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मिस्टर & मिसेस पटेल (माँ-बेटा:-एक सच्ची घटना) complete

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अपडेट 59

सुबह जब हमारी नीद टुटी तब कुछ पैसेंजर आलरेडी उतार गए पिछ्ली स्टेशन मे.

इस लिए कमरा थोड़ा खली था.

केवल एक मिडिल एज्ड अंकल हमारे सामने वाले बर्थ में थे.

सुबह ट्रैन में चाय देकर गया.

गरम पाणी का फ्लास्क और पैकेट शुगर, मिल्क पाउडर और ती बैग .

मैं चाय बनाना शुरु किया तो माँ मुझे धीरे से बोली" मुझे दीजिये.

मैं बनाती हु"ओर माँ चाय बनाने लगी.

मेरी पत्नी बनने के बाद भी वह बचपन से मुझे जैसी केयर और प्यार करते आयी,

वैसे ही मुझे केयर और प्यार कर रही है

और ज़िन्दगी भर करेगी मुझे पता है.

मैं उनका पति बनने के बाद भी उनको वह रेस्पेक्ट और केयर करूँगा ज़िन्दगी भर,

जैसा में माँ को करता था.

हम चाय पीते पीते एक दूसरे को देख के स्माइल कर रहे थे.

यह है वह पहली सुबह जो हर कपल की लाइफ में बस एक बार आती है.

शादी के अगले दिन की सुबह.

हम इन पलों को हमारे दिल में कैद करते रहे

एक दूसरे को प्यार से देखते देखते.

हमारे सामने वाले अंकल हम से परिचय किये और जब उनको पता चला की हम नई नई शादी करके मेरा जॉब की जगह पे जा रहा है,

तब वह हमे बताये की हमारी जोड़ी बहुत खूबसूरत जोड़ी बना है.

हमे पूछा हमारा यह लव मैरिज है या अरेंज्ड मैरेज.

यह सुनके माँ और में दोनों कुछ पल खामोश रहै.

उनको कैसे हमारे रिश्ते के बारे में बताये.

तो में तुरंत बोला की अरेंज मैरिज है,

तब वह आदमी बोला की बहुत कम लोगों के अंदर अरेंज मैरिज में इतना प्यार झलक ता है

जितना हमारे जोड़ी को देख के लग रहा है.

मैं और माँ इस बात को सुनके एक दूसरे को देखा और मन में सोचे की उस्को यह नहीं पता की हम

कैसे हमारे नसीब के फेरे आज ऐसे एक कपल बने है जो कपल दुनियामे ढूँढ़ने में शायद मिलेगा भी नहीं

और हमारे बीच जो प्यार है वह दुनियाका सब से ज़ादा प्यार का बंधन है.

टैक्सी आके घरके एक दम सामने रुक गई मैं उतरके घूम के जाकर माँ की तरफ का डोर खोला और माँ उतरी.

फिर हम अपना सामान वगेरा नीचे उतारके ड्राइवर को टैक्सी फेर मिटा दिया और वह टैक्सी लेके चला गया माँ घर के आस पास इधर उधर की तरफ देख रही थी.

मैं उनको देखते देखते दो सूटकेस खिचके डोर के पास लेकर गया.

और माँ तभी तीसरा सूटकेस को लेन की कोशिश कर रही है.

मैं उनको मना किया और जाकर एक हाथ में वह सूटकेस खीचते हुए दूसरी हाथ से आराम से माँ का हाथ पकड़के धीरे से बोला.

चलो..मा बस एक प्यारी सी स्माइल देकर शर्मा के नज़र झुका के मेरे साथ चल्ने लगी.

और में उनका हाथ पकड़के डोर के तरफ जाने लगा.

हम कोई कुछ बोल नहीं रहे है.

केवल जब भी नज़र मिल रहा है तभी एक दूसरे को मुस्कुराके अपना प्यार जताने लगे.

माँ जब चल रही थी उनके पायल की मीठी आवाज़ होने लगी.

मैंने की निकाल के डोर खोला.

फिर मेंने माँ की तरफ देखा.

और धीरे से बोला.

नयी बहु के घर में कदम रखने से पहले यहाँ उनका स्वागत करने के लिए तो कोई नहीं है..

फिर में रुक गया. माँ मेरे तरफ देखके मीठी मीठी हस् रही है.

और फिर घूम के खुद ही अंदर जाने के लिए कदम उठाने गयी की में उनको रोका.

“रुक जाइये..”

मा मेरी तरफ नज़र घुमायी तो में उनके आँखों में आंख दाल के उनके मन के अंदर जाकर उनके मन को छुना चाहा.

और फिर फुसफुसाकर कहा

“कोई नहीं तो क्या हुआ, मैं स्वागत करूँगा..”

माँ अस्चर्य नज़र से मुझे देखते रही और फिर हास् के मेरे पागलपन को साथ देणे लगी.

वह हस्ते ही उनके मोती जैसे दाँत उनके गुलाबी होठो के अंदर से दिखे और वह बहुत खूबसूरत लगने लगी.

मेरा दिल बस पिघल के उनके कदमो के नीचे आगया.

मै आगे बढ़ के घर के अंदर गया और घूम के माँ के सामने खड़ा हो गया.

माँ समझ नहीं पा रही है की में क्या करने जा रहा हु.

कैसे स्वागत करना चाहता हु.

मैं तभी मेरे राईट घुटने को फ्लोर पे टीकाकर, लेफ्ट पैर को फोल्ड करके वहि दरवाजे के सामने बैठ गया.

फिर मेरे राईट हैंड को आगे ले जाकर हथेली की उल्टी साइड को फ्लोर टच करवाके रख दिया और लेफ्ट हैंड को ऊपर माँ के तरफ बढा दिया.

मैं आँखों में प्यार लेकर स्माइल करते हुए उनको देखा.

वह बस उनकी बडी बडी आँखों से एक सरप्राइज्ड लुक लेकर मुझे देखे जा रही है.

मैं कुछ नहीं बोल रहा था.

तभी अचानक माँ की आँखे नम हो गई और वह होठो पे एक प्यार भरी स्माइल लेकर वह बस मुझे ऐसे ही देखे जा रही थी.

धीरे धीरे उनकी आंखे गिली होने लगी और उनके होठ काँपने लगे.

मुझे समझ में आगया की उनके मन में भावनाओं की बारिश शुरु हो गई है.

और बाहर उनकी नज़र और होठो पर काँपती हुई स्माइल मुझे यह बता रही है.

मैं तभी धीरे एक दम प्यार से बोला.

”आओ”

वह उनके राईट हैंड को उठाके उनके होठ के पास ले जाकर होठ के ऊपर रख के उनके ख़ुशी के रोने को छुपा ने की कोशिश करने लगी.

पर मेरी नज़रों से वह चीज़ छुपा नहीं पाई.

मैं एक चौड़ी स्माइल देकर सिचुएशन को सहज करके फिरसे बोला.

“आओ”

तभी माँ ने उसी राईट हैंड को मेरे लेफ्ट हैंड की तरफ बढा दिया और मेरा हाथ पकड़ लिया.

उनके उस स्पर्श में जो प्यार था,

वह में ज़िन्दगी भर नहीं भूल सकता.

मैंने उनका हाथ पकड़ लिया और माँ तभी उनकी स्लिपर से अपने दोनों पैर निकाल के लेफ्ट पैर को आगे बढा के मेरी राईट हथेली के ऊपर रख दिया.

मैं इस तरह उनके ज़िन्दगी में कभी भी उनके कदमों के नीचे कोई काँटा आने नहीं दूँगा.

हमेशा मेरे प्यार से उनका वह रास्ता गुलाब की पंखुड़ी से भर दूँगा.

यह कसम खाकर उनका घर के अंदर स्वागत किया.

माँ घर के अंदर आते ही में खड़ा हो गया. और उनका हाथ छोड़ दिया.

माँ तभी भी मुझे देखे जा रही है एक अद्भुत प्यार की नज़र से.

मैं उनको इजी फील करवाने के लिए हसकर उनको बोला.

”वेलकम मिसेस मंजु हीतेश पटेल”.

मेरे बोलने के इस ढंग से वह बस उस गिली आँखों से हस पड़ी और अपनी नज़र नीचे झुका ली.
 
अपडेट 60

मैं बस बाहर जाकर सारे लगेज अंदर लाया और डोर बंध कर दिया.

येही है आज से हमारा घर, हमारा संसार.

उनके पति का घर है यह.

माँ मुझे यह सब करते हुए देख रही थी.

वह और कुछ नहीं देख रही है, केवल साइड में खड़े होकर मेरे ऊपर नज़र टिकाके रखे है.

वह भी मेरी इस तरह अदायें देखते हुए मुझे नये तरह से अविस्कार कर रही होगी.

और शायद उसी लिए वह भी थोड़ा आश्चर्यचकित है और मन में एक अद्भुत आनंद की अनुभुति से उनके अंदर भी एक तूफ़ान चल रहा होगा.

मैं उनसे नज़र मिलाकर स्माइल दिया.

और फिर धीरे कदमों में उनके पास गया.

अब हमारी नज़र टीका हुआ है और एक दूसरे को नये तरह से अविस्कार के ख़ुशी से हम दोनों एक दूसरे के प्यार में खो रहे है.

मैं उनके एकदम पास गया.

वह अभी भी उन बड़े बड़े आँखों से प्यार लेकर मुझे बस देखते रहि.

मैं मन में हिम्मत लेकर मेरा हाथ बढाके उनके दोनों कंधे पक़डे.

और उनको मेरी तरफ खिचके मेरी बाँहों में भर लिया.

माँ ने कोई विरोध नहीं कीया और वह भी उनके शरीर को मेरे शरीर के साथ मिलाकर मुझे कसके पकड़ ली.

वह अपने सर को मेरे छाती के ऊपर रख के उनके दोनों हाथ मेरा पीछे ले जाकर मेरी पीठ को पकड़ के रखी है.

मैंने भी मेरे दोनों हाथ उनके पीठ के ऊपर ले जाकर उनको मेरे शरीर के साथ कसके पकड़के रखा है.

हम एक दूसरे की दिल की तेज धड़कनें मेहसुस करने लगे.

हम कुछ वक़्त ऐसे ही एक दूसरे को बाँहों में भरके फील करते रहे और हमारी सांसे तेज होने लगी.

मैं धिरे से उनके कांन के पास मेरे होठ ले जाकर बोला.

“आई लव यु”.

माँ बस मेरी बाँहों में पिघलते पिघलते धीरे धीरे बोलि.

“आई लव यु टू”.

हम एक दूसरे को कसके एक दूसरे के शरीर के साथ मिलाने लगे. मैं उनके नरम बोब्स को मेरे छाती पे मेहसुस करने लगा. और मेरा पेनिस मेरे जीन्स के अंदर धीरे धीरे सख्त होने लगा. हम एक दूसरे की पीठ को धीरे धीरे सेहलाने लगे. मैं तभी फुसफुसाकर उनके कांन में बोला

"अब टाइम आया की नहीं?

माँ ने शर्मा के मेरे छाती में अपना चेहरा छुपाया और फुसफुसाकर कहा.

“कौनसा”?.

मैने मेरे शरीर के हर कोने में उनके शरीर को मेहसुस करते हुए कहा

"तुम हमेशा हर चीज़ के लिए बोलती थी.. टाइम आने दीजिये..टाइम आने दीजिये...अभी भी वह टाइम नहीं आया क्या?

माँ ने इसका कोई जवाब न देकर मुझे बस और कसके पकड़के अपना शर्माया हुआ चेहरा छुपा रही है.

मैं मेरी आवाज़ में बहुत सारा प्यार और पैशन लेकर कहा

"बोलो ना मंजु"

मा कुछ पल कुछ न बोलके ऐसे ही मुझे पकड़के खड़ी रहि.

फिर कुछ पल बाद वह अपना चेहरा मेरे छाती से थोड़ा अलग कीया.

उनके पूरे शरीर में एक हल्का सा कम्पन हो रहा है और में उसको मेहसुस कर पा रहा हु.

मेरे भी अंदर एक तूफ़ान चल रहा है और मेरा पेनिस अब फुलकर एक दम बड़ा होने लगा.

फिर माँ अपना चेहरा धीरे धीरे ऊपर की तरफ करने लगी.

उनकी सांस तेज हो रही है. आँख बंध करके रखी है.

मैं केवल प्यार से उनको देखे जा रहा हु.

मैं भी उत्तेजना के कारन गरम होने लगा.

माँने अपना चेहरा रुक रुक के ऊपर किया.

उनके होठ काँप रहे है.

गुलाबी पतले होठो में प्यार और शर्म लगा हुआ है.

मेरे सवाल का कोई जवाब न देकर वह बस ऐसे अपना चेहरा ऊपर करके उनके होठ मुझे समर्पण करने के लिए खड़ी है.

मेरे छाती में जैसे कोई हज़ारो हथोडे पीट रहा है.

खूंन दौड रहा है और पेनिस में जाकर जमा होकर उसको और सख्त और खड़ा कर दिया.

पूर्ण समर्पित भाव से मेरे सामने खड़ी मेरी माँ,

जो की अब मेरी शादी कि हुई बीवी है,

उनके पीठ में अपने हाथ से उनको प्यार से पकड़ के मेरे होठो को धीरे धीरे उनके होठो की तरफ झुका ने लगा.

माँ आंख मूंद के रखी है, मेरा चेहरा उनके चेहरे के एकदम पास आते ही हम एक दूसरे की गरम सांस एक दूसरे के चेहरे पे मेहसुस करने लगे.

मेरे भी अंदर का कम्पन मुझे और आगे बढ्ने के लिए मजबूर किया और में मेरे होठ को माँ के होठ के ऊपर मिला दिया.

माँ का होठ टच होते ही उनका पूरा बदन एकदम काँप उठा.

मेरे शरीर में लिप्त हुआ , मेरे हाथ में पकडे हुये उनके नरम और हलके शरीर मे मैं वह कम्पन महसुस किया.

मेरे भी अंदर तूफ़ान सा चलने लगा.

मैं मेरा मुह हल्का सा खोला और माँ के दोनों होठो को हलके से एक बार चुस लिया.

मेरे मुह का गिला पण उनके होठ पे टच हुआ और वह भी धीरे से अपना मुह हल्का सा खोलि.

मैं जैसे दोबारा मेरे होठ उनके ऊपर रखे तो हम एक दूसरे के एक एक होठ को अपने अपने होठो के बीच पाया और धीरे धीरे उसको प्यार से हल्का हल्का चुसने लगा .

हम एक दूसरे के होठो को ऐसे चुस रहे है जैसे की हम मख़्खन की बनी हुई कोई चीज़ पे होठ लगाके चुस रहे है

यह ध्यान में रख के की उस मख़्खन की चीज़ का साइज शेप बरक़रार रख के चुसना है.

जोर से चूसूंगा तो वह पूरा पिघलके मुह में आजायेगा नहीं तो डैमेज होकर उनका शेप बिगड जाएगा.

वैसी सावधानी से हम नये नये लवर्स के जैसे एक दूसरे के होठ को धीरे धीरे चुसके हमारे प्यार को जताने लगे.

माँ का हाथ अब मेरी पीठ से धीरे धीरे ऊपर आकर मेरा कन्धा पकड़ी है.

मैं मेरा लेफ्ट हाथ से उनके पीठ के ऊपर सहलाने लगा.

और राईट हाथ से उनकी कमर को पकड़ के हमारा बैलेंस बनाके रखा है.

मैं धीरे धीरे मेरा मुह और खोलकर उनका पूर होठ मेरे मुह में लेने की कोशिश किया और मेरा जीब से उनके होठ चाटने लगा.

वह भी उनका मुह खोल के मुझे सहज कर दे रही है. माँ जिस तरह मेरे होंटो को किस कर रही थी वो पल मेरे लाइफ के बेस्ट पलो में से एक था

किस मतलब बस होंटो से होंट मिला दो , या सक करो , या जोर से दबा लो ऐसा नहीं होता

आज माँ मुझे जो किस कर रही है उसकी कल्पना में सपनो में भी नहीं कर सकता था

सपना तो अपने हाथों में होता है , जैसे चाहो इमेजिन कर सकते हो जैसे चाहे बेस्ट बना सकते हो , फिर भी सपने माँ के किस के सामने कुछ नहीं थे

मै तो स्टेचू बन गया

किस में इतना प्यार हो सकता है कभी सोचा नहीं था

अगर माँ के किस में इतना जादू है तो आगे आगे तो में सच मच स्वर्ग में न चला जाऊ

माँ के अंदर कितना प्यार छुपा है ये आज देखने को मिला

भले इतने सालो बाद उनको ये मोक्का मिला था फिर भी कोही जल्दबाज़ी नहीं थी किस करने में

आभी भी जिस सॉफ्टनेस से किस कर रही थी उस से वो किसी की भी जान ले लेंगी

जांन लेवा किस था

मेरा दिल तो इस किस को फील करने के लिये अपनी आंखे बंद करने को बोल रहा था

माँ के होंट मेरे होंटो पे मक्खन जैसे मूव हो रहे थे हम दोनों जिस तरह किस करने लगे उस से लग रहा था जैसे हम २ जिस्म एक जान हो

हमारी आत्मा आज एक दूसरे को प्यार कर रही है ऐसा लग रहा था

हमारी आत्माओ का मिलन हो रहा था मैंने मेरी जबान एकबार उनके मुह के अंदर डाली.

उनकी जबान से टकराया, फिर माँ ने अपनी जबान मेरे मुह सरकाई मैने उनकी जबान अपने होठो से पकड़ कर चुसना चालू किया

आह क्या स्वाद था जैसे शहद लगा हो

उनकी जबान बहोत देर चुसने के बाद अपनी जबान उनके मुह में डाली अब माँ की बारी थी माँ भी मेरी जबान पुरी तरह मग्न होकर चुसने लगी

फिर मैं अपनी जीभ निकालके उनके ऊपरवाले होठ को चुस्ने लगा.हमरा किस धीरे धीरे गहरा होते जा रहा है.

दोनों के हाथ के संचालन से एकदूसरे को पता चल रहा है की हम कितने उत्तेजित होगये है.

मेरे ज़िन्दगी का पहला किस है. वह भी अपनी माँ यानि की बीवी के साथ. माँ भी १८ साल बाद किसी पुरुष का स्पर्श पाकर धीरे धीरे मेरे बाँहों में पिघलते जा रही है. हमारे शरीर के बीच एक भी गैप नहीं जहाँ थोडी हवा भी रह पा रही.

दोनों का शरीर एक दूसरे से मिल गया.

मेरा पेनिस उनके शरीर में टकराके यह बताने की कोशिश कर रहा है की अब वह ज़ादा वक़्त ऐसे नहीं रहना चाहता है.

वह उनके पसन्दीदा जगह पे जाना चाहता है. माँ भी मेरा मन की चाहत को समझ रही है.

वह अब उनके तन मन उनके बेटे, जो की अब उनका पति है, उनके पास पूरा समर्पण करने के लिए तैयार हो रही है.

अचानक मोबाइल रिंग होने लगा.

हम बस एक दूसरे में खोये हुए थे तो पहले हम सुने नहि.

फिर थोडे टाइम बाद फ़ोन की घंटी हम दोनों को इस दुनिया में वापस लाई
 
अपडेट 61

नानी का फ़ोन था.मेरा ज़िन्दगी का पहला किस था और माँ के साथ हमारा पहला किस था.

हमे उस किस के जादू और उसकी सुखानुभूति से बाहर आने में थोड़ा वक़्त लग रहा था.

हमको मोबाइल की घंटी सुनाई तो दे रहा था पर फिर भी ऐसा लग रहा था की जैसे हम दोनों बहुत दूर कोई

और दुनिया में पहुच गए और दूसरी कोई दुनिया से कुछ आवाज़ हमारे पास तक पहुच रहा है.

हम दोनों ही बहुत बुरी तरह जुड़े हुए थे,

दोनों ही आँख मूंदे हुये थे.

दोनों ही एक तेज सांस के साथ साथ थोड़ा थोड़ा काँप रहे थे अंदर से.

दोनों ही एक दूसरे से कभी जुदा न होने की कसम से एक दूसरे को कसके पकडे हुए थे.

हमारी जबान और होठ के द्वारा हम हमारा प्यार जता भी रहे थे और एक दूसरे के प्यार को मेहसुस भी कर रहे थे.

मुझे माँ के उस गुलाबी नरम होठो से एक नशा होने जा रहा था.

हमे पहले शारीरिक स्पर्श से जो उत्तेजना हो रही थी,

उससे ज़ादा हमारे दिल में एक दूसरे के लिए जो प्यार है वह मेहसुस करना और उस प्यार को हमारे इस नये रिश्ते में स्थापन करने का प्रयास सुरु होगया था.

माँ कम्प्लीटली सरेंडर कर चुकी थी उनके बेटे के पास,

उनके पति के पास.

मैन माँ के होठो से मेरे होठो को जैसे अलग किया,

माँ आँख खोल के मेरे तरफ देखि.

उनके आँखों में एक प्यार की और प्यास का साया नज़र आया.

उनके चेहरे पे एक अनिन्द्य सुन्दर ख़ुशी का अभा छायी हुई है.

वह अभी भी मेरे दोनों कन्धों को अपने हाथो से पकड़ी हुई है.

मैं उनकी आंखों में देखते हुये,

मेरे एक हाथ से उनके पीठ को पकड़के बैलेंस रखते हुए में दूसरे हाथ से मेरे पॉकेट से मोबाइल निकाला.

तब माँ को समझ आया की में क्यों हमारे पहले प्यार की निशानी,

पहले चुम्बन को बीच में रोक दिया था.

वह कुछ सोच के खुद बखुद शर्मा गयी और एक बार मेरी तरफ देख के एक लाज की हसि हस्के नज़र झुका लि.

और अचानक झट से मुझसे अलग होकर उल्टी तरफ मुड के जाने लगी.

मैं मोबाइल स्क्रीन को देखके फिर से माँ को मेरे से दूर जाते हुए देखते देखते स्माइल करते हुए फ़ोन पे बोला" हेलो नानीजी... बोलिये”

मेरी बात सुनके उधर नानी हस् पडी और यहाँ माँ जाते जाते अचानक केवल अपने सर को पीछे की तरफ घुमाके मुझे देखि.

उनके उस आँखों में जो एक अद्भुत प्यार की झलक थी और उनके होठो को दबाके जो एक प्यारी मुस्कराहट देकर गयी,

वह में इस ज़िन्दगी में क्या, अगले सात जनम तक नहीं भूल पाऊंगा.

मेरे अंदर मेरी छाती में एक तरंग सा खेल गया और मेरी छाती जैसे हल्कि सी होने लगी. उनकी वह नज़र मेरे दिल में एक तीर मार के गयी.

मैं उनके जादू से निकल ने से पहले नानी उधर से हसके बोली

“अभी भी में तुम्हारी नानी बनके रहुं क्या?

इस बात से झट से में होश में आया और सिचुएशन को सँभालते हुए कहा

"नही नहि....अक्टुअली...."

बोलके में रुक गया. मैं क्या बोलने जारहा था और क्या बोलूँ यह सोचकर में थोड़ा टाइम कुछ नहीं बोल पा रहा था.

माँ मेरे से दूर जाकर खिड़की के पर्दे को हटा रही थी पर उनका ध्यान पूरा मेरे ऊपर है और में यह समझ पा रहा था.

और नानी के साथ मेरा इस तरह परिस्थिति में पड़ने से उनको मज़ा आने लगा.

मैं बस बात को घुमा के बोला

"हा....मम्मी बोलिये"

मुझे थोड़ा शर्म आ रहा था. माँ को देखा तो वह वैसे ही मुस्कराहट को अपने होठो पे दबा के खिड़की खोल ने की कोशिश कर रही है.

नानी उधर से बोली

"तुम लोग पहुच गए कया"

मै हसके बोला

" जी हाँ.....अभी अभी घर में एंट्री लिये"

मा के साथ किस करते हुए मेरे अंदर जो तूफ़ान चल रहा था, वह धीरे धीरे ठण्डा हो रहा था.

मेरा पेनिस जो एकदम सख्त होकर मेरे जीन्स के अंदर से माँ के पेट् को टच कर रहा था,

अब वह भी धीरे धीरे शांत होने लगा.

नानी उधर नाना को बता रही है की हम पहुच गये फिर नानी बोली

"जर्नी में कोई परेशानी तो नहीं हुआ न बेटा...सामान-वामान लेकर"

मैने उनको बताया की

"नहि.... ट्रेन भी टाइम पे थी, और आने में भी कोई तकलीफ नहीं हुई"

मैन गर्दन घुमाके माँ को देखा. माँ पूरे घर को घुर घुर के देख रही थी.

किचन, ड्राइंगरुम, डाइनिंग रूम और बेडरुम. उनके संसार को समझ रही थी.

मैं नानी को पुछा

"पापा क्या कर रहे है"?

नानी बोली "और पुछो मत बेटा"

नानी के गले में ऐसा एक आवाज़ था जो सुनकर मैंने तुरंत बोला "क्यूं ..क्या हुआ”?बोलकर में थोड़ा टर्न होकर माँ की तरफ देखा.

माँ बैडरूम के अंदर चली गई थी.

उनको दिखाइ नहीं दिया.

नानी उधर से बोली "सुबह घर पहुच के तुम लोगों से फ़ोन पे बात चित किया,तब तो ठीक थे, लेकिन ब्रेकफास्ट करने के बाद अचानक वह उलटी कर दीये” मैन नानी को पुछा"

अरे..डॉक्टर. को दिखाई की नहीं”? मेरे गले में एक ऐसा कंसर्नड था की में जब फिर से बैडरूम की तरफ देखा तो माँ हमारे बैडरूम के डोर के पास खड़ी होकर मुझे देख रही थि,

शायद हमारी बात को समझ ने की कोशिश कर रही थी.

मैं माँ की तरफ नज़र रखकर नानी को सुनता रहा “नहीं बेटा” डॉक्टर को तो दिखाया नहि,

थोड़ा रेस्ट करने के बाद अच्चा फील किया तो, डॉक्टर को नही बुलाया”. “पिछले तीन-चार दिन से तो तुम देख रहे हो,

कितना हेक्टिक जारहा था, इस्स लिए आज दिन भर रेस्ट किया,

तो अब काफी अच्चा फील कर रहे है”.

मेरे चेहरे पे नाना नानी , जो अब मेरे साँस और ससुर है,

उनके बारे में सोचके जो चिंता का अभास आया था,

माँ दूर से वो पढ़लि और नानी के साथ मेरी बातचीत को एक तरफ़ा सुनकर कुछ अंदाज़ किया.

इस लिए वह मुझे देखते हुये आँखों में एक सवाल लेकर शांत कदमो में मेरी तरफ आरही थी.

तब तक नानी बोलते रहि

“और मेरी बात कभी सुनते है क्या तुम्हारे नाना, कितनी बार मना किया की डॉक्टर सिगरेट पीनेसे मना किया है, लेकिन क्या..छुप छुप के पी लेते है”

नानी नाना के बारे में कम्प्लेन कर रही थी.

बात तो सही कह रही थी.

हम सब नाना की तबियत की चिंता करते है उनके बीमारी के बाद से.

नानी वह बातें करते करते इतना भावूक हो गयी थी की वह नाना को नाना ही सम्बोद्धित किया मेरे पास.

मुझे समझ में आरहा है की जिस तरह माँ और में पति पत्नी के इस नये रिश्ता में एक दूसरे को परिपूर्ण तरीके से अपनाने के लिए जैसे एक संघर्ष चल रहा है हमारे मन मैं, वैसे नाना नानी को भी इतना दिन के पुराने एक रिश्ते को बदल के दूसरी रिश्ते में आने में भी टाइम लग रहा है. इस लिए नाना को मेरा नाना ही बोल दिया.

मैं चुप होकर सब सुन रहा था.

तभी नानी बोली "माँ कहाँ है”? मैने माँ को देखते हुए कहा "ईधर ही है”.
 
अपडेट 62

माँ मेरे नज़्दीक आगयी थी.

उनके मांग में सिन्दूर और गले में मंगल सूत्र और मेहँदी के साथ

इस घर पे उनको एक नये रूप में घूमते फिरते देख के मेरे मन में एक

अद्भुत ख़ुशी की तरंग खेले जा रही है.

अब उनके चेहरे पे एक सवाल के साथ साथ जो उदबेग और कंसर्न नज़र आया,

उसी रूप में , एक आदर्ष बेटी के रूप म, एक प्यारी ममतामयी माँ के रूप म,

में बचपन से उनको देखते आ रहा हु.

आज मेरी पत्नी बनने के बाद भी उनके चेहरे पे वह अनुभुति का मिश्रण देख पा रहा हु.

इस में मेरा दिल उनके ऊपर और पिघलने लगा,

और नानी उधर से बोली

"माँ को फ़ोन दो ना ज़रा"

मैने हाथ बढाकर माँ को फ़ोन दिया.

वह बस उसी तरह एक चिंता के साथ चेहरा बनाके फ़ोन लि और बोली

"क्या हुआ मम्मी”?

बोलकर माँ नानी से बात करने लगी.

बात करते करते माँ खिड़की की तरफ जाने लगी.

बाहर अभी तक अँधेरा आया नहि.

गर्मी के सीजन में शाम को जो ऑरेंज कलर की लाइट छा जाती है चारों तरफ, वह लाइट खिड़की के पास खड़ी माँ के चहेरे पे गिऱ रही थी.

मैं दूर खड़ा रहके माँ के चेहरे पे बात करते करते धीरे धीरे एक राहत की अनुभुति आना वॉच कर रहा हु.

माँ की चेहरे पे वह रंगीन रौशनी के अभा से, एक अलौकिक सौंदर्य निखार ने लगा.

मैं दूर से माँ को नानी से बात करते हुए देख देखके मन ही मन में उनके लिए बहुत सारा प्यार और चाहत का एक तान, एक आकर्षण अनुभव कर रहा हु. उनकी साड़ी उनके शरीर में टाइट पहन ने के कारन उनके शरीर के सारे कर्व्स मेरी नज़र में आने लगे.

और में वहि खड़े खड़े उनके धीरे धीरे चिंता मुक्त होकर नानी से हास्के बात करने का वह परिबर्तन देख रहा हु.

और मेरे अंदर वह तूफ़ान फिर से सुरु हो रहा है.

माँ प्रोफाइल में खिड़की के पास खड़ी होकर बात करने के कारन उनके स्तन, पेट, पतली कमर और सूडोल हिप्स सब कुछ एक अपना रंग बनकर मेरे मन में एक अद्भुत सिरसिरानी का जनम दे रहे है.

मेरा पेनिस फिर से सख्त हो रहा है.

मै डोर के पास पड़े हमारे तीन सूटकेस को अंदर ले जाने के लिए वहां गया.

बड़ा वाला सूटकेस को खिचके में बेड रूम में लेकर गया.

फिर आकर दूसरी वाली को लेकर जा रहा था.

जाते जाते माँ को देखा.

वह अब फ़ोन में खुश होक बात कर रही है.

मैं बेड रूम में जाकर सूटकेस रखा.

जब में तीसरे और छोटे वाला सूटकेस को उठाया खीच के ले जाने के लिये,

तब माँ को बोलते हुये सुना

"ठीक है.........हां...देती हु”

बोलके मेरी तरफ घुमि और मुझे देख के एक स्माइल देकर मेरी तरफ आने लगी.

मैं कुछ न बोलकर उनको देख के स्माइल दिया और उनके बढ़ाये हुये हाथ से मोबाइल लेकर नानी को बोला

"जी मम्मी बोलिये"

ओर उधर से पापा की आवाज़ सुनाई दिया.

"नहीं बेटा..में बोल रहा हु"

मेरी बेवकूफ़ी से माँ मेरे तरफ देख के हस पडी.

मैं नानाजी से बात करना सुरु किया तो माँ मेरे हाथ से वह सूटकेस लेकर खुद ही बैडरूम की तरफ चलि गयी.

मैं बात करते करते घूमके उनको देखा.

और वह बैडरूम में दाखिल होने से पहले एकबार मेरी तरफ घुमी तो मेरे से नज़र मिल गई.

वह बस उस नज़र से मन में एक नशा लगने वाली एक स्माइल देकर अंदर चलि गयी.

हमारे बीच एक जो मोमेंट क्रिएट हो रहा था एक दूसरे को किस करते टाइम,

वह अब इस फ़ोन कोल के वजह से रुक गया

और जो मेंमरी और पैशन हममे चढ़ गया था वह अब मन में तो है, पर बाहर आने के लिए सही परिस्थिति पा नहीं रहा है.

शायद माँ ने उसी को याद दिलाकर एक शरारत मिली वह हसि मुझे देकर गयी.

मैं केवल फ़ोन कोल का अंत होने का इंतज़ार कर रहा था.

नानजी से थोडी बात होने के बाद में फ़ोन कट करके बैडरूम के तरफ चल पडा.

जैसे ही में डोर के पास पंहुचा तो देखा की माँ सूटकेस खोलकर सारे कपडे निकाल रही है और सब बेड के ऊपर सजाके रख रही है.

मुझे वहां जाते मेहसुस करके वह वैसे ही मिठी मिठी हसि होठो पे लाकर मुझे देखि.

वह झुक के मेरेवाले सूटकेस से कपड़े निकाल रही थी और फिर सीधा होकर बेड के ऊपर सब रख रही थी.

जैसे मुझे देखि तो बोली "इतने कपडे लेजाने की क्या जरुरत थी”?

मै क्या जवाब दुं, बस ऐसे ही मुस्कुराते रहा.

माँ फिर झुकि हुई पोजीशन पे रहकर कपडा निकालते निकालते बोली

"इन तीन सूटकेस के कपडो से तो यह अलमारी भर जाएगी"

मैन बोला "ठीक है..जरूरत पड़ेगी तो और एक खरीद लेंगे"

मै यहाँ से खड़े होक देख रहा हु की

माँ का मंगलसूत्र गले से नीचे की तरफ लटक रही है

और उनके ब्लाउज की फ्रंट कट से उनकी गोरी गोरी मुलायम डीप क्लीवेज नज़र रही है.

मेरे अंदर खुन दौडने लगा. मुझे मालूम है आज सही तरह से हमारी सुहागरात है.

हम पति पत्नी का इस प्यार का, इस रिश्ते को सम्पूर्ण करने के लिए आज रात पति पत्नी को एक होना है. मैं माँ को देखते देखते इसी सोच में था तभी माँ कुछ महसुस करके अपना सर ऊपर उठाके मुझे देख के बस आँखों की भाषा से पूछ्ने लगी

"क्य हुआ...क्या देख रहे है वहां खड़े खडे"

मुझे माँ को उस पोजीशन में उस अदाओ में देख के लगा की मेरे दिल में एक तीर चल गया.

मैं इसके जवाब में बस केवल हस दिया.

वह होंठो और आंखों में एक अद्भुत ख़ुशी लेकर मुझसे नज़र हटाकर काम करने लगी.

मुझे उनके स्तन का उपरी भाग और उनकी इस तरह अदायें देख के मन कर रहा है की

दौडके जाकर उनको अपनि बाँहों में भर लूँ और प्यार से उनके सारे बदन को चूम के बस केवल प्यार ही भर दुं. पर!!!
 
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दोस्तो मैं आप सब का बहुत आभारी हूं
 
अपडेट 63

मेरे मन की यह इच्छा पूरी करने के लिए जो सहजता और साहस की जरुरत है, वह अभी भी आने में थोडी झिझक है.

हम पति पत्नी बन गए है पर हमारे इतने दिन का माँ बेटे का रिश्ता था और वह अभी भी हमारे मन के एक दम डीप में है.

इस लिए न माँ , न में, कोई भी अभी भी सही तरह से एक दूसरे से फ्री नहीं हो पाए

एक दूसरे के पास मन की चाहत पूरी करने के लिए आगे नहीं बढ़ पारहे है.

मन चाह रहा है दोनों का.

बस एक सूक्ष्म लाइन इस वास्तव और उस चाहत को अलग करके रखी है.

हमे मालूम है, वक़्त ही सब कुछ ठीक करेंगा.

और हम दोनों उस वक़्त के बेसब्री से इंतज़ार में है.

मेरा गला सुख रहा था. अन्दर का छट पटाहट और बाहर उसको दबाकर रखना और फिर ऐसी परिस्थिति में आकर प्यास लग रही थी.

मैं वहां से किचन की तरफ गया.

अहमदाबाद जाने से पहले अक्वागार्ड का एक वाटर पूरिफिएर लगाया था. उसको स्टार्ट करके में सब खाली बोटल्स में पानी भर्ने लगा.

मैं सोच रहा था की क्या अद्भुत हमारा नसीब.

मैं २० साल में शादीशुधा बन गया.

हमारी शादी में न कोई गेस्ट, न कोई गिफ्ट, न कुछ गाना बजाना, कुछ भी नही हो पाया.

पर हम एक दूसरे को सच्चे दिल से प्यार करके इस रिश्ते में जुड़ गये दुनिया में सब से अलग यह शादी और अलग यह पहली शाम, पहली रात

मैं पाणी पिकर एक बोतल लेकर बैडरूम के तरफ चला. मैं जैसे ही रूम के डोर की तरफ पहुंचा, दूर से डोर के दोनों परदे की गैप से देखा की माँ खुली हुई अलमारी के दोनो दरवाजे पकड़ के चुप चाप खड़ी है. उनके बॉडी टेक्चर और प्रोफाइल फेस पे वह एक्सप्रेशन से मालूम पड़ रहा है की वह बहुत सरप्राइसड हुई है और साथ में एक ख़ुशी उनको छा रही है.

मैं वहां रुक गया और माँ को ऐसे देख के मेरे दिल में एक अनुभुति आया.

माँ ज़िन्दगी में पति के साथ संसार करने की असली ख़ुशी, सुख, कभी ठीक से पाई नहि. ज़िन्दगी में छोटी छोटी चीज़ें जो हमे ख़ुशी देती है, वह कभी पाई नहि.

आज ज़िन्दगी के इस मोड़ पे आकर अचानक सब कुछ नये तरह से पाकर खुद के अंदर ही सरप्रीसड हो रही है.

एक पुराने जीवन को अब एक नये जीवन के रूप में डालकर उसको फिर से जीने का जो मौका नसीब ने दिया है,

उसमे वह सच मच खुद को भाग्याशाली समझ रही है.

इस लिए अब छोटी छोटी चीज़ों से भी उनके अंदर का इमोशन उभार के बाहर आरहा है.

मैं खड़े खड़े मन में बोलते रहा की में ज़िन्दगी भर माँ को ऐसे ही ख़ुशी और आनंद देना चाहता हु.

ज़िन्दगी के ऐसे ही रंग में उनको रंगाकर रखना चाहता हु. मैं आगे बढ़ के रूम की तरफ गया. माँ विस्मय के साथ अलमारी के अंदर देख रही थी और जैसे ही मेरी प्रेजेंट घर के अंदर महसुस कि वह धीरे धीरे मुड़कर मुझे देखि.

मैं जानता हु की अलमारी के अंदर में उनके लिए बहुत सारी सारीज, ज्वेल्लरी वगेरा सारी चीज़ों को जो खरीदके रखा है,

माँ कभी कल्पना नहीं कि होगी की में ऐसा करूँगा उनके लिये.

शादी से पहले यहाँ घर में जो कुछ किया था सब फ़ोन पे बताया था.

पर में यह सब उनसे छुपके किया था.

और आज माँ वह सब देख के उनके प्रति मेरा जो प्यार है, उसमे वह धीरे धीरे बह जाने लगी.

और में आज उनको इस तरह खुश देख के मेरे अंदर और प्यार आने लगा.

माँ मुझे बिना पलक झपका के कुछ पल ऐसे देखि और फिर एक मिठी मुस्कान देकर मुझे उनके दिल की सारी अनुभुति को मेरे अंदर संचरित कर दि.

मै पाणी की बोतल को वहि टेबल पे रख के धीर कदमो से माँ की तरफ बढ्ने लगा.

माँ अलमारी के दोनों दरवाजे को दोनों हाथ से पकड़के मेरी तरफ सर घुमा के मुझे देखते हुए खड़ी है.

मैं उनके उस प्यार भरी मुस्कान का जवाब एक चौड़ी स्माइल से देते हुए उनके पास पहुंचा. उनको यह सरप्राइज देना चाहता था और वह सच हो गया.

मैं उनके पास पहुँचके उनके एकदम नज़्दीक खड़ा हो गया.

माँ अपने विस्मय को अपने खुद की मन की ख़ुशी से और शर्म से धक के एक अद्भुत प्यार भरी स्माइल देकर और दिल में तीर लगानेवाली एक नज़र देकर उनका चेहरा थोड़ा झुका ली.

मैं उनके पास एकदम नज़्दीक खड़ा हु.

हम कोई कुछ नहीं बोल रहे है. केवल इस पल को मेहसुस कर रहे है.

कुछ पल बाद मैंने उनके कान के पास मुह ले जाकर फुसफुसाकर पुछा

"तुम्हेँ पसंद नहीं आई"

वह धीरे धीरे मेरी तरफ नज़र घुमाकर आँखों में आंख डालकर होंटों पे ख़ुशी की मुस्कराहट रख के उनका सर एक अद्भुत प्यारे तरीके से हिलाकर धीरे से बोली

"बहुत"

फिर नज़र को थोड़ा दूसरी तरफ करके एक हल्की उदास आवाज़ से बॉली

"मैंने सपने में भी नहीं सोचा की.....मुझे ज़िन्दगी में कभी ऐसा प्यार मिलेंगा"

माँ यह बोलकर उनके अंदर के इमोशन को कण्ट्रोल करते हुए रुक गयी.

फिर खुद ही हस के वहि चुप होकर खड़ी रहि.

मैं मेहसुस किया की माँ इस तरह प्यार को ज़िन्दगी में फिर से पा कर, मेहसुस करके अंदर से पिघल रही है.

मैं देख रहा हु की माँ के लेफ्ट हैंड की इंडेक्स फिंगर अलमारी के डोर के ऊपर रब कर रही है.
 
अपडेट 64

मैं समझ गया माँ के अंदर एक अनजानी अनुभुति उनके शरीर में दौड रही है.

मैंने उनके पास रहकर मेरे सर को धीरे से थोड़ा आगे ले जाकर उनके सर को टच करवाया. माँ मेरे टच से अचानक काँप उठि. वह कम्पन उनके शरीर में इतनी प्रोमिनेंटली था की में अपनी ऑखों से वह देख पाया. मेरे अंदर वह चाहत , वह उत्तेजना फिर से आगया. मैं अपने सांस की गर्मी खुद मेहसुस कर रहा हु. अपने शरीर में जो खलबली मची है वह महसुस कर रहा हु.

मेरे पेनिस के शख्त होने का ताज़ा इशारा में मेहसुस कर रहा हु. मैं धीरे धीरे उनके बालों में मेरा नाक टच करवाया और उनके बालों की खुशबु स्वास भरके लेने लगा. मैंने दोनों हाथ धीरे धीरे उठाके उनकी कमर को पकड़ा और मेरा लेफ्ट हैंड उनके पेट् की मुलायम स्किन के ऊपर टच हो गयी. माँ की सांस तेज हो रही है.

मैं मेरे पैर को थोड़ा आगे ले जाकर उनके शरीर के साइड से मेरा शरीर टच करवा दिया.

मैं उनके बालों में दो तीन बार नाक रगड के धीरे धीरे उनके लेफ्ट शोल्डर के ऊपर मेरे मुह को लेकर आया.

और जैसे ही मेरे होठो का उनकी गर्दन की मुलायम स्किन पे टच हुआ, वह एक गुदगुदी सी फील करने लगी.

और में मेरी नाक और होठ को उनके गोरी गोरी सुडौल गर्दन में एकबार रब करते ही वह झट से अपने शोल्डर को खीच लिया और जोर से हस् पडी. मैं उनकी कमर में दोनों हाथ का बंध लगाकर दोनों हाथ को लॉक करके कसके पकड़ा हुआ है. इस लिए वह मेरे से दूर जा तो नहीं पाई पर हस्ते हस्ते गुदगुदी फील करते करते बोली

"आरे..क्या कर रहे है...छोड़िये....मुझे बहुत काम करना है अभी"

मै मेरे होठ और नाक से उनकी स्किन के ऊपर रब करना बंद करके बस उनको चुपचाप पकड़के खड़ा हु.

वह भी अब शांत हो गयी.

पर हमारे दोनों की सांस तेज बह रही है. मेरे जीन्स के अंदर का पेनिस जीन्स फाड़ के बाहर आना चाह रहा है.

फिर भी में उनकी इच्छा को सम्मान देते हुए उनके साथ और बदमाशी नहि किया.

हम ऐसे कुछ पल एक दूसरे से लिपट के खड़े रहने के बाद माँ धीरे से बोली

"छोडिये ना...मुहे अब काम करने दिजिये"

मै समझ गया माँ अभी यह सब करना नहीं चाह रही है. लेकिन वह चाहती है.

मैं अंदर ख़ुशी से भर गया.

मैं उनको मेरी बाँहों से मुक्त करके उनके पास में ही खड़ा हु.

माँ मेरे हाथ के बंधन से मुक्त होकर तुरंत वहां से जाने लगी और जाते जाते मेरे तरफ देख के बोली की

"चलिये फ़टाफ़ट जाइये...और मार्किट से सामान वगेरा लेकर आइये"

बोलकर माँ फिर से खुली हुई सूटकेस के पास पहुच गयी और कपडा वैगेरा समेट्ने लगी.

मैं समझ नहीं पाया माँ क्या लाने को कहि. मैंने माँ को पुछा

"क्या लेकर आऊँ?"

माँ मेरी तरफ देख के मेरे न समझने की हालत देख के खुद हस् पडी. और मुझे देखते हुए बोली

"रात को डिनर नहीं करना है"

मै बोला "तोह उनके लिए मार्किट से क्या लाना,मैं होटल से खाना मँगवाता हु"

माँ काम करते करते रुक गयी और मुझे देखते रहि. फिर नज़र हटके काम करना सुरु करती है और वैसे काम करते करते बोली ”ओह.. मैं बनाउ तो मेरे हाथ का खाना पसंद नहीं आयेगा"

माँ के गले में एक ऐसा टच था की में अंदर से काँप गया.

मैं उनको हर पल खुश देखना चाहता हु,

उनकी हर इच्छा को में आदेश मानकर पूरा करना चाहता हु,

में इस परिस्थिति को सहज करने के लिए हस पड़ा और तुरंत बोला

"दुनियाके सारे ५ स्टार होटल का खाना भी तुम्हारे हाथ का बना हुआ खाने के पास फिका है"

माँ झट से मुड़के मुझे देखि और हस् पडी.

फिर बोली

"तोह जाईये. सामान लेकर आइये और में तब तक यह सब समेट के रख देती हु”.

मै उनकी तरफ देख के स्माइल कर रहा हु

और वह मुझे देख के हासके फिर से काम पे ध्यान दी. मैं उनको इस तरह एक नये रूप में, नयी दुल्हन के रूप में,

मेरी बीवी की रूप में देख के मन ही मन एक ख़ुशी के सागर में बह गया

और फिर याद आया की अरे आज रात तो हमारी सुहाग रात है.

यहाँ कोई नहीं जो इस सुहागरात में नये दूल्हा दुल्हन के लिए सब कुछ सजाकर के देंगे.

यहाँ केवल हम दोनों है.

मैं तुरंत सोच लिया की हमारी सुहागरात को और सुन्दर और खूबसूरत तरीके से सजाकर मनाने के लिए मुझे बहुत कुछ लाना भी है.

मैं तुरंत माँ को एक झलक देखकर वहां से निकल गया मार्किट जाने के लिये.
 
अपडेट 64

बाहर अँधेरा हो गया.

फिर भी आसमान मे मैं उजाला देख पा रहा हु.

स्ट्रीट लाइट जल रही है.

चारों तरफ बिजली की रौशनी छा गयी है. फिर भी नेचर की अद्भुत महिमा से आसमान अभी भी उजाले जैसा है.

गर्मी के टाइम ऐसे ही कुछ कुछ शाम होती है, जहाँ एक अद्भुत रोशनाई से चारों दिशाएं भर जाती है. और तब एक ऐसी अनुभुति मन के अंदर आती है जो कभी किसी भी परिस्थिति में मन को वैसा फील नहीं करवाती है.

कुछ खुशी, कुछ ग़म मिलकर वह अनुभुति हम को सब के बीच में रहकर भी हमे सब से अलग कर देती है..कुछ पलों के लिये.

मैं आसमान की तरफ से नज़र हटा के नीचे लाया तो एक साईकल रिक्शा मेरे सामने तब तक आ गया था.

मैं उसमे चढ़के बाजार की तरफ जाते जाते सोचा..क्या अद्भुत इस दुनिया का नियम.

हमारे पास कितनी सारी मटेरिअलिस्टिक चीज़ें होती है.

हम एक चीज़ देकर उसी के बराबर तोलमोल के दूसरी चीज़ पाते है.

पैसा सब के पास समान तरीके से नहीं है. इस लिए बहुत कुछ चीज़ें तोलमोल ने के चक्कर में ज़िन्दगी में अधुरी रह जाती है.

लेकिन हमारे पास एक कारख़ाना है,

जहाँ हम हमारी मर्ज़ी के माफ़िक जो चाहे जितना चाहे कुछ चीज़ उतना पा सकते है.

और उनके दम पर हमे बहुत कुछ मिल सकता है.

हा..हमारा मन. हमारा मन एक ऐसी चीज़ों का कारख़ाना है

जहाँ से हमे जितना चाहे ईमोशन, पैशन, लव, लॉयलटी, आनेस्टी मिल सकती है.

और उस चीज़ के बलबुते से हम बहुत कुछ मन पसंद, मन चाहे चीज़ पा सकते है, और नेचर उसको पाने में आपको सहयोग देता है.

मेरा माँ के प्रति प्यार ऐसा ही एक बलिष्ट नमुना.

मैं उनको शायद जाने-अनजाने में इतना प्यार कर बैठा था,

इतना चाहने लगा था की आज ज़िन्दगी के इस मोड़ पे हम एक साथ हो गये

माँ भी मन से शायद अनजाने में ऐसाही कुछ चाही होगी,

इस कारन वह आज अपने बेटे की ज़िन्दगी में हमेशा के लिए उसकी पत्नी बनके आगयी.

एक अदृश्य धागे से हमारा मन बंध गया था

और अब हम इस समज में एक नये रिश्ते में जुड़कर, एक नयी ज़िन्दगी जीने की शुरुआत कर दिया.

आज हमारे ज़िंदगीका वह स्पेशल दिन है, जो हर कपल, हर पति पत्नी के जीवन में एक बार आता है.

और इस अनोखे पल को में स्पेशल,

मेरी माँ के लिये, मेरी बीवी के लिए बहुत स्पेशल बनना चाहता हु.

जब हमारे बाल ग्रे हो जायेंगे, जब हम सारी चीज़ें बोलने से ज़ादा मेहसुस करेंगे, हमारे पोता पोती आजु-बाजु घूमते रहेंगे,

तब बालकनी में ऐसे ही एक शाम को हाथ में हाथ रखके बैठ्कर,

आसमान की तरफ देखते हुए इस पल को, इस दिन को याद करके कुछ ख़ुशी मेहसुस करेंगे.

माँ के साथ घरमे जो जो चीज़ें लेने के लिए डिस्कुस किया था,

वह सब सारा सामान में ले लिया.

और में माँ को न बताकर एक चीज़ लिया. बहुत सारे गुलाब के फूल और गुलाब की पंखुड़िया. बाकि सब सामान के साथ फूलों का भी एक बड़ा पैकेट बनाया और रिक्शा लेकर घर वापस आगया.

कालिंग बेल्ल बजाते ही माँ दरवाजा खोल दि. माँ को देख के मेरी छाती में छनछन करके एक सिहरण खेल गई.

यह माँ का और एक रूप जो आज पहली बार देखने को मिला.

माँ स्माइल करके मुझे देख रही थी. उनके बालों को एकट्ठा करके ऊपर की तरफ उठाके सरके ऊपर एक काजुअल जुड़ा बना हुआ है.

मांग में सिंदुर का लाल रंग जलजल कर रहा है. गले में मंगल सूत्र लटक के उसकी लॉकेट उनके मुलायम और डीप क्लीवेज के पास पड़ी हुई है. और उनके कंधो में एक टॉवल रखी हुई है.

मुझे एक झलक देख के पता चल गया की वह नहाने के लिए जा रही थी.

एक तो इतना गरमि, दूसरी यह है की कल से हम ट्रैन में थे. आज दिन भर नहाने का मौका नहीं मिला.

इस लिए अब वह नहाने के लिए तैयार हो रही थी.

लेकिन उनके इस रूप को एक झलक देख के मेरा मन ख़ुशी से पिघल रहा था और मेरा पेनिस सख्त होकर फुदक ने लगा.

वह बहुत ज़ादा सेक्सी लग रही थी.

उनके वह साज, वह अदायें और यह परिस्थितियां मुझे उनकी तरफ खींच रहा था और अंदर से बहुत आर्गी फील हो रहा था.

मैं बस स्माइल कर रहा था.

मेरे दोनों हाथों में इतना सारा सामान देखकर माँ हस पड़ी और बोली

"अरे ..सारा बाजार उठाकर लेकर आये क्या"!!

बोलकर मेरे हाथ से कुछ पैकेट्स और कैर्री बैग्स लेने की कोशिश कि.

मैं ने सावधाणी से फूलों का पैकेट न देकर बाकि कुछ समान उनको दे दिया.

और अंदर आगया. माँ सामान लेकर किचन की तरफ चल पडी. मैं डोर बंध करके उनके पीछे पीछे जाने लगा.

उनके हर स्टेप में मुझे हल्का हल्का झूम झूम आवाज़ सुनाई देणे लगा.

वह जो पायल पहनी हुई है, यह उसकी आवाज़ है.

उनको पीछे से ऐसे आवाज़ करते जाती हुई, दिल में आग लगने वाली एप्पल शेप हिप्स की एक रदम में,

ऐसे अकर्षित करनेवाली एक अंदाज़ में जाते हुए देखकर मेरा दिल तेजी से धड़कने लगा.

माँ आज रात मेरी बाँहों में होगी.

मेरी बीवी बनकर मुझे पति के सारे अधिकार देगी.

उनके शरीर को हर जगह में छुने का,

हर कोने में किस करने का,

मेरी बाँहों में लेकर जी भर के प्यार करने का अधिकार देगी.

उनका तन पूरी तरह से उनके बेटे के पास,

उनके पति के पास समर्पण करेगि.

मैं इसके लिए बेताब हु और वह भी मन में इसके लिए इंतज़ार कर रही होगी जरुर.

माँ किचन में दाखिल होगयी.

और में किचन में घूसने से पहले फूलों का पैकेट वहि पड़ी हुई एक रैक के ऊपर रख दिया और किचन में घुस गया.
 
अपडेट 65

मैं मार्किट में था और माँ इसी बीच में हमारे सारे कपडे तो समेट के रख दिया है, ऊपर से घर की साफ़ सफाई कर दि है. किचन बिलकुल साफ़ नज़र आया.

कुछ बर्तन को धोकर वहि रखी है.

जो एक्स्ट्रा पैकेट और कुछ यूज़लेस सामान पड़ा था उसको एक अलग पैकेट में भरके वहि स्लैब के नीचे रखी हुई है.

मैं अकेला क्या करता कुछ नहि

और आज माँ के हाथ की छांया से पूरा घर चमक रहा है.

यह घर भी जैसे मेरी तरह उनके मालकिन के आने से उनके स्पर्श से खुश हो रहा है.

माँ पैकेट से कुछ कुछ सामान निकाल के बाहर रख रही है.

तभी काम करते करते मेरी तरफ एकबार देख के बोली

" देखिये तो....फ्रीज क्यों नहीं ऑन हो रही है"

मै मेरे हाथ का सामान सब वहि रख दिया था.

और वहां खड़ा होकर माँ को और इस घरको देख रहा था.

जब माँ बोली में तुरंत घूम के फ्रिज की तरफ जाते हुए बोल

"क्यूं...क्या हो गया"!!

ओर में फ्रिज के पास जाकर डोर खोला तो देखा की फ्रिज बंद है.

माँ तब पीछे से बोली

"क्या मालुम्....स्टेबिलाइजर में तो करंट है"

मै सीधा होकर उठके जैसे ही देखा तो में खुद हस पडा.

माँ मेरी तरफ देखने के लिए पीछे की तरफ सर घुमाकर होठो पे एक हल्का स्माइल लेकर पुछी

"आरे.... हस क्यों रहे है"

मैने ने फ्रिज का प्लग लगाते लगाते बोल

"जाने के दिन सुबह यह स्टेबीलाइजर वाला इसको रीप्लेस करके नया देकर गया,

और उनके बाद से फ्रिज चला नहि,

तभी से फ्रिज का प्लग खुला हुआ था"

मैने प्लग लगाकर डोर खोलतेही अंदर लाइट ऑन दिखते ही. में हास्के माँ की तरफ देखा. माँ तभी वहां से जाने के लिए कदम बढायी और बोली

"ठीक है उसको चल्ने दीजिये. मैं आकर सामान भरती हु”

मुझे मालूम है माँ नहाने जायेगी, फिर भी में अचानक बेवकुफ जैसा सवाल पुछा

"कहा जा रही हो"

मा मेरे पास आगयी थी. मुझे क्रॉस करके जाते जाते मेरी तरफ मुड़के देखते हुए स्माइल किया और कंधे से टॉवल निकाल के लेफ्ट हाथ के ऊपर रखि. फिर आँखों में एक अद्भुत अदायें और होठ पे एक प्यारी हसि को दबाते हुए धीरे से बोली

"नहाने"

ओर फिर हस्ते हुए मेरी तरफ एक अद्भुत नज़र फ़ेक के किचन से बाहर निकल गयी. माँ मेरे बेवकूफ़ सवाल में ऐसा एक आवाज़ महसुस किया था जिसके जवाब में वह शायद ऐसी अदायें और आँखों की भाषा से यह कह के गयी की

"अब में कहाँ जाउंगी, अब तो में तुम्हारी ही हो चुकी हु, हमेशा तुम्हारे पास ही रहुंगी".

मेरा मन उनके इस इशारे से झूम उठा. और देखा की माँ बाहर जाकर बेडरूम की तरफ चलि गयी. इस घर पे बेड रूम के साथ लगा हुआ बाथरूम बहुत बड़ा है.

दूसरा जो हॉल के साथ अटैच्ड है वह बाथरूम कम टॉयलेट तो है पर वह इतना छोटा है की उसको केवल टॉयलेट कहना ही ठीक होगा.

मैं बाहर आकर रैक से वह फूलों का पैकेट उठाया और बैडरूम के तरफ चला.

बेडरूम में आकर देखा माँ सारे कपडे वगेरा अलमारी में सजाके रख दिया और रूम को भी सजाके सामान वगेरा प्रॉपर अपने अपने जगह पे रख दिया था.

और मेरे मन के अंदर हथोड़ा पीठना शुरू होगया जब देखा की माँ हमारे लिए नयी ख़रीदी हुई डबल बेड के ऊपर एक नयी बेडकवर बिछाकर रखी है.

ऊपर की तरफ दोनों तकिया भी नयी कवर के साथ है.

यह बिस्तर आज से मेरा और माँ का है.

नीचे की तरफ माँ एक साड़ी और मेरा पाजामा और टी शर्ट रखी हुई है बेड के उपर.

मुझे नहाके पहन ने के लिए वह कपडा माँ निकाल के रखदी और खुद अपने ब्लाउज और पेटिकोट लेकर बाथ रूम में चलि गयी लेकिन साड़ी यहाँ रखके गयी.

बाथरूम से पानी गिरने का और माँ की बँगलेस का आवाज़ आरहा है. तभी मेरा मोबाइल रिंग होने लगा.

मैं पॉकेट से निकालके देखा की मेरा ऑफिस का कलीग का फोन है मैं रिसीव करके "हल्लो" बोला और बाहर जाने के लिए चल पडा.

मैं फूलों का पैकेट वहि साइड में कंप्यूटर टेबल के नीचे छुपा के रख के बैडरूम से बाहर आगया.

मेरा कलीग मेरे से सीनियर है.

वह पुछ रहा था कल से में ज्वाइन कर रहा हु की नहि.

मैं तीन दिन की छुट्टी और शनिवार हाफ डे लिया था.

कल से मुझे ज्वाइन करना था.

इस लिए वह कन्फर्म कर रहा है क्यों की उस हिसाबसे कल का प्लान ऑफ़ एक्शन बनेगा.

मैं बोला की हाँ में आज एम.पी आगया और कल से ऑफिस आऊंगा.

फिर थोड़ा ऑफिस के काम की बातें और इधर उधर की बातें करने के बाद हम "बाय” बोलके फ़ोन कट किये.

मैं अचानक इस ख़ुशी का एक अद्भुत नशा

लगनेवाले माहौल से ऑफिस के काम की दुनिया में चला गया था.
 
शाजिया जी कमेंट करने के लिए आपका बहोत धन्यवाद मैं अपडेट जल्दी जल्दी देने का प्रयास करूंगा और सिर्फ mr & mis patel यह कहानी अपने अंत की और बढ़ रही है इस कहानी के मूल लेखक ने यह कहानी बीच मे ही छोड़ दी थी आप जो आगे पढ़ेंगे वह इसका विस्तारित स्वरूप है जो आपको जरूर पसंद आयेगा भाषा शैली जरूर अलग होगी आप सब दोस्तो का तहे दिल से धन्यवाद

..........सलिल
 
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