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"मेरा अनुभव- पहली कहानी"

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StoryPublisher

Guest
दोस्तों सबसे पहले एडमिन को धन्यवाद देना चाहूँगा जिन्होंने इस वेबसाइट का निर्माण किया और साथ ही मुझे साइट को जॉइन करने की मंजूरी दी, मैं इस साइट का नियमित पाठक हूँ और आप सभी के लेख पड़ता हूँ आप सभी की लेखन कला अद्बुद्ध है जिसे पड़ के अत्यधिक आनंद प्राप्त होता है. आप सभी के लेखों को पड़ के मुझे भी लिखने की इच्छा हुई तो सोचा मैं भी कोशिश करके देखता हूँ बस आप लोगों के साथ और सहयोग मिल जाये तो शायद कुछ अच्छा कर सकूं. जैसा कि दोस्तों मैं अभी सीख रहा हूँ तो आप लोगों से अनुरोध है कि कृपया मेरा मार्गदर्शन करते रहियेगा..

अब मैं आपको अपना परिचय भी दे देता हूँ मेरा नाम शैलेश है और में नोएडा में एक प्राइवेट कंपनी में कार्यरत हूँ और कहानियां पड़ना मुझे बहुत पसंद है दिखने में एवरेज हूँ जैसा कि एक आम आदमी होता है..

दोस्तों परिचय तो हो गया अब कहानी पे आते हैं आपको एक बात बता दूं ये कहानी मेरी काल्पनिक रचना है जिसका वास्तविकता से कोई संबंध नही है कहानी का उद्देश्य मात्र आपका मनोरंजन करना है..

"मेरा अनुभव- पहली कहानी"

सुबह के आठ बज रहे थे और में हमेशा की तरह अपने ऑफिस को तैयार हो रहा था और साढ़े आठ बजे मुझे ऑफिस के लिए निकलना था मेरा ऑफिस 9 बजे का था और ऑफिस में लेट होना मुझे कतई मंजूर नही था मैं सेक्टर 15 में एक किराये के फ्लैट में रहता था जो तीन मंजिला था और हर मंजिल में दो-दो रूम थे नीचे के दोनों कमरों में मकान मालिक और उसका परिवार रहता था और दूसरे माले के एक रूम में मैं रहता था और मेरे सामने वाले रूम में भी एक लौंडा रहता था जो सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहा था तीसरे माले पे एक शादीशुदा जोड़ा रहता था और उनके सामने वाला रूम खाली पड़ा था..

मेरी ऑफिस की टॉइमिंग सुबह 9 बजे से शाम के 6 बजे तक की होती थी और शनिवार संडे को मेरा ऑफ होता था मैं अपनी कम्पनी में टीम लीडर था और जैसा कि आप जानते ही हैं टीम लीडर का काम ही टीम मेंबर्स के साथ मिल के काम करवाना होता है मेरी टीम का काम डेटा बनाना, क्लाइंट से इशू या क्वेरी डिस्कस करना होता था इस लिए मेरी टीम में 4 लड़के और 6 लड़कियाँ थीं क्यों कि मैं टीम लीडर था तो उनके काम की रिपोर्ट्स मैं बनाता था और उस रिपोर्ट्स के आधार में उन्हें पॉइंट्स देता था जिससे उनका इंसेंटिव भी बनता था इसलिए टीम मेंबर्स के बीच मेरी काफी अहमियत थी हालांकि मैंने कभी इस बात का घमंड नही किया और ना ही गलत फायदा उठाया बल्कि मेरा व्यहार मेरी टीम के साथ बहुत अच्छा था इसलिए मेरी टीम भी मेरे से बहुत खुश रहती थी और हर बार मेरी टीम के परिणाम बाकी टीमों की तुलना में काफी अच्छे आते थे और हमारी टीम का मैनेजर भी मेरे और मेरी टीम के काम से बहुत खुश था और उसने हमारे डिपार्टमेंट हेड से मेरी प्रमोशन की इच्छा जाहिर की और हेड ने कहा इस अप्रेसल में मुझे असिस्टेंट मैनेजर बना दिया जाएगा जिससे में और मेरी टीम बहुत खुश थी..

तो दोस्तों ऑफिस लाइफ तो अच्छी चल रही थी बस कमी पर्सनल में थी दरअसल में कैरियर बनाने में इतना मशगूल हो गया था कि प्यार मोहबत के चक्कर में पड़ ही नही पाया हालांकि मेरी टीम मेंबर्स में से कुछ मुझे पसंद भी करती थीं मगर मैं ही इस विषय में गभीर नही था इसलिए वो भी कुछ नही कर पाती ऊपर से मैं उनका टीएल भी था तो बात नही बन पाती थी, दूसरे टीम की लड़कियों ने भी चांस मारे मगर मैंने ही रेस्पॉन्स नही दिया और सच बताऊं तो उनमें मुझे प्यार वाली फीलिंग भी नही आई जो कि किसी को दिल से पसंद करने पर आती है तो कुल मिला के आलम ये था मैं अकेले अपनी जिंदगी काट रहा था..

एक दिन शाम को घर से आया तो सामने वाले लौंडे का रूम खाली पड़ा था मुझे बड़ी हैरानी हुई पता नही अचानक कहा चला गया मैंने नीचे जाकर मकान मालिक से पूछा तो उन्होंने बताया कि उसकी सरकारी नौकरी का परिणाम आ गया और वो पास हो गया था कुछ ही दिनों में उसका इंटरव्यू था और उसका सेंटर उसी के घर के पास पड़ा था इसलिए वो आज ही सारा हिसाब करके निकल गया. मैंने कहा चलो अच्छा है और फिर में अपने रूम में आ गया और खाना खा पी के सो गया अगले दिन सो के उठा फ्रेश होके रेडी हुआ और रूम से बाहर निकला और सामने वाले रूम की तरफ देखा जहाँ रोज वो लौंडा सुबह सुबह गुड़ मोर्निंग या हाई हेलो बोलता था, उस दिन मुझे लगा कि सच ही कहा है किसी ने कि जब कोई चला जाता है तब उसकी कमी का एहसास होता है और फिर में निकल पड़ा ऑफिस के लिए और ऐसे ही एक हफ्ता निकल गया और उस रूम में कोई नही आया..

एक दिन शनिवार को मेरी छुट्टी थी और में लैपटॉप पे कोई मूवी देख रहा था कि मैंने अपने रूम के बाहर लड़कियों के हसने की आवाज सुनी मैंने सोचा यहां तो लड़कियां रहती नही हैं फिर कौन आया सोचा बाहर जाके देखूँ और जैसे ही बाहर जाके देखा तो देखता ही रह गया सामने वाले रूम के बाहर तीन बहुत ही खूबसूरत और मॉडर्न लड़कियां खड़ीं थी और रूम की जांच पड़ताल कर रही थीं शायद वो तीनों अपने लिए रूम देख रही थी और उनकी बातों और हँसी से लग रहा था जैसे उन्हें रूम पसंद आ गया है फिर वो नीचे चले गयीं और थोड़ी देर में अपने साथ एक ताला लेकर आयी और रूम लॉक करके चले गयीं..

आज के लिए इतना ही दोस्तों कहानी जारी रहेगी आपके राय और सुझाओं का इंतजार है..
 
दोस्त कहानी का आगाज़ शानदार है लिखते लिखते अपने आप ही नये नये विचार आते जाएँगे जिससे आप कहानी को और भी बेहतर करते जाओगे पर कहानी के साथ ज़्यादा छेड़छाड़ कभी कभी मूल विषय से भटका देती है इसका ख्याल ज़रूर रखना .
 
शुक्रिया राज भाई, मैं ध्यान रखूंगा..
 
दोस्तों सबसे पहले तो आप सभी का हौसला अफजाई के लिए बहुत बहुत धन्यवाद करता हूँ और साथ ही आपसे एक चीज के लिए सहायता चाहता हूँ और वो है बड़े फॉन्ट में ना लिख पाने की समस्या पिछले पोस्ट को मैंने बड़े फ़ॉन्ट्स में लिखने की कोशिश की मगर सफलता नही मिली आपसे विनती है कि कृपया करके फॉन्ट्स बड़े करने में मेरी सहायता करें. आपके सहयोग के साथ कहानी को आगे बढ़ाते हैं..

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उनके जाने के बाद मैं मैंने थोड़ी देर उनके वापस आने की बाट देखता रहा मगर वो नही आई और फिर मैं अपने लैपटॉप पर मूवी देखने में व्यस्त हो गया फिर शाम को खाना खा के सो गया. आपको बता दूं कि मैं अधिकतर खाना रूम पे खुद ही बना के खाता था अगर कभी लेट हो गया या मन नही हुआ तो ही बाहर से खा के आता था. अगले दिन मैं 9 बजे देर से उठा क्यों कि एक तो संडे था ऊपर से कोई खास काम भी नही था उठने के बाद फ्रेश होके मैं दूध और ब्रेड लाने के लिए रूम से बाहर निकला और रोज की आदतानुसार सामने वाले रूम पे नजर पड़ी तो चौंक गया क्यों कि सामने वाले रूम पे पर्दा लगा हुआ था और रूम के आगे बहुत साफ सफाई भी हुई पड़ी थी जबकि इससे पहले जब भी देखो तो उस कमरे का दरवाजा हमेशा बंद और कमरे के आगे धूल और बिखरा हुआ सामान पड़ा रहता था मैंने सोचा शायद कोई फैमिली रहने आयी है और फिर मैं सामान लेने चला गया.

थोड़ी देर में जब में नाश्ते का सामान लेके आया तो देखा उन तीनों में से दो लड़कियाँ कमरे के आगे चेयर लगा के बैठी हुई थीं और कॉफी पीते हुए अखबार पड़ रही थी जबकि तीसरी शायद अंदर थी. इन दोनों में से एक थोड़ी मोटी थी जिसके बूब्स भी बड़े और मोटे थे और पिछवाड़ा भी गजब का था और और शक्ल से भी ठीक ठाक थी जबकि दूसरी वाली पतली लंबी और थोड़ी साँवली सी थी तीसरी वाली को अब तक मैंने सही से देखा नही था. दोनों ने टीशर्ट और पजामा पहन रखा था. मोटी लड़की के बूब्स तो टीशर्ट से बाहर निकलने को बेताब से हो रहे थे और दोनों उभारों के बीच एक बहुत गहरी खाई थी. जैसे ही मोटी पे मेरी नजर पड़ी और सीधे टीशर्ट के अंदर से बाहर कूदने को तैयार उसकी चुचियों पे जा के थम गयी. वैसे तो में लड़कियों को ऐसे घूरा नही करता था क्यों कि एक तो में ऑफिस में ऐसा कर नही सकता था दूसरा मेरी बिल्डिंग में कोई लड़की थी भी नही और ऊपर वाली भाबी भी बहुत कम ही दिखा करती थी इसलिए कभी ऐसा करीबी मौका हाथ नही लगा था कुछ पलों तक ऐसे देखने के बाद में अपने रूम पे चला गया और नाश्ता करके नहाने चला गया.

आज काफी दिनों के बाद मेरे अंदर की भावनाएं फिर जाग उठी वैसे तो में हफ्ते में एक या दो बार मुठ मार लिया करता था मगर आज जबसे मोटी की चुचियों को देखा था तब से शरीर में बैचेनी सी पैदा हो गयी नहाते समय बार बार मोटी के बूब्स मेरी आँखों के सामने आ जाते और मेरा मन करता कि उसकी दोनों चुचियों को पूरे दिन रात भर पीता रहूं. यही सोचते-सोचते मैंने मुठ मारना शुरू कर दिया और थोड़ी ही देर में मेरा माल निकल गया और मन को थोड़ी राहत भी मिल गयी. नहा के मैंने नाश्ता किया और टीवी देखने लग गया..

दोस्तों आज के लिए इतना ही कहानी जारी रहेगी बस आप लोगों के सुझाओं और सहयोग का इंतजार है. कहानी कैसी जा रही है जरूर बताइयेगा अगर लिखने में कमियां आ रही हैं तो वो भी स्पष्ट कहियेगा धन्यवाद..!! :)
 
दोस्तों उत्साहवर्धन के लिए आप सभी का धन्यवाद इसी के साथ कहानी को आगे बढ़ाते हैं..

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मैं अपने कमरे में टीवी देख रहा था और टाइम काट रहा था. दोस्तों जिस बंदे के रूम के सामने तीन तीन मस्त बंदियाँ हो तो उसका मन टीवी में कैसे लगेगा मेरा मन बार बार मोटी की चुचियों और गाँड़ में डूब जाता तभी बाहर से तीसरी लड़की की आवाज भी आने लगी और मेरे कान खड़े हो गये. मेरी खिड़की में ब्लैक शीशा लगा हुआ था जिससे दिन की रोशनी में मैं तो बाहर देख सकता था मगर बाहर वाला मुझे नही देख सकता था, और मैने पर्दा हटा के खिड़की से देखा और मेरी आँखें खुली की खुली रह गयी तीसरी लड़की तो बिल्कुल आलिया भट्ट जैसी लग रही थी चेहरे का रंग एकदम गुलाबी, आंखे काली गहरी सी, उसके होंठ गुलाब की तरह लाल थे उसने पीले कलर का एक बहुत ही सुंदर पंजाबी सूट पहना हुआ था जो कि उसके शरीर पे एकदम फिट था जैसे उसके शरीर का ही हिस्सा हो और उस टाइट सूट में उसकी चुचियाँ ऐसे तन के खड़ी थी जैसे पहाड़ की चोटियाँ शायद वो अभी नहा के आयी थी उसके लंबे बाल अभी भी गीले थे और वो उन्हें सूखा रही थी उसका चेहरा मेरी खिड़की की तरफ था जिससे में उसे सामने से साफ देख सकता था जबकि वो मुझे नही देख सकती थी.

अचानक वो बाल झाड़ने के लिए दायीं ओर झुकी और उसके झुकते ही उसका सूट चुचियों पर से थोड़ा ढीला हुआ और मुझे उसकी गोरी गोरी चुचियों की एक छोटी सी झलक देखने को मिल गयी उसके स्तन बिल्कुल जवानी के दिनों की सानिया मिर्जा के जैसे थे एकदम तने हुए उन्हें देखते ही मेरे लंड ने फिर से खड़ा होना शुरू कर दिया और कुछ ही सेकंड्स में अपने विकसित रूप में आ गया मैं अभी इस झटके से उबरा ही था कि अचानक वो घूम गयी और उसके घूमते ही मेरी आँखों के सामने एक बहुत ही हसीन नजारा प्रकट हो गया उसने हरे रंग की लेगिंग पहनी हुई थी जो कि उसकी जांघों से खाल की तरह लिपटी हुई थी दोस्तों एक बात बता दूं लड़कियों के मामले में उनकी टाइट तनी हुई चुचियाँ और उनकी टाइट लेगिंग में दिखती हुई जाँघे मेरी कमजोरी हैं.

फिर मेरे लंड पर एक और हमला हुआ वो बाल झड़ने के लिए आगे की तरफ झुकी जिससे उसका सूट उसकी पीठ पे आ गया मेरे सामने उसकी टाइट गाँड़ नजर आ गयी बहुत ही कसी हुई लाजवाब, मेरा लंड तो मेरे अंडरवियर और लोवर दोनों को फाड़ के बाहर निकलने की जी तोड़ कोशिश करने लग गया मेरा मन किया अभी जाके उसे उस कुर्सी पर ही उल्टा कर के उसकी गाँड़ में अपना लंड घुसा दूँ और पीछे से उसकी चुचियाँ निचोड़ दूँ मैं इन ख्वाबों में ही डूबा था कि तभी मोटी अंदर चले गयी और वो मोटी की कुर्सी पे बैठ गयी कुर्सी पर बैठे हुए भी उसकी जाँघे मेरे लंड पर कहर बरपा रही थीं. तभी अंदर से मोटी की आवाज आयी ओ नेहा तुमने मेरा टॉवल देखा क्या और तभी उस साँवली लड़की ने नही में जवाब दिया उसने फिर पूछा पूजा तुमने देखा तो उस पीले सूट वाली ने बोला अंदर के कमरे में टंगा है इस प्रकार मुझे पता चला कि साँवली लड़की का नाम नेहा और मेरी वाली का नाम पूजा था, मेरी वाली इसलिए क्यों कि उन तीनों में मुझे सबसे ज्यादा वो ही पसंद आयी तो मैंने सोचा कि इसे ही पटाने की कोशिश करूंगा.

थोड़ी देर में नेहा बोली कविता जल्दी नहाओ मुझे भी नहाना है इसका मतलब मोटी का नाम कविता था थोड़ी देर में कविता नहा के आ गयी और उसने फिर से एक टीशर्ट और लोवर पहन रखा था शायद कविता रूम में टीशर्ट ही ज्यादातर पहनती थी और सुबह ही की तरह आज भी उसकी चुचियाँ बाहर आने को बेताब थीं और मेरे लंड का भी बुरा हाल कर दिया उसने फिर कविता और पूजा आपस में बात करने लगीं और नेहा नहाने चले गयी. तभी मेरे फोन पे एक मैसेज आया और में खिड़की से हट गया मैसेज पड़ने लगा मैसेज मेरे मैनेजर का था जिसमें उसने लिखा था कि एक मेल सेंड की है और मैं उसे चेक कर लूँ मैंने लैपटॉप उठाया और मेल चेक करने लगा मैं मेल तो पड़ रहा था पर मेरी आँखों में तो पूजा ही पूजा छायी हुई थी मैंने मेल चेक कर के लैपटॉप बंद किया और बिस्तर पर लेट के सोचने लगा कि कैसे पूजा से बात की जाये क्यों कि मुझे लड़कियां पटाने का ज्यादा अनुभव तो था नही फिर मैंने सोचा कि एक बार बात करने में क्या जाता है क्या पता काम बन जाये..

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दोस्तों आज के लिए इतना ही कहानी जारी रहेगी बस आप लोगों के सुझाओं और सहयोग का इंतजार है. कहानी कैसी जा रही है जरूर बताइयेगा अगर लिखने में कमियां आ रही हैं तो वो भी स्पष्ट कहियेगा धन्यवाद..!! :)
 
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थोड़ी देर बाद नेहा भी नहा के आ गयी और फिर तीनों की चपर चपर शुरू हो गयी एक के बाद तीनों अपनी अपनी कहानियाँ सुनाने में लग गये जैसे कि अक्सर लड़कियाँ करती हैं कि किसका पहला बॉयफ्रेंड कौन था और किस ने कभी तक किस की या नही वगैरह वगैरह मैंने सोचा कि रूम के अंदर बोर होने से अच्छा क्यों ना इनके साथ बातचीत की जाये और मैं भी बाहर आ गया और रूम के आगे खड़ा हो गया तीनों अपनी गपशप में लगी थी जैसे बरसों बाद मिली हों और आज बात करने का लास्ट दिन हो. मैंने पूजा की ओर देखते हुए हाय बोला लेकिन उसने कुछ जवाब नही दिया उसकी जगह कविता बोल पड़ी हाई, मैंने सोचा पूजा की तरफ से रिस्पांस नही आ रहा तो क्यों ना कविता से ही शुरुवात करी जाये वैसे भी कविता मुझे ओपन और फ्रेंक लगी मैंने पूछा शिफ्टिंग हो गयी सही से इस बार नेहा बोली हा शिफ्टिंग तो हो गयी है बस थोड़ा टाइम लगेगा एडजस्ट होने में. मैं पूजा से बातचीत करना चाह रहा था लेकिन वो मुझसे नजरें चुरा रही थी और फिर वो मुझे कुछ काम है बोल के अंदर चले गयी.

मैं कविता से बात करता रहा बातों-बातों में पता चला कि ये तीनों एक ही कॉल सेंटर में जॉब करते थे कविता बिहार से थी, नेहा मेरठ से और पूजा देहरादून से थी तीनों की मुलाकात इसी कम्पनी के इंटरव्यू में हुई थी और जॉब लगने के बाद तीनों ने एक साथ रूम ले लिया और तीनों को एक साथ रहते हुए 6 महीने हो गये थे हम बातचीत कर ही रहे थे कि नेहा बोल पड़ी मैं चाय बना के लाती हूँ आप चाय पीते हैं ना? मैंने हाँ कर दी और नेहा चाय बनाने चले गयी अब मैं कविता अकेले रह गए फिर कविता ने मुझसे मेरे बारे में पूछना शुरू किया और मैं भी उसे अपने बारे में बताता चला गया कविता से बात करते समय मेरी नजरें कई बार उसके सीने के उभारों पे चली जाती थी और मेरा लंड जीन्स में झटके मारने लग जाता था. कविता ने भी ये ताड़ लिया था कि मैं चोरी चोरी उसकी चुचियों को देख रहा हूँ मगर उसने कुछ कहा या किया नही जैसे उसे पता नही चल रहा कि मेरी नजरें कहाँ हैं..

बातों बातों में कविता ने पूछ लिया आपकी शादी हो गयी तो मैंने नही में जवाब दिया बोली गर्ल फ्रेंड तो होगी, मैंने फिर नही में जवाब दिया तो वो हँसने लगी और बोली क्यों कोई पसंद नही आयी या कोई पटी नही मैंने भी कहा यार पसंद तो बहुत आयी मगर कमबख्त कोई पटती ही नही है इस बार वो फिर हँस पड़ी बोली मुझे लगता तो नही है कि आपकी कोई गर्लफ्रेंड नही होगी चलो कोई नही अगर आप कहते हो तो मान लेती हूं, कविता काफी खुले दिमाग की लड़की थी और बहुत ही फनी भी इतनी जल्दी मुझसे काफी घुल मिल गयी थी. मेरी नजरें कविता की गाँड़ पे भी बार जा रही थी जिसे देख के कविता को जैसे मजा आ रहा था और आता भी क्यों ना लड़कियों को तो इच्छा ही इसी बात की होती है कि लड़के उनके हुश्न के दीवाने हो जाएं..

कविता को देख के मुझे उम्मीद की किरण नजर आने लगी कि यहाँ मेरा काम बन सकता है और जैसे ही में बात आगे बढ़ाने वाला था कि नेहा चाय बना के आ गयी और उसके साथ मे पूजा भी थी पूजा को देखते समय तो में दुनियाँ को भुल सा जाता था नेहा ने सबके लिए कपों में चाय डाली और सबको चाय उठाने को बोला मैंने और कविता ने एक साथ हाथ बढ़ाया और एक ही कप पे जिससे मेरा हाथ उसके हाथ से टच हो गया और हम दोनों ही एक दूसरे को देख के मुस्कुरा पड़े और मैंने सॉरी बोलते हुए हाथ वापस कर लिया और दूसरा कप उठा लिया फिर बिस्कुट लेने की बारी आई तो इस बार मैंने जानबूझ के कविता के हाथ को अपने हाथ से टच किया और कविता की ओर देखा मगर उसने कोई रिएक्शन नही किया और मुझे बड़ी खुशी हुई. थोड़ी देर में सबने चाय खत्म कर ली और फिर बातें शुरू हो गयी ज्यादातर बातें तो मैं और कविता ही कर रहे थे, नेहा बीच-बीच में थोड़ा बोल रही थी मगर पूजा बात नही कर रही थी वो अपने मोबाइल में लगी हुई थी मैंने भी सोचा क्यों ना पहले जहाँ उम्मीद ज्यादा है वहाँ फोकस करता हूँ और मैंने अपना ध्यान कविता पे लगा ..
 
कविता से बातें करते करते मुझे अंदाजा लग गया कि कविता ही मेरी पूजा तक पहुँचने वाली सीढ़ी है और में इस सीढ़ी पर बहुत जल्दी चढ़ना भी चाहता था. आज संडे था और छुट्टी का लास्ट दिन तो में आज के दिन का पूरा फायदा उठाना चाहता था क्यों कि इन तीनों का सिक्स डे वर्किंग होता था वो भी रेंडमली कभी मंडे, कभी वेडनेसडे और कभी फ्राइडे कविता अपनी जॉब से खुश नही थी और वो जॉब चेंज करना चाहती थी मैंने उसे बताया कि मेरी टीम में भी एक बंदे की आवश्यकता है वो चाहे तो मैं वहाँ उसका जुगाड़ करवा सकता हूँ यह सुनते ही कविता बहुत खुश हो गयी और बोली प्लीज़ यार मेरा अपनी कंपनी में करवा दो मैं बीपीओ में काम कर कर के परेशान हो गयी हूँ और मेरा बिल्कुल भी मन नही करता वहाँ काम करने का मैंने बोला ठीक है अपना रिज्यूम सेंड कर देना मैं बात कर लूंगा और उसे अपनी ईमेल आई डी देदी. कविता ने मेरे से मेरा कॉन्टैक्ट नम्बर मांगा तो मैंने कहा तुम अपना नम्बर दो मैं मिस कॉल करता हूं उसने अपना नंबर बताया और मैंने तुरंत उसका नम्बर सेव करके डायल कर दिया उसने भी मेरा नंबर सेव कर लिया फिर थोड़ी देर ऐसे ही बातचीत चलते रही और इसी बीच बीच मेरी नजर उसकी चुचियों और गाँड़ पे चली जाती और कविता मुस्कुराते रहती..

बातें करते करते 12 बज गए और फिर काफी देर से हाँ-हूं कर रही नेहा बोली कविता वो समान ढूंढना है और कपड़े भी तैयार करने है मंडे के लिए और उसने कविता को मुझसे छुपा के बातें बंद करने का इशारा किया जो कि मैंने देख लिया मैं समझ गया और मैंने खुद ही बोल दिया कि मुझे कुछ काम है और में वहाँ से उठा और कविता की ओर देखा तो उसके चेहरे पे भी नाराजगी के भाव थे शायद वो भी मुझसे और बात करना चाहती थी. मैंने दोनों को बाय बोला और अपने रूम में आ गया और वो तीनों अपने कमरे में चली गयी मैं भी खाली था तो सोचा थोड़ा आराम कर लूं और बिस्तर पर लेट गया और थोड़ी देर बाद मुझे नींद भी आ गयी. कुछ समय के बाद मेरी नींद खुली मैंने टाइम देखा तीन बज रहे थे और मुझे भूख भी लग आयी थी मैंने खिचड़ी बनानी शुरू कर दी और खिचड़ी कुकर में रख के में खिड़की पे आ गया और सामने वाले रूम की आवाज सुनने की कोशिश की मगर वहाँ से कोई मूवी चलने की आवाज आ रही थी मैं बोर हो रहा था फिर मुझे याद आया कि सुबह मैंने कविता का नंबर लिया था मैंने कविता के नंबर पे व्हाट्सअप किया- हाई मगर वहाँ से कोई रिप्लाई नही आया मुझे लगा शायद वो सो रही होगी या फिर मूवी में बिजी होगी और फिर मैंने दुबारा मेसेज नही किया और खिचड़ी बनने का इंतजार करने लगा और कुछ मिनटों बाद खिचड़ी बन गयी और में खिचड़ी खा के फिर बिस्तर पे लेट गया और जैसे ही फोन हाथ में लिया तो उसमें एक व्हाट्सएप्प नोटिफिकेशन था मैंने ओपेन किया तो कविता का रिप्लाई आया था-हेलो

मैं: क्या कर रही हो?

कविता: कुछ नही मूवी देख रही हूँ तुम क्या कर रहे हो?

मैं: मैं तो बोर हो रहा हूँ

कविता: अगर बोर रहे हो तो अपनी गर्ल फ्रेंड से बात कर लो

मैं: वो अभी सो रही है इसलिए बात नही कर सकती, मैंने उससे मजे लेने के लिए बोल दिया.

इस बार कविता का कोई रिप्लाई नही आया.

मैं: हेलो आर यु देर?

कविता: काफी देर बाद, अगर वो सोई है तो उसे कॉल करके जगा लो फिर बात कर लो.

कविता: मैंने तो पहले की कहा था कि तुम्हारी जरूर कोई गर्लफ्रेंड है तो फिर मुझसे झूट क्यों बोला?

उसकी बातों में साफ नाराजगी दिख रही थी जैसे वो मेरी बीवी हो.

मैं: ये लो हुजूर के भी अजीब अंदाज हैं खुद मेरी गर्लफ्रेंड बनाते रहते हैं तो कुछ नही मैंने बोल दिया तो इतना गुस्सा ये तो नाइंसाफी है //cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f61f.svg

कविता: मैं भला क्यों गुस्सा होउंगी मैं तुम्हारी बीवी थोड़े ना हूँ //cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f614.svg

मैं: मैंने तीर फेंका और बोला गर्लफ्रेंड तो हो //cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f61c.svg

कविता: क्या मतलब //cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f621.svg

मैं: हा हा हा- बस मजाक कर रहा था

कविता: ओके कोई नही

फिर ऐसे ही हमारी व्हाट्सअप पे बात होती रही और मैंने कविता को कुछ सॉफ्ट नॉनवेज जोक्स सेंड कर दिए मुझे लगा कही गुस्सा ना हो जाये मगर उसने भी मुझे वैसे ही जोक्स बदले में भेज दिए अब मुझे अपनी राह आसान होती दिख रही थी मैंने पूछा कि क्या उसका कोई बॉय फ्रेंड है?

वो बोली हा है उससे हा सुन के मुझे अपना मकसद खतरे में लगा मैंने पूछा कौन है? वो बोली तुम. मैं बोला क्या तो वो बोली मैं भी मजाक कर रही हूं अब हम दोनों गर्लफ्रेंड-बॉयफ्रेंड जैसी मजेदार बाते कर रहे थे.

मैंने पूछा क्या वो डिनर पे चलेगी मेरे साथ? तो वो बोली एक दिन की ही मुलाकात में डिनर पे ले जाना चाहते हो? मैंने भी फेंका मैं तो तुम्हें रोज डिनर पर ले जाना चाहता हूँ, इस जवाब पे उसने बहुत सारी //cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f601.svg//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f601.svg//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f601.svg//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f601.svg//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f601.svg//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f601.svg स्माइल्स दी जैसे उसे मेरा ऑफर बहुत पसंद आया लेकिन लड़की तो लड़की होती है बोली आज नही फिर कभी. मैंने भी ओके कहा और बोला प्रॉमिस करो तो उसने बोला प्रॉमिस नही कर सकती तो मैंने प्लीज़ प्लीज़ करके उससे प्रॉमिस ले ही लिया मैंने पूछा कि उसका ऑफ कब है तो उसने बताया कि इस शनिवार को उसका ऑफ है यह सुनते ही मैं खुश हो गया क्यों कि मेरा तो शनिवार और रविवार दोनों ही दिन ऑफ था, थोड़ी देर और ऐसी ही बात करने के बाद उसे कुछ काम करना था तो उसने बाय बोला और मैं भी ऑफिस की मेल चेक करने लगा..

शाम के 7 बज रहे थे मैं खाना बनाने की तैयारी कर रहा था वो तीनों भी खाना बना रही थी और साथ मे और काम भी मेरा ध्यान तो बस जल्दी से जल्दी कविता को पटा के उसको चोदने की तैयारी में लगा था अब तो में बस उसकी चूची और गाँड़ के ख्यालों में खोया रहता था इन्ही ख्यालों में खोये खोये खाना भी गया और खाना खा के सोने चला गया नींद आती तो कैसे मेरा मन तो कविता की कविता सुनने के लिए उतावला हुआ जा रहा था..
 
Bahut bahut dhanyawaad raj bhai, me bade update post karunga aur mujhe bahut achha laga aapka sujhaav bas aap aise hi maargdarshan karte rahiyega.. :)
 
दोस्तों तबियत खराब होने के कारण अपडेट में हुई देरी के लिए माफी चाहता हूँ और अब कहानी में आगे चलते हैं..

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मुझे बिस्तर पर पड़े पढ़े नींद नही आ रही थी तो मैंने सोचा क्यों न कविता से ही मजे लिए जाएं और मैंने उसे हाई का मैसेज किया और उसके साथ आंख मारने वाला स्माइली भी सेंड कर दिया दो मिनट बाद कविता का भी हेलो आया और उसके साथ में उसने हँसने वाला स्माइली सेंड कर दिया, मैंने पूछा क्या कर रही हो तो उसने बताया खाना खा के सो रही थी तुम क्या कर रहे थे? मैंने बोला मैं तुम्हारे बारे में ही सोच रहा था. वो बोली अच्छा मेरे बारे में क्या सोच रहे थे? मैंने कहा यार अब बताऊंगा तो तुम्हें यकीं नही आएगा और तुम फिर हँस पढ़ोगी वो बोली नही नही तुम बताओ तो, मैंने सोचा यही मौका है चांस मारने का मैंने बोल दिया यार मेरा मन सुबह से तुम्हारे ही ख्यालों में ही खोया है, दिल करता है हर समय तुम्हारे ही पास रहूँ और तुमसे ही बातें करता रहूँ मुझे लगा शायद कविता ऐसी बातों से पट जाएगी लेकिन कविता भी अनुभवी खिलाड़ी थी और उसे लड़कों के इस प्यार का अंजाम अच्छी तरह पता था तो उसने जवाब दिया अच्छा एक दिन में ही ऐसी हालत?

मैंने कहा प्यार में समय नही देखा जाता एहसास मायने रखते हैं और हँसने वाला स्माइली सेंड कर दिया. कविता बोली अच्छा चलो अब ज्यादा फ़्लर्ट मत करो और सो जाओ कल ऑफिस के लिए रेडी होना है और फिर उसने गुड नाईट बोल दिया मैंने भी गुड नाईट के साथ किश वाला स्माइली भेज दिया लेकिन उसके बाद कविता का कोई मैसेज नही आया शायद वो सो गयी थी मेरा भी आधा काम हो चुका था अब दिल्ली ज्यादा दूर नही थी जैसे तैसे करवट बदल के नींद आयी रात भर सपनों में कविता आते रही. सुबह मेरी नींद सात बजे खुली और जैसे ही मोबाइल ओपन किया तो कविता के मैसेज पड़े थे, गुड़ मोर्निंग जनाब उठे कि नही मैंने भी गुड मॉर्निंग बेबी के साथ फिर किस सेंड कर दिया मगर कविता का कोई रिप्लाई नही आया और में फ्रेश होने चला गया सामने से भी कोई आवाज नही आ रही थी तीनों शायद ऑफिस के लिए तैयार हो रही थी. 7:30 हो रहे थे और क्यों कि मेरे पास ज्यादा कुछ करने को कुछ था नही और ऑफिस के लिए अभी काफी टाइम था तो मैं अपने रूम के बाहर आ गया और बाहर फिर मुझे पूजा उसी पोज में अपने बाल सुखाते दिख गयी मगर आज उसने जीन्स और टीशर्ट पहनी हुई थी और उसकी पीठ मेरी और थी उसकी टाइट गाँड़ देखते ही मेरा लंड पूरा खड़ा हो गया वो बाल सुखाते रही और मैं उसे देखते हुए अपना लंड मसलता रहा और बाल सूखा के वो अंदर चले गयी और मैं आह भर के रह गया और मैं भी नाश्ता बनाने अंदर आ गया.

मैं नाश्ता बना ही रहा था कि तभी दरवाजे पे दस्तक हुई मैंने कहा अंदर आ जाओ और तभी मैं चौंक गया सामने कविता खड़ी थी और दरवाजे से ही बोली क्या आपके पास आई फोन का चार्जर है वो मेरा चार्जर काम नही कर रहा है, मैं तो पहले उसे देखता ही रह गया आज कविता तंग सूट पहन के आयी थी मैंने उसे अभी तक सिर्फ जीन्स और टीशर्ट में ही देखा था लेकिन आज सूट में तो कविता बिल्कुल पंजाबी कुड़ी लग रही थी मैं उसी को देख ही रहा था कि उसने फिर पूछ लिया क्या आपके पास आई फोन का चार्जर है? मैंने कहा हा हा क्यों नही आप अंदर आइये ना वो बोली नही फिर कभी अभी आफिस का टाइम होने वाला है, मैंने कहा ऐसा कैसे हो सकता है आप पहली बार आये हो और बिना दरवाजे से ही चले जाओगे प्लीज अंदर आ जाइये, घबराइए नही मेरा कोई क्रिमनल रिकॉर्ड नही है और यह सुन के कविता हँस पड़ी और मैंने पूछा क्या लेंगी आप चाय या पानी, माफ करना अभी तो बस ये दो चीज ही हैं मेनू में और वो फिर हंस पड़ी और बोली जो आप पिलाना चाहें मैंने बोला बस आप दो मिनट बैठो में अभी गर्मा-गर्म चाय बनाता हूँ और मैं चाय बनाने लगा और बनाते बनाते बातचीत शुरू कर दी..

चैट पे तो हम थोड़ा खुल के बात कर रहे थे मगर सामने बिल्कुल नार्मल जैसे हाल चाल, जॉब, काम वगैरह बातों बातों में चाय बन गयी और मैंने उसे चाय का कप दिया और बोला कविता चाय पी के बताओ कि पीने लायक बनी भी है कि नही, कविता ने पहला सीप लिया और बोली अरे वाह आप तो बहुत अच्छी चाय बनाते हो मैंने कहा जी आज पहली बार इतनी अच्छी चाय बनी है और वो फिर हंस पड़ी और बोली क्या आप हमेशा फ़्लर्ट के मूड में रहते हैं मैंने कहा नही बस आपके सामने और फिर हँसते हुए बोला जस्ट जोकिंग इसी तरह हँसी मजाक चलते रही मेरी नजरें तो बार बार उसकी मोटी गोल चुचियों पर चले जाती थी एक दो बार कविता की नजरों ने मेरी नजरों को पकड़ा भी मगर ऐसा दिखाया जैसे उसे पता ना हो थोड़ी देर मैं चाय खत्म हो गयी तो मैंने उसे चार्जर दे दिया और वो बोली मैं थोड़ी देर में चार्ज करके दे दूंगी मैंने कहा कोई बात नही आप आराम से देना मैंने देना शब्द थोड़ा जोर देकर कहा तो उसने भी मुस्कुरा के कहा ठीक है फिर आराम से ही दूंगी, उसने भी आराम शब्द को जोर देकर बोला जिससे मेरी हिम्मत और खुशी दोनों दुगनी हो गयी अब तो मुझे यकीन हो गया था कि मेरा चार्जर इसका फोन चार्ज करेगा और मैं इसको और फिर वो चार्जर ले के चले गयी.

उसके जाने के बाद मैं नहाने चला गया और नहाते नहाते कविता को इमेजिन करने लगा आज तो सूट में कहर ढा रही थी मैं खयालों में खो गया कि मैं उसके मोटी मोटी चुचियों को चूस रहा हूं उसकी भारी गाँड़ सहला रहा हूँ उसकी फूली हुई चूत चाट रहा हूँ और यही सोचते सोचते मेरा लंड तन के मेरे पेट से चिपकने लगा और मैंने मुठ मारना शुरू कर दिया और जब मेरा लावा बाहर निकला तब थोड़ा सकूं मिला मैं नहा के रेडी हुआ और बाहर आके देखा तो सामने वाला रूम लॉक था तीनों हसीनाएं आफिस के लिए निकल चुकी थी और में भी अपने ऑफिस के लिए निकल पड़ा..

दिन भर आफिस में काम करता रहा शाम को रूम पे आ गया सामने वाले रूम में अभी तक कोई नही आया था तभी नीचे से दो लोगों की बातचीत सुनाई दी मैंने देखा तो नेहा और उसके साथ एक लड़का दोनों ऊपर ही रहे थे और मुझे समझने में देर नही लगी कि ये नेहा का बॉयफ्रेंड है मैं तेजी से अपने रूम में चला गया और अपनी खिड़की पे खड़ा हो गया मैंने देखा उस लड़के ने नेहा की कमर में हाथ डाला और उसके साथ अंदर चला गया अंदर जाते ही उसने दरवाजा बंद कर दिया मैं समझ गया कि अंदर क्या हो रहा है मैंने अपनी खिड़की से उनकी खिड़की पे नजर डाली जिससे कुछ दिख सके मगर खिड़की बंद थी और मुझे बस अनुमान ही लगाना पड़ा कि अंदर क्या हो रहा है लगभग एक घंटे उस रूम का दरवाजा खुला और नेहा का बॉयफ्रेंड बाहर निकला और चला गया और नेहा ने इधर उधर देखा और अपना दरवाजा बंद कर दिया..

दोस्तों आज के लिए इतना ही अगला पोस्ट जल्दी ही दूंगा आपके साथ और सहयोग के लिए बहुत बहुत धन्यवाद..!!
 
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