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मेरा चुदाई का सफ़र



गंगा और मेरी यह पहली रात थी एक कमरे में, मैंने खाना अपने कमरे में मंगवा लिया और खाना खत्म करने के बाद जब गंगा आई। तो मैंने उसको कहा- गंगा, उस दिन मैं तुझ को अच्छी तरह देख नहीं पाया, आज तू अपना जलवा दिखा।

वो बोली- अच्छा छोटे मालिक।

और गंगा ने धीरे धीरे कपड़े उतारने शुरू कर दिये, पहले गुलाबी रंग की धोती उतारी, फिर ब्लाउज उतार दिया और आखिर में उसने पेटीकोट भी उतार दिया।

जैसा कि पहले लिख चुका हूँ, गंगा एक छरहरी और कुंवारी दिखने वाली लड़की लग रही थी, उसके मम्मे भी छोटे लेकिन सॉलिड लग रहे थे, उसका पेट भी अन्दर को था लेकिन चूतड़ छोटे लेकिन गोल लग रहे थे।

वो नग्न होकर मेरे पास धीरे धीरे आ गई और मैं भी पूरा नग्न होकर उसके सामने खड़ा हो गया। मेरा लंड अकड़ा हुआ खड़ा था और उसकी बालों से भरी चूत को सलामी दे रहा था।

मैंने आगे बढ़ कर उस को अपनी बाहों में भर लिया और फिर उसको उठा कर सारा कमरा घूम लिया।

उसको लिटा दिया और उसकी टांगों में बैठ कर धीरे से लंड उसकी टाइट चूत में डाल दिया। उसकी चूत एकदम गीली और पूरी तरह से तप रही थी।

मैं उसके मम्मों को चूसने लगा और हल्के हल्के धक्के भी मारता रहा, वो भी नीचे से धक्के मार रही थी।

थोड़ी देर बाद ऐसा लगा कि गंगा की चूत से बहुत पानी बह रहा है। चुदाई रोक कर देखा तो हैरान हो गया कि उसकी चूत में से पानी का छोटा सा फव्वारा निकल रहा है, उसको सूंघ कर देखा तो वो पेशाब नहीं था लेकिन चूत का रस था।

यह देख कर मैं फिर पूरे जोश के साथ उसको चोदने लगा और थोड़ी देर में गंगा फिर झड़ गई, बुरी तरह कांपती हुई वो मेरे से सांप के तरह लिपट गई।

गंगा का शरीर दुबला था लेकिन यौन आकर्षण भी बहुत था उसमें!

उस रात हम दोनों ने कई बार चुदाई की और गंगा ने जब तौबा की तभी उसको छोड़ा। फिर हम एक दूसरे के आलिंगन में ही सो गये।

सुबह जब आँख खुली तो गंगा जा चुकी थी और थोड़ी देर बाद वो मेरी चाय ले कर आ गई।

चाय देने के बाद वो खड़ी रही।

मैंने पूछा- कुछ कहना है गंगा?

वो हिचकते हुए बोली- छोटी मालिक, वो जो रसोईदारिन है, पूछ रही थी कि मैं आपके कमरे में क्यों सोई थी कल रात?

‘अच्छा… वो क्यों पूछ रही थी?’

‘मुझ को ऐसा लगता है कि उसको हम दोनों पर शक हो गया है!’

‘अच्छा, अभी तो मैं कॉलेज जा रहा हूँ लेकिन वहाँ से वापस आकर उससे बात करूंगा!’

शाम को जब मैं कॉलेज से लौटा तो गंगा मेरे लिए चाय और कुछ नमकीन ले आई। चाय पीने के बाद मैंने रसोइयिन को बुलाया।

जब वो आई तो मैंने उसको अच्छी तरह से देखा, 30-35 की उम्र और भरे जिस्म वाली औरत थी, देखने में कॅाफ़ी आकर्षक थी, उसके स्तन और नितम्ब दोनों ही काफी बड़े थे, चेहरा भी आकर्षक था और काफी सेक्सी लग रही थी।

मैंने पूछा- आंटी जी, आपका नाम क्या है?

वो बोली- छोटे मालिक, मेरा नाम परबतिया है लेकिन सब मुझको पारो के नाम से बुलाते हैं।

‘आप कब से यहाँ काम कर रही हो?’

वो बोली- कल ही चौकीदार राम लाल बुला कर ले आया था और कहा था कि छोटे मालिक का खाना वगैरह बनाना है और कोठी की साफ़ सफाई करनी है और दिन रात का काम है।

‘ठीक है, कितनी तनख्वाह का बोला था उसने?’

‘उसने कहा था कि शुरू में 50 रुपए महीना देंगे और फिर बढ़ा देंगे।’

‘अच्छा, आप इसी शहर की हो या फिर किसी गाँव की हो?’

‘छोटे मालिक, मैं आपके गाँव के पास ही एक गाँव की हूँ। रामलाल के भाई ने मुझको बताया था तो मैं यहाँ आ गई।’

मैंने राम लाल को कहा कि इन दोनों को जो कोठरी पसंद हो दे देना और चारपाई इत्यादि का भी इंतज़ाम कर देना।

रामलाल को गेट पर भेज कर मैं अंदर आ गया और पारो को भी कहा कि साथ आये।

फिर मैंने पारो को कहा- ऐसा है आंटी, मैं रात को बहुत डर जाता हूँ तो मेरे साथ मेरे कमरे में कोई न कोई ज़रूर सोता है। इसीलिए गंगा मेरे साथ सोती है और वहाँ गाँव में भी मेरे काम वाली नौकरानी मेरे ही कमरे में सोती थी। अगर आप सोना चाहो तो आप भी सो सकती हो! क्यों?

पहले वो हिचकिचाई फिर कहने लगी- ठीक है छोटे मालिक, मैं भी अकेले में घबराऊँगी सो आप दोनों के साथ सो जाय करूँगी।

‘चलो तय हो गया कि तुम दोनों रात को इसी कमरे में सोया करोगी। आज रात खाने में क्या बना रही हो?’

‘जो आप बोलो?’

‘अच्छा तो मटन ले आना आधा सेर, वही बना लेना। देखते हैं कैसा बनाती हो?’

दोनों चली गई तो मैं लेट गया और फिर मुझको झपकी लग गई, उठा तो शाम के 7 बज चुके थे।

मैंने डाइनिंग टेबल पर खाना खाया, मैं अकेला ही था।

फिर मैं बाहर निकल गया और कोठी के आस पास चक्कर लगाने लगा।

थोड़ा समय ही घूमा हूँगा कि एक आदमी मेरे से बोला- साहिब, माल चाहिए क्या?

‘कैसा माल?’

‘कोई लड़की या औरत?’

मुझको समझने में थोड़ी देर लगी, मैंने कहा- कहाँ है लड़की?

‘साहिब हाँ बोलो तो ले जायेंगे आपको वहाँ!’

‘कितने पैसे लगेंगे?’

‘यही कोई 50 रुपए!’

‘नहीं भैया, मुझको कुछ नहीं चाहिये।’

यह कह कर मैं वापस कोठी के अंदर आ गया और जाकर अपने बैडरूम में पायजामा कुरता पहन लिया और बिस्तर पर लेट गया।

थोड़ी देर बाद पहले गंगा आई और फिर बाद में पारो भी आ गई, दोनों ने अपने बिस्तर बिछा लिए और दोनों लेट गई।

अब मैं सोच में पड़ गया कि गंगा को कैसे चोदूँ? यह सब मेरी गलती है। पारो को न बुलाता तो अच्छा प्रोग्राम चल रहा था मेरा और गंगा का।

यह सब सोचते हुए में जाने कब सो गया।

रात को अचानक मेरी नींद खुली तो देखा कि पारो गंगा के बिस्तर में उसके साथ लेटी हुई थी और उसकी धोती को ऊपर करके उसकी चूत में उँगली से मसल रही थी।

पारो की अपनी धोती भी जांघों के ऊपर पहुँच गई थी और गंगा का हाथ भी पारो की चूत से खेल रहा था।

पारो की चूत एकदम काले मोटे बालों से ढकी थी।

यह नज़ारा देख कर मैं भी पारो की साइड पर बिस्तर में लेट गया और अपना हाथ उसकी चूत के ऊपर फेरने लगा, कभी उसकी चूत के मुंह को हाथ से मसल रहा था और कभी उसके मोटे मम्मों को दबाने में लगा था।

पारो की चूत एकदम गीली हो चुकी थी, उसकी आँखें अभी भी बंद थी।

मैंने चुपके से उसकी धोती को और ऊपर उठाया और पारो की टांगों को चौड़ा कर के अपना खड़ा लंड उस की चूत के ऊपर रख दिया।

पहले थोड़ा डाला और फिर उसको धीरे से पूरा डाल दिया।

मैंने पारो की आँखों की तरफ देखा जो पूरी तरह से बंद थीं। मुझको लगा कि वो गहरी नींद में सोई थी।

गंगा की धोती भी ऊपर उठी हुई थी और उसका हाथ भी पारो की चूत पर था और वो भी पारो की चूत से खेल रहा था।

उसका हाथ मेरे लंड से रगड़ रहा था।

पारो की कमर नीचे से ऊपर उठ कर मेरे लंड का स्वागत कर रही थी, उसकी पनिया रही चूत से लप लप की आवाज़ निकल रही थी। थोड़े से धक्के और मारे तो पारो की चूत झड़ गई, उसने कस कर मुझ को चिपटा लिया और कस के बांधे रखा जब तक वो पूरी झड़ नहीं गई।

अब मैंने गंगा को देखा, वो भी चूत में ऊँगली कर रही थी।

मेरा खड़ा लंड अब गंगा की चूत में जाने को उतावला हो रहा था।

पारो अब करवट बदल कर गहरी नींद में सो गई थी।

मैं अब उठ कर गंगा वाली साइड में चला गया और उसकी धोती ऊपर उठा कर लंड का एक ज़ोर का धक्का दिया और वो पूरा उसकी चूत में समां गया।

वो तब भी आँखें बंद कर के सोई हुई लगी। उसको मैंने धीरे धीरे चोदा और उसकी गीली चूत से फव्वारा छूटा दिया।

फिर मैंने दोनों की धोती ठीक कर दी और आकर अपने पलंग पर लेट गया।

मेरा लंड अभी भी खड़ा था लेकिन मन में ख़ुशी थी कि दो औरतों को चोद कर पट्ठा अभी रात भर सलामी देने को तैयार है।

थोड़ी देर में मुझको नींद आ गई और सुबह जब नींद खुली तो दोनों औरतें जा चुकी थी।

थोड़ी देर बाद गंगा मेरी चाय लेकर आई, मैंने उससे पूछा- रात कैसे कटी?

वो बोली- छोटे मालिक, ऐसी गहरी नींद थी कि कुछ भी पता नहीं चला।

मैं बोला- मुझको भी बड़ी गहरी नींद आई थी।

नाश्ता करके मैं कॉलेज चला गया और दोपहर 2 बजे वापस आ गया।

पारो मुझ को ठंडा पानी देने आई, उसके चेहरे को गौर से देखा लेकिन रात की चुदाई का कोई निशाँ नहीं था।

कुछ अजीब सा लगा कि इन दोनों की नींद इतनी पक्की है कि इनको पता ही नहीं चला कि वो दोनों रात को चुद गई हैं।

थोड़ी देर बाद गंगा भी आई और बोली- पारो पूछ रही है की रात को क्या बनाएँ?

मैंने कहा- कुछ भी बना लो और तुम ना… पारो को पटाओ ताकि हमारा चूत लंड का खेल जारी रहे। उससे पूछो कि वो अपनी चूत की भूख कैसे शांत करती है।

गंगा ने हाँ में सर हिला दिया और चली गई।

रात को खाना खाने के बाद मैं बिस्तर में लेटा ही थी कि गंगा आ गई और वो बोलना शुरू हो गई- छोटे मालिक, पारो एक विधवा है जो 3 साल पहले अपने पति को खो चुकी है। तब से वो किसी गैर मर्द के साथ नहीं गई और अपनी काम की भूख सिर्फ उंगली से शांत करती है। वो कह रही थी कि कोई अच्छा आदमी मिल जाएगा तो वो दोबारा शादी कर लेगी। जब मैंने उससे पूछा कि अगर तुमको कोई आदमी केवल कामक्रीड़ा के लिए मिल जाए तो तुम क्या उससे काम क्रीड़ा के लिए राज़ी हो जाओगी? वो कुछ बोली नहीं सिर्फ इतना कहा कि ऐसा समय आने पर मैं देखूंगी।

मैं बोला- अच्छा देखेंगे। मैं सोच रहा हूँ कल वही तरकीब इस्तेमाल करूँगा जो मैंने पहले भी आज़माई थी।

थोड़ी देर में पारो भी आ गई, उसने आज काफी रंगीन साड़ी पहनी हुई थी। हम तीनों थोड़ी देर बातें करने के बाद हम सो गए।

सुबह जल्दी ही आँख खुल गई और देखा आज भी पारो की साड़ी और पेटीकोट उसकी जांघों के ऊपर था और उसकी चूत के काले बाल साफ़ दिख रहे थे, उसकी जांघें काफी मोटी और गोल थी।

दिल तो हुआ कि जाकर उसकी गोल जांघों को चूम लूँ और फिर अपना लौड़ा भी उन पर फेरते हुए उसकी चूत में डाल दूँ।

यह सोचते ही मेरा लंड खड़ा हो गया और मैंने उसको पयज़ामे के बाहर कर लिया और हल्के हल्के उस पर हाथ फेरने लगा।

मेरी आँखें बंद थी और थोड़ी देर में मुझको महसूस हुआ कि कोई अपना हाथ मेरे लंड पर फेर रहा है।

आँखें खोली तो देखा वो हाथ पारो का था और वो फटी आँखों से मेरे लंड को देख रही है।

मैंने बिना कुछ सोचे ही खींच कर पारो को अपने बाहों में भर लिया और उसको बार बार चूमने लगा, खासतौर उसके होटों को और उस के गोल गालों को!

फिर जाने कैसे हिम्मत आ गई और मैंने उसको बिस्तर पर लिटा दिया और उसकी साड़ी उतार दी और पेटीकोट ऊंचा कर दिया और उस की चौड़ी टांगों में बैठ अपना लंड पूरा उस की प्यासी चूत में डाल दिया।

उसकी तपती चूत भट्टी बनी हुई थी और मुश्किल से 10 धक्के ही मारे थे कि वो ज़ोर से झड़ गई।

वो इतनी ज़ोर से कांपने लगी जैसे हवा में एक पत्ता कांपता है।

मैं अभी भी पारो के ऊपर लेटा था और मेरे खड़ा लंड अभी भी उस की गीली चूत में ही था। मैंने ध्यान से पारो को देखा उसकी आँखें बंद थीं और होटों पर एक मीठी मुस्कान थी।

उसने जब आँखें खोली और मुझको देखा तो उसके गोल बाजू एकदम मेरे गले में लिपट गए।

मैंने अब धीरे धीरे धक्के मारने शुरू कर दिए, पारो ने भी अपने चूतड़ उठा कर मेरे धक्कों का जवाब देना शुरू कर दिया।

तभी गंगा उठ कर पलंग के पास आ गई और जल्दी से पारो के ब्लाउज को खोलने लगी और फिर अपने भी सारे कपड़े उतार कर वो हमारे साथ पलंग पर लेट गई।

गंगा ने ऊँगली डाल कर पारो की चूत के दाने को रगड़ना शुरू कर दिया। मैंने भी अपना मुंह पारो के मुंह पर पर रख दिया और उसके होटों को चूसने लगा।

मेरा लौड़ा अभी भी हल्के धक्के मार रहा था। फिर मैंने पूरी ताकत से लंड अंदर बाहर करना शुरू कर दिया और पारो की एकदम गीली चूत से फिच फिच की आवाज़ें आ रही थी जो मुझको और ज़ोर के धक्के मारने के लिए उकसा रही थीं।

गंगा पारो के मम्मों के साथ खेल रही थी और मैं उसकी चूत में लंड पेल रहा था। पारो अब फिर नीचे से चूतड़ मेरे लंड को आधे रास्ते में आने पर उठा रही थी।

तभी मैंने महसूस किया कि पारो की चूत का मुंह अंदर से बंद और खुलना शुरू हो गया है तो मैंने धक्कों की स्पीड अपनी चरम सीमा पर कर दी।

जब मैंने एक बहुत गहरा धक्का मारा तो पारो ‘हाय हाय…’ करके मुझसे चिपक गई और उसका एक बहुत ही तीव्र स्खलन हुआ।

जब वह ढीली और निढाल होकर पड़ गई तो मैंने लंड उसकी चूत से निकाल कर गंगा की चूत में धकेल दिया।

उसकी चूत भी पूरी तरह से गीली हो चुकी थी और शायद इस कारण वश वो भी जल्दी ही झड़ गई। अब मैं दो औरतों के बीच खड़े लंड को लेकर लेटा था और हैरान हो रहा था कि पारो कैसे मेरे मन मर्ज़िया हो गई।

एक हाथ पारो के मोटे मम्मों के साथ खिलवाड़ कर रहा था और दूसरे से मैं गंगा की चूत को सहला रहा था।

 
लखनऊ में कम्मो से मुलाकात

मैं दो औरतों को चोद कर उनके बीच खड़े लंड को लेकर लेटा था और हैरान हो रहा था कि पारो कैसे मेरे मन मर्ज़िया हो गई।

एक हाथ पारो के मोटे मम्मों के साथ खिलवाड़ कर रहा था और दूसरे से मैं गंगा की चूत को सहला रहा था।

पारो के साथ चुदाई एक क्षण में हो गई, पारो इतनी जल्दी काबू में आ जायेगी, इसका मुझको यकीन नहीं था, इसमें शायद पारो को लंड की प्यास ही मुख्य कारण थी।

चुदाई कार्यक्रम के बाद वो दोनों चली गई और थोड़ी देर बाद गंगा मेरी सुबह की चाय लेकर आ गई।

चाय पीते हुए मैंने उससे पूछा- गंगा, यह पारो कैसे इतने जल्दी मान गई चुदाई के लिए?

वो बोली- छोटे मालिक मैं खुद हैरान हूँ कि यह कैसे हुआ?

मैं बोला- तुमको मालूम है, मैंने तुमको और पारो को परसों रात को भी चोदा था?

‘नहीं मुझको तो नहीं मालूम… कब चोदा आपने हम दोनों को?’

फिर मैंने उसको परसों रात वाली सारी बात बताई कि कैसे जब मेरी नींद खुली तो देखा तो पारो तुम्हारी चूत में ऊँगली डाल रही थी और तुम उसकी चूत में! और तुम दोनों गहरी नींद में सोई हुई थी, फिर उठ कर पहले मैंने पारो को सोये सोये चोदा और फिर तुमको भी हल्के से चोदा था, दोनों का पानी छूट गया था।

वो हैरान होकर बोली- यह कैसे हो सकता है? मेरी नींद तो झट खुल जाती है।

मैंने मुस्कराते हुए कहा- मेरी किस्मत अच्छी थी जो तुम दोनों को एक साथ चोदने का मौका मिल गया और तुम दोनों को पता भी नहीं चला।

फिर मैं नहा धोकर कॉलेज चला गया।

हमारा कालेज लड़के लड़कियों का साझा कॉलेज था, मैंने कॉलेज की लड़कियों को गौर से देखना शुरू कर दिया। कुछ लड़कियाँ थोड़ा बहुत फैशन करती थीं जैसे लिपस्टिक लगाना और साड़ी के इलावा पंजाबी सलवार सूट भी पहनती दिखी। लेकिन उनमें से कोई खास सुन्दर या सेक्सी दिखने वाली लड़की नहीं दिखी।

एक ख़ास चीज़ जो मैंने नोट की, वो थी सभी लड़कियाँ अंगिया (ब्रा) पहनती थी ब्लाउज के नीचे जो पहले गाँव में मैंने कभी नहीं देखा था।

वैसे भी मुझको शहरी लड़की को देख कर कोई ख़ास आनन्द नहीं आता था। मैं तो गाँव की सीधी साधी लड़कियाँ ही ज्यादा पसन्द करता था।

गाँव की कच्ची उम्र की लड़कियाँ भी मुझको नहीं भाती थीं, गाँव की शादीशुदा औरतें ही पसंद थी। एक तो वो यौनक्रिया में काफी मंझी होती थीं, दूसरे उनको पकड़े जाने का भय भी कम होता था।

रात को भोजन के बाद ही चोदन प्रोग्राम रखा जाता था क्यूंकि उस समय हमारे काम में कोई विघ्न नहीं डाल सकता था और फिर रात में हम तीनों कोठी के अंदर अकेले ही होते थे।

आज जब दोनों आई तो मैंने कहा- पारो आंटी जी, आपको सुबह की घटना बुरी तो नहीं लगी?

वो झट शर्माते हुए बोली- नहीं छोटे मालिक, और आप भी मुझको आंटी मत कहो न!

‘ठीक है पारो, अब तुम दोनों सोच कर बताओ कि आज क्या करें?’

पारो तो चुप रही लेकिन गंगा ही बोली- छोटे मालिक, आज हम तीनों नंगे हो जाते हैं, फिर आप फैसला करो किसकी चुदाई पहले और किस की बाद में!

मैं बोला- गंगा, ऐसा करते हैं कि हम सब नंगे होकर मेरे पलंग पर लेट जाते है मैं बीच में और तुम दोनों मेरी बगल में, सबसे पहले पारो को चोद देंगे क्योंकि वो काफी अरसा नहीं चुदी और फिर गंगा की बारी… क्यों ठीक है?

गंगा जल्दी ही नंगी हो गई लेकिन मेरी निगाहें तो पारो पर लगी थी, वो धीरे धीरे कपड़े उतार रही थी, जैसे पहले ब्लाउज, फिर साड़ी और आखिर में उसने पेटीकोट उतारा।

!

उसके चेहरे पर थोड़े से शर्म के भाव ज़रूर आये कि वो एक गैर मर्द के सामने नग्न हो रही है। ब्लाउज से निकल कर उसके मम्मे एकदम उछाल कर बाहर आ गए, गोल और काफी बड़े और पूरे सॉलिड दिख रहे थे। उसके मम्मों को देख मुझे कम्मो के मम्मों की याद आ गई, उसके बहुत बड़े और सॉलिड स्तन थे।

हाथ में लिए तो उसके निप्पल एकदम अकड़ गए, गोल और सख्त, उसका पेट भी एकदम गोल और अंदर के तरफ था। उसके नितम्ब बहुत उभरे हुए और गोल थे.. हाथ लगते ही वो थिरक रहे थे।

गंगा को देखा तो वो एक छरहरे शरीर वाली लड़की लग रही थी, छोटे गोल मम्मे और सॉलिड गोल चूतड़, वो हर लिहाज़ से एक कुंवारी लड़की लग रही थी।

मैं बोला- चलो शुरू हो जाओ, पहले पारो मेरे ऊपर चढ़ेगी और वो मुझको चोदेगी और जब तक वो चोद चोद कर थक नहीं जायेगी वो मेरे ऊपर से नहीं उतरेगी। और उसके बाद गंगा शुरू हो जायेगी। जब तक गंगा की बारी नहीं आती वो पारो को चूमे और चाटेगी ताकि वो गर्म बनी रहे।

पारो बोली- छोटे मालिक क्या यह संभव है? आपका यह लंड तब तक खड़ा रहेगा क्या?

मैंने गंगा की तरफ देखा, वो मुस्करा रही थी।

मैं बोला- पारो, तुम आजमा लो न, दखो कब तक यह तुम्हारी चूत की सेवा करता है।

गंगा ने पारो की चूत में हाथ डाल दिया और उसके दाने के साथ खेलने लगी और पारो अपनी चूतड़ उठा उठा कर उसके हाथ को तेज़ी से रगड़ने के लिए उकसाने लगी।

मैं उसके मम्मों को चूसने लगा, एकको चूसने के बाद दूसरे को मुंह में डाल लिया।

तब पारो उठी और मेरे ऊपर बैठ सी गयी और अपने हाथ से मेरे लोह समान लंड को अपनी चूत के ऊपर रगड़ कर उसके मुंह पर रख दिया।

मैं चुपचाप लेटा रहा।

तब पारो ने अपनी चूत धीरे से मेरे लंड के ऊपर रख कर एक ज़ोर का धक्का दिया और घुप्प से लंड उसकी चूत के अंदर चला गया।

और फिर वो पहले धीरे धीरे और बाद में तेज़ धक्के मारने लगी, उसके चेहरे पर यौन आनन्द के भाव आने लगे और थोड़े समय के बाद वो कांपती हुए झड़ गई लेकिन वो उतरी नहीं और थोड़ी देर बाद फिर धक्के मारने शुरू कर दिए।

ऐसा उसने 3 बार किया और आखरी बार जब वो झड़ी तो मेरे ऊपर से उतर कर बिस्तर पर हांफ़ते हुए लेट गई।

मैंने शरारत के तौर से पूछा- बस पारो या अभी और इच्छा है?

हांफ़ते हुए वो बोली- नहीं छोटे मालिक, मैं थक गई, अब गंगा की बारी है।

मैं बोला- चलो गंगा, अब तुम चढ़ जाओ जल्दी से!

जब वो भी 3-4 बार छूटा कर थक गई, वो भी उतर गई।

तब मैंने कहा- मेरा क्या होगा लड़कियों? मेरा तो छूटा नहीं अभी तक?

पारो हैरानगी के साथ बोली- अभी आपका नहीं छूटा क्या? उफ़्फ़… अब क्या होगा?

मैं बोला- कोई फ़िक्र नहीं, पारो तुम घोड़ी बनो!

वो घोड़ी बनी और मैंने उसको ज़ोर से चोदा और थोड़ी देर में वो खलास हो गई और मैंने भी एक ज़ोरदार पिचकारी उसकी चूत में मार दी और फिर मैं गंगा की तरफ मुड़ा और बोला- क्यों घोड़ी बनोगी क्या?

वो बोली- नहीं छोटे मालिक, अब और नहीं!

तब हम सब एक दूसरे से चिपक कर सो गए.

यह सिलसिला रोज़ का हो गया और जिन दिनों एक की माहवारी होती तो दूसरी उसकी जगह लेने के लिए तैयार होती।

मेरा यौनक्रिया का कार्यक्रम सही ढंग से चलता रहा और इस तरह हमको लखनऊ आये हुए दो महीने हो गए।

फिर एक दिन गाँव से खबर आई कि गंगा की माँ बहुत बीमार है और मैंने उसकी पूरी तनख्वाह देकर उसको बस में चढ़ा दिया और साथ में उसको कुछ रूपए फ़ालतू भी दे दिए।

एक दिन में कॉलेज से वापस आ रहा था तो एक गली से ‘श शस्श… श… श… की आवाज़ आई, उस तरफ देखा तो एक औरत जिसका चेहरा ढका था और वो बहुत ही भड़कीली साड़ी पहने थी, वो मुझ को इशारे से अपने पास बुला रही थी।

पहले तो मैं हिचकिचाया यह सोच कर कि ना जाने कौन औरत है, लेकिन फिर मन में सोचा कि देखो तो सही कौन है और क्या चाहती है वो मुझ से, मैं गली में चला गया।

वो मुझको अपने पीछे आने का इशारा कर तेज़ी से चलने लगी।

थोड़ा सा चलने के बाद वो एक दो मंजिला मकान के अंदर जाने लगी और मुझको पीछे आने का इशारा करती रही। मैं भी उसके पीछे उस मकान में चला गया।

उसने कहा- आ जाओ साहिब।

जब हम उसके कमरे में पहुंचे तो उसने मुझको अंदर करके दरवाज़ा बंद कर दिया और फिर उसने अपने मुंह को चादर से बाहर कर दिया।

वो बोली- मुझ को पहचाना छोटे मालिक?

मैंने गौर से देखा लेकिन बहुत कोशिश करने के बाद भी उस को नहीं पहचान सका। मैंने सर हिला दिया कि मैं नहीं पहचान सका उसको!

वो ज़ोर से हंसी और बोली- कैसे पहचानोगे छोटे मालिक? बहुत टाइम हो गया है। गौर से देखो मुझको?

फिर कुछ कुछ याद आने लगा, 3-4 साल पहले की बात है कम्मो अचानक गाँव से गायब हो गई थी, काम क्रीड़ा की मेरी बहुत प्रिया गुरु थी वो!

मैंने मुस्करा कर कहा- कम्मो हो तुम?

यह सुन कर वो ज़ोर से खिलखिला कर हंस दी और बोली- पहचान ही लिया छोटे मालिक। मैं तो सोच रही थी नहीं पहचानोगे आप?

मेरे चेहरे पर हैरानी थी और मैं बोला- अरे वाह कम्मो, गाँव से अचानक गायब हो गई थी तुम? क्या हुआ था?

‘वो बाद में बताऊँगी। अभी कुछ करने का इरादा है क्या?’

‘सच्ची? कुछ कर सकते हैं हम दोनों?’

‘अगर तुम्हारी इच्छा हो तो?’

मैं बिना कुछ बोले उसकी तरफ बढ़ गया और उसको बाँहों में भर लिया और ताबड़ तोड़ उसको चूमने लगा। उसको चूमते हुए महसूस किया कि वो मेरे लंड से खेल रही है मेरी पैंट के ऊपर से।

‘वैसा ही है क्या छोटे मालिक?’

‘खुद देख लो न!’

और यह कह कर मैंने अपनी पैंट उतार दी और कमीज भी उतार दी।

उधर वो भी अपनी साड़ी और ब्लाउज उतार कर तैयार हो गयी, पेटीकोट भी एकदम ज़मीन पर आ गिरा।

मेरा लंड पहले ही तैयार खड़ा था अपनी गुरु की चूत लेने के लिए!

फिर हम दोनों एक बहुत ही गर्म चुदाई में लग गए, मेरी चुदाई का स्टाइल देख कर कम्मो हंसने लगी और बोली- आपने गुरु की बात पूरी तरह से मान ली क्या?

लेकिन चूत और लंड की जंग जारी रही और यह जंग थी कि कौन पहले छूटेगा गुरु या चेला?

और मैंने अपने तजुर्बे का पूरा फायदा उठाते हुए अपनी चुदाई को एक नए मुकाम पर पहुँचा दिया।

और तभी कम्मो एक ज़ोर से झटके के साथ झड़ गई और मेरे शरीर से लिपट गई।

मैंने अपने धक्के जारी रखे और फिर कम्मो को दोबारा यौन की ऊंची सीढ़ी पर ले जाकर उसका फिर से छुटवा दिया।

वो हैरान हो रही थी लेकिन मैंने अपना छुटाए बिना ही बाहर निकाल लिया और उसके पेटीकोट से अपने लंड का गीलापन साफ़ कर दिया।

उसने बंद आँखें खोलीं और बोली- वाह छोटे मालिक, आप तो एक्सपर्ट हो गए हो कसम से! एक बार भी नहीं छूटा आपका?

‘कम्मो, जो तुमने सिखाया वही तो है यह सब… अच्छा यह बताओ कि अचानक तुम कहाँ गायब हो गई थी?’

‘रहने दो छोटे मालिक बड़ी लम्बी कहानी है।’

‘नहीं कम्मो, मैं सुनना चाहता हूँ कि ऐसा क्या हुआ कि तुम भाग गई किसी आदमी के साथ?’

‘भाग गई? यह किसने कहा कि मैं भाग गई थी किसी के साथ?’

‘गाँव में तो यही चर्चा थी।’

‘नहीं छोटे मालिक ऐसा नहीं है, सच तो यह है कि मैं गर्भवती हो गई थी।’

मैं हैरानी से बोला- गर्भवती हो गई थी? किसके साथ? कौन था वो हरामजादा जो तुमको मेरे अलावा भी चोदता था?

वो बड़े ज़ोर से खिलखाला कर हंस दी और हँसते हुए बोली- वो आप ही थे जिसने मुझको गर्भवती किया था।

‘मैंने? यह कैसे संभव है? मैं तो अक्सर बाहर ही छूटा रहा था न!’

‘हाँ बस एक बार मुझसे गिनती में गलती हो गई और उसका नतीजा मेरा गर्भ ठहर गया।’

‘मुझको बोलती तो शहर में या फिर गाँव में ही गर्भपात करवा देती न, वो क्यों नहीं किया?’

‘गाँव में यह किसी से छुपा नहीं रहता और शहर जाने के लिए मेरे पास पैसे नहीं थे!’

‘फिर अब बच्चा कहाँ है?’

‘वो पैदा होते समय ही मर गया था।’ यह कहते समय उसकी आँखों में पानी भर आया और फिर उसने मुझ को अपने दर्द भरी कहानी सुनाई।

लखनऊ शहर में वो इस लिए आ गई थी ताकि उसको यहाँ कोई पहचानने वाला न मिल जाए।
 
कम्मो के साथ जीवन का नया अध्याय

कम्मो जब लखनऊ में आई तो उसके पास धन के नाम मेरे दिए हुए थोड़े से रूपए ही थे। जब तक वो चले वो एक छोटी सी धर्मशाला में रही और जब वो खत्म हो गए तो वो मजबूरन लोगों के घर का काम-काज करने लग गई और एक सज्जन परिवार में उसको आसरा भी मिल गया लेकिन घर के मालिक की बुरी नज़र से बच कर वो वहाँ से भाग निकली और फिर दूसरे मोहल्ले में यही काम करने लगी।

उसको गाँव की खबरें मिलती रहती थी। लेकिन उसने अपने बारे में किसी को कुछ नहीं बताया। आजकल वो किसी आर्मी अफसर के परिवार में घरेलू काम कर रही है, यह सब सुन कर मैंने उसको कहा- कम्मो, सामान बांध और चल मेरे साथ।

वो बोली- नहीं छोटे मालिक, अब मैं यहाँ ही ठीक हूँ।

‘मैं तुम्हारी एक भी नहीं सुनूंगा, सामान बाँध, मैं तांगा लेकर आता हूँ, तू आज ही मेरे साथ जाएगी।’

यह कह कर मैं बाहर निकल गया और थोड़ी देर में तांगा लेकर आ गया।

कम्मो का थोड़ा बहुत जो सामान था, वो लेकर आ गई और मैं उसकी मकान मालकिन के पास जा कर उसका पूरा हिसाब चुकता कर दिया।

कोठी पहुँच कर मैंने चौकीदार को बुलाया और हुक्म दिया कि एक कोठरी वो कम्मो को दे दे और उसका सारा सामान उसी कोठरी में रख दिया जाए।

मैंने पारो को भी बुलाया और उसके साथ कम्मो का परिचय कराया और कहा- यह वो औरत है जिसने मुझको पाला है और यह अब गंगा की जगह सारा काम किया करेगी।

तभी मैंने मम्मी को भी फ़ोन कर के बता दिया कि कैसे कम्मो मुझ को मिल गई है और उसको मैं घर सम्हालने के लिए ले आया हूँ।

मम्मी बड़ी ख़ुशी हुई और उन्होंने कम्मो से भी बात की।

मैं बड़ा खुश था कि कामक्रीड़ा सिखाने वाली मेरी गुरु मुझको दुबारा मिल गई थी। लेकिन पारो का चेहरा थोड़ा मुरझाया हुआ था जो स्वाभाविक ही था।

मैंने कोशिश करके पारो के मन में उठ रहे किसी प्रकार के संशय को खत्म कर दिया और उसको तसल्ली दी कि वो पहले की तरह ही काम करेगी और रात को हमारे साथ ही सोया करेगी।

यह सुन कर पारो बड़ी खुश हो गई।

रात को खाने के बाद वो दोनों अपना बिस्तर ले कर मेरे कमरे में ही आ कर लेट गई। मैंने दोनों से पूछा कि उन दोनों को एक दुसरे के साथ सोना उचित लगेगा या नहीं।

दोनों ने हाँ में सर हिला दिया।

तब मैंने कम्मो से पूछा- कम्मो, आज तुम बताओ कि कैसे आज हम नए तरीके चुदाई करें? तुमने तो चम्पा के साथ भी मुझको चोदते हुए देखा है न, तो शर्माना नहीं, पारो भी माहिर है चुदाई की कला मैं।

कम्मो बोली- मैं यहाँ आज तो नई हूँ तो आप बताओ कि कैसे चुदाई करनी है वैसे ही कर देंगी हम दोनों।

मैंने कहा- पहले कपड़े तो उतारो।

और मेरे कहते ही दोनों निर्वस्त्र हो गई पूरी तरह से! मैं भी नंगा हो गया। मेरे खड़े लंड को देख कर दोनों बड़ी खुश लग रही थी।

कम्मो ने मेरे लंड को हाथ में लिया और नाप और बोली- छोटे मालिक, यह तो पहले से एक इंच बड़ा हो गया है। क्या किया आपने?

‘मैंने कुछ नहीं किया, बस वही किया जो तुमने मुझको सिखाया था।’

‘चुदाई? कितनों से?’

‘हा हा… वो तो एक राज़ है जो राज़ ही रहेगा। वैसे चुदाई के कुछ नतीजे सामने आने वाले हैं जल्दी ही।’

‘अरे वाह छोटे मालिक? आप तो छुपे रुस्तम निकले।’

अब मैंने दोनों औरतों को ध्यान से देखा, कद बुत में एक जैसी थी दोनों लेकिन बाकी शरीर में काफी फर्क था। जैसे पारो के मम्मे ज्यादा मोटे और गोल थे और कम्मो के मम्मे थोड़े छोटे लेकिन उनमें पूरा तनाव था।

इसी तरह दोनों के चूतड़ मोटे और गोल थे और जाँघें भी एकदम संगमरमर के खम्बे लग रही थी, चेहरे में काफ़ी फर्क था, कम्मो का चेहरा उम्र छोटी होने से ज्यादा चमक दमक वाला लग रहा था और पारो का थोड़ा प्रौढ़ता लिए हुए था।

दोनों की झांटों में भी समानता थी क्यूंकि दोनों ही काली बालों वाली थीं।

मुझ को लगा की दोनों ने कभी झांटों को साफ़ या काटा नहीं था।

यह प्रश्न मैंने दोनों से पूछा तो पारो बोली- छोटे मालिक, गाँव में चूत के बाल काटना मना है क्यूंकि चूत के बाल सिर्फ रंडियाँ ही काटती हैं, घरेलू औरतें नहीं काटती कभी!

कम्मो बोली- हाँ छोटे मालिक, ऐसा ही रिवाज़ है।

फिर दोनों ही मेरे अगल बगल लेट गई। मैंने अपने हाथों की उँगलियाँ से उनकी झांटों के साथ खेलना शुरू कर दिया और कम्मो मेरे लंड के साथ खेलने लगी।

तभी मुझ को विचार आया कि क्यों न आज इन दोनों की चूत को चाटा जाए।

सबसे पहले मैंने कम्मो को कहा- मैं तुम्हारी चूत को जीभ से चाटूंगा और तुम पारो की चूत के साथ भी वैसा ही करो अगर कोई ऐतराज़ न हो तो?

दोनों मान गई।

कम्मो पलंग के बीचों बीच लेट गई और चूत वाली साइड मैं उसकी टांगो को चौड़ा कर के बैठ गया और पारो उसके मुंह पर टांगों के बल बैठ गई और अपनी चूत को कम्मो के मुंह के ठीक ऊपर रख दिया।

मैंने धीरे से अपनी जीभ उसकी चूत में एक बार घुमाई और फिर उसके भगनसा को चाटने और चूसने लगा।

ऐसा करते ही उस ने अपने चूतड़ बिस्तर से ऊपर उठा दिए। उधर कम्मो की जीभ लगते ही पारो ने अपने जांघों को खोलना बंद करना शुरू कर दिया।

कम्मो अपने हाथों से पारो की चूत के ऊपर भी उंगली से रगड़ रही थी। दोहरे हमले को पारो ज्यादा देर सहन नहीं कर सकी और ‘उउउई मेरी माआआ…’ बोलती हुए छूट गई।

उधर कम्मो के चूतड़ पूरे उठ कर मेरे मुंह से चिपके हुए थे और जैसे जैसे मैं उसकी भगनसा को चूस रहा था उसके शरीर में कंपकंपाहट शुरू हो गई और फिर वो इतनी बढ़ गई कि कम्मो की जांघें ने एकदम से मेरे मुंह को जकड़ लिया। और ऐसा लगने लगा की मैं सांस भी नहीं ले पाऊंगा।

दोनों एकदम निढाल सी लेट गई जैसे बहुत भाग कर आई हों।

मैं फिर उनके बीच लेट गया और अपने तने हुए लौड़े से खेलने लगा।

जब उन दोनों की सांस ठीक हुई तो मैंने कहा- तुम अब बारी बारी से मेरे लंड को चूसो।

दोनों खुश होकर बारी बारी से मेरे लंड को चूसने लगी। एक के मुंह में लंड और दूसरे के मुंह में अंडकोष।

और आखिर में जब लंड कम्मो के मुंह में था तो न जाने उसने क्या ट्रिक खेली कि मेरा वीर्य का बाँध टूट गया और सारा वीर्य एक फव्वारे की तरह निकला जिसको पहले कम्मो के मुंह में लिया और बाद में वो पारो के मुंह में जा कर गिरा।

मैं कालेज नियम से जाता था। धीरे धीरे मैं कालेज में एक जनप्रिय छात्र बनता गया। उसका राज़ था खुले दिल से दोस्तों पर खर्च करना। उनमें 3-4 लड़कियाँ भी थी जो उन दिनों लड़कों के साथ ज्यादा मिक्स नहीं होती थी।

एक लड़की जिसका नाम नेहा था वो कुछ ज्यादा ही मुझ पर मेहरबान रहती थी। कालेज में अक्सर वो कैंटीन में मिल जाती थी और में उसको नई चली कोकाकोला की बोतल पिला दिया करता था।

उसने एक दो बार मेरे घर आने की कोशिश करी लेकिन मैंने कुछ ज्यादा भाव नहीं दिया।

मेरा सेक्स जीवन पारो और कम्मो के साथ अच्छा चल रहा था, दोनों रात में मुझसे चुदती थी बारी बारी और जो कुछ नया सोच कर आती थी और करती थी, उसको ईनाम भी देता था।

एक दिन कम्मो बोली कि आज उसको लखनऊ की एक सहेली मिली थी और अगर छोटे मालिक इजाज़त दें तो उसको बुला लें घर में?

मैंने कहा- हाँ हाँ, बुला लो। लेकिन पूछ लेना कि वो हमारे साथ वो सब करेगी जो हम तीनों करते हैं।

‘छोटे मालिक, आप निश्चिंत रहें! और अगर पसंद नहीं आई तो वापस भेज देंगे। ठीक है न?’

‘चलो देखते हैं।’

कालेज से जब मैं घर पहुँचा तो खाने के बाद कम्मो एक छरहरे जिस्म वाली कमसिन लड़की को ले आई और कहने लगी- यह रेनू है छोटे मालिक!

लड़की दिखने में तो अच्छी थी लेकिन फिर मेरे मन में ख्याल आया कि हमारा चौकीदार रामलाल ये सब देख रहा है, तो वो क्या सोचेगा कि छोटे मालिक का चरित्र अच्छा नहीं।

मैंने कम्मो को बुलाया अकेले में और कहा- ये सब क्यों कर रही हो? हम तीनो के बीच सब ठीक तो चल रहा है फिर किसी और को क्यों बुलाया जाए? और जितने ज्यादा लोग इसको जानेंगे, उतने ही हमारी बदनामी का खतरा बढ़ जाएगा। और फिर मैं तुम दोनों से खुश हूँ।

कम्मो बोली- ठीक है मालिक जैसा आप कहें।

इधर हमारा यौन जीवन मज़े से चल रहा था, दोनों ही मुझ से बहुत ही खुश थी। कम्मो तो कई बार कह चुकी थी कि छोटे मालिक अपना खज़ाना बचा के रखिये, शादी के टाइम काम आएगा।

लेकिन खज़ाना घटने के बजाए बढ़ता ही जा रहा था।

यह अजीब बात कम्मो और पारो को भी नहीं समझ आ रही थी।
 
चाचा का परिवार

अब इतनी बड़ी कोठी में सिर्फ मैं, पारो और कम्मो ही रह गए थे। रोज़ रात को चुदाई का क्रम जारी रहा।

कुछ दिनों के बाद मम्मी का फ़ोन आया- कैसे हो बेटा? सब ठीक चल रहा है न? और तुम्हारी तबीयत कैसी है? और कम्मो और पारो तुम्हारा पूरा ध्यान रख रहीं हैं न?

मैं बोला- मम्मी, मैं बिलकुल ठीक हूँ और रोज़ कालेज जा रहा हूँ और दोनों औरतें मेरा बहुत अच्छा ख्याल रख रहीं हैं।

मम्मी बोली- चलो अच्छा है, अपने खाने पीने का पूरा ध्यान रखना, और देखो ज्यादा देर बाहर मत घूमना। अच्छा ऐसा है वो जो दूर के तुम्हारे चाचा जी हैं, उनका फ़ोन आया था कि वो परिवार के साथ लखनऊ जा रहे हैं और कुछ दिनों के लिए वो हमारी कोठी में रुकना चाहते हैं। मैंने कह दिया है कि वो बिना झिझक के हमारी कोठी में रुक सकते हैं।

मैं बोला- ठीक है मम्मी, उनको आने दो मैं उनका पूरा ख्याल रखूँगा। कितने लोग होंगे उनके परिवार में?

मम्मी बोली- चाचा-चाची और उनकी लड़की होगी शायद। उनका अच्छी तरह से ध्यान रखना और खातिर में किसी तरह की कमी नहीं रहने देना। वो शायद कल पहुँच रहे हैं अपनी कार से, ठीक है न?

मैं बोला- ठीक है मम्मी, आप बेफिक्र रहें, पारो काफी होशियार है, पूरा ध्यान रखेंगे हम!

मम्मी बोली- अच्छा बेटा, मैं रखती हूँ, जब वो पहुँच जाएँ तो फ़ोन कर देना, ओ के?

मैं बोला- ओके मम्मी, बाय।

मैंने पारो और कम्मो को बुलाया और चाचा के परिवार के आने की खबर उन दोनों को दी और कहा कि बैठ कर पूरी योजना बना लो कि कैसे उनकी खातिर करनी है।

कम्मो बोली- रात को सारी योजना बना लेंगे, और किसी चीज़ की कमी नहीं होने देंगे।

खाने का सारा सामान कम्मो ने लाने की ड्यूटी ले ली और पारो ने खाना बनाने का काम सम्हाल लिया। चाचा चाची को मम्मी पापा वाला कमरा और उनकी लड़की के लिए मेरे साथ वाला कमरा देने की बात तय कर ली।

दोनों उन कमरों को ठीक करने में लग गई।

अगले दिन मैं कालेज से जल्दी आ गया और चाचा चाची का इंतज़ार करने लगा।

दोपहर के 12 बजे के लगभग वो अपनी कार से पहुँचे।

मैंने उनका स्वागत किया और जल्दी ही उनको नहा धोकर फ्रेश हो जाने के लिए कहा।

सब फ्रेश होकर खाने के टेबल पर बैठ गए। अब मैंने इस परिवार को ध्यान से देखा।

चाचा थोड़ी ज्यादा उम्र के लगे लेकिन चाची काफी जवान दिख रही थी। उनकी लड़की ऊषा कोई 20 साल की होगी और चाची की उम्र की ही लग रही थी।

बाद में मुझको पता चला कि चाचा की यह दूसरी शादी थी और ऊषा उनकी पहली बीवी से हुई लड़की थी। दोनों माँ बेटी दिखने में काफी सुंदर लग रही थी।

खाने के टेबल ही पर पता चला कि चाचा जी अपने किसी काम के कारण आये हैं और बच्चे सिर्फ सैर और लखनऊ देखने आये हैं। चाचा जी रात को बनारस के लिए निकल गए और दो दिन बाद आने का कह बिस्तर पर चले गये।

रात को पारो और कम्मो अपनी कोठरियों में सोई।

आधी रात को मुझ को ऐसा लगा कि कोई मेरे बिस्तर पर मेरे साथ लेटा है। पहले सोचा शायद पारो या कम्मो आ गई है लेकिन जब आँखें खोली तो देखा कि चाची जी मेरे साथ लेटी हैं।

उन्होंने सिल्क की लाल रंग का नाइट सूट पहना हुआ था और वो मेरे खड़े लंड से खेल रही थी।

मेरा पायजामा नीचे खिसका था और मेरे लंड और अंडकोष पयज़ामे से बाहर निकले हुए थे। चाची की पोशाक भी ऊपर की तरफ खिसकी हुई थी और उसकी चूत मुझको दिख रही थी।

चाची की चूत एकदम सफाचट थी यानि एक भी बाल नहीं था उस पर।

चाची ने मुंह नीचे करके मेरे लंड को अपने मुंह में लेकर चूसना शुरू कर दिया।

लंड तो खड़ा था पूरी तरह और चाची जल्दी से उस के ऊपर बैठ और लंड एकदम चूत में घुस गया। उसकी गीली और टाइट चूत में लंड बड़े आनन्द से घुसा हुआ था और मैंने हल्के से नीचे से ऊपर एक धक्का मारा और तब चाची की कमर जल्दी जल्दी ऊपर नीचे होने लगी।

अब मेरे से नहीं रहा गया और मैंने चाची की कमर पकड़ कर नीचे से ज़ोर ज़ोर से धक्के मारने शुरू कर दिए और चाची भी आँखें बंद किये हुए इन धक्कों का आनन्द लेने लगी।

मुझको लगा कि चाची की चूत बंद खुलना शुरू हो गई और थोड़ी देर में चाची का झड़ गया और वो मुझसे इस ज़ोर से लिपट गई जैसे वो मुझको कभी नहीं छोड़ेगी।

अब मैं अपने को काबू नहीं कर सका और आँखें खोल कर बिस्तर में बैठ गया और चाची को देख कर हैरानी का भाव चेहरे पर ले आया और हैरान हो कर बोला- चाची आप यहाँ क्या कर रहीं हैं? आप कब आई?

चाची मुस्करा कर बोली- सोमू, तुम मुझको एक बार तो चोद चुके हो। और अभी मेरी भूख खत्म नहीं हुई चुदवाने की, तो लगे रहो।

‘अरे चाची, मैं तो छोटा हूँ आपसे। मैं क्या कर सकता हूँ, तुम्हारी भूख कैसे शांत कर सकता हूँ?’

‘बस वैसे ही करते रहो, जैसा मैं कह रही हूँ। वरना तुम जानते हो मैं शोर मचा कर सब को बुला लूंगी।’

अब मैं थोड़ा घबराया लेकिन मैं जानता था कि घर के अंदर सिर्फ चाची की बेटी ऊषा ही है और बाकी सब तो बाहर हैं।

फिर मैंने सोचा कि चलो चाची चूत दे ही रही है तो मज़ा लेते हैं।

चाची को मैंने गौर से देखा, उम्र शायद 30 के आस पास होगी लेकिन शरीर बहुत ही गठा हुआ था। मम्मे गोल और सॉलिड थे लेकिन साइज में वो पारो और कम्मो से छोटे थे, चूतड़ भी काफ़ी मोटे और गोल थे।

मैं चुपचाप लेटा रहा और चाची मेरे लंड के साथ खेलना और अपनी चूत को अपने ही हाथ से रगड़ना जारी रखे हुए थी। उसने कई इशारे फेंके कि मैं उसके ऊपर चढ़ जाऊँ लेकिन मैं लेटा रहा।

तब चाची ने मुझको होटों पर चूमना शुरू किया, आखिर न चाहते हुए भी मैं धीरे धीरे चाची का साथ देने लगा।

चाची की चूत को हाथ लगाया तो वो गर्मी के मारे उबल रही थी और उसका रस टप टप कर के बह रहा था।

अब मैं अपने को और नहीं रोक सका और खड़े लंड के साथ चाची की जाँघों के बीच बैठ कर ज़ोर ज़ोर से चोदने लगा।

चाची के मुख से सिसकारियाँ निकल रही थी और वो नीचे से ज़ोर से चूतड़ उठा उठा कर लंड और चूत का मिलन करवा रही थी।

फिर मेरे लौड़े ने इंजिन की तरह तेज़ी से अंदर बाहर होना शुरू कर दिया। पांच मिन्ट में ही चाची झड़ गई और मैं भी ज़ोरदार पिचकारी मारते हुए झड़ गया।

मैं चाची के ऊपर निढाल पड़ा था।

इतने में किसी ने आवाज़ लगाई- मम्मी यह क्या हो रहा है सोमू के साथ?

हम दोनों ने मुड़ कर देखा तो दरवाज़े पर ऊषा खड़ी थी और फटी आँखों से अंदर का नज़ारा देख रही थी।

हम दोनों नंगे ही उठ बैठे, मेरा लौड़ा छूटने के बाद भी खड़ा था और ऊषा की नज़र खड़े लंड पर टिकी थी।

जल्दी से वो अंदर आ गई और आते ही मेरा लंड अपने हाथ में पकड़ लिया। उसने भी पिंक रेशमी चोगा पहना था जिसको उसने एक ही एक्शन में उतार के फ़ेंक दिया और कूद कर पलंग पर मेरी साइड वाली खाली जगह में आकर लेट गई।

अब मैं दोनों माँ बेटी के बीच में था, बेटी ने मेरा लंड पकड़ रखा था और माँ मेरे अंडकोष के साथ खेल रही थी।

तब चाची बोली- ऊषा, थोड़ी देर पहले मैं सर दर्द की दवाई लेने सोमू के कमरे में आई थी। देखा कि सोमू गहरी नींद में सोया है लेकिन इसका लंड एकदम खड़ा था और पायज़ामे के बाहर निकला हुआ था। बस मैंने झट से सोमू के खड़े लौड़े को अपनी चूत में डाल लिया और अब तक 3 बार छूटा चुकी हूँ मैं और अभी भी यह तेरे लिए खड़ा है साला, चढ़ जा तू भी!

!

अब मेरे से नहीं रहा गया और मैं बोला- चाची कुछ तो ख्याल करो, मैं थक गया हूँ बहुत, थोड़ी देर बाद करना जो भी करना है।

ऊषा बोली- मम्मी आप अभी सोमू को रेस्ट करने दो, तब तक हम अपना खेल करते हैं। क्यों?

चाची बोली- ठीक है। तू आ जा मेरी साइड में!

ऊषा मेरी साइड को छोड़ कर चाची के साथ लेट गई, चाची ने तब ऊषा को होटों पर चूमा और अपने एक हाथ से छोटे छोटे मम्मों के संग खेलने लगी और दूसरे हाथ से उसकी सफाचट चूत को रगड़ने लगी।

दोनों की सफाचट चूत मैंने पहली बार देखी थी। माँ बेटी की चूत पर एक भी बाल नहीं था, जबकि गाँव वाली सब औरतें काली घनी बालों की घटा अपनी चूत के ऊपर रखती थी।

चाची धीरे धीरे ऊषा के मम्मों को चूसते हुए नीचे की तरफ आ गई और उसका मुंह ऊषा की चूत पर था।

ऊषा ने अपने चूतड़ चाची के मुंह के ऊपर टिका दिए थे और चाची अपनी जीभ उसकी भगनासा को चूसती हुई उसकी चूत के अंदर गोल गोल घुमा रही थी।

ऊषा का शरीर एकदम अकड़ा और उसने चाची का मुंह अपनी जाँघों में जकड़ लिया और वो ज़ोर ज़ोर से काम्पने लगी।

तभी ऊषा ने अपना जिस्म ढीला छोड़ दिया।

कुछ देर आराम करने के बाद ऊषा उठी और मेरे लंड को खड़ा देख कर उसके ऊपर बैठने की कोशिश करने लगी।

मैंने भी उसको घोड़ी बनाया और अपना खड़ा लंड उसकी चूत में पीछे से डाल दिया। उसकी चूत बहुत ही टाइट लगी मुझको और लंड बड़ी मुश्किल से अंदर जा रहा था।

लंड के घुसते ही चूत में बहुत गीलापन आना शुरू हो गया और फिर मैंने कभी तेज़ और कभी आहिस्ता धक्के मार कर ऊषा का पानी जल्दी ही छूटा दिया और वो कई क्षण मुझ से लिपटी रही।

फिर हम तीनों बड़ी गहरी नींद में सो गए।
 


चाची, उषा की चूत गान्ड चुदाई


चाची रात में 3-4 बार चुद चुकी थी इसलिए मैंने सोचा सुबह उषा को ही चोद दूंगा लेकिन जब आँख खुली तो देखा कि चाची का हाथ मेरे लंड के साथ खेल रहा था।

लंड, जैसा कि आम बात थी, पूरा तना हुआ था और चाची का हाथ मुठ की तरह नीचे ऊपर हो रहा था।

चाची बिल्कुल नंगी लेटी थी और उसकी सफाचट चूत सुबह के हल्के प्रकाश में भी चमक रही थी।

चाची की चूत असल में मुझको बिल्कुल अच्छी नहीं लग रही थी क्यूंकि बालों के बिना चूत असल में चूत नहीं लग रही थी बल्कि एक लकीर के समान लग रही थी।

चूत की शान तो उस पर छाये घने बाल ही होते हैं। बालों भरी चूत यह आभास देती है कि शायद बालों के पीछे कोई अनमोल खज़ाना है।

वैसे देखा जाए तो बालों बिना चूत की कोई शान या कोई आन नहीं होती।

चाची बार बार मेरे लंड को खींच कर इशारा दे रही थी कि मैं उस पर चढ़ जाऊँ लेकिन सुबह सुबह चाची का मुंह नहीं देखना चाहता था तो मैंने चाची को घोड़ी बनने का इशारा किया और जब वो घोड़ी बनी तो मैंने पीछे से उसकी चूत पर हमला कर दिया।

एक ही धक्के में लंड पूरा अंदर हो गया और चाची भी चूतड़ आगे पीछे करने लगी।

मैंने आँखें बंद किये ही उसको चोदना शुरू कर दिया।

थोड़े ही धक्के मारे थे कि मुझको लगा कि कोई मेरे अंडकोष के साथ खेल रहा है, आँखें खोली तो देखा कि उषा जो मेरी बायें और लेटी थी अपने हाथ से मेरे अंडकोष के साथ खेल रही थी।

मैं लगातार ज़ोर ज़ोर से चाची की चूत चोद रहा था और चाची का हाय हाय करना जारी रहा।

थोड़ी देर में देखा कि उषा भी साइड में घोड़ी बन कर बैठी है। जब चाची झड़ गई तो वो पेट के बल लेट गई और उसकी गोल गांड हवा में लहरा रही थी।

उषा की गांड सीधे मेरे लंड के सामने आ गई और मैंने चाची की चूत से निकाला लंड उसकी बेटी की चूत में डाल दिया।

मेरे लंड से टपकता रस उसकी माँ की चूत का ही था तो झट से पूरा चूत में घुस गया।

पहले धीरे धीरे उषा को चोदना शुरू किया और मेरे लंड को महसूस हुआ एक बहुत ही तंग और टाइट गली में लंड आ जा रहा है। उस की चूत की पकड़ गज़ब की थी जिससे साफ़ ज़ाहिर हो रहा था कि यह चूत ज्यादा नहीं चुदी है।

मैंने अपने हाथ उषा के बूब्स की तरफ रखने की कोशिश की लेकिन वो काफी नीचे लेटी थी और वहाँ हाथ नहीं पहुँच रहा था। फिर मैं उसके छोटे लेकिन गोल और सॉलिड चूतड़ को ही हल्के हल्के थाप देने लगा। यह शायद उषा को अच्छा लगा और वो चूतड़ों को ज़ोर ज़ोर से आगे पीछे करने लगी।

मैंने भी चुदाई की स्पीड बढ़ा दी और उसके चूतड़ों को उठा कर अपनी छाती से लगा तेज़ तेज़ जो धक्के मारे तो थोड़े ही समय में वो ‘ओह्ह्ह ओह्ह्ह मरी रे…’ बोलने लगी और उसकी चूत अंदर से बंद और खुल रही थी।

मैंने भी तेज़ी से चूत की गहराई तक धक्के मारे और उसकी चूत को जल्दी ही झड़ने के लिए मजबूर कर दिया।

वो भी बिस्तर पर पसर गई।

तब मैं उसके ऊपर से उठा और कपड़े पहनने लगा।

फिर मैंने चाची को उठाया- अभी दोनों नौकरानियाँ आ जाएंगी, आप लोग अपने कमरे में जाओ जल्दी से।

चाची एकदम हड़बड़ाहट में नंगी ही अपने कपड़े उठा कर अपने कमरे की तरफ भागी और उसी तरह उषा भी कपड़े उठा कर भाग गई।

उनके जाने के बाद मैंने कोठी का मुख्य द्वार खोल दिया।

मैंने सोचा कि चलो पारो और कम्मो को उठा देते हैं।

मैं पारो की कोठरी की तरफ गया तो देखा की दरवाज़ा ज़रा सा खुला है और अंदर से उफ्फ्फ उफ्फ की आवाज़ आ रही थी।

दरवाज़ा थोड़ा खोल कर देखा तो पारो और कम्मो लेस्बियन सेक्स में लगी थीं, कम्मो की गांड उठी हुई थी और वो पारो की चूत को चाट रही थी।

थोड़ी देर मैं यह नज़ारा देखता रहा और फिर अपने खड़े लंड को कम्मो की खुली चूत में पीछे से डाल दिया।

लंड के अंदर जाते ही कम्मो चौंक गई और ‘कौन है… कौन है…’ कहते हुए पीछे मुड़ने की कोशश करने लगी। लेकिन धीरे से उसके कान के पास मुंह ले जाकर मैंने कहा- मैं हूँ सोमू, चुपचाप लेटी रहो।

और उसके मोटे चूतड़ अब अपने आप हिलने लगे और उसका मुंह भी तेज़ी से पारो की चूत को चाट रहा था।

जल्दी से पारो का छूट गया और फिर मैं तेज़ी से धक्के मार कर कम्मो का भी छूटा दिया।

तीनो हम पारो की छोटी सी चारपाई पर लेटे थे।

फिर मैंने कम्मो से कहा- पारो को साथ ले जाओ और जल्दी से चाय बना कर ले आओ हम सबकी।

और कपड़े ठीक करते हुए बाहर आ गया और जल्दी से कोठी में घुस गया।

थोड़ी देर में कम्मो चाय लेकर आ गई।

चाय रखने के बाद उसने जो मुड़ कर देखा तो मुंह में ऊँगली दबा ली- यह क्या है छोटे मालिक?

उसके हाथ में चाची की अंगिया थी जो चाची यहीं भूल गई थी और वो मेरे बिस्तर पर रखी थी।

कम्मो मुस्कराई- क्यों छोटे मालिक, रात को चाची को चोद दिया क्या?

मैं भी मुस्कुरा कर बोला- हाँ री, दोनों माँ बेटी को रात को खूब चोदा, साली याद करेंगी। अच्छा चलो अब तुम उनको भी चाय दे आओ।

चाय पीकर मैं कॉलेज जाने की तयारी में जुट गया।

नाश्ते के टेबल पर दोनों माँ बेटी नहीं आई तो मैंने सोचा कि शायद सोई हैं, और मैं कालेज चला गया।

जाने से पहले पारो को बता गया कि दोपहर के खाने में क्या बनेगा।

कालेज से वापस आने पर पता चला कि दोनों लखनऊ घूमने गई हैं।

मैं खाना खाकर सो गया। जब नींद खुली तो शाम हो चुकी थी।

ड्राइंग रूम में गया तो माँ बेटी वहां बैठी थीं, वो दोनों बताने लगी कि वो कहाँ कहाँ घूम आई हैं। कुछ शॉपिंग भी की थी दोनों ने।

रात में मैंने उनके लिए मुर्गा बनवा दिया था तो वो खाकर बड़ी खुश हुई कि ऐसा मुर्गा उनके छोटे शहर में नहीं मिलता और बहुत ही स्वादिष्ट बनाया है तुम्हारी कुक ने।

खाने के बाद कुछ देर हम तीनों ने ताश के पत्ते खेले और फिर करीब दस बजे हम सोने चले गए।

मुझको उम्मीद थी कि आज वो दोनों मुझ को परेशान नहीं करेंगी लेकिन ऐसा नहीं हुआ।

जब दोनों नौकरानियाँ सोने के लिए अपनी कोठरी चली गई तो मैंने मुख्य द्वार बंद कर लिया और आकर अपने बिस्तर पर लेट गया।

थोड़ी देर बाद मेरे बंद कमरे का दरवाज़ा खटका और खोलने पर सामने चाची और उषा खड़ी थीं, दोनों ही अपने सोने वाली पोशाक में थी।

‘आओ चाची जी, कोई काम था क्या?’

‘नहीं वो सर दर्द हो रहा था मुझको और उषा को, सोचा कि तुमसे कोई बाम ले आती हैं।

‘हाँ हाँ, क्यों नहीं।’

मैं बाम का मतलब समझता था।

तब चाची बोली- सोमू, तुमने हमारी हर तरह से बहुत अच्छी खातिरदारी की है। हम दोनों तुम्हारी रात की खातिरदारी नहीं भुला सकती। सो आज हम दोनों तुम्हारी खातिरदारी करेंगी। बोलो मंज़ूर है?

मैं बोला- चाची, रहने दो, आपने जो भी मुझको दिया, वो बहुत दिया, मेरा आप पर कोई अहसान नहीं है, हिसाब बराबर हो गया है।

चाची बोली- नहीं सोमू, आज रात हम दोनों तुझको एक तोहफा देना चाहती हैं।

तब चाची और उषा ने मिल कर मेरे कपड़े उतार दिए और यह देख कर अचम्भे में आ गई कि मेरा लंड पूरी तरह से तना हुआ खड़ा था।

दोनों ने लंड को हाथ नहीं लगाया और अपना काम शुरू कर दिया।

ड्राइंग रूम में पड़े रेडियो को वो पहले उठा लाई थी, उसको चालू कर दिया, हल्के हल्के डांस के गाने उस पर बज रहे थे।

डांस के म्यूजिक पर दोनों अपनी कमर हिला हिला कर डांस करने लगी।

नाचते हुए पहले चाची ने उषा के कपड़े एक एक कर के उतारने शुरू कर दिए। धीरे से डांस करते हुए चाची ने पहले उषा का ब्लाउज उतार दिया और फिर उसकी अंगिया उतार दी और घुमा कर मेरे मुंह पर फ़ेंक दी।

सूंघने पर बहुत ही प्यारी खुशबू आ रही थी उषा की अंगिया से, मैंने उसको अपने गले में लपेट लिया।

यह देख कर उषा खिलखाला कर हंस दी थी।

चाची लगातार उचक उचक कर डांस कर रही थी।

फिर उसने उषा की पिंक सिल्क साड़ी उसको गोल गोल घुमा कर उतार दी। साड़ी हवा में लहराते हुए उसने मुझ पर लपेट दी।

जब तक मैं साड़ी से आज़ाद होता, तब तक उषा का पेटीकोट भी उतार दिया और ज़ोर से मेरे ऊपर फैंक दिया लेकिन इस बार मैं चौकन्ना था तो हाथ से उसको परे फैंक दिया।

यह सारा नज़ारा बहुत ही सेक्सी था और मेरा लंड बार बार हवा में लहलहा रहा था।

अब उषा आई और मेरे लंड के साथ अपनी चूत जोड़ कर गोल गोल घूमने लगी।

‘उफ्फ्फ ओह्ह्ह…’ की आवाज़ मेरे मुंह से और उषा के मुंह से इकट्ठी निकल रही थी, मेरा लंड उषा की चूत के ऊपर रगड़ा मार रहा था। कभी वो आधा इंच चूत के अंदर जाता और फिर उषा के डांस की वजह से वहां से खिसक जाता।

उधर चाची भी अपने कपड़े डांस की ताल के साथ उतारने में लगी थी। पहले उसका ब्लाउज हम दोनों पर गिरा, जिसको मैंने उषा की चूत और अपने लंड के बीच में रख दिया और फिर उसकी सिल्क ब्रा भी आकर मेरे मुंह पर गिरी।

उसमें से आ रही खुशबू मुझ को पागल बना रही थी, मैंने एकदम जोश में आकर उषा को कस कर पकड़ा और खड़े खड़े ही लंड को उषा की चूत में डाल दिया।

जब वो आधा अंदर चला गया तो मैंने उसको गोद में उठा लिया और पूरा का पूरा लंड उसकी गीली चूत में घुसेड़ दिया।

अब चाची भी पूरी नंगी हो चुकी थी तो वो भी हम दोनों के साथ चूत का रगड़ा मार रही थी।

मैंने उषा को पलंग की साइड में लिटा दिया और उसकी टांगें चौड़ी करके अपने पूरे जोबन पर आये लंड को फिर से उसकी चूत में डाल दिया और उसकी कमर के नीचे अपने हाथ रख कर उठा लिया और ज़ोर से धक्के मारने लगा।

उषा कोई 10 धक्कों में ही छूट गई और पलंग पर पसर गई।

चाची मुझको पीछे से अपनी चूत से मेरे चूतड़ रगड़ रही थी और अपने मम्मे उसने मेरी पीठ पर चिपका रखे थे और अपने दायें हाथ से मेरे अंडकोष को मसल रही थी।

जैसे ही मैं उषा से फ़ारिग़ हुआ, चाची ने एक ज़ोर के झटके से मुझको पलटा लिया और मेरे होटों पर अपने जलते हुए होंट रख कर चूसने लगी।

अब मैंने चाची को चूमने के बाद उसको मम्मों को कुछ देर चूसा, फिर उसकी गांड में ऊँगली डाल कर गोल गोल घुमाने लगा।

गांड काफी टाइट थी।

न जाने क्यों चाची बोली- सोमू, कभी गांड मारी है किसी लड़की की?

मैंने कहा- नहीं चाची, मुझको यह अच्छा नहीं लगता।

चाची बोली- अरे बड़ा मज़ा आता है! कोई क्रीम है यहाँ तेरे कमरे में?

मैंने कहा- हाँ कोल्ड क्रीम है।

‘दिखा तो सही।’

मैं अपने ड्रेसिंग टेबल से क्रीम की शीशी उठा लाया और चाची को दे दी।

चाची ने ढेर सारी क्रीम अपनी गांड में लगाई और बोली- चल सोमू, डाल लंड मेरी गांड में।

पहले तो मैं बहुत हिचकिचाया लेकिन फिर सोचा कि क्यों न आजमाया जाए यह नया तरीका।

और मैंने डरते हुए लंड को चाची की गांड में डालना शुरु कर दिया।

पहले थोड़ा सा डाला और फिर धीरे धीरे से सारा अंदर डाल दिया।

चाची ‘उई उई’ करने लगी लेकिन गांड को पीछे धकेल कर मेरा पूरा लंड अंदर तक ले जाने लगी।

मुझको ऐसा महसूस हो रहा था कि मेरा लंड एक छोटी सी मोरी में आगे पीछे हो रहा है और बहुत ही अधिक टाइट पाइप में घुसा हुआ है।

अब मैंने धक्के तेज़ कर दिए और चाची भी धक्कों का बराबर जवाब दे रही थी। चाची की एक ऊँगली अपने क्लिट पर रगड़ा मार रही थी ताकि वो पूरी तरह आनन्द ले सके।

आखरी का धक्का मैंने बहुत ज़ोर से मारा और अंदर ही पिचकारी छोड़ दी और तभी चाची का भी छूट गया।

फिर हम दोनों निढाल हो कर पलंग पर लेट गए। उषा थकी हुए होने के कारण एकदम गहरी नींद में सोई हुई थी। वो पूरी तरह से नंगी थी और उसको नंगी देख कर मेरा लौड़ा फिर तन गया। लेकिन मैंने अपने को कंट्रोल किया और उषा की बगल में लेट गया और चाची मेरी बगल में लेट गई, चाची का हाथ मेरे खड़े लंड से खेल रहा था जब मुझको गहरी नींद आ गई।

सुबह उठा तो देखा कि उषा मेरे ऊपर चढ़ी हुई थी और मेरे लंड को अपनी चूत में डाल कर ऊपर नीचे हो रही थी।

मैं भी आँखें बंद करके लेटा रहा।

10 मिन्ट तक उषा मेरे लंड को चूत में डाले रही और फिर वो ज़ोर से ‘उई माँ…’ कह कर मेरे ऊपर पसर गई।

मैं उठा और दोनों को जगाया कि नौकर आने वाले हैं, आप अपने कमरे में जाएँ।

दोनों अपने कपड़े समेट कर नंगी ही भाग गई अपने कमरे में।

चाय पीने के बाद ड्राइंग रूम में आया तो दोनों माँ बेटी तैयार होकर बैठी थी।

मैंने हैरान होकर पूछा- क्या बात है, आप तैयार हो कर बैठी हैं? कहीं जाना है क्या?

‘हाँ सोमू, आज हम वापिस जा रहे हैं। तुम्हारे अंकल अभी वापस आ रहे हैं और हम ब्रेकफास्ट कर के वापस चले जाएंगे।’

‘अभी कुछ दिन और ठहर जाइए न, अभी तो मज़ा आना शुरू हुआ था।’

‘नहीं सोमू, हम फिर आएंगे और हाँ तुम आओ न हमारे शहर!’

‘ज़रूर आऊंगा जब कालेज से छुट्टी होगी, तभी आ पाऊंगा।’

और नाश्ता कर के वो चले गए।
 


पारो का सेक्स जीवन


चाची और उषा के जाने के बाद हम तीनों फिर एक साथ हो गये यानि कम्मो और पारो फिर मेरे कमरे की हर रात को शोभा बढ़ाने लगी।

सबसे पहले दोनों ने चाची और उषा की कहानी सुननी चाही।

जैसे कैसी थी दोनों? उनके मम्मे कैसे थे और चूत कैसी थी?

मैंने भी खूब मज़े ले ले कर उनको बताई सारी बातें।

चाची की और उषा की सफाचट चूत से वे बड़ी हैरान थी, कहने लगी- यह कैसे हो सकता है?

मैंने उनको बताया- चाची बता रही थी कि वो दोनों दाड़ी बनाने वाला रेजर और चाचा के शेविंग करने वाले साबुन से एक दूसरी की चूत की सफाई करती हैं। बिल्कुल साफ़ कर देती हैं चूत और बगलों के बाल, उन दोनों की चूत बहुत ही मुलायम और चमकदार लग रही थी।

दोनों बहुत ही हैरान हो रहीं थी, कम्मो बोली- ऐसा करने से उन का पति नाराज़ नहीं होता क्योंकि ऐसा तो सिर्फ रंडियाँ ही करती हैं। घरेलू औरत ऐसा करे ना तो उस का पति उसको घर से निकाल दे!

मैं बोला- अच्छा, पर ऐसा क्यों है? बाल सफा करने से क्या बिगड़ जाता है औरत का?

कम्मो बोली- रंडियाँ इसलिए साफ़ करती हैं बालों को ताकि कोई ग्राहक उनको बीमारी न दे जाए! और फिर ग्राहक के जाने के बाद वो अच्छी तरह चूत को साफ़ कर लेती हैं ताकि जितना भी वीर्य ग्राहक का अंदर छूटा होता है वो सब बहार निकल जाता है और उनके गर्भवती होने की संभावना काफी कम हो जाती है।

मैं बोला- फिर तो तुम को भी ऐसा ही करना चाहिए न?

कम्मो बोली- छोटे मालिक हमारे चोदनहार तो सिर्फ आप ही हैं और आप किसी बाहर वाली औरत के पास तो जाते नहीं तो हमें काहे का फ़िक्र?

‘लेकिन बच्चा ठहरने की सम्भावना तो होती है न?’

‘अरे बच्चे की बात से याद आया कि आप का कब हो रहा है?’

‘मेरा कब क्या हो रहा है?’

‘वही, जिसकी बात हम कर रही हैं?’

‘बच्चा? मेरे कैसे हो सकता है?’

‘वाह, आप भूल गए क्या? इतने खेतों में बीज डाला है आपने?’

‘अरे कौन से खेत? कब बीज डाला मैंने?’

‘हा हा… भूल गए क्या ? पहला खेत तो मेरा था जिसमें आपने हल चलाया और फिर चम्पा, फिर बिन्दू, फुलवा और फिर निर्मला और ना जाने और किनका खेत आपने जोता?

मैं बड़े ज़ोर से हंस दिया और बोला- अरे तुम चूत वाले खेतों की बात कर रही हो!

वो भी मुस्कराते हुए बोली- हाँ वही तो!

मैंने पारो की तरफ देखा और पूछा- पारो, तुम बताओ कि क्या तुम्हारी चूत खेत की तरह है और मेरा लंड हल की तरह?

वो भी हँसते हुए बोली- हाँ छोटे मालिक, अगर देखा जाए तो चूत एक धरती का टुकड़ा है जिस पर पुरुष अपने लंड का हल चलाता है और एक निश्चत समय के बाद उसमें फसल उग आती है जो धरती के पेट से निकलने के बाद एक प्यारे बच्चे का रूप ले लेती है।

कोठी का मुख्यद्वार बंद करके हम तीनों मेरे कमरे में बातें कर रहे थे, आज कोई मेहमान नहीं था तो हम आजाद थे।

मैंने कहा- ऐसा करो, कम्मो और पारो हम तीनो नंगे हो जाते हैं, फिर बात करेंगे। ठीक है न?

हम तीनों जल्दी ही निर्वस्त्र हो गए और पलंग पर लेट गए। मैं बीच में और मेरी दाईं तरफ कम्मो और बाएं तरफ पारो।

कम्मो ने मेरे लौड़े पर हाथ रखा और वो टन से खड़ा हो गया। सबसे पहले कम्मो ने मेरे लंड को पकड़ा और मैं अपना दायाँ हाथ उस की बालों भरी चूत में फेरने लगा और दूसरा पारो की चूत में डाल कर उसकी गीली चूत में भगनासा को हल्के हल्के दबाने लगा।

फिर मैंने कहा- अच्छा पारो, आज तुम सुनाओ अपनी कहानी। कैसे शादी की पहली रात में तुम चुदी थी?

वो पहले थोड़ी शरमाई और फिर बोली- छोटे मालिक, आप यकीन नहीं मानोगे, शादी से पहले मैंने लंड देखा ही नहीं था. कुत्ता कुत्ती को करते हुए देखा ज़रूर था लेकिन इसका मतलब तब मैं नहीं जानती थी।

कम्मो बोली- अच्छा? ऐसा कैसे हो सकता है? किसी छोटे लड़के को तो देखा होगा तुमने और उसके छोटे लंड को भी देखा होगा न?

पारो बोली- हाँ वो देखा था लेकि लड़के के लंड और किसी मर्द के लंड में बहुत अंतर होता है कम्मो। और जब मेरे पति ने सुहागरात को अपना खड़े लंड को निकाला तो मैं एकदम डर गई और फिर उसने मुझको लिटा दिया और मेरी साड़ी ऊपर करके टांगों के बीच बैठ कर लंड को चूत में डालने की कोशिश करने लगा। लेकिन मेरी चूत बहुत टाइट थी तो उसकी हर कोशिश नाकामयाब हो रही थी, लंड अंदर जा ही नहीं रहा था।

फिर वो थक कर लेट गया और सो गया। अगली रात फिर उसने कोशिश की लेकिन फिर उसको कोई सफलता नहीं मिली। इस तरह दो रात कोशिश करने के बाद वो जब कुछ नहीं कर सका तो वो काफी शर्मिंदा हो गया मेरे सामने। लेकिन मुझको तो कुछ मालूम ही नहीं था। फिर ना जाने किसने उसको कोई तरीका समझाया और अगली रात वो तेल की शीशी ले कर आया और ढेर सा तेल मेरी चूत पर मल कर उसने फिर कोशिश की और वो इस बार चूत में लंड डालने में सफल हो गया। हालांकि मुझको बेहद दर्द हुआ। और फिर मेरा पति रोज़ रात को मुझको चोद देता था लेकिन मुझको कोई आनन्द नहीं आता था।

मैं और कम्मो एक साथ बोल उठे- फिर क्या हुआ?

पारो थोड़ी देर चुप रही और फिर मुस्कराते हुए बोली- मेरे पति का एक छोटा भाई भी था जो मेरे चारों तरफ बड़े प्यार से घूमता रहता। वो बहुत ही शरारती था और हर वक्त कोशिश करता था कि मेरे शरीर के किसी अंग को छू ले। पहले तो मैंने ध्यान नहीं दिया लेकिन एक दिन उसने मेरे मम्मों पर हाथ रख दिया तो मैंने उसकी ध्यान से देखा और पाया कि वो 19-20 साल का जवान लड़का है, दिखने में भी ठीक ही लग रहा था तो मैंने उसको धीरे धीरे छूट देनी शुरू कर दी।

एक दिन मेरा पति बाहर गया हुआ था और सास भी किसी काम से घर पर नहीं थी, मैं और मेरा देवर किशन ही घर में था, मैं अपने बिस्तर पर आकर लेट गई, तभी मुझको लगा कि कोई मेरे कमरे में कोई आया है।

मैंने ध्यान से देखा, वो किशन ही आया था।

!

उसने आते ही मुझको बाँहों में भर लिया और ताबड़तोड़ चूमना शुरू कर दिया।

मैंने उसको रोका- कोई आ जाएगा, जाओ यहाँ से!

पर वो नहीं माना और मेरे को चूमते हुए उसने मेरे मम्मे भी दबाने शुरू कर दिए जिससे मुझको बड़ा आनन्द आना शुरू हो गया।

जब उसने देखा कि मैं उसको ज्यादा रोक टोक नहीं रही तो उसने मेरी धोती ऊपर उठा दी और अपना मोटा खड़ा लंड मेरी चूत में डालने लगा।

मैं चिल्ला उठी- यह क्या कर रहा है रे किशना?

उसने सब अनसुनी कर दी और अपने लंड से चूत में धक्के मारने लगा।

मैं बोली- बस कर किशना, नहीं तो मैं शोर मचा दूंगी।

यह सुन कर किशना ने मेरा मुंह अपने मुंह से बंद कर दिया और ज़ोर से धक्के जारी रखे।

अब मुझ को मज़ा आने लगा था, मेरा बोलना बंद हो गया और मैं चुदाई का जीवन में पहली बार आनन्द लेने लगी।

थोड़ी देर बाद मुझको ऐसा लगा कि मेरी चूत में कुछ खलबली हो रही है और फिर मेरी चूत अंदर ही अंदर खुलने और बंद होना शुरू हो गई और फिर मुझको लगा कि मेरी चूत से कुछ पानी की माफिक निकला और मेरे बिस्तर पर फैल गया है।

कुछ देर बाद किशना का एक गर्म फव्वारा छूटा और मेरी चूत में फैल गया और मैं आनन्द विभोर हो गई। इस पहली चुदाई के बाद हर मौके पर हम दोनों चोदना नहीं छोड़ते थे।

आज तक समझ नहीं आया कि हम चुदाई करते हुए कभी पकड़े नहीं गए। ईश्वर का लाख शुक्र है कि वह हमको बचाते रहे हर घड़ी में!

मैं बोला- तुमको कभी बच्चा नहीं ठहरा पारो?

पारो बोली- नहीं, कभी नहीं, न अपने मर्दवा से और न ही देवर से… मालूम नहीं ऐसा क्यों हुआ?

यह कहानी सुनते हुए मेरा लंड तो खड़ा ही था लेकिन उधर कम्मो की हालत भी ठीक नहीं थी।

मैंने फ़ौरन दोनों को घोड़ी बनाया और ज़ोर से चोदना शुरू कर दिया, पहले कम्मो को और फिर पारो को!

कुछ धक्के एक चूत में मार कर मैं अपना लंड दूसरी में डाल देता था। इस तरह दोनों को जल्दी ही चोद चोद कर पूर्ण चरमसीमा पर पहुंचा दिया।

दोनों ही थक कर लेट गई और मैं उन दोनों के बीच में था।

फिर रात भर हम तीनों चुदाई में मग्न रहे।
 
कम्मो की कहानी उसी की जुबानी

अभी तक आपने पारो की कहानी पढ़ी, अब आपको कम्मो की कहानी सुनाने की कोशिश करता हूँ।

कम्मो मेरे जीवन में मेरी यौन गुरु बन कर आई थी, उसी ने मुझको यौन ज्ञान के ढाई अक्षर सिखाये थे। उसका ढंग ख़ास था क्यूंकि वो सब काम स्वयं करके दिखाती थी ताकि मुझको शक की कोई गुंजायश न रहे, इलिए मैं यह मानता हूँ कि जो मैं आज कामक्रीड़ा में माहिर बना बैठा हूँ, वो सब कम्मो की वजह से ही है, न वो मेरे जीवन में आती, न मैं काम-कला का इतना ज्ञान अर्जित करता।

कम्मो जब मेरे जीवन में आई थी, उस समय मैं केवल गाँव का एक भोला भाला लड़का ही था, यह तो कम्मो ही है जिसने मुझ में छिपी हुई अपार यौन शक्ति को पहचाना और उस शक्ति को एक दिशा दी।

अगली रात कम्मो की कहानी सुनने के लिए हम दोनों बड़े बेताब थे।

रात को हमने ढेर सारा बकरे का मांस पारो से बनवाया और नान इत्यादि बाजार से मंगवा लिए। कुछ खाने का सामान पारो मेरे कहने पर राम लाल चौकीदार को दे आई ताकि वो और उसका परिवार भी ढंग से खाना खा सके।

खाना खाकर हम तीनों मेरे कमरे में इकट्ठे हुए, तीनों ने धीरे धीरे अपने कपड़े उतारने शुरू कर दिये। कपड़े उतारने का क्रम ऐसा रखा कि हर एक कपड़ा उतारने के बाद हम देखते थे कि कितने कपड़े बचे हैं शरीर पर!

एक एक कपड़ा उतारते हुए हम देखते जा रहे थे कि किसके कपड़े ज्यादा बचे हैं शरीर पर… हम तीनों के शरीर पर केवल 3-3 कपड़े थे जो हम रेडियो पर चल रहे एक फ़िल्मी गाने के मुताबिक़ उतार रहे थे।

सबसे पहले मैंने अपने तीन कपड़े उतार दिए और उसके बाद कम्मो ने उतारे और पारो सब से आखिर में उतार पाई। उन दोनों की चूतों पर उगी हुई काली झांटें ख़ास चमक रही थी और दोनों ने शरीर पर हल्का सा सेंट लगा रहा था जिसकी खुश्बू अलग अलग थी।

हम तीनों मेरे बड़े पलंग पर लेट गए।

फिर कम्मो ने कहा- आज हम एक नए तरीके से चोदते हैं। छोटे मालिक पारो की चूत को चूसेंगे, पारो मेरी चूत को चूसेगी और मैं छोटे मालिक के लंड को चूसूंगी, यह एक गोल चक्र बना लेते हैं इस काम के लिए!

हमने एक गोल चक्र बना लिया, मैंने अपना मुंह पारो की बालों भरी चूत में डाल दिया और पारो ने अपना मुंह कम्मो की चूत में और कम्मो मेरे लंड को चूसने लगी।

पारो की चूत एकदम फूली हुई थी और खूब पनिया रही थी क्यूंकि आज के नए खेल ने उसको काफी उत्तेजित कर दिया था।

मैं धीरे धीरे अपनी जीभ को उसकी सुगन्धित चूत के होटों पर फेरने लगा, मैं जानबूझ कर उसके क्लिट यानी भगनासा को नहीं छू रहा था। जीभ को गोल गोल घुमाता हुआ उसकी चूत के अंदर का रस पीने लगा। मेरी जीभ करीब 1 इंच तक उसकी चूत में चली जाती थी।

फिर मैंने हाथ की ऊँगली भी चूत में डाल दी और उसको अंदर बाहर करने लगा।

अब पारो ने अपने चूतड़ हिलाने शुरू कर दिए और मैं ऊँगली को उसकी भगनासा पर फेरने लगा.।

उधर कम्मो मेरे खड़े लंड को लोलीपोप की तरह चूसने लगी जिससे मुझको बहुत आनन्द आ रहा था, कम्मो के चूतड़ भी ऊपर उठ बैठ रहे थे पारो की जीभ के कारण।

मैंने पारो के भगनासा को अब चूसना शुरू कर दिया और अपनी बीच वाली ऊँगली उसकी चूत के काफी अंदर तक डाल दी।

अब पारो के मुंह से ओह्ह्ह्ह ओह्ह्ह जैसी आवाज़ें आने लगी और कुछ ही क्षण में उसकी जांघों ने मेरे मुंह को कैद कर लिया और वो ज़ोर ज़ोर से कांपने लगी।

थोड़ी देर में कम्मो भी इसी तरह झड़ गई, सिर्फ मेरा लंड अभी भी वैसे ही मस्त खड़ा था।

फिर ना जाने कम्मो ने जीभ से कोई खेल खेला और मेरा भी फव्वारा छूट गया।

हम तीनों वैसे ही लेटे रहे। फिर जब सांसें ठीक हुईं तो अपनी अपनी जगह पर लेट गए।

मैं बोला- कम्मो डार्लिंग, हमको बंटा बोतल तो पिलाओ बर्फ डाल के!

वो गई और जल्दी ही तीन ग्लासों में लेमन में बर्फ डाल कर ले आई। लेमन पी कर दिल खुश हो गया।

मैंने कम्मो को बोला- कम्मो डार्लिंग, तुम्हारा मम्मे का क्या साइज होगा?

वो बोली- मुझ को क्या मालूम छोटे मालिक!

‘अरे तो पता करो न? तुम्हारे पास वह नाप लेने वाला फीता है क्या?’

‘शायद है। लेकिन ढूंढना पड़ेगा?’

‘तो ढूंढिए न, और पारो को भी साथ ले लो, वो भी शायद जानती होगी।’

दोनों नंग धड़ंग फीता ढूंढने में लग गई।

मैं लेटे लेटे ही उन दोनों का सेक्सी नज़ारा देख रहा था, कम्मो के चूतड़ एकदम गोल और उभरे हुए थे जबकि पारो के थोड़े फैले हुए थे, उनमें गोलाई कम थी।

इसी तरह पारो के मम्मे ज्यादा बड़े और सॉलिड लग रहे थे जबकि कम्मो के मम्मे छोटे और गोल थे।

थोड़ी देर में कम्मो फीता ले आई, मैंने दोनों को सीधा खड़ा कर दिया और जैसे दर्ज़ी औरतों का नाप लेता है वैसे ही दोनों का नाप लेने लगा।

पहले पारो के मम्मों का नाप लिया, वो पूरे 38 इंच के निकले और उसकी कमर 30 इंच थी और हिप्स यानी चूतड़ 40 इंच थे।

अब कम्मो की बारी थी, उसके मम्मे 36 इंच कमर 28 इंच और चूतड़ 38 इंच के निकले।

मेरा अंदाजा सही निकला।

दोनों को मैंने बताया कि उनके नाप बड़े ही सेक्सी थे और अगर कोई जवान लड़का उनको नंगी देख ले तो वो फ़ौरन उनको चोद डालेगा जैसे मैं चोदता हूँ।

यह सुन कर दोनों खूब हंसी और बोली- छोटे मालिक, तुम कौन से बूढ़े हो गए हो? तुम भी अभी जवानी में कदम रख रहे हो और हम को देख कर रोज़ चोद देते हो।

इस बात पर हम तीनों खूब हँसे।

मैंने कम्मो को देख कर कहा- अच्छा कम्मो, अब तुम सुनाओ अपनी कहानी, देखें तुम्हारे साथ क्या हुआ तब?

कम्मो मुस्कराई और फिर बोली- छोटे मालिक, मैं बचपन से ही बड़ी नटखट और चुलबुली लड़की मानी जाती थी अपने गाँव में! खूब शरारत करना मेरा नियम था, मैं और मेरी एक सहेली चंचल सेक्स के मामले में काफी जानकारी रखते थे। मैं और मेरी सहेली चंचल बड़ी पक्की सहेलियाँ थी, हम कोशिश करते रहते थे कि गाँव में नए शादीशुदा जोड़ों को सुहागऱात वाली रात में किस प्रकार देखा जाए रात के अँधेरे में!

शुरू शुरू में तो हम को ज़्यादा सफलता नहीं मिलती थी लेकिन धीरे धीरे मुझको समझ आने लगा कि नए जोड़ों को रात को कैसे देखा जाए, खासतौर पर गर्मियों के दिनों में!

शादी होने से पहले हम दोनों उस घर की खूब अछी तरह जांच पड़ताल कर लेती थी, जैसे झोंपड़ी कैसे बनी और उसमें कौन कौन लोग रहते हैं, दूल्हा दुल्हन का कमरा कौन सा होगा यह भी जान लेते थे।

फिर जब दूल्हा डोली लेकर आ जाता था तो सब दुल्हन के स्वागत में लग जाते थे और हम मौका पा कर दूल्हा दुल्हन के कमरे में छोटे छोटे 2 छेद कर लेती थीं जिससे कमरे में होने वाले कार्य कलाप को देख सकें।

यह काम आसान होता था क्योंकि झोंपड़ी की दीवार तो मिटटी की बनी होती थी। इस तरह हम ने कई सुहागरातें देखी थी।

!

मैं बोला- अच्छा? यह तो बड़ा ही मुश्कल काम था जो तुम दोनों ने किया। तुम लोग सुहागरात में क्या क्या देखा करती थी?

कम्मो बोली- छोटे मालिक, बहुत कुछ देखा हमने! बहुत सारा नज़ारा तो खराब होता था लेकिन कुछ लड़के समझदार होते थे और अपनी दुल्हनिया को बड़े प्यार से चोदते थे।

‘अच्छा कुछ खोल कर बताओ न कि क्या देखा तुमने?’ मैं बोला।

सारे दूल्हे अक्सर देसी पौवा शराब का चढ़ा कर आते थे और कमरे में आते ही दुल्हन की साड़ी ऊपर उठाते थे और ज़ोर से अपना लंड उस कुंवारी कन्या की चूत में डाल देते थे और फिर ज़ोर ज़ोर से धक्के मारते हुए कुछ ही मिनटों में ढेर हो जाते थे और दुल्हन बेचारी अपनी फटी हुई चूत को कपड़े से साफ़ करती और उसमें से बह रहे खून को भी साफ़ कर देती थी।

दस में से आठ दूल्हे ऐसा ही करते थे और बाकी दो जो थोड़ी बहुत चुदाई का ज्ञान रखते थे बड़े प्यार से अपनी दुल्हन को चोदते थे और हर चुदाई के बाद उसको खूब प्यार भी करते थे।

मैं बोला- तुम सुनाओ न, तुम्हारे साथ क्या हुआ था?

वो हँसते हुए बोली- मेरा दूल्हा तो निकला भोंदू… यानि उसको कुछ भी चुदाई के बारे में नहीं पता था, बिस्तर में लेटते ही गहरी नींद में सो गया। मैंने ही हिम्मत करके उसके लंड के साथ खेलना शुरू कर दिया। उसका लंड जब खड़ा हो गया तो मैं नंगी होकर उसके लंड के ऊपर चढ़ गई और धीरे धीरे धक्के मारने लगी। वह तब भी नहीं उठा क्यूंकि मैं पहले ही अपनी चूत को गाजर मूली से फड़वा चुकी थी तो मैंने पहली रात को घर वाले को 2 बार चोदा जिसका उसको बिल्कुल ही पता नहीं था।

हम तीनो बड़े ज़ोर से हंसने लगे- साला कैसा बुद्धू था तेरा घरवाला? फिर क्या किया तुमने?

‘करना क्या था, धीरे धीरे उसको सब कुछ सिखा दिया और वो रात में 2-3 बार चोदने लगा। मैंने उसको हर तरह से चुदाई का तरीका सिखा दिया और उसके साथ खूब मज़े लेने लगी।’

‘फिर क्या हुआ?’

एक रात मैंने उसको थोड़ी सी देसी शराब पिला दी और अपनी सहेली चंचल को बुला लिया। उस रात मेरी सास किसी काम से पड़ोस वाले गाँव गई हुई थी, बस शराब के नशे में दोनों ने मेरे घरवाले को खूब चोदा और उसको पता भी नहीं चला, वो बेहद शरीफ और सीधा था।

यह कहते हुए उसकी आँखों में आंसू भर आये और वो फूट फूट कर रोने लगी।

फिर उसने बताया कि एक शाम उसकी साइकिल का ट्रक के साथ हादसा हो गया और वो वहीं समाप्त हो गया।

मेरी और पारो की भी आँखें भर आई।
 
कम्मो और उसकी सहेली चंचल

कम्मो की दर्द भरी कहानी सुन कर हम बहुत द्रवित हो गए लेकिन जो हो चुका था उसको तो बदला नहीं जा सकता ना, मेरे कहने पर पारो लेमन वाली बोतल उठा लाई और सबने ठंडी बोतल पी, पीने के बाद मन में कुछ शांति आई।

मैंने वैसे ही कम्मो से पूछा कि उसकी सहेली चंचल का क्या हाल है अब, वो कहाँ रहती है आजकल।

कम्मो हंसने लगी और बोली- वाह छोटे मालिक, चंचल का नाम सुन कर आपके लंड के मुंह में पानी भर आया?

मैं भी हंस दिया और बोला- नहीं ऐसा नहीं है लेकिन वैसे ही उसका हाल जानने के लिए मैंने पूछा था।

कम्मो बोली- छोटे मालिक, आप सुन कर खुश होंगे, वह आजकल यहीं रहती है अपने पति के साथ।

‘अच्छा है। तुमको मिलती होगी अक्सर?’

‘हाँ, मिलती है कभी कभी, जब उस का पति घर नहीं होता। क्यों आपकी कुछ मर्ज़ी है क्या?’

‘मर्ज़ी तो तुम्हारी है कम्मो, सहेली तो वो तेरी है न?’

‘अच्छा अगर आपकी बहुत मर्ज़ी है तो मैं उससे पूछ देखती हूँ, अगर वो तैयार हो गई तो बुला लूंगी उसको!’

‘तेरी इच्छा है अगर तेरा दिल मानता है तो बुलाना वरना नहीं। उसके तो अभी बच्चे भी होंगे न?’

‘नहीं छोटे मालिक, उसका कोई बच्चा नहीं हुआ अभी तक, उसका पति अक्सर काम के सिलसिले में बाहर रहता है और वो यहाँ अकेली ही रहती है पति की गैरहाज़री में!’

‘अच्छा तुम उससे पूछना क्या वो कुछ समय हम तीनों के साथ गुज़ारना चाहेगी? वैसे जैसे तुम ठीक समझो उससे बात कर लेना।’

कम्मो बोली- ठीक है छोटे मालिक, मैं कोशिश करती हूँ।

अभी काफी रात बाकी थी, हम तीनों फिर चुदाई में लग गए। मैं पलंग के किनारे पर बैठ गया और पहले मोटे चूतड़ वाली पारो मेरे लंड पर बैठ गई, उसने अपने हाथ से मेरे लोहे के समान लौड़े को अपनी गीली चूत में डाल दिया और मेरी गर्दन में हाथ डाल कर आगे पीछे झूलने लगी। उसके मोटे मम्मे मेरी चौड़ी छाती पर चिपक जाते थे और उसकी चूचियां मेरी छोटी चूचियों के साथ रगड़ करती हुई पारो की चूत के साथ वापस चली जाती थी।

कम्मो मेरे पीछे बैठ कर मेरे अण्डों के साथ खिलवाड़ कर रही थी और पारो की गीली चूत का रस अपनी चूत पर लगा रही थी। थोड़ी देर में पारो एक ज़ोर का चूत का झटका मार कर मुझसे चिपक कर झड़ गई।

उसके झड़ते ही उसकी जगह कम्मो फ़ौरन आ गई और उसी जोश से भरी चुदाई कम्मो के साथ शुरू हो गई। वो भी थोड़ी देर में झड़ गई।

क्यूंकि मेरा अभी नहीं झड़ा था तो मैं अभी खेल बंद करने के हक में नहीं था, मैंने अपनी गुरु कम्मो को लिटा कर उसकी टांगों को अपने कंधे पर रख कर ज़ोरदार चुदाई शुरू कर दी। और इतनी तेज़ तेज़ धक्के मारने लगा कि कम्मो की सांस उसके गले में अटक गई।

मेरी इस धक्कशाही से वह कब और कितनी बार छूटी, यह मैं नहीं जानता लेकिन अंत में जो मेरा फव्वारा छूटा, वो कम्मो की चूत की पूरी गहराई तक पहुँच गया होगा।

फिर हम तीनो एक दूसरे से लिपट कर नंगे ही सो गए।

अगले दिन जब मैं कॉलेज से लौटा तो कम्मो मुस्कराती हुई आई और बोली- बधाई हो छोटे मालिक, आप का काम हो गया।

मैं बोला- कौन सा काम कम्मो?

कम्मो बोली- वही चंचल वाला।

मैं बोला- वाह कम्मो, कमाल किया तुमने, कब आयेगी वो?

कम्मो बोली- कब क्या, वो तो आई बैठी है।

मेरा मुंह हैरानगी से खुला रह गया।

तब कम्मो अंदर गई और एक अच्छी दिखने वाली औरत को साथ ले आई और बोली- छोटे मालिक, इनसे मिलो, यह है मेरी सहेली चंचल।

चंचल ने बड़े प्यार से मुझ को नमस्ते की और मैंने भी उसका जवाब दिया।

ध्यान से देखा, चंचल कोई 5 फ़ीट की हाइट वाली मध्यम जिस्म वाली औरत थी जिसकी उम्र होगी 22-23 साल। रंग गंदमी और शरीर भरा पूरा लेकिन पारो और कम्मो से काफी कम था, बहुत ही आकर्षक साड़ी ब्लाउज पहने थी।

मैंने कम्मो को कहा- बहुत सुन्दर है तुम्हारी सहेली।

कम्मो बोली- खुशकिस्मती देखिए, इसका पति कुछ दिनों के लिए बाहर गया हुआ है काम पर! जब मैंने आपका संदेशा दिया तो फ़ौरन तैयार हो गई।

मैं खुश होते हुए बोला- वाह कम्मो, तुमने तो कमाल कर दिया। यह रात रहेगी न तुम्हारे साथ?

कम्मो बोली- हाँ छोटे मालिक, यह यहीं रहने के लिए तैयार है जब तक इस का पति नहीं लौट कर आता।

मैं बोला- चलो अच्छा है, रात में चंचल की खातिर का इंतज़ाम कर देना, जैसे मुर्गा और आइसक्रीम मंगवा लेना। खूब जमेगी जब मिल बैठेंगे चार यार!

कम्मो और चंचल हंसती हुई चली गई।

रात को बहुत अच्छा खाना खाकर लेमन पीकर मेरे कमरे में हम इकट्ठे हुए, देखा तो पारो नहीं है। कम्मो ने बताया कि पारो की माहवारी शुरू हो चुकी है, इसलिए नहीं आई।

चंचल से मैंने पूछा- कम्मो ने सारी बात बताई है या नहीं?

वो बोली- मैं जानती हूँ छोटे मालिक।

मैं बोला- तो ठीक है, शुरू हो जाओ फिर।

यह कह कर मैं अपने कपड़े उतारने लगा, कम्मो भी यही कर रही थी, सिर्फ चंचल कुछ नहीं कर रही थी।

हम दोनों ने हैरानी से उसको देखा और एक साथ पूछा- क्या बात है, कपड़े नहीं उतार रही हो तुम?

चंचल बोली- मैं पहले छोटे मालिक का मशहूर लंड देखना चाहती हूँ, सुना है बहुत लम्बा और लोहे के समान खड़ा रहता है।

मैं और कम्मो ज़ोर से हंस पड़े।

फिर मैंने जल्दी से अपना पयजामा उतार दिया।

मेरा वफादार लंड एकदम अकड़ा खड़ा था और सीधा चंचल की तरफ इशारा कर रहा था।

चंचल ने लंड को देखा और आगे बढ़ कर उसको अपने हाथ में पकड़ लिया, फिर उसने उसको अपने होटों से चूमा और कहने लगी- छोटे मालिक, जब तक आप मुझको माँ नहीं बनाते, आप मुझको इसी लंड से चोदते रहोगे और कभी भी चुदाई से इंकार नहीं करोगे।

मैं बोला- कम्मो ने बता ही दिया। ठीक है अगर तुम सबको वहम है कि मेरे चोदने से गाँव की औरतें माँ बन रही हैं तो मैं तुम्हारी इच्छा ज़रूर पूरी करूंगा लेकिन कोई पक्की गारंटी नहीं देता मैं!

चंचल और कम्मो बोली- ठीक है छोटे मालिक!

अब चंचल जल्दी से अपने कपड़े उतारने लगी, उसके नंगी होते ही दो चीज़ें सामने आई, एक तो उसने मम्मों पर अंगिया पहन रखी थी और दूसरे उसकी चूत भी सफाचट थी, यानि कोई झांट का बाल नहीं था उस पर।

कम्मो ने पूछा- यह क्या है चंचल? बाल कहाँ गए तेरी चूत के? और यह क्या अंगिया पहन रखा है?

चंचल बोली- यह सब मेरे पति की मर्ज़ी से हो रहा है, उसको चूत पर बाल अच्छे नहीं लगते और अंगिया पहनना उसको अच्छा लगता है।

मैं बोला- चलो ठीक है, जैसे इसके पति की मर्ज़ी, और यह अंगिया का क्या फ़ायदा है चंचल?

चंचल बोली- छोटे मालिक, इसे पहनने से मम्मे सख्त बने रहते हैं और ढलकते नहीं जल्दी।

मैं बोला- यह बात है तो फिर तो सब औरतों को ब्रा पहननी चाहये न जैसे कि शहर की लड़कियाँ और औरतें करती हैं। कल जाकर तुम अपने लिए और पारो के लिए ब्रा ले आना, चंचल को ले जाना, वो बता देगी कहाँ से अच्छी ब्रा मिलती है।

अब मैंने ध्यान से चंचल को देखा, उसका जिस्म काफी सेक्सी था, वो कद की छोटी ज़रूर थी पर सारे अंग सुन्दर और सुडौल थे। कम्मो उसको लेकर मेरे निकट आई और उसको मेरी बाँहों में धकेल दिया और बोली- नज़राना पेश है आली जा, कबूल फरमायें।

मैं भी एक्टिंग के मूड में बोला- बेगम, आपने बड़ा ही लाजवाब तौहफा दिया है हम को, बोलो इसके बदले में क्या चाहिये आपको?

कम्मो बोली- कनीज़ को आपके लौड़े के दर्शन होते हैं और होते रहें हर रोज़, यही काफी है हज़ूर।

मैं बोला- जाओ ऐसा ही होगा।

फिर मैंने चंचल से पूछा- तुमको किस तरह की चुदवाई सबसे ज्यादा पसंद है चंचल?

वो बोली- वैसे तो हर तरह की पसंद है लेकिन घोड़ी वाली बहुत ज्यादा पसंद है।

फिर मैंने चंचल के होटों को चूमना शुरू किया और साथ ही साथ ऊँगली उसकी चूत में भी डाल दी जो बेहद गीली हो रही थी। मुंह के बाद उसके मम्मों को चूमना और चूसना शुरू किया और उंगली से उसकी भग को भी रगड़ता रहा।

जब वो काफी गर्म हो गई तो मैंने उसको पलंग पर घोड़ी बना दिया और पीछे से लंड को उसकी चूत के ऊपर रख कर एक हल्का धक्का मारा और लंड का सर चूत के अंदर था।

कम्मो भी हमारे साथ बैठी थी और वो मेरे लंड को पकड़ कर फिर से चंचल की चूत पर रख कर रगड़ने लगी।

अब फिर मैंने हल्का धक्का मार दिया और लंड अब पूरा अंदर चला गया। कुछ देर मैंने लंड को उसकी चूत में बिना हिले डुले रखे रखा और कम्मो साइड से चंचल के मम्मों को रगड़ने लगी।

फिर कम्मो ने मेरे चूतड़ों पर एक हल्की सी थपकी दी जैसे घोड़े को तेज़ भागने के लिए देते हैं, मैं इशारा समझ गया और अपना लंड को सरपट दौड़ाने लगा। चंचल अपना सर इधर उधर कर रही थी और मेरा लंड बेहद तेज़ी से दौड़ता हुआ अपनी मंज़िल की तरफ भागने लगा।

कम्मो मेरे पीछे बैठ गई थी और अपने मम्मे मेरी पीठ से रगड़ रही थी जिससे मेरा जोश और भी बढ़ रहा था।

इस दौड़ का पहला शिकार हुआ जब चंचल छूटने के बाद रुकने का इशारा करने लगी लेकिन मैं अपने सरपट दौड़ते हुए लौड़े-घोड़े को कैसे रोकता, वो तो बेलगाम हो गया था और एक इंजन की तरह अंदर बाहर हो रहा था।

थोड़ी देर ऐसे ही दौड़ चली और फिर चंचल छूट कर अबकी बार लेटघोड़ी ही गई।

मुझको जबरन रूकना पड़ा, तब तक कम्मो अपनी चूत को घोड़ी बन कर आगे पेश कर रही थी तो मैंने उस गिरी हुई घोड़ी से अपना लंड निकाला और दूसरी में डाल दिया।

दूसरी फ़ुद्दी के अंदर गरम जलती हुई लोहे की सलाख गई तो वो भी भागने लगी तेज़ी से! मेरे जैसा शाहसवार नई घोड़ी की दुलत्ती चाल से बेहद खुश हुआ और आराम से नई घोड़ी को चोदने में मग्न हो गया।

कभी तेज़ और कभी धीरे चाल से कम्मो को भी हिनहिनाने पर मजबूर कर दिया, उसके गोल और मोटे चूतड़ मुझको इस कदर भा गए कि बार बार उन पर हाथ फेरते हुए उसका होंसला बढ़ाने की कोशशि करने लगा।

उधर देखा कि चंचल भी फिर गांड उठा कर तैयार हो रही है तो मैंने कम्मो को धक्के तेज़ कर दिए और 5 मिन्ट के अंदर ही उसका भी छूटा दिया।

जब वो लेट गई तो मैंने अपनी गरम सलाख कम्मो की चूत से निकाल कर चंचल की छोटी लेकिन गोल गांड में डाल दी।

दौड़ फिर शुरू हो गयी चंचल के साथ और 10 मिन्ट की तेज़ और आहिस्ता चुदाई के बाद जब वो झड़ गई तो मैंने भी लंड उसकी चूत की गहराई में ले जाकर ज़ोरदार हुंकार भर कर फव्वारा को छोड़ दिया और खुद भी उस लेटी हुई चंचल पर पसर गया।

हम दोनों के ऊपर कम्मो भी आकर पसर गई और अच्छी खासी सैंडविच बन गई हमारी।

हम तीनों काफी देर ऐसे ही लेटे रहे और फिर सीधे हो कर लेट गए। कम्मो का एक हाथ मेरे लंड पर था और दूसरा चंचल की सफाचट चूत के ऊपर थिरक रहा था।

मेरे भी हाथ इसी तरह दोनों की चूत और मम्मों के साथ खेल रहे थे, चंचल की चूत से अभी भी मेरा वीर्य धीरे धीरे निकल रहा था।

इस तरफ मैंने कम्मो का ध्यान मोड़ा और इशारा किया कि चंचल की चूत को ऊपर करो!

वो झट समझ गई और उसने चंचल की चूत के नीचे एक तकिया रख दिया जिससे वीर्य का निकलना बंद हो गया।

चंचल अभी 2-3 बार ही छूटी थी तो कम्मो ने उससे पूछा- और लंड की इच्छा है तो बोलो?

चंचल ने हामी में सर हिला दिया और वो खुद ही मेरे खड़े लंड के साथ खेलने लगी, मैं भी उसकी चूत में ऊँगली डाल कर उसकी भगनासा को सहला रहा था।

तब वो उठी और मेरे खड़े लंड के ऊपर बैठ गई, जब पूरा लंड अंदर चला गया तो उसने झुक कर मुझको होटों पर जोदार चूमा, मैं भी उसके गोल और सॉलिड बूब्स के साथ खेलता रहा।

हमारी दोबारा शुरू हुई जंग में कम्मो हम दोनों का पूरा साथ दे रही थी, उसकी हाथ की ऊँगली चंचल की गांड में घुसी हुई थी और दूसरी मेरी गांड में थी।

चुदाई की स्पीड तो चंचल के हाथ में थी तो मैं चैन से लेटा रहा। चंचल कभी तेज़ और कभी धीरे धक्के मार रही थी, हर धक्के का जवाब मैं कमर उठा कर दे रहा था।

अब उसकी चूत में से ‘फिच फिच’ की आवाज़ें आने लगी और उसकी चूत का पानी मेरे पेट पर गिरने लगा। उसकी चूत से निकल रही सफ़ेद क्रीम से मेरा लंड एकदम सफेद हो गया।

फिर चंचल ने आँखें बंद कर ली और ऊपर नीचे होने की स्पीड एकदम तेज़ कर दी। मैं और कम्मो समझ गए कि चंचल अब झड़ने वाली है, मैंने अपने दोनों हाथ चंचल के उचकते चूतड़ों के नीचे रख दिए और खुद भी नीचे से ज़ोरदार धक्के मार रहा था।

चंचल एक दो मिन्ट में पूरी तरह फिर झड़ गई और मेरे ऊपर तक कर लेट गई।

अभी भी उसका शरीर उसके छूटने के कारण कांप रहा था। मेरा लंड अभी भी उसकी चूत में ही था।

तब वो धीरे से मेरे ऊपर से हट कर बिस्तर पर लेट गई, फिर उसने आँखें खोल कर मुझको विस्मय से देखा और बोली- वाह छोटे मालिक, आप तो कमाल के हैं। अभी तो ठीक से मूंछ और दाढ़ी भी नहीं निकली और आप तो सेक्स के चैंपियन बने जा रहे हैं?

मैं कुछ कह नहीं सका, बस ज़रा मुस्करा भर दिया और बोला- यह सब तेरी सहेली कम्मो का कमाल है, मेरा इसमें कुछ नहीं। वही मेरी गुरु है और वही मेरी सही मायनो में मालिक है।

हम सब बहुत हँसे और फिर हम एक दूसरे के साथ लिपट कर सो गए।
 
चंचल को गर्भवती बनाने की कोशिश

चंचल दो रात हमारे साथ रही और फिर उसका पति लौट आया तो वो वापस चली गई। इन दो रातों को मैंने चंचल को और कम्मो को कई बार चोदा।

4-5 बार छूटने के बाद चंचल ने हथियार डाल दिए लेकिन कम्मो अभी तैयार थी चुदाई के लिए तो उसको मैंने कहा- मैं लेट जाता हूँ और जैसी तुम्हारी मर्ज़ी हो मुझको चोद लो।

मेरी एक तरफ़ कम्मो लेटी थी और दूसरी तरफ़ चंचल लेटी थी। कम्मो ने पहले मेरे लंड को चूसना शुरू किया और फिर उसने अपनी जीभ से मेरे शरीर के अंगों को चूमना शुरू किया।

कुछ समय मेरे छोटे चुचूकों को चाटा और फिर बढ़ती हुई मेरे पेट को और नाभि में जीभ से चाटने लगी। कम्मो की चूमाचाटी से मेरा लंड पत्थर की भान्ति सख्त हो गया था लेकिन कम्मो की हिदायत के अनुसार मुझको चुपचाप लेटे रहना था तो मैं हवा में लहराते हुए अपने लंड को देखता रहा।

कुछ देर बाद कम्मो मेरी बगल में लेट गई और अपनी टांग को मेरे ऊपर डाल कर अपनी चूत का मुंह मेरे लंड के पास ले आई और फिर ऐसा निशाना लगाया कि लंड घुप्प से चूत के अंदर हो गया, मुझको कम्मो की चूत एक तपती हुई गुफा लग रही थी जिसमें शह्द जैसा गाढ़ा पदार्थ भरा पड़ा था।

उसकी गर्मी इतनी तीव्र थी कि मेरा लंड दुहाई करने लगा। लेकिन तभी कम्मो की चूत ने मेरे लौड़े पर आगे पीछे होना शुरू कर दिया।

मैं अपने हाथ अपने सर की नीचे रख कर लेटा और कम्मो आँखें बंद करके तरह तरह की अवस्था में मुझको दबादब चोदने लगी। उस की घनी ज़ुल्फ़ें मेरी छाती पर फ़ैल रही थी और वो मेरे शरीर पर पूरी लेट कर कमर से चुदाई में मगन थी।

इस चुदाई के दौरान उसका कितनी बार छूटा मुझ को मालूम नहीं। फिर वो पूरी तरह से थक कर मेरी बगल में लेट गई। चंचल यह सारा तमाशा देख रही थी और अपनी भग को ऊँगली से मसल भी रही थी।

अब वो मैदान में फिर आ गई और मुझसे कहने लगी- छोटे मालिक, अब मुझको ऐसे चोदो कि मेरे बच्चा ठहर जाये।

कम्मो ने पूछा- तेरी माहवारी कब हुई थी?

चंचल ने उँगलियों पर गिन कर बताया- 15 दिन हो गए हैं।

कम्मो ने फिर पूछा- कुछ दिनों से तुझको शरीर कुछ गरम लग रहा है क्या?

चंचल बोली- हाँ, वो तो हर महीने माहवारी के 14-15 बाद गरम लगता है, ऐसा लगता है कि हल्का सा ताप चढ़ा है।

कम्मो बोली- अच्छा मुझको अपनी नब्ज़ दिखा?

नब्ज़ देखने के बाद उसने एक ऊँगली से उसकी चूत का रस ऊँगली पर लगाया और उसको सूंघा।

कम्मो बोली- अच्छा हुआ, तेरा मामला तो फिट है। तू आज छोटे मालिक से घोड़ी बन कर दो तीन बार अंदर छुटवा ले। तेरी किस्मत अच्छी हुई तो आज ही गर्भ ठहर जाएगा तुझको! छोटे मालिक आज आप सिर्फ चंचल को चोदो और उसकी चूत की गहराई में 2-3 बार पिचकारी छोड़ो।

यह कह कर वो फिर कुछ सोचने लगी और बोली- मैं रसोई में जाकर तुम दोनों के लिए ख़ास दूध बना कर लाती हूँ जिससे यह काम पक्का हो जाएगा।

और वो जल्दी से उठी और नंगी ही रसोई में चली गई।

दस मिन्ट बाद वो एक बड़ा गिलास दूध लेकर आई और मेज पर रख दिया।

कम्मो बोली- चलो चंचल, पहले तुम यह दूध थोड़ा सा पियो और फिर छोटे मालिक को दे दो।

चंचल ने ऐसा ही किया और खुद थोड़ा सा पीकर गिलास मुझको दे दिया और मैंने भी थोड़ा सा दूध पिया और मेज पर गिलास रख दिया।

‘दूध बड़ा ही स्वादिष्ट था, मज़ा आ गया पीकर…’ मैंने कम्मो को कह दिया।

वो बोली- यह दूध ख़ास तौर पर जब गर्भ धारण करने की इच्छा हो तो पिया जाता है। इसमें शरीर को काफी शक्ति प्राप्त हो जाती है। और यह आदमी और औरतों के लिए एक सा ही अच्छा होता है, अब तुम दोनों शुरू हो जाओ।

चंचल को मैंने हाथ लगाया तो उसका शरीर थोड़ा सा गरम लगा जैसे एक दो डिग्री बुखार हो। तब चंचल मेरे लंड को चूसने लगी और मैं ने ऊँगली से उसकी भग को मसलना शुरू कर दिया।

जब चूत काफ़ी रसदार हो गई तो कम्मो ने उसकी चूत में ऊँगली डाल कर जांच की और फिर कहा- शुरू हो जाओ मेरे शेरो, आज मैदान जीत कर ही आना है।

चंचल जल्दी से घोड़ी बन गई और कम्मो बीच में बैठ कर मेरे लंड को चंचल की चूत के मुंह पर रख दिया और मेरे चूतडों पर ज़ोर से मुक्का मारा।

लंड उचक कर चूत के अंदर चला गया और कम्मो का हाथ मेरे लौड़े के नीचे यह महसूस करने की कोशिश कर रहा था कि लंड पूरा अंदर गया या नहीं।

इस काम के लिए वो चंचल के पेट के नीचे ऐसे लेट गई कि सर एक तरफ और टांगें दूसरी तरफ।

हाथों से उसने मेरे चूतड़ों को हल्के हल्के मारना शुरू किया जैसे घोड़े को तेज़ भागने के लिए चाबुक मारनी पड़ती है।

हर बार उसके हाथ की मार से मेरी स्पीड भी तेज़ होने लगती। एक हाथ से वो चंचल की भग को भी छेड़ रही थी और उसके भी चूतड़ आगे पीछे मेरे धक्के के अनुरूप होने लगे थे।

ऐसा लग रहा था कम्मो एक रिंग मास्टर की तरह हम दो शेरों को नचा रही हो।

जब चुदाई करते कोई 10 मिन्ट हो गए तो उसने चंचल की चूत पर ऊँगली तेज़ कर दी और फिर बड़ी ही सुहानी चीख मार कर चंचल का छूटना शुरू हो गया।

तभी कम्मो ने नीचे लेटे हुई ही चिल्लाना शुरू कर दिया- छोटे मालिक, आप भी छूटा लो जल्दी से।

इतना सुनना था कि मैंने फुल स्पीड से धक्के मारने शुरू कर दिये और बहुत जल्दी ही लंड को पूरा चूत के अंदर डाल कर फव्वारा छोड़ दिया और उसके चूतड़ को कस के पकड़े रहा ताकि वीर्य का एक कतरा भी बाहर न गिरे।

उधर कम्मो ने नीचे से चंचल की चूत को ऊपर उठाये रखा और फिर एक तकिया उसकी चूत के नीचे रख कर आप नीचे से हट गई.

ऐसा करने के बाद ही कम्मो चंचल के नीचे से हटी और मुझको कहा- आप चंचल की चूत से लंड निकाल लो।

हम सबने नोट किया कि वीर्य का एक कतरा भी बाहर नहीं गिरा।

कम्मो ने चंचल को सीधा लेटने से पहले उसकी गांड के नीचे दो मोटे तकिये रख दिए ताकि उसकी कमर ऊपर को उठी रहे और वीर्य बाहर न गिर सके।

मैं बहुत हैरान था कि कम्मो को यह सब कैसे मालूम था।

तब उस ने बताया कि जब वो विधवा हुई तो उसने सोचा कि वो एक अच्छी दाई बन सकती है जिससे अच्छी आमदन भी सकती है तो वो एक बूढ़ी दाई के साथ काम सीखने लगी।

यह दूध और तकिये का और तारीख देख कर चोदना दाई से ही सीखा था।

कम्मो आगे बोली- यह छोटे मालिक जो इतनी ज्यादा चुदाई कर लेते हैं, उसका राज़ भी मैं जानती हूँ।

मैं बोला- अच्छा बताओ, क्या राज़ है इसमें?

कम्मो बोली- अभी नहीं, जब वक्त आएगा तो बता दूंगी सब कुछ आपको, चंचल तू जानती है कि छोटे मालिक कितनी औरतों को हरा कर चुके है यानि गर्भवती कर चुके हैं?

मैं बोला- कम्मो, नहीं बताना किसी को! वैसे कुछ गाँव से खबर आई क्या?

कम्मो बोली- कौन सी खबर छोटे मालिक?

‘वही जो तू सुनना चाहती है। चंपा की और दूसरी औरतों की?’

‘नहीं छोटे मालिक!’

‘चलो फिर सो जाते हैं, काफी रात हो गई है।’

कम्मो बोली- छोटे मालिक, आपको सुबह को फिर चंचल को चोदना हो गा जैसा आज चोदा था।

मैं हँसते हुए बोला- कम्मो, तू तो मुझको सरकारी साँड बना रही है। तू बाहर एक बोर्ड लगा दे कि ‘यहाँ औरतों को गर्भवती बनाया जाता है!’

हम सब बहुत हँसे और फिर हम तीनों एक दूसरे की बाँहों में सो गये।

सुबह उठ कर पहला काम वही किया, चंचल को फिर से चोदा कम्मो की देख रेख में।

और इस चुदाई के बाद कम्मो बोली- चंचल आज चली जायेगी क्यूंकि इसका पति आज वापस आ जायेगा। और सुन चंचल आज रात को पति से दो बार ज़रूर चुदवाना नहीं तो सब गड़बड़ हो जाएगा।

उस दिन मैं कालेज जल्दी चला गया क्यूंकि कालेज की एक ख़ास मीटिंग थी।

शाम को घर आया तो कम्मो ने हँसते हुए बताया- छोटे मालिक, बधाई हो चम्पा के घर लड़का हुआ है।

मैं भी हँसते हुए बोला- तुझको बधाई हो! तेरी ही सहेली है न!

कम्मो बोली- हाँ, वो तो है। उसके लड़के के जन्म से मैं बहुत खुश हूँ। आखिर उसकी तमन्ना पूरी हो गई। चम्पा आपको शुक्रिया कह रही थी।

मैं बोला- मेरा शुक्रिया क्यों? उसके पति की मेहनत जो सफल हुई।

कम्मो हंसने लगी और बोली- रहने दो छोटे मालिक, हम सब जानते हैं किस की मेहनत रंग लाई।

पारो यह सब सुन रही थी लेकिन उसको समझ नहीं आ रहा था कि हम किस की बात कर रहे हैं।
 
गीतिका और विनीता

इन दिनों कालेज में बड़ी गहमा गहमी थी, एक तो इलेक्शन थे दूसरे कई प्रोग्रामों की तैयारी चल रही थी। कॉलेज की ड्रामा क्लब का मैं भी सदस्य था। हालांकि मुझ को नाटकों में कोई रोल नहीं मिला था लेकिन प्रबंध के काम इतने ज्यादा होते थे कि शाम तक मैं थक जाता था।

कुछ दिनों बाद मम्मी का फ़ोन आया कि वो और पापा एक दो दिन के लिए लखनऊ आ रहे हैं और मैं उनका कमरा ठीक ठाक करवा दूँ। मैंने पारो और कम्मो को बता दिया और उन दोनों ने मम्मी पापा का कमरा एकदम बढ़िया बना दिया।

अगले दिन जब कालेज से वापस आया तो वो दोनों आ चुके थे। फिर हमने दोपहर का भोजन साथ साथ ही किया।

बातों बातों में मम्मी ने बताया कि पापा के एक जमींदार दोस्त की दोनों बेटियाँ यहाँ गर्ल्स कॉलेज में पढ़ती हैं और वो कॉलेज के हॉस्टल में रहती हैं। उनको हॉस्टल का खाना अच्छा नहीं लग रहा है तो पापा ने फैसला किया है कि वो दोनों भी हमारी कोठी में ही रहेंगी अगर मुझको कोई ऐतराज़ न हो तो?

पहले तो मैं घबरा गया कि मेरी चुदाई की आज़ादी में विघ्न पड़ेगा उन दोनों के आ जाने से?

लेकिन फिर सोचा कि अगर इंकार कर दिया तो पापा बुरा मान जाएंगे और उनको शक भी हो जायेगा कि यहाँ कुछ गड़बड़ तो नहीं।

मैं बोला- ठीक है मम्मी, अगर आपकी और पापा की इच्छा है तो वो यहाँ रह सकती हैं। आप उनके लिए कमरा निश्चत कर दो ताकि कम्मो और पारो उसको साफ़ करवा दें।

यह सुन कर मम्मी बहुत खुश हुई और कम्मो के साथ जाकर उनके लिए कमरा सेलेक्ट किया और उसमें सब कुछ साफ़ और नया सामान डलवा दिया।

चाय के समय पापा और एक अंकल जिनको मैं नहीं जानता था, आये, मैंने दोनों को चरण वंदना की।

मम्मी बोली- ठीक है भैया जी, आप दोनों लड़कियों को ले आइए ताकि वो अपना कमरा इत्यादि देख लें और आज ही उनका सामान भी शिफ्ट करवा दीजिए ताकि वो आपके होते हुए यहाँ सेट हो जाएँ।

अंकल बोले- ठीक है भाभी जी।

फिर हमने साथ बैठ कर चाय और नाश्ता किया और एक घंटे बाद वो अपनी दोनों बेटियों को हमारी कार में बिठा कर ले आये।

दोनों के साथ हमारा परिचय करवाया गया, बड़ी का नाम गीतिका था और छोटी का नाम वनिता था, दोनों ही दिखने में आम लड़कियों की तरह थी।

वनिता जो अपनी बड़ी बहन से एक साल छोटी थी, काफी दिलचिस्प लगी और बड़ी थोड़ी गंभीर थी। रंग-रूप में दोनों गंदमी रंग वाली और शारीरिक तौर पे वनिता थोड़ी भरे हुए जिस्म वाली थी और बड़ी थोड़ी लम्बी और स्लिम थी, दोनों की आँखें बड़ी सुंदर थी।

पारो और कम्मो ने खाना बहुत स्वादिष्ट बनाया था और सबने खाने की बहुत तारीफ की। फिर रात में हम सब अपने कमरों में सो गए।

आज बहुत अरसे के बाद मैं अकेला ही कमरे में सोया।

जाने से पहले मम्मी कम्मो को समझा गई- सोमू को रात में अकेला नहीं छोड़ना, तुम ज़रूर उसके साथ सोना, कोई चाहे कुछ भी कहे। ठीक है! अगर कोई ऐतराज़ करे तो मुझ को खबर करना। समझ गई ना?

कम्मो बोली- जैसा आपका हुक्म मालकिन।

‘और देखो कम्मो, तुम और पारो मिल कर बढ़िया खाना रोज़ बनाना ताकि ये लड़कियाँ खुश रहें। अगर कोई समस्या होगी तो मुझको फ़ोन करना, ओके?’

कम्मो ने हाँ में सर हिला दिया।

मम्मी मुझ को कमरे में ले गई और बोली- ये दस हज़ार रूपए तुम रख लो। सारा खर्च इसी में से करना, कम हो जाएँ तो मांग लेना। ओके?

मैं बोला- मम्मी, तुम फ़िक्र न करो, मैं सब सम्हाल लूँगा। आज कल घर में नौकरानी कौन है?

वो बोली- वही निर्मला है जो यहाँ भी रह कर गई है। तुम जब चाहो उसको फ़ोन कर दिया करो और सबका हाल बता दिया करो।

नाश्ते के बाद वो सब चले गए और हम तीनों कालेज चले गए।

कुछ दिन तो सब कुछ ठीक चला लेकिन एक रात में विनी ने मुझको और कम्मो को चोदते हुए पकड़ लिया।

उस रात हम दोनों से कमरे का दरवाज़ा ठीक से बंद नहीं किया गया और वो जैसे की मौका ही ढूंढ रही थी, अंदर आ गई जब मैं कम्मो को घोड़ी बना कर चोद रहा था।

वो बड़े धीमी आवाज़ में बोली- यह क्या हो रहा है सोमू?

मैं क्या बोलता… मेरी तो बोलती ही बंद हो गई।

वो बोली- हमें भी हिस्सा चाहिए इस खेल में! बोलो हाँ, नहीं तो मैं दीदी को बुला लेती हूँ?

कम्मो बोली- छोटे मालिक, बताओ क्या करेंगे अब?

मैं बोला- कैसा हिस्सा मांग रही हो तुम?

वो बिना किसी झिझक बोली- इस मीठी चुदाई के खेल में… मुझको खेल में शामिल कर लो वरना?

मैं बोला- देखो विनी, तुम अभी उम्र की छोटी हो, तुमने यह खेल पहले नहीं खेला है, ज़रा बड़ी हो जाओ तो तुमको भी शामिल कर लेंगेइस खेल में।

मैंने उसको समझाने की कोशिश की लेकिन उसकी नज़र तो मेरे खड़े लौड़े पर ही टिकी थी।

वो बोली- सोमू, तुमको बता दें कि हमने यह खेल कई बार खेला है अपने गाँव के दोस्तों के साथ… हमको इस खेल के सारे रूल्स और कायदे मालूम हैं। तुम मुझको शामिल करते हो या नहीं वरना मैं अभी चिल्ला दूंगी।

मैंने कम्मो की तरफ देखा और उसने हल्के से आँख मार दी।

मैं बोला- ठीक है।

इतना सुनना था कि विनी ने झट मेरा लंड पकड़ लिया, बोली- अरे यह तो वास्तव में खड़ा है. मैंने सोचा था कि यह सिर्फ एक नाटक है!

और यह कह कर वो लंड को मुट्ठी में लेकर ऊपर नीचे करने लगी और कम्मो ने पीछे से उसके मम्मों को पकड़ लिया और निप्पल के संग खेलने लगी।

तब विनी मेरे लंड को छोड़ कर अपने कपड़े उतारने लगी, उसने सिल्क की चोगानुमा ड्रेस पहनी हुई थी, उसको उतारते ही वो बिल्कुल नंगी हो गई।

उसका शरीर किशोर लड़कियों के समान था हालांकि वो पूरी वयस्क हो चुकी थी। कम्मो उसके चूतड़ों को ज़ोर ज़ोर से भींच रही थी। मैं ने गौर से देखा, उसकी चूत पर बालों का पूरा जंगल छाया था।

उसने मेरा लंड छोड़ कर कम्मो की तरफ मुंह किया और सीधा मुंह उसके मोटे मम्मों पर टिका दिया और उसकी चूचियों को एक एक कर के चूसने लगी।

मैं भी विनी के पीछे खड़ा होकर उसकी गांड और चूत पर हाथ फेरने लगा। उसकी चूत अभी पूरी तरह गीली नहीं हुई थी तो मैंने उसकी भग को मसलना शुरू कर दिया।

मेरा खड़ा लंड उसकी गांड में छेद की तलाश कर रहा था।

विनी हम दोनों के बीच सैंडविच बनी हुई थी और खूब आनन्द ले रही थी जैसा उसके मुख से झलक रहा था, उसके मम्मे छोटे और गोल ज़रूर थे लेकिन एकदम सॉलिड थे।

विनी भी कम्मो की बालों भरी चूत में हाथ डाले हुई थी।

फिर कम्मो उसको धीरे से मेरे पलंग पर ले आई और उसको वहाँ लिटा दिया, कम्मो बोली- क्यों विनी तुम पहले क्या पसंद करोगी? लंड की चुदाई या फिर मेरे मुंह की चुदाई?

विनी झट से बोली- लंड की चुदाई पहले और दूसरी बाद में!

मैं बोला- अगर तुम्हारी बहन गीतिका जाग गई तो क्या होगा?

इतने में पीछे से आवाज़ आई- मैं तो जगी हुई हूँ और सारा तमाशा देख रही हूँ कब से!

यह गीतिका थी।

मेरा तो सर चकरा गया। वो जल्दी से हमारे पास आई और अपने सिल्क के चोगे को उतारने लगी। पहले तो कम्मो भी हैरान हो गई कि यह कहाँ छुपी हुई थी और कब कमरे के अंदर आई।

नाईट ड्रेस उतारते ही वो भी आकर मुझसे चिपक गई, आगे विनी थी और पीछे गीतिका और कम्मो हैरान हुई कभी मुझको और कभी दोनों लड़कियों को देख रही थी।

गीति ने भी मेरा लंड अपने अधिकार में ले लिया और हाथ से उसके और अंडकोष के साथ खेलने लगी। अब हालत यह थी कि दोनों बहने एक दूसरे को धक्का मार रही थी और मेरे लंड को अपने कब्ज़े में करने की कोशिश कर रही थी।

मैंने घबरा कर कम्मो की तरफ देखा और उसने हाथ के इशारे से मुझको बताया कि वो इन दोनों को सम्हाल लेगी।

फिर कम्मो ने अपनी आवाज़ ज़रा ऊँची करके कहा- लड़कियो, अपने पर काबू करो, नहीं तो छोटे मालिक किसी के साथ भी नहीं करेंगे कुछ!

यह सुन कर दोनों सम्भल गई और मुझसे माफ़ी मांगने लगी।

कम्मो ने कहा- ऐसा करते हैं, पहले आप दोनों यह बताएं कि तुम दोनों ने कितनी बार लंड चूत का खेल खेला है और किसके साथ?

बड़ी बोली- मैंने तो कई बार अपने घरेलू नौकर को चोदा है और फिर गाँव के कई लड़कों के साथ भी यह खेल खेला है खेत खलियान में!

विनी बोली- मैंने 4-5 बार चुदवाया है अपने कार के ड्राइवर से और चौकीदार के लड़के से!

कम्मो बोली- मुझको लगता है कि तुम दोनों यह सब झूट बोल रही हो। तुम दोनों लेट जाओ पलंग पर, मैं तुम्हारा चेक अप करूंगी। मैं एक ट्रेंड नर्स रह चुकी हूँ, मुझसे कुछ नहीं छुपा सकोगी तुम दोनों। ठीक है?

दोनों एक साथ बोली- नहीं नहीं, हम सच कह रही हैं। तुमको हम को चेक करने की कोई ज़रूरत नहीं।

मैं गंभीरता से बोला- देखो जैसा कम्मो कह रही है, वैसा ही करो, वरना मुझको माफ करो। मैं आप दोनों के साथ कुछ नहीं करूंगा। बोलो क्या मंज़ूर है?

पहले दोनों कुछ देर सोचती रही और फिर गीति बोली- अच्छा कम्मो आंटी, हमारा चेकअप कर सकती है लेकिन हमारी शर्त है कि कम्मो आंटी और तुम दोनों वायदा करो कि यह बात किसी को नहीं बताओगे?

मैंने कम्मो को देखा, उसने हल्के से हाँ में सर हिला दिया।

तब मैं बोला- हम वायदा तब करेंगे जब तुम भी वायदा करो कि जो कुछ भी यहाँ हम सब करेंगे, वो किसी को नहीं बताओगी। अगर हाँ तो रखो मेरे और कम्मो के हाथ पर हाथ तुम दोनों भी।

दोनों ने झट से हमारे हाथ पर अपने हाथ रख दिए।

अब कम्मो बोली- मैं तुम दोनों की चूत का अच्छी तरह चेक अप करूंगी, अगर मुझको लगा कि तुम दोनों की चूत में कुछ गड़बड़ है तो मैं तुम दोनों को डॉक्टर से चेकअप करवाऊँगी, ठीक है?

दोनों ने हामी में सर हिला दिया, दोनों पलंग पर नंगी ही लेट गई।

तब कम्मो ने पहले बड़ी की चूत को देखना शुरू किया। उसने उसकी चूत को चौड़ा किया और फिर उसमें पूरी ऊँगली डाल कर चेक किया, फ़िर उसने अपनी ऊँगली को सूंघा और फिर उसने गीति के मम्मों को हाथ से गोल गोल चेकअप किया।

फिर उसने गीति को उल्टा लिटा दिया और उसकी गांड में ऊँगली डाल कर चेक करने लगी।

इसी तरह उसने छोटी विनी का भी चेक अप किया। चेक अप करने के बाद कम्मो ने उन दोनों को खड़ी कर दिया और फिर वो गीति के मम्मों को चेक करने लगी और फिर उसके मुंह को खुलवाया और ध्यान से उसके अंदर चेक करने लगी।

यह सब करने के बाद वो मेरे पास आई और बोली- छोटे मालिक, गीति की चूत में से बदबू आ रही है, लगता है उसके अंदर इन्फेक्शन हो गई है। जब तक उसकी इन्फेक्शन ठीक न हो जाए, उसको चोदना आपके लिए खतरनाक हो सकता है।

कम्मो ने मेरी तरफ देखते हुए कहा- विनी की चूत भी ठीक हालत में नहीं है, लगता है उसने भी चूत में गाजर मूली या फिर बैंगन का उपयोग किया है कई बार, जिससे उसमें भी इन्फेक्शन हो गई है।

मैंने यह सब सुन कर गंभीर मुंह बना लिया और दोनों से बोला- बताओ, क्या कम्मो सच कह रही है? तुम दोनों ने आदमी से कभी नहीं चुदवाया है और सिर्फ गाजर मूली से अपनी तसल्ली करती रही हो?

मैंने देखा कि दोनों का मुंह एकदम पीला पड़ गया और दोनों ही नज़रें नीचे कर देख रही थी, जिससे साफ़ हो गया कि कम्मो का तीर निशाने पर बैठा था।

मैंने कम्मो से पूछा- अब ये दोनों क्या करें?

कम्मो बोली- अगर ये मान जाएंगी तो कल मैं इनको अपनी जानने वाली लेडी डॉक्टर के पास ले जाती हूं और उससे दवाई इत्यादि ले देती हूँ इनको, ताकि जल्दी ही आराम आ जाए इनकी चूतों को! क्यों क्या मर्ज़ी है आप दोनों की?

दोनों ही चुप रही और फिर एक दूसरे को देखने लगी।

फिर गीति बोली- कम्मो आंटी, ठीक कह रहीं हैं। हम कल ही इनके साथ डॉक्टर के पास जाएंगी और अपना पूरा चेक करवाएंगी।

मैं बोला- शाबाश लड़कियो, जब तुम दोनों ठीक हो जाओगी तो मैं हूँ न तुम्हारी सेवा करने के लिए।

दोनों दौड़ कर आई और मुझको गले लगा लिया।

मैंने देखा कि कम्मो मुस्करा रही थी।

कम्मो ने दोनों को उनके सिल्क के चोगे पहनाये और साथ लेकर उनके कमरे तक छोड़ आई और यह भी बोल आई कि रात को अकेले कमरे से मत निकला करो क्यूंकि यहाँ सांप बिच्छू का डर रहता है।

जब वो वापस आई तो मेरा लौड़ा फिर खड़ा था और उस रात मैंने कम्मो को बड़े प्यार से काफी देर चोदा और जब वो 3-4 बार छूट गई तभी मैंने उसको छोड़ा।

उस रात मैं और कम्मो घोड़े बेच कर एक दूसरे की बाहों में सोये थे।
 
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