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Guest
मैंने ध्यान से ऊपर से नीचे तक उसको देखा.कमरे में इतनी रोशनी तो थी कि मैं सब कुछ अच्छी तरह देख सकता था.उसके मम्मे वाकयी ब्रा से बाहर को थे जो हाथ रखा होने के बाद भी दिख रहे थे.
जबकि उसका पेटीकोट घुटनों तक था.
रानी की गोरी गोरी पिंडली और पाँव में पड़े पाजेब बहुत ही सेक्सी लग रहे थे.
तभी मुझे उसका मस्ताना रूप दिखा, उसके पेटीकोट को बांधने वाला हिस्सा उस ओर ही था और वहाँ इतना गैप था कि आसानी से मेरा हाथ अंदर जा सकता था.
अँधेरा होने से उसके अंदर तो नहीं दिख रहा था, पर मैं हाथ से उसकी चूत को छू सकता था, वो भी उसके पति की मौजूदगी में…!
मैं यह सोचकर ही रोमांचित था कि उसकी चूत बिना किसी परदे के होगी.क्योंकि यह तो मैंने देख ही लिया था कि उसने पेटीकोट के अंदर कच्छी या कुछ और नहीं पहना है.
मैं रानी की चिकनी कमर पर हाथ रख फिसलाता हुआ वहाँ तक ले गया.वो तो सलोनी की मस्ती देख खुश हो रही थी, मैंने अपना हाथ उस गैप में घुसा दिया और सीधे उँगलियों को जांघों के जोड़ तक ले गया.
रानी- ओह प्लीज… मत करो ना… अह्ह्हाआ!उसने बहुत हल्की सी ही आवाज निकाली और घूमकर अपने पति की ओर देखा.पर उसको कुछ पता नहीं चला, उसने एक बार तिरछी नजर से तो देखा, फिर वापस उसी कमरे में देखने लगा.
रानी भी ज्यादा शोर तो कर नहीं सकती थी, अपने पति की ओर से संतुष्ट होकर उसने भी विरोध करना बंद कर दिया.
मैंने आसानी से ही अपनी उँगलियाँ उसकी चिकनी चूत तक पहुँचा दी.उसने भी अपनी चूत के बाल पूरी तरह साफ़ कर रखे थे, उसकी चूत के होंठ बाहर को उठे ही बहुत ही कोमल महसूस हो रहे थे.
मैंने उसकी पूरी चूत को सहलाते हुए उसके चूत के दाने को रगड़ना शुरू कर दिया.
रानी ने खुद ब खुद अपने पैरों के गैप को बढ़ा दिया जिससे मैं सरलता के साथ उसकी पूरी चूत को सहला पा रहा था.
रानी की चूत को सहलाते और एक उंगली से उसकी चूत के अंदर तक करते हुए मैंने दूसरे कमरे में देखा, मामाजी भी सलोनी से कुछ ज्यादा ही मजा ले रहे थे, वो उससे पूरी तरह सट गए थे.
अरे यह क्या… उन्होंने सलोनी का पेटीकोट पूरा ऊपर तक उठा दिया था और वो उसकी नंगी चूत को चूम रहे थे.
हम जहाँ थे, वहाँ से पूरा दृश्य साफ़ साफ़ दिख रहा था.
तभी रानी अपने पति को बोली- ओह, यह पापा को क्या हो गया? देखो, मैं आपसे नहीं कहती थी कि इनकी हरकतें ठीक नहीं है… पर आपको मेरी बात पर भरोसा ही नहीं था? उस बेचारी को सोते हुए भी परेशान कर रहे हैं.उसका पति केवल ‘ह्म्म्म्म्म’ बोल कर रह गया.
मैंने दोनों को चुप रहने को बोला और रानी की चूत में ऊँगली करता रहा.
उसकी चूत से भरभरा कर रस बाहर आ रहा था.
रानी इतना अधिक मदहोश हो गई थी कि उसने मेरे लण्ड तक को टटोलना शुरू कर दिया था.
मैंने भी उसकी मर्जी को समझा और ज़िप खोलकर अपना पहले से ही तनतनाया लण्ड बाहर निकाल लिया.
मैंने रानी की आँखों में प्रशंसा देखी, उसने मेरे लण्ड को पकड़ लिया.इतना कुछ तो हो गया था, अब यह देखना था कि क्या रानी का पति अपने सामने ही मुझे रानी की इस रस भरी चूत में लण्ड डालने देगा या नहीं?
मैं तो मान भी जाऊँ पर मुझे नहीं लगता कि अब मेरा लण्ड मानेगा.
और उधर मामाजी क्या केवल सलोनी की चूत चाटकर ही संतुष्ट हो जाएँगे या फिर आगे भी बढ़ेंगे.
फिर अगर बढ़े तो क्या सलोनी मना करेगी या उनका सहयोग करेगी?
देखो क्या होता है?
कहानी जारी रहेगी
जबकि उसका पेटीकोट घुटनों तक था.
रानी की गोरी गोरी पिंडली और पाँव में पड़े पाजेब बहुत ही सेक्सी लग रहे थे.
तभी मुझे उसका मस्ताना रूप दिखा, उसके पेटीकोट को बांधने वाला हिस्सा उस ओर ही था और वहाँ इतना गैप था कि आसानी से मेरा हाथ अंदर जा सकता था.
अँधेरा होने से उसके अंदर तो नहीं दिख रहा था, पर मैं हाथ से उसकी चूत को छू सकता था, वो भी उसके पति की मौजूदगी में…!
मैं यह सोचकर ही रोमांचित था कि उसकी चूत बिना किसी परदे के होगी.क्योंकि यह तो मैंने देख ही लिया था कि उसने पेटीकोट के अंदर कच्छी या कुछ और नहीं पहना है.
मैं रानी की चिकनी कमर पर हाथ रख फिसलाता हुआ वहाँ तक ले गया.वो तो सलोनी की मस्ती देख खुश हो रही थी, मैंने अपना हाथ उस गैप में घुसा दिया और सीधे उँगलियों को जांघों के जोड़ तक ले गया.
रानी- ओह प्लीज… मत करो ना… अह्ह्हाआ!उसने बहुत हल्की सी ही आवाज निकाली और घूमकर अपने पति की ओर देखा.पर उसको कुछ पता नहीं चला, उसने एक बार तिरछी नजर से तो देखा, फिर वापस उसी कमरे में देखने लगा.
रानी भी ज्यादा शोर तो कर नहीं सकती थी, अपने पति की ओर से संतुष्ट होकर उसने भी विरोध करना बंद कर दिया.
मैंने आसानी से ही अपनी उँगलियाँ उसकी चिकनी चूत तक पहुँचा दी.उसने भी अपनी चूत के बाल पूरी तरह साफ़ कर रखे थे, उसकी चूत के होंठ बाहर को उठे ही बहुत ही कोमल महसूस हो रहे थे.
मैंने उसकी पूरी चूत को सहलाते हुए उसके चूत के दाने को रगड़ना शुरू कर दिया.
रानी ने खुद ब खुद अपने पैरों के गैप को बढ़ा दिया जिससे मैं सरलता के साथ उसकी पूरी चूत को सहला पा रहा था.
रानी की चूत को सहलाते और एक उंगली से उसकी चूत के अंदर तक करते हुए मैंने दूसरे कमरे में देखा, मामाजी भी सलोनी से कुछ ज्यादा ही मजा ले रहे थे, वो उससे पूरी तरह सट गए थे.
अरे यह क्या… उन्होंने सलोनी का पेटीकोट पूरा ऊपर तक उठा दिया था और वो उसकी नंगी चूत को चूम रहे थे.
हम जहाँ थे, वहाँ से पूरा दृश्य साफ़ साफ़ दिख रहा था.
तभी रानी अपने पति को बोली- ओह, यह पापा को क्या हो गया? देखो, मैं आपसे नहीं कहती थी कि इनकी हरकतें ठीक नहीं है… पर आपको मेरी बात पर भरोसा ही नहीं था? उस बेचारी को सोते हुए भी परेशान कर रहे हैं.उसका पति केवल ‘ह्म्म्म्म्म’ बोल कर रह गया.
मैंने दोनों को चुप रहने को बोला और रानी की चूत में ऊँगली करता रहा.
उसकी चूत से भरभरा कर रस बाहर आ रहा था.
रानी इतना अधिक मदहोश हो गई थी कि उसने मेरे लण्ड तक को टटोलना शुरू कर दिया था.
मैंने भी उसकी मर्जी को समझा और ज़िप खोलकर अपना पहले से ही तनतनाया लण्ड बाहर निकाल लिया.
मैंने रानी की आँखों में प्रशंसा देखी, उसने मेरे लण्ड को पकड़ लिया.इतना कुछ तो हो गया था, अब यह देखना था कि क्या रानी का पति अपने सामने ही मुझे रानी की इस रस भरी चूत में लण्ड डालने देगा या नहीं?
मैं तो मान भी जाऊँ पर मुझे नहीं लगता कि अब मेरा लण्ड मानेगा.
और उधर मामाजी क्या केवल सलोनी की चूत चाटकर ही संतुष्ट हो जाएँगे या फिर आगे भी बढ़ेंगे.
फिर अगर बढ़े तो क्या सलोनी मना करेगी या उनका सहयोग करेगी?
देखो क्या होता है?
कहानी जारी रहेगी