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मेरी चालू बीवी complete

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अपडेट 87

मेरे अपने ऑफिस का बाथरूम मेरे लिए वरदान साबित हो रहा था, मेरे स्टाफ की लड़कियाँ ज्यादातर इसी का प्रयोग करती थीं, बार-बार पेशाब करने जाना, खुद को व्यवस्थित करना और कभी सैनिटरी पैड बदलना… मैं सोच रहा था कि यार क्यों ना अपने बाथरूम में कैमरा लगवा लूँ और अपना पूरा स्टाफ बदलकर प्यारी प्यारी लड़कियों को ही रख लूँ…

खैर, यह सब संभव नहीं था पर सोचकर बहुत अच्छा लग रहा था.

फिलहाल मेरा ध्यान इस देसी कुड़ी, रोज़ी की ओर ही था, बहुत ही मस्त है साली !

देखने को भी मना करती है और दरवाजा भी खुला छोड़ मेरे बाथरूम में नंगी होकर बैठ जाती है, इतने प्यारे पोज़ में उसको बैठे देख मैं यह सोच रहा था कि काश यह इंडियन सीट होती तो मजा आ जाता, इसकी मक्खन जैसी चूत के दोनों खुले होंट दिख जाते.

मेरा लण्ड इतना बैचेन हो गया था कि उसमें दर्द होने लगा था.

मैं उसको अपनी साड़ी कमर तक उठाये, अपने दोनों हाथों से पकड़े, उसकी चिकनी सफ़ेद टांगों को घूरता हुआ खड़ा ही था कि उसने मुझे जाने का इशारा किया.

मैं भी शराफत से एक ओर को हो गया, मैंने दरवाजा बंद नहीं किया और उसकी नजर से तो कुछ बच गया पर अपनी नजर उसी पर रखी.

हाँ, पीछे जरूर हट गया, उसने भी मेरे से नजर हटाई और खड़ी होकर एकदम से अपनी साड़ी को हाथों से छोड़ दिया, बस एक पल के लिए ही मुझे उसकी चूत के दर्शन हुए. उसने बिना मेरी ओर देखे फ़्लश चलाया और हाथ धोकर बाहर आ गई.

वो बहुत हल्के से ही मुझ पर नाराज हुई- यह क्या करते हो सर आप? मुझे बहुत शर्म आ रही थी.

मैं- अरे यार तुम भी ना… मैं तो केवल दरवाजा बंद करने को ही कह रहा था… हा हा… और फिर क्या हो गया… अब तो हम दोस्त हो गए ना !!

रोज़ी ने कुछ नहीं कहा, जैसे उसने ये सब स्वीकार कर लिया हो.

मैंने बहुत ही प्यार से रोज़ी का हाथ अपने हाथ में लेकर कहा- तुम भी ना यार, इतना ज्यादा शरमाती हो… अरे यार ये सब तो नार्मल है… इसे एन्जॉय करना चाहिए…

उसने अपनी पलकें झुकाकर अपनी स्वीकृति दी.

तभी मैंने एकदम से चौंकते हुए ही कहा- अरे रोज़ी यह क्या? तुमने मूतने के बाद अपनी योनि साफ़ नहीं की?

मैंने जानबूझ कर ही चूत शब्द का प्रयोग नहीं किया क्योंकि मुझे पता था कि उसको अच्छा नहीं लगेगा.

उसने अपनी आँखों को हल्का सा सिकोड़ा और कुछ भौंचक्की आँखों से मुझे देखा पर मेरी बात का आशय समझते ही उसका चेहरा एक बार फिर पूरा लाल हो गया.

मैं- अरे यार, अब इसमें क्या शरमाना… ये तो नार्मल बात ही है… क्या तुम अपनी बुर गन्दी ही रखती हो… मूतने के बाद तो साफ़ करना चाहिए ना…

रोज़ी- जी नहीं, मैं हमेशा पानी से साफ़ करती हूँ…

मैं- अच्छा तो आज क्यों नहीं की… एक तो कच्छी नहीं पहनी… ऊपर से मूतने के बाद बुर साफ़ भी नहीं की?

रोज़ी को अब मेरी बातों में रस आने लगा था, उसने ना तो अपना हाथ ही मेरे हाथों से छुड़ाया और ना ही कुछ विरोध कर रही थी.

रोज़ी- जी केवल आपकी वजह से जल्दबाजी में नहीं की… आपने कैसे दरवाजा खोल दिया था… हम्म्म्म??

मैं अब जोर से हंसा- हा हा हा… तो इसमें भी मेरे ऊपर ही इल्जाम… चलो कोई बात नहीं… इसका हर्जाना भी भर देते हैं !

मैंने मेज पर सामने रखा नेपकिन पेपर उठाते हुए कहा- लाओ जी, मैं अपने हाथ से साफ़ कर देता हूँ.

रोज़ी- हाय राम… क्या कह रहे हैं आप सर… इस पेपर से… आप?

मैंने उसकी बात पूरी नहीं होने दी- अच्छा पेपर से नहीं तो फिर… क्या जीभ से करूँ?

और मैंने अपनी जीभ बाहर निकाल कर जीभ की लम्बी नोक हिलाकर उसको दिखाया.

उसका हाथ जो मेरे हाथ में ही था, मैंने साफ़ महसूस किया उसमें जोर का कम्पन हुआ, उसने एक जोरदार झुरझुरी ली थी.

इसका मतलब मेरी बातों का असर हो रहा था, रोज़ी की सेक्स की अग्नि महसूस कर रही थी और उसे बहुत मजा आ रहा था.

उसने अजीब सी आँखों से मुझे देखा… मैंने जीभ को लहराते हुए ही कहा- अरे हाँ डियर… शालू की भी मैं जीभ से ही साफ़ करता हूँ… उसको यह बहुत पसंद है… और मुझे भी इसका स्वाद बहुत अच्छा लगता है. शालू तो हमेशा मूतने के बाद अपनी बुर मुझसे ही साफ़ करवाती है.

रोज़ी अब कुछ नहीं कर रही थी, उसने अपना हाथ अभी तक मेरे हाथ में पकड़ा रखा था बल्कि अब तो मैं उसकी पकड़ अपने हाथ पर महसूस कर रहा था.

रोज़ी- तो क्या शालू आपके सामने नंगी लेट जाती है?
 
मैं- ओह… तो इसमें क्या हुआ? और क्या मैंने अभी तुमको नंगी नहीं देखा… अरे मेरी जान, इसमें क्या तुम्हारी बुर काली हो गई… या मेरी आँखें ख़राब हो गई… जब दोनों को अच्छा लगा तो इसमें बुराई क्या है, बताओ?

उसने कोई जवाब भी नहीं दिया पर कुछ कर भी नहीं रही थी, मैंने ही उसके हाथ को पकड़ अपनी मेज पर झुका दिया.

उसने कुछ नहीं कहा.

मैं- बताओ ना जान… क्या तुम्हारी इजाजत है? क्या मैं तुम्हारी प्यारी… राजदुलारी बुर को प्यार से साफ़ कर सकता हूँ?

रोज़ी बैचेनी भरी नजरों से मुझे देखे जा रही थी, मैंने भी उसकी साड़ी उठाने की कोई जल्दी नहीं की.

रोज़ी की लाल आँखे बता रही थीं कि वो वासना की आग में जल रही है.

उसका शरीर उसके मन के विचारों से बगावत कर रहा है, वो बुरी तरह काँप रही थी… मैं अगर इस समय उसको चोदना चाहता तो वो बिल्कुल भी मना नहीं करती.

पर बाद में उसको ग्लानि हो सकती थी इसलिए मैं उसके साथ सेक्स नहीं बल्कि उसके विचारों को बदलना चाहता था.

रोज़ी मेरी ऑफिस की मेज पर अधलेटी मेरे बाहों में बंधी थी, मेरा एक हाथ उसकी गर्दन के नीचे और दूसरा उसके पेट पर रखा था…

पेट वाले हाथ से मैं हल्के हल्के गुदगुदी कर रहा थाजिससे उसकी साड़ी सिमट गई थी, अब मेरा हाथ उसके नंगे पेट पर रखा था.

मैं बहुत धीरे धीरे उस हाथ को उसके पेट पर फिसला रहा था, रोज़ी की साँसें बहुत तेज-तेज चल रही थी, उसके वक्ष के उभार तेजी से ऊपर नीचे हो रहे थे.

मैं अपना चेहरा उसके पास ले गया और उसके गालों से अपने होंठों को चिपका दिया.

अचानक उसने अपनी गर्दन को मेरी ओर घुमाया… यही वो क्षण थे जब उसके लाल, कांपते हुए लबों से मेरे होंठ जुड़ गए.

शायद उसके बदन की जरूरत ने उसके संकीर्ण विचारों पर पूर्ण विराम लगा दिया था और वो भी अब मस्ती में डूब जाना चाहती थी… अब वो हर पल का पूरा लुफ्त उठाना चाहती थी.

मैं दस मिनट तक उसके होंठों को चूसता रहा, इस बीच हम दोनों की जीभ ने भी पूरी कुश्ती लड़ी… मैं लगातार उसके पेट को सहलाते हुए अपना हाथ साड़ी के ऊपर से ही उसके बेशकीमती खजाने, रोज़ी की चूत के ऊपर ले गया और साड़ी के ऊपर से उसकी चूत को अपनी मुट्ठी में भर लिया.

बिल्कुल ऐसा लगा जैसे नंगी चूत ही हाथ में आ गई हो… रोज़ी की साड़ी और पेटीकोट इतने पतले थे कि नंगी चूत का अहसास हो रहा था, ऊपर से उसने कच्छी भी नहीं पहनी थी.

मैं मस्ती के साथ उसकी चूत को मसलने लगा…

अब रोज़ी के मुख से मजेदार सिसकारियाँ निकलने लगी- ..अह्ह्हाआआ पुच अह्हाआआ… अह्ह्हाआआ पुच अह्हाआआआ पुच… अहआ पुच अह्हाआआआ पुच …

अब मुझे लगने लगा था कि रोज़ी अपनी चूत को दिखाने के लिए मना नहीं करेगी,अब वो अपनी चूत को नंगी करने को तैयार हो जाएगी, मैंने उसकी चूत को सहलाते हुए ही कहा- हाँ तो अब क्या सोचती हो जानेमन? अब तो अपनी बुर को साफ़ कराने को तैयार हो… अगर महारानी जी की इजाजत हो तो इस परदे को हटाऊँ?

मैंने रोज़ी की साड़ी को पकड़ते हुए पूछा.

कहानी जारी रहेगी.
 
अपडेट. 88

अब मुझे लगने लगा था कि रोज़ी अपनी चूत को दिखाने के लिए मना नहीं करेगी, अब वो अपनी चूत को नंगी करने को तैयार हो जाएगी, मैंने उसकी चूत को सहलाते हुए ही कहा- हाँ तो अब क्या सोचती हो जानेमन? अब तो अपनी बुर को साफ़ कराने को तैयार हो… अगर महारानी जी की इजाजत हो तो इस परदे को हटाऊँ?मैंने रोज़ी की साड़ी को पकड़ते हुए पूछा.

रोज़ी की जिस गुलाबी चूत को इतने नजदीक से देखने के लिए मैं मर रहा था, उस कोमल चूत को देखने और छूने का समय आ गया था.

रोज़ी अब मेरी किसी भी हरकत का खुलकर विरोध नहीं कर रही थी, जो भी थोड़ा बहुत ना-नुकुर या फिर इधर उधर वो कर रही थी… वो उसकी नारी सुलभ लज़्ज़ा थी या फिर पहली बार किसी बाहरी पुरुष के इतने नजदीक जाने का अहसास.

लेकिन यह निश्चित था कि यह सब छेड़खानी उसको बहुत ज्यादा भा रही थी.

उसकी महकती हुई, मचलती हुई जवानी मेरी बाहों में थी और मुझे ज़माने भर का सुख दे रही थी.

उसकी पतली साड़ी के ऊपर से मैंने रोज़ी की चूची, चूत और चूतड़ों को खूब मसल लिया था, अब बारी इन सभी अंगों को नंगा करने की थी जिसकी शुरुआत मैंने कर दी थी.

मैंने साड़ी खोलने की बजाए पहले उसकी साड़ी को उठाकर उसके बेशकीमती खजाने, रोज़ी की कोमल सी बुर को नंगी करने की सोची.

एक बार उसकी बुर अच्छी तरह गर्म हो जाए और कामरस से भर जाए, वो खुद साड़ी, पेटीकोट उतार फेंकेगी और मेरा लण्ड अपनी चूत में घुसा लेगी.

मैंने बहुत अरमानों के साथ ही उसकी साड़ी का निचला सिरा पकड़ लिया और बोला- लाओ जानेमन… अब तो इज़ाज़त दे दो, तुम्हारी बुर को अच्छी तरह साफ़ करने की.

रोज़ी- अरे तो अभी तक आप क्या कर रहे थे? मैं तो समझी आप मेरी साफ़ ही कर रहे हैं…

मैं- अरे, यह भी कोई साफ करना होता है? एक बार वैसे साफ करवा कर देखो… फिर तो हर बार मुझे ही याद करोगी.

मैंने फिर से अपनी जीभ की नोक को हिलाकर सेक्सी इशारा किया कि कैसे अपनी जीभ से तेरी चूत को कुरेद-कुरेद कर साफ़ करूँगा.

रोज़ी के चेहरे पर अब ना बुझने वाली मुस्कान… सेक्सी मुस्कान लगातार झलक रही थी.

रोज़ी- अच्छा तो चलिए उसे भी देख लेते हैं.

मैं रोज़ी की साड़ी को नीचे से पकड़ ऊपर उठाने लगा, मेरे दिल की धड़कने लगातार बढ़ रही थी, उसकी साड़ी अभी घुटने के ऊपर ही आई थी कि रोज़ी ने कहा- ओह… सुनिए सर… सोफे पर चलें… यहाँ यह चुभ रहा है.

मैंने तुरंत अपने लण्ड की ओर देखा जो उसकी जांघ से चिपका था.

मगर वह मेज से नीचे उतर अपने चूतड़ों को सहला रही थी. ओह, मतलब मेज पर कुछ चुभ रहा था… उसका आशय मेरे लण्ड से नहीं था.

मैंने भी हँसते हुए उसके चूतड़ों को सहलाया- कहाँ जान? मैं तो कुछ ओर समझा?

वो भी मेरे लण्ड की ओर देखते हुए मुस्कुराती हुई सोफे पर चली गई.

सोफ़ा बहुत अच्छी जगह था, यह शीशे वाली दीवार से लगा था.

सोफे के पीछे वाला परदा हटते ही शीशे से बाहर वाले कमरे में पूरा स्टाफ काम करते हुए नजर आने लगता था, जिसका मजा में हमेशा शालू को चोदते हुए लेता था.

रोज़ी बड़े आराम से सोफे पर अधलेटी हो गई, मैं उसके पैरों के पास बैठ गया और धीरे से उसकी साड़ी ऊपर उठाने लगा.

रोज़ी ने अपनी आँखे बंद कर ली थीं वो आने वाले सुख का पूरा मजा लेना चाहती थी.

इसी का फ़ायदा उठाते हुए मैंने सीसे पर से परदा हटा दिया और सारा स्टाफ मुझे दिखने लगा.

अब ऐसा लग रहा था जैसे में कहीं भीड़भाड़ या पब्लिक प्लेस में हूँ और यह सब मस्ती कर रहा हूँ.

रोज़ी की शर्म अभी भी पूरी तरह नहीं मिटी थी… उसने अपनी टाँगें ढीली नहीं छोड़ी थीं बल्कि कसकर मुझे साड़ी नहीं उठाने दे रही थी.

रोज़ी- प्लीज, ऐसे ही कर दीजिये न साफ़… मुझे बहुत शर्म आ रही है.

उसके नखरे देख मुझे बहुत मजा आ रहा था, मैंने रोज़ी को चूमते हुए सोफे पर सही से लिटा दिया, उसकी साड़ी का पल्लू हटाकर उसके चेहरे पर डाल दिया.

रोज़ी- देखिये सर, मुझे बहुत शर्म आ रही है… केवल एक बार ही… जल्दी से साफ़ कर देना… फिर मैं उठ जाऊँगी… एक दो बार से ज्यादा मैं नहीं कराऊंगी…पक्का?

मैं- हा हा हा… अरे मैं कौन सा घंटे लगाऊँगा, बस गीलापन साफ़ करूँगा… कसम से… हा हा…

पहले उसकी शर्म को कुछ दूर करना जरूरी था.

मैं सोफे के नीचे अपने घुटनों पर बैठ गया…मैंने अपने होंठ रोज़ी की नाभि के ऊपर रख दिए और जीभ से चाटने लगा.अब रोज़ी मचलने लगी.

मैंने एक हाथ उसके घुटनों पर रख उसकी साड़ी को पकड़ लिया, रोज़ी के मचलने से और मेरे प्रयास से उसकी साड़ी ऊपर होने लगी और कुछ ही क्षणों में साड़ी जाँघों तक आ गई.

मैं रोज़ी के पेट को चूमते हुए ही नीचे उसकी चूत की ओर बढ़ने लगा, साथ ही साथ साड़ी, पेटीकोट के साथ ऊपर उसकी कमर तक भी लाने का कार्य जारी था.और जल्दी ही साड़ी कमर तक पहुँच गई. मैं भी घूमकर अब उसकी टांगों के बीच आ गया.
 
वाह… कितनी चिकनी और सफ़ेद टांगें थी रोज़ी की… बिल्कुल केले के तने जैसी… तराशी हुई टांगों को देखकर ही मेरा दिल बाग़-बाग़ हो गया.

मैंने उसके पैरों को सहलाते हुए अपना पूरा चेहरा वहाँ रख दिया, उसके पैरों को सहलाते हुए मैं ऊपर को बढ़ने लगा.

रोज़ी बहुत कसमसा रही थी पर जैसे ही मैं उसकी जांघो तक पहुँचा, उसने खुद ही अपनी टांगों के बीच मुझे जगह दे दी.

अब मैंने उसकी दोनों टांगों को घुटने से हल्का सा मोड़ते हुए, उसकी जाँघों के अंदर वाले भाग को चूमते हुए दोनों को इतना फैला दिया कि मेरा सर सरलता से वहाँ घुस गया.

अब मैं रोज़ी की चूत के बिल्कुल नजदीक पहुँच गया था.

इतनी सब करने के बाद मैंने पहली बार रोज़ी की गुलाबी चूत को देखा.

कसम से मेरे लण्ड ने हल्का सा पानी छोड़ दिया… क्या चूत थी… गुलाबी तो थी ही… और इस समय उसके सफ़ेद रस से भरी हुई…

उसकी चूत का पानी उसके चूत के छेद और बाहर भी निकल कर चारों ओर फ़ैल गया था, वो चमक रहा था जिससे चूत की ख़ूबसूरती कई गुना बढ़ गई थी.

मैंने अपनी नाक ठीक उसके चूत के छेद पर रख उसकी मदमस्त खुशबू ली… मेरी सांस जैसे ही वहाँ पड़ी… रोज़ी ने एक जोर की सिसकारी ली- अह्ह्ह्हा आआआ आह्ह… आआअ ओह…

उसकी साड़ी तो शायद पूरी खुल ही गई थी और पेटीकोट के साथ उसके कमर से भी ऊपर उसके पेट पर फैला था.

पैरों के तलुए से लेकर पेट तक जहाँ रोज़ी ने अपने पेटीकोट का नाड़ा बाँधा था, वहाँ तक पूरी नंगी वो मेरे सामने लेटी थी.

उसके पैरों में घुँघरू वाली पायल लगातार बज रही थी जो बहुत खूबसूरत लग रही थी.

दोनों पैर थोड़े उठे घुटनों तक मोड़े हुए उसके चूतड़ों की गोलाई, चूतड़ों के बीच सुरमई छेद और गुलाबी दरार, उसके ऊपर गुलाबी गद्देदार, गुदगुदे, हल्के से उभरे हुए पर आपस में चिपके हुए उसकी चूत के होंठ, रोजी की कमर से नीचे के सौन्दर्य को अच्छी तरह दिखा रहे थे.

उसकी चूत को देखकर कोई नहीं कह सकता था कि यह अभी तक चुदी भी है, उसको देखकर तो लग रहा था जैसे उसमे कभी उंगली तक नहीं गई.

मैंने रोज़ी की ख़ूबसूरती अच्छी तरह निहारने के बाद उससे खेलना शुरू कर दिया. मेरी जीभ रोज़ी की चूत पर हर जगह घूमने लगी.

रोज़ी के मुख से अब लगातार सिसकारियाँ निकल रही थी- आःह्हाआ आआ उफ़्फ़ ओह अह्ह्ह हाह्ह्ह आःह्हाआ नहीईइ इइ आह्हआअ…मेरे ऑफिस में एक अलग ही माहौल बन गया था.

मैंने उसकी चूत को अब अपने हाथों से हल्का सा खोला, बहुत चिपचिपा हो रहा था, शायद बहुत समय के बाद उसकी चूत को ऐसा सुखद अहसास मिल रहा था या शायद पहली बार !?!

उसकी चूत बहुत ज्यादा पानी छोड़ रही थी, इतना पानी तो मधु की चूत से भी नहीं निकला था.

मुझे उसकी खुशबू बहुत भा रही थी… मेरी जीभ लगातार उसकी चूत के चारों ओर अंदर तक अठखेलियाँ कर रही थी.

अब रोज़ी ने अपने चूतड़ों को ऊपर की ओर उछालना भी शुरू कर दिया था, उसको वाकयी बहुत आनन्द आ रहा था, वो मजे के सागर में गोते लगा रही थी.

मैं चूत से लेकर गांड तक सब कुछ चाट रहा था, जो रोज़ी केवल 1-2 बार में साफ़ करने की बात कर रही थी, वो अब सिसकारियों के साथ-साथ चटवाने में सहयोग भी कर रही थी, वो खुद अपनी चूत मेरे मुँह से चिपकाये जा रही थी.

मुझे दस मिनट से भी ज्यादा हो गए थे, मेरे होंठ दर्द करने लगे थे मगर रोज़ी ने एक बार भी मना नहीं किया… उसने शायद दो बार अपना पानी भी छोड़ दिया था क्योंकि उसकी चूत पानी से लबालब हो गई थी.

मैं उसके सारे पानी को चाट चाट कर फिर से साफ़ कर देता था…

फिर मुझे ही उससे बोलना पड़ा- क्या हुआ मेरी जान? …अभी और साफ़ करूँ?

इस समय मैं चाहता तो उसको आसानी से चोद सकता था, वो इस कदर गर्म हो गई थी कि बड़े से बड़े लण्ड को भी मना नहीं करती.

पर मैं उसको ऐसे नहीं बल्कि उसकी दिली ख्वाहिश से उसे चोदना चाहता था.

जब वो खुद पहले से चुदाई के लिए राजी हो… तभी मैं चोदना चाहता था.

मैंने उसको वैसे ही छोड़ दिया.

वो कुछ देर तक वैसे ही लेटी रही, नीचे से नंगी लेटी वो बहुत सेक्सी लग रही थी.

उसने अपनी साड़ी से चूत तक को नहीं ढका, मतलब वो बहुत कुछ चाहती थी पर खुद नहीं कह पा रही थी.

भले ही वो इस समय मुझे गाली दे रही होगी परन्तु जब उसकी खुमारी उतरेगी तो वो मुझसे प्यार करने लगेगी.

मुझे इस बात की पूरी तसल्ली थी.

अब मैं उसके उठने और कपड़े सही करने का इन्तजार कर रहा था, मैं देखना चाहता था कि वो ऑफिस के स्टाफ को देख कैसे प्रतिक्रिया करती है.

मैंने दराज से सिगरेट निकाली, जलाई और आराम से पीते हुए उसको देखने लगा.

कहानी जारी रहेगी.
 
अपडेट 89

अपने ऑफिस में मैं अपनी रिवॉल्विंग चेयर पर आराम-मुद्रा में बैठा सिगरेट के कश लगाता हुआ, मस्ती के पलों को जी रहा था…

सामने शीशे पर पड़ा हुआ परदा पूरा हटा हुआ था, सामने जहाँ मेरा स्टाफ पूरी लगन के साथ अपने-अपने काम में लीन था, वहाँ काफी चहल-पहल थी.

और शीशे के ठीक बराबर में जो सोफ़ा पड़ा था, वहाँ रोज़ी मस्ती में नहाई हुई अपने रस में डूबे अंगों को लिए लेटी हुई थी.

मैं उसके अंगों को बड़े आराम से देख रहा था, जब भी वो हिलती, अपने पैरों को ऊपर नीचे करती या फिर घूम जाती, उसकी जांघों का जोड़ और यौवन से लदे चूतड़ बार-बार मेरे लण्ड को आमंत्रण दे रहे थे.

वाह क्या दिलकश नजारा था…

सिगरेट से कहीं ज्यादा नशा उसके अंगों को देखकर चढ़ रहा था, यह मेरा दिल ही जानता है कि मैंने कैसे खुद को रोका हुआ था.

अगर कुछ देर और रोज़ी ऐसे ही रहती तो शायद मैं खुद को नहीं रोक पाता.

पर रोज़ी की शर्म फिर से वापस आ गई और वो सोफे से उठकर जल्दी से खुद को व्यवस्थित करने लगी.

उसकी साड़ी तो पहले से ही अस्त-व्यस्त थी तो उसने उठते हुए साड़ी को अपने बदन से हटा ही दिया.वो केवल पेटीकोट और ब्लाउज में बहुत सेक्सी लग रही थी.रोज़ी का पेटीकोट बहुत ही झीने कपड़े का था, कपड़े से उसकी टाँगें और सभी कुछ दिख रहा था.ये सब बहुत ही सेक्सी लग रहा था.

उसने मेरी ओर देखे बिना ही अपने पेटीकोट के नाड़े को सीधा करके बाहर निकाला, शायद उसको अपना पेटीकोट सही करना था.

मैं बिना पलक झपकाये उसको देख रहा था… उसने पेटीकोट के नाड़े को खींच कर खोला, पेटीकोट पहले ही नाभि से काफी नीचे बंधा था, नाड़ा खुलने से वो नाभि के पास से कुछ ओर नीचे खिसक गया.

मुझे उसकी चूत का ऊपरी हिस्सा तक दिख गया था तो मेरे मुख से अह्ह्हाआआ निकल गई.

रोज़ी ने पेटीकोट पकड़े पकड़े ही नजर उठाकर मुझे देखा और वो शरमा गई…

रोज़ी मुझे देखकर वैसे ही शरमाकर मेरी ओर पीठ कर लेती है, उसके घूमने से अब उसका चेहरा शीशे की ओर हो गया तो पहली बार उसने उस शीशे में से सबको देखा…

दो जने ठीक शीशे के सामने खड़े बात कर रहे थे.

बस यही वो क्षण था… उसने जैसे ही शीशे में से सबको देखा और…

स्वाभावि ही उसके मुख से एक जोरदार चीख निकली और उसके दोनों हाथ उसके चेहरे पर आँखों को ढकने के लिए उठ गए.पेटीकोट उसके हाथ से छूट गया, जिसने नीचे जमीन चूमने में एक क्षण भी नहीं लगाया.

अब रोज़ी कमर के नीचे पूरी नंगी थी… लेकिन फिर भी उसके नंगे चूतड़ों का दृश्य की मुझे बस जरा सी झलक ही मिली.

क्योंकि रोज़ी वहाँ से दौड़ कर तुरंत मेरे सीने से लग गई… शायद अपनी शर्म को छिपाने का नारी को यही सबसे सुलभ उपाय लगता है.

मैंने हंसते हुए अपनी सिगरेट बुझाई, उसको डस्टबिन में डालने के बाद उसकी पीठ पर हाथ रख उसको खुद से चिपका लिया.

मैं- क्या हुआ जानेमन?उसने कुछ नहीं कहा… बस तेज तेज सांस लेते हुए उसने अपने एक हाथ से शीशे की ओर इशारा किया.

मैं खुद कुर्सी से खड़ा हुआ और उसको भी उठाकर खड़ा किया.

वो अभी भी मेरे सीने से चिपकी थी, उसकी पीठ पर रखे, अपने हाथ को सरकाकर मैं उसके चूतड़ों पर ले गया और नंगे चूतड़ों की एक गोलाई को मसलते हुए ही उससे कुछ मस्ती करने के लिए मैंने कहा- हा हा हा तो क्या जानेमन… पेटीकोट भी निकालकर उनको ये सब क्यों दिखा रही हो?

मैं उसकी चूतड़ों की दरार में उंगली फिराते हुए उंगली उसकी चूत तक ले गया.

उसने एक जोर की सिसकारी ली- …अह्ह्हाआआ क्या करते हो सर आप…? प्लीज वो परदा बंद करो ना… और यह आपने ही खोला होगा ना?

मैं- अरे घबराओ मत मेरी जान… यह तो बस मनोरंजन ही है… यह ‘वन साइड व्यू ग्लास; है… हम तो बाहर देख सकते हैं मगर उधर से कुछ नहीं दिखेगा.

अब शायद उसको समझ आ गया था क्योंकि उसने भी उधर खड़े होकर कई बार अपने बाल सही किये थे.

उधर से किसी को भी खुद का अपना अक्स ही नजर आता है.

यह सब जानने के बाद भी वो मेरे सीने से लगी रही, मेरा हाथ कभी उसके नंगे चूतड़ों के सम्पूर्ण भाग को सहलाता, कभी उसके चूतड़ों की दरार तो कभी उसके गुदाद्वार को कुरेदता, तो कभी मैं चूतड़ों के नीचे उसकी चूत को भी सहला देता.

उसने एक बार भी मेरे हाथ को ना तो हटाने की कोई कोशिश की और ना ही हल्का सा भी विरोध किया.

मेरा लण्ड आगे से उसकी नंगी चूत को छू रहा था पर वो अभी भी पैंट के अंदर ही था.

मेरा दिल कह रहा था कि यार… लौंडिया पूरी गर्म है… निकाल लण्ड और डाल दे चूत में…

मगर दिमाग अभी उसको बहुत आराम से चोदने के मूड में था… वो कोई भी जल्दबाजी करने की इजाजत नहीं दे रहा था.

मैंने ही रोज़ी को थोड़ा सा अपने से अलग करते हुए कहा- मेरी जान… उधर सबको देखते हुए आराम से कपड़े पहनो, फिर देखो कितना मजा आता है…हा हा हा ह…

रोज़ी ने उउह्ह्ह्हूऊउ करते हुए… अपने कपड़े उठाये और दूसरी तरफ जाकर अपना पेटीकोट और साड़ी पहनी.

फिर करीब एक घंटे तक तो वो बड़ी ही विचलित सी रही मगर बाद में उसकी समझ में आ गया और उसकी आँखों में एक अलग ही प्यार मुझे अपने लिए नजर आया.

कुछ देर तक तो मैं अपनी थकन उतारता रहा और कुछ ऑफिस का काम किया, 2-3 बार शालू को भी कॉल किया मगर फिर फ़ोन नहीं लगा… लगता था उसको चार्ज करने का समय नहीं मिला था.

पर पहली बार ऐसा हुआ था कि उसने किसी और के फोन से भी मुझे कॉल करके नहीं बताया था… शायद किसी जरुरी कार्य में ही फंस गई थी.

हे भगवान, उसके साथ सब कुछ सही हो…

फिर कुछ फ्री होने के बाद मैंने सलोनी को फोन करने की सोची मगर तभी नलिनी भाभी की कॉल आ गई.

कहानी जारी रहेगी
 
अपडेट. 90

फिर कुछ फ्री होने के बाद मैंने सलोनी को फोन करने की सोची मगर तभी नलिनी भाभी की कॉल आ गई.

मैं सोच ही रहा था कि वो जरूर मुझसे नाराज होंगी कि मैंने दोबारा उनको कॉल क्यों नहीं किया पर उधर से कोई वैसी आवाज तो नहीं आई, उन्होंने कुछ नहीं कहा.

मैं अभी हेलो कहने ही वाला था कि मुझे लगा जैसे वहाँ कोई बात कर रहा हो… यह तो सरप्राइज़ था मेरे लिए !

अरे, यह नलिनी भाभी तो मेरे ही फ्लैट में थी और सलोनी भी स्कूल से वापस आ गई थी, वो दोनों आपस में बात कर रही थी, नलिनी भाभी ने शायद यह सोचा होगा कि ये बातें मुझे भी सुना दें… ग्रेट नलिनी भाभी !

नलिनी भाभी के इस कमाल का मैं कायल हो गया थाम उन्होंने सच में कमाल ही कर दिया था… जो मजा मुझे इस समय मिल रहा था… इसका सारा श्रेय केवल और केवल नलिनी भाभी को जाता है.

अब बस इतना देखना था कि क्या नलिनी भाभी अपने कमाल से सलोनी से उसके सेक्सी राज निकाल पाएँगी या नहीं.

वो दोनों आपस में बात कर रही थी, मैं ध्यान से दोनों की बात सुनने लगा.

नलिनी भाभी- अरे कुछ तो शर्म कर लिया कर, जब देखो बेशर्मो की तरह नंगी खड़ी हो जाती है?

सलोनी- हा हा हा क्या भाभी.. आप भी ना… अब आप से क्या शर्माना? मेरे पास ऐसा क्या है जो आपके पास नहीं है.

नलिनी भाभी- हा हा… वो तो सही है… फिर भी… एक तो तेरे अंकल भी ना… जब देखो तब… एकदम से आ धमकते हैं, उनसे तो शर्म कर लिया कर !

मैं उनकी बात सुन ही रहा था कि रोजी फिर से मेरे केबिन में आ गई. वो कुछ बोलने वाली ही थी कि मैंने उसको चुप रहने का इशारा किया और फोन स्पीकर पर कर लिया.

थैंक्स गॉड… उसको समझ आ गया, उसने कोई अन्य प्रश्न नहीं किया.

अब वो भी ध्यान से उन बातों को सुनने लगी, उसके माथे पर हल्की शिकन जरूर थी पर अभी उसने कोई प्रश्न पूछना व्यर्थ समझा, यह उसकी समझदारी थी.

सलोनी- अरे तो उनसे क्या शर्माना भाभी… बेचारे कितनी मदद करते हैं मेरी… हा हा हा… फिर थोड़ा बहुत इनाम तो उनको भी मिलना चाहिए ना !

नलिनी भाभी- हाँ, तुझे ऐसे नंगी देखने के बाद, पता है मुझे कितना परेशान करते हैं?

सलोनी- हाय… सच भाभी… फिर तो आपको मेरा अहसान मानना चाहिए… हा हा हा हा… मेरे कारण आपको कितना मजा आता होगा…

नलिनी भाभी- हाँ हाँ, मुझे सब पता है… मेरे मजे के चक्कर में तू कितना मजा ले रही है.

सलोनी- ह्हह्हाआ बिल्कुल नहीं भाभी… अंकल को तो मैंने छुआ तक नहीं… हाँ बस उन्होंने ही थोड़ा बहुत… पर मेरे दिल में तो उनके लिए बहुत इज़्ज़त है… मेरे लिए तो वो बिल्कुल पिता समान हैं.

नलिनी भाभी- अरे उनकी छोड़… वो तो तू चाहे कुछ भी कर… वो जो तू कल रात कैसे… बिल्कुल नंगी… उस लड़के के साथ… पूरी कॉलोनी में घूम रही थी… और क्या पूरे शहर में भी ऐसे ही नंगी घूम रही थी? बता ना… क्या क्या किया उस लड़के के साथ… और साहिल कहाँ था?? तुम रात भर अकेले उस लड़के के साथ… बता न.. क्या क्या हुआ??

सलोनी- हा हा… ओह अरे… थोड़ा रुको तो भाभी… आप तो एकदम से… सवाल पर सवाल… सवाल पर सवाल… हा हा हा… अरे अभी-अभी थककर स्कूल से आई हूँ… जरा रुको तो !

नलिनी भाभी- हाँ वो तो लग ही रहा है… लगता है बहुत मेहनत की है स्कूल में तेरी इस डिबिया ने, बड़ी लाल हो रही है.. जैसे खूब पिटाई हुई हो इसकी किसी तातकवर डंडे से… हा हा !

सलोनी- अरे वाह… भाभी ..कह तो आप बिल्कुल ठीक रही हो… हा हा…

मैंने सोचा कि लगता है दोनों खूब मस्ती कर रहे हैं.

नलिनी भाभी- और यह क्या… तू स्कूल भी कच्छी पहनकर नहीं जाती?

सलोनी- अरे वो मैं कहाँ पहनती हूँ वैसे भी… मुझे आदत ही नहीं है. और हाँ भाभी, अगर कच्छी पहनकर जाउंगी तो फिर मजा कैसे करुँगी?

नलिनी भाभी- तू तो पूरी बेशर्म होती जा रही है.

सलोनी- झूठ भाभी.. मैं तो पहले से ही हूँ… वो तो अब आप बेशर्म होती जा रही हो… हा हा.. बोलो मैं सही कह रही हूँ ना… अच्छा आप बताओ.. आपने मेरे पति का सही से ध्यान रखा था ना… और मधु को क्यों वापस भेज दिया? कहीं कुछ ऐसा वैसा तो नहीं किया ना आपने मेरे भोले भाले पति के साथ… हा हा हा…

नलिनी भाभी- हाँ बस एक तू भोली है और वो तेरा पति भोला है… और बाकी सब ही टेढ़े हैं? मैं ऐसी वैसी बिल्कुल नहीं हूँ… पूछ लेना अपने उस भोले से… हाआंन्नणणन…

सलोनी- अर्रर… आप नाराज क्यों होती हो मेरी प्यारी भाभी… मैं तो ऐसे ही कह रही थी… और अगर दिल हो तो कर भी लेना.. सच, मैं कुछ नहीं कहूँगी… मुझे अच्छा ही लगेगा.

नलिनी भाभी- कितनी बेशर्म होती जा रही है तू?

सलोनी- अरे इसमें बेशर्मी की क्या बात है… अगर मेरे प्यारे पति को और मेरी प्यारी भाभी… दोनों को अच्छा लगे तो मैं तो खुद उनका डंडा आपकी इस मुनिया में डाल दूँ… हा हा…

नलिनी भाभी- चल दूर हट मेरे से… मुझे ये सब पसंद नहीं… तू ही डलवा… अलग अलग डंडे… चल ये सब बातें छोड़.. मुझे वो बता ना?

 
सलोनी- आए ओये ओये… ये क्या बात हुई… वैसे तो आपको ये सब पसंद नहीं… और ये बता ..वो बता… जब पसंद नहीं तो ये सब क्यों पूछ रही हो… जाओ मैं कुछ नहीं बताती !

मेरा तो दिल धक रह गया, अरे यह क्या कह रही है? ऐसे तो कुछ भी पता नहीं चलेगा.

नलिनी भाभी- अरे मेरी बन्नो… नाराज क्यों होती है?? पसंद नहीं होता तो वैसी ही तेरे पास बैठी रहती… वो तो तू जैसे बात कर रही है, तो मैंने कहा. चल अब ज्यादा नखरे मत कर और जल्दी से बता कि कल रात क्या गुल खिलाये तूने?

सलोनी- अरे वो तो भाभी कल आपके चहेते… साहिल की ही मर्जी थी… उन्ही के कारण कल मुझे कितने लोगों के सामने नंगी रहना पड़ा…

नलिनी भाभी- क्या मतलब??

सलोनी- अरे बता रही हूँ ना…

और उसने पहले बिल्कुल वही कहानी सुनाई जैसे होटल में क्या-क्या हुआ… और फिर पुलिस वाले की भी… हाँ उसने एक नई बात बताई… जिसे सुन मैं चोंक गया… अमित ने बताया था कि इंस्पेक्टर ने ज्यादा कुछ नहीं किया था… मगर साले अमित ने झूठ बताया..

सलोनी के अनुसार उस इंस्पेक्टर ने बहुत मजे लिए…

मैं आश्चर्यचकित था कि 15 मिनट में ही उसने सलोनी को इस कदर भोग लिया था.

मेरी समझ में यह भी आ गया था कि केवल मेरे सामने ही वो चुदवाना पसंद नहीं करती है बल्कि मेरे पीछे उसको चुदवाने से कोई परहेज़ नहीं है, उसको लण्ड अपनी चूत या गांड में डलवाने में मजा ही आता है.

उसके अनुसार इंस्पेक्टर ने कुछ देर तक तो उससे अपना लण्ड चुसवाया… फिर उसकी चूचियों को मसला और लण्ड भी चूचियों के बीच रखकर रगड़ा… फिर सलोनी उसके लण्ड को चूत में लेना चाहती थी मगर उसने चूत को उंगली से चोदते हुए मना कर दिया कि उसको और यह भी कहा- …तुम जैसी रंडियों की ढीली ढाली चूत मारने में नहीं बल्कि गांड मारने में मजा आता है.

और इंस्पेक्टर ने सलोनी को जीप में ही घोड़ी बनाकर पीछे उसके गांड में अपना लण्ड डाल दिया.

सलोनी ने यह भी बताया कि उसको बहुत दर्द हुआ… जिस समय अमित उसको बचाने आया उस समय उस इंस्पेक्टर का लण्ड सलोनी की गांड में था… अमित ने खुद इंस्पेक्टर को धक्का देकर उसका लण्ड बाहर निकाला था… फिर अपने रुमाल से सलोनी की गांड को साफ़ करके अपना कोट उसको पहनाया था.

मुझे अमित पर बहुत गुस्सा आया कि साले ने मुझे बताया क्यों नहीं और उस इंस्पेक्टर को क्यों छोड़ दिया… और फिर सलोनी पर भी गुस्सा आया कि उसने मुझे क्यों नहीं बताया?

फिलहाल तो मैं उसकी बातें सुन रहा था…

नलिनी भाभी- चल अच्छा हुआ कि फिर भी बच गई तू… वरना अभी तो वो दूसरा भी था… पता नहीं बीच सड़क पर और क्या-क्या होता…

सलोनी- हाँ भाभी सच… मैं अमित भैया का अहसान कभी नहीं भूल सकती… मुझे बहुत दर्द सहने से बचा लिया था उन्होंने…

नलिनी भाभी- तो उनका अहसान तूने कैसे उतारा… उस बेचारे साहिल को तो तुमने रात भर पुलिस स्टेशन भेज दिया… और अकेले यहाँ दोनों… हम्म्म?

सलोनी- अरे नहीं भाभी… उनको तो मैंने ही जल्दी बुलवा लिया था… अगर उस इंस्पेक्टर को केस के चककर में पड़ते तो पता नहीं आज भी हम वहीं होते… और हमारी बदनामी वो अलग.

नलिनी भाभी- फिर भ कुछ तो हुआ होगा बता ना?

सलोनी- उनको वहीं छोड़ मैं डरी हुई सी अमित भैया के साथ उनकी गाड़ी में आई, वो बहुत मजाक कर रहे थे जिससे मैं नार्मल हो जाऊँ… फिर मुझे पता चला कि वो तो मुझे पहले से ही बहुत पसंद करते हैं… उन्होंने बताया कि उनकी बहुत पुरानी इच्छा पूरी हो गई… मुझे नंगी देखने की… उनकी प्यारी और मजाकिया बातें सुन मुझे बहुत अच्छा लगा और मैं जल्दी ही नार्मल हो गई…

फिर उन्होंने ही कहा कि भाभी आज मजा करते हैं… वो चाहता था कि मैं पार्किंग से यहाँ तक नंगी ही आऊँ…

मैंने बहुत मना किया… पर उसने ज़िद पकड़ ली और फिर अपना कोट भी वापस मांग लिया.

फिर मैंने भी सोचा कि रात को इस समय कौन सा कोई जगा होगा, सब तरफ अँधेरा ही था, अमित तो मुझे पहले ही नंगी देख चुका था… बस मैंने उसकी यह इच्छा भी पूरी कर दी… सच भाभी बहुत मजा आया… एक दिन आप भी यह ट्राई करना… वो तो हमारे पास चाबी नहीं थी, वरना आपको भी कुछ पता नहीं चलता.

नलिनी भाभी- रहने दे… तेरे अंकल तो कब से तेरी राह देख रहे थे… उन्होंने तेरे को पूरा कंपाउंड का चक्कर लगाकर… नंगी ऊपर आने तक सब देख लिया था.

सलोनी- हाँ वो तो उन्होंने मुझे बता दिया था… अब चलो उनकी तो कोई बात नहीं… वो तो अपने ही हैं ना.. हा हा…

नलिनी भाभी- और यह भी तो हो सकता है कि कुछ और लोगों ने भी देखा हो… हो सकता है कोई और भी अपनी बालकोनी से देख रहा हो?

सलोनी- हा हा सच भाभी.. तो चलो यह उसका इतनी रात तक जागने का इनाम हो गया होगा… हा हा..

नलिनी भाभी- फिर तुम दोनों ने अकेले फ्लैट में क्या किया, वो तो बता?

सलोनी- अरे बस अब रहने भी दो ना भाभी, वो सब बाद में बता दूंगी.

नलिनी भाभी- नहीं मुझे अभी सुनना है बता ना !

मैंने रोजी की ओर देखा, वो आँखे फाड़े, मुँह खोले सब सुन रही थी.

उसकी समझ में आ तो गया होगा कि मैं किसकी बात सुन रहा हूँ क्योंकि उन्होंने मेरा ज़िक्र भी छेड़ा ही था.

अब उसकी क्या प्रतिक्रिया होती है, यही देखना था.

सलोनी- ओके बाबा, बताती हूँ… मुझे भी अमित भैया पहले से ही बहुत पसंद हैं ..इसीलिए मैंने भी सोच लिया था… कि उनकी सभी इच्छा पूरी करुँगी…

नलिनी भाभी- और तेरे अमित भैया की क्या इच्छा थी?

सलोनी- क्या भाभी आप भी… मुझ जैसे लड़की को नंगी देखकर एक लड़के की क्या इच्छा हो सकती है… हा हा…

नलिनी भाभी- तो तुम दोनों ने सब कुछ कर लिया?

सलोनी- ह्म्म्म बताती हूँ ना, रुको तो…और कुछ देर के लिए वहाँ चुप्पी सी छा गई.

अब क्या राज खोलने वाली है सलोनी…????

कहानी जारी रहेगी.

 
अपडेट. 91

मैं रोज़ी के साथ बैठा नलिनी भाभी और सलोनी की बातें सुन रहा था.

हम दोनों में एक फर्क था, मुझे तो उनकी बातें सुनकर मजा आ रहा था पर रोज़ी अभी हमारे बारे में ज्यादा नहीं जानती थी इसलिए उसको शायद बहुत अजीब लग रहा था.

वो तो एक पतिव्रता टाइप की लड़की थी, उसने कभी दूसरे मर्द के बारे में शायद ऐसा सोचा भी नहीं था पर अब वो कुछ कुछ खुद को बदल रही थी.

अभी तो उसके चेहरे के भाव और रंग हर पल बदल रहे थे, वो मुझे बड़े ही सहानुभूति के भाव से देख रही थी और उसकी आँखों में मेरे लिए बहुत ही याचना के भाव थे.

मैं बस यही सोच रहा था कि जब उसको पता चलेगा कि मुझे सलोनी के ऐसा कुछ करने से कोई ऐतराज नहीं है, तब उसको कैसा लगेगा.

फिलहाल तो वो मेरे साथ सलोनी की बातें सुनने में मस्त थी.

और उधर फिर से बातचीत शुरू हो गई… जैसे नलिनी भाभी सब कुछ उगलवाने का मूड में ही आई थी और सलोनी को भी उनको कुछ भी बताने से कोई ऐतराज नहीं था.

नलिनी भाभी- अच्छा अब कुछ तो पहन ले या ऐसे ही नंगी घूमती रहेगी?

सलोनी- हा हा… क्या भाभी आपमें और अंकल में कितना फर्क है… आप हमेशा कुछ पहनने को बोलती रहती हो और अंकल?

नलिनी भाभी- अंकल क्याआआ??

सलोनी- अरे छोड़ो न भाभी…बस लो पहन लिया…ना.

नलिनी भाभी- यह भी तेरा कोई कपड़ा है… लगता है जैसे कुछ पहना ही नहीं है.

सलोनी- अरे भाभी इसमें ही तो मजा है… खुद के लिए हमने पहना भी है और दूसरों के लिए नहीं भी… हा हा…

नलिनी भाभी- हाँ तो बता न फिर क्या हुआ?

सलोनी- अरे भाभी बताया ना… पहले तो हम दोनों ही थक गए थे तो मैंने गीजर ओन कर दिया.

तब अमित भैया बोले कि जब तक पानी गर्म हो वे मेरी मालिश कर देते हैं, सच उनको बहुत अच्छा मसाज करना आता है… भाभी आप भी करवा कर देखना… मैं तो पूरी नंगी थी ही, अमित भैया ने भी अपने सभी कपड़े निकाल दिए थे…

नलिनी भाभी- सब क्या? अंडरवियर भी?

सलोनी- उफ़्फ़्फ़्फ़ हाँ भाई वो भी… और उनका लण्ड काफी बड़ा था और पूरा खड़ा था… अब बस यही सुनना चाहती थी ना आप?

नलिनी भाभी- हाय राम… बड़ी बेशरम है तू तो… मैंने तो ऐसे ही पूछा था.

सलोनी- हाँ मुझे पता है सब कि कैसे और क्या जानना है आपको.

नलिनी भाभी- अच्छा ठीक है तू चाहे जैसे भी बता पर मुझे अच्छा लग रहा है… फिर क्या हुआ?

सलोनी- अरे फिर तो बहुत मजा आया… भैया अपनी सभी कलाएं मेरे बदन पर लगा दी, पहले उन्होंने खूब मालिश की, फिर मेरे चूतड़ों में दर्द तो हो ही रहा था उस इंस्पेक्टर के लण्ड की वजह से तो अमित भैया ने मुझे उल्टा करके मेरे चूतड़ों की खूब मालिश की, फिर मेरे छेद में भी खूब अच्छी तरह से मालिश की.

नलिनी भाभी- तूने उसे मना नहीं किया?

सलोनी- क्या भाभी? मुझे तो खूब अच्छा लग रहा था… मैं मना क्यों करती? जब वो पीछे से मेरे ऊपर चढ़कर मालिश कर रहे थे तब उनका लण्ड मुझे खूब मजा दे रहा था.

नलिनी भाभी- वो कैसे?

सलोनी- उनका लण्ड मेरी जांघों और चूत को भी बार बार छू रहा था.

नलिनी भाभी- मतलब तू चाह रही थी कि वो उसको तेरी मुनिया में डाल दे?

सलोनी- सच भाभी… मैं तो पहले से ही इतनी गर्म हो गई थी पर वो भी पूरा घाघ थे, लगा रहे थे, घिस रहे थे मगर डाल नहीं रहे थे.

फिर जब मैंने उनको याद दिलाया कि जल्दी कर लो ना… साहिल आने वाले होंगे.

नलिनी भाभी- तो तूने अपने मुँह से कह दिया… बड़ी कमीनी है तू तो?

सलोनी- अरे नहीं भाभी.. मेरा मतलब तो मालिश पूरी करने से था. मगर वो भी तो पूरा सताने पर लगे थे.

फिर उन्होंने मेरे सामने ही साहिल को फोन किया कि पूछ लेते हैं कि जनाब है कहाँ.

नलिनी भाभी- ओह वो तो बड़ा बहादुर निकला… उसको तो नहीं और तेरे को भी डर नहीं लगा कि ऐसे नंगे दोनों फिर साहिल को भी कॉल करने लगे?

सलोनी- अरे भाभी अब वो कहाँ डरते, जब साहिल के सामने से मुझे… पूरी नंगी ही अपनी गाड़ी में बैठा कर ले आए और साहिल ने भी कुछ नहीं कहा.

नलिनी भाभी- अरे साहिल बेचारा क्या जाने? कितना सीधा है वो तो…

सलोनी- हाँ भाभी, यह तो आप बिल्कुल सही कह रही हैं, वाकयी वो हैं तो बहुत सीधे और अच्छे भी.

नलिनी भाभी- अच्छा फिर फोन पर किसने बात की?

सलोनी- अमित कह तो वो मुझी से रहे थे, पर मैंने मना कर दिया. फिर खुद ही बात करने लगे और बात करते करते ही उन्होंने अपना लण्ड मेरी चूत में डाल दिया.

मेरा तो मुँह खुला का खुला रह गया, अब मैं कुछ बोल भी नहीं सकती थी और हिल भी नहीं सकती थी.

मुझे चोदते हुए ही वो बात करते रहे और मैं अपना मुहँ दबाये बिल्कुल चुप रही अगर हल्की सी भी सांस वो सुन लेते तो उनको कितना बुरा लगता. सच पूरे पागल ही हैं… उनको बोल रहे थे कि मैं अपने कमरे में आराम कर रही हूँ… जबकि मुझे बुरी तरह चोद रहे थे.

 
पूरे एक झटके में ही उन्होंने अपना पूरा लण्ड मेरी नाजुक चूत में घुसा दिया था, सच बहुत दर्द हुआ था… फिर तो उन्होंने मुझे बहुत मजा दिया, जब तक साहिल घर नहीं आ गए, वो मुझे चोदते रहे.

नलिनी भाभी- क्यों फिर नहाये नहीं तुम दोनों?

सलोनी- नहाये तो थे… वो सुबह मेरे साथ ही नहाकर अपने घर गए.

नलिनी भाभी- क्या मतलब? साहिल कहाँ था?

सलोनी- वो तो यहाँ सो रहे थे… बेचारे पूरी रात के थके थे.

नलिनी भाभी- अच्छा और तुझे थकान नहीं हुई?

सलोनी- अरे मेरी थकान तो अमित भैया ने अच्छी तरह निकाल दी थी… हा हा हा… सच बहुत मजा आया था… कल पहले तो साहिल के साथ ही बहुत मजा आया था.. फिर अमित भैया ने दिल खुश कर दिया… तीन बार चोदा मुझे… अभी तक मीठी मीठी टीस उठ रही है.

नलिनी भाभी- टीस? वो कहाँ उठ रही है?

सलोनी- अरे चूत और गांड दोनों में ही…

नलिनी भाभी- तो क्या उसने गांड भी मारी तेरी? तुझे डर नहीं लगा कि अगर साहिल जाग गया तो?

सलोनी- अरे डर की बात कर रही हो आप भाभी… वो तो इतने हिम्मती हैं कि रात को जब मैं साहिल के साथ सो रही थी, तब भी यहाँ आकर मेरे पास लेट गए और मेरी चूत चाटी, मेरे से अपना लण्ड चुसवाया और लेटे-लेटे ही एक बार मेरे को चोदा भी.

नलिनी भाभी- क्या पागलों जैसी बात कर रही है? कहाँ चोदा? और साहिल कहाँ था?

सलोनी- अरे यहीं.. मेरे पास लेटे मजे से सो रहे थे… उधर वो तो जोर जोर से खर्राटे ले रहे थे…और इधर अमित हर खर्राटे की आवाज पर धक्के मार रहे थे. सच भाभी बहुत ही मजे वाला अनुभव था… बहुत मजा आया…करीब आधे घंटे तक उन्होंने मुझे चोदा.

नलिनी भाभी- और तुझे बिल्कुल डर नहीं लगा कि साहिल ने देख लिया तो क्या होगा? और कपड़े उतारे थे या ऐसे ही किया सब कुछ?

सलोनी- कौन से कपड़े भाभी, अमित भैया ने मुझे कपड़े पहनने ही कहाँ दिए… जब साहिल यहाँ दरवाजे तक पहुँच गए तब तक तो लगातार चोदते रहे.

फिर जब उन्होंने घण्टी बजाई, तब मैं तो भागकर यहाँ आकर सोने का नाटक करने लगी और अमित भैया ने ही दरवाजा खोला, पता नहीं क्या कहा उनसे.

और मैं तो यहाँ सांस रोके चुपचाप ही रही, कपड़े पहनने का समय ही नहीं मिला.

नलिनी भाभी- और साहिल ने भी एक बार भी तुझे नहीं देखा कि कपड़े पहने है या नहीं?

सलोनी- अरे नहीं… मैं तो डर रही थी पर उन्होंने नहीं देखा… फिर मैं यह भी सोच रही थी कि अगर देख भी लिया तो कुछ नहीं कहने वाले आखिर जब मैं उनके पास से आई थी, तब नंगी ही थी.

नलिनी भाभी- सच तू तो बहुत हिम्मती है… और तूने बहुत हिम्मत वाला काम किया है… मुझे तो सोचकर ही डर लग रहा है.

सलोनी- हा हा हा भाभी… सच, पर उस मजे के लिए इतना तो रिस्क लेना ही पड़ता… क्या मजा आया था !!

नलिनी भाभी- और फिर गांड कब मारी तेरी उसने?

सलोनी- सुबह नहाते हुए… उसमें भी बहुत मजा आया… अभी तक टीस उठ रही है.. अह्ह्हाआआ…

नलिनी भाभी- और साहिल जाग जाता तो… तूने तो हद ही कर दी सलोनी…

सलोनी- अरे इसमें हद किस बात की, शुरू में तो मैं केवल उनकी हेल्प के लिए ही गई थी… पर जब उन्होंने मुझे भी साथ ले लिया तो फिर मैं सब कुछ भूल गई. और फिर जो अमित भैया ने मेरी जो गांड मारी है, सच आज तक इतना मजा नहीं आया. मैं तो उनकी चुदाई की कायल ही हो गई.

नलिनी भाभी- देखो तो कितनी बेशरम होकर सब बता रही है… तुझे तो अब किसी बात की शर्म ही नहीं रही.ट्रीन्न न्न्न… ट्रिन्न न्न्न्न…

नलिनी भाभी- ओह कौन आ गया इस समय?

सलोनी- अंकल ही होंगे…

अंकल- अरे तू कब से यहाँ बैठी है…

और तभी कॉल कट हो गई.

अब मैं खुद को रोज़ी के प्रश्न के लिए तैयार कर रहा था कि अब उसको क्या और कैसे सब कुछ बताना है.

उसको बुरा भी ना लगे और वो सब कुछ अच्छी तरह स्वीकार भी कर ले.

कहानी जारी रहेगी.

 
अपडेट. 92

सलोनी की इतनी सेक्सी बातें सुनकर मेरे पर तो ज्यादा असर नहीं हुआ पर शायद लगता है कि रोज़ी कुछ ज्यादा ही उत्सुक दिख रही थी. अब मुझे सब कुछ सम्भालना था, उसको बड़े आराम से ही सब कुछ बताना था.

उसकी आँखों में मेरे लिए इस समय केवल सहानुभूति ही नजर आ रही थी, वो अभी केवल इतना ही समझ रही थी कि जिस पति को अपनी पत्नी की बेवफाई के बारे में पता चले तो उस पर क्या गुजरती है.

अब मुझे उसकी वो सारी ग़लतफहमी दूर करनी थी और उसका दृष्टिकोण बदलना था.

रोज़ी- ओह सर ये आपकी वाईफ थी न… मुझे शालू ने बताया था… उनका नाम सलोनी ही है ना?

अब फिर से मेरा माथा ठनका, शालू ने इसको क्या क्या बताया होगा?

मैं- हाँ यार मेरी प्यारी बीवी ही है… क्या बताया शालू ने तुमको इसके बारे में?

रोज़ी- बस इतना ही कि उनका नाम सलोनी है और बहुत मॉर्डर्न हैं.

मैं- हाँ यार बहुत मॉडर्न है वो.. अब तो तुम समझ ही गई होगी.

रोज़ी- छिइइ…इइइइइ कितनी गन्दी हैं वो… ये सब भी कोई करता है क्या?

मैं- हा हा हा… वाह यार… तुम भी क्या बात करती हो? अरे इसमें क्या हुआ?

रोज़ी- क्यों आपको बुरा नहीं लगा वो… ये सब…?

मैं- कमाल करती हो… इसमें बुरा क्या लगेगा… अरे यार, उसका जीवन है… और जो उसको अच्छा लगता है.. उसको करने का पूरा हक़ है.

रोज़ी- मगर ऐसे.. ये तो गलत है न… उनको आप जैसा इतना अच्छा पति मिला है… फिर तो कुछ और नहीं !!!

मैं- अरे यार किस पिछड़ी दुनिया में जी रही हो? आजकल सब कुछ चलता है. अभी कुछ देर पहले हमने जो कुछ किया, क्या वो सही था? अरे हम दोनों को अच्छा लगा तो किया ना…!

रोज़ी- ह्म्म्म्म… पर मुझे अगर आप जैसा पति मिलता तो फिर तो कभी कुछ और नहीं सोचती.

मैं- क्यों अभी क्या खराब मिला है… अरे यार ये पति सिर्फ 1-2 साल तक ही अच्छे लगते हैं फिर सब कुछ पुराना जैसा हो जाता है…

रोज़ी- जी नहीं मेरे साथ ऐसा नहीं है… वो तो… मेरे लिए सेक्स ही सब कुछ नहीं है… मुझे तो बस दिल से प्यार करने वाला और मुझे समझने वाला ही अच्छा लगता है.

मैं- अरे तो क्या इसीलिए तुम मेरे साथ वो सब?

रोज़ी- जी हाँ मुझे आप बहुत अच्छे लगे… तभी तो मैंने सलोनी जी के बारे में वो सब कहा.

मैं- अरे मेरी जान ऐसा कुछ नहीं है, वो बहुत अच्छी है, मुझे बहुत प्यार करती है और मैं भी उसको बहुत प्यार करता हूँ.

रोज़ी- फिर ये सब.. क्या आपको बिल्कुल भी बुरा नहीं लगा?

मैं- बिल्कुल नहीं… मैं ये सब केवल थोड़ा सा शारीरिक सुकून ही मानता हूँ. क्या किसी के साथ थोड़ा बहुत मस्ती करने से इंसान का कुछ घिस जाता है… नहीं ना? तो फिर काहे का हल्ला?

रोज़ी- हाँ मगर हमारा यह समाज… इसी को सब कुछ समझता है.

मैं- अरे छोड़ो यार ये सब फ़ालतू की बातें… कुछ नहीं रखा इनमें ! सच बताओ, हमने जो अभी किया… मुझे पता है वो तुम्हारी नजरों में गलत है… पर सच बताना तुमको अच्छा लगा या नहीं?

उसने बहुत ही शरमाते हुए हाँ में जवाब दिया.

मैं- फिर सब बात बेकार हैं… अगर किसी बात से हमको ख़ुशी मिलती है… और कुछ नुक्सान नहीं होता… तो वो बात गलत हो ही नहीं सकती. मुझे नहीं लगता कि किसी भी मर्द को अगर कोई लड़की सेक्स का ऑफर दे तो वो मना कर दे… वो एक बार भी तुम्हारी तरह नहीं सोचेगा… जब उसका कुछ नहीं घिसता तो फिर यार तुम लड़कियों को क्यों चिंता होती है?

इस बात पर हम दोनों बहुत जोर से हंसने लगे.

रोज़ी- आप सच बहुत मजेदार बात करते हो… आप बहुत अच्छे हैं.

मैं- अच्छा रोज़ी सच बताओ… क्या तुम्हारे पति तुमको परेशान करते हैं?

रोज़ी- ना ऐसी कोई बात नहीं… पर वो अच्छे इंसान नहीं हैं.

वो अभी ज्यादा कुछ नहीं बताना चाह रही थी इसलिए मैंने उसको ज्यादा परेशान करना सही नहीं समझा- ह्म्म्म्म ठीक है.

रोज़ी- अच्छा सर, आप दोनों फिर ऐसे ही किसी के भी साथ मजे करते हो… आप दोनों.. किसी को कोई ऐतराज नहीं होता?

मैं- हाँ यार… वैसे हम दोनों ही एक दूसरे के बारे में काफी कुछ जानते हैं परन्तु कोई कुछ नहीं कहता… ना ही हम एक दूसरे को डिस्टर्ब करते हैं.

रोज़ी- आप जब ये सब जानकर सलोनी जी के साथ कैसे वो सब कर पाते हैं?

मैं- हा हा हा… कितना शर्माती हो यार तुम… अभी जब मैं तुम्हारी बुर चाट रहा था… तब तो खुल गई थी… पर अब फिर ऐसे ही… सच बताओ अगर उस समय मैं तुम्हारी बुर में अपना लिंग डाल देता तो क्या तुम मना करती?

रोज़ी- हाय राम.. आप कैसी बात करते हो?

मैं- देखो, हम दोनों अब पक्के दोस्त हैं… मैं तुमको बहुत पसंद करता हूँ… और तुम मुझको… यह तुमने अभी अभी कहा भी है… फिर इतना सब शरमाना वरमाना छोड़ो… अब तो बस हम आपस में खुलकर बात करेंगे. और अब तो तुम मेरे बारे में सब कुछ जान गई हो… वो सब भी जो कोई नहीं जानता.

 
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