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मा की मस्ती compleet

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रमण बोला -अर्रे यार तुम माँ बेटे कुछ देर के लिए सबर तो करो अगर अभी कुछ ही देर मे तुम्हारी यही माँ अपनी गान्ड उछाल-2 कर कहेगी कि अब मैं जब भी लंड लूँगी तो यहीं लूँगी,तुम देखना अभी इसको इतना मज़ा आएगा कि ये खुद ही अपनी गान्ड मारने को कहेगी.तुम बस जैसे मैने कहा है वैसे ही इसकी चुचियो को मस्लो इस-से इसका दर्द कम हो जाएगा.

ये सुन कर मनु फिर से अपनी माँ आरती के मम्मों को मसल्ने लगा ,फिर उसने आगे हो कर लेट कर अपनी माँ की एक चुचि को चूसना शुरू कर दिया,इस-से आरती को अपनी गान्ड मे दर्द कम लगने लगा और अब वो सिसकारियाँ भरने लगी,कुछ देर तक ऐसे ही चलता रहा ,जब आरती की सिसकारियाँ और तेज़ होने लगी तो रमण भी धीरे-2 अपने लंड को उतना ही अंदर अंदर-बाहर करने लगा,इससे आरती की गान्ड मे दर्द भी कम हो रहा था और थोड़ा सा चिकनाई होने से वो आ-जा भी आराम से रहा था.

अब रमण को लगा कि आरती भी अब रिदम में आ गयी है अब उसको और आगे बढ़ना चाहिए तो उसने फिर से एक बार आरती की कमर को ठीक से पकड़ा और इस बार के शॉट में अपना पूरे का पूरा लंड आरती की गान्ड मे पेल दिया,इस बार जब रमण ने धक्का लगाने से पहले आरती की कमर को पकड़ा था तो आरती समझ गयी थी कि अब रमण उसकी गान्ड को फाड़ कर ही मानेगा तो उसने अपनी चीख को पहले से ही काबू मे कर लिया था,और अपने दाँत पर दाँत रख कर मूह को बंद कर लिया था,और अपना ध्यान अपनी चुचि की चुसाइ की तरफ लगा दिया था,इसलिए उसको बहुत ज़्यादा दर्द का अहसास नही हुआ.

जब रमण ने देखा कि इस बार आरती ने चीख नही मारी तो एक बार तो उसको ऐसा लगा कि कहीं उसने गान्ड की जगह आरती की चूत में तो लंड नही डाल दिया है,पर फिर जब उसने देखा कि नही लंड तो गान्ड मे ही गया है और वो भी पूरे का पूरा तो उसकी ख़ुसी का ठिकाना नही रहा और अब वो अपनी कमर को धीरे-2 आगे पीछे करने लगा,कुछ ही देर में लंड आराम से अंदर-बाहर होने लगा और अब आरती को भी राहत के साथ-2 मज़े की अनुभूति होने लगी थी और वो भी रमण का साथ देने लगी थी.

जब मनु ने अपनी माँ को ऐसे मज़े लेते हुए देखा तो वो वहाँ से उठ गया और खड़ा हो कर अपनी माँ की गान्ड मराइ देखने लगा,उसको अपनी माँ की गान्ड मराइ देखने मे बहुत मज़ा आने लगा,और उसने अपना लंड निकाल लिया और उसको मसल्ने लगा,आरती ने जब उसको ऐसे करते हुए देखा तो अपने पास बुला लिया और उसके लंड को अपने मूह में ले लिया अब आरती पीछे से गान्ड मरवा रही थी और आगे से मनु का लंड चूस रही थी.

 


कुछ ही देर मे रमण ने अपने धक्को की स्पीड और तेज़ कर दी अब आरती भी पीछे को तेज़ी से धक्के लगा रही थी,और कमरे में खूब मादक सिसकारियाँ गूँज रही थी,तभी मनु अपनी माँ के मूह मे ही झड गया,और आरती उसके लंड का सारा रस पी गयी,अब रमण भी झड़ने को तैयार हो गया था,कुछ ही देर मे रमण ने अपना सारा माल आरती की गान्ड में ही गिरा दिया और आरती के उपर ही ढेर हो गया आरती भी वहीं पेर बेड पर ढेर हो गयी थी.

वो तीनों वहीं कमरे में रास लीला के बाद थक कर लेट गये,अब रमण आरती पर से हट गया था,और आरती वैसे ही लेटी हुई थी,और उसकी गान्ड में से रमण का माल बाहर आ रहा था,ये देख-2 कर मनु के लंड में फिर से हरकत होने लगी थी.पर अभी उसको पता था कि उसकी माँ अभी-2 गान्ड फटवा कर हटी है कुछ टाइम तक वो उसका लंड नही लेगी,इसलिए वो मन मार कर रह गया.

थोड़ी ही देर में रमण उठा और अपने कपड़े पहन-ने लगा,उसने देखा कि आरती की गान्ड का छेद अच्छी तरह से खुल चुका है,वो बोला जानेमन आज तो चुदाई में बहुत मज़ा आया.

आरती बोली-वो तो तुम्हे आना ही था ,आज तुमको मेरी कुँवारी गान्ड जो फाड़ने को मिली थी,पर तुम्हारे इस मोटे लंड ने मेरी गान्ड की हालत खराब कर दी,अब मेरी गान्ड में बहुत दर्द हो रहा है,पता नही मैं उठ भी पाउन्गि या नही.

रमण-आरे ऐसा कुछ नही होगा ,मनु अभी तुम्हारी गान्ड की गरम पानी से कुछ सिकाई कर देगा तो ठीक हो जाएगा दर्द,अच्छा अब मैं चलता हूँ.

और ये कह कर रमण चला गया,अब घर में माँ-बेटा ही रह गये थे.मनु ने पूछा माँ क्या बहुत दर्द हो रहा है,आरती ने कहा नही कुछ खास नही मैं तो ऐसे ही बोल रही थी,मुझे लगा कहीं वो रमण फिर से ना शुरू हो जाए,मैं अभी फ्रेश हो कर आती हूँ.

ये कह कर आरती उठी और बाथरूम में चली गयी,थोड़ी ही देर में आरती फ्रेश हो कर नाइटी पहन कर बाहर आ गयी,अभी उसको देख कर कुछ खास पता नही चल रहा था कि इसकी अभी-2 गान्ड फाडी गयी है,मनु भी समझ गया कि उसकी माँ को कुछ ज़्यादा तकलीफ़ नही हुई है गान्ड मरवाने में तो ऐसे मैं वो भी उसकी गान्ड मार सकता है,ये सोच कर ही उसका लंड फिर से तन गया.

 


आरती ने भी देखा कि मनु का लंड तन गया है,और चुदाई के लिए तैयार हो गया है,पर अभी वो उसका लंड गान्ड मे लेने के मूड मे नही थी,तो वो मनु से बोली कि तुम्हारा तो ये तैयार है आ जाओ और इसको मेरी चूत मे डाल कर मेरी चुदाई करो,मेरी चूत में भी खुजली हो रही है.

मनु अपनी माँ की ये बात सुन कर थोड़ा सा निराश हो गया,वो तो आज अपनी माँ की नयी-2 गान्ड मारने की फिराक में था.

ये बात आरती को भी समझ मे आ रही थी,पर वो अभी अपनी गान्ड दुबारा नही मरवा सकती थी,इसलिए वो मनु को बोली कि बेटा अभी ऐसे निराश होने की क्या ज़रूरत है मैं या मेरी गान्ड कहीं भागी नही जा रही हैं,आज-2 रहने दो इसमे दर्द है,कल से तुम भी इसको खूब मारना मैं तुमको नही रोकूंगी.

ये सुन कर मनु खुश हो गया कि आज नही तो कल तो उसको अपनी माँ की गान्ड मारने को मिलने ही वाली है,और फिर उसने अपनी माँ की नाइटी उतार दी,नाइटी के नीचे तो आरती ने कुछ पहना ही नही था और वो नाइटी उतरते ही बिल्कुल नंगी हो गयी,जब से ये दोनो उसको चोदने लगे थे,उसको नंगे रहने मे बहुत मज़ा आने लगा था,और वो घर मे हर समय नंगा ही रहना चाहती थी,अब कपड़े तो वो किसी के आने पर या बाहर जाने पर ही पहनती थी,नही तो घर मे सिर्फ़ नाइटी मे ही घूमती रहती थी.

मनु को भी अपनी माँ के इस नंगे पन में बहुत मज़ा आता था,और वो रात दिन अपनी माँ को ऐसे ही देखना चाहता था,वो तो उसका बाप घर पर आता था,नही तो वो अपनी माँ को घर में हर समय ऐसे ही पसंद करता था.

आरती के नंगे होते ही मनु सबसे पहले उसकी गोद मे लेट गया और उसके मम्मों को चूसने लगा,आरती भी उसके सिर पर हाथ फेरने लगी और एक चुचि को प्कड़ कर उसके मूह में दे दिया ,जिस-से मनु को और मज़ा आने लगा,आरती की गोद में लेटे -2 ही मनु अपनी एक उंगली उसकी नंगी चूत में डाल देता है,तो आरती की सिसकारी निकल गयी और वो मदहोश होने लगी.

फिर आरती बोली कि ले बेटा आज अपनी माँ की चुचियो का सारा दूध पी जा,मैं कब से तुझको अपना दूध ऐसे ही गोद मे पिलाना चाहती थी,आज इनको निचोड़ ले ,हाई ये तू क्या कर रहा है,अपनी नंगी माँ की चूत में भी अपनी उंगली डाल रहा है और चुचि भी चूस रहा है,हाई बेटा आज तो मुझे बहुत ही मज़ा आ रहा है.

कुछ ही देर मे मनु ने आरती की दोनो चुचियो को बुरी तरह से चूस लिया और वो उन पर अपने दाँत भी गढ़ा रहा था,जब भी वो उसकी चुचि को अपने दाँत से काट-ता था आरती की तेज़ सिसकारी निकल जाती थी.फिर वो थोड़ा सा घुमा और उसने अपना मूह वैसे ही हालत में अपनी माँ की चूत पर लगा दिया,अब तो आरती के आनंद का कोई हिसाब ही नही रहा था,और वो आनंद के सागर में घूम रही थी,जब मनु उसकी चूत को ऐसे चाट रहा था,तो उसने अपने पाँव थोडा खोल दिए जिस-से कि मनु को उसकी चूत चाटने में परेशानी ना हो.

मनु अपनी माँ की चूत को अब अपनी जीभ से अच्छी तरह से चाट रहा था,फिर वो उसकी चूत की दोनो पुट्टियो को अपने दाँतों से काटने लगा जब उसने आरती की चूत को ऐसे काटा तो आरती ने अपने पाँव बिल्कुल ही खोल दिए और वो अपना सिर इधर-उधर पटाकने लगी,और बड़बड़ाने लगी-साले आज क्या मेरी चूत को खा ही जाएगा क्या ,इसको अपने मूह मे भर ले और इसको ऐसे ही काट -2 कर खा जा,अब आरती को बहुत ही मज़ा आ रहा था,और उसकी चूत बहुत ज़्यादा पानी छोड़ने लगी थी,ऐसे ही करते-2 और पानी छोड़ते -2 ही मज़े -2 मे आरती का थोड़ा सा पिशाब भी निकल गया,जब ऐसा हुआ तो उसका अलग ही नमकीन स्वाद मनु को आया,और उसने उसको भी चूस लिया पर वो बहुत ही गरम लगा तो उसने अपना मूह हटा लिया पर आरती अब अपना मूत रोक नही सकी और उसने मनु का सिर पकड़ा और फिर से अपनी चूत पर लगा दिया.

 
मनु फिर से अपनी माँ की चूत के पास आया तो उसने देखा कि ये तो उसकी माँ पिशाब कर रही,और उसका दिल उसको पीने का नही था,पर क्यूंकी आरती उसके सिर को लगातार अपनी चूत पर ही लगा रही थी,फिर अपनी माँ की गुलाबी चूत से निकलते हुए मूत को देख कर उसकी वासना ने अंगडाई ली और उसका दिल किया कि इसको पी ही लेना चाहिए तो उसने अपना मूह अपनी माँ की पिशाब करती हुई चूत पर लगा दिया और वो आरती के सारे पिशाब को पी गया,जब वो मूत पी रहा था तो उसको वो अपने गले से पेट में जाता हुआ गरम-2 लग रहा था,जब उसने अपनी माँ का सारा मूत पी लिया तो आरती ने उसका सिर छोड़ दिया,अब आरती के जिस्म की आग भी थोड़ी सी कम हो गयी थी.

पर मनु ने जब देखा कि उसकी माँ का सारा मूत ख़तम हो गया तो वो उठा और उसने आपनी माँ को वहीं गीले बेड पर लिटा दिया और उसके मूह पर अपना मूह रख दिया,और जो आरती का पिशाब उसके मूह मे था वो सारे का सारा आरती के मूह में डाल दिया,अब बारी आरती की थी जब मनु ने ऐसे किया और उसका ही मूत उसको ही पिलाया तो उसको बहुत ही अजीब लगा पर मनु ने भी अपनी माँ का सिर कस के पकड़ रखा था और उसने भी अपने मूह का सारा मूत आरती के मूह में जाने तक उसका सिर नही छोड़ा.

अब दोनो मा-बेटे को मूत का ही नशा चढ़ गया था,और उन दोनो को चुदाई की इच्छा बहुत बढ़ गयी थी तो मनु ने जल्दी से अपनी माँ को लिटा कर उसके उपर आ कर अपना लंड एक ही धक्के में उसकी चूत में बाड़ दिया और जल्दी-2 धक्के मारने लगा,आरती भी उसके साथ-2 धक्के लगा रही थी,दोनो माँ बेटे जबरदस्त चुदाई में मगन हो गये और कुछ ही देर में दोनो झड़ने लगे.

जब दोनो जने अच्छी तरह से झड गये तो वहीं पर गीले बेड पर ही ढेर हो गये.

और इसी तरह आरती रमण और मनु के साथ चुदाई करके अपनी प्यास बुझा लेती थी मनु भी खुश था कि अब उसे चूत के लिए कोई समस्या नही थी आरती की चुदास इतनी बढ़ चुकी थी कि वो हमेशा चुदने के लिए तैयार रहती थी बस इसी तरह उनकी जिंदगी मज़े से चलती जा रही थी . पर कहते हैं ना कि पाप का घड़ा जल्दी ही भर जाता है एक दिन अरविंद जल्दी घर आ गया और उसने आरती को रमण और मनु के साथ नंगी अवस्था में चुदाई करते हुए देख लिया . उस दिन अरविंद ने आरती और मनु की खूब पिटाई की . फिर आरती को तलाक़ देकर अपने से अलग कर दिया . ऐसी खबरें जल्दी ही फैल जाती है आरती ने आत्मग्लानी से आत्महत्या कर ली . मनु आज भी उस दिन को कोसता है जब उसे अपनी माँ के प्रति आकर्षण पैदा हुआ था ..

एंड.
 
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