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मेरी चालू बीवी complete

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मैंने ध्यान से ऊपर से नीचे तक उसको देखा.कमरे में इतनी रोशनी तो थी कि मैं सब कुछ अच्छी तरह देख सकता था.उसके मम्मे वाकयी ब्रा से बाहर को थे जो हाथ रखा होने के बाद भी दिख रहे थे.

जबकि उसका पेटीकोट घुटनों तक था.

रानी की गोरी गोरी पिंडली और पाँव में पड़े पाजेब बहुत ही सेक्सी लग रहे थे.

तभी मुझे उसका मस्ताना रूप दिखा, उसके पेटीकोट को बांधने वाला हिस्सा उस ओर ही था और वहाँ इतना गैप था कि आसानी से मेरा हाथ अंदर जा सकता था.

अँधेरा होने से उसके अंदर तो नहीं दिख रहा था, पर मैं हाथ से उसकी चूत को छू सकता था, वो भी उसके पति की मौजूदगी में…!

मैं यह सोचकर ही रोमांचित था कि उसकी चूत बिना किसी परदे के होगी.क्योंकि यह तो मैंने देख ही लिया था कि उसने पेटीकोट के अंदर कच्छी या कुछ और नहीं पहना है.

मैं रानी की चिकनी कमर पर हाथ रख फिसलाता हुआ वहाँ तक ले गया.वो तो सलोनी की मस्ती देख खुश हो रही थी, मैंने अपना हाथ उस गैप में घुसा दिया और सीधे उँगलियों को जांघों के जोड़ तक ले गया.

रानी- ओह प्लीज… मत करो ना… अह्ह्हाआ!उसने बहुत हल्की सी ही आवाज निकाली और घूमकर अपने पति की ओर देखा.पर उसको कुछ पता नहीं चला, उसने एक बार तिरछी नजर से तो देखा, फिर वापस उसी कमरे में देखने लगा.

रानी भी ज्यादा शोर तो कर नहीं सकती थी, अपने पति की ओर से संतुष्ट होकर उसने भी विरोध करना बंद कर दिया.

मैंने आसानी से ही अपनी उँगलियाँ उसकी चिकनी चूत तक पहुँचा दी.उसने भी अपनी चूत के बाल पूरी तरह साफ़ कर रखे थे, उसकी चूत के होंठ बाहर को उठे ही बहुत ही कोमल महसूस हो रहे थे.

मैंने उसकी पूरी चूत को सहलाते हुए उसके चूत के दाने को रगड़ना शुरू कर दिया.

रानी ने खुद ब खुद अपने पैरों के गैप को बढ़ा दिया जिससे मैं सरलता के साथ उसकी पूरी चूत को सहला पा रहा था.

रानी की चूत को सहलाते और एक उंगली से उसकी चूत के अंदर तक करते हुए मैंने दूसरे कमरे में देखा, मामाजी भी सलोनी से कुछ ज्यादा ही मजा ले रहे थे, वो उससे पूरी तरह सट गए थे.

अरे यह क्या… उन्होंने सलोनी का पेटीकोट पूरा ऊपर तक उठा दिया था और वो उसकी नंगी चूत को चूम रहे थे.

हम जहाँ थे, वहाँ से पूरा दृश्य साफ़ साफ़ दिख रहा था.

तभी रानी अपने पति को बोली- ओह, यह पापा को क्या हो गया? देखो, मैं आपसे नहीं कहती थी कि इनकी हरकतें ठीक नहीं है… पर आपको मेरी बात पर भरोसा ही नहीं था? उस बेचारी को सोते हुए भी परेशान कर रहे हैं.उसका पति केवल ‘ह्म्म्म्म्म’ बोल कर रह गया.

मैंने दोनों को चुप रहने को बोला और रानी की चूत में ऊँगली करता रहा.

उसकी चूत से भरभरा कर रस बाहर आ रहा था.

रानी इतना अधिक मदहोश हो गई थी कि उसने मेरे लण्ड तक को टटोलना शुरू कर दिया था.

मैंने भी उसकी मर्जी को समझा और ज़िप खोलकर अपना पहले से ही तनतनाया लण्ड बाहर निकाल लिया.

मैंने रानी की आँखों में प्रशंसा देखी, उसने मेरे लण्ड को पकड़ लिया.इतना कुछ तो हो गया था, अब यह देखना था कि क्या रानी का पति अपने सामने ही मुझे रानी की इस रस भरी चूत में लण्ड डालने देगा या नहीं?

मैं तो मान भी जाऊँ पर मुझे नहीं लगता कि अब मेरा लण्ड मानेगा.

और उधर मामाजी क्या केवल सलोनी की चूत चाटकर ही संतुष्ट हो जाएँगे या फिर आगे भी बढ़ेंगे.

फिर अगर बढ़े तो क्या सलोनी मना करेगी या उनका सहयोग करेगी?

देखो क्या होता है?

कहानी जारी रहेगी
 
अपडेट 113

रानी इतना अधिक मदहोश हो गई थी कि उसने मेरे लण्ड तक को टटोलना शुरू कर दिया था.

मैंने भी उसकी मर्जी को समझा और ज़िप खोलकर अपना पहले से ही तनतनाया लण्ड बाहर निकाल लिया.

मैंने रानी की आँखों में प्रशंसा देखी, उसने मेरे लण्ड को पकड़ लिया.इतना कुछ तो हो गया था, अब यह देखना था कि क्या रानी का पति अपने सामने ही मुझे रानी की इस रस भरी चूत में लण्ड डालने देगा या नहीं?

मैं तो मान भी जाऊँ पर मुझे नहीं लगता कि अब मेरा लण्ड मानेगा.

और उधर मामाजी सलोनी की चूत को चाटने में लगे थे.

सलोनी की आँखे बंद थी… इसलिए नहीं कि वो सो रही थी या फिर सोने का नाटक कर रही थी, बल्कि उसके चेहरे से ही उसकी मस्ती झलक रही थी, उसको बहुत ही मजा आ रहा था, सलोनी के होंठ कभी बंद तो कभी खुल रहे थे, कभी कभी वो उनको गोल सीटी बजाने जैसा कर ले रही थी.

उसके दोनों हाथ अपने आप ही उसकी ऊपर उठी हुई चूचियों पर आ गए थे जिनको वो मसल भी रही थी.

इस सेक्सी दृश्य को देखते हुए रानी जैसी सुकोमल नारी के मक्खन जैसे जिस्म से खेलने का मजा दुगना हो गया था.

और ऊपर से उसका पति भी साथ था, उसके सामने तो रानी को चोदने में मजा ही आ जाता.

रानी डरते हुए बार बार अपने पति की ओर देख रही थी मगर उसने एक बार भी हमारी ओर नहीं देखा, वो अपने बाप की रासलीला देखने में मशगूल था.

मैंने रानी की चूत सहलाते हुए ही उसके पेटीकोट का नाड़ा ढीला कर दिया, उसने कोई प्रतिरोध नहीं किया बल्कि वो भी कमरे में देखने का प्रयास करती रही.

अब मैंने पेटीकोट के ऊपर से हाथ अंदर डालकर उसकी चूत को अपनी मुट्ठी में भर लिया. मैं चूत को मसलते हुए पेटीकोट को नीचे करने लगा.

रानी अपने पति को देखते हुए पलट गई, अब वो मेरे नीचे दबी थी.

उसकी मदमस्त चूतड़ मेरी कमर के नीचे थे, उसका पेटीकोट घुटनों से नीचे तक सरक गया था.

मैंने नीचे हाथ कर उसको पूरा निकाल दिया तो अब रानी केवल एक छोटी सी ब्रा में मेरे नीचे दबी हुई लेटी थी.

हम तीनों के मुँह उस दरवाजे के बनाये गैप में थे और सलोनी-मामाजी की मस्ती देख रहे थे.

रानी का पति कोने में सिकुड़ा सा बैठा हुआ था, रानी और मैं दूसरी तरफ उलटे लेटे थे, मैं रानी के ठीक ऊपर था, मेरा लण्ड पैंट से बाहर था, मैंने पैंट को अपने चूतड़ से नीचे को सरका दिया पर पूरी उतारी नहीं.

मेरा लण्ड अब पूरी तरह से स्वतंत्र होकर रानी के चूतड़ों की दरार में घुसा हुआ था.उसने जरा से ऊपर को होकर लण्ड को चूत के ऊपर कर लिया, रानी ने अपने दोनों पैरों के बीच इतना गैप कर लिया था कि लण्ड आसानी से चूत में प्रवेश कर सकता था.

मैंने लण्ड के टॉप को रानी की पानी छोड़ रही चूत के द्वार पर रखा और हल्के से धक्का दिया तो बिना कोई आवाज निकले मेरे लण्ड का टोपा रानी की चूत में चला गया.

उसकी चूत इतनी गर्म लग रही थी जैसे आग निकल रही हो, बहुत ही गरम थी रानी की चूत!

मैं बहुत धीरे धीरे लण्ड को अंदर सरकाने लगा, रस में डूबी, भीगी हुई चूत में मेरा लण्ड फिसलता हुआ अंदर सरक रहा था.

उधर मैंने देखा कि मामाजी ने सलोनी के ब्लाउज को खोल दिया था और उसकी ब्रा ऊपर कर वो सलोनी के चूची को चूसने लगे.

वाह, यह क्या, मामाजी ने भी अपना पजामा पूरा ही निकाल दिया था, उनके बदन पर केवल एक बनियान ही था जो ऊपर तक सरका हुआ था.

सलोनी के बाएं हाथ में उनका लण्ड था जिसे वो हिला रही थी.

इधर रानी का पति उसको ऐसा करते देख सिसकारी लेते हुए अपने हाथ से ही अपने लण्ड को हिला रहा था.

और तभी मामाजी ने सलोनी के दोनों पैरों को अपने हाथ से पकड़ घुटनों से मोड़ ऊपर को कर दिया.

ऊपर को खिलकर निकल आई सलोनी की चूत पर मामा ही ने थूका और अपना लण्ड वहाँ लगा दिया.

सलोनी बिलकुल भी मना नहीं कर रही थी, इसका मतलब वो उनका लण्ड लेने को तैयार थी.

और तभी मामाजी ने एक जोरदार धक्क्का लगाकर अपना लण्ड सलोनी की चूत में डाल दिया.

आज मैं एक और लण्ड को अपनी बीवी की चूत में जाते हुए देख रहा था.

‘आह्ह्ह्ह्हा आआह’ सलोनी की जोरदार सिसकारी के साथ ही रानी भी सिसकार उठी- आअह्ह्ह्ह्ह्हाआआ!

मैंने भी एक तेज झटके से अपना लण्ड जड़ तक रानी की चूत की गहराइयों में उतार दिया था.

रानी का पति- क्या हुआ?

रानी- अह्ह्ह… देखो, मैं ना कहती थी कि यह बुड्ढा अब मुझे भी गन्दी नजर से देखता है पर आपको तो मुझ पर भरोसा ही नहीं था, अब देख लिया ना आपने अपनी आँखों से?

रानी का पति कुछ नहीं बोला.

उधर मामाजी खुलकर अपनी कमर हिला हिला कर सलोनी को चोद रहे थे, इधर मैंने भी गति पकड़ ली.

अब उसके पति ने मुझको देखा तो उसको ज्यादा कुछ तो पता नहीं चला.

मैं- तेरा बाप तो बहुत हरामी है साला?

पति- पर यह आप क्या कर रहे हो मेरी रानी के साथ?

मैं- बदला… जब वो खुलकर कर रहा है तो क्या मैं ऊपर से भी नहीं कर सकता?
 
मैंने उसको बरगलाया, उसको ऐसा दिखाया कि मैं ऊपर-ऊपर से ही कर रहा हूँ जबकि मेरा लण्ड रानी की चूत में गहराई तक आ-जा रहा था.

रानी के पति को अपने बाप के ऐसे कृत्य को देखते हुए कोई पछतावा नजर नहीं आ रहा था बल्कि वो पूरा मजा ले रहा था, उनकी चुदाई देखते हुए वो खुद अपना लण्ड जोर जोर से हिला रहा था, उसका ध्यान मेरी या फिर रानी की ओर बिल्कुल नहीं था.

रानी को मैंने लगभग पूरा नंगा कर दिया था, उसकी चूत में लण्ड भी डाल दिया था, मगर उसको जैसे पता ही नहीं चला था और वो बड़बड़ा भी रहा था- आह्ह्हा यार कुछ भी बोलो, तुम्हारी बीवी है बहुत मस्त माल! मेरा बाप तो कई साल से भूखा है, अगर मैं भी होता तो खुद को नहीं रोक पाता, इसको पूरा नंगा करके खूब चोदता!

मैं- साले… हरामी… मेरे सामने ही ऐसा बोल रहा है?मैंने एक चपत उसके सर पर लगाई.

‘सॉरी यार… पर क्या करूँ? वो है ही ऐसी… काश इसको पूरी नंगी करके, कमरे में खड़ी करके इसको घुमा घुमाकर चारों ओर से देखता!

बस उसका इतना कहना था.

मामाजी ने उधर सलोनी की चूत से अपना लण्ड बाहर निकल लिया, सलोनी अब आँखें खोलकर उनको देख रही थी.

उन्होंने अपनी बनियान हाथ ऊपर करके उतार दी, फिर सलोनी को उठाकर खड़ा किया, उसकी बाँहों में फंसे हुए ब्लाउज और ब्रा को उसके शरीर से अलग कर एक ओर फेंक दिया.

सलोनी- नहींईइ… अरे कोई आ जायेगा?

मामाजी- चुप्प… कुछ नहीं होगा!

और फिर उन्होंने सलोनी के पेटीकोट का नाड़ा भी खोल दिया. पेटीकोट टाइट था, वो एकदम नहीं उतरा, उन्होंने उसको अपने हाथ से सलोनी के चूतड़ों से उतारा.

सलोनी मदहोशी सी हालत में थी, वो उस कमरे में मामाजी के सामने पूरी नंगी खड़ी थी और मामाजी भी पूरे नंगे खड़े अपने लण्ड को हाथ से सहला रहे थे.

लण्ड सलोनी के चूत से अभी ही निकला था अतः वो चूत के रस से भीगा हुआ था और चमक रहा था.

सलोनी ने एक मस्त अंगड़ाई ली, उसकी चूचियाँ और चूतड़ दोनों ही उठे और हिले, कमरे में जैसे भूचाल सा आ गया.

मामाजी ने जोर से सिसकारी ली, उनका लण्ड उछल उछल कर हिल रहा था, उन्होंने अपने दोनों हाथों से सलोनी के यौवन को सहलाना शुरू कर दिया, वो कभी उसकी चूचियों को मसलते तो कभी उसके चूतड़ों को!

सलोनी कमरे में घूम घूम कर मस्ती ले रही थी.

तभी सलोनी ने मामाजी के लण्ड को अपने मुट्ठी में भर लिया, वो उसको पागलों की तरह हिला रही थी.

मामाजी ने सलोनी को बालो से पकड़ उसके सिर को अपने लण्ड की ओर झुकाया.सलोनी तो जैसे नशे में थी, वो घुटनों पर बैठ उनके लण्ड को अपने होंठों के बीच दबा कर चूसने लगी.

रानी का पति और भी कमीनपने पर उतर आया है- देख, मैं सही बोल रहा था ना, यह तो बिल्कुल रण्डी जैसा चूस रही है, साली कितनी मस्त है यार!

मुझे गुस्सा आ गया, मैंने गप की आवाज के साथ अपने लण्ड को रानी की चूत से बाहर निकाला.

उसने चौंककर मुझे देखा.

मैंने उसके बालों को कसकर खींचा- साले तेरा बाप तो हरामी है ही, तू उससे भी बड़ा हरामी है. कमीने चल, अपने बाप का क़र्ज़ अब तू चुकाएगा, साले चूस मेरे लण्ड को वैसे ही!

और मैंने अपने लण्ड को उसके खुले मुँह में घुसेड़ दिया.

बहुत ही गर्म माहौल हो गया था.

कहानी जारी रहेगी.
 
अपडेट 114

रानी का पति और भी कमीनपने पर उतर आया है- देख, मैं सही बोल रहा था ना, यह तो बिल्कुल रण्डी जैसा चूस रही है, साली कितनी मस्त है यार!

मुझे गुस्सा आ गया, मैंने गप की आवाज के साथ अपने लण्ड को रानी की चूत से बाहर निकाला.

उसने चौंककर मुझे देखा.

मैंने उसके बालों को कसकर खींचा- साले तेरा बाप तो हरामी है ही, तू उससे भी बड़ा हरामी है. कमीने चल, अपने बाप का क़र्ज़ अब तू चुकाएगा, साले चूस मेरे लण्ड को वैसे ही!

और मैंने अपने लण्ड को उसके खुले मुँह में घुसेड़ दिया.

बहुत ही गर्म माहौल हो गया था.

उसने अपनी आँखें फाड़े लण्ड को मुँह में ले लिया, लण्ड उसके हलक तक चला गया.

मैंने उसके बालों को इतने कसकर पकड़ा कि वो कहीं काट ना ले!

रानी को बहुत ही मजा आ रहा था, वो हंस रही थी.

मैंने उसके मुँह में ही धक्के लगाने शुरू कर दिए, उसकी बीवी की चूत से भीगे लण्ड को वो चूसने लगा.

मैं- साले, अब पता चला जब बीवी चुदती है तो कैसा लगता है? और लण्ड चूसने में कितना मजा आता है?मैंने रानी को अपने चिपका लिया.

उधर सलोनी मामाजी का लण्ड चूसने में लगी थी और इधर मैं उनके बेटा बहु से मजे ले रहा था.

पहले तो मेरे लण्ड से उसको परेशानी सी हो रही थी, फिर अचानक ना जाने क्या हुआ, उसकी आँखे लाल हो गई, वो बड़े प्यार से मेरे अंडकोषों को सहलाते हुए लण्ड को चूसने लगा.

यह देखकर रानी की भी आँखों में चमक आ गई… वो खुद अपने हाथ से मेरे लण्ड को पकड़ उसके मुँह में डालने लगी.

मेरा मजा तिगुना हो गया था!

उधर सलोनी पूरी नंगी उकड़ू बैठी मामाजी के लण्ड को चूस रही थी.

उसके उठे हुए नंगे चूतड़ मुझे साफ दिख रहे थे.

मेरी सीधी बगल में रानी मुझसे चिपकी थी, उसने अपनी ब्रा भी हटा दी थी. उसकी नंगी चूचियों को एक हाथ से मसलते हुए मैं दूसरे हाथ से उसके चूतड़ सहला रहा था और वो अपने पति को मेरा लण्ड चुसवा रही थी.

मेरी शुरू से ही आदत है सेक्सी बातें करते हुए चुदाई करने की, मैं रानी को छेड़ते हुए बोला- क्यों मेरी जान… यह बूढ़ा तो बहुत हरामी है… तुमको भी बहुत चोदता होगा या फिर परेशान करता होगा?

रानी- हाँ सही बोला आपने… यह सब तो नहीं, पर हाँ परेशान बहुत करता है. इनको कई बार बताया पर ये मानते ही नहीं थे… अच्छा हुआ आज इन्होंने सब कुछ अपनी आँखों से देख लिया.

उसका पति केवल गों गों की आवाज निकाल रहा था.मैं एक सेकंड भी लण्ड उसके मुँह से बाहर आने नहीं दे रहा था.

रानी मेरे चेहरे के आगे ही झुकी थी, उसकी नंगी चूची मेरे होंठों से टकरा रही थी, मैंने उसकी एक चूची को सही से पकड़ कर अपने होंठों के बीच उसके निप्पल को लिया और चूसने लगा.

वो भी यही चाहती थी, इसीलिए ऐसा कर रही थी.

रानी मजे से अपनी चूची चुसवाने लगी.

मैं- तुम बताओ मेरी जान, क्या क्या किया है इसने अभी तक तुम्हारे साथ?

रानी- मुझे तो लगता है हर समय उसकी नजर मेरे अंगों पर ही रहती है. पहले तो विश्वास नहीं होता था पर अब सब कुछ सच लगता है.

मैं- फिर भी बताओ न वो सब कुछ… जरा विस्तार से!.!

रानी- अब क्या बताऊँ… इनको तो सब पता ही है. मुझे लगता है जैसे कई बार बाथरूम में झाँकने की कोशिश करते हैं, कई बार मैंने मेरे कमरे में झांकते हुए भी पकड़ा है जब मैं कपड़े बदल रही हूँ या फिर ऐसे वैसे बैठी या लेटी हूँ, तब ही ये ताक झांक करते रहते हैं.

मैंने उसकी चूत में उंगली करते हुए पूछा- और क्या तेरी चूत नहीं देखी कभी या फिर अपने हाथ से नहीं सहलाई?

रानी- मैं पूरे पक्के तौर पर तो नहीं कह सकती, वैसे तो मुझे छूने का कोई मौका नहीं छोड़ते… पर हाँ, मेरे होशोहवास में ये सब नहीं किया. हाँ कई बार मुझे ऐसा लगता है जैसे… मेरे सोने पर कोई मुझे छू रहा है, कई बार मेरे कपड़े भी अस्त व्यस्त होते हैं.

मैं- अरे तो हो सकता है कि तुमको कोई गोली दे चोद भी दिया हो बूढ़े ने…

रानी- अब ये तो पता नहीं… पर हाँ कई बार ऐसा तो होता है कि मेरे पेट या चूतड़ पर कुछ चिपचिपा सा हो और किसी ने पोंछा हो!

मैं- तुमको कुछ पता नहीं चलता था?

रानी- अरे अक्सर मैं बहुत गहरी नींद ही सोती हूँ ना… और अगर कोई मेरे अंगों को सहलाये तो मुझे बहुत मजा आता है, मैं और भी गहरी नींद में सो जाती हूँ और ऐसे मजा लेती हूँ जैसे कोई सपने में कर रहा हो!

मैंने उसके चूतड़ों को कसकर दबाया- क्या बात है यार… फिर तो जो भी तुम्हारे पास होता होगा, उसको मजा आ जाता होगा?

तभी उसके पति ने कुछ इशारा किया, हम दोनों ने उधर देखा.

ओह! यह तो सलोनी आज पूरे चुदाई के मूड में थी!

मामाजी ने सभी गद्दे एक के ऊपर एक करके सलोनी को उन पर झुका कर खड़ा कर दिया.

उनका लण्ड टनटना रहा था, अब यह पक्का था कि वो सलोनी को नहीं छोड़ने वाले, वो उसको चोदने की पूरी तैयारी कर रहे थे.
 
मामाजी सलोनी के चूतड़ों के पीछे बैठ अपने दोनों हाथों से उसके मखमली चूतड़ों को चीर कर खोला, वहाँ ढेर सारा थूका, फिर हाथ से उस जगह को चिकना बना दिया.अब मामाजी ने खड़े होकर अपने लण्ड को सेट किया.

यह पता नहीं चला कि वो चूत में डालने वाले हैं या गांड में!पर अपना लण्ड सेट कर एक धक्का लगाया उन्होंने!

सलोनी- अह्ह्ह्हाआआ…

सलोनी उचक गई… लण्ड काफी हद तक अंदर चला गया था.

रानी का पति- उफ़्फ़, तू सही कह रही है रानी… इन्होंने तो चोद भी दिया इसको!

मैं- चुप साले… अब देखना कैसे इसका बदला तेरी बीवी से लूँगा.

मैंने रानी को वही अपने आगे घोड़ी बनाया- चल साले, सही से चुदवा इसको, नहीं तो तेरी गांड मारूंगा.

वो बहुत डर गया था, उसने खुद रानी की चूत को गीला किया, मेरा लण्ड तो पहले से ही उसके थूक से लबालब था, रानी के पति ने मेरे लण्ड को पकड़ रानी की चूत में खुद सेट किया.

यह मेरा बहुत पुराना सपना था जो आज पूरा हुआ था कि किसी हसीना का पति खुद अपने हाथों से मेरा लण्ड अपनी सुन्दर बीवी की चूत में डाले!

आज सलोनी के कारण मेरा यह सपना भी पूरा हो गया.

मैंने एक जोरदार धक्का मारा!

आह्ह्ह्ह्हा आआआह…और मेरा आधे से ज्यादा लण्ड रानी की सुरंग में चला गया.

रानी की चूत इतना पानी छोड़ रही थी कि एक ही बार में पूरा लण्ड निगलने को तैयार थी.

मैंने रानी के चूतड़ों पर हाथ रख एक और धक्के में ही अपना पूरा लण्ड उसकी गहराई तक उतार दिया.

और अब एक मस्त चुदाई का माहौल बन गया था, दोनों कमरों से केवल सिसकारी और चुदाई की आवाजें आ रही थी.

उधर मामाजी सलोनी को पीछे से ही चोद रहे थे.

इधर मैं भी रानी को घोड़ी बनाकर उसके चूतड़ों को दोनों हाथों से पकड़ चोद रहा था.

रानी का पति दोनों ओर देख रहा था और कभी रानी के सर पर हाथ फेरता तो कभी उसकी नीचे को लटकती हुई चूचियों को सहलाता.

मेरे लण्ड में एक अलग ही उबाल आया हुआ था, मन कर रहा था कि यह चुदाई कभी ख़त्म ना हो.

मैं बहुत तेजी से धक्के लगा रहा था, मेरा लण्ड तेजी के साथ रानी की चूत में आ जा रहा था.

तभी मैंने सलोनी को देखा, वो भी जमकर मजा ले रही थी, मामाजी भी लम्बी चुदाई करने के लिए अपना पूरा अनुभव का प्रयोग कर रहे थे.वो बार बार अपने लण्ड को सलोनी की चूत से बाहर निकाल ले रहे थे, उसके बाद या तो खुद नीचे बैठ सलोनी की चूत अपनी जीभ से चाटने लगते या फिर सलोनी से अपना लण्ड चुसवाते!

और फिर मामाजी ने एक और किलकारी की, उन्होंने सलोनी को गद्दे के ऊपर सीधा लिटाकर उसके दोनों पैर हवा में उठा दिए, सलोनी की चूत सामने खिलकर आ गई, उन्होंने अपना लण्ड एक ही झटके में अंदर डाल दिया!और फिर से उसको चोदने लगे.

पर मैंने अपना आसन नहीं बदला वरना सलोनी की चुदाई देखने में परेशानी हो जाती.हाँ, मैंने छेद जरूर बदलने की सोची और मैंने अपना लण्ड रानी की चूत से बाहर निकाल लिया.

कहानी जारी रहेगी.
 
अपडेट. 115

मैं बहुत तेजी से धक्के लगा रहा था, मेरा लण्ड तेजी के साथ रानी की चूत में आ जा रहा था.

तभी मैंने सलोनी को देखा, वो भी जमकर मजा ले रही थी, मामाजी भी लम्बी चुदाई करने के लिए अपना पूरा अनुभव का प्रयोग कर रहे थे.वो बार बार अपने लण्ड को सलोनी की चूत से बाहर निकाल ले रहे थे, उसके बाद या तो खुद नीचे बैठ सलोनी की चूत अपनी जीभ से चाटने लगते या फिर सलोनी से अपना लण्ड चुसवाते!

और फिर मामाजी ने एक और किलकारी की, उन्होंने सलोनी को गद्दे के ऊपर सीधा लिटाकर उसके दोनों पैर हवा में उठा दिए, सलोनी की चूत सामने खिलकर आ गई, उन्होंने अपना लण्ड एक ही झटके में अंदर डाल दिया!और फिर से उसको चोदने लगे.

पर मैंने अपना आसन नहीं बदला वरना सलोनी की चुदाई देखने में परेशानी हो जाती.हाँ, मैंने छेद जरूर बदलने की सोची और मैंने अपना लण्ड रानी की चूत से बाहर निकाल लिया.

फिर मेरे मन में केवल बदला लेने की भावना भी न जाने कहाँ से आ गई थी.

मामाजी को बार बार अपना लण्ड सलोनी की चूत से बाहर निकालकर उसको चुसवाने लगते थे, बस यही देखकर मैंने भी रानी की चूत से निकले लण्ड को फिर से उसके पति के मुँह में दे दिया.

पर अब उसने कोई विरोध नहीं किया, वो मजे से उसको चूस रहा था, इस बार रानी भी नीचे बैठकर मेरे अंडकोषों को चूसने और सहलाने लगी.

अब कभी उसका पति तो कभी रानी खुद मेरे लण्ड को अपने मुँह में लेकर चूस रही थी, दोनों में जैसे होड़ सी लगी थी कि कौन उसको चूसेगा.

इस सबमे मेरा लण्ड गुर्रा सा रहा था, वो पूरा लाल हो गया था.

मैंने एक बार फिर रानी को घोड़ी बनाया और इस बार लण्ड उसके गांड के छेद पर सेट किया.

उसने एक बार हल्के से अपने चूतड़ों को हिलाया पर मैंने उसके चूतड़ों को कस कर पकड़ा और एक तेज झटके के साथ लण्ड को अन्दर पेल दिया.

मुझे एहसास हो गया कि रानी की गाण्ड का छेद बहुत ही कसा था, उसने गांड चुदवाई तो है पर ज्यादा नहीं, शायद 2-3 बार ही!

ऐसा महसूस हो रहा था जैसे गांड के छेद में कसकर डाट लगा दी हो, बहुत ही फंसा फ़ंसा सा अन्दर जा रहा था मेरा लौड़ा!

रानी बार बार सर हिलाकर मना कर रही थी मगर जब उधर मेरी सलोनी की गाण्ड मारी जा रही हो तो भला मैं कैसे मान जाता?

मैं कसकर रानी के चूतड़ों को पकड़े हुए ही अपने लण्ड को अन्दर किये जा रहा था और तभी रुका जब पूरा लण्ड अन्दर प्रवेश कर गया.

अब मुझे ऐसे लग रहा था जैसे किसी ने मेरे लण्ड को किसी शिकंजे में कस लिया हो.

और फिर शुरू हुई उस सिकंजे से बाहर निकलने और उसको कसकर रखने की कशमकश.

लण्ड बहुत ही धीरे धीरे अन्दर बाहर हो पा रहा था मगर मजा बहुत ज्यादा आ रहा था.

कुछ देर तक तो रानी ने विरोध किया मगर अब शायद उसको भी मजा आने लगा था, वो भी अपने कूल्हों को आगे पीछे करके मज़ा लेने लगी.

फिर हम तीनों ने इस ओर से ध्यान हटा, उधर लगा दिया.

मैं धीरे धीरे गाण्ड मारते हुए सलोनी की चुदाई देखने लगा.

अरे उधर शायद मामाजी का काम तमाम हो गया था, मामाजी अपना लण्ड हाथ में पकड़े हंम्फ हंम्फ! हांफ रहे थे और सलोनी के पेट और जांघें दोनों ही उनके वीर्य से भीगी थीं, वहाँ से पानी भी टपक रहा था.

सलोनी की हमेशा की आदत है कि वो कभी भी सेक्स को बीच में नहीं छोड़ती!

उसने यहाँ भी ऐसा ही किया, उसने उठकर मामाजी के लण्ड को अपने हाथ से सहला कर सही किया, फिर उसको अपनी जीभ से साफ़ कर उसको अपने मुँह में लेकर चूस कर सही कर दिया.

चुदाई के बाद मुँह में लेकर चूसने से लण्ड को बहुत आराम मिलता है, यह बात सलोनी को अच्छी तरह से पता है.

यह सब मामाजी को भी भाया, वो प्यार से सलोनी के सर पर हाथ फेरने लगे, फिर मामाजी ने वहाँ पड़ी एक चादर से सलोनी के पूरे बदन को साफ़ किया.

सलोनी अपने कपड़े पहनने लगी, मामाजी ने भी अपना पजामा और बनियान पहना और वहीं लेट गए.

मामाजी- अरे, यह साहिल कहाँ चला गया? मुझे तो डर था कि कहीं बीच में ना आ जाए!

सलोनी अपना ब्लाउज और पेटिकोट ही पहन वहीं लेट गई.

सलोनी- हाँ, शायद कहीं चले गए होंगे… चलो अच्छा ही हुआ… वरना आपका क्या होता?? अहा हा हा…

मामाजी- हा हा… वैसे बेटी, बुरा मत मानो तो एक बात पूछूँ?

सलोनी- जी हाँ, क्या?

मामाजी- क्या साहिल के अलावा तुमने आज मुझसे ही चुदवाया है या फिर किसी और से भी? देखो सच-सच बताना?

कहानी जारी रहेगी.
 
अपडेट. 115

मैं बहुत तेजी से धक्के लगा रहा था, मेरा लण्ड तेजी के साथ रानी की चूत में आ जा रहा था.

तभी मैंने सलोनी को देखा, वो भी जमकर मजा ले रही थी, मामाजी भी लम्बी चुदाई करने के लिए अपना पूरा अनुभव का प्रयोग कर रहे थे.वो बार बार अपने लण्ड को सलोनी की चूत से बाहर निकाल ले रहे थे, उसके बाद या तो खुद नीचे बैठ सलोनी की चूत अपनी जीभ से चाटने लगते या फिर सलोनी से अपना लण्ड चुसवाते!

और फिर मामाजी ने एक और किलकारी की, उन्होंने सलोनी को गद्दे के ऊपर सीधा लिटाकर उसके दोनों पैर हवा में उठा दिए, सलोनी की चूत सामने खिलकर आ गई, उन्होंने अपना लण्ड एक ही झटके में अंदर डाल दिया!और फिर से उसको चोदने लगे.

पर मैंने अपना आसन नहीं बदला वरना सलोनी की चुदाई देखने में परेशानी हो जाती.हाँ, मैंने छेद जरूर बदलने की सोची और मैंने अपना लण्ड रानी की चूत से बाहर निकाल लिया.

फिर मेरे मन में केवल बदला लेने की भावना भी न जाने कहाँ से आ गई थी.

मामाजी को बार बार अपना लण्ड सलोनी की चूत से बाहर निकालकर उसको चुसवाने लगते थे, बस यही देखकर मैंने भी रानी की चूत से निकले लण्ड को फिर से उसके पति के मुँह में दे दिया.

पर अब उसने कोई विरोध नहीं किया, वो मजे से उसको चूस रहा था, इस बार रानी भी नीचे बैठकर मेरे अंडकोषों को चूसने और सहलाने लगी.

अब कभी उसका पति तो कभी रानी खुद मेरे लण्ड को अपने मुँह में लेकर चूस रही थी, दोनों में जैसे होड़ सी लगी थी कि कौन उसको चूसेगा.

इस सबमे मेरा लण्ड गुर्रा सा रहा था, वो पूरा लाल हो गया था.

मैंने एक बार फिर रानी को घोड़ी बनाया और इस बार लण्ड उसके गांड के छेद पर सेट किया.

उसने एक बार हल्के से अपने चूतड़ों को हिलाया पर मैंने उसके चूतड़ों को कस कर पकड़ा और एक तेज झटके के साथ लण्ड को अन्दर पेल दिया.

मुझे एहसास हो गया कि रानी की गाण्ड का छेद बहुत ही कसा था, उसने गांड चुदवाई तो है पर ज्यादा नहीं, शायद 2-3 बार ही!

ऐसा महसूस हो रहा था जैसे गांड के छेद में कसकर डाट लगा दी हो, बहुत ही फंसा फ़ंसा सा अन्दर जा रहा था मेरा लौड़ा!

रानी बार बार सर हिलाकर मना कर रही थी मगर जब उधर मेरी सलोनी की गाण्ड मारी जा रही हो तो भला मैं कैसे मान जाता?

मैं कसकर रानी के चूतड़ों को पकड़े हुए ही अपने लण्ड को अन्दर किये जा रहा था और तभी रुका जब पूरा लण्ड अन्दर प्रवेश कर गया.

अब मुझे ऐसे लग रहा था जैसे किसी ने मेरे लण्ड को किसी शिकंजे में कस लिया हो.

और फिर शुरू हुई उस सिकंजे से बाहर निकलने और उसको कसकर रखने की कशमकश.

लण्ड बहुत ही धीरे धीरे अन्दर बाहर हो पा रहा था मगर मजा बहुत ज्यादा आ रहा था.

कुछ देर तक तो रानी ने विरोध किया मगर अब शायद उसको भी मजा आने लगा था, वो भी अपने कूल्हों को आगे पीछे करके मज़ा लेने लगी.

फिर हम तीनों ने इस ओर से ध्यान हटा, उधर लगा दिया.

मैं धीरे धीरे गाण्ड मारते हुए सलोनी की चुदाई देखने लगा.

अरे उधर शायद मामाजी का काम तमाम हो गया था, मामाजी अपना लण्ड हाथ में पकड़े हंम्फ हंम्फ! हांफ रहे थे और सलोनी के पेट और जांघें दोनों ही उनके वीर्य से भीगी थीं, वहाँ से पानी भी टपक रहा था.

सलोनी की हमेशा की आदत है कि वो कभी भी सेक्स को बीच में नहीं छोड़ती!

उसने यहाँ भी ऐसा ही किया, उसने उठकर मामाजी के लण्ड को अपने हाथ से सहला कर सही किया, फिर उसको अपनी जीभ से साफ़ कर उसको अपने मुँह में लेकर चूस कर सही कर दिया.

चुदाई के बाद मुँह में लेकर चूसने से लण्ड को बहुत आराम मिलता है, यह बात सलोनी को अच्छी तरह से पता है.

यह सब मामाजी को भी भाया, वो प्यार से सलोनी के सर पर हाथ फेरने लगे, फिर मामाजी ने वहाँ पड़ी एक चादर से सलोनी के पूरे बदन को साफ़ किया.

सलोनी अपने कपड़े पहनने लगी, मामाजी ने भी अपना पजामा और बनियान पहना और वहीं लेट गए.

मामाजी- अरे, यह साहिल कहाँ चला गया? मुझे तो डर था कि कहीं बीच में ना आ जाए!

सलोनी अपना ब्लाउज और पेटिकोट ही पहन वहीं लेट गई.

सलोनी- हाँ, शायद कहीं चले गए होंगे… चलो अच्छा ही हुआ… वरना आपका क्या होता?? अहा हा हा…

मामाजी- हा हा… वैसे बेटी, बुरा मत मानो तो एक बात पूछूँ?

सलोनी- जी हाँ, क्या?

मामाजी- क्या साहिल के अलावा तुमने आज मुझसे ही चुदवाया है या फिर किसी और से भी? देखो सच-सच बताना?

कहानी जारी रहेगी.
 
अपडेट. 116

मामाजी- अरे, यह साहिल कहाँ चला गया? मुझे तो डर था कि कहीं बीच में ना आ जाए!

सलोनी अपना ब्लाउज और पेटिकोट ही पहन वहीं लेट गई.सलोनी- हाँ, शायद कहीं चले गए होंगे… चलो अच्छा ही हुआ… वरना आपका क्या होता?? अहा हा हा…

मामाजी- हा हा… वैसे बेटी, बुरा मत मानो तो एक बात पूछूँ?सलोनी- जी हाँ, क्या?

मामाजी- क्या साहिल के अलावा तुमने आज मुझसे ही चुदवाया है या फिर किसी और से भी? देखो सच-सच बताना?

उनकी बातचीत का विषय देख मेरे कान भी खड़े हो गए, मेरी चुदाई की गति कम हो गई क्योंकि मैं उनकी हर बात ध्यान से सुनना चाहता था.

सलोनी मुस्कुरा रही थी- क्यों जानना है आपको ये सब? आपको अच्छा लगा ना आज! बस भूल जाइये अब ना!

मामाजी- प्लीज यार… बताओ ना… अब हम दोनों में ये सब बातें तो होनी चाहिए ना?

सलोनी- अच्छा आप भी सब कुछ बताइये फिर… साहिल को तो आपने ना जाने क्या क्या बता दिया. फिर मुझे क्यों नहीं?

मामाजी- नहीं यार, उससे तो बस ऐसे ही नार्मल बातें ही हुई हैं.

सलोनी- तो पहले आप बताओ, आपने किस किस के साथ चुदाई की है? अब आपकी पत्नी तो है नहीं… यह तो मुझे पता है.

मामाजी- अरे यार, वो बहुत पहले ही मर गई थी… तभी तो मुझे ना जाने कब से प्यासा ही रहना पड़ा! सच बताऊँ तो केवल तुम ही हो जिसने मुझे पत्नी के मरने के बाद आज इतनी शांति दी, वरना मैं तो ना जाने कब से प्यासा ही था.

सलोनी- तो आपने तब से किसी औरत-लड़की के साथ कुछ नहीं किया?

मामाजी- कहाँ यार… एक तो मेरी उम्र… और फिर समाज में रुतबा… कभी मैंने गलत करने की नहीं सोची.

सलोनी- ओह… फिर तो मैंने आपके बारे में काफी गलत सोचा.

मामाजी- हो सकता है! वैसे तुमसे झूठ नहीं बोलूँगा, जब से मेरी बहू घर आई है, उससे जरूर…

सलोनी- वाह… सच? मुझे लगा था…!! वो रानी ना… उससे मैं मिली थी… बहुत ही सेक्सी है वो तो!!

मामाजी- अरे यार, उसको कुछ मत बोलना… उसको कुछ नहीं पता.

सलोनी- क्याआआ…? फिर क्या??

मामाजी- बता रहा हूँ यार… वो तो बहुत ही सीधी-सादी है… उसके साथ भी कुछ करने की मेरी हिम्मत नहीं है, बस छुपकर ही उसको देखता हूँ, या फिर मौका लगता है तो थोड़ा बहुत!!

सलोनी- ओह… क्या कह रहे हैं आप? सब कुछ पूरा खुल कर बताओ ना?

मामाजी- हम्म्म… अरे यार, उसको छुपकर नहाते हुए… या जब बेसुध सो रही होती है तो उसे निहार लेता हूँ.

सलोनी- बस उसके बदन को देखते ही हो या फिर कुछ और भी?

मामाजी- अब तुझसे क्या छुपाना… दरअसल उसकी नींद बहुत गहरी है, तो जब वो सो जाती है, तो वो सब भी थोड़ा बहुत कर लेता हूँ.

सलोनी- ओह… क्या मामाजी? आप भी ना… जरा खुल कर बताओ ना… क्या चोदा भी है आपने अपनी बहू को?

मामाजी- कोशिश तो की है… पर डर के कारण अच्छे से नहीं हो पाता है.

सलोनी- मतलब, उसको नंगी करके अच्छी तरह से सब कुछ देखा है?

मामाजी- हाँ यार, वो तो कई बार… उसकी फ़ुद्दी भी खूब चाटी है… और चूचियाँ भी कई बार पी हैं. उसके चूतड़ों के बीच लौड़ा घुसा कर लेटा रहता हूँ, बहुत मजा आता है…

सलोनी- तो उस रानी को कुछ पता नहीं चलता?

मामाजी- मैंने बोला न कि उसकी नींद बेहोशी की नींद है… एक बार सो जाने के बाद वो घण्टों तक बेहोश सी सोई रहती है.

सलोनी- फिर तो आपने अपना लौड़ा उसकी फ़ुद्दी में घुसाया भी होगा?

मामाजी- हाँ, कई बार कोशिश की तो है… पर अब शरीर में इतनी ताकत तो है नहीं, इसलिए सही से पोजीशन नहीं बन पाती, हाँ… थोड़ा सा डालकर ही कर लेता हूँ.

सलोनी- हा हा… बात तो वही हुई… अपनी बेटी जैसी बहू को चोद चुके हो… और बातें ऐसी करते हो?

मामाजी- वो तो आज भी चोदा है… और सही मायने में तो इसे ही चुदाई कहते हैं जहाँ दोनों एक साथ सही से करें! उसमें सच म बिल्कुल मजा नहीं आता. बस मन की संतुष्टि के लिए कर लेता हूँ.

उनकी बातें सुन रानी और उसका पति भी काफी उत्तेजित हो गए थे और मेरा भी बुरा हाल था.तभी मेरा भी पानी निकलने वाला हो गया और मैंने रानी को कस कर जकड़ लिया.

मैंने सारा पानी रानी की गाण्ड के अन्दर ही छोड़ दिया.

रानी भी बहुत गर्म हो गई थी, सही मायने में उसको आज ही गाण्ड मरवाने में सही मजा आया था.

फिर अपने ससुर की चुदाई कहानी सुनकर तो उसको और भी मजा आया होगा.

मैं लण्ड से पानी की एक एक बूंद निकाल वहीं लेट गया जिसको रानी ने पकड़ सलोनी की तरह ही अपनी जीभ और मुँह में लेकर साफ़ कर दिया.

उधर सलोनी अपनी कहानी बताने लगी जिसको सुनने के लिए रानी और उसके पति से ज्यादा, मैं लालयित था.

अतः मैंने फिर से अपनी आँखें और कान वहाँ लगा दिए… पता नहीं क्या राज अब खुलने वाला था??
 
अपडेट. 117

रानी भी बहुत गर्म हो गई थी, सही मायने में उसको आज ही गाण्ड मरवाने में सही मजा आया था.

फिर अपने ससुर की चुदाई कहानी सुनकर तो उसको और भी मजा आया होगा.

मैं लण्ड से पानी की एक एक बूंद निकाल वहीं लेट गया जिसको रानी ने पकड़ सलोनी की तरह ही अपनी जीभ और मुँह में लेकर साफ़ कर दिया.

उधर सलोनी अपनी कहानी बताने लगी जिसको सुनने के लिए रानी और उसके पति से ज्यादा, मैं लालयित था.

अतः मैंने फिर से अपनी आँखें और कान वहाँ लगा दिए… पता नहीं क्या राज अब खुलने वाला था?

सलोनी ने मामाजी की ओर करवट लेकर अपना एक पैर उनकी कमर पर रख लिया, इससे उसका पेटीकोट घुटनों से भी ऊपर हो गया.

मामाजी ने सलोनी की बाहर झांकती नंगी गोरी जांघ पर हाथ रखा और सहलाते हुए पेटीकोट के अन्दर चूतड़ों तक ले गए.

सलोनी ने बोलना शुरू कर दिया था तो मैं हाथ पर ध्यान ना दे उसकी बात को सुनने लगा.

सलोनी- आज से पहले केवल एक बार और मुझसे गलती हुई थी, बहुत पहले… पर उसके जिम्मेदार साहिल ही थे. वैसे तो ये बहुत अच्छे हैं पर….!मैंने अपने मन में सोचा ‘केवल एक बार? यह क्या बोल रही है सलोनी? सच नारी को कोई नहीं समझ सकता.’

सलोनी- जी वो कभी-कभी मुझे ऐसी हालत में छोड़ जाते हैं कि पता ही नहीं चलता और ऐसा हो जाता है. अब आज ही देख लीजिए, ये मुझको छोड़कर चले गए और आपने इस मौके का फ़ायदा उठा लिया… सच मुझे तो तब पता चला जब आप पूरे ऊपर आ गए और मैं खुद को रोक ही नहीं पाई.

मामाजी- अरे क्याआ बेटा… यह कोई गलती थोड़े ना है, यह सब तो मन बहलाने और सुकून के लिए किया जाता है. तुझे नहीं पता कि आज एक प्यासे की मदद करके तूने कितना पुण्य का काम किया है.

सलोनी- हा हा हा…!

उसने फिर से मामाजी का लण्ड पकड़ लिया- ओह, तो इसकी बदमाश की प्यास बुझ गई? जो सोती हुई आपकी बहू को भी नहीं छोड़ता.

मामाजी- अभी कुछ समय के लिए तो बुझ ही गई… देखो कितना शान्त है और सॉरी यार.. इसी के कारण तो यह सब हुआ. जब तुम साहिल का लण्ड चूस रही थी, तभी इसने तुम्हारे ये फूले हुए चूतड़ और चिकनी चूत को देख लिया था. फिर तो इसने बवाल ही खड़ा कर दिया और इसकी मर्जी के आगे मुझे झुकना ही पड़ा.

सलोनी- ओह भगवान… अपने वो सब देख लिया था… अब देखा ना आपने? वो तो ठण्डे होकर चले गए और मैं यहाँ… सच में मैं हल्की नींद में थी और तो यही समझी कि वो ही हैं मेरे पास…

मामाजी- अरे यार, कुछ गलत नहीं हुआ… तुम वो बताओ, जो बता रही थी.

सलोनी- वही तो बता रही हूँ… तब भी ऐसा ही हुआ था, हमारी शादी के कुछ दिनों बाद की बात है, हम जयपुर गए थे, मई का महीना था, बहुत गर्मी थी वहाँ पर… इनको कम्पनी की ओर से होटल का कमरा मिला था, पर ये अपने एक दोस्त के यहाँ रुके थे. सतीश नाम था उनका, साहिल के बहुत पक्के दोस्त हैं.

सलोनी के मुख से यह बात सुन मुझे सतीश और वो पूरी घटना याद आ गई. वह बिल्कुल सच बोल रही थी… पर सतीश… क्या वह भी? यह जानकर मुझे बहुत आश्चर्य हुआ.

मैं ध्यान से आगे सुनने लगा…

सलोनी- मैं तो देखकर डर ही गई थी, वो सतीश भाई बहुत लम्बे-चौड़े थे! पहले पहल तो देख कर ही डर लगा पर बाद में अच्छा लगने लगा. उनका स्वाभाव बहुत ही अच्छा था, बहुत ही मजाकिया थे तो बहुत जल्दी हम दोस्त बन गए.बस एक ही परेशानी थी, मई महीने के आखिरी दिन थे, बहुत गर्मी थी, उनका घर एक ही कमरे का सेट था… मेरे पास भी बहुत ही हल्के कपड़े थे, शॉर्ट्स, स्कर्ट और हल्के छोटे टॉप वगैरा…वैसे भी मुझे और साहिल को मॉडर्न ड्रेसेज़ ही पसन्द हैं. फिर अब तो हम टूर पर थे तो मैंने वैसे कपड़े ही पहन रखे थे, नाइटी भी पारदर्शी और जांघों तक की ही थी. बस सफर के लिए ही मैंने कैप्री और शर्ट पहनी थी, उस में भी बहुत गर्मी लग रही थी.

15 दिन का टूर था, समझ नहीं आ रहा था कि क्या पहनूँ?

मगर सच साहिल इस मामले में बहुत सुलझे हुए हैं, उन्होंने कहा- अरे यार क्यों तकल्लुफ करती हो? यह समझो हम बाहर ही हैं और कौन तुम्हें देख रहा है. यह सतीश तो वैसे भी खुद को भगवान के हवाले कर चुका है, इसीलिए इसने शादी तक नहीं की, इसको तुम से कोई मतलब नहीं…मेरे मन से सभी शंका दूर हो गई और मैंने एक शार्ट और टॉप पहन लिया.साहिल को तो सब नॉर्मल ही लगा पर औरत तो गैर मर्द की आँखें एकदम समझ जाती है.सतीश मुझे चोर निगाहों से बार बार देख रहे थे, मुझे उनकी इस अदा पर हंसी ही आ रही थी तो मैंने इसको ज्यादा तूल नहीं दिया.

दो दिन तक तो सब ठीक रहा, सतीश हम दोनों से और भी ज्यादा खुल गए, हम एक साथ घूमने जाते, साथ साथ खेलते खाते.
 
पर मैंने महसूस किया कि मेरे कपड़ों से बाहर झांकते जिस्म को देख वो सतीश भाई बेचैन हो जाते… पर इस सब में मुझे मजा ही आ रहा था इसलिए मैंने इस ओर कोई ज्यादा ध्यान नहीं दिया.हम सब एक ही कमरे में सोते थे, साहिल और मैं तो उनके बेड पर और सतीश भाई नीचे अपना बिस्तर लगाते थे.

मगर तीसरी रात को मुसीबत आ ही गई वो भी साहिल के कारण ही, उस रात साहिल का मूड सेक्स का करने लगा.मैंने मना भी किया पर वो माने ही नहीं, बोले ‘अरे सतीश तो सो रहा है. कुछ नहीं होगा…!’

और उन्होंने मेरी कच्छी और ब्रा निकाल दी पर मैंने नाइटी नहीं निकालने दी, नाइटी वैसे भी बहुत छोटी और नेट वाली थी, उन्होंने उसको मेरी गर्दन तक सिमटा दिया और मेरी चूचियों और फ़ुद्दी को खूब चूसा.

मैं बहुत ही गर्म हो गई तो उन्होंने अपने लौड़े को भी मुझसे चुसवाया.

मैं तो बिल्कुल भूल सी ही गई थी कि सतीश भाई भी इसी कमरे में सो रहे हैं.

मैंने अपने होंठों से चूस-चूस कर ही उनके लण्ड का पानी निकाल दिया.

उन्होंने फिर मेरे जिस्म से खेलना शुरू कर दिया, तभी उनके सेलफ़ोन पर किसी का मैसेज आ गया.

उन्हें उसी समय किसी से मिलने जाना पड़ गया था.

उफ्फ… वो उनका ऑफिस का काम… और क्या…

वो खुद तो शान्त हो गए थे पर मैं अभी भी अपनी कामूकता की आंच में सुलग रही थी… पर मैं कर ही क्या सकती थी?

ये साहिल तो जाने कब तैयार होकर चले गए, पता ही नहीं चला, मुझे भी हल्की सी झपकी आ गई थी पर जिस्म में इतनी बेचैनी थी कि उठकर ब्रा पैंटी भी नहीं पहनी.

बस नाइटी को थोड़ा सा सही करके लेट गई.

ये शायद जाते हुए मेरे बदन को चादर से ढक गए होंगे पर गर्मी के कारण वो मैंने खुद हटा दी होगी.

इस बीच सतीश भाई उठे होंगे और उन्होंने मेरे नंगे अंगों को देख लिया था.यह बात उन्होंने ही मुझे बताई थी.

फिर नीचे सोने से अपनी कमर में दर्द के कारण वो मेरे पास बिस्तर ही लेट गए थे.उनके मजबूत बदन पर केवल एक लुंगी ही थी, मेरी जब आँख खुली तो उनकी लुंगी खुली पड़ी थी, वो मेरे बदन से बिल्कुल चिपके लेटे थे.

मैं तो उनका लौड़ा देखती रह गई, बहुत लम्बा और मोटा था.वैसे तो साहिल का बहुत ही अच्छा है पर उसका लण्ड 7 इंच के आस पास ही है.

मैंने इतना बड़ा और अजीब तरह का कभी नहीं देखा था, ऐसा लग रहा था जैसे लोहे का रॉड हो

मामाजी-क्या उसका बहुत बड़ा था

सलोनी- हाँ मामाजी, आप ठीक कह रहे हैं.उनका लंड करीब 12 इंच लंबा और 4 इंच चौड़ा होगा पर सबसे खास बात उनका टोपा था वह बहुत बड़ा था किसी जंगली आलू की तरह (मन मे वैसा दूसरा लंड आज तक नही मिला) मैं भी उसको देख कर बहुत ही ज्यादा उत्सुक हो गई थी. एक तो पहले ही साहिल मुझे प्यासी छोड़ गए थे और फिर उस जैसे लौड़े को देख मेरी बुरी हालत हो गई थी.

पर सतीश भैया का डर ही था, मैं बस उसको देख रही थी मगर उसको छूने का बहुत मन था.तभी एक आईडिया मेरे मन में आया!

कहानी जारी रहेगी.
 
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