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मेरा चुदाई का सफ़र

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तब तक भाभी ने मेरा लंड मेरी पैंट से निकाल लिया था और उसको बड़े गौर से देख रही थी, वो सीधा रॉड की तरह एकदम खड़ा था और इधर उधर झूल रहा था।

मैंने भी भाभी की साड़ी चूत के ऊपर कर दी थी और उसकी सफाचट चूत को बड़े ध्यान से देख रहा था।

मैं बोला- आपकी चूत इतनी सुन्दर है लेकिन अगर इस पर बाल होते न, तो यह और भी सेक्सी लगती। मुझको बालों से भरी चूत बहुत ज़्यादा पसंद है।

भाभी बोली- अगली बार आऊँगी तो इस पर घने बाल उगा कर लाऊंगी सिर्फ तुम्हारे लिए सोमू।

मैंने चूत पर हाथ लगाया तो वो बहुत ही गीली हो रही थी, मैं बिना अपनी पैंट उतारे ही भाभी पर चढ़ गया, भाभी ने भी अपने टांगें फैला दी थीं और चूत एकदम से सामने आ गई थी।

मैंने धीरे से लंड को चूत में डाला और फिर आहिस्ता से अंदर बाहर करने लगा, गीली चूत होने के कारण फच फच की आवाज़ आने लगी।

मैं धीरे धीरे चुदाई की स्पीड बढ़ाने लगा, फिर मैंने भाभी के चूतड़ों के नीचे हाथ रख दिए और चूत को ऊपर उठा दिया ताकि लंड पूरा अंदर तक जा सके।

कभी तेज़ और कभी धीरे और कभी पूरा निकाल कर सिर्फ आगे का हिस्सा अंदर और फिर कभी लंड के मुंह को भाभी के भग पर रगड़ना… इन सब तरीकों से मैं भाभी को चोद रहा था और मेरी इस मेहनत का फल यह मिला कि भाभी का जब छूटा तो वो इतने ज़ोर से चिल्लाई और उसका सारा जिस्म एकदम से अकड़ गया, मुझको इतने ज़ोर की जफ़्फ़ी डाली कि मेरा अंग अंग चरमरा गया।

मैं भाभी का छूटने के बाद भी अपने लंड को चूत के अंदर डाले ही भाभी के ऊपर लेटा रहा और मैं भाभी के मम्मों को ब्लाउज के ऊपर से चूमने लगा।

तब भाभी अपनी टांगें सिकोड़ने लगी, जिसका मतलब था कि मैं उनके ऊपर से हट जाऊ।ं।

मैंने भाभी को एक हॉट किस की और फिर उठ गया और अपने कमरे में आ लेट गया।

फिर ना जाने कब मेरी नींद लग गई.

रात को कम्मो ने भाभी को पूरी बात समझा दी थी कि कैसे गर्भाधान की क्रिया शुरू होगी और कैसे इसका समापन होगा और यह भी बता दिया था कि इस सारे काम में 2-3 दिन लग सकते हैं।

भाभी ने कहा था कि वो कोशिश करके भैया को एक आध दिन और रोक लेंगी अगर इसकी ज़रूरत पड़ी तो!

रात को जब मैं और भाभी खाना खा चुके तो कम्मो हमारे लिए एक खास खीर बना कर ले आई जो हम दोनों को खानी थी।

खीर अति स्वादिष्ट थी और मैंने और भाभी ने दो दो बार खाई।

फिर हम दोनों मेरे बेडरूम में आ गए और एक दूसरे को देखने लगे।

तभी कम्मो आ गई बोली- छोटे मालिक, आप कुरता पायजामा पहन कर तैयार हो जाइए, मैं भाभी को ख़ास तौर से तैयार करके लाती हूँ।

कम्मो और भाभी उनके कमरे में चली गई और मैं वहीं बैठा बोर हो रहा था।

थोड़ी देर बाद वो भाभी को शादी वाले जोड़े में सजा कर लाई मेरे कमरे में! आते ही उसने कहा- हज़ूर नवाब साहिब, आपकी मलिका सुहागरात के लिए तैयार है।

मैं भी उसी लहजे में बोला- ऐ हसीं बांदी, क्या तुम्हारी मलिका हुसन का मुजस्मा है?

वो बोली- आप खुद ही उनका दीदार कर लीजिये, यह हुस्न का तौहफा आपके लिए यह कनीज़ ख़ास तौर से तैयार करके लाई है।

मैं बोला- बहुत खूब ऐ खूबसूरत कनीज़, तुमने हमारी बहुत अरसे की दिली मुराद को पूरा किया है, हम तुमको इनामात से सरोबार कर देंगे।

कम्मो बोली- अगर जान की ईमान पाऊँ तो अर्ज़ करने की गुस्ताखी कर रही हूँ कि आप और मालिकाए आला की मदद करने के लिए यह नाचीज़ आपके इस शाही हरम में आपके रूबरू रहने की इजाज़त मांगती है!

तभी भाभी घूँघट की आड़ से बोली- अरे तुम यह क्या गिटर पिटर कर रहे हो, कुछ समझ नहीं आ रहा कि क्या बोल रहे हो तुम दोनों।

यह सुनना था कि मैं और कम्मो ज़ोर से हंस दिए, इस सारे चक्कर में भाभी का घूंघट भी खुल गया था और वो हैरत से हम दोनों को देख रही थी कि इन दोनों को क्या हुआ है जो खामख्वाह ही हंस रहे हैं।

कम्मो ने भाभी का चेहरा फिर घूंघट में डाला और उनको पलंग पर बैठा दिया।

मैं धीरे से सजी धजी भाभी के करीब जा ही रहा था कि उससे पहले ही कम्मो ने मुझको एक गुलाब का फूल पकड़ा दिया और आँखों से इशारा किया कि यह मैं भाभी का घूंघट उठाने के बाद उनको पेश करूँ।

मैंने ऐसा ही किया, बड़े धीमे से भाभी का घूंघट उठाया और उनको गुलाब का फूल पेश किया और बोला- माशाल्लाह, क्या हुस्न है ऐ मलिका-ऐ-आलिया… मेरे ख्वाबों की हसीं परी, आपकी खिदमत में यह अदना सा तौहफा पेश है।

भाभी बोली- सोमू यार, यह क्या चल रहा है? कहाँ है मलिका-ऐ-आलिया और कहाँ है मेरा तौलिया?

इतना सुनना था कि मेरा और कम्मो का हंसी के मारे बुरा हाल हो रहा था।

भाभी हैरान और परेशान हम दोनों को टुकर टुकर देख रही थी।

फिर कम्मो ने भाभी को समझाया कि यह सिर्फ एक खेल है जो हम अक्सर एक दूसरे के साथ खेलते हैं क्यूंकि लखनऊ एक नवाबों का शहर है इसलिए लखनवी तहज़ीब तो दिखानी ही पड़ेगी ना!

कम्मो खेल को आगे बढ़ाते हुए बोली- छोटे मालिक, आप अब आगे बढ़ कर मलिका-ऐ-आलिया का घूंघट हटा दीजिये।

घूँघट हटने के बाद मैंने उनके लबों को चूम लिया और उनके सारे जिस्म को गौर से देखने लगा जैसे कि अक्सर नया दूल्हा अपनी नई ब्याहता दुल्हनिया को बड़ी उमंग से देखता है।

मैं बोला- ऐ लखनऊ की हसीं दर हसीं मलिकाये-आलिया, अगर आपकी इजाज़त हो तो मैं आपके संगमरमरी जिस्म को देखने की जुर्रत कर सकता हूँ क्या?

तब भाभी भी मलिका-ऐ-आलिया के रोल को खलते हुए बोली- ऐ हमारे सरताज, इस लौंडिया की क्या हिम्मत जो नवाब-ए-अवध को हमारे इस अदना से जिस्म को ना देखने देने की जुर्रत कर सके!

इतना सुनना था कि मैं पहले भाभी की साड़ी उतारने लगा और इस काम में कम्मो भी पूरी तरह से शामिल हो गई, पहले धीरे से उनकी साड़ी उतार दी फिर उनके ब्लाउज पर हाथ साफ़ किया और आखिर में उनके पेटीकोट को उतार दिया।

तब भाभी ने आगे बढ़ कर मेरे पायज़ामे का नाड़ा खोल दिया और कुरता भी उतार दिया, मेरे खड़े लंड को झुक कर भाभी ने प्रणाम किया और कहा- हे लंडम, जी मुझको एक पुत्र प्रदान करो!

मैंने भी एक हाथ ऊँचा कर के कहा- तथास्तु… पुत्रवती भव!!!

कम्मो भी मुस्कराते हुए बोली- चलो, अब आगे की कार्यवाही शुरू करते हैं। छोटे मालिक अब आप भी शुरू हो जाएँ।

मैंने झुकी हुई भाभी को अपने हाथों से उठाया और कहा- भाभी, नाटक खत्म हुआ, अब आप बताओ कैसे चुदना पसंद करेंगी?

भाभी शर्माते हुए बोली- जैसे तुम चाहो और जिससे बच्चा होने की संभावना अधिक हो, वैसे ही चोदो मुझको।

मैं बोला- इस मामले की माहिर तो अपनी कम्मो रानी है, वो ही बता सकती है कि कैसे चुदाई करें हम! डॉक्टर कम्मो रानी, आप बताओ कैसे चोदना है भाभी को?

इस बीच भाभी मेरे लंड से खेल रही थी और उसको इधर उधर कर रही थी लेकिन वो फिर अटेंशन में सीधा खड़ा हो जाता था।

कम्मो ने कहा- सबसे पहले भाभी को घोड़ी बना कर चोदेंगे आप छोटे मालिक, जैसे आप पहले भी कर चुके हैं, जब मैं इशारा करूँगी आप अपना वीर्य भाभी की चूत में छोड़ेंगे। आगे मैं देख लूँगी, ठीक है?

अब मैंने भाभी को गले से लगा लिया और उनके मोटे और मुलायम चूतड़ों को दबाने लगा। भाभी भी अपनी चूत को मेरे खड़े लंड से रगड़ रही थी।

इसी तरह हम एक दूसरे को गले लगा कर प्रगाढ़ आलिंगन में बंधे हुए सारे कमरे का चक्कर लगाने लगे।

मेरा लौड़ा भाभी की चूत के ऊपर हल्की हल्की रगड़ लगा रहा था जिससे भाभी का जोश एकदम से बहुत तीव्र हो रहा था।

फिर मैं एकदम से नीचे बैठ गया और अपना मुंह भाभी की चूत में डाल दिया। भाभी वहीं लेटने लगी लेकिन कम्मो उनको उठा कर ऊपर पलंग पर ले गई और मुझको भी वहाँ आने का इशारा करने लगी।

भाभी ने पलंग पर लेटने के बाद अपनी गोल सफेद टांगों को खोल दिया और मैंने झट से अपनी पोजीशन लेकर उनकी चूत को चाटना शुरू कर दिया।

थोड़ी देर में ही भाभी इतनी गर्म हो गई कि उन्होंने मुझको मेरे बालों से पकड़ कर मुझको चूत से हटा कर अपने ऊपर कर लिया और मेरे मुंह को बेतहाशा चूमने लगी।

मैंने भी उनकी चुम्मियों का जवाब वैसे ही दिया और फिर उनको घोड़ी बनने के लिए उकसाया।

जब भाभी घोड़ी बन गई तो मैं भी उस चूतड़ों के बीच से अपना लंड उनकी उभरी हुई चूत में धीरे धीरे डालने लगा, लंड जब पूरा अंदर चला गया तो मैं ज़रा रुक गया और आज की भाभी की चूत की पकड़ को सराहने लगा, इतनी तेज़ और मज़बूत पकड़ भाभी की चूत में पहले कभी नहीं थी, यह ज़रूर कम्मो की ख़ास डिश का कमाल था।

अब मैंने धीरे धीरे चुदाई की स्पीड बढ़ा दी, लंड को पूरा निकाल कर फिर धीरे से अंदर डालने का क्रम शुरू कर दिया। लंड पूरा निकाल कर धीरे धीरे से पूरा डालना भी एक कला होती है जो चूत के शहसवार अच्छी तरह से जानते हैं क्योंकि लंड को पूरा निकालने का मतलब है कि लंड की टिप कभी भी चूत के बाहर नहीं आनी चाहिए।

इस तरीके से पूरे लंड का घर्षण और गर्जन कायम रहता है और औरतों को लंड का पूरा मज़ा मिलता रहता है।

और उधर कम्मो भी भाभी को गर्म करने की कोशिश कर रही थी, वो उसके गोल और मोटे मम्मों के साथ खेल रही थी।

फिर वो भाभी की चूत में हाथ डाल कर उसकी भग को रगड़ने लगी, थोड़ी देर में भाभी खूब हिलते हुए झड़ गई।

मैंने अपनी चुदाई स्पीड फिर एकदम आहिस्ता कर दी ताकि भाभी को फिर गर्म करके उसका एक बार और छुड़ाया जाये।

मैं अब पूरा का पूरा लंड एक साथ अंदर डाल कर उसको भाभी की चूत में थोड़ा थोड़ा घुमाने लगा, यह स्टाइल भाभी को बहुत पसंद आया और वो जल्दी जल्दी अपने चूतड़ों को आगे पीछे करने लगी।

कम्मो जो अभी भी भाभी की चूत में हाथ डाले हुए थी और उसके भग को रगड़ रही थी, नीचे से ही मुझको इशारा किया और मैं अपने लौड़े का घोड़ा सरपट दौड़ाने लगा।

इस रेस में भाभी एक बार फिर एकदम से अकड़ी और फिर चूतड़ हिलाती हुई झड़ गई और उनकी चूत से बहुत सा पानी नीचे गिरा।

 
अब कम्मो ने मुझको इशारा किया कि मैं अपना छूटा लूँ जल्दी ही!

मैंने लंड से भाभी की चूत के अंदर उसके गर्भाशय के मुंह को तलाश लिया और जब मेरा लंड उनके ठीक गर्भाशय के मुंह पर था तो मैंने अपना वीर्य का बाँध खोल दिया और भाभी की चूत को अपने वीर्य से पूरा भर दिया।

जैसे ही गर्म वीर्य भाभी की चूत और गर्भाशय पर गिरा, भाभी एक बार फिर झड़ गई और वो पलंग पर लेटने की कोशिश करने लगी लेकिन मैंने उनके चूतड़ अपने हाथों में पकड़ रखे थे।

कम्मो ने जल्दी से भाभी के पेट के नीचे 2 मोटे तकिये रख दिए ताकि उनके चूतड़ ऊपर रहें और वीर्य नीचे न बह जाए।

मैं भी उठ कर अपना लंड को साफ़ करने के लिए बाथरूम में चल गया।

तब तक भाभी सामान्य हो चुकी थी।

फिर हम पलंग पर लेट गए, एक तरफ़ कम्मो नंगी लेट गई और दूसरी तरफ़ भाभी, बीच में मैं लेट गया।

भाभी कुछ थकी हुई लगी और वो झट ही सो गईं।

मैंने कम्मो की चूत में ऊँगली डाली तो वो एकदम गीली हो रही थी। मैंने देखा कि भाभी तो काफी गहरी नींद में थी तो मैं पहले कम्मो को चूमता रहा और फिर उसके मम्मों को चूसा और फिर उसकी भग को थोड़ी देर मसला और फिर जब वो मुझको खुद ही लंड से खींच कर अपने ऊपर आने का न्योता देने लगी तो मैं भी उसके ऊपर चढ़ गया।

कम्मो के साथ चुदाई एक इंस्ट्रक्टर के साथ चुदाई के समान था क्यूंकि वो बड़े ध्यान से मेरी हर चेष्टा को देखती थी और जहाँ मैं गलती करता था वो मेरा कान पकड़ने में नहीं हिचकिचाती थी।

लेकिन मैं कम्मो को चोदते हुए ख़ास ख्याल रखता था कि उसके द्वारा बताये हुए तरीके का पूरी तरह से पालन हो क्यूंकि मैं उसके कमज़ोर पॉइंट अब जान गया था तो मुझको अपनी मर्ज़ी के मुताबिक उसको छुटाना आता था। अब भी वैसा ही हुआ, मैंने जल्दी से कम्मो रानी का छूटा दिया और उसके बाद एक मधुर चुम्बन और प्रगाढ़ आलिंगन के बाद हम दोनों सो गए।

सुबह उठा तो देखा कि कम्मो रानी तो नहीं थी लेकिन भाभी मस्त सोई थी। मैं उठा और टेबल पर रखी चाय पीकर अपने कपड़े पहनने लगा।

तब तक मैं नंगी लेटी भाभी के जिस्म को ही देखता रहा, एकदम लेटी औरत सदा ही काफी सेक्सी लगती है।

थोड़ी देर बाद भाभी को वैसे हो सोते छोड़ कर मैं कॉलेज की तैयारी में लग गया और जल्दी ही नहा धोकर तैयार होने लगा।

तब भाभी भी जाग गई और बड़ी ही मस्त अंगड़ाई लेती हुई उठी और मुझको एक बड़ी ही हॉट जफ़्फ़ी डाल दी और फिर मुझको बेतहाशा चूमने और मेरे लंड को पकड़ने लगी।

मैं बोला- क्या हुआ भाभी? इतनी मेहरबान क्यों हो रही हो?

भाभी मुझको कस कर फिर से जफ़्फ़ी डालने लगी और बोली- वाह सोमू राजा, यार तुमने तो कमाल कर दिया।

मैं हैरान होकर बोला- ऐसा क्या किया है मैंने भाभी जान?

भाभी बोली- रात को तुम सोये सोये ही मुझ पर 3 बार चढ़े हो और 2 बार कम्मो पर भी चढ़े, अपने आप चढ़ जाते हो और फिर जब मेरा छूट जाता था तुम अपने आप ही उतर जाते थे। यह कैसे होता है यार? तुम्हारी आँखें तो पूरी तरह से बंद थी।

मैं बोला- मैं खुद नहीं जानता यह कैसे होता है भाभी। अगर मैंने आपको सोये सोये चोद कर गलती की है तो मुझको माफ़ कर दीजिए।

भाभी एकदम प्यार से बोली- नहीं सोमू, मैं तो अपनी हैरानी बता रही थी तुमको!

मैं बोला- मैं अपनी इस कमज़ोरी को जानता हूँ लेकिन कम्मो कहती है कि मेरा शरीर बहुत अधिक यौन क्रिया करने में सक्षम है तो वो बगैर मेरे चाहे ही ऐसा हो जाता है।

इतने में कम्मो भी आ गई और भाभी को सुबह की चाय देते हुए बोली- मैंने सुन लिया है भाभी आप जो कह रही हैं वो बिल्कुल सही है, छोटे मालिक को रात को कुछ नहीं पता रहता कि वो क्या कर रहे हैं।

भाभी बोली- जो सोमू की पत्नी बनेगी, उसकी तो मौज ही मौज है।

कम्मो बोली- अच्छा भाभी, छोटे मालिक तो कॉलेज जा रहे हैं और वापस आकर फिर से आप को चोदेंगे ताकि गर्भ ठहरने की सम्भावना बढ़ जाए। ठीक है न? भैया तो शाम को को ही आएंगे ना?

भाभी ने कहा- वो कह रहे थे कि उनको लौटते हुए शाम हो जायेगी।

कॉलेज से लौटा तो जल्दी से खाना खाकर मैं तैयार हो गया और कम्मो भाभी को ले कर मेरे कमरे में आ गई।

कम्मो बोली- भाभी, जी आपको पूर्ण रूप से कामवासना से ओतप्रोत होना है तो मैं इस काम में आपकी मदद करती हूँ और छोटे मालिक भी यही काम करेंगे।

हम तीनों जल्दी ही वस्त्रहीन हो गए और कम्मो ने भाभी को पलंग पर लिटा दिया, फिर मैंने भाभी के गोल सॉलिड मम्मों को मुंह में ले लिया और उनको चूसने लगा।

काली गोल चूचियों को चूसना भाभी को बहुत अधिक मज़ा देता था, वो काम मैंने शुरू कर दिया।

थोड़ी देर में भाभी गर्मी से उफन गई और उनकी चूत में उंगली डाली तो वो एकदम गीली हो रही थी।

तब कम्मो ने मुझको इशारा किया, मैंने भाभी को पलंग पर चिट लेटा दिया और उनकी चौड़ी संगममर जैसी टांगों में बैठ कर चुदाई का काम शुरू कर दिया।

भाभी जल्दी ही चुदाई में पूरी तरह से रंग गई और खूब ज़ोर ज़ोर से मेरे धक्कों का जवाब देने लगी।

कोई 10-12 मिन्ट बाद मैंने महसूस किया कि भाभी के गर्भाशय का मुंह खुल रहा है और बंद हो रहा है। तभी भाभी का छूट गया और मेरे जांघों को भिगो गया।

अब मैंने फिर धीरे धीरे से और फिर जल्दी ही तेज़ तेज़ चुदाई करने दी।

इस बीच कम्मो भाभी के मम्मों को चूस रही थी और साथ ही उसके भग को भी मसल रही थी।

अब भाभी ने अपनी कमर को ऊपर को उठा कर झटका देना शुरू कर दिया और मैं समझ गया कि भाभी फिर स्खलित होने वाली हैं, मेरे धक्कों की स्पीड बहुत ही तेज़ हो गई और मैंने अपने दोनों हाथ भाभी के चूतड़ों के नीचे रख कर उनको ऊपर उठा लिया और गहरे और तेज़ धक्के मारने लगा।

भाभी जोश में तड़फड़ा रही थी और अपने सर को इधर उधर कर रही थी, कम्मो ने इशारा किया और मैंने भी निशाना साध कर ठीक उनके गर्भाशय पर लंड को बिठा कर अपना तीव्र फव्वारा छोड़ दिया।

मैंने भाभी के चूतड़ों को ऊपर उठाये हुए ही अपने लंड के साथ जोड़ दिया।

कम्मो ने बाद में बताया कि मैं और भाभी एक दूसरे के साथ जुड़े हुए बुरी तरह से कांप रहे थे।

भाभी को नीचे पलंग पर लिटा कर कम्मो ने उनके चूतड़ों के नीचे मोटे तकिये को रख दिया और मुझको नीचे आने के लिए कहा।

मैं बगल में लेट गया और ज़ोर ज़ोर से हांफ़ने लगा, जब थोड़ा हांफ़ना कम हुआ तो कम्मो ने वहीं रखा खास शरबत का गिलास हम दोनों को पकड़ा दिया।

भाभी भी आँख मूंद कर लेटी हुई थी, जब शरबत दिया गया तो उन्होंने पहले मुझको होटों पर किस किया और साथ ही कस के जफ़्फ़ी डाली और कहा- थैंकयू सोमू यार! यू आर ग्रेट!

अब मैं जल्दी से उठा और अपने कपड़े पहन कर बैठक में आ गया क्यूंकि मुझको अंदेशा था कि भैया कभी भी वापस आ सकते हैं।

जब सब सामान्य हुए तो चाय का इंतज़ाम पारो ने कर दिया।

चाय पी कर मैं अपनी कोठी के बगीचे में टहलने लगा।

कोई 6 बजे भैया वापस आये और काफी थके हुए लगे, आते ही नहाये धोये और बैठक में आकर बोले- सोमू यार, मेरा काम यहाँ खत्म हो गया है, कल सवेरे हम निकल जाएंगे अपने गाँव के लिए!

मैंने कहा- अभी कुछ दिन और रुक जाते, बड़ा मज़ा आ रहा था आपके और भाभी के साथ!

भैया बोले- फिर आएंगे और फिर यह मज़ा दोबारा करेंगे।

उस रात हम सब अपने अपने कमरों में सोये और भाभी को कम्मो ने पहले ही कह रखा था कि आज की रात भैया से ज़रूर चुदवाना।

अगले दिन भैया और भाभी जाने के लिए तैयार हो गए थे, कम्मो थोड़ी देर के लिए भाभी को उनके कमरे में ले गई और थोड़ी देर में ही दोनों वापस भी आ गई और दोनों ही बड़ी खुश लग रही थी।

कम्मो ने मुझको आँख मारी और सर हिला दिया जिसका मतलब था कि काम हो गया था।

थोड़ी देर बाद नाश्ता करके वो दोनों अपनी कार में बैठ कर गाँव चले गए और मैं कॉलेज चला गया।

आज कॉलेज के मुख्य गेट पर मुझको शानू और बानो मिल गई।

पाठकों को याद होगा नैनीताल ट्रिप में ये लड़कियाँ उन चार लड़कियों का ग्रुप था जो मेरे संपर्क में आईं थी। और मेरे ही कॉलेज में पढ़ती थी।

शानू बोली- सोमु यार, तुम तो ईद का चाँद हो गए हो, कभी मिलते ही नहीं?

मैं बोला- सॉरी दोस्तो, पीछे कुछ दिन बहुत बिजी था, मेरे घर में बहुत मेहमान आये हुए थे। बोलो क्या सेवा करें आप दोनों की?

शानू बोली- अभी टाइम है कुछ मिन्ट का तुम्हारे पास?

मैं बोला- हाँ हाँ, है क्यों नहीं, आप जैसी हसीनों के लिए टाइम ही टाइम है, तुम अर्ज़ करो क्या काम है?

शानू बोली- चलो फिर थोड़ी देर के लिए कैंटीन चलते हैं अगर कोई पीरियड नहीं है तुम्हारा तो?

मैं बोला- ठीक है आओ!

कैंटीन पहुँच कर मैंने पूछा- क्या खाएंगी या पियेंगी दोनों?

बानो बोली- एक एक कोक मंगवा लो यार!

मैं काउंटर पर गया और 3 कोक का आर्डर दे आया और वापस आकर उन दोनों के साथ बैठ गया।

पाठकों को याद दिला दूँ कि ये दोनों वही लड़कियाँ थी जिन्होंने मेरा अपहरण किया था जब मैं निम्मी और मैरी के कमरे से निकला था नैनीताल के होटल में।

कोक पीते हुए मैं बोला- शानू और बानो, कैसे हो आप दोनों, बड़े अरसे के बाद आपको मेरी याद आई जब कि बहुत सेवा की थी मैंने आप दोनों की नैनीताल में!

शानू हँसते हुए बोली- वही सेवा तो करवाने के लिए आई हैं तुम्हारे पास सोमू राजा।

मैं बोला- बोलो, क्या करना है मुझको?

शानू बोली- तुमने नैनीताल में बताया था कि तुम्हारे पास एक कोठी है जिसमें तुम रहते हो?

मैं बोला- हाँ है तो सही, बोलो क्या काम है?

शानू बोली- नैनीताल वाला किस्सा दोहराना है यार बस, और क्या करना है!

मैं थोड़ी देर चुप रहा और फिर बोला- देखो शानू, वहाँ मेरी हाउसकीपर भी है और एक कुक भी है, वहाँ तुमको वैसी प्राइवेसी नहीं मिल पाएगी जैसा कि नैनीताल में थी। बोलो उनके रहने से तुम दोनों को कोई प्रॉब्लम नहीं तो फिर मैं बात कर लेता हूँ उन दोनों से?

शानू बोली- ठीक है कल सुबह बता देना।

मैं बोला- सिर्फ आप दोनों ही हैं या फिर कोई और भी है?

शानू बोली- अगर किसी और को बुलाएँ तो तुम को ऐतराज़ तो नहीं न?

मैं बोला- कोई और लड़का या लड़की?

बानो बोली- लड़की ही होगी। हम तुमको उससे मिलवा भी देंगे।

मैं बोला- अपने कॉलेज की है या कहीं और की?

शानू बोली- हमारी क्लास फेलो है यार, लंच टाइम में तुम को मिलवा देते हैं उसको!

मैं बोला- उफ़ मेरे मौला 3 तुम और एक मैं?

दोनों हंस पड़ी और शानू बोली- हमने देखा है कि कैसे तुम 4 को भी संभाल लेते हो!

 
मैं बोला- लेकिन हमारी हाउसकीपर की एक शर्त होती है, मेरे साथ जो भी लड़की आती है मेरे घर में वो सारे कार्यक्रम में उपस्थित रहती है और वो उस कार्यक्रम का संचालन भी करती है, बोलो मंज़ूर है?

शानू बोली- यह कैसी शर्त है सोमू यार. एक बूढ़ी औरत का वहाँ क्या काम?

मैं बड़े ज़ोर से हंसा- बूढ़ी औरत? अरे नहीं वो तो 22-23 की है और सेक्स में एक्सपर्ट है, तुम से यही कोई 3-4 साल बड़ी होगी।

शानू बोली- अच्छा हम सोच कर लंच टाइम में तुमको बताती हैं।

फिर हम सब अपनी अपनी क्लासों में चले गए।

लंच टाइम में शानू और बानो मिली और उनके साथ एक बहुत ही खूबसूरत लड़की भी थी जिसका नाम उर्मिला था।

एकदम खिलता हुआ चेहरा, लालिमा भरी रंगत थी उसके चेहरे की और सिल्क की साड़ी में वो बेहद हसीन और सेक्सी लग रही थी। गोल गोल उभरे हुए उरोज और उसी तरह के गोल और मोटे चूतड़।

मैं तो उसको देखता ही रह गया।

फिर मैंने उनसे पूछा- क्यों शानू जी क्या फैसला किया आपने?

शानू बानो और उर्मि को देखते हुए बोली- ठीक है जैसा तुम ठीक समझो!

मैं बोला- एक और बात, क्या आप सब नॉन-वेज हैं या फिर टोटली वेज हैं?

शानू बोली- क्यों यह क्यों पूछ रहे हो?

मैं बोला-वाह शानू जी, आप हमारे घर आएँगी तो हम ठाकुर लोग आपको ऐसे थोड़े ही जाने देंगे? कुछ खातिर वातिर भी तो करना फ़र्ज़ बनता है हमारा।

शानू हँसते हुए बोली- वैसे उर्मि भी ठाकुरों के खानदान से है और हम सब नॉन-वेज हैं।

मैं बोला- ठीक है, कल का लंच आप सब हमारे घर में करेंगी। क्यों ठीक है न?

शानू सबको देखने के बाद बोली- ठीक है सोमू यार, तुम इतनी तक़ल्लुफ़ में क्यों पड़ रहे हो?

जब घर पहुँचा तो कम्मो ने खाना परोस दिया और पास ही बैठ गई।

मैंने उसको सारी बात बताई और कहा- कल लंच और आगे के कार्यक्रम के लिए मैं उन कॉलेज की लड़कियों को बोल आया हूँ और यह भी बता दिया है कि तुम हम सबके साथ रहोगी।

कम्मो हँसते हुए बोली- वाह छोटे मालिक, आप तो दिन पर दिन बहुत ही समझदार हो रहे हो!

मैंने कम्मो को समझा दिया कि उन तीन लड़कियों में से दो तो मैंने चोद रखी हैं और तीसरी मेरे लिये नई कली है। साथ ही मैंने उसके गोल चूतड़ों को साड़ी के ऊपर से दबाना शुरू कर दिया।

वो भी मेरी गोद में आकर बैठ गई, मैंने उस को हॉट किस किया और उसके मम्मों को भी दबाया।

मेरा खाना खत्म हो चुका था, वो बर्तन लेकर चली गई।

उसको ठुमक ठुमक चलते देख कर सुमी भाभी की बहुत याद आ रही थी। क्या चीज़ थी यार और क्या चुदवाती थी!

हाँ, उसकी पुरानी प्यास थी लेकिन उसने कैसे उस पर काबू रखा, वो वाकयी सराहनीय था।

चलो कम्मो ने उसके पति को भी ठीक कर दिया और साथ में उसको एक बच्चे के सुख के भी योग्य बना दिया।

लेकिन उसका अपना क्या हुआ?

जब वो वापस आई तो मैं उसके हाथ को पकड़ कर अपने कमरे में ले गया और वहाँ उसको एक बहुत ही गर्म चुम्मी होटों पर कर दी।

मैंने जान कर अपनी एक टांग उसकी साड़ी के ऊपर से उसकी चूत को छूने के लिए डाल दी।

तब मैंने उसको पूछा- कम्मो डार्लिंग, यह जो तुम्हारे पास बच्चों के बारे में जो हुनर है, उसका सही इस्तेमाल करो न, तुम पता लगाओ कैसे क्या करना है और मैं तुमको जगह और धन दिलवा दूंगा।

कम्मो बोली- वो सब मैंने पता कर लिया है, आप अगर इजाज़त दें तो मैं कोठी में एक छोटी कोठरी में अपना छोटा सा क्लिनिक खोल दूंगी।

मैं बोला- ठीक है, मैं आज ही मम्मी से बात करता हूँ, उनकी इजाज़त लेकर मैं यह तुम्हारे लिए कर देता हूँ, ठीक है?

कम्मो बोली- ठीक है।

फिर मैंने उसको कहा- तो चलो फिर एक छोटी सी चूत ही दे दो, बस इत्ता सा ही अंदर डालूँगा, सिर्फ डाला और निकाला, यही होगा!

कम्मो हँसते हुए बोली- मुझको सब मालूम है तुम कितना डालोगे और कितना निकलोगे।

यह कहते हुए उसने अपनी साड़ी इत्यादि उतार दी और मैंने भी पैंट कमीज उतार दी।

फिर हम एक धीमी प्यारी सी चुदाई में लग गए, न ज़ोर का धक्का न ज़ोर का उछाला।

धीरे धीरे कभी न खत्म होने वाली चुदाई जिसमें दो जान एक शरीर हो जाते हैं, ना छुटाने की जल्दी न निकालने की जल्दी, हल्की प्यारी सी चूमा चाटी और फिर अंतहीन रगड़ा रगड़ी और साथ ही शारीरिक गर्मी उसकी मेरे में और मेरी उस में!

यह खेल खलते हुए ही हम दोनों एक दूसरे की बाहों में सो गए।

अगले दिन दोपहर को कॉलेज कैंटीन में शानू और बानो तो आ गई लेकिन उर्मि नहीं आई।

हम तीनो कैंटीन में इंतज़ार कर रहे थे, कोई 10 मिन्ट की इंतज़ार के बाद उर्मि भी आ गई।

हम सब दो रिक्शा पर बैठ कर मेरी कोठी पहुँच गए।

राम लाल चौकीदार ने हम सबको सलाम की और फिर मैं तीनों लड़कियों को लेकर बैठक में आ गया।

कम्मो रानी ग्लासों में शरबत ले आई और मैंने उन सबको उससे मिलवाया और यह भी बताया कि ये लड़कियाँ तुमको एक बुढ़िया समझ रही थी।

इस बात पर काफी हंसी मज़ाक चलता रहा।

खाना बहुत ही स्वादिष्ट बना था और अंत में हम सबने आइसक्रीम खाई।

खाना समाप्त करके हम सब मेरे कमरे में आ गए जहाँ कम्मो ने पहले से ही मोटे गद्दे बिछा रखे थे।

शानू और बानो को मैं नैनीताल में चोद चुका था तो वो झट से मेरे पास आ गई और मुझको दोनों ने अपने बाहों में भर लिया। मैं भी एक एक कर के दोनों को चूमने लगा और वो भी खुल्लम खुल्ला मेरे लौड़े को पकड़ कर खेलने लगी।

उर्मि यह सब बड़ी ही हैरानी से देख रही थी।

कम्मो उर्मि के पास गई और उसको लेकर मेरे पास आ गई।

शानू और बानो ने हम दोनों का पहले हाथ मिलवाया और फिर दोनों ने उर्मि को मेरी तरफ धकेल दिया।

मैंने झट से उसको अपनी बाहों में ले लिया और कहा- वेरी सॉरी उर्मि जी, आप से नई मुलाकात है न… तो अभी एक दूसरे के साथ खुल नहीं पाये।

उर्मि भी अपनी मधुर आवाज़ में बोली- आपका ज़िक्र बहुत बार इन दोनों ने मेरे से किया था लेकिन आपको देखा तो आप बहुत ही अच्छे निकले।

मैंने झट से उर्मि को अपने गले लगा लिया और उसके हल्के गुलाबी होंटों को चूम लिया।

उसकी हाइट यही कोई 5 फ़ीट 5 इंच थी तो वो एकदम से मेरे साथ फिट बैठ गई।

जब उसके मोटे उरोज मेरी छाती से टकराये तो मुझको एक झनझनाहट सी हुई सारे शरीर में!

मैंने फिर से उसको बाँहों में भर लिया और उसके होटों को बार बार चूमने लगा।

कम्मो मुझको गुस्से में देख रही थी।

मैं समझ गया और मैंने झट से शानू को बाँहों में ले लिया और उसको गरम जोशी से भरी एक चुम्मी दे दी और फिर मैंने अपना ध्यान बानो की तरफ किया और जल्दी ही उसको भी जफ़्फ़ी डाली और चूमा चाटी शुरू कर दी।

अब कम्मो ने तीनों लड़कियों से कहा- छोटे मालिक अब बारी बारी से आपके कपड़े उतारेंगे जिसमें मैं उनकी मदद करूंगी।

सबसे पहले बानो सामने आ गई और मैंने उसकी सलवार कमीज धीरे से उतार दी और उसके मोटे और सॉलिड मम्मों को ब्रा में से उछल कर बाहर आते देखा, जल्दी से उसके मम्मों को एक चुम्मी दे दी और फिर मैंने शानू को सामने पाया और वैसे ही उसके कपड़े भी उतार दिए और वैसी ही एक चुम्मी उसके छोटे लेकिन सॉलिड मम्मों को दे दी।

अब कम्मो उर्मि को लेकर मेरे सामने आई और उसके कपड़े खुद ही उतारने लगी। जब मैंने उसको देखा तो उसने आँख से इशारा किया कि उसको वो काम करने दो।

धीरे धीरे से कम्मो पहले उर्मि की साड़ी उतारने लगी और फिर उसके पेटीकोट को उतार दिया लेकिन उसने ऐसे तरीके से उर्मि के कपड़ों को उतारा कि मैं और बाकी दोनों लड़कियाँ उसके मम्मों और चूत की झलक नहीं पा सके।

और अंत में उसने उसके मोटे मम्मों के ऊपर से ब्रा भी उतार दी लेकिन हम तीनों बड़ी उत्सुकता से उसके मम्मों और चूत की झलक पाने के लिए बेकरार थे।

कम्मो ने हमारी बेकरारी समझ ली थी, वो जानबूझ कर हम को तरसा रही थी और कुछ भी नहीं देखने दे रही थी।

उर्मि को भी सारे तमाशे से बड़ा आनन्द आ रहा था और वो भी भरसक कोशिश कर रही थी कि हम कुछ न देख पाएँ।

इस ऊहापोह में हमने मिल कर कम्मो की साड़ी खींच दी।

जैसे ही उसका ध्यान अपनी साड़ी की तरफ गया, हम तीनों ने उर्मि को खींच कर उसके पीछे से निकाल लिया।

अब उर्मि नंगी ही हम तीनों के सामने थी, मैं तो उसके मम्मों और काले बालों से ढकी चूत को देख कर मुग्ध हो गया, फिर उर्मि के गोल चूतड़ देखे तो मन एकदम पगला गया और मैंने आगे बढ़ कर उर्मि को फिर से गले लगा लिया।

उर्मि भी आगे बढ़ कर मेरे कपड़े उतारने लगी।

तब कम्मो भी अपने कपड़े उतार कर उर्मि का साथ दे रही थी।

दोनों ने मिल कर मुझ को जल्दी ही नंगा कर दिया और उर्मि ने पहली बार मेरे लम्बे और मोटे लंड को देखा।

वो झट से बैठ गई और मेरे लंड को अपने मुंह में डाल दिया और शानू और बानो भी मेरे दोनों और खड़ी हो गई और मेरी सफाचट छाती को चूमने लगी।

मुझको ऐसा लगा कि मैं स्वर्ग में अप्सराओं के बीच में खड़ा हूँ।

 
कम्मो ने जल्दी से आगे बढ़ कर मुझसे पूछा- छोटे मालिक, आप ठीक तो हैं न?

मैंने उसको आँख मारी- कम्मो डार्लिंग, यह सब होने के बाद मैं कैसे ठीक रह सकता हूँ, मेरा तो स्वर्गवास हो गया लगता है।

तीनों लड़कियाँ यह सुन कर बहुत ज़ोर से हंसने लगी।

अब उर्मि बोली- इतने मोटे और लम्बे लंड वाला भूत मैंने पहले कभी नहीं देखा था।

मैं भी बोला- इतनी सुंदर परियाँ मैंने पहले कभी नहीं देखी थीं।

और मैंने झट से उर्मि के गोल मम्मों को झपट कर पकड़ लिया और उनको चूमने लगा। उसकी चूत में ऊँगली डाली तो वो एकदम गीली हुई थी और लंड के लिए बेकरार हो रही थी।

कम्मो ने कहा- अब उर्मि नीचे लेट जाए और छोटे मालिक उसको चोदना शुरू कर दें ताकि बाकी दोनों की भी बारी आ जाए। जब तक ये दोनों चुदाई में बिजी हैं, तब तक हम तीनों एक दूसरे से प्रेमालाप करेंगी। उर्मि के बाद शानू की बारी और आखिर में बानो और मेरी बारी है।

मैंने पहले उर्मि को होंटों पर चुम्बन किया और फिर उसके मम्मों को चूसता हुआ पेट पर उसकी नाभि में जीभ से चुसाई और फिर नीचे का सफर शुरू हुआ।

नीचे पहुँच कर नर्म, गुलाबी और उभरी हुई चूत को देखा, उसको सूंघा और फिर उसमें जीभ से हमला कर दिया।

उसकी भग को चूसने लगा तो उर्मि ने अपनी कमर उठा कर अपनी चूत को मेरे मुंह में दे मारा और उसको मेरे मुंह में रगड़ने लगी।

वो बहुत ही कामातुर हो चुकी थी और मेरे लंड को ज़ोर ज़ोर से खींच रही थी, मेरा लौड़ा भी इस हसीना की चूत के लिए तरस गया था।

मैं उसकी टांगों में बैठा और अपने लोह समान लंड को चूत के निशाने पर बिठा कर एक हल्का धक्का मारा, उर्मि की चूत बहुत ही टाइट थी तो लौड़ा बाहर ही रुका हुआ था।

थोड़ी देर मैंने लंड को चूत के मुंह और भग पर रगड़ा और फिर प्रवेष के लिए अर्जी दी, इस बार शायद चूत ने इजाजत दे दी थी और लौड़ा आसानी से पूरा अंदर चला गया।

जैसे ही लंड पूरा अंदर गया, उर्मि के मुंह से बहुत ज़ोर से हाय की आवाज़ निकली।

मैंने घबरा कर पूछा- अंदर जगह कम है तो थोड़ा निकाल लूँ क्या?

उर्मि तो नहीं समझी इस लतीफ़े को, लेकिन शानू और बानो ज़ोर से हंस पड़ी।

मैं धीरे धीरे से चुदाई की स्पीड बढ़ाने लगा।

उधर कम्मो भी दोनों सेहलियों को गर्म करने में लगी थी, एक की चूत में उंगली थी और दूसरी के मम्मों में मुंह था।

बानो के मोटे मम्मे जबरन निगाहें अपनी तरफ खींच रहे थे और कम्मो भी उसके मम्मों को बहुत चूस चूस कर मज़ा ले रही थी।

शानू की चूत से बहुत रस टपक रहा था और बानो इस कोशिश में थी कि उसके खुशबूदार रस को पी जाए।

जैसे ही मैं उर्मि को फुल स्पीड से चोदने लगा, वैसे ही उसके मुंह से ‘हाय हाय…’ की मधुर आवाज़ें निकलने लगी और मेरा लौड़ा यह कह रहा था कि फाड़ दूंगा इस साली को छोड़ूंगा नहीं।

एक ज़ोरदार धक्के के बाद उर्मि की कमर इतनी ऊपर उठी और अपने साथ मुझको भी ऊपर उठा दिया पूरा का पूरा।

फिर इतने ज़ोर से नीचे हुई कि मेरी कमर उसकी मुलायम और संगमरमरी जांघों की कैद में आ गई।

फिर उर्मि की कंपकंपाहट इतने ज़ोर से शुरू हुई कि मेरे साथ बाकी तीनों चूतों को भी अपना कारोबार रोक कर सिर्फ उर्मि की खूबसूरत जांघों और कमर को देखना पड़ा।

मैंने अपना मुंह उर्मि के मुंह से चिपका रखा था ताकि वो और न चिल्लाये।

धीरे धीरे से वो संयत हुई और मैं उसके ऊपर से उठा।

मेरा लंड उर्मि की चूत से निकले रस में काफ़ी सराबोर हो गया था जिसको कम्मो ने तौलिये से साफ़ किया और फिर उर्मि को भी आये पसीने को साफ़ किया और हम सबको शरबत भी पिलाया।

उर्मि ऐसे लेट गई जैसे वो बड़ी लम्बी रेस के बाद लौटी हो।

अब शानू और बानो ने मुझको घेर लिया, दोनों मेरे दोनों तरफ खड़ी होकर मुझको चूमने और मेरी छाती के चुचूकों को चूसने लगी।

कम्मो ने दोनों को पलंग पर लिटा दिया और फिर मुझको उन दोनों के बीच में लेटना पड़ा।

मैंने पहले शानू को चूमा और फिर बानो को, दोनों की चूत में हाथ डाला तो दोनों तपती हुई भट्टी बनी हुई थी क्यूंकि उर्मि की चुदाई और बाद में कम्मो के साथ खेल खिलवाड़ में दोनों बेहद सेक्सी हो गई थी।

कम्मो ने सुझाया- छोटे मालिक, आप इन दोनों लड़कियों को एक साथ चोद डालो जैसे आप कई बार कर चुके हो।

मैं बोला- क्यों शानू और बानो, मैं तुमको एक साथ चोद डालूँ या फिर एक एक कर के? बोलो क्या मर्ज़ी है?

बानो बोली- अभी तो हम नहीं रुक सकती हैं अभी इतनी गर्मी चढ़ी हुई है। अभी तो साथ साथ कर दो हमारा काम, बाद में सिंगल एंट्री कर देना ओके?

शानू भी बोली- हाँ हाँ, यही ठीक रहेगा।

कम्मो बोली- चलो, फिर तुम दोनों घोड़ी बन जाओ।

जब वो घोड़ी बन गई तो मैं पहले बानो के पीछे से चूत में खड़े लंड को धीरे से डालने की कोशिश करने लगा लेकिन बानो इतनी सेक्सी हो चुकी थी कि उसने ज़रा भी सब्र किये बगैर अपनी गांड को मेरे लंड के साथ जोड़ दिया और लंड पूरा का पूरा अंदर चला गया।

बानो की चूत एकदम गीली और फूली हुई थी, वो स्वयं ही चूतड़ों को आगे पीछे कर रही थी और चुदाई का पूरा आनन्द ले रही थी। उसकी इस हालत को देख कर मैंने चुदाई की स्पीड तेज़ कर दी और उसके चूतड़ों को हाथ में पकड़ कर लम्बे और गहरे धक्के मारने लगा।

थोड़ी देर में ही वो छूट गई और उसकी चूत खुलने और बंद होने लगी।

मैंने अपना लौड़ा उसकी चूत से निकाल कर शानू की चूत में डाल दिया और वैसे ही पूरी स्पीड से उसको भी चोदने लगा। वो इतनी गर्म नहीं थी तो उसकी चुदाई मैंने धीरे धीरे करनी शुरू की। धीरे चुदाई का मज़ा ही कुछ और है, वहाँ दोनों पक्ष अपना प्रेम व्यक्त कर सकते हैं।

लेकिन अब शानू भी काफी हॉट हो चुकी थी तो मैंने फ़ास्ट और स्लो वाली स्पीड को अपनाया।

मैं नीचे हाथ डाल कर उसकी चूत के भग को भी मसलने लगा जिससे उसका मज़ा दुगना हो गया और वो अब जल्दी जल्दी अपने चूतड़ आगे पीछे करने लगी।

दूसरी तरफ कम्मो उर्मि के साथ प्रेमालाप करने में मग्न थी, उसके गोल सॉलिड मम्मों को चूस रही थी और उर्मि भी अपने हाथ को कम्मो की चूत में डाल कर उसकी भग को मसल रही थी।

जब मैंने महसूस किया कि शानू छूटने के कगार पर है तो मैंने अपनी स्पीड बहुत तेज़ कर दी और कुछ ही मिन्ट में शानू धराशायी हो गई।

मैं अपना लंड शानू की चूत से निकाल कर फर्श पर आ गया और ललकार भरी आवाज़ में बोला- और कोई है माई की लाडली जो मेरे सामने आकर खड़ी हो सके?

कम्मो ने हँसते हुए कहा- अभी तो मैं बाकी हूँ लेकिन अपना हिसाब बाद में कर लूंगी। क्यों उर्मि और इच्छा है क्या?

उसने इंकार में सर हिला दिया और बानो और शानू भी कुछ नहीं बोली।

मैं अभी भी उर्मि पर मर मिटा था तो मैंने उर्मि को आलिंगन में लिया और उसके कान में कहा- उर्मि डार्लिंग, तुम बड़ी सेक्सी और सुन्दर हो, तुम से जी नहीं भरा है अभी, क्या कल आना चाहोगी तुम अकेली ही?

उसने हाँ में सर हिला दिया और मैंने वैसे ही उसके कान में कहा- फिर कॉलेज में बात कर लेंगे।

कपड़े पहनने से पहले मैंने उर्मि और बानो के मम्मों को चूमा चाटा और शानू के चूतड़ों को हल्के से मसला।

फिर तीनों ने कपड़े पहन लिए और हम सब फिर बैठक में आ गए।

कम्मो सबके लिए शर्बत और चाय ले आई। मैंने और उर्मि ने चाय पी और बाकी दोनों ने शरबत पिया।

 
कम्मो ने तीनों को हमारे घर का फ़ोन नंबर दे दिया और कहा- कभी ज़रूरत हो तो फोन कर लेना।

उर्मि मेरे साथ वाली क्लास में बैठती थी और शानू और बानो एक ही क्लास में बैठती थी।

फिर मिलने का वायदा करके वो तीनों अपने अपने घर चली गई।

कुछ दिन बाद उर्मि मुझको कॉलेज में फिर मिली।

मेरा इंग्लिश का पीरियड खत्म हुआ तो अगला पीरियड खाली था, मैं क्लास में ही बैठा हुआ पिछले नोट्स को कॉपी करने में लगा था

कि मुझको लगा कि कोई मेरे साथ बेंच पर आकर बैठ गया है।

मैंने मुड़ कर देखा तो वो उर्मि ही थी, उसको देखते ही मेरी तो बांछें खिल गई।

मैं बोला- आओ उर्मि जी, कैसी हैं आप?

उर्मि बोली- बिल्कुल ठीक हूँ और तुम सुनाओ सोमू कैसे हो?

मैं बोला- बढ़िया, लेकिन आपकी याद में बेकरार हूँ।

उर्मि बोली- वही हाल मेरा है. बहुत तरस रही है मेरी वो आपके उनके लिए?

मैं शरारत के मूड में बोला- मैं कुछ समझा नहीं उर्मि जी, कौन तरस रहा है किसके लिए?

उर्मि थोड़ा शर्माती हुई बोली- वही!

मैं उसके मुंह से पूरा नाम सुनना चाहता था तो बोला- वही कौन? कुछ नाम तो लीजिये कौन है वो?

उर्मि बोली- सोमू यार, तुम जानते हो कौन किसके लिए तरस रहा है, फिर भी बनते हो।

मैं बोला- सच्ची!! कसम से, मैं कुछ समझा नहीं, इसलिए पूछ रहा था कि कौन किसके लिए तरस रहा है।

उर्मि झुंझलाते हुए बोली- मेरी वो तुम्हारे उसके लिए तरस रही है।

मैं कुछ सकुचाते हुए बोला- आपकी वो मेरे उसके लिए तरस रही है? पर क्या है यह ‘वो’ और ‘उस’ ज़रा खोल के समझाओ ना उर्मि जी?

मैं सीधा साधा लड़का हूँ यह लड़कियों की भाषा नहीं समझता उर्मि जी!

मन ही मन मैं मज़े ले रहा था। अब उर्मि ने मेरी आँखों में आँखें डाल कर देखा और फिर कहा- वाकयी में ही तुम नहीं समझे सोमू?

मैं बड़ा मासूम सा पोज़ बना कर बोला- कतई ही नहीं समझा, आप साफ़ शब्दों में कहिये न प्लीज!

अब उर्मि कुछ सोच में पड़ गई और फिर अपना मुंह मेरे कान के पास ला कर बोली- मेरी चूत आपके मोटे लंड के लिए तरस रही है।

मैं बोला- ऊह्ह्ह… रियली? ओह्ह्ह माय गॉड!

उर्मि बोली- क्यों क्या हुआ?

मैंने भी अपना मुंह उर्मि के कान के पास ले जाकर कहा- मेरा भी वो बहुत तरस रहा है आपकी उसके लिए!

अब उर्मि और मैं ज़ोर से हंस पड़े और उर्मि ने मेरी कमर में चुटकी काट ली, उर्मि बोली- बहुत शरारती हो गए तुम सोमू!

मैं बोला- जो भी बनाया हज़ूर आपने!

उर्मि बोली- कब करोगे?

मैं बोला- जब तुम चाहो।

उर्मि बोली- आज हो सकता है क्या?

मैं बोला- हाँ हाँ, हो क्यों नहीं हो सकता, तुम हुक्म तो करो मेरी जान, अभी अरेंज कर लेते हैं, तुम अकेली ही ना?

उर्मि बोली- हाँ!

मैं बोला- तब ठीक है, मैं कम्मो को फ़ोन कर देता हूँ, लास्ट पीरियड के बाद कैंटीन में मिलते हैं।

उर्मि चली गई तो मैंने कम्मो को फ़ोन कर दिया, उसने कहा कि वो खाना तैयार रखेगी।

लास्ट पीरियड की खत्म होने की घंटी बजी तो मैं दौड़ कर कैंटीन पहुँच गया और वहाँ उर्मि का इंतज़ार करने लगा। थोड़ी देर में वो छोटे

से बैग के साथ आ गई।

उर्मि और मैं रिक्शा में बैठ कर 10 मिन्ट में ही घर पहुँच गए।

कम्मो हमारा इंतज़ार कर रही थी, पहले उसने ठंडा शर्बत पिलाया और फिर खाना लगा दिया।

खाने के दौरान उर्मि ने बताया कि उसका घर भी वहाँ से ज़्यादा दूर नहीं है।

कम्मो ने पूछा कि उसके घर में कौन कौन हैं तो वो बोली- बड़े भैया और भाभी हैं और एक छोटा भतीजा है जो बहुत ही शरारती है। वैसे

हमारा गाँव वहाँ से 2-3 घंटे ही दूर है और मम्मी पापा वहीं रहते हैं।

कम्मो बोली- तुम बड़ी सुन्दर हो, अब तक तुम्हारी शादी क्यों नहीं हुई?

उर्मि बोली- ऐसा है दीदी, मेरे माँ बाप तो पीछे पड़े हैं लेकिन मैं तो एक डॉक्टर बनना चाहती हूँ तो अभी तक सबको बोल दिया है कि

मेरी शादी करने की कोई कोशिश ना करें।

कम्मो भी हँसते हुए बोली- बहुत ही अच्छा विचार है तुम्हारा उर्मि… तुम ज़रूर डॉक्टर बन जाओगी।

फिर हम आइस क्रीम खाकर मेरे कमरे में आ गए। वहाँ कम्मो थोड़ी देर बाद आई और पूछने लगी- छोटे मालिक, आज मेरी ज़रूरत है

यहाँ क्या?

मैंने उर्मि की तरफ देखा और पूछा- क्यों उर्मि? तुम्हारी क्या इच्छा है?

उर्मि बोली- सोमू, तुम्हारी क्या इच्छा है तुम बताओ।

तब कम्मो बोली- छोटे मालिक, आज आप अकेले ही संभाल लीजिये उर्मि को!

यह कह कर कम्मो वहाँ से चली गई.

मैंने दरवाज़ा बंद कर दिया और मुड़ कर उर्मि को उठा कर एक बहुत ही प्रगाढ़ आलिंगन किया और उसके होंटों को बहुत ही प्रेम से

चूमा।

उर्मि भी मुझको चूमने लगी बेतहाशा और फिर वो एकदम से मेरे कपड़ों पर टूट पड़ी और जल्दी जल्दी मुझको वस्त्रहीन करने लगी।

मैं भी उसके कपड़े उतारने लगा, पहले उसकी हल्के नीले रंग की साड़ी को उतार दिया और फिर उसके नीले रंग के ब्लाउज को भी

अलग कर दिया और जल्दी ही उसके पेटीकोट को भी उतार दिया।

वो उस समय सिर्फ सिल्क की ब्रा में ही थी, मैं दूर खड़ा होकर उसकी ख़ूबसूरती को निहारने लगा।

ऐसा लग रहा था कि उसके जिस्म का हर हिस्सा जैसे साँचे में ढला हुआ हो!

और जब मैंने उसकी ब्रा को उतार दिया तो उसके गोल और ठोस उरोज ऐसे हाथ में उछल कर आ गए जैसे बड़े खूबसूरत गेंद हों।

 
औरतों के उरोज मेरी सबसे बड़ी कमज़ोरी रहे हैं, मेरी मम्मी बताया करती थी कि जितनी भी आया मेरी देखभाल के लिए रखी जाती थी

वो सब यही कहती थी कि मैं उनकी गोद में जाते ही सीधे उनके मम्मों पर हाथ रखता था।

मैंने आगे बढ़ कर उर्मि को अपनी बाँहों में भर लिया और उसके होंटों को चूमने लगा।

फिर उसको धीरे से मैं अपने पलंग की तरफ ले आया और उसको चित लिटा दिया।

अब मैं खुद पलंग पर बैठ गया और उसके मम्मों के साथ खेलने लगा, फिर उनको मुंह में लेकर उनके काले चुचूकों को भी चूसने लगा,

एक को चूम रहा होता तो उर्मि दूसरा मेरे मुंह में दे देती! जैसे एक के साथ दूसरा फ्री !!!

मैंने उर्मि के मम्मों के बाद अपना ध्यान उसके सपाट पेट और नाभि पर लग दिया और थोड़ा सा चाटने के बाद मैंने चूत पर छाए काले

घने बालों की तरफ ध्यान केंद्रित कर दिया।

वहाँ ऊँगली से चूत के रेशमी बालों को छूते हुए उसकी चूत में ऊँगली डाल दी। बेहद गीली चूत में से भीनी भीनी सी खुशबू आ रही थी.

अब मैंने मुंह चूत में डाल दिया और उसकी भग को और चूत के लबों को चाटने लगा। फिर मेरा पूरा ध्यान उर्मि की चूत में छिपे भग

पर चला गया,. भग को मुंह में लेकर हल्के हल्के चूसने लगा।

ऐसा करते ही उर्मि के चूतड़ अपने आप ऊपर की तरफ उठ गए और उसके मुख से हल्की हल्की सिसकारी की आवाज़ आने लगी।

फिर एकदम उर्मि की दोनों जांघों ने मेरे मुंह को अपने बीच जकड़ लिया, उसके हाथों ने मेरे सर को ऊपर उठाने की कोशिश की लेकिन

मैं मस्त चुसाई में लगा रहा।

फिर उर्मि एकदम से चिल्ला पड़ी- ऊह्ह्ह ऊह्ह…

और उसका सारा शरीर बेहद तीव्रता से कांपने लगा, उसकी जांघों ने मेरे मुंह को ऐसा ज़ोर का जकड़ा हुआ था कि मुझको सांस लेना भी

मुश्किल हो रहा था।

फिर उर्मि का शरीर एकदम से ढीला पड़ गया और यह मौका देख कर मैं उर्मि की टांगों में लेट गया और काफी देर से खड़े अपने लौड़े

को उर्मि की चूत के मुंह पर टिका कर एक हल्का सा धक्का मारा और फच्च से लंडम सारा उर्मि की चूत में गृहप्रवेश कर गया।

अब मैंने धीरे धीरे से चुदाई शुरू कर दी। उर्मि का आलम यह था कि वो ही आँखें बंद किये आनन्द ले रही थी।

कभी कभी नीचे से ठुमका ज़रूर लगा देती थी नीचे से शायद यह जताने के लिए कि वो सोई नहीं थी।

अभी भी मैं उसके उरोजों को मुंह में लेकर चूस रहा था।

धीरे धीरे उर्मि की सोई हुई चूत फिर से जागने लगी और वो अंदर ही अंदर मेरे लंड को पकड़ और छोड़ रही थी क्यूंकि शायद उसको यह

उम्मीद थी कि इस गाय के थन से थोड़ा बहुत दूध निकल आये।

लेकिन वो अभी सोमू के लंड से वाकिफ नहीं थी पूरी तरह! यह वो लंड था जिसको ओलिंपिक सेक्स गेम्स में भी गोल्ड मेडल मिल

सकता था।

यह मैं नहीं कह रहा यह मेरे द्वारा उन चुदी हुई चूतों का एक मत निर्णय था, ऐसा मेरा ख्याल है।

लेकिन उर्मि की चूत अब पूरी तरह से जाग गई थी और पूरी शानो शौकत से चुदवा रही थी, कुछ धक्कों के बाद ही वो धराशाई हो गई।

अब मैंने उसको घोड़ी बना कर चोदना शुरू कर दिया और उसके गोल और मुलायम चूतड़ों को अपने हाथों में लेकर धक्के मारने लगा।

वो भी बिदकी घोड़ी की तरह से अपनी लातें मरने से बाज़ नहीं आ रही थी लेकिन ऐसी घोड़ी को कंट्रोल करना मुझको अच्छी तरह से

आता था।

मैंने फुल स्पीड से उसकी चुदाई शुरू कर दी, पूरा अंदर और फिर पूरा बाहर… इसी क्रम और फिर सरपट घुड़दौड़ से मैंने उर्मि जैसी घोड़ी

को भी मात दे दी।

जब तीसरी बार उर्मि छूटी तो वो पलंग पर ढेर हो गई और मैं उसकी बगल में लेट गया, मेरा लौड़ा तो अभी भी हवा में लहलहा रहा

था।

मैं उठा और कम्मो को बुला लाया।

उसने आते ही पहले उर्मि का पसीना पौंछा और फिर उसको और मुझ को रूह अफजा शरबत पीने को दिया।

कम्मो भी वहाँ रुक गई और उर्मि जो मेरे साथ लेटी थी, उसके मम्मों को सहलाने लगी और उसकी चूत के बालों को संवारने लगी।

कम्मो बोली- उर्मि, अगर चाहो तो हमको बता सकती हो कि तुमको सबसे पहले किसने चोदा था?

उर्मि कुछ देर सोचती रही फिर बोली- मेरे गाँव में मेरा एक दूर का रिश्ते का भाई हमारे साथ रहता था, उसने मुझे पहली बार धोखे से

चोदा था जब मैं किशोरावस्था में थी।

मैं बोला-अच्छा? बहुत बुरा हुआ तुम्हारे साथ उर्मि… लेकिन उसके बाद तुम चुदाई की शौक़ीन कैसे हो गई?

कम्मो बोली- इस विषय के बारे में मैं बहुत कुछ जानती हूँ वो आप दोनों को भी बता देती हूँ। अगर कच्ची कली को तोड़ा जाए यानि

छोटी उम्र वाली लड़की से यौन क्रिया की जाए तो वो एकदम से पगला जाती है और अक्सर देखा गया है कि वो किसी एक मर्द की हो

कर नहीं रह सकती क्यूंकि उसके एक मर्द से तसल्ली नहीं होती। क्यों उर्मि, क्या मैं ठीक कह रही हूँ?

उर्मि हैरानी से कम्मो को देख रही थी। फिर एकदम से उर्मि रोने लगी और कम्मो उसको चुप करवाने की कोशिश करती रही। काफ़ी

कोशिश के बाद उर्मि शांत हुई और बोली- बड़े अरसे के बाद मुझको सोमू जैसा मर्द मिला है जो मेरी भूख को शांत कर सकता है।

कम्मो बोली- छोटे मालिक जैसे आप एक तरह से एक अजीब बिमारी की चपेट में हो, वैसे ही उर्मि को भी उसी तरह की बीमारी है।

यानि जबसे उसकी छोटी उम्र में चुदाई हुई है, तब से उसको चुदाने की तीव्र इच्छा रहती है और वो एक मर्द से पूरी नहीं हो पाती। क्यों

मैं ठीक कह रही हूँ उर्मि?

उर्मि कुछ सोचते हुए बोली- नहीं ऐसी बात नहीं है, असल में मुझको काफी देर की चुदाई और एक रात में 3-4 बार की चुदाई बहुत

अच्छी लगती है। यह ज़रूरी नहीं कि अलग अलग मर्द हों यह काम एक मर्द भी कर सकता है जैसे सोमू कर रहा है।

कम्मो बोली- इसका मतलब यह है कि तुम ने अभी तक कई मर्दों के साथ सम्भोग किया है?

उर्मि बोली- नहीं दीदी, मैंने मुश्किल से 2 मर्दों के साथ ही सेक्स किया है क्यूंकि गाँव में ज़्यादा चॉइस ही नहीं था तो मैं अभी तक तो

ऊँगली से ही काम चलाती रही हूँ।

कम्मो बोली- फिर छोटे मालिक का कैसे पता चला तुमको?

उर्मि बोली- वो शानू और बानो ने अपना नैनीताल वाले ट्रिप का किस्सा सुनाया तो मुझको पता चला। लेकिन जब 3 दिन पहले सोमू ने

मेरे को चोदा ना, तो मुझको यकीन हो गया कि सोमू ही वो मर्द है जो मुझको पूरी तसल्ली दे सकता है।

 
कम्मो और मैं एक दूसरे को देखने लगे कि क्या किया जाये?

कम्मो ने कहा- उर्मि, यह सारी कहानी तुम्हारे भैया और भाभी को पता है क्या?

उर्मि बोली- नहीं… उनको यह बात पता लग गई तो वो मुझको जान से मार देंगे। ठाकुर लोग बड़े ज़ालिम होते हैं आपको तो शायद

मालूम होगा ना?

मैं बोला- बड़ी अजीब स्थिति है उर्मि तुम्हारी… अच्छा कब कब महीने में कब कब तुमको चुदवाने की इच्छा बहुत बलवती होती है?

उर्मि अपनी चूत में दायें हाथ की ऊँगली से अपनी भग को हल्के हल्के रगड़ रही थी, उसका बायां हाथ मेरे खड़े लंड के साथ खेल रहा

था।

उर्मि शर्माते हुए बोली- पीरियड्स के बाद 10-15 दिन मेरे लिए बड़ी मुश्किल से कटते हैं और फिर मैं नार्मल हो जाती हूँ।

कम्मो बोली- यह समय तो आम लड़कियों और औरतों के लिए काफी उत्तेजना भरा होता है, इन्हीं दिनों गर्भवती होने का ज़्यादा चांस

होता है। इसका मतलब यह है कि तुमको अगर इन 5-6 दिनों में अगर चुदाई का चांस मिल जाए तो इसके बाद तुमको कोई प्रॉब्लम

नहीं होती है?

उर्मि ने हाँ में सर हिला दिया।

अब तक उर्मि फिर पूरी तरह से गर्म हो चुकी थी और वो मेरे लौड़े को बार बार खींच रही थी कि चुदाई के मैदान में फ़ौरन आ जाए।

मैंने उसको पलंग के सहारे खड़ा किया और उसके पीछे से लंडम की एंट्री उसकी चूत में कर दी।

वो अपनी चुदाई का किस्सा सुनाती हुए बहुत ही कामुक हो चुकी थी।

मैंने धीरे और फिर तेज़ वाली स्पीड का सहारा लिया और पूरी कोशिश में लग गया कि वो पूर्ण रूप से स्खलित हो जाए और उसकी

चुदाई की भूख कुछ शांत हो जाए।

मैंने लंड की स्पीड को ऐसे कंटोल किया कि बार बार लंड उसकी चूत की गहराइयों में विचरता रहे और उसकी चूत को हर तरह से

आनन्द की विभूति मिलती रहे।

कुछ देर में ही मैंने महसूस किया कि उसकी चूत से कुछ रसदार पानी निकल रहा है और वो उसकी टांगों के नीचे गिर रहा है।

मैंने उस पानी को छूकर देखा तो वो काफी गाड़ा और खुशबूदार था।

यह देख कर मैंने धक्कों की स्पीड तेज़ कर दी और कुछ ही क्षण में उसके चूतड़ आगे पीछे होने लगे और फिर एक साथ पूरी तरह से

मेरे लौड़े के साथ चिपक गए।

उर्मि के मुख से कुछ अस्फुट शब्द निकल रहे थे और फिर वो पलंग पर ढेर हो गई।

मैं भी कुछ देर अपना लंड उसकी चूत में डाल कर खड़ा रहा उसके पीछे।

थोड़ी देर बाद कम्मो आई और उसने तौलिये से मुझ को पौंछा, उर्मि की टांगें पकड़ कर उसको पलंग पर लिटा दिया और उसके सारे

शरीर को अच्छी तरह से पौंछा।

फिर वो हम सबके लिए शरबत ले आई।

शरबत पीते हुए कम्मो ने उर्मि को कहा- तुम मुझको टेलीफोन करके आ जाया करो, यहाँ कुछ गपशप मार लिया करेंगे और अगर छोटे

मालिक खाली हुए तो तुम्हारा काम भी कर दिया करेंगे। क्यों छोटे मालिक?

मैं बोला- हाँ हाँ ज़रूर, तुम्हारा काम अवश्य कर दिया करेंगे। जब चाहो कम्मो से फ़ोन पर बात कर के आ जाया करो, मैं तुम्हारी पूरी

सेवा कर दिया करूँगा जैसे तुम चाहो वैसे ही!

फिर वो तैयार हो कर चलने लगी तो मैं उसको गेट पर जाकर रिक्शा में बिठा आया।

कुछ दिन बीत जाने के बाद मुझको उर्मि फिर कॉलेज में मिली और बोली- तुमसे ज़रूरी बात करनी है, आओ कैंटीन चलते हैं।

मैं उसके पीछे चलते हुए कैंटीन पहुँच गया और वो एक टेबल पर बैठते हुए बोली- सोमू यार कुछ खाओगे या पियोगे?

मैं बोला- तुम बोलो, क्या लाऊँ तुम्हारे लिए?

उर्मि बोली- कुछ नहीं चाहिए यार, क्या तुम मेरे घर आ सकते हो थोड़े टाइम के लिए?

मैं बोला- क्या काम है उर्मि, बोलो?

उर्मि बोली- मेरी एक क्लास फेलो तुमसे मिलना चाहती है।

मैं बोला- कब और कहाँ?

उर्मि बोली- मेरे घर में, आज ही!

मैं बोला- ऐसा क्या काम आन पड़ा तुम्हारी सहेली को जो मुझको बुलाना चाहती है वो?

उर्मि बोली- मैं उसको बुला लाती हूँ तुम यहीं रुको।

मैं वेट करने लगा और थोड़ी देर में वो एक अपने जैसी ही खूबसूरत लड़की को साथ लेकर आ गई।

उसने हम दोनों को मिलवाया। उस लड़की का नाम हिना था और वो एक बड़े ही अमीर घराने से थी, वो कॉलेज अपनी कार में आया जाया करती थी।

हम दोनों ने हेलो किया एक दूसरे को!

फिर मैं चुपचाप वेट करने लगा कि इस लड़की को क्या काम हो सकता है मुझसे।

हिना बोली- देखो सोमू, मुझको तुम्हारी कुछ खासियतें पता चली हैं जिन पर मुझको कतई विश्वास नहीं, तो मैं चाहती हूँ कि मैं खुद उनको जांच लूँ?

मैं गुस्से में कांपने लगा था लेकिन मैंने बड़ी मुश्किल से अपने आपको संभाला और बड़े ही संयत स्वर में बोला- देखिये मैडम, मुझमें कोई भी ऐसी खासियत नहीं है जिसकी आपको जांचने की ज़रूरत पड़े, थैंक यू मैडम, बाय मैडम और बाय उर्मि!

यह कह कर मैं वहाँ से उठ आया और अपनी क्लास की तरफ जाने लगा।

तभी उर्मि ने मुझको आवाज़ दी- रुको सोमू, बात तो सुन लो पूरी हिना की..

मैं बोला- मैंने कोई बात नहीं सुननी, ओके बाय।

मैं फिर मुड़ कर जाने लगा कि हिना मेरे निकट आ गई और बोली- मुझको माफ़ करना सोमू, मुझको ऐसी बात नहीं करनी चाहिए थी।

मैं चुप रहा।

तब हिना फिर बोली- एक बार मेरी बात सुन तो लो यार सोमू।

मैं बोला- वैरी सॉरी हिना जी, वास्तव में जब आप ने मेरी खासियतों की जांच की बात की तो मुझको गुस्सा आ गया था। मुझमें ऐसी कोई भी खासियत नहीं है जो दूसरे लड़को में न हो!

हिना बोली- सॉरी यार, मुझसे गलती हुई थी, अच्छा ऐसा है मैं एक प्रोग्राम बनाना चाहती हूँ जिसमें सिर्फ हम 4 लड़के फ्रेंड्स और 4 लड़कियाँ सहेलियाँ होंगे।

मैं बोला- फिर क्या होगा।?

हिना बोली- मैं एक बहुत बड़े बंगले में रहती हूँ लखनऊ में जो मेरे पिताजी का है और वो इस शहर के बहुत ही अमीर आदमी हैं। कुछ दिनों के लिए मेरी सारी फैमिली लखनऊ से बाहर जा रही है तो मैंने सोचा कि क्यों न मैं अपने बंगले में एक नाईट पार्टी अपने फ्रेंड्स के साथ करूँ।

मैं बोला- लेकिन मैं तो आपका दोस्त नहीं हूँ फिर मेरा क्या काम उसमें?

हिना बोली- मैं तुमको अपना दोस्त ही तो बनाना चाहती हूँ सोमू यार!

मैं बोला- ठीक है मैं दोस्ती के लिए तैयार हूँ लेकिन आप पहले मेरी कोठी में आओ तो सही, मुझको मेहमान नवाज़ी का मौका तो दो, फिर देखेंगे आगे की पार्टी का!

हिना बोली- ठीक है, कल मैं तुमसे आगे बात करूंगी, ओके बाय!

 
मैं भी अपने टाइम पर कॉलेज से वापस घर आ गया और खाना वगैरह खा कर कुछ देर के लिए सो गया। शाम को कम्मो को सारी बात बताई और पूछा- क्या कल अपने दोस्तों को यहाँ बुला लूँ?

कम्मो बोली- हाँ हाँ बुला लो न, मैं सब इंतज़ाम कर दूंगी।

अगले दिन कॉलेज खत्म होने पर हिना, उर्मि और उसकी कुछ फ्रेंड्स मुझको कैंटीन में मिले, सबसे परिचय करवाया गया। फ्रेंड्स में 2 लड़के और एक लड़की थी।

लड़कों के नाम विनोद और राज थे और लड़की का नाम निशि था। यह सब साइंस के विद्यार्थी थे जबकि मैं और उर्मि और निशि आर्ट्स के विद्यार्थी थे, हम चारों ही इंटर के प्रथम साल के विद्यार्थी थे।

फिर हम सब हिना की कार में बैठ कर मेरी कोठी में आ गए।

वहाँ कम्मो ने हम सबका स्वागत किया, बैठक में ले गई और शरबत और जलपान का इंतज़ाम कर दिया।

अब मैंने नए मेहमानों का निरीक्षण परीक्षण किया, इन नए मेहमानों में से मैं सिर्फ उर्मि को ही जानता था।

हिना और निशि देखने में सुन्दर थी, उनकी शारीरिक सुंदरता उनके कपड़ों के कारण नहीं आंकी जा सकती थी लेकिन वो मनमोहक अवश्य थी।

लड़कों में विनी 5 फ़ीट 8 इंच का पतले शरीर वाला लड़का था और राज का शरीर थोड़ा भरा हुआ नाटे कद बुत वाला था।

तभी कम्मो ने आकर कहा- खाना मेज पर लग गया है।

हम सब बैठ कर खाना खाने लगे और वहीं बातें शुरू हो गई कि क्या प्रोग्राम बनाया जाए?

हिना बोली- ऐसा है, मैं काफी अरसे से सोच रही थी कि हम कुछ लड़के लड़कियाँ मिल कर डांस और ग्रुप सेक्स का प्रोग्राम बनायें। ‘उसके लिए आजकल के माहौल में मॉडर्न लड़के और लड़कियाँ कहाँ से मिलेंगी?’

‘मैंने पूछताछ की तो पता चला कि मेरे अलावा दो लड़कियाँ और भी हैं जो इस किस्म का शौक रखती हैं और कुछ लड़कों ने भी अपनी रज़ामंदी जताई।’ हिना ने बताया।

विनी बोला- मेरे ख्याल में हम सबके अलावा भी कुछ और लड़के लड़कियाँ होंगे जिनको ग्रुप सेक्स से कोई परहेज़ ना हो।

उर्मि बोली- मैं भी कालेज की कुछ लड़कियों को जानती हूँ जिन्होंने ग्रुप सेक्स का आनन्द पिछले कुछ दिनों में ले लिया है।

यह कह कर वो मेरी तरफ देखने लगी लेकिन मैं सर नीचे कर के किसी से भी नज़र नहीं मिला रहा था।

राज बोला- मैं अपने बारे में तो कह सकता हूँ कि मुझको ग्रुप सेक्स में कोई ऐतराज़ नहीं होगा और मैं काफी मज़ा ले सकूंगा।

अब मैं बोला- मैं सोचता हूँ कि हम सब ग्रुप सेक्स का पूरा मतलब नहीं समझे हैं अभी तक, मेरे विचार में ग्रुप सेक्स का पूरा मतलब और उससे जुड़ी हुई समस्याओं को पूरी तरह समझ पाएँ, उसके बाद फैसला लें कि यह करना है या नहीं।

हिना बोली- वाह सोमू यार, तुम तो काफी जानकारी रखते हो इस बारे में… मेरे ख्याल में सोमू ठीक कह रहा है और हमको इस बारे में पहले पूरी जानकारी ले लेनी चाहये। लेकिन यह जानकारी मिलेगी कहाँ से?

कुछ समय तक जब कोई नहीं बोला तो मैंने कहा- अगर हिना जी और आप सबको भी मंज़ूर हो तो मैं अपनी हाउसकीपर कम्मो रानी से मिलवा देता हूँ शायद उसको कुछ मालूम हो!

हिना और सबने कहा- ठीक है आप बुलाओ उनको हम पूछ लेते हैं!

मैं कम्मो को बुला लाया।

हिना ने सारी बात उसको बताई और पूछा कि आपकी राय में हमको क्या करना चाहिये इस मामले में।

कम्मो बोली- देखिये, मैंने भी अभी तक ग्रुप सेक्स या सामूहिक सेक्स के बारे में पढ़ा था कि पहले ज़माने में यह प्रथा राजा रजवाड़ों में आम थी और कई अमीर-उमरा इस तरह का सामूहिक यौन समारोह अपने महल मेंकिया करते थे लेकिन उसमें भाग लेने वाली स्त्रियाँ अक्सर बाज़ारू होती थी। जहाँ तक घरेलू लड़कियों का सवाल है, आजकल मॉडर्न माहौल में शायद यह मान्य हो लेकिन इसमें सबसे बड़ी अड़चन लड़कियों के लिए होती है क्यूंकि वास्तव में इस सारी क्रिया में लड़कियों का रोल इम्पोर्टेन्ट हैं। क्या आप लड़कियाँ इसके साथ होने वाली बदनामी की सम्भावना के लिए तैयार हैं?

हिना बोली- कैसी बदनामी दीदी?

कम्मो बोली- क्या आपके साथ यौन क्रिया में भाग लेने वाले लड़के इस बात की गारंटी ले सकते हैं कि यह बात बाहर नहीं निकलेगी?

लड़के चुप रहे।

मैंने कहा- कम्मो जी ने सही सवाल उठाया है, क्या आज आप इन तीनों लड़कियों के साथ सेक्स करने के बाद यह गारंटी लेते हैं कि इसके बारे में कभी किसी को कोई बात नहीं बताएंगे?

सब लड़के चुप रहे।

तब कम्मो बोली- आप सिर्फ 6 लड़के लड़कियाँ हैं, आप में यह बात छुप सकती है अगर आप सब मिल कर कसम खाएँ कि कभी भी इस ग्रुप सैक्स के बारे में किसी को भी कुछ नहीं बताएँगे।

सबने ज़ोर से कहा- हम सब कसम खाएंगे कि हम इस बारे में कभी भी किसी को नहीं बताएँगे।

कम्मो बोली- चलो यह तय हो गया। अब सवाल है कि किस जगह यह कार्यक्रम किया जाए, क्यों हिना तुम्हारा क्या इरादा है?

हिना बोली- मैं सोच रही थी कि अगले हफ्ते मेरे मम्मी पापा बाहर जाने वाले हैं तो मैं अपने बंगले में उनके जाने के बाद इसका आयोजन कर लूंगी।

कम्मो बोली- सिर्फ शाम का या फिर पूरी रात का आयोजन होगा यह?

हिना बोली- कम्मो जी, आप क्या उचित समझती हैं?

कम्मो बोली- मेरे विचार में आप इस कार्यक्रम को दोपहर में कॉलेज खत्म होने के बाद ही रखें। आपके पास 3-4 घंटे होंगे इस काम के लिए… मेरे ख्याल में वो काफी हैं और फिर किसी भी लड़की को झूठ का सहारा नहीं लेना पड़ेगा अगर यह प्रोग्राम दिन को करते हैं।

हिना बोली- वो तो ठीक है लेकिन मेरे पास तो जगह सिर्फ रात को मिल पाएगी न!

कम्मो ने मेरी तरफ देखा, मैं उसका इशारा समझा गया और मैंने कहा- मेरी कोठी में यह प्रोग्राम रख सकती हैं लेकिन उसमें हिस्सा लेने वाले केवल यही लोग होंगे सिर्फ हम 6… क्यों? मंज़ूर है?

 
हिना ने सबकी तरफ देख कर पूछा- क्यों बॉयज एंड गर्ल्स मंज़ूर है?

सबने कहा- मंज़ूर है।

कम्मो बोली- आप सब लड़कियों को मालूम होना चाहिए कि इस ग्रुप सेक्स प्रोग्राम में कोई भी लड़का किसी लड़की के साथ और कोई लड़की किसी दूसरे लड़के के साथ सेक्स कर सकती है और किसी को कोई भी ऐतराज़ नहीं होगा।

सब बोले- हमको मंज़ूर है।

हिना बोली- इस प्रोग्राम में कुछ ख़ास खाने के लिए या पीने का इंतज़ाम हम आपस में पैसे इकटठे कर के करेंगे। क्यों मंज़ूर है?

जब सबने हाँ बोल दी तो हिना ने कहा- आप सब कम्मो दीदी को 100-100 रूपए दे दें। इस प्रोग्राम की तारीख बाद में तय होगी।

तब हिना बोली- आज जब हम सब इकट्ठे हुए ही हैं तो क्यों न आज कुछ थोड़ी सी शुरुआत कर लें? क्यों सोमू और कम्मो जी?

मैं बोला- हमको तो कोई ऐतराज़ नहीं, आप सब देख लो, क्यों कम्मो?

कम्मो बोली- हाँ छोटे मालिक, ठीक है, अगर आप सब तैयार हैं तो प्रबंध कर सकते हैं हम!

हिना ने सबसे पूछा तो सबने हाँ कर दी।

कम्मो बोली- इससे पहले कि कार्यवाही शुरू करें, आप सब अपनी कसम तो खा लो मिल कर!

हिना ने कहा- आओ सब जने एक दूसरे का हाथ पकड़ें और कसम खाएँ कि हम 6 इस ग्रुप में घटने वाली किसी भी घटना का ज़िक्र किसी और से नहीं करेंगे।

सबने एक दूसरे का हाथ पकड़ कर कसम खाई, फिर कम्मो सबको लेकर मुख्य गेस्ट रूम में ले गई। वहाँ नीचे फर्श पर मोटे गद्दे बिछा रखे थे और टेबल पर शीशे के गिलास, शरबत और कोक की बोतलें ला कर रख ली।

मैं बोला- आप सब शर्बत या फिर कोक पी सकते हैं। एक बात और अगर हिना जी और आप सब बुरा न मानें तो कम्मो जी सारे कार्यक्रम के दौरान यहीं रहेंगी ताकि कोई प्रॉब्लम हो तो वो उसको अटेंड कर सकती हैं।

हिना और सबने कहा- हमको कोई ऐतराज़ नहीं है।

फिर हिना ने कम्मो के साथ कुछ सलाह की और कहा- हम सब अपने कपड़े उतार देंगे। किसी को शर्म वर्म की प्रॉब्लम तो नहीं है ना? इस काम में कम्मो जी हम लड़कियों की मदद करेंगी।

फिर लड़के लोग अपने कपड़े उतारने लगे और कम्मो एक एक कर के लड़कियों के कपड़े उतारने लगी। सब से पहले हिना ही नग्न हुई, उसके बाद निशा और अंत में उर्मि।

अब कम्मो ने कहा- लड़के एक लाइन में खड़े हो जाएँ और लड़कियाँ उनके सामने लाइन बना कर खड़ी हो जाएँ।

अब मैंने और बाकी सबने अपने सामने खड़ी लड़की या लड़के को गौर से देखा कि वो देखने में कैसे हैं।

मेरे सामने हिना खड़ी थी और उसका शरीर काफी ख़ूबसूरती लिए हुए था, उसके मम्मे गोल और ज़्यादा मोटे नहीं थे लेकिन उसके चूतड़ मोटे और फैले हुए थे, गोल नहीं थे, चूत पर हल्के भूरे बाल थे और पेट एकदम स्पाट था।

फिर निशा को देखा, उसके मम्मे गोल लेकिन छोटे थे और चूतड़ भी गोल और छोटे थे, उभरे हुए नहीं थे और उसकी चूत पर काले घने बाल छाए हुए थे।

उर्मि की नग्न तस्वीर पाठकों के समक्ष पहले ही रखी जा चुकी है।

लड़को को देखा तो सिवाए मेरे किसी और का लंड खड़ा नहीं था, मेरा लंड एकदम तना हुआ खड़ा था।

कम्मो ने कहा- अब लड़की और लड़के की जोड़ियाँ बनाने का टाइम है, इसके दो तरीके हैं, या तो जैसे आप खड़े हैं आमने सामने वही आपके पार्टनर हैं या फिर लाटरी डाली जाए?

सबने कहा- आमने सामने वाले ही ठीक हैं।

कम्मो ने कहा- अब आप अपने पार्टनर को अपने पास ला सकते हैं और आगे का कर्यक्रम शुरू कर सकते हैं, लेकिन याद रहे कोई भी ऐसी हरकत ना करें जो आपके पार्टनर को मंज़ूर न हो।

 
ग्रुप सेक्स

कम्मो ने कहा- अब आप अपने साथी को अपने पास ला सकते हैं और आगे का कर्यक्रम शुरू कर सकते हैं, लेकिन याद रहे कोई भी ऐसी हरकत ना करें जो आपके पार्टनर को मंज़ूर न हो।

हिना धीरे धीरे चल कर मेरे पास आई, हम दोनों ने हाथ मिलाया, फिर हिना मेरे खड़े लंड को दखने लगी।

वो हैरान थी क्यूंकि किसी लड़के का लंड अभी भी पूरा खड़ा नहीं हुआ था।

राज का लंड काफी मोटा था लेकिन वो लम्बाई में छोटा था और उधर विनी का लंड लम्बा था लेकिन पतला लग रहा था।

क्यूंकि उर्मि के हिस्से में राज आया था सो वो उसके छोटे लंड को बड़ी मायूसी से देख रही थी और उसकी आँखें तो मेरे लम्बे और मोटे लंड की तरह ही थी।

मैंने हिना को अपने पास खींच लिया और उसके लबों पर एक सॉफ्ट चुम्बन जड़ दिया। उसने भी मेरे चुम्बन का जवाब अपनी बाहों को मेरे गले में डाल कर मुझको एक बड़ा ही गहरा चुम्बन दिया।

उसका हाथ अपने आप सरकता हुआ मेरे लौड़े पर चला गया और उसके साथ खेलने लगा।

बाकी जोड़े भी एक दूसरे को लेकर बिजी हो गए। विन्नी निशि को किस कर रहा था और राज उर्मि के मम्मे चूस रहा था लेकिन वो दोनों ही अपने खड़े लंडों को लेकर दोनों लड़कियों के ऊपर टूट पड़े।

मैं और हिना एक दूसरे को बहुत ही गहरी किसिंग में लग गये, वो मेरे लंड के साथ खेल रही थी और मैं उसकी चूत में ऊँगली डाल कर उसके भग को मसल रहा था।

फिर मैंने हिना को लिटा दिया और उसके मम्मों को चूसने लगा और मेरा एक हाथ उसके भग के को सहला रहा था।

हिना की चूत भी गीली हो चुकी थी लेकिन अभी इतनी नहीं थी कि लंड को डाला जाए।

मैं उसके मम्मों के काले चुचूकों को चूसने लगा और ऊँगली से उसकी भग को रगड़ने लगा। थोड़ी देर में ही हिना ने मेरे लौड़े को खींचना शुरू किया जिसका मतलब था कि वो चुदाई के लिए तैयार है।

मैंने उसकी गोल सिल्की टांगों में बैठ कर अपने खड़े लंड को उसकी चूत के ऊपर रख कर भग को ज़ोर ज़ोर से रगड़ना शुरू किया।

अब हिना रह नहीं पा रही थी और अपनी कमर को ऊपर उठा कर लंड को अंदर डालने की कोशिश कर रही थी।

जब मैंने देखा कि वो काफ़ी उतावली हो गई है तो मैंने लंड का सिर्फ मुंह उसकी चूत पर रखा और थोड़ा भाग ही अंदर डाला कि उसके चूतड़ ने नीचे से ज़ोर से धक्का मारा और पूरा लंड अंदर ले गई।

अब मैंने अपने हाथ उसकी कमर के नीचे रखे और उसके चूतड़ों को अपने हाथ में ले लिया और धीरे धीरे धक्के मारने शुरू किये, पूरा लंड निकाल कर फिर पूरा अंदर डालना यही क्रम मैंने अपना लिया।

हिना भी नीचे से पूरी कमर उठा कर मेरे लंड का स्वागत कर रही थी।

दूसरी तरफ देखा कि विनी तेज़ धक्कों के आखरी पड़ाव पर पहुँच चुका था और राज उर्मि के अंदर झड़ चुका था और वो उर्मि की बगल में लेट कर हाम्फ़ रहा था।

उर्मि के हाव भाव से लग रहा था कि उसका कुछ भी नहीं हुआ और वो उठ कर बाथरूम में जा रही थी।

इधर मैंने हिना की चुदाई धीरे धीरे से थोड़ी तेज़ कर दी और ऐसा करते ही हिना ज़ोर से स्खलित हो गई और उसके मुख से हाय की जोर की आवाज़ निकली।

मैं भी रुक गया और जब वो थोड़ी सी संयत हुई तो उसको उठा कर मैंने अपने ऊपर बैठा लिया।

अब वो ऊपर से मुझको धक्के मारने लगी और मैं अपने हाथों से उसके मम्मों को सहलाने लगा, ख़ास तौर से उसके चुचूकों को ऊँगली से गोल गोल घुमाने लगा।

जल्दी ही हिना फिर से तैयार हो गई और ऊपर से बैठे ही मुझको ज़ोर ज़ोर से धक्के मारने लगी। कोई 5 मिन्ट की ऐसी चुदाई के बाद वो फिर से काम्पने लगी और फिर झड़ गई और मेरे ऊपर पूरी तरह से लेट गई।

अब मैंने उसको उठाया और उसको दीवार के सहारे खड़ा करके पीछे से चोदने लगा।

वो भी बड़े आनन्द से इस पोज़ में मुझसे चुदती रही। केवल 5 मिन्ट में फिर मैंने महसूस किया कि उसकी चूत फिर बंद और खुल रही है और थोड़ी देर में उसका ढेर सारा पानी झड़ गया और वो थक कर वहीं बैठ गई।

कम्मो जल्दी से आई और मैंने और उसने मिल कर उसको गद्दे पर लिटा दिया।

दूसरी तरफ़ दोनों निशि और उर्मि खाली हाथ बैठी थी और दोनों लड़के आराम से गद्दों पर लेटे थे।

मुझको हिना से फारिग होते देख कर निशि उठ कर आई और मेरे लंड को चूसने लगी और उधर उर्मि विनी को जगाने की कोशिश करने लगी।

मैंने निशि की चूत को टटोला तो वो बहुत ही गीली हो रही थी, मैंने उससे पूछा- क्या इरादा है निशि? मुझसे करवाना है क्या?

वो बोली- हाँ सोमू प्लीज!

मैंने उसको कहा कि वो फ़ौरन घोड़ी बन जाए।

जैसे ही वो घोड़ी बनी, मैंने अपना लंड उसकी चूत में डाल दिया और उसके छोटे लेकिन सॉलिड मम्मों के साथ खेलने लगा, अपनी पुरानी घुड़चाल शुरू कर दी यानि पूरा लंड निकाल कर फिर उसको पूरा डालना पहले धीरे धीरे, फिर जल्दी ही तेज़ी से घुड़ दौड़ शुरू कर दी, साथ ही उसके चूतड़ों पर हाथ की थपकी भी देने लगा।

चूतड़ों पर पड़ती थपकी को निशि ने बहुत ही पसंद किया और उसने अपने चूतड़ों को हिला हिला कर इस का अभिवादन किया।

अब मैंने उसको गर्म होते महसूस किया तो मैं पूरी ताकत से उसको पीछे से चोदने में लग गया, मेरी बेतहाशा स्पीड से वो घबरा गई और जल्दी ही छूट गई और छूटते ही चिल्ला पड़ी- मर गई रे!

कम्मो जल्दी से आई और उसको संभालने लगी.

मुझको खाली देख उर्मि दौड़ कर आ गई और बोली- सोमू प्लीज, मेरा भी काम कर दो, प्लीज सोमू!

मैं खड़ा हो गया और उसको चूतड़ों से उठा लिया और अपने खड़े लंड का निशिना लगा कर उसकी चूत में अपना मोटा लंड घुसेड़ दिया और फिर उसको हाथों में लेकर सारे कमरे का चक्कर लगाने लगा।

उर्मि मेरे लंड पर बैठी हुई अपने चूतड़ों को आगे पीछे करने लगी और जल्दी ही वो पूरी तरह से मुझको चोदने लगी।

मैं आराम से खड़ा था और वो मेरे लंड पर नाच रही थी। जल्दी ही उसका नाच इतना तेज़ हो गया कि मैं और कम्मो उसको संभाल नहीं पा रहे थे।

जल्दी ही वो मेरे गले में अपनी बाहें डाल कर मुझ से चिपक गई और सिर्फ अपने चूतड़ों को आगे पीछे नचा रही थी।

थोड़ी देर में उसका नाचना बंद हो गया और वो मेरे मुंह से अपना मुंह जोड़ कर मेरी छाती से चिपक गई और ज़ोर ज़ोर से कांपने लगी।

जब वो पूरी तरह से झड़ गई तो वो अपने आप से मेरे लंड के ऊपर से हट गई और उसके हटते ही मेरा लंड पॉप कर बाहर आ गया। लंड का रंग एकदम लाल हो गया था जैसे बहुत ही गुस्से में हो!

एक घंटे में 3 जवान लड़कियों को चोदने के बाद कोई भी आदमी या फिर लंड लाल सुर्ख हो ही जाता।
 
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