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मिस्टर & मिसेस पटेल (माँ-बेटा:-एक सच्ची घटना) complete

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अपडेट 83

माँ मेरे मुंह को मेरी जिव्हा को अपनी जिव्हा से सहलाती है . मगर मैने एकदम से उसकी जिव्हा अपने होंठो में दबा ली है और चूसने लगा

“उन्न्न्गग्घ्ह्ह......” माँ मेरे मुंह में सिसकती है और वो अपनी कमर इधर उधर हिलाने लगती है . मैं यह समझकर कि माँ क्या चाहती है अपनी कमर को थोडा सा हिलाता डुलाता हु और फिर हमदोनों एकदम से सिसक उठते हैं . मेरा पेनिस अपनी माँ की योनि पर था और उससे निकल रहा हल्का हल्का रस उसकी योनि को भिगो रहा था . माँ मेरे चेहरे को दबाती है तो मैं उसकी जिव्हा को और भी जोर जोर से चुसने लगा . हम दोनों की कमर हल्की हल्की हिलना शुरु हो गई थी . जिससे मेरा पेनिस अब माँ की योनि को रगड़ रहा था .

“उफ्फ्फ्फफ्फ्फ़.....” माँ आह भरती है जब दोनों के होंठ सांस लेने के लिए जुड़े होते हैं .

“मंजू....” हितेश भी पेनिस पर योनि के स्पर्श से सिसक उठा था .

माँ मेरे चेहरे को झुकाती है और मेरे मुख में अपनी जिव्हा घुसेड़ देती है . मैं फिर से उनकी जिव्हा को चूसने लगता हु . हमदोनों अब एक दुसरे की कमर पर अपनी कमर खूब जोर जोर से रगड़ने लगे . मेरा पेनिस बार बार माँ की योनि को छूता है और उसे सहलाते हुए उस जगह में घूम रहा था . उधर माँ जो अब पूरी तरह गर्म हो चुकी थी इस बार मेरी जिव्हा को अपने होंठो में दबोच कर उसे चूसने लगती है .

“आआह्ह्ह्ह......हाएएएएईएएएएइइइइइ...” अचानक माँ को झटका लगता है और वो सिसक कर अपना चेहरा हटा लेती है .

“मंजू मेरी जान...उफफ्फ्फ्फ़...” मैं भी सिसक उठा . मेरा पेनिस उनकी कमर की रगड़ से अचानक योनि के होंठो को फैलाकर थोडा सा अन्दर घुस गया था . अगर थोड़ा सा जयादा जोर लगा होता तो शायद सुपाड़ा अन्दर चला जाता .

माँ योनि में पेनिस के एहसास को पाकर ठिठक गई थी . वो मेरे चेहरे की और देखती है जो उसी की और देख रहा था . माँ धीरे से हल्के से सर हिलाती है जैसे मेरे किसी सवाल का जवाब दे रही हो . मैं अपनी माँ के इशारे को पाकर वापिस उठ गया और माँ की जाँघों के बीच बैठ जाता हु . मैने माँ की टांगों को ऊपर उठाया तो तो माँ खुद अपनी टांगें घुटनों से मोड़कर खड़ी कर देती है .मैने माँ के घुटनों को पकड़ उन्हें पूरी तरह फैला दिया . उनकी योनि मेरे सामने थी उसका द्वार बंद था दोनो लिप्स अंदर की और थे किसी बच्ची की तरह उनकी योनि थी एकदम नाजुक छोटी सी . मैं अपने सामने अपनी माँ की योनि को देख रहा था . मैंने एक बार फिर से निगाह उठाकर माँ की और देखा . माँ फिर से सर हिलाकर मुझे इशारा करती है . मैने माँ की पतली सी कमर को कस कर थाम लिया और थोडा सा उचककर आगे को बढ़ . मेरा पेनिस योनि के बेहद करीब था .

मैं थोडा सा आगे को होता हु और मेरा पेनिस माँ की योनि के छेद पर फिट हो जाता है .

"ईइइइइइस्सस्ससह्ह्ह्हह्ह......" माँ होंठ काटते हुए आँख बंद करके सिसक पड़ती है .

मैन अपनी मंजू की कमर को थाम अपने अस्स आगे को धकेल दिए . मेरे पेनिस का सुपाड़ा योनि का मुंह हल्का सा खोलता हुआ और ऊपर को फिसल जाता है . हालाँकि पेनिस अन्दर नहीं घुसा था मगर हमदोनों उस स्पर्श मात्र से सिसक उठे थे . मैने फिर से कमर को थामकर पेनिस अन्दर धकेल दिया और इस बार सुपाड़ा योनि के छल्ले को खोलता हुआ हल्का सा अन्दर जाता है और फिर से फिसल कर बाहर आ जाता है . माँ की योनि रस से भीग चुकी थी इसीलिए पेनिस को सीधा रख पाना मुझ को बहुत मुश्किल लग रहा था .

मैने और जोर लगाया . मेरे पेनिस का सुपाड़ा जैसे ही योनि के छल्ले पर और बल डालता है वो खुलती चली जाती है .

माँ का बदन ऐंठने लगता है वो ऊपर को उठती है और अपने नम होंठ मेरे होंठो पर रख देती है .

“मंजू आह आह.....”मैं इस प्रहार को सहन नहीं कर पाया और मेरा पेनिस वीर्य की फुहारे छोड़ने लग गया….

 
दोस्तो आपको यह अपडेट कैसा लगा जरूर बताना अब यह स्टोरी अपने अंत की और बढ़ रही है आपका

........सलील
 
अपडेट 84

होश आया तो मुझे खुद पे बहुत ग्लानी हुई, ये क्या हो गया मेरे साथ्. माँ क्या सोचेगी मेरे बारे में. अपना उतरा हुआ चेहरा लिए में माँ की बगल में लेट गया. मेरी हिम्मत ही नहीं हो रही थी की में माँ से नजरें मिलाऊं. मुझे सब कुछ धूल में मिलता हुआ नजर आ रहा था

कहा इतनी बड़ी बात करी थी की अपनी माँ को दुनिया की सारी खुशियां दूंगा और आज पहली मिलन की रात को ये क्या हुआ.

अपणा चेहरा दूसरी तरफ कर लिया, अपने आप ही मेरी आँखों से ऑंसू बहने लगे.

पति पत्नी के प्रेम की पहली सीडी में में फ़िसल गया.

‘ओह ये क्या हुआ हीतेश को, उतेजना में खुद को संभाल नहीं पाया ... मुझे ही कुछ करना होगा बहुत से लोग पहली बार औरत के संपर्क में आ कर अपनी उतेजना को संभल नहीं पाते, हीतेश के साथ भी ऐसा हो गया लगता है उधर मुंह कर के रो रहे हैं’

‘सुनो!’

‘अरे सुणो ना’

‘उफ़ क्या ये छोटे बच्चों की तरह कर रहे हो हो जाता है इधर मेरी तरफ देखो देखो ऐसा करोगे तो में नाराज हो जाउंगी’

अब मुझे माँ की तरफ चेहरा घूमाना ही पड़ा मेरे चेहरे पे म्रेरे दिल का हाल लिखा हुआ था मेरी आँखें मेरी ग्लानी का प्रतिबिम्ब बनी हुई थी.

माँ ने मुझे अपनी बाँहों में भर लिया

ओह क्या सकून मिलता है ईनबाँहों में समा कर.

‘अपने आप को दोष मत दो

अत्यधिक उत्तेजना में ऐसा हो जाता है

मैने सर उठा कर माँ की आँखों में देखा वहा प्रेम के अलावा कुछ नहीं था वर्ना कोई और औरत होती तो आज मेरी शायद वो हालत हो जाती की जिंदगी में दुबारा सर न उठा पाता.

'परेशन मत होइये, ऐसा हो जाता है इसका मतलब ये नहीं है आप मुझे प्यार नही करते”

'में.....'

'कुछ मत सोचो - बस मेरी बाँहों में सो जाओ'

माँ प्यार से मेरे बालों को सहलाने लगी लेकिन अब नींद कहाँ आती आधी से ज्यादा रात तो बीत ही चुकी थी माँ दुखी न हो इस्लिये अपनी आँखें बंद कर ली और कल का इंतज़ार करने लगा कल मुझे ऑफिस भी जाना था

और यार लोग भी पीछे पडेंगे.

चांद सरकता रहा, रात गुज़रती रही और में माँ की बाँहों में आँखें बंद किये अपनी नकामयाबी पे खुद को कोस्ता रहा

मैंने सपने में भी नहीं सोचा था की माँ के साथ मेरी पहली रात का ये हस्र होगा.

माँ का दिल वाकई में बहुत बड़ा है

एक सिर्फ वो ही है जो मेरे दिल की हर धड़कन को समझती है जो मेरे हर दुःख को पहचान जाती है.

मुझे बोलने की जरुरत नहीं पड़ती वो मेरी आँखों की भाषा को समझ जाती है.

अब मुझे कल का इंतज़ार था कल जो शायद अंदर ही अंदर उसे भी इस बात का अफ़सोस हो रहा होगा

कितने सपने सजा के रखे होंगे माँ ने कितनी शिदत से इंतज़ार किया होगा इस रात का

कितने सालों के बाद आज माँ के तपते जिस्म को शान्ति मिलनि थी सब धरा रह गया

मैं अपने माँ को वो सुख नहीं दे पाया जिसका उसे अधिकार है

जिसको मैंने आग दिखा दी और जलता ही छोड़ दिया

एक डर सा बैठ गया है दिल में कहीं कल फिर आज जैसा न हो.

'ना जाने हीतेश क्या सोच रहा होगा अपने मन में सुहाग रात के कितने अरमान होते हैं कितनी तड़प होती है

कैसे पागलों की तरह मुझे चूम रहा था कैसे मेरे हर एक पोर का रस चुस्ने की कोशिश कर रहा था

आदमी जल्दी हीनभावना का शिकार हो जाता है

में जानती हु वो आज तक किसी और लड़की के पास नहीं गया मुझे उस पर बहुत फक्र है ये आखरी जंग बाकी रह गई है फिर हम दोनों एक हो जायेंगे मन से तो हैं ही तन से भी हो जायेंगे और फिर शुरू होगा हमारा अपना पारिवार

हमारी अपनी गृहस्थी लगता है कल मुझे ही पहल करनी पड़ेगी

अपने लज्जा को कुछ देर के लिए छुपा कर एक प्रियसी का रूप धरण करना पड़ेगा

मुझे ही कल हीतेश को उकसाना होगा कहीं हीनभावना के चक्कर में वो हार न मान जाए

मुझे ही अपने हीतेश को जितना होगा

ये रात बस जल्दी गुजर जाए और कल सूरज हमें नई ऊर्जा दे कर आगे बढ्ने में मदद करे'

 
अपडेट 85

आंखों ही आँखों में रात कट गई सुबह की चिड़ियाँ चहचहाने लगी.

मैंने सर उठा कर माँ के चेहरे की तरफ देखा बिलकुल शांत था इसतरहा की मानो एक ज्वारभाटा छुपा हुआ अपने बंध खोलने के लिए अग्रसर हो. मुझे कहीं कोई दुःख की परछाई माँ के चेहरे पे नजर नहीं आई.

दिल में अपने माँ के लिए प्यार और इज़्ज़त और भी ज्यादा उमड पडी.

और एक कसम सी खाली की आज खुद पे संयम रखूँगा और माँ को वो सुख दूंगा जिसका वो कब से इंतज़ार कर रही है.

मै धीरे से उठा और बाथरूम में घुस गया पर जाने से पहले माँ के उप्पर एक चद्दर डालता गया क्यूँकि रात भर तो हम नग्न ही एक दूसरे से लीपटे रहे.

माँ के कोमल जिस्म का स्पर्श अब भी मेरे जिस्म के हर कोने में मुझे महसुस हो रहा था

फ्रेश हो कर में किचन में चला गया और अपने और माँ के लिए चाय बना कर वापस बैडरूम में पहुंच गया.

माँ के नाजुक होंठ जैसे मुझे बुला रहे थे. मैंने चाय बिस्तर के पास टेबल पे रख दी और अपनी तेज होती हुई साँसों को सँभालते हुये माँ के चेहरे पे झुकता चला गया.

मेरे होंठ जैसे ही माँ के होठो को छुये जिस्म में फिर से एक थरथराहट फैल गयी हल्के हलके चुम्बन लेने लग गया में.

''उठो जाणू दिन हो गया है"

माँ ने अपनी आँखें खोली मुझे अपने चेहरे पे झुका हुआ पाया और उनके हाथ अपने आप मेरे सर पे चले गए और मुझे अपनी तरफ दबाने लगी गुड मॉर्निंग किस के लिए और मेरे होंठ माँ के काँपते होठो के साथ जुड़ गये

इस चुम्बन में जो अनुभुति थि, जो लज़्ज़त थी वो शब्दों में बयान नहीं करी जा सकती. यूं लग रहा था जैसे हम दोनों की आत्मायें एक दूसरे का स्पर्श कर रही हो, जिस्म तो मात्र एक माध्यम बन के रह गए थे.

बड़ी मुस्किल से खुद को अलग किया,

उस वक़्त मुझे माँ की आँखों में थोड़ी नराजगी दीखि वो नहीं चाहती थी की ये चुम्बन जल्दी खतम हो, पर चाय ठण्डी हो जाती.

'मालिकाये आलिया चाय ठण्डी हो रही है - उठिये'

मैंने मुस्कुराते हुए कहा और माँ हैरानी से मुझे देखने लगी.

'अरे यूँ क्यों देख रही हो?'

'आपने मुझे क्यों नहीं उठाया पहले खुद क्यों बनाई चाय'

'जाणु दिल कर रहा था आज अपने जाणू को खुद चाय बना के पिलाऊँ अब पि कर बताओ इस नाचीज को चाय बनानी आती है या नहीं बाकी सब तो तुम्हें ही करना है'

माँ उठने लगी तो उसे एक दम ख़याल आया की वो नग्न है उसने फट से चद्दर अपने उप्पर खिंच ली और जब मुझे नग्न देखा......तो उनका मुंह खुला रह गया.

'कितने बेशर्म होते जा रहे हैं कपडे तो पेहनिये'

'चाय तो पियो फिर पहन लुंगा'

माँ का चेहरा एक दम भट्टी की तरहा शर्म से लाल हो गया.

'सच मुझे नहीं पता था आप इतने बेशर्म हो'

'इसमे बेशरमी क्या तुम से कुछ छुपा है क्या - जो अब देख लोगी तो कुछ फरक पड़ जायेग'

‘छि छि गंदे, बहुत गंदे हो गए हो'

“अच्छा लो चाय पियो'

कह कर मैंने माँ को कप उठा के पकड़ा दिया. माँ ने नजरें निचे ही रखी और कप पकड़ लिया मेरी तरफ बस कनखियों से देख रही थी और एक छुपी हुई मुस्कान उनके लबोँ के कोनों में नजर आ रही थी.

चाय ख़तम हुई तो मैंने पूछ लिया

'कैसी लगी?'

'बीलकुल आप की तरहा मीठी'

“अच्छा जी , पर हमें तो कुछ और ही मीठा लगता है” में शरारत से बोला.

'कय''? बताओ” माँ ने आँखों ही आँखों में इशारा किया जल्दी बताओ ना.

ओर मैंने अपने होंठ माँ के होठो से चिपका दिए और हम दोनों का एक गहरा स्मूच शुरू हो गया.

हम दोनों एक दूसरे के होठो का रस चुस्ने में खो गए और तब तक खोये रहे जब तक सांस लेना दूभर न हो गया.

मजबुरन हमें अलग होना पड़ा और अपने साँसे सँभालने लगा.

“अच्छा में ऑफिस के लिए तैयार होता हु' कह कर मैंने वार्डरॉब से कपडे निकाले और बाथरूम में घुस्स गया.

जब तक में बाथरूम से तैयार हो कर बाहर आया माँ नाश्ता रेडी कर चुकी थी और उसने एक नाइटी पहनी हुई थी आज पहली बार में माँ को नाइटी में देख रहा था

मेरा मन भटकने लगा पर ऑफिस जाना जरुरी था.

कसी तरह खुद को सम्भाला नाश्ता किया और माँ को एक किस दे कर ऑफिस के लिए निकल पडा

 
अपडेट 86

ऑफिस में दिन भर मन नही लग रहा था बार बार मन भटक रहा था मैंने क्या क्या सोचा था और क्या हो गया था शायद बहोत दिनों से मैने हस्तमैथुन नही किया था इसलिए मेरे साथ यह हो गया

अगर मैं हस्तमैथुन करता तो शायद मेरे अंदर इतनी उत्तेजना ना पैदा होती

और मेरे साथ यह नही होता मुझे मालूम है मैं पूरी तरह नॉर्मल हु मुझमे कोई दोष नही है

सिर्फ बहोत दिनों की दबाई उत्तेजना के कारण मेरा इतनी जल्दी वीर्यपात हो गया माँ न जाने मेरे बारे में क्या सोच रही होगी

उनके हमारे मिलन को लेकर न जाने कितने सपने देखे होंगे उसने क्या क्या सोच होगा

मैंने उनके सारे अरमानो पर पाणी फेर दिया

मैने सबसे बड़ी गलती यह कि के मै बहोत दिनों से अपने ऊपर काबू रखने की कोशिश कर रहा था

इसकी वजहसे मेरे अंदर लावा जमा होता गया और पहली रात को अति उत्तेजना की वजहसे मेरा कुछ करने से पहले स्खलन हो गया

और मैं माँ के सामने मुझे शर्मिंदा होना पड़ा पर आज ऐसा नही होगा

आज मैं माँ के साथ अपनी रियल सुहागरात मनाऊंगा

और माँ को वह खुशी दूँगा जिसके लिए वह नजाने कितने सालो से तरसी है

मैं अब उनका पति हु अब यह मेरी जिम्मेदारी है कि मेरी पत्नी की तन मन से सेवा करु मैं ऐसे ही न जाने क्या क्या सोच रहा था

माँ के बारे मै सोच कर मेरा पेनिस सुबह से ही दर्द कर रहा था दिल कर रहा था कि अभी इसी पल माँ के पास उड़कर जाउ और उन्हें बाहो में लेकर अपनी सारी उत्तेजना उनके अंदर खाली कर दु

पर यह मुमकिन नही था आज मुझे अपनी साइट पर जाना था वहाँ कुछ प्रॉब्लम हो गई थी मेरे सीनियर दूसरे कामो में बिजी थे तो मुझे ही जाना पडेगा पर जाने से पहले टॉयलेट में जाकर मैंने अपनी पूरी उत्तेजना फ्लश कर दी

अब कुछ अच्छा फील हो रहा था मैं जब बाहर आया तब अचानक फोन बजने लगा

देखा तो चेहरे पर मुस्कान फैल गई मंजू का फोन था स्क्रीन पर उनका मुस्कुराता चेहरा देख कर फिर से उत्तेजना बढ़ने लगी

यह माँ भी ना उन्हें जब भी देखता हूं उनके बारे में सोचता हूं

मन उत्तेजना से भर जाता है मैंने फोन उठाया और कान से लगाकर कहा

“हैल्लो जान कैसी हो”

उधर से माँ के हँसने की आवाज आई मानो कानो में शहद घुल गया

“अच्छी हु आप कैसे है” ?

मैं ने कहा “मैं ठीक हु”

माँ ने कहा “आप दोपहर खाना खाने आएंगे ना”

मैंने कहा “नही जान आज मैं बहुत बिजी हु मुझे अभी साइट पर जाना पड़ रहा है”

माँ ने कहा “क्यों”

मैने माँ को सब बता दिया क्यों जाना जरूरी है माँ की आवाज में चिंता साफ दिख रही थी उन्हीने कहा

“फिर दोपहर के खाने के बारे मैं क्या सोचा है”

मैंने कहा “मैं वही कुछ खा लूंगा आप चिंता मत करे दोपहर की कसर रात को निकाल लूंगा”

मेरी बात का मतलब समझ कर माँ बुरी तरह शर्मा गई और कहा

“धत आप बहुत बदमाश हो गए है”

“अरे मैं खाने की बात कर रहा हु”

माँ ने कहा “मैं सब समझ गई हूं किस बारे में बात कर रहे है”

ऐसी ही मीठी मीठी बाते करते रहे और फोन कट कर दिया और अपने काम में बिजी हो गया

मैंने अभी तक ऑफिस में किसी को नही बताया है कि मेरी शादी हो गई है.

और मैं अपनी पत्नी को अपने साथ लेकर आया हु.

पर बताना तो पड़ेगा पर आज काम की अधिकता के कारण नही बता पाया.

पर जल्द ही बताऊंगा और एक शादी की छोटी पार्टी भी दूँगा अपनी खुशी में सबको शामिल करूँगा.

पूरे दिन काम करते करते निकल गया आज का काम पूरी तरह थकाऊ था आखिर कार काम खतम हुआ.

अब मैं घर की और आ रहा था जहाँ मेरी मंजू मेरा इंतजार कर रही थी.

कुछ दिनों से बहुत गर्मी बढ़ गई थी पर आज आसमान पर काले बादल छा गए थे शायद आज रात जोरोसे बारिश होंगी.

इस बेमौसम की बारिश की प्यासी धरती को बहुत जरूरत थी

मैं बारिश से पहले घर पहुचना चाहता था आखिर मैं घर पहुच ही गया.

 
अपडेट 87

धड़कते दिल से मैंने दरवाजे की बेल बजाई सच कहूं तो मेरा पेनिस अपने पूरे आकार में आगया था पर मैंने अपने ऊपर पूरा काबू रखा हुआ था.

थोड़े समय बाद माँ ने दरवाजा खोला. और मैं उनकी तरफ देखता ही रहा माँ ने स्लिव्हलेस नाईटगाऊन पहना था उसमें उनके उन्नत उभार खुलकर दिख रहे थे और उन्होंने अपने बाल खुले छोड़ रखे थे इसलिए माँ कुछ ज्यादा ही हसीन दिख रही थी, एकदम हॉट उनके होठो पर हल्की हँसी और आंखों में शर्म दिख रही थी मुझे अंदर लिया और दरवाजा बंद कर दिया शायद वह तभी नहाकर निकली थी इसलिये उनकी सुंदरता और खुलकर बाहर आई थी गोरे गुलाबी गाल सीधी नाक रस भरे होठ जवानी से भरपूर माँ किसी अजन्ता की मूरत के समान लग रही थी उन्हें इस रूप में देख कर मेरे दिल की धड़कन बढ़ गई मुझे अपने रूप को यु घूरते हुए देखकर माँ के दिल की धड़कन बढ रही है यह उनके गाउन में उनके सीने के उतार चढ़ाव से पता चल रहा था.

वह अपने हाथों को एक दूसरे से मसलते हुये अपने होंठ दांतो के बीच दबाकर निशब्द खड़ी थी अब किसी भी शब्दोकि आवश्यकता ही नही थी क्यों कि मैं माँ के इतना करीब खड़ा था फिर भी माँ ने कोई हलचल नही की मैं जो समझना था वह समझ गया और हल्के से आगे होकर माँ को अपनी तरफ खींच लिया उन्होंने अपना चेहरा दूसरी तरफ मोड़ लिया पर मैंने उनके मखमली गालो के ऊपर अपने होंठ रख दिये और मुह खोल कर उनके गाल अपने मुंह मे भरकर चुसने लगा मुँह में मिश्री की मिठास सी घुल गई अब किसी भी शब्दोकि आवश्यकता नही रही थी क्यों कि मैं उनके इतने करीब खड़ा था फिर भी उसने कोई विरोध नही किया था मैं जो समझने का था वह समझ गया और मैंने आगे बढ़कर माँ को बाहो में ले लिया और अपने हाथ उनकि पीठ पर कसकर उनके गालो को चूमने लगा उनके मुंह से आहे निकलने लगी और उन्होंने अपनी आंखें बंद कर ली उनकि मध भरी सिसकारियां मेरे कानो में रस घोलने लगी. मैं उत्तेजित होकर उनके गालो को आवेग से चूमने चाटने काटने लगा. उनकी सुराही दार गर्दन को चूमने लगा. उनकी बदन की गर्मी मुझे ज्यादा उत्तेजित कर रही थी देखते देखते मेरे हाथ उनके पीठ पर जोर जोर से घूमने लगे उनके बदन के एक एक अंग को में छूकर देख रहा था. अब वह भी धीरे धीरे मेरा साथ दे रही थी. उनके कोमल हाथ मेरी पीठ पर घूम रहे थे, मेरा दाया हाथ उनके पीठ पर घुमाते घुमाते हुये उसे और जोर से पकड़ते हुए मैंने अपना बाया हाथ उनके ऐप्पल शेप नितंबों के उपर से घुमाने लगा गाउन के अंदर वह गोलाई लिए हुये मुलायम रेशमी नितंबों को दबाते दबाते मैंने हल्केसे उनकी दोनों टांगों के बीचमे अपनी दो उंगलिया डालकर दबाई. उनकि सांसों की रफ़्तार बढ़ गई थी, मैं तो अब पूरा पागल होकर उनके गालो का गरदन का चुम्बन लेते लेते हल्के हल्के काट रहा था, और वह मेरे सर और पीठ पर हाथ घुमा रही थी, तब अचानक जोर से बिजली कड़की और हम दोनों को होश आया माँ ने अपने आप को ठीक किया और शर्माकर नजरे नीची करके हसकर कहा “पहले नहा लीजिये मैं आपके लिए खाना लगाती हु”

मैंने कहा “खाना बाद में करते है, पहले दूसरा जरूरी काम करते है” माँ शर्मा गई और अपनी आवाज में अपना पूरा प्यार मिलाकर कहा

“जी नही पहले खाना खा लीजिये मैं आपकी ही हु सदा के लिए”

माँ की बाते सुनकर मुझे माँ पर इतना प्यार आया कि मैंने माँ को अपनी बाहों में जोर से भींच लिया और उनके कानों में कहा

“आई लव यू फॉरएवर”

माँ ने मुझे चूमते हुए कहा

“आई लव यू टू, चलिए जल्दी से नहा लीजिये मैंने भी दोपहर से कुछ नही खाया है”

मैं शॉक में रह गया मैने कहा

“आपने क्यों नही खाया”

माँ ने कहा “आपके खाये बिना मैं कैसे खाती”

मैंने कहा “आपने क्यों नही खाया, मैंने आपको कहा था, कि मैं आज नही आ पाऊंगा, आप खा लीजिये, फिर आपने क्यों नही खाया”

माँ ने कहा “क्या आपने सही में खाना खाया था”

अब मैं माँ को क्या कहता सच मे मुझे आज खाने का मौका ही नही मिला था पर माँ को कैसे पता चला.

तब माँ ने कहा “मैं आपकी पत्नि ही नही आपकी माँ भी हु और माँ सब जानती है”

और हम दोनों हस पड़े मै बाथरूम में चला गया.

कुछ देर नहाने के बाद मैं बाथरूम के बाहर आया माँ खाने के टेबल पर मेरा इंतजार कर रही थी आज माँ बहुत खुश लग रही थी माँ ने आज स्पेशल खाना बनाया था सब मेरी पसंद का हम ने एक थाली में खाना खाया एक दूसरे को खिलाते हुये जब मैं माँ को खाना खिला रहा था तब माँ के होठो पर हँसी और आंखों में पानी था मैंने इसका कारण पूछा तो माँ ने कहा

“इस प्यार के लिए मैं कितने सालो से तरसी थी, पर आखिर भगवान ने मेरी सुनली और मुझे आप मिल गये, मेरे पती ना सिर्फ खूबसूरत है मुझे प्यार भी करते है, किसी पत्नी को और क्या चहिये, मैं आज बहुत खुश हूं मुझे सदा ऐसे ही प्यार करते रहना”

माँ की बाते सुनकर मेरी भी आंखों में आंसू आगये मैंने माँ से कहा “मैंने सिर्फ आपसे प्यार किया है, मैंने पूरी जिंदगी किसी और के बारे मे कभी सोचा भी नही, मैं किसी और लड़की को जानता भी नही, और तुम्हारे सिवा किसी को जानना भी नही चाहता,

‘मेरे लिए जो भी है वह सिर्फ तुम हो और मेरी पत्नी खूबसूरत ही नही साक्षात धरती पर उतरी अप्सरा है”

माँ बहोत शर्मा गई “आप बहोत शरारती हो गए है”

ऐसे ही खुशनुमा माहौल में हमने डिनर खतम किया

माँ सारे बर्तन उठाकर किचन में चली गई माँ ने फटाफट सारे बर्तन धोकर रख दिये शायद माँ को भी आज किसी बात की जल्दी थी जैसे ही वह किचन से बाहर आई मैंने उन्हें बाहो में पकड़ लिया वह भी मुझसे जोर से लिपट गई

 
अपडेट 89

बाहर आज जोर से बारिश हो रही थी तूफानी हवा के साथ जोरदार बारिश की आवाज से एक अलग ही माहौल बन गया था वैसे यह बारिश का सीजन नही था पर बेमौसम बारिश हो रही थी जैसे कुदरत भी हमारे मिलन को और रंगीन बनाने में लगी थी मेरा दाया हाथ उनकि पीठ पर घुमाते घुमाते अंजाने में माँ के दाएं स्तन के ऊपर ले आया और कुछ पल बाहे ढीली कर के उनकि तरफ देखा माँ भी अपनी नशीली नजरो से मुझे देख रही थी उनकि आंखें गुलाबी हो गई थी वह साक्षात कामदेव की रति दिख रही थी मैंने फिरसे उनको अपनी बाहों में पकड़ लिया और उनके रसभरे होंठों पर अपने होठ रख कर उनके होठो को हल्का खोलकर अपनी जीभ उनके मुंह मे डाल कर किस करने लगा इधर मेरा बाया हाथ बेरोक टोक उनके स्तन के ऊपर घूम रहा था

वह बड़े बड़े गर्म स्तन मेरी हथेलियों में नही आ रहे थे मैं किस करते करते धीरे धीरे उन्हें प्रेस कर रहा था फिर मैंने अपने बाये हाथ की उंगलियां पीछे से गाउन के उपरसे उनकी पेन्टी के अंदर डालने का प्रयास कर ने लगा माँ ने भी अपनी थाइस जरासी अलग करके उनके लिए रास्ता बना दिया फिर मैने भी निचेसे दो उंगलिया उनकी पेन्टी में डालकर उस रेशम पथ पर पहला कदम रख दिया जिसपे चलने के लिए न जाने कब से बैचेन था कितने दिनों के बाद वह घड़ी आज आई है माँ ने भी अब अपनी शर्म को त्याग दिया था वह भी अब इस राह पर अपने पति के साथ आगे बढ़ ना चाहती थी अपना पत्नी धर्म निभाना चाहती थी इतने सालों के बाद वह भी अपनी सालो की प्यास मिटाना चाहती थी इसके लिए अब थोड़ा बेशर्म बनना होगा यह वह भी जानती थी जब मैंने अपनी दो उंगलिया उनकी पेन्टी में डाली तो उन्हीने अपनी थाइस अलग जरके मुझे इशारा दिया कि मैं इस राह में आगे बढ़ सकता हु वह मेरी हमसफ़र बनने को तैयार है आह वह रेशमी अहसास क्या बताऊँ मैं एक हाथ से उनके स्तन प्रेस कर रहा था दूसरा हाथ उनके योनि पर घुम रहा था वहा अब गीलापन महसूस हो रहा था

वह एकदम सिहर उठी और मुझसे अलग हो कर अपनी नशीली आंखों से मुझे देखती रही

बाहर अब अंधेरा गहरा गया था और उसमें तूफानी बारिश आजकी रात हमारे जिंदगी की सबसे खुशी भरी रात थी हमारे रिश्ते में नई खुशी ला रही थी कुदरत भी हमारे मिलन को और यादगार बना रहा था बाहर और अंदर दोनो तरफ तूफान आया था

आज की रात सिर्फ हमारी थी हमारे बीच कोई नही आनेवाला माँ आज रात पत्नी बनकर मेरी शेज पर आने वाली थी उनकि नाजुक कमसिन भरी हुई काया आज मेरे नीचे आनेवाली थी यह सोचकर मेरे बदन मे सिरसिरी शुरू हो गई थी मेरा पेनिस हार्ड होकर दर्द करने लगा था अब उन्हें मेरे उतेजना का अहसास दिलाने के लिए मैंने घुमाकर पीछे से कमर में दोनों हाथ डालकर अपनी बाहों में ले लिया मैन उन्हें इतना टाइट हग किया कि हमारे बीच मे से हवा भी नही जा सकती उनकी सुराहीदार गर्दन पर पेशिनीयटली किस करते करते मैंने अपना कड़क पेनिस उनके एप्पल शेप नितंबों में दबा दिया मुझे उनको सेक्स करने की कितनी प्रबल इच्छा हुई है यह उन्हें बताना था वह पेनिस का अहसास होते ही माँ के मुह से सिसकारियां शुरू ही गई “ओह आ आ सीस सी”! उनके बदन की वह मादक गंद मुझे पागल बना रही थी मैं पूरी तरह मदहोश होकर पीछे से धक्के लगा रहा था मेरी गर्म सांसे उनकी गर्दन पर उनको अहसास दिला रही थी. उन्होंने मदहोशी में अपना सर पीछे मेरे खंदे पर रखकर अपनी आंखें बंद कर ली अब मेरे दोनो हाथ उनके स्तन पर लेजाकर मैं बिनधास्त होकर उनके दोनो मस्त गोल कड़क स्तन को प्यार से दबाने लगा आह वह प्यारा अहसास उनका मुँह वैसेही दीवार की तरफ करके मैं उन्हें जोरसे रगड़ने लगा उनके बाल हटाकर उनके मखमली गाल काटने लगा उनकी सुराहीदार गर्दन पर चुम्बन करता रहा और दोनो गोल गोल स्तन मसल मसलकर गुलाबी से लाल कर दी वह दीवार पकड़कर खड़ी थी मैं लगभग उनके ऊपर चढ़ ही गया था मुझे माँ के साथ फोरप्ले करने में बहोत मजा आरहा था थोड़ी देर ऐसा करने के बाद मुझे लगा कि माँ अब बहुत गरम हो गई है मुझसे भी अब रहा नही जा रहा था अब कब उनके सारे कपड़े निकाल कर पूरी निर्वस्त्र देखु ऐसा हुआ था फिर मैंने एक प्यार भरा किस करके उनके कान में कहा

"जान बेडरूम में चले"

 


अपडेट 90

उन्होंने शर्माकर गर्दन नीचे की और गर्दन हिलाकर अपनी सहमति दी उनकी इस शर्मीली अदा पर मैं मर मिटा अब क्यों देर करना मैं उन्हें हाथ पकड़ कर बेडरूम की और ले चला तो उन्होंने मेरा हाथ खींचकर मुझे रोका मैने सवालिया निगाहोसे उनकी तरफ देखा तो उन्होंने शर्माकर नीची नजरोसे होठो पर मुस्कुराहट लाकर कहा

“आप कुछ भूल तो नही रहे”

मैंने कहा “क्या मेरी जान”

उनके चेहरे पर प्यारी हसि खिल गईं पर कहा कुछ नही मेरी भी कुछ समझ नही आ रहा था कुछ देर सोचने के बाद मेरी समझ मे आया और मेरे होठो पर हसी आगई और मैंने कुछ ना बोलकर करना ठीक समझा मैंने माँ को अपने दोनों हाथों से उठाकर अपनी छाती से लगाकर बेडरूम की और चला माँ की यही इच्छा थी कि मैं उन्हें उठाकर ले चलू उठाने से उनकी स्तन मेरे मुँह के पास आई थी और मैं यह मौका कैसे छोड़ता मैन एक स्तन अपने मुंह मे लि और कपड़े के ऊपर से उसे चुसने लगा माँ के मुँह से फिर सिसकारियां शुरू हो गई उन्हें किस करते करते बेडरूम में पहुंच गये वहा के गर्म माहौल से हम दोनों और ज्यादा गर्म हो गये उन्हें बेड के पास खड़ा करके मैं खुद बेडपर बैठ गया और अपना शर्ट निकाल दिया माँ बहोत शर्मा रही थी मै उन्हें मसलते मसलते उनके गाउन के बटन निकलता रहा ओ गाउन ढीला होकर उनके पैरों में गिर गया गाउन नीचे गिरते ही मैंने उन्हें देखा तो मैं देखता ही रह गया जैसे कोई संगेमरमर में तराशी हुई अजन्ता की मूरत अपनी पूरी शान के साथ मेरे सामने खड़ी हो उनकी दूध सी गोरी बेदाग मखमली त्वचा,जैसे दूध में चुटकीभर केसर मिलाई हो हेल्दी भरा हुआ मांसल बदन, रसीले होंठ, नशीली आँखे,ऐसी जवानी से भरपूरजैसे कोई प्रणय देवता मेरे सामने खड़ी थी उन्हें इस रूप में देखकर मैं तो जैसे पागल हो गया था उनके इस रूप की मैंने कभी कल्पना भी नही की थी रूप और सौंदर्य का थाठे मारता समंदर मेरे सामने खड़ा था उनके पूर्ण गोलाई लिए हुये पुष्ट बेल शेप स्तन काले ब्रा में बहोत खूबसूरत दिख रहे थे सपाट पेट जो हमेशा से मेरी कमजोरी रहा है काली पेन्टी में छुपा हुआ वह खजाना जिसपर न जाने कब से मेरी नजर थी मेरे जैसे मर्द को जैसे वह चैलेंज दे रही थी कुदरत ने उसे सबकुछ भरपूर मात्रा में दे रखा था ऐसा बनाया था कि आप उसे सिर्फ प्यार ही करते रहे ज़िंदगी भर फिर भी मन न भरे मैं उनके सामने खड़े होकर धीरे धीरे उपरसे किस करना चालू किया तो उन्होंने सिसकिया लेना चालू किया वह गरम गरम सांसे छोडने लगी उनके होंठ,गाल,गर्दन करते करते मैं उनके क्लीवेज एरिया चूमना चालू किया दोनो पहाड़ो की चोटिया और गहराइयों में चूमता रहा

ब्रा की ऊपर की खाई में कुछ ज्यादा ही चूमने चाटने लगा तो वह जैसे पागल होकर मेरे सर को पकड़कर अपने छाती पे दबाने लगी फिर मैं बेड पर बैठ कर उन्हें अपनी तरफ खीचकर उनके ब्रा को एक साइड से नीचे से खींचा “वॉव”उनके निप्पल इतने खूबसूरत होंगे यह मैने सपने में भी नही सोचा था डार्क गुलाबी रंग के निप्पल अकड़ कर कठोर हो चुके थे गुलाबी रंगत लिए हुये थोडेसे स्तन के बाहर झुके हुये जैसे चुसने में आसानी हो ऐसा कुदरत ने ही प्लान बनाया आकर में वह थोड़े बड़े ही थे उसपर वह निप्पल बिल्कुल सीधे खड़े थे ब्रा में से उतना ही भाग खुला करके प्यार भरी नजरोसे देखता रहा फिर प्यार से दबाकर हाथ घुमाकर धीरेसे मुँह में लेकर चुसने लगा जैसे उनका दूध पी रहा हु ऐसी आवाज मेरे मुह से आने लगी बीच बीच मे उनके पीठ पर हाथ का दबाव देकर उन्हें अपनी और खींचकर जोर से चुसने लगा अब दोनों भी सेक्स में पूरी तरह खो गये “चुसो मेरे प्रियतम अपनी माँ के स्तन और जोरसे चुसो”ऐसे जरूर माँ अपने मन मे सोच रही होगी.वह पूरी तरह सेक्स में डूब गई थी देखते देखते मैंने पीछे से ब्रा के हुक्स निकाल दिये मेरी नज़र अपनी माँ के स्तन से हट नहीं रही थी . उनकी दूध सी रंगत, उनकी मोटाई, उन पर गहरे गुलाबी रंग का घेरा और डार्क गुलाबी रंग के निप्पल और निप्पल कैसे अकड़े हुए थे . मैंने धडकते दिल के साथ अपना हाथ अपनी माँ के स्तन की और बढ़ाया तो . माँ के दिल की धडकने भी बढ़ने लगी हैं .

 


अपडेट 91

और वह भरे हुये बेल शेप उन्नत स्तन मेरे सामने खुले हुये उनकी वह जानलेवा थिरकन इतने साल माँ के जिन स्तन को मैं कपड़ो के अंदर देखते आया था आज वह मेरे सामने अपनी पूरी सुंदरता आन बान और शान और घमंड के साथ खड़े थे माँ के चेहरे पे शर्मीली मुस्कुराहट थी वह बहोत शर्मा रही थी अपने हाथों से अपने जानलेवा स्तनोको उन्होंने छुपा लिया मानो पहाड़ो पर बादल आगये हो मैन उनके हाथों पे आपने होंठ रखकर चुम लिया और उनके हाथ हटा दिये और वह दो रसभरे दो कपोत मेरे सामने खुले हुये उन्हें मैं हाथ मे लेकर दबाने लगा देखते देखते उनके निप्पल कड़क हो गये उन्हें एक एक करके मुह में लेकर चुसने लगा उन्हें अपने हाथ का सहारा देकर उन puffy निप्पलको पागलो की तरह चुसने में बहोत मजा आ रहा था वह अपने मुह से सससस आवाज करके मेरे सर को अपने स्तन पर दबा रही थी

“उन्न्न्नग्ग्गह्ह्ह्हह” माँ के गले से घुटी सी आवाज़ निकलती है .

“उफ्फ्फ्फ़....” मैं भी अपनी माँ के स्तन को छूते ही सिसक पड़ता हु . नर्म मुलायम स्तन और सख्त निप्पल से जैसे ही मेरा हाथ टकराता है तो हम दोनों माँ दोनो के बदन में झुरझुरी दौड़ जाती . मेरी एक ऊँगली निप्पल को छेड़ती है, उसे सहलाती है, फिर मैंने पूरी स्तन को अपनी हथेली में भर लिया . कितना नर्म, कितना मुलायम, कितना कोमल एहसास था . मैन स्तन को अपनी हथेली में समेट हल्के से दबाया तो

“उन्न्न्नग्गग्घ्ह्ह.....” माँ फिर से सीत्कार भर उठती है . वह अपना सीना उठाकर अपना स्तन अपने बेटे के हाथ में धकेलती है .

मैं स्तन की भारी कोमलता से हैरान था . वहीँ उसको दबाने से उनकि कठोरता से स्तब्ध रह जाता हु . तने हुए गुलाबी निप्पल को घूरते हुए मैंने अपना चेहरा नीचे लाते ही . माँ मेरे चेहरे को अपनी स्तन पर झुकते देखती है तो एक तीखी सांस लेती है .

“आअह्ह्ह्हह्ह्ह्हह्ह .......” मेरे होंठ जैसे ही माँ के निप्पल को छूते हैं, माँ एक लम्बी सिसकी लेती है .

मैं माँ के निप्पल को चूमने लगता हु . कुछ देर चूमने के बाद मैने अपना चेहरा हटाकर निप्पल को घूरता रहा और फिर से अपना चेहरा स्तन पर झुका दिया. इस बार मेरी जिव्हा बाहर आती है और माँ के निप्पल को चाटती है .

“आआह्ह्ह्ह...........उन्न्नन्न्गग्ग्गह्ह्ह्हह ...” माँ का बदन तेज़ झटका खाता है . जिस तरह मेरी खुरदरी जीभ ने माँ को सिसकने पर मजबूर कर दिया अपने बेटे के जीभ के प्रहार से वो सिसकने पर मजबूर थी . मैं निप्पल को चाटता जा रहा था . निप्पल चाटते हुए उनके निप्पल को अपने होंठो में दबोच कर उसे बच्चे की तरह चुसना शुरु कर दिया है . माँ ने अपना सीना ऊपर उठाकर बेटे के मुंह में स्तन धकेल रही थी . उनके मुंह से फूटने वाली सिसकियाँ और भी तेज़ और गहरी हो गई जब मैंने एक स्तन को चूसते हुए, दुसरे पर अपना हाथ रख दिया और उसे हल्के हल्के दबाने लगा, सहलाने लगा, उनके निप्पल को अंगूठे और ऊँगली के बीच लेकर मसलने लगा .

निप्पल चूसते चूसते मैं उसे धीरे धीरे दांतों से हल्का हल्का सा काट भी रहा था . जब भी मेरे दांत निप्पल को भींचते, माँ सर को जोर से झटकती . माँ मेरे सर पर हाथ रख देती है और मुझसे स्तन चुसवाते हुए मेरे बालों में उँगलियाँ फेरने लगती है . मैं उत्साहित होकर और भी जोर जोर से स्तन को चूसता हु . कभी कभी मैं पूरी स्तन को मुंह में भरने की कोशिश कर रहा हु जिसमे स्पष्ट तौर पर मैं सफल नहीं हो सकता था क्योंकि माँ की मोटी स्तन मेरे मुंह में पूरे समाने से तो रहे .

“दुसरे को भी...दुसरे को भी चुसिये ....” माँ मेरा मुंह अपने एक स्तन से हटाकर दुसरे की तरफ ले जाती है और मैं झट से उनके निप्पल को होंठो में भरकर चुसना शुरु कर देता हु . उनका हाथ मेरे बालो को सहलाने लगता है .

“उन्न्नन्न्गग्ग्गह्ह्ह्हह ... आआह्ह्ह्ह...........” माँ की सिसकियाँ कुछ ज्यादा ही ऊँची हो रही थी . मैं कुछ ज्यादा ही जोर से निप्पल को चूस रहा था . माँ मेरे सर को अपन स्तन पर दबा रही थी . मैं अपनी माँ के स्तन से मुंह हटाता हु और दोनों स्तन को उनकी जड़ से दोनों हाथों में भर लेता हु . इससे उनके निप्पल और स्तन का ऊपरी हिस्सा उभर कर सामने आ जाता है .मैं फिर से मुंह नीचे करके अपनी माँ के स्तन को चूसने लगता हु . मगर इस बार थोडा सा चूसने के बाद मैंने अपना मुंह उठाकर दुसरे स्तन पर ले गया. हाथ से स्तन को दबाते हुए मैंने बदल बदल कर स्तन को चूसने लगा .

 
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