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मेरी चालू बीवी complete

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अपडेट. 67

कई बार जोर से थपथपाने के बाद आवाज आई- कौन है…????मैं- अरे श्याम खोल जल्दी से…मैंने जान बूझकर उसका नाम लिया और मेरी ट्रिक काम कर गई…

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तुरंत दरवाजा खुला, मैंने एक झटके में दरवाजा पूरा धकेला और अंदर घुस गया…श्याम- अर्र्र्र्र रे रे रे क्या है…????मैं- साले कमीने… इसे यहाँ क्यों ले आया तू? तुझे क्या कहा था…अब उसने मुझे पहचान लिया…

श्याम- वो साहब, मेमसाहब को बाहर ही उलटी हो गई थी… सब होटल गन्दा कर दिया… फिर बेहोश हो गई तो मैंने यहीं लिटा दिया था…

मैंने बिस्तर पर देखा… सलोनी वहाँ बेसुध लेटी थी… उसकी दोनों टाँगें खुली थीं… स्कर्ट ऊपर थी, टॉप चूची से नीचे थी.उसकी चूत और चूची दोनों पूरी तरह नंगी सामने से दिख रही थी !

मैंने एक जोर का थप्पड़ श्याम के गाल पर लगाया- …साले दरवाजा बंद करके तू कर क्या रहा था यहाँ?

श्याम- अरे नहीं साहब, मैंने कुछ नहीं किया… बस इनका सीना मसलकर इनको होश में ला रहा था !

मैंने एक और थप्पड़ उसको जड़ दिया- वो तो दिख रहा है… साले इसको नंगी करके तू यहाँ दरवाजा बंद करके क्या कर रहा था? रुक साले, अभी मैनेजर को बुलाता हूँ…

श्याम- क्यों बात बढ़ाते हो साहब? आप भी तो इस माल को चोदने के लिए ही लाये हो… चलो आप चोद लो आराम से, मैं कमरे और आपका खर्च कोई नहीं लूँगा…

साला सच बहुत कमीना था… मैंने जानबूझकर ही उसको नहीं बताया था कि यह मेरी बीवी है.मैं- अच्छा तो तूने सब कर लिया?

श्याम- अरे नहीं साहब, मैंने कुछ नहीं किया, बस ऊपर ही ऊपर से मजे लिए हैं… मैं वैसे भी इन बाहर की लड़कियों के साथ कभी चुदाई नहीं करता… बीमारी का डर रहता है साहब… आप करो, मैं किसी से कुछ नहीं कहूँगा…

वो जैसे मेरे ही मुँह पर वो बिना आवाज का झापड़ लगा गया था… मैं अपना सा मुँह लिए उसको जाता देखता रहा…

अब मैंने सलोनी की ओर ध्यान दिया, मैंने जाकर उसको देखा तो उसकी दोनों चूची पूरी लाल हो रही थी और निप्पल बिल्कुल खड़े थे…

मैंने जैसे ही हाथ लगाया तो सलोनी के दोनों निप्पल थूक से लसलसे से दिखे, मैंने तुरंत सलोनी की चूत को हाथ लगाया तो ओह…???

वोडका के 4 पेग लगाने के बाद मुझे अच्छा खासा नशा हो गया था… अभी कुछ देर पहले तक मैं बहुत मस्ती में था क्योंकि काफी दिनों के बाद मैंने इतने पेग एक साथ लिए थे…

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मगर अभी कुछ देर की घटनाओ ने मेरे सारे नशे की ऐसी-तैसी कर दी थी… मुझे कुछ भी समझ नहीं आ रहा था कि जो मस्ती मैं करने आया था, वो ऐसी तो नहीं थी कि एक वेटर मेरी जान को ऐसे छोड़कर चला गया था !

सलोनी अभी भी बिस्तर पर लेटी थी, उसकी नंगी चूचियाँ अपने साथ हुए हर जुल्म की दास्ताँ सुना रही थी…

उसकी चूत पूरी तरह से खुली पड़ी थी… उसकी स्कर्ट जो वैसे ही बहुत छोटी थी और इस समय उसकी कमर के नीचे दबी थी… मेरा हाथ उसकी नंगी चूत पर चला गया.

जैसे ही मैंने उसकी चूत को छुआ, वो बहुत गीली थी, चूत के आस पास के क्षेत्र से साफ़ पता चल रहा था कि उसके साथ छेड़छाड़ की गई है और चाटा भी गया है.

मगर मैंने जब अपनी गीली उँगलियों को सूँघा तो वो तो मेरी जान के चूत का ही पानी था…

मैं इस सुगन्ध को कैसे भूल सकता हूँ… जब भी सलोनी बहुत ज्यादा गर्म हो जाती थी तो उसकी चूत का पानी खुद व खुद निकलने लगता है… जिसकी खुशबू पूरे कमरे में फैल जाती है…

इसका मतलब सलोनी पूरी तरह गर्म हो गई थी, वो पूरा बेहोश नहीं थी, वो भी यहाँ जो भी हुआ था, उसका पूरा मजा ले रही थी…

मैंने एक बार फिर सलोनी की चूत पर उँगलियाँ घुमाई…सलोनी- अह्ह्हाआआआ ओह !

उसने एक जोर से सिसकारी भरी… इसका मतलब यह मजे ले रही है… हाँ, इसकी आँखें पूरी तरह बंद हैं… उसको नहीं पता कि उसके साथ कौन है…

मैंने उसको करीब 5 मिनट तक खूब गर्म कर दिया…

मेरा लण्ड भी पूरा तनतना रहा था मगर मैं अभी से सलोनी को चोद कर पूरा रात का मजा ख़राब नहीं करना चाहता था…

तभी वो वेटर फिर से कमरे में आ गयाम उसके हाथ में एक गिलास भी था…

वेटर श्याम- क्या साहब. चोद दिया क्या?? ऐसे कैसे मजा आया होगा आपको? लो, मैं यह नीम्बू पानी लाया हूँ… पहले इसको पिलाकर होश में लाओ, फिर आराम से इसकी चूत और गाण्ड दोनों मारना…

मैंने बिना कुछ बोले उससे गिलास ले लिया… सलोनी को उठाकर अपने कंधे पर अधलेटा किया और उसको वो नीम्बू पानी पिलाने की कोशिश करने लगा.

तभी वो वेटर साला मेरे सामने ही बैठ सलोनी की जांघें सहलाता हुआ बोला- साहब कुछ भी कहो… पर माल बहुत मस्त है… लगता है अभी नई ही धंधे में आई है… मैंने भी आज तक नहीं देखा…

कहानी जारी रहेगी.

 
अपडेट 68

मेरा लण्ड भी पूरा तनतना रहा था मगर मैं अभी से सलोनी को चोद कर पूरा रात का मजा ख़राब नहीं करना चाहता था.

तभी वो वेटर फिर से कमरे में आ गया उसके हाथ में एक गिलास भी था…

वेटर श्याम- क्या साहब. चोद दिया क्या?? ऐसे कैसे मजा आया होगा आपको? लो, मैं यह नीम्बू पानी लाया हूँ… पहले इसको पिलाकर होश में लाओ, फिर आराम से इसकी चूत और गाण्ड दोनों मारना…

मैंने बिना कुछ बोले उससे गिलास ले लिया… सलोनी को उठाकर अपने कंधे पर अधलेटा किया और उसको वो नीम्बू पानी पिलाने की कोशिश करने लगा.

तभी वो वेटर साला मेरे सामने ही बैठ सलोनी की जांघें सहलाता हुआ बोला- साहब कुछ भी कहो… पर माल बहुत मस्त है… लगता है अभी नई ही धंधे में आई है… मैंने भी आज तक नहीं देखा…

मैं बेबस सा उसको देख रहा था, अब कुछ कह भी नहीं कह सकता था, अगर जरा भी उसको बोलता कि मेरी बीवी है तो साला सभी को बोल देता और सभी मेरी बहुत मजाक उड़ाते…

उसकी हिम्मत बढ़ती जा रही थी, उसने मेरे सामने ही सलोनी की चूत को अपने दोनों अंगूठों से खोलते हुए कहा- देखा साहब कितनी टाइट और पूरी लाल चूत है… और खुशबू भी ऐसी जैसी कुंवारी लड़की की चूत से आती है… सच साहब बहुत जानदार चूत है… मैं तो यहाँ रोज कई देखता हूँ पर ऐसी नहीं देखी…

.!

लग रहा था कि इस साले ने कसम खाई है वरना इसकी तो मार ही लेता…

बोलते बोलते कमीने ने अपना मुँह सलोनी की चूत पर लगा दिया…

मैं सलोनी के ऊपर वाले मुँह को किसी तरह खोलकर उसको नीम्बू पानी पिलाने में ही व्यस्त था…

और वो कमीना मेरी सलोनी के नीचे वाले होंठ पूरी तरह खोलकर मेरे ही सामने चूसने लगा.

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सलोनी को भी अब हल्का हल्का होश आने लगा था… मुझे डर सा लगने लगा कि यह सब देखकर ना जाने वो क्या सोचने लगे कि क्या ये सब मैं ही करा रहा हूँ?

मैंने कसकर एक लात उस वेटर को मारी… वो दूर हट गया…

मैं- तू अपने कमीनेपन से बाज नहीं आएगा साले…

श्याम बड़े गंदे ढंग से अपने होंटों को चाटने लगा और बोला- क्या साहब…?? कितना मजा आ रहा था… सच बहुत मजेदार है तिकोनी इसकी… पहले भी आपने नहीं चूसने दी…

जैसे ही चूसने लगा तभी आ धमके… और अब भी नहीं…

मैं- साले ये कोई धंधे वाली नहीं है… घरेलू है… मेरे साथ केवल घूमने आई है…

श्याम- ओह तो यह बात है… किसी और की घरवाली के साथ मजे… कोई बात नहीं साहब… करो मजे…

सलोनी अब हल्के हल्के कुनमुनाने लगी तो मैंने उसको जाने का इशारा किया और वो शराफत से चला भी गया…

सलोनी- ओह क्या हुआ…?? मेरा सर…ओह यह सब?

मैं- कुछ नहीं जान… तुमको जरा ज्यादा हो गई थी, चलो बाहर चलकर बैठते हैं.

सलोनी ने खुद को व्यवस्थित किया, उसने मुझसे कोई बात नहीं की.

मैं- जान कैसा लग रहा है… अब सब सही है ना?

सलोनी- सॉरी जानू… पता नहीं मुझे क्या हो गया था? वो मैं टॉयलेट गई थी… फिर पता नहीं क्या हुआ एकदम से…

मैं- कुछ नहीं जान, चलो बाहर चलकर बैठते हैं !

और हम रेस्टोरेंट में आकर बैठ गए… वहाँ दो बार गर्ल काफी छोटे कपड़ों में डांस कर रही थीं.

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सलोनी- क्या खाना यहीं खायेंगे?

मैं- हाँ जान… क्यों क्या हुआ?

सलोनी- नहीं कुछ नहीं… वो सब हमको ही देख रहे हैं…

मैं- हाँ जान लगता है तुम भूल गई हो कि तुमने स्कर्ट के नीचे कच्छी नहीं पहनी है और तुम्हारे लेटने से स्कर्ट भी सिकुड़ गई है…

सलोनी को जैसे सब कुछ याद आया… मैंने भी जानबूझकर ही उसको याद दिलाया कि कहीं बेख्याली में वो कुछ ज्यादा ना कर दे.

सलोनी- ओह मैं तो बिल्कुल भूल ही गई थी… सुनो, घर चलो ना… सब मुझे ही कैसी भूखी नजरों से देख रहे हैं…

मैं- अरे, तो क्या हुआ जान? मज़े लो ना… डरती क्यों हो, कोई कुछ करेगा थोड़े ना… मैं हूँ ना…

सलोनी ने कोई जवाब नहीं दिया…

हम सेंटर में एक मेज पर जाकर बैठ गए, मैंने कुछ स्नैक्स और सूप आर्डर किया…

अब डांस काफी सेक्सी हो गया था और लड़की भी बदल गई थी…

लड़कियाँ केवल ब्रा और छोटी सी कच्छी में बड़े ही उत्तेजक ढंग से डांस कर रही थीं… उनकी चूचियों का काफी हिस्सा उनके हिलने से बाहर निकले जा रहा था और दोनों चूचियाँ बहुत तेजी से हिल रही थी या ऐसे कहो कि वो हिला रही थीं…

उनके चूतड़ तो लगभग उनकी कच्छी से बाहर ही थे, बहुत पतली पट्टी ही उनके पीछे चूतड़ों को ढके थी.

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तभी एक लड़की नाचते नाचते हमारे मेज के पास आई, उसने जैसे ही मुझे आँख मारी… मुझे याद आया- ओह यह तो वही लड़की है जो अभी कुछ देर पहले उस कमरे में एक मोटे से चुद रही थी… अरे इसी की तो वो मोटा आदमी गांड मार रहा था और अब यह वही गांड नचा नचा कर सबको दिखा रही है…

तभी वो मेरी गोद में आकर बैठ गई… उसने अपने चूतड़ बड़े सेक्सी अंदाज़ में मेरे आधे खड़े लण्ड पर रगड़े और मेरे गालों को चूम लिया…

मेर हाथ भी उसकी चूचियों तक पहुँच गए थे पर 20 सेकंड में ही वो उठकर फिर स्टेज पर चली गई.

सलोनी- क्या बात जानू… लगता है यहाँ बहुत आते हो…?

वो लगातार मुस्कुरा रही थी…

मैं- अरे नहीं, वो तो मैंने अभी इसको अंदर देखा था…ओह… मेरे मुँह से निकल गया…

सलोनी- कहाँ अंदर…??? बताओ ना…

कहानी जारी रहेगी.

 
अपडेट. 69

नाइट क्लब के रेस्टोरेंट में हम दोनों ऐसी जगह बैठे थे जहाँ हमें हर कोई आसानी से देख सकता था.

मैंने चारों ओर नजर मारी तो ज्यादातर लोग हमें ही देख रहे थे… ऐसा नहीं कि वहाँ और कोई लड़की ना हो बल्कि हर मेज पर ही कोई लड़की या महिला बैठी थी

और ऐसा भी नहीं था कि सेक्सी कपड़ों (मिनी स्कर्ट और ट्यूब टॉप) में केवल सलोनी ही हो…

ज्यादातर वहाँ सेक्सी कपड़ों में ही थीं, और तो और जो लड़कियाँ नाच रही थीं, वो तो पूरी नंगी ही लग रही थीं…

फिर भी सलोनी की सुंदरता और सेक्स अपील हर किसी को उसी की ओर आकर्षित कर रही थी.

सलोनी का नशा अब काफी हद तक काबू में आ गया था, हाँ, झूम वो अब भी रही थी और उसकी जुबान भी लड़खड़ा रही थी मगर अब वो काफी सही लग रही थी.

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हाँ, कुर्सी पर दोनों पैरों के बीच उसने काफी गैप कर रखा था, वो तो शुक्र था कि उसके पैर मेज के अंदर ही थे वरना देखने वालों की पैंट की चेन ख़राब हो जाती !

सलोनी मेरी और झुकते हुए अब मेरे पर दबाव डालने लगी, पूछ्नए लगी- …बताओ ना जानू, तुमने क्या क्या देखा…?? सच मुझे कुछ भी याद नहीं…

मैं- अरे यार जब तुम नहीं आई ना, तो मैं अंदर गया था… तब यह एक मोटे से आदमी के साथ ता-ता-धिन्ना कर रही थी ! वो मैंने तो केवल आवाज सुनी, मैं समझा कहीं कोई तुमको तो परेशान नहीं कर रहा… पर जब दरवाजा खोलकर देखा, तो यह पूरी नंगी लगी हुई थी और चिल्ला भी रही थी…

सलोनी- हाय राम… आपने इसको पूरी नंगी देखा… वो भी सब करते हुए…

मैं- हाँ यार… मेरी जान… हम यहाँ अकेले ही तो हैं… क्या सब करते हुए… बोलो चुदवाते हुए…

.!

सलोनी- धत्त… आप तो पूरे बेशर्म ही हो गए हो… और चिल्ला क्यों रही थी?

मैंने आँख मारते हुए कहा- …अरे इतना बड़ा लौड़ा उस मोटे ने इसकी गांड में घुसा रखा था तो चिल्लाएगी ही ना… हा हा हा…

मैंने नशे में ही खुद को सलोनी के सामने पूरा खोल देने का सोच रखा था इसीलिए अब पूरे खुले और नंगे शब्दों का प्रयोग कर रहा था.

सलोनी- ओह क्या हो गया आपको… कितना गन्दा बोल रहे हो…

पर उसके होंटों पर भी मुस्कराहट बता रही थी कि उसको भी मेरी बातें अच्छी लग रही थी…

तभी मुझे एक कोने में मोटा बैठा दिखाई दिया तो मैंने कहा- हाँ देखो जानू… वो है, वो जो शनील के काली शर्ट में है… उस कोने में…

सलोनी ने उसको देखते ही मेरे हाथ को कस कर दबाया और बोली- अरे जानू, मुझे याद आ रहा है… जब मैं अभी अंदर गई थी ना तो यही था वहाँ… इसने मेरे साथ बदतमीजी भी की थी…

मैं- अच्छा? क्या किया था?

सलोनी- बस मेरे को तो नशा बहुत हो गया था और उलटी सी होने लगी थी… इसने ही मुझे पकड़ा था और मेरी स्कर्ट में हाथ डाला था…

मैं- अरे जान तुमको वहम हुआ होगा तुमको पकड़ने में लग गया होगा…

सलोनी- नहीं जान, मेरा विश्वास करो… यह बहुत कमीना है… इसने जानबूझकर मेरी स्कर्ट उठाई थी और हाथ फ़ेर कर अंदर सहलाया था…

मैं- क्या? और तुमने मना नहीं किया?

सलोनी- अरे मैं तो उलटी से परेशान थी… तभी इसने मेरी मजबूरी का फ़ायदा उठाया था… यह और वो कमीना वेटर दोनों मुझे नंगा करने में ही लगे थे…

मुझे गुस्सा सा आ गया, मैं जैसे ही उठने लगा, सलोनी ने कसकर मेरा हाथ पकड़ लिया- रुको ना, अब क्या यहाँ मेरा तमाशा बनाओगे? मेरे इन कपड़ों में कोई इनको गलत नहीं कहेगा… मेरा ही तमाशा बन जायेगा.

मैं- हम्म… पर अब अगर कुछ भी करता हूँ तो… साला बखेड़ा खड़ा कर देगा…

फिर सोचता हूँ कि यार जब मस्ती करने आये हैं तो ये सब तो होगा ही…

सलोनी- छोड़ो अब जो हुआ… अब आप मूड अच्छा करो और अपनी मस्ती ख़राब मत करो… शुक्र है इन्होंने बस छेड़छाड़ ही की…ना कि ज्यादा कुछ… वरना कुछ भी कर सकते थे…

मैं- अरे जान वो वेटर तो पिट ही गया था मुझसे… पता है तुमको कमरे में ले गया था और तुमको पूरी नंगी कर दिया था… वो तो मैं समय पर पहुँच गया वरना जाने क्या कर देता !!

सलोनी- क्याआआआ सच… मैं तो समझी आप मुझे वहाँ ले गए थे.

मैं- अरे जानू, उसने तो तुम्हारे सब… मतलब स्कर्ट और टॉप हटा दिए थे… और मजे से चूस रहा था…हा हा हा…

सलोनी- ऐसे क्यों कह रहे हो… मुझे शरम आ रही है…जब मैं होश में ही नहीं थी तो…

मैं अब उसको छेड़ने लगा- तब ही तो बोलता हूँ जानू… इतनी मत लिया करो… वरना कोई भी नशे में पेल जायेगा…

सलोनी- हाँ रहने दो… अभी किसी में हिम्मत नहीं है…

वो भी शायद मेरा मजाक समझ गई थी… इसलिए ज्यादा नाराज नहीं हो रही थी…

सलोनी- तो तुमने उस वेटर को बहुत मारा…

मैं- ज्यादा तो नहीं… पर हाँ 2-4 तो धर ही दिए थे… वैसे वो तुमको धंधे वाली समझ रहा था…

सलोनी- क्या?? बस आप मुझे यही और दिखाओगे, अच्छा खासा सही कपड़े पहन कर आ रही थी…

मैं- अरे, यहाँ हमको कौन जानता है ! मजे लो… उनको समझने दो कुछ भी… इसका भी एक अलग ही मजा है…

सलोनी- इसका मतलब यह तो नहीं कि मैं धंधे वाली बन जाऊँ

मैं- अरे यार, कैसी बात कर रही हो… कपड़े बदलने से कोई इंसान नहीं बदल जाता… बल्कि एक दिन वैसी ज़िंदगी भी जी लेता है… मैं यही तो देखता हूँ कि दुनिया में पहचान इंसान से नहीं बल्कि चेहरे और कपड़ों से होती है…

सलोनी- हाँ, यह तो आपने ठीक ही कहा… सुनो आपकी बात सुनकर तो मुझे बड़ी अजीब सी फीलिंग हो रही है कि इन लोगों ने मेरे नंगे अंगों को देखा और छुआ होगा…

मैं- अरे यार खुलकर बोलो… मैं तुम्हारा पति जो तुमको बहुत प्यार करता है, जब तुम्हारे साथ है तो तुमको किस बात की चिंता… और जरा सी मस्ती करने में चूत या लण्ड घिस नहीं जाते… अच्छा तुम बताओ, अभी जब वो लड़की मेरी गोद में बैठी तो मेरा लण्ड उसकी गांड के स्पर्श से खड़ा हो गया… इसका मतलब मैं गलत हूँ या मेरे लण्ड या उसकी चूत का कुछ घिस गया… अरे यार जरा सा मजा आ गया बस…

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सलोनी लगातार मुझे देखे जा रहे थी, वो मुझे समझने की कोशिश कर रही थी.

तभी वहाँ तेज लाइट ओन हो गई और तेज म्यूजिक के साथ कॉमन डांस का अनाउंसमेंट हो गया.

सभी स्टेज के नीचे डांस फ्लोर पर डांस करने लगे, सलोनी भी मुझे डांस के लिए बोलने लगी.

पर मेरा बिलकुल मन नहीं था क्योंकि नशा बहुत हो गया था और मैं सबको डांस करते हुए उनकी हरकतें देखना चाह रहा था…

कुछ ही देर में एक वैल सूटेड बूटेड आदमी वहाँ आया और सलोनी को डांस के लिए बोलने लगा…

उसने मना किया… पर मैंने अपनी आँखों से उसको हाँ में इशारा किया… और सलोनी ने उसके बड़े हुए हाथ पर अपना हाथ रख दिया… दोनों डांस फ्लोर की ओर बढ़ने लगे…

मैं उसको बताना चाह ही रहा था कि अपनी स्कर्ट का ध्यान रखना.. कि अंदर कच्छी नहीं है… पर तब तक तो वो तेजी से आगे चली गई…

अब पता नहीं क्या होगा…????

क्या हसीन रात थी… यह वही समझ सकता है जिसने इसको जिया है… वो लोग मेरी नजर में बहुत दकियानूसी होते हैं जो मैं, मेरा और हमेशा शक और चिंता में ज़िंदगी गुजार देते हैं…

शायद बहुत लोगों को मैं पागल और सनकी लग रहा हूँ कि कैसे अपनी बीवी को दूसरों के बाँहों में डालकर मजे ले रहा है…

मगर सोचना इस पर कि कोई चीज अपना हक़ ज़माने से अपनी नहीं हो जाती… उसको हर तरह से प्यार करने और उसको अपनी मर्जी से सुख देने से वो आपको और भी ज्यादा प्यार करती है…

यही हाल अब सलोनी का भी था… उसकी आँखों में मेरे लिए एक अजीब सा प्यार नजर आने लगा था…

फिलहाल मैं उसके डांस और दूसरे लोगों द्वारा सलोनी को घूरने का मजा ले रहा था…

सलोनी एक लड़के के साथ नाच रही थी… वो मेरे से कुछ दूर थी… मैंने देखा वो बार बार मेरे को घूम घूम कर देख रही है…

मैंने उसको फ्री करने के इरादे से उसको बाय जैसे इशारा किया कि तुम एन्जॉय करो, मैं अभी आता हूँ…

और मैं उसको दिखाने के लिए बाहर की ओर आने लगा…

तभी मुझको वही वेटर मिल गया… क्या नाम था साले का… हाँ याद आया श्याम…मैंने उससे पूछा कि क्या कोई शर्ट मिल सकती है?

उसने अन्दर से लाकर मुझे एक सफ़ेद टी-शर्ट दे दी… मैंने अपनी शर्ट उतार कर उसे दी और सफ़ेद वाली टी-शर्ट पहन ली..वो बहुत से सवाल कर रहा था पर मैंने उसको चुप करा दिया कि बाद में बताऊँगा…

फिर मैं घूम कर पीछे से सलोनी के काफी निकट चला गया और उसकी तरफ पीठ कर ली…

वो काफी बिंदास होकर डांस कर रही थी, हल्का सा नशा उसको उन्मुक्त बनाये हुए था और ऊपर से मेरी बातों ने उसको काफी बिन्दास कर दिया था…

शायद हर लड़की का मन आजादी से अपनी मर्जी से मजे करने का होता है… मगर समाज की बंदिशें और दकियानूसी विचार उनको अपने मन की नहीं करने देते…

सलोनी वाकयी में बहुत निश्चिन्त होकर खुले मन से मस्ती कर रही थी, मज़े ले रही थी… उसको अब मेरी भी चिंता नहीं थी… वो समझ रही थी कि या तो मैं कहीं बाहर चला गया हूँ… और अगर हूँ भी तो उसको कुछ करने से मना करने वाला नहीं हूँ…

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और वो काफी हद तक सही भी थी… इसीलिए उसके बदन के हर अंग से एक अलग ही मस्ती झलक रही थी…

सलोनी के नाचने से उसका स्कर्ट बहुत तेजी से दोनों और घूम रहा था…

और उसकी टाँगें पूरी नग्न दिख रही थीं…

कहानी जारी रहेगी.

 
अपडेट. 70

सलोनी वाकयी में बहुत निश्चिन्त होकर खुले मन से मस्ती कर रही थी, मज़े ले रही थी… उसको अब मेरी भी चिंता नहीं थी… वो समझ रही थी कि या तो मैं कहीं बाहर चला गया हूँ… और अगर हूँ भी तो उसको कुछ करने से मना करने वाला नहीं हूँ…

और वो काफी हद तक सही भी थी… इसीलिए उसके बदन के हर अंग से एक अलग ही मस्ती झलक रही थी…

सलोनी के नाचने से उसका स्कर्ट बहुत तेजी से दोनों और घूम रहा था…

और उसकी टाँगें पूरी नग्न दिख रही थीं… पास वालों को तो नहीं मगर हाँ, दूर वाले जरूर उनको अंदर तक देख रहे होंगे, वो तो उनको आईडिया नहीं हुआ होगा… पर अगर उनको पता चल जाये कि इस हसीना ने अंदर कच्छी नहीं पहनी है तो शायद सबके लण्ड पानी छोड़ दें…

तभी लाइट काफी हल्की हो गई…

मैं जानता था कि ऐसे होटल में धीरे धीरे लाइट हल्की करते जातें हैं जिससे जोड़े अपनी मस्ती में डूबते जाते हैं…

मैंने देखा कि मेरे आगे एक जोड़ा डांस कर रहा था… लेडी कोई 35 साल की हल्की मोटी और कुछ सांवली सी थी…

उसने लाल टाइट स्लैक्स और सफ़ेद टी-शर्ट पहनी थी…

उसके साथ वाला आदमी भी काला और बहुत मोटा चश्मे लगाये बहुत गन्दा लग रहा था…

पता नहीं वो उसका पति था या कोई आशिक या बॉस…

पर दोनों बहुत रोमांटिक हो डांस कर रहे थे… दोनों एक दूसरे की बाँहों में जकड़े थे… और मोटा, काला आदमी लगातार उसके होंठों को चूसे जा रहा था…

पहले तो वो उस लेडी के चूतड़ों को स्लैक्स के ऊपर से ही सहला रहा था मगर लाइट हल्की हो जाने के बाद उसने अपने मोटे, गंदे हाथ स्लैक्स के अंदर डाल दिए थे…

मैंने साफ़ देखा कि उसके हाथ इतनी कसी हुई स्लैक्स को भी उठा, उठाकर काफी अंदर तक जा रहे थे… स्लैक्स के ऊपर से ही उसके हाथ लेडी के चूतड़ों पर चारों ओर घूमते हुए दिख रहे थे…

तभी मुझे पीछे से आवाज आई- वाओ मैम… आपने पैंटी नहीं पहनी…

सलोनी- ओह क्या कर रहे हो… अपना हाथ हटाओ वहाँ से…

मैंने अब सलोनी की ओर ध्यान दिया… ओह ! वो भी अब उस लड़के की बाहों में थी…

मैंने देखा कि वो लड़का भी सलोनी की स्कर्ट में अपना हाथ घुसाये था…

दोनों बहुत धीमे डांस कर रहे थे मगर लड़के का हाथ मुझे साफ़ दिख रहा था…

उसने सलोनी के चूतड़ों के बीच अपनी उँगलियाँ डाली हुई थी…

लड़का- अह्हा… कितनी गीली हो रही है मैम आपकी…

सलोनी- क्याआआ… ओह्ह्ह्ह्ह…

लड़का- चूऊऊत…

सलोनी- हटो बेशरम… बस्स्स्स्स निकालो न हाथ…

तभी मेरे पीछे से भी आवाज आई…मोटा आदमी- अरे देख जानेमन…वो साली नंगी ही आई है…मैंने एक साइड में हो दोनों को देखा… वो जोड़ा जो मेरे पीछे डांस कर रहा था… दोनों सलोनी को ही देख रहे थे…

लेडी- अरे हाँ… देखो कैसे उंगली करा रही है…

मोटा आदमी- हा हा… हाँ जैसे तेरे पति के सामने मैंने की थी तेरे…

लेडी- हा हा…हाँ बिलकुल… देखो कैसे मस्ती ले रही है…

इसका मतलब वो लेडी किसी और की पत्नी थी और यहाँ किसी और के साथ मस्ती करने आई थी…

मैंने देखा उस मोटे आदमी ने लेडी की स्लैक्स उसके चूतड़ों के काफी नीचे कर दी थी और उसके मोटे मोटे चूतड़ नंगे से दिखने लगे थे…

लेडी- क्या कर रहे हो आप? मुझे भी इसकी तरह ही नंगी करोगे क्या?

मोटा आदमी- तुझसे तो कितना कहता रहता हूँ… पर तुझे ही शर्म आती रहती है…

लेडी- अरे मन तो मेरा भी बहुत करता है… मगर साला वो हरामी… देखते नहीं हो… मेरी हर चीज पर कितनी नजर रखता है… हर समय बंदिश और बंदिश… नरक बना दिया है कमीने ने मेरी ज़िंदगी को… बस जब वो बाहर होता है… तभी कुछ जी पाती हूँ…

मेरे देखते देखते ही उस आदमी ने उसकी स्लैक्स चूतड़ से लगभग नीचे ही कर दी…

तभी वो आदमी घूमकर सलोनी की ओर आ गया…

मोटा आदमी- एक मिनट इधर आ जा… जरा इसके चिकने चूतड़ भी तो छूकर देखूँ यार…

लेडी- अरे पिटोगे क्या…?? इधर उधर हाथ मत मारो…

मगर साला मोटा बहुत बड़ा कमीना था… वह नाचते नाचते ही सलोनी के बिल्कुल पास चला गया… और फिर मैंने ध्यान से देखा…

उसने आपने हाथ सलोनी के चूतड़ों से सटा दिए…सलोनी ने एक बार पीछे देखा और वो मुस्कुरा दी… उसने एक बार भी विरोध नहीं किया !

बस मोटे को छूट मिल गई… अब वह अपनी वाली लेडी को मेरी ओर करके खुद सलोनी के पास हो गया और सलोनी की पीठ पर सटकर उसके चूतड़ों से चिपक गया…

मेरे सामने उस लेडी के नंगे चूतड़ दिख रहे थे… मैंने भी उसके चूतड़ अपनी दोनों मुट्ठियों में पकड़ कर दबा दिए और वो लेडी अचानक मेरी और घूमी…

उसकी आँखें पूरी लाल थी… और…!!!

 
अपडेट 71

मस्ती भरी रात का पूरा मजा आ रहा था… सलोनी तो मस्ती कर ही रही थी… उसके चेहरे से लग रहा था कि वो हल्के नशे में है और वहाँ का माहौल उसको कुछ ज्यादा ही नशीला बना रहा था…

इस तरह खुले में इतने लोगों के बीच सेक्स का मजा करने का यह मेरा तो पहला ही अनुभव था..

जहाँ न जाने कितनी आँखें देख रही थी और कई हाथ छू रहे थे पर सलोनी तो पहले भी ऐसे खुले सेक्स का मजा ले चुकी है… यह मैंने अपने पेन रेकॉर्डर से सुना ही था…

और उसके हाव भाव से लग भी रहा था कि वो पूरी तरह मस्ती में डूबी थी…

आगे वाला लड़का बड़े मजे से उसको अपने से चिपकाये उसकी गर्दन और जहाँ जगह मिल रही थी चूम रहा था और वो मोटा आदमी भी सलोनी के पीछे से चिपक गया था…

मैंने देखा उसने सलोनी का स्कर्ट पूरा ऊपर को करके उसका निचला सिरा स्कर्ट की बेल्ट में फंसा दिया तो उसको अब स्कर्ट पकड़ने या ऊपर करने की जरुरत नहीं हो रही थी.

सलोनी पीछे से पूरी नंगी ही दिख रही थी, जरा सा स्कर्ट का कपड़ा ही अब उसके विशाल चूतड़ों पर दिख रहा था…

मोटे आदमी के दोनों हाथ सलोनी के चूतड़ों के समस्त भाग में घूम रहे थे और कभी कभी वो अपनी मोटी मोटी उँगलियों का भी प्रयोग कर रहा था.

इधर उस मोटे के साथ वाली लेडी पूरी मस्ता गई थी, वो मुझसे चिपकी जा रही थी…

वैसे भी वो केवल मजे लेने आई थी, उसको उस मोटे की बिलकुल चिंता नहीं थी.

मेरे हाथों ने उसकी टाइट स्लैक्स चूतड़ों को सहलाते हुए उसके मोटे चूतड़ों से पूरी ही उतार दी थी… स्लैक्स उसकी जाँघों तक पहुंच गई थी…

तभी उस लेडी ने कमाल कर दिया.. उसने मेरी पैंट की चेन खोलकर मेरा लण्ड बाहर निकल लिया…

उसकी इस हरकत से मुझे बहुत आराम मिल गया क्योंकि बहुत देर से मेरा लण्ड पूरा खड़ा था और पेंट के अंदर उसमे दर्द होने लगा था.

वो मेरे लण्ड को ऊपर से नीचे सहलाने लगी..

मैं अपना एक हाथ उसके चूतड़ों से हटा उस लेडी के आगे लाया और सीधा उसकी टांगों के बीच चूत पर रख दिया..उसकी स्लैक्स कच्छी के साथ ही उतर गई थी इसलिए चूत पूरी तरह नंगी थी…

क्या मस्त चूत थी यार !! बिल्कुल फूली हुई… चूत पर बहुत मुलायम रेशमी बाल थे… मेरे हाथों की उँगलियों ने उसके बालों को सहलाते हुए चूत के होंठों को सहलाया..

उसके मुँह से सिसकारी निकल गई- ..अह्हा… आआआ… आआआ… अहा…

मैंने उँगलियों से ही उसके चूत के छेद को ढूंढ अपनी एक उंगली से छेद को कुरेदा.. उसके चूतड़ों पर रखा हाथ भी पीछे से उसकी चूत को कुरेदने लगा..

उसने कसकर मेरे लण्ड को पकड़ दबा दिया…

उसकी चूत पूरी गीली हो गई थी और लगातार पानी छोड़ रही थी…तभी उसने मेरे कान में कहा- …चलो कहीं साइड में चलते हैं…

क्या बात है !! मतलब वो चुदवाने के मूड में आ गई थी…

मैंने सलोनी की ओर देखा तो वो उन दोनों से मस्ती कर रही थी… उस मोटे आदमी ने सलोनी को पीछे से दबोच लिया था और उसके हाथ आगे से सलोनी की स्कर्ट के अंदर थे..

आगे से सलोनी की स्कर्ट अभी भी उसकी बेशकीमती चूत को ढके थी पर इस समय शायद उसकी चूत पर उस मोटे के हाथ थे जो पता नहीं कैसे उसको छेड़ रहे होंगे…

अब या तो मैं यहाँ रूककर सलोनी की मस्ती देखता या फिर इस नई बालों वाली चूत का मजे लेता…

यह तो पक्का था कि वो चुदाई के लिए पूरी तरह तैयार थी और मेर लण्ड को बिना किसी शर्म के कभी सहला रही थी तो कभी कसके पकड़ लेती तो कभी मरोड़ देती..

कुछ समझ नहीं आ रहा था कि क्या करूँ .???

लण्ड उसकी हरकतों के आगे झुकने को तैयार ही नहीं था…

मैंने बड़े प्यार से उससे उसका नाम पूछा- ..जानेमन तुम्हारा नाम क्या है?

लेडी- ऋज़ू.. बहुत धीरे से ही उसने बोला..

मैं- क्या मूड है?

ऋज़ू- तुम्हारे लण्ड को खा जाने का…

एकदम खुली शब्दों का प्रयोग !मतलब पूरी तरह रण्डी बन गई थी वो… कहते हैं एक रण्डी हर स्त्री में छुपी होती है, बस उसको बाहर निकालना पड़ता है.

ऋज़ू काफी हाई सोसाइटी की दिख रहे थी मगर इस समय बिलकुल एक रण्डी की तरह ही बात कर रही थी और उसकी हर हरकत एक उच्च श्रेणी की रण्डी जैसी ही लग रही थी.

मेरा दिल उसको छोड़ने का बिल्कुल भी नहीं कर रहा था…बस सलोनी को मस्ती करते देखने का थोड़ा सा मन था ..

मगर ऋज़ू जैसे माल ने उसमें भी संदेह पैदा कर दिया था कि क्या करूँ?

मेरा लण्ड अब ऋज़ू की चूत में घुसने के लिए व्याकुल था…- मेरी जान यहाँ कहाँ चोदूँ तुम्हें? मेरा लण्ड तो तुम्हारी इस चुनिया के लिए पागल है..

मैंने कस कर उसकी चूत को मसल दिया तो ऋज़ू- अह्ह्हा…आआआ… मेरी चूत भी तेरे लौड़े को पूरा खा जाएगी.

उसकी भाषा हर तरह की लगाम छोड़ती दिख रही थी..

मैंने सोच लिया कि इस कमीनी के साथ पूरा मजा लेना है पर अब मेरा दिमाग केवल यह सोच रहा था कि मैं ऋज़ू को भी चोद लूँ और सलोनी को भी देखता रहूँ !

अब ये दोनों काम एक साथ कैसे होंगे… !?!

कहानी जारी रहेगी.

 
अपडेट. 72

मैंने बड़े प्यार से उससे उसका नाम पूछा- ..जानेमन तुम्हारा नाम क्या है?

लेडी- ऋज़ू.. बहुत धीरे से ही उसने बोला..

मैं- क्या मूड है?

ऋज़ू- तुम्हारे लण्ड को खा जाने का…एकदम खुली शब्दों का प्रयोग !

मतलब पूरी तरह रण्डी बन गई थी वो… कहते हैं एक रण्डी हर स्त्री में छुपी होती है, बस उसको बाहर निकालना पड़ता है.

ऋज़ू काफी हाई सोसाइटी की दिख रहे थी मगर इस समय बिलकुल एक रण्डी की तरह ही बात कर रही थी और उसकी हर हरकत एक उच्च श्रेणी की रण्डी जैसी ही लग रही थी.

मेरा दिल उसको छोड़ने का बिल्कुल भी नहीं कर रहा था…बस सलोनी को मस्ती करते देखने का थोड़ा सा मन था ..मगर ऋज़ू जैसे माल ने उसमें भी संदेह पैदा कर दिया था कि क्या करूँ?

मेरा लण्ड अब ऋज़ू की चूत में घुसने के लिए व्याकुल था…- मेरी जान यहाँ कहाँ चोदूँ तुम्हें? मेरा लण्ड तो तुम्हारी इस चुनिया के लिए पागल है..

मैंने कस कर उसकी चूत को मसल दिया तो ऋज़ू- अह्ह्हा…आआआ… मेरी चूत भी तेरे लौड़े को पूरा खा जाएगी.उसकी भाषा हर तरह की लगाम छोड़ती दिख रही थी..

मैंने सोच लिया कि इस कमीनी के साथ पूरा मजा लेना है पर अब मेरा दिमाग केवल यह सोच रहा था कि मैं ऋज़ू को भी चोद लूँ और सलोनी को भी देखता रहूँ !अब ये दोनों काम एक साथ कैसे होंगे… !?!

मेरा दिल चाह रहा था कि यह रात कभी ख़त्म ना हो ! मेरी सभी इच्छायें यहाँ पूरी होने की कगार पर थीं…बल्कि अगर ऐसा कहूँ तब भी गलत नहीं होगा कि मेरी सभी सोच से ऊपर अब यहाँ का माहौल हो गया था… नशे ने हम दोनों को हर वो हरकत करने पर मजबूर कर दिया था जो शायद होश रहते हम कभी भी नहीं कर सकते थे !

ऋज़ू भले ही 34-35 साल की थी मगर अविरल सेक्स ने उसको 25-26 साल का बना रखा था… वह बहुत ही खूबसूरत दिख रही थी… जरूरत से ज्यादा उसका खुलापन मुझे मेरे लक्ष्य से भटका रहा था… मेरा ध्यान सलोनी की ओर से हट रहा था…

ऋज़ू ने मेरे लण्ड को सहला सहला कर पूरा लाल कर दिया था… वो अपने नाखून मेरे लण्ड के टॉप पर रगड़ रही थी.मैंने ऋज़ू की मस्त चूचियाँ दबानी शुरू कर दी !

ऋज़ू- अगर प्यास लगी हो तो पी ले… बहुत रस है रे मेरे मम्मो में !मैं भी अब ऋज़ू के नंगपने में रंगने लगा था- हाँ जानेमन.. कामरस से भरे पड़े हैं तेरे ये गोले..मैं उसकी कुर्ती के ऊपर से ही उनको मसलने लगा !और फिर ऋज़ू ने कमाल कर दिया… उसने अपनी स्लैक्स अपने पैरों से पूरी निकाल दी…

भरी स्टेज पर ऐसा शायद कोई रण्डी भी नहीं करती मगर ऋज़ू ने तो खुलेपन की हद ही कर दी थी.. वो कमर से नीचे पूरी नंगी मेरे साथ मजे कर रही थी..

ऋज़ू- चल न किसी कोने में.. मैं तेरे लण्ड को पूरा खाना चाहती हूँ.. तेरे लण्ड की खुशबू ने मुझे पागल कर दिया है…

वो मेरे लण्ड को पकड़ अपनी चूत को आगे कर उस पर लगा कर घिसे जा रही थी… वो इस कदर पागल हो रही थी कि अगर मैंने कुछ नहीं किया तो वहाँ खुद ही सबके सामने चुद लेगी…

उसके गदराये शरीर को छोड़ने का मेरा भी बिल्कुल मन नहीं था !मैंने सलोनी को देखने के लिए उधर नजर घुमाई मगर अह…होह… वो वहाँ नहीं थी…अरे यह कहाँ चली गई? मैंने चारों ओर देखा मगर वो मुझे कहीं दिखाई नहीं दी.जरा सी देर में ही वो गायब हो गई थी, मुझे वो दोनों भी नहीं दिखाई दिए, न तो मोटा आदमी और न ही उसके साथ वाला लड़का !

अरे साले मेरी नजर बचा सलोनी को कहाँ उठा ले गए.. जब यहाँ मेरे सामने ही उन्होंने उसकी स्कर्ट उठा उसको नंगा कर दिया था और उसके चूतड़ और चूत सब छू रहे थे.. अब पता नहीं अकेले में क्या कर रहे होंगे??मुझे डर लगने लगा कि सलोनी की मदमस्त जवानी देख कोई उससे जबरदस्ती ना कर दे…

मैं सलोनी को ढूंढने जाने लगा मगर ऋज़ू ने कसकर मुझे पकड़ लिया…मैंने भी उसका हाथ पकड़ा और स्टेज से नीचे आकर सोचने लगा कि सलोनी किस ओर गई होगी.इतनी देर में 2-3 आदमियों ने ऋज़ू के चूतड़ों पर चांटा मारा और बड़े गंदे कमेंट्स भी दिए.. मगर ऋज़ू ने बड़ी छिनाल अदा से सबको मुस्कुराकर ही जवाब दिया.

मैं समझ गया कि यह यहाँ की बहुत पुरानी चुद्दक्कड़ है, मैंने ऋज़ू के कान में पूछा- …अरे वो तेरे साथ वाला मोटा कहाँ है?

ऋज़ू- पता नहीं.. चोद रहा होगा कमीना कहीं किसी चूत को..

मैं- अरे वो मेरे साथ वाली लड़की थी न, वो कहीं नहीं दिख रही.. वो मेरे साथ आई थी..

ऋज़ू- अरे वो नंगी रण्डी.. जिसने कच्छी नहीं पहनी थी, तेरे साथ थी? ..उसी के साथ तो था वो कमीना… चल छोड़ उसको, उसकी चूत से कहीं मजेदार है मेरी चूत.. चल आज मुझे अपना मूत पिला… उसको चुदने दे किसी और से…

.!

उसकी इतनी गन्दी बातों ने तो हद कर दी थी.. मैं ज़िंदगी में पहली बार ही किसी स्त्री के मुख से इतनी गन्दी भाषा सुन रहा था…

मुझे बहुत परेशान देख उसने मेरा हाथ पकड़ा और बोली- चल उसके सामने ही मुझे चोदना… मुझे पता है कहाँ ले गया होगा वो कमीना उसको…और मैं उसके साथ आगे को गया…

अभी हम एक गैलरी की ओर गए ही थे कि मुझे श्याम दिख गया…मैं जल्दी से उसकी ओर लपका- अरे श्याम.. तूने उसको देखा जो मेरे साथ थी?पर उसने पहले ऋज़ू को देखा और उसके चूतड़ों पर हाथ मारते हुए बोला- और सुना छम्मकछल्लो.. आज कितनों से चुदवा ली.. चल मेरा मूत पियेगी क्या?

मैं उसकी बात सुन आश्चर्यचकित था मगर मुझे सलोनी की चिंता हो रही थी, मैंने कसकर श्याम को झकझोर दिया- अरे उसको छोड़.. पहले यह बता कि तूने सलोनी को देखा कहीं?अब उसने मेरे को देखा- अरे आप साहब..? हाँ वो मेमसाहब… वो तो वहाँ उसको 2-3 जने मिलकर… हा… हो… हो… हो…और मुँह दबाकर हंसने लगा…मैं उसकी ओर ध्यान ना देकर सीधे उस ओर बढ़ गया जिधर उसने इशारा किया था..

मुझे भागता देख ऋज़ू अपने नंगेपन की परवाह ना करते हुए मेरी ओर लपकी और मुझे पकड़ लिया.ऋज़ू- अरे छोड़ न उस छिनाल को… वो तो अब चुद ही रही होगी… तू तो मेरी इस चूत को शांत कर और मुझे अपना गर्म मूत पिला…नशे में ना जने क्या-क्या बक रही थी..!!अगर मेरे दिमाग में कुछ और नहीं होता तो शायद उसकी इस तरह गन्दी बातों को सुन मैं बहुत मस्त होता.. मगर मैं सलोनी को इतना प्यार करता था कि मुझे उसकी बहुत चिंता हो रही थी…

मैंने ऋज़ू को भी साथ ले लिया कि चलो आज इसको वहीँ सलोनी के सामने ही चोदूँगा..यह दिमाग में आते ही मेरे शरीर में एक झुरझुरी सी आ गई- …वाओ, कितना मजा आएगा…??तभी मुझे एक ओर से बहुत तेज सिसकारियों की आवाज आई… मैं उस ओर बढ़ा…और तभी ऋज़ू की आवाज आई- अरे, कैसे जमकर चुदवा रही है यह तो…ओह !!!मैं सन्न रह गया…

कहानी जारी रहेगी.

 
अपडेट. 73

मैंने सलोनी के साथ हर तरह की मस्ती करने की सोच तो लिया था पर इस मस्ती में अभी और क्या क्या देखना पड़ सकता था, यह अभी तक मैंने नहीं सोचा था…और अब हर नई बात के लिए मुझे एक अजीब सी घबराहट हो रही थी…

ऋज़ू जैसी बोल्ड लड़की मैं खुद चुदाई करने के लिए तो सोच सकता था क्योंकि वो किसी और की बीवी थी मगर इतना बोल्ड मैं सलोनी के लिए तो नहीं सोच सकता था…

मैं भी एक भारतीय पुरुष ही था, मैं बड़ी बैचेनी से सलोनी को ढूंढ रहा था.

जैसे ही ऋज़ू ने एक ओर देखते हुए कहा- अरे… यह तो यहाँ चुद रही है मस्ती से…

मेरे दिल को एक हल्का सा धक्का ही लगा…मैंने उस ओर देखा ….वहां एक कमरा था और तीन अजीब से आदमी आधे नंगे दिखे, उनके नीचे के शरीर पुरे नंगे थे..

वहां केवल एक ही सिंगल बिस्तर था… मैंने देखा एक आदमी उस लड़की की दोनों टाँगे अपने हाथ में पकड़े था और उसको तेजी से चोद रहा था..

मुझे दरवाजे से वो लड़की बिल्कुल नहीं दिख रही थी क्योंकि उस आदमी के शरीर ने उसको लगभग पूरा ही ढक दिया था.

मैंने चारों ओर नजर घुमाई ओर मुझे एक तरफ एक कपड़ा दिखा… मैंने ध्यान से देखा… अरे, यह तो सलोनी की स्कर्ट है…

इसका मतलब सलोनी??????

दो आदमी आगे सलोनी के दोनों तरफ बैठे थे जो अपने हाथों से उसके बदन को मसल रहे थे, उसने दोनों के लण्ड अपने हाथ से पकड़ रखे थे और उनको एक एक करके चूस रही थी…

क्योंकि जब मैंने देखा तब वो बायीं ओर वाले का चूस रही थी… फिर देखते ही देखते उसने अपना मुँह दायीं ओर कर लिया और उसका लण्ड चूसने लगी …

मेरा दिल बैठा जा रहा था क्योंकि मेरी सलोनी इतनी चुदक्कड़ हो गई थी किएक साथ तीन लण्डों से खेल रही थी !!!

मेरे कदम जैसे दरवाजे पर ही जम गए थे.. उन्होंने एक कदम भी आगे बढ़ने से मना कर दिया था…

मेरी समझ नहीं आ रहा था कि क्या करूँ???

अब रोकने से भी क्या फ़ायदा था ??? जो उसको चोद रहा था, वो काफी तगड़ा आदमी था, अगर मैंने उनको जरा भी रोकने की सोची तो पता नहीं साला मेरे साथ क्या करेगा !!!

तभी मैंने ध्यान दिया कि कोई मेरे लण्ड को भी चूस रही है, मैंने नीचे देखा तो वो ऋज़ू थी… ना जाने उसने अपनी कुर्ती कब उतार दी थी.. वो पूरी नंगी नीचे बैठी बड़ी लगन से मेरे लण्ड को चूस रही थी जो इतने गर्म माहौल में भी, ऐसे घटनाक्रम की वजह से बैठ गया था.

मैंने ध्यान किया कि सलोनी को ढूंढने में मैं इतना मशगूल था कि अपने लण्ड को भी अंदर नहीं किया था.. मैं ऐसे ही सब जगह भाग दौड़ कर रहा था…

ऋज़ू के जरा से प्रयास से ही मेरा लण्ड खड़ा हो गया…

तभी मैंने सलोनी की ओर देखा, वो आदमी बहुत तेज धक्के लगाने लगा… इसका मतलब वो चरम पर था…

कमरे में तेज आहें ओर धक्कों की आवाजें गूंजने लगीं..

ज़िंदगी में पहली बार मैं किसी और का वीर्य अपनी जान के चूत में जाते देखने वाला था…

मगर थैंक गॉड… उसने आखरी समय में अपना लण्ड सलोनी की चूत से बाहर निकाल लिया… भक की तेज आवाज आई…

और उसने शायद हमको देख लिया था… वो उठकर हमारी ओर को आया…

मैंने उसके लण्ड को देखा.. पूरा तना हुआ… काला ओर लण्ड का अगला भाग लाल सुर्ख हो रहा था.

वो जल्दी से हमारे पास आया, और उसने ऋज़ू के चेहरे के पास अपना लण्ड कर दिया..

ऋज़ू ने भी बिना सोचे उसके लण्ड को अपने मुख में भर लिया…

अब मैंने हिम्मत करके सलोनी की ओर देखा… वो दोनों आदमी अभी भी सलोनी से मस्ती में लगे थे…

मैंने ऋज़ू के हाथ से अपना लण्ड छुड़वाया और सलोनी की ओर गया…

वाओ… जैसे ही मैंने देखा.. अरे यह तो कोई और है..

वो कोई और ही लड़की थी… गोरी चिट्टी… मगर उसकी चूत ओर चूची काफी मसली हुई लग रही थी…

मैंने एक ठंडी सांस ली… जैसे किसी गुफा से बाहर आया हूँ… और खुशी के मारे मैंने उस लड़की के पैरों को फैलाकर उसकी चूत को अपने हाथ से सहला दिया…

उसने मुस्कुराकर मुझे देखा जैसे उसको कोई ऐतराज नहीं हो… और मेरे लण्ड को अपने हाथ में पकड़ लिया…

मेरा दिल तो कर रहा था कि डाल दे इसकी चुदी हुई चूत में मगर मैंने फिर खुद को कंट्रोल किया और कुछ पीछे को हट गया क्योंकि आगे वाला एक आदमी अब उसकी चूत को चोदने के लिए मेरी ओर आ गया था.

मैंने भी उसको चोदने की या वहाँ कोई पंगा करने की कोई चेष्टा नहीं की.

मुझे अब फिर सलोनी याद आ गई.. अगर वो यहाँ नहीं है तो फिर कहाँ है…????

मैंने सलोनी की स्कर्ट उठाकर देखी… अरे यह तो वाकयी उसी की स्कर्ट थी…

अपनी स्कर्ट यहाँ उतार कहाँ चली गई वो नंगी… और उसने तो कच्छी भी नहीं पहनी थी…

मैंने देखा उस काले हब्शी ने अपना सारा वीर्य ऋज़ू के ऊपर गिरा दिया था और ऋज़ू अभी भी उसके लण्ड को पकड़े थी…

तभी कमरे के अंदर एक दरवाजा खुला जो शायद बाथरूम था, उसमें से एक लड़का पूरा नंगा बाहर निकला…

अरे यह तो वही था जो सलोनी के साथ डांस कर रहा था…

उसने मुझे देखा और बड़ी गन्दी हंसी हंसा…

वो पूरा नंगा था मगर उसका लण्ड पूरा मुरझाया हुआ था… वो चारों ओर शायद अपने कपड़े देख रहा था… क्योंकि उसने बिस्तर के कोने पर पड़ी एक जींस उठाकर पहन ली थी…

मैंने उससे सलोनी के बारे में पूछा… उसने बिना कुछ कहे मुस्कुराते हुए बाथरूम की ओर इशारा कर दिया.

मैं जल्दी से उधर लपका और बाथरूम का दरवाजा खोल दिया और मुझे सलोनी मिल गई वो सामने कमोड पर बैठी थी… पूरी नंगी… उसने एकदम से मुझे देखा.. हम दोनों की नजरें आपस में मिली…

 
अपडेट. 74

क्या बात थी… हर पल मस्ती भरा गुजर रहा था… जिधर देखो मस्ती, चुदाई और आहें…कमरे में वो लड़की अभी भी दो आदमियों के साथ मस्ती भरी चुदाई कर रही थी…

ऋज़ू उस हब्शी का लण्ड चूस रही थी और अब बाथरूम में मेरी बीवी… मेरी प्यारी जान… सलोनी पूरी तरह नंगी…

जी हाँ… उसके कातिल बदन पर एक भी कपड़ा नहीं था… उसकी स्कर्ट तो मेरे हाथ में ही थी और टॉप भी बाथरूम में एक तरफ पड़ी नजर आ गई… ब्रा भी कहीं न कहीं होगी…

पर सलोनी के बदन पर कपड़े के नाम पर एक रेशा तक नहीं था… वो बाथरूम की तेज लाइट में मेरे ठीक सामने कमोड पर बैठी थी…

और वो मोटा, काला आदमी पूरा नंगा उसके आगे जमीन पर बैठा था…

अपने मोटे शरीर की वजह से वो बड़े अजीब तरीके से ही वहाँ बैठा था… उसके दोनों पैर फैले थे और चूतड़ जमीन पर टिके थे…

उसने अपना मुँह मेरी बीवी के दोनों टांगों के बीच डाल रखा था… मतलब वो उसकी रसीली छोटी से चूत का रस पी रहा था…

मैंने जैसे ही दरवाजा खोला… तो यही दृश्य मेरे सामने था…

सलोनी और मेरी नजरें आपस में मिलीं और उस मोटे ने भी चूत से मुँह हटा कर पीछे घूमकर मुझे देखा…

तभी मुझे सलोनी का हर अंग नंगा नजर आ गया…

मोटे के चेहरे पर कोई शिकन तक नहीं आई… पर हाँ… सलोनी के चेहरे पर कुछ परेशानी नजर आई…

मतलब नशे के बाबजूद उसने मुझे पहचान लिया था और उसको यह भी समझ आ रहा था कि शायद वो कुछ गलत कर रही है…

उसने वहाँ से उठने की कोशिश की पर मोटे ने उसकी दोनों जांघों को अपने हाथों से जकड़ लिया…

तो उसको मजबूरन फिर कमोड पर बैठना पड़ा…

यह गनीमत थी कि उसने कुछ बोला नहीं वरना सबको वहाँ पता चल जाता कि हम दोनों पति पत्नी हैं…

मैंने मुस्कुराकर आँखों ही आँखों में उसको इशारा किया कि मजे लो…

उसकी आँखें एक पल के लिए कुछ सिकुड़ी पर फिर सामान्य हो गईं मगर उसका चेहरा बता रहा था कि वो जैसे मजबूरी में ये सब कर रही हो, उसको बहला फ़ुसला कर यहाँ लाया गया हो…

तभी मोटे ने सलोनी की दोनों टांगें उठा ली और अपने कन्धों पर रख ली, इस अवस्था में सलोनी की चूत की दोनों फ़ांकें खुलकर सामने आ गई…

और वो मोटा बहुत मदमस्त तरीके से उसको चाट रहा था…

मुझे देखते देखते ही धीरे धीरे सलोनी की आँखें बंद होने लगी… मतलब उसको बहुत मजा आ रहा था और उसके मुँह से निकली आवाज ने भी यह सच साबित कर दिया- …अह्ह्ह्ह्हाआआआ अह्हाआआआ मईइइइइ अह्ह्ह्हाआआ

.!

मेरे होंठों की मुस्कराहट गहरी हो गई… यह पहला मौका था जब मैं सलोनी के ठीक सामने था, उसने मुझे देख लिया था और वो पूरी नंगी एक अजनबी के सामने बैठी थी और वो अजनबी बड़े मजे से उसकी चूत चाट रहा था और सलोनी भी पूरा मजा ले रही थी…

ऐसी थी सलोनी की चूत की गर्मी… जिसने उसकी सारी घबराहट को दूर कर दिया था और उसकी चूत ने पानी छोड़ना शुरू कर दिया था…

तभी ऋज़ू मेरे पास आ गई… मैंने एक नजर कमरे में देखा… पलंग पर अभी भी वो लड़की उन दो आदमी से मजे ले रही थी…

एक उसको चोद रहा था और दूसरे का लण्ड उसके मुँह में था, तीसरा शायद बाहर चला गया था…

तभी ऋज़ू फ्री हो गई थी और वो लड़का भी नहीं था जो सलोनी के पास से गया था…

उसका मुझे अंदेशा था कि क्या वो सलोनी को चोदकर गया था या ऐसे ही चला गया था?

क्योंकि उसका चेहरा बता रहा था कि गया तो वो लण्ड का पानी निकाल कर ही था…

अब कहाँ यह तो सलोनी जाने या फिर ये दोनों… पता नहीं ?????

ऋज़ू ने मेरी जींस खोलनी शुरू कर दी… मेरा लण्ड भी अब आजादी चाह रहा था…

और कुछ ही देर में ऋज़ू नीचे बैठ मेरे लण्ड को चूस रही थी…

मैंने सलोनी को देखा… वो आँखें खोल मुझे देख रही थी, अब उसके होंठों पर भी एक आकर्षक मुस्कुराहट थी…

जो थोड़ी बहुत ग्लानि थी वो इस दृश्य ने खत्म कर दी थी…

अब हम दोनों पति पत्नी अपने लण्ड और चूत किसी अजनबी से चुसवा रहे थे…

मैं अब सलोनी को कुछ और भी करते देखना चाह रहा था इसीलिए मैंने ऋज़ू को खड़ा किया और उसकी कुर्ती निकाल उसको भी पूरी नंगी कर दिया क्योंकि उसने कुर्ती के अंदर ब्रा नहीं पहनी थी…

मैंने ऋज़ू वहीं वाश वेसिन से लगाकर उल्टा खड़ा कर दिया…

वो खुद झुक गई, उसको चुदाई का अच्छा अनुभव था, ऋज़ू ने झुककर अपनी गांड को ऊपर को उठाकर अपने दोनों छेद खोल दिए कि चाहे किसी में भी डाल दो…

मैंने सलोनी की ओर देखा… वो अभी भी मुझे मुस्कराकर देख रही थी… और उसकी लाल आँखें बता रही थी कि डाल दो इसकी चूत में…

मैंने भी ऋज़ू की चूत को अपने बाएं हाथ से सहलाया और दायें हाथ से लण्ड को पकड़ उसके चूत के छेद से चिपका एक ही झटके में लण्ड चूत की गहराई में उतार दिया…

मोटे को मेरी चालू बीवी की चूत चाटने में इतना मजा आ रहा था कि वो एक पल को भी अपना मुँह नहीं हटा रहा था…

अब उस बाथरूम में कई आवाजें एक साथ शोर करने लगी…

सलोनी और ऋज़ू की आहें और सिसकारियाँ…

चूत चाटने की चपर शपर और मेरी जांघें जब ऋज़ू के मोटे चूतड़ से टकराती तो पट-पट… साथ ही लण्ड के चूत में जाने की भी आवाज…

मैंने सपने में भी नहीं सोचा था कि आज ही इतना मजेदार सीन हो जायेगा…

सलोनी हमारी चुदाई को देखते हुए अपनी चूत की चुसाई का पूरा मजा ले रही थी पर मैं तो उसकी भी चुदाई का इन्तजार कर रहा था…

क्या मुझे उसकी चुदाई देखने को मिलेगी…??

तभी वो मोटा सलोनी की चूत के मुख से अपना मुँह हटा हाँफ़ने लगा…

और सलोनी… ?????

 
अपडेट. 75

एक तो बहुत मस्त रात थी और किस्मत भी इतनी शानदार थी कि रात ख़त्म होने का नाम ही नहीं ले रही थी.मेरे लण्ड ने तो आज पूरे मजे लेने थे, वो बड़े ही रिदम के साथ ऋज़ू की चूत में आ जा रहा था, उसके हर कोने में घूम रहा था.ऋज़ू भी किसी नृत्यांगना की तरह अपने चूतड़ों को घुमा घुमा कर चुदवा रही थी.

मेरा मजा तो कई गुना बढ़ गया था क्योंकि मेरे सामने मेरी जान सलोनी पूरी मस्त थी और पूरी नंगी होकर एक अजनबी से मजे कर रही थी.

इस मजे के लिए तो मैं अपनी पूरी सम्पत्ति दांव पर लगा सकता था पर किस्मत से यह मजा मुझे आज मुफ़्त में ही बिना किसी मेहनत के ही मिल गया था.

मैं यह सोच सोच कर ऋज़ू की चूत में जोरदार धक्के मार रहा था कि आज के बाद तो हम दोनों और भी मजे करेंगे क्योंकि जिस बात के लिए मैं सारी योजना बना रहा था कि हम दोनों आपस में खुलकर अनजान लोगों से सेक्स करें !

वो हम दोनों ही रोज कर तो रहे थे… पर आपस में नहीं खुल पा रहे थे… वो सब आज अचानक ही हो गया था… अब देखते हैं यह रात हमारे जीवन में कैसा नया मोड़ लेकर आती है…

मैं लगातार देख केवल सलोनी को ही रहा था कि वो कैसे मजे ले रही है और मजे की बात यह थी कि वो भी मुझे ही देख रही थी.. शायद उसके मन में भी वही सब था जो मेरे मन में था.. उसको भी मेरी चुदाई देखने में मजा आ रहा था…

मैंने ऋज़ू के चूतड़ों को अपने दोनों हाथों से थाम रखा था और उसको चोदे जा रहा था.

वो मोटा किसी धौकनी की तरह हाँफ़े जा रहा था, फिर वो सलोनी की ओर मुँह करके बैठ गया.

मुझे उसकी पीठ ही नजर आ रही थी पर सलोनी जैसे सब समझ गई थी कि मैं अब सब कुछ देखना चाह रहा हूँ…

उसने कमोड से खड़ी होकर बहुत ही मुश्किल से उस मोटे को खड़ा किया.मैंने देखा उठते समय मोटे के हाथ सलोनी के चूतड़ों पर थे.सलोनी ने मोटे को कमोड पर बैठा दिया…

मैंने मोटे के लण्ड को देखने की कोशिश की मगर मुझे कहीं दिखाई नहीं दिया…सलोनी भी उसके टांगों के बीच हाथ चला रही थी…

तभी वो मोटा खड़ा हो गया…अरे यह क्या है..???? बिल्कुल छोटा सा मुरझाया हुआ… बच्चों की नुन्नी भी उससे बड़ी होती है…

इतने बड़े पेट और मोटी मोटी जाँघों के बीच उसका लण्ड तो नहीं हाँ लुल्ली दिख ही नहीं रही थी…

सलोनी उसको भी अपनी सेक्सी उँगलियों से हिला कर देख रही थी मगर उसमें बिल्कुल भी जान नहीं थी.

कैसा मर्द था साला ! इतनी सेक्सी लड़की उसके लण्ड को सहला रही है और वो मुदों की तरह बैठा है !

तभी ऋज़ू ने भी उस ओर देखा और ‘हा हा हा हा हा हा हा’ जोर से हंसने लगीमैं- क्या हुआ? क्यों हंस रही है??

ऋज़ू- अरे कहाँ राख में चिंगारी ढून्ढ रही है ! यह तो ऐसा ही है साला.. एक बार पानी निकलने के बाद अब कल ही जागेगा.. वो तो मेरे पति का बॉस है… तभी झेल रही हूँ वरना.. !!

मोटा आदमी- कमीनी चुपचाप क्यों नहीं चुदवा लेती.. हर समय अपनी चूत घुसाती रहती है… इसी से चोदा है तुझे कितनी बार… फिर भी…

ऋज़ू- हाँ हाँ मुझे पता है.. कैसे चोदा है..!! हा हा हा हा…

मोटा आदमी- चल साली, मुझे मूत आ रहा है… चल पी इसको.. तुझे तो बहुत शौक है न मूत पीने का…

उसकी बात सुनते ही सलोनी उसके लण्ड को छोड़ दूर हट गई…

अभी तक हम दोनों ही सेक्स में इतने आगे नहीं बढ़े थे कि सब कुछ अच्छा लगे !

शायद मूत जैसी बात सुनकर ही सलोनी को घिन्न आ गई होगी और सच बताऊँ तो मुझे भी अच्छा नहीं लगा.

वो मोटा किसी तरह चलकर हमारी ओर आ गया.. मैंने ऋज़ू को उधर घुमाया और लण्ड की स्पीड बढ़ा दी और तभी ऋज़ू बहुत तेजी से चूतड़ हिलाने लगी..

फिर एकाएक उसने अपने चूतड़ कसकर जकड़ लिए और- अह्ह्हाआआ अह्ह्हा… आआआ… ओह आऐइइइ… इइइइ… मैईईई… गईइइइइइइइ…

लगता था वो पानी छोड़ रही थी… मेरे लण्ड ने उसके पानी को महसूस किया..

उधर मोटे ने अपनी छोटी सी लुल्ली ऋज़ू के मुख में डाल दी…

मैं तेजी से उसको चोद रहा था पर न जाने यह कैसी मस्ती थी कि मेरा लण्ड पानी छोड़ने को तैयार ही नहीं था, वो पूरा तना हुआ तेजी से चूत के पानी के साथ अंदर बाहर हो रहा था.

तभी उस मोटे ने ऋज़ू के चेहरे पर ही मूतना शुरू कर दिया और मैंने तेजी से लण्ड उसकी चूत से बाहर निकाल लिया.. मेरा काम होने ही वाला था मगर एकदम से मन खिन्न सा हो गया !

तभी एक और आदमी अंदर आया, वो जो बाहर उस लड़की को चोद रहा था, उसका लण्ड बता रहा था कि वो पूरा चोदने के बाद सीधा यहीं आ रहा था.. उसका लण्ड अजीब सा पानी से सना हुआ और लिथड़ा हुआ सा दिख रहा था.

सलोनी वहीं दरवाजे पर अपने कपड़े हाथ में लिए खड़ी थी, उसने अभी कुछ पहना नहीं था…

उसने अंदर आते ही सलोनी के नंगे चूतड़ों को सहलाया और बोला- क्या बात है जानेमन चुदवा लिया क्या?? अभी कहाँ जा रही है…?? रुक ना… अभी एक बार तुझको भी चोदूंगा…

उसने एक हाथ चूतड़ों पर रखे हुए ही सलोनी के होंठों को चूम लिया और दूसरे हाथ से उसकी चूत को मसलने लगा.

मैंने देखा कि सलोनी ने भी उसके लण्ड को सहलाया और मुस्कुराकर बाहर चली गई.मैं भी सलोनी के पीछे अपनी पैंट को सही करते हुए बाहर आ गया.

बाहर दूसरा आदमी भी नंगा बैठा सिगरेट पी रहा था और वो लड़की पूरी टाँगें फैलाये अधलेटी अवस्था में थी.. मेरा दिल किया कि इसी साली को चोदकर अपना लण्ड शांत कर लूँ …

सलोनी एक ओर खड़ी होकर अपने कपड़े पहन रही थी और वो आदमी सिगरेट पीते हुए उसको घूर रहा था. वो सिगरेट पीते पीते उठकर सलोनी की ओर बढ़ा, मैं उसको देखते हुए ही उस लड़की की ओर गया.

कहानी जारी रहेगी.

 
अपडेट. 76

जैसा कि हम दोनों यह सोच कर आज घर से निकले थे कि आज केवल होगी तो मस्ती- मस्ती और बस मस्ती…तो आज की रात ऐसी ही गुजर रही थी..मस्ती भी ऐसी कि कोई सपने में भी नहीं सोच सकता..

मगर मेरे लण्ड को भी ना जाने कैसी जवानी आ गई थी.. ना तो एक पल को बैठ रहा था..

और न ही अभी तक उसने पानी ही निकाला था… मुझे याद नहीं पड़ता कि कभी इससे पहले यह कभी इतना रुका हो.. कभी कभी तो केवल जरा सा देखकर ही कच्छा ख़राब कर देता था…

मगर आज इतना मस्त नजारा चारों ओर था, सब तरफ चुदाई चल रही थी, ऋज़ू की खूब चुदाई भी की थी.. उस जैसी चुदक्कड़ रंडी को भी संतुष्ट कर दिया था..

उसका तक पानी निकल गया था.. मगर खुद अभी भी तना खड़ा था… अब साला ना जाने किसको चोदने वाला था…

मैंने लण्ड को पैंट के अंदर डालने की कोशिश की मगर यह कहाँ अंदर जाने वाला था !

सलोनी जब बिस्तर पर उस लड़की के पास गई तो मैंने सोचा शायद वो अभी भी और मस्ती के मूड में है, उसने अभी भी अपना कोई कपड़ा नहीं पहना था, उसकी स्कर्ट और टॉप दोनों उसके हाथ में ही दिख रहे थे, मगर वो बिस्तर पर जाकर कुछ ढूंढने लगी.

ढूंढते हुए ही जब वो उस आदमी के पास गई जो उस लड़की को चोदने के बाद बिस्तर पर एक ओर बैठा था तो उस आदमी ने भी सलोनी को छेड़ना शुरू कर दिया.

सलोनी बिस्तर पर घुटने पर बैठ चादर हटा देख रही थी, वो अंग्रेजी में बोल रहा था, वो कोई विदेशी ही था, ज्यादा गोरा तो नहीं पर अलग सा लुक था उसका !

आदमी- अरे मेरी जान क्या ढूंढ रही है?और साले ने एक कस कर चपत सलोनी के चूतड़ पर लगा दी.

उसके दोनों चूतड़ के हिस्से जोर से हिले और एकदम से लाल हो गए.

सलोनी- उउउन्न… ओह… दर्द होता है…और उसने बड़े ही सेक्सी अंदाज़ में अपनी कमर को हिलाया.

आदमी- ओह सॉरी..और उसने उस हिस्से को सहलाया- ..पर क्या खो गया?

सलोनी- व्ववओ… मेरी ब्रा नहीं मिल रही… यही तो थी…

आदमी ने उसकी चूची को पकड़ लिया- अरे मेरी जान… इनको कैद नहीं कर न.. कितने सुन्दर हैं तेरे ये फूल.. इनको आजाद रहने दे…

और उसने सलोनी को अपने ओर खींच उसकी एक चूची को अपने मुँह में डाल लिया…

मैंने देखा कि वो लड़की भी उनकी मस्ती देख मस्त हो रही थी, उसने अपना हाथ सलोनी की पीठ पर रख दिया और सहलाने लगी.

मैंने भी अपनी पैंट को फिर से नीचे कर दिया और उस लड़की के पास पहुँच गया.

उसने मुस्कुराते हुए मेरे लण्ड को अपने बाएं हाथ से पकड़ लिया मगर मैं अब कुछ और करने के मूड में नहीं था, मैं कैसे भी अपना पानी चूत में निकालना चाह रहा था..

मैंने उसकी चूत को अपने हाथ से सहलाया और उसको घुमाने के लिए पलटने लगा तो वो एकदम घूमकर घोड़ी बन गई..

उसको शायद ऐसे चुदवाना अच्छा लगता होगा !

मैं एक हाथ से उसकी चूत को टटोलते हुए बिस्तर पर चढ़कर उसके पीछे घुटनों पर बैठ गया और अपने लण्ड को सेट करके उसकी चूत में अंदर तक घुसेड़ दिया.

अब बिस्तर पर ही बड़ा अच्छा नजारा हो गया था…

एक साइड में वो आदमी बैठा था, सलोनी अपने घुटनों पर खड़े हो अपनी चूची चुसवा रही थी, उसके पीछे वो लड़की घोड़ी बनी थी और उस लड़की का मुँह ठीक सलोनी के चूतड़ों पर था और मैं उस लड़की की चूत में लण्ड डाले उसको चोद रहा था…

तभी उस लड़की ने सलोनी के चतड़ों को अपने दोनों हाथ से पकड़ खोला तो मेरे सामने सलोनी के दोनों छेद चमक उठे..

दोनों पूरे लाल हो रहे थे और चूत तो इतनी गीली हो रही थी जैसे लगातार पानी छोड रही हो.

मैंने उस लड़की के कसकर एक धक्का मारा और उसका मुँह सलोनी के चूतड़ों से सट गया…

उसने भी पूरा नीचे होकर सलोनी की चूत पर अपनी जीभ लगा दी …

सलोनी ने एक बार पीछे घूमकर देखा. उसकी आँखे थोड़ी सी फैली और फिर वो भी मजा लेने लगी.

वो लड़की बड़े मजे से सलोनी की चूत चाट रही थी और मैं कस कस कर धक्के मार रहा था.

इस बार कुछ धक्कों में ही मेरे लण्ड ने पिचकारी निकालनी शुरू कर दी, मैंने जल्दी से लण्ड उसकी चूत से बाहर निकाला, और उसकी पीठ पर सारा पानी छोड़ दिया.

लड़की तेजी से उठी और मेरे लण्ड को अपने मुँह में ले लिया…

वो पूरी प्रोफेशनल थी… उसको सब पता था कि मर्द को कैसे अच्छा लगता है..

मैंने देखा उस आदमी ने सलोनी को अपनी गोद में खींच लिया है..

मैंने हल्का सा नीचे झुककर देखा- अरे, इसका लण्ड तो ठीक सलोनी की चूत से चिपका था !क्याआआ ये अर…रे…रे…र…

कहानी जारी रहेगी.

 
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