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मेरी खुली चुनौती मेरे पति को

योग का लण्ड मेरे पति के लण्ड से कहीं ज्यादा लम्बा और मोटा था। मेरे पति का लण्ड भी कोई छोटा नहीं था, पर योग के लण्ड के मुकाबले कुछ नहीं था। लिफ्ट में मैंने योग के लंड को महसूस जरूर किया था और उसकी साइज का मुझे भली भांति अंदाज भी हो गया था। पर उस रात मैंने पहेली बार योग के नंगे लण्ड को स्पर्श किया था। उसका इतना मोटा लण्ड पूरी तरह मेरी छोटी सी मुट्ठी में लेना तो संभव नहीं था पर फिर भी मैंने उनके लण्ड की ऊपरी सतह वाली त्वचा को मेरी उँगलियों का घेरा बनाके मुट्ठी में पकड़ा और धीरे धीरे प्यार से उसको उनके लण्ड के डण्डे की लम्बाई पर आगे पीछे करने लगी। मैं योग को बड़े ही प्यार भरी नज़रों से देख रही थी। उनका कई महीनों का या यूँ कहिये की सालों का सपना शायद साकार हो रहा था। वह आँखें मूँदे इस अनुभव का आनंद ले रहे थे। कभी वह अपनी पत्नी कनिका के हाथ के स्पर्श का ऐसा अनुभव लेते थे। उन्होंने शायद सोचा भी नहीं होगा की एक दूसरी औरत जिसकी शकल कनिका से हूबहू मिलती थी वह भी कभी उनके लण्ड को इस तरह सहलाएगी और उनसे चुदने के लिए तैयार होगी। लण्ड का सहलाना मर्दों का वीक स्पॉट होता है यह सब औरतें जानती है। उसको ऐसे हिलाते ही कई ढीले ढाले मर्द तो औरत की मुठी में ही अपना माल छोड़ देते हैं। मेरे लण्ड सहलाते ही योग का पूरा बदन सिहर उठा। उनका लण्ड फुल कर और बड़ा हो गया। उनकी उत्तेजना का अनुभव मैंने मेरे स्तनोँ को जोरसे दबाने के कारण भली भाँती महसूस किया।

उन्होंने झुक कर मेरी दोनों चूँचियों को बारी बारी चूसना शुरू किया। उनको मेरी फूली हुई निप्पलेँ बड़ी भायीं ऐसा मुझे लगा क्यों की वह बारी बारी उनको चूमते और काटते थे। ऐसा काफी देर करते रहने के बाद उन्होंने सर उठाया और मेरी और देखकर बोले, "प्रिया, जानूँ इनको चूसकर तो मजा आ गया। तुम्हारे स्तन कमाल के स्वादु हैं।" मैंने उनकी और देखकर कहा, "लगता है अभी भी तुम अपना शिशुपन भूले नहीं हो।" "अगर इतनी मस्त स्तनोँ और निप्पलोँ वाली माँ अपना दूध पिलाने वाली हो तो भला कौन शिशु बनना नहीं चाहेगा?" योग ने मुस्कराते हुए मेरे स्तनोँ को चूसते हुए जवाब दिया। योग ने अपनी मुट्ठी में मेरे एक स्तन को इतने जोर से दबाया की मेरी चीख निकल गयी। उन्होंने एक उंगली मेरी एक निप्पल पर फिराते हुए कहा, "प्रिया डार्लिंग, तुम्हारे स्तन जैसे स्तन मैंने आज तक नहीं देखे। भगवान ने तुहारे स्तनोँ को सुंदरता का नमूना के जैसे बनाया है। " "और आपके लण्ड के जितना बड़ा लण्ड मैंने कभी ना देखा है और ना ही हाथों में पकड़ा है।" मैंने जवाब में योग से कहा। अचानक मैं यह सोच कर उलझन में पड़ गयी और शर्मा गयी की यह मैंने क्या बोल दिया? अगर योग ने पूछ लिया की मैंने कितने लण्ड पकडे हैं तो मैं क्या जवाब दूंगी? पर योग ने जवाब दिया, "जानूँ, यह लण्ड अब आज से तुम्हारा है।" योग यह कह कर खड़े हुए और उन्होंने अपना पजामा निचे खिसका कर कोने में फेंक दिया। उनका लंबा, मोटा, लोहे के छड़ के सामान कड़क लण्ड मेरी नज़रों के सामने तन कर खड़ा उद्दंड, ऊपर की तरह अपनी नोक उठा कर इधर उधर ऐसे झूल रहा था जैसे गुरुत्वा-कर्षण का नियम उस पर लागू नहीं होता हो। मैंने योग का लण्ड फिर मेरी हथेली में पकड़ा और उसे बड़े प्यार से थोड़ा और फुर्ती से सहलाने लगी। मैंने योग की और देखा तो योग मुस्कराये और मेरे बालों में अपनी उंगलियां डाल कर उनसे खेलने लगे।

मैंने उनसे कहा, "जानूँ जानते हो जब आपने मुझे सपने में से जगाया तो मैं 'धीरे करो धीरे करो' क्यूँ बड़बड़ा रही थी?" योग ने मेरी और प्रश्नात्मक नजर से देखा। मैं शर्मा कर मुस्कुरायी और बोली, "मैं सपना देख रही थी की तुम मुझे बड़े जोर से और दबंगाई से चोद रहे थे और यह तुम्हारा मोटा और लंबा लण्ड मेरी छोटी सी चूत पर कहर ढा रहा था। मैं तुम्हें मेरी यह नाजुक चूत को तुम्हारा यह घोड़े के जैसा लण्ड फाड़ ना दे इस लिए धीरे धीरे चोदने के लिए कह रही थी। " योग ने फिर वही मीठी मुस्कान देकर बोले, "अच्छा मैडम! तो आप यहां मेरे घर में मुझे चोदने और मुझसे चुदवाने के इरादे से ही आयी थीं?" मैंने योग की कमर पकड़ी और बोली, "योग जानूँ, तुम सवाल बहुत ज्यादा पूछते हो। क्या तुम्हारी माँ ने कम बोलो और काम ज्यादा करो उसकी सिख नहीं दी थी?" मैंने योग का कुर्ता उसकी छाती के ऊपर से निकालना चाहा। तो योग ने तुरंत ही अपनी बाहें ऊपर करके निकाल फेंका। मैं योग की निप्पलोँ को चाटना और उसके छाती पर फैले घने बालों को चूमना चाहती थी।

योग मुझे अपने और करीब खिंच कर बोले, "मेरी माँ की सिख मैं कैसे अमल करता हूँ यह देखना चाहोगी?" कुर्ता निकालने पर योग अब पूरी तरह नंगे हो चुके थे। उनकी पतली सुगठित कमर और उसके निचे का ढलाव जो उनके पाँवों के बिच उनके लण्ड की और जाता था वह इतना लुभावना और सेक्सी लग रहा था की मैं अपने आप को रोक नहीं पायी और उन के शेव कर के साफ़ किये हुए टीले पर मैंने अपने होँठ रखे और चुम लिया। फिर मैंने मेरा सर ऊपर की और उठाया और मैं योग के सीने पर उनकी दो निप्पलोँ को चूमने और काटने लगी। मेरा हाथ अपने आप ही सरक कर उनकी जाँघों के बिच चला गया और मैं उनके लण्ड के ऊपर के हिस्से का मुआइना करने लगी। उनका कसा हुआ बदन, उनकी सख्त जाँघें, उनकी कड़क गाँड़ और कसरत करने से सख्त हुए उनके स्नायु मेरे शरीर को अजीब सी सिहरन दे रहे थे।

 
मैंने कहा, "हाँ, माँ की दी हुई सिख तुम कैसे अमल में ला रहे हो यह साफ़ दिखता है।" उस रात को तो यह बदन सिर्फ मेरा ही था, यह सोच कर मैं रोमाँच अनुभव कर रही थी। मैं उस रात सिर्फ उनकी बनकर रहना चाहती थी और चाहती थी की उस रात के लिए वह सिर्फ मेरे हों। मैं उनका पूरा बदन का स्पर्श उपरसे और अंदर से अनुभव करना चाहती थी। मैं उस रात के लिए उनका चोदने का खिलौना बनना चाहती थी। मैंने उनकी और देखा तो पाया की वह भी मुझे टकटकी लगा कर देख रहे थे। ख़ास तौर पर उनकी नजर मेरे पतलून पर थी। वह थोड़ा झुके और मेरी पतलून की रबर वाली खींचने वाली बेल्ट को नीचे खिसकाने लगे। योग के हाथ मेरी पतलून पर चले गए और अगले ही पल वो उसे निचे की तरफ खिसकाने लगे l मैंने झुक कर अपने हाथ एवं पॉंव से मेरी पतलून को निकाल दिया। अब सिर्फ पैंटी में खड़े हुए मैं कुछ शर्म के मारे अजीब सा महसूस कर रही थी। योग ने मुझे ऊपर से निचे तक देख कर कहा, "जानूं आपने तो कुछ नहीं देखा। देख तो मैं रहा हूँ। यह नजारा कोई मनमोहक सपने से कम नहीं है।" मैंने देखा की योग की नजर मेरी जाँघों के बिच में बने हुए त्रिकोणाकार के बिच में मेरी साफ़ सुथरी चिकनी चूत पर मंडरा रही थी। योग ने अपना हाथ मेरी चूत के टीले के ऊपर फिराना शुरू किया। उन्होंने महसूस किया की मैं मेरी चूत को पहले से ही शेव करके एकदम साफ़ कर के आयी थी। तो उन्होंने फिर कहा, "देखो, मेरी रानी तो अपनी चूत भी साफ़ करके आयी है। इसका मतलब यह हुआ की तुम तो पहले से ही मेरा रेप करने का प्रोग्राम बनाके आयी हो।" मैं योग की बात सुनकर हँस पड़ी और बोली, "मैं जानती थी तुम मेरे चंगुल से छटक कर कहीं नहीं जा सकते।"

योग ने मेरी चूत में दो उंगलियां डालनी चाहि तो मैं उत्तेजना के मारे काँप उठी। मेरी चूत में से तो जैसे फव्वारा सा निकला जा रहा था। योग की उंगलियां पूरी गीली होगयीं। मेरे देखते ही देखते योग ने अपनी उँगलियाँ अपने मुंह में डाली और मेरा रस चाट गया। फिर योग झुक कर मेरी टाँगों के बीचमें आगये और उनको फैला ना चाहा। मैं शर्म के मारे पानी पानी हो रही थी। मैंने मेरी जांघें फिर सेसमेट लीं, तो योग ने मेरी और देखा और मुस्करा कर बोले, "जानूं, अब क्या लाज और शरम? छोडो यह सब। अब जब तुम्हें चुदना ही है तो शर्माना क्या? अब मैं तुम्हें चोदूंगा और मेरी जान शरमा ने से काम नहीं चलेगा।" उन्होंने फिर मेरी टांगें फैलाई। मैंने इस बार कोई विरोध नहीं किया। वह मेरे प्रेम छिद्र की जांच करने में जुट गए। मैं उनका इरादा समझ गयी। वह देखना चाहते थे की क्या उनका बड़े घोड़े जैसा लण्ड मैं ले पाउंगी या नहीं। योग ने मुझे अपनी बाँहों में लेकर पीछे से मेरी गाँड़ के गालोँ को महसूस करने लगे। थोड़ी देर उन्हें सहलाने के बाद वह बोले, "वाह! क्या कमाल की तुम्हारी गाँड़ है। कितनी चिकनी, कितनी कोमल और फिर भी कितनी करारी। मैं इन्हें चूमना चाहता हूँ। मैंने फ़ौरन जवाब दिया, "लो भाई, नेकी और पूछ पूछ! मैं आपकी हूँ, मेरा पूरा बदन आपका है और मेरा सब कुछ आपका है। योग ने मुझे घुमा दिया। मैं अपना मुंह पलंग की और कर मेरी गाँड़ छत की और कर के सो गयी। टेड ने झुक कर मेरी गाँड़ पर अपने होँठ रखे और वह मेरी गाँड़ के गालोँ को चूमने लगे।

 
नहीं। योग ने मुझे अपनी बाँहों में लेकर पीछे से मेरी गाँड़ के गालोँ को महसूस करने लगे। थोड़ी देर उन्हें सहलाने के बाद वह बोले, "वाह! क्या कमाल की तुम्हारी गाँड़ है। कितनी चिकनी, कितनी कोमल और फिर भी कितनी करारी। मैं इन्हें चूमना चाहता हूँ। मैंने फ़ौरन जवाब दिया, "लो भाई, नेकी और पूछ पूछ! मैं आपकी हूँ, मेरा पूरा बदन आपका है और मेरा सब कुछ आपका है। योग ने मुझे घुमा दिया। मैं अपना मुंह पलंग की और कर मेरी गाँड़ छत की और कर के सो गयी। टेड ने झुक कर मेरी गाँड़ पर अपने होँठ रखे और वह मेरी गाँड़ के गालोँ को चूमने लगे।

उन्होंने मेरी गाँड़ पर करीब दो या तीन मिनिट तक अपने होँठ चिपका कर रखे और मेरी गाँड़ को चूमते ही रहे। बिच बिच में वह अपने मुंह की लार भी मेरी गाँड़ पर फैलाते रहे। वह मेरी गाँड़ को सहलाते रहे और धीरे से उन्होंने अपनी दो उँगलियाँ फिर से मेरी चूत में डाली। मेरी गाँड़ के बिच की दरार में जब वह उंगलिया डालते, तो मैं चौंक उठती। मैं डर जाती की कहीं योग मेरी गाँड़ मारने का प्लान तो नहीं बना रहे? मेरा चौंकना योग को अनोखी उत्तेजना देता था। शायद इस लिए वह थोड़ी थोड़ी देर के बाद मेरी गाँड़ की दरार में उंगली डाल देते। मैं धीरे धीरे समझ गयी की योग मुझे छेड़ना चाहते थे। उन्हें भी शायद गाँड़ मारना पसंद नहीं था। योग जब भी मेरे नंगे बदन की और देखते थे तब उनकी आँखों में मैंने एक भाव देखा। जैसे चकोर चन्द्रमा को एकटक देखता रहता है वैसे ही मेरे नंगे बदन को योग देखते रहते थे। यही बात तो वह लड़की ने मुझे कही थी। उसने कहा था की योग मुझे चकोर जैसे चाँद को देखता है अथवा जब वह नहीं होता तो उसका इन्तेजार करता है ऐसे ही देखते रहते या फिर मेरा इन्तेजार करते थे। मैं चाहती थी की कब वह वक्त आये की योग मेरी प्यासी चूत में अपना मोटा लण्ड पेलना शुरू करें पर योग थे की मेरे नंगे बदन को देख कर उन का दिल ही नहीं भर रहा था।

मेरी गाँड़ से अच्छी तरह से खेलने के बाद उन्होंने मुझे पलटा और मुझे मेरी गाँड़ और पीठ पर बिस्तर पर लिटा दिया। अब वह मेरे बालों से लेकर मेरी जाँघों के बिच खिला हुआ मेरी चूत का त्रिकोणाकार देखने लगे। पहले उन्होंने मेरी आँखें चुमी। काफी देर तक वह मेरी आँखें और मेरी गर्दन को चूमते रहे। फिर उन्होंने मेरे पके हुए फल के सम्मान दो स्तन गुम्बजोँ को देखा। थोड़ी देर देखते ही रहे। मैंने उनकी चकोर जैसी आँखों का राज जानना चाहती थी। मुझ से पूछे बिना रहा ना गया। मैंने योग से पूछा, "योग मेरे सवाल का सच्चा जवाब दोगे?" योग ने मेरी और अचरज से देखा और हाँ कहा तो मैंने पूछा, "यह तुम मुझे ऐसे एकटक क्यों देख रहे हो?" योग ने बिना झिझके जवाब दिया, "तुमने मुझे सच बोलन के लिए कहा है। तो मैं बताता हूँ की तुम ऐसे लेटी हुई बिलकुल हूबहू मेरी बीबी कनिका ही लग रही हो। मुझे माफ़ करना पर उसकी याद मेरे जहन से जा नहीं रही।"

मैंने कहा, "भला इतनी प्यारी बीबी की याद आपके जहन से क्यूँ जानी चाहिए? कोई जरुरत नहीं उसे भूलने की। मैं तुम्हारी कनिका ही हूँ। मुझे तुम अपनी कनिका समझ कर ही प्यार करो। मुझे अपनी कनिका ही समझ कर तुम मुझे पूरी तरह से मन भरने तक चोदो। मैं कनिका को भुलाने नहीं मैं तुम्हारी कनिका बनकर आयी हूँ।" योग मेरी बात सुनकर बहुत प्रसन्न हुए। झुक कर उन्होंने मेरी दोनों निप्पलोँ को चूमा। अपने होँठ थोड़े और दबाकर वह मेरे स्तनोँ को देर तक प्यार से चुम्बन करते रहे। योग ने फिर मेरे स्तनोँ को चूसना शुरू किया। और चूसना भी कैसा? उन्होंने मेरे स्तनोँ को इतने जोश से चूसा की मेरे स्तन जैसे उनको मुंह में ही चले गए। जैसे वह मेरे स्तन को निगल ही गए हों! उनके इतनी ताकत से मेरे स्तनोँ को चूमने के कारण मेरे स्तन भी लाल हो गये।

उनकी नजर मेरी कमर से हट ही नहीं रही थी। वह मेरी ढूंटी (नाभि) में अपनी जीभ डाल कर चाटते रहे। मैंने योग से पूछा, "कनिका आपसे कैसे चुदवाती थी?" योग ने जवाब दिया, "कनिका बाहर से एकदम शालीन लगती थी। पर बैडरूम में कपडे निकालने के बाद वह आग का गोला थी। मेरा मोटा लण्ड उसे बहुत पसंद था। वह कई बार कहती थी की उसे मुझसे चुदवाने में जो दर्द होता है, उससे कहीं ज्यादा उसे अद्भुत आनंद मिलता है। वह मेरे लण्ड को बहुत प्यार करती थी और सख्त चुदाई के बाद वह थक जाती थी तो भी मेरे लण्ड को अपने हाथों में ही पकड़ कर सो जाती थी और जैसे ही वह करवट बदल कर मेरे सामने आती तो भरी नींद में भी वह मेरा लंड पकड़ लेती और फिर खर्राटे मारती हुई लेट जाती थी।" योग ने आगे कहा, "वह चुदवाने से पहले फोरप्ले में बहुत उत्तेजित हो जाती थी। उसे अपनी चूत चुसवाना बहुत पसंद था। क्या तुम्हें भी पसंद है?" मैंने कहा, "भला, किस औरत को अपने पसंदीदा मर्द से अपनी चूत चुसवाना पसंद ना होगा?" योग ने सुनते ही मुझे खींचा और पलंग की किनारी पर ले आये। वह खुद फर्श पर बैठ गए और मुझे अपने पॉंव निचे लटकाने को कहा। फिर उन्होंने मेरे पाँव फैलाये और खुद बिच में जा बैठे। मेरी चूत उनके मुंह के बिलकुल सामने थी। उन्होंने मुझे लेटने को कहा और अपनी जीभ से मेरी चूत के होँठों को चाटने और सहलाने लगे। अपनी जीभ से वह मेरी चूत के एक होँठ को खींचते, चाटते और फिर छोड़ देते। उनको पता था की कहाँ जोभ फिराने से औरतें ज्यादा उत्तेजित हो जाती हैं।

 
योग के मेरी चूत में जीभ फिराने से मैं अपना आपा खो बैठी थी। कई महीने हो गए की किसी मर्द ने मेरी चूत चाटी थी। मेरे पति को फोरप्ले में कोई रस नहीं था। वह ऑफिस से थक कर आते थे और मुझे जल्द बाजी में चोद कर फ़ौरन सो जाते थे। योग ने अपना मुंह मेरी जाँघों के बिच से निकाला और अपनी दो उँगलियाँ मेरी चूत में डालदी। इससे पहले भी वह मेरी चूत में उँगलियाँ डाल चुके थे पर उस समय उन्हें मेरा स्त्री रस चाटना था। अब वह मुझे उँगलियों से चोदना चाहते थे। मैं वैसे ही उनकी जीभ के मेरी चूत के साथ छेड़खानी करने के कारण बड़ी गरम होरही थी। योग को कैसे पता लगा की मैं चूत में उंगलिया डालकर उँगलियों से चोदने पर पागल हो जाती हूँ। शायद हर औरत की यह कमजोरी होगी। जैसे ही योग ने मुझे उँगलियों से चोदना शुरू किया की मुझसे रहा नहीं गया। योग मेरी सारी कमजोर जगहों को जैसे भली भाँती जानते हों ऐसे वहीं पर अपनी उंगली रगड़ते थे जहाँ छूने से ही मैं मचल उठती थी।

जैसे जैसे योग अपनी उँगलियाँ अंदर बाहर करते रहे, मैं बिस्तर पार आह्ह.. ओह्ह्ह... कर अपनी गाँड़ उठा कर बिस्तर पर रगड़ती रही। योग ने अपनी उँगलियों से चोदने की फुर्ती बढ़ाई की मेरी गाँड़ रगड़ने की रफ़्तार भी बढ़ने लगी। साथ साथ चूत में फड़फड़ाहट भी बढ़ने लगी। मेरी चूत का रस का स्राव नहीं रुक रहा था। मैं उन्माद से पागल हो रही थी। मैं झड़ ने वाली ही थी। मैं अपनी कराहट रोक नहीं पायी। मैंने योग का सर पकड़ा और बोल पड़ी, "योग आआआ.... हहह.... मत रुको, मैं झड़ने वाली हूँ। ओह्ह्ह..." थोड़ी ही देर में ही मेरी कमर बिस्तर पर ही उठाकर मैं ने एक बड़ी आहहह... भरी और मैं इतनी जोर से झड़ गयी की पता नहीं ऐसा कभी हु था या नहीं। जैसे ही मैं झाड़ रही थी की योग ने उँगलियों से मुझे चोदना बंद किया और मुझसे लिपट गए और मेरे होँठों से होँठ मिलकर मुझे गढ़ आलिंगन में लेकर मुझे चूमने लगे। चूमते चूमते भावुक होकर बोलने लगे, "मेरी प्यारी कनिका। मैं तुम्हें बहुत प्यार करता हूँ। तुम मुझे छोड़कर क्यों चली गयी?"

मैंने भी उतने ही आवेश से योग को चुम्बन करते हुए कहा, "डार्लिंग मैं वापस आ गयी हूँ ना? क्या अब तुम मेरे वापस आने से खुश नहीं हो?" योग ने कहा, "मैं तुम्हारे आने से बहुत खुश हूँ।" योग मुझे साँस भर राहत देने के लिए रुके। पर मैं रुकना नहीं चाहती थी। मैं योग से रात भर चुदना चाहती थी क्यूंकि अगला दिन इतवार था। मुझे ऑफिस नहीं जाना था। घर में मेरा इंतजार करने वाला कोई नहीं था। मैंने योग को कहा, "अब बहुत हो गया। मैं तुम्हारे इस घोड़े जैसे लण्ड को मेरी छोटी सी चूत में डलवाना चाहती हूँ। मेरी छोटी सी चूत को आज तुम अपने मोटे लंड से चौड़ी बना दो। हालांकि मैं जानती हूँ की मुझे कष्ट होगा पर जानूं तुम्हारी कनिका कष्ट झेलने के लिए तैयार है।" मैंने योग को खींच मेरे ऊपर चढ़ने के लिए खींचा। मैं बिस्तर पर निचे लेट गयी और योग को मेरे ऊपर चढ़ाया। उसका मोटा लण्ड मेरे पेट को चोंच मार रहा था। मैंने उसका मुंह मेरे हाथ में पकड़ा और अपने होंठ योग के होँठों से मिला दिए l योग की दाढ़ी मुझे मेरे गालों पर चुभ रही थी पर मुझे अच्छी लग रही थी। मैं योग के होँठों पर अपनी जीभ फिराने लगी। योग के होँठ बड़े रसीले लगते थे। उसके मुंह की लार मेरे मुंह में जा रही थी। मैं तो योग के लण्ड से उसका वीर्य मेरी चूत में डलवाने के लिए तैयार थी तो भला उसके मुंह की लार से क्या दिक्कत?

 
मैंने योग के मुंह से निकली लार चाटी। इसे देख योग मुस्कुराये। मैंने योग से कहा, "जनाब आपका शिकार आपके लण्ड का इंतजार कर रहा है। अब इंतजार किस बात का?" योग ने कहा, "तुम मेरा शिकार नहीं, मेरे लिए वरदान हो। तुमने आज मुझे एक कड़वाहट भरे इंसान से अच्छा इंसान बनाया है। मैं तुम्हारा शुक्रिया कैसे अदा करूँ?" मैंने कहा, "जनाब, अब तुम मुझसे अच्छे शब्द प्रयोग ना करें l मेरे सपने में तुम ने मुझे बहोत गंदे गंदे शब्द कहे थे। मुझे राँड़ कहा था, वेश्या कहा था, मेरी चूत को भोसड़ा कहा था। मुझे थप्पड़ भी मारा था। वह तुम्हारा रूप डरावना था l पर अब मैं तुमसे डरने वाली नहीं हूँ। मैं जानती हूँ की तुम मुझसे बहुत प्रेम करते हो। जो व्यक्ति बहुत प्रेम करता हो तो उसकी गालियां भी अच्छी लगती हैं l मैं आक्रामक चुदाई करवाना चाहती हूँ। तो तुम मुझे ऐसे चोदिये जैसे तुमने कभी संजना को चोदा था या फिर उससे भी ज्यादा आक्रामक तरीके से चोदो। मुझे आपने जैसे सपने में कहा था कहिये। आज मैं आपकी रखैल बनना चाहती हूँ। मुझे बेशक गन्दी गालियां दो, कुछ भी कहो, मुझे अच्छा लगेगा। " योग ने मेरे गाल पर अपने होँठ रखे और मुझे अपने दांतों से जोर से काटा। मेरी चीख निकल गयी। फिर वह बोले, "तुम मेरी प्यारी कनिका हो या प्रिया हो। मैं तुम पर कभी हाथ नहीं उठा सकता। पर मेरी कनिका भी जब बहुत चुदवाने के मूड में होती थी तो वह भी मुझे गंदे गंदे शब्द बोलने को कहती थी। जब मैं उसे छिनाल, राँड़ ऐसे कहता था तो वह मुझसे लिपट जाती थी और कहती थी, "मैं छिनाल या राँड़ ही सही, पर मैं तुम्हारी हूँ।" फिर मुझे ही गालियां निकालती थी और कहती थी। "इतना मोटा लण्ड लेकर घूमते हो पर इस लण्ड को अगर मेरी चूत में डाला नहीं तो फिर किस काम का? साले डालो इसे जल्दी और तुम्हारी राँड़ की भूख शांत करो।"

मैंने योग के होँठ फिर से जोश से चूमे और मेरे होँठों को उसके होँठों पर रख कर के ही बोली, "साले सपने में तो तू इतनी बहादुरी दिखा कर बड़ा शूरवीर बनता था। अब तुझे क्या हो गया है? क्या तेरा यह लण्ड ढीला पड़ गया?" योग मेरे मन की इच्छा समझ गए और बोले, "राँड़ मेरे लौड़े की ताकत तुझे देखनी है? तो मैं तुझे अभी दिखाता हूँ। जब मैं तुझे चोदुँगा तब अगर तूने चिल्ला चिल्ला कर मुझे रुकने के लिए ना ना कहा तो मैं कभी किसी औरत की चूत में यह लण्ड नहीं डालूंगा।" योगराज की बात सुनकर मैं डर गयी। मैंने धीरे से सहमे से कहा, "योग नहीं यार ऐसा मत करना। मैं तो गन्दी गन्दी बातें उकसाने के लिए कह रही थी। तुमने तो इसे सीरियसली ले लिया।" योग हँस पड़े और बोले, "तो मैं कौन सा सीरियसली कह रहा था? मैं मेरी प्यारी प्रिया को रुलाऊंगा क्या? और फिर तुम्हें मुझे उकसाने की कोई जरुरत है क्या? इसे देखो यह तो कभी का तुम्हारी चूत को चोद ने के लिए फनफना रहा है।" योग ने अपने खड़े मोटे ऊपर की तरफ मुंह किये हुए लम्बे छड़ सामान लण्ड की और इशारा करते हुए कहा। मुझे यह सुनकर अच्छा लगा की योग धीरे धीरे मुझे कनिका से अलग प्रिया मानने के लिए तैयार हो रहे थे। योग ने बड़े प्यार से मेरी टाँगों को उठाकर अपने कंधे पर रख दिया। फिर वह थोड़ा झुक कर मेरी चूत को गौर से देखकर बोले, "जानू तुम्हारी चूत का द्वार वाकई में छोटा है। मेरा लौड़ा डालने से तुम्हें जरूर कष्ट होगा। पर धीरे धीरे कष्ट कम होगा और बादमें हम खूब एन्जॉय करेंगे। मैं मेरी प्रिया की चूत का ध्यान रखूंगा. ओके?"

 
मैंने आँखें मुंद कर हामी भरी और योग का लण्ड हाथ में पकड़ा और उसे मेरी चूत के छिद्र की नोक पर रखा।

तब अचानक योग बोल उठे, "जानूं, क्या मैं कंडोम पहनलूँ?" मैं नहीं चाहती थी की उस रात मेरी और योगके बिच कोई प्लास्टिक आये। मैंने कहा, "योग डार्लिंग, आज की रात मैं अपनी चूत और तुम्हारे लण्ड के बिच कोई भी अवरोध आने देना नहीं चाहती। वैसे तो यह पीरियड गर्भ धारण के अनुकूल नहीं है फिर भी यदि तुम्हारे वीर्य से मुझे गर्भ हुआ तो मैं उसे अपना सौभाग्य समझूंगी और मैं मेरे पति को बता दूंगी की मैंने तुमसे चुदवा कर यह गर्भ धारण किया है l मैं अपने पति से कई सालों से चुद रही हूँ और पिछले कुछ सालों से तो हमने कोई सुरक्षा नहीं अपनायी। पर कोई गर्भ धारण नहीं हुआ। वह मुझे माँ नहीं बना पाए। अब तुमसे अगर मुझे कोई बच्चा हुआ तो मैं उसे बड़ा करुँगी और उसे योग कुमार या योग कुमारी का नाम दूंगी। मेरे पति को अगर कोई शिकायत हो तो मैं उससे तलाक लेने के लिए तैयार हूँ, चाहे तुम मुझे अपना साथी बनाना चाहो या नहीं।' योग ने कहा, "मेर सौभाग्य होगा अगर तुम मेरी पूरी जिंदगी के लिए मेरी पत्नी बनो। मेरी दूसरी कनिका को पा कर मेरा जीवन सफल हो जाएगा।"

पिछले कुछ महीनों से मेरी चुदाई हुई ही नहीं थी। मेरे पति विदेश गए हुए थे। अजित से ब्रेक अप हो गया था। शायद इसलिए मेरा छिद्र और भी छोटा दिख रहा था। अब मुझे भरोसा था की योग से बार बार चुदवाकर मेरा छिद्र चोदने लायक तो हो ही जाएगा। खैर, मैंने योग के लण्ड को अपनी चूत की पंखुड़ियों पर रगड़ा जिससे उसका लण्ड चिकनाहट से लिप्त हो जाए। अच्छी तरह स्निग्ध करने क बाद मैंने एक हाथ की मेरी उँगलियों से मेरी चूत की दोनों पंखुड़ियाँ खोली और दूसरे हाथ से योग का लण्ड मेरी उँगलियों में पकड़ कर मेरे छिद्र में धीरे से घुसेड़ा। उसके लण्ड के थोड़े से प्रवेश होने पर ही मुझे रोमांच हो उठा और मेरे रोंगटे खड़े हो गए। अब यह चिंता थी की आगे क्या होगा। क्या योग का मोटा लण्ड मेरी छोटी सी चूत में घुस पायेगा? और अगर घुस भी पाया तो मुझे कितना दर्द देगा। मुझे डर ज्यादा था, क्यूंकि योग का लण्ड देखते ही मेरी हालत खराब हो जाती थी। ऐसा लगता था योग की दोनों झांघों के बिच किसीने रबर का एक सॉलिड पाइप घुसेड़ दिया हो। मैं जानती थी की ऐसे कोई दिक्कत नहीं होती है। एक बार स्त्री जब वयस्क हो जाती है तो उसकी चूत बड़ा लण्ड भी ले सकती है। बल्कि बड़े लण्ड से चुदवाने में उसे और भी मजा आता है क्यूंकि उसकी चूत का पूरा हिस्सा लण्ड के साथ अच्छी तरह से जब रगड़ता है तो फिर स्त्री को एक गजब की ऊंचाई का अनुभव होता है जिसे बताना बड़ा मुश्किल है। वह एक अजीब सा नशा है जो औरत और मर्द दोनोँ महसूस करते हैं। सेक्स में कुछ ऐसा अनोखा उत्तेजक उन्माद झटका लगता है की जिसका अनुभव करते ही बनता है।

यह अजीब सा अनोखा अनुभव भगवत कृपा से ही इंसान और दूसरे जानवरों को प्राप्त है। इसी लिए तो पुरुष और स्त्री चोदते हैं। अगर चुदाई की क्रिया ना हो तो संसार कैसे चलेगा।? कई बार हम सोचते हैं की भगवान् को इंसानों की चुदाई की क्रिया पसंद नहीं है। शायद इसीलिए संत महात्मा कहते हैं स्त्रियों के संग से दूर रहो। पर भगवान् ने ही तो पुरुष और स्त्री में जातीयता की भावना दी है ना? पुरुष स्त्री की और, और स्त्री पुरुष की और क्यों आकर्षित होते हैं? क्यों की यह भाव भगवान् ने ही दिया है। इस लिए स्त्री पुरुष का मिलन यानी चोदना वर्ज्य नहीं है। संत लोग यह इस लिए कहते हैं यदि आप भगवान् का भजन एक निष्ठा से करना चाहते हैं तो यह आकर्षण उस में बाधा देता है। परन्तु यहां भी भगवत इच्छा ही आती है। अच्छे अच्छे महात्मा स्त्री का अवैध संग भी करते हैं तो यह साफ़ हो जाता है की वह सिर्फ दिखावा ही करते हैं और लोगों को धोखा देते हैं। चुदाई करने की इच्छा से या कोई भी कारण किसी भी स्त्री पर जबरदस्ती करना या उस पर मानसिक या शारीरिक अत्याचार करना अथवा अभद्र व्यवहार करना वर्ज्य है। वह ना सिर्फ सामाजिक बुराई बल्कि घोर पाप है। किसी भी नाबालिग को लुभाकर या ताड़ कर यौन व्यवहार करना घोर अपराध या पाप है। कानूनन भी इसकी कड़ी सजा होनी चाहिए और है।

 
वह ना सिर्फ सामाजिक बुराई बल्कि घोर पाप है। किसी भी नाबालिग को लुभाकर या ताड़ कर यौन व्यवहार करना घोर अपराध या पाप है। कानूनन भी इसकी कड़ी सजा होनी चाहिए और है।

एक बात और। हमारे समाजने नियम बनाये हैं की किसीकी पत्नीसे चुदाई नहीं करनी चाहिए, पर आजकल सामाजिक तनाव या चुदाई के अभाव के कारण शादी शुदा स्त्रियां अलग अलग पुरुषों से चुदवाती हैं या शादी शुदा पुरुष अलग अलग स्त्रियों को चोदते हैं। आपस की सहमति से अगर यह होता है तो यह भी वर्ज्य नहीं माना जाना चाहिए। कई बार पति या पत्नी लज्जा या सामाजिक ग्रंथि के कारण सीधे सीधे इजाजत ना दें पर उनकी मौन अनुमति होती है ऐसा भी मैंने देखा है। हमारे समाज में स्त्रियों का स्थान पहले से ही ऊंचा रहा है। पर आजकल उनपर होते हुए अत्याचार या मानसिक यातना देख कर हम सब जो समझदार हैं उनका का दिल पसीज जाता है। सब लेखक और पाठक गण से प्रार्थना है की ऐसा ना करें और ना होने दें।

मेरी चूत दूसरी औरतों के मुकाबले कुछ ज्यादा ही टाइट थी। मेरे पति और अजित ने उसका अनुभव किया था। दोनों ही मेरी चूत के दीवाने थे। दोनों का ही कहना था की दूसरी औरतों के मुकाबले उन्हें मुझे चोदने में एक अलग ही आनंद का अनुभव होता था। मेरी चूत चोदने वाले का लण्ड इतना टाइट पकड़ती थी की चोद ने वाले को मजा ही आ जाता था। मुझे लगा की अजित के मोटे लंड से कई रात चुदवाने के बाद मेरी चूत शायद थोड़ी ज्यादा चौड़ी हो गयी होगी। अजित से चुदवाये हुए काफी समय हो चुका था और उस बिच में मेरी चूत फिर सिकुड़ गयी होगी। योग ने मेरे इशारे पर अपना लण्ड मेरी चूत में थोड़ा घुसेड़ा। योग के लण्ड के घुसते ही मेरे पुरे बदन में एक अजीब सी सिहरन फ़ैल गयी। मेरी कई महीनों की इच्छा उस रात फलीभूत हो रही थी। मैंने योग को मेरी गाँड़ ऊपर उठाकर धक्का मारा जिससे उसका लण्ड मेरी चूत में और घुसे। मैंने तय किया की जो होना है सो हो; उस रात मैं योग से खूब चुदाई करवाउंगी। योग का लण्ड घुसते ही मुझे दर्द तो हुआ पर मैं उसको सहने के लिए तैयार थी। मैं जानती थी की दर्द के आगे मजा है।

शायद योग थम कर मुझे समय देना चाहते थे। पर मैं इंतजार के मूड में नहीं थी। मैंने योग की पीठ में मेरी उंगलियां और नाख़ून गाड़ कर इशारा दिया की वह मुझे चोदना शुरू करे। योग ने धीरे से अपना लंड और घुसेड़ा और उसका लण्ड मेरी चूत की गहरायिओं में समाने लगा। मुझे दर्द तो काफी हुआ पर अब मैं रुकने वाली नहीं थी। योग ने धीरे धीरे मुझे चोदना शुरू किया। योग के लण्ड को मेरी चूत की गहरायिओं में महसूस करते ही मैं सातवें आस्मां को छूने लगी। मेरी चूत में मेरे रस का फव्वारा छूट पड़ा था। शायद योग ने भी उसे महसूस किया होगा। वह मेरी चूत में अपना लण्ड पेलते हुए मुस्करा दिए। मैं उनको देख कर शर्मायी और मुस्करायी। योगने झुक कर मेरी चूतमें अपना लण्ड रखते हुए मेरे होंठों को बड़े प्यार से चूमा और मेरे होंठों को चूसने लगे। मैंने योग की कमर के इर्दगिर्द मेरी बाहें फैलायीं और उनको मेरी बाहों में ले लिया और उनको अपने और खींचा और अपनी कमर उठाकर उन्हें मुझे चोदना जारी रखने को इंगित किया। योग भी शायद कई महीनों से मुझे चोदने को बेताब थे। पर पता नहीं क्या हुआ की योग ने अपना लण्ड मेरी चूत में से निकाला और आगे बढ़कर मेरे होँठों को बड़े प्यार से चूमने लगे। मैं हँस पड़ी और मैंने पूछा, "जानूं, क्या हुआ? चुदाई करने का मूड नहीं है क्या?"

 
योग ने कहा, "प्रिया, मुझे तुम पर इतना प्यार आता है की जब तुम्हें चोदता हूँ तो खूब प्यार करने का मन करता है और जब प्यार करता हूँ तो खूब चोदने का मन करता है। तू इतनी प्यारी है की मेरी समझ में नहीं आता की क्या करूँ? पता नहीं शायद इसी लिए तुम्हारा नाम प्रिया है।"

मैंने कहा, "इसका जवाब यह है की तुम मुझे बड़े प्यार से चोदो। प्यार भी करते जाओ और चोदते भी जाओ। मेरी यह चूँचियाँ तुम्हारे प्यार भरे चुम्बन को तरस रही हैं। मुझे चोदते हुए इनको चूमते जाओ। मेरा पूरा बदन तुम्हारा है। मेरे पुरे बदन को प्यार करो। पर मुझे चोदना जारी रखो। मैं तुमसे चुदने ने के लिये बेताब हूँ। पता नहीं कबसे मैं तुमसे चुदवाने के लिए बेताब थी l यदि तुमने मुझे उस दिन लिफ्ट में पकड़ कर चोद दिया होता तो कसम तुम्हारी, मैं सब के सामने ही तुमसे चुदवा लेती। मैं बहुत शर्मीली हूँ। मैं अपना नंगा बदन किसी को नहीं दिखा सकती। पर उस दिन मैं यह सब झेल लेती अगर तुम मुझे पकड़ कर सब के सामने ही चोद देते। मैं तुमसे चुदवाने के लिए उस दिन भी इतनी बेताब थी और आज भी हूँ।"

योग ने मेरी और देखा और बोले, "डार्लिंग, मैं तुम्हें मात्र चोदने के लिए ही नहीं, मैं तुम्हें सच्चे दिलसे प्यार करता हूँ और अगर तुम किसी की बीबी नहीं होती तो मैं तुमसे शादी कर तुमसे जिंदगी भर की साथीदारी निभाना चाहता हूँ l पर मेरा दुर्भाग्य तो देखो, जो मेरी थी उसे ऊपर वाले ने मुझसे जल्दी छीन लिया और जो मेरी बन सकती है उसकी अपनी मजबूरियां है।" ऐसा कह कर योग ने मेरी शादी शुदा होने का अफ़सोस जताया।

मैंने योग को झकझोरते हुए कहा, "प्यारे, मैं यहीं तुम्हारे साथ तुम्हारे निचे चुदवाने के लिए लेटी हुई हूँ। मैं हमेशा हमेशा के किये तुम्हारी हूँ और रहूंगी। शादी वादी ठीक है। मेरे पति ने शादी की रस्म नहीं निभाई और मुझसे थोड़ा दूर होते ही, दूसरी औरत के पीछे भागने लगे और उस को चोदने लगे l अरे भाई मुझे भी तो मेरे पति से चुदवाये बगैर परेशानी होती थी। पर मैंने तो ऐसा कुछ नहीं किया। फिर भी अगर वह मुझे बताते तो शायद मैं समझ जाती। मैं बीबी हूँ ना? हो सकता है, मैं थोड़ा शोर शराबा करती, पर आखिर में मान जाती l मैं जानती हूँ की मेरे पति जैसा एक युवा हट्टा कट्टा मर्द चूत चोदे बिना ज्यादा दिन नहीं रह सकता। पर ना ही उन्होंने मुझे बताया और ना ही उन्होंने अपना गुनाह कुबूल किया। जब मैंने उन्हें रंगे हाथों पकड़ा तो उलटा मुझ पर ही इल्जाम लगाने लगे l अगर शादी का मतलब यही है, तो ठीक है। फिर मुझे क्या पड़ी है? मैं तो उनसे भी एक कदम आगे चलूंगी। मैं तो खुल्लम खुल्ला तुमसे चुदवाउंगी और मेरे पति से भी नहीं छुपाउंगी। शादी अपनी जगह और चुदाई अपनी जगह l

 
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