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मेरी चालू बीवी complete

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अपडेट 149

अब तक आपने पढ़ा…मैंने शॉर्ट्स में हाथ डाल कर सलोनी की चिकनी चूत को सहलाया और शॉर्ट्स नीचे सलोनी के पैरों में गिर गई, सलोनी नीचे से पूरी नंगी थी, उसने पैन्टी नहीं पहन रखी थी!

तभी बाहर से हल्की सी आहट सी हुई… कौन होगा?जोगिंदर ताऊ… पप्पू… कलुआ… या कोई और???

दरवाज़े की तरफ़ मेरी पीठ थी, मैं तो देख नहीं सका पर सलोनी ने तो जरूर देख लिया होगा.कोई भी हो, मुझे क्या फ़र्क पड़ता है, जो बाहर थे वे तीनों तो सलोनी को नंगी देख ही चुके थे, उसके साथ काफ़ी कुछ कर चुके थे.पप्पू और कलुआ ने तो सलोनी को जम कर चोदा था और जोगिंदर ताऊ ने भी कोई कसर नहीं छोड़ी थी.

देख रहे हैं तो देखने दो… अब मुझे भी मजा आएगा कि कोई छिप कर हमारी चुदाई देख रहा है.और मैं अपनी जानम सलोनी को मज़े से चोदूँगा.

मैंने सलोनी को नीचे उसके घुटनों पर बैठाया और उसने भी मेरी निक्कर नीचे करके लंड को आज़ाद कर लिया और सीधे सलोनी के होंठों के बीच घुस गया.

सलोनी चटकारे ले लेकर मेरे लंड को चूसने लगी रही जब कि उसकी नज़र दरवाजे की तरफ़ ही थी.

मुझे भी आभास हो रहा था कि परदा काफी हट गया है और जो भी आया था या आए थे, वे मज़े से इस नज़ारे का लुत्फ़ उठा रहे थे.

तभी सलोनी ने लंड चूसते चूसते ही अपने बाजू ऊपर उठा कर अपना टॉप निकाल दिया तो अब वह पूरी नंगी होकर मेरे लंड को किसी बावरी की भान्ति चूस रही थी.

इतना मज़ा मुझे कभी नहीं आया… सलोनी का इस प्रकार से लंड चूसना मैंने पहले कभी नहीं देखा था. सलोनी मेरे लन्ड को ऐसे चूस रही थी जैसे उसमें किसी फ़िरंगन विदेशी सेक्सी पोर्न एक्ट्रेस की आत्मा आ गई हो.

वह पूरे लंड को अपनी लार से गीला कर चुकी थी, उसका थूक टपक रहा था मगर लंड चूसने की सलोनी की गति बढ़ती जा रही थी.

मैंने तुरंत अपनी शर्ट निकाल कर अपने बदन का तापमान सही किया, सलोनी को उठा कर खड़ी किया जिससे मेरा पानी सलोनी के मुँह में ही ना निकल जाए!

मैं सलोनी को पूरी ताकत से चोदना चाहता था जिससे बाहर वालों को भी पता चल जाए कि सलोनी चूत चुदाई की प्यासी नहीं है, मैं भी उसको बहुत बढ़िया चोदता हूँ और सलोनी सिर्फ़ ज्यादा मज़े लेने के लिए ही गैरों से चुदवाती है.

मैंने सलोनी को बेड के किनारे पर इस प्रकार लिटाया कि उसके चूतड़ आगे को निकले हुए थे, उसकी दोनों टांगों को ऊपर हवा में उठा कर मैंने सलोनी की चूत देखी जो कुछ समय पहले ही चुदने के बाद भी फूली हुई थी और उसमें से अभी भी पानी रिस रहा था.

शायद इसको देख कर मुझे काफ़ी रोमांच हो रहा था, मैंने साइड से हल्के से दरवाज़े की तरफ़ देखा, मुझे 1-2 परछाई सी नज़र आई, ये वही लड़के और ताऊ ही थे जो हमारी चुदाई सरे आम देख कर मज़ा लूट रहे थे.

मैंने अपना लंड सलोनी की चूत के मुँह पर रखा और एक ही धक्के में आधा लंड अंदर घुस गया.

सलोनी- अह्हह ह्ह्हहा हयी…काफ़ी ज़ोर से सीत्कार भरी सलोनी ने!

दूसरे तेज धक्के में लंड पूरा चूत की जड़ तक पहुंच गया और सलोनी ने इस और तेज सिसकारी ली- अह्ह्ह्ह आहह… हई याह्ह्ह!इसके साथ ही अपनी कमर और चूतड़ पूरे हवा में उठा कर मेरे लंड का स्वागत किया.

मैंने भी सलोनी के मखमल जैसे कूल्हों पर अपने हाथ जमाये और मेरी कमर के साथ सलोनी की कमर भी लयबद्ध थिरकने लगी..!

पट पट… चिप चिप… पच पच… चुदाई का मधुर संगीत गूंजने लगा था, दुनिया का कोई भी संगीत इस संगीत के सामने बेकार था.हम दोनों के साथ साथ वे तीनों भी हमें देख कर भरपूर आनन्द ले रहे थे.

अह… आह… ओह… आअ… हम्म… उम्म… फक फक… अगले दस मिनट ऐसे मजेदार संगीत को सुनने में बीत गये.

मुझे चरम आनन्द का अहसास होने लगा, सलोनी भी अपनी चूत को बार बार संकुचित कर रही थी- हहआ आह्ह बस्स्स…

और मैंने सलोनी को तुरन्त पलट कर घोड़ी बना दिया, इस पोज़ में पानी निकालने में अलग ही मज़ा है.

मैंने पीछे से ही एक बार में पूरा लंड चूत में घुसा दिया.

‘अहह हआ हहहा…’ सलोनी आगे को हुचकी.

मैंने कस कर उसके चूतड़ों को पकड़ा… और इस बार एकदम तेज गति से लंड आगे पीछे… और हहहआ सिसकारी… मेरी नंगी जाँघें तेज तेज़ से सलोनी के चूतड़ों से टकरा रही थी.

हहआ… और सैलाब आने लगा, गति बढ़ने लगी, साथ ही आवाज भी… हहहआ

और मैंने लंड बाहर निकाला और पिचकारी पिच पिच… सलोनी की पीठ से लेकर चूतड़ों तक… सब गीला… 5-6 पिचकारियों के बाद सलोनी ने खुद घूम कर मेरे लंड को हाथ से पकड़ा और उसने कमाल कर दिया, दरवाज़े की तरफ़ देखते हुये सलोनी ने मेरे लंड को अपने मुँह में ले लिया और उसे साफ करने लगी.

अभी भी काफ़ी मलाई थी जो सलोनी ने मजे से चाट ली.उस वक्त पूरी तरह बदला हुआ रूप था सलोनी का!जो मजा ऑफिस में वहाँ की लड़कियाँ देती हैं, वही मज़ा इस वक्त सलोनी मुझे दे रही थी.उसने चाट चाट कर मेरे लंड को अच्छी तरह साफ कर दिया था.

अहाह… आ अब मुझसे रुका नहीं गया, मैं बेड पर लेट कर हांफ़ने लगा.सलोनी भी मेरे पास लेट गई, उसका हाथ अभी मेरे लंड पर ही था.

मैंने हल्की तिरछी नज़र से दरवाजे की ओर देखा, दरवाज़े का पर्दा काफ़ी हटा हुआ था और तीनों ही छिप कर नहीं सामने ही खड़े हुए अपने लंडों को बाहर निकाले हुए मसल रहे थे.

अरे यह क्या… वे तो सलोनी को इशारे भी कर रहे थे! सलोनी उन्हें देखते हुए ही मेरे लंड को मसल रही थी.शायद सलोनी उनके लंडों को देखते हुए कुछ और ही सोच रही हो कि यह किसी और का लंड है?

और तभी!!!

कहानी जारी रहेगी.
 
अपडेट 150

तीनों ही अपने लन्डों को बाहर निकाल कर सहला रहे थे और सलोनी को इशारे कर रहे थे, सलोनी भी उन्हें देखते हुये मेरे लन्ड को मसल रही थी.शायद सलोनी उनके लौड़ों को देख कर कुछ और सोच रही थी कि यह उन तीनों में से किसी लंड है?और तभी…!!

सलोनी मेरे लंड को छोड़ नंगी ही उठ कर खड़ी हो गई, बोली- मैं जरा फ्रेश हो कर आ रही हूँ!बस इतना कह कर वह बाथरूम की तरफ़ नंगी चली गई. वैसे भी वह सेक्स करने के बाद कपड़े नहीं पहनती!

बाथरूम का एक दरवाज़ा बाहर वाले कमरे में खुलता है, शायद उसने कोई प्रोग्राम सोचा था.मैं ऐसे ही नंगा लेटा हुआ था कि बाहर से हल्की हल्की आवाजें आने लगी और उधर का दरवाजा भी हल्के से खोलने की आवाज आई,मैंने उसी पर्दे के पीछे से देखा, थोड़ा सा अन्तर आया, वही कमरा था… वही पर्दा था, पहले मैं उस ओर था… इस बार इस तरफ़ हूँ.

पहले मैं ड्राइंगरूम में था, अब बैडरूम में हूँ, मगर वे चारों फ़िर से वही सब करने लगे थे.

सलोनी पूरी नग्न खड़ी थी, कलुआ, पप्पू खड़े हुए ही उसके स्तन मसल रहे थे ताऊ नीचे बैठ कर सलोनी की दोनों टांगों को फैला कर मेरे लंड के रस से भीगी हुई सलोनी की चूत चाट रहे थे..!

सलोनी की आँखें बन्द थी वरना वह मुझे पर्दे से झाँकते हुए देख सकती थी.उसको बहुत मज़ा आ रहा होगा, उसने पप्पू और कलुआ के लंड अपने हाठों में पकड़े हुये थे.

कुछ ही देर में सलोनी ने अपने हाथों से उन लड़कों का पानी निकाल दिया जो बैठे हुये जोगिंदर ताऊ पर गिरा.लेकिन उन्होंने कोई गुस्सा नहीं दिखाया, आराम से सलोनी की चूत को चाटते रहे.

फिर सलोनी ताऊ को खड़ा करके उनका लंड भी हिलाने लगी.जोगिंदर ताऊ ने सलोनी को कुछ कहा, सलोनी ने एक बार मना किया लेकिन फिर नीचे बैठ कर वह उनके लंड को मुँह में लेकर चूसने लगी.

और कुछ देर बाद ताऊ का वीर्य भी निकल गया.

सलोनी वैसे ही बाथरूम से अन्दर आई… मैं जल्दी से बेड पर आकर सो गया.सलोनी कुछ देर बाद कमरे में आई और मुझे उठाने लगी.

उसने अब नाईटी पहन ली थी लेकिन नाईटी के अन्दर पता नहीं उसने कुछ पहना भी या नहीं!

सलोनी- सुनो लगता है कि वे बाहर अपना काम कर चुके हैं, जाओ उनको वापिस भेज आओ, मुझे घर के काम भी निबटाने हैं अब!

मुझे हंसी आ गई, मुझे पता था कि उन्होंने कौन सा काम निपटाया था.

फिर भी मैंने उठ कर टी-शर्ट और लोअर पहना और बाहर आया.

बाहर अब सब सामान्य था… जैसे वे कुछ जानते ही नहीं! मुझको भी सामान्य ही रहना था क्योंकि तभी मेरी इज्जत रह सकती थी.

ताऊ ने कहा- भाई, काम हो गया, कल सवेरे हम सामान यहीं से ट्रक में लदवा देंगे, यहीं से चला जाएगा. पर आप लोग कब जाएँगे?

मैंने कहा केवल इतना- बता दूँगा! अभी तुम जाओ, ये 500 रुपए लो, कुछ खा पी लेना, बाकी मैंने ट्रांसपोर्ट में पैसे दे दिये हैं.

मेरे काफ़ी कहने पर भी उन्होंने पैसे नहीं पकड़े और मुझे नमस्ते कर के चले गये.जाते हुए उनकी निगाहें मेरे पीछे थी… शायद सलोनी को ढूंढ रहे थे पर सलोनी अब बाहर नहीं आई.

रात में मैंने सलोनी को फ़िर से चोदा क्योंकि लंड बहुत खड़ा हो रहा था.अब मैंने तो अपनी सभी सखियों से नाता तोड़ लिया था तो अब सिर्फ़ सलोनी की ही चूत थी जिसे चोद कर मैं मज़े ले सकता था.

सामने वाली नलिनी भाभी और अरविन्द अंकल भी अपने बच्चों के पास विदेश गये हुये थे.मैंने ऑफिस जाना बन्द कर दिया था क्योंकि वहाँ का चार्ज मैं दे चुका था, इसलिये वहाँ वाली चूतें भी नहीं मिल सकती थी.

1-2 दिन में हमने भी निकलना था मगर जाने से पहले सलोनी को यह मज़ा मिलना था, उसने ले लिया!वैसे भी अब यहाँ कुछ भी करके जाए क्या फरक पड़ना था.

अगले दिन मैं सवेरे जल्दी निकल पड़ा बकाया काम निबटाने के लिये.जब वापिस आया तो कम्पाऊण्ड में एक ट्रक खड़ा था, उसमें हमारा सामान लदा हुआ था.

वाह.. बहुत अच्छी सर्विस है इन लोगों की.मैं तो ट्रान्सपोर्ट में फ़ोन करने की सोच ही रहा था लेकिन ये लोग तो अपना काम कर चुके थे.

ट्रक जाने को तैयार था, मैंने ड्राईवर से पूछा- लद गया सब सामान?उसने कहा- हां भाई, सब सामान आ गया… अब हम निकल ही रहे हैं वैसे अभी जोगिंदर ताऊ अन्दर ही हैं.

मेरा दिमाग तुरन्त क्लिक कर गया.जोगिंदर ताऊ… यह तो शायद वही कल वाला बूढ़ा है, वो अन्दर क्या कर रहा है? अकेला है या उसके साथ वे छोकरे भी हैं पप्पू, कलुआ!

मैं जल्दी से अन्दर अपनी बिल्डिंग तक आया… पर मेरी किस्मत कुछ साथ नहीं दे रही थी, बिजली नहीं थी तो लिफ्ट बन्द थी.

मैं फ़टाफ़ट सीढ़ियाँ चढ़ कर अपने फ्लोर तक पहुँचा और पहले आस पास का आईडिया लिया.

मुझे पता चल गया कि जोगिंदर घर के अन्दर ही है.कौन कौन हैं कुछ नहीं पता!

मैंने जेब से फ्लैट की चाबी निकाली और जितनी धीरे हो सकता था, उतनी धीरे से दरवाज़ा खोला.

जैसे अपने घर में नहीं किसी दूसरे के घर में चोरी छिपे घुस रहा हूँ.

मैंने बहुत जरा सा दरवाजा खोल कर अन्दर झांका… इस रूम में तो कोई नहीं दिखा, यहाँ कोई फर्नीचर भी नहीं था कि कोई छुप सकता!हाँ बैडरूम से आवाजें भी आ रही थी और परछाई भी दिख रही थी.

आवाज में गूंज थी, खाली घर में ऐसे आवाज गूंजती है.

मैंने दरवाजा हल्के से बन्द किया और बैडरूम की ओर बढ़ा.आज भी उन तीनों में से ही होंगे या फिर कोई और भी हो सकता है?

क्या आज सलोनी कफिर रंगरेलियाँ मना रही है?

पर्दा पहले से ही सरका हुआ था, यह अच्छा भी था और बुरा भी, इससे मेरे देखे जाने का चांस अधिक था.फिर भी मैंने एक तरफ़ खड़े हो कर अन्दर देखा!

यह क्या?

कहानी जारी रहेगी.
 
अपडेट 151

सलोनी फिर रंगरलियां मना रही है?मैंने अन्दर देखा कि अन्दर सिर्फ़ जोगिंदर ताऊ ही थे… मतलब आज पप्पू और कलुआ नहीं आए, या फिर चले गये थे.

मेरी बीवी सलोनी पूरी नंगी बेड पर लेटी थी उसके कपड़े फर्श पर फ़ैले हुए थे.जोगिंदर ताऊ के तन पर सिर्फ़ बनियान थी, उनकी लुंगी और अण्डरवियर भी वहीं पड़े हुए थे.

पता नहीं ताऊ सलोनी को चोद चुके थे या फिर उसके बदन को चूस चाट कर ही मज़े ले रहे थे, अभी वे सलोनी की चूचियाँ सहला चूस रहे थे.

सलोनी का हाथ उनके खड़े हुये लंड पर धीरे धीरे ऊपर नीचे फिसल रहा था.

मैं उनकी बातें सुनने का यत्न करने लगा.

जोगिंदर - मेमसाहब आप बहुत सुन्दर तो हो ही… बहुत सेक्सी भी हो… मुझको कल पूरी रात नींद नहीं आई, सिर्फ़ आपके बारे में सोचता रहा, मैंने अपने हाथ से तीन बार मुट्ठ मार कर लंड का माल निकाला तब भी यह शान्त नहीं हुआ, बस आपकी यह प्यारी चूत ही याद आती रही!

कलुआ और पप्पू तो आपको चोद कर इतने मस्त हो गये कि आज़ आए ही नहीं काम पर… आपने उनको इतना मज़ा दिया कि अब 2-3 दिन उनको होश नहीं आयेगा.

सलोनी- अहहा हा हा हहहा…सलोनी हंसने लगी.

जोगिंदर - मेमसाहब, क्या आप मुझे वो ज़न्नत का मज़ा नहीं देंगी जो आपने उन दोनों को दिया?

सलोनी- मैंने कब मना किया ताऊ? कल तो उन लड़कों के सामने मुझे शरम सी आ रही थी, मुझे तो आपका लंड कल बहुत पसन्द आया था, सलोनी की चुदाई तो पहले भी देखी थी… और उसके साथ बहुत मज़े भी किए थे लेकिन इस वक्त उसकी पहली चुदाई वाली घटना, वो भी उसी के मुख से इतने सेक्सी अन्दाज़ में सुनने के बाद मेरे लंड और मन को एक अलग ही रोमांच मिल रहा था.

मैंने तुरन्त अपना लंड पैंट से बाहर निकाला और मेरा हाथ लंड पर वैसे ही चलने लगा जैसे सलोनी जोगिंदर के लंड को सहला रही थी.वाह रे किस्मत… बीवी मेरी… बैडरूम मेरा… और मैं बाहर खड़ा अपने लंड को अपने हाथ से सहला रहा था जबकि यह बूढ़ा कमीना मेरी बीवी की बगल में नंगा लेट कर मेरी बीवी के कोमल हाथ से अपने लंड को सहलवा रहा है.

पर फिर भी मैं सह रहा था क्योंकि अपनी जो बातें वह ताऊ को बता रही थी, मुझको तो शायद ना ही बताती.

जोगिंदर ताऊ- हहहआ आपकी यही अदायें तो मारू हैं मेमसाहब, आपने जब से कल अपनी पहली चुदाई वो बातें बताई… सोच कर ही लंड के पानी की बूँदे टपक जाती हैं. आज आगे की बात सुनते हुये ही आपको चोदूँगा तो आप देखना… आप को ऐसा लगेगा कि सीड ही चोद रहे हैं आप को और आप फिर से कॉलेज वाली जिन्दगी में पहुंच गई हैं.

कहते हुए जोगिंदर ताऊ ने कस के सलोनी के चूचों को मसला और हल्के से दांतों से काटा.

मुझे यह इसलिये पता चल गया कि सलोनी के मुख से तेज सीत्कार निकली और उसने मेरे परिचित अन्दाज़ में ही कहा- आहहहआ दांतों से नहीं… आहहह

और जोगिंदर ताऊ अब उठकर कल की तरह ही सलोनी की जांघों के बीच आ गये और उसकी चूत को चाटते हुए बोले- तो मेमसाहब यह सीड भाई दूसरे थे जिन्होंने आपकी चूत चोदी उन अंकल के बाद जिन्होंने आप को सबसे पहले चोदा था?

जियो जोगिंदर ताऊ मेरे मन की हर बात पूछने के लिए… यही सब तो मैं न जाने कब से जानना चाहता रहा था.

सलोनी- हहहआ… क्या करते हो ताऊ? चूसो… हहआँ और चूसो… हहहाँआ पूरा… नहीं य अहहहा और…

सलोनी तो अपनी चूत की चुसाई का अब पूरा मज़ा लेने लगी थी.

सच में जोगिंदर चूत चाटने में पूरे तजुर्बेकार थे, उनको तो चटाई के मामले में कुत्ते की श्रेणी में ही रखना सही होगा, अपनी जीभ को ऊपर से नीचे तक फ़िरा कर सलोनी की चिकनी चूत चाट रहे थे, सपड़ सपर सपड़… सपर… की आवाजें बाहर तक आ रही थी.

सलोनी- आहहहा हहहा ओह्ह ऊई… यम्माह… अहम्मा मआ मम्मी मेरी हहआ बुरररर… हह!पता नहीं कैसी कैसी आवाजें सलोनी अपने मुख से निकाल रही थी.

और ताऊ समझ गये कि सलोनी ऐसे कुछ नहीं बोलेगी… उन्होंने चूत चाटना बन्द किया और ताऊ ने सलोनी की जांघों को पूरा चौड़ा करके चुदाई के आसन में आ गये.

अब उनका सख्त खड़ा लंड सीधे सलोनी की चूत के मुँह पर था, ताऊ ने लन्ड को हाथ से निशाने पर नहीं नहीं किया, बस उसे चूत के छेद के ऊपर टिकाया और सलोनी की एक जोर सी चीख निकली उसके मुख से- आहह आअहहहा… आअ!

ताऊ ने एक झटके में लंड का अगला हिस्सा चूत के अन्दर घुसा दिया था.

सलोनी – धीरे हल्के से… हहहआ ऐसा ही दर्द तो सीड मुझे देता था हर बार!

जोगिंदर ताऊ- हहा अरे, मैं कुछ पूछ रहा हूँ ना आपसे मेमसाहब… बताओ ना… क्या सीड आपका दूसरा लंड था जिससे आपने चुदवाया?

सलोनी- ना! पहले पूरा धीरे धीरे अंदर करो, ऐसे कैसे बताऊँ आहहहा…

सलोनी तो ऐसे कर रही थी जैसे पहली बार चुदवा रही हो.

पता नहीं उसको वाकयी दर्द हो रहा था या यह भी उसकी सेक्सी अदाओं में से एक थी.
 
जोगिंदर ताऊ ने एक बार फिर से कोशिश की मगर आराम से लंड कैसे अन्दर सरकता? सलोनी कैसी भी थी मगर उसको यह तो ख़ासियत ऊपर वाले से ही मिली थी, गॉड गिफ्ट!

कि उसकी चूत अंदर से एकदम कसी और ऊपर से बिल्कुल किशोरियों जैसी दिखती है.इसलिये जो सलोनी की चूत को एक बार देख ले, वह तो पागल ही हो जाता है.

अगर किसी ने चोद लिया, वह तो सलोनी पर अपना सब कुछ कुर्बान करने को तैयार हो जाता है.

जोगिंदर ने कई बार प्रयत्न किया कि आराम से धीरे धीरे लंड अन्दर जाये पर जितना वो अन्दर धकेलते, सलोनी की चूत उतना ही उसको बाहर को कर देती.

उनका हर धक्का बेकार जा रहा था, लन्ड का अगला दो इंच का हिस्सा ही चूत के अन्दर गया नज़र आ रहा था, बाकी लंड बाहर ही था.

और ताऊ तो पूरे खाये खेले थे, उनको लगा कि ऐसे बात नहीं बनेगी तो उन्होंने सलोनी के कूल्हों पर अपने दोनों हाथ कसे, उसको पलंग से थोड़ा ऊपर उठाया और इस बार कस कर एक धक्का लगा दिया.

एक बार फिर से सलोनी की चीख निकली- आई…ईई आआह्ह… ओह्ह…

अब जोगिंदर ताऊ को सफ़लता मिल गई, उनका आधे से ज्यादा लंड चूत की दीवारों को फ़ैलाते हुए अन्दर चला गया था.ताऊ का लंड चिकना था, सलोनी को बहुत मज़ा दे रहा होगा.यह बात सलोनी के चेहरे की मस्ती से ही पता चल रही थी.

और ताऊ ने तेज तेज धक्के लगाते हुये पूरा लंड उसकी चूत में घुसा दिया.

सलोनी के मुख से सिसकारियाँ और आनन्द मिश्रित आवाजें माहौल को जबरदस्त सेक्सी बना रही थी.

फिर अचानक से ताऊ के लंड का सुपारा फिसलते हुए सीधा सलोनी की चूत के अंदर चला गया क्योंकि उसकी चूत पानी से भीगी हुई थी. लंड के चूत के अंदर जाते ही सलोनी मचल उठी. सलोनी की चूत बहुत कसी है.

ताऊ का मोटा लंड चूत में जाते ही सलोनी एकदम हैरान रह गई,

सलोनी- ताऊ, आपका लंड इतना मोटा क्यों लग रहा है आज?

अब ताऊ ऊपर नीचे होकर धक्के देने लगे तो सलोनी को ज्यादा मजा आने लगा आज इतना मोटा लम्बा लंड उसकी चूत मे जा रहा था.

वह एकदम चिल्लाती हुई बोली

सलोनी- उह्ह ओह ताऊ … थोड़ा ठहरो … आह्ह ताऊ आईह …

सलोनी ताऊ को अपने नंगे जिस्म पर से हटाने की कोशिश करने लगी परन्तु ताऊ ने उसे अपनी बांहों में कसके जकड़ रखा था, सलोनी ज़रा भी कामयाब नहीं हो पा रही थी.

तब ताऊ ने लंड को चूत के और अंदर घुसाते हुए पूछा

ताऊ- मेम साब, अच्छा नहीं लग रहा क्या?

सलोनी ताऊ की बात सुन कर मुस्कुरा दी और अपने चूतड़ उछाल कर ताऊ की बात का जवाब दिया.

सलोनी इतनी ज्यादा सेक्स की भूखी है कि इतने लम्बे मोटे लंड का मजा वो छोड़ नहीं सकती थी, चाहे वो लंड किसी का भी क्यों ना हो!

फिर ताऊ सलोनी के चूचों को पकड़ कर मसलने लगे और अब सलोनी अपने आपको कंट्रोल कर रही थी लेकिन तब भी मजे से उसकी सिकारियां निकली जा रही थी ‘उम्म्ह… अहह… हय… याह…’

ताऊ का लंड सलोनी की चूत को रगड़ रहा था. ताऊ सलोनी के होंठों को चूसने लगे. और अब लंड ज़ोर ज़ोर से चूत के अंदर बाहर हो रहा था.

आख़िर वो कंट्रोल नहीं कर पाई और अब ताऊ ने उसके निप्पल को जैसे ही अपने मुंह में लिया तो सलोनी ज़ोर ज़ोर अपने चूतड़ ऊपर नीचे करने लगी.

फिर वो इतने झटके के साथ ऊपर उठी कि चूत में से बहुत सारा पानी निकल आया.

और ताऊ हंसते हुए बोले

ताऊ- तो अब बोलो मेरी जाने जिगर … निकल गया ना चूत का पानी!

अब ताऊ सलोनी की चूत के ऊपर लंड रगड़ रहे थे. इस बीच उन्होंने सलोनी की चूत में वापस झटका मारा तो पूरा का लंड अंदर तक धंस गया. सलोनी की पूरी चूत पानी से लबालब थी. ताऊ ने सलोनी को जांघें चौड़ी करने को कहा. और जैसे ही सलोनी ने अपनी टांगें फैलायी तो ताऊ अपन लंड को सलोनी की चूत के अन्दर-बाहर पेलने लगे.

ताऊ बहुत ज़ोर से धक्के लगा रहे थे, सलोनी के मुंह से उम्म्ह… अहह… हय… याह… ही निकल रहा था और उसने अपने पैर ताऊ की गांड पर रख लिए. अब ताऊ का सारा लंड सलोनी की कसी चूत में था और पच पच की सी आवाजें आ रही थी. सलोनी अपने पैरों से ताऊ की गांड को दबा रही थि जिससे उनका लंड उसकी चूत के ज्यादा अंदर तक जाए.

उन की चुदाई चलते आधा घन्टा तो हो ही गया था. तभी सलोनी एक बार फिर परमानन्द की तरफ बढ़ चली और साथ ही ताऊ ने अपनी पानी उसकी चूत में ही छोड़ दीया.

ताऊ कुछ देर तक सलोनी के नंगे जिस्म के ऊपर ही पड़े रहे.

तभी दरवाजे पर ठक ठक हुई तो सलोनी तो नही पर ताऊ घबरा गये और जल्दी से कपड़े पहन कर पिछले दरवाजे से निकल गये सलोनी ने नाइटी पहनी और दरवाजा खोला तो सामने कुरियर वाला था जो पार्सल लेकर आया था सलोनी ने उससे पार्सल लिया और दरवाजा बंद कर दिया.मैं भी तब तक किचन में छुप गया था.फिर मैं भी बाहर जाकर थोड़ी देर घुम कर एक सिगरेट पी मैंने देखा कि जोगिंदर ताऊ सामान लदा हुआ ट्रक लेकर चले गये है. मुझे मालूम है सलोनी चुप नही बैठने वाली वह वहां भी खूब मजे लेने वाली है.और मैं भी अब सीधी साधी ज़िन्दगी नही जी सकता.शायद सलोनी निम्फोमेनिया बीमारी से पीड़ित है.जिसमे आप किसी के साथ भी चुदाई करते है फिर वह बच्चा हो या बूढा कोई फर्क नही पड़ता सिर्फ वह मर्द होना चाहिए बस.और शायद मैं भी किसी मानसिक बीमारी से पीड़ित हु क्यों कि मुझे भी अपनी बीवी को किसी और से चुदते हुये देखने मैं बहुत मजा आता है, अब हम भी कल निकलने वाले है अब नयी जगह जा रहे है नयी जगह नये लोग नया एडवेंचर हमारी राह देख रहा है चलो अब हम भी चलते है.

समाप्त……
 
दोस्तो इस कहानी के बारे में अपने विचार जरूर कमेंट करे ताकि मैं अपनी अगली कहानियों में सुधार कर सकू साथ बने रहने के लिये आप सबका बहुत धन्यवाद.... सतीश
 
कमेंट करने के लिये आप सब भाईयों का बहुत धन्यवाद, दोस्तो यह कहानी कंपलीट हो गयी है...सतीश
 
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