मैने बाइक बाहर निकाली और नीलम को पीछे बैठा कर उसे मेन रोड तक छोड़ने चला गया…मेन रोड पर पहुँच कर थोड़ी देर इंतजार के बाद बस भी मिल गयी…मैं घर वापिस लौट आया….तो साना ने डोर खोला…..जैसे कि मैं पहले बता चुका हूँ कि, साना का रंग सांवला था…उसकी हाइट भी कम थी….पर उसके नैन नक्श एक दम तीखे थे….मम्मे एक दम कसे हुए थे….उसने ब्लॅक कलर का फिटिंग वाला सूट पहना हुआ था…..जो उसके जिस्म पर बेहद कसा हुआ था…
मैने बाइक अंदर की और बाइक स्टॅंड पर लगा कर सीधा बरामदे में गया… नजीबा वही बैठी हुई थे…उसने मुझे देख कर स्माइल की…..मैं उसके सामने वाले सोफे पर बैठ गया….”मामी को बस मिल गयी थे….?”
मैं: हां….
तभी साना भी वहाँ आकर बैठ गयी…..वो नजीबा के साथ बैठी हुई थी…. “तो जीजा जी….ओह्ह्ह सॉरी समीर जी…..छोड़ आए अम्मी को…..” साना ने तंज़ाया अंदाज़ में हंसते हुए कहा….तो नजीबा ने अपनी कोहनी उसके पेट में मारी….”अह्ह्ह्ह शरम कर कंजारिए….ऐसे क्यों मार रही है….मैने कॉन सा कुछ ग़लत कह दिया है….” साना ने हंसते हुए कहा….तो नजीबा उसे घूर कर देखने लगी….मुझे लगा कि, अब मुझे यहाँ से खिसक लेना चाहिए….इसलिए में चुप चाप उठ कर ऊपेर आ गया… और फिर सीधा ऊपेर छत पर चला गया…धूप निकल चुकी थे….इस लिए मैने स्टोर रूम से चारपाई निकाली और उसे धूप में डाल कर लेट गया….
अभी थोड़ी देर ही हुई थे कि, मुझे सीढ़ियों से किसी के ऊपेर चढ़ने की आवाज़ आई… मैं लेटे लेटे ही सर घुमा कर सीढ़ियों की तरफ देखने लगा… थोड़ी देर बाद साना ऊपेर आई…उसने मुस्कुराते हुए मेरी तरफ देखा, और फिर स्माइल करते हुए बोली…”तो जीजा जी धूप का मज़ा ले रहे है….” मैने भी स्माइल से ही जवाब दिया…पर बोला कुछ नही… उसने स्टोर रूम का डोर खोला और अंदर चली गयी… और फिर वो कपड़ों का ढेर लेकर बाहर आई….ये वही कपड़े थे…जो कल नीलम ने धोए थे….और सही तरह से सूखे नही थे…सर्दियाँ जोरो पर थी…इसलिए धूप भी पूरी तरह नही निकलती थी…शायद जाने से पहले नीलम साना को कह के गयी थी…..
उसने सारे कपड़ों को उसी चारपाई पर मेरे पैरो की तरफ रखा जहाँ में लेटा हुआ था… मैने गोर किया कि, साना जब ऊपेर आई थी…तब उसने दुपट्टा लिया हुआ था…और अब उसके जिस्म पर दुपट्टा नही था….फिर वो स्टोर रूम के अंदर गयी….और बाकी के बचे हुए कपड़े भी उठा कर ले आई…और वही रख दिए….उसके मम्मे उसकी ब्लॅक कलर की फिटिंग वाली कमीज़ में एक दम फँसे हुए लग रहे थे….मम्मो की पूरे शेप दिखाई दे रही थी….फिर वो झुक कर कपड़ों को उठाने लगी….तो मेरी नज़र उसके डीप नेक वाले कमीज़ में से झाँक रहे मम्मो पर पड़ी….उफ्फ झुकने की वजह से उसके मम्मे कमीज़ से बाहर आने को उतावले हो रहे थे…साना के मम्मे नजीबा जितने ही बड़े थे….फिर उसने उन कपड़ों में से कुछ कपड़े उठाए… और तार पर डालने लगी….वो बार-2 कपड़े डाल कर चारपाई के पास आती और झुक कर एक-2 करके कपड़े उठाती….तो मुझे उसकी तंग कमीज़ के गले से झाँक रहे मम्मो का दीदार हो जाता….
वहाँ लेटे-2 ही मेरे लंड ने शलवार के अंदर से सर उठाना शुरू कर दिया… और धीरे-2 मेरे लंड ने शलवार को आगे से ऊपेर उठा दिया…मैं उस वक़्त मूड खराब करने के मूड में बिल्कुल भी नही था…मुझे पता था कि, अगर मैं इसी तरह उसके मम्मो को देखता रहा तो, मेरा अपना ही मूड खराब होना है…. नीलम यहाँ थी नही…फिर मुझे ऐसे ही तड़पते हुए दिन गुजारना पड़ना था… इसीलिए में वहाँ चारपाई से उठा बाहर गली वाली बाउंड्री के पास जाकर खड़ा होकर नीचे गली में देखने लगा….
साना अपने काम में बिज़ी थी..,में वहाँ थोड़ी देर खड़ा रहा और फिर से हट कर छत पर टहलने लगा….और टहलते हुए में स्टोर रूम में चला गया…और जैसे ही उस सिंगल पर बेड पर बैठने लगा तो, साना अंदर दाखिल हुई…”रूको रूको समीर….” मैने हैरत से साना की तरफ देखा तो, वो मुझे देख कर अजीब से अंदाज़ से मुस्कुराइ….”समीर इस बेड पर मत बैठना….?” साना ने मुस्कुराते हुए कहा… तो मैं सवालिया नज़रों से साना को देखने लगा….”क्यों इस बेड पर बैठना मना है…?” मैने साना की तरफ देखते हुए कहा….तो मेरी बात सुन कर साना मुस्कुराते हुए बोली…”नही मना तो नही है….पर ये बेड टूटने वाला है…?”
मैं: क्या टूटने वाला है….?
साना: हां कल दोपहर को ये बहुत आवाज़ कर रहा था हाहाहा…..
साना ने हंसते हुए कहा तो, मेरी आँखे खुली की खुली रह गयी….”क्या…?” मैने चोन्कते हुए पूछा तो, साना क़हक़हे के साथ हंसते हुए बोली….”हां समीर कल दोपहर को में ऊपेर आई थे…तब इस बेड की चीखे निकल रही थी….सच….”
मैं: चीखे निकल रही थी….क्या मतलब…..(मैने अंजान बनने की आक्टिंग करते हुए कहा….दरअसल मेरा डर के मारे बुरा हाल हो चुका था….कि कही साना ने कुछ देख ना लिया हो…)