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मेरी चालू बीवी complete

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सच कहूँ तो मैंने सेक्स तो बहुत किया है, पर उस सबमें मैं हमेशा खुद ही हीरो रहता था पर इस तरह लाइव ब्लूफिल्म वो भी अपनी बीवी की, मैं पहले बार देख रहा था.

सलोनी को पूरी नंगी होकर इस तरह मेहता अंकल के लण्ड से चुदवाते देख मेरी हालत ख़राब हो रही थी.

मैंने अपना लण्ड पैंट से बाहर निकाल लिया था और अपने ही हाथों से सहला रहा था.

अब मैंने नलिनी भाभी को देखा, लगता था वो भी पहली बार ही ऐसे लाइव शो देख रही थी, उनकी हालत भी पतली थी, अपनी शर्म के कारण वो बिस्तर पर तो नहीं जा रही थी लेकिन कुर्सी पर बैठे हुए ही, उनका हाथ अपने पेटीकोट के अंदर था, साफ़ पता चल रहा था कि वो अपनी चूत के साथ खेल रही हैं.

मैं अभी नलिनी भाभी को ही बुलाकर उन्हीं को चोदने का प्लान बना रहा था कि तभी मुझे अपनी ओर वाले कमरे में कुछ आहट सी हुई.

ओह इस समय कौन आ गया?

मैं अभी बाथरूम का दरवाजा बंद करने की सोच ही रहा था कि वो तो एकदम से दरवाजे पर ही आ गया.

मुझे कुछ नहीं सूझा.. बाथरूम बहुत बड़ा था और मोटे मोटे परदे भी थे, मैं वहीं पास के एक मोटे परदे की ओट में हो गया.

तभी बाथरूम की लाइट ओन हुई और एक बहुत ही सुन्दर लड़की मेरे सामने प्रकट हुई.

क्या खूबसूरती थी उसकी… बहुत लम्बी, 6 फुट से 2-3 इंच ही कम होगी, बहुत ही ज्यादा गोरी, दूध से भी ज्यादा साफ़ रंग था उसका… उस पर रंगत गुलाबी, आँखें तो ज्यादा खूबसूरत नहीं थी, उनको काजल से बड़ा बनाया हुआ था पर होंठ बहुत चौड़े, मोटे और लाल थे. कपड़े भी बहुत सेक्सी पहने थे, अमूमन महिला संगीत में लड़कियाँ लहंगा-चोली जैसे वस्त्र ही पहनती हैं, जो उसने भी पहना था परन्तु उसकी हाइट ज्यादा होने के कारण वो इन वस्त्रो में बहुत ही सेक्सी लग रही थी.

उसका लहंगा कमर से बहुत नीचे बंधा था जो उसकी पतली कमर की पूरी ख़ूबसूरती को दिखा रहा था और चोली इतनी छोटी थी कि ऊपर से उसके भरी मम्मों की पूरी गोलाई बाहर थी और चोली के निचले भाग से भी गोलाई का कुछ अंश बाहर था, चोली के कप उसकी चूची की पूरी गोलाई को दिखा रहे थे.

फिर चोली के नीचे से लहंगे तक का भाग नंगा था जो सफेद लाइट में चमक रहा था.

एक तो गोरा रंग, ऊपर से बहुत पतली कमर, उस पर उसकी गहरी नाभि जिस पर उसने कोई चमकता हुआ नाग लगा रखा था और फिर नाभि के नीचे का भी काफी हिस्सा नंगा ही था, उसने अपना लहंगा शायद अपनी चूत से 2-3 इंच ही ऊपर बाँधा हुआ था.

कुल मिलाकर सेक्स के रस से सराबोर थी वो हसीना.मेरे देखते ही देखते वो ठीक मेरे ही सामने आई..अरे वहाँ तो कमोड था… ओह यह तो मूतने के लिए आई है.

और बिना कुछ सोचे उसने अपने लहंगे को कमर तक उठा लिया, अब उसकी दोनों लम्बी नंगी टाँगें मेरे सामने थी, बिल्कुल चिकनी और केले के तने जैसी !

वो अपने लहंगे को बहुत ही संभालकर अपनी कमर के ऊपर को समेट रही थी कि कहीं वो गन्दा ना हो जाए.

पर उसकी इस हरकत से मुझे बहुत ही सेक्सी दृश्य के दर्शन हो गए थे.

उसने लहंगा कमर से भी ऊपर उठ जाने से उसकी कमर में फंसी छोटी सी कच्छी बहुत ही खूबसूरत लग रही थी.

उसने एक हाथ से लहंगे को पकड़, दूसरे से अपनी कच्छी नीचे सरका दी और जल्दी से कमोड पर बैठ गई.

मुझे उसकी चिकनी चूत साफ नजर आ रही थी… बिल्कुल चिकनी, बाहर को निकले हुए होंठ !

मैंने देखा चूत का दाना और उसके होंठ हल्के से कांपे और उसमें से मूत निकलने लगा.

एक हसीना मेरे सामने बैठी मूत रही थी और मैं उसको देख रहा था, बड़ा ही मनोहारी दृश्य था.

तभी वहाँ सलोनी की तेज आवाज आई- अह्ह्ह्हाआआ… अह्ह्ह्ह आःह्हाआआआआ आह्ह्हा तेज अंकल और तेज अह्हा अह्हा

और ये आवाजें सुनकर वो हसीना चौंक गई, आश्चर्य के भाव लिए कमोड से उठी, बहुत ही सेक्सी अंदाज़ से अपनी फैंसी कच्छी जो उसके खड़े होने से पंजों तक पहुँच गई थी, उसको अपने पाँव से बाहर किया.

इस दौरान भी वो लहंगे को वैसे ही अपने दोनों हाथों से अपनी कमर तक ऊँचा किये पकड़े रही.

फिर वो उसी दरवाजे की ओर गई जहाँ से मैं अभी कुछ देर पहले सलोनी को चुदवाते हुए देख रहा था.

मैंने पहली बार उसकी आवाज सुनी- ओह गॉड… यह क्या… डैड तो सलोनी भाभी को चोद रहे हैं… घर में इतने मेहमान हैं… अगर किसी ने देख लिया तो?

…ओह…

मेरी समझ में एकदम से आ गया… अरे यह तो रिया है… मेहता अंकल की बड़ी बेटी.

उफ्फ… मुझे तो पहले ही समझ जाना चाहिए था इसको देखकर… आखिर लंदन से आई है, तभी ऐसी है.

उसने अपना लहंगा अभी तक नहीं छोड़ा था और उसके झुके खड़े होने से मुझे वो दिख गया जिसे देखकर मेरे लण्ड ने बगावत कर दी…

अब मैं भी नहीं रुक सकता था और…???

कहानी जारी रहेगी.
 
अपडेट. 99

अच्छी तरह से मूतने के बाद वो हसीना उठने ही वाली थी कि उसको सलोनी और मेहता अंकल की चुदाई की सिसकारियाँ और आवाजें सुनाई दी, वो संभालकर ही अपने लहंगे को पकड़े हुए कमोड से उठी, उसे तो यही लग रहा था कि वो बाथरूम में अकेली है, उसने अपने लहंगे को नहीं छोड़ा, ऊपर ही पकड़े रही या फिर उसको इस बात का ख्याल ही नहीं रहा क्योंकि वहाँ चुदाई कि आवाजें ही ऐसी आ रही थी..

जिज्ञासावश ही वो कमोड से उठकर आगे बढ़ी, उसकी कच्छी जब पैरों में फ़ंसी तो अपनी कच्छी को भी पैरों से निकाल अलग कर दिया.

फिर वो उसी दरवाजे की ओर गई जहाँ से मैं अभी कुछ देर पहले सलोनी को चुदवाते हुए देख रहा था.

मैंने पहली बार उसकी आवाज सुनी- ओह गॉड… यह क्या… डैड तो सलोनी भाभी को चोद रहे हैं… घर में इतने मेहमान हैं.. अगर किसी ने देख लिया तो… ओह?

मेरी समझ में एकदम से आ गया… अरे यह तो रिया है, मेहता अंकल की बड़ी बेटी.

उफ्फ्फ मुझे तो पहले ही समझ जाना चाहिए था इसको देखकर, आखिर लंदन से आई है, तभी ऐसी है.

उसने अपना लहंगा अभी तक नहीं छोड़ा था और उसके झुक कर खड़े होने से मुझे वो दिख गया जिसे देखकर मेरे लण्ड ने बगावत कर दी.

अब मैं भी नहीं रुक सकता था, रिया के झुकने से उसके मस्त नंगे चूतड़, कुछ ज्यादा ही उठे हुए थे रिया के चूतड़… क्या मस्त गद्देदार चूतड़ थे, पूरे गोल और आपस में सटे हुए, इतने खूबसूरत लग रहे थे कि मैं सब कुछ भूल गया.

मैंने अपना लण्ड तो पहले ही बाहर निकाला हुआ था, लण्ड उस दृश्य को देख और भी ज्यादा तन चुका था, मैंने पैंट का बटन भी ढीला कर दिया और रिया के ठीक पीछे पहुँच गया.

मैंने चुपके से ही उसके चूतड़ों से अपना लण्ड चिपका दिया !

रिया ने एक दम से पीछे मुड़कर देखा और मुझे देखते ही उसका चेहरा भक्क हो गया.

रिया- अरे भैया आप?

ओह… मैं भले ही उसको ना जानता हूँ पर वो मुझे अच्छी तरह से जानती है, तभी तो उसने सलोनी को भी पहचान लिया.

रिया ने तुरंत मेरा हाथ पकड़ा और मुझे अपने कमरे में ले जाने लगी, वो नहीं चाहती थी कि मैं सलोनी को उस कमरे में मेहता अंकल से चुदते हुए देखूं… उसको शायद डर था कि वहाँ सलोनी को मेहता अंकल के साथ देख मैं हल्ला न कर दूँ.

इसलिए वो मुझे वहाँ से हटाना चाहती थी, मैंने भी इस स्थिति का फ़ायदा उठाने की सोची- क्या हुआ? यहाँ क्या हो रहा है?

मैंने उसके नंगे चूतड़ों पर हाथ फेरते हुए पूछा.

उसने मेरा हाथ झटका- उफ्फ यह क्या कर रहे हो भैया? मैं तो बस पेशाब करने आई थी, और आप यहाँ क्या कर रहे हो???

मैं- मैं भी तो बस सलोनी को ढूंढ रहा था, फिर मुझे भी प्रेशर लगा और यहाँ आ गया.

रिया- वो तो ठीक है, फिर ये सब क्या कर रहे थे? वो लगातार मेरे लण्ड को देख रही थी.

मैं- अरे मेरी हसीना… जब सामने इतना सेक्सी चूतड़ दिखे तो मैंने तो खुद को संभाल लिया… मगर यह नहीं माना… हा हा हा…

मैंने अपने लण्ड को हिलाते हुए कहा- रुको मैं भी फ्रेश हो लेता हूँ.

अब वो डर गई… रिया नहीं चाहती थी कि मैं फिर से बाथरूम में जाऊँ, उसको डर था कि मैं सलोनी को देख लूंगा.

बस यही बात मेरे लिए फायदे का सौदा साबित हुई.

रिया- ओह तो इसको क्या ऐसे ही लेकर जाओगे? ऐसे तो इसकी धार कमोड की बजाए छत पर जायेगी.

उसने मेरे छत की ओर तने हुए लण्ड को देखकर कहा.

मैं भी उसकी बात से मासूम बन गया- हाँ यार रिया… बात तो तेरी सही है… वैसे इसे खड़ा भी तूने किया है तो इसको बैठा भी तू ही.

रिया- हा ह अ हा… कैसे बैठते हैं आपके ये जनाब?

मैं- यार शादीशुदा हो.. अब यह भी क्या मैं बताऊँगा? तुम्हारे पास तो कई जगह है जहाँ यह आराम से बैठ सकता है.

रिया- जी नहीं… वो सभी जगह बुक हैं… वहाँ इसको कहीं जगह नहीं मिलेगी.

मैं- ओह… क्या यार? चलो छोड़ो… कम से कम वो जगह दिखा तो सकती हो… ये जनाब तो देखकर ही काम चला लेंगे.

रिया- अरे नहीं बाबा… अभी आपने देखा तो था… सीधे कब्ज़ा करने ही आ गया था… मैं यह रिस्क नहीं ले सकती.

मैंने फिर से अपना वही हथियार अपनाया- ठीक है.. फिर हम छत पर ही मूत कर आ जाते हैं.

और मैं फिर से बाथरूम की ओर बढ़ा, मेरा आईडिया काम कर गया.

रिया- अरर्रऐ नहींईईईई वहाँ नहीं… उफ़्फ़्फ़ आप भी नहीं मानोगे ना… चलिए ठीक है… पर सिर्फ देखना… ओके… और इसको दूर ही रखना…

मैंने एक ठंडी सांस ली- हाँ हाँ… अब जल्दी करो…

वो लहंगा फिर से ऊपर करने लगी…

मैं- ओह ऐसे नहीं… इसको उतार कर सही से… हमारे साहबजादे को कोई रूकावट पसंद नहीं.

और मैंने खुद ही उसके लहंगे के हुक को निकाल दिया, रिया ने धीरे से अपना लहंगा नीचे को उतार दिया, उसने कोई विरोध नहीं किया, अब रिया केवल एक छोटी सी चोली पहने मेरे सामने खड़ी थी.
 
मैंने चोली के ऊपर से ही उसने मस्त मम्मो को दबाया, रिया ने तुरंत मेरे हाथ को झटक दिया, वो वहाँ रखी एक आराम कुर्सी पर बैठते हुए बोली- इस सबका समय नहीं है… जल्दी से देखो… मुझे और भी बहुत से काम हैं.

उसकी इस जल्दबाजी पर मुझे मजा आ गया…

रिया ने आराम कुर्सी पर पीछे को लेटते हुए अपने दोनों पैरों को फैलाकर दोनों हथ्थों पर रख लिया.

क्या पोज़ बनाया था उसने… लगता है ये कुर्सी चुदाई के लिए ही बनी है और दोनों बहनें यहीं अपने पिता से चुदवाती होंगी.

मैं रिया के पास गया और अपना मुँह ठीक उसकी चूत पर ले गया. मैं उसके इतना पास था कि मेरी साँसें रिया की चूत के ऊपर जा रही थी.

मैंने फिर से उसके चूत के बाहर निकले हुए होंठों को कांपते हुए महसूस किया.

रिया- बस देख ली ना? जल्दी करो, घर में बहुत मेहमान हैं, कोई भी इधर आ सकता है.

मुझे भी इसी बात का अंदेशा था पर मैं अब उसको छोड़ना नहीं चाहता था, मेरा लण्ड तो पहले से ही तैयार था, सलोनी की चुदाई देखने के बाद तो वो बैठने का नाम ही नहीं ले रहा था.

मैंने रिया के दोनों पैरों को वहीं हथ्थे पर ही अपने दोनों हाथों से जाम कर दिया, अपनी कमर को हल्का सा नीचे किया और मेरा लण्ड अपने निशाने पर पहुँच गया.

रिया की चूत अभी बिल्कुल सूखी थी, पर फिर भी मुझे पता था कि वो आसानी से मेरे लण्ड को ले लेगी, आखिर वो लंदन से आई थी और मेहता अंकल जैसे बड़े लण्ड लेने की आदी थी.

मैंने लण्ड को रिया की चूत के मुख पर रखा और मेरा सोचना सही साबित हुआ जब एक ही धक्के में मेरा लण्ड रिया की चूत में समा गया.

मेरा लण्ड पूरा का पूरा रिया की चूत के अंदर था, रिया का मुँह खुला का खुला रह गया- अह्ह्हाआआआ ये क्या कर रहे हो भैया?

वो जोर लगाकर निकलने ही वाली थी कि मैंने वहाँ एक और धमाका कर दिया- वही जो वहाँ तेरा बाप मेरी सलोनी के साथ कर रहा है…

बदला… !!!

रिया- ओह अह्ह्हाआआ अह्हा इसका मतलब अपने देख लिया था… अह्हा अह्हा अह्हा अह्हा अर्रे रुको तो… आप कर लेना… पर पहले कंडोम तो लगा लो…

मेरी बात सुनते ही वो शांत हो गई.

मैं- अब इस समय कंडोम कहाँ से लाऊँ?रिया- अरे यहीं रखा है… वो उस ड्राअर में…

मुझे उसकी बार पर विश्वास करना पड़ा और मेरे लिए भी सही था, आखिर वो विदेश में भी चुदवाती होगी.

मैंने वहाँ से कंडोम निकाला, रिया ने एक और अच्छा काम किया, उसने खुद मेरे हाथ से पैकेट लिया और खोलकर बड़े ही प्यार से मेरे लण्ड पर चढ़ा दिया.

मैंने इस बार और भी अच्छे ढंग से खड़े होकर लण्ड को फिर से उसकी चूत में सरका दिया और अपना काम शुरू कर दिया.

मैं लगातार धक्के पर धक्के लगा रहा था और अब वो आराम से चुदवाने लगी.

अह्ह्ह आह्ह… और मेरी मेहनत सफल हुई, अचानक धक्कों से फच फच की आवाजें आने लगी, रिया की चूत ने पानी छोड़ना शुरू कर दिया था.

मुझे जोश आ गया और मैं अब और भी तेजी से धक्के लगाने लगा. 15 मिनट तक वहाँ बहुत अच्छा समां बंध गया था, मुझे चोदने में बहुत मजा आ रहा था.

और फिर?

कहानी जारी रहेगी.
 
अपडेट. 100

रिया के कहने पर ही मुझे सुरक्षा का ध्यान आया, मैंने उसके बताने पर एक विदेशी कंडोम का उपयोग किया, उसको पहनने पर भी उसके होने या ना होने का अहसास नहीं हो रहा था और बहुत ही अच्छी खुशबू भी आ रही थी उससे…

रिया ने खुद ही अपने हाथों से उसको मेरे लण्ड पर चढ़ाया और उसको 3-4 बार चूसकर लण्ड को फिर से टाइट किया.मैंने इस बार और भी अच्छे ढंग से खड़े होकर लण्ड को फिर से उसकी चूत में सरका दिया और अपना काम शुरू कर दिया.

मैं लगातार धक्के पर धक्के लगा रहा था और अब वो आराम से चुदवाने लगी थी.नई बात यह थी कि वो मेरे द्वारा ब्लू फिल्मों में देखी गई विदेशी लड़कियों की तरह ही मस्ता रही थी और बिल्कुल ऐसा व्यवहार कर रही थी जैसे पहली बार चुदवा रही हो जबकि उसकी चूत में मेरा लण्ड बहुत ही आराम से आ-जा रहा था.

उसकी सिसकारियों में दर्द के साथ साथ चुदवाने की तीव्र इच्छा भी थी.

रिया- आह्ह अह्हा अहा अह्ह्ह फ़क मी हार्ड… (तेजी से चोदो मुझे)… अह्ह्ह नहीईईईई ईई ओह अह्हा अह्हा फ़क मी हार्ड… ओह्ह अह्हा आह्ह और कस के… अह्हा अह्हा अह्हा अह्हाआआआ अह्हा अह्ह्ह… उफ्फ्फ आह्ह…इस तरह उसको चोदने में बहुत ही मजा आ रहा था…

अह्ह्ह आह्ह और मेरी मेहनत सफल हुई, अचानक धक्कों से फच-फच की आवाजें आने लगी, रिया की चूत ने पानी छोड़ना शुरू कर दिया था.मुझे जोश आ गया और मैं अब और भी तेजी से धक्के लगाने लगा, 5 मिनट में वहाँ बहुत अच्छा समां बन्ध गया था, मुझे चोदने में बहुत मजा आ रहा था.

और फिर मेरे लण्ड ने पानी छोड़ दिया, आखिर बहुत समय से बेचारा रोके पड़ा था.उधर रिया ने भी अपनी कमर उचकाई और बहुत तेज सिसकारियाँ लेने लगी- अह्ह्हाआआ अह्ह्हाआआ अह्ह्ह ओह हो गया… बस्स्स स्स्सस…थैंक्स गॉड वो भी झड़ गई थी, उसके झड़ने से मुझे बहुत सुकून मिला वरना मुझे बहुत ग्लानि होती.

मैंने अपना लण्ड उसकी चूत से बाहर निकाल लिया, फिर कंडोम निकालकर वहीं डाला और वहीं रखे एक तौलिये से लण्ड को पौंछ लिया.रिया कुछ देर वैसे ही लेटी हुई मेरे लण्ड को देख रही थी- वैसे भैया, आप चोदते तो अच्छा हो… पर आपके हथियार को देखते हुए लगता है कि सलोनी भाभी को भी थोड़ा बहुत मजा तगड़े हथियार से लेने का पूरा हक़ है, आपका हथियार तो नार्मल ही है.

मैं- हाँ जानेमन, तेरे बाप के हथियार के सामने तो बहुत छोटा है(मेरे लंड की लंबाई सात इंच मोटाई 2.५ इंच है) तेरी चूत देखकर तो मुझे भी ऐसा ही लगता है… लगता है तूने तो खूब तगड़े तगड़े डलवाये हैं इसमें?

रिया- इसकी छोड़ो.. इसने तो पूरी दुनिया देखी है…

मैं- तेरा पति कुछ नहीं कहता?

रिया- वो क्या कहेंगे?? उनको तो ग्रुप सेक्स का चस्का है… वो तो खुद अपने ही हाथों से अपने दोस्तों का लण्ड पकड़कर मेरी चूत में डालते हैं, वो तो बहुत एडवांस और मॉडर्न हैं.

मैं- अच्छा जी… फिर तो ठीक है… और अगर मुझे ऐतराज होता तो मैं तभी हल्ला कर देता जब सलोनी को तुम्हारे पापा से चुदवाते हुए देखा !रिया अब उठकर बैठ गई थी, उसने भी उसी तौलिये से अपनी चूत और आस पास का हिस्सा साफ़ किया और लहंगा पहनने लगी.

रिया- ओह… अच्छा… तो वैसे ही डरा रहे थे… मतलब फ्री में मुझे चोद दिया… हा हा हा…

मैं- अरे अगर मुझे पता होता कि तू भी नाटक कर रही है… तो मैं ऐसा क्यों करता? आराम से वहीं चोद देता सलोनी को देखते हुए…हा हा हा…रिया ने भी हंसी में मेरा साथ दिया… उसने ड्रेसिंग टेबल के सामने खुद को व्यवस्थित किया और मुझसे बोली- चलो भैया… बाहर कार्यक्रम में… आपको मजेदार डांस दिखवाते हैं.

मुझे तो वैसे भी देखना था कि सलोनी और नलिनी भाभी कैसा प्रोग्राम करती हैं.मैंने रिया को अपनी बाहिओं में भर कर उसके लबों को चूमा और फ़िर मैं तुरंत तैयार हो गया, मैंने ध्यान दिया कि रिया ने अपनी कच्छी नहीं पहनी- रिया, तुम्हारी कच्छी? पहनोगी नहीं?

रिया मुस्कुराते हुए- वाह जी.. बहुत ध्यान रखते हो.. छोड़ो उसको… आज ऐसे ही आपको अपना डांस दिखाते हैं.

और वो तेजी से घूमी, उसका लहंगा कमर तक उठ गया, ऐसा तो मैंने महंगे होटल में बार गर्ल को भी नहीं देखा था…मजा आ गया… अब तो और भी मजा आने वाला था.

लहंगा बहुत ही महंगा और और घूम वाला था, जरा सा घूमने से ही पूरा उठ जा रहा था, मुझे उसकी गोल गाण्ड पूरी नजर आ गई थी.अब यह देखना था कि केवल इन कुछ पर ही मस्ती चढ़ी थी या कुछ और भी कलियाँ थी वहाँ जो इसका मजा ले रही थी.

मैंने एक बार और रिया को अपने सीने से लगाया, उसके कसे हुए मम्मों का अहसास होते ही दिल में उनको देखने की इच्छा हुई.मैंने रिया के सीधे मम्मे को अपनी हथेली में भर लिया- अरे जानेमन.. एक बार इनको तो दिखा दो वरना सपने में आते रहेंगे.

रिया- ओह… तभी क्यों नहीं कहा? अब देर हो जाएगी… फिर देख लेना…
 
मैं- फिर कब? पता नहीं मौका मिले या नहीं?

रिया- क्यों अब नहीं आओगे? अरे सात दिन बाद शादी है और कई फंक्शन यहाँ भी हैं, आपको सभी में आना है, ओके… और हाँ शादी में जरूर साथ चलना, वहाँ बहुत मजा आएगा.

मैं- क्यों? कहाँ जाना है? क्या बरात यहाँ नहीं आएगी?

रिया- नहीं.. हमको वहीं जाना है… होटल में सब अरेंजमेंट है… तो आपको तो आना ही होगा.मैं अब इस मस्ती के बाद मना तो कर ही नहीं सकता था.

बात करते हुए ही हम दोनों हॉल में आ गए, बहुत भीड़ थी वहाँ, हर उम्र का माल था, एक से एक चमकीले कपड़ों में…मैंने देखा, सभी लेडीज ही थी… मुझे कुछ अजीब सा लगा.तभी रिया मुझे हाल के सामने एक कमरे में ले गई, वहाँ मेहता अंकल अपने चार दोस्तों के साथ बैठे थे, अरविन्द अंकल भी थे.ओह इसका मतलब अरविन्द अंकल यहाँ थे और नलिनी भाभी अंदर चुदाई करवा रही थी.

मैं भी एक कुर्सी पर बैठ गया जहाँ से पूरा हाल नजर आ रहा था.वो सब भी ऐसे ही बैठे थे, कुर्सी सभी ऐसे ही पड़ी थी कि सब सामने कार्यक्रम का मजा ले सकें. सामने एक मेज पर खाने पीने का सामान और कुछ ड्रिंक भी रखी थी.

खास बात यह थी कि केवल मैं ही युवा था, बाकी सभी बुड्ढे ही थे लगभग मेहता अंकल की उम्र के ही !

मेहता अंकल- और बेटा कैसा चल रहा है तुम्हारा काम?

मैं- बहुत अच्छा अंकल… बधाई हो आपको… अब आप भी अपनी जिम्मेदारी से मुक्त हो गए.

बस ऐसे ही कुछ फॉर्मल बातें हो रही थी, तभी बाहर एक लड़की डांस के लिए खड़ी हुई.18-19 साल की, गोरी थी पर थोड़ी पतली थी… उसने फ्रॉक जैसी कुछ फैंसी गुलाबी ड्रेस पहन रखी थी… फ्रॉक का घेरा… किसी गुड़िया की तरह कई फरों वाला था और उसके घुटनों से थोड़ा ऊपर तक ही था जिसमें से उसको गोरी गोरी टाँगें जांघों तक ही नुमाया हो रही थी.वो अपना गाना सेट करा रही थी, तभी मुझे पता चला कि… ओह ये तो साले सभी बुड्ढे बहत ही कमीने हैं.

उनमें से एक बोला- रुको यार देखो, अब ध्यान से देखना… उसने काली नेट वाली कच्छी पहनी है.दूसरा- हाँ हाँ, हम भी यही देख रहे हैं, और ना हुई तो 5000 तैयार रख.ओह साला… ये तो शर्त लगाकर मस्ती कर रहे हैं, उनको मेरे से भी कोई फर्क नहीं पड़ा, शायद मुझे ज्यादा नहीं जानते थे.क्या हो गया है इन बुड्ढों को… कमीने अपनी पोती की उम्र की लड़की की कच्छी पर शर्त लगा रहे थे.

और तभी मैंने सोचा मैं भी क्या सोचने लगा, ये तो साले कमीने होंगे ही, आखिर अरविन्द और मेहता अंकल जैसों के दोस्त हैं जिन्होंने अपनी बेटी को भी नहीं छोड़ा.तभी उस लड़की ने डांस शुरू कर दिया… रॉक इन रोल बेबी रॉक इन रोल…गाना भी ऐसा था… और उस पर घूमती हुई वो बिल्कुल बेबी डॉल जैसी ही लग रही थी.

और यह क्या? वो सामने वाला बुड्ढा बिल्कुल सही था… लड़की ने काली नेट वाली कच्छी ही पहनी हुई थी… कच्छी भी इतनी उसके चूतड़ों से चिपकी हुई थी कि उसके चूतड़ और चूत के सभी उभार साफ़ पता चल रहे थे.

वैसे तो वहाँ कोई मर्द नहीं था और हम लोग उसको नहीं दिख रहे होंगे पर फिर भी कुछ वेटर तो थे ही, वो सब ड्रेस में सर्विस दे रहे थे.मगर उनको किसी की चिंता नहीं थी, तभी दूसरे ने 5000 का चेक उसको तुरंत ही दे दिया- ले यार तू जीत गया.. पर यह बता कि तूने कब देख ली इसकी कच्छी? क्योंकि कलर तक तो सही था पर नेट भी पता होना संदेह में डालता है?

वो जोर से हंसा, बोला- हाँ, अभी जब आया था.. तभी देख लिया था, यह वहाँ कोने में उकड़ू बैठी कुछ कर रही थी, तभी साफ़ साफ़ दिख गई थी.दूसरा- ओह तभी साले इतना उछल रहा था… चिड़िया के दर्शन पहले ही कर लिए… डबल फ़ायदा… फ़ुद्दी भी देख ली और पैसे भी… सही है.. कोई बात नहीं !!

मैं उनकी बातें सुनकर सोच रहा था कि यार यहाँ तो कमाई भी हो सकती है, बस अरविन्द और मेहता अंकल चुप रहें.मैं यहाँ बहुत ही मस्ती और फिर कुछ शर्त लगाने की भी योजना बनाने पर विचार करने लगा था, देखता हूँ कितनी सफलता मिलती है.फिलहाल बहुत ही मजा आने वाला था.

कहानी जारी रहेगी.
 
अपडेट 101

और तभी मैंने सोचा मैं भी क्या सोचने लगा, ये तो साले कमीने होंगे ही, आखिर अरविन्द और मेहता अंकल जैसों के दोस्त हैं जिन्होंने अपनी बेटी को भी नहीं छोड़ा.

तभी उस लड़की ने डांस शुरू कर दिया… रॉक इन रोल बेबी रॉक इन रोल…गाना भी ऐसा था… और उस पर घूमती हुई वो बिल्कुल बेबी डॉल जैसी ही लग रही थी.और यह क्या? वो सामने वाला बुड्ढा बिल्कुल सही था… लड़की ने काली नेट वाली कच्छी ही पहनी हुई थी… कच्छी भी इतनी उसके चूतड़ों से चिपकी हुई थी कि उसके चूतड़ और चूत के सभी उभार साफ़ पता चल रहे थे.

वैसे तो वहाँ कोई मर्द नहीं था और हम लोग उसको नहीं दिख रहे होंगे पर फिर भी कुछ वेटर तो थे ही, वो सब ड्रेस में सर्विस दे रहे थे.मगर उनको किसी की चिंता नहीं थी, तभी दूसरे ने शर्त हारते ही 5000 का चेक उसको तुरंत ही दे दिया- ले यार तू जीत गया.. पर यह बता कि तूने कब देख ली इसकी कच्छी? क्योंकि कलर तक तो सही था पर नेट भी पता होना संदेह में डालता है?

वो जोर से हंसा, बोला- हाँ, अभी जब आया था.. तभी देख लिया था, यह वहाँ कोने में उकड़ू बैठी कुछ कर रही थी, तभी साफ़ साफ़ दिख गई थी.दूसरा- ओह तभी साले इतना उछल रहा था… चिड़िया के दर्शन पहले ही कर लिए… डबल फ़ायदा… फ़ुद्दी भी देख ली और पैसे भी… सही है.. कोई बात नहीं !!

मैं उनकी बातें सुनकर सोच रहा था कि यार यहाँ तो कमाई भी हो सकती है, बस अरविन्द और मेहता अंकल चुप रहें.मैं यहाँ बहुत ही मस्ती और फिर कुछ शर्त लगाने की भी योजना बनाने पर विचार करने लगा था, देखता हूँ कितनी सफलता मिलती है.लेकिन सभी बहुत अमीर और डीसेंट भी थे, उनकी बातें कितनी सेक्सी थी, फिलहाल बहुत ही मजा आने वाला था.

मैंने वहाँ चारों ओर देखा, बहुत ही हाई क्लास पार्टी थी… क्योंकि मेहता अंकल भी शहर के जाने माने अमीर व्यक्तियों में आते थे्.वहाँ सभी अमीर घरों की तितलियाँ बहुत ही सेक्सी अंदाज में मंडरा रही थी.तभी उन बुड्ढों में से एक बोला- यार वो देखो उधर… वो गुलाबी घाघरे में… यह तो जान है यार मेहता… क्या मस्त चूतड़ हैं इसके यार… मेरा तो बिना गोली खाए ही तन गया.

मेहता अंकल- रुक यार मैं अभी आया…और वो उठकर चले गए, अरविन्द अंकल भी कुछ देर पहले चले गए थे.

अब वहाँ वो तीनो बूढ़े और मैं ही था और जैसे ही मैंने उनकी बताई हुई जगह देखा तो एकदम से समझ गया कि मेहता अंकल क्यों उठकर गए.ये तो मेरी सलोनी को देख रहे थे. और हो भी क्यों नहीं, सलोनी इतनी सारी लेडीज़ में भी अलग ही नजर आ रही थी, उसने गुलाबी लहंगा और चोली पहनी थी, हालाँकि उसने चुनरी बाँध रखी थी पर उसकी एक चूची, नंगा पेट उसकी नाभि तक और एक कन्धा पूरा नंगा ही दिख रहा था, चोली भी काफी कसी हुई और छोटी थी जो केवल डोरी से ही उसके कंधों और शायद कमर से बंधी थी, उसके गोरे सुडौल कंधे और बाहें सब नंगे नजर आ रहे थे.. उसका लहंगा भी नाभि से काफी नीचे बंधा था और उसके घुटनों से जरा सा ही नीचे होगा… कुल मिलाकर उसका सुन्दर बदन ढका बहुत ही कम था और दिख ज्यादा रहा था.

मुझे खुद पर गर्व महसूस हुआ कि मुझे इतनी सुन्दर बीवी मिली है जो यहाँ सबसे ज्यादा सेक्सी लग रही है.वो एक कुर्सी पर बैठी थी, एक पैर दूसरे के ऊपर रखा था जिससे उसकी एक जांघ भी थोड़ी दिख रही थी.तभी सलोनी ने अपने पैरों को बदला और अपना लहंगा दोनों हाथों से आगे से उठाकर ठीक किया जैसे साधारणतया लड़कियाँ करती हैं.

हम कुछ दूर थे तो साफ साफ़ तो कुछ नहीं दिखा, अगर पास होते तो दावे के साथ कह सकता हूँ कि उसकी चूत तक साफ़ साफ दिख जाती.मगर सोच कर ही उन बुड्ढों को मजा आ गया था, वे बहुत ही गन्दी बातें करने लगे थे जो शायद वो हमेशा आपस में करते ही होंगे.जो शर्त में हारा था, उसने तेज आह भरी- आःह्हाआआ हाय यार… काश मैं वहाँ होता… क्या चिकनी जांघें हैं.

सलोनी बराबर में बैठी नलिनी भाभी से झुककर कुछ बात कर रही थी तो उनके चूतड़ एक ओर से बाहर को निकले हुए थे.दूसरा बूढ़ा- अरे यार… इस जैसी मलाई कोफ्ता को तो तीनो छेदों में एक साथ लण्ड डालकर चोदना चाहिए.. तभी इसको मजा आएगा.तीसरा जीभ निकाले बस घूरे जा रहा था- यार… यह कब नाचेगी?पहला बूढ़ा- तू चाहे कहीं भी डालना पर मैं तो इसके मोटे मोटे चूतड़ों के बीच ही डालूँगा… जब से देखें हैं साले मस्त मस्त, तभी से सपने में आते हैं.

बाकी दोनों बुड्ढों ने एक साथ ही पूछा- क्या कह रहा है बे… तूने कब देखे?पहला बूढ़ा- अरे बताया नहीं था उस दिन… वो यही थी.. यहीं पर ही तो देखे थे.. यार क्या मस्त लग रही थी उस दिन ! मैंने तो तभी सोच लिया था कि इसकी तो जरूर मारूँगा यार…तीसरा बूढ़ा- अरे मुझे नहीं पता यार, बता न, कैसे देखे थे?
 
पहला बूढ़ा- हाय.. क्या याद दिला रहा है तू यार… अरे ये सामने से कुछ उठा रही थी या पता नहीं क्या कर रही थी, मैं इसके पीछे ही था, इसने छोटी वाली मिनी स्कर्ट पहन रखी थी, तभी पूरे गोल गोल चूतड़ नजर आ गए थे.तीसरा बूढ़ा- अरे तो कच्छी में ही देखे होंगे ना? मैं समझा कि नंगे देख लिए…

पहला बूढ़ा- अरे नहीं यार, मुझे तो पूरे नंगे से ही दिखे… अगर कच्छी होगी भी तो वो पतली वाली होगी जिसकी डोरी चूतड़ों की दरार में घुस जाती है… और इसके तो इतने गद्देदार हैं कि डोरी भी नहीं दिखी, सच बहुत मजा आया था उस दिन…उनकी बातें सुन कर मुझे ना जाने क्यों बहुत मजा आ रहा था… मेरे ही सामने वो सलोनी के बारे में, जो मेरी प्यारी सेक्सी बीवी है… ऐसी गन्दी गन्दी बातें कर रहे थे.

उसकी बातें सुनकर मुझे साफ़ लग गया कि इसने सलोनी ने नंगे चूतड़ ही देखे होंगे और सलोनी जानबूझकर ही इसके सामने झुकी होगी… ऐसा तो वो ना जाने कितनी बार कर चुकी होगी, उसको तो अपना जिस्म दिखाने में बहुत मजा आता है.

इस साले को पता चलेगा तो साला अपना सर पीट लेगा कि ‘अगर जरा सा झुककर देखता तो सलोनी की छोटी सी प्यारी सी चूत भी देख लेता…’ जो मैंने कई बार ऐसे ही मौकों पर देखी है.पीछे से दोनों चूतड़ों के गैप से उसकी गोरी चिकनी हल्की सी झांकती हुई चूत बहुत ही प्यारी लगती है.दूसरा बूढ़ा- अरे सालों, तुम तो ऐसे बात कर रहे हो जैसे इसकी मिल ही जाएगी?

अब तीनों मेरे सामने इतना खुलकर बात कर रहे थे जैसे उनको कोई चिंता ही नहीं हो क्योंकि नशा उन पर पूरी तरह हावी हो चुका था.पहला बूढ़ा- अरे यार.. मेहता ने कहा है ‘बहुत चालू है…’ और शादी में साथ ही चलेगी, वहाँ तो बहुत समय होगा, वहीं पटाकर चोद देंगे यार…

मैंने सोचा कि इन सबका परिचय तो ले ही लिया जाए यार कि साले हैं कौन जो इतना खुलकर सलोनी के बारे में बात कर रहे हैं.मैं- वाह अंकल, आप सच कह रहे हो… वैसे मैं साहिल… और… इस कंपनी में काम करता हूँ.अब उन्होंने मेरी ओर कुछ ध्यान से देखा और सभी ने अपना परिचय दिया.

शर्त हारने वाला रिटायर्ड बैंक मैनेजर था… नाम अनवर… ओह वो मुस्लिम था तभी सलोनी की गांड मारने की बात कर रहा था.दूसरा वाला जोजफ.. वो ईसाई रिटायर्ड जज था.और तीसरा वो कुछ ज्यादा ही बूढ़ा दिख रहा था, गोल मटोल सा, पेट बाहर निकला हुआ, उसका नाम राम कपूर था, वो कोई बड़ा बिज़नेसमैन था.उन तीनों से जरा सी देर में ही मेरी दोस्ती हो गई.

मेहता अंकल और अरविन्द अंकल अभी तक नहीं आये थे, वो शायद डर गए थे या फिर हो सकता है कि साले किसी के साथ मस्ती कर रहे हों, पर मुझे चिंता नहीं थी.सलोनी, नलिनी भाभी और अनु तीनों ही मेरे सामने हाल में ही थी.अब अगर किसी और की बजा रहे हो तो मुझे उससे क्या !!

विराज अंकल काफी बूढ़े लग रहे थे, उन्होंने मुझसे कहा- देख बेटा, बुरा मत मानना… बस ऐसे ही थोड़ी बहुत मस्ती कर लेते हैं… और फिर थोड़ा नशा भी हो गया है.मैं- अरे क्या बात कर रहे हो आप अंकल… ये सब तो चलता है… और जीवन में सेक्स ना हो तो जीने का फ़ायदा ही क्या !

विराज अंकल- बिल्कुल ठीक कहा बेटा… ये सब हमारे लिए किसी दवाई से काम नहीं… देखो हम सब ही अभी तक फिट हैं… अगर ये सब नहीं होता तो कहीं अस्पताल में या बिस्तर पर पड़े होते या मर खप गए होते.जोजफ अंकल- और नहीं तो क्या… इन हसीनाओं के मस्ताने अंग देख कर सेक्सी बात करने के लिए तो हम इतनी सुबह टहलने के लिए उठ भी जाते हैं और कितना चल भी लेते हैं, वरना कौन साला उठता… हा हा हा…और तीनों जोर जोर से हंसने लगे.

अभी बाहर हॉल में कुछ साधारण महिलाएँ ही नृत्य कर रही थी पर वो उन पर भी सेक्सी कमेंट्स मार रहे थे.‘देख यार, क्या मोटे चूतड़ हैं… कैसे हिला रही है..’और जब किसी का पल्लू नीचे गिर जाता तब तो उनके मजे आ जाते और उनकी गहरी चूचियों की घाटी देख आहें भरने लगते.और सलोनी को भी देखे जा रहे थे और कमेंट्स भी कर रहे थे.

जोजफ अंकल- यार अनवर इस पीस से मिलवा तो दे यार, जरा पास से भी देख लेंगे, देख कितनी छोटी चोली पहन रखी है… वो भी बिना किसी बंधन के… छू नहीं सकते तो जरा इन कबूतरों को देख ही लें ! नाच भी तो नहीं रही, वरना चुनरी हटाकर नाचती तो मजा आ जाता… इसका तो चोली का गला भी इतना बड़ा है कि जरा सा भी झुकेगी तो पूरे नंगे ही दिखेंगे..!!!

विराज अंकल- अरे वो तू सही कह रहा है जोजफ… मैं तो इसकी टाँगें देख रहा हूँ और लहंगा भी ऐसा है कि जरा भी घूमेगी तो पूरा उठेगा… हाय पता नहीं अंदर कितनी लम्बी निकर या फिर पजामी होगी?

जय अंकल- हाय यार, क्या बात कही.. यह भी तो हो सकता है कि केवल कच्छी ही पहनी हो… और भी छोटी वाली उस दिन की तरह…और मैं मन ही मन हंस रहा था कि अगर इनको पता चल गया कि सलोनी ने लहंगे के अंदर कुछ नहीं पहना तो इनकी क्या हालत होगी.

तभी वो लोग सलोनी पर भी शर्त लगाने लगे- …चल हो जाए 5000 की… इसने कितनी लम्बी निकर पहनी होगी?विराज अंकल- मेरे अनुसार तो एक छोटी पजामी होगी… जो एक-सवा फ़ीट की होती है.जोजफ अंकल- हम्म्म्म शायद निकर ही होगी… जो लड़कियों की छोटी-छोटी स्किन टाइट रंग बिरंगे जो आते हैं.जय अंकल- यार मुझे तो लगता है इसने एक छोटी सी कच्छी ही पहनी होगी… हा हा…

मैंने तुरंत सोचा कि मैं भी इनसे फ़ायदा उठा ही लेता हूँ.मैं- क्यों अंकल? क्या मैं इस शर्त में भाग नहीं ले सकता?विराज अंकल- अरे क्यों नहीं बेटा… हम भी तो देखें तुम्हारा अनुमान… बताओ तुमने क्या सोचा?

मैं- हा हा… अब सब कुछ तो अपने बता ही दिया… चलिए अगर इसने कुछ नहीं पहना होगा तो मैं जीत गया.सभी जोर से हंसने लगे.जय अंकल- अरे यार अगर कुछ नहीं पहना होगा तो वैसे ही पैसे वसूल हो जायेंगे… हा हा…

कहानी जारी रहेगी.
 
अपडेट. 102

तभी वो लोग सलोनी पर भी शर्त लगाने लगे- …चल हो जाए 5000 की… इसने कितनी लम्बी निकर पहनी होगी?विराज अंकल- मेरे अनुसार तो एक छोटी पजामी होगी… जो एक-सवा फ़ीट की होती है.जोजफ अंकल- हम्म्म्म शायद निकर ही होगी… जो लड़कियों की छोटी-छोटी स्किन टाइट रंग बिरंगे जो आते हैं.जय अंकल- यार मुझे तो लगता है इसने एक छोटी सी कच्छी ही पहनी होगी… हा हा…

मैंने तुरंत सोचा कि मैं भी इनसे फ़ायदा उठा ही लेता हूँ.मैं- क्यों अंकल? क्या मैं इस शर्त में भाग नहीं ले सकता?विराज अंकल- अरे क्यों नहीं बेटा… हम भी तो देखें तुम्हारा अनुमान… बताओ तुमने क्या सोचा?मैं- हा हा… अब सब कुछ तो अपने बता ही दिया… चलिए अगर इसने कुछ नहीं पहना होगा तो मैं जीत गया.सभी जोर से हंसने लगे.

जय अंकल- अरे यार अगर कुछ नहीं पहना होगा तो वैसे ही पैसे वसूल हो जायेंगे… हा हा…वो सभी सलोनी के बारे में सोचकर पागलों की तरह ही हंस रहे थे, मैंने सोचा कि यार कुछ देर उठकर जाता हूँ.तभी मेहता अंकल भी आएँगे और हो सकता है ये सलोनी से कुछ मजा करें तो मैं उनसे ‘एक्सक्यूज़ मी’ कहके बाहर आ गया.और मेरा सोचना बिल्कुल सही था, बाहर एक तरफ मेहता अंकल खड़े हुए सिगरेट पी रहे थे.मुझे देखते ही वो कुछ सकपका से गए.

मैं- अंकल आपके दोस्त.. आपको याद कर रहे हैं, मैं जरा कुछ काम निबटाकर आता हूँ.मेहता अंकल- ओह अरे.. बैठो ना बेटा… वो सॉरी… ये सारे मेरे दोस्त ऐसे ही हैं.पता नहीं वो क्यों झेंप सा रहे थे, शायद अंदर हुई बात के कारण?मैंने उनका डर दूर करने के लिए ही बोला- अरे क्या अंकल आप भी… ये सब तो चलता ही है और मुझे बहुत मजा आया… यकीन मानिए, हम लोग तो इससे भी ज्यादा मजाक करते हैं. बस प्लीज अपने दोस्तों को यह मत बताना कि मैं सलोनी का हस्बैंड हूँ, बाकी सब मजाक तो चलता है.. हा हा…

मैंने माहौल को बहुत ही हल्का कर दिया… अंकल का चेहरा एकदम से चमक गया, वो बहुत ही खुश हो गए.और मैं उनको दिखाने के लिए बाहर को चला गया, अंकल भी तुरंत सिगरेट फेंककर अंदर चले गए.मैंने बस एक मिनट ही इंतजार किया और फिर से अंदर आ गया.दरवाजे की तरफ़ उनकी पीठ थी तो उनको पता ही नहीं चला, मैं चुपचाप अंदर जाकर एक परदे के पीछे छिप गया, मैंने पहले ही यहाँ छुपने का सोच लिया था.

अब वो लोग आपस में बात कर रहे थे

जय अंकल- अरे यार कहाँ चला गया था तू? सबके सेक्सी डांस मिस कर दिए तूने…मेहता अंकल- अरे तुम सब पागल हो क्या? अरे वो साहिल बैठा था, उसके सामने ही शुरू हो गए, वो यहीं रहता है यार.. और क्या सोचेगा मेरे बारे में… और यहाँ सभी को जानता है वो… अगर उसको बुरा लग जाता तो?

विराज अंकल- ओह… अरे सॉरी यार.. हमने तो सोचा वो भी तेरे साथ ही होगा, तभी तूने उसको यहाँ बैठाया है.जोजफ अंकल- पर यार वो तो खुद मजे ले रहा था, उसको खुद इस सबमें मजा आ रहा था… सच !जय अंकल- और तो और… वो तो शर्त तक लगाकर गया है.

मेहता अंकल- क्या शर्त… कैसी शर्त?

जय अंकल- अरे वो जो सामने बैठी है ना… उस पर… और अपनी वही पुरानी शर्त कि ‘इसने लहंगे के नीचे क्या पहना है?मेहता अंकल- ओह.. क्या कह रहे हो तुम? क्या इसी पर? पक्का? अरे यह तो उसकी रिश्तेदार है.थैंक्स गॉड कि अंकल ने सच नहीं बताया.

विराज अंकल- अरे तू क्यों परेशान हो रहा है? हमको तो ऐसा कुछ नहीं लगा और वो खुद ही मजे ले रहा था… अच्छा अब तुम लोग छोड़ो इन बातों को, सुन यार मेहता… जरा इस पटाका से मिलवा तो दे यार !

मेहता अंकल- अरे, तो इसमें क्या है? अभी मिलवा देते हैं.और उन्होंने एक वेटर को बुलाकर कुछ कहा, फिर वो चला गया.मैं साँस रोके ये सब देख रहा था.

और कुछ देर बाद ही सलोनी वहाँ आ गई, वो सभी को हाथ मिलाकर हैल्लो बोल रही थी.मेहता अंकल ने तीनों से ही उसको मिलवाया, सलोनी उनकी बगल में ही खड़ी थी, मैंने देखा कि मेहता अंकल ने अपना हाथ उसकी कमर पर रखा जो फिसल कर उसके चूतड़ों तक पहुँच गया..!

मैं उनके ठीक पीछे परदे की ओट में खड़ा था, मुझे उन सभी की हर हरकत बहुत ही अच्छी तरह से दिखाई दे रही थी.सलोनी को सपने में भी उम्मीद नहीं थी कि मैं यहाँ भी हो सकता हूँ, वो बहुत ही खुलकर उनसे मिल रही थी.

मेहता अंकल- बेटा, ये सभी मेरे बहुत ही गहरे मित्र हैं… तुम्हारी बहुत ही तारीफ कर रहे थे और मिलना चाह रहे थे, तुम इनको बहुत ही अच्छी लगी.

मेहता अंकल उससे बात करने के साथ साथ अपना हाथ सलोनी के चूतड़ पर ही रखे हुए थे जो वहाँ गोल मटोल कूल्हों पर चारों ओर घूम रहा था.मैंने देखा कि विराज अंकल थोड़ा पीछे को बैठे हुए थे और उनकी नजर मेहता अंकल के हाथ पर ही थी जिसको देखकर वो मुस्कराते हुए मजा ले रहे थे.

सलोनी ने एक बार भी उनके हाथ का कोई विरोध नहीं किया.
 
अब मैंने देखा कि मेहता अंकल का हाथ कुछ ज्यादा ही गुस्ताखी करने लगा था, वो सहलाने के साथ साथ सलोनी के लहंगे को समेटते भी जा रहे थे जिससे सलोनी की चिकनी जांघें पीछे से नंगी होती जा रही थी.

विराज अंकल की नजर बदस्तूर वहीं थी, और तभी वो सलोनी के सामने ही बोल पड़े- ओह यार… मैं तो शर्त हार गया.मुझे याद आ गया कि उन्होंने कुछ पजामी टाइप पहने होने को कहा था जो उनको नहीं दिखाई दी, तभी शायद वो मायूस हो गए थे.पर नंगी और चिकनी जांघें देख कर उनका चेहरा चमक रहा था.

तभी जय अंकल ने सलोनी को कुछ ऑफर किया, उन्होंने वहाँ रखी एक प्लेट उठाई- लो बेटा… ये लो… और कब है तुम्हारा डांस?वो सबसे कोने में बैठे थे, सलोनी जैसे ही प्लेट में लेने के लिए झुकी तो कई बातें एक साथ हो गई, चोली में से सलोनी के मम्मे देखने के लिएउन्होंने प्लेट को एकदम से नीचे मेज पर रख दिया, सलोनी अपने ही गति में आगे को मेज पर गिर सी गई, मेहता अंकल का हाथ जो काफी ऊपर

तक उसके लहंगे को उठा चुका था और उस समय भी उसके चूतड़ पर ही था, सीधे ही सलोनी के नंगे चूतड़ों पर पहुँच गया और मेज से भी उसका बैलेंस गड़बड़ा गया जिससे सलोनी उनके पैरों के पास गिर गई.मुझे सलोनी का केवल कुछ ही भाग दिख रहा था, वो उनके आगे गिरी थी मगर चारों ने उसको अच्छी तरह देख लिया होगा.पता नहीं उसका कौन-कौन सा अंग उधर गया होगा.

चारों ने जल्दी से उठकर उसको पकड़ कर उठाया, सलोनी अपने लहंगे को सही करने लगी.चारों एक साथ- ओह बेटा, कहीं लगी तो नहीं?

सलोनी- नहीं अंकल.. ओह सॉरी… मेरा बैलेंस बिगड़ गया था… बस बस, मैं ठीक हूँ.

चारों ही उसको देखने के बहाने जगह जगह से छूने की कोशिश कर रहे थे, मैं सही से देख भी नहीं पा रहा था कि वो उसको कहाँ-कहाँ छू रहे हैं.ओह, ये साले तो इतना गर्म हो रहे हैं कि अभी यहीं सलोनी का रेप ही ना कर दें… पता नहीं कैसे बचेगी अब सलोनी????

कहानी जारी रहेगी.
 
अपडेट 103

सलोनी जैसे ही प्लेट में लेने के लिए झुकी तो कई बातें एक साथ हो गई, चोली में से सलोनी के मम्मे देखने के लिए उन्होंने प्लेट को एकदम से नीचे मेज पर रख दिया, सलोनी अपने ही गति में आगे को मेज पर गिर सी गई, मेहता अंकल का हाथ जो काफी ऊपर तक उसके लहंगे को उठा चुका था और उस समय भी उसके चूतड़ पर ही था, सीधे ही सलोनी के नंगे चूतड़ों पर पहुँच गया और मेज से भी उसका बैलेंस गड़बड़ा गया जिससे सलोनी उनके पैरों के पास गिर गई.

मुझे सलोनी का केवल कुछ ही भाग दिख रहा था, वो उनके आगे गिरी थी मगर चारों ने उसको अच्छी तरह देख लिया होगा.पता नहीं उसका कौन-कौन सा अंग उधर गया होगा.

चारों ने जल्दी से उठकर उसको पकड़ कर उठाया, सलोनी अपने लहंगे को सही करने लगी.चारों एक साथ- ओह बेटा, कहीं लगी तो नहीं?सलोनी- नहीं अंकल.. ओह सॉरी… मेरा बैलेंस बिगड़ गया था… बस बस, मैं ठीक हूँ.

चारों ही उसको देखने के बहाने जगह जगह से छूने की कोशिश कर रहे थे, मैं सही से देख भी नहीं पा रहा था कि वो उसको कहाँ-कहाँ छू रहे हैं.ओह, ये साले तो इतना गर्म हो रहे हैं कि अभी यहीं सलोनी का रेप ही ना कर दें… पता नहीं कैसे बचेगी अब सलोनी.

फिर बड़ी मुश्किल से ही सलोनी उनसे पीछा छुड़ाकर अलग हटकर खड़ी हुई, वो अपने कपड़े सही कर रही थी.

सलोनी- ओह आप लोग भी ना… मैं बिल्कुल ठीक हूँ… आप लोग प्रोग्राम देखो.

ओ तेरी… सलोनी की चोली से उसकी एक चूची निप्पल तक बाहर आ गई थी जिसे उसने अपने हाथ से अंदर कर ठीक किया. अब यह पता नहीं कि गिरने से बाहर आई या फिर यह इनमें से किसी की कारस्तानी थी.

तभी नलिनी भाभी की आवाज आई, वो बाहर ही खड़ी थी- अरे सलोनी… कहाँ है तू? चल न, सभी हमारे स्वांग के लिए कह रहे हैं.और वे दोनों वहाँ से चली गई, सभी जोर से हंसने लगे.

जोजफ अंकल- ओह यार, लगता है यह शर्त भी साला अनवर ही जीत गया..

जय अंकल- हा हा… देखा मैं ना कहता था… इतनी मॉडर्न लड़की है यह… कोई नेकर या पजामी पहनेगी क्या?

विराज अंकल- पर दिख तो कोई कच्छी भी नहीं रही थी… क्या मस्त और मुलायम चूतड़ थे यार !

जय अंकल- अरे मैंने तो पहले ही कहा था, ये फैंसी कच्छी पहनने वाली छोरियां हैं, अब पतली सी डोरी… घुसी होगी चूतड़ों के बीच में, इतने मोटे तो चूतड़ थे, तुमको कहाँ से दिखती!तभी मेहता अंकल ने एक और धमाका किया- तू भी हार गया अनवर… सच उसने कुछ नहीं पहना… नंगी है पूरी लहंगे के नीचे… ले सूंघ मेरी ऊँगली… उसकी चूत की खुशबू आ रही है.. ले देख…जय अंकल और बाकी दोनों भी सूंघने लगे.

विराज अंकल- अबे, यह तूने कब किया?मेहता अंकल- अरे जब वो गिर रही थी, तभी मेरी दो उंगलियाँ उसकी चूत में चली गई थी… हा हा… चल छोड़ो ये सब.. देखो प्रोग्राम शुरू होने वाला है…अरे यह तो मुझे भी देखना था, अतः मैंने तुरंत पीछे से हल्का सा ही बाहर को होकर अंदर आने का नाटक किया और अपनी कुर्सी पर जाकर बैठ गया.

मेहता अंकल- आ गए बेटा… बिल्कुल सही समय पर आये… देखो अब सलोनी का प्रोग्राम ही होने वाला है.मैंने सोचा ‘हाँ हाँ… मुझे पता है… क्यों कह रहे हो कि सही समय पर आये… पहले आ जाता तो वो सब जो देख लेता… जो अभी तुम सभी मिलकर कर रहे थे.फिलहाल मैं बाहर को देखने लगा, जहाँ सलोनी और नलिनी भाभी कुछ तैयारी सी करने में लगी थी.

जय अंकल- अरे मेहता… ये सब क्या कर रही है… क्या इनका डांस नहीं है?

मेहता अंकल मुस्कुरा रहे थे- अबे देखता रह… यह हम लोगों का बहुत खास प्रोग्राम होता है… यह एक स्वांग है… जिसकी थीम ‘बन्नो की शादी’ है… इसमें ये सभी ऋतु की शादी के बाद जो होता है ना उसको एक कॉमेडी की तरह मस्ती में दिखाएँगी, बहुत मजा आएगा…

मैंने देखा कि बाहर वो लोग काफी तैयारी में लगे थे, उन्होंने एक पलंग तक लगाया था जिसको सुहगरात जैसा ही सजाया गया था.फिर उनका प्रोग्राम शुरू हो गया.

कुछ देर बाद समझ आया कि नलिनी भाभी सलोनी के पति का रोल कर रही थी, सलोनी दुल्हन बनी थी जो ऋतु का रोल था.इसमें दो कोई और भी लेडी थी जो ससुर और जेठ का रोल का रही थी.
 
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