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मेरी पाठिका की चूत चुदाई
बात कुछ महीने पहले की है। मैं अपना मेल बॉक्स चैक कर रहा था.. उसमें मैंने अपनी पिछली कहानी से रिलेटेड एक मेल देखा.. और आदत के मुताबिक मैंने उस मेल का रिप्लाई दिया।
कुछ दिन बाद फिर से उसका मेल आया, उसने मेरी कहानी देर से पढ़ने के लिए सॉरी कहा और मेल का रिप्लाइ देने के लिए शुक्रिया भी किया।
मैंने उसके बारे में पूछा.. तो उसने अपना नाम बेला बताया।
इसी तरह हमारी मेल पर ही बातें होने लगीं।
मैं उससे कभी डबल मीनिंग बातें लिख देता.. तो वो भी मुझे भी डबल मीनिंग में रिप्लाई करती थी। हमारी बातें सिर्फ़ मेल पर ही होती थीं। मैंने उसका मोबाइल नंबर माँगा.. तो उसने नहीं दिया।
ऐसे ही कुछ दिन बीतने के बाद एक मेल में उसने मुझे मिलने की बात कही। मैंने कहा- क्या सच में तुम मुझसे मिलना चाहती हो.. मज़ाक तो नहीं कर रही हो?
उसने कहा- नहीं.. मैं सच में तुमसे मिलना चाहती हूँ।
मैंने उसको अपने बारे में बताया.. तो उसने कहा- मुझे पता है.. मैंने तुम्हारी कहानियाँ पढ़ी हैं.. जिसमें तुमने अपने बारे में पहले ही बताया हुआ है।
मैंने पूछा- तुमको मुझसे क्यों मिलना है?
उसने कहा- मिलकर बताऊँगी।
मैंने उससे पूछा- ठीक है ये बताओ कि कहाँ मिलना है?
मुझे उसने सिर्फ़ अपना नाम बताया था और मैं ये भी नहीं जानता था कि वो कौन से शहर में रहती है।
उसने कहा- मैं भी नागपुर की ही रहने वाली हूँ और रविवार को नागपुर के कपल के लिए फेमस गार्डन (नाम भी बताया) में मुझसे मिलना चाहूँगी।
मैंने उससे पूछा- तुम नागपुर में रहती हो.. ये बात मुझे पहले क्यों नहीं बताई?
तब उसने कहा- मैंने इसलिए नहीं बताया कि शायद मैं तुम्हें बताती तो तुम उसी वक्त मुझसे मिलने की फरमाइश करते।
मैंने उससे कहा- ऐसी कोई बात नहीं है।
पर बात तो उसकी भी सही थी।
मैंने उससे पूछा- मेरे पास तो तुम्हारा मोबाइल नंबर नहीं है.. तो मैं तुमको पहचानूँगा कैसे?
उसने कहा- मैं गुलाबी रंग का सलवार कुर्ता पहन कर आऊँगी।
उसने मुझे भी सफेद शर्ट और ब्लू जींस पहनकर आने को कहा। रविवार को मैं ठीक एक बजे अपने तय हुई जगह पर पहुँच गया और गार्डन के गेट पर टिकट लेकर इंतजार कर रहा था।
वहाँ पर सिर्फ़ कपल आ रहे थे.. कोई भी लड़की अकेले नहीं थी। उसने कहा था कि वो अकेली ही आएगी।
कुछ देर इंतजार करने के बाद मन में ख्याल आने लगे कि कहीं कोई मुझे बेवकूफ़ तो नहीं बना रहा है।
लगभग आधे घंटे बाद एक लड़की स्कूटी पर अकेली आई, उसने पिंक कलर का सूट पहना हुआ था, अपना पूरा मुँह दुपट्टे से ढका हुआ था। हाथ में ग्लव्ज़.. आँखों पर गॉगल पहनकर आई थी।
मुझे लगा कि शायद ये वही है। अब मन में जो हलचल चल रही थी.. वो शांत हो गई थी।
तब तक वो गाड़ी पार्क करके एंट्री गेट की तरफ आ रही थी। उसने मुझे देखा पर वो पहले टिकट लेने के लिए टिकट काउंटर की तरफ मुड़ी तो मैंने खुद वहाँ जाकर पहले उसको ‘हैलो..’ कहा।
मैंने उसे अपना परिचय दिया और पूछा- क्या आप बेला हैं?
उसने ‘हाँ’ में सिर हिलाया।
मैंने कहा- मैंने आपकी भी टिकट ले ली है।
फिर हम दोनों गार्डन में आ गए और अपने लिए अच्छी सी जगह देख कर बैठ गए। उसने दुपट्टा नहीं हटाया था, मैंने बात शुरू करते हुए पूछा- आने में इतनी देर क्यों हो गई?
उसने बताया- मैं अपनी फ्रेंड के यहाँ शादी में गई थी और वहाँ से निकलने में वक़्त लग गया।
मैंने उससे कहा- अब तो ये दुपट्टा निकाल लो।
उसने कहा- मैं यहाँ कंफर्ट फील नहीं कर रही हूँ।
मैं उसे गार्डन में थोड़ा और अन्दर ले कर गया और उससे कहा- यहाँ बहुत कम लोग आते हैं.. यहाँ तुम दुपट्टा हटा सकती हो।
उसने दुपट्टा हटा दिया।
यारों क्या बताऊँ.. मेरा तो मुँह खुला का खुला रह गया। वो शादी से होकर आई थी इसलिए उसने मेकअप भी वैसा ही किया था। एकदम सुर्ख लाल होंठ, कजरारी आँखें.. गुलाबी गाल.. सच में वो अप्सरा तो नहीं थी.. लेकिन उससे कम भी नहीं लग रही थी।
थोड़ा अपने आपको संभालते हुए मैंने कहा- आप बहुत ही खूबसूरत हैं और बहुत ही प्यारी लग रही हैं।
उसने एक प्यारी स्माइल दी और थैंक्यू बोलते हुए कहा- तुम भी हैण्डसम हो।
मैंने कहा- लड़कियों को कैसा भी लड़का हीरो ही दिखता है।
दोस्तो इसका मतलब ये नहीं कि मैं इतना बुरा दिखता हूँ.. पर मैंने ऐसी बहुत सी जोड़ियां देखी हैं जिन्हें देखकर लंगूर के हाथ में अंगूर कहावत याद आती है।
मैंने बात आगे बढ़ाते हुए उसके बारे में पूछा तो उसने बताया- मैं नागपुर के एक गर्ल्स कॉलेज से अपना ग्रॅजुयेशन कर रही हूँ, फैमिली में चार लोग हैं। पापा और मम्मी दोनों जॉब करते हैं। छोटी बहन जूनियर कॉलेज में पढ़ती है।
मैंने उससे कहा- तुम बहुत स्वीट और सिंपल हो.. तो मेल पर इतनी बोल्ड बातें कैसी कर लेती हो?
उसने कहा- मैंने आज तक ऐसी बातें नहीं की.. कॉलेज में फ्रेंड्स बातें करती हैं पर मुझे पसंद नहीं हैं और मैं तुमसे भी ऐसी बातें नहीं करती.. अगर तुम खुद मुझे ऐसे सवाल ना पूछते। मैंने सिर्फ़ ये सोच कर जवाब दिए थे कि शायद हम कभी मिलेंगे ही नहीं।
मैंने कहा- फिर अचानक ये मुझसे मिलने का प्रोग्राम कैसे बना और मुझे यहाँ मिलने क्यों बुलाया?
उसने कहा- तुमसे मेल पे बातें करते करते पता नहीं मुझे क्या हुआ और तुमसे मिलने की इच्छा हो गई।
मैंने पूछा- क्यों?
उसने कहा- ये मुझको नहीं पता.. बस ऐसे ही।
मैंने उससे पूछा- क्या तुम्हारा कोई बॉयफ्रेंड है?
उसने ‘ना’ कहा।
मैंने पूछा- फिर कहानी पढ़ने का शौक कैसे लगा?
उसने कहा- सहेली ने बताया और उसे उसके बॉयफ्रेंड ने बताया था।
मैंने पूछा- क्या कभी कोई अडल्ट मूवी देखी है?
उसने कहा- मैं मोबाइल पर वीडियो देखती हूँ.. जो मुझे अपनी फ्रेंड से मिलती हैं। पहले तो मुझे पसंद नहीं था.. पर अब मुझे इस तरह की क्लिप्स अच्छी लगती हैं। इन्हें देखकर मुझे कुछ होता भी है।
मैंने कहा- सिर्फ़ देखना और पढ़ना ही पसंद है.. या कभी कुछ करने का भी मन किया?
तो उसने कहा- मन तो करता है.. पर डर भी बहुत लगता है। मेरी सहेलियां अपने बॉयफ्रेंड्स के साथ जाती रहती हैं और उनके बॉयफ्रेंड और उनके दोस्तों के साथ मुझे भी चलने के लिए कहते हैं.. पर उनके साथ जाने का मेरा कभी मन नहीं किया।
मैंने उससे कहा- अगर मैं कुछ करूँ तो तुम्हें बुरा तो नहीं लगेगा?
वो शर्मा कर बोली- क्या?
मैंने उसे गालों पर एक किस किया.. उम्म्ह… अहह… हय… याह… मुझे मजा आ गया पर तो वो शरमा गई और कुछ नहीं बोली।
अब मैंने उसे होंठों पर किस की.. वो भी मेरा साथ दे रही थी।
तभी उसका मोबाइल बज उठा। उसने बात खत्म की और मुझसे कहा- अभी मुझे जाना होगा.. वैसे भी बहुत देर हो गई है।
हमें वहाँ बैठे हुए बहुत वक़्त हो गया था इसीलिए हमें मन ना होते हुए भी वहाँ से जाना पड़ रहा था।
मैंने उससे कहा- दोबारा कब मिलने आओगी?
उसने कहा- जल्दी ही।
मैंने उससे कहा- क्या हम फोन पे बातें कर सकते हैं?
तो उसने मेरा मोबाइल नंबर ले लिया और खुद के मोबाइल से मेरे मोबाइल पर मिस कॉल किया।
उसने कहा- तुम कॉल मत करना.. मैं ही तुमको कॉल करूँगी।
उसके बाद मैंने उसको हग किया और एक किस करके हम लोग बाहर निकल आए।
उसी रात को उसका कॉल आया और हमने ढेर सारी बातें की।
मैंने उससे पूछा- अब हम कब मिलेंगे?
उसने कहा- फिलहाल मेरे कॉलेज की छुट्टियां चल रही हैं.. तो वो बिना कारण बताए ज़्यादा वक़्त के लिए घर से नहीं निकल पाऊँगी।
अब हमारी रोज बातें होने लगीं। फोन पर भी मैं उससे सेक्स चैट, उत्तेजित करने वाली बातें करता.. जिससे वो गर्म हो जाती। फिर हम फ़ोन सेक्स करके एक दूसरे की गर्मी को शांत करते।
एक दिन सवेरे उसका कॉल आया कि आज वो अपनी सहेली के घर जाने के बहाने से मुझसे मिलने आ रही है.. तो मैं 11 बजे उसको वहीं मिलूँ.. जहाँ हम पिछली बार मिले थे।
मैं वहाँ पहुँच गया, वो भी जल्दी ही आ गई, वो लॉन्ग स्कर्ट और टॉप पहन कर आई थी। ऐसा लगा कि जैसे आज पूरी तैयारी के साथ आई हो।
हम दोनों साथ में अपनी उसी जगह पर जाकर बैठ गए। सवेरे का वक़्त गुजर चुका था.. इसलिए गार्डन में ज़्यादा लोग नहीं थे। हम दोनों ज़्यादा खुल कर बैठे थे और बातें कर रहे थे।
मैंने उससे पहल करने के लिए कहा.. तो वो मुझे कभी माथे पर चूमती.. तो कभी गालों पर… वो मस्ती के मूड में थी और मुझे तड़पाना चाहती थी.. पर मैं भी कहाँ हार मानने वाला था, मैंने भी उसको कमर से पकड़ कर अपनी ओर खींचा और अपने होंठ उसके होंठों पर रख दिए।
हम दोनों एक दूसरे का पूरा साथ दे रहे थे, उसके हाथ मुझे अपनी आगोश में जकड़ रहे थे, वो मुझे खुद में समा लेना चाहती थी। मैंने भी उसको कसके पकड़ा और उसके मुँह में अपनी जुबान घुमाने लगा।
मैं उसके मम्मों को दबाने लगा.. तो वो गर्म सिसकारियां भरने लगी, उसकी साँसें तेज होने लगी थीं, उसने थोड़ा संभलते हुए कहा- प्रेम, सच में हमें यहाँ कोई देखेगा तो नहीं ना?
मैंने उससे कहा- यहाँ पर फिलहाल कोई नहीं आएगा।
वो फिर से मुझे किस करने लगी।
अब मैं ज़्यादा जोश में आ गया था.. इसलिए हाथों से उसकी बुर को सहलाने लगा। उसने भी साथ देते हुए मेरे लंड पर दबाव बनाना शुरू किया, हम एक-दूसरे को अपने हाथों से मज़ा दे रहे थे और सिसकारियां ले रहे थे।
उसने मेरे पैंट की चैन खोली और मेरे लंड को बाहर निकाल कर मजा देने लगी।
मैंने उसकी पेंटी उतार दी, वो स्कर्ट पहनकर आई थी.. इसलिए मुझे ज़्यादा मेहनत नहीं करनी पड़ी।
उसकी पेंटी गीली हो चुकी थी, मैं उसकी बुर को मजा दे रहा था, उसने कहा- अब मुझसे सहा नहीं जा रहा है।
वो चुदास में भर कर मेरा लंड अपना बुर चोदन करवाना चाह रही थी।
गार्डन में तो चुदाई करना नामुमकिन तो नहीं था.. पर मुश्किल जरूर था। मैंने उससे कहा- मैं पेड़ से सट कर बैठ जाता हूँ और तुम मेरे लंड के ऊपर आकर बैठ जाओ।
उसने सर हिलाया।
मैं पेड़ से सट कर बैठ गया और वो मेरे लंड पर अपनी बुर का निशाना लगाकर बैठ गई।
अभी मेरा लंड उसकी बुर के थोड़ा ही अन्दर गया था कि वो खड़ी हो गई।
मैंने पूछा- क्या हुआ?
उसने कहा- दर्द हो रहा है।
मैंने उसको समझाया- शुरूआत में तो दर्द होता ही है.. बाद में फिर सिर्फ़ मजा आता है।
वो मान गई और वापस मेरे लंड पर बैठने को राज़ी हो गई। मैंने अब उसकी बुर में अपना थोड़ा सा लंड घुसाया और उसे नीचे होने के लिए कहा।
इस बार उसने कुछ ज़्यादा ही ज़ोर लगा लिया। मेरा आधा लंड उसकी बुर में घुस चुका था। उम्म्ह… अहह… हय… याह… वो दर्द से चीखने ही वाली थी कि मैंने अपने हाथ से उसका मुँह दबा दिया.. वरना उस दिन तो पब्लिक में धुलाई हो जाती।
उससे दर्द सहा नहीं गया और उसकी आँखों से आँसू आने लगे, मैं उसको किस करने लगा।
थोड़ी देर में जब उसका दर्द कम हुआ तो वो खुद ही धीरे-धीरे ऊपर-नीचे होने लगी। मैं भी नीचे से धक्का लगाने लगा। वो मादक सिसकारियां ले रही थी और आवाजें निकालने लगी थी।
बात कुछ महीने पहले की है। मैं अपना मेल बॉक्स चैक कर रहा था.. उसमें मैंने अपनी पिछली कहानी से रिलेटेड एक मेल देखा.. और आदत के मुताबिक मैंने उस मेल का रिप्लाई दिया।
कुछ दिन बाद फिर से उसका मेल आया, उसने मेरी कहानी देर से पढ़ने के लिए सॉरी कहा और मेल का रिप्लाइ देने के लिए शुक्रिया भी किया।
मैंने उसके बारे में पूछा.. तो उसने अपना नाम बेला बताया।
इसी तरह हमारी मेल पर ही बातें होने लगीं।
मैं उससे कभी डबल मीनिंग बातें लिख देता.. तो वो भी मुझे भी डबल मीनिंग में रिप्लाई करती थी। हमारी बातें सिर्फ़ मेल पर ही होती थीं। मैंने उसका मोबाइल नंबर माँगा.. तो उसने नहीं दिया।
ऐसे ही कुछ दिन बीतने के बाद एक मेल में उसने मुझे मिलने की बात कही। मैंने कहा- क्या सच में तुम मुझसे मिलना चाहती हो.. मज़ाक तो नहीं कर रही हो?
उसने कहा- नहीं.. मैं सच में तुमसे मिलना चाहती हूँ।
मैंने उसको अपने बारे में बताया.. तो उसने कहा- मुझे पता है.. मैंने तुम्हारी कहानियाँ पढ़ी हैं.. जिसमें तुमने अपने बारे में पहले ही बताया हुआ है।
मैंने पूछा- तुमको मुझसे क्यों मिलना है?
उसने कहा- मिलकर बताऊँगी।
मैंने उससे पूछा- ठीक है ये बताओ कि कहाँ मिलना है?
मुझे उसने सिर्फ़ अपना नाम बताया था और मैं ये भी नहीं जानता था कि वो कौन से शहर में रहती है।
उसने कहा- मैं भी नागपुर की ही रहने वाली हूँ और रविवार को नागपुर के कपल के लिए फेमस गार्डन (नाम भी बताया) में मुझसे मिलना चाहूँगी।
मैंने उससे पूछा- तुम नागपुर में रहती हो.. ये बात मुझे पहले क्यों नहीं बताई?
तब उसने कहा- मैंने इसलिए नहीं बताया कि शायद मैं तुम्हें बताती तो तुम उसी वक्त मुझसे मिलने की फरमाइश करते।
मैंने उससे कहा- ऐसी कोई बात नहीं है।
पर बात तो उसकी भी सही थी।
मैंने उससे पूछा- मेरे पास तो तुम्हारा मोबाइल नंबर नहीं है.. तो मैं तुमको पहचानूँगा कैसे?
उसने कहा- मैं गुलाबी रंग का सलवार कुर्ता पहन कर आऊँगी।
उसने मुझे भी सफेद शर्ट और ब्लू जींस पहनकर आने को कहा। रविवार को मैं ठीक एक बजे अपने तय हुई जगह पर पहुँच गया और गार्डन के गेट पर टिकट लेकर इंतजार कर रहा था।
वहाँ पर सिर्फ़ कपल आ रहे थे.. कोई भी लड़की अकेले नहीं थी। उसने कहा था कि वो अकेली ही आएगी।
कुछ देर इंतजार करने के बाद मन में ख्याल आने लगे कि कहीं कोई मुझे बेवकूफ़ तो नहीं बना रहा है।
लगभग आधे घंटे बाद एक लड़की स्कूटी पर अकेली आई, उसने पिंक कलर का सूट पहना हुआ था, अपना पूरा मुँह दुपट्टे से ढका हुआ था। हाथ में ग्लव्ज़.. आँखों पर गॉगल पहनकर आई थी।
मुझे लगा कि शायद ये वही है। अब मन में जो हलचल चल रही थी.. वो शांत हो गई थी।
तब तक वो गाड़ी पार्क करके एंट्री गेट की तरफ आ रही थी। उसने मुझे देखा पर वो पहले टिकट लेने के लिए टिकट काउंटर की तरफ मुड़ी तो मैंने खुद वहाँ जाकर पहले उसको ‘हैलो..’ कहा।
मैंने उसे अपना परिचय दिया और पूछा- क्या आप बेला हैं?
उसने ‘हाँ’ में सिर हिलाया।
मैंने कहा- मैंने आपकी भी टिकट ले ली है।
फिर हम दोनों गार्डन में आ गए और अपने लिए अच्छी सी जगह देख कर बैठ गए। उसने दुपट्टा नहीं हटाया था, मैंने बात शुरू करते हुए पूछा- आने में इतनी देर क्यों हो गई?
उसने बताया- मैं अपनी फ्रेंड के यहाँ शादी में गई थी और वहाँ से निकलने में वक़्त लग गया।
मैंने उससे कहा- अब तो ये दुपट्टा निकाल लो।
उसने कहा- मैं यहाँ कंफर्ट फील नहीं कर रही हूँ।
मैं उसे गार्डन में थोड़ा और अन्दर ले कर गया और उससे कहा- यहाँ बहुत कम लोग आते हैं.. यहाँ तुम दुपट्टा हटा सकती हो।
उसने दुपट्टा हटा दिया।
यारों क्या बताऊँ.. मेरा तो मुँह खुला का खुला रह गया। वो शादी से होकर आई थी इसलिए उसने मेकअप भी वैसा ही किया था। एकदम सुर्ख लाल होंठ, कजरारी आँखें.. गुलाबी गाल.. सच में वो अप्सरा तो नहीं थी.. लेकिन उससे कम भी नहीं लग रही थी।
थोड़ा अपने आपको संभालते हुए मैंने कहा- आप बहुत ही खूबसूरत हैं और बहुत ही प्यारी लग रही हैं।
उसने एक प्यारी स्माइल दी और थैंक्यू बोलते हुए कहा- तुम भी हैण्डसम हो।
मैंने कहा- लड़कियों को कैसा भी लड़का हीरो ही दिखता है।
दोस्तो इसका मतलब ये नहीं कि मैं इतना बुरा दिखता हूँ.. पर मैंने ऐसी बहुत सी जोड़ियां देखी हैं जिन्हें देखकर लंगूर के हाथ में अंगूर कहावत याद आती है।
मैंने बात आगे बढ़ाते हुए उसके बारे में पूछा तो उसने बताया- मैं नागपुर के एक गर्ल्स कॉलेज से अपना ग्रॅजुयेशन कर रही हूँ, फैमिली में चार लोग हैं। पापा और मम्मी दोनों जॉब करते हैं। छोटी बहन जूनियर कॉलेज में पढ़ती है।
मैंने उससे कहा- तुम बहुत स्वीट और सिंपल हो.. तो मेल पर इतनी बोल्ड बातें कैसी कर लेती हो?
उसने कहा- मैंने आज तक ऐसी बातें नहीं की.. कॉलेज में फ्रेंड्स बातें करती हैं पर मुझे पसंद नहीं हैं और मैं तुमसे भी ऐसी बातें नहीं करती.. अगर तुम खुद मुझे ऐसे सवाल ना पूछते। मैंने सिर्फ़ ये सोच कर जवाब दिए थे कि शायद हम कभी मिलेंगे ही नहीं।
मैंने कहा- फिर अचानक ये मुझसे मिलने का प्रोग्राम कैसे बना और मुझे यहाँ मिलने क्यों बुलाया?
उसने कहा- तुमसे मेल पे बातें करते करते पता नहीं मुझे क्या हुआ और तुमसे मिलने की इच्छा हो गई।
मैंने पूछा- क्यों?
उसने कहा- ये मुझको नहीं पता.. बस ऐसे ही।
मैंने उससे पूछा- क्या तुम्हारा कोई बॉयफ्रेंड है?
उसने ‘ना’ कहा।
मैंने पूछा- फिर कहानी पढ़ने का शौक कैसे लगा?
उसने कहा- सहेली ने बताया और उसे उसके बॉयफ्रेंड ने बताया था।
मैंने पूछा- क्या कभी कोई अडल्ट मूवी देखी है?
उसने कहा- मैं मोबाइल पर वीडियो देखती हूँ.. जो मुझे अपनी फ्रेंड से मिलती हैं। पहले तो मुझे पसंद नहीं था.. पर अब मुझे इस तरह की क्लिप्स अच्छी लगती हैं। इन्हें देखकर मुझे कुछ होता भी है।
मैंने कहा- सिर्फ़ देखना और पढ़ना ही पसंद है.. या कभी कुछ करने का भी मन किया?
तो उसने कहा- मन तो करता है.. पर डर भी बहुत लगता है। मेरी सहेलियां अपने बॉयफ्रेंड्स के साथ जाती रहती हैं और उनके बॉयफ्रेंड और उनके दोस्तों के साथ मुझे भी चलने के लिए कहते हैं.. पर उनके साथ जाने का मेरा कभी मन नहीं किया।
मैंने उससे कहा- अगर मैं कुछ करूँ तो तुम्हें बुरा तो नहीं लगेगा?
वो शर्मा कर बोली- क्या?
मैंने उसे गालों पर एक किस किया.. उम्म्ह… अहह… हय… याह… मुझे मजा आ गया पर तो वो शरमा गई और कुछ नहीं बोली।
अब मैंने उसे होंठों पर किस की.. वो भी मेरा साथ दे रही थी।
तभी उसका मोबाइल बज उठा। उसने बात खत्म की और मुझसे कहा- अभी मुझे जाना होगा.. वैसे भी बहुत देर हो गई है।
हमें वहाँ बैठे हुए बहुत वक़्त हो गया था इसीलिए हमें मन ना होते हुए भी वहाँ से जाना पड़ रहा था।
मैंने उससे कहा- दोबारा कब मिलने आओगी?
उसने कहा- जल्दी ही।
मैंने उससे कहा- क्या हम फोन पे बातें कर सकते हैं?
तो उसने मेरा मोबाइल नंबर ले लिया और खुद के मोबाइल से मेरे मोबाइल पर मिस कॉल किया।
उसने कहा- तुम कॉल मत करना.. मैं ही तुमको कॉल करूँगी।
उसके बाद मैंने उसको हग किया और एक किस करके हम लोग बाहर निकल आए।
उसी रात को उसका कॉल आया और हमने ढेर सारी बातें की।
मैंने उससे पूछा- अब हम कब मिलेंगे?
उसने कहा- फिलहाल मेरे कॉलेज की छुट्टियां चल रही हैं.. तो वो बिना कारण बताए ज़्यादा वक़्त के लिए घर से नहीं निकल पाऊँगी।
अब हमारी रोज बातें होने लगीं। फोन पर भी मैं उससे सेक्स चैट, उत्तेजित करने वाली बातें करता.. जिससे वो गर्म हो जाती। फिर हम फ़ोन सेक्स करके एक दूसरे की गर्मी को शांत करते।
एक दिन सवेरे उसका कॉल आया कि आज वो अपनी सहेली के घर जाने के बहाने से मुझसे मिलने आ रही है.. तो मैं 11 बजे उसको वहीं मिलूँ.. जहाँ हम पिछली बार मिले थे।
मैं वहाँ पहुँच गया, वो भी जल्दी ही आ गई, वो लॉन्ग स्कर्ट और टॉप पहन कर आई थी। ऐसा लगा कि जैसे आज पूरी तैयारी के साथ आई हो।
हम दोनों साथ में अपनी उसी जगह पर जाकर बैठ गए। सवेरे का वक़्त गुजर चुका था.. इसलिए गार्डन में ज़्यादा लोग नहीं थे। हम दोनों ज़्यादा खुल कर बैठे थे और बातें कर रहे थे।
मैंने उससे पहल करने के लिए कहा.. तो वो मुझे कभी माथे पर चूमती.. तो कभी गालों पर… वो मस्ती के मूड में थी और मुझे तड़पाना चाहती थी.. पर मैं भी कहाँ हार मानने वाला था, मैंने भी उसको कमर से पकड़ कर अपनी ओर खींचा और अपने होंठ उसके होंठों पर रख दिए।
हम दोनों एक दूसरे का पूरा साथ दे रहे थे, उसके हाथ मुझे अपनी आगोश में जकड़ रहे थे, वो मुझे खुद में समा लेना चाहती थी। मैंने भी उसको कसके पकड़ा और उसके मुँह में अपनी जुबान घुमाने लगा।
मैं उसके मम्मों को दबाने लगा.. तो वो गर्म सिसकारियां भरने लगी, उसकी साँसें तेज होने लगी थीं, उसने थोड़ा संभलते हुए कहा- प्रेम, सच में हमें यहाँ कोई देखेगा तो नहीं ना?
मैंने उससे कहा- यहाँ पर फिलहाल कोई नहीं आएगा।
वो फिर से मुझे किस करने लगी।
अब मैं ज़्यादा जोश में आ गया था.. इसलिए हाथों से उसकी बुर को सहलाने लगा। उसने भी साथ देते हुए मेरे लंड पर दबाव बनाना शुरू किया, हम एक-दूसरे को अपने हाथों से मज़ा दे रहे थे और सिसकारियां ले रहे थे।
उसने मेरे पैंट की चैन खोली और मेरे लंड को बाहर निकाल कर मजा देने लगी।
मैंने उसकी पेंटी उतार दी, वो स्कर्ट पहनकर आई थी.. इसलिए मुझे ज़्यादा मेहनत नहीं करनी पड़ी।
उसकी पेंटी गीली हो चुकी थी, मैं उसकी बुर को मजा दे रहा था, उसने कहा- अब मुझसे सहा नहीं जा रहा है।
वो चुदास में भर कर मेरा लंड अपना बुर चोदन करवाना चाह रही थी।
गार्डन में तो चुदाई करना नामुमकिन तो नहीं था.. पर मुश्किल जरूर था। मैंने उससे कहा- मैं पेड़ से सट कर बैठ जाता हूँ और तुम मेरे लंड के ऊपर आकर बैठ जाओ।
उसने सर हिलाया।
मैं पेड़ से सट कर बैठ गया और वो मेरे लंड पर अपनी बुर का निशाना लगाकर बैठ गई।
अभी मेरा लंड उसकी बुर के थोड़ा ही अन्दर गया था कि वो खड़ी हो गई।
मैंने पूछा- क्या हुआ?
उसने कहा- दर्द हो रहा है।
मैंने उसको समझाया- शुरूआत में तो दर्द होता ही है.. बाद में फिर सिर्फ़ मजा आता है।
वो मान गई और वापस मेरे लंड पर बैठने को राज़ी हो गई। मैंने अब उसकी बुर में अपना थोड़ा सा लंड घुसाया और उसे नीचे होने के लिए कहा।
इस बार उसने कुछ ज़्यादा ही ज़ोर लगा लिया। मेरा आधा लंड उसकी बुर में घुस चुका था। उम्म्ह… अहह… हय… याह… वो दर्द से चीखने ही वाली थी कि मैंने अपने हाथ से उसका मुँह दबा दिया.. वरना उस दिन तो पब्लिक में धुलाई हो जाती।
उससे दर्द सहा नहीं गया और उसकी आँखों से आँसू आने लगे, मैं उसको किस करने लगा।
थोड़ी देर में जब उसका दर्द कम हुआ तो वो खुद ही धीरे-धीरे ऊपर-नीचे होने लगी। मैं भी नीचे से धक्का लगाने लगा। वो मादक सिसकारियां ले रही थी और आवाजें निकालने लगी थी।