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मेरा चुदाई का सफ़र

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कम्मो गई और चम्पा आई

अब मैं चम्पा को पटाने की तरकीब सोचने लगा, कुछ सूझ नहीं रहा था और इसी बारे में सोचते हुए मैं सो गया।

सुबह जब आँख खुली तो चम्पा चाय का कप लिए खड़ी थी। मैंने जल्दी से चादर उतारी और कप लेने के लिए हाथ आगे किया तो देखा की चम्पा मेरे पायजामे को देख रही थी।

जब मैंने उस तरफ देखा तो मेरा लंड एकदम अकड़ा खड़ा था, एक तम्बू सा बन गया था खड़े लंड के कारण और चम्पा की नज़रें उसी पर टिकी थी।

मैंने भी चुपचाप चाय ले ली और धीरे से गर्म चाय पीने लगा। मेरा लंड अब और भी तन गया था और थोड़ा थोड़ा ऊपर नीचे हो रहा था। चम्पा इस नाटक को बड़े ही ध्यान से देख रही थी। जब तक चम्पा खड़ी रही लंड भी अकड़ा रहा।

जब वो कप लेकर वापस गई तो तब ही वो बैठा अब मुझको चम्पा को पटाने का तरीका दिखने लगा।

अगले दिन मैं चम्पा के आने से पहले ही जाग गया, हाथ से लंड खड़ा कर लिया, उसको पायजामे से बाहर कर दिया और ऊपर फिर से चादर डाल दी और आँखें बंद करके सोने का नाटक करने लगा।

जब चम्पा ने आकर बोला- चाय ले लीजये।

मैंने झट से आँखें खोली और अपने ऊपर से चादर हटा दी और मेरा अकड़ा लंड एकदम बाहर आ गया।

मैंने ऐसा व्यवहार किया जैसे मुझ को कुछ मालूम ही नहीं और उधर चम्पा की नज़र एकदम लंड पर टिक गई थी।

मैं चाय लेकर चुस्की लेने लगा और चम्पा को भी देखता रहा। उसका हाथ अपने आप अब धोती के ऊपर ठीक अपनी चूत पर रखा था और उसकी आँखें फटी रह गई थी।

चाय का खाली कप ले जाते हुए भी वो मुड़ कर मेरे लंड को ही देख रही थी।

अब मैं समझ गया कि वो लंड की प्यासी है।

उसके जाने के बाद मैंने कॉल बैल दबा दी, और जैसे ही चम्पा आई, मैंने पायजामा ठीक करते हुए उससे कहा- मेरे स्कूल के कपड़े निकाल दो।

और वो जल्दी से अलमारी से मेरी स्कूल ड्रेस निकालने लगी।

मैं चुपके से उसके पीछे गया और उस मोटे नितम्बों को हाथ से दबा दिया।
 


चम्पा की पहली चूत चुदाई


चाय का खाली कप ले जाते हुए भी वो मुड़ कर मेरे लंड को ही देख रही थी।

अब मैं समझ गया कि वो लंड की प्यासी है।

उसके जाने के बाद मैंने कॉल बैल दबा दी, और जैसे ही चम्पा आई, मैंने पायजामा ठीक करते हुए उससे कहा- मेरे स्कूल के कपड़े निकाल दो।

और वो जल्दी से अलमारी से मेरी स्कूल ड्रेस निकालने लगी।

मैं चुपके से उसके पीछे गया और उस मोटे नितम्बों को हाथ से दबा दिया।

उसने मुड़ के देखा और मुझ को देख कर हल्के से मुस्करा दी।

मैंने झट उसको बाँहों में भर लिया, वो थोड़ा कसमसाई और धीरे से बोली- कोई आ जाएगा, मत करो अभी!

मैंने उसको सीधा करके उसके होंटों को चूम लिया और पीछे हट गया।

यह अच्छा ही हुआ क्यूंकि मैंने मम्मी के आने की आवाज़ सुनी जो मेरे ही कमरे की तरफ ही आ रही थी।

मैं झट से बेड पर लेट गया।

मम्मी ने आते ही कहा- गुड मॉर्निंग सोमू बेटा, उठ गए क्या?

‘गुड मॉर्निंग मम्मी, मैं अभी ही उठा था… चाय पी ली है और चम्पा आंटी मेरे स्कूल के कपड़े निकाल रही है!’

मम्मी बोली- मैं यह बताने आई थी, मैं आज दिन और रात के लिए पड़ोस वाले गाँव जा रही हूँ। तुम अकेले घबराओगे तो नहीं? वैसे चम्पा तुम्हारे कमरे में ही सोयेगी, जैसे कम्मो सोती थी… ठीक है बेटा? और चम्पा, तुम अम्मा से बिस्तर ले लेना और अब दिन और रात को सोमू के कमरे में ही सोया करना! ठीक है?

चम्पा ने हाँ में सर हिलाया।

यह कह कर मम्मी तेज़ी से बाहर निकल गई।

और इससे पहले की चम्पा बाहर जाती, मैंने फिर उसको बाँहों में भर लिया और जल्दी से उसके होटों को चूम लिया। चम्पा अपने को छुड़ा कर जल्दी से बाहर भाग गई।

मैं बड़ा ही खुश हुआ कि काम इतनी जल्दी सेट हो जायेगा मुझको उम्मीद नहीं थी। मुझको मालूम था कि खड़े लंड का अपना अलग जादू होता है।

मैंने आगे चल कर जीवन में खड़े लौड़े की करामात कई बार देखी। जहाँ भी कोई स्त्री मेरे प्यार के जाल में नहीं फंसती थी, वहीं मैं हमेशा खड़े लौड़े वाली ट्रिक इस्तेमाल करता था और वो स्त्री या लड़की तुरंत मेरी ओर आकर्षित हो जाती थी।

स्कूल से आया तो कमरे में आकर सिर्फ बनियान और कच्छे में बिस्तर पर लेट गया।

चम्पा आई और मेरा खाना परोसने लगी।

मैंने पूछा- मम्मी चली गई क्या?

चम्पा मुस्कराई और बोली- हाँ सोमू भैया!

‘देखो चम्पा। तुम मुझको भैया न बुलाया करो, सिर्फ सोमू कहो ना… अच्छा यह बताओ आज मैंने सुबह तुमको चूमा, कुछ बुरा तो नहीं लगा?’

चम्पा बोली- नहीं सोमू भइया लेकिन वक्त देख कर यह करो तो ठीक रहेगा क्यूंकि किसी ने देख लिया तो मैं बदनाम हो जाऊँगी।

‘ठीक है, जाओ ये खाने के बर्तन रख आओ और खाना खाकर वापस आ जाओ, मैं तुम्हारी राह देख रहा हूँ!’

वो आधे घंटे में खाना खाकर वापस आ गई, जैसे ही वो कमरे में आई, मैंने झपट कर उसको बाँहों में दबोच लिया, कस कर प्यार की झप्पी दी जिसमें उसके उन्नत उरोज मेरी छाती में धंस गए। मेरा कद अब लगभग 5’7″ फ़ीट हो गया था और वो सिर्फ 5’3″ की थी।

उसको चूमते हुए मैंने उसके स्तनों को दबाना शुरू कर दिया और देखा कि उसके पतले ब्लाउज में उसकी चूचियों में एकदम अकड़न आ गई थी।

मैं उसको जल्दी से अपने बिस्तर पर ले गया और लिटा दिया और झट अपना कच्छा उतार दिया और उसका हाथ अपने खड़े लौड़े पर धर दिया।

वो भी मेरे लौड़े से खेलने लगी।

मैंने उसकी धोती उतारे बगैर उसको ऊपर कर दिया और काले बालों से घिरी उसकी चूत पर हाथ फेरा तो वो एकदम गीली हो चुकी थी और उसका पानी बाहर बहने वाला हो रहा था। मैंने झट उसकी टांगों में बैठा और अपना लंड उसकी चूत के मुंह पर रख दिया और चम्पा की तरफ देखा।

उसने आँखें बंद कर रखी थी और उसके होंट खुले थे!

एक धक्के में ही पूरा का पूरा लौड़ा उसकी कसी चूत में घप्प करके घुस गया और उसके मुख से हल्की सिसकारी निकल गई। मैं कुछ क्षण बिना हिले उसके ऊपर लेटा रहा और तभी मैंने महसूस किया कि चम्पा के चूतड़ हल्के से नीचे से थाप दे रहे हैं।

और मेरे लौड़े को पहली बार इतनी रसीली चूत मिली, वो तो चिकने पानी से लबालब भरी हुई थी।

मैं धीरे धीरे धक्के मारने लगा, पूरा का पूरा लंड चूत के मुंह तक बाहर लाकर फिर ज़ोर से अंदर डाल देता था। कोई 10-15 धक्कों के बाद मैंने महसूस किया चम्पा कि चूत अंदर से खुल रही और बंद हो रही थी और जल्दी ही चम्पा ने मुझको ज़ोर से अपने बदन से चिपका लिया और अपनी जाँघों से मेरी कमर को कस कर पकड़ लिया।

इससे पहले कि उसके मुख से कोई आवाज़ निकले, मैंने अपने होंट उसके होंटों पर रख दिए और कुछ देर तक उसका शरीर ज़ोर ज़ोर से कांपता रहा और फिर वो झड़ जाने के बाद एकदम ढीली पड़ गई।

लेकिन मैंने अब उसको फिर धीरे से चोदना शुरू किया। धीरे धीरे उसको फिर स्खलन की ओर ले गया और उसका दूसरी बार भी बहुत तीव्र स्खलन हो गया।

अब मैंने अपना लंड उसकी चूत में पड़ा रहने दिया और मैं उसके ऊपर लेट गया।

कुछ समय बाद मैंने उसको चूमना शुरू कर दिया, उसके उन्नत उरोजों और चुचूक चूसने लगा, एक ऊँगली उसकी चूत में डाल उसकी भगनासा को हल्के से मसलने लगा।

ऐसा करते ही चम्पा फिर से तैयार हो गई और अब उसने मुझ को बेतहाशा चूमना शुरू कर दिया और नीचे से चूत को लंड के साथ चिपकाने की कोशिश करने लगी।

मैंने फिर ऊपर से लंड से धक्के मारने शुरू कर दिए और इस बार मैं इतनी ज़ोर से धक्के मारने लगा कि चम्पा हांफ़ने लगी और करीब 10 मिन्ट के ज़ोरदार धक्कों से चम्पा फिर छूट गई और वह निढाल होकर टांगों को सीधा करने लगी लेकिन मैंने अपनी जांघों से उसको रोक दिया और धक्कों की स्पीड इतनी तेज़ कर दी कि कुछ ही मिनटों में ही मेरा फव्वारा लंड से छूट गया और चम्पा की चूत की गहराइयों में पहुँच गया।

अब मैं चम्पा के ऊपर से उतर कर बिस्तर पर आ गया, मैंने चम्पा का हाथ अपने लंड पर रख दिया और वो एकदम चौंक गई और हैरानी से बोली- सोमू, तुम्हारा लंड अभी भी खड़ा है? अरे यह कभी बैठता नहीं?

मैं बोला- चम्पा रानी, जब तक तुम यहाँ हो, यह ऐसे ही खड़ा रहेगा और तुम्हारी चूत को सलामी देता रहेगा।

‘ऐसा है क्या?’ वो बोली।

‘हाँ ऐसा ही है!’ मैंने कहा।

‘अच्छा रात को देखेंगे… अब तुम सो जाओ, मैं चलती हूँ, रात को आऊँगी।’

यह कह कर चम्पा चली गई।

उसके जाने के बाद लंड धीरे धीरे अपने आप बैठ गया और फिर मैं भी गहरी नींद सो गया।
 


चम्पा के साथ पहली रात

चम्पा एकदम चौंक गई और हैरानी से बोली- सोमू, तुम्हारा लंड अभी भी खड़ा है? अरे यह कभी बैठता नहीं?

मैं बोला- चम्पा रानी, जब तक तुम यहाँ हो, यह ऐसे ही खड़ा रहेगा और तुम्हारी चूत को सलामी देता रहेगा।

‘ऐसा है क्या?’ वो बोली।

‘हाँ ऐसा ही है!’ मैंने कहा।

‘अच्छा रात को देखेंगे… अब तुम सो जाओ, मैं चलती हूँ, रात को आऊँगी।’

यह कह कर चम्पा चली गई।

उसके जाने के बाद लंड धीरे धीरे अपने आप बैठ गया और फिर मैं भी गहरी नींद सो गया।

चम्पा के साथ गुज़ारी पहली रात ज़िन्दगी भर याद रहेगी, दिन भर मैं चम्पा पर छाया था, रात में चम्पा छा गई, चम्पा ने अपने गुज़रे जीवन के ख़ास क्षण उस रात मुझको बताये।

चम्पा को अपने पति के साथ बिताये दिन याद आने लगे। कैसे सुहागरात वाले समय उसके पति ने उसको बड़ी बेरहमी से चोदा था, उसके दिल में संजोय सारे अरमानों को रौंदता हुआ उसका ज़ालिम लंड उसकी चूत को बर्बाद कर गया था।

साले ने एक बार भी उसको उस रात चूमा या प्यार से नहीं देखा। उसका ध्यान सिर्फ चूत पर लगा था और मोटे लम्बे लंड से वह चूत को फाड़ता हुआ अपनी जीत के झंडे गाड़ता हुआ मूंछों को ताव देता रहा।

चम्पा बेचारी मासूम और कमसिन अपने पति का यह यौन अत्याचार सहती रही। उस समय वो किशोरावस्था में थी और काम क्रीड़ा के बारे में कुछ नहीं जानती थी।

ये सब बताते हुए उसकी आँखें भर आई। आगे उसने बताया कि पति के साथ बिताये शादीशुदा जीवन में वो एक बार भी यौन सुख को अनुभव नहीं कर सकी, उसका पति केवल एक सांड के माफिक था जो सिर्फ गाय को हरा करना जानता था, उसको काम सुख देना नहीं आता था।

यह कह कर वो चुप हो गई।

मैंने पूछा- फिर तुम कैसे अपने को कामसुख देती थी?

वो शर्मा गई और मुंह फेर लिया।

मैंने भी कोई ज़ोर नहीं डाला, उसको काम क्रीड़ा के लिए मूड में लाने के लिए मैं ने उसको चूमना शुरु किया, पहले उसके गालों को चूमा और फिर उसके कानों के पास थोड़ा होंटों से गर्मी दी और फिर एक बहुत ही गहरी चुम्मी उसके पतले होंटों पर दी। चूमते हुए मैंने उसके कपड़े भी उतारने शुरू कर दिए, पहले ब्लाउज उतारा और फिर उसकी धोती उतार दी और फिर उसके पतले पेटीकोट को उतार दिया।

बल्ब की रोशनी में उसका शरीर एकदम सोने के माफिक चमक रहा था, सिर्फ चुचूकों का काला रंग और चूत के बालों की काली घटा के सिवाए उसका बदन काफी चमक रहा था, गंदमी रंग बहुत सेक्सी लग रहा था।

मैं पलंग पर उसके साथ बैठ गया और उसके शरीर के एक एक हिस्से को बड़े ध्यान से देखने लगा। उसके सख्त उरोज जिनको अब मैंने चूमना शुरू कर दिया, चुचूकों को मुंह में लेकर गोल गोल घुमाना बड़ा अच्छा लगा।

और तभी मैंने देखा कि चम्पा भी मेरे खड़े लंड को हाथ में लेकर ध्यान से देख रही थी। लंड के आगे वाले भाग से उस पर छाई हुई चमड़ी को आगे पीछे करने लगी, कभी वो मेरे टाइट अंडकोष से खेलती और कभी पूरे लंड को मुट्ठी में लेकर ऊपर नीचे करती थी।

मेरी भी एक ऊँगली उसकी भगनासा को धीरे से सहला रही थी। कम्मो ने बताया था कि स्त्री का सबसे गरम शारीरिक हिस्सा केवल क्लिट या भगनासा ही होता है, दो तीन बार ऐसा करने पर चम्पा के चूतड़ अपने आप ऊपर को उठ रहे थे।

अब चम्पा की चूत बिलकुल पनिया गई थी और उसने मेरे लंड को खींच कर इशारा दिया कि वो चूत की जंग के लिए तैयार है।

मैं भी झट उसकी टांगों के बीच आ गया और अपना लंड को निशाने पर रख कर एक हल्का धक्का दिया और लंड एकदम पूरा चूत के अंदर हो गया। लंड को अंदर डाल कर ऐसा लगा कि वो किसी तपती हुई भट्टी में चला गया हो।

मैंने धीरे धीरे धक्के लगाने शुरू किए और चम्पा भी अपने चूतड़ उठा कर बराबर का साथ दे रही थी, मेरा मुंह चम्पा के मोटे स्तनों के चुचूकों को चूस रहा था।

एक को छोड़ा दूसरे को चूसा, धक्के और चुसाई साथ साथ चल रही थी और चम्पा के मुंह से दबी हुई सिसकारी निकल रही थी, उसके दोनों हाथ मेरी गर्दन में थे।

और तब मैंने अपने दोनों हाथ उसके चूतड़ों के नीचे रख दिए जिससे उसको लंड चूत की पूरी गहराई तक महसूस हुआ और तभी उसका शरीर एकदम अकड़ गया, थोड़ा कम्पकम्पाया और उसने ज़ोर से मुझ को भींच लिया और उसके मुंह से केवल हाय शब्द निकला और वो ढीली पड़ गई।

मैंने चुदाई जारी रखी लेकिन धक्के रोक दिए ताकि उसकी सांस में सांस आये और उसको फिर से आनन्द आने लगे।

चम्पा एकटक मुझ को देख रही थी और फिर कहने लगी- सोमू, तुम तो बहुत अच्छी चुदाई करते हो जी, कहाँ से सीखा यह सब?

मैं हंस दिया और बिना जवाब दिए चुदाई में फिर से जुट गया।

जब चम्पा का तीसरी बार छूटा तो उसने हाथ खड़े कर दिए और कहने लगी- अब और नहीं।

तब मैंने बिना छुटाये ही लंड चूत से निकाल लिया और चम्पा के साथ लेट गया। चम्पा तो ऐसे लेटी थी जैसे मीलों दौड़ कर आई हो।

मैंने उसका हाथ उठा कर अपने लंड पर रख दिया, मेरा लौड़ा अभी भी सर उठाये खड़ा था और फन फन फुफकार रहा था।

मेरा हाथ चम्पा के गदराये पेट पर था और वहीं से खिसकता हुआ वो उसकी चूत के ऊपर बैठ गया। उसकी चूत से अभी भी रसदार पानी निकल रहा था और वो ऐसे निढाल पड़ी थी जैसे बहुत ही मेहनत कर के आई हो।

उसके चेहरे पर एक पूर्ण तृप्ति की मुस्कान थी।

मैं बोला- लगता है बहुत थक गई हो?

वो मुस्कराई और फिर मेरी तरफ देखते हुए बोली- सोमू, तुम तो कमाल के चोदू हो, इतनी उम्र में तुम तो बहुत बड़े खिलाड़ी निकले। किसने सिखाया है यह सब?

मैं भी हँसते हुए बोला- अंदाजा लगाओ तुम कौन हो सकता है यह सिखाने वाला?

‘कम्मो है क्या? मुझको पक्का यकीन है कि यह काम कम्मो के अलावा दूसरा कोई और हो ही नहीं सकता!’

‘तुम इतने यकीन से कैसे कह सकती हो?’

‘वही तो थी तुम्हारे काम को देखने वाली… वही आती जाती थी तुम्हारे पास!’

बातें करते हुए उसका हाथ मेरी लंड से खेल रहा था जो अब भी बराबर एकदम अकड़ा था। मेरा भी हाथ उसकी चूत के घने बालों के साथ खेल रहा था, मैंने चूत में ऊँगली डाली तो वो फिर से गीली होना शुरू हो गई थी।

मैंने हल्के हल्के उसके भगनासा को रगड़ना शुरू किया। मेरा ऐसा करने पर वो तुरंत अपना चूतड़ उठा कर ऊँगली का ज़ोर बढ़ा देती थी और अब मैं तेज़ी से ऊँगली करने लगा।

उसकी आँखें मुंदी हुई थी और मुंह अधखुला था। फिर उसने हाथ से मेरे लंड को ऊपर आने की दावत दी और मैं झट उसकी खुली टांगों के बीच आ गया और निशाना साध कर अपना अकड़ा लंड उसकी चूत में डाल दिया और धीरे धक्के से शुरू कर बहुत तेज़ धक्कों पर पहुँच गया।

मैंने देखा चम्पा का मुख एकदम खुला हुआ था और उसकी साँसें तेज़ी से चल रहीं थी, उसका एक हाथ उसकी छाती के चुचूकों को रगड़ रहा था और दूसरा मेरे गले में था।

इस बार चुदाई का अंत मैं अपना छूटने के बाद तक करना चाहता था इसलिए सर फ़ेंक कर अपने काम में जुट गया, कभी बहुत तेज़ धक्के और कभी सिर्फ चूत के ज़रा अंदर तक जाकर वापसी वाले धक्के मारने लगा।

चम्पा के मुंह से हल्की सिसकारी निकल रही थी और वो आँखें बंद कर चुदाई का आनन्द ले रही थी। इस बीच उसका पानी 3 बार छूटा ऐसा मैं ने मसहूस किया और अंतिम पड़ाव पर पहुँच कर मैंने इतनी स्पीड से धक्के मारे कि मैं खुद हैरान था कि मैं ऐसा कर सकता हूँ।

और फिर ज़ोर का धक्का मार कर पूरा लंड चम्पा की चूत में डाल कर मेरा वीर्य छूट गया और ज़ोरदार पिचकारियाँ उसकी चूत को हरा करने लगी।

चम्पा ने भी अपने चूतड़ उठा कर मेरे ही लंड के साथ चिपका दिए और छूट रहे वीर्य को पूरा अंदर ले लिया।

मैं हैरान था कि इस को शायद गर्भवती होने का डर नहीं लग रहा था, मैंने हिम्मत करके पूछ ही लिया- चम्पा मैंने तेरे अंदर छुटाया, तुझे गर्भ ठहरने का डर नहीं लग रहा?

वो हैरानी से मेरा मुंह देखने लगी और फिर बोली- अच्छा सोमू भैया को यह भी पता है कि गर्भ कैसे ठहरता है?

वो शरारत से मुस्कराई।

मैं बोला- यही सुन रखा है कि आदमी का अंदर छूटने पर ही गर्भ होता है! क्या ऐसा नहीं है?

चम्पा मुस्कराई और बोली- मेरे घर वाले ने 2 साल बुरी तरह से मुझ को चोदा था फिर भी कुछ नहीं हुआ मुझको, शायद मेरे अंदर ही कोई खराबी है।

‘चलो छोड़ो, आज मैंने तुमको 3 गोल से हराया!’

‘वह कैसे?’

‘तुम्हारा कम से कम 4 बार छूटा और मेरा सिर्फ एक बार, इस तरह तुम 3 गोल से हारी हो।’

‘नहीं तो, मैं तो 7 बार छूटी थी और तुम्हारा एक बार… तो हुई न 6 गोल से तुम्हारी जीत!’

‘अच्छा, मुझको तो 4 बार छूटना महसूस हुआ था?’

‘इतने सालों के बाद मुझको किसी लंड ने ऐसे अच्छी तरह चोदा है, मेरा तो जीवन सफल हो गया, अब मैं तुमको नहीं छोडूंगी जीवन भर, रोज़ रात मुझ को इसी तरह चोदना होगा!’

‘ठीक है मेरी रानी, चोदूंगा जितना चुदवाओगी तुम!’

और फिर हम दोनों एक दूसरे के साथ चिपक कर सो गए।

आधी रात को मेरी नींद खुली तो नंगी चम्पा को देख कर मेरा दिल फिर मचल गया और मैंने उसको चूत पर हाथ फेर कर सोये हुए ही तैयार कर लिया और फिर मैंने उसको फिर हल्के हल्के चोदा कहीं उसकी नींद न खुल जाए।

वो तब भी एक बार छूट गई और मैं बिन छूटे ही सो गया और लंड तब भी खड़ा था।

फिर सुबह होने से पहले ही मेरी नींद खुली तो देखा कि चम्पा की चूत पनिया रही है और मैं फिर उस पर चढ़ गया और तकरीबन सुबह होने तक उसको चोदता रहा।

जब उसकी आँख खुली तो मैं उसको बड़े प्यार से धीरे धीरे चोद रहा था। एक हॉट चुम्मी उसके होटों पर की और आखिरी धक्का मारा और मेरा फव्वारा छूट गया और चम्पा की चूत पूरी तरह से मेरे वीर्य से लबालब भर गई और तभी उसने झट मुझ को कस कर अपने

बाँहों में समेटे लिया और कहा- जियो मेरा राजा, रोज़ ऐसे ही चोदना मेरी जान!

यह कह कर वो अपने कपड़े पहनने लगी और फिर जल्दी से कमरे से बाहर चली गई।

और मैं फिर से सो गया गहरी नींद में!

तभी चम्पा मेरी चाय लाई और चाय पीने के बाद में एकदम फ्रेश हो गया और जल्दी से स्कूल की तैयारी शुरू कर दी।

स्कूल में ज्यादा दिल नहीं लग रहा था लेकिन फिर भी पूरा समय बिताना पड़ा। स्कूल के बाद मैं जल्दी ही घर वापस आ गया चम्पा मेरी रहा देख रही थी, वो मेरा खाना ले आई और मैं खाना खाने के बाद सो गया।

 
जब आँख खुली तो देखा कि चम्पा नीचे दरी बिछा कर सो रही थी, पंखे की ठंडी हवा में उसके बाल लहरा रहे थे और उसका पल्लू सीने से नीचे गिरा हुआ था, उसके उन्नत उरोज मस्त दिख रहे थे।

मैं भी कमरे का दरवाज़ा बंद कर के नीचे ही लेट गया और उसकी लाल धोती को उल्टा दिया और खड़े लंड को उसकी सूखी चूत में डाल दिया।

लंड को चूत में ऐसे ही पड़े रहने दिया।

लंड की गर्मी जब चूत के अंदर फैली तो चम्पा थोड़ी हिली, मैंने कस के एक धका मारा तो चम्पा की आँख खुल गई और मुझको अपने ऊपर देखकर उसने टांगें फैला दी और तब मैंने उसको फिर जम के चोदा।

2-3 बार छूटने के बाद वो बोली- बस करो सोमू, अभी रात भी तो है न।

मैं फिर बिन छुटाये उसके ऊपर से उतर गया।

आने वाली रात के बारे में सोचते हुए मेरी शाम कट गई और खाने में तंदूरी मुर्गा दबा के खाया और एक प्लेट में डलवा कर चम्पा के लिए भी ले आया क्यूंकि मैं जानता था कि नौकरों का खाना अलग बनता था और उसमें सिर्फ दाल रोटी और चावल ही होते थे।

रात जब मैं अपने कमरे में आया तो काफी गर्मी लग रही थी, मैंने जल्दी एक पतला कच्छा और बनयान पहन ली और पंखा फुल स्पीड पर कर दिया।

थोड़ी इंतज़ार के बाद चम्पा आ गई, वो बिलकुल तरोताज़ा लग रही थी।

मैंने उसके सामने तंदूरी मुर्गे की प्लेट रख दी और कहा- खाओ चम्पा, जी भर के… क्यूंकि आज रात को तुम को सोने नहीं दूंगा।

और कोल्ड बॉक्स से बंटे वाली बोतल निकाल कर गिलास में डाल दी और गिलास चम्पा को दे दिया।

वो मुर्गा और बोतल पीकर बहुत खुश हुई, फिर हम दोनों मेरे नरम बेड पर लेट गए और कमरे की हल्की लाइट जला दी और और इसी हल्की लाइट में हम दोनों एक दूसरे को निर्वस्त्र करने लगे, उसका धोती और ब्लाउज और पेटीकोट झट से उतार दिया।

तब चम्पा ने मेरा हाथ पकड़ लिया और बोली- कहीं मम्मी या कोई और आ गया तो? पूरे कपड़े न उतारो सोमू!

मैं बोला- डरो मत चम्पा रानी, मेरे और मम्मी का हुक्म है कि रात में कोई मुझको नहीं तंग करेगा और न ही कोई मेरे कमरे में आएगा। पापा मम्मी भी नहीं आते कभी, तुम बेफिक्र रहो!

फिर हमारा खेल शुरू हुआ और आज मुर्गा खाकर चम्पा में कामुकता बहुत ज्यादा बढ़ गई थी, वो प्यार की जंग में बढ़ बढ़ कर हिस्सा ले रही थी।

अब उसने मेरे सारे जिस्म को चूमना शुरु किया, मेरी ऊँगली भी उसकी चूत पर ही उसकी भगनासा को हल्के हल्के मसल रही थी।

फिर वो मेरे ऊपर लेट गई और मेरे लौड़े को अपनी चूत पर बिठा कर ऊपर से धक्का मारा और पूरा का पूरा लंड उसकी आग समान तप्ती हुई चूत में जड़ तक चला गया।

वो बोली- सोमू, अब तुम हिलना नहीं, सारा काम मैं ऊपर से करूंगी।

चम्पा तब पैरों बल बैठ गई और ऊपर से चूत के धक्के मारने लगी। इस पोजीशन में मैंने आज तक किसी को नहीं चोदा था, मुझको सच में बहुत मज़ा आने लगा और मैं नीचे से धक्के मारने लगा जिसके कारण मेरा पूरा 7 इंच का लंड चम्पा की चूत में समां गया।

और बार बार ऐसा होने लगा।

तब चम्पा के चूतड़ एकदम रुक गए और वो एक ज़ोरदार कम्कम्पी के बाद मेरे ऊपर निढाल होकर पसर गई, चम्पा का बड़ा तीव्र स्खलन हुआ और वो बहुत ही आनन्दित हुई।

मेरा खड़ा लंड अभी भी उसकी चूत में समाया हुआ था।

मैंने थोड़ी देर उसको आराम करने दिया और फिर उसको सीधा करके उस पर चढ़ने की तैयारी करने लगा और तभी चम्पा बोली- कभी घोड़ी बना कर चोदा है किसी को?

मैंने कहा- नहीं तो, क्या यह तरीका तुम को आता है?

चम्पा बोली- मेरा मूर्ख पति कई रंडियों के पास जाता था, यह सब वो वहाँ से ही सीखा था और मेरे साथ ज़बरदस्ती करता था। सच में कभी भी अपने पति के साथ नहीं छूटी क्यूंकि मैं उसको मन में एक दरिंदा ही समझती थी।

चम्पा झट घोड़ी बन गई और मैं उसके पीछे घुटने बल बैठ गया और जैसा उसने बताया अपना लंड चम्पा की गांड और चूत बीच वाले हिस्से में टिका दिया और फिर धीरे से उसको चूत के मुख ऊपर रख कर धीरे से अंदर धकेल दिया और गीली चूत में लंड फिच कर के अंदर जा घुसा और बड़ा ही अजीब महसूस होने लगा क्यूंकि चूत की पकड़ लंड पर काफी सख्त हो गई।

चूत अपने आप ही बहुत टाइट लगने लगी, हल्के धक्कों से शुरू करके आखिर बहुत तेज़ी से धक्के मारने लगा और कमसे कम चम्पा 3 बार इस पोजीशन में छूटी और मैं भी एक ज़ोरदार फव्वारे के साथ छूट गया।

उस रात हम दोनों ने कई नए पोज़ सीखे और आज़माये। और इस गहमा गहमी में हम पूरी तरह से थक कर चूर हो गए और एक दूसरे की बाँहों में सो गए।

सुबह जब आँख खुली तो चम्पा जा चुकी थी और काफी दिन निकल आया था।

फिर यह सिलसिला बराबर जारी रहने लगा।

 


चम्पा संग फ़ुलवा


चम्पा के साथ गुज़ारी गई कई रातों की कहानी सिर्फ इतनी है कि हर बार कुछ नया ही सीखने को मिलता था। उसके साथ यौन सम्बन्ध अब प्राय: एक निश्चित और सुचारू ढंग से होने लगा, वो दोपहर को केवल पंखे की ठंडी हवा के लिए आती थी और हम दोनों एक दूसरे से दूर ही रहते थे और यह अच्छा ही हुआ क्यूंकि -2 बार ऐसा हुआ कि मम्मी मुझ को आवाज़ लगाती हुई मेरे कमरे तक आ गई और हम को सोया देख कर वापस चली जाती थी।

यह देख कर हम दोनों अब सावधान हो गए थे और रात में भी हम दोनों थोड़ी देर के लिए कपड़े पूरे उतार कर चुदाई कर लेते थे। चम्पा भी अब पूरी तरह से काम का आनन्द ले चुकी थी और उसकी काम भूख अब काफी हद तक शांत हो चुकी थी। वो हर रात 3-4 बार छूट जाती थी और उसके बाद वो शांत हो कर सो जाती थी और मैं भी 1 बार शुरू रात में छूटा लेता था फिर सुबह की पहली चुदाई में फिर चम्पा को चोदते हुए उसका 2 बार और मेरा 1 बार ज़रूर छूट जाता था।

लेकिन गज़ब की बात यह थी कि चम्पा की चूत को ऊँगली लगाओ तो वह पूरी तरह गीली ही मिलती थी।

चम्पा से पूछा तो वो बोली- मेरे पति के साथ सोते हुए मेरी चूत कभी गीली नहीं होती थी और हमेशा ही वो सूखी चूत में लंड डाल कर धक्के मार लेता और जल्दी ही छूट जाता। कभी उसने मेरे कपड़े नहीं खोले, सिर्फ धोती ऊंची करता और लंड अंदर डाल कर जल्दी जल्दी धक्के मार कर छूटा लेता और फिर जल्दी ही सो जाता… और मुझ को गर्मी चढ़ी होती थी जिसको मैं नहाते हुए शांत कर लेती थी।

मैंने पूछा- अच्छा तो बताओ, कैसे शांत करती थी तुम अपनी गर्मी?

वो कुछ नहीं बोली और थोड़ी देर बाद कहने लगी- छोड़ो सोमू, तुम क्या करोगे जान कर, यह हम औरतों का गोपनीय राज़ है जो हम मर्दों को नहीं बताती।

‘अच्छा! मैं भी यह राज़ जान कर ही रहूँगा।’

‘नहीं न… यह औरतों की बातों को जानने की कोशिश न करो मेरे सोमू।’

उस वक्त मैं चुप कर गया और ठीक मौके का इंतज़ार करने लगा। अगले दिन मैं स्कूल के सबसे बड़े लड़के को पकड़ा जो शादीशुदा था, मैं उसको बहला कर स्कूल की कैंटीन में ले गया और उसको बंटे वाली बोतल पिलाई और फिर उसकी तारीफ की जैसे वो बहुत ही सुन्दर और स्मार्ट लड़का है।

वो जब खुश हो गया तो उससे पूछा- यार एक बात बतायेगा?

उसने कहा- पूछो छोटे सरकार!

‘यार, आज तक यह नहीं समझ आया कि औरतें जब बहुत गरम हो जाती हैं और लंड की प्यासी होती हैं और उनका पति उनके पास नहीं होता तो वे कैसे अपनी गर्मी शांत करती हैं?’

वो मुस्करा दिया और बोला- क्या बात है छोटे सरकार, यह सवाल क्यों पूछ रहे हो? आप का किसी से चक्कर तो नहीं चल रहा?

‘अरे नहीं यार, वो क्या है घर में नौकरानियों आपस में बातें कर रहीं थी कि पति बाहर गया है सो गर्मी चढ़ती है तो शांत कर लेती हूँ! कैसे शांत करती हैं ये औरतें चढ़ी हुई गर्मी?

‘अरे यार सिंपल है, अपनी ऊँगली से चूत के ऊपर दाने को रग़ड़ लेती है और जैसे हम लड़कों का मुठ मारने से छूट जाता है वैसे ही वो सिर्फ ऊँगली से छूटा लेती हैं।’

‘अच्छा? सच कह रहे हो?’

‘हाँ भई हाँ, मैंने अपनी पत्नी का कई बार छुटाया जब मेरा जल्दी छूट जाता है तो मैं उसको ऊँगली से छूटा देता हूँ और वो खुश होकर सो जाती है या फिर उसका मुंह से छूटा देता हूँ।’

‘वो कैसे यार? बता न? अच्छा कुछ खायेगा क्या? एक समोसा ले ले यार!’

समोसा खाते हुए वो बोला- किसी को बताना नहीं यार, यह मुंह का तरीका बहुत कम लोगों को मालूम है।

‘घबरा नहीं यार, मैं तेरा राज़ अपने तक ही रखूँगा। अब बता, यह मुंह का तरीका क्या है?’

और फिर उसने मुझको मुखमैथुन करना सिखाया और कहने लगा- अगर किसी स्त्री का नहीं छूट रहा हो लंडबाज़ी के बाद भी तो यह तरीका एकदम मस्त है और आज़माया हुआ है और कितनी भी सख्त औरत क्यों न हो, काबू में आ जाती है और बार बार देती है चूत!

मैं यह सुन कर एकदम खुश हो गया और सोचा यह तरीका आज ही आज़माऊँगा। किसी तरह स्कूल खत्म हुआ और मैं बहुत बेसब्री से रात का इंतज़ार करने लगा। मुश्किल से टाइम काट कर रात के खाने के बाद मैं अपने कमरे में आ गया और चम्पा का इंतज़ार करने लगा।

काफी देर बाद वो आई और आ कर अपना दरी वाला बिस्तर बिछा और वहीं लेट गई।

यह देख कर मैं बोला- क्या बात है चम्पा? मेरे बिस्तर पर नहीं आ रही क्या?

चम्पा बोली- नहीं सोमू, मेरा महीना शुरु हो गया है तो कुछ नहीं कर सकते अगले चार दिन!

यह सुन कर मेरा मुंह लटक गया और मैं एकदम उदास हो गया, फिर सोचा यह 4 दिन भी बीत जाएंगे। यह सोच कर मैं सोने की कोशिश करने लगा। तभी लगा कि चम्पा उठी और बाहर चली गई और थोड़ी देर बाद वो किसी लड़की के साथ वापस आ गई।

ध्यान से देखा तो वो रसोई में हमारी बावर्चन के साथ काम करती थी, देखने में कोई ख़ास नहीं थी, थोड़ी मोटी थी लेकिन उसके उरोज और नितम्ब काफी बड़े लग रहे थे।

मुझको समझ नहीं आया कि चम्पा उसको मेरे कमरे में क्यों लाई थी। मैं उठ कर बैठ गया और चम्पा से पूछा- यह कौन है चम्पा?

‘छोटे मालिक, यह तो फुलवा है, यह आज मेरे पास सोयेगी अगर आप को ऐतराज़ न हो?’

‘पर क्यों?’ मैं बोला।

‘बस यों ही!’

वो मंद मंद मुस्कराने लगी और फिर चम्पा उठी, कमरे का दरवाज़ा बंद कर आई, मेरे बिस्तर पर बैठ गई और उसने इशारे से फुलवा को भी पास बुला लिया।

चम्पा बोली- छोटे मालिक, फुलवा मेरे बचपन की सहेली है और हमारी शादी भी साथ साथ हुई थी। हमारे पति भी एक साथ विदेश नौकरी करने गए थे और हम दोनों तब से ही लंड की प्यासी हैं. जब आपने मुझको पहली बार चोदा था तो फुलवा मेरे चेहरे को देख कर जान गई थी कि मेरी लंड की प्यासी थोड़ी शांत हुई है। और तभी उसके चेहरे की मायूसी देख कर मैंने मन ही मन फैसला किया कि छोटे मालिक को मनवा लूंगी और फुलवा को चुदवा दूंगी। बोलिए, क्या आप फुलवा को भी चोदेंगे? मैं हाथ जोड़ कर आप से विनती कर रही हूँ छोटे मालिक आप फुलवा को भी लंड का सुख दे दो जी!

मैं गहरी सोच में डूब गया कि फुलवा को चोदना ठीक होगा क्या?

मेरे को हिचकते देख कर चम्पा बोली- सोमू मान जाओ ना?

मैं बोला- क्या तुम यहाँ रहोगी? तुम्हारे बिना मैं नहीं करूँगा कुछ भी?

‘हाँ हाँ, रहूंगी… तुम दोनों की पूरी मदद करूँगी, बोलो ठीक है न?’

मैंने हामी में सर हिला दिया।

चम्पा ने फुलवा को बाँहों भर लिया और उसके गालों को चूम लिया और मुझको भी होटों पर चूम लिया।

उसका इतना करना था कि मेरा लंड टन से खड़ा हो गया।

चम्पा ने फुलवा के कपड़े उतारने शुरू कर दिये, पहले उसकी धोती को उतारा और फिर उसका ब्लाउज उतार दिया। फुलवा का ब्लाउज जब उतरा तो उसके मोटे स्तन उछाल कर बाहर आ गए, बहुत बड़े और सॉलिड थे।

उसकी चूचियाँ भी एकदम कड़ी थीं और ख़ास तौर अपनी ओर आकर्षत कर रही थीं और चम्पा ने धीरे से उसका पेटीकोट भी उतार दिया।

फुलवा का सारा जिस्म गोल मोल था, उसका पेट गोल और उभरा हुआ था लेकिन हिप्स और जांघें एकदम सॉलिड थे। उसकी चूत काले बालों से ढकी हुई थी, उसका मुंह झुका हुआ था और शायद सोच रही होगी ‘क्या मैं उसको पसंद करूंगा या नहीं?’

उसका भ्रम दूर करने के लिए मैंने भी अपनी कमीज और कच्छा उतार दिया और मेरा खड़ा लंड यह बताने के लिए काफी था कि मैं उसको पसंद करता हूँ, या यूँ कहो कि मेरा लंड बहुत पसंद करता है।

चम्पा खड़े लंड को देख कर ताली बजाने लगी और जल्दी से उसने मुझ को एक किस कर दी और और मुझको और फुलवा को अपनी दोनों बाहों में भर लिया और फिर फुलवा को लेकर बिस्तर पर आ गई, फुलवा को बीच में और मुझको एक साइड पर और आप दूसरे साइड में लेट गई।

फिर उसने मेरा हाथ पकड़ कर फुलवा के स्तनों पर रख दिया दोनों उरोजों को मेरे हाथ द्वारा मसलने लगी।

फिर उसके इशारे पर मैं खुद ही यह काम करने लगा और फिर उसने मेरा हाथ पकड़ कर फुलवा की बालों भरी चूत पर रख दिया।

मैंने ऊँगली डाली तो वो पूरी तरह से पनिया रही थी। उसके भगनासा को हल्के से रगड़ा तो फुलवा ने अपनी कमर एकदम ऊपर उठा दी। अब मैंने उसकी चूचियों को चूसना शुरु कर दिया और दूसरे हाथ उसके चूत पर फेरना जारी रखा।

तब चम्पा ने फुलवा का हाथ मेरे लौड़े पर रख दिया और उसको मुठी में ऊपर नीचे करने को कहा।

फिर चम्पा ने मुझको इशारा किया कि मैं फुलवा पर चढ़ जाऊ और मैं झट उसकी टांगों के बीच आकर लंड को उसकी चूत पर रख दिया, कुछ देर लंड को हल्के से चूत पर रगड़ा और फिर चूत के मुंह पर रख कर एक धक्का मारा और घप से लंड चूत की गहराई में खो गया।

ऐसा लगा कि वो एक गर्म भट्टी में चला गया हो। मुझको कम्मो और चम्पा के साथ पहली चुदाई की याद आ गई क्यूंकि तब भी दोनों की चूतें भट्टी की तरह गर्म थीं..

अब मैंने चुदाई अपने कंट्रोल में ले ली और धीरे धीरे धक्कों के साथ चुदाई की स्पीड बढ़ाता गया और करीब 5 मिन्ट की चुदाई बाद वो पहली बार छूट गई।

उसके छूटने का ढंग कुछ अलग था, छूटने से पहले उसने अपनी कमर को एकदम ऊपर उठाया और मेरी कमर के साथ जोड़ दिया और ज़ोर ज़ोर से कांपना शुरू कर दिया और जब तक वो पूरी तरह नहीं छूटी वो मुझसे चिपकी रही।

मेरा लंड पूरा उसके अंदर समाया हुआ था और उसकी चूत का खुलना बंद होना लंड को महसूस हो रहा था, उसके मोटे मम्मे मेरी छाती से चिपके हुए थे।

थोड़ा रुक कर मैंने फिर चुदाई शुरू कर दी और धीरे धीरे चुदाई की स्पीड बढ़ाता गया और फुलवा एक बार फिर छूट गई और एकदम ढीली पढ़ गई लेकिन मैंने चुदाई जारी रखी और थोड़े टाइम बाद जब फुलवा तीसरी बार छूटी तो मैं अपने को नहीं रोक सका और उस के साथ मेरा भी फुवारा छूट गया और फुलवा का चेहरा एकदम खुशी से खिल उठा।

हम दोनों थक कर लेट गए और चम्पा फुलवा के होटों को चूसने लगी और उसके स्तनों को दबाने लगी। फुलवा ने ‘थैंक यू’ मुझको आँखों से ही कह दिया।

चम्पा उठी और नीचे बिस्तर बिछा कर लेट गई और फुलवा को मेरे साथ सोने का इशारा करके खुद सो गई।

10-15 मिन्ट बाद मैंने फुलवा को फिर चोदा और उसके दो बार छूटने के बाद मैंने भी छूटा लिया और करवट बदल कर सो गया।

आधी रात को मेरा हाथ फिर फुलवा के नंगे स्तनों पर लगा और फिर मेरा लंड चोदने के लिए तैयार हो गया और मैंने फुलवा की चूत को हल्के से मसला और जब उसकी टांगें फिर अपने आप खुल कर चौड़ी हो गई तो मैं जल्दी से अंदर घुसा और उसकी चूत में लंड को डाल दिया।

फुलवा की चूत अभी भी पनिया रही थी, थोड़े धक्कों के बाद वो झड़ गई लेकिन मैं अभी भी मस्ती में था तो आधा घंटा उसको चोदने के बाद ही अपना छुटाया और फिर गहरी नींद सो गया।

सुबह चम्पा ने मुझको जगाया और पूछा कि हम दोनों जाएँ क्या?

मैंने इशारे से कहा कि फुलवा को एक बार और चोदना चाहता हूँ तो फुलवा जो धोती पहन चुकी थी, धोती को उतारने लगी।

मैंने इशारे से कहा- रहने दो, धोती ऊपर उठा कर ही चोद दूंगा।

वो फिर मेरे पास लेट गई और मैंने उसको जल्दी ही फिर तैयार कर लिया और उसकी ज़ोरदार चुदाई कर दी और उसका कम से कम 2 बार छूटने के बाद भी मैं नहीं छूटा और उसको कहा- जाओ तुम दोनों, बाकी हिसाब रात को कर लेंगे।

यह सिलसिला 4-5 दिन चला और फिर सिर्फ चम्पा ही आई, कुछ उदास दिख रही थी, मैंने पूछा- उदास क्यों हो चम्पा?

वो बोली- फुलवा नहीं आई इसलिए!

‘तो क्या परेशानी है?’

‘आप से पूछे बगैर हम उसको कैसे लाते?’

‘अरे इसमें पूछना क्या है? ले आओ न उसको!’

और चम्पा ख़ुशी ख़ुशी चली गई और थोड़ी बाद वो फुलवा को लेकर आ गई। दोनों मेरे पलंग पर बैठ गई मेरी अगल बगल… मैंने पहले चम्पा को चूमा और फिर फुलवा को।

मैं बोला- अब क्या इरादा है चम्पा रानी?

‘आप बुरा तो नहीं मान जायेंगे अगर मैं कहूं कि आप हम दोनों को बारी बारी से चोदो। आप बीच में लेट जाओ और हम दोनों को बारी बारी से चोदो जैसे पहले मुझको और फिर फुलवा को, मंज़ूर है क्या?’

‘जैसा तुम कहो चम्पा!’

‘चलो फुलवा और सोमू तुम भी कपड़े उतार दो और मैं भी उतार देती हूँ फिर आप बीच में लेट जाना ठीक है?’

‘ठीक है, या ऐसा करो कि मैं बीच में लेट जाता हूँ और तुम बारी से मेरे ऊपर चढ़ जाना और चुदाई का सारा काम तुम दोनों को करना पड़ेगा। मंज़ूर है क्या?’

दोनों ने सर हिला दिया।
 
पहले चम्पा ने मुझ को मुंह से लेकर लंड तक चूमा और फुलवा मेरे खड़े लंड से खेलती रही।

थोड़ी देर बाद फुलवा ने मेरे लंड को मुंह में लेकर चूसना शुरू कर दिया। मैं एकदम से बिफर गया क्यूंकि पहले कभी ऐसा नहीं हुआ था, मुझ को लगा कि मेरा लंड फट जाएगा लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ और तब चम्पा मेरे लंड के ऊपर आ गई और मेरे खड़े लंड को हाथ से चूत में डाल दिया और फिर आहिस्ता आहिस्ता ऊपर से नीचे धक्के मारने लगी।

उसकी चूत से टपक रहा रस मेरे लंड और अंडकोष पर गिर रहा था, मैं भी नीचे से धक्के का जवाब धक्के से दे रहा था। फुलवा मेरी छाती के निप्पलों को चूस रही थी और हम तीनों ही चुदाई में मस्त थे।

तभी चम्पा ने धक्के मारना तेज़ कर दिया और फिर उसने आखरी एक धक्का ज़ोर से मारा और वो मेरे ऊपर पसर गई, उसका रस पूरी तरह से मेरे ऊपर फैल गया और उसके उरोज मेरी छाती में दब गए।

फुलवा ने प्यार से चम्पा को मेरे ऊपर से हटाया और बिस्तर पर लिटा दिया। और फिर वो अपनी मोटी गांड को लेकर मेरे लंड के ऊपर बैठ गई और जब लंड उसकी चूत में पूरा चला गया तो वह भूखी शेरनी की तरह से धक्के मारने लगी और जल्दी जल्दी ऊपर नीचे होने लगी।

मैं उसकी धक्के की लय को समझ पाता तब तक वो भी झड़ गई और हांपते हुए मेरे ऊपर पसर गई।

दो दो चूतों से निकला रस मेरे ऊपर फैल गया और उस रस से बहुत मादक सुगंध आ रही थी।

सारी रात यही क्रम चलता रहा, कभी चम्पा ऊपर और कभी फुलवा ऊपर! दोनों कई बार छूटी और मैं भी 2 बार छूट गया, दोनों में एक एक बार!

सुबह हुई तो हम तीनों मस्त नींद में थे लेकिन चम्पा सजग थी और टाइम पर उठ कर फुलवा को लेकर चली गई और जब मेरी चाय ले कर आई तो पलंग की चादर की हालत देख कर उसने झट चादर बदल दी और बोली कि इसको वो खुद धोएगी क्यूंकि चादर पर ढेरों चूत का रस और वीर्य फैला था।

चम्पा की होशियारी के कारण हमारा यह खेल निर्विघ्न चलता रहा।

फुलवा को गर्भ ठहर गया


अब ढलती उम्र में कभी कभी सोचता हूँ कि यह कैसे संभव हुआ कि मेरी हरकतों को बारे में मेरे माँ और पिता को कभी कोई खबर नहीं लगी.

यह सब शायद पहले कम्मो और बाद में चम्पा की होशियारी के कारण संभव हुआ। दोनों बहुत ही सतर्क रहती थी कि कभी भी हवेली में काम करने वाला नौकर या नौकरानी के मन में उठ रहे संशय को फ़ौरन दबा दिया जाये।

चम्पा का कहना था कि वो समय समय पर सब को यही कहती थी कि छोटे मालिक रात को बहुत डर जाते हैं तो किसी का उनके साथ सोना बहुत ज़रूरी था। यह कहानी इतनी प्रचलित कर दी गई कि कम्मो और फिर चम्पा का मेरे कमरे में सोना एक साधारण बात बन गई और छोटे मालिक की भलाई के लिए ही मालकिन ने यह उचित समझा है।

और फिर छोटे मालिक एक सीधे साधे लड़के हैं और उनको दुनिया दारी का कुछ भी ज्ञान नहीं।

इस बात को मेरे कमरे में रहने वाली सारी नौकरानियों के दिल में बिठा दी जाती थी और अपने शारीरिक सुख को जारी रखने के लिए ये बातें वो बार बार दोहराती थीं।

उधर मैं भी कम्मो चम्पा और अब फुलवा को बिना मांगे थोड़ा बहुत धन दे दिया करता था। जैसे कम्मो को हर महीने 100 रुपया देता था जो उसकी पगार के अलावा होता था। इसी तरह चम्पा और अब फुलवा को भी इतने ही पैसे हर महीने दे दिया करता था।

मेरी मम्मी हर महीने मुझको हज़ार रुपया जेब खर्चे के लिए देती थी और मैं जहाँ तक हो सके इन लोगों की मदद कर दिया करता था। यही हाल स्कूल में भी था, मैं हर एक दोस्त की मदद कर दिया करता था, वो सब मेरे अहसानों तले दबे रहते थे और मेरा बड़ा आदर करते थे।

शायद यही आदत मुझ को कष्टों से बचा लेती थी।

अब हर रात को हम तीनों चुदाई का यह खेल खेलते थे। कभी चम्पा नीचे होती थी और मैं उसके ऊपर और फुलवा मेरे ऊपर।

चम्पा ने नीचे से मारा गया हर धक्का मेरे ऊपर लेटी फुलवा मुको धक्का मार कर जवाब देती थी। नीचे से चम्पा और ऊपर से फुलवा के धक्कों के कारण चम्पा जल्दी ही झड़ जाती और तब फ़ोरन चम्पा अपनी जगह फुलवा को दे देती और मैं फिर उन दोनों के बीच में ही रहता।

जब दो दो बार दोनों झड़ गई तब मेरा एक बार फ़व्वारा छूटा लेकिन मैं अपना लंड फुलवा की चूत में ही डाले लेटा रहा।

मेरा लंड उसकी चूत में पूरा खड़ा था और वो धीरे धीरे नीचे से धक्के मारती रही। चम्पा एक हाथ से मेरे अंडकोष पकड़ रही थी और दूसरे की ऊँगली मेरी गांड में डाल रखी थी। उन दोनों के ऐसा करने से मुझ को बड़ा आनन्द आ रहा था।

और फिर एक दिन हम तीनों आसमान में उड़ते हुए ज़मीन पर आ गिरे।

उस रात मैं उन दोनों को चुदाई का नया तरीका सोच रहा था की वो दोनों मुंह लटकाये कमरे के अंदर आई।

मैंने पूछा- क्या बात है?

दोनों चुप रहीं और फिर मेरे दोबारा पूछने पर चम्पा बोली- फुलवा को गर्भ ठहर गया है।

‘गर्भ? यह कैसे हुआ?’

‘हम जो हर रात को अंदर जो छुटाती थी उसी कारण हुआ है शायद?’

‘तुमको कैसे पता है कि यह गर्भ ही है?’

‘दो महीने से फुलवा को माहवारी नहीं हुई, इससे पक्का है कि वो गर्भवती है।’

मैं घबरा गया और घबराहट में कुछ कह नहीं पाया।

चम्पा मेरी हालत समझ रही थी और प्यार से बोली- सोमू, तुम घबराओ नहीं, हम इसका कोई उपाय ढूंढ निकालेंगी।

उस रात इस बुरी खबर के बाद किसी का भी चुदाई का मन नहीं किया।

अगले दिन चम्पा ने मुझको दिलासा दिलाई और कहा- मैं इस मुसीबत से छुटकारे के बारे में गाँव की पुरानी दाई से बात करूंगी।

अगले दिन स्कूल से वापस आने पर चम्पा ने बताया- दाई कहती है कि वो गर्भ गिरवा देगी, बस कुछ रुपये देने होंगे उसको!

मैंने पूछा- कितने मांग रही है?

‘100 रूपए में काम हो जाएगा।’

मैंने झट अलमारी से 100 रुपये निकाल कर चम्पा को दे दिए। चम्पा मम्मी से एक दिन की छुट्टी ले गई और साथ में फुलवा को भी ले गई।

मेरा सारा दिन बेचैनी से गुज़रा।

अगले दिन चम्पा आई और आते ही बोली- काम हो गया छोटे मालिक, आप घबराएँ नहीं।

!

मैंने चैन की सांस ली और उस रात मैंने और चम्पा ने जम कर चुदाई की, 4-5 बार चम्पा का छुटाने के बाद हम दोनों एक दूसरे की बाँहों में सो गए।

कुछ दिनों बाद फुलवा फिर वापस आ गई।

तब मैंने और चम्पा ने यह फैसला लिया कि अब से मैं फुलवा की चूत में नहीं छुटाऊँगा लेकिन चम्पा की चूत में मैं अंदर ही छुटाऊंगा क्यूंकि उसमें शायद गर्भ नहीं ठहरता।

हम ऐसा ही करते रहे और दोनों को मैं पूरा यौन आनन्द देता रहा और दोनों के चेहरे काम तृप्ति के कारण खूब चमक रहे थे।

करीब 6 महीने शान्ति से और मौज मस्ती में गुज़रे लेकिन फिर एक और मुसीबत आ गई।

एक दिन चम्पा ने बताया कि उसका पति लौट कर आ रहा है एक हफ्ते में!

‘अब कैसे होगा?’ यही प्रश्न हम तीनों के दिमाग में बार बार उठने लगा।

चम्पा के जाने के बारे में सोचने से मैं काफी उदास हो गया था।

वो 7 दिन हमने धुआंधार चुदाई में गुज़ारे। जैसा कि तय किया गया, सारी चुदाई का केंद्र चम्पा को ही बनाया गया। फुलवा और मैंने चम्पा को पूरा प्रेम दिया।

उसकी चुदाई की हर इच्छा को पूरा किया, कभी ऊपर से कभी घोड़ी बना कर और कभी साइड से और कभी उसकी टांगों के बीच बैठ कर चम्पा की चुदाई की, मैंने और फुलवा ने उस काम में मेरा पूरा साथ दिया।

और फिर चम्पा एक दिन नहीं आई और फुलवा ने बताया कि उसका पति आ गया है और वो अब शायद नहीं आ पायेगी।

मैं चम्पा को बहुत मिस कर रहा था, चाहे फुलवा बाकायदा रोज़ आती थी, मेरी सेवा भी बहुत करती थी लेकिन चम्पा का साथ कुछ और ही रंग का था।

फुलवा मुझको रोज़ चम्पा के ख़बरें देती थी।
 
चम्पा के गर्भवती होने की समस्या

और फिर चम्पा एक दिन नहीं आई और फुलवा ने बताया कि उसका पति आ गया है और वो अब शायद नहीं आ पायेगी।

मैं चम्पा को बहुत मिस कर रहा था, चाहे फुलवा बाकायदा रोज़ आती थी, मेरी सेवा भी बहुत करती थी लेकिन चम्पा का साथ कुछ और ही रंग का था।

फुलवा मुझको रोज़ चम्पा के ख़बरें देती थी।

एक दिन उसने बताया कि चम्पा को उसके पति ने शराब पी कर बहुत मारा और उसके शरीर में बहुत चोटें आई हैं।

मैं बहुत व्याकुल हो गया यह सुन कर… लेकिन अपने को कुछ करने में बिल्कुल असमर्थ पाता था।

मैंने फुलवा से पूछा- क्यों मारता है वो उसको?

वो बोली- सुना है कि वो उस को बाँझ बुलाता है। कह रहा था एक दो महीने में अगर उसके बच्चा होने के आसार नहीं हुए तो वो दूसरी शादी कर लेगा। अब बताओ चम्पा क्या करे?

मैंने कुछ सोचते हुए कहा- अगर चम्पा को मैं चोदू हर रोज़ तो हो सकता है कि चम्पा को गर्भ ठहर जाए जैसे कि तुमको हो गया था।

‘लेकिन आप तो चम्पा को रोज़ ही चोदते थे न? फिर उसके तो बच्चा नहीं ठहरा?’

‘फुलवा, मैं चम्पा को चोदते टाइम अक्सर बाहर छूटा लेता था, बहुत कम ही अंदर छुटाया था। तुम एक काम करो, चम्पा से पूछो कि उसका पति कब शहर जाता है?’

उसने कहा- आज ही पूछती हूँ! वैसे भी मेरी माहवारी शुरू हो गई है सो तुम्हारे साथ चुदाई तो हो नहीं सकती। कल दोपहर को मिलते हैं।

अगले दिन जब स्कूल से वापस आया तो वो बोली- चम्पा कह रही थी की कल शायद 2-3 दिनों के लिए शहर जा रहा है, चम्पा का पति। अब बोलो, क्या करना है आगे?

मैंने कहा- हमारी एक बड़ी अच्छी छोटी सी कुटिया है जंगल में… जिसके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं। कल तुम दोपहर को चम्पा को लेकर आ जाना वहाँ, बाकी बात वहीं करेंगे। और देखो वो जगह यहाँ से सिर्फ 2 मील है और तुमको वहाँ का रास्ता हवेली का दरबान बता देगा। ठीक है?

स्कूल से आकर खाना खाने के बाद मैं अपनी साइकिल पर बैठ कर 10 मिनट में वहाँ पहुँच गया और चाबी से दरवाज़ा खोल कर अंदर आ गया।

कॉटेज बोलते थे हम सब इस सुन्दर सी कुटिया या कॉटेज को, और जिसमें कभी कभी पापा जब अपने मित्रों के साथ ऐश मौज करने की इच्छा होती तो वो इस कॉटेज में आ जाते थे जहाँ सारे इंतेज़ाम पहले से किये रहते थे।

यह बड़ी एकांत जगह थी और पूरे साज़ो सामान से सजी थी। एक ड्राइंग रूम और दो बैडरूम थे जिनमें सुन्दर सोफे और पलंग बिछे थे। पीने के लिए हर किस्म की शराब वहां रखी थी लेमन सोडा और भी कई पीने के शरबत रखे थे।

यहाँ दिन रात चौकीदार रहता था जिसको मैंने पटाया हुआ था, उसको 10 रुपये दे देता था यदा कदा और वो उसी में खुश रहता था और मेरे लिए छोटे मोटे काम कर दिया करता था।

उससे मैंने पहले ही थोड़ी सी बर्फ मंगवा के रखी थी आर 3-4 लेमन सोडा की बोतलें ठंडी करने के लिए रख दी थी।

आधे घंटे बाद चम्पा और फुलवा दोनों आई।

जैसे ही चम्पा अंदर घुसी और दरवाज़ा बंद हुआ मैंने झपट कर चम्पा को बाहों में बाँध लिया और लगातार उसको चूमता रहा और जल्दी से उसकी धोती उठा दी और अपना लौड़ा जो पूरी तरह से खड़ा था उसकी चूत में डालने की कोशिश करने लगा।

चम्पा मेरे उतावलेपन को समझती थी, वो स्वयं ही पलंग पर लेट गई और अपनी धोती ऊपर उठा दी और अपने मम्मे ब्लाउज से निकाल दिए और मैंने बिना देरी के लंड उसमें डाल दिया और तेज़ तेज़ धक्के मारने लगा।

उस वक्त मैं कम्मो के सिखाये हुए सारे सबक भूल गया और चम्पा को चोदने में एकदम लीन हो गया और जब चम्पा का पहली बार छूटा तब मुझ को होश आया और मैंने अपनी स्पीड नार्मल कर दी और जब चम्पा दूसरी बार छूटी तो मैं उसके ऊपर से उतर कर उस के पलंग पर लेट गया।

तब चम्पा मुझको बेहद प्यार से चूमने लगी।

जब हम दोनों थोड़ा संभले तो मैंने बात छेड़ी- चम्पा, अब क्या करें तुम्हारे पति का?

वो रोने लगी और अपने पति को बहुत बुरा भला कहने लगी।

तब मैंने उसको रोका और कहा- देखो चम्पा, रोने से काम नहीं चलेगा, हमको यह सोचना है कि इस मुश्किल का हल क्या है। सच बताओ क्या तुम अपने पति को छोड़ना चाहती हो?

वो बोली- छोड़ कर जाऊँगी कहाँ और कैसे जिऊँगी? यह नहीं हो सकता।

‘अगर तुम्हारे बच्चा पैदा हो जाता है तो?’

‘तो शायद मेरा पति बदल जाए और मेरी इज़्ज़त करने लगे?’

‘तो प्रश्न है तुम्हारा बच्चा कैसे पैदा हो? क्या कभी तुमने डॉक्टर को दिखाया है?’

चम्पा बोली- डॉक्टर? वो क्यों?

‘अरे यह देखने के लिए कि क्या तुम्हारे अंदर कोई खराबी तो नहीं? जिसके कारण तुमको बच्चा नहीं हो रहा।’

‘नहीं कभी नहीं दिखाया डॉक्टर को।’

‘अच्छा कल चलो मेरे साथ, 4 बजे के बाद मैं तुम्हें एक अच्छी सी लेडी डॉक्टर को दिखाता हूँ, वो बता देगी कि तुमको क्या कमी है, बोलो मंज़ूर है?’

‘अच्छा जैसा तुम कहते हो सोमू… फुलवा भी जायेगी मेरे साथ!’

‘ठीक है, कल 4 बजे मुझको बस स्टैंड पर मिलना, ठीक है?’

दोनों ने सर हिला दिया और ठंडी लेमन का मज़ा लेने लगी।

अगले दिन मैंने एक टैक्सी का अरेंजमेंट कर दिया और हम तीनों पास के कसबे में गए जहाँ डॉक्टर का नाम मेरे स्कूल के दोस्त ने पहले ही बता दिया था।

डॉक्टर की फीस देने के बाद वो दोनों तो डॉक्टर के पास चली गई और मैं बाहर बैठा रहा।

एक घंटे बाद वो दोनों बाहर आई और चम्पा और फुलवा दोनों मुस्कराते हुई आई और दोनों एक साथ बोली- डॉक्टर साहिब कहती हैं कि सब ठीक है, चम्पा में कोई खराबी नहीं। और बच्चा कैसे हो इसका भी तरीका बता दिया है। यह भी कहा है कि इसका पति भी अपनी जांच करवाये, हो सकता है उसमें कुछ खराबी हो?

चम्पा बोली- मुझको पक्का यकीन है कि उसमें ही खराबी है। साला घाट घाट का पानी पीने की आदत है उसको तो वो ही ठीक नहीं है।

हम तीनों ख़ुशी ख़ुशी वापस घर आ गए। चम्पा अपने घर चली गई और फुलवा मेरे साथ हवेली में आ गई।

रात को जब फुलवा मेरे कमरे में आई तो उसने खुल कर सारी बात बताई।

फुलवा ने बताया- डॉक्टर साहिबा ने यह भी बताया है की माहवारी के शुरू होने के बाद 10-18 दिन में अगर चुदाई की जाए तो बच्चा अक्सर ठहर जाता है। उन दिनों के पहले और बाद में बच्चा नहीं होता। छोटे मालिक यह बात तो बहुत अच्छी बताई उसने, आगे से हम चुदाई करते हुए इन दिनों में अंदर नहीं छुटाएँगे और बाकी दिनों में अंदर छुटा सकते हैं।

वो बड़ी खुश लग रही थी तो उस रात हमने सारी चुदाई के दौरान अंदर ही छुटाया।

फिर मैं बड़ी बेसब्री से चम्पा की चुदाई का उसके पति द्वारा करने का इंतज़ार करने लगा और फिर फुलवा ने बताया- चम्पा अब ख़ुशी ख़ुशी उसको चूत देती है जिससे वो बड़ा प्रसन हो गया है।

दो महीने गुज़र जाने के बाद भी जब चम्पा गर्भवती नहीं हुई तो हमको यकीन हो गया कि उसके पति में ही खराबी है। लेकिन चम्पा को कैसे गर्भवती बनाएं ताकि उसका पति उसको छोड़ने का विचार छोड़ दे?

उस रात मैंने फुलवा को तरह तरह से चोदा। हर बार से वो पूरी तरह से सखलित हो जाती थी। उसका छूटना अब काफी आम बात हो गया था।

वो लंड को डालते ही छूटना शुरू हो जाती थी और थोड़ी देर धक्के मारने के बाद ही वो ढेर सारा पानी छोड़ते हुए ढीली पड़ जाती थी। लेकिन जब मेरा लंड उसके अंदर ही पड़ा रहता था तो वो शीघ्र ही दुबारा तैयार हो जाती थी।

यह बात ख़ास तौर से उन दिनों में ज्यादा दिखाई देती थी जब उसके गर्भवती होने के दिन होते थे, वो उन दिनों कुछ ज्यादा ही बेशरम हो जाती थी और बार बार लंड अपने अंदर डालने की कोशिश करती थी।

यह देख कर मेरे मन में एक सवाल उठा- क्या चम्पा के साथ भी ऐसा ही होता होगा।

अगली बार जब चम्पा का पति शहर गया तो मैंने चम्पा को कॉटेज में बुला लिया और उसके आते ही उससे पूछा कि माहवारी के बाद कौन सा दिन है उसका?

वो बोली- शायद 10वाँ या 11वा दिन है।

मैंने कुछ कहा नहीं और फ़ौरन उसके कपड़े उतारने लगा और अपना भी पायजामा उतार कर बिल्कुल नंगा हो गया और उसको भी नंगी कर दिया और फिर मैंने उसको बड़े कायदे से पूरी तरह गरम कर दिया और जब तक उसने हाथ नहीं जोड़े कि अब अंदर डालो लंड को… और नहीं सहा जाता, तब तक मैंने चूत में लंड नहीं डाला।

और जब वो पूरी तरह से गीली हुई चूत को उठा उठा कर मुझ को लंड डालने के लिए कहने लगी, तभी मैंने लंड को चूत के मुँह पर रख कर उसके दाने पर रगड़ा और थोड़ा सा अंदर डाला और चम्पा ने अपने चूतड़ उठा कर पूरा का पूरा अपने अंदर ले लिया और लगी ज़ोर से नीचे से धक्के मारने।

तभी मेरे लंड को महसूस हुआ कि उसके गर्भाशय का मुँह खुलने और बंद होने लगा तो मैंने भी अपनी पिचकारी उसके गर्भ के मुख पर रख पूरी तरह से छोड़ दी और ऐसा लगा कि मेरा लंड उसके गर्भ के मुख में अंदर तक फव्वारा छोड़ रहा है।

चम्पा की आँखें पूरी बंद थी और उसका शरीर ज़ोर ज़ोर से कांप रहा था और उसके चेहरे पर एक मंद मंद मुस्कान छाई हुई थी।

मैंने मन ही मन सोचा कि आज चम्पा ज़रूर पर ज़रूर गर्भवती हो जायेगी।

थोड़ी देर वो ऐसे ही लेटी रही और फिर उसकी टांगें अपने आप ऊपर उठने लगी और एक हाथ चूत के ऊपर रख दिया ताकि वीर्य सारा का सारा अंदर ही रहे और बाहर न निकले।

आधे घंटा तक वो ऐसे ही पड़ी रही।

मैंने पूछा- पति कब वापस आ रहा है?

वो बोली- शायद 2 दिन बाद आयेगा? क्यों पूछ रहे हो?

‘कल भी आ जाना क्यूंकि मुझको लगता है कि तुम आजकल में ज़रूर गर्भवती हो जाओगी और जब पति आ जाए तो रात उससे भी चुदवाना ताकि उस को शक न हो! ठीक है?’

उसने खुश होते हुए सर हिला दिया और लेमन पीकर अपने घर चली गई।

उसके अगले दिन भी चम्पा आ गई और इस तरह चोद कर उसको निहाल कर दिया।

मुझको यकीन था कि चम्पा ज़रूर गर्भवती हो जायेगी।

 


फुलवा और बिंदू


जैसे की मुझ को उम्मीद थी कि चम्पा जल्दी ही गर्भवती हो जायेगी और वैसा ही हुआ। वो शायद उस दिन की चुदाई के बाद से ही गर्भवती हो गई थी क्यूंकि उसको चुदाई में अब बिल्कुल ही आनन्द नहीं आ रहा था।

और फिर सबने देखा कि उसके चेहरे पर एक चमक आ गई है जिसको देख गाँव की औरतों ने कहना शुरू कर दिया था कि चम्पा को लड़का ही होगा।

फुलवा बता रही थी कि चम्पा का पति भी काफ़ी सुधर गया था, उसकी इज़्ज़त करने लगा था और उसकी अच्छी देखभाल कर रहा था।

चम्पा की इच्छा की पूर्ति देख कर मैं भी बहुत खुश था।

फुलवा के साथ चुदाई अभी भी जारी थी और क्यूंकि फुलवा अब अकेली मेरी देखभाल कर रही थी तो हम दोनों पति पत्नी की तरह रहने लगे थे।

पर मेरे मन में शायद यह डर था कि कहीं फुलवा का पति न वापस आ जाए और मुझको फुलवा से भी हाथ धोना पड़े।

मैं अब बड़ी कक्षा में हो गया था और मुझको काफी पढ़ना पड़ता था। इसी कारण मेरा और फुलवा का हर रोज़ का यौन कार्यक्रम नहीं हो पाता था, अब रोज़ की बजाये उसको हफ्ते में 3-4 दिन बार ही चोद पाता था और अक्सर मैं अपना नहीं छूटने देता था, मुझे उसके गर्भवती होने का भय भी लगा रहता था।

एक दिन फुलवा कमरे में आने के बाद अपने बिस्तर को बिछा लेने के बाद मेरे पलंग पर आकर बैठ गई। मुझको ऐसा लगा वो कुछ कहने की कोशिश कर रही है लेकिन किसी जिझक के कारण कह नहीं पा रही।

मैंने उसके ब्लाउज बटन खोलते हुए उससे पूछा- फुलवा, कुछ कहना है क्या?

वो बोली- आप बुरा तो नहीं मान जाओगे?

‘ऐसी क्या बात है कि मैं बुरा मान जाऊँगा?’

‘है ऎसी ही बात।’

‘तो बोलो क्या बात है?’

‘आप वायदा करो कि बुरा नहीं मानोगे?’

‘अरे बाबा नहीं बुरा मानूंगा। बोलो क्या बात है?’

‘मेरी एक सहेली है बिंदू, 5 साल हो गए शादी को लेकिन उसको अभी तक बच्चा नहीं हुआ।’

‘तो मैं क्या कर सकता हूँ?’

‘नहीं नहीं, मैं आपको कुछ करने के लिए नहीं कह रही!’

‘तो फिर?’

‘मैं सोच रही थी मैं अकेली आपको पूरी तरह चुदाई में तसल्ली नहीं दे पाती शायद?’

‘नहीं नहीं, ऐसा मत सोचना कभी, तुम मेरे लिए काफी हो।’

‘वही तो…’ लेकिन मालकिन कह रही थी कि छोटे मालिक के लिए एक और कामवाली ढूंढनी चाहिए। इसीलिए मैं सोच रही थी कि मेरी सहेली बिंदू को यहाँ आप के काम के लिए रखवा दूँ क्यूंकि पता नहीं कब मेरा पति भी वापस आ जाए? तब आपके पास कोई कामवाली नहीं रहेगी ना!’

‘हाँ कह तो ठीक रही हो, कौन है यह बिंदू?’

‘अरे छोटे मालिक देखोगे तो देखते रह जाओगे, बिल्कुल चम्पा की तरह है उसकी बनावट, और उसका पति भी मुम्बई गया है और लौट के नहीं आ रहा।’

‘अच्छा तो कल लाना उसको, मैं देख लेता हूँ उसको?’

और फिर मैंने फुलवा को नंगी करके चोदना शुरू कर दिया, पहले धीरे और फिर बाद में तेज़ी से।

वो आम दिनों की तरह 3-4 बार छूट गई और हम नंगे ही एक दूसरे की बाहों में सो गए।

अगले दिन दोपहर को वो एक काफी अच्छी दिखने वाली लड़की को लेकर आई और बोली- यह बिंदू है मेरी सेहली।

मैंने कहा- इसको काम बता दो, अगर इसको वो सब मंज़ूर हो तो मम्मी से बात कर लो।

फुलवा बोली- इसको सब समझा दिया है और जैसा हम करती हैं, वैसे ही यह भी करेगी।

‘ठीक है, कितनी उम्र इसकी?’

‘यह 21-22 की है और 4 साल शादी के बाद भी इसके बच्चा नहीं हुआ अब तक… तो बेचारी बहुत परेशान है।’

‘आखरी बार इसका पति कब आया था?’

‘2 साल हो गए छोटे मालिक!’

‘अच्छा, चलो मम्मी से पूछ लेना और मुझ को बता देना, ठीक है?’

मुझको बिंदू ठीक ही लगी और थोड़ी देर बाद मम्मी फुलवा और नई लड़की बिंदू के साथ मेरे कमरे में आई और बोली- सोमू, यह नई लड़की तुम्हारे काम के लिए रखी है तुम और फुलवा इसको सारा काम समझा देना। ठीक है न?

मैंने कहा- ठीक है मम्मी, लेकिन अब मैं बड़ा हो गया हूँ मुझको कामवाली लड़कियों की कोई ज़रुरत नहीं है।

‘अरे नहीं सोमू, फुलवा बता रही थी कि तुम रात को बहुत डर जाते हो कभी कभी। इसका मतलब है कि तुमको अभी भी बुरे सपने बहुत आते हैं। ये दो लड़कियाँ रहेंगी तुम्हारे पास तो पूरा ख्याल करेंगी तुम्हारा। क्यों लड़कियो? रखोगी न पूरा ध्यान?’

‘जी मालकिन!’ दोनों एक साथ बोल पड़ी।

‘अच्छा ठीक है फुलवा, तुम सोमू की पूरी देखभाल करोगी और बिंदू तुम्हारी इस काम में मदद करेगी, दोनों रात इसी कमरे में ही सोना। ठीक है?’

दोनों ने सर हिला दिया और फिर मम्मी चली गई।

तब फुलवा बिंदू को काम समझाने लगी। अभी वो बातें कर ही रही थीं, मैं सो गया। शाम को उठा तो फुलवा को आवाज़ लगाई।

जब वो आई तो मैं उससे चम्पा का हाल पूछा।

वो कहने लगी- चम्पा को बहुत उल्टियाँ आ रही हैं और बेचारी कुछ खा पी नहीं रही है। कह रही थी कि जब तबियत थोड़ी ठीक होगी तो वो आपसे मिलेगी।

मैंने कुछ सोचते हुए फुलवा से कहा- देखो मुझको इस नई कड़की के बारे में चिंता हो रही है। क्या तूने चुदाई का कार्यक्रम भी उसको बता दिया था?

फुलवा बोली- बताया तो था छोटे मालिक, लेकिन पूरी तरह खोल कर नहीं बताया था।

‘क्या तुमने उसको चुदाई के खेल के बारे में बताया था?’

वो सर नीचे करके बोली- नहीं मालिक, पूरी तरह से शायद उसको अभी समझ नहीं आया होगा। मैंने तो सिर्फ यह कहा था कि हम दोनों वहाँ मौज करेंगी।

‘अरे वाह! उसको समझा देना अभी से… वरना वो हमारे लिए मुसीबत बन सकती है फुलवा!’

मैं परेशान हो गया यह जान कर कि बिंदू की सहमति नहीं हमारे चुदाई कार्यकर्म के बारे में। यानि उसको पूरी बात की जानकारी नहीं है अभी तक।

मैं फुलवा को डाँट कर बोला- क्या फुलवा, तुमको यहाँ लाने से पहले उसकी रज़ामंदी ले लेनी थी। खैर तुम अब जाकर उसको समझा देना, अगर कुछ न नुकर करे तो वापस भेज देना या दूसरे काम पर लगा देना। समझ गई न?

फुलवा रुआंसी हो रही थी और जल्दी से बाहर चली गई। रात हुई तो खाने के बाद मैं अपने कमरे में आकर लेटा ही था कि फुलवा आ गई, साथ में बिंदू भी थी।

फुलवा मेरे दूध का गिलास लेकर आई थी और बिंदू पूरा पल्लू सर पर ढक कर खड़ी थी।

फुलवा बोली- छोटे मालिक, आज हम दोनों आप शरीर को दबाएँगी क्यूंकि बड़ी मालकिन कह रहीं थी कि आज आप बहुत थक गए होंगे स्कूल में खेल कर… हम दबाएँ आपको?

यह कहते हुए फुलवा ने मेरे को आँख का इशारा किया।

मैंने कहा- ठीक है मैं आज बहुत थक गया हूँ।

मैं बीच मैं लेट गया और वो दोनों मेरी बगल में आकर बैठ गई। पहले फुलवा ने शुरू किया और मेरे टांगों को हल्के हल्के दबाना शुरु कर दिया।

एक टांग फुलवा दबा रही थी और दूसरी बिंदू दबा रही थी। बिंदू का हाथ बहुत हल्का था जबकि फुलवा काफी ज़ोर से दबा रही थी।

मैंने आँखें बंद कर ली।

तभी महसूस किया कि फुलवा का हाथ मेरी जांघों को दबा रहा था और बिंदू अभी भी हल्के हाथ से टांग को ही दबा रही थी।

मैंने अधमुंदी आँख से देखा कि फुलवा ने बिंदू को इशारे से ऊपर को दबाने के लिए कहा।

बिंदू झिझकते हुए अपना हाथ मेरी जांघों तक ले आई, 5-7 मिन्ट ऐसे ही दबाती रहीं दोनों।

तभी फुलवा ने शरारत करते हुए अपना हाथ मेरे लंड पर रख दिया और फिर जल्दी से हटा भी लिया।

इस हरकत से मेरा लंड अपने आप खड़ा होने लगा और मेरा पायजामा एक तम्बू बनता गया।

मैं आँखें बंद किये पड़ा रहा और तब दबी मुस्कान से फुलवा ने बिंदू का हाथ भी मेरे लौड़े पर रख दिया और बिंदू ने झट से हाथ हटा लिया और जांघों पर दबाती रही।

फुलवा अब दबाते हुए मेरे लंड से भी खेलने लगी।
 


फुलवा और बिंदू की चूत चुदाई


यह प्रसंग कोई 10 मिन्ट तक चला और तब तक बिंदू की झिझक काफ़ी दूर हो गई थी। अब वो बेझिझक मेरे लंड पर हाथ फेरने लगी और मेरा लंड और अकड़ गया।

फुलवा ने जानबूझ कर मेरा पयजामा लंड के ऊपर से खिसका दिया और लंड एकदम आज़ाद होकर लहलहाने लगा।

दबी आँख से मैंने देखा कि लंड को बिंदू बड़े अचरज से देख रही है और तब फुलवा के इशारे पर उसने लंड को हाथ में ले लिया और उसको अच्छी तरह देखने लगी और अपने हाथ को ऊपर नीचे करने लगी।

फुलवा एक हाथ से मेरे अंडकोष से खेल रही थी और दूसरा उसने अपनी धोती में डाल दिया और अपनी चूत को रगड़ने लगी।

उसने इशारे से बिंदू को भी ऐसा ही करने को कहा, तब बिंदू ने भी एक हाथ अपनी धोती के अंदर डाल दिया।

फुलवा ने मौका देख कर मुझ को इशारा किया और मैंने भी एक हाथ बिंदू की धोती में डाल दिया और सीधा उसकी चूत को छूने लगा।

उसकी चूत एकदम गीली हो चुकी थी।

मेरे हाथ को बिंदू ने रोकने की कोई कोशिश नहीं की और मैं उसके भगनासा को हल्के हल्के रगड़ने लगा।

बिंदू अपनी जांघों को बंद और खोल रही थी और काफी गरम हो चुकी थी।

तब फुलवा ने बिंदू को पलंग से नीचे उतारा और उसके कपड़े उतारने लगी, पहले ब्लाउज उतार दिया और फिर धोती खींच दी और फिर पेटीकोट भी उतार दिया।

बिंदू ने अपना एक हाथ स्तनों पर रखा और दूसरे से चूत को छुपाने की नाकाम कोशिश करने लगी।

अब तक फुलवा भी पूरी नंगी हो चुकी थी और मैं भी एकदम नंगा हो चुका था और मेरा लौड़ा पोरे जोबन में अकड़ा था।

मैंने देखा कि बिंदू की नज़र मेरे खड़े लौड़े पर टिकी थी।

तब फुलवा ने बिंदू का हाथ मेरे लौड़े पर रख दिया और मेरा हाथ उसको मोटे और गोल स्तनों पर। तब मैंने बिंदू को अपनी बाँहों में जकड़ लिया और उसको होटों को बार-बार चूमना शुरू कर दिया।

मैंने अपनी जीभ उसके मुख में डाल दी और उसकी मुंह में गोल गोल घुमाने लगा। एक हाथ मैं उसको मोटे और गोल नितम्बों पर रख कर उनको दबाने लगा।

तब फुलवा हम दोनों को धीरे धीरे पलंग की और ले आई और जैसे ही बिंदू लेट गई मैंने उसकी जांघों को चौड़ा किया और अपने खड़े लंड को उसकी चूत के मुंह पर टिका दिया और धीरे से एक हल्का धक्का मारा और लंड एक बेहद टाइट चूत में पूरा चला गया, उसकी चूत की पकड़ गज़ब की थी।

फुलवा भी अपने मुंह से बिंदू के मम्मे चूस रही थी। तभी बिंदू के मुंह से आहा ऊह्ह्ह के आवाज़ें आने लगी और फुलवा ने झट मेरा रुमाल उसके मुंह पर रख दिया ताकि कोई आवाज़ न निकल सके।

बिंदू की चूत इतनी प्यासी हो रही थी कि अब तक वो 3-4 बार छूट चुकी थी लेकिन अभी भी वो नीचे से चूतड़ ज़ोर ज़ोर से ऊपर उठा उठा कर लंड को अंदर लेती थी। उसकी आँखें पूरी तरह से बंद थीं और शायद उसको याद भी नहीं था उसको कौन चोद रहा है।

उसका केंद्र बिंदू उस वक्त सिर्फ उसकी चूत थी जिसकी 2 साल की प्यास वो बुझा रही थी.

फुलवा भी उसको उकसा रही थी, कभी उसकी गांड में उंगली डाल कर कभी उसके होटों को चूस कर।

तभी बिंदू एक आखिरी झटके से ऐसी छूटी कि ढेर सारा पानी उसकी चूत से निकला और सारे बिस्तर की चादर पर फैल गया।

बिंदू अब एकदम ढीली पड़ गई और बिस्तर में आँखें बंद करके पसर गई।

मेरा लंड तो अभी भी खड़ा था, तो मैंने लण्ड मेरे साथ लेटी हुई फुलवा की एकदम गीली चूत में डाल दिया और ज़ोर ज़ोर से धक्के मारने लगा क्यूंकि फुलवा बिंदू की चुदाई देख कर बहुत गरम हो चुकी थी और जल्दी ही झड़ गई, तब मैंने अपना भी छूटा दिया।

बिंदू अभी भी आँखें बंद किये लेटे हुए थी और उसके होटों पर पूरी तरह से यौन सुख की मुस्कान थी।

मैं दोनों के बीच लेट गया और बिंदू के एक सख्त स्तनों को दबाने लगा और धीरे धीरे उसके निप्पल खड़े होने शुरु हो, उसकी चूत में ऊँगली डाली तो वो फिर गीली होनी शुरू हो गई थी।

तब मैंने उसका हाथ अपने खड़े लंड पर रख दिया और वो उसको सहलाने लगी। उसने आँख खोल कर मुझ को देखा और मुस्करा कर मेरा शुक्रिया अदा किया।

मेरे लंड को खींच कर बताया- आ जाओ, फिर चढ़ जाओ।

मैं भी झट उसकी टांगों के बीच आ गया और एक ही झटके में पूरा लंड उसकी चूत में डाल दिया। फिर 10 मिन्ट की चुदाई के बाद वो 2 बार झड़ गई।

फुलवा ने उससे पूछा- कैसे लगी छोटे मालिक की चुदाई?

उसने शर्म के मारे मुंह पर हाथ रख लिया।

मेरा लंड अभी भी खड़ा था सो मैंने फुलवा को सीधा किया और उसके ऊपर चढ़ गया।

फुलवा ने बिंदू का हाथ अपनी चूत के पास रख दिया और लंड के अंदर बाहर जाते हुए उसको महसूस करवाया।

फुलवा की चुदाई खत्म करने के बाद मैंने उससे पूछा- आखरी बार तेरे पति ने कब तुझको चोदा था?

वो बोली- 2 साल से ऊपर हो गए हैं, इस बीच मैंने किसी की ओर आँख उठा कर भी नहीं देखा लेकिन छोटे मालिक आपको देख कर पता नहीं क्यों मेरा मन किया कि आप मुझ को चोदें। और आप ने शरीर दबवाने का बहाना बना कर मेरी दिल की मुराद पूरी कर दी।

फुलवा बोली- अगर तू हमारे साथ रहेगी तो रोज़ रात को 3-4 बार चुदेगी छोटे मालिक से। लेकिन याद रख, किसी से कुछ भी नहीं कहना और मन लगा कर छोटे मालिक और मालकिन का काम करती जा… तो बहुत सुखी रहेगी। धन कपड़ा लत्ता और अच्छा खाना मिलता रहेगा। मालकिन खुश होकर इनाम में बड़ी अच्छी साड़ी भी देती हैं और छोटे मालिक भी इनाम देते हैं हम सबको।

थोड़ी देर बाद हम तीनों सो गए और फिर कोई आधी रात को मुझको लगा कि कोई मेरे लंड को छेड़ रहा है।

आँख खोलकर देखा तो बिंदू थी जो मेरे लंड के साथ खेल रही थी।

मैंने भी उसकी चूत को हाथ लगा कर देखा तो एकदम गीली थी, मैं समझ गया कि इसकी अभी तृप्ति नहीं हुई है और फिर मैंने उसको पहले धीरे और फिर तेज़ी से चोदा, और तब तक नहीं उतरा जब तक उसने तौबा नहीं की।

इस सारी हलचल में फुलवा भी जाग गई और अपनी चूत को रगड़ने लगी। उसकी गर्मी को देखकर मैंने उसको भी चोदा। तब फुलवा ने बिंदू का हाथ मेरे अंडकोष पर रख दिया और उनको दबाने का इशारा करने लगी।

मैं चोद रहा था फुलवा को लेकिन मेरा मुंह तो बिंदू के मम्मों पर था और उसके मोटे निप्पल मेरे मुंह में गोल गोल घूम रहे थे।

इस सेक्सी नज़ारे पर मेरा लंड और भी सख्त हो गया था और तब मैंने महसूस किया कि फुलवा भी छूट गई है।

मैं उतर कर बिस्तर पर लेट गया लेकिन मेरे लौड़ा सीधा तना खड़ा था। यह देख कर शायद बिंदू से रहा नहीं गया और वो मेरे लौड़े पर चढ़ बैठी, ऊपर से धक्के मारते हुए उसको कुछ मिन्ट ही हुए होंगे कि वो भी झड़ कर मेरे ऊपर पसर गई।

जल्दी ही सुबह हो गई और वो दोनों मेरे कमरे से निकल कर अपने दैनिक कार्यकर्म में लग गई और मैं बड़ी गहरी नींद में सो गया।
 
फुलवा और बिंदू का लेसबीयन सेक्स

मैं चोद रहा था फुलवा को लेकिन मेरा मुंह तो बिंदू के मम्मों पर था और उसके मोटे निप्पल मेरे मुंह में गोल गोल घूम रहे थे।

इस सेक्सी नज़ारे पर मेरा लंड और भी सख्त हो गया था और तब मैंने महसूस किया कि फुलवा भी छूट गई है।

मैं उतर कर बिस्तर पर लेट गया लेकिन मेरे लौड़ा सीधा तना खड़ा था। यह देख कर शायद बिंदू से रहा नहीं गया और वो मेरे लौड़े पर चढ़ बैठी, ऊपर से धक्के मारते हुए उसको कुछ मिन्ट ही हुए होंगे कि वो भी झड़ कर मेरे ऊपर पसर गई।

जल्दी ही सुबह हो गई और वो दोनों मेरे कमरे से निकल कर अपने दैनिक कार्यकर्म में लग गई और मैं बड़ी गहरी नींद में सो गया।

कोई आधे घंटे बाद फुलवा मेरी सुबह की चाय लाई और यह देख कर हैरान रह गई की मेरा लंड तब पूरा खड़ा था।

वो दाँतो तले ऊँगली दबाते हुए बोली- कमाल है छोटे मालिक आप का तो अभी भी खड़ा है? यह कैसे संभव हो सकता? मैं जानती हूँ कि आपने रात भर कम से कम 10 बार हम दोनों को चोदा है और फिर भी यह खड़ा है। हाय राम!!!

और उसने हाथ लगा कर पक्का किया कि लंड खड़ा है। लेकिन अजीब बात यह थी कि मुझ को थकावट या कमज़ोरी बिल्कुल महसूस नहीं हो रही थी।

कुछ दिनों बाद मेरे इम्तेहान शुरू होने वाले थे तो मैं दिल लगा कर पढ़ने में लग गया। फुलवा और बिंदू को रात में सिर्फ 1-2 बार ही चोदता था और चुदाई की सारी मेहनत उन दोनों से करवाता था।

मैं सर के नीचे हाथ रख कर लेट जाता था और वो दोनों बारी बारी से मेरे ऊपर चढ़ कर अपनी यौन इच्छा पूरी करती थीं। ऐसे करते हुए कुछ दिनों में मेरे पेपर्स खत्म हो गए और अब मैं फिर फ्री था।

अब मैं चुदाई के साथ उन दोनों से उन की अपनी काम तृप्ति के बारे में सवाल करने लगा। जैसे कि अगर दो साल पति नहीं है तो यकीनन उनको काम तृप्ति नहीं मिलती होगी तो कैसे वो अपना गुज़ारा करती थी?

दोनों ही इस बारे में बताने से कतरा रहीं थी लेकिन मैंने भी उनको अपनी कसम देकर सच बताने पर मजबूर कर दिया।

पहले फुलवा बोली- पति चुदाई का ज़्यादा शौक़ीन नहीं था और शुरू शुरू में तो रोज़ रात को चुदाई करता था लेकिन 7-8 दिन बाद हफ्ते में दो दिन चुदाई पर आ गया था। उसको चुदाई के बारे कुछ ज्यादा नहीं मालूम था, लंड खड़ा किया और धोती ऊपर उठाई और अंदर डाला और जल्दी जल्दी धक्के मारे और अपना छुटा के उतर जाता और फिर सो जाता था।

उसके साथ चुदते हुए मैं एक बार भी नहीं छूटी जैसे छोटे मालिक मुझ को रात में 4-5 छूटा देते हैं, वैसा पति के साथ एक बार भी नहीं हुआ।

यह कहते हुए उसकी आँखों से आंसू गिरने लगे।

मैंने पूछा- फिर चूत को कैसे ठंडा करती थी तुम?

वो कुछ बोली नहीं और अपने पल्लू में मुंह छुपाने लगी। उसकी हिचकिचाहट ठीक थी। कोई भी औरत अपना निजी काम क्रिया के बारे में नहीं बताती आसानी से।

मैंने उसको अपनी कसम याद दिलाई, तब उसने बताया- मैं ऊँगली मारती थी चूत में।

‘कैसे?’

तब उसने चूत में ऊँगली से अपनी भगनासा को रगड़ा और कहा- यह मैं रात को बिस्तर में लेटने के बाद ऐसे चूत को शांत करती थी।

मैं बोला- अच्छा, तभी मेरी ऊँगली चूत पर पड़ते ही तुम को मज़ा आने लगता था! और तुम बिंदू क्या करती थी?

बिंदू बोली- मैं भी ऐसे ही करती थी।

‘बिंदू, तेरे पति कैसे चोदता तुझको?’

बिंदू शर्माते हुए बोली- मेरा पति थोड़ा पड़ा लिखा था और यौन क्रिया के बारे में थोड़ा बहुत जानता था। पहली रात उसने मुझ को बड़े प्यार से चोदा। पहली कोशिश में उसका लंड चूत में जा नहीं पा रहा था तो उसने मेरे चूतड़ के नीचे तकिया रख दिया और थोड़ा सरसों का तेल अपने लंड पर लगा कर धीरे धीरे धक्के मारे जिससे मुझको दर्द तो हुआ लेकिन बहुत ही कम। पहली बार उसके करने पर मैं नहीं छूटी थी लेकिन दुबारा करने पर मेरा छूट गया और उसके बाद वो हर बार मेरा छूटा देता था। लेकिन वो ज्यादा देर कर नहीं पाता था और जल्दी ही छूट जाता था।

मैं कोशिश करती थी कि जब वो चोदे तो मैं अपनी ऊँगली से चूत रगड़ती रहती थी ताकि उसके छूटने के साथ ही मेरा भी छूट जाए।

‘उसके जाने के बाद क्या किया तुमने?’

‘वही ऊँगली का सहारा लिया लेकिन मेरी एक सहली थी गाँव में, उसने मुझ को एक और ही तरीका सिखाया।’

‘वो क्या था?’ मैंने और फुलवा ने एक साथ ही पूछा।

वो बोली- जब मेरी सास घर पर नहीं होती थी तो मैं उसको बुला लेती थी और फिर हम दोनों करती थी।

मैंने पूछा- क्या करती थी?

वो बोली- अगर फुलवा मान जाए तो मैं उसके साथ करके दिखा सकती हूँ।

मैंने फुलवा की ओर देखा तो वो हिचकिचा रही थी लेकिन थोड़ी देर बाद बोली- क्या करोगी तुम?

‘देख लेना कुछ ख़ास नहीं है यह सब?’

‘दोनों नंगी लेटी थी मेरे साथ, मैं बीच में था और वो दोनों मेरे साइड्स में लेटी थीं मुझको एक साइड में आने के लिए कहा और खुद फुलवा की बगल में लेट गई।’

अब उसने हल्के हल्के फुलवा के उरोजों पर हाथ फेरना शु्रू किया और साथ ही अपना मुंह फुलवा के मुंह से जोड़ दिया और उसको पहले हल्की और बाद मैं बड़ी गहरी किसिंग करना शुरू कर दिया। और फिर उसका एक हाथ फुलवा की चूत पर घने बालों के साथ खेलने लगा और उसकी ऊँगली कभी कभी उसकी बालों में छिपी चूत पर चलने लगी।

मैंने नोट किया कि फुलवा भी अब गर्म हो रही थी और बिंदू की चूमा-चाटी का जवाब दे रही थी, उसके भी हाथ बिंदू के चूतड़ों पर फिसल रहे थे और उसकी एक ऊँगली बिंदू की गांड में गई हुई थी।

तभी बिंदू का मुंह अब फुलवा के मम्मों के ऊपर उसके निप्पल को चूस रहा था और उधर फुलवा के चूतड़ ऊपर की ओर उठ रहे थे। अब धीरे धीरे बिंदू का मुंह मम्मों से हट कर उसकी चूत पर टिक गया था।

पास जाकर देखा कि बिंदू की जीभ अब फुलवा की भगनासा को चाट रही थी और फुलवा के चूतड़ एकदम ऊपर उठकर अकड़ रहे थे। बिंदू का मुंह और शरीर फुलवा की जाँघों के बीच था और वो अब तेज़ी से फुलवा की चूत को चूस रही थी।

फुलवा के मुख से हल्की सिसकारी निकल रही थी और उसके चूतड़ एकदम ऊपर उठे हुए थे।

बिंदू के जीभ अब बड़ी तेज़ी से फुलवा की चूत को चूस रही थी, तभी ही फुलवा का शरीर एकदम अकड़ गया और उसके मुंह से एक ज़ोर सी आआआह्ह्ह् की आवाज़ निकली और उसका सारा शरीर कंपकंपाने लगा।

धीरे आवाज़ निकल रही थी- मर गई… मर गई… उईईई उईई…

और उसकी जांघों ने बिंदू के सर और मुंह को जकड़ लिया। दोनों ऐसी ही पड़ी रहीं और फिर धीरे से फुलवा की जांघों ने बिंदू का सर और मुंह आज़ाद कर दिया और वो बुरी तरह से निढाल होकर पड़ रही और उधर बिंदू भी ऐसे लेट रही थी जैसे उसका भी पानी छूट गया हो।

मैंने बिंदू की चूत को हाथ लगा कर देखा तो वो भी सारी गीली हो रही थी और उसकी चूत से भी सफ़ेद पानी निकल रहा था। दोनों एक दूसरी के साथ लिपट कर लेटी हुई थी।

और मेरे लौड़े का भी बुरा हाल था, ऐसा लग रहा था कि अभी फट जाएगा।

हम तीनों एक दूसरे के साथ लिपट कर सो गये।
 
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