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मेरी चालू बीवी complete

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अपडेट 39

मगर मधु की चूत बिलकुल अनछुई थी, उस पर अभी बालों ने आना शुरू ही किया था…

जिस चूत में अंगुली भी अंदर नहीं जा रही थी उसका तो कहना ही क्या…इतनी प्यारी कोमल मधु की चूत इस समय मेरी नाक के नीचे थी… उसकी चूत से निकल रहे कामरस की खुशबू मुझे मदहोश कर रही थी…मैंने अपनी नाक उसकी चूत के ऊपर रख दी…मधु- अह्ह्हा… आआआ… स्श…वो जोर से तड़फी… उसने अपनी कमर उठा बेकरारी का सबूत दिया…मैं उस खुशबू से बैचेन हो गया और मैंने अपनी जीभ उसके चूत के मुँह पर रख दी…बहुत मजेदार स्वाद था… मैं पूरी जीभ निकाल चाटने लगा… मुझे चूत चाटने में वैसे भी बहुत मजा आता था…और मधु जैसी कमसिन चूत तो मक्खन से भी ज्यादा मजेदार थी…मैं उसकी दोनों टाँगें पकड़ पूरी तरह से खोलकर उसकी चूत को चाट रहा था… मेरी जीभ मधु के चूत के छेद को कुरेदती हुई अब अंदर भी जा रही थी…उसकी चूत के पानी का नमकीन स्वाद मुझे मदहोश किये जा रहा था… मैं इतना मदहोश हो गया कि मैंने मधु की टाँगें ऊपर को उठाकर उसके चूतड़ तक चाटने लगा…कई बार मेरी जीभ ने उसके चूतड़ के छेद को भी चाटा…मधु बार बार सिसकारियाँ लिए जा रही थी…हम दोनों को ही अब सलोनी की कोई परवाह नहीं थी…मैंने चाट चाट कर उसका निचला हिस्सा पूरा गीला कर दिया था… मधु की चूत और गांड दोनों ही मेरे थूक से सने थे…मेरा लण्ड बुरी तरह फुफकार रहा था…मैंने एक कोशिश करने की सोची… मैंने मधु को ठीक पोजीशन में कर उसके पैरों को फैला लिया… और अपना लण्ड का अग्रमुण्ड उसकी लपलपाती चूत के मुख पर टिका दिया…यह मेरी ज़िंदगी का सबसे हसीं पल था…एक अनछुई कली… पूरी नग्न… मेरे नीचे दबी थी…उसके चिकने कोमल बदन पर एक चिंदी वस्त्र नहीं था…मैंने उसके दोनों पैरों को मोड़कर फैलाकर चौड़ा कर दिया… उसकी छोटी सी चूत एकदम से खिलकर सामने आ गई…मैंने अपनी कमर को आगे कर अपना तनतनाते लण्ड को उन कलियों से चिपका दिया…मेरे गर्म सुपारे का स्पर्श अपने चूत के महाने पर होते ही मधु सिसकार उठी…मैं धीरे धीरे उसी अवस्था में लण्ड को घिसने लगा..दिल कर रहा था कि एक ही झटके में पूरा लण्ड अंदर डाल दूँ…मगर यही एक शादीशुदा मर्द का अनुभव होता है कि वो जल्दबाजी नहीं करता…मैंने बाएं हाथ को नीचे ले जाकर लण्ड को पकड़ लिया, फिर कुछ पीछे को होकर लण्ड को चूत के मुख को खोलते हुए अंदर सरकाने की कोशिश करने लगा.मधु बार-बार कमर उचकाकर अपनी बेचैनी जाहिर कर रही थी…शायद दस मिनट तक मैं लण्ड को चोदने वाले स्टाइल में ही चूत के ऊपर घिसता रहा…1-2 बार सुपारा जरा जरा… सा ही चूत को खोल अंदर जाने का प्रयास भी कर रहा था..मगर मधु का जिस्म अभी बिल्कुल दर्द सहने का आदि नहीं था… वो खुद उसे हटा देती थी…शायद उसको हल्के सी भी दर्द का अंदाजा नहीं था… उसको केवल आनन्द चाहिए था ..इसलिए हल्का सा भी दर्द होते ही वो पीछे हट जाती थी..इससे पहले भी मैंने 4-5 लड़कियों की कुंवारी झिल्ली को भंग किया था और उस हर अवस्था का अच्छा अनुभव रखता था ..जिन 4-5 लड़कियों की मैंने झिल्ली तोड़ी थी उनमें एक तो बहुत चिल्लाई थी, उसने पूरा घर सर पर उठा लिया था..मुझे यकीन था कि मधु अभी तक कुंवारी है..उस सबको याद करके एवं सलोनी के इतना निकट होने से मैं यह काम आसानी से नहीं कर पा रहा था…मुझे पता था कि मधु आसानी से मेरे लण्ड को नहीं ले पायेगी और अगर ज़ोर से झटके से अंदर घुसाता हूँ तो बहुत बवाल हो सकता है…

खून-खराबा, चीख चिल्लाहट.. और ना जाने कितनी परेशानी आ सकती है…हो सकता है सलोनी भी इसी सबका इन्तजार कर रही हो…फिर वो मेरे ऊपर हावी होकर अपनी रंगरलियों के साथ-साथ दबाव भी बना सकती है…मेरा ज़मीर खुद उसके सामने कभी नीचे दिखने को राजी नहीं था…वो भी एक चुदाई के लिए… क्या मुझे अपने लण्ड पर काबू नहीं है..??मुझे खुद पर पूरा भरोसा है, मैं अपने लण्ड को अपने हिसाब से ही चुदाई के लिए इस्तेमाल करता हूँ…. ज़बरदस्ती कभी करता मैं…और जो तैयार हो उसको छोड़ता नहीं…मधु के साथ भी मैं वैसे ही मजे ले रहा था… मुझे पता था कि लौंडिया घर की ही है… और बहुत से मौके आएँगे… जब कभी अकेला मिला तब ठोक दूँगा…और अगर प्यार से ले गई तो ठीक.. वरना खून खराबा तो होगा ही….मधु की नाचती कमर बता रही थी कि उसको इस सब में भी चुदाई का मजा आ रहा है…खुद को मजा देने के लिए मैंने अपने लण्ड को उसकी चूत के पूरा लेटी अवस्था में चिपका दिया और मैं ऊपर-नीचे होकर मजा लेने लगा…लण्ड पूरा मधु की चूत से चिपककर उसके पेट तक जा रहा था…उसकी चूत की गर्मी से मेरा लण्ड लावा छोड़ने को तैयार था पर लगता है कि मधु की चूत के छेद पर अब लण्ड छू नहीं पा रहा था या

उसको पहले टॉप के धक्कों से ज्यादा आनन्द आ रहा था…उसने कसमसाकर मुझे ऊपर को कर दिया, फिर खुद अपने पैरों को मेरी कमर से बांधकर अपना हाथ नीचे कर मेरे लण्ड को पकड़ लिया…उसके पसीने से भीगे नरम छोटे हाथों में आकर लण्ड और मेरी हालत ख़राब होने लगी…उसने लण्ड के सुपारे को फिर अपनी चूत के छेद से चिपकाया और कमर हिलाने लगी…अब मैं भी कमर को थोड़ा कसकर आगे पीछे करने लगा…उसके कसे हुए हाथों में मुझे ऐसा ही लग रहा था कि मेरा लण्ड चूत के अंदर ही है…मैं जोर जोर से कमर हिलाने लगा जैसे चुदाई ही कर रहा हूँ…मधु लण्ड को छोड़ ही नहीं रही थी कि कहीं मैं फिर से लण्ड को वहाँ से हटा न लूँ…

कहानी जारी रहेगी.

 
अपडेट 40

अब लण्ड का सुपारा आधा से लेकर एक इंच तक भी चूत के अंदर चला जा रहा था…मधु ने इतनी कसकर लण्ड पकड़ा था कि…वो वहाँ से इधर उधर न हो इसीलिए चूत में भी ज्यादा नहीं घुस पा रहा था…वरना कुछ झटके तो इतने जोरदार थे कि लण्ड अब तक आधा तो घुस ही जाता…और तभी मेरे लण्ड ने पिचकारी छोड़ दी…मैं- अहाआआ… ह्ह्ह्ह्ह…ह्ह्ह्ह्ह… ओह्ह्ह ह्ह्ह्ह्ह… आआअ… ह्ह्ह्ह्ह्…ह ह्ह्ह… ऊऊ ओह ह्ह्ह्ह्ह्ह…कई पिचकारियाँ मधु की चूत को पूरा गीली करती हुई उसके पेट और छाती तक को भिगो गई…सच में बहुत ज्यादा वीर्य निकला था…मधु ने अब भी कसकर लण्ड को पकड़ा था… मुझे जन्नत का मजा आ रहा था…पर अब मुझमें अब जरा सी भी हिम्मत नहीं बची थी, मैं एक ओर गिर कर लेट गया…मुझे बस इतना ध्यान है कि मधु उठकर बाथरूम में गई….कुछ देर बाद मैंने देखा मधु बाथरूम से बाहर निकली.. वो अभी भी पूरी नंगी थी…उसने बाथरूम का दरवाजा, लाइट कुछ बंद नहीं की.. और मधु बाथरूम से अपने शरीर को साफ़ करके फिर मेरे पास आ चिपक कर लेट गई…उसने अपनी समीज भी नहीं पहनी और ना उसको सलोनी का डर था ..इतने मजे करने के बाद उसका सारा डर निकल गया था… वो पूरी नंगी उसी अवस्था में मुझसे चिपक लेट गई ..इतनी कम उम्र में भी वो सेक्स की देवी थी…उसने अपना एक हाथ मेरे सीने पर और एक पैर मेरे लण्ड पर रख दिया था.. सिर मेरे कंधे पर रख सो गई थी…मेरे अन्दर इतनी ताकत भी नहीं बची थी कि अपना हाथ भी उस पर रख सकूं… मैंने भी उसको दूर नहीं किया…उसकी चूचियों का अहसास मेरे हाथ पर एवं उसकी गर्म चूत का कोमल अहसास मेरी जांघ पर हो रहा था…मेरे में बिल्कुल हिलने तक की ताकत नहीं बची थी.. नींद ने मेरे ऊपर पूरा कब्ज़ा कर लिया था…जबकि दिमाग में यह आ रहा था… कि उठकर सब कुछ सही कर देना चाहिये… खुद को और मधु को कपड़े पहना देने चाहियें…वरना सुबह दोनों को ऐसे देख सलोनी क्या सोचेगी और ना जाने क्या करेगी?मुझे नहीं पता कि मैं कब बेहोशी की नींद सो गया..सुबह सलोनी ने ही मुझे आवाज दी- सुनो, अब उठ भी जाओ… चाय पी लो…रात की सारी घटना मेरे दिमाग में आई और मैं एकदम से उठ गया…कमरे में सलोनी नहीं थी… मैंने राहत की सांस ली… फिर चारों और देखकर सारी स्थिति का अवलोकन किया…मेरी कमर तक चादर थी जो पता नहीं मैंने खुद ली या किसी और ने… कुछ पता नहीं…मैंने चादर हटा कर देखा… मेरी कमर पर रात को बंधा कपड़ा भी अंदर ही था… बंधा तो नहीं था पर हाँ लिपटा जरूर था….फिर मैंने बिस्तर पर देखा….दूसरे कोने पर मुँह तक चादर ढके शायद मधु ही सो रही थी…क्या मधु अभी तक नहीं जगी… उसने कपड़े पहने या नहीं ..मैंने चारों और नजर घुमाकर उसकी उतरी हुई समीज को खोजा पर कहीं नजर नहीं आई…मधु कब रात को उधर चली गई…?क्या सलोनी ने ये सब किया…?या फिर मधु ही सब कुछ ठीक करके फिर सोई…मेरा दिमाग बिलकुल सुन्न हो गया था…मैंने चाय पीकर अपने कमर का कपड़ा कस कर बांधा.. फिर एक बार बाहर कमरे में देखा….सलोनी शायद रसोई में थी.. उसकी आवाज भी आ रही थी… और शायद कोई और भी था…जिससे वो बात कर रही थी…मगर मेरे दिमाग में अब वो नहीं थी… मैं तो रात के काण्ड से डरा हुआ था…कि ना जाने सलोनी का क्या रुख होगा…??उसे कुछ पता चला या नहीं….मैं जल्दी से मधु की ओर गया और उसको उठाने के लिए उसकी चादर हटाई…क्या नजारा था… सुबह की चमकती रोशनी में मधु का मादक जिस्म चमक रहा था…उसके बदन पर समीज तो थी… मगर वो उसके पेट पर थी…शायद उसने खुद या फिर सलोनी ने उसको समीज पहनाने की कोशिश की होगी… जो केवल कमर तक ही पहना पाई…उसका पूरा जिस्म ही पूरा नंगा मेरे सामने था…उसने अपनी दोनों टांगें घुटनों से मोड़ कर फैला रखी थी…उसकी खुली हुई कोमल चूत मेरे सामने थी…वैसे तो इसको मैं पहले भी देख चुका था पर इस समय उसमे बहुत अंतर था…उसकी चूत बिल्कुल लाल सुर्ख हो रही थी… और एक दो खून के लाल निशान भी दिख रहे थे…ओह… क्या रात मेरे लण्ड ने इस बेचारी को इतना दर्द दिया था…मगर लण्ड तो बहुत जरा सा ही अंदर गया था फिर इसकी चूत इतना कैसे सूज गई…फिर मैंने प्यार से मधु की चूत पर अपना हाथ रखा और धीरे से उसको सहलाया…मुझे लगा कि रात को जोश में मुझे पता नहीं चला पर शायद मधु को बहुत कष्ट हुआ होगा…हो सकता है मेरा लण्ड कुछ ज्यादा ही अंदर तक चला गया हो…फिर मुझे उसकी चूत पर कुछ अलग ही गन्ध आई..अरे यह तो बोरोप्लस की खुशबू थी…इसका मतलब मधु ने रात को बोरोप्लस भी लगाया… इसने एक बार भी मुझे अपने दर्द के बारे में नहीं बताया…मुझे उसके इस दर्द को छुपाने पर बहुत प्यार आया… मैंने उसके होंठों को चूम लिया..तभी मुझे सलोनी के कमरे में आने की आवाज आई…उसके पैरों की आवाज आ रही थी…मैंने जल्दी से मधु को चादर से ढका और बाथरूम में घुस गया…

 
अपडेट 41

मुझे उसकी चूत पर कुछ अलग ही गन्ध आई..अरे यह तो बोरोप्लस की खुशबू थी…इसका मतलब मधु ने रात को बोरोप्लस भी लगाया… इसने एक बार भी मुझे अपने दर्द के बारे में नहीं बताया…मुझे उसके इस दर्द को छुपाने पर बहुत प्यार आया… मैंने उसके होंठों को चूम लिया..तभी मुझे सलोनी के कमरे में आने की आवाज आई…उसके पैरों की आवाज आ रही थी…मैंने जल्दी से मधु को चादर से ढका और बाथरूम में घुस गया…सलोनी कमरे में आकर- अरे आप कहाँ हो जानू…मैं- बोलो जान… बाथरूम में हूँ…सलोनी- ओह ठीक है.. मैं आपको उठाने ही आई थी…उसकी आवाज में कहीं कोई नाराजगी या कुछ अलग नजर नहीं आया… वो हर रोज की तरह ही व्यवहार कर रही थी…मुझे बहुत सुकून सा महसूस हुआ… फिर मुझे लगा कि शायद वो मधु को उठा रही है…अब ये सब मैं नहीं देख सकता था… क्योंकि बाथरूम से केवल बाहर का कमरा या रसोई ही देखी जा सकती है… बैडरूम में नहीं…हाँ मैं दरवाजा खोल देख सकता था मगर मैंने इसमें कोई रूचि नहीं ली.. मेरे दिल को सुकून था कि इतने बड़े कांड के बाद भी सब कुछ ठीक था…मैं नहाकर बाहर आया तो बेडरूम पूरी तरह से व्यवस्थित था, कमरे में कोई नहीं था, मधु और सलोनी दोनों ही रसोई में थी…मैं तैयार हुआ… दस से भी ऊपर हो गए थे… मैं रसोई में ही चला गया…दोनों काम में लगी थीं, दोनों ने रात वाले कपड़े ही पहन रखे थे…मधु ने मुझे देखकर सलोनी से बचकर एक बहुत सेक्सी मुस्कान दी…मैंने भी उसको आँख मार दी तो उसने शरमाकर अपनी गर्दन नीचे कर ली…मैं सलोनी के पास जाकर उसके गोलों मटोल चूतड़ों को सहलाकर बोला- क्या बात जान… आज अभी तक तैयार नहीं हुई?सलोनी नहीं जानू.. मैं भी देर से ही उठी… वो तो भला हो दूध वाले का जिसने उठा दिया सुबह आकर… वरना इतनी थकी थी कि सोती ही रहती…मेरे जरा से सहलाने से ही उसकी पतली नाइटी खिसकी और सलोनी के नंगे चूतड़ मेरे हाथों में थे…मैं सोचने लगा कि सुबह से सलोनी ऐसे ही सब काम कर रही है? वो लगभग नंगी ही दिख रही है उस पतली सी आधी नाइटी में…

जिसके नीचे उसने ब्रा या कच्छी कुछ भी नहीं पहना था… क्या सबके सामने वो ऐसे ही आ-जा रही है?सभी के खूब मजे होंगे…पहले तो मैं उसको कुछ नहीं कहता था मगर अब उसको छेड़ने के लिए मैं बात करने लगा था, मैंने उसके चूतड़ सहलाते हुए ही कहा- क्या बात जानू… कुछ पहन कर दूध लिया या ऐसे ही दूधवाले को जलवा दिखा दिया? वो तो मर गया होगा बेचारा…मधु हमको देखकर मुस्कुरा रही थी…सलोनी भी मस्ती के मूड में ही लग रही थी, अपने चूतड़ों को हिलाये जा रही थी, वो कोई विरोध नहीं कर रही थी- …नहीं जी… दूध लेने के बाद ही यह नाइटी पहनी मैंने !

मैं- हा हा हा… फिर तो ठीक है…

सलोनी- हे हे… आपको तो बस हर समय मजाक ही सूझता है…मैंने उसके नाइटी के गले की ओर देखा… उसके जरा से झुकने से ही उसके दोनों मस्त गोलाइयाँ पूरी नंगी दिख रही थी… उनके निप्पल तक बाहर आ-जा रहे थे…मैं समझ सकता था कि सलोनी के दर्शन कर कॉलोनी वालों के मजे आ जाते होंगे…ना जाने दूधवाले, अंडे वाले और भी किसी ने क्या क्या देखा होगा…अब जब सलोनी को दिखाने में मजा आता है तो मैं उसके इस आनन्द को नहीं छीन सकता था, उसको भी मजे लेने का पूरा हक़ है…नाश्ता करते हुए रात की किसी बात का कोई जिक्र ना तो सलोनी ने किया और ना ही मधु ने…मेरे दिल में जो थोड़ा बहुत डर था वो भी निकल गया…हाँ सलोनी ने एक बात की जिसके लिए मुझे कोई ऐतराज नहीं था- जानू एक बात कहनी है…

मैं- बोलो… आज बाजार जाना है, पैसे चाहिएँ?

सलोनी- नहीं…हाँ…अरे वो तो है… पर एक और बात भी है…मैं- तो बोलो न जानू… मैंने कभी तुमको किसी भी बात के लिए मना किया है क्या?

सलोनी- वो विनोद को तो जानते हो ना आप? मेरे साथ जो पढ़ते थे…मैंने दिमाग पर जोर डाला पर कुछ याद नहीं आया… हाँ उसने एक बार बताया तो था…वैसे सलोनी ने एम० ए० किया है… और एम० एड० भी… उस समय उसके साथ कुछ लड़के भी पढ़ते थे पर मुझे उनके नाम याद नहीं आ रहे थे…एक बार उसने मुझे मिलवाया भी था… हो सकता है…उन्ही में कोई हो…

मैं- हाँ यार…पर कुछ याद नहीं आ रहा…

सलोनी- विनोद भाईजी ने यहाँ एक स्कूल में जगह बताई है… उसका कॉल लेटर भी आया है… मैं पूरे दिन बोर हो जाती हूँ.. क्या मैं यह जॉब कर लूँ?मैं उसकी किसी बात को मना नहीं कर सकता था फिर भी- यार, तुम घर के काम में ही इतना थक जाती हो, फिर ये सब कैसे कर पाओगी?

सलोनी- आपको तो पता ही है… मुझे जॉब करना कितना पसंद है… प्लीज हाँ कर दो ना… मैं मधु को यहाँ ही काम पर रख लूँगी, यह मेरी बहुत सहायता कर देती है, मैंने इसके मां से भी बात कर ली है…सलोनी पूरी तरह मेरे ऊपर आ मुझे चूमकर मनाने में लगी थी…मैं कौन सा उसको मना कर रहा था- अरे जान… मैं कोई मना थोड़े ही कर रहा हूँ… पर कैसे कर पाओगी इतना सब? बस इसीलिए… मुझे तुम्हारा बहुत ख्याल है जान

 


अपडेट 42

सलोनी- हाँ मुझे पता है… पर मुझे करनी है ये जॉब…जब नहीं हो पायेगी तो खुद छोड़ दूंगी…

मैं- कहाँ है जानू ये स्कूल…

सलोनी- वो… उस जगह… ये… नाम है स्कूल का !

मैं- ओह, फिर यह तो बहुत दूर है… रोज कैसे जा पाओगी?

सलोनी- बहुत दूर है क्या…?

मैं- हाँ जान…

सलोनी- चलो फिर ठीक है मैं जाकर देखती हूँ… अगर ठीक लगा तो ही हाँ करुँगी…

मैं- जैसा तुम ठीक समझो… और ये लो पैसे… मैं चलता हूँ… जो खरीदना हो खरीद लेना… और इस पागल को भी कुछ कपड़े दिला देना…

मधु- उउन्न्न्न… क्या कह रहो भैया?मैं यह सोचकर ही खुश था कि मधु अब ज्यादा से ज्यादा मेरे पास रहेगी और मैं उससे जब चाहे मजे ले सकता हूँ…मैं अपना बेग लेकर बाहर को आने लगा पर दरवाजा खोलते ही अरविन्द अंकल सामने दिख गए…

अंकल- अरे बेटा.. आज अभी तक यहीं हो, क्या देर हो गई?

मैं मन ही मन हंसा…- ओह यह सोचकर आया होगा कि मैं चला गया हूँगा…

मैं- बस जा ही रहा हूँ अंकल…मैं बिना उनकी और देखे बाहर निकल गया…बुड्ढा बहुत बेशर्म था, मेरे निकलते ही घर में घुस गया…अब मुझे याद आया कि ‘ओह… आज तो मैंने वो वीडियो रिकॉर्डर भी ओन कर सलोनी के पर्स में नहीं रखा…’अब आज के सारे किस्से के बारे में कैसे पता लगेगा…सोचते हुए कि अंकल ना जाने मेरी दोनों बुलबुलों के साथ ‘जो लगभग नंगी ही हैं…’ क्या कर रहा होगा…मैं जैसे ही अरविन्द अंकल के घर के सामने से निकला, उनका दरवाजा खुला था…मुझे भाभी कि याद आ गई और मैं दरवाजे के अंदर घुस गया…मैंने दिमाग से सलोनी, मधु और अरविन्द अंकल को बिल्कुल निकाल दिया था…मुझे अब कोई चिंता नहीं थी सलोनी चाहे जिससे कैसा भी मजा ले और अब मैं अब केवल जीवन को रंगीन बनाने पर विश्वास करने लगा था…मुझे पूरा विश्वास था की सलोनी कितनी भी बिंदास हो मगर ऐसा कुछ नहीं करेगी जिससे बदनामी हो…वो बहुत समझदार है… जो भी करेगी बहुत सोच समझ कर…मैं अरविन्द अंकल का घर का दरवाजा खुला देखकर उसमें घुस गया…पहले मुझे ऑफिस के अलावा कुछ नहीं दिखता था, चाहे कुछ हो जाये मैं समय पर ऑफिस पहुँच ही जाता था पर अब मेरा मन काम से पूरी तरह हट गया था… हर समय बस मस्ती का बहाना ढूंढ़ता था…मुझे याद है पिछले दिनों ऐसे ही एक बार सलोनी ने नलिनी भाभी (अरविन्द अंकल की बीवी) को कुछ सामान देने को कहा था…एक बात याद दिला दूँ कि अरविन्द अंकल भले ही 60 साल के हों पर नलिनी भाभी उनकी दूसरी बीवी हैं…वो 36-38 साल जी भरपूर जवान और सेक्सी महिला हैं… उनका एक एक अंग गदराया और साँचे में ढला है…38-28-37 की उनकी काया उनको सेक्स की देवी जैसी खूबसूरत बना देता है…पहले वो साड़ी या सलवार सूट ही पहनती थी क्योंकि वो किसी गाँव परिवेश से ही आई थीं और उनका परिवार गरीब भी था मगर अब सलोनी के साथ रहकर वो मॉडर्न कपड़े पहनने लगी थीं और सेक्सी मेकअप भी करने लगीं थीं…कुल मिलाकर वो जबरदस्त थीं…उनके साथ हुआ वो पिछला किस्सा मुझे हमेशा याद रहने वाला था… जब मैं सलोनी का दिया सामान देने उनके घर पहुचा तो दरवाजा ऐसे ही खुला था…अरविन्द अंकल की हमेशा से आदत थी कि जब वो आस पास कहीं जाते थे तब दरवाजा हल्का सा उरेक कर छोड़ देते थे…वैसे भी यहाँ कोई वाहर का तो आता नहीं था और इस बिल्डिंग पर हमारे आखिरी फ्लैट थे इसीलिए वो थोड़े लापरवाह थे…उस दिन जैसे ही मैं नलिनी भाभी को आवाज लगाने वाला था तो मैंने देखा कि…नलिनी भाभी अंदर वाले कमरे में बालकनी वाला दरवाजा खोले, जिससे हलकी धूप कमरे में आ रही थी, केवल एक पेटकोट अपने सीने पर छातियों के ऊपर बांधे अपने बालों को तौलिये से झटक रहीं हैं…उनके बाल पूरे आगे उनके चेहरे को ढके थे… उनका पेटीकोट उनके विशाल चूतड़ों से बस कुछ ही नीचे होगा… जो उनके झुके होने से थोड़ा थोड़ा वो दृश्य दिखा रहा था, पर ऐसा दृश्य देखकर भी मेरे मन में कोई ज्यादा रोमांच नहीं आया…बल्कि डर लगा कि यार… ये मैंने क्या देख लिया… अगर भाभी या अंकल किसी ने भी मुझे ऐसे देख लिया तो क्या होगा…???मैं वहां से जाने ही वाला था कि तभी…भाभी ने एक तौलिये को एक झटका दिया और उनका पेटीकोट शायद ढीला हो गया, मैंने साफ़ देखा कि भाभी कि दोनों चूचियाँ उछल कर बाहर निकल आई…उनका पेटीकोट ढीला होकर उनके पेट तक आ गया था…अब इस दृश्य ने मेरी जाने की इच्छा को विराम लगा दिया…उनके बार-बार तौलिया झटकने से उनके दोनों उरोज ऐसे उछल रहे थे कि बस दिल कर रहा था को जाकर उनको पकड़ लूँ…भाभी चाहे कितनी भी सेक्सी थी पर अंकल की बीवी यानी आंटी होने के नाते मैंने कभी उनको इस नजर से नहीं देखा था…पर आज उनके नंगे अंग देख मेरी सरीफों वाली नजर भी बदल गई थी…शायद इसीलिए कहा जाता होगा कि आजकल लड़कियों के इतने खुले वस्त्रों के कारण ही इतने ज्यादा बलात्कार हो रहे हैं…भाभी के उछलते मम्मे मेरे को अपनी ओर आकर्षित कर रहे थे… मगर मेरा ईमान मुझे रोके था…मेरे इच्छा और भी

देखने की होने लगी…मैं सोचने लगा कि काश उनके गद्देदार चूतड़ भी दिख जायें… और यहाँ भी भगवान से प्रार्थना कर रहा था कि अंकल अभी वापस ना आएं…और शायद भगवान ने मेरी सुन ली…भाभी तौलिये को वहीं स्टूल पर रख, एक कोने पर रखे ड्रेसिंग टेबल की ओर जाने लगीं और जाते हुए ही उन्होंने अपना पेटीकोट चूतड़ों से नीचे सरकाते हुए पूरा निकाल दिया…उनकी पीठ मेरी ओर थी… पीछे से पूरी नंगी नलिनी भाभी मुझे जानमारू लग रही थी….!उनकी नंगी गोरी पीठ और विशाल गोल उठे हुए चूतड़… गजब का नज़ारा पेश कर रहे थे…उनके दोनों चूतड़ आपस में इस कदर चिपके थे कि जरा सा भी गैप नहीं दिख रहा था…फिर भाभी दर्पण के सामने खड़ी हो अपने बाल कंघे से सही करने लगी…मुझे दर्पण का जरा भी हिस्सा नहीं दिख रहा था… मैं दर्पण से ही उनके आगे का भाग या यूँ कहो कि उनकी चूत को देखना चाह रहा था…मगर मेरी किस्मत इतनी अच्छी नहीं थी…भाभी ने वहीं टेबल से उठा अपनी कच्छी पहन ली और फिर ब्रा भी…फिर वो घूम कर जैसे ही आगे बढ़ी…उनकी नजर मुझ पर पड़ी…भाभी ने ‘हाय राम !’ कहते हुए तौलिये को उठा कर खुद को आगे से ढक लिया.मैं ‘सॉरी’ बोल कर उनको सामान देकर वापस आ गया.उस दिन के इस वाकिये का कभी कोई जिक्र नहीं हुआ था…बस सलोनी ने ही एक बार कुछ कहा था जिसका मेरे से कोई मतलब नहीं था…हाँ तो आज फिर दरवाजा खुला देख मैं अंदर चला गया…आज मेरे पास कोई बहाना नहीं था, ना ही मैं उनको कुछ देने आया था मगर मेरी हिम्मत इतनी हो गई थी कि आज अगर भाभी वैसे मिली तो चाहे जो हो…आज तो पकड़ कर अपना लण्ड पीछे से उनके चूतड़ों में डाल ही दूंगा…यही सोचते हुए मैं अंदर घुसा… बाहर कोई नहीं था… इसका मतलब भाभी अंदर वाले कमरे में ही थी…और मैंने चुपके से अंदर वाले कमरे में झाँका…अह्हा…

कहानी जारी रहेगी.

 
अपडेट 43

आज मेरे पास कोई बहाना नहीं था, ना ही मैं उनको कुछ देने आया था मगर मेरी हिम्मत इतनी हो गई थी कि आज अगर भाभी वैसे मिली तो चाहे जो हो…आज तो पकड़ कर अपना लण्ड पीछे से उनके चूतड़ों में डाल ही दूंगा…यही सोचते हुए मैं अंदर घुसा… बाहर कोई नहीं था… इसका मतलब भाभी अंदर वाले कमरे में ही थी…और मैंने चुपके से अंदर वाले कमरे में झाँका…अह्हा…भाभी ना दोनों कमरों में थी और ना बाथरूम में…मैंने सब जगह देख लिया था… मैं बाहर वाले कमरे के साइड में देखा वहाँ उनकी रसोई है… हो सकता है वो वहाँ हों…और मुझे भाभी जी दिख गई… सफ़ेद टाइट पजामी और शार्ट ब्लैक कुर्ती पहने वो रसोई में काम कर रही थीं..कुर्ती उनके चूतड़ों के आधे भाग पर टिकी थी… भाभी के चूतड़ इतने विशाल और ऊपर को उठे हुए थे कि कुर्ती के बावजूद पूरे दिख रहे थे…भाभी की सफ़ेद पजामी उनके जाँघों और चूतड़ पर पूरी तरह से कसी हुई थी…कुल मिलाकर भाभी बम लग रही थी…मैंने अपना बैग वहीं कमरे में रखा और पीछे से भाभी के पास पहुँच गया…मैं अभी कुछ करने की सोच ही रहा था मैंने देखा कि नलिनी भाभी आटा गूंध रही थी, उन्होंने शायद मुझे नहीं देखा था और ना ही पहचाना था…पर शायद उनको एहसास हो गया था कि कोई है… और वो उनके पति अरविन्द अंकल ही हो सकते हैं…

वो बिना पीछे घूमे बोली- अरे सुनो… जरा मेरी पीठ में खुजली हो रही है…जरा खुजा दो…वो एक हाथ से बालों को सही करते हुए सीधे हाथ से आटा गूंधने में मग्न थीं…मैंने भी कुछ और ना सोचते हुए उनके मस्त बदन को छूने का मौका जाया नहीं किया…रात मधु के साथ मस्ती करने के बाद मेरा अब सारा डर पहले ही ख़त्म हो गया था…भाभी को अगर बुरा लगा भी तो क्या होगा… ज्यादा से ज्यादा वो सलोनी से ही कहेंगी…और मुझे पक्का यकीन था कि वो सब कुछ आराम से संभाल लेगी…मैंने भाभी की टाइट कुर्ती को उठाकर अपना हाथ अंदर को सरका दिया…वो सीधी हो खड़ी हो गई तो कुर्ती आराम से उनके पेट तक ऊपर हो गई मगर और ज्यादा ऊपर नहीं हुई, वो उनके वक्ष-उभारों पर अटक गई…नलिनी भाभी की सफ़ेद, बाल रहित चिकनी पीठ आधी नंगी मेरे सामने थी…मैं हाथ से सहलाने लगा…

नलिनी भाभी- अरे नाखून से खुजाओ न… पसीने से पूरी पीठ में खुजली हो रही है…मन में सोचा कि बोल दूँ कि कुर्ती उतार दो… आराम से खुजा देता हूँ…पर मेरी आवाज वो पहचान जाती… इसलिए चुप रहा…मैंने हाथ कुर्ती के अंदर तक घुसा कर ऊपर उनकी गर्दन और कंधों तक ले गया…अंदर कोई वस्त्र नहीं था…वाह… नलिनी भाभी ने ब्रा भी नहीं पहनी थी… उनके मम्मे नंगे ही होंगे…मन ने कहा कि अगर जरा से जोर लगाकर कुर्ती ऊपर को सरकाऊ तो आज फ़िर मम्मे नंगें दिख जायेंगे…तभी मेरी नजर खुजाते हुए ही नीचे की ओर गई…सफेद टाइट पजामी इलास्टिक वाली थी, पजामी उनके चूतड़ के ऊपरी भाग तक ही थी… उनके चूतड़ के दोनों भाग का ऊपरी गड्डा जहाँ से चूतड़ों की दरार शुरू होती है, पजामी से बाहर नंगा था और बहुत सेक्सी लग रहा था…मैं जरा पीछे खिसका और पूरे चूतड़ों का अवलोकन किया…टाइट पजामी में कहीं भी मुझे पैंटी लाइन या कच्छी का कोई निशान नहीं दिखा…इसका मतलब नलिनी भाभी ने कच्छी भी नहीं पहनी थी…बस मेरा लण्ड उनके चूतड़ के आकार को देखते ही खड़ा हो गया…और मेरी हिम्मत इतनी बढ़ गई… कि मैंने पीठ के निचले भाग को सहलाते हुए अपनी उँगलियाँ उनकी पजामी में घुसा दी…नलिनी भाभी के नर्म गोश्त का एहसास होते ही लण्ड बगावत करने को तैयार हो गया…यह मेरे लिए अच्छा ही था कि भाभी ने एक बार भी पीछे मुड़कर नहीं देखा… और भाभी भी लगता था कि हमेशा मूड में ही रहती थी…उन्होंने एक बार भी नहीं रोका बल्कि बात भी ऐसी करी जो हमेशा से मैं चाहता था…

नलिनी भाभी- ओह, आपसे तो एक काम बोलो…आप अपना मौका ढूंढ लेते हो… क्या हुआ?? बड़ी जल्दी आ गए आज सलोनी के यहाँ से…? हा… हा… क्या आज कुछ देखने को नहीं मिला… या अंकुर अभी घर पर ही था?ओह इसका मतलब नलिनी भाभी सब जानती हैं कि अरविन्द अंकल मेरे यहाँ क्यों जाते हैं और वो वहाँ क्या करते हैं…मैंने कुछ ना बोलते हुए अपना हाथ कसकर पूरा पजामी के अंदर घुसा दिया और भाभी के एक चूतड़ को अपनी मुट्ठी में लेकर कसके दबा दिया…

नलिनी भाभी- अह्ह्ह्ह्हाआआआआ…मेरे सीधे हाथ की छोटी उंगली चूतड़ के गैप में अंदर को घुस गई और मुझे उनकी चूत के गीलेपन का भी पता चल गया…मैंने छोटी उंगली को उनकी चूत के ऊपर कुरेदते हुए हिलाया तो भाभी ने कसकर अपने चूतड़ों को हिलाया…

नलिनी भाभी- ओह क्या करने लगे सुबह सुबह… फिर पूरा दिन बेकार हो जायेगा… क्या फिर सलोनी को नंगा देख आये… जो हरकतें शुरू कर दी…?बस मैंने जोश में आकर अपने बाएं हाथ से उनकी पजामी की इलास्टिक को नीचे सरकाया और पजामी दोनों हाथ से पकड़ उनके चूतड़ों से नीचे सरका दिया.उन्होंने अपनी कमर को हिला बहुत हल्का सा विरोध किया पर उनके हाथआटे से सने थे इसलिए अपने हाथ नहीं लगाये… पर कमर हिलाने से आसानी से उनकी पजामी चूतड़ से नीचे उतर गई…अब उनके सबसे सेक्सी चूतड़ मेरे सामने नंगे थे… दोनों चूतड़ एक तो सफ़ेद-गुलाबी रंगत लिए… गोल आकार लिए हुए… एक दूजे से चिपके…मनमोहक दृश्य प्रस्तुत कर रहे थे…मैंने एक हल्की से चपत लगा दोनों को हिलाया और दोनों हाथों से दोनों चूतड़ों को अपनी मुट्ठी में भर लिया….!तभी…

नलिनी भाभी- अरईए… आररर्र… ए… अंकुर… आअप पप इइइइइइइ…जिसका सपना काफी समय से देख रहा था आज वो पूरा होता नजर आ रहा था…ये सब गदराये अंग मैंने कुछ समय पहले भी नंगे देखे थे… मगर कुछ दूरी से देखा… वो भी कुछ पल के लिए…तो कुछ ठीक से दिखाई नहीं दिया था पर इस समय सभी मेरी आँखों के सामने नंगे थे… बल्कि मेरे हाथो के नीचे थे… मैं इन सबको छू रहा था मसल रहा था…मैं अपनी किस्मत पर नाज कर रहा था कि कल रात एक कुंवारी कली पूरी नंगी मेरे बाहों में थी और आज एक अनुभवी सेक्सी हुस्न से मैं खेल रहा था…एक मुझसे बहुत छोटी थी… सेक्स से बिल्कुल अनजान… केवल खेल समझने वाली… और ये मुझसे बड़ी… सेक्स की देवी… सेक्स को पढ़ाने और सिखाने वाली…नलिनी भाभी की कुर्ती उनके छाती तक उठी थी… और उनकी पजामी मैंने चूतड़ों से खिसका कर काफी नीचे कर दी थी…उन्होंने ब्रा, कच्छी कुछ भी नहीं पहनी थी…उनका लगभग नंगा जिस्म मचल रहा था…और जवानी को जितना तड़पाओ, उतना मजा आता है.मैं भाभी के दोनों चूतड़ अच्छी तरह मसल रहा था…

नलिनी भाभी- ओह अंकुर, तुम कब आ गए… आहहाआ और ये क्या कर रहे हो?अह्हा…

कहानी जारी रहेगी.

 


अपडेट 44

तभी…नलिनी भाभी- अरईए… आररर्र… ए… अंकुर… आअप पप इइइइइइइ…मैं भाभी के दोनों चूतड़ अच्छी तरह मसल रहा था…

नलिनी भाभी- ओह अंकुर, तुम कब आ गए… आहहाआ और ये क्या कर रहे हो? अह्हा… देखो अभी छोड़ दो… ये कभी भी आ सकते हैं…उन्होंने खुद को छुड़ाने का जरा भी प्रयास नहीं किया बल्कि और भी सेक्सी तरीके से चूतड़ हिला हिला कर मुझे रोमांचित कर रही थीं…मैंने एक हाथ उनकी पीठ पर रख उनको झुकने का इशारा किया…वो वाकयी बहुत अनुभवी थी… मेरे उनकी नंगी कमर पर हाथ रखते ही वो समझ गई…नलिनी भाभी अपने आप रसोई की स्लैप पर हाथ रख अपने चूतड़ों को ऊपर को उठा कर झुक गई… उन्होंने बहुत सेक्सी पोज़ बना लिया था…मैंने नीचे उकड़ू बैठ उनके चूतड़ों के दोनों भाग अपने हाथों से फैला लिये… और अब उनके दोनों स्वर्ग के द्वार मेरे सामने थे…वाह… भाभी ने भी अपने को कितना साफ़ रखा था… कोई नहीं कह सकता था कि उनकी उम्र चालीस को छूने वाली है…उनके दोनों छेद बता रहे थे कि वो चुदी तो बहुत हैं, उनकी चूत अंदर तक की लाली दिखा रही थी… और गांड का छेद भी कुछ फैला सा था…मगर उन्होंने अपना पूरा क्षेत्र बहुत चिकना और साफ़ सुथरा किया हुआ था…मेरी जीभ इतने प्यारे दृश्य को केवल दूर से देखकर ही संतुष्ट नहीं हो सकती थी…मैंने अपने थूक को गटका और अपनी जीभ नलिनी भाभी की चूत पर रख दी…मैंने कई गरम गरम चुम्मे उनकी चूत और गांड के छेद पर किये…फिर अपनी जीभ निकाल कर दोनों छेदों को बारी बारी चाटने लगा और कभी कभी अपनी जीभ उनकी चूत के छेद में भी घुसा देता था…भाभी मस्ती में आहें और सिसकारियाँ ले रही थी- …अह्ह्ह्ह्हा…आआआ… आए… ओओ… ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह… आहा… आउच… अह्हा… अह्ह… आअह ओह…ह्ह… माआअ… आआइइइइ… उउउ…ना जाने कितनी तरह की आवाजें उनके मुख से निकल रही थीं…उनके घर का दरवाजा, मेन गेट से लेकर यहाँ रसोई तक सब पूरे खुले थे… मुझे भी कुछ याद नहीं था… मैं तो उनके नंगे हुस्न में ही पागल हो गया था…अब मैंने उनकी पजामी को नीचे उतारते हुए भाभी के गोरे पैरों के पंजों तक ले आया…उन्होंने मुस्कुराते हुए पैर उठाकर पजामी को पूरा अलग कर दिया… अब वो मेरी और घूमकर रसोई की स्लैब पर बैठ गई… भाभी ने अपना बायाँ पैर उठाकर स्लैब पर रख लिया…इस अवस्था में उनकी चूत पूरी तरह खिलकर सामने आ गई…मैं उकड़ू बैठा बैठा आगे को खिसक उनकी चूत को अपने हाथ से सहलाने लगा…चूत उनके पानी और मेरे थूक से पूरी गीली थी… मैंने उनके चूत के दाने को छेड़ा…

नलिनी भाभी- आह्ह्ह्हाआआ खा जा इसे… ओह !वो मेरे बाल पकड़ मेरे सर को फिर से चूत पर दबाने लगी… मैं एक बार फिर उनकी चूत चाटने लगा…पर मुझे मौके का आभास था और मैं आज ही सब कुछ कर मौका अपने हाथ में रखना चाह रहा था…मेरा लण्ड भी कल से प्यासा था, उसमें एक अलग ही तड़फ थी, कल उसे चूत तो मिली थी पर वो उसमें जा नहीं पाया था…और आज एक परिपक्व चूत अपना मुख खोले निमन्त्रण दे रही है… मैं आज कोई मौका खोना नहीं चाहता था…मैं खड़ा हुआ और मैंने पेंट की चैन खोल अपने लण्ड को आज़ाद किया…लण्ड सुपाड़ा बाहर निकाले चूत को देख रहा था…भाभी भी आँखे में लाली लिए लण्ड को घूर रही थीं, उन्होंने हाथ बढ़ाकर खुद ही लण्ड को पकड़ लिया…नलिनी भाभी अब किसी भी बात को मना करने की स्थिति में नहीं थीं…मैं आगे को हुआ… लण्ड ठीक चूत के मुख पर टिक गया…कितनी प्यारी पोजीशन बनी… मुझे जरा सा भी ऊपर या नीचे नहीं होना पड़ा…भाभी ने खुद लण्ड अपने चूत पर सही जगह टिका दिया….!मैं भी देर करने के मूड में नहीं था, मैंने कसकर एक जोर सा धक्का मारा…और… धाआआआ प्प्प्प्प्प्प्प्प्प्प्प्प फ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़्क्क्क्क्क्क्क्क की आवाज के साथ लण्ड अंदर…मैंने कमर पर जोर लगाते हुए ही पूरा लण्ड अंदर तक सरका दिया…चूत की गर्मी और चिकनाहट ने मेरा काम बहुत आसान कर दिया था… अब मेरा पूरा लण्ड चूत के अंदर था…मैं बहुत आराम से खड़ी पोजीशन में था… मैंने तेजी से धक्के देने शुरू कर दिए थे…नलिनी भाभी बहुत बेकरार थी… उन्होंने खुद अपनी कुर्ती अपनी चूचियों से ऊपर कर अपनी मदमस्त चूची नंगी कर दी थीं… और उनको अपने हाथ से मसल रही थी…मैं उनकी मनसा समझ गया, मैंने अपने हाथ उनकी मुलायम चूची पर रख उनका काम खुद करने लगा…मेरे कठोर हाथों में मुलायम चूची का अकार पल प्रतिपल बदलने लगा…

नलिनी भाभी- अह्ह्ह्हाआ… जल्दी करो… अंकुर… तुम्हारे अंकल आ गये तो मुझे मार ही डालेंगे…

मैं- अऊ ओह ह्ह्ह्ह्ह्ह… अरे कुछ नहीं होगा… वो वहाँ सलोनी के साथ हैं…

नलिनी भाभी- अह्ह्हाआ… हाँ… पर वो कभी भी आ सकते हैं…

मैं- अरे आने दो… वो भी तो सलोनी से मजे ले रहे हैं…

नलिनी भाभी- अरे नहींईईईई वो तो केवल देखते हैं… मगर मुझे बहुत चाहते हैं… इस तरह चुदते देख मार ही डालेंगे…

मैं- क्या कह रही हो भाभी? क्या वो सलोनी को नहीं चोदते?

नलिनी भाभी- नहीं पागल…उन्होंने केवल उसको नंगी देखा है… जैसा तूने मुझे देखा था… मैंने उनको बता दिया था… तो उन्होंने भी मुझे बता दिया… बस्स्स्स्स्स्स्स्स्स…

मैं- अरे नहीं भाभी… आप को कुछ नहीं पता… उन दोनों में और भी बहुत कुछ हो चुका है…

नलिनी भाभी- तू पागल है… अह्ह्हाआ अहा… कुछ नहीं हुआ… और वो अब किसी लायक भी नहीं हैं… उनका तो ठीक से खड़ा भी नहीं होता… ओह उफ़्फ़्फ़्फ़्फ़ और तेज अहा… मजा आ गया… कुछ मत बोल अह्ह्ह… आज बहुत दिनों बाद… अह्ह्ह ह्ह्ह्ह मेरे को करार आया है…

मैं- चिंता मत करो भाभी… अब जब आप चाहो… यह लण्ड तुम्हारा ही है… ओह ह्ह्हह्ह्…

नलिनी भाभी- अह्ह्ह्हाआआआ ह्ह्ह… वैसे शक तो मुझे भी है… कि ये सलोनी के यहाँ कुछ ज्यादा ही रहने लगे हैं.. तू अह्ह्ह्हाआ ह्ह्ह अह्हा… अब मैं ध्यान रखूंगी… और करने दे उनको… तेरे लिए मैं हूँ ना अब… इसको तो तू ही ठंडा कर सकता है…

मैं- अह्ह्ह अह्ह्ह्ह्ह… ह्ह्ह्ह्ह्ह… हाँ भाभी मैंने दोनों को चिपके और चूमते सब देखा था… सलोनी अंकल का लण्ड भी सहला रही थी…अह्ह्ह्ह्हा…आआआआ…

नलिनी भाभी- हाँ एक बार मैंने भी देखा था… हाआआआअह्हह्हह

मैं – क्याआआआआआ बताओ न…

नलिनी भाभी – हाँ अह्ह्ह्हाआ हाँ… अह्ह्ह्ह्ह् उफ़्फ़्फ़्फ़्फ़… मजा आ रहा है… अह्ह्ह ओ ओ ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह…उ उ उउउउउअह्हा…

कहानी जारी रहेगी.
 
अपडेट 45

नलिनी भाभी- हाँ एक बार मैंने भी देखा था… हाआआअह्हह्हह…

मैं – क्याआआआआआ बताओ न…

नलिनी भाभी – हाँ अह्ह्ह्हाआ हाँ… अह्ह… उफ़्फ़… मजा आ रहा है…मेरा लण्ड एक लयबद्ध तरीके से नलिनी भाभी की मस्त चूत में अठखेलियाँ कर रहा था, मैं अपने हाथों से उनकी चूचियों को मसल रहा था, कभी हल्के से तो कभी पूरी कसकर…कभी कभी मैं उनके चुचूक भी अपनी अंगुली और अंगूठे की साहयता से मसल देता…नलिनी भाभी लगातार सिसकारियां भर रही थीं- अह्ह्ह्ह्हाआआआ… ओह… ह्ह्ह… उफ़्फ़्फ़्फ़… अह्ह्हाआआ…मेरे होंठ सूखने लगे… मैं उनके लाल होंठों को चूसना चाह रहा था… बस यही करने की मेरी हिम्मत नहीं हो रही थी, मैं आगे बढ़कर उनके होंठो को अपने मुँह में नहीं ले पा रहा था…शायद इसलिए क्योंकि भाभी मुझसे उम्र में बड़ी थी…तभी भाभी ने आगे को बढ़कर अपना सर आगे किया, मुझे अपनी और झुकाया और मेरे होंठो को चूम लिया…शायद इसीलिए सेक्स करने के बाद हम लोग इतना करीब आ जाते हैं… एक दूसरे की भावनाओं को कितना जल्दी समझ जाते हैं…मैं भाभी के होंटों को चूसने लगा…तभी भाभी ने कसकर मुझे पकड़ लिया और मुझे अपने लण्ड पर गर्म गर्म अहसास हुआ…नलिनी भाभी ने अपना पानी छोड़ दिया था…

नलिनी भाभी- अह्ह्ह्ह्हाआआ… अह्ह्ह्ह… ह्ह्ह… ओह… नहीईइइइइइइइइइइइ… अह्ह्ह्ह… अह्ह्हह्ह्ह… आआआअ…वो कसकर मुझे चिपकाये थीं… मेरा लण्ड उनकी चूत में पूरी तरह कसा था…मैंने भी उनकी चूचियों को पकड़ा, फिर से खड़ा हुआ और तेज तेज धक्के दिए…अब मेरा भी निकलने वाला था… मैंने अपना लण्ड बाहर निकालने के लिए पीछे हट ही रहा था कि…

नलिनी भाभी- ओह नहींईईईईई अंदर ही डाल दो… बहुत दिन से इसको पानी नहीं लगा है… जल्दी करो ओ ओ ओ आआअ…

मैं- ओह अह्ह्ह्ह्ह्ह… अगर कुछ रुक गया तो…क्या होगा???

नलिनी भाभी- अह्ह्ह्ह्ह्ह ह्ह्ह कुछ नहीं होगा… मैं अब इस मजे को नहीं जाने दूंगी… अह्ह्ह्ह्ह…और मैंने उनको कसकर पकड़ लिया… मेरे लण्ड से पिचकारी निकलने लगी जो एक के बाद एक उनके चूत में जा रही थीं…भाभी मस्ती से आँखें बंद किये मेरी हर पिचकारी का आनन्द ले रही थी…

नलिनी भाभी- अह्ह्ह्हह… आज तूने अपनी भाभी को तृप्त कर दिया अंकुर… आज से ये अब तेरी है… तू इसका ध्यान रखना… नियम से इसमें पानी डालते रहना…

मैं- हाँ हाँ भाभी… अब तो मेरा लण्ड भी आपको नहीं छोड़ेगा… कितनी प्यारी हो आप… और आपकी यह चूत… आई लव यू भाभी…

.!नलिनी भाभी- आई लव यू टू… पुच पुचउन्होंने मेरे सब जगह चूम लिया…सच बहुत हॉट है नलिनी भाभी…अब लण्ड से पानी निकलने के बाद मुझे सलोनी की याद आई…भाभी नंगी अपने चूतड़ों की ओर से कपड़ा डाल अपनी चूत साफ़ कर रही थी…“भाभी और क्या देखा था आपने? अंकल ने भी सलोनी को चोद दिया है ना? मुझे तो ऐसा ही लगता है…!”

नलिनी भाभी- अरे नहीं रे… ऐसा तो मुझे नहीं लगता… पर हाँ दोनों एक दूसरे को नंगा देख चुके हैं… चुम्मा चाटी भी होती रहती है…

मैं- अरे आपने क्या देखा वो बताओ ना…??नलिनी भाभी- अब तू फिर जाकर लड़ेगा ना सलोनी से…

मैं- अरे अब मैं क्यों लड़ूंगा…?? मुझे तो इतनी प्यारी भाभी मिल गई ना अब चोदने के लिए…

नलिनी भाभी- ओ हाँ… सुन मैंने 2-3 बार उनको चूमते हुए देखा है…

मैं- बस स्स्स्स्स्स्स? वो तो मैंने कितनी बार देखा है… वो तो जब भी आते हैं…मेरे सामने ही सलोनी के गालों को चूमते हैं… ये तो अलग बात हुई ना…

नलिनी भाभी- अरे वैसे नहीं पागल… एक बार जब मैं गैलरी में थी तो तुम्हारे अंकल सलोनी के पास ही गए थे… मैंने वैसे ही रसोई में झांक लिया तो तुम्हारे अंकल सलोनी को चिपकाये उसके होंठों को चूस रहे थे….

मैं- बस इतना ही ना…

नलिनी भाभी- और उनके हाथ सलोनी के नंगे चूतड़ों पर थे…जिनको वो मसल रहे थे… तुमको तो पता ही है कि वो कितनी छोटी गाउन पहनती है और कच्छी पहनती नहीं है… या हो सकता है कि इन्होंने उतार दी हो…

मैं- तो फिर तो आगे भी कुछ किया होगा उन्होंने…

नलिनी भाभी- मुझे भी यही लगा था… पर फिर कुछ देर बाद ही ये वापस आ गए थे…

मैं- और क्या क्या देखा आपने??

नलिनी भाभी- बस ऐसा ही कुछ और भी देखा था… फिर बाद में बता दूंगी…उन्होंने अपनी पजामी सीधी कर पहनते हुए कहा…मुझे भी अब सलोनी को देखने की इच्छा होने लगी थी…मैंने मोबाइल निकाल समय देखा… करीब आधा घंटा मुझे घर से निकले हो गया था… मधु भी वहाँ थी तो अरविन्द अंकल सलोनी से ज्यादा मजा तो नहीं ले पाये होंगे… और मैंने तो यहाँ पूरा काम ही कर दिया था…पर कहीं ना कहीं दिल सलोनी के बारे में जानने को कर रहा था…तभी नलिनी भाभी ने मेरे लण्ड को भी कपड़े से साफ़ किया… फिर उसको चूमकर मेरी पैंट में कर दिया…मैंने उनको चूमा और वहाँ से निकल आया…मैंने अपने फ्लैट की ओर देखा… दरवाजा बंद था…

कहानी जारी रहेगी.

 
अपडेट 46

मैंने मोबाइल निकाल समय देखा… करीब आधा घंटा मुझे घर से निकले हो गया था… मधु भी वहाँ थी तो अरविन्द अंकल सलोनी से ज्यादा मजा तो नहीं ले पाये होंगे… और मैंने तो यहाँ पूरा काम ही कर दिया था…

पर कहीं ना कहीं दिल सलोनी के बारे में जानने को कर रहा था…

तभी नलिनी भाभी ने मेरे लण्ड को भी कपड़े से साफ़ किया… फिर उसको चूमकर मेरी पैंट में कर दिया…

मैंने उनको चूमा और वहाँ से निकल आया…

मैंने अपने फ्लैट की ओर देखा… दरवाजा बंद था… मतलब अंकल अभी भी अंदर ही थे…

मैं अभी प्लान कर ही रहा था कि मुझे सीढ़ियों से मधु आती नजर आई…

मैं चोंक गया… मधु यहाँ है… तो क्या बंद फ्लैट के अंदर अंकल और सलोनी अकेले हैं… ओह क्या वो दोनों भी चुदाई कर रहे हैं…???

मधु मुझे आश्चर्य से देख रही थी…

मैंने उसको आँखों में देखते हुए ही पूछा- कहाँ गई थी तू??

मधु जैसे उसने कुछ सुना ही नहीं- अरे भैया आप यहाँ… इस समय?

मैं- मैंने तुझसे कुछ पूछा…

मधु अपने हाथ में सिगरेट की डब्बी दिखाते हुए- अंकल ने मंगाई थी…

मैं- क्या कर रहे हैं वो दोनों अंदर????

मधु ने कंधे उचकाए- मुझे क्या पता??

मैं- कितनी देर हो गई तुझे निकले हुए…

मधु- अभी तो गई थी… हाँ दुकान पर कुछ भीड़ थी…

मुझे पता था कि बाहर कॉलोनी तक जाने इतनी सीढ़ियां… इस सबमें करीब 15 मिनट तो लगते ही हैं… इसका मतलब पिछले 15-20 मिनट से दोनों अंदर हैं और दरवाजा भी लॉक कर लिया…

साला अरविन्द मेरी बीवी से पूरा मजा ले रहा होगा… अब देखा कैसे जाये…

तभी मुझे रसोई वाली खिड़की नजर आई और मैं चुपचाप मधु को वहाँ ले गया…

मेरी किस्मत कि खिड़की खुली थी… हाँ उसके दरवाजे भिड़ा कर बंद कर दिया था…

मैंने हल्की से आहत लेते हुए दरवाजे को खोल दिया… रसोई में कोई नहीं था…

मैंने उसके जंगले की चिटकनी खोल उसको भी खोला और देखा… अब अंदर जाया जा सकता था…

पर खिड़की काफी ऊँची थी, ऊपर चढ़ने के लिए कोई ऊँची कुर्सी या स्टूल चाहिए था…

मैंने मधु की ओर देखा, उसने अपना कल वाला फ्रॉक पहन लिया था शायद बाहर आने के लिए… या अंकल के कारण…

मैंने मुँह पर ऊँगली रख उसको चुप रहने के लिए इशारा किया और उसको अंदर जाने के लिए बोला…

वो एकदम तैयार हो गई…

मैंने उसको उचकाया… और जैसे ही उसके चूतड़ों पर हाथ लगाया… एकदम से ठंडा सा लगा…

मधु ने अभी भी कच्छी नहीं पहनी थी, उसके चूतड़ नंगे थे…

मैंने मधु को गोद में उठाकर खिड़की पर टिकाया और अपना हाथ सहारे के लिए ही उसके चूतड़ों पर रखा… उसका छोटा फ्रॉक हट गया था और मेरा हाथ उसके नंगे चूतड़ों पर था…

एक बार फिर मेरे हाथों ने मधु के मांसल, छोटे छोटे चूतड़ों का स्पर्श किया और रोमांच से भर गए…

.!

इससे पहले मेरे मन में उत्तेजना के साथ साथ शायद कुछ गुस्सा भी था कि एक 62 साल का बूढ़ा मेरी जवान सुन्दर बीवी जो लगभग नंगी थी…

अंदर मेरे घर पर और शायद मेरे ही बैडरूम में… मेरे बिस्तर पर… ना जाने क्या कर रहा होगा???

मगर मधु के नंगे चूतड़ों के स्पर्श… और जब वो खिड़की पर उकड़ू बैठी… तब उसके नंगे चूतड़ और उसकी प्यारी, कोमल, छोटी सी चूत देख… जिससे मैंने कल बहुत मजे किये थे और वो सब मेरी जान सलोनी के कारण ही हो सका था…

मेरा सारा अंदर का द्वेष गायब हो गया और मैं अब केवल सलोनी के मजे के बारे में सोचने लगा…

लेकिन मन उसको ये सब करते देखना चाहता था कि मेरी जान सलोनी को पूरा मजा आ रहा है या नहीं… वो पूरी तरह आनन्द ले रही है या नहीं…

मधु के उकड़ू बैठने से उसके नंगे चूतड़ और खिली चूत ठीक मेरे चेहरे पर थे… उसकी फ्रॉक सिमटकर मेरे हाथो से दबी थी…

मैंने मधु को दोनों हाथों से थाम रखा था… मेरी गर्म साँसे जब मधु को अपनी चूत पर महसूस हुई होंगी…

तभी उसने अपनी आँखों में एक अलग ही तरह की बैचेनी लिए मेरी ओर देखा…

मैंने आँखों ही आँखों में उसको आई लव यू कहा और अपने होंठ उसकी चूत पर रख एक गर्म चुम्मा लिया…

मधु की आँखे अपने आप बंद हो गई…

मगर मैंने खुद पर नियंत्रण रखा… मैंने उसको रसोई में उतरने और दरवाजा खोलने को बोला…

वो जैसे सब समझ गई… वो जल्दी से नीचे उतर रसोई से होते हुए… ऐसे आगे बड़ी कि कोई उसे ना देखे… वो बहुत सावधानी और चारों ओर देखकर आगे बढ़ रही थी…

फिर वो मुख्य द्वार की ओर बढ़ी…

मैं भी घूमकर आगे बढ़ गया और अपने दरवाजे की तरफ आया…

बहुत हल्के से लॉक खुलने की आवाज आई…

मधु काफी समय से हमारे घर आ रही है इसलिए उसे ये सब करना आता था… उसने वाकयी बहुत सावधानी से काम किया… अंकल या सलोनी किसी को कोई भनक तक नहीं मिली…

मैं चुपचाप अंदर आया और उससे इशारे से पूछा- …कहाँ हैं दोनों??

मधु ने बैडरूम की ओर इशारा किया…

मेरे दिल की धड़कने बढ़ने लगी…

मैंने मधु को एक तरफ से देखने भेज पहले रसोई में जाकर सबसे पहले खिड़की का जंगला लॉक किया कि सलोनी को बिल्कुलशक ना हो…

मैं जैसे ही मुड़ा…मुझे रसोई में एक कोने में सलोनी की नाइटी दिखी जो उसने सुबह पहनी थी…

मुझे अच्छी तरह याद है कि सलोनी केवल यही नाइटी पहने थी… और इसके अंदर कुछ नहीं… इसका मतलब अंकल ने सलोनी को यहीं नंगी कर दिया था… और अब बैडरूम में तो निश्चित चुदाई के लिए ही ले गए होगे…

मैं केवल यही सोच रहा था कि आदमी कितना बदकार होता है… वहाँ नलिनी भाभी सोचती है कि अरविन्द अंकल कुछ कर ही नहीं सकते क्योंकि उनका अब खड़ा ही नहीं होता…

और यहाँ दूसरी औरत को देख वो सब करने को तैयार हो जाते हैं… उनका मरा हुआ लण्ड भी ज़िंदा हो जाता है… वाह रे चुदाई की माया…

मैं जल्दी से रसोई से निकला और फिर मधु के पास जा खड़ा हो गया…

बैडरूम का दरबाजा पूरा खुला ही था, बस उस पर परदा पड़ा था…

बैडरूम का दरवाजा उन्होंने इसलिए बंद नहीं किया होगा कि वो दोनों घर पर अकेले ही थे और परदा तो उस पर हमेशा पड़ा ही रहता है…

मधु परदे का एक सिरा हटाकर अंदर झांक रही थी… और अंदर का दृश्य देखते ही मेरा लण्ड तनतना गया…

कहानी जारी रहेगी.

 
अपडेट 47

मैं जल्दी से रसोई से निकला और फिर मधु के पास जा खड़ा हो गया…बैडरूम का दरवाजा पूरा खुला ही था, बस उस पर परदा पड़ा था…

बैडरूम का दरवाजा उन्होंने इसलिए बंद नहीं किया होगा कि वो दोनों घर पर अकेले ही थे और परदा तो उस पर हमेशा पड़ा ही रहता है…

मधु परदे का एक सिरा हटाकर अंदर झांक रही थी… और अंदर का दृश्य देखते ही मेरा लण्ड तनतना गया…

अंदर पूरी सफ़ेद रोशनी में सलोनी और अंकल पूरी तरह नंगे खड़े थे…

मैंने दोनों की बातें सुनने की कोशिश की…

सलोनी- अंकल जल्दी करो… कपड़े पहनो…मधु आती होगी…अंकल- अरे कुछ नहीं होगा… तू मत डर… उसको भी देख लेने दे… कितनी सेक्सी हो गई है ना…सलोनी- अरे वो तुम्हारी पोती के बराबर है… उस पर तो गन्दी नजर मत डालो…

अंकल- अरे तो क्या हुआ? तू भी तो बेटी के बराबर है… जब बेटी चोद सकते हैं… तो उसको भी… हे हे हे….!

सच अंकल बहुत बेशर्मों जैसे हंस रहे थे…

तभी सलोनी थोड़ा पीछे को हटी… अंकल का लण्ड उसके हाथ में थे…माय गॉड…ये तो बहुत बड़ा था…

सलोनी उसको अपने हाथ से ऊपर से नीचे तक सहला रही थी… उसका हाथ बहुत तेज चल रहा था…

और तभी अंकल ने सलोनी को नीचे की ओर धकेला…सलोनी ने तुरंत उनके लण्ड को जितना हो सकता था उतना ही अपने मुँह में भर लिया…

अंकल ने सलोनी के मुख को लण्ड से चोदते हुए ही अपनी आँखें बंद कर ली…

मैंने देखा कि अंकल झड़ रहे हैं और उनका सारा पानी सलोनी के मुह के अंदर जा रहा है…

सलोनी ने मेरा भी कई बार चूसा है मगर किसी और मर्द के साथ इस तरह सेक्सी पोजीशन में मैंने पहले बार देखा था…

सलोनी ने उनका सारा पानी गटक लिया और कुछ ही पलों में उनका लण्ड चाट चाट कर साफ़ कर दिया…

मैं आश्चर्यचकित था कि अंकल ने यहाँ केवल इतना ही किया या पहले उन्होंने सलोनी को चोदा भी होगा…

सलोनी जिस तरह नंगी उनसे मजे कर रही है और करीब आधे घंटे से वो इनके साथ है तो केवल हाथ से करने तो नहीं आये होंगे…मेरे दिमाग केवल यही सोच रहा था कि पिछले आधे घंटे उन्होंने क्या किया होगा… अपनी प्यारी सलोनी को मैं बहुत प्यार करता था…

उसके बारे में, उसकी मस्ती के के बारे में…बहुत कुछ जानता था मैं…

पिछले दिनों में उसको अपने भाई पारस के साथ… फिर दुकानदार लड़के के साथ… सलोनी को कई सेक्सी हरकतें करते देख चुका था…मगर इस समय ये सबसे अलग था…

अपने से लगभग तीन गुना बड़े एक बूढ़े आदमी के साथ जो सलोनी के पिताजी से भी उम्र में बड़े होंगे… और सलोनी उनके साथ कितने मजे कर रही थी..

सलोनी ने अंकल का लण्ड…चाट चाट कर पूरा साफ़ कर दिया…

अंकल ने सलोनी को ऊपर उठाया और उसके होंठों को चूमने लगे… सलोनी के मुंह पर अंकल के वीर्य के निशान दिख रहे थे…

दोनों बहुत ही हॉट किस कर रहे थे…

अंकल सलोनी का लगभग पूरा मुँह ही चाट रहे थे…

फिर उन्होंने सलोनी को घुमाया और उसकी पीठ से चिपक गए…

अब सलोनी का मुंह हमारी ओर था… पूरी नंगी सलोनी की दोनों तनी हुई चूचियाँ और उनके गुलाबी निप्पल लगभग लाल सूर्ख हो गए थे… ऐसा लग रहा था जैसे बुरी तरह मसले जाने के कारण दोनों अपना लाल चेहरा लिए मेरे से खुद को बचाने को कह रहीं हों…

तभी अंकल ने सलोनी के कानों के पिछले भाग को चूमते हुए अपनी दोनों हथेलियों में फिर से उन मासूम चूचियों को भर लिया…

वो दोनों को बड़ी बुरी तरह मसल रहे थे…उनका अभी भी आधा खड़ा लण्ड सलोनी के चूतड़ों में गड़ा हुआ था…

मैं नलिनी भाभी के शब्दों को याद कर रहा था कि अरविन्द अंकल का अब खड़ा ही नहीं होता…मगर यहाँ तो उल्टा था… पानी निकलने के बाद भी बैठने का नाम नहीं ले रहा था…तभी अंकल ने अपना हाथ सलोनी की जाँघों के बीच उसकी कोमल चूत पर ले गए…उनकी उँगलियाँ उसकी चूत पर पियानो की तरह चल रही थीं…

सलोनी आँखे बंद किये सिसकारियाँ ले रही थी- … अह्ह्ह्हाआआआ… आए… अब छोड़ दीजिये ना… अह्हाआआ आ बस्स्स्स…स्स्स अब नहींईइइइइइ… ओह…अंकल- पुच पुच…बस उसको चूमे जा रहे थे… कानो से लेकर गर्दन तक…मैंने देखा मधु भी काफी गर्म हो गई है…वो अपने चूतड़ों को मेरे से घिस रही थी…

मगर अभी इस सबका समय नहीं था…मैं इस सब में भूल गया कि मैं और मधु चुपके से घर में घुसे हैं ! अगर सलोनी को यह पता लग गया तो उसको बहुत बुरा लगेगा…

मैं अभी बाहर निकलने कि सोच ही रहा था कि तभी अंदर से आवाज आई- चलिए अंकल जी, अब आप जल्दी से फ्रेश होकर कपड़े पहन लो, मैं नहीं चाहती कि मधु या किसी को कुछ पता चले…और सलोनी तेजी से बाहर को आने लगी…

मेरे पास इतना समय नहीं था कि मैं बाहर निकल सकूँ…मधु को पीछे खींचते हुए मैं खुद अलमारी के साइड में हो गया…हाँ मधु वहीं रह गई…

सलोनी पूरी नंगी ही बाहर निकली….!

सलोनी- अर्रए… ईईईए…

उसके मुख से हल्की सी चीख निकली…फिर सलोनी बोली- तू कब आई… और दरवाजा…मधु मेरी समझ से भी ज्यादा समझदार निकली, वो बोली- दरवाजा तोतो खुला था भाभी…उसने अपने हाथ में पकड़ा सिगरेट का पैकेट उसको देते हुए कहा…

सलोनी वहाँ पड़े एक कपड़े से अपने शरीर को पोंछते हुए बोली- कितनी देर हो गई तुझे?

मधु- बस अभी आई भाभी… आप नहा ली क्या???

सलोनी- बस नहाने ही जा रही थी… तू रुक…और वो रसोई में चली गई…

बस इतना ही समय काफी था मेरे लिए…मैं जल्दी से बाहर निकला और एक बार अंदर कमरे में देखा…वहाँ कोई नहीं था… अंकल शायद बाथरूम में थे… मैं जल्दी से मुख्य द्वार से बाहर आ गया…पीछे मधु ने दरवाजा बंद कर दिया… मैंने चैन की सांस ली…

मैं एक बार फिर चुपके से रसोई की खिड़की से झाँका…सलोनी अपना गाउन सीधा कर पहन रही थी… उसके मस्त चूतड़ों को नजर भर देखकर मैं जल्दी जल्दी सीढ़ियाँ उतरने लगा…

कितना कुछ हो रहा था… हर पल कुछ नया… पता नहीं सही या गलत… पर मजा बहुत आ रहा था…

करीब बारह बजे सलोनी का फोन आया कि वो स्कूल और शॉपिंग के लिए जा रही थी…

मुझे अफ़सोस इस बात का था कि मैंने आज उसके पर्स में रिकॉर्डर नहीं रखा था पर मधु उसके साथ थी…अब यह मेरे ऊपर निर्भर था कि मैं मधु से सब कुछ उगलवा सकता था…पता नहीं आज क्या होने वाला था…??

कहानी जारी रहेगी.

 
अपडेट 48

करीब बारह बजे सलोनी का फोन आया कि वो स्कूल और शॉपिंग के लिए जा रही थी…मुझे अफ़सोस इस बात का था कि मैंने आज उसके पर्स में रिकॉर्डर नहीं रखा था पर मधु उसके साथ थी…

अब यह मेरे ऊपर निर्भर था कि मैं मधु से सब कुछ उगलवा सकता था… पता नहीं आज क्या होने वाला था…?? मेरा पूरा ध्यान सलोनी और मधु की ओर ही था… पता नहीं वो वहां क्या कर रहे होंगे..???

सब कुछ छोड़कर मैं ऑफिस पहुँचा…पर ऑफिस पहुँचते ही दिल को सुकून मिल गया … मेरी सेक्रेटरी शालू जो तीन दिनों से नहीं आ रही थी, आज मेरे कैबिन में उत्तेजक लिबास में बैठी मुस्कुरा रही थी..उसको देखते ही मेरा सारा ध्यान अब ऑफिस की ओर ही हो गया…

हाँ सलोनी सही कहती थी… मेरे शालू के साथ बहुत गहरे ताल्लुकात हैं… वो पिछले एक साल से मेरे साथ है और मेरा पूरा ध्यान रखती है.हम कई बार ऑफिस टूर पर बाहर भी जा चुके हैं और एक ही कमरे में एक साथ रुकते हैं.

शालू एक गरीब परिवार की बहुत सुन्दर लड़की है, 20-21 साल की, 5 फुट 5 इंच लम्बी, 34-25-34 की उसका बहुत आकर्षक, साँचे में ढला शरीर किसी को भी उसकी ओर देखने पर मजबूर कर देता है, उसके नैन-नक्श काफी तीखे हैं और उसके लाल होठों के नीचे की ओर एक तिल उसको कुछ ज्यादा ही सेक्सी दिखाता है.

ऑफिस के काम के बारे में तो वो कुछ ज्यादा नहीं जानती… मगर मर्द को खुश रखने की सभी कला उसके अंदर है.बहुत मॉडर्न और नये फैशन के कपड़े पहनना और अपने बदन के कुछ हिस्सों को दिखा कर रिझाना उसको बहुत अच्छी तरह आता है.उसकी आवाज बहुत सेक्सी है, फोन पर बात करके ही वो काफी आर्डर बुक करवा देती है.

उसकी इसी अदा का मैं दीवाना हूँ, उसमे एक बहुत ख़ास बात है कि सेक्स में किसी भी बात के लिए वो कभी मना नहीं करती..मैं जो चाहता हूँ, वो मेरी हर चाहत का पूरा ख्याल रखती है… अपने ऑफिस में ही उसको मैं कई बार पूरी नंगी करके चोद चुका हूँ… उसको कभी ऐतराज नहीं हुआ…

मैं कहीं भी उसके साथ मस्ती करने के लिए उसके कपड़ों के अंदर हाथ डाल देता हूँ या उसके कपड़े उतारता तो वो तुरंत तैयार हो जाती है..

मेरे कैबिन में एक तरफ़ा दिखने वाले शीशे लगे हैं जिनसे मैं स्टाफ पर नजर रखता हूँ… वैसे तो उन पर परदे पड़े रहते हैं पर शालू को चोदते समय मैं ये परदे हटा देता हूँ..

मुझे और शालू दोनों को ही सारे स्टाफ को काम करते हुए देखते हुए चुदाई करने में बहुत मजा आता है !

कई बार तो कोई न कोई लड़की या लड़का हमारे सामने ही दूसरी तरफ से शीशे में देखते हुए खुद के कपड़े सही करने लगता है तो हमें ऐसा लगता कि वो हमको चुदाई करते हुए घूर रहा है..और चुदाई में और भी ज्यादा मजा आ जाता है, हम दोनों और मजे लेकर चुदाई करने लगते हैं..

हाँ हम दोनों चुदाई के समय बातें करने की भी आदत थी..शालू और मैं दोनों अपनी चुदाई की बातें एक दूसरे से खुलकर करते हैं, इससे हम दोनों को बहुत उत्तेजना मिलती है…

शालू वैसे भी चुदाई की आदी थी क्योंकि उसको बहुत कम आयु से ही चुदवाने की आदत लग गई थी इसलिए वो इतनी कम आयु में ही इतनी सेक्सी हो गई थी…

आज शालू कुछ ज्यादा ही सेक्सी लग रही है, उसने काले रंग की स्किन टाइट लेग्गिंग और नारंगी कढ़ाई वाली टाइट कुर्ती पहनी हुई है…उसके गोरे रंग पर गहरे रंग के कपड़े उसको बहुत सेक्सी दिखा रहे हैं. कपड़े इतने टाइट हैं कि उसका हर अंग अपना आकार बाहर को निकला दिखा रहा है…

उसने सेक्सी मुस्कराहट के साथ मेरा स्वागत किया… मैंने भी उसको मुस्कुराकर ही साथ दिया…

शालू- क्या हुआ जनाब, आज इतनी देर से? किसके साथ बिजी थे?

उसकी बात सुनते ही मुझे नलिनी भाभी याद आ गई जिनको अभी अभी चोदकर आ रहा था… और मेरा एक बहुत पुराना सपना साकार हुआ था..

मैं- मेरी जान है कोई.. अब तू तो गायब ही हो गई थी.. क्या हुआ था?

शालू- अरे आपको बताया तो था… कोई आया था घर पर..

मैं- अच्छा तो अपने किसी पुराने आशिक के साथ थी जनाबे-आली…

शालू- अरे नहीं.. कोई रिश्तेदार थे… बस और कोई नहीं… पर आपको क्या हुआ आज.. कुछ बदले से नजर आ रहे हो?उसका ऐसा सोचना सही भी था… आज सुबह की चुदाई और रात मधु के साथ की गई मस्ती के कारण खुद को कुछ थका सा महसूस कर रहा था…

वरना पहले जब भी वो छुट्टी से आती थी, मैं तुरंत उसको नंगी करके चोदने लगता था…पर आज मैं अपने काम में लग गया था… इसीलिए वो मुझे आश्चर्य से देख रही थी…

मैं- अरे नहीं जानेमन, आज जरा कुछ थकान सी लग रही है…

मैंने उसको पकड़ कर उसके होंठों का एक चुम्मा लिया.. वो भी मेरा साथ देने लगी… और उसने मुझे सही से बैठाकर मेरे सिर को अपने हाथों से दबाते हुए कहा- अहा मेरा जानू.. क्या हुआ? लाओ मैं अब पूरी सेवा करके आपको बिल्कुल सही कर दूंगी..बस यही उसकी अदा मुझको भाती थी.. वो हर समय बस मेरा ख्याल रखती थी…

वो मेरी कुर्सी के बराबर खड़ी हो, मेरा सिर अपनी मुलायम चूचियों पर रख कर दबा रही थी….!

मैंने अपना हाथ उसकी कमर में डाल कर उसके गदराये चूतड़ों पर रखा और उनको मसलने लगा…मुझे शालू के चूतड़ दबाने ओर मसलने में बहुत आनन्द आता है… उसके चूतड़ हैं भी पूरे गोल और मुलायम ..

मुझे अहसास हो गया कि उसने कच्छी नहीं पहनी है.. वैसे साधारणतया वो हमेशा कच्छी पहनती थी ..

मैं- क्या बात जानेमन? आज अंदर खुला क्यों है..? किस ख़ुशी में अपनी मुन्नी को आज़ाद छोड़ रखा है?

शालू- हा… हा… वेरी फनी… आपको तो और भी मजा आ गया होगा !

मैं- अरे वो तो है… ऐसा लग रहा है जैसे नंगे चूतड़ों पर हाथ रख रहा हूँ… आज तो रास्ते में लोगों को मजे आ गए होंगे..

शालू- हाँ, मैं तो रास्ते में सबसे दबवाती हुई आ रही हूँ… आपने तो मुझे ना जाने क्या समझ रखा है??

मैं- अरे नहीं जानेमन… मेरा वो मतलब नहीं था.. अरे आते जाते जो शैतान दिमागी होते हैं.. उनकी बात कर रहा हूँ…

शालू- मुझे तो सबसे ज्यादा शैतान आप ही लगते हो बस…

मैं- हा हा हा… फिर भी हुआ क्या, यह तो बता? …अगर सभी कच्छियाँ फट गई हैं तो चल बाजार… अभी दिला देता हूँ…

शालू- अरे नहीं यार… वो कल ही मेंसिस बंद हुई थी ना तो कुछ रेशेज़ पड़ गए हैं… इसीलिए नहीं पहनी…

मैं- अरे कहाँ??? दिखाओ तो जरा..

शालू- तो देख लो ना.. मैंने कभी मना किया? मेरी मुन्नी के आस पास ही… और काफी खुजली भी हो रही है…

मैं- अच्छा तो वो खुजली सही करनी होगी.. है ना!

शालू- हाँ आप तो डॉक्टर हो ना.. सब कुछ सही कर दोगे…

मैंने उसको अपनी ओर किया.. उसने आज्ञाकारी की तरह अपनी कुर्ती पेट तक ऊपर कर दी…और मैं शालू की लेग्गिंग की इलास्टिक में अपनी उँगलियाँ डालकर उसको नीचे करने लगा !

कहानी जारी रहेगी.

 
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