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मिनी की कातिल अदाएं

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मिनी की कातिल अदाएं

दिल्ली में अँसल के बंगला सोसाइटी में, मिनी शर्मा अपने बंगले की खिड़की पर खडी हो कर गली में बाहर का नज़ारा देख रहीं थीं. मिनी एक बहुत की खूबसूरत औरत थीं – गोरा रंग, लम्बा कद, काले लम्बे बाल, . उनका बदन एक संपूर्ण भारतीय नारी की तरह भरा पूरा था. मिनी एक जिन्दा दिल इंसान थीं जिन्हें जिन्दगी जी भर के जीना पसंद था. मिनी इस घर में अपने हैण्डसम पति वी रंगीला और अपनी बेटी डॉली के साथ रहती थी. डॉली यूनिवर्सिटी में फाइनल इयर की क्षात्र थीं. मिनी एक गृहणी थीं. वी रंगीला एक सॉफ्टवेयर कंपनी में ऊंची पोस्ट पर थे. मिनी को ये बिलकुल अंदाजा नहीं था की उसकी जिन्दगी में काफी कुछ नया होने वाला है.

मिनी के सामने वाला घर कई महीनों से खाली था. उसके पुराने मालिक उनका मोहल्ला छोड़ कर दिल्ली चले गया थे. आज उस घर के सामने एक बड़ा सा ट्रक खड़ा था. उसके ट्रक के बगल में एक बीएमडब्ल्यू खडी थी जिसमें गुड़गावां का नंबर था. लगता था गुड़गावां से कोई दिल्ली मूव हो रहा था. पुराने पडोसी काफी खडूस थे. मोहल्ले में कोई उनसे खुश नहीं था. मिनी मन ही मन उम्मीद कर रही थी कि नए पडोसी अच्छे लोग होंगे जो सब से मिलना जुलना पसंद करते होंगे.

मिनी ने देखा की उस परिवार से तीन लोगों थे. पति पत्नी शायद 40 प्लस की उम्र में होंगे. उनकी बेटी मिनी की अपनी बेटी डॉली की उम्र की लग रही थी.

मिनी ने अपने पति रंगीला को पुकारा, “जानू, जल्दी आओ. हमारे नए पडोसी आ चुके हैं”

रंगीला लगभग दौड़ता हुआ आया और बाहर का नज़ारा देखते ही उसकी बांछे खिल उठीं. बाहर एक हैण्डसम आदमी की बहुत ही सेक्सी पत्नी अपने बॉब कट हेयर स्टाइल में एकदम कातिल हसीना लग रही थी. जैसे जैसे वो चलती थी, उसकी चून्चियां उसकी टी-शर्ट में इधर से उधर हिलती थीं. इसी बीच रंगीला की नज़रों में उनकी कमसिन जवानी वाली बेटी आई. रंगीला का तो लंड उसके पाजामें के अन्दर खड़ा होने लग गया. नए पड़ोसियों की बेटी ने लो-कट टी-शर्ट पहन रखी थी. इसके कारण उसके आधे मम्मे एकदम साफ़ दिखाई पड़ रह थे. उसके मम्मे उसके मम्मी की भांति सुडौल थे जो एक नज़र में किसी को भी दीवाना बना सकते थे. उसने बहुत छोटे से शॉर्ट्स पहन रखे थे जिससे उसके गोर और सुडौल चूतड़ दिखाई पड़ रहे थे.

रंगीला सारा नज़ारा अपनी पत्नी मिनी ने पीछे खड़ा हो कर देख रहा था. रंगीला ने पीछे से मिनी को अपने बाँहों में भर लिया. उसके हाथ मिनी के दोनों चुचियों पर रेंगने लगे. मिनी मुस्कराई और उसने अपनी गुदाज चूतडों को रंगीला के खड़े लंड पर रगड़ना शुरू कर दिया. इससे रंगीला का खड़ा लंड मिनी की गांड की दरार में गढ़ने लगा.

मिनी ने धीरे से हँसते हुए पूंछा, “डार्लिंग! तुम्हारा लंड किसे देख के खड़ा हो गया?”

रंगीला बोला, “दोनों को देख कर. तुमने देखा की उनकी लडकी ने किस तरह के कपडे पहने हैं”?

“वो बहुत हॉट है न? जरा सोचो अपनी डॉली अगर ऐसे कपडे पहने तो?” मिनी बोली.

रंगीला के हाथ अब मिनी के ब्लाउज के अन्दर थे. वो उसकी ब्रा का आगे का हुक खोल रहा था. रंगीला मिनी की चुचियों को अपने हाथों में भर रहा था और धीरे धीरे मसल रहा था. रंगीला को अपनी चुचियों के साथ खेलने के अनुभव से मिनी भी गर्म हो रही थी.

वो बोली, “रंगीला डार्लिंग! आह.. मुझे बहुत अच्छा लग रहा है. मुझे खुशी हुई की नए पड़ोसियों को देख कर तुम्हें “इतनी” खुशी हुई… अब मुझे तुम्हें यहाँ बुला कर उन्हें दिखाने का इनाम मिलेगा ना?”

मिनी की कातिल अदाएं

रंगीला मिनी को जोर जोर से चूमने लगा. उसने मिनी का गर्म बदन अपने ड्राइंग रूम में बिछे हुए कालीन पर खींच लिया. उसके हाथ अब मिनी के स्कर्ट के अन्दर थे, उसकी उंगलिया उसकी गीली चूत पर रेंग रहीं थी. मिनी ने अपनी टाँगे पूरी चौड़ी कर रखीं थीं. हालांकि दोनों के विवाह को 19 साल हो गए थे, पर दोनों आज भी ऐसे थे जैसे उनका विवाह 19 घंटे पहले ही हुआ है – जब भी उन्हें जरा भी मौका मिलता था, चुदाई वो जरूर करते थे.

रंगीला ने अपना पजामा उतार के अपने लंड को आज़ाद किया. मिनी इस लंड को अपनी चूत में उतार के चोदने के लिए एकदम तैयार थी. मिनी को चुदाई बहुत पसंद थी. वो वाकई चुदवाना चाहती थी. पर रंगीला को चिढाने के लिए उसने बोला,

“रंगीला डार्लिंग… नहीं…डॉली के घर आने का टाइम हो गया है. वो कभी भी आ सकती है”

 
रंगीला ने अपना लौंडा मिनी के चूत के मुहाने पर टिका के एक हल्का सा धक्का लगाया जिससे उसके लंड का सुपाडा मिनी की गीली चूत में जा कर अटक सा गया. मिनी ने अपनी गांड को ऊपर उठाया ताकि रंगीला का पूरा का पूरा लंड उसकी चूत के अन्दर घुस सके. रंगीला धीरे धीरे अपनी गांड हिलाने लगा ताकि वो अपनी पूरी तरह गरम चुकी पत्नी की गांड के धक्कों को मैच कर सके और बोला,

“अच्छा को कि डॉली किसी दिन हमारी चुदाई देख ले…कभी कभी मुझे लगता है कि उसकी शुरुआत करने की उम्र भी अब हो गयी है.”

मिनी ने अपने पैर रंगीला की गांड पर लपेट लिए और अपनी भरी आवाज में बोली,

“अरे गंदे आदमी…यहाँ तुम अपनी पत्नी की ले रहा है और साथ में अपनी बेटी को चोदने के सपने देख रहा है…सुधर जा….”

रंगीला ने मिनी को दनादन फुल स्पीड में चोदना चालू कर दिया. उसका लंड मिनी की चूत के गीलेपन और गहराइयों को महसूस कर रहा था. मिनी आह आह कर रही थी और अपनी चूत को रंगीला के लंड पर टाइट कर रही थी. रंगीला को मिनी की चूत की ये ट्रिक बेहद पसंद थी. रंगीला ने धक्कों की रफ़्तार खूब तेज कर दी और वो मिनी की चूत में झड़ने लगा. मिनी ने अपने चूत में रंगीला के लंड से उसके वीर्य की गरम धार महसूस की और वो भी झड़ गयी. मिनी झड़ते हुए इतनी जोर से चिल्लाई की उसकी अवाज नए पड़ोसियों तक भी शायद पहुची हो. दोनों एक दुसरे से लिपटे हुए थोड़े देर पड़े रहे. फिर रंगीला के अपना लौंडा उसकी चूत से निकाला उसे होठों पर चूमा और बाथरूम की तरफ चला गया.

मिनी ने अपने कपडे ठीक किये और वापस खिड़की पर चली गयी ताकि देख सके की नए पड़ोसी अब क्या कर रहे हैं.

अब मम्मी और बेटी शायद घर के अन्दर थे और पिता बाहर खड़ा हुआ था. रंगीला बाथरूम से लौट आया और उसने मिनी के गर्दन के पीछे चूमा. मिनी गर्दन के पीछे चूमा जाना बहुत पसंद था. मिनी ने अपनी भरी आवाज में बोला

“मज़ा आया रंगीला. मुझे बहुत अच्छा लगता है जब तुम कहीं भी और कभी भी मेरी लेते हो..”

“ओह यस बेबी…इस शहर का सबसे टॉप माल तो तू है न…”

कहते हुए रंगीला ने मिनी की गांड पर एक हल्की चपत लगाईं.

मिनी हंसने लगी और रंगीला की बाहों में लिपटने लगी और बोली,

“थैंक्स डार्लिंग….मैं टॉप माल हूँ..और तुम्हारी बेटी डॉली? क्या तुम उसे हमारे खेल में जल्दी शामिल करने की सोच रहे हो?”

“पता नहीं बेबी….पर मुझे लगता है इस मामले में किसी तरह की जल्दबाजी ठीक नहीं है”

मिनी को फिर से अपनी गांड में कुछ गढ़ता हुआ सा महसूस हुआ. उसे रंगीला का ये कभी भी तैयार रहने का अंदाज़ बड़ा भाता था. मिनी जब रंगीला से मिली थी तब तक सेक्स के प्रति उसका रुझान कुछ ख़ास नहीं था. पर रंगीला के साथ बिठाये पहले 6 महीने में मिनी एक ऐसी औरत में तब्दील हो गयी जिसे हमेशा सेक्स चाहिए. वो एक दुसरे के लिए एकदम खुली किताब थे. उन्हें एक दुसरे की पसंद, नापसंद, गंदी सेक्सी सोच सब बहुत अच्छी तरह से पता था. वो दोनों बहुत दिन से अपने १८ वर्ष की बेटी को अपने सेक्स के खेल में लाने की सोच रहे थे. जब भी मौका मिलता, वे दोनों इस विषय में चर्चा करना नहीं चूकते थे. मिनी को ये अच्छी तरह से पता था की डॉली का काम तो होना ही है, आज नहीं तो कल …

रंगीला खिड़की से झांकता हुआ बोला,

“अपना नए पडोसी की बॉडी तो एकदम मस्त है और देखने में भी हैण्डसम है. उसे उतार लो शीशे में. किसी दिन जब मैं ऑफिस में हूँ, तुम उसे किसी बहाने से यहाँ बुला कर जम कर चोदना”

मिनी आनंदातिरेक से भर उठी. उसकी एक और कल्पना थी की वो अपने पति रंगीला के अलावा किसी गैर मर्द के साथ यौन सुख का आनंद ले. रंगीला को ये बात पता थी. वो इस बारे में अक्सर बात करते थे. वो सेक्स करने के दौरान गैर मर्द वाला विषय अक्सर ले आते थे. ऐसा करने से इससे उन्हें चुदाई में अतिरिक्त आनंद मिलता था.

मिनी और रंगीला दोनों एक दुसरे के पसंद अच्छी तरह समझते थे. शायद यही उनके खुश वैवाहिक जीवन का राज था.

उनके पडोसी का सामन अब तक अनलोड हो चुका था. वो मूविंग ट्रक के ड्राईवर से कुछ बात कर रहा था. उसने एक पतली टी-शर्ट और टाइट शॉर्ट्स पहन रखे थे. रंगीला ने मिनी के कान के पीछे का हिस्सा चूमते हुए पूछा,

“मिनी, उसके टाइट शॉर्ट्स में उसका सामान देख रही हो? मुझे पक्का पता है कि तुम उसका लौंडा मुंह में लेकर चूस डालोगी न? सोचो न उसका लंड तुम्हारे मुंह में अन्दर बाहर हो रहा है.”

मिनी गहरी साँसे ले कर कुछ बडबडायी. रंगीला ने उसकी स्कर्ट उठा दी और अपना लौंडा उसकी गांड की दरार में रगढ़ने लगा. मिनी आगे झकी और अपने चूतडों को उठाया. रंगीला ने अपना लंड मिनी की चूत के छेद पर भिड़ाया और एक ही झटके में पूरा घुसेड़ दिया. मिनी इस अचानक आक्रमण से सिहर सी उठी. उसकी सीत्कार से पूरा कमरा गूंज उठा.

 
मिनी बोली,

“यस..रंगीला सार्लिंग…चोदो मुझे…हाँ मुझे पडोसी का लंड बड़ा मजेदार दिख रहा है….मैं किसी दिन जब तुम ऑफिस में होगे …उसे यहाँ बुलाऊंगी …और जम के चुदवाउन्गी…..आह…आह…पेलो….”

जल्दी ही रंगीला मिनी की चूत में झड गया. मिनी को रंगीला से चुदना और साथ में पडोसी को ले कर गंदी गंदी बात सुनने में बड़ा मज़ा आया.

रंगीला ने अपना लंड मिनी की चूत से निकाल लिया और ऊपर शावर लेने चला गया. ऊपर से बोला.

“मिनी, तुम जा कर हेल्लो हाय कर के आ जाओ. और उन्हें शाम को बाद में चाय नाश्ते के लिए इनवाईट लेना”

बाद में, रंगीला जब शावर से निकला, उसने देखा मिनी वहां खडी हो कर कपडे उतार रही थी, नीचे ब्रा नहीं पजानू थी.

“ओह… तुम्हारी ब्रा को क्या हुआ जानेमन?” रंगीला ने पूछा.

“वो मैंने पड़ोसियों से मिलने जाने के पहले उतार ली थी.” मिनी ने आँख मारते हुए बोला.

“ह्म्म्म..तो पड़ोसियों ने तुम्हारे शानदार मम्मे ठीक से ताके की नहीं” रंगीला ने पूछा.

“शायद…. एनी वे, बंसल्स यानी की हमारे नए पडोसी शाम को 6:00 बजे आयेंगे. ओह रंगीला वो बहुत अच्छा आदमी है…अब तुम देखते जाओ..वो जिस तरह से मुझे तक रहा था..मुझे लगता है की मेरा बरसों पुराना सेक्सी सपना पूरा होने वाला है…”

बंसल्स ठीक शाम 6:00 बजे पहुँच गए. सब ने एक दुसरे से परिचय किया. हर आदमी एक दुसरे को टाइट हग कर रहा था. डॉली वहां खड़े हो कर आश्चर्य से इन सब का मिलाप देख रही थी. मिनी को जब जय ने हग किया तो वो इतना टाइट हग था की मिनी उसका मोटा और लम्बा लंड अपने बदन पर गढ़ता हुआ महसूस कर सकती थी. जय ने अपना हाथ मिनी की गांड पर रखा और हलके से मसला. मिनी ने घूम कर इधर उधर देखा – रंगीला सुनीता लगभग उसी हालत में थे. कोमल और डॉली पीछे के दरवाजे से निकल रहे थे. मिनी ने जय से नज़रें मिलाईं और मुस्कराई और फुसफुसाई

“ध्यान से जय…जरा ध्यान से”

इस बात का मतलब था की मेरी गांड से खेलो जरूर पर तब जब कोई देख न रहा हो.

सब लोगों ने ड्राइंग रूम पार कर के पेटियो में प्रवेश किया. मिनी ने वहां सैंडविच, समोसे, चाय वगैरह लगवा रखे थे. रंगीला और मिनी एक दुसरे के देख कर बीच बीच में मुस्करा लेते थे. रंगीला ने ध्यान दिया की उनकी बेटी डॉली एक वहां अकेली लडकी थी जिसने ब्रा पजानू हुई थी.

कोमल हर बहाने से अपने शरीर की नुमाइश कर रही थी. उसे पता था की रंगीला उसे देख देख के मजे ले रहा है.

जय की पत्नी सुनीता काफी खुशनुमा स्वभाव की थी. तब वो झुक कर खाना अपनी प्लेट में डाल रही थी, उसके लो-कट ब्लाउज से उसके मम्मे दिखते थे. रंगीला को यह देख कर बड़ा आनंद आ रहा था. वैसे सुनीता और मिनी दोनों की दिल्ली की लड़कियां थीं. शायद इसी लिए इस मामले में दोनों काफी खुले स्वभाव की थीं.

सब लोग नाश्ता खाते हुए एक दुसरे से बात कर रहे थे. कोमल और डॉली जल्दी से गायब हो गए. शायद वे दोनों डॉली के रूम में बैठ कर कुछ मूवी देख रहे थे. मिनी जय को अन्दर ले कर गयी और उसे दिखाने लगी की उनका इम्पोर्टेड स्टोव कैसे काम करता है. सुनीता रंगीला को देख कर मुस्कुरा रही थी.

“सो ये मोहल्ला मजेदार है की नहीं रंगीला. हम जब गुड़गावां से मूव हो रहे थे, तो वहां के पड़ोसियों को छोड़ने का बड़ा अफ़सोस था हमें. हम उनसे काफी करीब भी आ चुके थे”

सुनीता ने पूछा.

रंगीला मुस्कराने हुए सुनीता के मस्त उठे हुए मम्मे देख रहा था. उसने उसे देखा और जवाब दिया,

“मुझे लगता है आप लोगों के आने से मोहल्ले में नयी रौनक आ जायेगी.”

सुनीता मुस्कराई और बोली,

“ये मुझे एक इनविटेशन जैसा लग रहा है रंगीला. जब हम लोग थोडा सेटल हो जाएँ, तुम और मिनी हमारे साथ एक शाम गुजारना.”

रंगीला बोला,

“ओह उसमें तो बड़ा मज़ा आएगा. हम लोग आपके गुड़गावां के पड़ोसियों वाले खेल भी खेल सकते हैं उस दिन”

“रियली? क्या तुम और मिनी वो वाले खेल खेलना चाहोगे?” सुनीता ने चहकते हुए पूंछा.

सुनीता मनो ये पूँछ रही हो, “अरे रंगीला तो तुम्हें मालूम भी है की हम कौन सा खेल खेल खेलते हैं वहां?”

रंगीला मन ही मन मुस्कराते हुए मना रहा था कि भगवान् करे तुम उसी खेल की बात कर रही हो जिसमें उसे सुनीता की स्कर्ट के अन्दर जाने का मौका मिले.

वह आँख मारते हुए बोला

“सुनीता, अगर तुम सिखाने को तैयार को वो खेल तो हम लोग सीखने में बड़े माहिर हैं”

 
ऐसी गर्म बातें सुनते ही रंगीला का लंड न चाहते हुए भी थोडा टाइट हो गया. सुनीता ने ये बात तुरंत नोटिस की. वो अपने होठों को होठों से चबाते हुए मुस्कराई और रंगीला की तरफ थोडा झुक गयी. उसका बलाउज थोडा खुल सा गया और रंगीला को उसकी गुलाबी और मस्त टाइट चुचियों का मस्त नज़ारा दिख गया. उसने चुचियों का अपनी आँखों से सराहते हुआ कहा,

“हमको लगता था की हमें दोस्ती करने में थोडा वक़्त लगेगा. पर तुम लोगों से मिल कर लगता है की मैं गलत था.”

रंगीला और सुनीता की नज़रें एक दुसरे से मिलीं. रंगीला किसी भी लडकी से इतनी जल्दी नहीं घुला मिला था. दोनों को बहुत अच्छी तरह से पता था की उनके दिमाग में क्या खिचड़ी पाक रही थी. रंगीला सुनीता को जल्दी से जल्दी चोदना चाह रहा था. सुनीता को ये बात बहुत साफ़ दिखाई पड़ रही थी. और सबसे बड़ी बात तो ये थी की रंगीला को सुनीता के स्कीम बड़ी अच्छे तरह से पता थी.

रंगीला मुस्कराया और बोला,

“मैं हमारे खेल खेलने का बेसब्री से इंतज़ार कर रजा हूँ.”

“वो तो ठीक है मिस्टर रंगीला, पर तुम्हारी बेगम मिनी का क्या”

सुनीता ने पूछा.

“मुझे लगता है की उसे भी ये खेल पसंद आएगा, हम दोनों ने कुछ करते हुए इस बारे में कई बारे में बात करी है” , रंगीला बोला.

“कुछ करते हुए ..हाँ.. पर क्या करते हुए?” सुनीता ने उसे चिढाया.

“वही जो मैं तुम्हारे साथ करना चाह आहा हूँ.” रंगीला ने अंततः बोल ही डाला. उसने ये मान लिया था की जय को इससे कोई समस्या नहीं है.

सुनीता ने रंगीला के खड़े लंड उसके शॉर्ट्स के अन्दर देखा और एक सिहरन भरते हुए बोला,

“अजीब सी बात है. अभी अभी खाया है पर फिर से कुछ खाने का दिल करने लगा”

रंगीला हंसने लगा और बोला,

“मुझे भी. क्या हमने कुछ और खाने के लिए तुम लोगों के सेटल होने का इंतज़ार करना पड़ेगा?”

“किस बात के लिए रंगीला” सुनीता ने उसे फिर से चिढाते हुए पूछा.

रंगीला को सुनीता का ये चिढाने का अंदाज़ बड़ा भाया. वो बोला

“वही बात जिसमें मुझे तुम्हारे सारे ओपेनिंग्स भरने का मौका मिले.”

“ओह..बात तो ये है की मैं तो बिलकुल तैयार हूँ, अभी के अभी.. पर तुम कल सुबह हमारे यहाँ क्यों नहीं आ जाते…हम मिल कर अपने खेलों की प्रक्टिस जम कर करेंगे …”

“किस वक़्त””

“दस बजे? हमारा दरवाजा खुला छोड़ देंगे. बस आ जाना. और रंगीला साहब…मुझे तुम्हारी ओपेनिंग्स भरने वाला खेल बहुत पसंद…बहुत…”

बाहर अँधेरा होने लगा था. वो दोनों वहां बैठ कर बात कर रहे थे. दोनों खड़े होते और उन्हें हाथ एक दूसरे के शरीर पर चल रहे थे मानों एक दुसरे में कुछ ढूंढ रहे हों. रंगीला के हाथ सुनीता की फिट गांड पर रेंग रहे थे, वो बीच बीच में उसके ब्लाउज में हाथ डाल कर उसके मम्मे मसल लेता. तो कभी पैंटी मन डाल कर उसकी चूत में उंगली डाल देता. सुनीता रंगीला के शॉर्ट्स में हाथ डाले बैठी थी और उसके खड़े लंड को अपने मुलायम हाथों से सहला रही थी. ये सोच कर की कल ये लंड उसकी चूत में होगा उसे एक अजीब सी सिहरन सी हो रही थी.

इसी बीच किसी के आने की आवाज ने उन्हें चौंका दिया और वो दोनों एक दम से अलग दूर हो कर खड़े हो गए थे मानों उनके बीच कुछ हुआ ही न हो.

जय और मिनी वापस आ गए थे. रंगीला ने देखा की मिनी उसकी तरफ देख कर मुस्करा रही थी. शायद वो सोच रही थी की उसके अनुपस्थिति में रंगीला और सुनीता के बीच क्या हुआ होगा. रंगीला भी ये सोच रहा था की जय ने मिनी के साथ क्या क्या किया होगा.

बाद में उस रात जब रंगीला और मिनी बिस्तर पर लेटे, मिनी बड़ी गर्म थी. वो एक मिनट के लिए रंगीला का लंड चूसती, तो दुसरे ही पल रंगीला का मुंह अपनी चूत में भिड़ा के अन्दर खींच देती. फिर अगले ही पल वह रंगीला को नीचे लिटा कर उसके ऊपर चढ़ गयी और लगी उसे दनादान छोड़ने. मिनी को खुद पता नहीं था की वो चोद चोद कर कितनी बार झडी. जब वो आखिरी बार झडी तो वो रंगीला के ऊपर से जैसे साइड में बिस्तर पर कटे पेड़ की तरह गिर पडी.

“आज की चुदाई बड़ी ही मजेदार है मेरी जान.”

रंगीला थोडा ऊपर खिसका और मिनी की चुचियों से खेलते हुए बोला,

“मुझे लगता है की तुमने आज जय के साथ थोड़ी तो मौज की है पर जब तुम लौटे तो तुम्हारे चेहरे पर एक अजीब सा लुक था. हैं ना?”

मिनी थोड़ी हिचकिचाई उसने अपने हाथों से रंगीला का मुलायम पड़ गया लौंडा पकड़ लिया और उससे तब तक खेला जब तक की वो फिर से खड़ा बहिन हो गया. वो बोली,

“जय मुझे लाइन मार रहा था जोरों से. जब मैं उसे अपना स्टोव दिखा रही थी, वो पीछे खड़ा था. वो अपने हाथ मेरे हाथों के नीचे से ला कर मेरे मम्मे सहलाने लगा. और उसने मेरी गर्दन के पीछे किस भी किया.”

“और तुमने क्या किया बेबी डॉल?”

“पहले तो मैं वह चुपचाप खडी रही. मुझे विश्वाश नहीं हो रहा था की ये सब वास्तव में हो रहा है….. फिर मैं वापस उसकी तरफ घूमी….तुम्हें तो पता ही है की मैं ऐसे समय ब्रा नहीं पहनती ताकि मेरे तगड़े मम्मों की जम के नुमाइश कर सकूं…उसने मेरे मम्मों को देखा..और बोला – मिनी तुम्हारे मम्मे तो लाजवाब हैं.”

“इसके पहले की मैं कुछ कहती वो मेरे दोनों मम्मे मसलने लगा …मैं कुछ बुद्बुदाई..मुझे बड़ा आनंद आ रहा था….उसने मेरा ब्लाउज खोल दिया और मेरे मम्मों को एकदम नंगा कर के मसलने लगा …थोड़ी देर में मैने उसका हाथ हटा दिया और ब्लाउज के बटन लगा दिए.”

“तुम्हारा मन नहीं हुआ की जय को वहीं के वहीं चोद डालो मिनी मेरी जान!”

 
मिनी रंगीला का लंड को जोर से हिला रही थी. उसने रंगीला की आँखों में ऑंखें डाल के बोला,

“रंगीला, प्लीज बुरा मत मानना पर सच्चाई ये है की मेरा बस चलता तो उसे वहीँ पटक कर चोद देती उसे. अगर तुम दोनों दुसरे कमरे में नहीं होते तो भगवान् न जाने आज मैं क्या कर बैठती”

“ओह, मुझे मालूम है बेबीडॉल की तू क्या करती. तू अपनी टाँगे फैला कर जय का बड़ा और मोटा लौंडा अपनी प्यासी चूत में गपाक से डाल लेती ना? वैसे लगता है अब समय आ गया की हम अपना इतना पुराना सपना पूरा करें… जय और रीता स्वैप करने में पूरी तरह से इंटरेस्टेड हैं..तू क्या बोलती है मेरी जान? ”

मिनी पूरे उन्स्माद में भर चुकी थी. वो रंगीला के ऊपर चढ़ गयी और उसका लौंडा अपनी खुली चूत में भर कर उसे जम के छोड़ने लगी. जैसे वो ऊपर ने नीचे आती उसकी आज़ाद चुन्चिया हवा में उछल जाती थीं. उन दोनों की ये चुदाई बड़ी की स्पेशल थी क्योंकि पहली बार वो अपनी चुदाई में औरों को सामिल करने के काफी करीब थे.

मिनी ने अपनी हस्की आवाज में पूछा,

“क्या तुम पड़ोसियों के साथ ये सब करना चाहोगे? ओह..मुझे तो पहले से पता है की तुम सुनीता को चोदना चाहते हो. मुझे पता है की तुम मेरे अलावा और औरतों को चोदते हो और मुझे इससे कोई समस्या नहीं रहे है. तुमने मुझे हमेशा खुश रखा है…पर पड़ोसियों के साथ का ये सब तुम्हें ठीक रहेगा रंगीला? जय ने मुझे बोल ही रखा है की वो कहीं और मिल कर मेरी लेना चाहता है”

“ओह तो ये बात है बेबी डॉल! लगता है हमारे पडोसी समय बर्बाद करने में बिलकुल विश्वाश नहीं रखते हैं”

रंगीला ने भी मिनी को बताया कि इस दौरान सुनीता और उसके बीच में क्या हुआ. रंगीला मिनी की चूत में अपना लंड उछल उछल कर डालने लगा. मिनी को रंगीला का लौंडा अपनी चूत के अन्दर फूलता हुआ सा लगा. रंगीला धीमे धीमे से छोड़ने लगा और एक पल बाद ही जोर से चोदने लगता. पूरा कमरा चुदाई की मस्की गंध से भर सा गया. मिनी ने झुक कर रंगीला का लंड गपागप अपनी चूत में जाते देखा और रंगीला से पूछा,

“तो तुम मानसिक रूप से उस बात के लिए बिलकुल तैयार हो की जय मुझे छोड़ दे? तुम्हारा सुनीता को चोदना मुझे तो बड़ा अच्छा लगेगा….पर तुम गैर मर्द की मेरे साथ चुदाई देख सकोगे?”

“अगर तुम जय से चुदना चाह रही तो मुझे इससे कोई समस्या नहीं है बेबी डॉल. मेरी तो ये सब करने की वर्षों की तमन्ना थी.”

“ओह शिट रंगीला… मैं तो उस समय के लिए तरस रही हूँ जब जय मेरी ले रहा होगे और तुम मुझे उससे चुदते हुए देख रहे होगे. गैर मर्द से चुदने के विचार से मुझे मजा आने लगता है”

रंगीला ने मिनी को अपने सुनीता के साथ के अनुभव को अब विस्तार में बता रहा था और उसे चोद रहा था. इस समय मिनी को पता चला की उन्हें पड़ोसियों से मिलने अगली सुबह जाना है,

“ओह यस….तुम सुनीता को जोर से चोद देना रंगीला….ओह…आईईई…ई..ई…..मैं गयी रे… ” कहते हुए मिनी झड गयी.

दोनो एक दुसरे की बाहों में लिपट कर नंगे ही सो गए. उन्हें अगले दिन की सुबह का इंतज़ार था. उन्हें पता था की वो सुबह उनके जीवन में कई नए आयाम ले कर आयेगी.

 
मिनी और रंगीला नंगे बदन एक दुसरे की बाँहों में समाये सारी रात सोते रहे. दोनों ने पिछली रात एक दुसरे को चोद चोद कर इतना थकाया था की जब वो एक बार सोये तो सुबह कब हुई ये पता नहीं चला. रंगीला की आँख 9:30 पर खुली और वो तुरंत ब्रश करने चला गया. वापस आकर मिनी के होठों पर होंठ रखे और धीरे से बोला, “बाय”. रंगीला अपने सामने के घर में कल ही शिफ्ट हुए पड़ोसी की पत्नी सुनीता से मिलने जा रहा था.

मिनी को रंगीला के वापस आने के लिए लगभग दो घंटे इंतज़ार करना पड़ा. रंगीला को देखते ही मिनी समझ गयी को वो सुनीता को जम कर छोड़ कर आया है. रंगीला ने उसे साड़ी आपबीती सुनाई. उसने बताय की जब वो उसके घर पहुंचा सुनीता बिस्तर पर नंगी लेट कर उसका इंतज़ार कर रही थी. दोनों ने एक दुसरे पहले तो चूस चूस कर पानी निकाला फिर चोद चोद कर.

“मिनी उन्होंने हमें शाम को ड्रिंक्स के लिए बुलाया है. तुम अभी भी राजी हो ना?”

मिनी हंसी और बोली,

“अरे ये भी कोई पूछने की बात है… ऐसा मौका छोड़ने का तो सवाल ही नहीं उठता.”

“अच्छा एक बात – सुनीता पूछ रही थी की क्या तुम्हें औरत के साथ सेक्स पसंद है”

मिनी बोली … “मुझे लगता है की ये कला भी सीखने का वक़्त आ ही गया है….”

दोनों ने बाकी का दिन शाम का इंतज़ार करते हुए ही गुज़ारा. शाम को जब वो पड़ोसियों के लिए निकलने ही वाले थे, उसके घर की घंटी बजी, दरवाजा खोला तो देखा पड़ोसियों की बेटी कोमल खडी थी.

“मैंने सोचा की मैं डॉली को यहाँ कंपनी दूंगी, ताकि आप दोनों को मेरी मम्मी और पापा को ठीक से जानने का पूरा मौका मिले.”

कोमल अन्दर आई. वो मिनी स्कर्ट और लो कट ब्लाउज पहने हुए थी. मिनी अभी भी ऊपर तैयार हो रही थी. रंगीला ने कोमल की चुचियों को घूरा और बोला,

“ये बड़ी अच्छी बात है कोमल.. ये तो बड़ा अच्छा होगा अगर तुम और डॉली अच्छी सहेलियां बन जाओ..”

कोमल मुस्करा रही थी उसे अच्छे तरह पता था की रंगीला इस समय उसके चुन्चियों को मजे ले कर घूर रहा है. वो बोली,

“मुझे पूरा यकीन है की हम दोनों बेस्ट सहेलियां बनेंगे … क्या आप मेरे दोस्त बनेंगे

रंगीला अंकल? गुड़गावां में मेरी कई सहेलियों के पिता लोग मेरे बड़े अच्छे दोस्त थे”

रंगीला मन ही मन सोच रहा था की कोमल क्या उसे हिंट दे रही थी कि गुड़गावां में वो अपनी सहेलियों के पिताओं के साथ मौज कर रही थी. इस ख़याल से ही उसका लंड खड़ा हो गया. उसने कोमल की आँखों में आँखें डाल कर बोला,

“मुझसे दोस्ती करोगी कोमल?”

“ओह.. बिलकुल”

उसी समय मिनी सीढ़ियों से उतारते हुए नीचे आई. उसकी ड्रेस बहुत ही सेक्सी थी, रंगीला और कोमल जैसे मिनी को घूरते जा रहे थे. डॉली मिनी के पीछे पीछे आई और मिनी की ड्रेस का बिलकुल ध्यान न देते हुए उसने कोमल का हाथ पकड़ा और अपने ऊपर कमरे में चली गयी.

 
मिनी और रंगीला हाथों में हाथ डाले जब पड़ोसियों के यहाँ पहुचे, जय और सुनीता दोनों ने बड़े ही खुशी से उसका दरवाजे पर उनका स्वागत किया. जल्दी जय ने सबको ड्रिंक्स बना दिए. इस परिस्थिति में सब के लिए ड्रिंक्स जरूरी था. जैसे ही थोडा सरूर चढ़ा, वो चार लोग एक दुसरे के साथ और भी खुलते गए. जय के चुटकुले और रंगीला के जवाबी चुटकुले नॉन-वेज होते चले जा रहे थे. लड़कियां उन गंदे चुटकुलों पर जम के ताली बजा बजा कर हंस रही थीं. रंगीला और जय एक दुसरे की बीवियों के साथ खड़े थे. थोड़े समय में ही दोनों जोड़ियाँ एक दुसरे से थोडा दूर होती गयीं. एक दुसरे के कानों में फुसफुसाना शुरू हो गया. एक दुसरे को छूने का छोटा से छोटा मौका भी कोई छोड़ नहीं रहा था. सारा मामला बिलकुल ठीक दिशा में जा रहा था. कुल मिला कर जय के बनाए हुए ड्रिंक्स जैसे बिलकुल ठीक काम कर रहे थे. रंगीला ने मिनी को चेक किया. मिनी के मम्मे आनंद में कड़े हो गए थे, उसके गाल शायद थोडा नर्वस होने की वज़ह से लाल हो गए थे.

मिनी भी रंगीला को बीच बीच में देख लेती थी. वैसे उसे रंगीला और सुनीता के बारे में कुछ सोचने की जरूरत ही नहीं थी क्योंकि वो दोनों तो आज सुबह ही अपनी चुदाई की शुरुआत कर चुके थे. बात ये थी की उसके और जय के बीच की बात कुछ आगे बढेगी या नहीं?

जय शायद मिनी की इस अदृश्य उलझन को भांप गया. वो बोला,

“मिनी तुमने अपने घर में मुझे अपना स्टोव दिखाया था. आओ मैं तुम्हें अपना होम थिएटर रूम दिखाता हूँ.”

मिनी तो मानों पहले से ही तैयार बैठी थी. जय ने उसका हाथ अपने हाथों में लिया और बढ़ गया. अब ध्यान देने की बात ये है कि होम थिएटर रूम देखने का निमंत्रण रंगीला और सुनीता को क्यों नहीं मिला. शायद जय और मिनी जल्दी से जल्दी सुनीता और रंगीला से बराबरी करना चाहते थे. क्योंकि सुबह कि चुदाई के बाद रंगीला और सुनीता का स्कोर इनके मुकाबले में 1-0 था. जैसे ही वे दोनों वहां से निकले, सुनीता ने दीवार पर अलग हुआ स्विच आन कर दिया. वो रंगीला की तरफ मुडी और मुस्कराते हुए बोली,

“अब हम जय और तुम्हारी प्यारी और मासूम पत्नी के बीच जो कुछ भी होगा वो सारा हाल इस स्पीकर पर सुन सकेंगे.”

उन्हें स्पीकर पर दरवाजा खुलने की आवाज आई और फिर जय और मिनी के परों की आहट सुनाई पडी. साड़ी चीजें बिलकुल साफ़ सुनाई पड़ रही थीं. उन्होंने क्लिक की आवाज सुनी, लगता है जय ने दरवाजा लॉक कर लिया हो. मिनी मुंह दबा कर हंस रही थी. उसकी दिल की धडकनें जोर से चल रही थीं. जय ने लाइट ऑफ कर के वहां अँधेरा कर दिया. मिनी ने जोर से सांस भरी और उई की अव्वाज निकाली क्योंकि जय अपना हाथ उसकी स्कर्ट के अन्दर डाल कर उसकी चूत सहला रहा था. मिनी ने अपने पैरों को फैला दिया ताकि जय उसकी चूत को मजे से सहला सके और बोली,

“मौका मिला की की दरवाजा बंद और बत्ती बंद और काम चालू जय जी?”

“अरे मै तो तुम्हारे लिये कब से कितना बेकरार हूँ, बस मौका मिलने की ही देर थी जानेमन.”

“ओह नो …. ओह… नो ….. बड़ा मजा आ रहा है, तुम जिस तरह से मेरी स्कर्ट के अन्दर मेरी रगड़ रहे हो…. ओह जय … तुम तो बड़े खिलाडी निकले..आह्ह…”

“आओ यहाँ इस काउंटर पर बैठो, ताकि मैं तुम्हारी बुर चाट सकूं मिनी.”

बाहर रंगीला और सुनीता स्पीकर पर चलने की आवाज फिर गीली चीज चाटने की आवाज और साथ में मिनी के सिहरने की आवाज सुन रहे थे.

“ऊ ऊ ऊ ऊ ऊ… यस जय… बहुत अच्छे … कितना मजा आ रहा है….. ओह शिट जय लगता है की झड जाऊंगी… फक…….”

भारी साँसों के आवाजों से सारा कमरा भर उठा. थोडी समय बाद मिनी एक धीमी से चीख मार कर शांत हो गयी. मिनी बोली,

“अब कुछ खाने का मेरा टर्न जय…. चलो खोलो और दिखाओ यहाँ क्या छुपा रखा है …”

और इसके बाद स्पीकर पर जय के लंड के ऊपर मिनी का गीले मुंह की आवाजें सुनाई दीं. जय को मजा लेने की आवाजें भी बीच में आ रही थीं.

और कुछ ही छड़ों बाद

“मैं तुम्हारी बुर चोदना चाहता हूँ मिनी… अभी के अभी…”

“यस …. जल्दी से…. ओह यस …मजा आ रहा है ….. सो गुड. ओह तुम्हारा बड़ा लंड बड़ा प्यारा है जय… पेल दो इसे …. छोड़ दो मुझे…मुझे चोदो……. फक…फक…”

थोड़ी देर में जब आवाजें आनी बंद हो गयीं, जय बोला,

“ओह मिनी, कपडे वापस पहनने की जरूरत नहीं है. चलो वापस रंगीला और सुनीता के पास चलते हैं… मुझे पूरा यकीन है की वो दोनों ऐसा की कुछ कर रहे होंगे”

“मुझे भी ऐसा जी लगता है”

जब जय और मिनी नंगे बदन वापस रंगीला और सुनीता के वापस आये, सुनीता फर्श पर फैले कालीन पर पूरी तरह से नंगी लेटी हुई थी. उसने अपने पैर पूरी तरह से फैला रखे थे. रंगीला उसकी दोनों लम्बी और सुन्दर टांगों के बीच में बैठा उसकी चूत को अपने मोटे लंड से धीरे धीरे धक्के लगाता हुआ छोड़ रहा था. दोनों काफी आवाजें निकाल रहे थे. मिनी ने रंगीला को दूसरी औरत को चोदते हुए कभी नहीं देखा था. ये नज़ारा देख कर उसके बदन में जैसे ऊपर से नीचे तक चीटियाँ रेंग गयीं और उसकी चूत फिर से चुदाई के लिए बिलकुल तैयार हो गयी.

जय को तो बस इशारा ही काफी था. उसने खड़े खड़े ही पीछे से अपना लंड मिनी की बुर में डाल दिया और उसे तब तक चोदा जब तक दोनों झड नहीं गए.

सबने बाद में बैठ कर बड़े ही आराम से डिनर खाया. खाने की टेबल पर बैठ कर उन्होंने खूब सारी बातें की. ध्यान देने वाली बात ये थी की सारी की सारी बातें सेक्स से ही सम्बंधित थीं और चारों लोग डिनर टेबल पर पूरी तरह से नंगे बैठ कर खाना खा रहे थे. खाना ख़तम कर के जब वे वापस उस कमरे में लौटे तो सुनीता मिनी के साथ चल रही थी. सुनीता ने मिनी की नंगी कमर को अपने हाथो में भर कर पूछा,

“तुमने कभी किसी औरत के साथ सेक्स किया है मिनी?”

“अभी तक तो नहीं … पर ऐसा लगता है की आज इस चीज पर भी हाथ साफ कर ही डालूँ..पर मुझे पता नहीं है की कैसे करते हैं…”

“अरे कभी न कभी तो जब आदमी के साथ किया होगा तो पहली बार ही हुआ होगा न? करना चालू करो तो बाकी सब अपने आप हो जाएगा..देखो, पहले मैं तुमारी बुर चाटना शुरू करती हूँ…उसके बाद तुम जैसा मैं तुम्हारे साथ करू वो तुम्हें अगर तुम्हें ठीक लगे तो मेरे साथ करते जाना.. बस मजा आना चाहिए..”

रंगीला और जय दोनों लोग अपने हाथ में स्कॉच का जाम ले कर बैठ गए. ऐसा लग रहा था की जैसे लड़के लोग नाईट क्लब में बैठ कर दारू पीते हुए कोई शो देख रहे हों. सुनीता ने मिनी को सोफे के इनारे पर बिठा कर लिटा दिया और अपने तजुर्बेकार मुंह से मिनी की बुर को चाटने लगी. सुनीता की जीभ मिनी की बुर के बाहर की खल के ऊपर थिरकती और दुसरे ही पल वह उसके बुर के दाने को चाट लेती, अगले पल वह मिनी की बुर के छेद में अपनी जीभ घुसेड कर जैसे उसे थोडा सा अपनी जीभ से छोड़ सा देती थी. मिनी उन्माद में सिस्कारिया भर रही थी. सुनीता धीरे धीरे बुर के दोनों तरफ की खाल चाट रही थी और उसने अपने एक उंगली मिनी की बुर में डाल राखी थी और दूसरी उंगली उसके गांड में. मिनी के लिए यह अनुभव एकदम नया था और वो इसे जी भर के मजे ले कर ले रही थी. मिनी अपना बदन एक नागिन की तरह उन्माद में घुमा रही थी. वो उन्माद में चीख रही थी. इतना आनंद उसके बाद के बाहर हो गया और एक चीत्कार के साथ ही उसने सुनीता की जीभ पर अपनी बुर का रस उड़ेल दिया. मिनी का बदन शिथिल पड़ गया. वह सुनीता के कन्धों पर अपने पर डाले हुए सोफे पर टाँगे फैला कर नंगे पडी हुई थी.

मिनी ने लेटे लेटे अपनी बुर की तरफ देखा. सुनीता ने अपना चेहरा उसकी दोनों टांगों के बीच से ऊपर उठा. दोनों एक दुसरे को देख कर मुस्काये. मिनी उठी और सुनीता को पकड़ कर उसके होठों से होठों का चुम्बन दिया. मिनी ने सुनीता के होठों पर लगा हुआ अपनी ही बुर का रस चाट चाट कर साफ कर दिया.

“ये तो वाकई बड़ा मजे वाला था सुनीता… थैंक यू डार्लिंग. मुझे लगता है की मुझे भी बदले में कुछ करना चाहिए”

मिनी सुनीता को लिटा कर उसके ऊपर 69 का पोज बना कर लेट गयी. दोनों लड़कियां एक दुसरे की चूत मस्त हो कर चाट रहीं थीं.

 
जय के पास क्यूबा से लाये हुए सिगार थे. उसने एक जय को दिया और एक खुद के लिए रखा. दोनों लड़कियों के पास गए. जय ने सुनीता की चूत में लगभग 2 इंच सिगार घुसेढ़ दिया. रंगीला ने भी इसकी पूरी नक़ल करते हुए मिनी की बुर में सिगार डाल दिया.

सुनीता बोली, “क्या तुम लोगों के लंड अब इतना थक गए हैं की हम लोगों को अब सिगार से चुदना पड़ेगा”

“अरे नहीं मेरी जान, ये तो हम तुम्हें चोदने के पहले तुम्हारी चूतों को थोडा धूम्रपान करा रहे हैं” कहते हुए जय ने सिगार दुसरे सिरे से जलाने की कोशिश की. पर वो जला नहीं क्योंकि सिगार को फूंकने की जरूरत होती है. और सुनीता की चूत में शायद फूंकने का हुनर नहीं था.

मिनी ने जोर से डांट लगाई, “अरे ये आग हटाओ यार, हम लोग जल गए तो.. पागल हो क्या तुम लोग”

दोनों ने तुरंत अपनी बीवियों की आज्ञा का पालन करते हुए सिगार चूत से निकाल कर जला लिया. सिगार चूत के रस से लबालब था तो दोनों को सिगार पीने में ख़ास ही मज़ा आ रहा था. कमरे में चूत के रस के साथ शराब और सिगार के धुंएँ की गंध भर गयी.

मिनी और सुनीता एक दुसरे की चूत चूसते हुए लगता है झड़ने ही वाले थे. रंगीला बाथरूम के लिए गया. जब वो वापस लौटा, उसने देखा की जय चेयर पर बैठा है और मिनी उसकी बाहों में बाहें डाले उसके ऊपर बैठी हुई है. जय का लंड उसकी चूत में घुसा हुआ है. मिनी धीरे धीरे ऊपर नीचे हो रही मानों घोड़े की सवारी कर रही हो. रंगीला मुस्काराया और मिनी के पीछे जा कर खड़ा हो गया. मिनी के चूतर जय के मोटे लंड के ऊपर उछालते देख कर उसका लंड फटाक से खड़ा हो गया. सुनीता को समझ आ गया की रंगीला की मन्सा क्या है. उसने ड्रावर खोली और उसी KY जेली की ट्यूब निकाली और आँख मारते हुए रंगीला को थमा दी. रंगीला ने ट्यूब से क्रीम अपने लौंडे पर लगाई और ढेर सारी क्रीम उंगली में लगा कर मिनी की गांड के छेद पर लगाने लगा. जैसे ही ठंडी क्रीम मिनी की गांड में लगी, मिनी चौंक कर उचक गयी. पीछे मुड़ कर देखा तो समझ गयी की रंगीला के गंदे दिमाग में की योजना है. वो जय के लौंडे को चोदते हुए हाँफते हुए बोली,

“हाँ रंगीला…. जल्दी करो… मैंने इस पोज के के बारे में कितना सोचा हुआ है… आज वो सपना हकीकत में बदलने जा रहा है….कम ऑन रंगीला…गो फॉर इट…”

सुनीता आगे आई और रंगीला का क्रीम से सना हुआ लौंडा मिनी की गांड के छेद के मुहाने पर टिकाया, ऊपर रंगीला को देख कर आँख मारी, जैसे कि वो 100 मीटर रेस में रेस स्टार्ट के लिए फायर कर रही हो. रंगीला ने एक धक्का दिया और उसका लौंडा मिनी की गांड में जा घुसा. वैसे तो मिनी ने रंगीला का लौंडा अपनी गांड में कई बार लिया हुआ था. पर ये पहली बार था जब लंड गांड में तब घुसा, जब बुर में एक मोटा सा लंड पहले से घुस कर कमाल कर रहा था. ये अनुभव बड़ा ही अनोखा था और बड़ा की मजेदार भी. जैसे जैसे दो मोटे लंड उसके दोनों छेदों में अन्दर बाहर जाते थे, वह वासना के उन्माद में पागल सी हो जा रही थी. आनंद के चरम शीर्ष पर थी वो और कुछ भी बडबडा रही थी.

“चोदो मुझे तुम दोनों….ओह मई गॉड…मेरी गांड मारो रंगीला….मेरी बुर को चोद डालो जय….ओह्ह…मैं झड़ने वाली हूँ…मेरी मारो जोर से ….आ…आ…आ..आह…उईईईईई…….”, मिनी ये बडबडाते हुए जोरों से झड गयी.

उस रात बहुत कुछ हुआ. सुनीता और मिनी ने रंगीला और जय से डबल-चुदाई कराई. मिनी ने सुनीता से अपनी बुर फिर से चुस्वाई और फिर मिनी ने सुनीता की चूत चूसी. गर्मी की ये लम्बी शाम चारों ने बहुत से खेल खेलते हुए गुजारी.

जब वे चलने लगे तो सुनीता ने कहा,

“मुझे बड़ी खुशी है की हम लोगों का परिचय इतनी जल्दी तुम लोगों से हो गया. बड़ा अच्छा हो की और 4-5 कपल्स हमारे खेल में शामिल हो सकते. तुम लोगों किसी और कपल्स को जानते हो जो इसमें शामिल हो सकें? मैं अगले हफ्ते नया जॉब पर स्टार्ट कर रही हूँ. वहां पर मैं और लोगों को अन्दर लाने की कोशिश करूंगी. जल्द ही हमारे पास एक बड़ा और बढ़िया सा ग्रुप होगा. बहुत मजा आएगा न? हम यहाँ पर पार्टी करेंगे. हम हिल स्टेशन पर जा कर पार्टी करेंगे”

सब लोगों ने फिर से किस किया एक दुसरे के बदन को अच्छे से छुआ. उन्होंने अगले हफ्ते की पार्टी रंगीला और मिनी के घर पर तय की. चारों लोग अपनी इस नयी शुरुआत से बड़े खुश थे. वो जानते थे कि आने वाला समय उस सबके जीवन में नए नए आनंद ले कर आने वाला था और सब लोग इस बात से बड़े खुश थे.

 
आज की शाम को पड़ोसियों के घर जम कर सेक्सी पार्टी करने के बाद, मिनी और रंगीला धीरे धीरे घर की तरफ टहलते हुए जा रहे थे. थोड़े देर के लिये दोनों खामोश थे. शायद सोच भी नहीं प् रहे थे की पिछले ३-४ घंटे में जो भी हुआ है सच में हुआ है या सम्पना था. शायद दोनों ही इस बात का इंतज़ार कर रहे थे की दूसरा बोले. यह उनका स्वैप का पहला अनुभव था. उन्हें खुशी थी की उनका पहला अनुभव इतना अच्छा गया.

रंगीला मौन भंग करते हुए बोला, “मिनी.”

“यस डार्लिंग!”

“आज रात की इस पार्टी में तुम्हें मजा आया की नहीं?”

“बहुत ज्यादा मज़ा आया रंगीला, तुम्हें तो मालूम है कि मुझे तुम्हारे सामने किसी दुसरे मर्द से चुदने का कितने सालों से इंतज़ार था. मेरा जय से चुदना, फिर तुमसे चुदना फिर तुम दोनों से एक साथ चुदना…और सुनीता की का मेरी चूत को चाटना और मेरा उसकी चूत को चाटना…मुझे तो अभी भी मेरी किस्मत पर यकीन नहीं हो रहा है.“

मिनी बोलती जा रही थी,

“हम लोगों ने अगले हफ्ते मिलने का प्लान तो किया है. पर मेरा मन तो उससे पहले एक बार और मिलने का हो रहा है रंगीला….मतलब कल रात ही मिलें उसने फिर से?”

रंगीला ने स्वीकृति दी,

“बढ़िया आईडिया है ये. मुझे लगता है कि वो मान जायेंगे. हमारे पडोसी हमसे कहीं से कम चुदक्कड़ नहीं हैं. वो चोदने का कोई मौका नहीं छोड़ेंगे. मैं उन्हें कॉल कर के कल सुबह ही बुला लूँगा डार्लिंग!”

दोनों एक बार फिर से शांत हो गए

“रंगीला”

“हाँ जी”

“तुन्हें मुझे जय मुझे चोदते हुए देख कर कैसा लगा था?”

“मुझे बड़ा ही हॉट लगा बेबी डॉल. दुसरे आदमी का लौंडा तिम्हारी चूत में जाते देख कर मेरा लंड तो बहुत जोर से खड़ा हो गया. अब मैं तुम्हें दो आदमियों से इकठ्ठे चुदते हुए देखना चाहता हूँ. जैसे जय और मैंने तुम्हारी और सुनीता की डबल-चुदाई की, ठीक वैसे ही. कुछ और लोगों का इंतज़ाम करना पड़ेगा अगली पार्टी के लिए”

“ओह, मुझे भी वो करना है. तुम्हें पता है जब जय मुझे चोद रहा था और तुम वहां बैठ कर अपना लंड हाथ से धीरे धीरे हिलाते हुए मुझे चुदते हुए देख रहे थे, मैं जितना जोर से झड़ी की पूरे जीवन में उतना जोर से नहीं नहीं झड़ी थी. तुम्हारा मुझे देखना एक कमाल का अनुभव था रंगीला.”

“हाँ.. आज की रात बड़े मजे की रात थी बेबी डॉल.”

“और, जब मैं और सुनीता एक दुसरे के ऊपर लेट कर एक दुसरे की चूत चाट रहे थे, तुम्हें मजा आया होगा न?”

“बहुत मजा आया मिनी. जीवन मजे लेने के लिए है. मुझे बड़ी खुशी है की तुमने आज किसी औरत को चोदने का नया अनुभव प्राप्त किया”

“और मुझे बड़ा मजा आया जब तुम और सुनीता चोद रहे थे, और बाद में जब तुमने और जय दोनों ने

सुनीता की डबल-चुदाई की, तब तो कमाल ही हो गया.”

“बिलकुल सही बोला”

“रंगीला मुझे चुदाई बड़ी अच्छी लगती है, कभी कभी ऐसा लगता है जैसे मेरा मन करता है कि किसी को भी चोद डालूँ”

“हाँ मिनी, इस मामले में मैं भी कुछ ऐसा ही हूँ. जब सेक्स इतना आनंद देने वाला काम है तो पता नहीं दुनिया ने इसमें इतनी रोक टोक क्यों लगा रखी है. केवल अपनी पत्नी को चोदो…किसी और की तरफ बुरी नज़र से मत देखो…मुझे ये सारे नियम बेकार के लगते हैं. मुझे लगता है पड़ोसियों के साथ सेक्स कर के हमारे लिए एक नयी दुनिया दी खुल चुकी है. और अब ये हमारे ऊपर है की हम इस नयी दुनिया का कितना आनंद लें.”

“काश की ये सब ऐसे ही चलता रहे. मैं तो बस अब किसी भी चीज के लिए हमेशा तैयार हूँ. जो भी सामने आएगा.. मैं एक बार कोशिश जरूर करूंगी करने के लिए….तुम्हें कैसा लगेगा की मैं माल जाऊं और किसी बिलकुल अजनबी से आदमी से चुद लूं? … जब भी मैं इस बारे में सोचती हूँ, मेरा मन बेचैन हो जाता है.”

“ओह, सही जा रही हो बेबी डॉल…. मैं देखना या फिर कम से कम इस बारे में सुनना तो जरूर चाहूंगा. मेरी तरफ से तुम्हें खुली छूट है मिनी.”

जैसे ही उन्होंने घर का दरवाजा खोला, कोमल सीढ़ियों से नीचे उतर रही थी. उसके चेहरे पर ऐसा की लुक था जैसे बिल्ली के दूध पीने के बाद का होता है.

रंगीला मुस्कराया और मिनी के कानों में फुसफुसाया, “मैं कोमल को उसके घर तक छोड के आता हूँ. अगर देर लगे तो तुम सो जाना प्लीज”

“रंगीला, क्या तुम कुछ नया शुरू करने वाले हो?” वो वापस फुसफुसाई.

“आज के दिन तो कुछ भी हो सकता है.”

“हाँ, आज के दिन तो सही में कुछ भी हो सकता है. खैर, बाद में मुझे पूरी कहानी सुनानी पड़ेगी”

“ओह.. जरूर”

जैसे जी कोमल नीचे उस तक पहुची, रंगीला ने उसके लिए दरवाजा खोला और बोला,

“क्या मैं इस खूबसूरत और जवान लडकी कोमल को उसके घर तक छोड़ दूँ?”

“ह्म्म्म जरूर मिस्टर वी.”

जैसे ही दरवाजा बंद हुआ. रंगीला ने अपना हाथ कोमल की पतली कमर में डाल दिया और कोमल को अपनी बाहों में खींच लिया. उसका जवान जिस्म एक पल में रंगीला के अनुभवी बदन से टकराया, उनके होठ आपस में मिले और दोनों के बीच का पहला और गहरा चुम्बन लिया गया. जैसे ही चुम्बन ख़त्म हुआ, रंगीला को ये बात अच्छी तरह से समझा आ गयी की कोमल अभी अभी चूत चाट कर आयी है. चूँकि कोमल पिछले ३-४ घंटे से उसकी बेटी डॉली के साथ थी, रंगीला को ये समझने में देर नहीं लगी की उसके होठों पर किसकी चूत का रस लगा हुआ है.

 
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