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मेरा प्यार मेरी सौतेली माँ और बेहन complete

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सबा की बुन्द के भूरे सुराख को देखते ही मेरे लंड ने जबरदस्त सलामी ठोकी और मैं अपने आप पर काबू ना रख सका...और उठ कर घुटनो के बल बैठ गया....और सबा चाची की मोटी गोश्त से भरि बुन्द को दोनो हाथों से पकड़ कर दबाते हुए मसलने लगा....और साथ मैं अपनी एक उंगली को सबा के सुराख पर दबाने लगा.....

"अहह" सबा एक दम से सीधी हो गयी....और मेरी तरफ घूमी और मुझे देखते हुए मुस्कराने लगी......"अब मेरे बारी है हिसाब चुकता करने की...'

मैं अपने लंड को हाथ से हिलाते हुए बेड पर लेट गया… सबा ने मुस्कुराते हुए मेरी तरफ देखा और फिर बेड पर घुटनो के बल बैठते ही मेरे लंड को पकड़ कर उसके ऊपेर झुकती चली गयी.....

अगले ही पल मेरे लंड का मोटा कॅप सबा के होंठो के बीच में दबा हुआ था. ....और सबा पूरी मस्ती में आकर मेरे लंड के चुप्पे लगाने लगी...वो कभी मेरे लंड को आधे से ज़्यादा मूह में भर कर चूसना शुरू कर देती तो कभी.....लंड को मूह से बाहर निकाल कर मेरे बॉल्स को मूह में भर कर चूसना शुरू कर देती.....कुछ ही पलों में मेरा लंड सबा के थूक से एक दम चिकना हो गया....

मैं बेड पर उठ कर बैठ गया....और सबा को बाहों में भरते हुए उन्हे नीचे लेटा दिया.....और उसके ऊपेर आते ही मेने उसके बड़े-2 मम्मों को मूह में भर कर चूसना शुरू कर दिया......"उंह ओह्ह्ह्ह समीरर ....उंह सीईईई ह अहह अहह ओह हां चुस्स मेरे मम्मों को......"

सबा ने हाथ नीचे लेजा ते हुए मेरे लंड को पकड़ और अपनी फुद्दि के सुराख के सुराख पर सेट कर दिया......"सीईईईईईईई उंह समीर अब तो फिर फुद्दि को ठंडा कर ही दो डालो ना अपना लौडा मेरी फुददी में अहह......" सबा अब एक पल भी बर्दास्त नही कर पा रही थी....

मेने अपने लंड को पूरी ताक़त से सबा की फुद्दि में धकेला तो मेरे लंड का कॅप सबा की गीली रसदार फुद्दि की दीवारो को फेलाता हुआ अंदर जा घुसा......सबा ने अपनी टांगे और बाहें दोनो ऊपेर उठा कर मेरी पीठ पर कस ली....और अपनी बुन्द को ऊपेर की ओर उछालने लगी.....मेने भी कुछ और जबरदस्त धक्के मार कर उनकी फुद्दि की गहराईयो में अपने लंड को उतार दिया......

मैं: थॅंक्स सबा…(मैने अपने लंड को स्पीड से सबा की फुद्दि के अंदर बाहर करते हुए कहा…..

सबा: किस लिए थॅंक्स बोल रहे हो….

मैं: आज तुमने मुझे अपनी कोरी बुन्द जो मारने दी…

सबा: एक बात कहूँ…..

मैं: हाँ कहो…

सबा: मेरी बुन्द कोरी नही थी….

मैं सबा की बात सुन कर एक दम से चोंक गया….”क्या….”

सबा: हाँ पहले फ़ैज़ के अब्बू ने शादी के कुछ महीनो बाद मेरी बुन्द मारी थी… और फिर….(सबा बोलते बोलते चुप हो गयी….)

मैं: और फिर किसने मारी…(मैने पूरे जोश के साथ शॉट लगते हुए कहा….) फ़ैज़ के दादा ने….

 


सबा मेरी बात सुन कर शरमा गयी….”तो मैने जो भी गाओं के लोगो से सुना है वो सच है….” मैने सबा के मम्मों को पकड़ कर खेंचते हुए और तेज़ी से घस्से लगाने शुरू कर दिए……सबा ने अपनी आँखे मस्ती मे बंद कर ली…

जैसे ही मेरे लंड का टोपा पूरा अंदर घुस्सा सबा ने मेरे फेस को पकड़ कर अपने होंठो को मेरे होंठो पर रख दिया और पागलो की तरह मेरे होंठो को चूसने लगी....."ओह्ह्ह्ह समीर तुम्हारे लंड ने तो मेरी फुद्दि को पूरा भर दिया है....मुझे बहुत मज़ा आ रहा है समीर सच में दिल कर रहा है तुम्हारा लंड हमेशा ऐसे ही अपनी फुद्दि में लेकर लेती राहु....."

मैं: तो फिर रोका किसने है......

सबा: ऐसे मोके रोज रोज नही मिलेंगे ना......

मैं: क्यों मैं तुम्हारे घर पर आ जाया करूँगा.....

सबा: (अपनी बुन्द को धीरे-2 ऊपेर की ओर उठाते हुए) सच समीर तुम आया करोगे ना वहाँ पर.....

मैं: हाँ अगर तुम मुझे अपनी फुद्दि लेने दोगी तो.....

सबा: सच समीर तू मुझे घर पर आकर चोदेगा....हाईए मैं भी रंडी बन गये हूँ....जो छुप छुप कर अपने यार से अपनी फुद्दि मरवाती हूँ अपने घर पर......समीर छुप के सेक्स करने का अपना ही मज़ा है.....

मैं: हां वो तो है......

मेने अपने लंड को फुल स्पीड से सबा की फुद्दि के अंदर बाहर करना शुरू कर दिया. मेरे लंड का कॅप सबा की फुद्दि की दीवारों से रगड़ ख़ाता जैसे अंदर बाहर होता....सबा एक दम से मचल उठती और अपनी बुन्द को हवा मे उछालने लगती.... "ओह समीरर और ज़ोर से चोदो मुझे.....ह हाआँ ऐसे ही....ओह आह अहह ओह"

मैने भी अब अपनी स्पीड बढ़ा दी थी....और अपने लंड को पूरा बाहर निकाल -2 कर अंदर डालने लगा था....पूरे रूम में फॅच-2 थप-2 की आवाज़े गूंजनी लगी थी.....सबा की फुद्दि में से इतना पानी आ रहा था....कि लंड गच -2 की आवाज़ करता हुआ सबा की फुद्दि के अंदर बाहर हो रहा था.....और सबा भी अपनी टाँगो को पूरा ऊपेर उठा कर फेलाए हुए मेरे लंड को अपनी फुद्दि की गहराईयो में उतरता हुआ महसूस कर रही थी.....15 मिनट की जोरदार चुदाई ने हम दोनो को सर्दी में भी पसीने ला दिए थी....हम दोनो एक दूसरे से ऐसे लिपटे हुए थी कि, जैसे एक जिस्म हो....

हम दोनो की कमर से नीचे का हिस्सा ही ऐसा था....जो एक पल के लिए अलग होता और अगले ही पल एक दूसरे से चिपक कर थप-2 की आवाज़ करता.....सबा चाची एक बार फारिग हो चुकी थी...और मेरे लगातार धक्के लगाने से फिर से जोश में आ चुकी थी... "ओह्ह्ह समीर आज क्या हो गया है तुम्हे अहह सीईईईईई हइई तुम्हारा हो क्यों नही रहा है.....निकाल ना अपना पानी मेरी फुद्दि मैं ओह्ह्ह्ह देख ना कितनी आग लगी हुई ही मेरी फुद्दि में देख समीर देख मेरी फुद्दि आहह उंह ओह्ह्ह फिर से ओह्ह्ह्ह गइई ले निकल गयी सारी गरमी मेरी फुद्दि पर अब तुम भी निकाल दो अपने लंड की भडास मेरी फुद्दि मे......"

सबा ने अब और तेज़ी से अपनी बुन्द को ऊपेर की ओर उछालना शुरू कर दिया था....आख़िर कार मेने भी 8-9 करार शॉट मार कर अपना पानी सबा की फुद्दि में उडेलना शुरू कर दिया.....

 


एक घंटे में दो बार फारिघ् होने के बाद में और सबा दोनो थक चुके थे…और अपनी उखड़ी हुई सांसो को दुरस्त कर रहे थे…..इस घर का जो खोफ़ मेरे जेहन में यहाँ आने से पहले था….वो पूरी तरह निकल चुका था….मुझे लेटे-2 ही ख़याल आया कि, थोड़ी देर पहले में यहाँ आने से कैसे डर रहा था….यहाँ तो ऐसा कुछ भी नही है…..फिर लोग इस जगह के पास से भी क्यों नही गुजरना चाहते…. क्यों लोग इस जगह को मनहूस कहते है….मैने सबा की तरफ फेस करके करवट के बल लेटते हुए उसके एक मम्मे के निपल को अपने हाथ के उंगलियों में लेकर दबाना शुरू कर दिया….

तो सबा ने भी करवट के बल होते हुए मेरी तरफ फेस कर लिया….और मेरे बालो में अपने हाथ की उंगलयों को बड़े प्यार से घुमाने लगी…” चाची एक बात पूछूँ…” मैने सबा के मम्मे से हाथ हटा कर उसकी कमर से पीछे ले जाते हुए उसकी बुन्द पर फेरते हुए कहा

…”हां पूछो पर मुझे यहाँ तो चाची मत बुलाओ…मुझे बड़ा अच्छा लगता है….जब तुम मुझे मेरे नाम लेकर बुलाते हो……”

मैं: अच्छा ठीक है….ये बताओ कि लोग इस जगह से इतना खोफ़ क्यों खाते है…?

सबा: (मेरी बात सुन कर मुस्कुराते हुए बोली….) लोग तो पागल है…..उन्हे कुछ भी नही पता…..इसके पीछे एक बड़ी लंबी कहानी है….

मैं: तो फिर बताओ क्या कहानी है इसके पीछे….

सबा: अभी बताऊ…..(सबा ने मेरी तरफ सवालिया नज़रों से देखते हुए पूछा…)

मैं: हां अभी तो बहुत टाइम है….थोड़ी देर रेस्ट भी हो जाएगा……

सबा : तो सुनो फिर…..ये बात बहुत अरसे पहले की है….उस वक़्त फ़ैज़ बहुत छोटा था…में फ़ैज़ के अब्बू के साथ बड़ी खुस थी….घर में मेरे सास ससुर फ़ैज़ के अब्बू में और फ़ैज़ ही थे….घर में किसी चीज़ के तंगी नही थी… नौकर चाकर सब रखे थे फ़ैज़ के दादा जी ने…कि उनकी बहू को काम नही करना पड़े….

फिर कुछ महीनो के बाद फ़ैज़ के अब्बू मेरे शोहार की मौत हो गयी…..में टूट गयी थी…कुछ दिन तक घर में बड़ा दुख वाला महॉल रहा था…तब मेरी उम्र सिर्फ़ 20 साल थी….फ़ैज़ के अब्बू की मौत के 7 महीने बाद मेरे वालिद और वालिदा मुझे ले जाने आ गये…..वो मेरी दूसरी शादी करना चाहते थे….उस वक़्त मेरी उम्र ही क्या थी. … लेकिन फ़ैज़ के दादा जी इस बात के लिए राज़ी नही हुए…मेरे वालिद की उनके साथ बड़ी बहस हुई….झगड़ा भी हुआ…लेकिन फ़ैज़ के दादा जी नही माने….और कहने लगे कि, उन्होने ने अगर मेरी शादी करनी है….तो वो फ़ैज़ को कभी साथ नही भेजेंगे….फ़ैज़ उनके पास रहेगा…फ़ैज़ उनके बेटे की आखरी निशानी है….

में बीच में फँस गयी थी……फिर अम्मी अब्बू ने कहा कि, अगर वो फ़ैज़ को नही भेजना चाहते तो नही सही…लेकिन वो मेरा दूसरा निकाह ज़रूर करेंगे…पर फ़ैज़ के दादा जी इस पर भी राज़ी नही हुए….धीरे-2 घर में कलेश बढ़ता जा रहा था… मुझे अब वो घर काट खाने को दौड़ता था….फ़ैज़ के अब्बू को गुज़रे दो साल हो चुके थे….पर अभी तक फ़ैज़ के दादा जी अपनी ज़िद्द पर अटके हुए थे….में उस घर में क़ैद से होकर रह गयी थी….एक दिन मेरे सब्र ने भी जवाब दे दिया…और गुस्से में आकर में अपने सास ससुर के साथ झगड़ा कर बैठी…तो फ़ैज़ के दादा जी ने मुझसे कहा कि, आख़िर तुम्हे यहाँ किस बात की तंगी है…मैं अपने होश में नही थी… गुस्सा सर पे सवार था…मेरे मूह से निकल गया कि, मुझे मर्द की कमी महसूस होती है….उस दिन फ़ैज़ के दादा जी ने मुझे एक बात क्लियर कर दी…..कि वो मेरे दूसरी शादी नही होने देंगे…..उनके रुतबे रुबाब के आगे हम सब ने हार मान ली….

मेरे अम्मी अब्बू ने भी मुझे मेरे हाल पर छोड़ दिया…भाई और भाभीया तो पहले से ही मुझे ख़ास पसंद नही करती थी….मैने भी अपने आप को समझा लिया कि, अब मुझे यही जिंदगी ज़ीनी है….मैने अपना दिल फ़ैज़ की तरफ लगा लिया….में रोज सुबह उठती घर का सारा काम काज करती थी……एक दिन सुबह के 5 बजे की बात है… में सुबह 5 बजे उठ जाती थी…क्योंकि सुबह सुबह फ़ैज़ के दादा जी 5 बजे उठ कर हमारे घर के सामने जो घर है ना वहाँ पर हवेली हुआ करती थी…वहाँ पर हमारी भैंसी बँधी होती थी…फ़ैज़ के दादा जी उठ कर भैसो को पानी चारा देने के लिए चले जाया करते थे….और दूध निकाल कर वापिस आते थे….वैसे भैंसो के रखवाली के लिए उन्होने एक आज़म नाम का नौकर रखा हुआ था…वो अपनी बीवी के साथ उसी हवेली में रहता था…..

 


हवेली में ही उसका कमरा था…आज़म ज़्यादातर खेतो में रखवाली करता था…वो सुबह -2 निकल जाता था…कभी फसलों को पानी देने के लिए तो, कभी भैंसो का चारा लेने के लिए…उस दिन मैने उठ कर चाइ बनाई और अपनी सास ससुर को देने के लिए उनके रूम में गयी तो, मेरे ससुर हवेली से अभी वापिस नही आए थे…मैने सास को चाइ दी…तो सास ने मुझसे कहा कि, जाओ जाकर अपने ससुर साहब को बुला लाओ…नही तो चाइ ठंडी हो जानी है….मैने चाइ के कप वही रखे और घर से बाहर आकर सामने हवेली में चली गयी….सर्दियों का मौसम था…और 5:30 बजे थे…इसलिए बाहर अभी भी अंधेरा था…जब में हवेली में दाखिल हुई थी…मुझे भैंसो वाले रूम से ससुर जी की आवाज़ आई….

में दबे पावं उस रूम की तरफ बढ़ने लगी…जहाँ मेरे ससुर जी अपनी भैंसो को बाँधते थे…में जैसे ही दरवाजे के पास पहुचि और अंदर झाँका तो मेरे दिल की धड़कने तेज हो गयी…अंदर ससुर जी आज़म की बीवी को बाहों में लिए हुए थे…और नरगिस उनकी बाहों में तड़प रही थी…ससुर जी के हाथ नरगिस की बुन्द पर थी…और शावलार के ऊपेर से उसकी बूँद को दबा रहे थे….

नरगिस: उईईइ अम्मी क्या कर रहे हैं कोई आ जाएगा…..

ससुर: कोई नही आएगा जान…

और ससुर जी ने उसके होंठो को अपने होंठो में ले लिया और चूसने लगी…मेरा दिल जोरों से धड़क रहा था…मेरी फुद्दि में खुजली होने लगी….और मेरी फुद्दि ने पानी छोड़ना चालू कर दिया नरगिस उस समय सिर्फ़ मेंहरूण कलर के शलवार कमीज़ में थी…ससुर शलवार के ऊपेर से उसकी गान्ड को मसल रहे थे…और नरगिस आह ओह्ह्ह करने लगी तभी ससुर ने उसके होंठो को चूस्ते हुए…उसकी कमीज़ को ऊपेर उठाना चालू कर दिया….जैसे ही नरगिस की कमीज़ ऊपेर हुई… उसके गोरे गोरे 40 साइज़ के मम्मे उछल कर बाहर आ गये…उसने नीचे ब्रा नही पहनी थी…ससुर ने झट से नरगिस के मम्मे को मूह में ले लिया, और चूसना चालू कर दिया….मेरी तो हालत देख कर ही खराब हो रही थी…मेरा एक हाथ मेरी फुद्दि को शलवार के ऊपेर से सहला रहा था…और दूसरे साथ से में अपने मम्मे को मसल रही थी…

ससुर तेज़ी से नरगिस के एक मम्मे को चूस रहा था…और दूसरे हाथ से दूसरे मम्मे को मसल रहा था…नरगिस की कामुक सिसकारियाँ सुन कर में और भी गरम होने लगी…मेरी पैंटी गीली होने लगी…ससुर ने अपनी शलवार को निकाल कर फेंक कर खुन्टे से टाँग दिया…मेरे हाथ पैर एक दम से सुन्न पड़ गये…मेरी नज़र ससुर जी के काले फन्फनाते लंड पर जम गयी…इतना मोटा और लंबा लंड मेरे आज तक नही देखा था…मेरी फुद्दि की फांके फुदकने लगी…नरगिस पैरो के बल नीचे बैठ गयी…और काले लंड की चॅम्डी को टोपे से पीछे कर दिया….मेरे जिस्म में देख कर ही मस्ती की लहर दौड़ गयी…ससुर जी का गुलाबी टोपा किसी छोटे सेब जितना मोटा था…नरगिस ने एक दो बार लंड को हिलाया, और फिर अपनी जीभ को बाहर निकाल कर वो लंड के टोपे पर चारों तरफ घुमा – 2 कर चाटने लगी

ससुर: क्या कर रही हो जानेमन… पूरा मूह में लेकर चूस ना….

और नरगिस ने पूरा मूह खोल कर लंड के टोपे को अंदर ले लिया, और टोपे को चूसने लगी…लंड का टोपा नरगिस के थूक से गीला होकर चमकने लगा….नरगिस तेज़ी से लंड को मूह के अंदर बाहर करके चूस रही थी….

ससुर सहाब: अब बस करो… चल आ..

और ससुर ने वहाँ रखी तरपाल को नीचे ज़मीन पर बिछा दिया….नरगिस तेज़ी से उसपर लेट गयी, और अपनी शलवार को खोल कर घुटनो तक उतार दिया…और अपनी टाँगो को घुटनो से मोड़ ऊपेर उठा कर अपनी जाँघो को फेला दिया…उसकी फुद्दि एक दम सॉफ थी….फुद्दि पर बालो का कोई नामो निशान नही था….ससुर जी नरगिस की रानो के बीच में आकर बैठ गये…और अपने लंड के टोपे को उसकी फुद्दि के छेद पर लगा कर जोरदार धक्का मारा….

नरगिस: अहह मर गई, जी क्या करते हो, आराम से करो ना

और ससुर ने नरगिस की टाँगों को उठा कर अपने कंधों पर रख लिया और , तेज़ी से अपने लंड को अंदर बाहर करने लगा….लंड फॅच-2 की आवाज़ से अंदर बाहर होने लगा…नरगिस की सिसकारियाँ मुझे सॉफ सुनाई दे रही थी…जिसे सुन कर मेरी फुद्दि की आग और भड़कने लगी…ससुर करीब 10 मिनट उसे लगतार चोदता रहा…फिर कुछ देर बाद दोनो शांत पड़ गये…ससुर खड़ा हो गया… नरगिस भी खड़ी हो गयी, और अपने कपड़े ठीक करने लगी…ससुर ने अपनी शलवार पहन ली…नरगिस कपड़े ठीक करके दूध दुहुने बैठ गये…

और ससुर बाहर आने लगा…में एक दम से डर गयी…और वापिस मूड कर आने लगी…बाहर अभी भी अंधेरा था…में अपने घर में आ गयी..पर जैसे ही में डोर बंद करने लगी…ससुर आ गया, और डोर को धकेल कर अंदर आ गया…

 


में: (हड़बड़ाते हुए) चाइ पी लीजिए….(मेरे हाथ पैर डर के मारें काँप रहे थे…)

ससुर: क्यों क्या हुआ… भाग क्यों आई वहाँ से… अच्छा नही लगा क्या?

में: (अंजान बनने का नाटक करते हुए) कहाँ से ससुर जी में समझी नही…

वो एक पल के लिए चुप हो गया….और मेरी तरफ देखते हुए उसने अपना लंड शलवार से निकाल लाया…और एक ही झटके में मेरा हाथ पकड़ कर अपने लंड पर रख लिया….

में: ये क्या कर रहे हैं आप….? छोड़ो मुझे (गुस्से से बोली)

ससुर: अब मुझ से क्या शरमाना ….वहाँ तो देख देख कर अपनी फुद्दि को दबा रही थी…अब क्या हुआ…

में: (अपने हाथ को छुड़ाने के कॉसिश करते हुए गुस्से से बोली) देखे ससुर जी आप जो कर रहे है, ठीक नही कर रहे है…मेरा हाथ छोड़ दो…

ससुर ने अपने होंठो पर बेहूदा सी मुस्कान लाते हुए मुझे धक्का दे कर दीवार से सटा दया…और मेरे दोनो हाथों को पकड़ कर मेरी कमर के पीछे दीवार से सटा दिया…..मेरा दुपट्टा नीचे गिर गया…और मेरी कमीज़ में तने हुए मम्मे मेरे ससुर जी के सामने आ गये…उन्होने एक हाथ से मेरे दोनो हाथों को पकड़ कर दीवार से लगाए रखा…फिर वो पैरो के बल नीचे बैठ गये…और मेरी शलवार के जबरन में हाथो की उंगलियों को फसा कर नीचे करने लगे…मेरी तो डर के मारे जान निकली जा रही थी…की कहीं मेरी सास उठ कर बाहर ना आ जाए….अगर वो मुझे इस हालत में देख लेती तो में कहीं की नही रहती…..में अपनी तरफ से छूटने की पूरी कोशिश कर रही थी…पर उसकी पकड़ बहुत मजबूत थी….उसने तब तक मेरी शलवार को झटके से नीचे कर दिया….और अपनी कामिनी नज़रों से मेरे दूध जैसी गोरी और मुलायम रानो को देख रहा था….अचानक उन्होने ने मेरी शलवार को एक झटके में मेरे एक पैर से निकाल दिया…

मेरी ब्लॅक कलर की पैंटी अब उनकी आँखों के सामने थी…इससे पहले कि में और कुछ कर पाती या बोलती, उसने अपने होंठो को मेरी रानो पर रख दया…मेरे जिस्म में करेंट सा दौड़ गया…जिस्म में मस्ती और उतेजना की लहर दौड़ गयी…और ना चाहते हुए भी मूह से एक कामुक सिसकारी निकल गयी…जो उसने सुन ली वो तेज़ी से अपने होटो को मेरी थाइस पर रगड़ने लगा…मेरे हाथ पैर मेरे साथ छोड़ रहे थे…उन्होने ने मेरे दोनो हाथों को छोड़ दिया…और अपने दोनो हाथों को पीछे से लेजा कर मेरी बुन्द को मेरी पैंटी के ऊपेर से पकड़ लिया….मेरा जिस्म काँप उठा…आज कई महीनो बाद किसी ने मुझे मेरी बुन्द को छुआ था…वो मेरी जाँघो को चूमता हुआ ऊपेर आने लगा…और मेरी पैंटी के ऊपेर से मेरी फुद्दि के लिप्स पर अपने होंठो को रख दिया ….में अपने हाथों से अपने ससुर के कंधों को पकड़ कर पीछे धकेल रही थी…पैंटी के ऊपेर से ही फुद्दि पर उनके होंठो को महसूस करके में एक दम कमजोर पड़ गयी…

में: (अब मेने जदो जेहद करना छोड़ दिया था बस अपनी परवरिश का ख़याल रखे हुए मना कर रही थी) नही ससुर जी छोड़ दो जी…कोई आ जाएगा…. अहह नही ओह्ह्ह्ह बस कही सास उठ कर इधर नही आ जाए ओह्ह्ह ओह्ह्ह्ह

अचानक उन्होने अपने होंठो को मेरी पैंटी के ऊपेर से हटा लिया…मेरी पैंटी मेरी फुद्दि के पानी से एक दम गीली हो चुकी थी…..उसने मेरी तरफ देखते हुए, अपने हाथों से मेरे चुतड़ों को पैंटी के ऊपेर से कस के दबा दिया…मेरा जिस्म एक दम से अकड़ गया…फिर वो एक दम से खड़ा हुआ…और मेरे हाथ को अपने फन्फनाते लंड पर रख दिया… मेरी साँसें इतनी तेज़ी से चल रही थी..कि में बता नही सकती…उनका मोटा लंड किसी लोहे की रोड की तरह सख़्त खड़ा झटके मार रहा था…मेरे हाथ अपने आप उसके 7 इंच के लंड पर कसते चले गये…उसने मुझे अपनी बाहों में भर कर अपने से चिपका लिया… और मेरी बुन्द को दोनो हाथों से पकड़ कर दबाने लगी…मेरी साँसे तेज़ी से चल रही थी…और उन्होने ने अचानक मेरे होंठो पर अपने होंठो को रख दिया….में एक दम से मचल उठी…..और हिलने लगी….पर उनके हाथ लगातार मेरी बुन्द को सहला रहे थे…जिससे मेरी जदो जेहद करने की ताक़ात ख़तम हो चुकी थी…उन्होने मेरे होंठो को 2 मिनट तक चूसा… फिर उन्हों ने अपने होंठो को हटाया और पीछे हट गये…

 


ससुर: में आज दोपहर 12 बजे तुम्हारा इंतजार करूँगा … तुम्हारी सास जब खाना खा कर आराम करने लेट जाएगी तो में तुम्हारे रूम में आउन्गा….

मैने जल्दी से अपनी शलवार ऊपेर की और नज़रें झुकाए बिना कुछ बोले अपने रूम में चली गयी….मैने घर के काम में लग गयी….लेकिन मेरी हालत बड़ी बुरी हो रही थी….मेरा दिल कही नही लग रहा था…ससुर जी ने मेरी फुद्दि की आग को इतना बढ़ा दिया था… कि बार-2 मेरा ध्यान सुबह हुई घटना पर जा रहा था…जैसे -2 12 बजे का टाइम नज़दीक आ रहा था मेरे दिल की धड़कने बढ़ती जा रही थी…

मेने घड़ी देखी 12 बजने में 15 मिनट बाकी थे…तभी मेरी सास मेरे कमरे में आई…और मुझे बोली….” बहू सुन मैं पड़ोस के घर में जा रही हूँ….अपने सासुर को खाना खिला देना….और आकर दरवाजा बंद कर लो…में उठ कर बाहर आ गयी और सास जाने के बाद मेने डोर बंद कर दिया…और फिर से अपने रूम में आ गयी… में अपने कमरे में सहमी सी बैठी थी…तभी मेरे रूम का डोर एक दम से खुला….मेरा दिल डर के मारे जोरों से धड़कने लगा…ससुर जी को अंदर आता देख में अपने कमरे से बाहर की तरफ भागी…पर ससुर ने तेज़ी से डोर पर मुझ को पकड़ लिया…और पीछे धकेल दया….में गिरते-2 बची….उसने अंदर आते ही डोर बंद कर दिया…और मेरी तरफ बढ़ने लगा…मेरी तो जैसे जान निकली जा रही थी…मेरी समझ में नही आ रहा था…कि आख़िर में करूँ तो क्या करूँ…

.ससुर ने आगे बढ़ते हुए अपनी कमीज़ निकाल कर चारपाई पर फेंक दी…और फिर मेरी तरफ देखते हुए आगे बढ़ने लगा…में उसकी अपनी तरफ बढ़ता देख पीछे हटने लगी…और आख़िर में पीछे जगह ख़तम हो गयी…में चारपाई के एक तरफ खड़ी थी…. मेरी पीठ दीवार से सट गयी…उसने मेरी तरफ बेहूदा मुस्कान से देखते हुए अपनी शलवार को निकाल कर नीचे फेंक दिया…उसका 7 इंच का खड़ा हुआ लंड मेरी आँखों के सामने था…जो हवा में झटके खा रहा था…मेने अपनी नज़रे घुमा ली…मेरे कुछ बोलने की हिम्मत भी नही हो रही थी…वो मेरे बिल्कुल पास आ गया….में उसकी साँसों को अपने फेस और होंठो पर महसूस कर रही थी…जैसे ही उसने मेरा हाथ पकड़ा मेने उसका हाथ झटक दिया

में: देखिए ससुर जी में आप की इज़्ज़त करती हूँ…अगर आप अपनी इज़्ज़त चाहते है…तो यहाँ से चले जाइए…नही तो में पूरे गाओं को चीख -2 कर बुला लूँगी…

ससुर: बता देना जिसे बताना है बता देना…पहले एक बार मेरे इस लंड की प्यास अपनी फुद्दि के रस से बुझा दो…फिर चाहे तो जान ले लेना…

और ससुर ने मेरे हाथ को पकड़ कर अपने लंड के ऊपेर रख लिया…और मेरे हाथ को अपने हाथ से थाम कर आगे पीछे करने लगा…मेरे हाथ लंड पर पड़ते ही मुझे एक बार फिर करेंट सा लगा….हाथ पैर काँपने लगे…साँसें एक दम से तेज हो गयी…

ससुर: आह अहह तुम्हारे हाथ कितने नरम हैं, मज़ा आ गया….

फिर ससुर जी ने अपना हाथ मेरे हाथ से हटा लिया…और अपना एक हाथ मेरी कमर में डाल कर अपनी तरफ खींच के, अपनी छाती से सटा लिया…और दूसरे हाथ को मेरे गालो पर रख कर अपने अंगूठे से मेरे होंठो को धीरे मसलने लगे….मेरे बदन में मस्ती की लहर दौड़ गयी…ना चाहते हुए भी मुझे मस्ती से चढ़ने लगी…मुझे इस बात का ध्यान भी नही रहा कि मेरा हाथ अभी उनके लंड को सहला रहा है…मेरा हाथ उतेजना के मारे उनके लंड के आगे पीछे हो रहा था….

 


ससुर: हां ऐसे ही हिलाती रहो….अहह तुम्हारे हाथों में तो सच में जादू है….ओह्ह्ह्ह हां ऐसे ही मूठ मारती रहो….

जैसे ही ये अल्फ़ाज़ मेरे कानो में पड़े…मुझे एक दम से होश आया….और मेने अपना हाथ लंड से हटा लाया…और शर्मा कर सर को झुका लिया…उन्होने मेरे फेस को दोनो हाथों में लेकर ऊपेर उठाया….

ससुर: सबा तुम बहुत खूबसूरत हो…..

में ससुर जी की बातों में आकर जज्बातों में बहने लगी…ससुर जी ने मेरे दुपट्टे के पल्लू को पकड़ नीचे कर दिया…और मेरे मम्मो को हाथों से मसलना चालू कर दिया…में कसमसा रही थी…पर में अपना काबू अपने ऊपेर से खोती जा रही थी….उन्होने ने अचानक मुझे चारपाई पर धकेल दिया….और मेरे कपड़े उतारने शुरू कर दिए….मुझे कुछ भी होश नही था…ये सब इतनी तेज़ी से हुआ कि मुझे पता नही चला कि, कब मेरे सारे कपड़े उतर गये….और ससुर जी ने अपना मूह खोल कर मेरी फुद्दि पर लगा दिया….मेरे बदन में मस्ती की लहर दौड़ गयी….आँखें बंद हो गयी….मुझ से बर्दाश्त नही हुआ…और मेरी कमर अपने आप ऊपेर की तरफ उठने लगी…..

में: नही सहह नही नहियीई ईीई आप क्या कर रहीईई हूओ अहह अहह सीईईईईई उंह नहिी ओह ओह नहियीई

मेरी कमर ऐसे झटके खा रही थी…कि देखने वाले को लगे कि में अपनी फुद्दि खुद अपने ससुर के मूह पर रगड़ रही हूँ…..उन्होने मेरी टाँगों को पकड़ कर मोड़ कर ऊपेर उठा दिया….जिससे मेरी फुद्दि का सुराख और ऊपेर की ओर हो गया…वो अपनी जीभ को मेरी फुद्दि के छेद के अंदर घुसा कर चाट रहे थे…में एक दम मस्त हो चुकी थी…मेरी फुद्दि से पानी आने लगा…में अपने हाथों को अपने ससुर जी के सर पर रख कर…उन्हें पीछे धकेलने की नाकाम कॉसिश कर रही थी…पर अब में जदो जेहद करने की हालत में भी नही थी…उन्होने अपने दोनो हाथों को ऊपेर करके मेरे मम्मो को दबोच लिया….और ज़ोर ज़ोर से मसलने लगी….में मस्ती के मारे छटपटा रही थी…मेरी फुद्दि के छेद से पानी निकल कर मेरी गान्ड के छेद तक आ गया था… में बहुत गरम हो चुकी थी…

उन्होने ने मेरे मम्मो के निपल्स को अपनी हाथों की उंगलियो के बीच में लेकर मसलना चालू कर दिया….मेरे मम्मो के काले निपल एक दम तन गये…अब मेरे बर्दास्त से बाहर हो रहा था….में 2 सालो के बाद फारिघ् होने के बिल्कुल करीब थी…मेरी सिसकारियाँ मेरी मस्ती को बयान कर रही थी….अचानक उन्होने मेरी फुद्दि से अपना मूह हटा लिया….और ऊपेर आ गये…और मेरी आँखों में देखते हुए अपने लंड के टोपे को, मेरी फुद्दि के छेद पर टिका दिया….जैसे ही उनके लंड का गरम टोपा मेरी फुद्दि के छेद पर लगा मेरा पूरा बदन झटका खा गया….और बदन में करेंट सा दौड़ गया

ससुर: कैसा लगा सबा….

 


में कुछ नही बोली और वैसे ही आँखें बंद किए लेटी रही….उन्होने मेरे एक मम्मे के निपल को मूह में ले लिया और चूसने लगे….में मस्ती में आह ओह ओह कर रही थी….मुझे आज भी याद है, में उस वक़्त इतनी गरम हो चुकी थी… कि मेरी फुद्दि की फाँकें कभी उनके लंड के टोपे पर कस्ति तो कभी फेलति…अब वो मेरे मम्मो को चूसने के साथ मसल भी रहे थे….में वासना के लहरों में डूबी जा रही थी….फुद्दि में सरसराहट होने लगी…और मेरी कमर खुद ब खुद ऊपेर की तरफ उठने लगी, और लंड का टोपा मेरी फुददी के छेद में चला गया…मेरे मूह से अहह निकल गयी….होंठो पर कामुक मुस्कान आ गयी…

.दहाकति हुई फुद्दि में लंड के गरम टोपे ने आग में पेट्रोल का काम किया….और में और मचल उठी….और मस्ती में आकर अपनी बाहों को उनके गले में डाल कर कस लिया….मेरी हालत देख उन्होने मेरे होंठो को अपने होंठो में ले लिया और चूसने लगे…अपनी फुद्दि के पानी का स्वाद मेरे मूह में घुलने लगा…वो धीरे-2 मेरे दोनो होंठो को चूस रहे थे…और अपने दोनो हाथों से मेरे मम्मो को मसल रहे थे….मैने अपने हाथों से उनकी पीठ को सहलाना चालू कर दिया….

और उन्होने ने भी मस्ती में आकर अपनी पूरी ताक़त लगा कर जोरदार धक्का मारा….लंड मेरी फुद्दि की दीवारों को फेलाता हुआ अंदर घुसने लगा…लंड के मोटे टोपे की रगड़ मेरी फुद्दि क दीवारो को फेलाता हुआ अंदर घुस गया, और सीधा मेरी बच्चेदानी से जा टकराया….मेरी तो जैसे जान ही निकल गयी…दर्द के साथ-2 मस्ती की लहर ने मेरे बदन को जिंज़ोर कर रख दिया…मेरी फुद्दि की फाँकें फड़फड़ाने लगी…

ससुर: आहह सबा तुम्हारी फुद्दि तो सच में बहुत टाइट है…..मज्जा आ गया….देख तेरी फुद्दि कैसे मेरे लंड को दबा रही है…..

में ससुर जी की बातों को सुन कर शरम से मरी जा रही थी….पर मेने सच में महसूस किया कि, मेरी फुद्दि की दीवारें ससुर जी के लंड पर अंदर ही अंदर कस और फैल रही हैं….जैसे मेरे बरसों की प्यासी फुद्दि अपने प्यास बुझाने के लिए, लंड को निचोड़ कर सारा रस पी लेना चाहती हो….

ससुर जी ने मेरी टाँगों को अपने कंधों पर रख लिया…और अपना लंड मेरी फुद्दि में आदर बाहर करने लगी….लंड का टोपा मेरी फुद्दि की दीवारो पर रगड़ ख़ाता हुआ अंदर बाहर होने लगा….और लंड का टोपा मेरी बच्चेदानी के मूह पर जाकर चोट करने लगा…में एक दम गरम हो चुकी थी…और मस्ती के दरिया में गोते खा रही थी…

ससुर का लंड मेरी फुद्दि के पानी से एक दम गीला हो गया था…और लंड फॅच-2 की आवाज़ के साथ अंदर बाहर हो रहा था…..में अब अपने आप में नही थी…में अपने दाँतों में होंठो को दबा ससुर जी के लंड से चुदवा के मस्त हो चुकी थी…में अपनी आँखें बंद किए, अपने ससुर जी के लंड को अपनी फुद्दि में महसूस करके फारिघ् होने के करीब पहुच रही थी…..ससुर जी के जांघे जब मेरी बुन्द से टकराती, तो थप-2 की आवाज़ पूरे कमरे में गूँज जाती, फॅच-2 और थप-2 की आवाज़ सुन कर मेरी फुद्दि में और ज़्यादा खुजली होने लगी…और में अपने आप को रोक ना सकी….मैने अपनी गान्ड को ऊपेर की तरफ उठाना चालू कर दिया…मेरी गान्ड चारपाई के बिस्तर से 3-4 इंच ऊपेर की तरफ उठ रही थी…और लंड तेज़ी से अंदर बाहर होने लगा…

मेरी उतेजना देख ससुर जी और भी जोश में आ गये…और पूरी ताक़त के साथ मेरी फुद्दि को अपने लंड से चोदने लगे… में झड़ने के बहुत करीब थी….और ससुर जी का लंड भी पानी छोड़ने वाला था….

ससुर: अह्ह्ह्ह सबा मेरा लंड पानी छोड़ने वाला है….अहह अहह

में: आह सीईईईईई उंह उंह

और मेरा पूरा बदन अकड़ने लगा….में आज पहली बार दो सालो के बाद फारिघ् हो रही थी….में इतनी मस्त हो गयी थी, कि में पागलों के तरह अपनी गान्ड को ऊपेर उछालने लगी…और मेरी फुद्दि ने बरसों का जमा हुआ पानी उगलना चालू कर दिया…ससुर जी भी मेरी कामुकता के आगे पस्त हो गये…और अपने लंड से पानी की बोछार करने लगी…में चारपाई पर एक दम शांत लेट गयी…में एक दम पुरसकून हो गयी…में करीब 10 मिनट तक ऐसे ही लेटी रही….ससुर जी मेरे ऊपेर से उठ गये थे…मेने अपनी आँखों को खोला जिसमे वासना का नशा भरा हुआ था…ससुर जी ने अपनी शलवार कमीज़ पहन ली थी…

 


ससुर: सबा आज तुम्हारी टाइट फुद्दि चोद कर मज़ा आ गया…..आज रात के 11 बजे में फिर से आउन्गा…तैयार रहना…..

सबा: उसके बाद से मेरे और मेरे ससुर साहब के बीच ये सब शुरू हो गया…..और उन्होने ये मकान बनवाया था….क्यों कि मेरी सास को हम पे शक हो गया,.. और मेरे ससुर जी ने ही यहाँ के बारे में ऐसी अफवाहे फेला दी थी कि, यहा कोई काला साया है….ये उन्होने ने कैसे किया मुझे नही पता…लोग इधर आने से डरते थे… इसलिए मैं अपने ससुर के साथ इस मकान में आया करती थी…

मैं:इसका मतलब है कि तुमने जवानी में पूरे मज़े लिए है….

सबा: कहाँ…ससुर साहब उम्र दराज़ थे….पहले 4-5 साल तो ठीक चला…फिर दमे की शिकायत हो गयी….ऊपेर से उम्र का असर भी था…धीरे-2 फिर कम होने लगा…

सबा: दफ़ा करो इन बातों को…..चलो थोड़ी ऊपेर छत पर घूम कर आते है…

मुझे भी उस कमरे में घुटन सी महसूस हो रही थी….तो मेने भी हां कर दी….हम ने कपड़े पहने और ऊपेर आ गये….छत काफ़ी खुली थी…ऊपेर सर्दियों की सुनहरी धूप निकली हुई थी…धूप में टहलने का आलग ही मज़ा आ रहा था.. चारो तरफ दूर-2 तक खेत ही खेत थी…छत के चारो तरफ 5 -5 फुट उँची बाउंडरीज़ थी….घर के पीछे की तरफ नहर बहती थी….सबा घर के पीछे वाली बाउंड्री के पास जाकर खड़ी हो गयी….उसने अपने दोनो हाथ बाउंड्री पर रखे और नहर की तरफ देखने लगी….सबा ने सिर्फ़ शलवार कमीज़ पहनी हुई थी….उसने अपने बाजुओ को बाउंड्री पर टिकाया हुआ था….और थोड़ा झुक कर खड़े होने के वजह से उसके बुन्द पीछे की तरफ मजीद नज़र आ रही थी….

में सबा के पीछे जाकड़ खड़ा हो गया….अपनी शलवार को ढीला करके अपने लंड को बाहर निकाला और लंड को पकड़ा और दूसरे हाथ से सबा की कमीज़ को पकड़ कर उठा कर उसकी कमर पर रख दिया….सबा ने मुस्कुराते हुए पीछे फेस घुमा कर देखा और फिर से आगे की तरफ देखने लगी….मेने शलवार के ऊपेर से अपने लंड को सबा की बुन्द की लाइन के दरमिया रख कर दबाया तो, मेरा लंड सबा की शलवार के कपड़े को दबाता हुआ उसके बूँद के दरार में घुस्स गया….”श्िीीईईई….लगता है तुम्हारा फिर से मूड बन गया है…..” सबा ने नहर की तरफ देखते हुए कहा…मेने सबा की बुन्द के दोनो साइड पर हाथ रख कर पकड़ा और धीरे-2 अपनी कमर हिलाने लगा… “ऐसे बुन्द निकाल कर दिखाओगि तो, मूड तो बनाना ही है….” मेने अपने लंड को सबा की बुन्द के छेद पर दबाते हुए कहा…..

सबा: थोड़ी देर रुक जाओ….अभी तो मेरे दोनो सुराख गीले है….

में: मतलब….

सबा: (हंसते हुए…) थोड़ी देर पहले ही तो तुम्हारे लंड ने दोनो सुराखो के अंदर जाकर थूका है….अभी भी थूक है दोनो सुराखो में उसे तो सूख लो दो….

में: मुझे इंतजार नही होता….

सबा: फिर इंतजार किसका कर रहे हो….मुझे घसीट कर नीचे लेजाओ….और चोद लो मुझे... में भला तुम्हे कुछ कह सकती हूँ…

में: अच्छा मुझे इतना मानती हो…?

सबा: और नही तो क्या….(सबा ने मेरे दोनो हाथो को पकड़ कर आगे लेजा कर अपने मम्मो पर रख दिया….

मेने सबा के मम्मो दो तीन बार दबाया और फिर अपना हाथ उसके मम्मो से हटा कर उसके इलास्टिक वाली शलवार के जबरन पकड़ कर शलवार को नीचे उसके घुटनो तक कर दिया….”समीर ये कर रहे हो….नीचे चलो…..”

में:नही जी…मेने तो अब तुम्हारी यही लेनी है…तुम्हारी क्या मज़ाल जो तुम मुझे मना करो….

 
मेने अपने घुटनो को थोड़ा सा मोड़ा और झुक कर अपने लंड की कॅप को सबा की फुद्दि के सुराख पर सेट किया….जैसे लंड का गरम और मोटा कॅप सबा की फुद्दि के गीले सुराख पर लगा…तो सबा के मूह से आह निकल गयी….और उसने अपनी टाँगो को मजीद खोल लिया…कि में आसानी से उसकी फुद्दि मार सकूँ….”ले मार ले अपनी गस्ति की फुद्दि…” सबा ने अपनी बुन्द को पीछे के तरफ पुश करते हुए कहा….” तो मेरे लंड का कॅप सबा की गीली फुद्दि के लिप्पस को खोलता हुआ अंदर जाने लगा….मुझे अपने लंड की कॅप पर मजीब सरसराहट महसूस हो रही थी….

सबा तब तक अपनी गान्ड को पीछे की तरफ पुश करती रही…जब तक कि मेरा पूरा लंड सबा की फुद्दि में नही घुस्स गया….मेने अपने हाथो को सबा की कमीज़ के अंदर डाल कर उसके मम्मो को पकड़ कर खेंचते हुए अपने लंड को अंदर बाहर करना शुरू कर दिया…सबा भी पूरी तरह मस्त होकर कोड़ी हुई खड़ी थी..और मेरे लंड को फुद्दि में लेकर मज़ा ले रही थी…..मेने 5-6 मिनट तक जम कर सबा की फुद्दि उसी पोज़ में मारी…और सबा की फुद्दि को खड़े-2 पानी -2 कर दिया….

हम ने अपने कपड़े ठीक किए….”अब हमे चलना चाहिए….” सबा ने मेरी तरफ देखते हुए कहा….मेने अपनी कलाई पर बँधी घड़ी में टाइम देखा तो 1 बजने वाला था….मेने भी हां में सर हिला दिया…”कल किसी को भेज कर इस घर की सॉफ सफाई करवा देती हूँ….नीचे बड़ी अजीब सी स्मेल आ रही थी….और बिस्तरों को भी धूप लगवाने को कह दूँगी….”

हम दोनो नीचे आए…मेने अपनी जॅकेट पहनी और सबा ने अपना बुरखा पहना… सबा ने रूम को लॉक किया और रूम्स के चाबी वही मीटर के पास रख दी…फिर हम घर से बाहर निकले और सबा ने घर को लॉक कर दिया…हम उस कच्चे रास्ते पर चलने लगे….तो सबा ने घर की चाबी मुझे देते हुए बोली…”ये चाबी तुम अपने पास रख लो….”

मेने सबा की तरफ सवालियाँ नज़रो से देखा….तो सबा मुस्कुराते हुए बोली…”फ़ैज़ के दादा जी और मेरे सिवाए किसी को पता नही है कि, ये घर हमारा है…तुम ये चाबी अपने पास रखो….और कल सुबह-2 आकर घर का लॉक खोल देना..में किसी को भेज दूँगी…तुम सॉफ सफाई करवा लेना..और बिस्तरों को भी धूप लगवा देना…तुम्हे काम करने की ज़रूरत नही….जिसे भेजूँगी वो सब कर लेगी…”

में: कर लेगी मतलब किसी औरत को भेजो गे आप….

सबा: हां वो नरगिस थी नही जो हमारे यहाँ काम करती थी…जिसका फ़ैज़ के दादा जी के साथ चक्कर था….

में: हाँ पर वो तो अब इस दुनिया में नही रही….

सबा: हां उसका खाविंद भी इस दुनिया में नही रहा….लेकिन उसके बेटा और बहू हमारे पास ही काम करते है…रानी नाम है उसका….उसको उसके खाविंद के साथ भेज दूँगी….

में: पर तुम उससे कह कर क्या भेजोगी….उसे पता नही चलेगा कि ये घर तुम्हारा है….

सबा: तो क्या हुआ…उसकी सास को भी पता था…

में: तो फिर में क्यों यहाँ आऊ….वो सोचेंगे ऩही कि में यहा क्या कर रहा हूँ..

सबा: सोचने दो….वैसे भी उनमें इतनी हिम्मत नही कि, वो मेरे खिलाफ एक लफ़्ज भी बोले….ज़ीशान तो वैसे भी मेरा इतना करज़दार है कि, वो मूह खोल ही नही सकता…और उसकी बीवी रानी की पूछो ही मत…

में: क्यों क्या हुआ…..

सबा: उसे तो मेने रंगे हाथो पकड़ लिया था…ज़ेशन खेतो में काम देखता है… तो उसकी बीवी रानी यहा हम अब भैंसे बाँधते है वहाँ भैंसो का काम करती है..वही दो कमरे दिए है….

एक दिन में सुबह दूध लेने उधर गयी तो, रानी अपनी फूफी के बेटे से अपने माममे चुसवा रही थी….उसकी फूफी का बेटा उससे मिलने आया हुआ था….तब मेने उसको पकड़ लिया….तब से वो मुझसे इतना डरती है कि, वो अपनी ज़ुबान कभी नही खोलगी.. वैसे भी उनकी औकात नही है कि हमारे सामने मूह खोले…

में: लेकिन वो अपनी ही फूफी के बेटे से पर क्यों….

सबा: मुझे पक्का तो नही पता…लेकिन मेने सुना है ज़ेशन एक नंबर. का गान्डू है… हमारे खेतों में जीतने भी मजदूर है….सब ने उसकी गान्ड मारी हुई है…. उसे तो खुद अपनी गान्ड में लंड चाहिए….वो खाक अपनी बीवी को लंड देता होगा…तू डर मत….कुछ नही होता वैसे भी तूने सफाई ही तो करवानी है…

में: तो तुम भी तो आ सकती हो…..

सबा: में आउन्गि बाद में…..मुझे कल कुछ काम है….11 बजे तक फारिघ् होकर आ जाउन्गि…तब तक सॉफ सफाई भी हो जाएगी…

अभी हम कुछ ही दूर आए थी….कि सबा एक दम रुक गयी…और मेरी तरफ घूमते हुए उसने शलवार के ऊपेर से मेरे लंड को पकड़ लिया….और मेरे लंड जो कि ढीला था. उसे पकड़ कर दबाते हुए बोली….”तुम डरो नही….तुम्हारे पास ये है …इसके लिए तो, में तुम्हारी तरफ तेज हवा भी नही आने दूं….” सबा जिस अंदाज़ से मेरे लंड को दबा रही थी….उसकी आँखो में शोखी सॉफ नज़र आ रही थी…मेरा लंड थोड़ा सा सख़्त हो गया था….सबा ने देखा कि अभी छोटे वाला रोड काफ़ी दूर है…और दूर -2 तक कोई नज़र नही आ रहा….दोनो तरफ वैसे भी गन्ने की फसल खड़ी थी…सबा ने मेरी शलवार का नाडा ढीला करना शुरू कर दिया….

में: ये क्या कर रही हो…अगर कोई आ गया फिर देखना क्या बनता है हमारा…

सबा: हाहाहा तुम सच में बड़े डरपोक हो….मेरे होते हुए कोई तुम्हारी तरफ आँख भी नही उठा कर देख सकता….

में: वो तो ठीक है…पर अब ये क्या कर रही हो….

सबा ने मेरी शलवार को ढीला करके लंड बाहर निकाल लिया...”समीर तुम्हारा लंड बड़ा प्यारा है…इसने जो सकून मेरी फुद्दि को दिया है….

 
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