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मेरा चुदाई का सफ़र

गीतिका और विनीता की सहेलियाँ

उस रात मैं और कम्मो घोड़े बेच कर एक दूसरे की बाहों में सोये थे इसलिए सुबह थोड़ी देर से उठे।

मुख्यद्वार जब कम्मो ने खोला तो सामने पारो खड़ी थी, वो और कम्मो मुस्कराते हुए मेरी चाय के साथ मेरे कमरे में आईं।

फिर मेरे सामने ही कम्मो ने पारो को रात की सारी कहानी सुनाई और दोनों बहुत देर तक हंसती रहीं।

तब पारो बोली- मैं भी माहवारी से फ़ारिग़ हो गई हूँ, छोटे मालिक रात को मैं भी आऊँगी आपके पास!

मैंने चाय का कप रखा और उठ कर पारो को गले लगा लिया और उसके होटों को चूम लिया, फिर एक हाथ मैंने कम्मो की कमर में और दूसरा पारो की कमर में डाल कर दोनों के साथ छोटा सा नाच किया, दोनों बहुत खुश हुईं।

फिर मैंने अलमारी से अपना बटुआ निकाल कर दोनों को 100-100 रूपए दिए कि वे अपनी पसंद की अच्छी सी साड़ी खरीद लें और साथ ही दो तीन अंगिया भी खरीद लें।

दोनों ख़ुशी के मारे मुझसे फिर लिपट गई और मेरे मुंह पर ताबड़तोड़ चुम्मियों की बौछार लगा दी।

मेरा लौड़ा तो खड़ा होने लगा था लेकिन कम्मो ने जल्दी से पारो का हाथ पकड़ा और कमरे के बाहर चली गई।

दोपहर जब मैं कॉलेज से लौटा तो कम्मो मुझको दरवाज़े पर मिली, उसके चेहरे पर बड़ी प्यारी सी मुस्कान थी।

मैंने पूछा- बड़ी खुश लग रही हो, क्या कोई ख़ास बात है?

उसने झट से मिठाई का डिब्बा मेरी ओर कर दिया और बोली- बधाई हो छोटे मालिक, आप बाप बन गए!

मैं एकदम हैरान हो गया और बोला- ठीक से बताओ, काहे की बधाई और यह मिठाई कैसी है?

मैं अपने कमरे में जाते हुए बोला।

कम्मो भी मेरे पीछे आते हुए बोली- आप समझे नहीं क्या? अरे चम्पा के लड़का हुआ है।

मैं बोला- चम्पा के लड़का हुआ है तो मुझको काहे की बधाई? वो तो उसके पति का है ना!

कम्मो बोली- हाँ है तो उसके पति का लेकिन छोटे मालिक मेहनत तो आपने की थी और निर्मला कह रही थी कि लड़का बहुत ही सुन्दर है और एकदम हृष्ट पुष्ट।

मैं बोला- चलो अच्छा हुआ, बेचारी बहुत दिनों से आस लगाये बैठी थी।

कम्मो बोली- हाँ वो तो है! अब रह गई फुलवा, उसका भी कुछ समाचार जल्दी ही आएगा।

मैं बोला- और सुनाओ, क्या दोनों को डॉक्टर के पास ले गई थी?

कम्मो बोली- हाँ, वही निकला जो मैंने सोचा था। दोनों को इन्फेक्शन है और अगर लग कर इलाज नहीं कराया तो अंजाम खराब हो सकता है, डॉक्टर ने कहा है।

मैंने पूछा- दवाइयाँ ले आई हो ना उनकी?

कम्मो ने हाँ में सर हिला दिया और वो मेरा खाना लाने के लिए चली गई।

खाना खा कर मैं गहरी नींद में सो गया।

शाम को दोनों बहनें आकर बैठक में मेरे पास बैठ गई।

मैंने उपचारिक तौर से पूछा- दवाई खाई क्या?

दोनों ने हाँ में सर हिला दिया।

उनको हमारे साथ रहते हुए करीब एक हफ्ता होने लगा था। सो वो दोनों मेरे साथ थोड़ी खुल चुकी थीं। कुछ सोचते हुए बड़ी गीति बोली- सोमू, हम शाम को बोर हो जाती हैं, अगर तुम इजाज़त दो तो हम कुछ अपनी सहेलियों को यहाँ बुला लें? हमारे साथ कुछ गपशप हो जायेगी तो हमारा दिल भी बहल जाएगा।

मैंने कहा- हाँ हाँ, ज़रूर बुला लिया करो और उनके आने से पहले पारो आंटी को बता दिया करो ताकि वो कुछ नाश्ता इत्यादि बना दिया करे उन लोगों के लिए!

गीति बोली- मैं अभी उनसे फ़ोन पर बात करती हूँ अगर वो आना चाहें तो आ सकती हैं।

थोड़ी देर बाद दो लड़कियां आईं। गीति जो बाहर उनका इंतज़ार कर रही थी, उनको लेकर बैठक में आई और मुझसे मिलवाया।

दोनों ही बड़ी चुलबली लगी।

वो चारों बातें करने लगी तो मैं उठ कर अपने कमरे में आ गया और एक किताब पढ़ने लगा।

उस रात कमरे का दरवाज़ा अच्छी तरह से बंद किया और पहले पारो को चोदा और फिर कम्मो को।

मैंने कम्मो से पूछा- मैं कई बार तुम दोनों के अंदर छूटा रहा हूँ कहीं तुम को गर्भ का खतरा तो नहीं हो जाएगा?

कम्मो हँसते हुए बोली- नहीं छोटे मालिक, पहले वाली गलती को दोहराने नहीं दूंगी इसलिए मैं और पारो, एक ख़ास दवा आती है, उसका इस्तेमाल कर रहीं हैं, आप निश्चिंत रहो।

सुन कर मुझको बड़ी तसल्ली हुई।

अगले दिन कालेज से लौटने पर गीति और विनी दोनों मेरे पास आई और कहने लगी- सोमू, एक नई पिक्चर सिनेमा हाल में लगी है, हम वो देखना चाहती हैं, तुम चलो हमारे साथ।

कुछ देर सोचने के बाद मैंने हाँ कर दी, हम तीनों रिक्शा पर बैठ कर सिनेमा हाल पहुँच गए।

टिकट लेने के बाद अंदर बालकॉनी की तरफ जा ही रहे थे कि गीति की दो सहेलियाँ मिल गई और वो भी हमारे संग हो लीं।

सिनेमा हाल की बालकॉनी थोड़ी सी भरी थी और बाकी खाली थी।

गीति और उसकी एक सहेली इकट्ठी बैठ गई और फिर विनी बैठ गई और मेरे साथ वाली सीट पर एक गोरे रंग वाली लड़की बैठ गई।

उस लड़की को मैंने ध्यान से देखा, काफी सुन्दर थी और सुडौल जिस्म वाली थी। परिचय हुआ तो उसका नाम परिणीता था प्यार का नाम परी बताया उसने और हमारी कोठी के पास वाली कोठी में रहती थी।

इतने में हाल में अँधेरा हो गया, कोई 10 मिन्ट पिक्चर चली होगी कि मैंने महसूस किया कि किसी का हाथ मेरी जाँघ पर चल रहा है। मैंने कोई खास ध्यान नहीं दिया क्यूंकि पिक्चर काफी रोमांटिक थी और मैं काफी तल्लीनता से पिक्चर देख रहा था।

थोड़ी देर बाद ऐसा लगा कि वही हाथ मेरी पैंट पर ठीक लंड के ऊपर चल रहा है।

मैं समझ गया कि यह हाथ परी का ही है, वो हाथ बाहर से मेरी पैंट पर लंड को सहला रहा था।

मैं भी आनन्द लेने लगा और धीरे धीरे मेरा लंड खड़ा होना शुरू हो गया। परी का हाथ अब सिर्फ मेरे लंड के ऊपर ही था। जैसे ही हाल में थोड़ी रोशनी हुई तो परिणीता ने अपना हाथ हटा लिया।

मुझको शरारत सूझी और मैंने अपना लंड पैंट में से निकाला और खड़े लंड को पैंट के बाहर ही रख दिया और ऊपर हाथ रख दिया।

थोड़ी देर में फिर अँधेरा जब गहरा हुआ तो सूरी का हाथ ढूंढता हुआ मेरे लौड़े पर आ गया।

जैसे उसने खड़े लंड को हाथ लगाया और महसूस किया कि वो पैंट के बाहर है तो उसको एक झटका लगा और उसने अपना हाथ झट से खींच लिया।

मैं वैसे ही बैठा रहा। कुछ मिन्ट के बाद वो हाथ फिर से मेरे लंड को टटोलता हुआ लंड के ऊपर आ कर टिक गया। उसके हाथ ने लंड को अपनी मुट्ठी में ले लिया और उसको हल्के हल्के सहलाने लगा।

तभी उसने मेरा हाथ पकड़ा और उसको अपनी जांघ के ऊपर रख दिया।

मैंने भी देर किये बगैर उसकी जांघ पर हाथ फेरना शुरू कर दिया क्यूंकि वो साड़ी पहने थी तो मैंने अंदाज़े से हाथ को उसकी चूत पर रख दिया और उसको हल्के हल्के साड़ी के बाहर से ही सहलाने लगा, फिर हिम्मत करके मैंने हाथ उसके नंगे पेट पर फेरने लगा और कुछ देर बाद उसके मम्मों की टोह लेने लगा।

यह सारा काण्ड इतने चुपके से हो रहा था कि साथ में बैठी हुए विनी को कोई खबर नहीं लग रही थी।

अब मैं उसके गोल और सॉलिड मम्मों को पूरी तरह से हाथ में ले कर हल्के से मसलने लगा।

!

थोड़ी देर बाद मैंने महसूस किया कि उसकी साड़ी उसके घुटने के ऊपर आ चुकी थी। मैंने मम्मे को छोड़ कर हाथ उसके घुटने पर रख दिया और धीरे से हाथ उसकी साड़ी के अंदर डालने लगा।

परी का हाथ लगातार मेरे खड़े लौड़े के साथ खेल रहा था। मेरे हाथ को साड़ी के अंदर जाते महसूस कर उसने अपनी झांगें और चौड़ी कर दी।

मेरा दायां हाथ अब उसकी चूत के बहुत निकट पहुँच चुका था, तभी विनी को हल्की सी खांसी आने लगी, हम दोनों ने अपने हाथ खींच लिए।

जब विनी सामान्य हुई तो हम दोनों के हाथ फिर अपने सफर पर चल पड़े। अब जल्दी से मैंने अपने हाथ को उसकी साड़ी के अंदर दुबारा डाल कर खुली हुई जांघों को पार कर उसकी झांटों से भरे किले के पास पहुँच गया, वहाँ उसकी चूत से टपक रहे रस को महसूस करने लगा और परी का भी हाथ अब मेरे लंड को ऊपर नीचे करने लगा।

मेरा लंड इस वक्त बहुत ही सख्त खड़ा था और वो बिदके हुए घोड़े की तरह हिनहिनाने लगा और परी के मुलायम हाथ में उछालें मारने लगा।

इधर मैं भी उसके भग को हल्के हल्के सहलाने लगा और परी की टांगें कभी बंद और कभी खुल रही थी जिससे ज़ाहिर था कि उसको बड़ा ही आनन्द आ रहा था।

फिर मैंने अपने हाथ की बीच वाली ऊँगली को उसकी खुली चूत के अंदर डाल दी और हल्के से रगड़ने लगा।

थोड़ी देर में एक ज़ोरदार हुंकार भर कर परी ने अपनी जांघों को भींच लिया और मेरे हाथ को जांघों के बीच जकड़ लिया और एक छोटे से कम्पन के बाद वो एकदम ढीली पड़ गई।

मैंने उसकी चूत से रिसते हुए रस को अपने हाथों में ले लिया और फिर अपना हाथ खींच लिया।

मेरा हाथ एकदम परी की चूत से निकल रहे रस में डूब गया।

तब उसने धीरे से मेरा हाथ अपनी साड़ी से निकाल दिया, अपना हाथ भी मेरे खड़े लौड़े के ऊपर से हटा लिया और अपनी साड़ी भी ठीक कर के सामान्य रूप में बैठ गई।

थोड़ी देर बाद पिक्चर का इंटरवल हो गया और हम सब उठ कर बाहर आ गए।

मैंने लड़कियों से पूछा- क्या पियेंगी या खायेंगी?

सब बोली- हम तो नई वाली कोका कोला की बोतल पियेंगी।

और मैं सबके लिए कोका कोला लेने चला गया और मेरे साथ परी भी चल दी कि शायद मदद की ज़रूरत पड़ेगी।

रास्ते में अपनी ऊँगली को बार बार सूंघ रहा था जिसको देख कर परी बहुत शर्मा रही थी, वो कहने लगी- सोमू, तुम्हें इस ऊँगली से बहुत खुशबू आ रही है क्या?

मैंने झट उसी ऊँगली को परी की नाक के नीचे रख दिया जो कुछ मिन्ट पहले उसकी चूत में डाली थी।

वो थोड़ी शर्माते हुए बोली- वाह सोमू, बड़ी खुश्बू आ रही है इस ऊँगली से। कहाँ डाला था इसको?

मैं बोला- बड़ी प्यारी जगह थी वो! यही सोचता हूँ क्या वहाँ अपना सब कुछ डालने का सौभाग्य दोबारा मिल सकेगा या नहीं?

परी ज़ोर से हंस दी और बोली- अगर कोई दिल से चाहे तो सुना है वह चीज़ अवश्य मिल जाती है।

फिर हम कोका कोला की बोतलें लेकर वापस आ गए और सबको एक एक दे दी। बर्फ में लगी ठंडी बोतल पी कर सब लड़कियाँ खुश हो गई।

फिर इंटरवल खत्म हो गया और हम सब अपनी सीटों पर आकर बैठ गए।

लेकिन मेरे साथ वाली सीट पर अब कोई और लड़की बैठी थी, उसने अपना परिचय खुद ही दिया- मैं जसबीर हूँ और हम सब लड़कियाँ एक ही कॉलेज में एक ही क्लास में पढ़ती हैं। वैसे मेरा घर का प्यारा नाम जस्सी है।

मैं बोला- बड़ी ख़ुशी हुई आप से मिल कर, वो परी कहाँ गई?

जस्सी बोली- वो तो दूपरी सीट पर बैठी है, आपको कोई ऐतराज़ तो नहीं न?

मैं बोला- नहीं तो।

सिनेमा हॉल की लाइट बंद होने से पहले मैंने ध्यान से जस्सी को देखा वो भी काफी गोल मोल थी लेकिन रंग थोड़ा सांवला था और उसने सलवार कमीज पहन रखी थी।

वो शायद पंजाबी थी।

उसके मम्मे काफी बड़े और गोल मोल थे और उसकी गांड भी मोटी और उभरी हुई थी, काफी सेक्सी लग रही थी।

जब पिक्चर इंटरवल के बाद शुरू हुई तो वही कहानी दोबारा दोहराई जाने लगी। यानी जस्सी ने भी परी की तरह मेरे लंड को पकड़ लिया।

उसने खुद मेरी पैंट के बटन खोल कर लंड को बाहर निकाला और उसके साथ मस्त खेलने लगी। मैंने भी फ़ौरन हाथ उसकी सलवार में छुपी उसकी चूत के ऊपर रख दिया और उसको हल्के से रगड़ने लगा।

तब उसने सलवार का नाड़ा हल्के से खोला और इतना खुला कर दिया कि मेरा हाथ सलवार के अंदर जा सके।

मैंने भी अपना दायां हाथ उसकी सलवार में डाल दिया और सीधा उसकी बालों से भरी चूत पर हाथ रख दिया। वो भी मेरे लंड की मुठी मारने लगी और मैं भी अपनी मध्यम ऊँगली उसकी चूत में डाल कर रगड़ने लगा।

थोड़ी देर यह खेल चलता रहा, फिर उसने अपना मुंह मेरे मुंह के पास लाकर मेरे गाल को चूम लिया और मैंने भी ऐसा ही किया।

अब वो जल्दी जल्दी मुट्ठी मारने लगी लेकिन मेरा लौड़ा तो मुट्ठी से डरने वाला नहीं था, वो सर उठाये जमा रह अपनी जगह!

मैंने भी उसकी भग को रगड़ने की गति तेज़ कर दी और 5 मिन्ट में ही वो पानी छोड़ बैठी। थोड़ा सा पानी मेरी ऊँगली में लगा जिसको सूंघा तो वैसी ही खुश्बू थी।

मैंने हाथ खींच लिया और उसने भी हाथ को हटा लिया।

जब पिक्चर खत्म हुई तो सारी लड़कियाँ मेरे साथ चलने की होड़ में लगी रही लेकिन मैंने अपने लिए अपना साथी तय कर लिया था और वो थी परी।

मैं उसके साथ चलने लगा और उसको अपना फ़ोन नंबर बता दिया और कहा- जब तुम चाहो मेरी कोठी में आ सकती हो।

फिर हम तीनों तो अलग रिक्शा पकड़ कर घर आ गए और वो दोनों लड़कियाँ अलग से अपने घर चली गई।

मैंने सारी कहानी कम्मो को बताई और कहा- मुझको परी की चूत ज़रूर लेनी है, जैसे भी हो।

मैं तो पिक्चर मैं काफी गरम हो चुका था, मैंने पारो और कम्मो की चूत पर सारी गर्मी उतारी।

दोनों हैरान थी कि मुझको क्या हो गया है, मैं उन दोनों को छोड़ ही नहीं रहा था, एक के बाद एक को चोद रहा था।

अगले दिन कम्मो ने बताया कि कल रात मैं कैसे पागल हो गया था उनकी चूतों के पीछे और दोनों को कम से कम 7-8 बार चोदा था मैंने।

सुबह वो दोनों बहुत ही थक गई थी और मैं भी काफी थका हुआ था।
 
परी की चूत चुदाई का कार्यक्रम

अगले दिन कम्मो ने बताया कि कल रात मैं कैसे पागल हो गया था उनकी चूतों के पीछे और दोनों को कम से कम 7-8 बार चोदा था मैंने।

सुबह वो दोनों बहुत ही थक गई थी और मैं भी काफी थका हुआ था, हम बिस्तर पर ही लेटे रहे क्योंकि वो दिन इतवार का दिन था, कहीं जाना आना नहीं था।

पारो गई और रसोई से तीनों के लिए चाय बना लाई।

गरम गरम चाय पी कर बड़ा ही आनन्द आ रहा था।

वे दोनों अपने घर के कामों में लग गई लेकिन मैं तो परी की याद में इस कदर डूबा हुआ था कि मुझको कोई होश ही नहीं था। मैं बैठक में आकर बैठ गया जहाँ वो दोनों बहनें भी आ गई और गपशप मारने लगी।

मैंने कहा- तुम्हारी सहेली परी और जस्सी मुझे अच्छी लगी।

गीति बोली- तुम कहो तो बुलवा लेते हैं परी को, वो तो पास ही रहती है।

मैं बोला- नहीं नहीं, ऐसे बुलाना ठीक नहीं। तुम उसको दोपहर के लंच के लिए बुला लो। कुछ ख़ास बनवा लेंगे हम और मिल जुल कर खाना खाएंगे। बोलो ठीक है?

दोनों ने सर हिला दिया और गीति ने कहा- यह ठीक रहेगा, उसको खाने पर बुलवा लेते है। मैं अभी उसको फ़ोन करती हूँ।

गीति ने परी को फ़ोन किया और परी ने आने के लिए हामी भर दी।

मैंने पारो और कम्मो को बुलाया और कहा- गीति और विनी की सहेली आज दोपहर का लंच यहीं करेगी, कुछ अच्छा बना लेना।

पारो बोली- क्या वो मीट और चिकन खाती है?

गीति बोली- हाँ हाँ, वो सब खाती है।

मैं बोला- पारो, तुम चिकन बना लो और साथ में कुछ नान बाहर से मंगवा लो। आइसक्रीम अगर घर में नहीं तो वो भी मंगवा लो। राम लाल को भेज कर सब चीज़ें मंगवा लो, और हाँ, उसको कहना एक दर्जन कोका कोला की बोतलें भी ले आएगा।

मेरे मुंह पर झलकती ख़ुशी को सिर्फ कम्मो ही भांप सकी और जाते जाते मुझको आँख मार गई।

जब मैं अपने कमरे में आया तो कम्मो भी पीछे पीछे आ गई। मैंने उसको बाँहों में भर लिया और उसके होटों पर एक ज़ोरदार चुम्मी जड़ दी। फिर मैंने उसको पास बिठा कर कहा- कम्मो रानी, आज परी की चूत दिलवा दो किसी तरह। वो पूरी तरह से तैयार है लेकिन सिर्फ जगह की कमी है। वो तुम सोचो कि कहाँ और कैसे होगा मेरा और परी का चुदाई का खेल?

कम्मो बोली- आप निश्चिंत रहें, मैं कुछ न कुछ इंतज़ाम करती हूँ।

और मुस्कराती हुई वो चली गई।

ठीक 12 बजे दोपहर परी हमारी कोठी में आ गई। मैंने और लड़कियों ने उसका स्वागत किया और फिर हम सबने कोक पिया।

फिर कम्मो से मिलवाया परी को और कम्मो ने कहा- अभी खाना खाने में तो समय है, क्यों न आप कुछ खेल खेल लो, जैसे लूडो है ताश है।

सबने कहा- ताश खेलते हैं।

कम्मो ताश ले आई और हमने कहा- रमी गेम खेलते हैं।

कम्मो ने कहा- ठीक है, आप दो दो की टीम बना लो। एक टीम में परी और छोटे मालिक होंगे और दूसरी में गीति और विनी होंगी। हालाँकि यह गीति को पसंद नहीं आया लेकिन वो कुछ बोल नहीं सकी।

ताश का गेम शुरू हुआ और शुरू से ही मैं और परी जीतने लगे। यह देख कर गीति बोली- यह गेम ठीक नहीं, कुछ और खेलते हैं।

परी बोली- अगर आप सब मानो तो झूठ मूठ का तीन पत्ती खेल खेलते हैं जो एक किस्म का जुआ होता है। एक एक पत्ता ताश का बांटेंगे सबको, जिसका पत्ता सबसे बड़ा होगा वो जीतेगा और सबसे कम वाला हारा हुआ माना जाएगा। फिर उससे जो हम कहेंगे उसको वो करना पड़ेगा।

मैं बोला- उस हारे हुए से क्या करवाएंगे?

परी बोली- वो सबको किस करेगा या फिर जो हम चाहेंगे, उसको वो करना पड़ेगा।

सब बोले- ठीक है।

पत्ते बांटे गए और फिर उनको एक एक कर के सीधा किया तो सबसे छोटा पत्ता मेरा ही निकला।

सब लड़कियाँ ताली बजाने लगी, मैंने कम्मो की तरफ देखा, उस ने मुझ को आँख मारी, कम्मो बोली- चलो छोटे मालिक, अब आप तैयार हो जाओ। बोलो लड़कियो, आपकी क्या मर्ज़ी है?

परी बोली- सोमू मुझको किस करे लिप्स पर और फिर गीति को किस करे और फिर वो विनी को किस करेगा। चलो शुरू हो जाओ।

मैं बोला- ठीक है, लेकिन किस यहाँ नहीं करूंगा बल्कि अपने बेडरूम में करूंगा। मंज़ूर है तुम सबको?

सब एक आवाज़ में बोली- ठीक है।

कम्मो बोली- मैं एक एक लड़की को ले जाऊँगी बैडरूम में और सिर्फ 5 मिन्ट दिए जाएंगे हर एक को!

मैं अपने बैडरूम में चला गया और मेरे पीछे ही परी भी आ गई। आते ही उसने मुझको कस कर अपनी बाँहों में भींच लिया और ताबड़तोड़ मुझको चूमने लगी।

जब वो मुझको चूम रही थी तो मेरे हाथ उसके चूतड़ों पर दौड़ रहे थे और कभी उसके मम्मों को टोह रहे थे। परी का एक हाथ मेरे लंड पर था जो अब तक पूरा खड़ा हो चुका था और दूसरा मेरी गर्दन में लिपटा था।

मैंने किसिंग के बीच उससे पूछा कि वो कब मेरे घर आ सकती है जब ये बहनें न हों?

परी ने पूछा- क्यों?

मैंने कहा- आगे कार्यक्रम नहीं करना क्या?

वो बोली- तुम कर पाओगे क्या?

मैं बोला- तुमको कोई शक है क्या?

परी ने कहा- अच्छा देखेंगे।

मैं समझ गया कि वो झिझक रही है आगे के काम के लिए। तो मैं भी ज़रा पीछे हट गया और बोला- हमारा 5 मिन्ट का समय ख़त्म हो गया, चलो वापस!

उसने बेदिली से मुझको छोड़ा लेकिन मैं जल्दी बैठक में गया और गीति को साथ ले आया।

उसको किस करने के बाद विनी को भी किस करना पड़ा।

फिर हम हाल में इकट्ठे हुए और तब तक कम्मो ने कहा- खाना तैयार है, सब डाइनिंग रूम में चलो।

खाने के बाद मैं लड़कियों से इजाज़त लेकर अपने कमरे में आ गया। मेरा मन उदास हो गया था कि परी कोई ज्यादा आगे नहीं बढ़ रही थी।

जब सब चली गई तो कम्मो ने कहा- अच्छा हुआ छोटे मालिक, परी तैयार नहीं हुई, वरना आप बदनाम हो जाते।

मैंने कहा- तो सिनेमा हाल में इतना आगे बढ़ना गलत था उसका?

कम्मो बोली- हाँ, वो तो ठीक नहीं किया उसने अगर आगे बढ़ने में हिचक थी। खैर छोड़ो आप आराम करो, उन लड़कियों को बातें करने दो आपस में।

मैं अपने कमरे में आकर लेट गया और जल्दी ही नींद लग गई।

कुछ देर बाद महसूस किया कि कोई मेरे लंड के साथ खेल रहा है। आँख खोली तो देखा तो परी मेरे पलंग पर बैठी थी और लंड को पैंट से निकाल कर मुठी मार रही थी।

मुझको यह अच्छा नहीं लगा, मैं बोला- यह क्या कर रही हो तुम?

वो बोली- चुप सोमू, कम्मो तुमको सब बताएगी।

फिर कम्मो ने बताया कि खाने के बाद परी को मैं गेट के बाहर छोड़ने आई थी लेकिन तभी इसने मुझसे कहा- वो दोनों बहनें तो अंदर चली गई हैं, तुम मुझको सोमू के कमरे में ले चलो। इसलिए मैं इसको तुम्हारे पास लेकर आई हूँ। यह आगे कार्यक्रम के लिए तैयार है।

पहले तो मैं खुश हुआ लेकिन फिर मन में ख्याल आया कि यह कहीं कुंवारी तो नहीं है?

मैंने कम्मो से यह सवाल पूछा तो वो बोली- यह पहले चुद चुकी है एक दो लड़कों से!

मैं उठा और परी को अपनी बाहों में भर लिया। कम्मो को देख कर परी थोड़ी शरमाई लेकिन कम्मो ने कहा- मैं यहाँ इसलिए हूँ कि आप दोनों का मिलन ठीक से हो जाए और कोई डिस्टर्ब न करे और फिर आपको हेल्प भी करूंगी ना।

मैंने कहा- कम्मो ठीक कह रही है, उसके होते कोई शक नहीं करेगा कि अंदर क्या हो रहा है।

परी बोली- ठीक है कम्मो आंटी।

झटसे मैंने अपने कपड़े उतार दिए और परी के कपड़े उतारने में कम्मो मदद करने लगी। जब हम दोनों नंगे हो गए तो परी ने मेरे खड़े लौड़े को देखा और हैरानगी से कहा- इतना बड़ा है यह तो, कल तो नहीं लगा था कि यह इतने बड़े साइज का है। मैं इसको झेल पाऊँगी क्या?

कम्मो और मैं एकदम हैरान हो गए, यह बात पक्की हो गई कि परी ने पहले कभी लंड देखा ही नहीं था।

अगर ऐसा ही है तो परी तो कुंवारी चूत थी।

मैंने अपने कपड़े पहनने शुरू कर दिए।

यह देख कर परी बोली- यह क्या कर रहे हो सोमू तुम?

मैं बोला- परी, तुमने कम्मो से झूठ बोला कि तुम पहले चुदी हुई हो। तुम तो कुंवारी चूत हो। कम्मो ज़रा चेक करना तो इसको?

कम्मो ने परी को पलंग पर लिटा दिया और उसकी चूत में ऊँगली डाली और बोली- आप ठीक कह रहे हैं छोटे मालिक। यह तो कुंवारी है अभी तक!

परी रोने लगी और रोते हुए उसने कहा- सोमू, तुम मुझको अच्छे लगे तो मैं चाहती थी कि तुम्ही मेरी कुंवारी चूत को पहली बार चोदो। कम्मो आंटी कहो न सोमू से कि ये ही है मेरे सपनों का राजा।

कम्मो बोली- छोटे मालिक, आप कपड़े पहन कर बैठक में बैठो, मैं परी से कुछ बातें अकेले में करना चाहती हूँ।

मैं कपड़े पहन कर बैठक में आ गया और पंखे को फुल स्पीड पर चला दिया।

थोड़ी देर बाद कम्मो बैठक में आई और मुझको लेकर फिर बैडरूम में गई।

फिर उसने बताया- परी आप से चुदवाना चाहती है और वो यह लिख कर देने को तैयार है।

मैंने कहा- उसकी ज़रूरत नहीं!

उधर परी को देखा वो अपना पेटीकोट पहन कर बैठी थी, उसके गोल मम्मे सफ़ेद संगमरमर की तरह लग रहे थे और उसका पेट भी एकदम सफ़ेद रंग का तराशा हुआ संगमरमर लग रहा था।

मेरा लौड़ा जो तकरीबन बैठ चुका था, अब फिर से तन रहा था।

मैंने झट से कपड़े उतार दिए और परी के पेटीकोट का नाड़ा खींच दिया और जब वो पूरी तरह से नंगी हो गई तो उसको फिर ध्यान से देखा, उसकी काले बालों से ढकी चूत सफ़ेद पेट और जांघों के बीच चमक रही थी।

कम्मो ने परी को लाकर मेरे पास खड़ा कर दिया और मैं इस कुंवारी चूत को बड़ी हसरत भरी नज़र से देख रहा था।
 
परी की कुंवारी सुरीली चूत

परी को देखा वो अपना पेटीकोट पहन कर बैठी थी, उसके गोल मम्मे सफ़ेद संगमरमर की तरह लग रहे थे और उसका पेट भी एकदम सफ़ेद रंग का तराशा हुआ संगमरमर लग रहा था।

मेरा लौड़ा जो तकरीबन बैठ चुका था, अब फिर से तन रहा था।

मैंने झट से कपड़े उतार दिए और परी के पेटीकोट का नाड़ा खींच दिया और जब वो पूरी तरह से नंगी हो गई तो उसको फिर ध्यान से देखा, उसकी काले बालों से ढकी चूत सफ़ेद पेट और जांघों के बीच चमक रही थी।

कम्मो ने परी को लाकर मेरे पास खड़ा कर दिया और मैं इस कुंवारी चूत को बड़ी हसरत भरी नज़र से देख रहा था। मैंने अपना मुंह उसकी चूत के काले बालों में डाल दिया और उसकी चूत की खुश्बू सूंघने लगा। उस दिन से पहले मैंने कभी कुंवारी चूत नहीं देखी थी तो मैं परी को पलंग पर लिटा कर उसकी चूत को अच्छी तरह देखने लगा।

फटी हुई चूत से कुंवारी चूत काफी भिन्न होती है यह मैंने उस दिन देखा। चूत में कोई भी खरोंच या दाग नहीं दिखा और पूरा खोलने पर उसका रंग एकदम गुलाबी दिखा जबकि फटी चूत थोड़ी लाली लिए होती है।

परी का एक हाथ मेरे लंड के साथ खेल रहा था और दूसरे से वो मेरी छाती के निप्पल को मसल रही थी। लंड की सख्ती और भी बड़ रही थी और वो परी के हाथ में उछाल भर रहा था, वास्तव में वो जल्दी ही गृहप्रवेश करना चाहता था लेकिन मैंने उसको अभी तक काबू रखा था।

उधर कम्मो भी अपने कपड़े उतार चुकी थी और वो परी के मम्मों को चूसने में लगी थी। फिर उसने एक मम्मा मेरे मुंह में डाल दिया और कहा- इसको खूब चूसो।

मैं भी जैसे छोटा बच्चा दूध के लिए चूसता है वैसे ही परी के एक मम्मे को चूस रहा था। फिर मैं उसके दूसरे सफ़ेद मम्मे पर आ गया और उसको भी पहले की तरह खूब चूसा।

कम्मो परी की चूत को तैयार कर रही थी बड़े हमले के लिए… उसकी जीभ उसकी भग को चूस रही थी और परी की कमर एकदम ऊपर उठी हुई थी और हाथ कम्मो के मुंह और बालों के साथ लगे हुए थे और उसको चूत में डालने की कोशिश कर रही थी।

परी के मुख से हल्की से सिसकारी निकल रही थी और उसके चूत से पानी की अविरल धारा बह रही थी।

तब कम्मो ने मुझको इशारा किया कि अपनी तोप का मुंह परी के चूत वाले किले के मुंह पर रख दूँ। मैंने ऐसा ही किया और एक हल्का सा धक्का लंड को मारा और उसको मुंह चूत के अंदर थोड़ा सा चल गया और धक्का मारा तो अंदर कुछ रुकावट लगी।

लंड को फिर थोड़ा बाहर निकाला और फिर एक हल्का धक्का मारा वो फिर वही रुकावट वाली जगह पर जा कर रुक गया। तब कम्मो उठी और पोंड्स क्रीम ले आई और उसको मेरे लंड और चूत पर बहुत सारा मल दिया और बोली- धक्का मारो ज़ोर का, छोटे मालिक।

मैंने उसके कहे मुताबिक़ एक काफी ज़ोर का धक्का मारा लंड का और कुछ फटने की आवाज़ के साथ ही मेरा लंड पूरा परी की चूत में चला गया।

उधर कम्मो ने परी के मुंह में एक रुमाल डाल रखा था ताकि उसके मुंह से आवाज़ बाहर न जाए।

मैं अपने लंड को परी की चूत में डाल कर थोड़ी देर आराम करने लगा। फिर मैंने लंड को धीरे धीरे अंदर बाहर करने लगा और परी की चूत के गीलेपन के कारण लंड महाशय पूरी आज़ादी से अंदर बाहर होने लगे।

अब मैंने अपना मुंह परी के होटों से चिपका दिया और उसको बड़ी गहरी चूमाचाटी करने लगा, अपनी जीभ उसके मुंह में डाल कर गोल गोल घुमाने लगा, वो भी मेरे को पूरी गहराई से चूम रही थी।

ऐसा लगा कि वो अपने चूत के दर्द को भूल कर अब चूत चुदाई का आनन्द ले रही थी। उधर कम्मो परी के मुंह को तौलिये से पौंछ रही थी क्यूंकि उस पर पसीने की बूँदें आ गई थी।

अब मैंने लंड की स्पीड तेज़ कर दी और काफी जल्दी से अंदर बाहर होने लगा और परी भी अपने चूतड़ उठा उठा कर मेरे धक्कों का जवाब दे रही थी।

कम्मो ने मेरे चूतड़ों पर थपकी मारनी शुर कर दी और मैंने लंड की स्पीड बहुत ही तेज़ कर दी। तभी मुझको लगा कि परी का पानी छूटने वाला है और फिर मेरे धक्के गहरे और तेज़ हो गए और मैं फुल स्पीड पर जब आया तो परी का पानी छूट गया और मेरा भी फव्वारा चल पड़ा।

अब परी ने मुझको कस कर अपने से चिपका लिया, उसकी सांसें बड़ी तेज़ी से चल रही थी और उसका शरीर पत्ते की तरह कांप रहा था। मैंने भी उसको पूरी ताकत से भींच रखा था।

जब वो थोड़ी सी संयत हुई तो मैंने उसको छोड़ दिया, उसकी आँखें बंद थी और उसके चेहरे पर एक बहुत प्यारी से मुस्कान थी जो यह जता रही थी कि वो पूरी तरह से आन्नदित हो गई थी।

कम्मो बहुत व्यस्त थी, वो परी के मुंह और शरीर को गीले तौलिये से ठंडा करने की कोशिश कर रही थी।

जब मैं परी के ऊपर से उठा और पलंग पर लेटा तो वो आ गई और मेरे शरीर को और लंड को तौलिये से साफ़ कर रही थी, मेरे लौड़े पर अभी भी परी की चूत के खून के दाग लगे थे।

!

फिर मैं और परी कुछ देर के लिए सो गए।

जब आधे घंटे बाद उठे तो कम्मो हमारे लिए स्पेशल दूध के गिलास लेकर खड़ी थी। दूध का पहला घूँट ही पिया तो एकदम आनन्द आ गया।

मैंने पूछा- क्या डाला है इसमें? बहुत ही स्वादिष्ट है और एकदम ठंडा है।

कम्मो बोली- तुम दोनों ने बहुत ही मेहनत की थी तो थकान कम करने के लिए है।

परी बोली- वाह कम्मो आंटी, आप तो कमाल की चीज़ हो। आपने मेरी बड़ी मदद की वरना बड़ा मुश्किल होता मेरे लिए!

कम्मो ने पूछा- तुमको आनन्द आया या नहीं?

परी बोली- बहुत मज़ा आया कम्मो आंटी।

यह कह कर परी ने मेरे खड़े लंड को पकड़ लिया और उसके साथ खेलने लगी, कम्मो ने परी से पूछा- क्या एक बार और चुदवाने की इच्छा है तुम्हारी?

परी ने फ़ौरन हाँ में सर हिला दिया और वो मेरी तरफ देखने लगी। मैंने भी उसकी चूत पर हाथ रखा और उंगली डाल कर चेक किया कि वो गीली हुई या नहीं।

उस वक्त वो फिर से काफी गीली हो चुकी थी, कम्मो ने क्रीम की शीशी से क्रीम लेकर उसकी चूत पर लगानी शुरू कर दी और थोड़ी सी मेरे लंड पर भी लगा दी।

फिर उसने परी को मेरे लंड पर बैठने के लिए कहा और अपने हाथ से मेरा लंड उसकी चूत के मुंह पर रख कर कहा कि वो ऊपर से ज़ोर लगाये।

परी ने ऐसा ही किया और लंड एक ही झटके में चूत के अंदर हो गया, तब वो धीरे धीरे लंड के ऊपर नीचे होने लगी।

मैं उसके गोल और सॉलिड मम्मों के साथ खेलता रहा और उसकी चूचियों को गोल गोल घुमाता रहा। परी ऊपर से मुझको चोद रही थी और मैं नीचे लेटे हुए आनन्द ले रहा था।

उसकी गोल गोल जांघों जो एकदम सफ़ेद संगमरमर की तरह थी, बहुत ही आकर्षक लग रही थी।

परी को चुदाई का बहुत आनन्द आ रहा था और वो कभी धीरे से या फिर तेज़ी पकड़ कर चुदाई का आनन्द ले रही थी।

एक बार फिर परी का चुदाई के दौरान पानी छूटा और वो कांपते शरीर के साथ मेरे ऊपर ही पसर गई। मेरा लंड अभी भी परी की चूत में ही था।

यह चुदाई का कार्यक्रम काफी देर चलता रहा। कम्मो ने मुझको इशारा किया कि बस अब और नहीं।

तब मैंने परी को हिलाया और वो उठी और अपने कपड़े पहनने लगी।

कम्मो उसको बाथरूम में ले गई और वो मुंह हाथ धो कर जब लौटी तो आते ही उसने मेरे लबों पर किसिंग करना शुरू कर दिया और फिर एक ज़ोरदार प्यार की जप्फी मुझ को मारी और मेरा थैंक्स करके घर जाने के लिए चलने लगी।

मैंने कम्मो को कहा कि वो उसको उसकी कोठी तक छोड़ आये।

परी ने कहा कि वो दोबारा आना चाहती है तो मैंने कहा कि फ़ोन कर लेना और कम्मो से या मुझसे प्रोग्राम तय कर लेना।

उन दोनों के जाने के बाद मैं थोड़ी देर के लिए लेट गया। थोड़ी देर बाद कम्मो लौट आई और सीधे मेरे पास ही आ गई, आते ही पूछा उसने- कैसी लगी परी आपको?

मैंने कहा- बहुत अच्छी… लेकिन आप दोनों के साथ मज़ा ही कुछ और है, खासतौर पर तुम्हारे सामने कोई भी लड़की या औरत नहीं टिक सकती। तुम्हारा सेक्स का स्टाइल और चुदाई के दौरान और बाद में अपने पार्टनर का ख्याल रखना शायद दूसरे औरतों या लड़कियों के बस में नहीं।

कम्मो बोली- छोटे मालिक, कल कोई और भी लड़की थी आप लोगों के साथ?

मैं बोला- हाँ थी तो सही, शायद उसका नाम जस्सी है, क्यों पूछ रही हो?

कम्मो बोली- वो शायद परी की खास सहेली है क्यूंकि उसने दो बार कहा लो जस्सी का भी सोमू कल्याण कर दे तो उसको बड़ा मज़ा आएगा।

मैं बोला- उसने भी वही किया था जो परी ने किया था सिनेमा हाल में!

कम्मो बोली- दोनों ही काफी गरम स्वाभाव की हैं शायद। परी ने इशारा फेंका है कि अगर सोमू चाहे तो जस्सी को भी चोद सकता है, वो भी परी की तरह अभी कुंवारी है।

मैं बोला- तुम क्या कहती हो कम्मो?

कम्मो बोली- मेरा सोचना यह है कि अभी तो ये दोनों बहनें बीमार चल रहीं हैं तो कोई आये या जाये इनको फर्क नहीं पड़ता लेकिन जब ये ठीक हो गई तो काफी मुश्किल कर देंगी दूसरी लड़कियों का आपके पास आना!

मैं बोला- ठीक कह रही हो कम्मो, तो तुम जस्सी के लिए मेरी तरफ से हाँ कर देती न!

कम्मो बोली- मैंने कह तो दिया है कि छोटे मालिक तैयार हो जाएंगे अगर आप कहें तो उससे पक्का कर लें।

मैं बोला- लेकिन हाँ करने से पहले यह भी तो सोचना पड़ेगा कि वो कब आ सकती है? मैं नहीं चाहता इन दो बहनों के सामने वो आये! ऐसा करो तुम परी को कहो कि कल वो कालेज के समय घर से निकले और जस्सी को लेकर सीधी हमारी कोठी में आ जाए। तब तक ये बहनें भी कालेज जा चुकी होंगी। क्यों यह प्लान कैसा रहेगा?

कम्मो बोली- तब तो आपको भी कालेज से छुट्टी लेनी पड़ेगी।

मैं बोला- नहीं, कल हमारे कालेज में इलेक्शन हैं, मैं बाद में चला जाऊंगा।

कम्मो बोली- ठीक है, मैं उस से अभी बात करती हूँ और कहूँगी कि दोनों साथ ही आयें।

मैं फिर अपने पलंग पर लेट गया और सोचने लगा कि एक और कुंवारी चूत के साथ मिलन होने जा रहा है।

थोड़ी देर बाद कम्मो आई और बोली- छोटे मालिक वो दोनों कल 10 बजे यहाँ पहुँच जाएंगी।

मैंने कम्मो को इशारा किया कि वो मेरे पास आये और जैसे ही वो आई मैंने उसको कस कर अपने सीने से लगा लिया और एक ज़ोरदार चुम्मा किया उसके होटों पर, जल्दी से अपना हाथ उसकी साड़ी के अंदर डाला और उसकी गीली चूत पर हाथ फेरा और चूत के बाल हल्के से खींचे।

उसने भी मुझको चूमा और फिर वो चली गई।
 
जस्सी अपनी कुंवारी चूत चुदवाने आई

मैं फिर अपने पलंग पर लेट गया और सोचने लगा कि एक और कुंवारी चूत के साथ मिलन होने जा रहा है।

थोड़ी देर बाद कम्मो आई और बोली- छोटे मालिक वो दोनों कल 10 बजे यहाँ पहुँच जाएंगी।

मैंने कम्मो को इशारा किया कि वो मेरे पास आये और जैसे ही वो आई मैंने उसको कस कर अपने सीने से लगा लिया और एक ज़ोरदार चुम्मा किया उसके होटों पर, जल्दी से अपना हाथ उसकी साड़ी के अंदर डाला और उसकी गीली चूत पर हाथ फेरा और चूत के बाल हल्के से खींचे।

उसने भी मुझको चूमा और फिर वो चली गई।

मैं भी बड़े ही प्रसन्न चित से बैठक में आकर बैठ गया और बार बार परी की कुंवारी चूत की चुदाई को याद करके आनन्द लेने लगा।

परी बड़ी सुंदर लड़की थी जो मेरे पास ख़ास तौर पर चुदवाने के लिए आई थी। शायद यह सिनेमा में हुई हमारी मुलाकात का नतीजा था जहाँ परी ने देखा कि उसकी कोशिश करने के बाद भी मेरा लौड़ा बैठा नहीं अपनी अकड़ पर डटा रहा था। शायद यही कारण था की परी इतनी जल्दी मुझसे चुदवाने के लिए तयार हो गई थी।

कम्मो का भी यही मानना था कि जब उसने और उसकी सहेलियों ने मेरे खड़े लंड को देखा तो उनको विश्वास नहीं हुआ था कि मेरा लंड इतनी देर खड़ा रह सकता है और उनकी चूत को हरा सकता है बार बार।

कभी कभी मैं साफ़ महसूस करता था कि मेरे संपर्क में आई सारी स्त्रियाँ मेरे करामाती लंड का विश्वास नहीं करती थी इसीलिए वो बार बार मुझसे चुदवाती थी कि शायद अबकी बार सोमू का लंड खड़ा नहीं हो पायेगा इतनी जल्दी और वो इस प्यारी लड़ाई में जीत जाएंगी।

लेकिन हर बार उनको हार का मुंह देखना पड़ता था।

अगले दिन दोनों बहनें अपने समय पर कालेज चली गई थी। जैसे ही वो रिक्शा में बैठी तभी कम्मो ने परी को फ़ोन कर दिया कि बहनें चली गई हैं।

जल्दी ही मैंने देखा कि कम्मो परी और जस्सी को साथ लेकर आ रही थी।

उन दोनों को पहले बैठक में ही बिठाया, कम्मो फिर मेरे पास आई यह बताने कि वो दोनों आ गई हैं।

मैंने उस समय पैंट कमीज पहन रखी थी, मैं बैठक में आ गया।

दोनों के साथ हेलो हुआ और फिर कम्मो हम सबके लिए कोकाकोला ग्लासों में डाल कर ले आई।

औपचारिक बातचीत के बाद मैं ही उनको आज के असली मुद्दे पर ले आया, मैंने परी से पूछा- अब कैसी हो तुम परी? सब ठीक है न?

परी बोली- हाँ सोमू, सब ठीक है, ऊपर नीचे सब ठीक है।

उसने शरारत के लहजे में बोला।

मैंने भी वैसे ही जवाब दिया- चलो अच्छा है जल्दी सब ठीक हो गया है। और सुनाओ, जस्सी को भी मिल कर बड़ी ख़ुशी हुई। कैसी हो जस्सी जी?

जस्सी थोड़ा शर्माते हुए बोली- मैं ठीक हूँ सोमू।

मैं बोला- जस्सी तुम्हारे नाम और पहनावे से लगता है कि तुम पंजाबी हो?

जस्सी बोली- हाँ जी, मैं सिखनी हूँ और आपकी कोठी से थोड़ी दूर हमारा मकान है।

मैं बोला- वेरी गुड… फिर क्या प्रोग्राम है?

परी बोली- वही जो कल वाला प्रोग्राम था, जस्सी उसके लिए तैयार होकर आई है।

कम्मो बोली- जस्सी, तुम मेरे साथ छोटे मालिक के कमरे में आओ।

वो दोनों चले गए तो परी ने पूछा- कहाँ गई हैं दोनों?

मैं बोला- वो कुछ नहीं, ज़रा जस्सी से कुछ बातें कर रही है।

थोड़ी देर में दोनों वापस आ गई और कम्मो बोली- सब ठीक है छोटे मालिक, आओ हम छोटे मालिक के कमरे में चलते हैं।

यह कह कर हम तीनो कम्मो के पीछे मेरे बैडरूम में चले गए।

वहाँ पर और जस्सी को बिठा कर कम्मो बाहर चली गई और कह गई- मैं अभी आती हूँ।

तब परी ने आगे बढ़ कर मुझ को लबों पर चूम लिया और मैंने भी उसको एक बहुत ही गहरी चुम्मी दी।

फिर मैंने एक हाथ परी के चूतड़ पर रख दिया और उसको हल्के हल्के मसलने लगा।

परी बड़े ही प्यारे रंग की सिल्क की साड़ी पहने हुए थी और मेरे हाथ उसके चूतड़ों पर नहीं टिक रहे थे। जस्सी यह सब बड़े ध्यान से देख रही थी।

अब मैं परी के मम्मों के साथ खेल रहा था और उसका हाथ मेरे अंडकोष पर था। फिर मैंने परी के मम्मों को उसके ब्लाउज के ऊपर से चूमना शुरू कर दिया।

यह देख कर परी अपने ब्लाउज के बटन खोलने लगी। मैं अपने लंड को उसकी चूत को साड़ी के ऊपर से रगड़ रहा था।

यह देख कर जस्सी का एक हाथ अपने आप ही अपनी चूत के ऊपर चला गया.

तब परी ने कहा- सोमू, क्यों न जस्सी को भी साथ ले लें, वो बेचारी यूँ ही गर्म हो रही है।

मैंने कहा- हाँ हाँ, आ जाओ जस्सी, तुम भी शामिल हो जाओ इस खेल में।

जस्सी झट से उठी और आकर हमारे बीच में खड़ी गई और हम दोनों को जफी डाली।

मैंने एक हाथ अब जस्सी के कूल्हों के ऊपर रख दिया और उसकी कमीज के ऊपर से उसके चूतड़ों को रगड़ने लगा।

फिर मैंने जस्सी के खुले हुए होटों के ऊपर एक चुम्मी दे दी और फिर मैंने दोनो हाथों से जस्सी और परी को पकड़ा और दोनों को अपने से पूरी तरह से लिपटा लिया, अपने हाथ मैंने दोनों के उरोजों पर रख दिए जो गोल और बहुत ही सॉलिड थे।

इतने में दरवाज़ा खुला और कम्मो एक ट्रे में हम तीनों के लिए खास दूध लेकर आई और बोली- चलो चलो, तुम सब यह दूध पहले पी लो फिर और कुछ करना।

हम भी गिलास पकड़ कर दूध पीने लगे तब मैंने देखा की परी और जस्सी की नज़र मेरी पैंट पर थी जिसमें मेरा लंड एकदम खड़ा और बाहर निकलने के लिए छटपटा रहा था।

परी ने एक हाथ से मेरी पैंट के बटन खोल दिए और लपक कर लंड को खींच कर बाहर निकाल लिया।

जस्सी एकटक मेरे लंड को देख रही थी और मुझको लगा कि उसने पहले खड़ा लंड नहीं देखा था हालांकि उसने सिनेमा हाल में इसके साथ खूब खिलवाड़ किया था लेकिन देख नहीं पाई थी।

दूध खत्म होने के बाद कम्मो ने हम सबका चार्ज अपने हाथों में ले लिया।

कम्मो बोली- सबसे पहले छोटे मालिक परी को चोदेंगे और जस्सी इस चुदाई के खेल को ध्यान से देखगी। क्यूंकि चुदाई के समय थोड़ी बहुत तकलीफ तो होगी न जस्सी को तो इन दोनों की गरम चुदाई देख कर थोड़ी गरम भी हो जायेगी, क्यों ठीक है न?

हम सबने हामी में सर हिला दिया, फिर हम सब अपने अपने कपड़े उतारने में लग गए।

परी को तो नंगी मैंने देखा ही था लेकिन जस्सी को पहली बार देख रहा था तो उसको मैं बड़ी उत्सुकता से देख रहा था।

जब दोनों नंगी हो गई तो मैंने देखा कि परी के मम्मी गोल और छोटे हैं लेकिन जस्सी के गोल और बहुत ही मोटे लगे। मैंने आगे बढ़ कर जस्सी के मम्मों को हाथ से तोलना शुरू किया।

वास्तव में वो काफी उम्दा किस्म के मम्मे थे और जस्सी के शरीर की शान थे। उसके चूतड़ भी गोल और ज़्यादा उभरे हुए थे और बार बार घोड़ी बना कर चोदने लायक थे।

उस की चूत भी कुछ ज़्यादा उभरी हुई थी हालांकि घने काले बालों के बीच छुपी हुई थी।

यह सारा नीरीक्षण करने के बाद मेरे लंड की अकड़ और अधिक हो गई और वो सीधा जस्सी की तरफ ही इशारा कर रहा था।

तब तक जस्सी को लेकर कम्मो पलंग के दूसरी तरफ चली गई और मुझको, परी को पलंग की ओर धकेल दिया।

मैंने परी को एक बहुत सख्त जफ़्फ़ी मारी और उसको चूमते हुए पलंग पर ले आया, उसकी चूत को हाथ लगाया तो वो बेहद गीली हो चुकी थी।

अब मैंने परी को घोड़ी बनाया और उसकी चूत पर थोड़ी क्रीम लगाई और उस पर अपना लंड रख कर कम्मो की तरफ देखने लगा।

उसने हल्के से आँख का इशारा किया और मैंने झट से लंड पहले थोड़ा और फिर पूरा का पूरा परी की चूत में डाल दिया।

!

उसके मुंह से आनन्द की सिसकारी निकल पड़ी और वो स्वयं ही अपने चूतड़ आगे पीछे करने लगी।

यह देख कर मैं अपने घोड़े को सरपट दौड़ाने लगा और रेल के इंजिन की तरह अंदर बाहर करने लगा।

मेरे हाथ उसके मम्मों की सेवा में लग गए।

परी की चुदाई को जस्सी बड़े आनन्द से देख रही थी और कम्मो के हाथ की उंगली उसकी कुंवारी चूत पर चल रही थी और उसको मस्त कर रही थी।

जस्सी का मुंह खुला हुआ था और उसका एक हाथ अपने मम्मे को टीप रहा था और उसकी जांघें कम्मो को हाथ को कभी जकड़ रही थी और कभी उसको छोड़ रही थी।

कोई 6-7 मिन्ट में ही परी बड़ी तीव्रता से झड़ गई और पलंग पर पसर गई।

मैंने उसको सीधा किया और ताबड़तोड़ उसके होटों को चूमने लगा और उसके मम्मों को चूसने लगा। वो बुरी तरह से कसमसाने लगी लेकिन मैंने उसको सांस लेने के लिए भी समय नहीं दिया।

तब कम्मो आई और मुझको उठा कर जस्सी की तरफ ले गई और मेरे लौड़े को भी गीले कपड़े से साफ़ करती गई।

मैंने जाते ही जस्सी को अपनी बाहों में बाँध लिया और उसके लबों को चूसने लगा।

उसका हाथ अब मेरे लौड़े से खेल रहा था।

तब कम्मो ने जस्सी को बिस्तर पर लिटा दिया और उसकी चूत पर थोड़ी क्रीम लगाई और मेरे लंड को भी क्रीम लगा कर तैयार कर दिया।

मैं जस्सी के गोल और मोटे मम्मों को चूसने लगा, उसके खड़े निप्पलों को भी बारी बारी लोली पोप की तरह चूसने लगा।

कम्मो ने मेरे चूतड़ पर हल्की सी थपकी मारी और मैं समझ गया कि चूत में लंड के जाने का समय निकट आ गया है, मैंने लंड को हल्का से एक धक्का दिया और वो एक इंच अंदर चला गया और फिर एक और धक्का मारा तो आगे का रास्ता बंद मिला।

मैंने लंड को बाहर निकाला और उसको उसकी भग पर रगड़ा और फिर एक ज़ोर का धक्का मारा तो लंड पूरा अंदर और जस्सी हल्के से चिल्लाई- मर गई रे!

अब मैं लंड को अंदर डाल कर आराम करने लगा। यह पहला प्रवेश चूत और लंड के पहले मिलाप की घड़ी होती है और एक दूसरे को पहचानने को और एडजस्ट करने का समय होता है। कम्मो के मुताबिक़ इस वक्त कभी भी जल्दबाज़ी नहीं करनी चाहिये और चूत और लंड को पूरा मौका देना चाहये कि वो आपस में हिलमिल सके और एक दूसरे को पहचान सकें।

मैं भी कम्मो की बताई हुई बातों का ध्यान रखते हुए जस्सी को होटों पर चुम्बन और मम्मों को चूसने में लग गया।

ऐसा करने से जस्सी अपनी चूत में हो रहे दर्द को भूलने लगी और नीचे से चूतड़ की थाप देकर मुझको लंड चलाने के लिए उकसाने लगी।

मैं भी धीरे धीरे लंड को अंदर बाहर करने लगा। पूरा लौड़ा निकाल कर फिर धीरे से अंदर डालने में मुझको भी बहुत मज़ा आने लगा और जस्सी के भी आनन्द की सीमा नहीं रही।

कम्मो हमारे दोनों के पसीने पौंछ रही थी और परी एक हाथ से अपनी भग को रगड़ रही थी और दूसरे हाथ से मेरे लंड को अंदर बाहर होते महसूस कर रही थी।

जस्सी की चूत में से अब काफी रस निकल रहा था जो सफ़ेद झाग वाला था। उसके मम्मों के निप्पल एकदम खड़े थे और मैंने चूस चूस कर उनका दूध अपने अंदर कर लिया था।

कम्मो जो चुदाई की रेफरी बनी हुई थी, मुझको चूतड़ों पर बराबर थपकी दे रही थी और मैं उसकी थपकी के कारण अपनी स्पीड बढ़ाने लगा।

ऐसा करने के कुछ मिन्ट में ही जस्सी छूट गई और चूतड़ उठा कर मुझसे नीचे से लिपट गई और मुझको कस कर अपने बाहों में जकड़ लिया जबकि उसका शरीर ज़ोर से कांपने लगा।

हम दोनों कुछ क्षण इसी तरह एक दूसरे की बाहों में लिपटे रहे और जब सांस ठीक हुई तो जस्सी ने मेरे मुंह अपने मुंह के पास लाकर ज़ोरदार किस होटों पर किया और बोली- थैंक यू सोमू, मैं तुमसे बहुत प्यार करती हूँ।

मैं बोला- तुम्हारा भी थैंक यू जस्सी, तुमने मुझको लाजवाब तोहफा दिया।

कम्मो ने दौड़ कर हम दोनों का बदन साफ़ कर दिया और जस्सी की चूत पर लगे खून के धब्बे भी अछी तरह से साफ़ कर दिए।

जस्सी अब बिस्तर पर पसर गई थी और कम्मो उसकी चूत पर क्रीम लगा रही थी ताकि उसको कम दर्द हो।

परी की नज़र अभी तक मेरे लौड़े पर अटकी थी क्यूंकि वो अभी भी खड़ा था।

कम्मो ने मुझ को और जस्सी को स्पेशल दूध का गिलास दिया।

दूध पीने के बाद मैं काफी फ्रेश हो गया था और परी की चूत और मम्मों की तरफ देख रहा था।

परी धीरे से आई और मेरे लंड से खेलने लगी और हैरान होकर कम्मो से पूछने लगी- यह सोमू का लंड कभी बैठता भी है यह सारा दिन इसी तरह खड़ा रहता है।

कम्मो बोली- तुम जैसी खूबसूरत और कमसिन लड़की को देख कर मेरा भी अगर लंड होता तो वो भी ऐसे ही खड़ा रहता।

मैं बोला- तुम चीज़ ही बड़ी मस्त हो परी और तुम्हारी सहेली जस्सी भी कम नहीं यार!

परी मेरे लंड के साथ खेल रही थी और मुझको यकीन था कि वो भी चुदाई के मूड में है। मैंने कम्मो को इशारा किया कि वो परी को संभाल ले थोड़ी देर तक!

तब कम्मो ने अपना ब्लाउज उतारा और साड़ी और फिर पेटीकोट भी उतार दिया।

उसने परी की कमर में हाथ डाला और उसके मुंह पर ज़ोरदार चुम्मी की।

पहले तो परी हैरान होकर देख रही थी कि यह क्या हो रहा है और फिर उसको मज़ा आने लगा, उसने भी चुम्मी का जवाब चुम्मी से दिया।

तब कम्मो ने उसको ज़ोर से अपनी मोटी बाँहों में भींच लिया, फिर उसके मम्मों को चूसने लगी, पहले दायाँ और फिर बायाँ।

एक हाथ उसने उसकी बालों भरी चूत में डाल दिया और उसकी भग को मसलने लगी। फिर उसने परी की गोल मस्त गांड को गोल गोल मसलना शुरू कर दिया।

पारी को खूब मस्ती चढ़ गई, वो भी कम्मो की चूत को छेड़ने लगी।

इधर जस्सी की भी आँखें दोनों की तरफ ही थीं, वो यह अजीब तमाशा देख रही थी और अपनी चूत पर हाथ फेरने लगी।

उसके हाथ को हटा कर अब मैं भी उसकी चूत पर हाथ फेरने लगा।

तब तक कम्मो परी के साथ मेरे पास आई और आते ही बोली- छोटे सरकार आपका स्पेशल गिफ्ट तैयार है। इस गीले और चुदासे गिफ्ट को कबूल फरमायें।

मैंने भी उसी लहजे में कहा- शाबाश मलिका-ए-औरतजात, आपने पूरी मेहनत से यह तोहफा तैयार किया है, यह हमको कबूल है!

यह कह कर मैंने परी को अपने आगोश में भर लिया और ताबड़तोड़ चूमने का दौर शुरू कर दिया।

उसकी चूत को हाथ लगाया तो वो एकदम तरबतर थी अपने सुगन्ध भरे पानी से।

मैंने परी को जस्सी की बगल में लिटा दिया और झट से उसकी खुली टांगों में बैठ कर अपनी तोप का निशाना साधने लगा।

परी ने जब अपनी टांगें बिलकुल फैला दी तो शाहे-ऐ-आलम समझ गए की भट्टी पूरी तरह से गर्म है, पहले धीरे से डाला लंड को और वो पानी की फिसलन से एकदम आधा अंदर चला गया, अगला धक्का लंड को उसकी चूत की गहराई तक ले गया, अंदर पहुंचा कर कुछ दम लेने लगे हम दोनों।

उधर जस्सी के साथ कम्मो छेड़छाड़ कर रही थी क्योंकि उसको अभी भी चूत में थोड़ा सा दर्द था लेकिन वो परी और मेरी चुदाई को बड़े ध्यान से देख रही थी।

अब धीरे धीरे मैंने परी को अपनी पूरी स्पीड से चोदना शुरू किया, पहले लेट कर फिर उसको अपने ऊपर लेकर पोजीशन बदल बदल कर चोदना शुरू किया।

अंतिम धक्के उसको घोड़ी बना कर लगाए, फिर जब वो छूटी तो उठ कर मेरे गले से लिपट गई।
 
मैं और मेरा औज़ार

मेरा लौड़ा अभी भी खड़ा था। अब मैंने सोचना शुरू किया कि मेरे लौड़े का इस तरह हर समय और देर तक खड़े रहना शायद आम आदमियों जैसा नहीं है।

फिर मैं उन कारणों के बारे में सोचने लगा जिनके कारण ऐसा मेरे लंड के साथ होता था।

मैंने देखा अक्सर जब मैं किसी नौकरानी को देखता था तो मुझे ऐसा लगता था कि यह अपनी चूत मुझको आसानी से दे देगी और किसी ऊंचे घराने की औरत या लड़की को देखता था तो मेरे मन में ऐसा कोई विचार नहीं आता था।

शायद यही कारण रहा होगा कि मेरा आकर्षण हमेशा निर्धन औरतों की तरफ ज्यादा रहता था और उनके साथ ही मेरा लंड अपने पूरे जोबन पर रहता था।

किसी खूबसूरत लड़की को देख कर मेरे लंड में कभी कोई हरकत नहीं होती थी लेकिन उसके साथ चल रही भरी पूरी नौकरानी को देख कर मेरा लंड हिलोरें मारने लगता था।

इसका मुख्य कारण शायद यह था कि मुझको जन्म से ही नौकरानियों ने ही पाल पोस कर बड़ा किया था और मैं अपनी माँ या और भद्र महिलाओं के पास बहुत कम ही गया था।

लेकिन इसका अपवाद था चाची और उसकी बेटी को चोदना और अभी परी और जस्सी के साथ चुदाई।

रही बात मेरे लंड के देर तक खड़े रहने का रहस्य वो तो मेडिकल साइंस ही बता सकती है कि इसका क्या कारण था। कहानी में आगे चल कर जब यह समस्या डॉक्टरों को बताई तो इस पर कई मेडिकल टेस्ट्स हुए जिनके नतीजे के अनुसार यह एक किस्म का रोग होता है जो लाखों में किसी एक को होता देखा गया।

इस मीठे रोग के बारे में आगे चल कर काफी चर्चा की जायेगी ताकि मेरे इस अद्भुत रोग का पूरा खुलासा किया जा सके और आपके मन में उठ रही शंकाएं थोड़ी कम की जा सकें।

यह भी आज़माई हुई बात थी कि मैं अपने लंड को काफी देर तक खड़ा रख सकता था या वो एक बार झड़ने के बाद बिना विलम्ब दूसरी या तीसरी बार भी खड़ा हो जाता था।

कई कई बार मेरा फव्वारा छूटने के बाद लंड को चूत में ही पड़ा रहने देता था जहाँ वो बिना हिलाये अपने आप खड़ा रहता था और दुबारा चुदाई की हिम्मत रखता था।

मैं अभी भी इसको कुदरत की मेहर मानता था और कभी अहंकार नहीं करता था कि मुझमें कोई ऐसी अद्भुत शक्ति है।

लेकिन जो भी लड़की या औरत मेरे निकट आती थी वो मेरे लौड़े की मुरीद हो जाती थी लेकिन वो मेरी तरफ इसलिए भी खिंची चली आती थी क्यूंकि उनके अनुसार मेरा चेहरा और शरीर का गठन बड़ी ही मासूमियत भरा लगता था उन सबको।

शक्ल से मैं एक छोटी उम्र वाला लड़का लगता था लेकिन जब मेरे शरीर को देखा जाता था तो वो एक जवान मर्द वाला शरीर लगता था।

मैं समझता हूँ यह भी एक कारण हो सकता है जिसके कारण शादीशुदा औरतें भी मेरी पक्की मुरीद थीं और हर समय मुझसे चुदवाने के लिए तैयार रहती थी।

इस विचार को कम्मो, चम्पा, फुलवा और चंचल भी मानती थी।

अब आगे की कहानी…

परी और जस्सी नाश्ता करके अपने घर चली गई क्योंकि वो दोनों बहनों के आने से पहले वहाँ से जाना चाहती थी।

उनके जाने के बाद मैं भी कालेज चला गया और आने वाले इलेक्शन में अपना योगदान देता रहा।

वापस आते हुए काफी शाम हो गई थी, आते ही मैं अपने बिस्तर पर लेट गया।

कम्मो चाय लेकर आ गई और मैंने पारो को भी बैठा लिया और वो जो साड़ी और ब्रा इत्यादि लाई थी, मुझको दिखाने लगी।

मैंने कहा- रात को तुम दोनों इनको पहन कर दिखाना, देखें कैसे लगती हो तुम दोनों इन नए कपड़ों में!

थोड़ी देर बाद पारो आई और बोली- वो चंचल आई है, आपसे बात करना चाहती है।

मैं बोला- ले आओ उसको यहाँ ही, वो तो अपनी है न!

जब पारो चंचल को लेकर आई तो देख कर हैरान रह गई कि वो नई डिज़ाइन की साड़ी और हाथ में पर्स लेकर आई। चंचल के इस रूप से कम्मो बड़ी खुश हो रही थी और साथ में पारो भी उसको हैरानी से देख रही थी।

दोनों ने उससे पूछा- वाह चंचल, कमाल कर दिया तुमने, बड़ी सुन्दर साड़ी है, और यह पर्स भी एकदम फस्ट-क्लास है। बड़ी सुन्दर लग रही है चंचल… क्यों छोटे मालिक?

मैंने कहा- बहुत सुंदर लग रही हो, बोलो सब घर में कुशल मंगल है न?

चंचल मुस्कराते हुए बोली- छोटे मालिक, बस कमाल का जादू किया आपके लंड ने। चूत ने जब बहुत कहा तो मैं आपके पास चली आई!

मैं बोला- क्यों पति घर में नहीं है क्या?

वो हँसते हुए बोली- वही तो, वो आज सुबह बाहर गए हैं। मैंने सोचा चलो आज छोटे मालिक की सेवा ही कर देते हैं?

मैंने कम्मो की तरफ देखा, उसने मुझको आँख मारी और कहा- हाँ हाँ अच्छा किया, छोटे मालिक बेचारे उदास बैठे थे। तुम आ गई हो तो इनका दिल बहल जाएगा।

फिर वो तीनों बातें करती हुई रसोई में चली गई फिर वो चंचल को अपनी कोठरी ले गई।

मैं उठा और बैठक में आकर बैठ गया। थोड़ी देर में गीति और विनी भी आ गई। दोनों का मूड एकदम खराब लग रहा था।

पूछने पर गीति ने बताया- हमारा दिल नहीं लग रहा है लखनऊ में, हम वापस जाना चाहती हैं।

मैंने कहा- ऐसी क्या बात हुई कि आप दोनों का मूड उखड़ गया लखनऊ से?

गीति बोली- कोई संगी साथी ही नहीं हमारा यहाँ!

मैं बोला- क्यों परी है, जस्सी है, दोनों ही तो तुम्हारी सहेलियाँ हैं न?

गीति बोली- हैं तो सही लेकिन वो हमसे ज़्यादा मिक्स नहीं हो पाई। मेरी और विनी की दूसरी सहेलियाँ हैं लेकिन हम उनको नहीं बुलाती यहाँ यही सोच कर कि तुमको शायद अच्छा नहीं लगेगा।

मैं बोला- नहीं नहीं, मेरी परवाह न किया करो। जिसको भी बुलाना हो, तुम बुला सकती हो लेकिन कम्मो आंटी को पहले बता दिया करना ताकि वो खाने पीने का इंतज़ाम कर दिया करे।

विनी बोली- सच्ची सोमू भैया, हम बुला सकती हैं क्या किसी भी सहेली को?

मैं बोला- हाँ हाँ, बेझिझक बुला लिया करो, जैसे तुमने परी को बुलाया था वैसे ही… और खूब मौज मस्ती करो!

यह सुन कर दोनों ही बहुत खुश हुई और जल्दी से आकर मुझको जफ़्फ़ी डाल दी, बड़ी मुश्किल से दोनों को अपने से अलग किया और वो ख़ुशी ख़ुशी अपने कमरे में चली गई।

मैंने कम्मो को बुलाया और कहा- दोनों बहनें अपनी सहेलियों को बुलाना चाहती हैं क्यूंकि वो काफी बोर हो रहीं हैं, ठीक है न कम्मो?

कम्मो बोली- ठीक है छोटे मालिक।

मैं बोला- वो तुमको बता दिया करेंगी जब भी कोई सहेली आने वाली होगी ताकि तुम खाने पीने का इंतज़ाम कर दो।

रात को जैसे होना था, हमारी चुदाई का दौर चंचल से शुरू हुआ। कम्मो पहले ही माहवारी की वजह से कुछ रातों के लिए छूट्टी ले गई थी सो हम तीनों ही थे मैदाने जंग में!

चंचल की साड़ी उतारने का हमने एक खेल बनाया, पहले मैंने उसका ब्लाउज उतारा और फिर पारो ने उसकी साड़ी उसके चारों ओर गोल घूम कर उतार दी।

फिर मैंने उसकी नई ब्रा को उतारने की कोशिश की लेकिन हम उसमें कामयाब नहीं हुए, उसको कैसे उतारा जाता है, हमें समझ नहीं आ रहा था।

चंचल ने खुद ही अपनी ब्रा खोल दी। फिर उसने बताया कि उसके हुक कहाँ होते हैं और उनको कैसे खोला जाता है।

अब पारो को नंगी करने का वक्त था, ब्लाउज चंचल ने उतारा और साड़ी मैंने और फिर पेटीकोट को भी चंचल ने उतारा और इस तरह हम तीनों नंगे थे।

चंचल पारो के मोटे चूतड़ों से बड़ी प्रभावित थी इसलिए वो उसके मोटे और चौड़े चूतड़ों पर हाथ फिरा रही थी।

फिर पारो ने कहा कि आज तो चंचल की चूत की खातिर करनी है क्यूंकि बहुत दिनों बाद आई है।

इसलिए उसने चंचल को बिस्तर पर लिटाया और एक उरोज को वो चूसने लगी और दूसरा मेरे मुंह में घुसेड़ दिया।

चंचल का एक हाथ मेरे खड़े लंड के साथ खेल रहा था और दूसरा उसने पारो की चूत में डाल रखा था और हम तीनों अपने काम में लगे पड़े थे।

जब चंचल बोली- शुरू करो छोटे मालिक!

तो मैंने उसकी टांगों को अपने कंधे के ऊपर रख दिया और एक धक्के में पूरा लंड अंदर कर दिया।

उसकी चूत एकदम बहुत गीली हो रही थी, लंड आज़ादी के साथ अंदर बाहर हो रहा था।

फिर मैंने पारो को इशारा किया कि वो भी हमारे साथ लेट जाए और चंचल के मम्मों को चूसे।

अब जब चंचल का छूटने वाला हुआ तो मैंने लंड निकाल कर पारो की मोटी चूत में डाल दिया और चंचल एकदम तड़फने लगी।फिर वो पारो की चुदाई में हमारे साथ हो गई। पारो का वैसे भी बहुत जल्दी छूट जाता था तो चंचल उसकी भग को रगड़ने लगी।

थोड़ी देर में पारो भी कमर उठा कर लंड को बीच में ले रही थी, मैं समझ गया कि पारो का छूटने के नज़दीक पहुँच गया है, मैंने लंड को वहाँ से निकाला और चंचल की नाजुक चूत में डाल दिया।

अब पारो सर हिला कर लंड को मांगने लगी।

मैंने कहा- रुको मेरी जान, आज मैं तुम दोनों का छूटने नहीं दूंगा।

यह कह कर चंचल की चूत में लंड की रेल गाड़ी चला दी।

वो चालाक थी, उसने अपनी टांगों को मेरी कमर के चारों और बाँध दिया और मुझको लंड निकालने का मौका ही नहीं दिया।

जब चंचल छूटी तो उसके शरीर में एक अजीब किस्म की तड़फड़ाहट हुई जो मैंने और पारो ने देखी और उसकी चूत से पानी की एक ज़ोरदार धारा बह निकली।

बाद में वो इस कदर ज़ोर से काम्पने लगी कि मैं जो उसके ऊपर था, भी हिलने लगा।

फिर मैंने और पारो ने उसको कस कर पकड़ा तब वो कुछ संयत हुई।

पारो बोली- वाह चंचल, क्या छूटी है री तू? कमाल कर दिया तूने तो!

अब मैं पारो के ऊपर फिर चढ़ गया और उसको ऐसे चोदना शुरू किया कि उसको कई बार छूटने के मुकाम पर लाकर फिर उसको छुटने से वंचित कर रहा था।

आखिर वो तंग आ गई और उसने मुखे नीचे लिटाया और मेरे ऊपर चढ़ बैठी, वो मुझ को चोदने लगी अपनी मर्ज़ी के मुताबिक़।

थोड़ी देर में उसका पानी भी झड़ गया और वो थक कर मेरे ऊपर ही पसर गई।

रात भर हम जागते, चोदते और फिर हम तीनों थक कर सो गए।

सुबह कम्मो ने चंचल से पूछा- क्या हुआ तेरे गर्भ धारण करने का प्लान? कुछ हुआ या नहीं?

वो बोली- अभी तो 2 दिन ऊपर हैं, कह नहीं सकती कि है या नहीं।

कम्मो बोली- अरे वाह, दाई के होते हुए तुझको काहे का फ़िक्र है री? चल उठ अभी तुझको चैक करती हूँ।

चाय पीने के बाद कम्मो ने मेरे सामने ही चंचल को चेक किया।

कम्मो गंभीर मुंह बना कर बोली- चंचल तू कैसी है री, तुझको गर्भ ठहर गया है री!

चंचल एकदम चौंक कर बोली- अच्छा दीदी, तुम कैसे कह सकती हो? मुझको तो कुछ महसूस नहीं हो रहा है?

कम्मो बोली- अब जा घर अपने… और 15 दिन यहाँ नहीं आना! कच्चे दिनों में चुदवायेगी तो कुछ भी हो सकता है, जा भाग, तुझको गर्भ ठहर गया है।

हम सब ख़ुशी से उछल पड़े और चंचल को गले लगा लिया सबने बारी बारी।
 
छवि और सोनाली के दांव पेच

रात भर हम जागते, चोदते और सोते रहे। यही क्रम काफी रात चला और फिर हम तीनों थक कर सो गए।

अगले दिन कॉलेज से आया तो कम्मो मेरे कमरे में आई और बोली- छोटे मालिक दोनों बहनों ने अपनी चार सहेलियों को रात रहने के लिए बुला लिया है, अब क्या करें?

मैं हैरान हो गया, मैंने कम्मो से पूछा- रात रहने को क्यों बुलवाया उनको? और उनके माँ बाप ने इजाज़त दे दी थी क्या?

कम्मो बोली- छोटे मालिक, यह तो मैं नहीं जानती लेकिन उनके परिजन उनको रिक्शा में छोड़ने आये थे। इसका मतलब है कि उनकी रजामंदी से वो आई हैं।

मैं बोला- कम्मो डार्लिंग, तुम जाकर बहनों को कहो कि मैं उन सब मेहमानों से मिलना चाहता हूँ बैठक में!

कम्मो ‘अच्छा’ कह कर चली गई।

थोड़ी देर में दोनों बहनें अपनी चारों सहेलियों के साथ बैठक में आ गई।

गीति ने सबसे परिचय करवाया। मैंने सबको ध्यान से देखा सभी काफी अच्छी दिख रही थी।

सबसे सुन्दर सोनाली दिख रही थी, साड़ी और ब्लाउज में कॅाफ़ी आकर्षक लग रही थ। दूसरी जो लड़की मुझको भाई, वो आशु थी।

बाकी की दोनों भी अच्छी थीं लेकिन उनमें से केवल छवि कुछ अलग लग रही थी, उसके नयन नक्श बहुत तीखे और शरीर काफी भरा पूरा था और वो सबसे सेक्सी लग रही थी।

वो भी मुझको घूर कर देख रही थी और मैं भी उसको एकटक देख रहा था। हमारी आँखें चार क्या हुईं अलग होने का नाम ही नहीं ले रहीं थी।

यह बात बाकी लड़कियों से छिपी नहीं रही और वो हंस हंस कर छवि को छेड़ने लगी।

मैं बोला- आप सबका स्वागत है, जो चीज़ भी चाहिए हो, आप बेझिझक कम्मो आंटी को बोल सकते हैं और गीति तुमने अपनी फ्रेंड्स को कैसे एंटरटेन करने का फैसला किया है?

गीति बोली- क्यों फ्रेंड्स, कैसे एंटरटेन होना चाहती हो तुम सब? बोलो बोलो? वैसे यह हम लड़कियों की पजामा पार्टी है। तुम बताओ कैसे आप सबको आनन्द प्रदान कर सकती हैं?

सबसे पहले छवि बोली- हम लड़कियाँ मिलजुल कर डांस करेंगी। यह जो ग्रामोफोन रखा है सोमू, क्या यह काम करता है?

मैं बोला- हाँ हाँ, बिल्कुल करता है। मैंने बिल्कुल नई फिल्मों के गानों के रिकार्ड्स भी रखे हैं, आप उस दराज़ में देखिए सब मिल जाएंगे।

छवि लपक कर दराज़ से रिकार्ड्स निकाल लाई और उनको पढ़ने लगी। जो नई फिल्मों के थे, उनको एक तरफ कर दिया और बाकी उस ने दराज़ में वापस डाल दिए।

तब छवि बोली- केवल लड़कियों का आपस में डांस का क्या मज़ा आएगा? अगर सोमू बुरा न माने तो वो हम सबके साथ डांस करे तो बड़ा मज़ा आएगा।

सब चिल्ला पड़ी- हाँ हाँ सोमू, तुम हमारे साथ डांस करना प्लीज!

मैं बोला- लड़कियो, मुझको डांस करना नहीं आता, सॉरी प्लीज।

छवि बोली- हमको कहाँ डांस करना आता है, यूँ ही हाथ पैर हिला लेती हैं बस, वही हमारे लिए डांस है। तुम भी ऐसा ही करना, वही डांस हो जाएगा।

मैं बोला- ठीक है, देखेंगे और तुम अब क्या करने वाली हो अब?

कम्मो जो सारी बात सुन रही थी, बोली- चलो पहले तुम सब खाना खा लो, फिर करना जो भी करना है।

थोड़ी देर में खाना शुरू हो गया। कम्मो मेरे हाव भाव से समझ गई थी कि मुझको छवि भा गई है, उसने खाने के टेबल पर मुझको हेड चेयर पर बैठाया और छवि को मेरे दायें वाली कुर्सी पर बैठा दिया और बाएं तरफ उसने सोनाली को बैठा दिया।

खाना शुरू होते ही मुझको लगा कि छवि टेबल के नीचे से छुप कर मुझको नंगे पैर से छू रही थी। धीरे धीरे उसका पैर बढ़ते हुए मेरे लंड की साइड में छूने लगा।

मैंने भी अपना बायाँ हाथ उसकी सलवार से ढकी जांघ पर रख दिया।

हम खाना भी खा रहे थे और छुप कर एक दूसरे को परख भी रहे थे। फिर मैं धीरे से हाथ उसकी जांघ के आगे बढ़ाता रहा और उसने अपनी जांघें भी थोड़ी खोल दी।

कम्मो मेरे पीछे ही खड़ी थी, वो सारा नाटक देख रही थी।

इतने में छवि की चम्मच टेबल के नीचे गिर गई और टेबल के नीचे झुक कर चम्मच उठाने के बहाने उसने मेरे लंड को पैंट के बाहर से छुआ।

जब वो उठी तो अपनी कुर्सी मेरे और निकट ले आई और कम्मो ने भी आगे बढ़ कर इस काम में उसकी मदद की। अब उसकी कुर्सी मेरे बिल्कुल साथ जुड़ी हुई थी।

बाकी लड़कियाँ खाना खाने में मग्न थी, किसी ने इस खेल को नहीं देखा। मेरे साथ बैठी सोनाली भी खाने में मग्न थी, उसको भी पता नहीं चला।

अब मैं आराम से अपना हाथ छवि के गोल गुदाज़ जांघ पर फेरने लगा जो धीरे धीरे बढ़ता हुआ उसकी सलवार के उस हिस्से पर चला गया जो ठीक उसकी चूत पर था।

छवि भी अपना हाथ मेरे लौड़े के ऊपर रखे हुए थी और मेरा लंड भी टन से खड़ा हो गया था।

हम दोनों का ध्यान तो इस काम में लगा था तो खाना बहुत ही कम खा सके। मैं यदा कदा छवि से आँखें भी चार कर रहा था, मुझको यकीन हो गया था कि छवि चूत देने के लिए तैयार हो जायेगी।

मीठे में रबड़ी बहुत स्वादिष्ट बनी थी, वो सबने दो दो बार खाई।

फिर हम सोफे पर बैठ कर कोकाकोला पीने लगे। खाने को पारो और कम्मो ने मिल कर बनाया था, सब उन दोनों की तारीफ करने लगी।

अब डांस की बारी थी, छवि ने बाजे पर रिकॉर्ड लगा दिया और उसकी मधुर धुन पर सबसे पहले छवि ही नाचने लगी, उसका थिरक थिरक कर नाचना सबको बहुत अच्छा लगा और फिर सब लड़कियाँ उठ कर डांस करने लगी।

तभी छवि मेरे पास आई और मेरा हाथ खींचते हुए मुझको डांस करने के लिए ले गई।

मैं और छवि एक दूसरे का हाथ पकड़ कर डांस करने लगे।

कम्मो ने बैठक की सारी लाइट्स को ऑफ कर दिया और सिर्फ एक मद्धम सी नाईट लाइट का बल्ब जला दिया।

मैंने और छवि ने इस मौके का फायदा उठाते हुए एक दूसरे को आलिंगन कर लिया, उसके मोटे और सॉलिड मम्मों को मैंने बड़ी अच्छे से महसूस किया और उसके मोटे चूतड़ों पर हाथ भी फेरे।

छवि ने भी मेरे खड़े लंड को ज़रूर महसूस किया होगा।

अब छवि और मैं गले और कमर में हाथ डाल कर डांस करने लगे। डांस करते हुए मैं उसको एक अँधेरे कोने में ले गया और उसके होटों पर एक गर्म चुम्बन दे दिया और उसने भी उत्तर में मेरे होटों पर एक गहरा चुम्बन दे डाला।

चारों और देखने के बाद कि किसी का ध्यान हमारे तरफ नहीं है तो मैंने छवि के कान में कहा- रात को आना चाहोगी मेरे कमरे में?

उसने भी मेरे कान में कहा- क्या करेंगे वहाँ?

मैंने कहा- जो तुम चाहो, कर लेंगे।

वो बोली- कैसे आऊँगी मैं वहाँ?

मैं बोला- कम्मो आंटी ले आयेगी तुमको अगर तुम राज़ी हो तो!

वो बोली- ठीक है।

फिर हम डांस करते हुए थोड़ी लाइट की तरफ आ गए और वहाँ पहुँचते ही सब से पहले सोनाली ने छवि को हटा कर मेरा हाथ पकड़ लिया और मेरे साथ डांस करने लगी।

मैं बोला- सोनाली जी, आप बड़ा अच्छा डांस करती हैं।

सोनाली बोली- सोमू जी, आप मुझको सोनू बुलाया कीजिए, यही मेरे घर का प्यार का नाम है।

मैं बोला- अच्छा नाम है सोनू जी आपका, बड़ा प्यारा नाम और मुझको उम्मीद आपका सब कुछ भी बड़ा प्यारा होगा!

सोनू मुझको धकेलते हुए उसी अँधेरे कोने की तरफ ले जा रही थी जिस तरफ मैं छवि को ले गया था।

सोनू बोली- सोमू जी, आप बड़े अच्छे लग रहे हैं।

मैं बोला- एक बात बोलूँ, आप बुरा तो नहीं मानेंगी?

सोनू बोली- नहीं नहीं, आपका क्या बुरा मानना जी, बोलिए आप क्या कहना चाहते हैं?

मैं बोला- सच कहूँ, आप यहाँ सबसे सुन्दर लग रही हैं।

वो बोली- अच्छा जी, मुझको क्यों मक्खन लगा रहे हो आप?

मैं बोला- नहीं, सच कह रहा हूँ।

सोनू बोली- वैसे मैंने आपका और छवि का सारा कार्यकलाप देख लिया था।

मैं घबरा कर बोला- उफ़्फ़…

वो बोली- घबरायें नहीं, मैं भी आपके प्रोग्राम में हिस्सा लेना चाहती हूँ।

मैं डर कर बोला- कौन सा हिस्सा?

सोनू- वही जो आप छवि को देना चाहते है उस स्पेशल प्रोग्राम में जो आपके कमरे में होने वाला है रात को!

मैं बोला- ओह्ह, अच्छा ऐसा करें आप कम्मो आंटी से बात कर लें इस बारे में, वो बताएगी कि यह संभव है या नहीं। वो ही सारा इंतज़ाम कर देगी।

सोनू ने अँधेरे का फायदा उठाते हुए मेरे होटों को चूम लिया और जबरन मुझको उसको किस करना पड़ा होटों पर!

फिर उसने भी सीधा हाथ मेरे लंड पर रखा दिया। मैंने भी उसकी चूत को बाहर से छुआ और उसकी साड़ी वाले चूतड़ों पर हाथ फेरा। फिर हम लाइट वाले हिस्से में आ गए और सम्भल कर डांस करते रहे।

एक एक करके बाकी चारों लड़कियों के साथ डांस करना पड़ा लेकिन वो सब बड़े संयम से डांस कर रही थी, मैं भी पूरी तरह से संयमित रहा।

जब डांस खत्म हुआ तो मैंने कम्मो को बुलाया और उसके लेकर मैं अपने कमरे में आ गया।

मैंने कम्मो से पूछा- इन लड़कियों के सोने का क्या प्रबंध किया है?

कम्मो बोली- छोटे मालिक, चार लड़कियाँ ही नई हैं, मैंने दो कमरे उनके लिए तैयार कर दिए हैं।

मैं बोला- ठीक किया। वो ऐसा है कि डांस के दौरान मुझको छवि और सोनाली ने चोदने के लिए उकसाया है, तुम ऐसा करो, उन दोनों को बेस्ट कमरे में इकट्ठे ही ठहरा देना बाकी दोनों को एक साथ दूसरे कमरे में ठहरा देना।

कम्मो मुस्कराते हुए बोली- आपने अपना जादू फिर से चला दिया उन दोनों पर! अच्छा किया, मैं भी यही सोच रही थी की छवि और सोनू आप के लिए बेस्ट हैं।

मैं बोला- आज पारो को मना कर देना और तुम स्वयं उन दोनों को मेरे कमरे में ले आना, जब सब सो जाएँ तो! ठीक है न?

कम्मो बोली- ठीक है छोटे मालिक।

हम दोनों फिर बैठक में आ गए जहाँ अब लड़कियों ने गाने गाने शुरू कर दिए थे और उसमें आशु की आवाज़ बहुत ही अच्छी और सधी हुई गायिका की तरह लगी, उसका गला बहुत ही सुरीला था।

मैंने उसकी बहुत तारीफ की और कहा कि आगे चल कर वो बहुत अच्छी गायिका बन सकती है।

गाने और फिर कव्वाली के बाद प्रोग्राम खत्म हुआ और सबसे मैं ने गुड नाईट की और फिर अपने कमरे में आ गया।

सब सोने वाले कमरों में चली गई।

कम्मो उन लड़कियों के साथ रही जब तक वो सब सो नहीं गई।

लड़कियों के सो जाने की बात कन्फर्म करने के बाद वो छवि और सोनू को अपने साथ लेकर आ गई।

दोनों ने रात में सोने वाले चोगे पहन रखे थे।

वो दोनों चुपचाप मेरे कमरे में आई और आते ही मुझसे लिपट गई।
 
छवि और सोनाली की चुदाई

छवि और सोनाली दोनों चुपचाप मेरे कमरे में आई और आते ही मुझसे लिपट गई, दोनों बारी बारी से मुझको किस और आलिंगन करने में लगी रही, छवि ने मेरे लंड पर कब्ज़ा जमाया हुआ था और सोनू मुझको चूमने में लगी थी।

फिर कम्मो ने उन दोनों का ध्यान अपनी ओर खींचा और कहा- लड़कियो ज़रा रुको तो सही। आपके लिए सारी रात पड़ी है, ज़रा मेरी तरफ ध्यान दो।

यह कह कर कम्मो उन दोनों को कमरे की एक तरफ ले गई।

थोड़ी देर उनमें कानाफूसी हुई और फिर कम्मो मेरे पास आई और बोली- सब ठीक है। दोनों खुली हुई हैं, आपको मेहनत नहीं करनी पड़ेगी।

छवि और सोनू दोनों अपने चोगे उतारने लगी और मैं भी अपना पजामा कुरता उतारने लगा।

जब कपड़े उतार दिए गए तो हम तीनों एक दूसरे को बड़े ध्यान से देखने लगे। छवि, जैसा मेरा अंदाजा था, कुछ मोटापा लिए हुए थी और सोनू स्लिम थी।

दोनों का रंग साफ़ था और दोनों एक दूसरे की पक्की सहेलियाँ थी। छवि के मम्मे उसके जिस्म की शान थे वो बहुत ही सॉलिड और मोटे थे, निप्पल भी अभी एकदम अकड़े हुए थे।

उसके चूतड़ भी गोल और मोटे थे, पेट एकदम अंदर था जो अक्सर मोटी लड़कियों के साथ नहीं होता, उसकी चूत काले बालों से भरी हुई थी।

सोनू छवि से पूर्णतया भिन्न थी, वो स्लिम थी लेकिन उसके उरोज छोटे और गोल थे और चूतड़ भी गोल पर छोटे थे, चूत पर भी पर्याप्त बाल थे।

दिखने में दोनों ही सुन्दर थी लेकिन सोनू ज़्यादा सुन्दर थी और छवि ज़्यादा सेक्सी थी।

मेरा खड़ा लंड दोनों को सलामी दे रहा था।

सोनू जल्दी से नीचे झुकी और उसने मेरे लंड को मुंह में ले लिया। इससे पहले मैं कुछ बोलूं, छवि ने भी मेरे छाती के निप्पल को चूसना शुरू कर दिया।

मैं हैरान होकर कम्मो को देख रहा था और वो भी हैरान थी यह सब देख कर! तब सोनू मुझको धकेलती हुई पलंग की तरफ ले गई और मुझको वहाँ लिटा दिया।

जल्दी से सोनू मेरे ऊपर आकर बैठ गई और छवि भी जल्दी से मेरी दूसरी साइड में आ कर जम गई। मैं उन दोनों की फुर्ती देख कर दंग रह गया।

सोनू ने जल्दी से अपनी गीली चूत में मेरा लंड डाला और वो जल्दी से ऊपर नीचे होने लगी। उसकी आँखें बंद थी और वो बड़ी तन्मयता से मुझको चोद रही थी। मैंने उसके हिलते हुए मम्मों को चूसना शुरू किया क्योंकि वो दोनों ही मेरे मुंह के ऊपर थे।

उधर छवि भी एक हाथ से चूत में ऊँगली चला रही थी और दूसरे से मेरे अंडकोष के साथ खेल रही थी। उसने अपने मोटे और सॉलिड मम्मों को मेरी साइड में जोड़ रखा था।

मैंने कम्मो की तरफ देखा और उसने आँखों से ही कहा कि मैं पासा पलट दूँ।

मैं इंतज़ार करता रहा, जैसे ही सोनू कुछ धीमी पड़ी, मैंने उसको किस करने के बहाने उसका मुंह अपने मुंह के साथ जोड़ा, तभी मैंने उसको उल्टा दिया और उसको अपने नीचे ले लिया।

यह सारा काम मैंने लंड को बाहर निकाले बगैर कर दिया और अब मैं उसके ऊपर चढ़ा बैठा था, उसकी जांघों को चौड़ा कर के लंड पूरा का पूरा अंदर डाल दिया और फिर जो मैंने धक्काशाही शुरू की और ज़ोर से लंड को डालना और निकालना शुरू किया तो सोनू को सांस लेना भी मुश्किल हो गया।

मेरे धक्कों की स्पीड इतनी तेज़ थी कि छवि, जिसने अपना हाथ मेरे चूतड़ों पर रखा हुआ था, वो लंड की तेज़ी बर्दाश्त नहीं कर सकी और अपना हाथ फ़ौरन हटा लिया।

कम्मो भी मेरी स्पीड देख कर हैरान थी लेकिन वो मुझको और भी उकसा रही थी। मेरा और कम्मो का मकसद था कि सोनू को बुरी तरह हराना।

अब सोनू ने अपनी जांघों का बंद करना शुरू कर दिया लेकिन मैंने अपनी टांगों को और भी फैला दी ताकि सोनू अपनी टांगों को बंद न कर सके।

थोड़ी देर में सोनू ने चिल्लाना शुरू कर दिया- बस करो… बस करो!

मैंने बदस्तूर धक्के जारी रखते हुए कहा- अपनी हार मानो, तभी बंद होगी तुम्हारी चूत की धुनाई।

सोनू ने हाथ जोड़ दिए और कहा- मैं हारी तुम जीते।

तब मैंने एक फाइनल धक्का मारा और सोनू के ऊपर से उतर गया।

सोनू हांफ़ती हुई लेटी रही।

मैंने अपने लंड को देखा, उस पर एक मोटी झाग की परत जमी हुई थी।

!

कम्मो ने फ़ौरन आकर तौलिये से मेरा मुंह जो पसीने से तर बतर हो गया था, पौंछा और सोनू का भी मुंह साफ़ किया।

छवि यह सारा नज़ारा देख रही थी, बोली- वाह सोमू, तुमने तो सोनू को पूरी तरह से हरा दिया। उसकी चूत का सारा पानी निकाल दिया। अब वो कम से कम 10 दिन तक चुदवाने का नाम नहीं लेगी।

कम्मो मुस्करा रही थी और छवि मेरे लौड़े को विस्मय से देख रही थी।

तब कम्मो ने चादर की ओर इशारा करके कहा- देखो तो सही, सोनू का कितना पानी छूटा है यारो, वो कम से कम 5 बार छूटी होगी।

तभी सोनू ने आँखें खोली- मेरा 7 बार छूटा है।

कम्मो और और छवि के मुंह आश्चर्य से खुले के खुले ही रह गए।

छवि ने फिर मेरे लंड को हाथ में पकड़ा और उसको ध्यान से देखा।

तब तक मैंने आगे बढ़ कर छवि के मोटे मम्मों को दोनों हाथों में ले लिया, बड़े ही सॉलिड थे। वो उठी और अपना एक मम्मा मेरे मुंह पर रख दिया और मैं एक छोटे बच्चे के समान उसके काले मोटे निप्पल को चूसने लगा।एक को चूसने के बाद छवि ने अपना दूसरा मम्मा मेरे मुंह में डाल दिया।

अब मैंने उसकी चूत में ऊँगली डाली तो वो पूरी तरह से गीली हो रही थी। मैंने उसके होटों पर एक गर्म चुम्बन किया और उसको घोड़ी बनने का इशारा किया।

वो झट से घोड़ी बन कर मेरे सामने आ गई और मैंने अपना साफ़ किया हुआ लंड उसकी चूत में डाल दिया, धीरे धीरे उसको इंच दर इंच अंदर डाल दिया।

उसकी गांड और चूतड़ बड़े ही सेक्सी थे, मैं उनको हल्के हल्के थपकी मारते हुए छवि को चोदने लगा।

छवि भी हर धक्के का जवाब दे रही थी और क्योंकि वो सोनू की ज़ोरदार चुदाई देख चुकी थी तो वो बहुत ही गर्म हो रही थी।

मुश्किल से दस धक्कों में वो झड़ गई।

उसकी चूत में से निकलते गर्म पानी को मैंने महसूस किया।

अब मैंने पोजीशन फिर चेंज की, पलंग के किनारे बैठ गया और छवि को अपनी गोद में बैठा लिया और अपने हाथ उसकी मोटी गांड के नीचे रख दिए और उसको चूतड़ों से पकड़ कर आगे पीछे करने लगा।

छवि को इस स्टाइल से बड़ा मज़ा आ रहा था, वो लगातार मुझको होटों पर चूम रही थी, उसके सॉलिड मम्मे मेरी छाती से चिपके हुए थे और उसकी बाहें मेरी गर्दन से लिपटी हुई थी।

9-10 गहरे धक्के मारने के बाद छवि फिर कांपते हुए जिस्म के साथ मुझसे चिपक गई थी और अपने होटों को मुझ से चिपका दिया।

बड़ी देर वो मुझ से यूँ ही चिपकी रही और फिर एक हॉट किस करके बिस्तर में लेट गई। उसने हाथ से अपनी चूत को छुआ यह देखने के लिए कि मेरा वीर्य छूटा या नहीं।

जब उसको चूत में सिवाए अपनी चूत के पानी के अलावा कुछ नहीं दिखा तो वो फिर हैरान हो गई।

उधर सोनू ने आँखें खोली और छवि से पूछा- तेरा हो गया क्या?

छवि ने हाँ में सर हिला दिया।

तब दोनों उठी और अपने कपड़े पहनने लगी। कम्मो ने शरारत के तौर से पूछा- क्यों सोनाली और छवि, आप दोनों का काम हो गया क्या?

जब दोनों ने हाँ में सर हिला दिया तो कम्मो ने उनको मेरा खड़ा लंड दिखा दिया और कहा- छोटे मालिक में अभी 5-6 बार और चोदने की ताकत है, अगर चाहो तो चुदवा लो अभी और अगर इच्छा है तो!

दोनों ने कहा- नहीं कम्मो आंटी, हम दोनों में चुदाई की अब और ताकत नहीं है।

कम्मो बोली- ठीक है, मैं तुम दोनों को आपके कमरे में छोड़ आती हूँ।

दोनों ने जाने से पहले मुझको एक एक गहरी किस की होटों पर और मैंने भी उनके मम्मों और चूतड़ों पर खूब हाथ फेरा।

जाने से पहले कम्मो बोली- छोटे मालिक, इन दोनों में से कौन चुदाई की माहिर लगी आपको?

मैंने कुछ सोचने के बाद कहा- छवि नंबर एक पर और सोनाली नंबर दो पर लेकिन दोनों चुदाई में बहुत ही एक्सपर्ट हैं। लगता है कि दोनों को चुदाई का काफी ज्ञान है।

छवि बहुत खुश हुई और वो बोली- सोमू धन्यवाद, आगे कब चुदाई का प्रोग्राम बना सकती हैं हम?

मैं बोला- कम्मो आंटी मेरी निजी सेक्रेटरी है, तुम जब चाहो कम्मो आंटी से फ़ोन पर बात कर के प्रोग्राम बना सकती हो।

फिर दोनों ने मुझको विदाई किस की और अपने कमरे में चली गई।

जब कम्मो उनको छोड़ कर वापस आई तो मैंने उसको बाँहों में भर लिया और ताबड़ तोड़ उसके होटों को चूमना चुरू कर दिया।

वो बोली- क्या हुआ छोटे मालिक, आज मुझ पर बड़ा प्यार आ रहा है, क्या कारण है जी?

मैं भाव विभोर होकर बोला- कम्मो तुम न होती तो मुझको ये कुंवारी और नई लड़कियां कहाँ से मिलती? आओ अब तुमको खुश करने की बारी है।

कम्मो बोली- सच छोटे मालिक? मैं तो सोच बैठी थी कि आप इन नई छोकरियों के सामने मुझ बूढ़ी को कहाँ पसंद करोगे?

मैं बोला- कम्मो डार्लिंग, यह कैसे हो सकता है, तुम तो मेरी आँख का तारा हो, मेरी काम शक्ति हो, मेरी काम विद्या की गुरु हो। चलो आओ, एक एक हाथ हम दोनों का भी हो जाए?

कम्मो शर्माती हुई आई मेरे पास।

मैं तो नंगा खड़ा ही था, उसने भी झट से पेटीकोट ब्लाउज उतार दिया और वो फ़ौरन घोड़ी बन गई और मैंने उसकी गीली चूत में अपना खड़ा लंड डाला।

क्योंकि उसके सामने ही सोनू और छवि की हॉट चुदाई हुई थी तो वो भी ज़रूरत से ज़्यादा गरम हो चुकी थी, तो कुछ धक्कों के बाद उसने पानी छोड़ दिया।

मैं नीचे लेट गया और उसको बोला कि वो मुझको ऊपर से चोद ले जब तक उस का जी चाहे और जब तक वो चोद सकती है लेकिन मेरा ज़रूर छूटा दे।

कम्मो कॅाफ़ी देर चोदती रही मुझको और जब उसका मन भर गया तो उसने मुझको कुछ इस तरीके से चोदा कि मेरा फव्वारा छूट गया।

फिर हम एक दूसरे के बाहों में ही सो गए।
 
कम्मो और पारो की गांड मारी

कम्मो काफ़ी देर चोदती रही मुझको… और जब उस का मन भर गया तो उसने मुझको कुछ इस तरीके से चोदा कि मेरा फव्वारा छूट गया।

फिर हम एक दूसरे के बाहों में ही सो गए।

अगले दिन सोनू, छवि और उनकी सहेलियाँ अपने घर चली गई। कॉलेज से वापस आने पर कम्मो ने बताया कि गाँव से फ़ोन पर निर्मल से बात हुई थी, वो कह रही है कि फुलवा के घर में भी लड़का हुआ है। बधाई हो आपको बहुत सी, फिर पिता बन गए आप!

यह कहते हुए वो मुझको चिड़ा रही थी।

मैं बोला- चलो अच्छा हुआ, उसको भी बच्चे की आवश्यकता थी।

अगले दिन जब मैं कॉलेज पहुंचा तो मेरे एक खास मित्र ने सूचना दी कि कालेज की ड्रामा क्लब अपने मेंबर्स को 3 दिन के ट्रिप पर ले जा रही है, यह ट्रिप नैनीताल इत्यादि सुन्दर स्थलों की सैर करवाएगा, प्रत्येक छात्र और छात्रा को 100 रूपए देने होंगे।

सारे छात्र कालेज द्वारा एक बस में ले जाए जाएंगे, खाने-पीने और रहने का बंदोबस्त भी कालेज ही करेगा, जो जाना चाहेंगे उनको नाम जल्दी लिखवाना पड़ेगा और पैसे भी शीघ्र ही देने होंगे।

शाम को घर आकर मैंने गाँव फ़ोन किया और पूछा तो मम्मी बोली- ज़रूर जाओ और पैसे की ज़रूरत हो तो फ़ोन कर देना, मैं बैंक में डलवा दूँगी।

मैंने कहा- ठीक है।

अगले दिन मैंने अपना नाम लिखवा दिया और पैसे भी दे दिए, कम्मो ने मेरे जाने की तैयारी भी शुरू कर दी।

उस रात मैंने कम्मो और पारो को खूब चोदा। पारो बेचारी कुछ कम चुदी थी तो उसकी चुदाई पर ख़ास ध्यान दिया।

कम्मो बोली- छोटे मालिक, क्या आपका दिल कभी गांड चोदने का नहीं करता?

मैं बोला- गांड चोदने के बारे में कभी सोचा नहीं। क्यों तुम्हारा दिल है गांड मरवाने का?

कम्मो बोली- मैंने भी कभी गांड मरवाई नहीं न, तो कभी कभी इच्छा करती है कि गांड चुदाई का भी मज़ा लेना चाहये न! क्यों पारो, तुम्हारा दिल नहीं करता क्या?

पारो बोली- करता तो है लेकिन फिर मन में भय आ जाता है कि कहीं दर्द न हो बहुत?

कम्मो बोली- देखो पारो, जब तक करके नहीं देखते, तब तक कुछ भी डर नहीं, चलो छोटे मालिक।

मैं भी तयार हो गया।

कम्मो उठी और नंगी ही रसोई में चली गई और देसी घी थोड़ा सा कटोरी में ले आई। फिर उसने अपनी और पारो की गांड के ऊपर और अंदर देसी घी काफी सारा लगा दिया और कुछ देसी घी उसने मेरे लौड़े पर भी लगा दिया।

अब हम तीनों का बदन देसी घी से महक रहा था।

पहले बिस्तर पर कम्मो घोड़ी बनी और पारो मेरे और कम्मो के बीच में मदद करने के लिए बैठ गई।

मैं जैसे ही अपने खड़े लंड का निशाना साधने लगा, पारो ने घी से चुपड़ी कम्मो की गांड पर मेरा लौड़ा रख दिया, फिर वो बोली- धीरे से लंड का मुंह अंदर जाने दो।

मैंने भी हल्का सा धक्का मारा और लंड का थोड़ा सा हिस्सा गांड के अंदर चल गया।

कम्मो थोड़ी से बिदकी लेकिन फिर संयत होकर शांत होकर घोड़ी बनी रही।

!

पारो ने मुझको और धक्का मारने का सिगनल दिया और मैंने ज़रा और लंड अंदर धकेल दिया। मुझको ऐसा लग रहा था जैसे मेरा लंड एक बड़ी टाइट पाइप के अंदर जा रहा था।

इस तरह धीरे धीरे कम्मो की गांड में मेरा सारा लौड़ा समा गया। लंड की जो हालत थी वो ब्यान नहीं की जा सकती क्योंकि गांड की बहुत ज्यादा पकड़ होती है और लंड बेचारा यह महसूस कर रहा था जैसे उसको एक बहुत ही तंग जेल की सलाखों में बंद कर दिया गया।

फिर भी मैंने धीरे धीरे धक्के मारने शुरू किये।

पारो लगातार कम्मो को देख रही थी और जब उसने देखा कि कम्मो को मज़ा आने लगा है तो उसने मुझको इशारा किया और मैंने धक्कों की स्पीड तेज़ कर दी।

अब मैंने महसूस किया कि मेरे लंड को कम्मो की गांड, जैसे गाय का दूध दोहते है, वैसे खुल और बंद हो रही थी, इस कारण मुझको बहुत ही आनन्द आ रहा था और मैं थोड़े समय में ही एक ज़ोरदार धक्के के बाद छूट गया।

लेकिन मैंने लंड को निकाला नहीं और उसको वैसे ही सख्त हालत में गांड के अंदर ही पड़ा रहने दिया।

इधर पारो कम्मो की चूत को और उसके भग को मसल रहे थी जिससे कम्मो का मज़ा बहुत अधिक बढ़ गया था, वो अब गांड को खुद ही आगे पीछे करने लगी और मैंने अपने धक्के रोक दिए और कम्मो की गांड चुदाई का आनन्द लेने लगा।

थोड़ी देर बाद मैंने महसूस किया कि कम्मो की गांड एक बार फिर खुल बंद हो रही है।

मैंने उससे पूछा- क्यों कम्मो, एक बार और छूटा तेरा?

उसने हाँ में सर हिला दिया।

तब मैंने कहा- और चोदूँ या फिर बस?

कम्मो बोली- बस छोटे मालिक, बहुत हो गया।

मैं फ़ौरन घोड़ी से नीचे उतर गया।

तब पारो कम्मो की तौलिये से सफाई करने लगी। थोड़ी देर आराम करने के बाद मैंने पारो को इशारा किया कि आ जाओ मैदान में!

वो कुछ हिचकचा रही थी। यह देख कर मैंने कहा- पारो, अगर नहीं इच्छा, तो रहने दो, फिर कभी सही!

पारो बोली- नहीं छोटे मालिक, ऐसी बात नहीं है। मैं सोच रही थी कि आप थोड़ा आराम कर लेते तो ठीक होता न!

मैं बोला- नहीं नहीं, मैं बिल्कुल नहीं थका हूँ। अगर गांड मरवाने की इच्छा है तो आ जाओ। नहीं तो मैं तुम्हारी चूत ही ले लेता हूँ। बोलो जल्दी?

पारो बोली- आ जाओ छोटे मालिक, आज गांड मरवाई का भी मज़ा ले लेती हूँ।

कम्मो उठी और उसने फिर से देसी घी मेरे लंड पर लगा दिया और कॅाफ़ी सारा पारो की गांड में डाल दिया।

पारो बिस्तर में घोड़ी बन गई तो मैं उसके पीछे खड़ा हुआ और कम्मो ने मेरा लंड पारो की गांड पर रख दिया और बोली- मारो धक्का हल्का सा!

मैंने भी हल्का सा धक्का मारा और लंड बहुत सा अंदर चला गया, पारो ज़रा भी नहीं हिली और जल्दी ही पूरा लंड अंदर ले गई।

पारो की गांड मुझको कुछ कम टाइट लगी।

फिर मैंने लंड की स्पीड धीरे धीरे तेज़ कर दी।

थोड़ी देर बाद मुझको लगा कि पारो को गांड में बड़ा मज़ा आ रहा है, वो बाकायदा लंड का जवाब हर बार गांड को को मेरे लंड की जड़ तक लाकर देती थी।

अब मैंने तेज़ी से उसकी गांड में अपना लंड पेलना शुरू कर दिया और मुझको लगा कि उसकी चूत से भी पानी टपकना शुरू हो रहा है।

हाथ लगाया तो वाकयी उसकी चूत से बड़ा ही गाढ़ा रस निकल रहा था।

मैंने उसकी भग को रगड़ना शुरू कर दिया और ऊपर से गांड में धक्के भी तेज़ कर दिए थे।

कोई 10-12 धक्के इसी तरह ज़ोर से मारे तो पारो का शरीर काम्पने लगा और उसकी गांड अंदर से बंद और खुलना शुरू हो गई।

पारो हल्के से बोली- बस करो छोटे मालिक, मेरा पानी दो बार छूट चुका है गांड मरवाते हुए… उफ़्फ़, बड़ी ही मज़ेदार चुदाई है गांड की भी, मज़ा आ गया कम्मो।

मैं फिर दोनों के बीच में लेटा था।

और इस तरह हम तीनों नंगे ही एक दूसरे के साथ चिपक कर सो गए।
 
नैनीताल के सफर में निम्मी और मैरी

मैं फिर दोनों के बीच में लेटा था और इस तरह हम तीनो नंगे ही एक दूसरे के साथ चिपक कर सो गए।

अगले दिन मुझको कालेज में जल्दी पहुंचना था, मैं जल्दी से नाश्ता करके चला गया, दोनों बहनों को उनके कमरे के बाहर से बाय कर गया.

कालेज में पता चला कि अगले दिन सुबह 6 बजे पहुंचना है क्यूंकि बस 7 बजे रवाना हो जायेगी।

जाने वाले सब छात्रों को 1 बजे दोपहर छुट्टी दे दी गई ताकि वो घर में जाने की तैयारी कर सकें।

मैं भी घर आ गया और कम्मो के साथ मिल कर एक चमड़े के सूटकेस में जो ज़रूरी कपडे थे, पैक कर दिए। कम्मो ने काफी सारा खाने-पीने का सामान एक और बैग में डाल दिया था।

रात को मैंने दोनों बहनों को बैठक में बुलाया और उनको अपना प्रोग्राम भी बताया और यह भी कहा- मेरी गैर हाज़री में कम्मो आंटी घर की इंचार्ज होगी, जैसा वो कहेगी तुम सबको मानना पड़ेगा। पारो आंटी तुम सबके लिए जो खाना तुम पसंद करो, वो बना दिया करेगी। और कालेज से वक्त पर आ जाया करना, दोपहर मैं थोड़ा आराम भी कर लिया करना।

तब विनी ने पूछा- आपकी टीम जा कहाँ रही है?

मैं बोला- नैनीताल, क्यों कोई ख़ास बात है?

विनी बोली- नहीं नहीं, मेरी एक सहेली भी कल आपकी बस में जा रही है। उसका नाम है निम्मी। मैं अभी उसको फ़ोन कर देती हूँ आप के बारे में?

मैं बोला- ठीक है फ़ोन कर दो और उसको कह देना कि किसी चीज़ की ज़रूरत हो तो मुझसे मांग ले बिना झिझक के।

उस रात मैंने सिर्फ एक एक बार कम्मो और पारो को चोदा और फिर हम सो गए।

सवेरे कम्मो ने मुझको टाइम पर जगा दिया और मैं तैयार हो कर सामान लेकर कालेज चला गया।

बस खड़ी थी, सामान रख कर बैठ गया, थोड़ी देर बाद एक बड़ी ही स्मार्ट लड़की मेरे पास आई और साथ वाली सीट पर बैठ गई।

बस चलने से पहले एक और लड़की जो सलवार सूट पहने थी, मेरी सीट के पास आई और बोली- हेलो सोमू, मैं निम्मी हूँ. विनी ने मेरे बारे में बताया होगा।

मैं बोला- हां हां, बताया था।

निम्मी बोली- मैं तुम्हारे साथ वाली सीट पर बैठ सकती हूँ क्या?

मैं बोला- हाँ हाँ, क्यों नहीं।

तब मेरे बायें हाथ वाली सीट पर बैठी हुई लड़की उठी और मैं भी उठ कर बाहर आ गया और तब वो निम्मी खिड़की वाली सीट पर बैठ गई।

अब मैंने स्मार्ट लड़की को कहा कि वो चाहे तो बीच वाली सीट पर बैठ सकती है।

वो बोली- नहीं मुझे किनारे वाली सीट ही पसंद है।

इस तरह मैं दो सुन्दर लड़कियों के बीच में बैठा था।

जल्दी ही बस चल दी।

कालेज के एक पुरुष प्रोफेसर ने ज़रूरी अनाऊंसमेंट्स की और फिर एक महिला प्रोफेसर के साथ बैठ गया। वो दोनों बस के एकदम आगे वाले भाग में बैठे थे।

फिर मैंने साथ बैठी स्मार्ट लड़की को अपना परिचय दिया, उसका नाम मैरी था। अब मैंने उस लड़की को ध्यान से देखा, वो एक लम्बी स्कर्ट पहने हुए थी और लगता था कि वो क्रिस्चियन है। उसका शरीर काफी सुडौल था लेकिन रंग थोड़ा सांवला था, खूब पाउडर लिपस्टिक लगाये हुए थी।

निम्मी एक सुंदर लड़की थी लेकिन साधारण सलवार सूट में थी, उसका शरीर भी भरा हुआ था और रंग काफी साफ़ था। शक्ल सूरत से वो पंजाबी लग रही थी।

निम्मी से मैं बातें करता रहा क्यूंकि वो विनी के बारे में काफी कुछ जानती थी।

बस एक छोटे से शहर में नाश्ते के लिए रुकी और हम सब नीचे उतर कर एक साफ़ सुथरे रेस्टोरेंट में नाश्ता करने लगे।

वो दोनों लड़कियाँ भी मेरे साथ ही रहीं और हमने मिल कर अण्डों का आमलेट और टोस्ट खाया और चाय पी!

जब बस दोबारा चली तो निम्मी ने अपने थैले में से एक हलकी सी चुन्नी निकाल ली और अपने ऊपर और थोड़ी से मेरे ऊपर डाल दी।

निम्मी को नींद आने लगी और वो ऊँघने लगी और उसका सर मेरे कंधे पर आ गया। मैंने कोई ख़ास ध्यान नहीं दिया लेकिन थोड़ी देर बाद मुझको लगा कि निम्मी का हाथ मेरी जांघ पर आ गया था।

अब मैं काफी सतर्क हो गया।

धीरे धीरे निम्मी का हाथ सरकता हुआ मेरे लंड के ऊपर आ गया और मेरी पैंट के आगे के बटन खोलने शुरू किये। मैंने अपना हाथ उसके हाथ पर रख दिया और धीरे धीरे उसकी जांघ पर दोनों हाथ रख दिये- उसका और अपना भी!

!

फिर हल्के हल्के मैंने हाथ उसकी सलवार में छुपी उसकी चूत पर रख दिया। उसने अपना हाथ मेरे हाथ के ऊपर रख दिया और उस पर ज़ोर डालने लगी। मेरा हाथ उसकी कमीज से ढकी सलवार के ऊपर था।

उधर मैरी शायद छुपी नज़रों से हम दोनों का कार्य कलाप भांप रही थी, अब उसने भी अपने थैले से एक सुंदर सी पतली शाल निकाली और उसको अपने शरीर के ऊपर डाल लिया लेकिन काफी सारी शाल मेरे ऊपर आ गई थी।

अब थोड़ी देर बाद मैरी का भी हाथ मेरी जांघों के ऊपर दौरा कर रहा था। पैंट के ऊपर चलते हुए वो दो हाथ आपस में मिले और चौंक कर अलग हट गए।

पहले मैंने निम्मी को देखा और थोड़ा मुस्करा दिया और फिर मैरी की तरफ देखा और ज़रा मुस्करा दिया।

दोनों मेरी मुस्कराहट देख कर संयत हो गई।

मैंने दोनों से कहा- लगी रहो गर्ल्स और पकड़न पकड़ाई खेलते रहो दोनों। मुझको भी कुछ पकड़ने के लिए दे दो ना!वो दोनों भी मुस्करा दी।

फिर मैंने हाथ चुन्नी के नीचे करके अपने लंड को पैंट के बाहर निकाल लिया और निम्मी और मैरी का हाथ शाल और चुन्नी के अंदर से सीधा अपने खड़े लंड पर रख दिया।

दोनों को खड़े लंड पर हाथ रखने से एक हल्का सा करंट लगा और उनकी आँखें अचरज में फ़ैल गई और दोनों ने झट से अपना हाथ हटा लिया।

लेकिन मैंने फिर दुबारा उनका हाथ पकड़ कर लंड पर रख दिया।

मैं बोला- अब तुम दोनों घबराओ नहीं, मैं ज़रा भी बुरा नहीं मान रहा, अगर इजाज़त दो तो मेरे भी हाथ आप दोनों के ख़ज़ाने की सैर कर लें।

दोनों ने हँसते हुए हाँ में सर हिला दिया।

अब शाल हम तीनों के ऊपर आ गया था, सबसे पहले मैंने निम्मी की सलवार के ऊपर चूत वाली जगह पर हाथ रख दिया और मैरी की भी स्कर्ट के ऊपर हाथ रख दिया।

वो दोनों एक एक हाथ से मेरे लंड के साथ खेल रही थी और मैं भी सलवार के अंदर हाथ डालने की कोशिश कर रहा था पर उसकी सलवार का नाड़ा सख्त बंद था।

उधर मैरी की स्कर्ट को एक कोने से पकड़ कर ऊपर उठाने की कोशिश कर रहा था. दोनों ने मेरी मुश्कल को समझा और खुद ही निम्मी ने नाड़ा ढीला कर दिया और मैरी ने अपनी स्कर्ट एक साइड से थोड़ी ऊपर कर दी।

अब मेरा हाथ भी निम्मी की पैंटी के अंदर चूत पर था और उसकी घनी झांटों से खेल रहा था, मेरा बायां हाथ जो मैरी की तरफ था, वो भी मैरी की पैंटी के ऊपर चक्कर लगा रहा था।

मैरी की तरफ वाले हाथ ने पैंटी के ऊपर से ही उसकी भग को ढूंढ लिया था और उसको मसलना शुरू कर दिया और निम्मी की चूत पर हाथ फेरते हुए उसकी भी भग को तलाश लिया था।

दोनों की ही चूत हल्की गीली लगी और दोनों ही बहुत गरमा रही थी, मैं सर उठा कर बस मैं बैठे अन्य छात्र छात्रों की तरफ देखा। सब थोड़ा ऊंघ रहे थे और किसी का भी ध्यान हमारी तरफ नहीं था।

एक बात जो अजीब लगी, वो थी कि बस में ज्यादा लड़कियाँ थी और लड़के बहुत ही कम थे। इसी लिए तकरीबन ज़्यादा सीटों पर लड़कियाँ एक साथ बैठी थी और लड़के अलग बैठे थे।

निम्मी और मैरी एक एक हाथ से मेरे लंड की मुठी मारने की कोशिश कर रही थी लेकिन मेरे लंड पर ठण्ड थी क्यूंकि निम्मी की चूत पर मेरा हाथ पहुँच चुका था, उसको मेरे हाथ से ज्यादा आनंद आ रहा था और उधर मैरी की चूत को मैं पैंटी के ऊपर से छेड़ रहा था।

फ़िर मैरी ने ज़रा चूतड़ ऊपर उठा कर अपनी पैंटी को नीचे कर दिया जिससे उसकी चूत भी आधी नंगी हो गई।

अब दोनों चूतें मेरे हाथ में थी।

निम्मी की चूत का पानी पहले छूटा और ढेर सारा छूटा। उसने झट से अपना पर्स निकाला और उसमें से एक रूमाल निकाल कर अपनी सलवार के अंदर डाल दिया।

लेकिन मैरी की चूत पर बाल नहीं थे और वो सफाचट थी, उसकी चूत की चमड़ी काफी मुलायम थी और उस पर हाथ फेरते हुए काफी मज़ा आ रहा था।

उसकी भग काफी उभरी हुई थी और मोटी थी।

हाथ लगाते ही वो एकदम सख्त हो गई जैसे कि छोटा लंड हो।

धीरे धीरे मैरी की भग को रगड़ा तो वो अपने हाथ को मेरे हाथ के ऊपर रख रख देती थी और ज़ोर डालती थी कि यहीं करूँ।

फिर मैंने हाथ की ऊँगली को उसकी चूत के अंदर डाला और गोल गोल घुमाया।

मैरी ने झट अपनी जांघें बंद करके मेरे हाथ को कैद कर दिया।

वो थोड़ी सा कांपी और उसकी चूत में से भी थोड़ा सा पानी निकला और फिर उसने अपनी जांघें खोल दी लेकिन मेरे हाथ को भग के ऊपर ही रखा और साथ ही उसने मेरे लंड को भी सहलाना जारी रखा।

निम्मी भी अब अपना हाथ मेरे लंड पर रख कर उसके साथ या फिर अंडकोष के साथ खेल रही थी। मैं दोबारा से निम्मी की चूत के साथ खेल रहा था और वो अब पूरी तरह सी सूखी थी।

इतने में प्रोफेसर साहब उठे और घोषणा की- अगला शहर आने वाला है, यहाँ हम लंच करेंगे।

हम तीनों एकदम संयत हो गए और अपने कपड़े भी ठीक कर लिए।

मैं बोला- निम्मी और मैरी, आप दोनों मेरे साथ लंच करना प्लीज, तीनों एक साथ खाना खायेंगे। क्यों ठीक है?

दोनों बोली- हाँ सोमू, ठीक है।

लंच एक बहुत शानदार रेस्टोरेंट में था, खाना बहुत ही स्वादिष्ट बना था, हम तीनों ने चिकन करी और परांठे खाए।

खाना खाते समय मैंने मैरी और निम्मी को कहा- आप दोनों रात को कैसे सोना पसंद करेंगी? अलग अलग कमरे में दूसरी फ्रेंड्स के साथ या फिर दोनों एक ही कमरे को शेयर करेंगी?

निम्मी बोली- एक ही कमरे में सोयेंगी हम दोनों अगर तुम वायदा करो कि रात को तुम हमारे कमरे में आओगे। क्यों मैरी, तुमको मंज़ूर है क्या?

मैरी बोली- हाँ हाँ, बिल्कुल मंज़ूर है।

मैं बोला- तुम दोनों ऐसा करना कि सर को बोल देना कि तुम दोनों एक ही कमरे में ही सोयेंगी। तो वो तुम दोनों को एक कमरा दे देगा। मैं देखूंगा मेरा साथ कैसे बनता है।

खाना खाने के बाद हम अपनी सीटों पर बैठ गए और जल्दी ही बस फिर चल पड़ी।

पेट भरे होने के कारण हम सब ही जल्दी झपकी लेने लगे और शाम होते ही हम नैनीताल की सुन्दर पहाड़ियों में पहुँच गए।

जैसा हम चाहते थे, निम्मी और मैरी को एक कमरा मिल गया और मुझको भी उनसे दो कमरे के बाद अलग कमरा मिल गया। प्रोफेसर सर बोले- मुझको थोड़े पैसे ज़्यादा देने पड़ेगे।

मैंने कहा- कोई बात नहीं सर में दे दूंगा।

फिर हम सब नैनीताल के माल रोड पर घूमने के लिए निकल गए, मैरी और निम्मी मेरे साथ ही थी।

नैनीताल की लेक अति सुन्दर लग रही थी रात को… वहाँ मैंने दोनों लड़कियों को गोलगप्पे और चाट खिलाई, कोकाकोला पीकर सब वापस आ गए।

रात का डिनर बहुत ही सुन्दर था। कई प्रकार के व्यंजन बने थे और हम सबने बड़े ही आनन्द से रात को भोजन किया और उसके बाद होटल के हाल में खूब गाना बजाना हुआ, कई लड़कों और लड़कियों ने बड़ा ही सुन्दर डांस और संगीत का प्रोग्राम दिया।

उसके बाद जल्दी ही हम सब सो गए।

जैसा कि मेरा अनुमान था, सर और मैडम ने ठीक रात के 11 बजे सब कमरों को चेक किया कि सब विद्यार्थी अपने अपने कमरों में मौजूद हैं या नहीं।

उसके बाद वो भी सो गए।

जैसा हमने तय किया था, मैं 12 बजे रात को निम्मी और मैरी के कमरे को 3 बार हल्के से खटखटाऊंगा और तभी मैरी या निम्मी कमरे का दरवाज़ा खोल देंगी।
 
नैनीताल में मैरी और निम्मी के साथ

जैसा हमने तय किया था, मैं 12 बजे रात को निम्मी और मैरी के कमरे को 3 बार हल्के से खटखटाऊंगा और तभी मैरी या निम्मी कमरे का दरवाज़ा खोल देंगी।

मैंने निर्धारित समय पर उनके कमरे पर पहुँच कर 3 बार हल्के से खटखटाया और तभी मैरी ने दरवाज़ा खोल दिया।

मैंने इधर उधर देखा कि कोई देख तो नहीं रहा और जल्दी से अंदर कमरे में चला गया।

कमरे में हल्की लाइट में देखा कि निम्मी तो गहरी नींद में सोई है और मैरी एक रेशमी चोगे में लिपटी मेरे सामने खड़ी है। उसने दरवाज़ा बंद करके झट से मुझको अपनी बाँहों में ले लिया और ज़ोरदार किस मेरे होटों पर दे दी।

मैंने भी एक हॉट किस उसके होटों पर दी और उसको कस कर अपने आगोश में ले लिया।

इस तरह हम काफी देर तक एक दूसरे को चूमते रहे।

जब चुम्बन से फारिग हुए तो मैरी जल्दी से मेरे कपड़ों को उतारने के लिए उकसाने लगी। मैंने भी जल्दी से अपना कुरता और पजामा उतार दिया और तब तक मैरी भी सिल्की चोगा उतार चुकी थी।

हम दोनों ने एकटक एक दूसरे को देखा। मैरी वाकयी में एक सुंदर लड़की थी, उसके नयन नक्श के अलावा उसका शरीर भी बहुत ही सेक्सी था।

खूब मोटे और उन्नत उरोज और गोल और काफी उभरे हुए चूतड़… कुल मिला कर बहुत ही सेक्सी बना रहा था यह सारा दृश्य।

मैंने भी आगे बढ़ कर उसके उन्नत उरोजों को दोनों हाथो में ले लिया और उनके कड़ेपन को परखने लगा। एक हाथ उसके चूतड़ों पर रख दिया और उनकी गोलाई और मोटेपन को जांचने लगा।

फिर मैंने उसका दायाँ मुम्मा अपने मुँह में ले लिया और उसके मोटे काले निप्पल जो एकदम खड़े थे, अपने मुंह में डाल कर चूसने लगा।

मैरी ने जल्दी दूसरे मम्मे को भी मेरे मुंह में डाल दिया।

मैरी भी मेरे लोहे के समान खड़े लंड को ध्यान से देख रही थी, शायद उसने पहले इतना बड़ा और मोटा लंड कभी नहीं देखा था।

उसने मुझको मम्मे चूसने से रोकते हुए नीचे बैठ कर मेरे लंड को अपने मुंह में रख लिया और उसको लॉली पॉप की तरह चूसने लगी और साथ ही मेरे अंडकोष के साथ हाथ से खेलने लगी।

मेरे अंडकोष एकदम टाइट हुए थे।

अब मैंने उसको खड़ा किया और उसकी चूत में ऊँगली डाली तो वो बहुत ही पनिया रही थी, उसके भग को हल्के से रगड़ा तो वो और भी उन्मुक्त हो गई।

अब मैं उसको किस करते हुए एक सिंगल बेड की तरफ ले जा रहा था जिसमें वो पहले लेटी थी, दूसरे में तो निम्मी सोई हुई थी।

मैरी को बेड पर लिटा कर मैंने उसकी टांगों को चौड़ा किया और उसकी सफाचट चूत को चाटने लगा। जैसे ही जीभ उसकी भग पर लगी, वो एकदम चौंक गई।

फिर जब मैं हल्के से जीभ उसकी भग के ऊपर रख कर गोल गोल घुमाने लगा तो उसने अपनी कमर ऊपर उठा कर मेरे मुंह के साथ जोड़ दी।

मैं भी अपने हाथ उसकी कमर के नीचे रख कर उसकी चूत की सेवा करने लगा, चुसाई और चटाई दोनों काम साथ साथ चल रहे थे।

उसके हाथ मेरे सर को और भी अपनी चूत में घुसेड़ने की कोशिश करने लगे और उसके चूतड़ थोड़ी देर बाद हल्के हल्के कांपने लगे और मैं समझ गया कि लोहा पूरी तरह से गर्म है।

मैंने उसकी जाँघों के बीच बैठ कर अपना लौड़ा उसकी चूत पर रखा और एक हल्का झटका मारा कि वो हल्के से चिल्ला पड़ी- मर गई उफ्फ्फ!

मेरा लंड बिना किसी रुकावट के पूरा अंदर चला गया। मैंने धीरे से उसको निकाला और फिर धीरे से अंदर धकेल दिया।

3-4 बार ऐसा करने के बाद मैरी ने अपनी टांगें पूरी खोल दी और उसको मेरी कमर की चारों ओर लपेट दिया।

अब मैं एक लय से उसको मज़े मज़े से चोदने लगा, कभी तेज़ और कभी आहिस्ता!

थोड़ी देर बाद मैंने महसूस किया कि किसी का हाथ मेरे चूतड़ों पर थपकी दे रहा है।

मुड़ कर देखा तो निम्मी अपनी सिल्क के पयज़ामे कुर्ते में मेरे चूतड़ों को थपकी दे रही थी।

मैं बोला- आ जाओ मैदान में निम्मी, खेल अभी शुरू हुआ है।

निम्मी ने झट से अपने कपड़े उतार दिए और चारपाई की साइड से वो मैरी के मम्मों के साथ खेलने लगी और फिर मेरे लौड़े को हाथ से अंदर बाहर जाते फील करने लगी।

मैंने बिना निम्मी को देखे ही अपना काम जारी रखा और फुल स्पीड से मैरी को चोदता रहा। निम्मी हाथों से मैरी को उकसा रही थी और मैरी भी समझ कर नीचे से चूतड़ उठा उठा कर मेरे लंड का जवाब दे रही थी।

थोड़ी देर में ही मैरी एक बार फिर झड़ गई और मैंने उसको उठा कर घोड़ी बना दिया और अपना तना हुआ लौड़ा उसकी चूत में पीछे से पेल दिया।

अब लंड पूरा का पूरा उसकी चूत में जड़ तक जा रहा था।

निम्मी कभी मेरे लौड़े को छूती थी और कभी मैरी की झाग वाली चूत पर हाथ रख रही थी। निम्मी ने वहीं खड़े हुए अपना मुंह मेरे मुंह के साथ जोड़ दिया और मुझको किस करने लगी।

मैं भी मैरी को धक्के मार रहा था लेकिन किस निम्मी को कर रहा था।

इस तरह चोदते हुए मुझ को 7-8 मिन्ट हुए होंगे कि मैरी अबकी बारी बुरी तरह से झड़ गई, उसके झड़ते हुए चूतड़ों की कंपकम्पाहट को निम्मी भी फील कर रही थी।

मैंने आखिरी बार थोड़े से धक्के और मारे और अपना मैरी की चूत से लंड निकाल लिया।

मैरी आँखें बंद किये लेटी हुई थी और निम्मी होटल के तौलिये से मैरी की चूत और मेरे लंड को साफ़ कर रही थी। मैरी की सांसें अभी भी धौंकनी की तरह चल रही थी।

निम्मी मुझको उठा कर अपने बेड पर ले गई, मुझको लिटा कर उसने कोका कोला की 3 बोतलें खोली, एक मुझको दी और बाकी दो उसने मैरी और अपने लिए रख ली।

मैरी ने कोका कोला पीते हुए मुझको ‘थैंक यू सोमू डार्लिंग…’ कहा और मैंने भी जवाब में कहा- वेलकम मैरी डार्लिंग। आई लव यू एंड निम्मी।

मैं बैठ कर कोकाकोला पी रहा था, मेरा एक हाथ निम्मी के गोल मोल छोटे मम्मों के साथ खेल रहा था और निम्मी का एक हाथ मेरे लौड़े पर था।

मैंने यह नोट किया है अब तक अपनी सेक्स लाइफ में कि औरतों और लड़कियों की नज़र सीधे आदमी के लौड़े पर जाती है जबकि आदमी की नज़र पहले औरतों के मम्मों पर फिर उसके चूतड़ों पर और आखिर में उसकी चूत पर जाती है।

मैंने भी जब निम्मी की चूत देखी तो उसको बालों से ढका हुआ पाया जबकि मैरी की चूत बालों रहित थी यानि सफाचट थी। वो नियमित शेव करती थी चूत के बालों का और निम्मी बालों को नहीं शेव या नहीं काटती थी।

कोक पीते हुए निम्मी मुझको चूमने लगी, पहले मेरे लिप्स पर फिर वो मेरे सारे मुंह पर, मैं भी उसके मम्मों के साथ खेल रहा था और उंगली कभी उसकी चूत में भी डाल रहा था और कभी उसकी झांटों के साथ खेल रहा था।

निम्मी की चूत भी एकदम गीली हो चुकी थी, मैंने उसको कहा- निम्मी, अब तुम्हारी बारी है मुझको चोदने की, बोलो कैसे चोदना चाहती हो?

निम्मी बोली- मैं आदमी बन कर तुमको चोदना चाहती हूँ डार्लिंग सोमू। क्या चुदवाओगे मुझसे?

मैं बोला- जैसा हुक्म मालकिन या फिर मल्लिका-ए-आली। मैं क्या करूँ अभी आपके लिए?

निम्मी भी उसी लहजे में बोली- ऐ गुलाम, अब तुम लेट जाओ और अपने लंड को खड़ा रखो जब तक मलिका-ऐ- आलिया हुक्म न दें!

मैरी जो यह सब देख रही थी, वो भी इस ड्रामे का हिस्सा बनने को तैयार थी, वो बोली- ऐ मलिका-ए-आलिया यह कनीज़ भी आपकी खिदमत में हाज़िर है, हुक्म कीजिए।

निम्मी बोली- सबसे पहले इस ग़ुलाम के लंड को साफ़ करो और फिर इस पर सेंट लगा कर इसको खशबूदार करो!

मैरी बोली- जो हुक्म मलिका-ए-आली।

तौलिये से उसने मेरे लौड़े को साफ़ किया और फिर उस पर लेडीज परफ्यूम लगाया और फिर वो बोली- आपका वफ़ादार लंड तैयार है मलिका-ए-आली!

निम्मी बोली- हमको सहारा दो और इस ग़ुलाम के लौड़े पर बिठा दो, आज हम इस लंड की सवारी करना चाहती हैं।

मैरी ने उसको उठाया और मेरे लंड के ऊपर बिठा दिया और उसका निशाना भी निम्मी की चूत की तरफ कर दिया।

मैरी बोली- मलिका-ए-आली, आपके ग़ुलाम की तोप का निशाना ठीक आपके खज़ाने पर लगा दिया है, आप हुक्म दें तो आपके ख़ज़ाने पर तोप चढ़ा दें।

निम्मी बोली- ऐ कनीज़, हमारे को उठा कर तोप पर चढ़ा दो.

मैरी ने निम्मी को हल्का सा उठाया और घुप से लंड के ऊपर बिठा दिया और ऊपर से उसको ज़ोर से धक्का दिया तो मेरा पूरा का पूरा लौड़ा उसकी चूत में चला गया।

अब मैं भी नीचे से धक्के मारने लगा और मलिका भी ऊपर से धक्के पर धक्के मार रही थी।

मैरी उसके मम्मों को चूस रही थी और मैं उसके चूतड़ों को मसल रहा था, उसकी झांटें उसकी चूत में से निकल रहे गाढ़े रस से सरोबार हो रहीं थी, कुछ रस टपक कर मेरे पेट पर भी गिर रहा था।

निम्मी के चूतड़ों को अपने दोनों हाथों से नीचे से पकड़ रखा था और उनको मैं ही ऊपर नीचे कर रहा था।

फिर मैं बैठ गया और निम्मी को गोद में लेकर चोदने लगा, उसके दोनों गोल मम्मे मेरी छाती से चिपके हुए थे।

मैंने अपने मुंह को निम्मी के मुंह के साथ जोड़ कर उसके अंदर जीभ घुमा रहा था और उसका रस पी रहा था।

निम्मी के चूतड़ों को मैंने अपने हाथों में लिया हुआ था, उनको अपनी स्पीड से आगे पीछे करने लगा।

तभी वो एक गहरी हाय के बाद झड़ गई और मुझको कस कर अपने से चिपका लिया।

थोड़ी देर बाद वो संयत हुई और उठ कर बिस्तर पर लेट गई। मैं भी उठा और जल्दी से अपने कपड़े पहनने लगा और एक हॉट किस करके दोनों को थैंक्स बोला और चुपके से लड़कियों के कमरे से निकला और अपने कमरे की तरफ जाने लगा।

तभी एक कमरे का दरवाज़ा खुला और एक हाथ निकला और मुझ को खींच कर उस कमरे में घसीट लिया।

इससे पहले मैं समझ पाता कि क्या हो रहा है, मुझको अंदर लेकर दरवाज़ा बंद हो गया।

अंदर एकदम अँधेरा था।

थोड़ी देर में कमरे में एक हल्की लाइट जल उठी, उस लाइट में देखा कि दो लड़कियाँ मेरी दोनों तरफ खड़ी थी, रोशनी होते ही बोली- हेलो सोमू बाबा, कैसे हो तुम?

मैं हक्का बक्का हुआ आँखें फाड़ कर देख रहा था कि ये दोनों कौन हैं? इनको पहले कभी देखा तो नहीं?

फिर मैंने हिम्मत जुटा कर उनसे पूछा- आप कौन हैं और इस तरह मुझको क्यों इस कमरे में ले आई हैं?

उन दोनों लड़कियों में जो लम्बी थी, वो बोली- सॉरी सोमू बेबी, हमको यह करना पड़ा। क्यूंकि तुमने सारे रास्ते हमारी तरफ देखा तक नहीं। हम तुम्हारे पीछे वाली सीट पर बैठी थी और तुम्हारी सारी हरकतें देख रहीं थी।

मैं घबरा कर बोला- ओह तो तुम दोनों हमारी बातें भी सुन रही थी? तुम को कैसे पता चला कि हम यहाँ आज रात को मिलने वाले हैं?

लम्बी वाली फिर बोली- बताया तो, हमने तुम्हारी कई बातें अच्छी तरह से सुनी थी और हमारा अंदाजा था कि तुम आज रात मैरी और निम्मी को मिलने ज़रूर आओगे। जब तुम उन दोनों के कमरे की तरफ गए तो हमने थोड़े खुले दरवाज़े से देखा था।

मैं थोड़ा गुस्से में आया लेकिन फिर सोचा कि गुस्से से मेरा ही नुक्सान ज़यादा होगा, मैंने सुलह सफाई के लहजे में पूछा- अच्छा ठीक है, अब तुम बताओ कि तुम दोनों मुझसे क्या चाहती हो?

लम्बी फिर बोली- वही जो तुमने मैरी और निम्मी को दिया, वही मज़ा हम भी चाहती हैं।

मैं बोला- मैं तो सारा माल दे आया हूँ उन दोनों को, तो बोलो अब मैं क्या दूं तुम दोनों को?

लम्बी बोली- जो कुछ भी बचा है वो हमको दे दो।

मैं बोला- अभी तो कल की रात भी है, कल तुम अपनी बारी लगा लेना।

लम्बी बोली- नहीं नहीं, हमको भी थोड़ा मज़ा दे जाओ यार! सारी उम्र तुम्हारी अहसान मंद रहेगी हम दोनों।

मैं बोला- अच्छा ठीक है लेकिन पहले अपनी शक्ल तो दिखाओ दोनों।

तब दोनों ने कमरे में बड़ी लाइट ओन कर दी और मैंने देखा की लम्बी पतली और इकहरे बदन वाली है और छोटी थोड़ी मोटी और गोल बदन वाली है।

दोनों ही अपने रात वाले कॉटन के चोगे पहने हुए थी।

मैंने कहा- सच बोलूँ तो दिन भर के सफर ने थका मारा है और मेरी मानो कल का प्रोग्राम रख लो तो सबके लिए अच्छा रहेगा।

लम्बी बोली- चलो ठीक है लेकिन आज कुछ नमूना तो दिखा जाओ जिसके सहारे हम कल की इंतज़ार कर लेंगी दोनों, क्यों छोटी?

छोटी बोली- कुछ तो अपना जलवा दिखा जाओ न मेरे यार?

मैं बोला- रात बहुत हो चुकी है, तुम जल्दी करो जो कुछ भी करना है। अच्छा तुम दोनों अपने नाम तो बताओ या फिर मैं तुम को लम्बी और छोटी के नाम से ही बुलाऊँ?

लम्बी बोली- मेरा नाम शानू है, और इसुका नाम बानो है और हम दोनों इंटर फाइनल में हैं, और तुम सोमू, फर्स्ट ईयर में हो! है न?

मैं बोला- हाँ, तो शुरू हो जाओ, कपड़े उतारो अपने जल्दी से और मैं भी उतारता हूँ।

यह सुन कर दोनों खिल उठी और फिर जल्दी से दोनों ने अपने कपड़े उतार दिए और मैंने भी अपन पजामा कुरता उतार कर साइड में रख दिया।

अब दोनों की नज़र मेरे खड़े लौड़े पर पड़ी और दोनों की नज़रें एकदम फट गई क्यूंकि उनको उम्मीद थी कि मेरा लंड थका हुआ होगा, उनको मेहनत करनी पड़ेगी उसको खड़ा करने के लिए।

लेकिन जब लहलाते लंड को देखा तो उनके मुंह से लार टपकने लगी और दोनों भाग कर लंड को अपने मुंह में लेने के लिए बड़ी बेकरारी से मेरे पास आई।

मैं बोला- इतनी जल्दी नहीं, पहले अपनी इंस्पेक्शन करवाओ?

दोनों के मुंह पर सवालिया निशान बना हुआ था।

मैंने उनको इशारे से अपने पास बुलाया और उनकी चूतों को ध्यान से देखने लगा।

शानू की चूत सफाचट थी और बानो की चूत पर घने बाल थे। मैं उन दोनों की चूत का निरीक्षण परीक्षण करने के लिए ऊँगली डालकर और फिर उसको सूंघ कर पूरा किया। दोनों ही खुली चूतें थी तो पहले से चुदी हुई थी।

यह काम ख़त्म करने के बाद मैंने कहा- देखो, मैं बहुत ही थका हुआ हूँ, मैं लेट जाता हूँ तुम दोनों बारी बारी से मुझको जितना चाहो चोद लो। जब तसल्ली हो जाए तो कह देना मैं अपने कमरे में चल जाऊँगा। मंज़ूर है?

दोनों ने कहा- जो हुक्म मेरे आका, हम बांदियां तो आपकी है, जैसा चाहो जब चाहो, कर लो!

फिर दोनों मेरी अगल बगल में लेट गई। मैं उन दोनों की चूतों को गर्म करने की कोशश करने लगा, भग को खूब मसला और जब उन दोनों की चूत गीली हो गई तो पहले पतली पर लम्बी शानू को चोदने के लिए बुलाया।

वो मेरे ऊपर पैरों के बल बैठ गई और मेरे लंड को अपनी सफाचट चूत में डाल लिया, बानो मेरी गोलियों के साथ खेलने लगी।

मैंने अपना एक हाथ उसके छोटे और गोल मम्मों के साथ खेलने के लिए छोड़ दिया और दूसरा हाथ बानो की चूत के बालों में डाल दिया।

शानू ऊपर से ज़ोर ज़ोर से धक्के मार रही थी।

मैंने अब बानो को अपने मुंह के ऊपर खींच लिया और उसके मुंह और होटों पर ताबड़तोड़ चूमियों की बारिश कर दी और कभी उसका दायाँ मम्मा या फिर बायें मम्मे को चूसने लगा।

उधर मैं देख रहा था कि शानो को चुदाई में इतना आनन्द नहीं आ रहा था इसलिए मैंने उसको अपने ऊपर से हटा दिया और दोनों को एक साथ घोड़ी बना लिया और फिर मैंने पहले शानो को पीछे से चोदना शुरू कर दिया और 10 धक्के मारने के बाद मैंने चूत बदल दी यानी शानू की बजाये बानो की चूत में अपना लौड़ा डाला।

अब बारी बारी मैं दोनों लड़कियों को चोद रहा था, एक की चूत से निकाल कर दूसरी में डाल कर दोनों को मज़ा दे रहा था।

थोड़ी देर की मेहनत में पहले शानू छूटी और कुछ देर बाद ही बानो भी छूट गई।

अब दोनों लड़कियों के बीच में मैं लेटा था और दोनों ही मेरे खड़े लौड़े को देख कर अचरज कर रहीं थी और बार बार उसको चूम रही थी।

अब मैं उठा और अपने कपड़े पहनने लगा, वो दोनों मुझ को अभी भी हैरानी से देख रही थी, दोनों नंगी ही लेटी रहीं।

मैं उन दोनों को बाय करके बाहर आया और अपने कमरे में घुस गया और जाते ही थक कर गहरी नींद सो गया।

सुबह जब मेरी नींद खुली तो सूरज काफी सर पर आ गया था, कालेज के छात्र ब्रेकफास्ट करने होटल के रेस्टोरेंट में गए हुए थे।

जब मैं वहां पहुंचा तो तकरीबन सभी नाश्ता कर के जा चुके थे. सिर्फ निम्मी और मैरी बैठी थी एक टेबल पर और दुसरे टेबल पर शानो और बानो विराजमान थी. दोनों आपस में बड़ी तन्मयता से बातें कर रही थी.

मुझ को देख कर दोनों ग्रुप चुप हो गए. निम्मी और मैरी मुझ को अपने टेबल पर बुला रही थी और शानो और बानो अपने टेबल पर बुला रहीं थी.

मैं समझ गया की दोनों ग्रुप आपस में मिले हुए थे.

मैं सीधे ही निम्मी और मैरी के टेबल पर बैठ गया और उन को आहिस्ता से कहा- मुझ को यह उम्मीद नहीं थी की तुम और शानो मिले हुए हो एक दुसरे से. रात को मुझ को उन दोनों ने भी पकड़ लिया और मुझ को चोदा यानी मेरा रेप किया।

मैं बहुत रुआंसा मुंह बना कर बैठा था.मैरी बोली- सो सॉरी सोमु हम से गलती हो गयी थी. हम को तुम को बता देना चाहीऐ था लेकिन इस शानो की बच्ची ने हम को मना किया था। इस लिए हम कुछ नहीं बोली। रियली वेरी सॉरी।

शानो और बानो भी माफ़ी मांगने लगी. वैसे मै दिल ही दिल मैं बहुत खुश था की कल रात दो की जगह चार लड़कियों की चुदाई कर दी थी मैं ने। लेकिन मैं ने अपना रुख कठोर बनाई रखा.

मैं बोला- मेरा रेप कर के आप सॉरी बोल रहीं हैं उफ्फ्फ्फ़ यह क्या देख रहा हूँ मैं.

खैर जाने दो।

और मैं चुप चाप 4 अण्डों का ऑमलेट और माखन मार के टोस्ट खा रहा था. रात बड़ी एनर्जी खर्च हो गयी थी इस लिए।

निम्मी बोली- और क्या लाऊँ सोमु बोलो तो सही.

मैं बोला- लाना ही चाहती हो तो एक गिलास ऑरेंज जूस ले आओ.

बानो बोली मैं-क्या लाऊँ ?

मैं बोला- तुम मेरे लिए एक कप काफी ले आओ.

चारों लड़कियं मेरी खातिर में लग गयी थी. मैं नाश्ता खत्म कर के बोला- सच बताना यह मेरी बात और किस लड़की को मालूम है?

चारों ने एक साथ कहा- और किसी से कोई बात नहीं हुई है. कसम से.

मैं बोला- क्यों निम्मी और मैरी तुम को पहले से पता था मेरे बारे में?

निम्मी बोली- हाँ पता था.

मैं बोला-कैसे पता था तुम को ? किस ने बताया ?

निम्मी बोली- वो तुम्हारे घर में विनी और उस की बहन रहती हैं न वो हमारी भी सहेली। उसी ने हिंट दिया था की तुम्हारे हथियार में कमाल की शक्ति है.

मैं बोला- लेकिन मैं ने कभी उस के साथ कुछ नहीं किया था. खैर छोड़ो। अब क्या इरादा है?

शानो जो उन में सब से बड़ी थी बोली-जो तुम कहो वही हम को मंज़ूर है.

मैं बहुत धीमे स्वर में बोला- देखो जो हुआ वो बहुत डेंजरस था. हम सब पकडे जा सकते थे और हमारे घरवाले हमें कहीं का नहीं छोड़ते। अब के बाद हम एक दुसरे के नज़दीक नहीं आएंगे इस सारे ट्रिप में.

शानो बोली- नहीं सोमु प्लीज ऐसा ना कहो हमारा क्या होगा? हमतो कल पूरी तरह से आनंद नहीं ले सकी थी.

मैं बोला- अच्छा ऐसा करो सारा दिन हम चारों एक दुसरे के निकट नहीं आएंगे।ताकि किसी को शक न हो और रात के डिनर के बाद फैसला करेंगे की रात कैसे और किस के साथ गुज़ारनी है.ओके?

सब बोली- ओके। ठीक है.

मैं बोला- अब आप निकलो हाल से मैं बाद में आता हूँ।

मैं भी थोड़ी देर बाद नाश्ता ख़त्म कर के निकला और होटल के गार्डन में टहलने लगा।
 
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