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मा को चोदने के लिये बेकरार

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Guest
मा को चोदने के लिये बेकरार

मेरे घर मे सिर्फ मेरी मा और मै रहते थे. मेरे पिताजी एक दिन मा से झगडा करके हमे बेसहारा छोड कर चले गये थे, उनका कोई ठिकाना नही था. हमारा परिवार काफी अमीर था, खेती-बाडी, अच्छा बडा घर......पता नही पिताजी क्यू छोड गये थे. मैने एक दिन मा से पूछा था तो वो बहुत गुस्सा हुई थी. कुछ लोगोसे पता चला कि पिताजी का कोई बाहर का चक्कर था. घर मे और कोई ना होनेकी वजह से मुझपर घर की बहुत सारी जिम्मेदारिया बहुत जल्दी आ पडी थी जिसका मा को हमेशा दुख होता था. वो कहती थी, खेलने-कूदने की उमरमे ही तुम्हे यह सब काम करने पडते है. लेकिन मुझे उसका बुरा नही लगता था. मेरी मा ४४ साल की थी और मै २२ साल का जवान. मैने ग्रॅज्युएशन तो कर लिया था लेकिन घर के काम मे हाथ बटानेके लिये आगे नही पढ सकता था. वैसे नौकर तो थे लेकिन कई काम हमे खुद भी करने पडते थे.

हमारे गाव मे मेरे दोस्त कम थे, मै अक्सर मौका मिलनेपर शहर जाया करता था और फिल्मे देखकर मन बहलाया करता था. मेरी जिन्दगी बहुत सीधी थी, सुबह उठना, थोडीसी कसरत करके नाश्ता करना, फिर दिनभर खेतोमे काम करना, शाम को वापस घर आकर खाना खाकर सो जाना. कुछ साल पहले टीव्ही लगवा लिया था, लेकिन कई बार बिजली ना होनेकी वजह्से उसका भी कोई काम नही बनता था, खेतोमे काम करनेवालोसे और शाम को मा से बाते करकेही मै मन बहलाता था.

शहर जाता तो कभी कुछ किताबे ले आता, बस, उससे ज्यादा मनोरन्जन का कोई साधन नही था. मेरी सोच भी बिलकुल सीधी थी, न सेक्स के बारेमे मै खास कुछ जानता या जाननेकी कोशिश करता. हा टीव्ही-फिल्म देखकर मेरा लन्ड जरूर खडा होता था, तो मै बाथरूम जाकर अपनेही हाथसे अपनी सन्तुष्टी कर लेता था. लेकिन एक दिन मैने एक अजीबसे घटना देखी जिससे मेरा सोचनेका तरीका बदल गया.

खेतोसे मे थोडा देरसे लौटा, रास्तेमे हमारा एक नौकर बिरजू का घर पडता था, उसे कुछ काम बताने थे. मै उसके घर गया और दरवाजा खटखटाया, लेकिन कोई जवाब नही था, मुझे लगा कि वो पीछे आन्गन मे होगा इसलिये मै घर के पीछेकी ओर गया और वहा पहुचतेही मै चुप हो गया, बिरजू की बीवी वहापे खुलेमे नहा रही थी. पीछे कोई आयेगा इसका शायद उसे अन्दाजा नही था इसलिये वो पूरे कपडे उतारकर केवल अपने सायेको बदनपे बान्धकर बैठी थी, वो साया उसके शरीरपर चिपका था जिससे उसका गदराया जिस्म साफ दिख रहा था. वो मजेसे साबुन मल मलके नहा रही थी. वो नजारा देखकर मेरी लन्ड टाईट होने लगा, सास तेजीसे चलने लगी, मुह सूख गया. मै एक दीवारके पीछे छिपकर उसे निहारता रहा. मैने फिल्मोमे औरत का नन्गा जिस्म देखा था, शहर जा कर कभी मै ब्लू-फिल्मभी देखता लेकिन असली औरत का अध-नन्गा जिस्म देखनेका यह मेरा पहला मौका था. जबतक वो नहाती रही, मै चुपकेसे उसे देखता रहा. वो स्नान खतम करके घरके अन्दर चली गयी. मेरा मन कर रहा था कि किसी बहानेसे अन्दर जाए लेकिन मै डर रहा था कि कोई देख लेगा. तभी किसी के आने की आवाज आई और मै चुपचाप वहासे निकल पडा. आगे चलके देखा तो वो बिरजू था, अच्छा हुआ मै जल्दी निकला था. मैने उसे काम बताए और घर की ओर चल पडा.

घरपे पहुचा तो मा किचन मे खाना बना रही थी, रसोई के सामने खडी होकर वो पराठे सेक रही थी. मै जैसेही किचन मे गया मुझे साईड पोझसे वो दिखाई दी और मेरा दिल फिरसे जोरसे धडकने लगा. मा साडी-ब्लाउझ पहनी थी और इस तरफसे उनकी चुची और पेट साफ दिखाई दे रहा था. किचनमे काम करनेसे उसे पसीना छूटा था जिसकी वजहसे ब्लाउझ थोडा गीला हुआ था, जिसकी वजहसे उनकी चुची का थोडा हिस्सा दिख रहा था, और वो नजारा काफी सेक्सी लग रहा था. मा मेरे आने की आहट से मेरी तरफ देखकर मुस्कुराई और बोली

"आ गए तुम, आज देर क्यू हुई, कुछ तकलीफ तो नही है ना, आओ बैठो, मै खाना परोसती हू". मै हाथ मुह धोकर खानेके लिये बैठ गया, भूख तो लगी थी लेकिन आज मेरे दिमाग मे एक अलगसी भूख थी. बार बार मेरी नजर खाना बनाते हुए मा के शरीर पर जाती और हर बार मै अपने आप को दोषी मानता था. मेरी मा दिखने मे सुन्दर थी लेकिन पिताजी के इस बर्तावकी वजहसे हमेशा मायूस रहती थी. अभी कुछ सालोसे जबसे मैने घर की जिम्मेदारी सही तरीकेसे उठाई थी तब कही जाकर उनके चेहरे पे हसी लौट आई थी. उसका रन्ग सावला था लेकिन बाल बहुत घने और लम्बे थे जिन्हे वो एक जूडेमे बान्धती थी. हमेशा साडी और ब्लाउझ पहनती थी और अपने शरीर का कोई भी हिस्सा खुला नही छोडती थी. चेहरा अभी थोडा हसमुख हुआ था, आन्खे काली और बडी बडी जिनमे वो हमेशा काजल लगाती थी. होन्ट थोडे मोटेसे थे गाल भरे हुए. मा कभीभी मेक-अप नही करती थी, नहानेके बाद काजल और थोडीसी पावडर लगा लेती थी. उसके कन्धे भरे हुए थे. शुरुसेही मेहनतके और खेतीके काम करनेसे उसमे मोटापा बिलकुल नही था, एकदम सुगठित बदन था. अपने सीनेको वो पल्लुसे ढक लेती थी लेकिन आज मुझे अहसास होने लगा कि उसके पीछे उनकी चुचिया यकीनन मोटी और सुडौल होन्गी. मैने किचनमे आते आते उन्हे साईडसे देखा था. पेट ज्यादा फूला नही था, कमर नाजुक थी और उसके नितम्ब बहुत गदराए थे. आज उसका यह गठीला बदन देखकर मुझे पता चला कि हम लोग जब गाव मे चलते थे तो लोग मा को क्यू घूरत रहते थे. मै अब उनकी हाल-चाल पर ध्यान देने लगा. सचमुच मा जब चलती थी तो उसके नितम्ब ऐसे सेक्सी तरीकेसे हिलते थे कि बस देखते रहने का मन करता था. पीठपे ब्लाउझ कसा था जिससे उनकी ब्रेसिअरकी लाईन दिख रही थी.

मै खानेपे बैठा तो था लेकिन मेरा लन्ड खडा हो रहा था. अच्छा हुआ कि हम टेबलपे बैठे थे जिससे मा को मेरी इस अवस्थाका पता नही चला. मा मेरे साथ खानेपे बैठ गयी और मुझसे दिनभर की बाते पूछने लगी, मै बस ‘हा, ना, ठीक...’ ऐसे जवाब दिये जा रहा था क्योन्कि मेरा मन इस अजीबसी उलझन मे फसा था. एक तरफ मै चाहता था कि मा की सुन्दरता निहारू और दूसरी तरफ इस विचारसे मुझे अपने आप से नफरत हो रही थी. मै मा से नजर नही मिला रहा था, उतनी हिम्मत नही थी मुझमे. मैने खाना खा लिया और अपने कमरे मे जाकर सो गया.

आगे कुछ दिन इसी उधेड-बुनमे गुजरे. घरमे मेरे सिवा बस दो नौकर औरते थी, एक साफाई किया करती थी और दूसरी मा को घर के कामो मे मदद करती थी, लेकिन उनके जाने के बाद हम दोनो मा-बेटेही घर मे रहते थे. मा घर मे काफी खुलकर पेश आती थी, घर पे उसे साडी के पल्लुका इतना खयाल नही होता था. इतने दिन मैने कभी यह देखा नही था लेकिन अब मेरी नीयत बदलनेकी वजहसे ये सारी बाते अब मुझे खटकने लगी थी. मै जब भी मौका मिले तब मा के शरीर को देखते रहता और मन मे उसे उन कपडोके बगैरभी देखता और कल्पनामे खोए रहता. अब मेरा पापी मन मुझे थोडे और खतरे मोल लेने के लिए कहने लगा. मैने मा को बाथरूममे देखनेकी कोशिश की लेकिन उस दरवाजेमे ना ही कोई दरार थी न कोई सुराख. फिर मा को काम करते हुए उनकी चुचिया देखना, खाना बनाते हुए उनके बदन की मादक चाल देखना मानो मेरा हमेशाका काम हो गया. हालाकि मै यह सब सिर्फ घरमे होने पर ही करता था, काम के कारण मै अक्सर घरके बाहर बहुत समय बिताता था. लेकिन वहापर भी मेरा मन मुझे चैनसे बैठने नही देता. खेतोमे काम करनेवाली कई औरते हमारे खेतोमेभी आती थी, उन्हे झुककर काम करते हुए उनकी चुची देखनेकी कोशिश करना, पीछेसे उनके चूतड देखना और उनके बदनके दिखाई देनेवाले हिस्सोको देखते रहना मानो मेरा शौक हुआ था. अब मै अपने आप को सन्तुष्ट करने के लिए अपने हाथका सहारा प्रतिदिन लेता था और कभी कभी तो दिन मे २ या ३ बार भी. बडी विचित्र स्थिती मे मै फस गया था, मेरे इर्द-गिर्द सारी औरते थी, मै अकेला ही मर्द और मै कुछ नही कर सकता था. जब हम गावमे किसी काम के लिए जाते तो लोग मा को घूरते हुए मुझे दिखते वो कभी कभी कुछ गन्दी बाते भी करते. मै सब सुनकर अनसुनी कर देता था, मा को तो आदत पड गई थी, वो कुछ बोले बिना निकल जाती थी. मुझे कभी कभी गलत लगता था कि मै अपनेही मा के बारे मे ऐसे सोच रहा हू.

एक दिन मै सुबह नहाने बाथरूममे गया, मा पहलेही नहा चुकी थी. मै जल्दीमे था इसलिए जैसेही वो बाहर आई मै अन्दर घुस गया और दरवाजा अन्दरसे बन्द किया. मै जब मेरे कपडे उतारने लगा तो मैने देखा कि दरवाजेकी खून्टीपे मा के कपडे लटके हुए थे. मैने बडी उत्सुकतासे वो उठाए तो अन्दरसे एक सफेद ब्रेसिअर गिर पडी. वो मा की ही होगी यह सोचकर मेरा दिल धडकने लगा. मैने वो ब्रेसिअर उठाई, बिलकुल सिम्पल टाईपकी थी, लेकिन वो मा की है इस पापी विचारने मुझे बहुत उत्तेजित किया. मैने उसे सून्घा, उससे मा के बदन की खूशबू आ रही थी, जिसकी वजहसे मेरा लन्ड फनफनाने लगा. मैने बिना कुछ सोचे समझे वो ब्रेसिअर मेरे लन्डपे लपेटी और जोरसे मूठ मारने लगा. मै कल्पना कर रहा था कि मै मा के वक्षोके बीच मेरा लन्ड आगे-पीछे कर रहा हू. और कुछकी समयमे मेरा पानी छूटने लगा. मैने फिर बडे इत्मिनानसे स्नान खतम किया और बाहर आया. जैसेही मै बाहर आया मा बाथरूम मे गयी. मैने उसे पूछा

"इतनी क्या जल्दी है?" तो वो थोडी शरमाकर बोली

"कुछ नही, बस यूही.......मेरे कपडे अन्दर रह गये थे." और वो चली गयी. मै भी थोडा शरमा गया और वहासे निकल पडा. अगले कुछ दिनोमे मै अजीबसे खयालोमे खोया था. कभी कभी मुझे उस ब्रेसिअरकी खूशबूकी याद आती और मै उत्तेजित होता था तो कभी मुझे मा का प्यारभरा बर्ताव देखकर खुदपर गुस्सा आता था कि वो मुझे क्या समझती थी और मै उनके बारे मे क्या सोच रहा था, और इस विचारसे मै आत्मग्लानीका अनुभव लेता था. मेरा विवेक मुझे मा के बारेमे ऐसी सोच रखनेके लिए धिक्कारता था लेकिन मेरा गरम खून मुझे मा की ओर और ज्यादा आकर्षित करता था. मुझे यह बात समझ नही आ रही थी कि मै जो कर रहा हू वो सही है या गलत.

एक बार मेरे ममेरे भाई शहरसे गाव आए थे. मेरे मामा दूसरे शहरमे रहते थे, उनके दो बेटे थे, रवी और अनिल, लगभग मेरी ही उम्रके थे. मेरी उनके साथ खूब जमती थी. वो साल मे १-२ बार ही आते लेकिन जब भी आते, मामा मेरे लिए कई उपहार भेजते थे. यह दो भाई मेरे साथ मिलके खूब घूमते, बाते करते.

हम खेतोमे पास वाले पहाडपे सैर करने जाते थे. हम-उम्र होनेसे हम लोग एक दूसरेसे बिलकुल खुलकर बाते करते थे. वो दोनो शहरके रहनेवाले थे, वो अक्सर लडकियोके बारेमे बाते करते और मुझे कभी कभी छेडते भी थे. लेकिन वो सब हसी-मजाक हुआ करता था.

यह दोनो भाई खुद भी बहुत शरारती थे, औरतोके मामले मे काफी बेशरम थे. शायद शहरमे यह सब चलता होगा लेकिन गावमे हम दूसरी औरतोके साथ बात भी नही करते थे, छेडखानी करना तो दूरकी बात थी. लेकिन यह दोनो भाई जब भी मेरे साथ घूमने निकलते तो आती-जाती औरतोपर टिप्पणी करते रहते.

मा को इन दोनो भान्जोसे बहुत लगाव था वो दोनोभी ‘बुआ आज हमे ये चाहिए, आज हमे वो खिला दो’ इसप्रकारकी जिद करते थे और मा भी उनके हर जिद पूरी कर देती थी. इतने दिनोसे वो आते थे तो मुझे कभी महसूस नही हुआ लेकिन इस बार आए तो मुझे थोडी जलनसी होने लगी. मुझे ऐसा लगा कि वो मेरे और मा के बीचमे आ गए है. खैर मैने चेहरेपे ये बात जाहिर होने नही दी और उनके साथ मौजमस्तीमे शामिल हो गया.
 
एक दिन हम खाना खाकर उपरवाले कमरेमे बैठे थे. मा किचनमे कुछ काम कर रही थी. ये दोनो भाई और मै बाते कर रहे थे कि मा ने मुझे नीचे बुला लिया. मैने नीचे जाकर देखा उनका कुछ मामुली काम था वो निपटाकर मै फिरसे उपर आने लगा तो सीढीयोपे मेरे कानोपे उन दोनो भाईयोकी बाते पड गई.

रवी: "........क्या कह रहा है तू ?"

अनिल: "सच.......उनका पल्लु सरक गया था और उनकी चुचिया लगभग आधी नन्गी मेरी आन्खोके बिलकुल सामने........"

रवी: "क्या बात कर रहा है यार, वाकई बडा नसीबवाला है तू तो...........मै इतने दिनोसे ताक मे रहता था लेकिन मुझे कभी चान्स नही मिला और तूने तो..........चल और बता, अन्दर ब्रा भी होगी..."

अनिल: "हा, थी तो, काले कलरकी...."

रवी:"आय हाय.........उनकी वो काली ब्रा, वो ही ना जो हमने कल टन्गी देखी थी, वो लेस वाली......"

अनिल: "हा हा गुरु, वोही....."

रवी: उफ्फ्फ...........क्या गजब की लग रही होगी वो........उन भरे भरे मम्मोपे वो खूबसूरतसी काली ब्रा.....उनकी मम्मोपे कसके बैठी होगी साली.........मेरा तो सोचकरही खडा हो रहा है......यार अनिलभाई, अच्छा चान्स मारा तूने......साले मुझे आवाज दी होती"

अनिल: अबे कैसे देता, तू तो राज के साथ था"

रवी: "हा तो क्या हुआ, कुछ बहाना बना देता, वो तो साला एकदम लल्लु है"

मुझे यह सब सुनके मझा आ रहा था, मै इनको लल्लु लग रहा था यह सोचकर थोडा गुस्सा जरूर आया लेकिन मैने जानबूझकर मेरी आहट नही होने दी, मै जानना चाहता था यह दोनो चालू लडके किस औरत के बारेमे बोल रहे है.

रवी: यार अनिल, फिरसे कोई चाल चल ना यार, आज तो तूने यह बात कहकर मेरे दिलमे आग लगा दी, साले, और भी कुछ देखा क्या

अनिल: नही भैया, और क्या देखता, लेकिन जो नजारा देखा उनके क्लिव्हेज का......कसमसे, गज्जब.....ऐसा लग रहा था मानो उनकी चुचियोके बीचमे सीधी डाईव्ह मार दू और अन्दर घुस के.......

रवी: साले, जला मत, देख मेरा खडा होने लगा, अब तो मूठ मारनी ही पडेगी.

अनिल हसते हुए) जाओ भैया, जाओ, फिरसे वो लल्लु आ गया तो मुश्किल होगी.

रवी: हा यार, लेकिन तू कुछ तरकीब सोच, एक दिन नन्गी नहाते देखेन्गे बुआ को.

आखरी बात सुनकर मै दन्ग रह गया, मेरी हालत ऐसी हो गई कि काटो तो खून नही. मतलब ये दोनो हरामी अपनी सगी बुआ यानी की मेरी मा के बारेमे बात कर रहे थे, तभी तो पता चला कि साले दोनो हमेशा मा के इर्द गिर्द क्यो मन्डराते फिरते है. मैने ठान ली कि किसी हाल मे मे मै इन दोनोको मा के खूबसूरत बदन को निहारने का मौका नही दून्गा. मैने फिर नीचे जाकर उपर आते आते पैरोकी आवाज कर दी जिससे वो दोनो चौकन्ना हो गए और मै जाकर उनके साथ बात करने लगा. अब मै अक्सर उनके साथ साथ ही रहता था, वो दोनो मुझे टालने की कोशिश करते लेकिन मै बिलकुल नही मानता था. २-३ दिन इसी तरह बिताने के बाद वो दोनो बोअर हो गए और अपने घर चल दिए और मै फिरसे मा के साथ अकेला रह गया.

एक दिन मै शहर गया था, खेती के कुछ औजार लाने थे, कुछ बीज-खाद जैसी चीजे भी थी. हमारा शहर मे एक मकान और एक अनाज की दुकान भी थी, उसका किराया भी लाना था. मै शहर पहुचा, सारे काम निपटा कर अनाज की दुकान पे पहुचा. किरायेदार कही बाहर गया था, उसके नौकरने मुझे चाय-पानी दिया और बैठने को कहा. मै उस दुकान मे बोअर हुआ था तो इधर उधर ताका झाकी करने लगा. दुकान मे अनाज बान्धकर देने के लिये कुछ रद्दी कागजोका ढेर लगा था, उनमेसे कुछ कागज निकालकर यूही टाईमपासके लिये पढने लगा, उसमेसे एक कागज ने मेरा ध्यान आकर्षित किया. वो एक किताब का फटा पन्ना था और उसमे एक सेक्सी कहानी थी. वो कहानी अधूरी थी लेकिन उसमे जो लिखा था वो पढकर मेरा दिल जोरोसे धडकने लगा. वो एक मा-बेटेके बीचे मे हुए यौन सबन्धोकी कहानी थी. पहले तो मैने वो पन्ना झट्से नीचे रख दिया लेकिन मेरे अन्दरकी उत्तेजनाने मुझे उसे दुबारा पढनेपर मजबूर किया. इतनाही नही वो पूरा पन्ना पढनेके बाद मैने उस रद्दी के ढेर को छान मारा और वो फटी-पुरानी किताबभी ढून्ढ निकाली. उसमे ३ कहानिया थी जिनमे केवल एकही कहानी मा-बेटेके सम्बन्धोपर आधारित थी, बाकी दो कहनिया कुछ और सेक्सी थी और उनके आखरी पन्ने भी लापता थे. यह कहानी मैने पूरे पढने की ठान ली और वो किताब मैने उस रददीके ढेर से उठा ली और जेब मे रख ली. फिर वो किरायेदार आ गया और मेरा काम खतम करके मै वहासे निकल पडा. गाव जानेवाली गाडी वैसे तो शाम को थी और मेरे पास पूरी दोपहर थी, चाहता तो मै फिल्म का एक शो देख सकता था लेकिन अभी मेरी जेब मे रखी उस किताब को पढना मेरे लिये कोई भी फिल्मसे ज्यादा जरूरी था. मै एक बगीचेमे जाकर बैठ गया, वहापे और भी लोग थे जो कुछ कुछ पढ रहे थे. मैने वो कहानी पूरी की पूरी पढ ली. जैसे जैसे मै उस कहानी को पढा जा रहा था मेरे अन्दर एक सनसनी भरती जा रही थी. उस कहानी मे कुछ यू था कि एक अधेड उम्र की औरत अपने बेटे और पतिके साथ रहती है. उसका पति उसे सन्तुष्ट करनेमे असफल है, इसलिए वो तडपती रहती है. एक दिन एक विचित्र अवस्था मे बेटा उसे देख लेता है और वो मा के करीब आ जाता है और फिर उन दोनोमे यौन सबन्ध बनते है. इन सारे घटनाओको काफी विस्तारसे बताया था जो पढकर मेरा खून खौलने लगा.
 
इस तरह दिन गुजर रहे थे मेरा मन मा को चोदने के लिये बेकरार हुआ जा रहा था लेकिन मै कर भी क्या सकता था घर मे मा के अलावा नौकर थे और सबसे बडी बात तो मा के मानने की थी. वो अपने बेटेसे इसतरह के सबन्ध बनानेके लिए कतई राजी नही होती. मै मा के आसपास घूमता भटकता, चेहरेपर दिलकी उधेडबुन जाहिर होती होगी. मा ने मुझे २-३ बार टोका कि तुझे हुआ क्या है, घर के बाहर जाना बन्द ही हुआ था. मै किस उलझन मे फसा था ये उन्हे क्या बताता.

बात उस समय कि है जब हमारी फ़सले तैय्यार हुई थी अब उन्हे काटनेका टाईम आया था. वैसे तो यह काम करने के लिए लेबर लोग हमाने लगाए थे जो अक्सर रात को लाईट जलाकर काम करना पसन्द करते थे, दिन मे गरमी की वजहसे काम इतना नही बनता था. उनपर नजर रखने के लिए हम फार्म-हाऊसपे जाकर रहते थे. वैसे तो वो लोग ठीक-ठीक थे लेकिन लेबर लोग के बर्ताव का अन्दाजा कौन लगाए, इसलिए हम खुद जाकर देखते थे कि काम हो रहा है कि नही. मैने मा से कहा कि जम वहा जाकर रुकेन्गे तो मा ने भी हामी भर दी और फिर मै और मा फ़ार्म हौस चले गये. जब हुम पहुचे तो वहा काफी शाम हो गई थी. मा को वही ठहराकर मै खेतोमे एक चक्कर लगाके आया कि सब काम ठीक से हो रहा है कि नही.

वहासे आते आते बिरजू का घर लगता था, मेरे दिमाग मे उसकी बीवी की शकल नाचने लगी और मेरे पैर अपने आप ही उसके घर की तरफ मुड गए. घर के पास गया तो बिरजू बाहर खटियापे बैठा शराब पी रहा था. मेरे आनेकी आहट से वो थोडा डर गया लेकिन मैने उसे बैठने के लिए कहा और यू ही इधर उधर की बाते करता रहा. असल मे मेरी आन्खे उसकी बीवी को ढून्ढ रही थी. और थोडीही देर मे वो आ भी गई, मैने उसे नहाते हुए देखा था, अब वो पूरी तरहसे कपडोसे ढकी हुई थी, लेकिन उसके पल्लुसे उसके वक्षोके साईझका अन्दाजा लगाया जा सकता था. मुझे देखकर वो सहमसी गई, तो मैने उसे एक गिलास लाने के लिए कहा. बिरजू शरमा गया कि उसका मालिक उसके साथ बैठकर देसी दारू चढा रहा है लेकिन वो इन्कार भी नही कर सकता था. उसकी बीवी गिलास और नमकीन ले आई, सामने रखते वक्*त उसका पल्लु खिसक गया और उसकी बडी गुदाज चुचिया ब्लाउझसे आधी बाहर आ गई. मेरी नजर देखकर बिरजू सकपका गया और उसने बीवी को अन्दर जाने के लिए कहा, फिर उसने शायद अन्दर जाकर उसे डाटा होगा, काफी देर वो बाह्र नही आई. मै एक गिलास पी कर वहासे चल पडा. मै कभी कभी शहर मे दारू पीता था लेकिन वो विलायती शराब थी, यहा देसी दारू मुझपे असर दिखाने लगी थी.

नशेमे झूमता हुआ मै फार्महाउस आ पहुचा, दरवाजा खटखटाने पर मा ने दरवाजा खोला. वो शायद नीन्दसे उठी थी, उसकी साडी का पल्लु ठीकसे लिया नही था. मै देख रहा हू इसका अन्दाजा आकर उसने पल्लु ठीक किया और अन्दर चली गई. मेरा खाना टेबलपे लगाया था. मैने अकेले खाना खाया, मा फिरसे अपने कमरेमे सोने चली गई थी. अब मेरे दिमाग मे शैतान जागने लगा. खाना खानेके बाद मै मा के रूम मे आ गया.

मा की साडी अस्त व्यस्त पडी थी, नीचेसे तो घुटनो से ऊपर चढी थी जिससे मा की चिकनी जान्घे दिख रही थी. मा को इस हालत मे देखकर मेर लन्ड पॅन्ट फ़ाडकर बाहर निकलने को हो रह था. मैने चुपके से अपने एक एक करके सारे कपडे उतार दिये. अब मै पूरी तरह से नन्गा हो चुक था.फिर मै चुप चाप अपनी मा के बगल मे लेट गया. मैने आहिस्ता आहिस्ता मा की साडी और पेटिकोट ऊपर उठाना चालू कर दिया, पेटिकोट उसके कमर तक उठाया तो मा की भारी चुतड और जान्घ के दर्शन होने लगे. मा ने काली पॅन्टी पहनी हुई थी जो चुतड के बीच मे फ़सी हुई थी. जिन्दगी मे पहली बार मा के नन्गे चुतड देखकर मै पागल होने लगा मेरा शरीर थरथर काप रहा था. मै हलके हाथो से मा की चुतड और जान्घ पर हाथ फ़ेरने लगा. फिर मैने अपना लन्ड अपनी मा की चुतड मे पॅन्टी के ऊपर से ही सटा दिय और एक हाथ मा की कमर मे डाल दिया. मेरा हाथ कमर से होते हुए मा कि चुचियोतक पहुच गया. मैने हलके हलके मा की चुचियोन्को ब्लाउझके बाहर से दबाने लगा.

मेरा लन्ड मा के चुतडो पर अपना दबाव बनाने लग. अब मा का शरीर हरकत मे आने लगा.मै तो पूरी तरहसे बेकाबू हुआ था और मा के चुतडोपर तेज तेज धक्के देने लगा और जोर से चुचिया मसलने लगा, जिससे मेरी मा एक झटके मे उठ गई

मा (डरते हुए):कौन है

मा ने मुझे नन्गा देखा तो वो चौन्क गई फिर उसने अपने कपडे एक झटके मे ही सही कर लिये. मा ने मेरा खडा लन्ड देखकर मुझसे नजरे हटा कर कहने लगी

मा (गुस्से मे):ये क्या कर रहा है राज शर्म नही आती तुझे अपनी मा के साथ ऐसी हरकत करते हुए. चल जा अपने कमरे मे.

मै: चला जाउन्गा मा बस एक बार अपने बदन का मजा चखा दो

मा (गुस्से मे): अरे नालायक बेशर्म तुझे शर्म नही आती मा से ऐसी बाते करता है.

मुझपर तो वासना का भूत सवार था मैने उठके रूम अन्दरसे लॉक किया और मा की तरफ बढने लगा.

मा (गिडगिडाते हुए): प्लीझ बेटा ऐसा अनर्थ मत कर, आगे मत बढ मै तेरी मा हू ऐसा काम मत कर तुझे भगवान भी कभी माफ़ नही करेगा

मै: मा इस समय तू मुझे अपना बेटा मत समझ, मै जानता हू तू भी एक औरत है और तुझे एक मर्द की जरूरत है, आज के लिए मै तेरा मर्द, तेरा शोहर तेरा पति हू. मै तुझे वो सुख दून्गा जो मेरा बाप तुझे नही दे सका.

मा: चुप हो जा, कमिने, नीच............कितनी गन्दी बाते करते हो, वो भी अपनी सगी मा के साथ, कीडे पडेन्गे तेरे मुह मे.
 
यह सुनकर मेरा दिमाग झल्ला गया, एक तो शराब का नशा, उपर से उसपर वासना का भूत सवार, फिर क्या, मैने आव देखा न ताव, सीधा एक जानवर की तरह मा पर झपट पडा और मा को अपनी बाहो मे जकड लिया और किस करने की कोशिश की. मा ने एक जोरदार थप्पड मेरे गाल पर जड दिया तो गुस्सेमे मैने भी मा को २-३ तमाचे लगा दिए. मेरी ताकद मा से कई ज्यादा थी तो मा डर गई, उसके गाल लाल हो गए. फिर भी वो मुझसे लगतार छूटने का प्रयास करती रही.

मा (रोते हुए): प्लीज बेटा मुझे छोड दे, मै तेरी मा हू

मै: नही, आज तू मेरी पत्नी है, आज तो मै तुझे नही छोडून्गा, कई दिनोसे मै तुझे पाने की कोशिश कर रहा था, आज मौका मिला है, आज तुम मेरी हो जाओगी..........

और मैने मा की साडी खीन्चना चालू किया मा विरोध कर रही थी लेकिन मेरी ताकत के आगे वो मजबूर थी. आखिर मे मै कामयाब हो ही गया. अब मा सिर्फ़ ब्लाउस और पेटिकोट मे थी, वो कमरे के एक कोने मे दुबक के खडी थि. उसने फिर मुझे बिनती करते हुए कहा

मा:नही बेटा आगे मत बढना यह पाप है

मै: क्या बोल रही हो मा, यह पाप और पुण्य सब इन्सानो का किया धरा है, किसी भूखे को खाना और प्यासे को पानी पिलाना पुण्य है तो अभी तुम्हारी प्यास बुझाना भी एक पुण्य है.

शराब और वासना ने मुझे यह सब कहना सिखाया होगा. मै मा के पास गया तो मा मुझसे दूर भागने लगी. मैने पीछेसे उसका ब्लाउझ खीन्चा तो वो फट गया. मा चिल्लाई लेकिन मैने उसकी नही सुनी, उसे एक दिवार की तरफ ढकेलकर मैने उसके ब्लाउझ की बाहे फाड दी और उसे मेरे सामने कर उसके वक्षोपे जो हिस्स था वो बचा खुचा कपडा फाड दिया.

अब मा सिर्फ़ ब्रा और पेटिकोटमे थी. मै कुछ पल उसे बस निहारता रहा. मा की ब्रा बहुत खूबसूरत थी, काले कलर की और उसकी चुचिया आधी से ज्यादा बाहर दिख रही थी, मानो बाहर आनेके लिए बेताब हो. मुझे मेरे ममेरे भाईयोकी बात याद आई, शायद वो इसी ब्रा की बात कर रहे होन्गे, मा भी कुछ पल स्तब्ध थी, इसी का मैने फायदा उठाया और मा के ब्रा से दिखते मम्मोपर बेतहाशा चूमने लगा, मा ने मुझे दूर करने की जी तोड कोशिश की लेकिन मैने उसे बिलकुल कसके पकडा था. कुछ देर उसके वक्षोपर चुम्बन जडने पर मैने उसकी ब्रा का हूक खोलनेकी कोशिश की और मेरी पकड ढीली हो गई. मा ने एक जोर का झटका दे कर मुझे दूर किया और अपने हाथ अपने सीने पे रख दिये. लेकिन मेरे दिमाग मे शैतान घुस चुका था और मुझे अब कोई नही रोक सकता था. मैने पूरी ताकत लगाकर मा के हाथ दूर किए और ब्राके दोनो बाजूओको पकडके जोरसे खीन्चा. इससे एक तो ब्रा फट गई और मा पीछे दिवारसे सट गई. मा की बडी बडी चूचिया आजाद हो गई और उन नन्गी चूचियो को देखकर मै बेकाबू हो गया, मैने मा के मम्मोको बेरहमी से मसलना शुरु किया और नेशेमे बडबडा रहा था.

मै चूचियो को मसलते हुए): क्या मस्त चूचिया है तेरी मा. बचपन मे मैने इनसे ही दूध पिया था और आज भी इनको चूसून्गा,

और मैने उसका एक वक्ष मुह मे ले लिया और जोरजोरसे चूसने लगा, साथ ही मै दूसरे वक्ष को अपने दूसरे हाथ से मसल रहा था, उसके निपल को कुचल रहा था.

मा(दर्द से कराहते हुए): आआआअह्ह्ह्ह्ह........उम्म्म्म्म्म.....

मा जोर जोर से रोने लगी और उसे छोडने के लिए गिडगिडाने लगी लेकिन मै अपनी मदहोशी मे गुम था, पूरी तरह्से उसके मम्मोमे खोया था. धीरेधीरे मैने मेरा एक हाथ नीचे लाया और मा के पेट के उपर फेरने लगा. उसके पेटिकोटमे एक बित्तेभर का छेद था, मैने हाथ उसमेसे अन्दर डाला और मा और भी बेचैन हो गई, उसे अहसास हुआ कि उसका बेटा उसके सबसे प्रायव्हेट जगहतक पहुचना चाहता था. मुझे उसके पॅन्टीका किनारा हाथ लगा और मेरे बदन मे एक नया जोश आ गया और मैने खडे होकर मा को दीवार की तरफ ढकेल दिया.

मा को लगा कि मै अपने हरकतोसे बाज आ चुका हू और उसे छोडनेवाला हू. असल मे मेरे मन मे कुछ और ही था. मैने उसके मम्मे तो छोड दिये लेकिन अब मेरा पूरा ध्यान उसके पेटिकोट के अन्दर के माल पर था, मैने मा के पेटिकोट के नाडे को पकडा और पूरी ताकत के साथ उसे खीन्चा जिससे वो टूट गया, मा ने पेटिकोट को पकडे रखने का एक असफल प्रयास किया पेटिकोट थोडी देर मा के भरे हुए बडे चुतडो मे अटक गय था, लेकिन मैने जोरसे खीन्चने पर वो मा के पैरोमे गिर गया, अब मा के बदन पे सिर्फ़ पॅन्टी बची थी. किसी तरह मा वहासे भाग निकली तो मै भी उसके पीछे पडा और इसी सीना-झपटीमे मा बिस्तरपर पेट के बल गिर गई. बस फिर क्या था, मै भी उसके उपर लेट गया और उसे हरेक अन्गको मसलने लगा, उसके कन्धोपर और गर्दन पर चुम्बन जडाते हुए मैने उसके बदनके नीचेसे हात डालकर उसकी चुचिया पकडने की भी कोशिश की, मा चीख रही थी लेकिन यहा उसकी सुननेवाला कोई नही था, नौकर तो अपने अपने घर चले गए थे और हमारा यह फार्महाउस थोडा दूर भी था. तो मै बेफिक्र होकर मा से यह करतूत कर रहा था. कुछ देर बाद मैने नीचे हो कर मा की पॅन्टी जबरन उतार दी और दूर फेन्क दी.अब मा पूरी नन्गी थी उसके सावले कसे हुए बदन पे एक सूत का धागा भी नही था. मैने उसके चुतडोको मसलना शुरु किया बीच मे मै अपने दातोसे वहा काट लेता और मा

जोरसे कराहती. मै जिन्दगी मे पहली बार किसी नन्गी औरत को इतने करीबसे देखा था, मा के नन्गे बदन को देखकर मेरा लन्ड किसी साप की तरह फ़ुफ़कारने लगा. मै तो जवान ताकतवर मर्द था मेरी तकत के आगे मा क्या करती, मैने उसे जबरन सीधा लिटाने की कोशिश की लेकिन मा ने बिस्तर के साईडको कसके पकडा था, तो मै मा के चुतड मसलता रहा.

मै: वाह मा क्या गान्ड है तेरी, जी करता है इसे चबाके खा जाउ..........

मा (रोते हुए):प्लीज बेटा ऐसा मत कर, तू नरक जाएगा..........

मै: मा नरक का तो पता नही लेकिन जब तुझे चोदून्गा उस समय तो मुझे स्वर्ग का आनन्द मिलनेवाला है......

मेरा यह इरादा सुनकर मा और जोरसे विरोध करने लगी इसलिये मुझे अपने काम मे कठिनाई हो रही थी.

मै: क्यू नखरे कर रही हो मा, आज तो मै मेरे मन की प्यास बुझाकर ही रहून्गा, तेरी आवाज सुननेवाला कोई नही है.....

मेरे शैतानी दिमागमे एक और तरकीब आई. मा पेट के बल लेटी थी तो मैने उसकी साडी लेकर उसके दोनो हाथ बिस्तरके सिर की तरफ बान्ध दिए, मै उसके पैरोपे लेटा था तो वो अपने पैर छुडा न सकी. फिर मैने कमरेसे उसकी ब्रा से उसका एक पैर और पेटिकोटसे दूसरा पैर बिस्तरके साईडसे बान्ध दिया. अब मा ऐसी विचित्र अवस्था मे लेटी थी, उसकी टान्गे फ़ैली हुई थी, बिलकुल बेबस और बेसहारा.....उसे इस हालत मे देखकर मेरा लन्ड लोहे की रॉड की तरह सख्त हो गया,

और मै मा की गद्देदार चुतडोपर भूखे कुत्ते की तरह टूट पडा. मै उन चुतडोको अपनी हाथोसे बुरी तरह मसलते हुए उन्हे चूम चाट रहा था. मैने थोडा और जोर लगाकर मा के चुतडोको फैलाया जिससे उसकी गान्ड का छेद दिखने लगा. उस भूरे रन्ग के छेद को मैने उन्गली क्या लगाई, मा ऐसी उछल गई के पूछो मत, मानो बिजली का तार छुआ हो.............मैने शराब और वासनाके नशेमे फिर उस छेदपर मुह लगाया और उसे चाटना शुरु किया.......

मा अब बस आहे भरकर रो रही थी, मै कभी उसके चुतडोपर थप्पड मारता, कभी उनपर काटता.....करीब २०-२५ मिनट मै मा की गान्ड के साथ खेलता रहा. अब मै बहुत गरम हुवा था, मेरे बर्दाश्त के बाहर हुआ था सो मै मा के ऊपर चढ गया. मैने अपना लन्ड निकाला और मा की टान्गोको और छितराकर उसकी चुत पर रख दिया और धीरे धीरे अन्दर घुसाने की कोशिश करने लगा तभी मुझे लन्ड पर गरम चिपचिपासा पदार्थ मह्सूस हुआ. मुझे वो क्या था इसका उस वक्*त पता नही था क्योन्कि मै किसी औरत को चोदने का ये मेरा पहला अनुभव था. मेरा लन्ड चुत मे जाकर और टाईट हो गया, मैने अपनी कमर आगे-पीछे करना शुरु किया, मा के मुह से आआआह ऊऊऊह की आवाजे निकाल रही थी जिन्हे सुनकर मेरा जोश बढ रहा था और मै और तेजी से चोदने लगा. नशेमे और वासनासे धुत मै बडबडाने लगा:

मै(चोदते हुए): क्या मस्त चुत है तेरी मा बडा मजा आ रहा है तुझे चोदने मे........

मैने उसके बदनके नीचे से हाथ आगे लाए और उसके भरे हुए मम्मोकोभी मसलना शुरु किया, इस दोहरे हमले से मा और कराहने लगी

मा (दर्द से करह्ते हुए): आआह ऊऊऊह ऊऊऊ बहुत दर्द हो रह है.......आआआह्ह्ह..........हाय मै मर गई........

मा एक शरीफ औरत थी जिसने पिताजीके जाने के बाद किसी मर्द की तरफ देखा तक नही था, चुदाई की बात तो दूर ....मेरा लन्डभी जवान और मोटा था. इसलिये मा को काफ़ी दर्द हो रहा था. हमारी चुदाईकी वजह से मा की चुतसे ‘फ़च फ़च’ की मधुर ध्वनि कमरे मे गून्जने लगी. अब मा की सिसकारिया थोडी कम हुई तो मुझे लगा की अब वो ज्यादा विरोध प्रकट करने की स्थिती मे नही है. मैने मा की चुतसे अपना लन्ड निकाल लिया और फिर उसे खोल दिया और सीधा लिटा दिया, अब वो बिलकुल निढालसी पडी थी, उसे सीधा करके मैने पहले तो उसके रसीले होन्टोपे होन्ट रखकर एक मस्त चुम्मी ली और फिर उसके होन्टो को चूसना शुरु किया, मेरा एक हाथ मा के गर्दन के नीचे से पीठ पर था और दुसरा हाथ मा की गान्ड को मसल रहा था. इस तरह मा मेरी बाहोमे पूरी तरह कसके जकडी हुई थी. मा का विरोध लगभग शान्त हो चुका था. बस वो अब लगतार आन्सु बहा रही थी. मैने फिर मा की टान्गे फ़ैलायी जिससे मा की चुत दिखने लगी. मा की चुतपर बहुत घने और घुन्घराले बाल उगे हुए थे जो चुत की खूबसूरती को बढा रहे थे. मैने उन्गली डालकर चुत के छेद को फ़ैलाया, अन्दर की गुलाबी पन्खुडिया उन घने बालोसे पूरी तरह ढक चुकी थी. चुतमे कुछ देर उन्गली करनेके बाद मैने उन्ही उन्गलियोन्को मेरी नाक के पास ले जाकर एक लम्बी सास ली, मा की चुत की खुशबूसे मै गनगना उठा और उस जगहका स्वाद लेनेका मन हुआ. मैने फिरसे मेरी उन्गली अन्दर घुसेड दी और मा की रस से सराबोर उन उन्गलियोन्को मुह मे लिया. उस गजब के नमकीन स्वाद को चखकर मेरा नशा मानो दुगना हो गया, मैने झटसे नीचे झुककर मा की चुतमे सीधे अपनी जीभ डालकर चाटना शुरु किया. पहले तो मुझे इस चीज का तजुर्बा नही था तो शुरु शुरु मे मै किसी नौसिखिए की तरह सहम सहम कर चाट रहा था लेकिन एक बार मुझे उसका आनन्द आने लगा तो मैने अपनी जीभ सीधी अन्दर घुसा दी और लन्ड की तरह उसे अन्दर-बाहर करना शुरु किया. सचमुच मुझे मा की चुत का नमकीन रस पीने मे बडा मजा आ रहा था. कुछ ही देर मे मैने मा की चुत को चूस चाट कर लाल कर दिया. अब तो मै इतनी बेफिक्र हुआ कि मै बिस्तर के नीचे घुटनोपे बैठ गया और मा की टान्गे उठाई और मुह अन्दर डालकर चाटने लगा. मा ने कराहना बन्द किया था शायद उसको भी मझा आ रहा होगा, उसने चद्दर अपनी मुठ्ठीमे भर दी थी और चुपचाप पडी थी. मा की चुतसे ढेर सारा पानी पी जानेके बाद मैने उसके पैरोपे, जान्घोपे, पेट, स्तन, कन्धे, यहातक की उसके बगलमे भी जीभ डालकर चूमा और चूसा. मा की बगल मे भी ढेर सारे बाल थे, वहाकी महक कुछ और ही थी. मा के जिस्म का शायद ही ऐसा कोई हिस्सा होगा जहा मैने चूमा चाटा ना हो.

अब मै चुदाई के मूड मे आ गया, मैने मा की एक टान्ग को अपने कन्धे पे रखा और अपने लन्ड को मा की चुत से सटा दिया और एक झटके मे ही लन्ड को जड तक पेल दिया और धक्के लगाना शुरु किया. मेरी जान्घ मा के भारी चुतडो से टकरा रही थी जिससे ‘थप थप’ की आवाज हो रही थी जो मुझे मदहोश कर रही थी. इसी जोश मे मैने चुदाई की स्पीड बढा दी. थोडी देर तक इसी पोझिशन मे चोदने के बाद मैने मा को पीठ के बल लिटा दिया और अपना लन्ड उसकी बडी चूचियो के बीच फ़साया और धक्के देने लगा. फिर मै मा के ऊपर लेट गया और अपना लन्ड मा की चुत मे डालकर चोदने लगा. मैने दोनो हाथो से मा के सिर को पकडा था और होन्ठो से मा के होन्टो को चूस रहा था, कभी उसकी चुचिया मसलता, फिर मैने मा के दोनो हाथ उपर उठा लिए और कान्ख(बगल का हिस्सा) चूमने चाटने लगा.इस तरह मै मा को बेरहमी से चोद रहा था.

शराब का असर था या मेरी वासना इतनी भडक उठी थी कि मै अभी तक झडा नही था. अब मेरा मन मा की गान्ड मारने का कर रहा था. मैने मा को बिस्तर पर उलटा लिटा दिया और उसके चुतड फैलाये. इस पोझिशन मे उसकी गान्ड का छेद सामने उभरकर आया, मैने अपनी जीभ लम्बी कर के उसे थोडा चाटा और वहापे मेरी थूक लगा दी.

मा: छी छी बेटा तू यह क्या कर रहा है, पागल तो नही हुआ है तू......छोड दे मुझे बस कर अब...........

मै: मा मै तेरे पूरे शरीर से प्यार करता हू, तेरे इस खूबसूरत बदन का ऐसा कोई हिस्सा नही है जो मुझे अच्छा ना लगे, और यह तो तेरी वो जगह जिसमे मै अब तुझे चोदने वाला हू............

ऐसा कहकर मैने लन्ड को गान्ड के छेदसे भिडा दिया और जोर का झटका दिया जिससे लन्ड का सुपाडा गान्ड के छेद मे धस गया. मा दर्द से चिल्ला उठी लेकिन मैने लन्ड को और अन्दर घुसेड दिया.

मा (रोते हुए): आआआह्ह्ह्ह्ह्ह्ह............ बहुत दर्द हो रहा है प्लीज छोड दे मुझे अपनी मा पर थोडा तरस खा बेटा......

मै चोदते हुए): बस मेरी जान कुछ ही देर मे दर्द कम हो जायेगा........

मा का रो रो कर बुरा हाल हो गया, लेकिन मैने रहम नही किया और तेजी से गान्ड को चोदता चला गया. करीब १५ मिनट चल रही इस चुदाई ने मा की गान्ड का भुर्ता बना दिया. फिर मुझे उस समय का अहसास हुआ कि मै अब झडने वाला हू, मैने मेरे धक्के और तेज किए मा की गुदाज चुचियोको मसलते हुए उसके कन्धोपे दात गडा दिए और कुछ हे देर बाद मेरा गरम वीर्य मा की गान्ड मे फुहारने लगा. पूरी तरह झडनेके बाद मेरा लन्ड मा की गान्ड से बाहर आ निकला. इस जबरदस्त चुदाई से मै निढाल हो कर वही पर लेट गया.

अगले दिन मेरी नीन्द खुली तो दिन के ११:३० बजे हुए थे. मैने उठकर देखा तो मा बगल मे उदास बैठी थी. मैने मा से बात करनी चाही लेकिन वो मुझसे काफ़ी नाराज लग रही थी उसने मेरी बात का कोई जवाब नही दिया. उस समय उसके बदन पे सिर्फ एक पेटिकोट और ब्रा थी. मा को इस रूप मे देखकर मेरा लन्ड फ़िर फ़डफ़डाने लगा और मै मा के नजदीक जाकर उसे बाहो मे ले लिया. मा मुझे विरोध करने की स्थिती मे नही थी,

मैने पूछा: "क्या हुआ मेरी जान उदास क्यू हो"

लेकिन मा कुछ नही बोली. मैने मा की चूचियो को ब्रा के बाहर से मसलना चालू कर दिया.

मा: कल पूरी रात यही सब करके भी तेरा मन नही भरा.......

मै: (चूचियो को मसलते हुए): अरे मेरी प्यारी मा तू चीज ही ऐसी है कि तुझसे कभी मन भर ही नही सकता. लेकिन तू इतनी उदास क्यू है

मा: उदास ना हू तो क्या करू, तुमने कल रात बहुत गलत काम किया है, अगर किसी को पता चला तो हम समाज मे मुह दिखाने के काबिल नही रहेन्गे.

मै: अरे मा, गोली मारो इस समाज को, मै नही मानता इन सभी बातोको, तुम पिछले कई सालोसे विधवा की जिन्दगी बिता रही हो, तुम्हारा पति ऐश कर रहा है, समाज ने क्या किया इसके लिए ? और वैसे भी किसी को भी पता नही चलेगा, ये बात तेरे और मेरे बीच मे रहेगी. और मै तो किसी से कहून्गा भी नही, मा मै तुमसे बहुत प्यार करता हू और तुम्हे खुश देखना चाहता हू, मै हर काम का बोझ उठा रहा हू, क्या मै तुम्हे यौन सुख देने का जिम्मा नही उठा सकता.........

यू कहकर मैने फिरसे मा को चूमना शुरु किया, मा ने ज्यादा विरोध नही किया, शायद उसके अन्दर की औरत जाग गई होगी.

मा: लेकिन ?

मै(चूचियो को मसलते हुए): लेकिन वेकिन कुछ नही, बस आजसे तुम मेरी बीवी हो, मेरी दोस्त हो मेरी प्रेमिका हो, मेरी सबकुछ हो, मै तुम्हे खुश रखने की जी तोड कोशिश करून्गा, तुम्हारी हर बात मानून्गा, जो प्यार तुम्हे अपने पति से नही मिला वो सब दून्गा, बस मेरी बात मान जाओ, मै तुम्हे अपना बनाना चाहता हू, तुम मेरे सिवा किसी और की नही हो, मै हमेशा तुम्हारे साथ रहना चाहता हू, मै अपनी पूरी जिन्दगी तुम्हारे साथ गुजारून्गा, बस तो मेरा प्यार कुबुल कर दे.....
 
ऐसा बोलकर मैने मा को बेतहाशा चूमना शुरु किया, मेरे हाथ उसके अन्गोके साथ खेल रहे थे, मुझे अहसास हुआ कि मा ने भी उसके हाथ मेरे गलेमे डाल दिए है, और वो मुझे लिपटकर खडी है. मैने उसका चेहरा अपने हाथोमे लेकर उसकी ठुड्डी उठाई और पूछा

मै: क्या मा, बताओ ना, क्या तुम्हे मेरा प्यार कुबुल है

मा (शर्माते हुए): हा

मै: तो तुम मुझे तुम्हारे साथ प्यार करने दोगी

मा: हा........

और उसने लज्जा से अपना सिर नीचे किया, मैने उसका चेहरा हाथोमे लिया और उसके रसीले होन्टोपे एक लम्बासा चुम्मा जड दिया, कल भी मैने उसे चूमा था लेकिन वो जबरन था, इस चुम्मेमे प्यार और वासना दोनोका मिलाफ था, मै बडी उत्तेजना से मा के मुख-रस का प्राशन कर रहा था, मैने फिर मेरी जीभ अन्दर ठेल दी जो मा चूसने लगी. मैने मा की ब्रा उतार दी और उसकी गुदाज चुचियोको मसलने लगा. अब मेरी खुशी का कोई ठिकाना नही था, मा ने खुद होकर मेरे प्यार को सहमति दी थी, मैने एक हाथ से मा के पेटिकोट को कमर तक ऊपर कर दिया. मा ने अन्दर पॅन्टी नही पहनी थी, जिससे मेरा हाथ सीधा उसकी चुत पे गया.

मै: ये क्या मा, तुमने अन्दर कुछ नही पहना.........

मा (शरमाकर): कल रात तुमने उसे उतारकर कहा फेन्की क्या पता, मै उठकर ढून्ढनेवाली थी कि तुम जाग गए और फिर........

मैने उसका मुह मेरे होन्टोसे बन्द किया और मेरे हाथ की उन्गली से मा की चुत सहलाना चालू कर दिया.

फिर मैने मा को बेड पर पीठ के बल लिटा दिया और उसकी टान्गोको मोड दिया जिससे मा की चूत मेरी तरफ़ हो गयी. मैने उसकी टान्गोको और थोडा फैलाया और उसकी झान्टोभरी बुर पे मुह लगा लिया.

मा (कसमसाते हुए): आआआआ..........स्स्स्स्स्स...........बेटा ये क्या कर रहे हो, वहा मुह नही लगाते, छी छी..........गन्दा लगता है.........

मै: अरे नही मा, यह गन्दा कैसा यह तो अम्रित है, गजब का टेस्टी है तुम्हारा रस......और पीने दे मुझे...

और मैने मेरी जीभ सख्त करके सीधी चुत के अन्दर डाल दी और अन्दर बाहर करने लगा. मा मुह से तो इन्कार कर रही थी लेकिन उसकी चुत कुछ और कहानी बता रही थी, उसकी चुत के होन्ट लसलसा रहे थे और कुछ ही समय मे मा की चुत पानी छोडने लगी, मा ने मेरा सिर अपनी चुत पे दबाए रखा और मै मा की चुत से निकलता हुआ नमकीन रस पीने लगा. मै मा की चुत की अन्दर की दीवारो पर अपनी जीभ घुमा रहा था ऐसा करने पर मा बार बार अपनी गान्ड उचका रही थी.

मा: इस्स्स्स्स्स्स्स्स.......आआआआअ..........

मै: मा मझा आ रहा है ना.........

मा: हा बेटा..........उप्फ्फ्फ्फ.........बस बेटा अब और नही, और मत तडपा

मै: तो मै रुक जाउ......

मै जानबूझकर मा को चिढा रहा था.....

मा; हट बेशरम...........वो कर दे ना अब......

मै: वो मतलब.........

मा (शरमाकर): वो मतलब.........आआआह्ह्ह्ह......वो मतलब............मेरा मतलब...........अब चोद दे मुझे........

और मा ने शरमाकर अपने हाथोसे अपना चेहरा छुपा लिया. उसकी इस अदा ने तो मुझे पागल कर दिया, और मैने मा को सीधा लिटा दिया और उसके चुतडोको बेड के किनारे पर रख दिए और मै खुद बेड के नीचे खडा हो गया.

मैने मा की एक टान्ग को कन्धे पर रखकर अपना लन्ड मा की चुत से सटा दिया और एक जोरका धक्का मारा जिससे पूरा लन्ड एक ही बार मे अन्दर तक चल गया और मै मस्तीसी मा को चोदने लगा. मा के मुह से ‘आआआआह्ह्ह्ह्ह..........उम्म्म्म्म्म.....’ जैसी मादक सिसकिया मुझे पागल करने लगी. मैने मा की दूसरी टान्ग भी अपने कन्धे पर रख दी और चुदाई करने लगा. चुदाई करते वक्त मेरी जान्घे मा की भारी चुतडो से टकराकर ‘थप.थप....’ ऐसी आवाज कर रही थी. पूरा कमरा चुदाई की आवाजो से गून्ज रहा था. मै तूफ़ानी अन्दाज मे मा की चुदाई कर रहा था, कभी मै उसके मम्मे मसलता तो कभी झुककर उसके होन्टोको चूसता, यहा तक कि मैने उसके पैरो को मुह मे डाल कर भी चूस लिया,

उसकी भरी हुई चुचिया मसलने मे मुझे गजब का आनन्द मिल रहा था, उसके चूचीपर भूरे रन्ग के गोल और उस पर तने हुए निप्पल मुझे और ललचाते और मै कभी उन्हे उन्गलियोसे मिसता तो कभी मुह मे लेकर बच्चेकी तरह चूसता. चूस चूसकर और मसलकर मैने मा के मम्मोके लाल-निला कर दिया, मा भी अभी वासना मे पूरी तरह डूबी थी सो वो मुझे मना नही कर रही थी बल्कि कमर उचकाकर मेरे लन्ड को और अन्दर लेने की कोशिश कर रही थी. मै जब उसके मम्मोको मुह मे लेकर चूसता तो उसके निप्पल का सख्तपन मुझे महसूस होता था. मेरा सख्त लन्ड उसके चूतकी दीवारोको रगड रहा था, मा की चुत काफी टाईट थी और वो भी अब चुदाईका आनन्द ले रही थी तो वो अपने चूत को और टाईट करके मेरे लन्डपर दबा रही थी, जिससे मुझे लग रहा था कि मेरा लन्ड किसी मखमली मुठ्ठीमे आगे पीछे हो रहा है.

हम काफी देर तक ऐसे चुदाई करते रहे मा भी पूरा सहयोग दे रही थी सो मुझे और ज्यादा जोष आया था, और फिर मै अपने चरम सीमा पे पहुच चुका था, मै किसी जानवर की तरह गुर्राते हुए मा को सीनेसे लगा लिया और मेरा गरम गरम वीर्य उसकी चुत मे गिरने लगा. कुछ देर मै यूही उसपर लेटा रहा, मा तो कबकी ३-४ बार झड चुकी थी, हम फिर एक दूसरे के अगलबगल लेट गये और प्यार भरी मीठी मीठी बाते करते हुए सो गए.

उस दिन के बाद मेरी मा ने कभी अकेलापन महसूस नही किया, मै काम खतम करके घर जाता तो मा किसी प्यारी पत्नीकी तरह मेरा इन्तजार करती थी और मै हर समय उसके खूबसूरत बदनसे लगा रहता था. अब हमे किसी की पर्वा नही थी और ना ही कोई दुख, अब सिर्फ सुख ही सुख था हमारे जीवन मे.

The End

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