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मेरी चालू बीवी complete

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अपडेट. 77

ओह थैंक्स गॉड… मेरे लण्ड को आखिरकार ठंडक मिल ही गई थी… उस लड़की ने एक एक बूँद चाट चाट कर साफ़ कर दी थी…

मेरा लण्ड शीशे की तरह चमक रहा था… लड़की वाकयी बहुत सेक्सी थी… अब मैंने उसको ध्यान से देखा… बड़ी बड़ी आँखें, सांवला रंग और बहुत सेक्सी होंठ.. नीचे का होंठ कुछ ज्यादा ही चौड़ा था जो शायद लण्ड चूस चूस कर हुआ होगा…

मगर उसकी फिगर बहुत सेक्सी था… मस्त उठी हुई चूचियाँ और उभरे हुए चूतड़…

यह पक्का था कि कपड़ों में भी वो हर किसी को अपनी ओर आकर्षित कर लेती होगी… फिलहाल तो पूरी नंगी मेरे लण्ड की सेवा में लगी थी..

मेरा ध्यान अब सलोनी की ओर था और मैं इंतजार में था कि यह भी चुदवा ले…

एक मजेदार लम्बा और मजबूत लण्ड उसकी चूत से चिपका था… वो आदमी अपने हाथों से निचोड़ निचोड़ कर उसकी चूची चूस रहा था …

सलोनी लगातार अपनी कमर हिला रही थी जिससे उसकी चूत उसके लण्ड का हाल बेहाल किये थी..

तभी उसने सलोनी को जरा सा ऊपर को किया या सलोनी खुद हल्का से ऊँची हुई …

अररर रे रे ये क्या ??? उसका लण्ड अब पूरा खड़ा था… करीब 8 इंच और बहुत मोटा… लण्ड का अगला भाग लाल भभूका हो रहा था…

सलोनी के दोनों पैर काफी खुले थे… वो उसकी गोद में पूरी चिपकी थी… पीछे से ही उसकी मस्त चूत खिली हुई साफ़ दिख रही थी…

उसके उचकने से लण्ड का टोपा सलोनी की चूत के मुख पर आ गया था…

मुझे साफ़ साफ़ दिख रहा था कि लण्ड के टोपे ने चूत के मुख को खोलना शुरू कर दिया था…

.!

बहुत ही गर्म नजारा था…मुझे लग रहा था कि किसी भी पल यह भयंकर लण्ड मेरी जान की चूत में प्रवेश करने ही वाला है…

शायद सलोनी को भी इसका अहसास होने लगा था…वो जैसे ही थोड़ा सा और ऊपर हुई, मैंने देखा लण्ड अब उसकी चूत से हट गया था…

पता नहीं सलोनी क्यों अभी भी लण्ड से दूर हो रही थी.. शायद उसको मेरे सामने चूत में गैर लण्ड लेते शर्म आ रही होगी..

फिलहाल तो मेरे दिल को यही लग रहा था…

तभी मैंने देखा उस आदमी ने सलोनी को कसकर बाँहों में जकड़ लिया और उसको फिर से अपनी गोद में बिठाने को नीचे कर रहा है..

उसने अपने बाएं हाथ से सलोनी को कस कर चिपका लिया और दायाँ हाथ नीचे ला सलोनी के कसे हुए चूतड़ को दबाते हुए उसको अपने लण्ड पर सेट करने लगा…

मैं साला भी ना जाने क्यों इसका इन्तजार कर रहा था कि ‘कब यह लण्ड सलोनी की चूत को भेदता हुआ अंदर जाता है…’

मैं बिना पलक झपकाये उसको देखे जा रहा था…

और वो लड़की बेचारी मेरे मुरझा चुके लण्ड को अभी भी चूसे जा रही थी… शायद उसको फिर से चुदवाना था !

मैंने देखा लण्ड कि पोजीशन ठीक सलोनी की चूत के मुँह पर थी और सलोनी पूरा प्रयास ऊपर उठने का कर रही थी… उसको लण्ड अपनी चूत तक नहीं जाने देना था…

और वो आदमी उसको किसी छोटी से गुड़िया की तरह अपनी गोद में चिपकाये बड़े प्यार से ही उसको लण्ड के पास ला रहा था… बहुत ताकतवर था वो आदमी…

उसने एक बार फिर सलोनी को नीचे खींचते हुए और अपनी कमर को भी थोड़ा सा ऊपर उठाते हुए एक बार फिर लण्ड को चूत से भिड़ा दिया…

मैंने देखा इस छीना झपटी में एक दो बार लण्ड का अगला हिस्सा जरूर थोड़ा बहुत चूत को भेद चुका था..

यह नजारा मेरे इतने पास चल रहा था कि उसका हर प्रयास और हरकत मुझे साफ़ साफ़ दिख रही थी…

जैसे ही लण्ड चूत के मुख को छूता था सलोनी अपनी पूरी ताकत लगा फिर ऊपर हो जाती थी..

उन दोनों का यह खेल देख मेरे लण्ड में फिर से जान आने लगी.. साथ ही वो सेक्सी लड़की अपनी पूरी कोशिश कर ही रही थी.. मेरे लण्ड को बहुत अच्छी तरह से चारों ओर से चूस रही थी…

मगर मुझे यकीन था कि इतनी जल्दी लण्ड में ताकत उसके चूसने से नहीं, बल्कि सामने चल रहे नजारे ओर सलोनी की मस्ती देख ही आ रही थी…

मेरे लण्ड को ना जाने क्यों?? ये सब बहुत भा रहा था.. अब इन्तजार लण्ड के सम्पूर्ण रूप से सलोनी की चूत में समाने का था…

10-12 बार यही सब चलता रहा, वो सलोनी को नीचे करता और सलोनी ऊपर उठ जाती… और एक बार भक्क की आवाज आई..

अरे हाँ इस बार टोपा अंदर तक चला गया…

सलोनी- अह्ह्ह्हाआआआ ऊइइइइइइ…सलोनी के मुँह से भी एक चीख और सिसकारी एक साथ निकली..

मगर यह सब एक पल के लिए ही हुआ …

सलोनी ने पूरी ताकत लगा फिर से ऊपर उठ गई और एक बार फिर लण्ड की दूरी बढ़ गई… चूत उसकी पहुँच से बच कर निकल गई…

ये सब एक चूहे बिल्ली वाला खेल बहुत रोचक और मजेदार हो रहा था, कभी पकड़ में आ रही थी और कभी बच कर निकल जा रहे थी..

मुझे तो जन्नत का मजा आ रहा था.. एक हसीना से अपना लण्ड चुसवाते हुए ये सब देखना असीम सुख दे रहा था…

एक दो बार और ऐसा हुआ… मगर सलोनी उसके काबू में बिल्कुल नहीं आ रही थी..

मुझे भी अहसास होने लगा था कि अगर औरत ना चाहे तो शायद कोई भी लण्ड चूत में प्रवेश न कर पाये…

क्योंकि कहाँ तो वो इतना तगड़ा आदमी और कहाँ मेरी मासूम कमसिन सी

सलोनी… उसकी चूत में जाने को भी इतना ताकतवर लण्ड बेचारा कितनी देर से तरस रहा था…

तभी उस आदमी को शायद गुस्सा आ गया, उसने वैसे ही सलोनी को बिस्तर पर गिरा दिया और उसकी दोनों टाँगे किसी जालिम की तरह से जकड़ ली, उसने टांगों को बड़ी ही बेदर्दी से 180 डिग्री में फैला दिया…

वो सलोनी के ऊपर चढ़ आया और उसने सलोनी की चूत को देखा जो मुझे भी दिख रही थी, चूत बुरी तरह से फ़ैल गई थी…

सलोनी उसकी पकड़ से निकलने के लिए बुरी तरह मचल रही थी और जब लण्ड चूत के ऊपर आ गया तब वो जोर से चिल्ला पड़ी- बचाआआ…ओओओओ…

बस्स… यही मेरी मरदानगी जाग गई… आखिर वो मेरी प्यारी जान थी…

वो आदमी अपना लण्ड सलोनी की चूत पर रख झटका मारने वाला ही था कि सलोनी ने पूरी ताकत लगा दी उसको हटाने में और इधर मैंने भी उस लड़की के मुंह से अपना लण्ड निकाला और कसकर उस आदमी को धक्का दे दिया..

मेरा धक्का इतना ज़ोरदार था कि वो पीछे को गिर गया.

बस इतनी देर काफी थी सलोनी के लिए, वो जल्दी से वहाँ से उठी ओर कपड़े पकड़ कमरे के दरवाजे पर पहुँच गई…

मैं भी जल्दी से उठकर सलोनी के पीछे पहुँच गया..

वो आदमी गुस्से से भिनभिना रहा था…

मैंने दरवाजे पर आकर अपनी पैंट ठीक करके उसको गुस्से से देखा…

वो मेरे पास आने को लपका ही था कि उस लड़की ने उसको पकड़ लिया, शायद वो वहाँ मारधाड़ नहीं चाहती थी और वो आदमी भी नंगा होने के कारण बाहर नहीं आया…

सलोनी तो नंगी ही कॉरिडोर से बाहर निकल आई थी, उसने अभी भी अपने कपड़े नहीं पहने थे, उसको डर था कि कहीं वो फिर आकर उसको ना पकड़ ले…

मैं भी जल्दी जल्दी उसके पीछे को भागा कि फिर कोई उसको नंगी देख ना पकड़ ले…!!!

कहानी जारी रहेगी.

 
दोस्तो इस तरह की कहनिया जिसमे कोई आदमी अपनी बीवी, माँ, बहन, या कोई रिश्तेदार औरत को किसी और से चुदवाकर और उनको सामने चूदते हुये देखकर कैसे खुश हो सकता है मेरी समझ के बाहर है यह फैंटेसी हो सकती है रियल में नही हो सकता नीच से नीच आदमी भी यह नही कर सकता यह मेरी सोच है

इस तरह की कहनिया मुझे हॉरर कहनिया जैसी लगती है बहुत डरावनी हालांकि मैं ऐसी कहनिया पोस्ट करता हु पर मेरी निजी राय में मुझे पसंद नही आप सब लोगो से अनुरोध है कि आप भी अपने विचार रखे ताकि मैं अपनी कहानियों में उचित सुधार करू..... सतीश

 
अपडेट. 78

मेरी कुछ समझ नहीं आ रहा था कि आखिर यह मेरी सलोनी क्या चाहती है?

अच्छा खासा मजा आ रहा था और भाग कर आ गई !!??

जब तुझको चुदवाना ही नहीं था तो ये सब क्यों कर रही है?

मैं भागता हुआ उसके पीछे आया, वो दूसरी गैलरी में एक साइड में खड़ी हो हाँफ़ रही थी..

बड़ी प्यारी लग रही थी सलोनी… उसने अपने कपड़े अभी भी नहीं पहने थे… कपड़े उसने अपने दाएं हाथ में ले रखे थे… जो उसने अपने धोंकनी की तरह ऊपर नीचे होते सीने से लगा रखे थे.

मेरी ओर उसकी पीठ थी इसीलिए पीछे से उसकी नंगी पीठ और उसके नीचे सफ़ेद उठे हुए नंगे चूतड़ क़यामत लग रहे थे.

एक सार्वजनिक स्थान में वो भी एक नाइट क्लब में सलोनी को ऐसे नंगी खड़ी देख मेरा रोमांच से बुरा हाल था !

मैं अभी आगे बढ़ने ही वाला था कि तभी सलोनी शायद किसी कमरे के दरवाजे के पास खड़ी थी,

मैंने देखा वहां से कोई आवाज आ रही है- अरे बेटा क्या हुआ?

सलोनी ने तुरंत पीछे मुड़कर देखा, मैं जल्दी से पीछे वाली गैलरी के अंदर हो गया, मैं उसको नहीं दिखा.

मैंने आड़ लेते हुए ही उनकी बातें सुनने की कोशिश की..

सलोनी- व्व…वो वो अंकल…

ओह इसका मतलब कोई बुजुर्ग थे, कहीं कोई जानने वाला तो नहीं?

अब मेरा बुरा हाल था कि कहीं कोई जानने वाला ना मिल जाए !

मैंने फिर आगे हो झाँका तो सलोनी कमरे के दरवाजे पर खड़ी थी, उसने अपने आप को समेट रखा था पर थी तो वो पूरी नंगी ही…

.!

तभी उस आदमी की आवाज हल्की सी सुनाई दी- अरे ऐसे बाहर क्यों खड़ी हो… आओ अंदर आ जाओ !

सलोनी- अरे नहीं अंकल… वो मेरे साथ वाले आने वाले हैं वो तो उन सबने… बड़ी मुश्किल से बचकर आई हूँ… पता नहीं कहाँ चले गए …

उसने एक बार फिर पीछे की ओर चारों तरफ देखा, मैं फिर से पीछे को हो गया, उसको मेरी कोई झलक तक नहीं मिली.

मुझे फिर आवाज आई उस आदमी की- अरे अंदर तो आओ… क्या यहाँ ऐसे नंगी बाहर खड़ी रहोगी? अंदर आकर कपड़े तो पहन लो !

मैंने हिम्मत करके झांक कर देखा… सलोनी दरवाजे पर ही सिमटी हुई खड़ी थी… अब उस आदमी का हाथ मुझे सलोनी की पीठ पर रेंगता हुआ दिखा और अब उसका हाथ सलोनी के चूतड़ों तक सरक गया था.

फिर उसने वहाँ दवाब बनाया, कुछ ही पलों में सलोनी उसके कमरे के अंदर थी.

मैंने सोचा कि क्या उसको यहाँ मजा करने दूँ?

पर समय बहुत हो गया था मैंने खुद को व्यवस्थित किया और उस कमरे की ओर बढ़ गया.

मैंने देखा कि उसने दरवाजा बंद नहीं किया था या फिर सलोनी ने बंद नहीं करने दिया था?

मैंने भागते हुए से ही कमरे में प्रवेश किया और ऐसे प्रदर्शित किया जैसे अभी अभी आया हूँ.

एक बार तसल्ली कर ली कि वो कोई जानने वाला तो नहीं है… वो कोई और ही था… पके हुए बाल… रेशमी गाउन, चेहरे पर चमक… कोई अमीर बुड्ढा था.

वो सलोनी को समझाने के बहाने से उसके नंगे चूतड़ों का पूरा लुत्फ़ उठा रहा था, उसका हाथ लगातार सलोनी के चूतड़ों पर ही घूम रहा था.

मैं- अरे सलोनी तुम यहाँ? मैं तो घबरा गया था… आगे तक निकल गया था…

सलोनी ने मुझे देखा और बिल्कुल ऐसे व्यवहार किया जैसे उसका बलात्कार होते होते रह गया हो… वो भागकर मेरे सीने से लग गई.

अब उन अंकल की कोई हिम्मत नहीं हुई, वो अपने बेड पर जाकर बैठ गए मगर उनकी आँखें सलोनी के बदन पर ही थी.

मैंने सलोनी को थोड़ा सा पीछे किया और उसको कपड़े पहनने को बोला- जान… कपड़े तो पहन लो…

सलोनी अब कुछ नार्मल थी, उसने अपने कपड़ों को अलट-पलट कर देखा…ओह… यह क्या !!!उसके हाथ में केवल टॉप ही था… ना तो ब्रा थी और ना स्कर्ट !जाने कहाँ गिरा दी थी उसने या फिर वहीं छोड़ आई थी.

उसने मेरी ओर देखा, कुछ समझ नहीं आ रहा था कि ऐसी अवस्था में क्या करें…

वो बार बार अपने उस छोटे से टयूब टॉप को घुमा घुमा कर देख रही थी.

वो टॉप तो ब्रा रहते भी सलोनी की भारी चूचियों को पूरा नहीं छुपा पाता था… तो अब उस बेचारे की क्या मजाल…

पता नहीं इस सारी स्थिति में सलोनी को अच्छा लग रहा था या बुरा पर उसके चेहरे से परेशानी और मायूसी साफ़ झलक रही थी.

मेरा तो नशे और थकान के कारण दिमाग ही काम नहीं कर रहा था.

तभी सलोनी अंकल की तरफ गई…

सलोनी- प्लीज अंकल… कोई कपड़े हैं क्या आपके पास पहनने को.. मेरे कपड़े तो उन लोगों ने फाड़ दिए.. ओह गॉड ! अब मैं घर कैसे जाऊँगी…

और यह क्या अंकल तो पूरे सलोनी के दीवाने हो गए थे- हाँ हाँ क्यों नहीं बेटा.. तू ऐसा कर मेरी शर्ट और पैं पहन जा…

मैं दूसरे मंगवा लूंगा…

कमाल कर दिया था अंकल ने… मेरे दिमाग में तो यह आया ही नहीं कि अपनी ही शर्ट निकाल कर दे दूँ…

अंकल वाकयी बहुत ज़िंदा दिल निकले.

सलोनी ने बेड पर रखी उनकी शर्ट जो सफ़ेद रंग की बहुत चमकदार थी, शायद रेशम के कपड़े की थी और बहुत ही कीमती होगी, फिर सलोनी ने उनकी पैंट देखी, मगर वो तो बहुत चौड़ी थी, यह तो उसकी पतली कमर में रुक ही नहीं सकती थी.

उसने हंसकर उसको बिस्तर पर डाल दिया- ओह अंकल, यह तो मेरे आएगी ही नहीं.. यह तो बहुत बड़ी है…

अंकल- अरे कोशिश तो कर बेटी… इसमें कमर बेल्ट है.. टाइट हो सकती है.

और मेरे सामने ही अंकल पेंट लेकर सलोनी को पहनाने के लिए चले.

सलोनी ने मेरी ओर देखा, मैंने तुरंत अपनी गर्दन वहाँ मेज पर रखी महंगी व्हिस्की की ओर कर ली और अंकल से पूछा- अंकल, क्या दो घूंट पी लूँ, गला सूख रहा है?

अंकल- अरे हाँ बेटा, कैसी बात करते हो… और इसको भी थोड़ी सी पिला दो.. सारी घबराहट दूर हो जाएगी…

मैं मेज के पास जा वहाँ रखी कुर्सी पर बैठ गया और गिलास में व्हिस्की डाल अपना पेग बनाने लगा.

उधर अंकल खुद ही पैंट लेकर सलोनी को पहनाने लगे और सलोनी भी अपने पैर उठा पैंट को पहनने लगी !ना जाने इन बूढ़ों को सुन्दर लड़की को कपड़े पहनाने में क्या मजा आता था…

मुझे तो सच… केवल उतारने में ही आता था …

देखते हैं अंकल की पैंट सलोनी को फिट आती है या नहीं… या वो कैसे करके इसको फिट करेंगे…

कहानी जारी रहेगी.

 
दोस्तो ज्यादा काम की वजह से कुछ दिन से अपडेट नही दे पा रहा था पर अब रेगुलर अपडेट देने की कोशिश करूंगा धन्यवाद...सतीश
 
अपडेट. 79

मैंने तुरंत अपनी गर्दन वहाँ मेज पर रखी महंगी व्हिस्की की ओर कर ली और अंकल से पूछा- अंकल, क्या दो घूंट पी लूँ, गला सूख रहा है?

अंकल- अरे हाँ बेटा, कैसी बात करते हो… और इसको भी थोड़ी सी पिला दो.. सारी घबराहट दूर हो जाएगी…

मैं मेज के पास जा वहाँ रखी कुर्सी पर बैठ गया और गिलास में व्हिस्की डाल अपना पेग बनाने लगा.

अंकल खुद ही पैंट लेकर सलोनी को पहनाने लगे और सलोनी भी अपने पैर उठा पैंट को पहनने लगी !

ना जाने इन बूढ़ों को सुन्दर लड़की को कपड़े पहनाने में क्या मजा आता था?

मुझे तो सच… केवल उतारने में ही आता था …

देखते हैं अंकल की पैंट सलोनी को फिट आती है या नहीं… या वो कैसे करके इसको फिट करेंगे…

महंगी शराब देख मेरे को थोड़ा सा लालच तो आ गया था… मगर यह लालच केवल शराब का नहीं था…

मेरे दिल में फिर एक इच्छा बलवती हो रही थी कि शायद सलोनी को यहाँ इस बड़ी उम्र के आदमी के साथ ही ज्यादा मस्ती मिलती हो… और वो शायद अब कुछ ज्यादा करने के मूड में हो !?

मैं एक ओर बैठा उसको देख रहा था और धीरे धीरे शराब का पेग भी सिप कर रहा था.

अंकल सलोनी के पैर के पास नीचे बैठ उसको अपनी पैंट पहना रहे थे, सलोनी ने अपना पैर उठा पैंट के पाहुंचे में डाला ..

कमीज उसके चूत रूपी खजाने को पूरी तरह ढके थे परन्तु पैर उठाने से लगा कि जैसे बदली से चाँद झांक रहा हो !

बहुत ही मनोरम दृश्य था…

नीचे पैंट पहनाते हुए भी अंकल का सर ऊपर की ओर ही था, वो शर्ट के उठते गिरते देख रहे थे…

जरूर सलोनी के चूत के होंठों को खुलते बंद होते देखना उनको भा रहा होगा !

.!

इस उम्र में भी जवान खूबसूरत चूत और ऐसा रोमांटिक माहौल कहाँ हर किसी को नसीब होता है.. अंकल को अपने नसीब पर गर्व महसूस हो रहा होगा !

अंकल लगातार ऊपर देखते हुए पैंट को सलोनी के चिकने पैरों पर चढ़ाते हुए कमर तक ले गए.. सलोनी ने एक बार उनसे पैंट लेने की कोशिश की- ..लाइए अंकल, मैं पहन लेती हूँ !

अंकल- अरे रुक ना.. चल शर्ट पकड़..

उन्होंने कुछ ज़ोर से ही कहा.. सलोनी ने तुरंत शर्ट पकड़ कर ऊपर कर लिया.

अंकल बड़े प्यार से पैंट को उसके चूतड़ों पए चढ़ाने लगे.

पैंट की बेल्ट चौड़ी थी पर निचला भाग शायद छोटा था जिससे सलोनी के विशालकाय चूतड़ों पर चढ़ाने के लिए अंकल को थोड़ी मेहनत करनी पड़ी… इसके लिए उन्होंने अपने हाथों का सहारा लिया और उसके चूतड़ को अपने हाथ से दबा कर पैंट को ऊपर खींचा.

पैंट को ऊपर चढ़ाने के बाद उन्होंने पैंट के दोनों सिरे क्रॉस करके दोनों साइड में ले गए और उनको बेल्ट से कसने लगे.

परन्तु बेल्ट का अंतिम छेद पर कसने के बाद भी पैंट इतनी ढीली रही कि अंकल के पीछे हटते ही पैंट खुलकर सलोनी के पैरों पर गिर गई…

सलोनी बड़ी मासूमियत से अपनी शर्ट को पकड़े खड़ी थी.. उसके चेहरे पर नंगे खड़े होने वाली… शर्म जैसी तो कोई भावनाएँ नहीं थीं…

बल्कि कुछ मासूमी और हंसी वाले भाव दिखाई दे रहे थे.. जैसे अंकल की कोशिश फ़ेल हो जाने पर उनका मजाक सा उड़ा रही हो कि मैं तो पहले से जानती थी कि नहीं आएगी..

अंकल- ओह… यह तो वाकयी नहीं रुक रही तेरी कमर पर.. तू है भी बहुत पतली.. कुछ खाया पिया कर…

यह बोलते हुए अंकल ने उसकी कमर पकड़ ली और नापने का बहाना करते हुए उसके चिकने बदन का मजा लेने लगे.

सलोनी- चलिए छोड़िये न अंकल… मैं ऐसे ही चली जाऊँगी… सुनो… चलो न…

मैं उसकी आवाज सुनते ही उठ खड़ा हुआ, जल्दी से पेग निबटाया और बोला- अच्छा अंकल, थैंक यू.. चलते हैं.. आपकी शर्ट बाद में दे देंगे..

अंकल- अरे कोई बात नहीं बेटा… इसी को पहनने देना ..

और सलोनी के शर्ट के नीचे के भाग को खींचते हुए बोले- जरा इसका ध्यान रखना.. इसने कच्छी भी नहीं पहनी है.. कहीं नंगी न हो जाये..

मैंने नशे में बंद होती आँखों से देखा तो उनकी उंगलियाँ सलोनी की शर्ट के नीचे उसकी चूत के ऊपर थी.

अंकल- बेटा ध्यान रखना अपनी इतनी चिकनी सड़क का.. कहीं कोई एक्सिडेंट न कर दे..

मैंने सलोनी का हाथ पकड़ा और उसको कमरे से बाहर ले गया. बाहर आते हुए श्याम भी मिला पर मैं उससे मिले बिना ही सलोनी को ले पार्किंग में पहुँच गया.

बाहर की ठंडी हवा ने मेरी आँखों को थोड़ा सा खोला.. वहाँ मैंने लड़के को चाबी दी गाड़ी बाहर निकालने के लिए…

लड़का चाबी लेते हुए भी सलोनी की टांगों की ओर ही देख रहा था…

सलोनी अभी भी काफी नशे में लग रही थी.. वो मेरे कंधे पर झूल रही थी, उसके बार बार गिरने से शर्ट ऊँची हो जा रही थी.

लड़का पीछे देखता हुआ अंदर चला गया !

मैंने सलोनी को वहाँ रखे एक स्टूल पर बैठा दिया क्योंकि मुझे गाड़ी भी सम्भालनी थी.

तभी वहाँ दो लोग और आये वे होटल के बाहर जाते जाते रुक गए, वे सलोनी की ओर देख रहे थे.

मैंने पीछे घूमकर सलोनी को देखा, वो नशे के कारण स्टूल पर बैठे बैठे ही एक और को गिर गई थी और उसकी शर्ट उसके चूतड़ों से हटी हुई थी.

दोनों सलोनी के नंगे चूतड़ ही देख रहे थे…

मैंने दोनों को डांटा तो दोनों हंसते हुए बाहर गेट से निकल गए.

मैंने सलोनी को स्टूल पर सीधा किया, तभी वो लड़का बाहर आया और बोला- साहब, मुझसे आपकी गाड़ी का दरवाजा नहीं खुल रहा, आप खुद निकाल लीजिये, अब तो रास्ता साफ़ ही है.

अब मैं कुछ कर भी नहीं सकता था, वैसे भी मेरी गाड़ी का लॉक कुछ ख़राब हो गया था, वो आसानी से हर किसी से नहीं खुलता था.

मैंने उसके हाथ से चाबी ले ली- …चल इधर आ, मैडम को ऐसे ही कन्धों से पकड़े रहना.. गिरे नहीं..

लड़के की तो जैसे बांछें खिल गई, उसने सलोनी के दोनों कंधे अपने दोनों हाथ से पकड़ लिए और मैं जल्दी से गाड़ी लेने अंदर चला गया पर सोचा कि एक बार देखूँ साला क्या कर रहा है.

जरा सा बाहर आकर झांक कर देखा तो वो पीछे ही खड़ा था.. हाँ कुछ चिपका हुआ सा जरूर लगा.. हो सकता है साला अपना लण्ड सलोनी की पीठ से लगाकर मजा ले रहा हो…

मैं दिमाग न लगाकर जल्दी से गाड़ी के पास पंहुचा.. मेरी गाड़ी भी उसने बहुत अंदर ही खड़ी कर रखी थी !

ओह, मुझे भी दरवाजा खोलने में 5 मिनट लग गए.. होता ही है, जब जल्दी हो तो सही काम भी गलत हो जाता है.. किसी तरह मैं दरवाजा खोलकर गाड़ी ले बाहर आया.

मैंने देखा, सलोनी स्टूल के नीचे गिरी थी.. मैंने लड़के की ओर देखा तो वो सकपकाया- अरे साहब, खुद ही नीचे गिर गई.. इनको तो बिलकुल होश ही नहीं है.

मैं- चल जल्दी कर इसको उठाकर अंदर बैठा !

मैंने सलोनी वाली साइड का गेट खोल दिया.

बाहर की हवा से सलोनी का नशा कुछ ज्यादा ही बढ़ गया था शायद !

उस लड़के ने सलोनी को उठाया.. सलोनी के कदम लड़खड़ा रहे थे.

मैंने देखा कि मेरे देखते हुए भी उसने सलोनी को गाड़ी के अंदर करने और उसको बैठाने में उसके चूतड़ों को अच्छी तरह सहलाया था,

उसके हाथ सलोनी की शर्ट के अंदर ही थे.

मैंने उसको सौ का नोट भी दिया जैसे उसने मेरी बहुत मदद की हो और साला मना भी कर रहा था जैसे उसने पैसे वसूल कर लिए हों…

मैं गाड़ी लेकर आगे बढ़ गया, अब मेरी मंजिल घर ही था….

पर शायद किस्मत में अभी और भी बहुत कुछ देखना लिखा था… सामने पुलिस की पेट्रोल कार रुकी खड़ी थी… मैंने सोचा की निकाल लूंगा ….

सलोनी दरवाजे की ओर पैर किये मेरी गोद में सर रख लेटी थी …

मैंने उसकी शर्ट किसी तरह नीचे की पर फिर भी उधर खिड़की से देखने वाले को सलोनी के चूतड़ नंगे ही दिखते …

मैं जैसे ही गाड़ी के पास पहुँचा… ओह माय गॉड… वे बाहर ही खड़े थे !

दो पुलिस वालों ने हाथ देकर हमको रोक लिया.

मैंने बहुत कोशिश की फिर भी मुझे गाड़ी रोकनी ही पड़ी और उनमें से एक पुलिस वाला सलोनी की खिड़की की ओर ही आ रहा था.मैं सन्न रह गया… कि अब मैं क्या करूँ????

कहानी जारी रहेगी.

 
अपडेट. 80

सामने पुलिस की पेट्रोल कार रुकी खड़ी थी… मैंने सोचा कि निकाल लूंगा…सलोनी दरवाजे की ओर पैर किये मेरी गोद में सर रख लेटी थी…

मैंने उसकी शर्ट किसी तरह नीचे की पर फिर भी उधर खिड़की से देखने वाले को सलोनी के चूतड़ नंगे ही दिखते…

मैं जैसे ही गाड़ी के पास पहुँचा… ओह माय गॉड… वे बाहर ही खड़े थे !

दो पुलिस वालों ने हाथ देकर हमको रोक लिया.

मैंने बहुत कोशिश की फिर भी मुझे गाड़ी रोकनी ही पड़ी और उनमें से एक पुलिस वाला सलोनी की खिड़की की ओर ही आ रहा था.

मैं सन्न रह गया… कि अब मैं क्या करूँ????

एक तो रात की खुमारी ऊपर से नशा.. और फिर आज एक ही रात में की गई इतनी सारी मस्ती… इस सबमें मैं वाकयी बहुत ज्यादा थक गया था… और शायद सलोनी भी…

अब तो दिल जल्दी से जल्दी घर पहुँचने का कर रहा था…

मगर इससे क्या होता है, किस्मत में तो शयद कुछ और ही लिखा था… मेरे साथ आज तक ऐसा नहीं हुआ था, मेरा कभी ऐसा कुछ पुलिस से पाला भी नहीं पड़ा था…

अगर सब कुछ सामान्य होता तो मुझे ज्यादा कुछ नहीं लगता… मैं कह सकता था कि हम पति पत्नी हैं.

मगर यहाँ तो मामला बिलकुल ही उल्टा था… हम दोनों ही नशे की हालत में थे… रात के दो या ढाई बज रहे थे, इस वक्त में पति पत्नी तो ऐसी हालत में नहीं निकलते !

ऊपर से आसमान से गिरे खजूर में अटके… सलोनी लगभग वस्त्रहीन थी… उसके बदन पर एक मर्दाना कमीज थी जो उसको एक रंडी की तरह ही दिखा रही थी.

मेरी कुछ समझ नहीं आ रहा था कि इस स्थिति से कैसे निकलूँ… मेरे दिमाग ने बिल्कुल ही काम करना बंद कर दिया था.

पुलिस कॉन्स्टेबल को अपनी ओर आते देख मैंने और तो कुछ नहीं बस सलोनी को धक्का देकर नीचे गिरा दिया, वो अपनी सीट से खिसक नीचे को बैठ गई… अब कम से कम पहली नजर में तो वो नहीं दिखने वाली थी.

अब यह देखने वाली बात थी कि वो कॉन्स्टेबल किस खिड़की पर आता है…

अगर सलोनी की तरफ ही आता है तो उसको आसानी से सलोनी नहीं दिखती… क्योंकि सलोनी का सर दरवाजे से टिक गया था.

सलोनी ने थोड़ा बहुत उउन उउउह किया बस, फिर वो दरवाजे पर सर रख सो गई…

थैंक्स गॉड… कॉन्स्टेबल उसी की खिड़की की ओर आया… मैंने केवल थोड़ी से ही खिड़की खोली और बिना कुछ कहे अपना लाइसेंस उसको पकड़ा दिया.

मैं उसको अंदर देखने या बात करने का मौका नहीं देना चाहता था.

मैं- क्या हुआ सर??? एयरपोर्ट से आ रहा हूँ, दोस्त को छोड़ने गया था…

साला कॉन्स्टेबल बहुत ही खुश्क टाइप का था, बिना कुछ बोले लाइसेंस लेकर अपने साहब के पास चला गया.

मेरी ऊपर की सांस ऊपर और नीचे की सांस नीचे ही थी, मैं उनकी गतिविधि देख रहा था.

मैंने सोचा अगर यहाँ बैठा रहा तो साला इनमें से कोई आकर सलोनी को देख सकता है, मैं जल्दी से नीचे उतरा और उनके पास पहुँच गया.

उन्होंने ज्यादा कुछ नहीं पूछा… केवल फ्लाइट के बारे में पूछा जो मुझे पता था, कई बार बाहर जाने के कारण मुझे एयरपोर्ट और फ्लाइट के बारे में पता था.

तो उनको कोई शक नहीं हुआ.

मेरे और काम के बारे में जान कर उन्होंने मेरा लाइसेंस मुझे दे दिया, मैंने चैन की सांस ली और अपनी गाड़ी की ओर बढ़ गया.

मैं अपनी सीट पर बैठ अभी गाड़ी आगे बढ़ाने वाला ही था कि वो हो गया जो मैं नहीं चाहता था, सलोनी को नींद खुल गई और वो उठकर अपनी सीट पर बैठ गई.

बदकिस्मती से उसकी तरफ वाली खिड़की भी खुली थी और पुलिस वालों की नजर सीधे उसी पर पड़ी.

मैं गाड़ी आगे बढ़ाता, उससे पहले ही कॉन्स्टेबल मेरी गाड़ी के आगे आकर खड़ा हो गया…

अब मुझे सब कुछ धुन्धला सा नजर आने लगा… उसको देखकर मेरी गाड़ी खुद बा खुद बंद हो गई.

अबकी बार कॉन्स्टेबल मेरी ओर आया और मेरा दरवाजा खोल कर बोला- तो झूट बोल रहा था बे.. साले मस्ती करता घूम रहा है… खुलेआम…

मैं- नहीं सर व्ववओ वववो…

कॉन्स्टेबल- कुछ मत बोल साले… चल उतर नीचे…

और जोर से अपने भाई को बोला- साहब यहाँ तो नंगी छोकरी है… साला गाड़ी में ही काम निबटा रहा था…

.!

उसकी बात सुनकर मैंने सलोनी की ओर देखा… वो आँखे फाड़े केवल उस कॉन्स्टेबल को देख रही थी, उसकी शर्ट पूरी अस्त-व्यस्त थी, चूची भी आधी बाहर थी और टांगें भी ऊपर तक नंगी ही दिख रही थी.

अगर कॉन्स्टेबल ने उसको नंगी कहा था तो बिल्कुल गलत नहीं कहा था.

सलोनी वहां से पूरी नंगी ही दिख रही थी…

तभी वो इंस्पेक्टर बोला- धर ले दोनों को…

कॉन्स्टेबल- जी भाई… चल वे उतार इसको भी.. कहीं धंधे से ला रहा है या खुद ही बजाने ले जा रहा है?

मैं अब बिल्कुल सच बोलने वाला था और यह भी जानता था कि यहाँ साला कोई विश्वास नहीं करेगा मगर अब कुछ तो करना ही था…

मैंने किसी तरह खुद को संयत किया- सर विश्वास करो, यह मेरी बीवी है.. हम एक पार्टी में गए थे और वहाँ इसको किसी ने पिला दी…

कॉन्स्टेबल- और इसकी हालत तो यह बता रही है कि साली खूब चुदवाकर आ रही है…

मुझे उसकी बात पर कुछ गुस्सा आ गया- ..तमीज से बात करो.. हम पति पत्नी हैं…

मेरी आवाज शायद उस इंस्पेक्टर तक भी पहुँच गई, वो इंस्पेक्टर बोला- क्या बकवास हो रही है वहाँ??? यहाँ लेकर आ दोनों को…

मैं दौड़कर उस इंस्पेक्टर के पास गया- सर हम दोनों पति पत्नी हैं और एक पार्टी से आ रहे हैं..

और ना जाने मैंने उससे क्या क्या बोल दिया…

तभी मुझे सलोनी कि आवाज सुनाई दी, वो कॉन्स्टेबल जबरदस्ती उसको गाड़ी से उतार रहा था.

मैं- अरे सर उसको रोको, वो मेरी बीवी के साथ बदतमीजी कर रहा है !

इंस्पेक्टर ने जैसे मेरे कोई बात सुनी ही नहीं और अपने कॉन्स्टेबल से ही बोला- …हाँ लेकर आ उसको भी यहाँ… पूछ कहाँ धंधा करती है साली…

मेरी हालत अब पतली होने लगी… जरूर सलोनी के साथ कुछ गलत होने वाला था…

उस कॉन्स्टेबल ने सलोनी को गाड़ी के नीचे उतार लिया.. गनीमत यह थी कि सलोनी अब कुछ होश में नजर आ रही थी… वो खुद चल रही थी.. मगर फिर भी वो कॉन्स्टेबल उसको कोहनी के ऊपर बांह से पकड़े था… उसकी उंगलियाँ जरूर सलोनी की चूची से रगड़ खा रही होंगी… वो जल्दी ही हमारे पास आ गया…

खुली सड़क पर स्ट्रीट लाइट की रोसनी में सलोनी केवल एक शर्ट में एक इंस्पेक्टर और कॉन्स्टेबल के सामने खड़ी थी और कॉन्स्टेबल उसका हाथ पकड़े उसके मम्मों का मजा भी ले रहा था.

इंस्पेक्टर- अबे यह तो कोई नया ही माल लग रहा है.. पहले तो नहीं देखा अपने एरिया में इसको?

कॉन्स्टेबल- हाँ भाई कोई प्राइवेट धंधे वाली लगती है और देखो भाई खुले में करने की शौकीन है.. लगता है गाड़ी में ही मरवाती आ रही थी !

और कॉन्स्टेबल ने सलोनी का हाथ छोड़ उसकी शर्ट नीचे से पकड़ ऊपर पेट तक उठा दी…

सत्यानाश !

खुली सड़क पर सलोनी की चूत और चूतड़ दोनों नंगे हो गए…

सलोनी कितनी भी ओपन हो पर ऐसा उसने शायद सपने में भी नहीं सोचा होगा कि दो अजनबी और अपने पति के सामने उसको ऐसा कुछ सामना करना होगा…

उसका सारा नशा अब काफ़ूर हो गया था…

वो शर्म के मरे चीख पड़ी- नहीईइइइइइइ इइइइइइ…!!!उसने अपने हाथ अपनी आँखों पर रख लिए थे, मैं भी असहाय सा उसको देख रहा था…

इंस्पेक्टर- हाँ यार… यह तो मस्त माल है..और वो अपना हाथ सलोनी की ओर बढ़ाने लगा…???????????

कहानी जारी रहेगी.

 
अपडेट. 81

मैं कितना भी मस्ती के मूड में था और चाहे बहुत अधिक खुल चुका था… शायद हर तरह की आवारागर्दी करना चाहता था मगर इस समय खुद को ठगा सा महसूस कर रहा था, मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था कि इस परिस्थति से कैसे निकला जाये !

मैं बिल्कुल नहीं चाहता था कि कोई भी इंसान हमारी मजबूरी का फ़ायदा उठाये, अपनी मर्जी से हम कुछ भी करें वो हर हाल में अच्छा लगता है मगर इस तरह डरा धमका कर ऐसे पुलिस वालों के सामने मैं किसी भी हाल में अपनी बीवी की बेइज्जती नहीं चाहता था.

सलोनी भी पूरी तरह से इन लोगों का विरोध कर रही थी, उसको भी ये सब बिल्कुल पसंद नहीं आ रहा था कि एक गंदा सा हवलदार उसको छुए और उसके साथ ऐसे बदसुलूकी करे, वो हर तरह से विरोध कर रही थी.

इंस्पेक्टर भी साला कमीना टाईप का ही था, तभी वो कुछ नहीं सुन रहा था या हो सकता है कि उसका रात की ड्यूटी में ऐसे ही लोगों का सामना होता हो इसीलिए वो हम पर जरा भी भरोसा नहीं कर रहा था.

सलोनी मचलती हुई और उनकी हरकतों का विरोध करती हुई उनके बीच खड़ी थी, हवलदार उसके पीछे खड़ा हुआ उसको पकड़े था और इंस्पेक्टर उसके सामने खड़ा उसको देख रहा था.

मैं एक तरफ साइड में खड़ा ये सब देख रहा था और उनसे बचने की तरकीब सोच रहा था.

हवलदार ने सलोनी की शर्ट उसके पेट तक ऊँची कर पकड़ ली और खी खी कर हंसने लगा.हवलदार- यह देखो भाई… पूरी नंगी है सुसरी… गाड़ी में ही करा रही थी.सलोनी ने पूरी ताकत लगा दी हवलदार के हाथ से शर्ट छुड़वाने में.इंस्पेक्टर- सीधी खड़ी रह…

और उसने अपना हाथ सलोनी के पेट पर रख सहलाया- ..ये बिना कपड़ों के क्या कर रही थी..??

सलोनी की चूत का उभार इतना ज्यादा उभरा हुआ है कि उसके खड़े होने पर भी उसकी चूत के होंठ दिख रहे थे.

ऊपर से वो हमेशा उनको चिकना रखती थी इसीलिए वो कुछ ज्यादा ही हर किसी को आकर्षित करते हैं.

सच सलोनी किसी सेक्स की मूरत की तरह खड़ी थी… उसकी शर्ट का ऊपर का बटन खुला था और गाला भी काफी बड़ा था जिससे उसकी गदराई मुलायम चूची का काफी भाग बाहर झाँक रहा था.

इंस्पेक्टर ने सलोनी के पेट को सहलाते हुए ही अपना हाथ सीधा किया, उसकी उँगलियाँ सलोनी की चूत के ऊपरी हिस्से तक पहुँच गई.

सलोनी ने पैरों को झटका जिससे उसका हाथ वहाँ से हटा तो नहीं पर हाँ थोड़ा सा नीचे को और हो गया.

इंस्पेक्टर- अरे क्यों मचल रही है… अपने इस मुँह से फ़ूट ना.. यह अपनी इस चिड़िया को खोलकर कहाँ जा रही थी.. लग तो ऐसा ही लग रहा है जैसे खूब खिला पिला रही है इसको?

सलोनी- नहीईइइइइइ इइइइइ प्लीज सर मत करिए…

अरे यह क्या..???? इंस्पेक्टर की पूरी हथेली सलोनी की चूत पर थी, उसने सलोनी की चूत को अपनी मुट्ठी में भर लिया.

सलोनी- अह्ह्हाआआआ मत करो…

इंस्पेक्टर- सच वे… बहुत चिकनी है …

हवलदार- भाई अंदर से भी चेक करो ना.. कहीं कुछ छुपा कर तो नहीं ले जा रही…

इंस्पेक्टर- वो तू अपने डंडे से चेक कर लेना.. हा हा हा…हवलदार- हा हा हा भाई आप आगे से चेक कर लो… मेरा डंडा तो इसको पीछे से चेक कर रहा है… साली खूब मालदार है…

मैं चौंक गया… इसका तो मैंने ध्यान ही नहीं दिया… हवलदार सलोनी को पकड़ने के बहाने से उसके नंगे चूतड़ों से बुरी तरह चिपका था…

मुझे बहुत तेज गुस्सा आ गया- यह आप लोग कर क्या रहे हो?? आप शायद जानते नहीं हो, मैं इसकी शिकायत ऊपर तक करूँगा…

इंस्पेक्टर- जा भाग यहाँ से… तू शिकायत कर.. तब तक हम इसकी शिकायत पर मोहर लगा देते हैं..

ओह… ये तो खुलेआम गुंडागर्दी पर आ गए थे…

मैं- आप लोग ऐसा नहीं कर सकते.. हम पति पत्नी हैं..

इंस्पेक्टर- तो जा पहले सबूत लेकर आ… साले हमको बेवक़ूफ़ समझता है… पति पत्नी रात को इस समय नंगे घूमते हैं..

और एक झटके में उसने सलोनी की शर्ट के सारे बटन खोल दिए.

सलोनी सामने से पूरी नंगी दिखने लगी… उसकी सफ़ेद तनी हुई चूचियाँ और उन पर सफ़ेद धब्बे के निशान लाइट में चमक रहे थे… जो शायद क्लब में किसी के वीर्य के थे…

उधर हवलदार ने पीछे से शर्ट पकड़ पूरी निकाल वहीं डाल दी… सलोनी ने इसका पूरा विरोध किया मगर उनके सामने उसकी एक ना चली… अब उनके सामने खुली सड़क पर सलोनी पूरी नंगी खड़ी थी.

.!

इंस्पैक्टर उसके चूची को हाथ में ले मसलते हुए बोला- देख साले.. बोल रहा है बीवी है… हर जगह से तो गंदे पानी से लितड़ी पड़ी है…

हवलदार- हाँ भाई, पीछे भी सब जगह लगा है…लगता है कईयों से चुदवा कर आ रही है.

मैं असहाय सा उनको यह सब करता देख रहा था.

तभी इंस्पेक्टर ने सलोनी को घुमाया- दिखा तो साले, इसकी गांड कैसी है… चूत तो बिल्कुल मक्खन की टिक्की जैसी है…अरे यह क्या???

हवलदार ने अपने नेकर की साइड से लण्ड बाहर निकाला हुआ था, उसके काले लण्ड का अगला भाग बाहर दिख रहा था, कमीना अपने नंगे लण्ड को सलोनी के चूतड़ों से चिपकाये था.

इंस्पेक्टर- हा हा तूने डंडा बाहर भी निकाल लिया?हवलदार- हाँ भाई पीछे चेक कर रहा था…इंस्पेक्टर- हा हा हा बाहर ही चेक किया या अंदर भी देख आया?

हवलदार- अरे भाई अभी तो बाहर ही.. अंदर चेक करने के लिए तो हैलमेट पहना पड़ेगा… हा हा हा… हो हो हो…

दोनों पागलों की तरह हँसते हुए सलोनी को रगड़ रहे थे.. इंस्पेक्टर ने सलोनी की गर्दन पकड़ उसको झुका दिया और पीछे से उसके चूतड़ों पर चपत लगा लगा कर देखने लगा.

इंस्पेक्टर- अरे हाँ यार.. कितना यह तो लपलपा रही है.. आज तो इसकी गांड मारने में मजा आ जाएगा !

अब मेरा सब्र की इंतेहा हो गई थी- अगर आप लोगों ने इसको नहीं छोड़ा तो मैं अभी फोन करता हूँ…

इंस्पेक्टर ने हवलदार को बोला- अबे तू देख इसको क्या बक रहा है यह.. तब तक मैं इसके नट बोल्ट खोलता हूँ !

हवलदार- अरे छोड़ो भाई, इसको गाड़ी पर लेकर चलते हैं… मेरे से तो बिल्कुल नहीं रुका जा रहा.. क्या मक्खन मलाई चूत है इसकी…

वो पीछे से ही सलोनी की चूत को उँगलियों से रगड़ रहा था…

मुझमें ना जाने कहाँ से जोश आ गया, मैंने दोनों को एक साथ जोर से धक्का दिया, वो दोनों वहीं सड़क पर गिर पड़े !

मैंने सलोनी को पकड़ा और वहाँ से भागने लगा मगर तभी हवलदार ने अपना डंडा मेरे पैरों में मार दिया, मैं वहीं गिर पड़ा …

इंस्पेक्टर- साले तू तो अब गया… देखना कितना लम्बा तुझको अंदर करूँगा अब मैं..

मेरी हालत ख़राब थी …

सलोनी- नहीं सर प्लीज इनको छोड़ दीजिये.. आप चाहे कुछ भी कर लीजिये पर हमको छोड़ दीजिये..

मैं अवाक सा उसको देख रहा था… सलोनी रोये जा रही थी और मेरे से चिपकी थी… वो मेरे लिए कुछ भी करने को तैयार थी.

इंस्पेक्टर- नहीं… इसको तो मैं आज यही ठीक करूँगा.

उसने हवलदार के हाथ से डंडा ले लिया …

वो जैसे ही मुझे मारने को आया, सलोनी तुरंत खड़ी हो उसने इंस्पेक्टर के हाथ का डंडा पकड़ लिया…

सलोनी- आपको तो विश्वास नहीं है ना पर ये मेरे पति ही हैं… मैं इनको हाथ भी नहीं लगाने दूंगी… चलो आओ…. कर लो मेरे साथ अपने मन की…

इंस्पेक्टर मुँह खोले उसको देख रहा था…

हवलदार- वाह भाई, अब तो यह अपनी मर्जी से चुदवायेगी.. चलो भाई, गाड़ी के अंदर आज इसकी जमकर ठुकाई करते हैं, बहुत टाइट माल हाथ लगा है आज तो…

सलोनी बिना उनके कुछ कहे उनकी गाड़ी की ओर बढ़ गई.. मैं पूरी नंगी सलोनी को जाता देख रह था… हवलदार भी उसकी ओर पीछे पीछे जाने लगा.

इंस्पेक्टर- सुन साले, तेरा लौड़ा बहुत अकड़ रहा है? रोक इसको… तू इस पर नजर रख.. मैं उसको देखता हूँ…और हवलदार नाक मुँह सिकोड़ता हुआ इंस्पेक्टर के हाथ से डंडा ले मेरे पास आ गया और इन्स्पेटर गाड़ी की ओर चला गया.

सलोनी पहले ही वहाँ पहुँच गई थी.

हाय… यह अब क्या होने जा रहा था…?????????

कहानी जारी रहेगी.

 
अपडेट. 82

सोचा था पूरी रात खूब मस्ती करेंगे.. आज वो सब कुछ करेंगे जो केवल कल्पना ही किया करते थे मगर अब मुझे अपने निर्णय पर बहुत ज्यादा पछतावा हो रहा था…

मैं सपने में भी नहीं चाहता था कि सलोनी, मेरी प्यारी जान को जरा भी कष्ट हो, उसकी मर्जी के बिना कोई उसे छू भी सके…

मगर इस समय वो मेरे लिए कुर्बानी देने को तैयार थी…

उसने अपना संगमरमरी बदन एक दुष्ट पुलिस वाले के हाथों से नुचवाने का सोच लिया…

अगर वो अपनी मर्जी से कर रही होती तो मुझे कोई ऐतराज नहीं होता मगर यहाँ तो सब कुछ अलग था जिसे मैं कभी पसंद नहीं कर सकता था.

मेरी सलोनी बिना वस्त्रों के नंगी पुलिस वालों की जीप के अंदर थी और वो इंस्पेक्टर भी उसके साथ था, ना जाने कमीना कैसे कैसे उसको परेशान कर रहा होगा.

मैंने हवलदार को देखा, उसका ध्यान मेरी ओर नहीं था, वो साला लगातार जीप की ओर ही देख रहा था जैसे उसको अपनी बारी का इन्तजार हो.

मैं चुपचाप पीछे से निकल अपनी कार तक आया और फ़ोन निकाल सोचने लगा किसको फ़ोन करूँ?

100 नंबर पर तो करना बेकार था, वो इसी को कॉल करते !

तभी मुझे एक ओर से गाड़ी की लाइट नजर आई, जैसे ही गाड़ी निकट आई, मेरी तो ख़ुशी का ठिकाना ही नहीं रहा.

यह अमित की गाड़ी थी !

मुझे इसका ध्यान पहले क्यों नहीं आया ! अमित के तो कई दोस्त पुलिस में उच्च पद पर हैं.

मेरे रोकने से पहले ही उसने गाड़ी रोक दी, शायद उसने भी मुझे देख लिया था.

मैं जल्दी से उसके पास गया.

अमित- अरे तू… इस समय… यहाँ???

मैं- यह सब छोड़… तू जल्दी नीचे आ… ये साले पुलिस वाले… उस जीप में सलोनी को…

मेरे इतना कहते ही अमित सब कुछ समझ गया, वो बड़ी फुर्ती से नीचे उतरा…

अमित- कौन है साला कुत्ता? वो कुछ ज्यादा ही गुस्से में आ गया था…

मैंने घड़ी देखी इस सबमें करीब 15 मिनट बीत चुके थे… यानि सलोनी पिछले 15 मिनट से उस इंस्पेक्टर के साथ थी, ना जाने कमीने ने कितना परेशान किया होगा उसको.

हम दोनों तेजी से जीप की ओर बढ़े… हवलदार भी शायद मुझे ना पाकर जीप के पास चला गया था… उसको मेरे से ज्यादा दिलचस्पी सलोनी को देखने की थी.

हम जैसे ही वहाँ पहुँचे, हवलदार ने हमको देख लिया…

हवलदार- ऐ कहाँ जा रहे हो? रुको यहीं…वो बहुत कड़क आवाज में चिल्लाया..

मैं तो रुक गया पर अमित सीधे जीप तक पहुँच गया…अमित- कौन है बे… बाहर निकल…तभी इंस्पेक्टर गुस्से से बाहर निकला…

अरे बाप रे ! उसके काले और मोटे से शरीर पर केवल एक बनियान था, आस्तीन वाले बनियान में उसका थुलथुला शरीर बहुत ही भद्दा लग रहा था.

मैंने नीचे देखा… उसका काला सा लण्ड दिखा जो ऊपर को खड़ा था…पता नहीं साला क्या कर रहा था??

इंस्पेक्टर- कौन हो वे तुम??? निकलो यहाँ से… नहीं तो यहीं एनकाउंटर कर दूंगा…इंस्पेक्टर बहुत गुस्से में था…

अमित बिना कुछ बोले किसी को फ़ोन कर रहा था…अमित- ले साले, अपने बाप से बात कर ! तेरी तो मैं ऐसी-कम-तैसी करता हूँ.

इंस्पेक्टर- कौन है फ़ोन पर??? मैं तो अपनी ड्यूटी कर रहा हूँ…

इंस्पेक्टर की आवाज एकदम से नरम हो गई थी, शायद उसको लग गया था कि जरूर किसी बड़े अफसर का फ़ोन होगा.

उसने फ़ोन लेकर बात करनी शुरू कर दी… मुझे नहीं पता कि क्या बात कर रहा था…

मैं चुपचाप जीप की ओर चला गया… हवलदार भी अब शायद डर गया था, उसने मुझे नहीं रोका.

मैंने जीप के अंदर झांक कर देखा, पिछली सीट पर सलोनी पूरी नंगी लेटी थी.

मैंने तुरंत उसको अपनी बाँहों में लिया… ओ माय गॉड… वो रो रही थी.

मैंने किसी तरह उसको जीप से बाहर निकाला… मेरे बराबर में अमित भी था… वो भी मेरे पीछे आ गया था…

अमित- ओह ! यह क्या किया इसने साले हरामी ने ! अभी इसकी खबर लेता हूँ !

अमित ने अपना कोट निकाल कर सलोनी को दे दिया.

सलोनी बहुत डर गई थी, लगता है उसने बहुत कुछ झेला है, जिसकी आदत शायद उसको बिल्कुल नहीं थी, उसने कोट लेकर पहन लिया और उसको कस कर आगे से पकड़ लिया.

उधर इंस्पेक्टर ने भी अपनी पैंट पहन ली थी, दोनों बहुत डरे हुए थे.

अमित ने बताया कि उसने एस पी से बात कराई थी इसीलिए दोनों बहुत डरे हुए थे.

दोनों एक स्वर में- सर जी हमको माफ़ कर दो… ववव वो… अब नहीं होगा…

कमाल है… मैंने पहले बार पुलिस वालों को ऐसे रिरियाते देखा था… कमाल कर दिया था अमित ने…

अमित- नहीं कमीनो… तुमने मेरी भाभी के साथ यह नीच कर्म किया है, तुमको तो सजा मिलेगी ही मिलेगी…

फिर मेरे से कहा- सुन, तू इनके ही पुलिस स्टेशन में जा… और इनके खिलाफ रिपोर्ट दाखिल करके आ.

मैं- पर इस समय… और सलोनी…

अमित- अरे तू भाभी की चिंता ना कर… मैं इनको घर छोड़ता हूँ… फिर वहीं तेरे पास आ जाऊँगा… पर इन सालों को मत छोड़ना…

मुझे भी बहुत गुस्सा तो आ रहा था पर सलोनी को इस समय ऐसी हालत में नहीं छोड़ना चाह रहा था, पर जब अमित ने बोल दिया तो फिर मुझे कोई डर नहीं था.

अमित- सारे केस लगाना इन सालों पर… रेप, छेड़खानी, बिना वजह परेशान करना, मारपीट और…

इंस्पेक्टर- नहीं सर ऐसा कुछ नहीं किया हमने… वो सब गलतफहमी हो गई थी… हमको नहीं पता था कि ये वाकई इनकी पत्नी हैं… तो…

अमित- तो साले बलात्कार कर देगा… पत्नी नहीं है तो तेरी जागीर हो गई?

अमित बहुत गुस्से में था, वो तो इंस्पेक्टर पर हाथ भी उठा देता मगर सलोनी ने पकड़ लिया.

सलोनी- अब छोड़ो न अमित… मुझे बहुत डर लग रहा है… अब चलो यहाँ से… और हाँ साहिल तुम भी घर ही चलो… मुझे नहीं करना कोई केस…

पर अब मैं कैसे छोड़ सकता था, मैंने भी कमर कस ली…

मैं- नहीं जान, इसने तुम्हारे साथ गलत हरकत की है, मैं अब इसको नहीं छोड़ूंगा…

अमित सलोनी को पकड़ अपनी गाड़ी की ओर ले गया… मैंने भी उसको ठीक से पकड़ गाड़ी में बैठा दिया.

अमित- देख साहिल, तू वहाँ पहुँच… मैं भाभी को घर छोड़ फिर वहीं आता हूँ… छोड़ूंगा नहीं इनको…

फिर उसने सलोनी से पूछा- …भाभी इसने क्या क्या किया?

सलोनी ने अपना सर झुका लिया… उसकी आँखों में फिर से आँसू आ गए थे…

अमित- चलो रहने दो भाभी…मैं समझ गया, मैं इनको बिल्कुल नहीं छोड़ने वाला…चल तू पहुँच… मैं आता हूँ.

और उसने अपनी गाड़ी आगे बढ़ा दी…

अब इंस्पेक्टर और हवलदार वहीं मेरे से माफ़ी मांगने लगे पर मैं कैसे उनकी बात मानता…

काफी देर बाद हम उनके पुलिस स्टेशन पहुँचे… वहाँ भी वो दोनों मेरी खातिरदारी और माफ़ी में ही लगे रहे.

जब वो लिखने को राजी ही नहीं हो रहे थे, तब मैंने अमित को फ़ोन किया.अमित- हाँ बोल?

मैंने ध्यान दिया वहाँ से खिलखिलाने की आवाजें आ रही हैं…मैं- यार ये तो लिख ही नहीं रहे… तू क्यों नहीं आ रहा??

अमित- अरे यार छोड़ उनको… ये सलोनी भाभी मुझे आने ही नहीं दे रही… मना कर रही हैं… और सुन वो इंस्पेक्टर कुछ नहीं कर पाया था… सलोनी भाभी ने मुझे सब कुछ बता दिया है… मुझे लगता है उसकी भी ज्यादा गलती नहीं है… ऐसा कर तू आ जा यहाँ छोड़ उन्हें !

मैंने घड़ी देखी सुबह के 4 बजने वाले थे… हुआ कुछ नहीं और मैं डेढ़ घंटे से परेशान हो रहा था.

मैंने उन दोनों को वहीं छोड़ा और थके कदमों से अपनी गाड़ी की ओर बढ़ा…

मैंने सोचा सलोनी पहले भी वो सब बता सकती थी… फ़ालतू में मेरे दो घण्टे खराब हो गए.

अब गाड़ी चलाते हुए फिर से मेरा दिमाग घूमने लगा- अबे साले पिछले दो घंटे से अमित तो सलोनी के साथ ही है और आज तो उसने उसको पूरी नंगी भी देख लिया है. ना जाने वो क्या कर रहे होंगे? और अमित कह भी रहा था कि वो उसकी सेवा कर रही है.

मेरा पैर एक्सीलेटर पर अपने आप दब गया, घर जाने की जल्दी जो थी…

देखूँ तो सलोनी कैसी सेवा कर रही है उसकी…???

कहानी जारी रहेगी.

 
अपडेट. 83

सुबह की हल्की रोशनी चारों और फैलनी शुरू हो गई थी, मुझे काफ़ी थकान महसूस होने लगी थी… सब कुछ बहुत अच्छा हुआ था मगर बस मुझे यह पुलिस वाला मामला बिल्कुल पसंद नहीं आया था.

गाड़ी चलाते हुए मैं किसी तरह अपने कॉलोनी तक पहुंचा …थैंक गॉड, अब कुछ नया नहीं हुआ था, वहाँ भी कोई नहीं था.

बाहर की ओर अमित की गाड़ी भी खड़ी थी, इसका मतलब अभी तक जनाब मेरे फ्लैट में ही थे.. ना जाने क्यों मेरे होंठों पर एक मुस्कराहट सी आ गई.. मैंने पार्किंग में गाड़ी खड़ी की.

मैने घड़ी देखी 4:35 हो चुके थे… पूरी रात खूब धमाचौकड़ी मचाई थी हमने… अब तो फ्लैट में जाने की जल्दी थी.

मुझे इस बात की चिंता नहीं थी, बिल्कुल नहीं थी कि सलोनी अमित के साथ अकेली है या वो वहाँ कुछ हरमन झोली कर रही होगी.

मैं तो चाह रहा था कि वो चाहे किसी से भी चुदाई करे मुझे कोई फर्क नहीं पड़ने वाला था, मैं उसकी हर मस्ती में साथ था पर मेरी इच्छा उसको चुदाई करवाते देखने की थी और इतना सब होने के बाद भी मुझे दुःख इसी बात का था कि सलोनी ने मेरे साथ ऐसा क्यों किया !

मैं तो उसके हर बात में साथ हूँ फिर उसने मुझे पुलिस वालों के साथ क्यों जाने दिया जब उसने कुछ करना ही नहीं था.

अगर उसको अमित के साथ ही कुछ करना था तो मैं कौन सा उसको रोक रहा था और मेरा इतना समय भी ख़राब हुआ, साथ ही कितनी थकान भी हो गई.

पूरे कम्पार्टमेंट में कोई नहीं था, मैं आसानी से अपने फ्लैट तक पहुँच गया.

मैंने घण्टी नहीं बजाई.. यह मैंने पहले ही सोच लिया था कि आज सलोनी को बिना बताये ही फ्लैट में प्रवेश करूँगा.

अगर उसने पूछा तो मेरे पास बहाना भी था कि तुमको डिस्टर्ब नहीं करना चाहता था इसीलिए खुद अंदर आ गया.

मैंने अपने पर्स से चाबी निकाल बहुत चुपके से फ्लैट का दरवाजा खोला और बहुत शांति से ही अंदर प्रवेश कर गया.

पहली नजर में मुझे वहाँ कोई नजर नहीं आया, मैंने चुपके से दरवाजा बंद किया पर जैसे ही घूमा…

अरे बाप रे…

मेरे सभी विचारों को लकवा मार गया… अमित सोफे पर बैठा ड्रिंक कर रहा था…

उसने मुझे देख लिया था !

अमित बहुत धीमी आवाज में ही बोला- चल अच्छा हुआ, तू आ गया… मैं तेरा ही इन्तजार कर रहा था, बहुत मुश्किल से भाभी को सुलाया है… लगता है बहुत ज्यादा ही डर गई हैं बेचारी…

.!

मैं- अरे तो तू यहाँ अकेला ही बैठा है, तेरे को ऐसे छोड़ कैसे सो गई यार?

अमित- अरे तू फ़ोर्मल्टी मत कर.. वो बहुत ज्यादा थकी और परेशान थीं इसीलिए मैंने उनको सुला दिया था… फिर सोचा कि तू आ जाये तभी निकलूँगा. चल अब मैं भी चलता हूँ.. तू भी आराम कर ले…

मैं- तू पागल हो गया है क्या? अब इस समय कहाँ जायेगा… 3-4 घंटे यहीं आराम कर ले… सुबह चले जाना..

मैंने अब देखा अमित ने कपड़े पहले ही बदल लिए हैं, मतलब उसका भी दिल अभी जाने का नहीं है.

उसने मेरा ही एक लोअर पहना हुआ था और ऊपर उसका अपना सेंडो बनियान मगर मुझे उसके कपड़े वहाँ कहीं नजर नहीं आये, मतलब उसने मेरे बैडरूम में ही कपड़े बदले होंगे.

पता नहीं क्या क्या हुआ होगा???अमित- पर यार तुम लोग डिस्टर्ब होंगे, मुझे जाने दे.मैं- तूने रुचिका को तो बोल दिया होगा ना?

अमित- वो उसकी तो कोई फ़िक्र नहीं, उसको तो रात ही फोन कर दिया था !

मैं- तो तू अब कुछ मत सोच, चल अंदर तू आराम कर… मैं भी फ्रेश होकर आता हूँ.

अमित ने एक दो बार और थोड़ा सा ही विरोध किया फिर वो रुकने को राजी हो गया, मैं उसको अंदर ले गया.

बिस्तर पर एक ओर चादर ओढ़े सलोनी सो रही थी.

मुझे नहीं पता उसके बदन पर क्या था? या उसने कुछ पहना भी था या नहीं !?

मुझे उसका चेहरा तक नहीं दिख रहा था वो अपनी तरफ मुँह किये सो रही थी, बहुत थक गई थी बेचारी !

अमित ने मेरी ओर देखा, मैंने उसको बिस्तर की ओर इशारा किया.

उसकी आँखें जरा सी सिकुड़ी…

मैं फुसफुसाते हुए ही- …तू इधर को सो जा… मैं बीच में लेट जाऊँगा…वो बिना कुछ कहे दूसरे कोने में सिकुड़ कर लेट गया.

ना जाने क्यों? मुझे उस पर कुछ ज्यादा ही शक हुआ कि यह जो सब जगह कितना मजाकिया है, हर समय महिलाओं में घुसा रहता है… हर समय बस फ़्लर्ट ही करता रहता है, आज इतना सीधा क्यों है? क्यों इतना ज्यादा शरीफ बन रहा है…?

और सलोनी भी चाहे कितना भी थकी हो, वो अमित को अकेला छोड़ कैसे सो गई?

सब कुछ अजीब सा लग रहा था मगर वो सब मैं केवल अनुमान ही लगा सकता था.

फिलहाल दोनों को छोड़ मैं बाथरूम में चला गया, जल्दी से फ्रेश हो कपड़े बदल कर मैं भी कमरे में आ गया.

यह क्या? सलोनी ने करवट बदल ली थी, उसका मुँह अब अमित की ओर था… और सबसे बड़ी बात, वो बिस्तर के बीच आ गई थी.

मैं चाहता तो उसको एक ओर कर बीच में लेट सकता था मगर अभी भी मेरे दिल में शरारत ही थी, सलोनी को बीच में लिटाने में भी मुझको कोई ऐतराज नहीं था.

मैंने अमित को देखा, वो दूसरी ओर करवट लिए सो रहा था या सोने की एक्टिंग कर रहा था.

मैं चुपचाप दूसरी ओर लेट गया, मुझे बहुत तेज नींद आ रही थी मगर दिल में एक उत्सुकता थी जो मुझे सोने नहीं दे रही थी कि सलोनी ना जाने कैसे कपड़ों में या हो सकता है नंगी ही हम दोनों के बीच लेटी है?

अमित इतना सीधा तो नहीं है कि एक नंगी खूबसूरत नारी को अपनी गाड़ी में लेकर आया जो हल्के नशे में भी थी.. उसको बिना चोदे छोड़ा हो…

और अब दोनों मेरे सामने ऐसे एक्टिंग कर रहे हैं… अगर कुछ हुआ होगा तो जरूर कुछ न कुछ तो बात करेंगे ही…

जहाँ इतना अपनी नींद की कुर्बानी दी है, वहाँ कुछ और भी कर सकता हूँ.

हालाँकि नींद मेरे ऊपर हावी होती जा रही थी…

पता नहीं क्या हुआ? और होगा????

कहानी जारी रहेगी

 
अपडेट. 84

अमित इतना सीधा तो नहीं है कि एक नंगी खूबसूरत नारी को अपनी गाड़ी में लेकर आया जो हल्के नशे में भी थी.. उसको बिना चोदे छोड़ा हो…

और अब दोनों मेरे सामने ऐसे एक्टिंग कर रहे हैं… अगर कुछ हुआ होगा तो जरूर कुछ न कुछ तो बात करेंगे ही…

जहाँ इतना अपनी नींद की कुर्बानी दी है, वहाँ कुछ और भी कर सकता हूँ.

हालाँकि नींद मेरे ऊपर हावी होती जा रही थी…

कुछ देर तक मैं दोनों को देखता रहा, दोनों ही गहरी नींद सो रहे थे, उनको देखकर कोई नहीं कह सकता था कि उनके बीच कुछ हुआ होगा.

मगर मेरा दिमाग तो शैतान का दिमाग बन गया था, इसकी वजह पिछले कुछ दिनों से सलोनी का व्यवहार ही था.. जो कुछ मैंने देखा और सुना था उसको जानकर कोई धर्मात्मा भी विश्वास नहीं करता कि यहाँ बंद कमरे में सलोनी और अमित अकेले हों… वो भी ऐसी स्थिति के बाद जिसमे सलोनी को पूरी नंगी देख लिया हो… ना केवल नंगी देखा बल्कि उसको लगभग नंगी ही अपनी गाड़ी में बिठाकर लाया हो… फिर भी कुछ ना हुआ हो.. सब कुछ सोचकर असंभव सा ही लगता था.

ना जाने कितने विचार मेरे दिमाग में घूम रहे थे और सोचते सोचते ना जाने कब मैं सो गया… वैसे भी सुबह के 5 तो बज ही गए थे और थकान भी काफी हो गई थी, शारीरिक भी और मानसिक भी.

कोई तीन घंटे मैं सोता रहा… मुझे कुछ नहीं पता कि इस बीच क्या हुआ??? काफी गहरी नींद आई थी और अच्छी भी.

मेरी उठने की वजह स्वयं नहीं थी बल्कि वो आवाज थी जो मैंने सुनी… मुझे लगा जैसे कुछ बहुत तेज गिरा हो…

मेरी नींद तो खुल गई थी परन्तु मैंने आँख नहीं खोली थी…मैं लेटे लेटे ही आवाज की दिशा और स्थान का अवलोकन करता रहा…

कुछ समय बाद फिर हल्की आवाज आई, यह मेरे बैडरूम से तो नहीं आई थी… अरे यह आवाज तो बाथरूम से आई थी.

अब मैंने अपनी पूरी आँखें खोल देखा, कमरे में अभी भी अँधेरा ही था, शायद सलोनी ने इसलिए लाइट नहीं जलाई और परदे नहीं हटाये थे ताकि मुझे कष्ट ना हो और आराम से सोता रहूँ.

मेरी आँखें अभी भी खुलने को मना कर रही थी क्योंकि नींद पूरी नहीं हुई थी.

मैंने पास से मोबाइल उठाकर टाइम देखा, सवा आठ हो चुके थे… मैं उठकर बाथरूम के दरवाजे तक गया और कान लगाकर आवाज सुनने लगा.

अरे सलोनी अंदर अकेली नहीं थी, उसके साथ अमित भी था.

और रात वाले सभी विचार तुरंत मेरे दिमाग में आ गए, इसका मतलब ये आपस में पूरी तरह खुल गए हैं और अभी भी मस्ती कर रहे हैं !

साफ लग रहा था कि दोनों एक साथ स्नान कर रहे हैं.

अमित को तो सलोनी पहले से ही पसंद करती थी, फिर कल जो उसने हमारी मदद की थी, उससे तो वो मेरा भी चहेता हो गया था.

फिर सलोनी तो वैसे भी, जो उसकी जरा भी परवाह करता है, उस पर जान न्यौछावर कर देती है…

अब यह जानना था कि क्या अमित उसकी वो पसंद बन गया था कि उससे चुदवा भी ले… या अभी तक उसको भी उसने केवल ऊपरी मस्ती के लिए ही रखा था.

अब इतने समय में मैं यह तो जान गया था कि सलोनी हर किसी से तो नहीं चुदवाती… उसको ऊपरी मस्ती करने और लेने का शौक ही था.

और बहुत कम मर्द ही उसकी पसंद थे जिनसे वो चुदवाती थी, मेरे सामने उसको केवल मस्ती करने में मजा आता था, वो मेरे सामने चुदवाना भी नहीं चाहती थी.

शायद उसको डर था कि ऐसा देखने के बाद मेरा प्यार उसके लिए कम हो जायेगा ! ..ये केवल मेरे विचार थे जो कुछ मैंने अभी तक उसको जाना था.

मेरा दिल बाथरूम के अंदर देखने का कर रहा था मगर अंदर देखने का कोई साधन मेरे पास नहीं था.

हाँ बाथरूम से बाहर देखने के लिए तो मैंने जुगाड़ कर लिया था मगर बाहर से अन्दर का नज़ारा नहीं देखा जा सकता था.

मैं पूरे मनोयोग से आवाजें सुनने लगा… बाहर पूरी शांति थी तो हर आवाज मुझे स्पष्ट सुनाई दे रही थी.

अमित- हम्म्म्म पुचच च च पुचच च च पुचच च च पुचच च च पुचच च पुचच च च

सलोनी- ओह बस्स्स्स ना.. कल से हजार से ज्यादा बार चूम चुके हो…

अमित- पुचच च च पुचच च च पुचच च च पुचच च च… कहाँ मेरी जान… अभी एक ही बार तो…

सलोनी- देखो अमित, मैंने तुम्हारी सारी इच्छाएँ पूरी कर दी हैं… अब तुम घर जाओ.. रुचिका भी तुम्हारा इंतजार कर रही होगी… कल से कितनी बार उसने फोन किया है.

अमित- पुचच च च पुचच च च पुच च च… तुम बहुत सेक्सी हो सलोनी सच… पुचच च च पुचच च च पुचच च च पुचच च च… आई लव यू जानेमन… पुचच च च पुचच च च पुचच च च !

सलोनी- ओह… फिर से… अह्ह्हाआआआ नहीईइइइइ क्या करते हो?!!? फिर से गीला कर दिया …अह्ह्हाआआआ…

अमित- अह्हा पुचच च च क्या चूत है यार तुम्हारी… हजारों में एक… पुचच च च… वाह क्या टेस्ट है… पुचच च च पुचच च च पुचच च च पुचच च च…

सलोनी- अह्ह्हाआआ अब क्या खा जाओगे..? अह्ह्हाआआ ओह्ह नहीईइइइ अह्ह्हाआआआ बस्स्स्स्स्स्स अमित बस ना…

अमित- सुनो जानेमन, अभी मेरी एक इच्छा रह गई है… उसको अब तुम्हारे ऊपर है… कैसे पूरा करती हो.

सलोनी- पागल हो गए तुम… कल से कितनी सारी तुम्हारी इच्छाएँ पूरी की है… तुमको याद भी हैं या नहीं… और फिर से एक और इच्छा ..अब तुम रुचिका की इच्छाए पूरी करवाओ ..तुम्हारी सभी हो गई हैं.

अमित- पुचच च च पुचच च च पुचच च च पुचच च च पुचच च च… जानेमन इच्छाओं का अंत कभी नहीं होता… और मेरी तो केवल 3-4 ही हैं.

सलोनी- अह्हहाआआआ 3-4… अहा… कितनी सारी तो मैंने ही पूरी की… बस्स्स्स्स्स्स ना.. ओह क्यों काटते हो?!

अमित- पुचच च च पुचच च च अच्छा इतनी सारी बताओ फिर…सलोनी- अह्ह्हाआआ अब गिनानी भी होंगी.. तो सुनो… पहली: चलती गाड़ी में चुसवाया तुमने अपना…

.!

अमित- पुचच च च हा हा क्या?? देखो नाम बोलने की शर्त थी… हैं… पुचच च च पुचच च च च पुचच च च…

सलोनी- हाँ और दूसरी इन सबके गंदे नाम भी बुलवाये… जो मैं केवल साहिल के सामने ही बोल पाती थी… पर तुम्हारे सामने भी बोलने पड़े…

अमित- तो मजा तो उसी में ही है जानेमन ..पुचच च च पुचच च च पुचच च च… पर अभी भी गच्चा दे देती हो…

सलोनी- जी नहीं… तुमने अपना लण्ड नहीं चुसवाया था चलती गाड़ी में… और फिर मेरी चूत भी चाटी थी… अह्ह्हाआआ बस ना…

अमित- और क्या किया था..????? बस चाटी ही थी ना… चोदा तो नहीं था… अभी तो चलती गाड़ी में चोदने का भी मन है…

सलोनी- हाँ फिर कहीं भिड़ा देना… अह्ह्हाआआ.. गाड़ी को… !!

अमित- पुचच च च पुचच च च पुचच च च… अरे नहीं जानेमन बहुत एक्सपर्ट हूँ.. मैं इसमें.. रुचिका तो अक्सर ऐसे ही चुदवाती है…

अह्हाआआ… अछआ… तो ये भी… अरे इतने कसकर नहीं यार… दर्द होता है… आखिर ये लण्ड भी अब तुम्हारा ही है…

सलोनी- हाँ बहुत शैतान है यह तुम्हारा लण्ड… पुचच च च पुचच च च…अमित- अह्ह्हाआआ फिर??

सलोनी- फिर मुझे नंगी ही पार्किंग से यहाँ तक लाये… वो तो गनीमत थी कि किसी ने नहीं देखा… कितना डर गई थी मैं… पागल… अह्हाआआ पुचच च च पुचच च च…

अमित- यही तो मजा है जानेमन… मजा भी तो कितना आया था… अह्ह्हाआ ओह !!सलोनी- और फिर तुम्हारी वो सारी इच्छाएँ… पुचच च च पुचच च च पुचच च च अह्ह्हाआआ हो गया…अमित- अह्ह्हाआआ अह्हाआआ अह्ह्ह अउउउ हह्ह्ह्ह्ह कम्माल कर दिया तुमने जाने मन… इतनी जल्दी …अह्ह्हाआआआ…

सलोनी- बस्सस्स्स्स न हो गया ना… चलो अब… जल्दी करो… मुझे स्कूल भी जाना है… अंकल भी आने वाले होंगे ..और साहिल को भी उठाना है… चलो जल्दी करो…

अमित- अंकल क्यों?

सलोनी- वो स्कूल में साड़ी पहनकर जाना होता है… और मुझे पहननी नहीं आती… इसीलिए वो मदद करते हैं.

…ह्म्म्म्म… !!!!

उनकी इतनी बात सुनकर ही मुझे काफी कुछ पता चल गया था कि दोनों में बहुत अच्छी दोस्ती हो गई है.अब आगे आगे देखना था कि क्या होता है?!!?

कहानी जारी रहेगी.

 
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