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मेरा बेटा मेरा यार (माँ बेटे की वासना ) complete

"यही तो कह रहा हूँ डार्लिंग चूत तो बनी ही चोदने के लिए है" मेरे सामने मेरे बेटे का चेहरा था जो मुझ पर झुका हुआ मुझे ठोक रहा था।

"हुम्....... चूत तो बनी ही है चोदने के लिए.......लण्ड लेने के लिए........" मैं उन आँखों में देखतो बोली। "चोदो मुझे......मेरी चूत मारो......ऊऊम्मम्मह्ह्ह्ह्........चोदो......मेरी चूत मारो.......मेरी चूत तो बनी ही चोदने के लिए है" मैंने बेटे का चेहरा अपने हाथों में पकड़ उसे खींच कर अपने होंठ उसके होंठो पर दबा दिए। मेरी चूत से रस बहने लगा। जिस्म अकड़ने लगा। पूरी देह की नस नस फड़कने लगी। मेरी आँखे बंद हो गयी मैं झड़ती हुयी बेटे के लण्ड का स्वाद लेने लगी। कुछ ज़ोरदार धक्को के बाद उसका रस मेरी जलती चूत को शीतल करने लगा। मैंने उसकी गर्दन पर अपनी बाहें जकड दी और उसे कस कर सीने से लगा लिया।

"उफ्फ्फ्फ्फ्फ .......कणिका..... तुम्हारी चूत......उफ्फ्फ्फ़........आज भी तुम्हे चोदने में वही मज़ा आता है जैसा तुम्हे सुहागरात को चोद कर आया था।

मेरा पती भी कितना भोला था। वो समझ रहा था उसने मुझे चोदा था। उसे क्या मालूम था मुझे उसने नही बल्कि उसके ही बेटे ने चोदा था.....फिरसे। उफ्फ्फ्फ्फ्फ अभी भी चूत रस बहा रही थी। उसके लण्ड का स्पर्श चूत की दरो दिवार में समां गया था।

अगली सुबह मैं कुछ जल्दी उठी थी। पतिदेव को 7 दिन के लिए कामकाज के सिलसिले में बाहर जाना था। नहाधोकर मैंने नाश्ता बनाया और फिर पति को नाश्ते के लिए बुलाया। इसके बाद मैँ ऊपर गयी और एक महीने बाद बेटे के दरवाजे पर दस्तक दी। वो सायद कमरे में नही था। मैं अंदर गयी और बाथरूम के बंद दरवाजे पर दस्तक दी। अंदर से पानी की गिरती आवाज़ फ़ौरन वंद हो गयी।

"बेटा नाश्ता तयार है, जल्दी से नीचे आ जाओ" मैं जितना हो सकता था प्यार भरे स्वर में बोली और फिर वापस नीचे आ गयी। सीढियाँ उतरते मेरे होंठो पर जबरदसत मुस्कान थी,रात की चुदाई ने मेरी शंकाए दूर कर दी थी ,अब मुझे फिर से अपने बेटे का लंड चाहिए था अपनी चूत में।

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शाम को राज जानबूझकर काफी देर बाद घर आया । उसने देखा मेँ डाइनिंग रूम या किचन में नहीं थी जैसा की मै अक्सर इस समय होती थी । शायद वो दिन भर सोच रहा था कि घर जाकर मेरा सामना कैसे करेगा लेकिन जब उसने पाया कि मै आज , अन्य दिनों की तरह , डिनर के लिए उसका इंतज़ार नहीं कर रही है तो उसने राहत की सांस ली ।उस ने किचन में झांककर देखा तो पाया कि में ने उसके लिए खाना पकाकर रख दिया था । उसने चुपचाप खाना गरम किया और खाने लगा ।

डिनर के बाद उसने थोड़ी देर वहीँ सोफे पर बैठकर TV देखा फिर वो बाथरूम की तरफ चल दिया । चुपचाप उसकी ये हरकते अँधेरे में से देख रही थी ,सुबह मेरे बुलाने पर भी वो नहीं आया तो मेरे दिल में उसके लिए हमदर्दी का ज्वार उमड़ पड़ा था मुझे बार बार मेरे पति की वो बात याद आ रही थी की उसने किसी लड़की की चूत भी मार ली होगी तो क्या हुआ वो क्या किसी से नहीं चुदवाती होगी। में सुबकने लगी , राज मेरे बेडरूम के दरवाज़े से गुजरते वक़्त उसे हलकी हलकी मेरे सुबकने की आवाज़ें सुनाई दीं ।

अपने कानों में मेरे सुबकने की आवाज़ पड़ने से उसका दिल बैठ गया । जो कुछ भी हुआ उसके लिए उसका मन अपने को ही दोषी ठहराने लगा । वो सोचने लगा अगर वो उस रात मॉम के बाद में चुदाई वाले प्रस्ताव को ठुकरा देता तो वो घटना होती ही नहीं । उसका दिल अपनी सुबकती हुई मॉम के पास दिलासा देने के लिए जाने को मचलने लगा ।दूसरी तरफ ये बात भी थी कि राज को भी उस रात जब तक उसे ये पता नहीं चला था की वो अपनी मॉम को चोद रहा हे वो अजनबी औरत अच्छी लगी थी । उस औरत ने बिना नखरे दिखाये राज के साथ खुलकर सेक्स किया था और ये बात राज को बहुत पसंद आयी थी । लेकिन जब रोशनी में असलियत से उसका सामना हुआ और उस औरत से मुलाकात हुई तो वो उसकी अपनी ही मॉम निकली जिससे सेक्स सम्बन्ध बनाने की वो कल्पना भी नहीं कर सकता था ।

 
Thanks to all

 
वैसे तो हम दोनों ही माँ बेटे आपस में बिलकुल ही खुले हुए थे । अक्सर ही में घर में टीशर्ट और शॉर्ट्स में अपनी खुली टांगों में घूमती रहती थी । जब राज हमारे साथ आकर रहने लगा था तब भी में ने अपने तौर तरीकों में कोई बदलाव नहीं किया था । क्योंकि दोनों के दिल में एक दूसरे के लिए कोई बुरे विचार या वासना की भावना नहीं थी ।

लेकिन एक बार हम दोनों माँ बेटे के बीच जिस्मानी सम्बन्ध बन जाने के बाद अब सारे हालत बदल चुके थे।

“ मॉम ” उसने दरवाज़े के बाहर से मेरे को आवाज़ दी ।

" जाओ यहाँ से " में सुबकते सुबकते ही बोली ।

" मॉम , प्लीज मुझे अंदर आने दो । मैं तुमसे बात करना चाहता हूँ । “

" राज , तुम मुझसे दूर रहो । मुझे अकेला छोड़ दो । प्लीज ! ”

राज मेरा दुःख और बढ़ाना नहीं चाहता था । इसलिए उसने ज्यादा जोर नहीं दिया और चुपचाप अपने बेडरूम में आ गया । बेड में लेटे हुए उसे महसूस हुआ कि उसने अपनी प्यारी मॉम को खो दिया है ।

उसे लगा कि, उन दोनों के बीच जो लाड़ भरा रिश्ता माँ बेटे का था और जो उसके लिए बहुत मायने रखता था क्योंकि वो अपनी मॉम से बहुत प्यार करता था और उम्र में थोड़ा छोटा होने के बावजूद एक protective बेटे की तरह उसकी केयर करता था , वो रिश्ता अब हमेशा के लिए खत्म हो चुका है ।हम दोनों ही माँ बेटे के लिए वो रात बहुत लम्बी गुजरी l दोनों ही अपनी अपनी मानसिक पीड़ा को भोगते हुए बिस्तर में इधर से उधर करवटें बदलते रहे । आखिर थककर नींद ने हमें अपने आगोश में ले लिया ।

दूसरे दिन घर में मेरा मन नहीं लगा । मेरे मन में वही सब ख्याल आते रहे । उस रात में राज के सीने से लगने पर हुई उत्तेजना के दृश्य उसकी आँखों के सामने घूमते रहे । जिस अजनबी को वो इतना चाहने लगी थी वो अब अजनबी नहीं उसका बेटा राज था । फिर भी मेरी चाहत कम नहीं हो रही थी ।

मेने अपने दिल को समझाना चाहा कि ये सिर्फ छिछोरापन है , राज उसका बेटा है और वो उसकी मॉम आखिर दुनिया में कौन माँ अपने बेटे की तरफ इस तरह आकर्षित होती है कि उससे सेक्स सम्बन्ध बनाने की इच्छा हो ? जो भी हुआ वो किस्मत की एक गलती थी और अगर अब भी मैं राज की तरफ आकर्षित हो रही हूँ तो ये बहुत ही गलत बात है , जो संसार के नियम बंधनों के हिसाब से पाप है ।

 
मुझे अपने ऊपर ही क्रोध आने लगा । लेकिन लाख कोशिश करने के बाद भी में अपने दिल पर काबू न पा सकी ।मेरे मन में राज को पाने की इच्छा बढ़ती ही गयी । जब भी में अपनी आँखे बंद करती मुझको राज ही दिखाई देता । मेने अपनी पूरी कोशिश की , कि में अपने बेटे के बारे में इस तरह से न सोचू । मेने अपना ध्यान राज से हटाकर , अपने पति के साथ बिताये पलों को याद करने का प्रयास किया । लेकिन इन सब कोशिशों से कोई फायदा नहीं हुआ ।

मुझे बार बार उस अँधेरे कमरे में अपने ऊपर राज के बदन की परछाई दिखाई दे रही थी ।शाम को में डाइनिंग रूम में सोफे पर आँखें बंद किये लेटी थी । मेरे मन में राज के ही ख्याल आ रहे थे । मुझे लगा राज उसके ऊपर लेटा हुआ है और उससे धीमे धीमे प्यार कर रहा है । अपने आप ही मेरा एक हाथ clitoris पर चला गया और दूसरे हाथ से में अपनी एक चूची को हलके से सहलाने लगी । फिर कुछ पलों बाद मेने राज के मुंह से

निकलती सिसकारी सुनी और अपनी चूत में सफ़ेद गाड़े वीर्य की धार महसूस की ।

पिछले कुछ दिनों से मेरे मन में राज से मिलने की बहुत तड़प थी । उस रात की उत्तेजना मेरे मन से कभी निकल ही नहीं पायी । मुझे लगता था मेरे बदन में कुछ आग सी लग गयी है ।अपनी चूत के फूले होंठ मुझे कुछ ज्यादा ही sensitive महसूस हो रहे थे और चूत में हर समय एक गीलापन महसूस होता था ।

अपने अंदर उठती इन भावनाओं की वजह से दिन भर में बहुत रोयी थी । ये ऐसी इच्छाएं थी जो पूरी नहीं की जा सकती थीं और अपने बेटे के लिए तड़प , तो समाज स्वीकार ही नहीं करता था । मेने कभी नहीं सोचा था कि सिर्फ एक रात के सम्बन्ध से हालत यहाँ तक पहुँच जायेंगे और मेरे मन में अपने बेटे को पाने की चाहतइस कदर बढ़ जायेगी कि वो समाज के बनाये नियमों को तोड़ने पर आमादा हो जाएगी ।

 
अब में राज से अनजान नहीं थी । ये बात बिलकुल साफ़ हो चुकी थी कि वो कौन था जो उसके उत्तेजक सपनो में आता था और उसको भरपूर कामतृप्त करके ही जाता था । जिसके चौड़े सीने से लगकर वो अपने आप को फिर से छोटी बच्ची की तरह सुरक्षित महसूस करती थी । अब उस अजनबी का चेहरा धुंधला सा नहीं था ,

वो चेहरा था मेरे हैंडसम बेटे राज का ।

ऐसे हालात में एक ही छत के नीचे अपने बेटे के साथ रहना अब मेरे लिए नामुमकिन सा था । राज के उसके ही साथ रहने से मेरे को अपनी भावनाओं पर काबू पाना संभव नहीं लग रहा था । मुझे लग रहा था कि अगर राज यहीं रहा तो वो उसके लिए तड़पती ही रहेगी । मेने सोचा कि वो अपने बेटे से कह देगी कि वो फिर से हॉस्टल चला जाये

मगर राज को जाने के लिए कहने के ख्याल के बारे में सोचने से ही मुझे इतनी पीड़ा पहुंची कि मेने इस ख्याल को ही मन से निकाल दिया ।

मेरे लिए अब राज ही मेरा “ बॉयफ्रेंड “ था । लेकिन राज के लिए ?

दूसरी तरफ शायद राज के लिए ये सब बहुत मुश्किल था । वो कणिका को बहुत प्यार करता था और उसका पूरा ख्याल रखता था । कणिका की बात वो टालता नहीं था । लेकिन अपनी मॉम के लिए शारीरिक आकर्षण जैसी कोई भावना उसके मन में नहीं थी । उस रात नशे की हालत में उसने चुदाई जरूर कर दी थी लेकिन कभी मेरे माथे पर प्यार भरा किस कर लिया तो कर लिया वरना राज , समझदार बेटे की तरह उससे एक शारीरिक दूरी बनाये रखता था । उसने कभी भी मेरी छाती , मेरे नितम्बों और अक्सर खुली रहने वाली लम्बी चिकनी टांगों की तरफ गलत नज़रों से नहीं देखा था । वो तो मॉम की तरह उससे प्यार करता था । उसका मन अपनी माँ के लिए शीशे की तरह साफ़ था और ये बात मेरे को अच्छी तरह से मालूम थी ।

लेकिन इससे मेरी पीड़ा और भी बढ़ गयी क्योंकि में जानती थी कि मेरी तड़प इकतरफा थी और ये भी कि राज के मन में उसके लिए ऐसी कोई तड़प नहीं है ।

हर शाम मेरे लिए लम्बी खिंचती चली गयी । समय के साथ मेरी उलझन बढ़ती जा रही थी । मेरे को लग रहा था कि में एक चक्रव्यूह में फंस चुकी है और बाहर निकलने का कोई रास्ता उसे नहीं सूझ रहा था ।

“मॉम ! मॉम !”

“कौन ? कौन है ?“ जोर जोर से अपना नाम पुकारे जाने की आवाज़ से उसकी तन्द्रा टूटी और वो हड़बड़ा के सोफे में उठ बैठी ।

 
“मैं कितनी देर से आपको आवाज़ दे रहा हूँ । आपको क्या हो गया हे ?

“ सॉरी राज ...कुछ दिनों से मैं ढंग से सो नहीं पायी हूँ इसलिए आँख लग गयी थी “ मेने आँखें मलते हुए कहा ।

राज ने मेरे चेहरे से छलकता दर्द देखा वो तुरंत समझ गया कि में किन ख़यालों में डूबी हुई थी । रात को नींद न आने की बात तो सिर्फ एक बहाना थी ।

“ देखो मॉम , जो कुछ भी हुआ वो एक किस्मत की गलती थी और हम दोनों का ही इसमें कोई कसूर नहीं है । हमको इस बात को भूल जाना चाहिए और फिर से आपस में पहले जैसा ही व्यवहार करना चाहिए ।"

“पहले की तरह ? ये संभव ही नहीं है । “

“ लेकिन जो कुछ भी हुआ उसको अब हम पलट तो नहीं सकते ना । इसलिए उसे भूल जाना ही ठीक है । "

“तुम क्या कह रहे हो राज ? जो हुआ उसे भूल जाऊँ ? कैसे ? " मेरी पीड़ा अब गुस्से में बदल रही थी ।

एक तो मै पहले से ही परेशान थी , ऊपर से राज का बड़ों की तरह ऐसे बातें करना मुझे अच्छा नहीं लग रहा था । गुस्से से मेरा मुंह लाल हो गया ।

“ मॉम , प्लीज , पहले मेरी बात सुनो । मैं सिर्फ ये कह रहा हूँ कि माँ बेटे के बीच मर्यादा की जो रेखा होती है ,हमें उसे पहले जैसे ही बरक़रार रखना चाहिए । मैं तुम्हारा बेटा , तुम मेरी मॉम हो । जो कुछ हुआ उसे बुरा सपना समझकर भुला देना चाहिए । आपको मेरी इतनी सी बात समझ क्यों नहीं आ रही है ? उस घटना को भूल जाने में आपको प्रॉब्लम क्या है ? "

“ इतनी सी बात ...... ? ये इतनी सी बात है ......? बकवास बंद करो राज !! भाड़ में गयी तुम्हारी ये लेक्चर बाजी । तुम्हें कुछ अंदाजा भी है कि उस रात के बाद से मुझ पर क्या गुजरी है ? और तुमने कितनी आसानी से कह दिया , सब भूल जाओ । मैं कैसे भूल जाऊँ ? मर्यादा की जिस रेखा की तुम बात कर रहे हो , उसे तो तुम कब का पार कर चुके हो । राज अब वो रेखा हम दोनों के बीच है ही नहीं क्योंकि उस रात के बाद अब हम दोनों उस रेखा के एक ही तरफ हैं ।

उस रात जो बदन तुम्हारे जिस्म के नीचे था , वो मेरा बदन था , तुम्हारी अपनी सगी माँ का । अब आँखें फेर लेने से क्या होगा ।और ये बात नशे के बाद भी तुम जानते थे

सच को झुठला तो नहीं सकते ना तुम । "

 
मेरी आँखों से टपटप आँसू बहने लगे ।“ बात सिर्फ उस रात के सेक्स की नहीं है । लेकिन उस रात बिताये पलों के बाद , जाने अनजाने में , मेरे मन में जो आशाएं , उम्मीदें , जो इच्छाएं जन्मी थी , उनका क्या ? जो सपने रात भर मुझे बेचैन किये रहते थे , उनका क्या ? मैं उन्हें भुला ही नहीं सकती , चाहे मैं कितनी ही कोशिश क्यों ना कर लूँ । समझे तुम ? "

मेरे अंदर की इतने दिनों की पीड़ा , उसकी तड़प , लावा बनकर फूट पड़ी ।

“तुम सभी मर्द एक जैसे होते हो । तुम लोगों को इस बात का कुछ अंदाजा ही नहीं होता कि जब एक औरत किसी लड़के को अपना दिल दे बैठती है तो उस पर क्या बीतती है । लड़कों को लगता है कि औरत पर थोड़ा पैसा खर्च कर दो , कुछ गिफ्ट वगैरह दे दो और वो औरत उनके लिए अपने कपडे उतार दे । क्यों ? क्योंकि वो ऐसा चाहते हैं , बस । वो किसी भी तरह सिर्फ सेक्स करने की कोशिश में रहते हैं । औरत की भावनाओं की उन्हें कोई क़द्र नहीं होती । उनका सिर्फ एक लक्ष्य होता है कि कैसे भी पटाकर औरत की टांगे फैला दी जाएँ और इससे पहले कि औरत कहीं अपना इरादा ना बदल दे , झट से उसके

ऊपर चढ़के उसके अंदर अपना पानी गिरा दें ।

कई बेवक़ूफ़ औरते इनके चक्करों में फंस भी जाती हैं और जब तक उन्हें समझ आती है , लड़के अपना काम निकाल के , उनको छोड़ कर जा चुके होते हैं ।लेकिन ये बातें मुझे जल्द ही समझ आ गयी थीं । मैं जानती थी की उस दिन मेरे लिए सेक्स बहुत मायने रखता था,तुम नहीं होते तो शायद किसी और से चुदवा लेती ,तुम्हारे पापा की शराबखोरी ने उन्हें सेक्स में कमजोर बना दिया था और हर रात में अतृप्त रह जाती थी,उस रात तुमने मुझे कई रातो के बाद तृप्त किया था ,हा ये सही हे की मुझे जब ये पता चला की तुमने मेरे साथ सेक्स किया हे तो में नाराज थी लेकिन इन दो महीनो में मुझे पता चल गया हे की में तुम्हारे बिना नहीं रह सकती।

मै बोलते बोलते थोड़ी साँस लेने के लिए रुकी । मेरी पीड़ा देखकर राज का दिल भर आया । उसने मुझ को आलिंगन में भरकर मेरा सर अपनी छाती से लगा लिया । अपने बेटे की मजबूत बाँहों के घेरे में आकर मेने एक गहरी सांस ली । मेरी आँखों से फिर आँसू बह चले ।सुबकते हुए में बोली ,

 
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