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अब मैदान साफ़ था तो मैं चुपके से साथ वाले केबिन में दरवाज़ा खटका कर अंदर घुस गया। दोनों शमाएँ जलने जलाने के लिए तैयार बैठी थी, मैंने अंदर घुस कर केबिन का दरवाज़ा लॉक कर दिया।
फिर वही सिलसिला किसिंग और गर्म गर्म जफ़्फ़ियों का शुरू हो गया लेकिन मैंने अब ज़्यादा समय ना गंवाते हुए थोड़ी जल्दी शुरू कर दी और शमा की सलवार खोलने लगा तो रूबी मेरी पैंट को उतारने में लग गई।
मैंने उनको कहा- कभी भी किसी के आ जाने का काफी खतरा है यहाँ, तो कम से कम कपड़े उतारे जाएँगे ताकि कोई आ जाये तो वापस पहनने में कोई दिक्क्त न हो।
दोनों ने सर हिला कर हामी भर दी और रूबी जो मेरी पैंट खोल रही थी और जैसे ही वो मेरे अंडरवियर तक पहुँची तो वहाँ कच्छे में टेंट बना देख कर हंस पड़ी और शमा को बुला कर उसको भी हैरत से दिखाने लगी।
शमा ने नीचे झक कर मेरे कच्छे को नीचे किया तो लंडम लाल एकदम उन्मुक्त होकर हवा में लहलहाने लगे।
शमा ने झट से लंड को मुंह में ले लिया और रूबी मेरे अंडकोष को चूमने लगी और मेरा भी हाथ खाली न रह कर शमा की बालों भरी चूत को टटोलने लगा।
फिर मेरा दूसरा हाथ शमा के गोल गोल मुम्मों के ऊपर चला गया वो अभी भी कमीज से ढके हुए थे।
रूबी ने शमा की कमीज और ब्रा को ऊपर कर दिया जिससे उसके गोल और सॉलिड मुम्मे मेरे सामने आ गए, मैंने अपना मुंह उसके मुम्मों को चूसने को लगा दिया और दूसरे हाथ से रूबी की चूत को सहलाने के लिए लगा दिया और वो एकुदम लबालब पानी से भरी हुई थी।
दोनों ही शायद चुदाई के बारे में सोच सोच कर बहुत ही ज़्यादा गर्म हो चुकी थी और उन दोनों की चूत लपालप लंड लेने की इंतज़ार में थी।
मैं ने शमा को ऊपर किया और उसके कान में कहा- शमा जी आपकी शमा जलाएँ क्या?
शमा बोली- हज़ूर, वो तो आपके लंड को देख कर ही जल रही है सो जल्दी से अपनी जलती हुई मशाल को शमा के हवाले कीजिये सरकार मेरी।
मैं बोला- पेश है मशाल जो जलती रहे रात दिन!
यह कह कर मैंने उसको उल्टा खड़ा किया और उसके दोनों हाथ सीट पर रख कर पीछे से लंड का निशाना साधा और एक धक्के में अपने लम्बे और मोटे लंड को शमा की चूत में डाल कर उसके अंदर की शमा को रोशन करने लगा।
रूबी भी अब अपनी कमीज और ब्रा ऊपर कर के अपने मस्त गुब्बारों को उड़ने ले लिए आज़ाद करने लगी। उसके उरोज भी अलमस्त और मदमस्त थे, देखते ही शराब का नशा सा आ गया आँखों में और चूचियों को सहला कर दोनों को मरहबा कहा मन ही मन!
उसकी गांड पर हाथ फेरते हुए मन ही मन कहा- माशाल्ल्लाह क्या लुत्फ़ अन्दोज़ चीज़ें हैं यह दोनों उभरे हुए गोल गुंबद!
और शमा शायद मन ही मन कह रही थी- वाह क्या मीनारे कुतब शाही है इसका लौड़ा। लम्बा और मोटा तो है ही और क्या तपते लोहे की सलाख है यह जौनपुरी केला जो खाए वो भी पछताए और जो ना खाए वो कभी ना समझ पाये।
शमा की चूत में अब काफी हलचल थी वो खुद आगे पीछे हो कर चुदाई की स्पीड को कंट्रोल कर रही थी और जब उसने इस काम में तेज़ी दिखाई तो मैं समझ गया कि यह किला फ़तेह होने में ज़्यादा वक्त नहीं लगेगा और मैंने अपना दायाँ हाथ उसकी चूत के अंदर उसकी भग मसलने की ड्यूटी पर लगा दिया।
ऐसा करते ही शमा की उछल कूद और तेज़ हो गई और वो आँखें बंद करके फुसफ़ुसा रही थी- मार डालोगे क्या… उफ़ मैं गई रे…
फिर उसके धक्के एकदम तेज़ दर तेज़ हो गये और कुछ मिन्ट में वो थोड़ी से कांपी और सीट के ऊपर लुढ़क गई और मैंने अपनी तरफ से इनामी धक्के मारे उसको सीट पर लिटा कर और फिर मैं उसकी चूत से अपने गीले लौड़े को निकाल कर रूबी की चूत को ढूंढने लगा।
रूबी यह तमाशा देख कर अपनी चूत में से निकलती आग को अपनी ऊँगली से बुझाने की कोशिश कर रही थी और अब मेरे लौड़े को आज़ाद देख कर वो लपक पड़ी और वैसे ही सीट पर झुक कर खड़ी हो गई और मेरे अग्नि बाण का इंतज़ार करने लगी।
मैंने अपने शमा की चूत के पानी से लबरेज़ हुए लौड़े को रूबी की चूत के मुंह पर रख कर अंदर धकेल दिया और एक ही झटके में पूरा जब अंदर चला गया तो रूबी उछल पड़ी और ज़ोर से चिला पड़ी- उईईइ माआ मर गई रे!
लेकिन साथ ही बड़ी मोहब्बत से उसने पीछे मुड़ कर मेरी तरफ देखा और हल्के से मुस्करा दी और मेरे दिल ने कहा- मर जावां गुड़ खा के, साली क्या मुस्कराई है, यार वारी जाऊं!
और फिर मैं ने धीरे धीरे धक्के मारने शुरू किये, पूरा अंदर फिर पूरा बाहर, सिर्फ लंड की टिप अंदर, और फिर ज़ोरदार धक्का अंदर, बारमबार ऐसा करने से गिर जाती हैं बड़ी बड़ी शहसवार बेगमें और गुलामी कबूल कर लेती हैं खूबसूरत हूरें।
मैंने महसूस किया कि रूबी ज़्यादा आनन्द ले रही थी चुदाई का और बार बार मुड़ कर आँखों ही आँखों से शुक्रिया अदा कर रही थी।
मैं भी रूबी की हलीमी का कायल हो गया और इस कोशिश में लग गया कि इसको ज़्यादा से ज़्यादा लुत्फ़ अन्दोज़ करवाऊँगा।
मैं भी अब पूरी तरह से मस्त होकर चुदाई में लग गया और उसके गोल और सख्त चूतड़ों को सहलाने लगा और उसकी गांड में भी हल्की सी ऊँगली डाल दी और उसने फिर मुड़ कर एक प्यार भरी नज़र से देखा जैसे कह रही हो करते रहो गांड में भी ऐसा ही!
उधर शमा सीट पर पूरी पसर गई थी और उसकी खुली सलवार के अंदर से उसकी फूली हुई चूत के दर्शन हो रहे थे और उसमें से अभी भी थोड़ा थोड़ा रस निकल रहा था जो उसकी चूत का था और वो टप टप उसकी सलवार में गिर रहा था।
अब रूबी ने अपने चूतड़ों से इशारा किया कि तेज़ चुदाई करूँ, मैंने कमर कस के धक्कों की स्पीड धीरे धीरे तेज़ कर दी और उसकी चूत में ऊँगली डाल कर महसूस किया कि वो छूटने से ज़्यादा दूर नहीं है।
मेरी तेज़ स्पीड के आगे रूबी अब अधिक देर टिक ना सकी और हाय हाय करती हुई बहुत ज़्यादा पानी छोड़ती हुई एक सिहरन होने लगी उसके शरीर में!
मैं अब ट्रेन के फर्श पर बैठ गया और उसके नितम्बों को चूमने और चाटने लगा जिससे उसको बड़ा मज़ा आ रहा था।
अब मैं लेटी हुई शमा के गोल मुम्मों को जीभ से चाटने लगा और उसकी चूचियों का रसपान करने लगा।
शमा ने मुझको एक बहुत ही गहरी जफ़्फ़ी डाल दी और मेरे लबों को चूमने लगी, मैं भी उसके अधरों को जीभ से चूसने लगा।
अब दोनों थोड़ी संयत हो गई थी और अपने कपड़े ठीक कर रही थी, मैं भी अपनी पैंट वगैरह ठीक कर रहा था।
फिर मैंने उन दोनों को गुड नाईट कहा और जाने लगा तो शमा बोली- अब फिर कब होगी मुलाकात हम दोनों के सरताज?
मैंने भी उसी लहजे में जवाब दिया- जब आप चाहो बेगमाते-ऐ-अवध मैं आपका खाविंद आपकी खिदमत में हाज़िर रहूंगा। आप सिर्फ़ हुक्म नादिरशाही जारी कीजिये, बंदा आप की खिदमत में हाज़िर हो जाएगा।
यह कह कर मैंने उन दोनों को एक बार चूमा और केबिन का दरवाज़ा खोल कर बाहर आ गया।
फिर वही सिलसिला किसिंग और गर्म गर्म जफ़्फ़ियों का शुरू हो गया लेकिन मैंने अब ज़्यादा समय ना गंवाते हुए थोड़ी जल्दी शुरू कर दी और शमा की सलवार खोलने लगा तो रूबी मेरी पैंट को उतारने में लग गई।
मैंने उनको कहा- कभी भी किसी के आ जाने का काफी खतरा है यहाँ, तो कम से कम कपड़े उतारे जाएँगे ताकि कोई आ जाये तो वापस पहनने में कोई दिक्क्त न हो।
दोनों ने सर हिला कर हामी भर दी और रूबी जो मेरी पैंट खोल रही थी और जैसे ही वो मेरे अंडरवियर तक पहुँची तो वहाँ कच्छे में टेंट बना देख कर हंस पड़ी और शमा को बुला कर उसको भी हैरत से दिखाने लगी।
शमा ने नीचे झक कर मेरे कच्छे को नीचे किया तो लंडम लाल एकदम उन्मुक्त होकर हवा में लहलहाने लगे।
शमा ने झट से लंड को मुंह में ले लिया और रूबी मेरे अंडकोष को चूमने लगी और मेरा भी हाथ खाली न रह कर शमा की बालों भरी चूत को टटोलने लगा।
फिर मेरा दूसरा हाथ शमा के गोल गोल मुम्मों के ऊपर चला गया वो अभी भी कमीज से ढके हुए थे।
रूबी ने शमा की कमीज और ब्रा को ऊपर कर दिया जिससे उसके गोल और सॉलिड मुम्मे मेरे सामने आ गए, मैंने अपना मुंह उसके मुम्मों को चूसने को लगा दिया और दूसरे हाथ से रूबी की चूत को सहलाने के लिए लगा दिया और वो एकुदम लबालब पानी से भरी हुई थी।
दोनों ही शायद चुदाई के बारे में सोच सोच कर बहुत ही ज़्यादा गर्म हो चुकी थी और उन दोनों की चूत लपालप लंड लेने की इंतज़ार में थी।
मैं ने शमा को ऊपर किया और उसके कान में कहा- शमा जी आपकी शमा जलाएँ क्या?
शमा बोली- हज़ूर, वो तो आपके लंड को देख कर ही जल रही है सो जल्दी से अपनी जलती हुई मशाल को शमा के हवाले कीजिये सरकार मेरी।
मैं बोला- पेश है मशाल जो जलती रहे रात दिन!
यह कह कर मैंने उसको उल्टा खड़ा किया और उसके दोनों हाथ सीट पर रख कर पीछे से लंड का निशाना साधा और एक धक्के में अपने लम्बे और मोटे लंड को शमा की चूत में डाल कर उसके अंदर की शमा को रोशन करने लगा।
रूबी भी अब अपनी कमीज और ब्रा ऊपर कर के अपने मस्त गुब्बारों को उड़ने ले लिए आज़ाद करने लगी। उसके उरोज भी अलमस्त और मदमस्त थे, देखते ही शराब का नशा सा आ गया आँखों में और चूचियों को सहला कर दोनों को मरहबा कहा मन ही मन!
उसकी गांड पर हाथ फेरते हुए मन ही मन कहा- माशाल्ल्लाह क्या लुत्फ़ अन्दोज़ चीज़ें हैं यह दोनों उभरे हुए गोल गुंबद!
और शमा शायद मन ही मन कह रही थी- वाह क्या मीनारे कुतब शाही है इसका लौड़ा। लम्बा और मोटा तो है ही और क्या तपते लोहे की सलाख है यह जौनपुरी केला जो खाए वो भी पछताए और जो ना खाए वो कभी ना समझ पाये।
शमा की चूत में अब काफी हलचल थी वो खुद आगे पीछे हो कर चुदाई की स्पीड को कंट्रोल कर रही थी और जब उसने इस काम में तेज़ी दिखाई तो मैं समझ गया कि यह किला फ़तेह होने में ज़्यादा वक्त नहीं लगेगा और मैंने अपना दायाँ हाथ उसकी चूत के अंदर उसकी भग मसलने की ड्यूटी पर लगा दिया।
ऐसा करते ही शमा की उछल कूद और तेज़ हो गई और वो आँखें बंद करके फुसफ़ुसा रही थी- मार डालोगे क्या… उफ़ मैं गई रे…
फिर उसके धक्के एकदम तेज़ दर तेज़ हो गये और कुछ मिन्ट में वो थोड़ी से कांपी और सीट के ऊपर लुढ़क गई और मैंने अपनी तरफ से इनामी धक्के मारे उसको सीट पर लिटा कर और फिर मैं उसकी चूत से अपने गीले लौड़े को निकाल कर रूबी की चूत को ढूंढने लगा।
रूबी यह तमाशा देख कर अपनी चूत में से निकलती आग को अपनी ऊँगली से बुझाने की कोशिश कर रही थी और अब मेरे लौड़े को आज़ाद देख कर वो लपक पड़ी और वैसे ही सीट पर झुक कर खड़ी हो गई और मेरे अग्नि बाण का इंतज़ार करने लगी।
मैंने अपने शमा की चूत के पानी से लबरेज़ हुए लौड़े को रूबी की चूत के मुंह पर रख कर अंदर धकेल दिया और एक ही झटके में पूरा जब अंदर चला गया तो रूबी उछल पड़ी और ज़ोर से चिला पड़ी- उईईइ माआ मर गई रे!
लेकिन साथ ही बड़ी मोहब्बत से उसने पीछे मुड़ कर मेरी तरफ देखा और हल्के से मुस्करा दी और मेरे दिल ने कहा- मर जावां गुड़ खा के, साली क्या मुस्कराई है, यार वारी जाऊं!
और फिर मैं ने धीरे धीरे धक्के मारने शुरू किये, पूरा अंदर फिर पूरा बाहर, सिर्फ लंड की टिप अंदर, और फिर ज़ोरदार धक्का अंदर, बारमबार ऐसा करने से गिर जाती हैं बड़ी बड़ी शहसवार बेगमें और गुलामी कबूल कर लेती हैं खूबसूरत हूरें।
मैंने महसूस किया कि रूबी ज़्यादा आनन्द ले रही थी चुदाई का और बार बार मुड़ कर आँखों ही आँखों से शुक्रिया अदा कर रही थी।
मैं भी रूबी की हलीमी का कायल हो गया और इस कोशिश में लग गया कि इसको ज़्यादा से ज़्यादा लुत्फ़ अन्दोज़ करवाऊँगा।
मैं भी अब पूरी तरह से मस्त होकर चुदाई में लग गया और उसके गोल और सख्त चूतड़ों को सहलाने लगा और उसकी गांड में भी हल्की सी ऊँगली डाल दी और उसने फिर मुड़ कर एक प्यार भरी नज़र से देखा जैसे कह रही हो करते रहो गांड में भी ऐसा ही!
उधर शमा सीट पर पूरी पसर गई थी और उसकी खुली सलवार के अंदर से उसकी फूली हुई चूत के दर्शन हो रहे थे और उसमें से अभी भी थोड़ा थोड़ा रस निकल रहा था जो उसकी चूत का था और वो टप टप उसकी सलवार में गिर रहा था।
अब रूबी ने अपने चूतड़ों से इशारा किया कि तेज़ चुदाई करूँ, मैंने कमर कस के धक्कों की स्पीड धीरे धीरे तेज़ कर दी और उसकी चूत में ऊँगली डाल कर महसूस किया कि वो छूटने से ज़्यादा दूर नहीं है।
मेरी तेज़ स्पीड के आगे रूबी अब अधिक देर टिक ना सकी और हाय हाय करती हुई बहुत ज़्यादा पानी छोड़ती हुई एक सिहरन होने लगी उसके शरीर में!
मैं अब ट्रेन के फर्श पर बैठ गया और उसके नितम्बों को चूमने और चाटने लगा जिससे उसको बड़ा मज़ा आ रहा था।
अब मैं लेटी हुई शमा के गोल मुम्मों को जीभ से चाटने लगा और उसकी चूचियों का रसपान करने लगा।
शमा ने मुझको एक बहुत ही गहरी जफ़्फ़ी डाल दी और मेरे लबों को चूमने लगी, मैं भी उसके अधरों को जीभ से चूसने लगा।
अब दोनों थोड़ी संयत हो गई थी और अपने कपड़े ठीक कर रही थी, मैं भी अपनी पैंट वगैरह ठीक कर रहा था।
फिर मैंने उन दोनों को गुड नाईट कहा और जाने लगा तो शमा बोली- अब फिर कब होगी मुलाकात हम दोनों के सरताज?
मैंने भी उसी लहजे में जवाब दिया- जब आप चाहो बेगमाते-ऐ-अवध मैं आपका खाविंद आपकी खिदमत में हाज़िर रहूंगा। आप सिर्फ़ हुक्म नादिरशाही जारी कीजिये, बंदा आप की खिदमत में हाज़िर हो जाएगा।
यह कह कर मैंने उन दोनों को एक बार चूमा और केबिन का दरवाज़ा खोल कर बाहर आ गया।