• Hello Friends You can Register on the Forum and by posting you can earn money too.

मेरी खुली चुनौती मेरे पति को



जब मेरा योग से चुदना तय ही है तो फिर भला मैं हाय हाय क्यों करूँ? क्यों मैं उसे एन्जॉय ना करूँ? वैसे भी मेरी कई महीनों से इच्छा थी की मुझे योग से चुदवाना था। तो फिर मौक़ा मिला ही है तो मैं इस चुदाई का मजा क्यों ना उठाऊं? योग मेरी चूत में अपना लण्ड डालने के लिए उतावले हो रहे थे। मेरी जान हथेली में थी की मैं योग का लंड कैसे ले पाउंगी। इस लिए जरुरी था की योग मेरी चूत, में अपना लण्ड धीरे धीरे डाले। मुझे उसके लिए कुछ न कुछ तो करना ही था। मैंने योग की और देखकर बड़े प्यार से देखा और कहा, "योग ज़रा आराम से प्लीज?" योग ने मेरी और तेज तर्रार नज़र से देखा और पूछा, "आराम से क्या?" मैं समझ गयी की योग मुझसे खुल्लम खुल्ला बात बुलवाना चाहता था। मैंने झिझक ते हुए कहा, "योग मुझे आराम से चोदना प्लीज! प्लीज मुझे आहात मत करना प्लीज? क्या तुम मुझे बार बार चोदना नहीं चाहोगे?" योग उसी बीभत्स तरीके से ठहाका मारकर हंस कर बोला, "क्या बात है! मैं तुन्हें एक बार नहीं बार बार चोदना चाहता हूँ। जब तक तुम बूढीया ना बन जाओ और मैं तुम्हारी चूत का हुलिया बिगाड़ ना बना डालूं तब तक तुम्हें चोदता रहूंगा।" मैंने योग को बड़े प्यार से कहा, "योग डार्लिंग, मैं भी तुम से बार बार चुदवाना चाहती हूँ इसी लिए कहती हूँ की मेहरबानी करके लण्ड प्यार से और धीरे से डालो।"

मेरी बात सुनकर योग फिर एक ठहाका मार कर हँसे और बोले, "ठीक है, मेरी प्यारी राँड़ चलो मैं आपकी यह बात मान लेता हूँ। पर याद रहे, यह आखरी बार हम आपसे नरमी से पेश आएंगे। फिर हम नरमी से नहीं पेश आएंगे क्यूंकि वह हमारी स्टाइल नहीं है।" और फिर वही भयावह हँसी और वही सुनहरा दाँत। योग ने पहला धक्का धीरे से दिया। मुझे अच्छा लगा। योग का लण्ड थोड़ा सा ही घुसा था और काफी मोटा और कड़ा था। पहली बार मुझे ऐसा महसूस हुआ की मैंने वाकई में कोई मरदाना लण्ड को अपनी चूत में महसूस किया था। वह कोई भी मोटे से मोटे केले से भी मोटा था। मुझे मिली एक राहत खतम हो चुकी थी। अब मुझे भुगतना ही था। योग ने एक और धक्का दिया और उस समय मेरी चूत में से कटार की तेज धार से कट ऐसा शूल मझे महसूस हुआ। मेरी चूत योग के लण्ड ने ऐसी जकड राखी थी की उसका और अंदर जाना नामुमकिन था। और फिर भी योग थे की उसे और घुसेड़ने की कोशिश कर रहे थे। मैंने योग से कहा, "योग, प्लीज धीरे से डालो यार। तुम मुझे मार डालोगे क्या?" योग ने मेरे दोनों स्तनों को अपने दोनों हाथों में लकड़ रखा था और उन्हें इतनी जोर से दबा कर अपना मोटा लौड़ा वह मेरी चूत में घुसेड़ने के लिए अग्रसर हुआ। उसने एक जोर से कमर से अपने लण्ड को धक्का दिया। उस समय मेरे दिमाग में सिर्फ योग का लण्ड ही था। मैं उसे मेरी चूत को फाड़ते हुए महसूस कर रही थी।

मैं एकदम परेशान हो रही थी। मुझे लगा की मेरी चूत में से खून निकलना शुरू हो गया था। अगर योग ने और एक धक्का जोर से मारा तो वह मेरी चूत की चमड़ी को फाड़ डालेगा और मेरी चूत में से इतना खून बहेगा की खून की कमी के कारण ही मैं मर जाउंगी। मुझे इतनी जल्दी मरना नहीं था। मैं जानती थी योग आसानी से मेरी बात नहीं मानेगा। मैंने योगराज का सर मेरे दोनों हाथों में पकड़ा और उसका मुंह मेरे मुंह पर रख कर मैं उसे चुम्बन देने की लिये प्रेरित किया। मैं जानती थी की योग सीधे स्पष्ट खुल्लम खुल्ला चोदना, चूत, लण्ड ऐसा बोलने से ज्यादा खुश होता था। उसे सेक्स, लिंग, योनि जैसे गोल मोल शब्दों से नफरत थी। जैसे ही हमारे होंठ मिले की मैंने योग के कानों में कहा, "योग तुम्हारा लण्ड इतना मोटा मरदाना है और मेरी चूत छोटी सी जनाना है। थोड़ा रहम करना प्लीज! डार्लिंग, प्लीज थोड़ा सा धीरे से चोदो ना प्लीज?" मैंने फिर वही बार बार प्लीज कहने का फॉर्मूला अपनाया। मुझे लगा की मेरी बिनती का कुछ कुछ असर तो हुआ। योग रुक गया। पर फिर उसने एक और धक्का दिया और उसका मोटा और लंबा लण्ड मेरी चूत में आधा घुस गया। मैं तब सहनशीलता की मर्यादा पार चुकी थी। मैं योग का गला पकड़ा और उसे हिलाते हुए बोली, "तुम सुनते नहीं हो क्या? क्या तुम थोड़ी नरमी नहीं बरत सकते? कैसे प्रेमि हो? तुम्हे अपनी प्रेमिका से प्यार करना आता नहीं क्या?" योग मेरी बात सुनकर ठहाका मार कर हँस पड़ा और बोला, "प्रेम और तुमसे? मेरी जूती से! मैं तुम्हें प्रेम करना नहीं चोदना चाहता हूँ। ओ मेरी रंडी, मैं तुमसे जबरदस्ती करना चाहता हूँ। साली कुतिया। तुम क्या समझती थी? तुम योग से भी ज्यादा स्मार्ट हो? तुम सोचती थी की योग तुम्हारा काम भी करेगा और तुम्हें चोदेगा भी नहीं? तुमने कैसे सोचा की योग तुम्हारी चिकनी चुपड़ी बातों में आ जायेगा और खुद महेनत करके तुम्हें एक सफल महिला प्रोफेशनल का ताज पहनने देगा और खुद अपना अंगूठा चूसता रहेगा? अगर तुमने यह सोचा है तो तुम गलत फहमी में हो।"

 
योग गंदे और आक्रामक शब्द प्रयोग के साथ अपना तगड़ा लण्ड मेरी नाजुक चूत में उतनी ही आक्रामकता से घुसेड़े जा रहा था। मुझे मेरी चूत में भयंकर शूल सा दर्द हो रहा था। मेरे कपाल पर पसीना बह रहा था। जैसे जैसे योग ने अपना लण्ड मेरी चूत में ज्यादा और ज्यादा घुसेड़ा मेरा दर्द बढ़ता ही गया। पर साथ में वह दर्द मुझे पता नहीं क्या पागलपन सा आनंद भी दे रहा था। ऐसा आनंद मुझे मेरे पति से चुदवाने में कभी नहीं मिला। पर फिर भी मुझे योग की रफ़्तार कम करवाना जरुरी था। मेरी चूत में से खून बह रहा था। अगर योग इसी तरह मुझे चोदते रहे तो खून के बहाव से पूरा बिस्तर गीला होजायेगा और मुझे डर था की दर्द और खून के बहाव से मैं कहीं मर ना जाऊं। दर्द के मारे मैं डर को भूल कर जोर से चिल्ला उठी, "योग, क्या कर रहे हो? तुम्हें थोड़ी सी भी तमीज़ नहीं है क्या? थोड़ा धीरे करो।" जैसे मेरे मुंह से यह शब्द निकले की जैसे मैं डर रही थी वैसा ही हुआ। योग ने अपना हाथ ऊपर किया और एक जबरदस्त तमाचा गाल पर पाने को मैं तैयार हुई। परन्तु मैंने महसूस किया की गाल पर करारा थप्पड़ के बजाय कोई मेरे गाल पर और कन्धों पर हलके फुल्के मुझे टपलियाँ मार रहा था और मुझे झकझोर रहा था। तब फिर मैंने योग की आवाज सुनी। पर उस समय उनकी आवाज बड़ी मधुर और नरम थी। वह कह रहे थे, "उठो डार्लिंग, उठो!" मेरी समझ में कुछ नहीं आ रहा था, की मेरे चारों और क्या हो रहा था। मेरा सर चक्कर खा रहा था। मैंने धीरे से अपनी आँखें पूरी खोलीं। मैं एकदम हड़बड़ा कर जाग गयी। योग मेरे सामने पुरे कपडे पहने हुए खड़े थे और मेरी आँखों में आँखें डालकर मुझे जगाने की कोशिश कर रहे थे।

जब मैंने अपने बदन को देखा। मैं भी पुरे कपडे पहने हुए साफ़ सुथरी सोफे पर लंबा हो कर लेटी हुई थी। ना कोई खून ना ही कोई फटे हुए कपडे। हाँ मेरे कपाल पर जरूर पसीना बह रहा था। मैं समझ गयी की मैं नींद में ही योग के साथ आक्रामक चुदाई का सपना देख रही थी। मैंने अपनी आँखें मली और धीरे धीरे लुढ़कती हुई खडी होने की कोशिश करने लगी। योग ने कड़ी होने में मेरी मदत करी!

योग कंप्यूटर पर इतनी देर तक गुथम गुत्थी करने के कारण थके हुए नजर आ रहे थे। वो बड़ी ही मीठी मुस्कान के साथ बोले, "क्या हुआ था प्रिया? तुम सपने में मुझे धीरे धीरे क्या करने को कह रही थी? क्या तुम मुझे तुम्हारा यह प्रोग्राम जल्दी से देख कर खतम करना नहीं चाहती? या फिर तुम कुछ और सपना देख रही थी?" मैं क्या जवाब देती? मेरी तो हालत ही खराब हो रही थी। मुझे समझ नहीं आ रहा था की मैं कहाँ हूँ और मेरे इर्दगिर्द क्या हो रहा है? मैंने योगराज को मुझ पर झुककर मुझे ध्यान से देखते हुए पाया। मेरे दिमाग में उस समय जैसे हज़ारों घंटियाँ बज रही थीं। मैं उस भयावह सपने से उभर नहीं पायी थी। कुछ पल के लिए तो मुझे ऐसा लगा की कहीं योग स तरह प्यार भरी मीठी आवाज बनाकर मुझे धोखा तो नहीं दे रहे? कहीं वह मेरी सहानुभूति पाने की कोशिश तो नहीं कर रहे? कहीं मुझे बहेला फुसला कर मुझे चोरी छुपी चोदने का प्लान तो नहीं कर रहे? कहीं अचानक ही वह मुझे पकड़ कर एक करारा थप्पड़ मेरे गाल पर जड़ कर कहीं मुझे विवश कर मेरी चूत के लिए अपनी भूख वह शांत करना तो नहीं चाहते? पर उनका चेहरा तो कुछ और ही कह रहा था। वह एकदम गंभीर और शांत लग रहे थे। यह तो सपने से उलटी ही बात हो रही थी। मैंने उनके सवाल का जवाब देना टाल ने में ही अपना भला समझा।

मैं उन्हें पूछा, "आपने मेरा प्रोग्राम देखा क्या?" योग जवाब देते हुए कुछ ज्यादा ही गंभीर हो गए। मैंने उस रात के पहले योगराज जी को इतना गंभीर नहीं देखा था। गंभीर होने के उपरान्त वह थोड़ा जज्बाती हो रहे थे ऐसा मुझे लगा।

 
मैं उन्हें पूछा, "आपने मेरा प्रोग्राम देखा क्या?" योग जवाब देते हुए कुछ ज्यादा ही गंभीर हो गए। मैंने उस रात के पहले योगराज जी को इतना गंभीर नहीं देखा था। गंभीर होने के उपरान्त वह थोड़ा जज्बाती हो रहे थे ऐसा मुझे लगा।

योग के गला जैसे रुंध सा गया जब उन्होंने कहा, "मैंने तुम्हारा प्रोग्राम ना सिर्फ देखा, बल्कि मैंने तुम्हारे प्रोग्राम को इतनी बारीकी से जांचा है की क्या कहूं। मुझे इस बारे में तुमसे कुछ जरुरी बात करनी है।" मेरी जान हथेली में आगयी। एक भयंकर आशंका मेरे पुरे बदन में फ़ैल गयी। मैं समझ गयी की योग ने हमारा प्रोग्राम पूरा नकार दिया था, रिजेक्ट कर दिया था और वह अब बड़ा धमाका करने वाले थे की हमारा प्रोग्राम कूड़े दान में फेंकने के काबिल था। मेरे माथे पर पसीने की बुँदे आने लगीं। मेरी शकल रोनी सी हो गयी। मैं योग का फैसला सुनना नहीं चाहती थी। पर फिर सोचा की आखिर सच का सामना तो हिम्मत के साथ करना ही पडेगा।

योग ने मेरे कन्धों पर एक हाथ रखते हुए कुछ भावुकता भरे स्वर में कहा, "प्रिया डार्लिंग! यह तुम्हारा और तुम्हारी टीमम का डिज़ाइन किया हुआ प्रोग्राम मेरे देखे हुए प्रोग्रामों में से मेरी जिंदगी का सबसे सर्वोत्तम प्रोग्राम है। मेंरी समझ में यह नहीं आता की आप की टीम ने इतना सटीक, संक्षिप्त, सुगठित और फिर भी इतना विस्तृत प्रोग्राम कैसे बनाया? आपके छोटे से दिमाग में इतना प्रोफेशनल प्रोग्राम कैसे बना? प्रिया डार्लिंग, आज तुमने मुझे अपने इस प्रोफेशनलिजम से जित लिया। मैं तुम्हारे काम से मात खा गया।". मैंने देखा की योग सर की आँखों में भाविकता से भरे आंसू छलक रहे थे।

यह सूना तो मैं बेहोश सी हो गयी। मुझे अपने कानों पर यकीन नहीं हुआ। मैंने योग सर की और आश्चर्य और अविश्वास भरी नज़रों से देखा। मुझे समझ में नहीं आया की उन्होंने वाकई में क्या कहा। मुझे लगा की वह मेरे साथ कोई भद्दा मज़ाक कर रहे थे। एक उच्च कक्षा के प्रोफेशनल प्रोग्रामर से ऐसी भूरी भूरी प्रशंशा की मैंने कोई उम्मीद नहीं राखी थी। जो उन्होंने कहा था वह मुझे हजम नहीं हो रहा था। मुझे लगा की शायद मैंने सही नहीं सूना।

मैंने कुछ आशंका भरे स्वर में योग से पूछा, "सर, आप ने क्या कहा?"

योग ने दुबारा वही कहा जो उन्होंने पहले कहा था। मुझे फिर भी मेरे कानों पर यकीन नहीं हो रहा था। हां यह सही है की मुझे अपने काम पर विश्वास था। और वास्तव में जो शब्द योग सर ने कहे थे वह सही थे। मैंने और मेरी टीम ने जो महेनत की थी यह उसका सफल परिणाम था। मैं जानती थी की प्रोग्राम वाकई में वाणिज्य के हिसाब से उच्च कक्षा का था उसमें कोई शक की गुंजाइश नहीं थी l धीरे धीरे जो योग सर ने कहा वह दिमाग में घुसने लगा। वास्तव में तो वह एकदम सही कह रहे थे। मैं अत्याधिक भावावेश में सराबोर हुई थी। मेरी जिंदगी का और मेरी टीम एवं मेरे अपने प्रोफेशनलिजम का यह सबसे मूल्यवान प्रमाणपत्र था। मैं योग के पास गयी और मैं वही भावावेश में उनके सामने प्रस्तुत हुई। उन्होंने अपनी बाहें फैलायीं और मैं उनमें समा गयी। मैंने उनको बड़ा ही गाढ़ आलिंगन करते हुए कहा, "योग सर, आपकी यह मेरे काम की प्रशंशा मेरे लिए मेरी जिन्दगी की सर्व श्रेष्ठ और सबसे मूलयवान भेंट है।" योग सर मेरे भाव पूर्ण आलिंगन से कुछ ख़ास चलित नहीं हुए, बल्कि अपने ही प्रवाह में वह उसी भावावेश में बोले, "मैंने एक एक लिंक (जोड़ी), हर एक डेटा सेट को इतनी शूक्ष्मता और कठोरता से तराशा। कहीं कोई कमी, कोई गलती ढूंढने की बड़ी कोशिश की। पर यह प्रोग्राम इतना स्मूथ है की मुझे कुछ नहीं मिला। मैं अभी भी विश्वास नहीं कर पा रहा हूँ की यह प्रोग्राम तुमने बनाया...

 
मैं तुम्हारा और उन सब महिलाओं का गुनेहगार हूँ की जिनकी काबिलियत के बारे में मैंने आजतक उलटी पुलटि बातें की। मैंने आपकी और उन महिलाओं की काबिलियत के बारे में मेरे कटु वचनों द्वारा दिल दुखाया इस लिए मैं बहुत ही शर्मिन्दा हूँ और उन सब से माफ़ी माँगता हूँ।" तब तक मैं उस अजीबो गरीब उलझन से बाहर आ चुकी थी। मैं नार्मल हो चुकी थी। मैं योग सर की और आगे बढ़ी और उनका हाथ मेरे हाथों में लेकर बोली, "जिसका अंत सही हो वह सही है। मैंने भी आपका एप्प देखा है। आपका एप्प मेरे प्रोग्राम से कोई भी कंप्यूटर पर सहज रूप से ही लिंक हो जाएगा। क्या हम कोशिश करें?" पर तब मैंने योग सर की थकी हुई आँखों को देखा। वह थके हुए दीखते थे। मुझे लगा उनको कुछ सहज एवं तनाव मुक्त माहौल चाहिए।

मैंने कहा, "योग सर, काम को छोड़ते हैं। मैं समझती हूँ अब सफलता मनाने का, सेलिब्रेट करने का समय है। क्या आपके पास शैम्पेन है? मेरा मन करता है की सेलिब्रेट किया जाय।"

योग ने मुझे अपनी हाजरी में इतना आरामदायक स्थिति में पहली बार पाया। वह आश्चर्य से मुझे देखते रहे। योग हमेशा मेरा मन भांप लेते थे। उन्होंने मुझे पहले अपनी हाजरी में हमेशा बेचैन पाया था। अब मुझे तनाव मुक्त पाकर वह खुश नजर आ रहे थे। उन्हें मेरा यह परिवर्तन अच्छा लगा ऐसा मैंने महसूस किया।

उन्होंने जवाब में कहा, "क्यों नहीं डार्लिंग? शैम्पेन की कोई कमी नहीं है। चलिए"

हम चल कर उनके ड्राइंग रूम में पहुंचे। फिर उन्होंने कहा, "आप बैठिये। मैं बस थड़ी ही देर में नहा कर आता हूँ।"

मैंने अपने कंधे हिलाकर मुस्करा कर कहा, "जरूर शौक से जाइये। इसे आप अपना ही घर समझिये।"

योग जैसे ही बाथरूम गए तो मैं उठकर उनके घर की बालकॉनी में गयी जहां से सारा शहर रौशनी के गहनों में लदी हुई दुल्हन की तरह सजा हुआ नजर आ रहा था। निचे मुख्य रस्ते पर सरपट दौड़ती गाड़ियां अत्यंत आकर्षक लग रहीं थीं। वहां से इंसान छोटे से कीड़े मकोड़े की तरह दिख रहे थे। दूर समंदर की लहरें दिख रही थीं।

थोड़ी देर ताज़ी हवा में सांस लेने के बाद मैं वापस ड्राइंग रूम में आयी। ड्राइंग रूम में कुछ किताबें अलमारी में राखी हुई थीं तो कुछ इधर उधर बिखरी हुई थीं। जब मैं उन किताबों को लेकर एक साथ रखने लगी तब मेरा ध्यान तस्वीरों पर गया। पहले मेरा ध्यान इन तस्वीरों पर नहीं गया था। वहाँ कुछ तस्वीरें थीं जिसमें योग कोई लड़की के साथ पहाड़ों की वादियों में नजर आ रहे थे। अचानक मैंने देखा की तस्वीरों में मैं योग के साथ नजर आ रही थी। मुझे अपने आप पर यकीन नहीं हुआ। भला मैं तो कभी भी योग सर के साथ कहीं भी नहीं गयी, फिर यह मेरी तस्वीर कैसे योग सर के साथ बनी? मैं बड़ी उलझन में पड़ गयी। मैंने उन तस्वीरों को जब और गौर से देखा तो पाया की एक औरत जिसकी शक्ल हूबहू मुझसे मिलती थी वह अलग अलग पोज़ में योग सर की बाहों में, सर से सर टकराये हुए, एक दूसरे का हाथ पकड़ कर टहलते हुए, किस करते हुए और कई दूसरे पोज़ में देखा।

 
थोड़ी देर ताज़ी हवा में सांस लेने के बाद मैं वापस ड्राइंग रूम में आयी। ड्राइंग रूम में कुछ किताबें अलमारी में राखी हुई थीं तो कुछ इधर उधर बिखरी हुई थीं। जब मैं उन किताबों को लेकर एक साथ रखने लगी तब मेरा ध्यान तस्वीरों पर गया। पहले मेरा ध्यान इन तस्वीरों पर नहीं गया था। वहाँ कुछ तस्वीरें थीं जिसमें योग कोई लड़की के साथ पहाड़ों की वादियों में नजर आ रहे थे। अचानक मैंने देखा की तस्वीरों में मैं योग के साथ नजर आ रही थी। मुझे अपने आप पर यकीन नहीं हुआ। भला मैं तो कभी भी योग सर के साथ कहीं भी नहीं गयी, फिर यह मेरी तस्वीर कैसे योग सर के साथ बनी? मैं बड़ी उलझन में पड़ गयी। मैंने उन तस्वीरों को जब और गौर से देखा तो पाया की एक औरत जिसकी शक्ल हूबहू मुझसे मिलती थी वह अलग अलग पोज़ में योग सर की बाहों में, सर से सर टकराये हुए, एक दूसरे का हाथ पकड़ कर टहलते हुए, किस करते हुए और कई दूसरे पोज़ में देखा।

उस औरत की शक्ल, बदन का आकार, लम्बाई, कद, कमर का घुमाव यहां तक की गाँड़ की गोलाई और स्तनोँ की साइज मुझ से इतनी हद तक मिलती थी की कोई भी धोखा खा जाए। योग सर जिस कदर उस औरत को देख रहे थे तो मुझे यकीन हो गया की योग उस औरत से बेतहाशा प्यार करते थे। यह औरत कौन थी जिसे योग सर चकोर जैसे चाँद को निहारता है ऐसे देख रहे थे? तब मुझे याद आया की योग सर के ऑफिस से आयी वह लड़की भी मुझे कह रही थी की योग सर भी मेरी और जैसे चाँद को चकोर देखता रहता है ऐसी नज़रोंसे देखते हैं। वह औरत जरूर वह योग सर की कोई ख़ास थी। जरूर उनकी प्रेमिका या पत्नी होगी। वह योग सर की क्या लगती थी? क्या योग सर के जीवन में भी कोई औरत थी जिसे वह इतना ज्यादा चाहते थे? यह सवाल मुझे खाने लगा। यह सब मेरे लिए योग सर के जीवन के एक नए पन्ने जैसा लग रहा था।

मैं योग सर की उन तविरों को देख कर जीसमे एक औरत बिलकुल मेरे जेसी दिख रही थी, खो गयी थी, मेरे दिमागमें कई सवाल घूम रहे थे। तभी मेरे पीछे से योग सर की आवाज आयी, " यह मेरी पत्नी कनिका थी।" उनकी अचानक पीछे की और से आकर मुझे तस्वीरों को देखते हुए पकड़ा इससे मैं थोड़ी सेहम गयी। तब मैं समझी की योग सर मुझे इतना घूर घूर कर क्यों देख रहे थे। पर "थी" शब्द सुन कर मैं थोड़ा असमंजस में पड़ गयी। मेरे शक्की दिमाग ने फिर काम करना चालु कर दिया। "अच्छा! तो साहब को कनिका ने तलाक दे दिया लगता है।" मैंने सोचा। पर योग ने जो कहा वह सुनकर मैं काँप उठी। योग ने मुझे शांति से सोफे पर बिठाया और बोले, "कनिका मेरी जिंदगी, मेरी सब कुछ थी। पर दुर्भाग्य ने उसको मुझसे समय से बहुत पहले छीन लिया। उसकी मौत एक कार दुर्घटना की वजह से हुई और एक राँड़, कुलटा, भ्रष्ट और अनैतिक पेशेवर स्त्री उसके लिए जिम्मेदार थी।" मैं योग की बात सुनकर दो कारणों से स्तब्ध थी। पहला यह की, मुझे अच्छा लगा (नहीं सॉरी, बुरा लगा) की योग अपनी पत्नी से तलाक के कारण नहीं पर कार दुर्घटना से मौत के कारण अलग हुए थे। दुसरा यह की मैंने इससे पहले योग को कभी किसी भी महिला के लिए इतने गंदे शब्दों का प्रयोग करते हुए नहीं सूना था। कई बार उनका वर्तन कुछ असभ्य और अशिष्ट होता था। वह कुछ सेक्सी शब्दों का इस्तमाल भी जरूर करते थे, पर इतनी भद्दी भाषा मैंने उनके मुंह से पहेली बार ही सुनी थी। योग के मन में उस महिला के लिए कितनी कड़वाहट और ज़हर भरा था वह उनके शब्दों द्वारा जाहिर होता था।

मैं उनकी और प्रश्नात्मक दृष्टि से देखा। योग एक गहरी साँस लेकर बोले, "मेरी पिछली कंपनी में मेरा प्रमोशन तय था। कंपनी के मालिक ने मुझे बुलाकर यह बात बता दि थी। उन्होंने कहा था की कंपनी के रजिस्ट्रेशन की सालगिराह पर मेरे प्रमोशन का ऐलान किया जाएगा l फिर अचानक एक दिन बहुत सेक्सी और खूबसूरत औरत पता नहीं कहाँ से टपक पड़ी। कहा जाता था की उसने पिछली कंपनी में गज़ब का प्रदर्शन किया था और बड़ी उपलब्धियाँ हासिल की थीं l हमारी कंपनी का मालिक उस स्त्री से इतना प्रभावित हुआ था की जो पद मुझे मेरी काबिलियत के आधार पर प्रमोशन के बाद मिलना था उस पर उन्होंने उस स्त्री को बिठा दिया। मैं अपना अंगूठा ही चूसता रह गया।" यह बात कहते हुए योग ऐसे हताश लग रहे थे जैसे वाक्या कुछ सालों पहले नहीं, कल ही हुआ हो। योग ने आगे बताया, "मुझे जल्द ही पता लगा की वह औरत धोखेबाज थी। वह अलग अलग कंपनियों के मालिकों को अपने रूप और सेक्स के जाल में फाँस कर उच्च पद पर नौकरी करती थी, और जब बॉस ऊब जाते थे तो दुसरे किसी को फाँस कर वहाँ जॉब कर लेती थी। अपने रूप और बदन का सौदा करके वह औरत अच्छे प्रमाणपत्र लेती थी और खूब पैसे कमाती थी। उस औरत की वजह से मेरी जिंदगी छिन्न-भिन्न हो गयी। मैं अंदर ही अंदर टूट गया। मुझे सारी दुनिया की पेशेवर औरतों से नफरत सी हो गयी।

 
कनिका और मैं मेरा प्रमोशन का बेसब्री से इंतजार कर रहे थे और जब उस औरत ने हमारे सपनों को चकनाचूर कर दिया तो मैं टूट सा गया।" योग की आँखे यह कहते छलछला उठीं, "कनिका ने मुझे ढाढस देने की खूब कोशिश की पर मेरे जहन में जो नफरत और घृणा का ज़हर भरा था वह हट नहीं रहा था। मैं दिन रात बस यही विचारों के कारण कुढ़ता रहता था l मेरा ऐसा हाल देख कर एक शाम कनिका ने मुझे बाहर एक रोमांटिक शाम गुजारने के और रेस्टोरेंट में खाना खाने के लिए आग्रह किया। हम वहाँ ही एक अच्छे क्लब में गए। क्लब में मैंने शराब थोड़ी ज्यादा पी ली। मेरा दुर्भाग्य की मैंने क्लब में मेरे बॉस को उस औरत के साथ एक निजी कमरे से बाहर निकलते हुए देखा।

जाहिर था की मेरे बॉस, उस औरत को कमरे में चोद रहे थे, क्यूंकि वह जब बाहर आये तो उन दोनों के कपडे सही तरीके से पहने हुए नहीं थे। उनको साथ में देख कर मेरी छुपी हुई गुस्से की आग भड़क उठी। मैं अपने आप को गुस्से में रोक नहीं पाया, तो मैंने उस औरत को पकड़ा और जोर से हिलाया और उसे खूब गालीयाँ दी। मैंने मेरे बॉस को भी भला बुरा कहा। पहले तो मेरा बॉस मुझे इतना गुस्सैल देख कर हड़बड़ाया और फिर मुझे फ़ौरन नौकरी से बर्खाश्त कर दिया।"

योग के चेहरे पर गुस्सा और कूँठता का भाव था। पर अपनी बात जारी रखते हुए योग बोले, "मैंने कनिका का हाथ पकड़ा और ग़ुस्से में क्लब के बाहर निकला और कार में बैठा। कनिका ने मुझे शांत करने की बड़ी कोशिश की l मैं घर वापस जाने के लिए पहाड़ी रास्ते पर तेजीसे कार चलाने लगा। कनिका ने मुझे बार बार कार धीमी चलाने के लिए कहा। पर मुझ पर जनून सवार था। मैं उस औरत तो कोसता हुआ गुस्से में तेजी से कार चलाता था की अचानक सामने एक बड़ा ट्रक आने के कारण, मैं अपनी कार पर नियंत्रण नहीं रख पाया और मेरी कार गहरी खाई में जा गिरी। कनिका को गहरी चोटें आयीं और उसने वहीं दम तोड़ दिया। और मैं अकेला हो गया।" योग की आँखों में जैसे आंसुओं की बाढ़ उमड़ रही थी। मैं अनायास ही योग के पास पहुंची और मेरे रुमाल से उनके आंसू पोंछे, और वह भयावह एवं दुखद हादसे पर अपनी सहानुभूति जता ने के लिए उनके एकदम करीब जा बैठी।

मुझे तब समझ में आया की योग कार्यव्यस्त महिलाओं के खिलाफ इतनी नफरत और तिरस्कार की भावना क्यों रखते थे। मैंने योग का हाथ अपने हाथों में लिया और बोली, "कनिका की कमी की पूर्ति तो कोई नहीं कर सकता। परन्तु कनिका की आखरी इच्छा थी की आप खुश रहो और जो हो गया उसे भूल जाओ। तो आपको उस बात का तो सम्मान करना चाहिए l आपको अपने आप पर नियत्रण रखना होगा। आपको उस घटिया और चालु औरत को भूलना होगा और अपनी जिंदगी में आगे बढ़ना होगा। अगर मैं इस में आपकी कुछ भी मदद कर पाऊं तो वह मेरा सद्भाग्य होगा और ऐसा करने पर मुझे बड़ी ख़ुशी होगी।"

योग थोड़ी देर के लिए कनिका का फोटो देखते रहे, फिर एक गहरी साँस लेकर बोले, "मैंने आपके साथ जो सलूक किया है उसके लिए मैं आप से माफ़ी माँगता हूँ। मैं उस घटिया औरत के प्रति मेरी नफरत को भुला नहीं पा रहा था l मुझे हमेशा लगता था की मैंने मेरी प्यारी कनिका को उस धोखे बाज, घटिया राँड़ के कारण ही गँवाया था। इस के कारण मैं हर एक प्रोफेशनल औरत को उस औरत जैसा ही मानने लगा था और उनसे नफरत करने लगा था, मेरे मन में प्रोफेशनल औरतों के लिए एक पूर्वग्रह पैदा हो गया था..

आपका यह प्रोग्राम का अध्यन करने के बाद जब मैंने देखा की आपने कितना कार्यदक्ष यह प्रोग्राम डिज़ाइन किया है तो मेरी समझ में आया की महिलाएं भी इतना बढ़िया प्रोग्राम डिज़ाइन कर सकती हैं l वह एक धोखे बाज औरत के कारण मैं सारी औरत जात को धोखेबाज समझने लगा था। मेरे कड़वे और घातक शब्दों के कारण आप का ह्रदय तोड़ने के लिए मुझे आप माफ़ करना।" फिर योग सर की आँखों में आंसू झलक पड़े।

 


योग की कहानी और उनकी मेरे काम के प्रति तारीफ सुन कर मैं फूली नहीं समां रही थी, इस चक्कर में मैंने शम्पेन के 3-4 गिलास एक साथ गटक लिए! मैं अब योग बिखरे हुए घर के बारे में, उनके अकेलेपन के बारे में, उनकी पत्नी (जिसकी शक्ल मुझसे हूबहू मिलती थी) के बारे में सोचने लगी। मुझे लगा योग को इस वक्त मेरी सख्त जरुरत थी। एक स्त्री के प्रेम के बगैर भला पुरुष कैसे जी सकता है? पत्नी के बगैर अकेले रह कर उनमें करुणा और नर्माहट का भाव सुख गया था। योग के रूखेपन का कारण मुझे यही लगा। मेरे उनके करीब आते ही जैसे उनके जीवन में फिरसे प्यार और करुणा वापस लौट आयी थी।

अचानक मेरी साँसों की रफ़्तार बढ़ गयी। मेरी निप्पलेँ फूलने लगीं, मेरी चूत में से पानी रिसने लगा। मेरे जहन में एक उत्तेजक उन्मादक सिहरन फ़ैल गयी। मेरी जाँघों के बिच वही पुरानी खुजली सी पैदा होने लगी। मेरी चूत मेंअजीब सी फड़कन होनेलगी। मेरी चूत में योग के लण्ड के लिए एक ललक सी होने लगी। दो गिलास शैम्पेन ने मेरी भावनाओं को और रोमांचक बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। मैं योग के करीब गयी और उनसे लिपटकर उनकी बाहों में चली गयी और उनसे बोली, "योग डार्लिंग, मैंने थोड़ी देर पहले आपसे कहा था की मेरे काम के बारे में आपकी तारीफ़ ही मुझे मिलने वाले कोई भी तोहफे से मेरे लिए सबसे उत्तम तोहफा होगा। पर मैं गलत थी। अगर आप मेरे काम से वाकई में इतने प्रसन्न हैं तो उससे भी ऊंचा और उससे भी उत्तम एक और तोहफा है जिसके में लायक हूँ और जो मैं आपसे चाहती हूँ l मैं चाहती हूँ योग की आज रात तुम मुझसे खूब गहरा और घनिष्ट अंतरंग प्यार करो। योग तुम मुझे आज रात अपना सर्वस्व समर्पण कर दो और मेरा सर्वस्व स्वीकार करो। मैं तुम्हें अपने आपको समर्पित करना चाहती हूँ। क्या आज रात तुम मुझसे एकाकी अंतरंग प्यार करोगे? क्या आज रात तुम मुझे चोदोगे? अगर आप मुझे कोई तोहफा देना चाहते हो तो यही मेरे लिए सर्वोत्तम तोहफा होगा।"

योग मेरी बात सुनकर अचम्भे से मेरी और देखते ही रह गए। उनको मेरे शब्दों पर शायद विश्वास नहीं हो रहा था। उनको विश्वास नहीं हुआ की मैं वही औरत थी जो योग ने जब कहा की वह मुझे चोदना चाहता था तो आग बबूला हो गयी थी और उनसे नफ़रत करने लगी थी वही औरत आज सामने चल कर उनसे चुदवा ने के लिए आमंत्रित कर रही थी। योग के चेहरे पर अजीबोगरीब भाव दिखने लगे l मैंने योग का हाथ मेरे स्तनों पर रखा और कहा, "योग मैं मजाक नहीं कर रही। मैं वाकई में तुमसे तुम्हारे मोटे लण्ड से चुदना चाहती हूँ। मैं इस लिए नहीं कह रही हूँ की तुमने मेरे प्रोग्राम को स्वीकार किया है और मुझे पूरी सहायता करने का वादा किया है, पर इस लिए की मैं तुमसे चुदवाना चाहती हूँ। मैं हमेशा तुमसे चुदवाना चाहती थी। जब हम लिफ्ट में फँस गए थे तब मैं चाहती थी की तुम मुझे वहीँ चोद देते। पर वह हो नहीं पाया। बाद में मैं ग़लतफ़हमी के कारण तुम्हारे करीब आ नहीं पायी, और मेरी दिल की बात तुम्हें कह नहीं पायी l

जब तुमने मुझे चोदने के लिए उस कैफे में कहा था तो तुम्हें पता नहीं था की मैं तुमसे चुदवाने के लिए कितनी तड़पी थी। पर वही ग़लतफ़हमी के कारण मैंने तुम्हें दुत्कार दिया था। अब मैं अपनी गलती सुधारना चाहती हूँ।" योग ने मेरी और प्यार और कुछ लोलुपता भरी नजर से देखा। मैं उनकी नजर देख कर शर्मा गयी। उन्होंने वही प्यार भरी नजर से मुझे देखा जो पहली बार मिलने पर देखा था। उनको मुझमें अपनी पत्नी नजर आ रही थी। मुझे इससे कोई शिकायत नहीं थी। मैं उस रात उनकी पत्नी ही बनना चाहती थी। मैं उनको उस रात एक पत्नी का सुख देना चाहती थी। मेरे घुटनों और पीठ के निचे अपने बाजू रखकर योग ने आगे बढ़कर मुझे बड़ी आसानी से ऊपर उठा लिया। उनकी उंगलियां मेरे स्तनों को छू रहीं थीं।

 
वह मुझे उठा कर अपने शयन कक्ष में ले आये और मुझे बड़े प्यारसे बिस्तरे पर हलकेसे लिटाया। जैसे ही योग ने मुझे अपनी बाँहों में ऊपर उठाया की मैंने योग के होठोँ पर अपने होंठ रख दिए। उनके सर को मेरे दोनों हाथों में पकड़ कर मैंने उनके मुंह को मेरे मुंह से जोड़ दिया। मेरे ऐसे आवेग पूर्ण वर्ताव से योग थोड़े से सकते में आ गये की अचानक मुझे यह क्या हुआ? पर फिर उन्होंने भी मेरे होंठों से अपने होँठ भींच दिए और हम दोनों प्रगाढ़ चुम्बन में जुड़ गए। योग इतने उत्तेजित होगये थे और मेरे होँठों से अपने होँठ इतनी सख्ती से भींच दिए और हम इतनी देर तक एक दूसरे से होँठ से होँठ मिलाकर चिपके रहे की मेरे लिए साँस लेना भी मुश्किल हो रहा था। योग मेरे मुंह में अपनी जीभ डाल कर उसे अंदर बाहर कर रहा था। मैं उनकी जीभ को चूस कर उसका स्वाद ले रही थी। उनके मुंहकी लार मेरे मुंह में आरही थी और मुझे बड़ी सुहानी लग रहीथी। मुझे ऐसे महसूस हो रहा था जैसे योग मुझे जीभ से ही चोद रहे हों और उनकी लार जैसे उनके लण्ड से रिस रहा पूर्व स्राव हो। जब मेरी साँस रुकने लगी तो हम अलग हुए। मैं ताजा हवा में साँस में लेने की कोशिश कर रही थी तो बोले, "श्रीमती जी, आपका तोहफा तैयार है। "

योग निचे झुके और मेरे गाल पर, मेरी गर्दन पर और मेरी छाती पर गिरी शैम्पेन को वह चाटने लगे। उनका एक हाथ मेरी त्वचा और मेरे ब्लाउज और ब्रा के बिच में से उन्होंने घुसाया और मेरे स्तनोँ को अपनी उँगलियों के बिच दबाने लगे। उनके हाथ में मेरी फूली हुई निप्पलेँ आयी और वह उन्हें चींटा भरने और दबाने लगे। मेरी इतनी फूली हुई निप्पलेँ महसूस कर वह हैरान रह गए और बोले, "बापरे! तुम्हारी निप्पलेँ तो देखो! कितनी फूली हुई हैं? तुमतो एकदम गरम हो रही हो!" मैंने उनकी और देखा और हँस कर कहा, "योग, तुम तो मुझे अपना तोहफा देने में बिलकुल समय गँवाना नहीं चाहते हो।" योग ने कहा, "मुझे मेरी माँ ने एक बड़ी अच्छी सलाह दी थी की बेटा अच्छे काम करने में देर नहीं करनी चाहिए।" योग ने मेरे ब्लाउज के ऊपर के बटनों को खोलने के लिए फंफोशना शुरू किया। और आखिर में एक के बाद एक ऊपर के बटन खोल ही डाले। मैंने अपना ब्लाउज पूरा खोल दिया और बाहर निकाल फेंका। योग ने तुरंत पीछे हाथ डाल कर मेरी ब्रा की पट्टियां खोल डाली। मैंने योग को अपने पास खींचा और मेरा हाथ उसके पाजामे में हाथ दाल कर उसका लण्ड मेरे हाथ में पकड़ा। बापरे! योग का लण्ड जो मैंने सपने में देखा था उससे कम नहीं था। योग की उत्तेजना और कामुकता का अंदाजा उसके लण्ड की सख्ताई और लम्बाई से साफ़ साफ़ लगाया जा सकता था।

मेरे कंपनी ज्वाइन करने के बाद योग ने किसी भी औरत को नहीं चोदा था यह बात मैं जान चुकी थी। इसका मतलब यह हुआ की योग ने करीब करीब छह महीने से किसी भी औरत को नहीं चोदा था। यह योग की उत्तेजना से साफ़ दिख रहा था। योग के लण्ड पर उसका पूर्व स्राव पूरी तरह फैला हुआ था। मेरे हाथ लगते ही योग के बदन काँप उठा। मेरी हथेली योग के पूर्व स्राव की चिकनाहट से भर गयी। मुझे बरबस ही अजित के लण्ड के आसपास फैली चिकनाहट की याद आयी। उस बेचारे ने भी तो कोई भी औरत को करीब छः महीने से नहीं चोदा था।

योग का लण्ड मेरे पति के लण्ड से कहीं ज्यादा लम्बा और मोटा था। मेरे पति का लण्ड भी कोई छोटा नहीं था, पर योग के लण्ड के मुकाबले कुछ नहीं था। लिफ्ट में मैंने योग के लंड को महसूस जरूर किया था और उसकी साइज का मुझे भली भांति अंदाज भी हो गया था। पर उस रात मैंने पहेली बार योग के नंगे लण्ड को स्पर्श किया था। उसका इतना मोटा लण्ड पूरी तरह मेरी छोटी सी मुट्ठी में लेना तो संभव नहीं था पर फिर भी मैंने उनके लण्ड की ऊपरी सतह वाली त्वचा को मेरी उँगलियों का घेरा बनाके मुट्ठी में पकड़ा और धीरे धीरे प्यार से उसको उनके लण्ड के डण्डे की लम्बाई पर आगे पीछे करने लगी। मैं योग को बड़े ही प्यार भरी नज़रों से देख रही थी। उनका कई महीनों का या यूँ कहिये की सालों का सपना शायद साकार हो रहा था।

वह आँखें मूँदे इस अनुभव का आनंद ले रहे थे। कभी वह अपनी पत्नी कनिका के हाथ के स्पर्श का ऐसा अनुभव लेते थे। उन्होंने शायद सोचा भी नहीं होगा की एक दूसरी औरत जिसकी शकल कनिका से हूबहू मिलती थी वह भी कभी उनके लण्ड को इस तरह सहलाएगी और उनसे चुदने के लिए तैयार होगी। लण्ड का सहलाना मर्दों का वीक स्पॉट होता है यह सब औरतें जानती है। उसको ऐसे हिलाते ही कई ढीले ढाले मर्द तो औरत की मुठी में ही अपना माल छोड़ देते हैं। मेरे लण्ड सहलाते ही योग का पूरा बदन सिहर उठा। उनका लण्ड फुल कर और बड़ा हो गया। उनकी उत्तेजना का अनुभव मैंने मेरे स्तनोँ को जोरसे दबाने के कारण भली भाँती महसूस किया।

 
Back
Top