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Guest
रोज़ी चुपचाप मेरी बात सुनती रही.
मैं- अगर अब हमारे बीच आंतरिक दोस्ती भी हो जाए तो इसमें कोई बुराई नहीं होनी चाहिए. अगर हम दोनों को ही पसंद है… तो अपने दिल की ख़ुशी के लिए हम वो सब भी कर सकते हैं… जो इंसान की सबसे बड़ी जरूरत है. अच्छा सच बताओ रोज़ी तुमने अपने पति के साथ आखिरी बार कब सेक्स किया था… और तुम संतुष्ट हुई या नहीं?
रोज़ी ने केवल ना में सर हिलाया.
मेरे बहुत जोर देने पर उसने केवल इतना बताया- मुझे याद नहीं…
मतलब उनकी सेक्स लाइफ बहुत बोर चल रही थी, फिर भी मैंने उस दिन रोज़ी के साथ कुछ भी करना ठीक नहीं समझा.
उस दिन रोज़ी मेरे साथ ही ऑफिस से निकली, मैंने उसको उसके घर के पास वाले स्टॉप तक छोड़ा.
फिर मुझे नीलम की याद आ गई, मैंने उसको फोन मिलाया, कुछ देर में ही उसने कॉल रिसीव कर लिया.
मैं- हाँ जी नीलम जी… क्या हो रहा है… आपके ये कपड़े… इनका क्या करना है?
नीलम- ओहो जीजू… व्व्वो ववो… अह्हा…
वहाँ से बड़ी ही खतरनाक आवाजें आ रही थी.
मैं- अरे क्या हुआ… लगता है बहुत जरूरी काम चल रहा है… हा हा…
मैं जानबूझ कर हंसा.
नीलम- अह्हा हा हाँ जीजू… वो कुछ खुदाई का काम चल रहा है… ऐसा करो… अभी तो मैं कपड़े पहन ही नहीं सकती… आप उनको अपने पास ही रखो… फिर कभी ले लूँगी.
ओह यह नीलम तो शैतान की नानी निकली, उसको कोई शरम नहीं, वो बड़ी आसानी से सब बात बोल जाती है.
मैंने भी उससे ज्यादा कुछ नहीं कहा- ठीक है डियर, फिर तुम खुदाई करवाओ… मैं बाद में चैक कर लूँगा कि सही से हुई है या नहीं…
नीलम- और अगर नहीं हुई होगी तो क्या फिर आप भी सही से करोगे… हा हा… आःह्हाआआ…
मैं- वो तो देखने के बाद ही पता चलेगा… ओके बाय..और उसने भी फोन रख दिया.
मैं काफी थक गया था इसलिए जल्दी से घर पहुँचा.वहाँ सलोनी और मधु रसोई में काम करने में व्यस्त थे…
कहानी जारी रहेगी !
मैं- अगर अब हमारे बीच आंतरिक दोस्ती भी हो जाए तो इसमें कोई बुराई नहीं होनी चाहिए. अगर हम दोनों को ही पसंद है… तो अपने दिल की ख़ुशी के लिए हम वो सब भी कर सकते हैं… जो इंसान की सबसे बड़ी जरूरत है. अच्छा सच बताओ रोज़ी तुमने अपने पति के साथ आखिरी बार कब सेक्स किया था… और तुम संतुष्ट हुई या नहीं?
रोज़ी ने केवल ना में सर हिलाया.
मेरे बहुत जोर देने पर उसने केवल इतना बताया- मुझे याद नहीं…
मतलब उनकी सेक्स लाइफ बहुत बोर चल रही थी, फिर भी मैंने उस दिन रोज़ी के साथ कुछ भी करना ठीक नहीं समझा.
उस दिन रोज़ी मेरे साथ ही ऑफिस से निकली, मैंने उसको उसके घर के पास वाले स्टॉप तक छोड़ा.
फिर मुझे नीलम की याद आ गई, मैंने उसको फोन मिलाया, कुछ देर में ही उसने कॉल रिसीव कर लिया.
मैं- हाँ जी नीलम जी… क्या हो रहा है… आपके ये कपड़े… इनका क्या करना है?
नीलम- ओहो जीजू… व्व्वो ववो… अह्हा…
वहाँ से बड़ी ही खतरनाक आवाजें आ रही थी.
मैं- अरे क्या हुआ… लगता है बहुत जरूरी काम चल रहा है… हा हा…
मैं जानबूझ कर हंसा.
नीलम- अह्हा हा हाँ जीजू… वो कुछ खुदाई का काम चल रहा है… ऐसा करो… अभी तो मैं कपड़े पहन ही नहीं सकती… आप उनको अपने पास ही रखो… फिर कभी ले लूँगी.
ओह यह नीलम तो शैतान की नानी निकली, उसको कोई शरम नहीं, वो बड़ी आसानी से सब बात बोल जाती है.
मैंने भी उससे ज्यादा कुछ नहीं कहा- ठीक है डियर, फिर तुम खुदाई करवाओ… मैं बाद में चैक कर लूँगा कि सही से हुई है या नहीं…
नीलम- और अगर नहीं हुई होगी तो क्या फिर आप भी सही से करोगे… हा हा… आःह्हाआआ…
मैं- वो तो देखने के बाद ही पता चलेगा… ओके बाय..और उसने भी फोन रख दिया.
मैं काफी थक गया था इसलिए जल्दी से घर पहुँचा.वहाँ सलोनी और मधु रसोई में काम करने में व्यस्त थे…
कहानी जारी रहेगी !