• Hello Friends You can Register on the Forum and by posting you can earn money too.

मेरी दीदी दीपा

  • Thread starter Thread starter StoryPublisher
  • Start date Start date
S

StoryPublisher

Guest
मेरी बडी बहन दिपा 26 साल की मद्मस्त जवानी है ! उसकी शादी दो साल पहले हुइ थी, पति देल्ही मै फ़ौजी थ्रे और दिदी अपने जवानी का आनंद ले रही थी ! दिपा खुसमिजाज लड्की थी और एक दिन वो मुझे फोन कि…….. “राहुल तुम दिदि से मिलने कब आओगे ?

(राहुल) राखी के पर्व मे आता हू दिदि, इंतजार करो ! ” मेरी नज़र दिदि के जिस्म पर अक्सर जाती थी, लेकिन कभी उन्हे नण्गा नही देखा था ! दिपा के दो मस्त-2 गोल चुचि मेरे लंड़ को उर्जा देते थे तो उनका भारी भरकम चुतर मेरी नजर के सामने घुमता रह्ता था ! राखी का पर्व आ गया और मै दिदी से मिल्ने को निकल गया, दोफ्हर 1:00 बजे उनके घर पहुंचा, दिदी गुलाबी साड़ी और ब्लाउज मे गदराइ माल लग रही थी! दिपा के घर पहुंचकर मै स्नान किया और दोनो साथ मे खाना खाये, वो मुस्कुराते हुए बोली……. “राहुल अब तुम आराम करो

(राहुल) लेकिन आप क्या काम करेगी

(दिपा) काम क्या है जिजा तुम्हारे बाहर गये हुये है, चलो दोनो एक हि बिस्तर पर लेटकर बाते करेंग़े ! ”

दिपा का रंग़ गोरा, चेहरा खुबसुरत, ओंठ रसिली, कमर पतले, पेट सपाट और चुत्तर गोल गुम्बदाकार है, बुर को बार से मुक्त रखती है, जबकी बाल काले और लम्बे है, कोइ भी मर्द इनको देखकर चोदना जरुर चाहेगा! दिदी को देख मेरा लंड खड़ा हो जाता था, लेकिन शादि के बाद उनसे मुलाकात एक हि बार हुइ थी ! दिदी के साथ उनके बिस्तर पर लेटा और दोनो एक दुस्ररे के ओर मुह्न कर्के बात कर्ने लगे, उनके छाति से साड़ी निचे आ चुकि थी और उनका चुचि ब्लौओज से बाहर आने को आतुर था, मेरा ध्यान उनकी चुचि पर जा रहा था और फिर मै उंके चुचि को पकड़ लिया, जोर-2 से चुचि मसल्ता हुआ उनके ओंठ को चुम्ने लगा, वो बिरोध कर रही थी, लेकिन मै उनके जिस्म पर सवार हो गया! दिपा के चिक्ने बदन पर लेटकर उनके गुलाबी ओंठ को चुस्ने लगा, अब वो मेरे गिरफ़्त मे थी और मुझे उनके चिक्ने मांसल बदन का मजा मिल रहा था! दिपा मुझे कसकर पकड़ ली और अपने जिभ को मेरे मुह्न मे घुसा दी, उनका जिभ चुस्ता हुआ उनके बदन पर सवार था और वो मेरे बदन को सहला रही थी! कुछ देर बाद वो जिभ बाहर निकाल ली और दोनो बिस्तर पर बैठ कर एक दुसरे को नग्न करने लगे! दिपा के जिस्म पर से साड़ी, ब्लौउज और पेटिकोट निकाल कर उसके जिस्म को घुर्ने लगे, वो शर्मा रहि थी लेकिन मेरे 6-7 इंच लम्बे लंड को थाम्कर हिला रही थी!

दिपा को लेटाकर उनके पैर के पास बैठा और उनके चिक्ने-2 जण्घा को सह्लाने लगा, वो पैर सटाकर लेटी थी जिस्से की उसके बुर का दिदार नही हो पा रहा था! उसके चुतर के निचे एक तकिआ डाला और झुक्कर उसके जाङ्ह को चुम्ने लगा, वो अब गरम होने लगी और मै उसके चिक्ने जांङह को चुमता हुआ उसके चुचि को मसल्ने लगा, दिपा का पैर दो दिशा मै होने लगा और मुझे उस्के बुर का दिदार हो रहा था! मेरे लंड को बुर की भुख लग चुकि थी लेकिन चुदाइ अंत का काम था! अब दिदी का दोनो पैर फ़ल्का हुआ था और मै अप्ना चेह्रा उंके जण्घा के बिच कर दिया! दिपा के बुर को करीब से देख़्कर सुण्घने लगा, बुर के दोनो रान अलग थे आखिर मे दो साल से चुद जो रही थी! मै उंनके बुर को चुम्ने लगा और मेरी रांड बहन बुर को फ़ल्का दी, अब मेरा जिभ उंके बुर को चाट्ने लगा, मुझे काफ़ी मजा आ रहा था जब्की दिपा अप्ने पैर को पटक रही थी! दिदी के जण्घा को थाम्कर उसके बुर को कुत्ते कि तरह लपालप चाटने लगा, बुर का स्वाद ऐसा होता है आज पता चला! पल भर बाद दिदी के दोनो रान को मुह्न में लेकर चुस्ने लगा और दिदी तडपने लगी……. “राहुल अब बुर को कुते की तरह मत चुसो, चोदो मुझे सुना रे कुता

(राहुल) जरुर बे रंडी लेकिन मेरा लण्ड कौन चुसेगा. ”

मुझे वो बिस्तर पर सुलाकर मेरे कमर के पास बैठी और लण्ड को थाम्कर सर झुकाई, वो लंड के सुपाडे को अपने ओंठ पर रगड्ने लगी और मुझे आंख मारी, फिर वो मेरे पुरे लंड को मुह्न में लेकर चुसने लगी! दिपा मुह्न का झट्का लंड पर देने लगी और मेरा लंड उसके मुह्न मे पुरी तरह से खडा हो चुका था! कुछ देर बाद वो लंड को बाहर कि और जिभ से लंड को चाट्ने लगी, अब मेरा ध्यान दिपा कि बुर पर था! उसको चोद्कर लंड कि आग भुझाना था ! दिपा अब बेशरम कि तरह लेट्कर पैर को फ़ैला दी और अपने चुत पर हाथ फेरने लगी…… “राहुल अब देर मत करो, बुर को तुम्हरा लंड चाहिये ! ” मै दिदी के दोनो जण्घा के बिच लंड पकड़ कर बैठ गया और सुपाडा को बुर के छेद मे घुसाने लगा, धीरे-2 पुरा लंड बुर में चला गया और मेरा लंड गपागप बुर चोदने लगा! दिपा कि बुर सख्त थी और मेरा फ़ौलादी लंड बुर को चोद रहा था! दिदी के बदन पर सवार होकर पुरे गति से उनके बुर को चोद रहा था और वो मुझे कसकर पकड़े हुए अपने चुत्तर को उपर निचे करने लगी ! मेरा मुसल लंड बुर को रगरा दे रहा था और दो जिस्म आपस मे काम वास्ना का आनंद ले रहे थे! मेरे लंड से पानी निकलने का एह्सास हुआ और मै उनको तेज रफ़्तार से चोद्ते हुए ओंठ चुसने लगा, दिपा अपने चुत्तर को उपर निचे करते हुए हांफ़ रही थी, मेरा भी हाल खराब था! वो अब चिख्नने लगी…….. “अबे साले बुर मे आग लगी है, माल झाड बे, आह्हह ऊम्मम्मम अह्हह्ह. ” और मेरा लंड पुरी तरह से गरम हो चुका था, लगातार 12-14 मिनट से उसके बुर को चोद रहा था, अब चिखने लगा…… “आह्ह ले बे रंडी मेरा विर्य गिरा, पिला अपने बुर को आअह्हह्ह. ” और लंड से तेज गति मे विर्य निकला, मै लंड बुर में हि रहने दिया! दो नग्न जिस्म बिस्तर पर लेटे रहे और फिर दिपा मुझे चुम कर बोली……. “अग्ले चार दिन तक हम दोनो कपडा नही पहनेगे. ” दिदी को चोद्कर बहुत मजा आया !

 
दिपा दिदि 26 साल की शादी शुदा औरत/लड़्की है और वो भला 21 साल के लड़्के के साथ चुदवाने से क्यो परहेज करेगी अगर लंड़ मोटा, लम्बा और देर तक टिकने वाला हो ! रात्रि भोजन के बाद सभी लोग अपने-2 कमरे मे चले गये, मै अपने बेड़ पर लेट्कर दिपा का इंतजार कर रहा था ! रात के 11:15 बजे मेरे कमरे का दरवाजा खुला और सामने दिपा खड़ी थी, वो दरवाजा को बंद करके मेरी ओर बढ्ने लगी ! काले रंग़ के गाउन मे खुबसुरत दिख रही थी, मै बिस्तर पर उठ्कर बैठा और दिपा बेड़ पर आ गयी !

दिपा को अपने सिने से चिपकाकर गाल पर चुम्बन देने लगा और दोनो एक दुसरे को चुमने मे लिन थे, तभी मै दिदी के गाउन को उसके जिस्म से बाहर कर दिया और वो पुरी तरह से नग्न थी ! दिदि किसी कामुक औरत कि तरह मेरे मुह्न मे अपना लम्बा जिभ घुसा दी और मै उसके जिभ को चुसता हुआ अपने सीने से उसकी चुची को दबा रहा था, पल भर बाद दिदि बिस्तर पर लेट्ना चाही, लेकिन मै बेड़ पर लेट गया और दिदि को बोला… ” तुम मेरे उपर कुत्तिया कि तरह हो जाओ लेकिन अपना चेहरा मेरे लंड़ के पास रखना और मेरा चेहरा तुमहारे दोनो जङ्हा के बिच और निचे रहेगा ताकि दोनो एक दुसरे के योनि को प्यार कर सके ” और दिदि मेरे बदन पर लेट गयी और उसका चेहरा मेरे लंड़ के पास था जबकी मेरा मुह्न उसके दोनो जङ्हा के बिच और उसके बुर के निचे, दिदि मेरे लंड़ को पकड़ कर चुमने लगी जबकी मै उसके बुर मे एक उंग़ली करके बुर कुरेदने लगा ! मेरे चेहरे के उपर दिदी का भारी भरकम चुत्तर था और मुह्न ठीक उसके चुत के निचे, दिपा मेरे लड़ को मुह्न मे लेकर चुसने लगी जबकी मै उसके बुर से उङ्ली निकालकर सर थोड़ा उपर किया और बुर के रान के बिच जिभ घुमाता हुआ बुर चाट्ने लगा ! दोनो एक दुसरे के योनि को चुम चाट रहे थे और दिपा मेरे लंड़ को अब जिभ से चाट्ने लगी, उङ्ली की मदद से दिदि की बुर को फ़ल्काकर जिभ से चुत चोदने लगा, पल भर बाद दिदि मेरे लंड़ को दुबारा मुह्न मे ली और अपने मुह्न का झट्का देते हुए मेरे झांट मे उङ्ली नचाने लगी ! मेरा मुसल लंड़ अब चुदाई को आतुर था और दिदि अब मेरे बदन पर से हट गयी !

मै लेटाह ही रहा और दिपा को चुदाई का नया आसन समझाया, वो अब मेरे लंड़ के उपर टाण्ग फ़ैलाये बुर बिचकाये बैठ गयी लेकिन बुर और लंड़ मे थोड़ी दुरी थी ! मै दिपा के कमर को कसकर पकड़ा था और वो मेरे लंड़ को थामे सुपाड़ा को अपने चुत मे घुसा दी, धीरे-2 दिदि अपने चुत्तर को निचे कि ओर करने लगी और मेरा लंड़ उसकी बुर मे घुसने लगा, पल भर बाद मेरा पुरा लंड़ उसकी चुत मे था और मेरे कहने पर वो अपने चुत्तर को उपर निचे करने लगी ! दिदि के कमर को कसकर पकड़े उनके भारी भरकम नितम्ब का वजन लंड़ पर सहने लगा और दिदि पल भर बाद थक गयी तो अब मै उनके चुत्तर को थोड़ा उपर किया, अब 1/3 लंड़ बुर मे था और बांकी बाहर, मै निचे से अब बुर मे लंड़ पेलने लगा और 2/3 लंड़ दिदि की बुर को चोदता हुआ मस्ती देने लगा ! मै अपने चुत्तर को उपर निचे करता हुआ दिदि कि बुर को अपने मुसललंड़ से चोद रहा था, दोनो को मजा आने लगा और पल भर बाद… “आह्ज ऊ मेरी बुर से पानी निकलेगा आह्झ. ” और उसकी बुर से रस फ़ेंकने लगा, रस चु कर मेरे झांट पर भी गिरा !

दोनो पल भर आराम करने के बाद फ़िर से चुदाई मे लिन हो गये, अब दिपा अपने घुट्ने और कोहनी के बल बेड़ पर कुत्तिआ बन गयी और मै उसके नितम्ब के सामने बैठ्कर अपना लंड़ उसकि बुर मे पेला, रसिले बुर मे मेरा लंड़ पुरी तरह से अंदर जा चुका था! अब दिदि कि कमर को पक्ड़े गपागप बुर चुदाई करने लगा और दिदि अपने चुत्तर को हिला-2 कर चुदाई के मजे को दुना कर रही थी ! उनका भारी भरकम चुत्तर आगे पिच्हे हो रहा था और मै दिपा को चोदने मे मस्गुल था, अब लंड़ पुरी तरह से गरम हो चुका था और दिदि कि बुर मे भी आग लगी हुई थी, वो अब चिखने लगी…. “अबे चोदु माल गिरायेगा या चोद्ता हि रहेगा. ” 15 मिनट तक दिपा को चोदने के बाद… “ये ले रंड़ी ले मेरा रस. ” और उसकी गरम बुर मे विर्यपात कराके शांत हो गया !
 
दिपा और राहुल 2 दिन से रिश्ता नाता भुल्कर एक नये रिश्ते को निभा रहे थे, आखिर बुर और लंड़ का रिश्ता ही कुच्ह ऐसा होता है, ना रिश्ते याद रह्ते है ना उम्र का ख्याल होता है बस काम-वासना ही करने को जी करता है ! दिपा दिदी के साथ सुबह -2 एक दफ़े चुदाई का आनंद ले लिया था, ना वो मेरे पर ध्यान दे रही थी ना मेरा मन चोदने को हो रहा था, लेकिन शाम होते ही दोनो मजे को आतुर होने लगे ! मै बज़ार कि ओर निकला और दो बोत्तल बीयर लेकर घर आया, दिपा खाना बनाने मे लिन थी, मै रसोई घर मे घुसा और दिदी को पिछे से दबोच लिया, वो मुस्कुराते हुए पल्टी…… “क्या राहुल एक तो सुबह -2 बुर लह्ररा दिये और फिर से

(राहुल) वो नास्ता था, भुख अब लगी है खाना भी खाउंग़ा

(दिदी) खाना बनाने तो दो जानु

(राहुल) तब तक बीयर पीता हु. ”

दिदी साड़ी, साया, ब्लाउज पहन कर मस्त माल लग रही थी और उसके नितम्ब की गोलाई मेरे लंड़ को खड़ा कर चुकी थी, दिपा के चुत्तर पर अपना लंड़ रगड़ा था लेकिन मन गांड़ चोद्नने को हो रही थी ! मै बरमुड़ा पहन कर दिदी के पास वापस आया और एक ग्लास लेकर बालकोनी मे कुर्सी पर बैठ बियर पीने लगा, मेरा लंड़ कड़ा हो चुका था और चोदने को आतुर था ! पल भर बाद दिपा मेरे पास आकर बैठ गयी, मै एक बोतल बियर पीकर मस्त हो गया और दिदी अपना हाथ मेरे कंधे पर रखकर बोली……. ” खाना बन गया, चलो खाने

(राहुल) पहले तुमको चोदुंग़ा फिर खाना

(दिपा) अरे पग्ले चोदने को ही तो बोल रही हू. ” और वो मेरे हाथ पकड़ क्रर अपने बेड़रूम लेती आई ! एक बेशर्म लड़्की की तरह मेरे सामने अपने कपड़े को खोलने लगी, दिपा के मख्मली जिस्म अब नग्न थे और मै उनको बेड़ पर बैठने को बोला! उनके सामने मेरा फ़ौलादी लंड़ था और दिदी लंड़ को पकड़ कर उसके सुपाड़ा को अपने ओंठ प्रर रगड़ने लगी ! वो मुझसे नज़र मिलाते हुए लंड़ को अपने मुह्न मे भर ली और मेरे कमर को थामे मुखमैथुन करने लगी, उसका चेहरा लाल हो चुका था और दिपा किसी रांड़ की तरह मेरा लंड़ चुभला रही थी, 2-4 मिनट के बाद वो मेरे लंड़ को जिभ से चाट रही थी ! फिर वो अपना जिभ मुख से बाहर कि और लंड़ के सुपाड़े को उसपर रगड़ने लगी, मेरे लंड़ का हाल खराब था और दिपा फिर से लंड़ चुसने लगी, अपने मुख का तेज झट्का मेरे लंड़ पर पड़ रहा था और वो पल भर बाद लंड़ छोड़ बाथरूम भागी !

बेड़ पर दिपा का इंतेज़ार कर रहा था, वो आकर बेड़ पर लेट गयी, मै उसके नितम्ब के निचे तकिआ ड़ाल दिया और उसके दोनो पैर को दो दिशा मे करके अपना चेहरा बुर पर झुकाया ! उसके चिकने चुत को चुमता हुआ अपना हाथ उसके चुचि पर लगाया और मसलने लगा, वो सिसक रही थी और बुर को उंग़ली की मदद से फ़ल्का दी, अब मेरा जिभ दिदी की बुर को कुरेदने लगा ! उसकी बुर को जिभ से चोदने का मजा ही कुच्ह अलग था और दिदी…… “अबे कुत्ते बुर को सिर्फ़ चाटना आता है या चोद भी सकते हो

(राहुल) साली तु तो हरामी जात है 3-4 बार चुद कर भोली बनती है ! “और मै दिदी के बुर पर लंड़ का सुपाड़ा रखा और धीरे से लंड़ बुर मे घुसाने लगा, दिदी की चुत कसी हुई थी, 2/3 लंड़ घुसने के बाद लगा कि बुर फ़ट जायेगी, तो दिदी की कमर को कसकर पकड़ा और जोर का धक्का बुर मे दिया, मेरा पुरा लंड़ दिपा के बुर मे था और वो दर्द से चिंख उठी…….. “अबे हरामी बुर का भर्ता निकाल कर ही रहेगा क्या

(राहुल) अबे कुत्तिआ पल भर पहले तो भुल गयी थी की मै तुम्हे चोदा हू, इसलिए याद दिला रहा हू. ” मेरा लंड़ दनादन बुर के अंदर बाहर हो रहा था, अब दिदी के बदन पर औंध कर चोदने लगा और वो अपने गदेदार गांड़ को उपर निचे करने लगी! दोनो चुदाई कि दुनिया मे खो गये थे और मेरा लंड़ बुर को रगड़ -2 कर लहरा रहा था, दिदि का स्तन मेरे सिने से रगड़ खा रही थी और दिदी मेरे गाल को चुमते हुए बदन पर नाखुन फ़ेर रही थी, 10 मिनट कि चुदाई के बाद दिपा भी हांफ़ने लगी और मै भी झरने को आतुर था लेकिन लंड़ अभी बुर को चोदने मे मस्गुल था, वो चिंखने लगी….. “अबे साले अब तो बुर को गिला कर आह्हह्हह लहर रहि है

(राहुल) ये ले मेरा विर्य पी ले बे रांड़. ” और बुर मे विर्यपात कराकर दिदी के बदन पर लेटा रहा. ” दिदी और मै नग्न हि सो गये !
 
दिदी के घर आये 3 दिन हो चुका था, हमदोनो एक दुसरे के साथ काम क्रिया मे लीन रहा करते थे, एक दिन बाद जिजा भी आने वाले थे, इसलिए आज का दिन ही हमदोनो के हाथ मे था! मेरी निद्रा 9:00 बजे सबेरे खुली तो मै फ़्रेस होकर दिदी के साथ चाय का चुस्की लेने लगे, दिपा स्नान-ध्यान करके तैयार थी! वो पीले रंग़ की साड़ी, ब्लाउज पहनकर सुंदर लग रही थी, मुझे देखकर मुस्कुराई…… “क्या हाल है जनाब ?

(राहुल) मस्त बोलो तुमको कैसा लग रहा है?

(दिदी) एक अलग एह्सास, आज तक गैर मर्द के साथ नही चुदी थी, उसका आनंद मिल गया

(राहुल) लेकिन शादी के पहले तो तुम चुदी थी दिपा

(दिदी) गलत बात, वो सब अपवाह था राहुल मुझे बदनाम करने के लिये ! ”

दोनो बात करते-2 सोफ़ा पर एक दुसरे से लिपट गये, दिदी मेरी गोद मे बैठकर मेरे गाल को चुम्ने लगी जबकी मेरा हाथ उनके पीठ पर घुम रहा था, उनके चिक्ने जिस्म को सहलाता हुआ अपने सिने पर उनकी बड़ी-2 चुचि का एह्सास पा रहा था! दिदी मेरे मुह्न मे अपना जिभ घुसा दी और उनका जिभ चुसते हुए मै उनको कसकर पकड़ा था, चुचि मेरे सिने से दब रही थी और मेरा लंड़ खड़ा होने लगा! पल भर बाद दिदी जिभ खिंच ली और मै उनके ब्लाउज की ड़ोरी को खोल दिया, दिदी अपने बाहो से ब्लाउज को निकाल दी और अब उनके नग्न बाह्न के साथ ब्रा मे कैद चुची साड़ी के उपर से ही दिख रही थी! वो शर्माने लगी लेकिन मै दिदी के साड़ी को उनके सिने पर से उतार दिया! दिदी की दो मस्त चुचि काले ब्रा मे खुब्सुरत दिख रहे थे, उसको पकड़्कर मसलने लगा और दिदी सोफ़ा पर ही लेट गयी, दोनो चुचि को मसलते हुए मस्त हो रहा था और दिदी लेटे-2 अपने साड़ी को कमर से उतार फ़ेकी! दिपा काले रंग़ के साया और ब्रा मे सोफ़ा पर लेटी थी, हमदोनो अब कमरे मे आ गये और दिदी अचानक से मेरे बरमुड़ा को पकड़ कर निचे कि ओर खिंच दी और मै नण्गा हो गया!

दिदी बेड़ पर थी और मै भी बेड़ पर आ गया, अब जबर्दस्ती उनके साया को खोलने लगा, वो बिरोध कर रही थी लेकिन मै उनके साया के ड़ोरी को खोल दिया, दिपा दोनो जङ्हा को एक दुसरे पर कर दी ताकि मै साया उनके कमर से निचे ना कर सकु! मै दिदि के उपर सवार हो गया और उनको चुमने लगा, वो मेरे आगोस मे थी, अब उनके चुचि को दबाने लगा और वो खुद ही ब्रा खोल दी! दिदि के चुचि को मुह्न मे लेकर चुसने लगा और वो अपने छाती से मुझे लगाकर दुध पिला रही थी, मेरा फ़ौलादी लंड़ चुदाई को आतुर था, लेकिन मै दिदी को गरम करने मे मस्गुल था, उनके दुसरे चुचि को चुसता हुआ बदन पर लेटा हुआ था ! पल भर बाद उनके जिस्म पर से हटा और उनके कमर के पास बैठ्कर साया को निकाल दिया, दिदी के दोनो पैर को दो दिशा मे करके उनके चमकते बुर को निहारने लगा! दिदी के चुत्तर के निचे तकिया ड़ालकर अब मै उनके जङ्हा के बिच अपना सर झुकाया और बुर को चुमने लगा, वो उंग़ली कि मदद से बुर को फ़लका दी और मेरा जिभ बुर को कुरेदने लगा! मेरा जिभ लपालप कुत्ते कि तरह बुर के अंदर बाहर हो रहा था और दिपा सिसकने लगी….. “ऊह्ह ऊम्मम्म आह्हह्हह मेरि बुर को चोदो मेरे यार बुर मै चिंटि रेंग़ रही है. ” और मे दिदि के बुर को अपने जिभ से चोद्ता हुआ मस्त हो रहा था! अब बुर के रान को अपने मुह्न मे लेकर चुभ्लाने लगा और दोनो जङ्हा को कसकर पकड़ रखा था, पल भर बाद वो चिंख पड़ी……. “ऊह्हह्ह अबे कुत्ते बुर का पानी निकाल दिया, पी साले चाट रे बुर चटा. ” और दिपा की बुर का पानी पिकर रस को चाटा !

दिदी बेड़ पर कोह्ननी और घुत्तने के बल हो गयी, मै उनके नितम्ब के पास बैठकर चुत्तर को चुम्ने लगा और दिदि के गांड़ के दरार के बिच जिभ फ़ेरने लगा ! वो चुदने को आतुर थी, लेकिन मै उनके गांड़ के छेद को जिभ से चाटने लगा, वो मुस्कुरा कर बोली…… “अबे कुत्ते लंड़ को क्या हो गया है, चोदोगे या किसी और से चुदना होगा

(राहुल) चोद्ता हू जानेमन. ” और मै अपने लंड़ को पकड़ कर सुपाड़ा उसके बुर के मुहाने पर रखा, फिर लंड़ को अंदर पेलने लगा, गिले चुत मे 2/3 लंड़ अंदर जा चुका था, दिपा के कमर को थामकर जोर का ध्कका बुर मे दिया और पुरा लंड़ उसके बुर मे था! अब जोर-2 से बुर चुदाई करने लगा और दिपा मेरे मुसल लंड़ से चुद्ते हुए झुम्ने लगी, अपने चुत्तर को आगे पिच्हे करते हुए चुदाई का आनंद लेने लगी ! मेरा 7-8 इंच लम्बा 2 इंच मोटा लंड़ बुर को तेजी से चोद रहा था और मेरा लंड़ गपागप अंदर बाहर आ जा रहा था, 22 साल कि अवस्था मे बुर का स्वाद मिला था वो भी अपनी शादी-शुदा बहन का! अब दिपा की बुर का रस सुख चुका था और वो चिख्ने लगी….. “अबे चोदु कितनी देर मे माल झाडेगा, बुर मे आग लगी है बुझा ना साले

(राहुल) इतनी जल्दी क्या है रांड़ थोड़ा दम रखो. ” और मै बुर चोद्ता हुआ मस्त था, 15 मिनट की चुदाई के बाद…… “ले बे रांड़ माल गिरने वाला है आह्ह ऊह्हह. ” और मेरे लंड़ से विर्यपात हो गया, बुर कि गरमी को शांत कर दिया और दिदी मेरे लंड़ को चुसकर विर्य का स्वाद ले ली !

 
दिपा मेरे साथ सो गयी और दोनो कि निंद शाम 05:15 बजे खुली ! अपनो को नग्न देख शर्माने लगी तो मै उनको गौद मे लेकर बाथ्ररूम घुस गया, मै राहुल 21 साल का जवान था तो दिपा दिदी 26 साल कि गदराइ जवानी ! दिपा का जिस्म चिक्ना था, गोरे रंग़ के साथ रसिलि ओंठ, सुराही नुमा गर्दन, दो मध्यम आकार का चुचि, उसके घुण्दी किस्मिस कि तरह, पेट सपाट और जण्घा केले के थम्ब कि तरह चिंकनि ! मै दिपा कि बुर का तारिफ़ नही करना चाह्ता आखिर उसकी बुर का कौन सा हिस्सा मस्त है, मुझे नही पता, जीवन मे पहली बार बुर देखा हू ! उनके बुर का हिस्सा चिक्ना है, बार का नामो निशान तक नही और दोनो रान मांसल, पुरे बुर के आकार को मेढ्क कि तरह समझा जा सकता है! दिपा के बुर को फ़ल्काकर देखा तो गुलाबी रंग़ उनके भग्नासा का था !

दिपा और राहुल बाथरूम मे नंग़े थे और वो अपना टांग़ फ़ल्काकर खडी थी, मै घुटने के बल बैठा और दिदी के कमर को चुम्ने लगा! वो मेरे बाल सहला रही थी और मेरा चेह्ररा उनके जण्घा के बिच था, अपने उंग़ली कि मदद से बुर के रान को अलग किया और अपना जिभ बुर मे घुसाकर दिदी की चुत चाट्ने लगा ! दिदी का पैर कांपने लगा और मेरा हाथ उसके कमर को कस्कर पकडा हुआ था, दिदी की बुर मे 2/3 जिभ घुसाकर चाटने लगा, वो मेरे बाल को कसकर पकडे सर को अपने बुर कि ओर घुसा रही थी, खैर कुत्ते कि तरह जिभ लपालप करते हुए दिदी की चुत चाटता रहा! मेरा लंड फ़नफ़ना रहा था, तभी दिदि चिखने लगी……. “अबे कुत्ते बुर को चुस ना, आज तेरी मुह्न मे छर-2 मुतउंग़ी. ” दिदी की ये बात सुनकर मै चुत के रान को अपने जिभ के बिच ले लिया और चुसने लगा! वो मेरे बाल को थामे हुइ थी, पल भर बाद, दिपा चिखने लगी…… “अबे कुत्ते बुर का पानी भी पी और फ़्री मे मेरी मुत भी. ” मेरे मुह्न मे उसकी बुर ने तेजी से मुत दिया और उसको पिते हुए मेरा लंड गरम हो गया ! उसकी बुर का रस भी पिया और दिपा के सामने खडा हो गया!

दिपा मेरे बदन से चिपक्कर खडी थी और अपने चुचि को मेरे सिने से रगर रही थी, मेरा हाथ उसके कुल्हे पर था और मेरी एक उंग़ली उसके बुर को कुरेदने लगी! पल भर बाद दिदी मेरे पैर के पास बैठ गयी और लंड को थामकर उसके सुपाडे को अपने गाल पर रगरने लगी, मेरे से नज़र मिलाते हुए वो लंड चुसने लगी, अपने उंग़ली को मेरे झांट मे घुमाते हुए साली रंडी मुखमैथुन कर रही थी! तभी उसके सर के बाल को कसकर पकडा और उसके मुख को लंड से चोदने लगा, सुपाडा उसके गले तक जा रहा था और दोनो बाथ्ररूम मे मजे कर रहे थे, पल भर बाद दिपा लंड को बाहर कर दी और साली चुददक्कर खडे-2 घोड़ी बन गयी, मै उसके चुत्तर के पास खड़ा था, अपना लंड उसकी चुत मे पेल दिया, आधा लंड चुत के अंदर था तो उसके कमर पकड़ कर जोर का झट्का बुर मे दिया और वो साली चिख पड़ी……. “राहुल मेरी बुर का कचुमर मत निकालो तुम्हारा लंड तुम्हारे जिजा से भी मोटा है. “मेरा लंड बुर को चोद्ता हुआ उसके चुत्तर के धक्के को बर्दास्त कर रहा था, दिपा भले ही 2 साल से चुद रही हो, लेकिन उसके बुर की पकड़ मजबुत है, मेरा लंड उसके चुत मै पुरी तरह से फ़िट हो रहा था!

अब मै लंड का तेज वार बुर मे करने लगा जबकी दिपा अपने कुल्हे को जोर-2 से हिला रही थी ! मै उसके गोरे गांंड़ पर थप्पड़ दे रहा था और मेरा लंड पुरी तरह से गरम हो चुका था, तभी दिदी चिंखने लगी…… “अरे बहनचोद बुर गरम हो चुकी है, मै झड़ुंग़ी, जल्दी से माल गिरा. ” और मै दिदी को चोद-2 कर हांफ़ रहा था…… “ले बे साली चुददककर माल पी. ” झरना से पानी दो जिस्म पर गिर रहा था, दोनो स्नान करते हुए चुदआए का मजा ले रहे थे और मेरे लंड से विर्य बुर मे गिरा ! दिपा दिदी के साथ स्नान करके मजा आ गया !
 
राहुल को अब बुर की भुख सी लग चुकि थी, अपनी बड़ी बहन के साथ सम्भोग सुख लेने के बाद मेरा ध्यान औरतो पर ही लगा रह्ता था ! इस बिच अपनी चचेरी बहन के साथ काम वासना का आनंद लिया था लेकिन चुदाई का सुख नही ले पाया था ! मेरी छोटी चाची एक हफ़्ते कानपुर मे रुकी थी और मेरे साथ 2-4 बार चुदाई का आनंद ली थी ! मेरी बड़ी दिदि दिपा आने वाली है ये खबर सुनकर काफ़ी खुशी हुई, लेकिन जिजा भी साथ आने वाले है ये थोड़ी निराश करने वाली खबर थी ! दिदी और जिजा दोनो घर पहुंचे, फ़िर हमलोग साथ मे काफ़ी बातचित किये, दिदी हमको घुर-2 के देखा करती थी ! एक शाम वो मुझे अकेले मे मिली और बोली….. ” राहुल जिजा कल सवेरे की गाड़ी से देल्ही जायेंग़े तब तक इंतजार करो

(राहुल) जरुर दिदी. ”

अगले दिन मै कालेज गया लेकिन ध्यान दिपा पर ही लगी हुई थी, शाम को घर वापस आया तो दिपा लाल रंग़ के गाउन मे सुंदर लग रही थी ! मै अपना कपड़ा बद्ला फ़िर लेट गया, थोड़ी देर के बाद दिपा मेरे कमरे मे आई और दरवाजा बंद कर दी ! मै हड़्बड़ा कर बेड़ पर उठा और बोला…… “दिदी ये क्या कर रही हो

(राहुल) भोले मत बनो, मम्मी पापा बाजार निकले तो मै सोची लेकिन तुम कह्ते हो तो जाती हू. ” वो उठ्कर जाने लगी तो मै उसको कसकर पकड़ लिया और अपने बिस्तर पर ले आया ! दिपा बिस्तर पर बैठी और मै उसके सामने खड़ा हो गया, दिदि मेरे बरमुड़ा को कमर से निचे खिंच दी और मेरा लंड़ उनके मुह्न के सामने था! मुझसे नज़र मिलाते हुए वो मेरे लंड़ को पकड़ी और अपने मुह्न मे घुसा ली, मेरा खड़ा लंड़ उनके मुह्न मे था और वो मुह्न मे भरकर चुसने लगी, अब मेरा लंड़ पुरी तरह से खड़ा हो गया और वो उसपर अपना जिभ फ़ेरने लगी ! मै दिपा के चुत को चोदना चाह्ता था और वो फ़िर से मुखमैथुन करने लगी, अपने मुख का झट्का लंड़ पर देते हुए झांट मे उंग़ली घुमा रही थी, पल भर बाद दिपा लंड़ को अपने मुख से बाहर कर दी!

मै अब बिस्तर पर आ गया, दिदी के गाउन को उनके बदन से निकाल फ़ेंका, वो सिर्फ़ चाड़्ही मे बैठी हुए थी ! उनको बेड़ पर सुलाकर उनके जिस्म पर ओंधा और गाल पर चुमबन देने लगा, वो मेरे पिठ पर अपने हाथ फ़ेर रही थी, दिपा के गाल को चुमता हुआ अपने सिने से उसके चुची को रगड़ने लगा और दिपा तड़्प रही थी ! पल भर बाद दिदी के चुची को मुह्न मे भरकर चुसता हुआ दुसरा चुची मसलने लगा और वो सिसकने लगी…… “हाय रे मेरी बुर कितनी खुज्ली हो रही है. ” मै दिपा के दुसरे चुची को चुभलाने लगा तो वो मेरे बदन को खरोंचने लगी ! अब मै उनके कमर को चुम रहा था और उनके चिकने जाण्घ पर हाथ फ़ेरने लगा, अब मै दिपा के चध्ही को खोलकर बुर का दिदार करने लगा ! लगभग 2 महीने बाद दिपा कि बुर को निहार रहा था, एक तकिआ दिदी के चुत्तर के निचे ड़ाला और उनके दोनो जङ्हा के बिच अपना चेहरा झुकाया, उनकी चिकनी मांसल बुर लाल थी और बिन बार के सुंदर दिख रही थी ! मै दिपा कि बुर पर चुम्बन देने लगा तो वो अपने चुत्तर को उचकाने लगी, उनके बुर से सुगंध आ रहा था और मैने दिपा को बोला…. ” जानु उङ्ली की मदद से अपने बुर का मुख तो जरा खोलो. ” दिपा बुर को फ़लका दी तो मेरा जिभ उसके अंदर जाकर स्वाद लेने लगा ! दिदी की शादी के 2 साल हो चुके थे और वो चुदाई का भरपुर आनंद ले रही थी, इस्लिये उनकी बुर का हिस्सा धिला पड़ चुका था और अंदरुनी मार्ग भी काफ़ि खुल चुकी थी और ऐसे ही चुत को चाट्ने मै मजा भी आता है ! मेरा 2/3 जिभ दिदि की बुर को चोद रहा था और मेरा हाथ उनके मोटे जङ्हा को कसकर पकड़ा था, वो चिंखने लगी…… “अबे कुत्ते सिर्फ़ बुर चाट्ने मे हि वक़्त जाया करेगा या अपने लंड़ से चुदाई भी करेगा

(राहुल) फ़िल्हाल दिदि तेरे बुर की मुत पिउंग़ा

(दिदि) तो चल ना बाथरूम पिलाती हू अपनी मुत. ” पल भर बुर चुसा और दोनो बाथरूम चले आये ! अब दिदि खड़ी थी तो मै घुट्ने के बल बैठ्कर दिपा के दोनो रान को अपने मुह्न मे लिया और चुसने लगा और वो चिंख पड़ी….. ” ले बे कुत्ते पी मेरी बुर की मुत आह निकला. ” और दिदि कि बुर से पिसाब कि तेज धार मेरे मुह्न मे गिरने लगी और मै मुतपान करके मस्त हो गया !
 
अग्ले सवेरे दिदी सो कर उठी और चाय बनाकर मुझे भी जगा दी ! मै फ़्रेश होकर बाल्कोनी मे आया तो दिदी कुर्सी पर बैठकर चाय पी रही थी, मुझे देखकर बोली….. “राहुल चाय रसोइघर मे है, ले लो और पियो

(राहुल) ठीक है लेकिन मुझे दुध पिने का मन है दिदी

(दिपा शर्मा गयी) चाय पियो फिर दुध भी पी लेना

(राहुल) जब आप अपना चुची मुह्न मे घुसाओगी तभी तो दुध पी

(दिपा) अबे हरामी मेरे चुचि से अभी दुध कैसे निक्लेगा. ” और वो शर्म से सर झुका ली, लेकिन मेरा हाथ उसके चुची पर चला गया और मै जोर-2 से मसलने लगा! वो चुपचाप बैठी रही, मै कुर्सी और करीब किया और दोनो हाथ उनके दोनो चुचि पर लगाकर जोर-2 से मसलने लगा ! 5 मिनट तक चुचि मसलने के बाद दिपा को अपने गोद मे उठाकर कमरे मे ले आया और बेड़ पर सुला दिया, वो मुस्कुराने लगी……. “राहुल सुबह-2 तुम काम-वासना मे लग गये, खाना पीना कैसे बनेगा

(राहुल) खाना का ओर्डेर पास के रेस्तरा मे कर देगे. ”

दिदी के जिस्म से कपड़ा उत्तारा और नग्न जिस्म पर सवार होकर उनको चुमने लगा, उनके गोरे गाल पर चुमा लेता हुआ चुचि का एह्सास अपने सीने पर पा रहा था, दिदी अपने जिभ को मुख से निकाल मेरे मुह्न मे ड़ाल दी, जिभ चुसता हुआ अपने पिठ पर उनके हाथ का एह्सास पा रहा था! दिदी की सांसे तेज हो गयी, वो तड़पने लगी और उनका जिभ निकालकर अपना चेहरा उनके गोल-2 पर किया और अपना गाल चिकने चुचि पर रगड़ने लगा, फिर दिदी अपनी चुची खुद पकड़कर मेरे मुह्न मे घुसा दी, उनका 2/3 चुचि मेरे मुह्न मे था और मै जोर-2 से चुचि चुसता हुआ दुसरा चुचि दबाने लगा! दिदि के चुचि से दुध नही निकल रहा था और वो…. “राहुल बुर में खुजली हो रही है

(राहुल) अभी दुध पिना है, चुदाई बाद मे. ” दिपा के दुस्ररे चुचि को चुसता हुआ मस्त था, मेरा लंड़ 6-7 इंच कि लम्बाई और 2 इंच कि मोटाई ले कर फ़नफ़ना रही थी, अब चुचि चुसना छोड़ा! दिपा दिदी के चिकने मख्मली जिस्म पर अब चुम्बन देने लगा, उनके चिकने सपाट पेट को चुमता हुआ नाभि कि ओर गया और चुमता हुआ कमर तक पहुंचा ! दिदि तड़्प रही थी और दोनो पैर को फ़लकाकर बुर दर्शन कराने लगी, तभी दिदि की गांड़ के निचे तकिआ घुसाया और उनके मोटे-2 जण्घा को चुमने लगा, लेकिन मेरा ध्यान चुत पर ही था, वो उंग़ली से बुर को फ़लकाकर मुझे चाट्ने का न्योता दी और मेरा जिभ बुर के अंदर दौड़ने लगा, चिकने बुर को चाटता हुआ भुल चुका था की बुर दिदी की है और वो सिसकने लगी…. “राहुल अबे कुत्ते बुर चाट्ना छोड़ ना लंड़ मे जान नही है क्या चोदने के लिये

(राहुल) अभी चुसने दे ना फिर चोद कर तेरी बुर फ़ाड़ता हु. ” और मेरे ओंठो के बिच साली रांड़ की रान थी जिसको चुसता हुआ मस्त हो रहा था, पल भर बाद बुर से रस निकलने लगा और मै बुर का रस पीकर… चाट्कर बाथरूम भागा और मुतने के बाद देखा कि दिदि बुर फ़लकाकर छर-2 मुत रही है !

हमदोनो वापस कमरे मे आये और दिपा बेड़ पर कुत्तिआ कि तरह हो गयी, उनके चुत्तर के पास घुत्तने के बल बैठा और अपना लंड़ पकड़ कर बुर मे घुसाने लगा, मेरा 1/2 से ज्यादा लंड़ बुर मे था और मे कमर थामकर बुर मे जोर का झट्का दिया और मेरा मुसललंड़ दिदी कि बुर मे था, वो चिंख पड़ी….. “अरे बाप रे मेरी बुर फाड़ने पर क्यो लगे हो, इतना मोटा लंड़ तो तेरे जिजा का भी नही है. ” लेकिन मेरा लंड़ पुरे गति से उसकी बुर चोद रहा था, गिले बुर मे लंड़ गपागप दौड़ लगा रहा था और वो रांड़ अपने चुत्तर को जोर-2 से हिल्लाने लगी, दिदी को चोदने का आनंद ही अलग था ! मेरा लंड़ बुर को पुरे गति के साथ चोद रहा था तो दिपा अपने गांड़ को हिला रही थी, मेरा लंड़ पुरी तरह से गरम हो चुका था और दिपा कि बुर भी मेरे लंड़ के रगड़्न से गर्म हो चुकी थी, वो कुत्तिआ की तरह होकर चुदने मे मस्गूल थी, मुझे देखकर बोली…… ” अबे साले कुत्ते तेरा लंड़ तो झड़ेगा ही, थोड़ा जल्दी गिरा दो ना

(राहुल) सो क्या चुदक्कर बुर फटने लगी क्या. ” और मेरा लंड़ 15 मिनट के बाद विर्य गिरा दिया और दिदी पल भर बाद लंड़ बाहर कर दी और लंड़ चुसकर विर्य का स्वाद लेने लगी !
 
Back
Top