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मेरी खुली चुनौती मेरे पति को

l मैं जानती हूँ की मेरे पति जैसा एक युवा हट्टा कट्टा मर्द चूत चोदे बिना ज्यादा दिन नहीं रह सकता। पर ना ही उन्होंने मुझे बताया और ना ही उन्होंने अपना गुनाह कुबूल किया। जब मैंने उन्हें रंगे हाथों पकड़ा तो उलटा मुझ पर ही इल्जाम लगाने लगे l अगर शादी का मतलब यही है, तो ठीक है। फिर मुझे क्या पड़ी है? मैं तो उनसे भी एक कदम आगे चलूंगी। मैं तो खुल्लम खुल्ला तुमसे चुदवाउंगी और मेरे पति से भी नहीं छुपाउंगी। शादी अपनी जगह और चुदाई अपनी जगह l

लगता है आजकल यही दुनिया का नियम है। इस लिए मेरी शादी की चिंता मत करो और अब तुम मेरी भूख को शांत करो और मुझे खूब चोदो।" योग मेरी और आश्चर्य भरी नज़रों से देखने लगे। शायद उन्होंने इसके पहले ऐसी कोई शादी शुदा औरत को नहीं देखा होगा जो इतनी खुल्लम-खुल्ला अपने अंदर के भावों का इजहार करती हो। फिर एक बार और झुक कर वह मेरे दोनों स्तनोँ को बारी बारी से अपने मुँह में लेकर उन्हें चूमने और चूसने लगे। मेरी फूली हुई निप्पलोँ को मुंहमें ले कर योग उन्हें अपने दांतों से काटने लगे। एक बार तो मेरे मुंह से दर्द भरी सिसकारी भी निकल गयी। मैंने योग के तले लेटे हुए अपने दोनों हाथों में योग का घने बालों सर पकड़ रखा था और मैं उनका यह कार्य कलाप महसूस कर रही थी।

योग ने अपने होँठ और निचे ले जा कर मेरी नाभि को प्यार से चूमा और मेरी चूत के ऊपर के उभरे हुए टीले पर अपनी जीभ फैला कर उसे चाटने लगे। योग का खड़ा लण्ड मेरे घुटनों को छेद रहा था। मैं योग की इन हरकतों से बड़ी उत्तेजित हो रही थी। मुझसे रहा नहीं जा रहा था। मैंने कहा, "यार अब बस भी करो, तुम मुझे चुदवाने के लिये रुलाओगे क्या? अब मुझसे रहा नहीं जाता। तुम्हारा इतना बड़ा और मोटा लण्ड मेरी चूत में डालो और मुझे चोदो भी!! एक दो बार मुझे अच्छी तरह चोदने के बाद मैं तुम्हें पूरी रात मेरे नंगे बदन से खेलने दूंगी। तब तुम मुझे जहाँ चाहे चाटना जहाँ चाहे काटना। पर अभी तो बस मेरी चूत की भूख शांत करो।" योग ने अपना बदन सीधा कर, अपना लण्ड पकड़ा और उसे मेरी चूत की पंखुड़ियों से रगड़ने लगे। उन्हें पता था की अगर उनके लण्ड और मेरी चूत के बिच थोडा सा भी सूखापन रहा तो मुझे बहुत कष्ट होगा।

हालांकि जिस तरह से मैं अपना पानी छोड़ रही थी और योग का लण्ड उनके अपने पूर्व रस से सराबोर था; ऐसा होने का कोई सवाल ही नहीं था। उनके लण्ड की लम्बाई और मोटाई देख कर मेरी जान निकली जा रही थी। पर यही तो हर औरत को चाहिये। हर कोई औरत को ऐसे मोटे और लम्बे लण्ड से चुदवाने का मौक़ा हररोज नहीं मिलता। जरूर मुझे दर्द होगा। पर ऐसे लण्ड से चुदवाना भी तो अपने में ही एक अनुभव है। तो फिर जब सर ओखल में रख ही दिया था तो फिर मुसल से क्या डरना? मैंने भी योग का लण्ड अपनी उँगलियों में पकड़ा और मेरी पंखुड़ियों को खोल कर फिर उसे मेरे छिद्र के केंद्र में रखा और योग को उसे घुसाने का इशारा किया। योग ने एक हल्का धक्का दिया और अपना लण्ड थोड़ा घुसेड़ा। योग का लण्ड घुसते ही मेरी चूत के सारे स्नायु एकदम चुस्त हो गए और मेरी चूत अंदर से ही पता नहीं कैसे फड़कने लगी।

योग के लण्ड को मेरी चूत की दीवारों ने ऐसे जकड लिया की ऐसा लगता था की अब वह उसे और अंदर घुसने नहीं देंगे। योग के लण्ड के थोड़ा सा ही घुसने पर मेरी चूत में दर्द की तेज तीखी टीस मुझे महसूस हुई। दर्द काफी था। पर मैंने मेरे होँठ भींच कर अपने आप पर नियत्रण रखा और मेरे मुंह से थोड़ी सी भी आह या आवाज नहीं निकलने दी। अगर मैंने उस समय थोड़ी सी भी आवाज निकाली होती तो मुझे डर था की कहीं योग मेरी चूत में से अपना लण्ड फिर निकाल ना लें। मैं योग के लण्ड को हरदम मेरी चूत में रखना चाहती थी। मैंने योग की और देखा। उनकी आँखें बंद थीं। मेरे लिए यह अच्छा था क्यूंकि मेरे लाख कोशिश करने पर भी शायद कहीं मेरे चेहरे पर दर्द की लहर उन्हें दिखाई देती तो मुश्किल होती।

योग अपना लण्ड मेरी चूत में थोड़ा घुसा कर थम गए थे। योग भी मेरी चूत में अपने लण्ड के घुसने का मजा ले रहे थे। उनके लण्ड को जैसे मेरी चूत की दीवारों ने जकड़ा था वह उसका रसास्वादन कर रहे थे। शायद मेरी चूत की फड़कन उन्हें पागल कर रही थी। या फिर वह मुझे दर्द से थोड़ी देर के लिए राहत दिलाना चाहते थे। दर्द थोड़ा कम होने पर मैंने योग को अपनी गाँड़ ऊपर उठाकर ऊपर की और धक्का दिया और उन्हें महसूस कराया की मैं उनके चोदने का इंतजार कर रही थी। योग ने अपनी आँखें खोली और मुस्कुरा कर मेरी और देखा। उनकी उतनी मीठी मुस्कान देख कर तो मैं वारी वारी गयी। मैंने सोचा ऐसे प्यारे मर्द से तो जिंदगी भर चुदवाया जाये फिर भी कम है। मैंने भी वैसी ही मीठी मुस्कान उन्हें दी। मैं योग को यह भी जताना चाहती थी की मुझे ज्यादा दर्द नहीं हो रहा था।

तब योग को लगा की मैं ज्यादा दर्द नहीं महसूस कर रही थी तो उन्होंने अपना लण्ड और अंदर घुसेड़ा। उनका करीब आधा लण्ड से थोड़ा कम मेरी चूत में घुस चुका था। मेरा दर्द बढ़ता जा रहा था। तब मैंने तय किया की मैं दर्द के बारे में सोचूंगी ही नहीं। मैंने फिर मुस्कुरा कर योग को मेरी गाँड़ को उठाकर ऊपरकी और धक्का दिया। योग ने आधेसे ज्यादा लण्ड मेरी चूत में घुसेड़ दिया। उसे फिर वापस खींच कर उन्होंने फिर उसे अंदर घुसेड़ा। अब वह धीरे फिर हलके हलके मुझे चोद रहे थे। उन्होंने फिर भी अपना लण्ड पूरा नहीं घुसेड़ा था। मैंने फिर अपनी गाँड़ ऊपर उठाकर योग को लण्ड और अंदर घुसेड़ने का न्यौता दिया। योग का आधा लण्ड ही मेरी चूत को पूरा भर चुका था। मुझे लगा की योग का लण्ड मेरी चूत में और ज्यादा घुस नहीं पायेगा क्यूंकि शायद वह मेरे गर्भद्वार पर टक्कर मार रहा था। योग के लण्ड को चूत में पाकर मुझ पर एक तरह का पागलपन सवार हो गया था।

 
मेरा जहन उन्माद के सैलाब में ऊँची लहरों की तरह उछल रहा था। मैं जल्दी ही ढहने वाली थी। मेरा पानी का फव्वारा छूटने वाला था। मैं योग को रोकना नहीं चाहती थी चाहे मेरी चूत फट क्यों ना जाए। मैंने फिर एक धक्का और दिया और योग को उनका लण्ड घुसेड़ने के लिए मजबूर किया। एक और योग जान गए थे की मुझे उनका लण्ड लेने में बड़ा कष्ट हो रहा था। कैसे जान गए यह पता नहीं पर इसी कारण वह लण्ड को घुसड़ने में जल्दी नहीं कर रहे थे। और दूसरी तरफ मैं उनको उन्माद के मारे अपनी गाँड़ उछाल कर जोर से चोदने के लिए बाध्य कर रही थी।

मैं साफ़ देख रही थी की योग हीच कीचा रहे थे।मैंने उनसे कहा, "मैं जानती हूँ की आप मुझे दर्द ना हो इस लिए लण्ड घुसेड़ने से हिचकिचा रहे हो। पर यह समझो की अगर मैं आप के कारण प्रेग्नेंट हो गयी, जो की मैं होना चाहती हूँ, तो फिर आप क्या करेंगे? बच्चा तो मैंने ही जनना है। तो चूत तो खुलेगी या फटेगी ही। इस लिए मैं आपसे ख़ास अर्ज करती हूँ की आप ज्यादा सोचो मत और मुझे बेरहमी से चोदो। अगर मुझसे दर्द सहा नहीं जाएगा और आपको रोकना पडेगा तो मैं आपको रोकूंगी। पर अब रुकिए मत प्लीज?" योग ने एक बार और मेरी तरफ देखा और वही मनमोहक मुस्कान देकर मुझे चोदने के लिए तैयार हुए। उन्होंने एक धक्का थोड़े ज्यादा जोर से दिया और मेरी चूत जैसे फट गयी हो ऐसा तीखा दर्द मुझे महसूस हुआ। पर साथ साथ योग का लण्ड जो मेरी चूत की दीवारों को खोलता हुआ मेरी चूत की सुरंग में घुसे जा रहा था उसकी मादक रगड़ से मुझे अद्भुत उत्कट हर्षोन्माद का जो अनुभव हो रहा था वह दर्द से कहीं अधिक था और मैं उस उन्माद भरे पागलपन की अनुभूति को दर्द के कारण कम होने देना नहीं चाहती थी।

धीरे धीरे उन्माद बढ़ता गया और दर्द कम होता गया। योग का लण्ड मेरी चूत को खोलनेमें काफी कामयाब रहा। बस दिक्कत यही थी की योग के लण्ड का अग्र भाग मेरी बच्चे दानी को शायद ठोकर मार रहा था जो दर्द पैदा कर रहा था। पर उसके कारण जो आनंद हो रहा था वह भी तो अवर्णनीय था। मैं योग के साथ साथ अपनी गाँड़ ऊपर उठाकर योग को चोदने के लिए प्रोत्साहित करती रही। योग ने चोदने की गति जैसे बढ़ाई की मेरी गाँड़ और चूत के बीच वाले हिस्से में योग के अण्डकोष की फटकार से "फच्च फच्च" की आवाज से कमरा गूँज उठा। बापरे!! मेरे पति के साथ कभी भी मेरी ऐसी चुदाई नहीं हुई। हाँ अजित के साथ मुझे कुछ उत्तेजक चुदाई का जरूर अनुभव हुआ था। पर योग का लण्ड और उसके प्यार ने मुझे सातवें आसमान पर पहुंचा दिया था। आज तक किसी का भी लण्ड मेरी चूत की इतनी गहराइयों तक नहीं पहुँच पाया था।

जो प्यार, जो प्यार भरा सम्मान और जो पूरा समर्पण का भाव मेरे मनमें योग के प्रति था, वह मेरे पति को भी मैं नहीं दे पायी थी क्यूंकि मुझे ऐसा भाव उनकी और से कभी महसूस ही नहीं हुआ था। मेरा दिल और दिमाग किसी धमाकेदार उत्तेजित ऊँचाइयों पर पहुँच चुका था। मैं जल्द ही झड़ने वाली थी। पर योग तो मेरी चूत में अपना लण्ड पेले ही जा रहे थे। शायद उस रात पहली बार वह अपने लण्ड में हो रहे उन्माद का भली भांति अनुभव कर रहे थे। उनका ध्यान उनके लण्ड के इर्दगिर्द हो रही मेरी चूत की फड़कन पर केंद्रित था। जैसे जैसे योग मुझे चोदते गए, मेरा उन्माद बढ़ता गया। साथ साथ मेरी चूत की फड़कन भी बढ़ती गयी। अब दर्द के उस पार उसकी जगह उत्तेजना के नशे ने ले ली थी। जैसे ही मैं उत्तेजना के शिखर पर पहुंची मेरे दिमाग में एक धमाका सा हुआ और मेरी चूत में कुछ ऐसे अजीबो गरीब मचलन होने लगी की मैं अपने बदन पर भी नियत्रण नहीं रख पा रही थी।

स्त्री सहज लज्जा के कारण मैं अपना उन्माद जाहिर करने में शर्मा रही थी। मेरी उत्तेजना ऐसी थी की मुझे चिल्ला चिल्ला कर अपना उन्माद जाहिर करना चाहिए था। पर मैं एक गहरी साँस लेकर मेरे दिल और दिमाग में उठे हुए बिजली के झटके की तरह लगे धक्के को झेल कर हलकी सी आवाज में कराह उठी, "योग, मैं झड़ रही हूँ। पता नहीं तुमने मुझे आज इसी दुनिया में जन्नत के दर्शन करा दिए। मैंने आजतक ऐसा अनुभव नहीं किया। आज तो गज़ब हो गया।"

मेरा हाल देख योग थोड़ी देर थम गए। उन्हों मेरे स्तनो को जोर से दबाते हुए मेरी और देखा और फिर वही प्यार भरी मंद मंद मुस्कराहट, योग तब तक झड़ने के लिए तैयार नहीं थे। उनके टिकने की क्षमता काफी थी। मैं भी तो और बहुत अधिक चुदाई करवाना चाहती थी। फिर मेरी गाँड़ को ऊपर उठाकर मैंने उन्हें चोदना जारी रखने का इशारा किया। योग मेरी चूत की गहराईयों का अपने लण्ड द्वारा अनुभव कर रहे थे। साथ में वह मेरे चेहरे के भाव से मेरा उन्माद और मेरे प्यार की भी अनुभूति कर रहे थे। शायद उन्हें उस रात अपनी प्यारी पत्नी कनिका की कमी नहीं खली। उन्हें शायद कनिका के जैसी ही या फिर उससे भी ज्यादा उत्तेजक कामुकता भरी स्त्री साथीदार उस रात मिली थी। मैं उनके चेहरे के भाव पढ़ रही थी और वह मेरे।

 
मुझे लगा यही मेरे सच्चे पति होने के लायक हैं। मेरे असली पति भी मुझे प्यार करते थे, पर उनका प्यार मेरे बदन के कारण ज्यादा था। मैंने महसूस किया की योग मेरे बदन से कहीं ज्यादा मेरे दिल की गहराइयों में झाँक कर मुझे टटोल कर अपना साथी ढूँढ रहे थे, और शायद उन्हें मुझमें वह साथी नजर आरहा था, जो उनके दिल को समझ सके और उनके साथ कदम से कदम मिलाकर चल सके और उन्हें भावात्मक ढंग से वह शारीरिक और आत्मिक प्यार दे सके जिसकी हर मर्द और औरत को तलाश होती है।

योग भी अब अपनी उत्तेजना की पराकाष्ठा पर पहुँच रहे थे। मुझे धक्का लगा कर चोदते हुए बार बार वह मुझे, "मेरी प्यारी प्रिया, मेरी जान, मुझे छोड़ के मत जाना। तू मेरी है और मेरी ही रहना।" इत्यादि कहते रहते थे। उनकी भौंहें सिकुड़ने लगीं, अब वह अपने आप पर नियत्रण नहीं रख पा रहे थे। वह चरम पर पहुँचने वाले ही थे। मैं भी उनके चेहरे का भाव देख कर फिर से उत्तेजित हो उठी, मेरी चूत में फिर वही फड़कन बढ़नी शुरू हो गयी। मैंने योगके धक्के के मुकाबले सामने से मेरी गाँड़ बार बार उठाकर उनकी चुदाई का पूरा साथ देते हुए गर्मजोशी दिखाई और उसके कारण मैं भी फिर से वही उन्मादित बिजली के झटके समान सुनामी के मौजों सी लहार पर सवार होते अनुभव कर रही थी।

मैंने योग से कहा, "मेरे प्यारे, तुम जरा भी सोचे बगैर अपना सारा वीर्य मेरी चूत में उँडेल दो। बिलकुल निश्चिन्त रहो। मैंने इसके बारे में काफी सोचा है। तुम्हारे माल को रोकना मत।"

योग ने अपने लण्ड को एक और धक्का देते हुए मेरी चूत में एक जोरदार गरमा गरम फव्वारा छोड़ा। मैंने उसके गर्म और बहुत ज्यादा मात्रा में छोड़े गए वीर्य को मेरी चूत की पूरी सुरंग को लबालब भर देते हुए महसूस किया। देखते ही दखते हम दोनों ही एक साथ झाड़ गए। हम दोनों के एकसाथ झड़ते ही योग के इर्द गिर्द अपनी बाँहों को फैला कर मैंने योग को मेरे नंगे बदन के साथ चिपका दिया और योग के बदन के निचले हिस्से को अपनी जांघों में लपेट कर उनके लण्ड को मेरी चूत में ही रखे हुए मैंने उनको मेरे पर ही रहने दिया और उनकी पीठ और सुआकार गाँड़ को मैं बड़े प्यार से सहलाने लगी। काफी देर तक ऐसे पड़े रहने के बाद धीरे से अपना लण्ड मेरी चूत में से निकाल कर योग मेरे ऊपर से निचे उतरे और मेरे साथ में ही लेट गए। मेरी आँखें नींद से गहरा रहीं थीं। पर मुझे एक बहुत जरुरी काम करना था। मैं बिस्तर में से नंगी ही खड़ी हुई।

जब योग ने मुझे बिस्तर से निचे उतारते हुए देखा तो पूछा "क्या बात है?"

मैंने कहा, "तुमने तो उस गन्दी औरत को अपने जीवन से और जहन से निकाल फेंका और (मैंने अपने बदन की और इशारा करते हुए कहा) इस नयी मुसीबत को गले लगा लिया। पर मुझे भी एक हिसाब चुकाना है। मुझे भी एक नासमझ मर्द को सबक सिखाना है। आप लेटे रहो। मुझे आपसे और भी कई बार चुदाई करानी है। बस मैं गयी और आयी।"

ऐसा बोलकर मैंने साथ में ही मेज पर रखे हुए मेरे सेल फ़ोन को लेकर मेरे पति को एक सन्देश भेजा। मैंने लिखा,

"मेरे प्यारे पति देव।

आपने मुझे एक बहुत ही बढ़िया सबक सीखा दिया है। हम शादी शुदा होते हुए भी आप किसी स्त्री को चोदते रहे और मुझ से झूठ बोलकर यह बात छिपाते रहे। रंगे हाथों पकडे जाने पर उलटा आपने मुझ पर ही बेबुनियाद इल्जाम लगा दिया। आपने मुझे सिखाया की शादीकी सौगंध और वचनों का कोई मूल्य या मायने नहीं है। हम शादी शुदा रहते हुए भी अपने तन की भूख किसी और से शांत करवा सकते हैं। तो फिर आप मेरी खुली चुनौती सुनिए। अब मैं आपसे खुल्लम खुल्ला कहती हूँ की मैं मेरे एक अति प्रिय मर्द को ना सिर्फ प्यार करने लगी हूँ बल्कि उनसे खूब मजे से चुदवा भी रही हूँ। मैं उनसे अभी अभी चुद कर आयी हूँ और यह मेसेज आपको भेज रही हूँ। आप मेरे इस खत को जाहिर कर सकते हैं। मैं आपको तलाक देने के लिए बाध्य नहीं कर रही। आप अगर मुझे तलाक देना चाहे तो दे सकते हैं। मुझे आपसे कोई जीविका या आर्थिक आरक्षण नहीं चाहिए। अगर आप मेरे साथ रहना चाहते हों तो हमें आज़ादी रहेगी की हम दोनों शादी शुदा होते हुए भी किसी और को चोद या किसी और से चुदवा सकते हैं। निर्णय आपको लेना है। आखिर में मैं आपको बस कुछ पंक्तियाँ पढ़ाना चाहती हूँ। गौर फरमाइयेगा।

यदि हम नरम हैं तो शोले सम हम गरम भी तो है। यदि हम नार* हैं तो खड़ग और तलवार भी तो हैं।

समझना ना हमें तुम भूल से भी मुर्ख और दुर्बल। दिल में प्यार है तो साथ में धिक्कार भी तो है।

* नार = नारी, स्त्री

आपकी कानूनन पत्नी!

प्रिया"

मैसेज एक बार फिर पढ़ने के बाद मैंने उसे मेरे पति के सेल फ़ोन पर भेज दिया। फिर मैं धीरे से मेरे सो रहे प्रियतम के पास गयी और उनका थोड़ा ढीला पर उतना ही मोटा और लंबा लण्ड पकड़ कर उसे हिलाने लगी, ताकि वह फिर कड़क हो जाए और मैं फिर एक बार उनसे उतने ही प्यार और तूफ़ान के साथ दुबारा चुद सकूँ।

आशा है आप सब को मेरी कहानी पसंद आई होगी, आप सभी की प्रतिक्रियाओं का इतेजार रहेगा!

THE END...???

 
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