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मेरी बहनें मेरी जिंदगी complete

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Guest
मेरी बहनें मेरी जिंदगी



हेल्लो दोस्तो कैसे है आप बहुत दिनो से थोड़ा बिजी था अब जाकर थोड़ा सा फ्री हुआ हूँ तो मैने सोचा एक कहानी शुरू कर ही देता हूँ मित्रो ये कहानी एक भाई और तीन बहनो की है उनकी जिंदगी में कैसे उतार चढ़ाव आते है यही सब इस कहानी मे दर्शाया गया है वैसे तो इस कहानी को मैने नही लिखा है पर हिन्दी मे ज़रूर कनवर्ट किया है और थोड़े बहुत चेंज भी किए हैं जो आपको पसंद आएँगे

(अपडेट 1)

एक तेज रोशनी जो आँखों को धुँधला कर दे, बहुत तेज घूमती हुई गाड़ी एक पेड़ की तरफ जा रही है... दूसरी गाड़ी मे एक जोकर बैठा हुआ है, वो उसे देखकर बहुत ही तेज हँसने लगता है.. वो हँसी जो किसी के भी रोंगटे खड़े कर दे... एक धमाका होता है और चारो तरफ आग लग जाती है...

अरुण एक दम से अपने बिस्तर पे उठ के बैठ जाता है. वो चिल्लाता जा रहा है और अपने आप को ही मारता जा रहा. पैर इधर उधर कर रहा है. पूरी बॉडी पसीने से भीगी हुई है. वो हवा मे ही आग को बुझाने की कोसिस कर रहा है.. फिर जैसे ही उसे रीयलाइज़ होता है कि वो सपना था वो धीरे धीरे शांत हो जाता है. अरुण अपनी आँखों को रगड़ता है.

"एक और बुरा सपना", उसके मन से आवाज़ आई. अरुण को ऐसे सपने उस आक्सिडेंट से अभी तक आ रहे थे. वो हमेशा यही सोचता है कि ये सपने आने कब बंद होंगे.

"शायद कभी नही," वो अपने आप को बिस्तर के सामने वाले सीशे मे देखते हुए बोलने लगता है.

"तुम्हे मूठ मार लेनी चाहिए,". ये आवाज़ हमेशा मदद तो नही करती है.

अरुण अपने गाल पे हल्के से मारता है. इस तरीके सो अपनी आवाज़ को पनिशमेंट भी दे देता है और खुद को जगा भी लेता है. घड़ी की तरफ नज़र जाने पर पता चलता है कि 5:30 बज रहे हैं. आलस से वो बेड से नीचे उतर के लाइट ऑन करने जा रहा होता है कि उसके रूम का दरवाजा हल्का सा खुलता है और बाहर की रोशनी उसके कमरे मे एंटर होती है.

उसकी जुड़वा बहेन आरोही अपना सिर अंदर करके बड़ी चिंता के साथ उसकी तरफ देखती है.

"इसे हमेशा पता कैसे चल जाता है?" आवाज़ पूछती है.

"अरुण तुम ठीक हो?", वो आके अरुण के बगल मे बिस्तर पर बैठ जाती है. "एक और बुरा सपना?"

अरुण अपनी नज़रें नीचे झुका लेता है. वो आरोही को परेशान नही करना चाहता. आरोही कई मायनों मे बिल्कुल उसकी तरह थी, और कई मामलो मे बिल्कुल अलग. कभी कभी उसे लगता था जैसा उसका और आरोही का कोई रिश्ता ही नही है जबकि दुनिया वालों की नज़रों मे वो दोनो जुड़वा हैं. उधर उसके सिर मे उस आवाज़ मे ऐसे ही कोई धुन गानी सुरू कर दी.

वो दोनो बचपन से ही ज़्यादा से ज़्यादा टाइम साथ मे ही रहते थे. इसी वजह से उनके फ्रेंड सर्कल उन्हे डबल ए कह कर बुलाने लगा था. आरोही को पता नही हमेशा कैसे पता चल जाता था कि अरुण उदास है. उसकी बाकी बहनें इसे जुड़वा होने का साइड एफेक्ट बताती थी. अरुण भी हमेशा जान जाता था कि आरोही सॅड है चाहे वो उसके साथ हो या नही.

"अरुण?"

अरुण उसकी ओर देखता है. वो उसे बहुत ही गंभीर तरीके से देख रही है.

"हेलो...अरूंन्ं."

"ह्म्म, सॉरी. मैं ठीक हूँ, बस वही सपना," वो थोड़ी झुरजुरी के साथ कहता है.

"वही दोबारा? आक्सिडेंट वाला?"

अरुण हां मे सिर हिला देता है. आरोही उसके कंधे को पकड़कर अपना सिर उसके कंधे पर रख देती है.

"जोकर भी था क्या?"

अरुण एक हल्के से मुस्कुराता है और हां मे सिर हिला देता है.

"तुम्हारी और जोकर की दुश्मनी है क्यू. आक्सिडेंट के सपने मे जोकर? क्या बचपन मे जोकर ने मारा था क्या?" वो उसकी तरफ देखते हुए बहुत ही सीरीयस मूड मे पूछती है.

अरुण हल्की सी हँसी के साथ उसे धक्का देता है. आरोही हमेशा उसे अच्छा फील करवा ही देती है. चाहे कैसे भी.

वो फिर भी डरावनी आवाज़ मे कहती है, " क्या उस शैतान जोकर ने तुम्हे उसकी बड़ी लाल नाक छुने के लिए मजबूर किया?" और दोबारा अरुण को पकड़ लेती है.

अरुण काफ़ी तेज हँसने लगता है और उसे बेड पर धक्का दे कर कहता है "नही उसने ये किया था," और उसके पेट मे गुदगुदी करने लगता है. आरोही बहुत तेज हँसने लगती है और पीछे हटने की कोसिस करने लगती है.

अरुण को पता था कि उसे सबसे ज़्यादा गुदगुदी कहाँ लगती है (दोनो जुड़वा हैं भाई).

"उसके पास बूब्स भी हैं,"

(आगे से बोल्ड मे लिखा हुआ पार्ट अरुण के सिर मे आवाज़ की बात को बताया जाएगा)

अरुण रुक जाता है तब तक आरोही साँस लेने लगती है. अरुण सोचता है क्या किसी ओपरेशन के थ्रू वो इस आवाज़ को बंद नही कर सकता. शायद उसे साइकिट्रिस्ट की ज़रूरत है. आरोही को उठा देख वो दोबारा उसके पेट की तरफ हाथ बढ़ाता है.

"स्टॉप." वो तेज आवाज़ मे बोलती है. चेहरे मे बहुत बड़ी स्माइल है. वो उसके हाथ पर मारती है और कमरे से बाहर जाने के लिए दरवाजे की तरफ जाने लगती है.

"दोबारा सोने?"

"अब जब तुमने इतनी गुदगुदी करके जगा दिया तब?" वो उसकी तरफ हाथ झाड़ के चली जाती है. दरवाजा बंद होते ही अरुण को पागल सुनाई देता है. वो दोबारा बिस्तर पर लेट जाता है और छत की तरफ देख के सोचने लगता है..

1

Ek tej roshni jo ankhon ko dhundhla kr de, bahut tej ghumti hui gadi ek ped ki taraf ja rahi hai... dusri gadi me ek joker baitha hua hai, wo use dekhkar bahut hi tej hasne lagta hai.. wo hasi jo kisi ke bhi rongte khade kar de... ek dhamaka hota hai aur charo taraf aag lag jati hai...

Arun ek dum se apne bistar pe uth ke baith jata hai. Wo chillata ja rha hai aur apne aap ko hi marta ja rha. Pair idhar udhar kr rha hai. Puri body paseene se bheegi hui hai. Wo hawa me hi aag ko bujhane ki kosis kr rha hai.. fir jaise hi use realise hota hai ki wo sapna tha wo dheere dheere shant ho jata hai. Arun apni ankhon ko ragdta hai.

"Ek aur bura sapna", uske man se awaz aayi. Arun ko aise sapne us accident se abhi tak aa rhe the. Wo hamesha yahi sochta hai ki ye sapne aane kab band honge.

"Shayad kabhi nhi," wo apne aap ko bistar ke samne wale seeshe me dekhte hue btata hai.

"Tumhe muth mar leni chahiye,". Ye awaz hamesha madad to nhi krti hai.

Arun apne gal pe halke se marta hai. Is tarike so apni awaj ko punishment bhi de deta hai aur khud ko jaga bhi leta hai. Ghadi ki taraf nazar jane par pta chalta hai ki 5:30 baj rahe hain. Alas se wo bed se niche utar ke light on krne ja rha hota hai ki uske room ka darwaja halka sa khulta hai aur bahar ki roshni uske kamre me enter hoti hai.

Uski judwa behen Aarohi apna sir andar krke badi chinta ke sath uski taraf dekhti hai.

"Ise hamesha pata kaise chal jata hai?" Awaz puchti hai.

"Arun tum thik ho?", Wo aake arun ke bagal me bistar par baith jati hai. "Ek aur bura sapna?"

Arun apni nazrein niche jhuka leta hai. Wo aarohi ko pareshan nhi krna chahta. Aarohi kai mayeno me bilkul uski trah thi, aur kai mamlo me bilkul alag. Kabhi kabhi use lagta tha jaisa uska aur aarohi ka koi rishta hi nhi hai jabki duniya walon ki nazron me wo dono judwa hain. Udhar uski sir me us awaz me aise hi koi dhun gani suru kr di.

Wo dono bachpan se hi jyada se jyada time sath me hi rehte the. Isi wajah se unke friend circle unhe Double A keh kar bulane laga tha. Aarohi ko pata nhi hamesha kaise pata chal jata tha ki Arun udas hai. Uski baki behne ise judwa hone ka side effect batati thi. Arun bhi hamesha jan jata tha ki aarohi sad hai chahe wo uske sath ho ya nhi.

"Arun?"

Arun uski or dekhta hai. Wo use bahut hi gambheer tarike se dekh rhi hai.

"Hello...Arunnn."

"Hmm, sorry. Main thik hun, Bas wahi sapna," Wo thodi jhurjhuri ke sath kehta hai.

"Wahi dobara? Accident wala?"

Arun haan me sir hila deta hai. Aarohi uske kandhe ko pakadkar apna sir uske kandhe par rakh deti hai.

"Joker bhi tha kya?"

Arun ek halke se muskurata hai aur haan me sir hila deta hai.

"Tumhari aur joker ki dushmani hai kyu. Accident ke sapne me joker? Kya bachpan me joker ne mara tha kya?" Wo uski taraf dekhte hue bahut hi serious mood me puchti hai.

Arun halki si hansi ke sath use dhakka deta hai. Aarohi hamesha use acha feel krwa hi deti hai. Chahe kaise bhi.

Wo fir bhi darawani awaz me kehti hai, " Kya us shaitan joker ne tumhe uski badi lal naak chhune ke liye majboor kiya?" Aur dobara arun ko pakad leti hai.

Arun kafi tej hasne lagta hai aur use bed par dhakka de kar kehta hai "Nahi usne ye kiya tha," aur uski ped me gudgudi krne lagta hai. Aarohi bahut tej hasne lagti hai aur pich hatne ki kosis krne lagti hai.

Arun ko pta tha ki use sabse jyada gudgudi kahan lagti hai (dono judwa hain bhai).

"Uske pas boobs bhi hain,"

(aage se bold me likha hua part arun ke sir me awaz ki bat ko bataya jayega)

Arun ruk jata hai tab tak aarohi saas leni lagti hai. Arun sochta hai kya kisi opeartion ke through wo is awaz ko band nhi kr skta. Sayad use psychiatrist ki jarurat hai. Aarohi ko utha dekh wo dobara uske pet ki taraf hath badhata hai.

"Stop." Wo tej awaz me bolti hai. chehre me bahut badi smile hai. Wo uske hath par marti hai aur kamre se bahar jane ke liye darwaje ki taraf jane lagti hai.

"Dobara sone?"

"Ab jab tumne itni gudgudi krke jaga diya tab?" Wo uski taraf hath jhad ke chali jati hai. Darwaja band hote hi arun ko PAGAL sunai deta hai. Wo dobara bistar par let jata hai aur chhat ki taraf dekh ke sochne lagta hai..

 
मेरी बहनें मेरी जिंदगी-पार्ट-2

वो दोबारा बिस्तर पर लेट जाता है और छत की तरफ देख के सोचने लगता है..

अरुण छत की तरफ देखते हुए सोचने लगता है.

अरुण को हमेशा से पता था कि कोई आवाज़ उसके मन मे है पर वो कोई पागल थोड़ी ना था. आटीस्ट, कम से कम वो तो ये नही सोचता था. क्या एक पागल को पता होता है कि वो पागल है? और ये आवाज़ कोई बुरी तो थी नही बस थोड़ी सेक्स की तरफ अट्रॅक्टेड थी. उसके चेहरे पर से मुस्कान तुरंत ही गायब हो गयी जब उसे याद आया कि अगर उसने ये आवाज़ वाली बात किसी को बताई तो लोग उसे पागल ही समझेंगे. वो अपना सिर हिला के कहता है "बहुत ज़्यादा सोचते हो यार". वो जानता था कि जिंदगी की किसी भी लड़ाई मे उसकी बहनें हमेशा उसके साथ ही रहेंगी. इसी तरह सोचते सोचते उसके थॉट्स आरोही पर आ टिके.

"वूहू", फिर आवाज़ आई. अरुण ने दोबारा सिर को हिलाया. वो आरोही को लेकर थोड़ा प्रोटेक्टिव था. ये अलग बात है आरोही को इसकी ज़रूरत नही थी फिर भी. वो लगभग उसी की हाइट की थी वैसे अरुण थोड़ा मस्क्युलर था. आरोही के दो तीन बाय्फरेंड्स रह चुके थे पास्ट मे पर क्योकि वो ज़्यादातर टाइम अरुण के साथ स्पेंड क्रती थी तो कुछ हो नही पाया.

उन दोनो की नाक और आँखे एक जैसी थी. बस अरुण की दो तीन बार नाक टूट चुकी थी. बाल भी दोनो के एक जैसे थे भूरे, सिल्की, बस आरोही के लंबे थे. हां, आरोही सुंदर तो थी.

"हॉट भी,"

अरुण ने इग्नोर कर दिया. दोनो ने एक ही कॉलेज मे एक ही सब्जेक्ट लिया था. तो ज़्यादातर टाइम कॉलेज मे दोनो साथ मे ही बिताते थे. अरुण को इस बात से कोई प्राब्लम भी नही थी उसे आरोही के साथ रहना अच्छा लगता था. एक तरीके से आरोही उसका दाहिना हाथ थी.

"और तुम्हे पता है दाहिने हाथ(राइट हॅंड) के साथ क्या किया जाता है?"

"शट अप," अरुण खुद मे सोचता है. हां, वो सुंदर थी. उसकी सभी बहने सुंदर थी.

अरुण आरोही के बारे मे उस तरीके से सोच भी नही सकता था. आरोही के बारे मे उस तरीके से सोचना मतलब खुद के बारे मे उस तरीके से सोचना. अरुण थोड़ी देर के लिए सोचता है कि लड़की बनकर वो कैसा लगेगा. लेकिन तुरंत ही सिर को हिलाकर ये थॉट छोड़ देता है.

उसके थॉट्स अब स्नेहा पर आ गये. एक स्माइल आ गयी उसके चेहरे पर. स्वीट, सिंपल, विदाउट सोशियल सेन्स- स्नेहा. उसे और आरोही को दिमाग़ के साथ साथ अच्छे लुक्स भी मिले थे. स्नेहा के पास भी ये सब था पर थोड़ा अलग. स्नेहा बेवकूफ़ नही थी, फॉर आ फॅक्ट. वो उनकी फॅमिली की सबसे इंटेलिजेंट मेंबर थी. इतनी स्मार्ट कि कभी कभी उससे डर लगने लगता था. हमेशा क्लास मे टॉप आती थी. वो पुरातत्व विज्ञान पर रिसर्च मे कुछ करना चाहती थी. और ज़्यादातर टाइम पढ़ने मे ही लगाती थी. चास्मिस. मेकप का तो शायद उसे एम भी नही पता था.

स्नेहा की बॉडी भी मस्त है. जब किसी पार्टी ये बाहर घूमने के मौके पर वो अच्छी सी ड्रेस मे आती थी तो लोगो की साँसे रुक जाती थी. अटलीस्ट आऱुन तो ऐसा मानता था. उसके बूब्स घर मे सेकेंड लार्जेस्ट थे. एक लाइन मे कोई स्नेहा को डिस्क्राइब करे तो होगा पढ़ाकू, चास्मिस, क्यूट.

अरुण ने कभी उसे किसी लड़के के साथ नही देखा. अरुण को उसके बाय्फ्रेंड बनाने से ज़्यादा प्राब्लम नही थी बट उसका कोई बाय्फ्रेंड था ही नही. वो कुछ ज़्यादा ही इंटेलिजेंट थी.

अब उसके थॉट्स आए सोनिया पर.

"कुत्ती कमीनी,"

छोड़ो, उसने आवाज़ से कहा. अरुण सोचने लगा क्या आरोही के मन मे भी ऐसी आवाज़ होगी या सिर्फ़ उसी के मन मे ये सब होता है. स्नेहा के मन मे ज़रूर आइनस्टाइन बोलता होगा. और अगर सोनिया के मान मे कोई बोलता होगा तो वो आवाज़ होगी केवल चुड़ैल.

"या फिर सेक्सी चुड़ैल,"

अरुण ने एक लंबी सास ली. उसे पता था कि अगर उसने आवाज़ के बारे सोनिया से कुछ पूछा तो पहले तो उसे पागल की उपाधि दी जाएगी फिर उसके सिर पर डंडा मारा जाएगा. और जब वो बदला लेने जाएगा तो दोबारा डंडा खाएगा. अरुण को कभी कभी उस पर इतनी गुस्सा आता था कि मन करता था कुछ चुबा दे उसके. एक मिनिट, नही ऐसा नही. मत सोचना, मत सोचना.

"मुझे पता था तू मेरा ही भाई है,"

ओके तो वो उससे नफ़रत तो नही कर सकता क्योकि बहेन है वो उसकी. पर प्यार भी नही करता था. अगर प्यार नही करता है तो नफ़रत करता होगा??

बचपन से ही वो और आरोही सोनिया के टारगेट रहे हैं. आरोही थोड़ा जल्दी रो जाती थी तो सोनिया मुसीबत मे ना पड़े तो अरुण की जिंदगी बदहाल करने पर जुटी रहती थी. वही उन दोनो को सबसे पहले डबल ए कह कर बुलाया करती थी.

उसका मन उसे उसके सबसे फॅवुरेट टॉपिक पर लाने की कोशिस करता है. स्विम्मिंग. उनका घर काफ़ी आलीशान था. पीछे एक पूल भी था. उसे आरोही के साथ पूल मे मस्ती करना काफ़ी पसंद था.

सोनिया स्विम्मिंग मे मास्टर थी. उसने स्कूल मे चॅंपियन्षिप भी जीती थी.

"स्विम्मिंग के वक़्त क्या मस्त लगती है स्विमस्यूट मे,"

हां हां अच्छी लगती है. क्या आगे बढ़े? आवाज़ हँसने लगती है. उसे पता नही अरुण को सताने मे क्या मज़ा आता है.

अब उसके थॉट्स उसकी सबसे बड़ी बहेन सुप्रिया पर आकर टिक जाते हैं. बड़ी नही सुप्रिया की उम्र थी 22 साल. सुप्रिया के उपर उसके परिवार की ज़िम्मेदारी 17 साल की उम्र मे ही आ गयी जब उनके पेरेंट्स का आक्सिडेंट हो गया था. ये उसके लिए आसान नही था पर वो काफ़ी स्ट्रॉंग लड़की थी. एक तरीके से वो उन सबकी माँ बाप बन गयी थी...सोनिया कभी इस बात को आक्सेप्ट नही करेगी. वो हमेशा कुछ ना कुछ सॉफ ही करती रहती थी घर मे. पैसो के मामले भी वही देखा करती थी. वैसे पैसो की कोई कमी तो थी नही क्योकि मम्मी पापा दोनो डॉक्टर्स थे उपर से खानदानी पैसा.

अरुण एक बात को लेकर बड़ा परेशान था. जब भी वो मास्टरबेट करता था और जैसे ही उसका निकलने वाला होता उसका मन किसी ना किसी बहेन की पिक्चर उसके सामने ज़रूर भेजता.

ये सब सोचकर उसने घड़ी देखी तो 6 बज गये थे. वो उठा और बाथरूम मे जाके शवर ऑन किया और फिर से सोनिया के बारे मे सोचने लगा. कि क्या वो जिस तरीके से अरुण और आरोही की इन्सल्ट करती है वैसे अपने फ्रेंड्स की भी करती होगी. उसके दोस्त उसके बारे मे क्या सोचते होंगे.

"मस्त बूब्स, बड़ी गान्ड, बुक्बीस, चिकनी...,"

"स्टॉप इट.". खैर इन सब बातों को छोड़ो तो वो लगती तो हॉट है. छोड़ो इन बातों को.

इन सब बातों से मन हटाने के लिए अरुण ने सोचा कि मास्टरबेट ही कर लिया जाए...

2

Wo dobara bistar par let jata hai aur chhat ki taraf dekh ke sochne lagta hai..

Arun chhat ki taraf dekhte hue sochne lagta hai.

Arun ko hamesha se pata tha ki koi awaz uske man me hai par wo koi pagal thodi na tha. Atleast, kam se kam wo to ye nhi sochta tha. Kya ek pagal ko pta hota hai ki wo pagal hai? Aur ye awaz koi buri to thi nhi bas thodi sex ki taraf attracted thi. Uske chehre par se muskan turant hi gayab ho gayi jab use yaad aya ki agar usne ye awaj wali bat kisi ko batayi to log use pagal hi samjhenge. Wo apna sir hila ke kehta hai "BAhut jyada sochte ho yar". Wo janta tha ki jindagi ki kisi bhi ladai me uski behne hamesha uske sath hi rahengi. Isi tarah sochte sochte uske thoughts Aarohi par aa tike.

"Woohoo", fir awaz aayi. Arun ne dobara sir ko hilaya. Wo aarohi ko lekar thoda protective tha. Ye alag baat hai aarohi ko iski jarurat nhi thi fir bhi. Wo lagbhag usi ki height ki thi was Arun thoda muscular tha. Aarohi ke do tin boyfriends reh chuke the past me par kyoki wo jyadatar time Arun ke sath spend krti thi to kuch ho nhi paya.

Un dono ki naak aur ankhe ek jaisi thi. Bas Arun ki do tin bar nak tut chuki thi. Bal bhi dono ke ek jaise the bhure, silki, bas aarohi ke lambe the. Haan, Aarohi sundar to thi.

"Hot bhi,"

Arun ne ignore kr diya. Dono ne ek hi college me ek hi subject liya tha. To jyadatar time college me dono sath me hi bitate the. Arun ke is bat se koi problem bhi nhi thi use Aarohi ke sath rehna achcha lagta tha. Ek tarike se Aarohi uska dahina hath thi.

"Aur tumhe pata hai Dahine Hath(Right Hand) ke sath kya kiya jata hai?"

"Shut up," Arun khud me sochta hai. Haan, wo sunder thi. Uski sabhi behne sunder thi.

Arun aarohi ke bare me us tarike se soch bhi nhi skta tha. Aarohi ke bare me us tarike se sochna matlab khud ke bare me us tarike se sochna. Arun thodi der ke sochta hai ki ladki bankar wo kaisa lagega. Lekin turant hi sir ko hilakar ye thought chhod deta hai.

Uske thoughts ab Sneha par aa gaye. Ek smile aa gayi uske chehre par. Sweet, simple, without social sense- Sneha. Use aur Aarohi ko dimag ke sath sath ache looks bhi mile the. Sneha ke pas bhi ye sab tha par thoda alag. Sneha bevkoof nhi thi, for a fact. Wo unki family ki sabse intelligent member thi. Itni smart ki kabhi kabhi usse dar lagne lagta tha. Hamesha class me top aati thi. Wo archaelogical research me kuch krna chahti thi. Aur jyadatar time padhne me hi lagati thi. Chasmis. Makeup ka to shayad use M bhi nahi pata tha.

Sneha ki body bhi mast hai. Jab kisi party ye bahar ghumne ke mauke par wo ache si dress me aati thi to logo ki saanse ruk jati thi. Atleast ARun to aisa manta tha. Uske boobs ghar me second largest the. Ek line me koi Sneha ko describe kare to hoga Padhaku, Chasmis, Cute.

Arun ne kabhi use kisi ladke ke sath nhi dekha. Arun ko uske boyfriend banane se jyada problem nhi thi but uska koi boyfriend tha hi nhi. Wo kuch jyada hi intelligent thi.

Ab uske thoughts aye Soniya par.

"Kutti Kamini,"

Chodo, usne awaz se kha. Arun sochne laga kya Aarohi ke man me bhi aisi awaz hogi ya sirf usi ke man me ye sab hota hai. Sneha ke man me jarur Einstein bolta hoga. Aur agar Soniya ke man me koi bolta hoga to wo awaz hogi kewal CHudail.

"Ya fir sexy chudail,"

Arun ne ek lambi saas li. Use pata tha ki agar usne awaz ke bare Soniya se kuch pucha to pehle to use Pagal ki upadhi di jayegi fur uske sir par danda mara jayega. Aur jab wo badla lene jayega to dobara danda khayega. Arun ko kabhi kabhi us par itni gussa aati thi ki man karta tha kuch chubha de uske. Ek minute, nhi aisa nhi. Mat sochna, mat sochna.

"Mujhe pata tha tu mera hi bhai hai,"

Okay to wo usse nafrat to nhi kr skta kyoki behen hai wo uski. Par pyar bhi nhi krta tha. Agar pyar nhi krta hai to nafrat krta hoga??

Bachpan se hi wo aur aarohi soniya ke target rahe hain. Aarohi thoda jaldi ro jati thi to soniya musibat me na pade to arun ki jindagi badhal krne par juti rehti thi. Wahi un dono ko sabse pehle double AA keh kar bulaya krti thi.

uska man use uske sabse favourite topic par lane ki kosis krta hai. Swimming. Unka ghar kaphi aalishan tha. Piche ek pool bhi tha. Use aarohi ke sath pool me masti krna kaphi pasand tha.

Soniya swimming me master thi. Usne school me championship bhi jiti thi.

"Swimming ke waqt kya mast lagti hai swimsuit me,"

Haan Haan achi lagti hai. Kya aage badhe? Awaz hasne lagti hai. Use pata nhi Arun ko satane me kya maza aata hai.

Ab uske thoughts uski sabse badi behen Supriya par aakar tik jate hain. Badi nhi Supriya ki umr thi 22 saal. Supriya ke upar uske parivar ki jimmedari 17 saal ki umr me hi aa gayi jab unke parents ka accident ho gaya tha. Ye uske liye asaan nhi tha par wo kafi strong ladkli thi. Ek tarike se wo un sabki maa baap ban gayi thi...Soniya kabhi is bat ko accept nhi karegi. Wo hamesha kuch na kuch saaf hi krti rehti thi ghar me. Paiso ke mamle bhi wahi dekha krti thi. Waise paiso ki koi kami to thi nhi kyoki mummy papa dono doctors the upar se khandani paisa.

Arun ek bat ko lekar bada pareshan tha. Jab bhi wo masturbate krta tha aur jaise hi uska nikalne wala hota uska man kisi na kisi behen ki picture uske samne jarur bhejta.

Ye sab sochkar usne ghadi dekhi to 6 baj gaye the. Wo utha aur bathroom me jake shower on kiya aur fir se Soniya ke bare me sochne laga. Ki kya wo jis tarike se arun aur aarohi ki insult krti hai waise apne friends ki bhi krti hogi. Uske dost uske bare me kya sochte honge.

"Mast boobs, badi gaand, boobies, chikni...,"

"Stop it.". Khair in sab baton ko choodo to wo lagti to hot hai. Chodo in baton ko.

In sab baton se man hatante ke liye Arun ne socha ki masturbate hi kr liya jaye...

 
3

उसने अपने हाथों मे कुछ शॅमपू लिया और और अपना लंड पकड़कर उसे मसलना शुरू कर दिया. कुछ ही सेकेंड्स मे उसका लंड अपने फुल साइज़ मे आ गया और अरुण मदहोशी मे खोता चला गया. पूरे बाथरूम मे सिर्फ़ उसके हाथ की पच पच की आवाज़ और शवर से पानी गिरने की आवाज़ फैली हुई थी इस टाइम वो प्रार्थना कर रहा था कि घर मे सब लोग सो रहे हों या फिर बहरे हो जाए. उसके थॉट्स दोबारा सोनिया पर आ गये- उसके बूब्स, गान्ड, स्पॉटलेस स्किन, तीखे नैन नक्श.. दौड़ते टाइम उसके बूब्स का उछलना.. उसने अपने आप को कोसते हुए अपना सिर हिला कर इन थॉट्स को हटाने की कोसिस की. और अपना ध्यान एक फिल्म की हेरोइन पर लगाने की कोसिस की. जैसे ही वो चरम सीमा के बिल्कुल नज़दीक पहुच गया उसे लगने लगा कि उसके अंदर एक लहर सी बन रही है जो उसे उसके दिन के पहले ऑर्गॅज़म का मज़ा देगी.

और इधर उसके मन की आवाज़ बिल्कुल पर्फेक्ट टाइम का इंतज़ार क्रि रही थी.

इस टाइम अरुण इस दुनिया मे था ही नही इसलिए उसने बाथरूम के दरवाजे के खुलने की आवाज़ नही सुनी. और उपर से वो अंदर से लॉक करना भी भूल गया था. आरोही ने धीरे से अंदर झाँका. आरोही ने देखा कि स्नेहा की जगह उसका भाई शवर ले रहा है.(इनके घर मे एक ही लार्ज बाथरूम है) उसने तुरंत ही अपना सिर दरवाजे से बाहर कर लिया. लेकिन तब तक उसे आवाज़ सुनाई दे गयी थी. उसे लगा जैसे कोई भीगी हुई चीज़ पर अपने हाथ रगड़ रहा हो. उसका हाथ अपने आप ही उसके मूह पर चला गया जिससे उसकी हँसी किसी को सुनाई ना दे. उसने जाने के बारे मे सोचा लेकिन ये चंचल मन... उसने सोचा देखते हैं ना.

अरुण अपनी इमॅजिनेशन मे इतना खोया हुआ है कि उसे दरवाजा खुलने की आवाज़ सुनाई ही नही दी. और उसी टाइम वो क्लाइमॅक्स पर पहुँच गया. उसके सिर मे एक दम कई सारे हल्के हल्के विस्फोट होने लगे. और उसी टाइम उसके मन की आवाज़ ने अपना हमला कर दिया.

"आह..सोनियाअ..."

उसके स्पर्म की एक लंबी सी धार निकली और सामने बाथरूम की दीवार पे चिपक गयी और अरुण के मन मे सोनिया की पिक्चर आने लगी, उसके ब्रा मे क़ैद बूब्स. उसकी नंगी कमर, चिकनी जंघे, पतले होठ...

"आअह...सोनियाअ,,,फक मी..." मस्ती मे उसके मूह से ये शब्द बाहर आ गये.

आरोही झटके के साथ रुक गयी. "सोनिया?" उसके मन से ये बात तो निकल ही गयी कि उसका भाई मूठ मार रहा है. आअह..सोनिया? ये आख़िर कर क्या रहा है? क्या अरुण सोनिया के बारे मे इस तरीके से सोच रहा है? वो तो उसे बिल्कुल भी पसंद नही करता.

एक मिनिट...ओह शिट.

"ओह माइ गॉड!"

आरोही वही ठहर गयी जैसे कोई स्टॅच्यू खड़ा हो.. जब उसे पता चला कि उसने ये सब सोचा नही बल्कि बोला है और इतनी तेज़ बोला है कि शायद अरुण ने सुन भी लिया होगा. उसने अपने मूह पर हाथ रख लिया.

"प्लीज़...दोबारा नही..," अरुण तेज़ी से बोला. अपनी आवाज़ को चुप करवाने के लिए उसने ये बोला जो बहुत तेज़ उसके सिर मे हंस रही थी. आख़िर उसने इतनी तेज आअह सोनिया बोला ही क्यू?

"ओह माइ गॉड," उसने शवर के बाहर ये सुना. उसके हाथ पैर ठंडे पड़ गये. एक दम पूरा शरीर शांत पड़ गया. ऐसा लगा जैसे उसके शरीर मे जान हो ही नही.

जैसे ही आरोही को लगा कि अरुण ने उसके शब्द सुन लिए हैं उसने अपना सिर पीछे किया और तेज़ी से दरवाजा बंद करके अपने कमरे मे भाग गयी. कमरे मे पहुँचते ही वो अपने बेड पर तकिये पर अपना सिर पटक के बहुत तेज़ी से हँसने लगी. उसे इतनी तेज हँसी आ रही थी कि उसके पेट मे दर्द हो गया. और वो अपना सिर तकिया मे छुपाने लगी.

"ओह फक," अरुण चिल्लाया. कौन था बाहर? "प्लीज़ सोनिया नही...भगवान प्लीज़ सोनिया नही" हे भगवान, प्लीज़, शिट, अब क्या होगा उसके मन मे बुरे बुरे ख़याल आने लगे. आख़िर क्यूँ उसने मूठ मारते वक़्त सोनिया के बारे मे सोचा. और वो भी उसके बारे मे जिससे वो नफ़रत करता है. उसने अपना सिर पानी के नीचे करके आँखे बंद कर ली."मुझे सही मे इलाज़ की ज़रूरत है."

थोड़ी देर बाद वो सावधानी के साथ बाहर निकला ये देखते हुए कही कोई आसपास तो नही है और अपने रूम मे जाकर कपड़े पहनने लगा...

3

Usne apne hathon me kuch shampoo liya aur aur apna lund pakadkar use masalna shuru kar diya. Kuch hi seconds me uska lund apne full size me aa gaya aur Arun madhoshi me khota chala gaya. Pure bathroom me sirf uske hath ki pach pach ki awaz aur shower se pani girne ki awaz faili hui thi is time wo prarthana kar rha tha ki ghar me sab log plz so rahe hon ya fir behre ho jaye. Uske thoughts dobara Soniya par aa gaye- uske boobs, gand, spotless skin, tikhe nain naksh.. Daudte time uske boobs ka uchalna.. Usne apne aap ko koste hue apna sir hila kar in thoughts ko hatane ki kosis kari. Aur apna dhyan ek film ki heroin pr lagane ki kosis ki. Jaise hi wo charam seema ke bilkul najdeek pahuch gaya use lagne laga ki uske andar ek lahar si ban rhi hai jo use uske din ke pehle orgasm ka maja degi.

Aur idhar Uske man ki awaz bilkul perfect time ka intzaar kari rhi thi.

Is time Arun is duniya me tha hi nhi isliye usne bathroom ke darwaje khulne ki awaz nhi suni. Aur upar se wo andar se lock karna bhi bhul gya tha. Aarohi ne dhere se andar jhanka. Aarohi ne dekha ki Sneha ki jagah uska bhai shower le raha hai.(Inke ghar me ek hi large bathroom hai) Usne turant hi apna sir darwaje se bahar kar liya. Lekin tab tak use awaz sunai de gayi thi. Use laga jaise koi bheegi hui cheej par apne haath ragad raha ho. Uska hath apne aap hi uske muh par chala gaya jisse uski hasi kisi ko sunai na de. Usne jane ke bare me socha lekin ye chanchal man... usne socha dekhte hain na.

Arun apni imagination me itna khoya hua hai ki use darwaja khulne ki awaz sunai hi nhi di. Aur usi time wo climax par pahunch gaya. Uske sir me ek dam kai sare halke halke visphot hone lage. Aur usi time uske man ki awaz ne apna hamla kar diya.

"Aah..Soniyaaa..."

Uske sperm ki ek lambi si dhar nikli aur samne bathroom ki diwar pe chipak gayi aur Arun ke man me Soniya ki picture aane lagi, uske bra me kaid dooth. Uski nangi kamar, chikni janghe, patle hoth...

"Aah...Soniyaaa,,,Fuck me..." Masti me uske muh se ye shabd bahar aa gaye.

Aarohi jhatke ke sath ruk gayi. "Soniya?" Uske man se ye bat to nikal hi gayi ki uska bhai muth mar rha hai. Aah..Soniya? Ye aakhir kar kya rha hai? Kya Arun Soniya ke bare me is tarike se soch rha hai? Wo to use bilkul bhi pasand nhi karta.

Ek minute...oh shit.

"OH MY GOD!"

Aarohi wahi thehar gayi jaise koi statue khada ho.. jab use pata chala ki usne ye sab socha nhi balki bola hai aur itni tez bola hai ki shayad Arun ne sun bhi liya hoga. Usne apne muh par hath rakh liya.

"Plz...Dobara nhi..," Arun teji se bola. Apni awaz ko chup karwane ke liye usne ye bola jo bahut tez uske sir me has rahi thi. Aakhir usne itni tej Aah Soniyaa bola hi kyu?

"OH MY GOD," usne shower ke bahar ye suna. Uske hath pair thande pad gaye. Ek dum pura sharir shant pad gaya. Aisa laga jaise uske sharir me jaan ho hi nhi.

Jaise hi Aarohi ko laga ki Arun ne uske shabd sun liye hain usne apna sir piche kiya aur teji se darwaja band karke apne kamre me bhag gayi. Kamre me pahunchte hi wo apne bed par takiye par apna sir patak ke bahut teji se hansne lagi. Use itni tej hansi aa rhi thi ki uske pet me dard ho gya. Aur wo apna sir takiya me chupane lagi.

"Oh fuck," Arun chillaya. Kaun tha bahar? "Plz Soniya nhi...bhagwaan plz Soniya nhi" He bhagwan, plz, shit, ab kya hoga uske man be bure bure khayal aane lage. Aakhir kyu usne muth marte waqt Soniya ke bare me socha. Aur wo bhi uske bare me jisse wo nafrat karta hai. Usne apna sir pani ke niche karke ankhe band kar li."Mujhe sahi me ilaz ki jarurat hai."

Thodi der bad wo savdhani ke sath bahar nikla ye dekhte hue kahi koi aaspas to nhi hai aur apne room me jakar kapde pahanne laga...

 
4

पहले इनके घर के बारे मे पता कर लेते हैं.

2 मंज़िल का बंगलो है. उपर के फ्लोर पर अरुण आरोही और सोनिया के कमरे हैं. नीचे सुप्रिया और स्नेहा के कमरे हैं. साथ मे एक लार्ज बाथरूम और फुल्ली फर्निश्ड किचन प्लस आ लार्ज हॉल. बॅकयार्ड मे एक पूल.

तो वापस...

उसके बाद सुबह लगभग नॉर्मली ही स्टार्ट हुई. जब अरुण सीढ़ियों से नीचे आ रहा था उसे देसी घी के बने परान्ठो की महक आनी स्टार्ट हो गयी. और उसे बिना देखे ही पता चल गया ये पराठे जो कि उसकी फॅवुरेट चीज़ है वो और कोई नही उसकी सुप्रिया दी बना रही है और वो भी सिर्फ़ उसके लिए.

जैसे ही सुप्रिया ने अरुण के पैरो की आहट सुनी वो पलट कर उसके पास जाती है और उसके गाल पर हाथ रखते हुए पूछा- "फिर से सपना. मैने तुम्हारे चीखने की आवाज़ सुनी थी. अब ठीक हो??"

अरुण की नज़रे नीचे की ओर देख रही है. सुप्रिया आज लोवर ऑर टीशर्ट के उपर अपना अप्रोन पहने हुए है. अरुण की नज़रे अप्रोन के पीछे के क्लीवेज पे टिक जाती हैं और तुरंत ही उसे रीयलाइज़ होता कि उसकी सुप्रिया दी ने आज ब्रा नही पहनी है.

"अरुण?"

"ह्म्म कुछ नही..सब ठीक है," वो जल्दी से यह बोलकर डाइनिंग टेबल पर बैठ जाता है.

सुप्रिया बड़े आराम से पूछती है और ये जाहिर नही होने देती कि उसने अरुण की नज़रे अपने क्लीवेज पर देख ली थी और उसके चेहरे पर हल्की से कुटिल मुस्कान आ जाती है,"बात करना चाहोगे ?"

"नही अभी नही."

"परान्ठे?"सुप्रिया किचन मे जाते हुए पूछती है.

"एप." अरुण सामने की ओर देखता है तो पता चलता है स्नेहा पहले से ही मिल्कशेक लिए बैठी है. अरुण कभी कभी स्नेहा की कुकिंग पर बड़ा सर्प्राइज़ हो जाता है. ज़्यादातर खाना सुप्रिया ही बनाती है पर स्नेहा जब भी बनाती थी तो अरुण उंगलियाँ चाटने पर मजबूर हो जाता था. वो ध्यान देता है तो स्नेहा बस न्यूसपेपर पढ़ रही होती है. उसे ऐसा लगता है जैसे वो जानबूझकर उसे इग्नोर कर रही हो. हे भगवान..कही स्नेहा दी तो नही?? अगर स्नेहा दी ने सोनिया को बता दिया तो?? अरुण अपने आप को शांत रखने के लिए दो गहरी साँस लेता है.

"मिल्कशेक चाहिए."स्नेहा उसे देखकर पूछती है.

"ह्म्म.. हां दे दो."

"पक्का ठीक हो ना."

"हां..श्योर. बस वही पुराना सपना."

"हां वो तो रात मे ही पता चल गया था." वो बड़े प्यार और केरिंग नज़रों से अरुण की तरफ देखती है. "तुम्हे पता है ना तुम मुझसे कभी भी बात कर सकते हो ओके.?"

तब तक सुप्रिया प्लेट मे 2 पराठे लेकर आ जाती है और अरुण के सामने टेबल पर रख देती है.

"नही मैं ठीक हूँ." ये कहकर अरुण खाने पर टूट पड़ता है.

जैसे ही अरुण परान्ठो की पहला कौर ले रहा होता है तभी सोनिया उछलती कूदती तेज़ी से सीढ़ियों से नीचे उतर रही होती है. अरुण की आँखें अपने आप ही उसकी ओर घूम जाती हैं. सोनिया स्पोर्ट्स ब्रा और जॉगिंग पॅंट्स मे नीचे आ रही होती है. उसकी पॅंट्स बिल्कुल उसके बॉडी से चिपकी हुई होती है. शायद जॉगिंग करके वो रूम से फ्रेश होकर आई थी. ये ड्रेस उसके हर एक अंग को मोहक बना रही होती है. उसके दूध स्पोर्ट्स ब्रा मे और ज़्यादा ही कूद रहे हैं. नंगी कमर बाल खा रही है. वो भी थोड़ी बहुत आत्लेटिक है तो बॉडी तो मशाल्लाह बहतेरीन है ही.

अरुण सोचता है कि इसने अभी तक मुझे देखकर लड़ना स्टार्ट क्यू नहीं किया..ओह माइ गॉड..यही थी सुबह. अब तो मैं गया. अब तो पक्का डाइरेक्ट हॉस्पिटल मे दिखूंगा....

"दूध पर हाथ मार और तेज़ी से भाग. तुझे कभी पकड़ नही पाएगी." उसके मन ने अपना आइडिया दिया.

सोनिया नीचे आकर सीधे किचन मे चली जाती है और अपने लिए मिल्कशेक लेने लगती है. "थोड़ा आरोही के लिए भी बचाना," सुप्रिया पराठे बनाते हुए उससे कहती है. सोनिया बहुत ही आटिट्यूड मे सुप्रिया की ओर देखती है लेकिन थोड़ा मिल्कशेक छोड़ भी देती है.

फिर अपना ग्लास लेकर हॉल मे जाते टाइम अरुण के सिर पर मार के भागते हुए कहती है, "ऐसे ही रोज इतने पराठे खाओगे तो ढोल बनने मे ज़्यादा टाइम नही लगेगा."

"आज मेरा दिमाग़ मत खराब कर."

"नही तो क्या कर लोगे.."

"नही तो पक्का आज नानी याद दूला दूँगा तुझे.."अरुण ने पीछे मुड़कर उसे देखते हुए कहा. और उसकी नज़रे वही टिक गयी. सोनिया उसके उल्टी तरफ मूह करके मिल्कशेक पी रही है. उसकी नज़रें अपने आप ही उसकी बॉडी को तराशने लगी और जैसे ही उसके हिप्स पर पहुँची तो बस देखता ही रह गया. बिल्कुल गोल, मुलायम, सुडोल.

अरुण ने किसी तरह से अपनी नज़रें दोबारा अपनी प्लेट पे वापस करी और खाने पर ध्यान देने लगा. लेकिन थोड़ी देर मे दोबारा उसकी नज़रे वापस सोनिया पर टिक गयी. तब तक वो अपना मिल्कशेक ख़त्म कर चुकी थी और मिल्कशेक की एक दो बूंदे उसके मूह और गर्दन से होते हुए उसके क्लीवेज तक जा रही थी. उसकी स्किन बिल्कुल ही चिकनी और मुलायम लग रही थी. अरुण ने सोचा कि लोशन की एक बोतल तो डेली ख़त्म ही हो जाती होगी.

"क्या बोली अरुंधती..?" सोनिया ने बनावटी आवाज़ मे बड़े प्यार मे पूछा.

अरुंधती निकनेम था अरुण का गिवन बाइ ओन्ली सोनिया.

"कोई लड़ाई नही." तुरंत ही सुप्रिया की आवाज़ अंदर से आई.

अरुण ने जब आरोही की तरफ देखा तो तुरंत ही आरोही ने अपनी नज़रे टीवी की ओर कर दी. वो जानबूझकर उसे इग्नोर कर रही थी. तब जाके अरुण को रीयलाइज़ हुआ आरोही ही थी. और वो सोचने लगा पक्का 2 दिन के अंदर उसे आरोही की हर बात माननी पड़ेगी.

"तो आज का क्या प्लान है..?" सुप्रिया ने बर्तन सिंक मे डालते हुए पूछा.

"मैं तो पूल की सफाई करने वाला हूँ. गर्मियाँ बस आने ही वाली हैं." अरुण ने अपने बर्तन सिंक मे रखते हुए जवाब दिया. उसने सोचा कि अपने उबलते हुए हॉर्मोन्स को कंट्रोल करने के लिए पूल सॉफ करने की मेहनत से बढ़कर कोई काम न्ही.

"मैं तो आज एक पार्टी मे जाने वाली हूँ..रॉयल क्लब मे..सोच रही हूँ एक दो अच्छे दोस्त ही मिल जाएँगे वहाँ.." सोनिया ने अंगड़ाई लेते हुए कहा.

इस बात को सुन कर अरुण को हल्की सी हँसी आ गयी.

"क्या बे जोकर.."

"हां..चमेलीबाई.."

इस बात को कहकर जैसे ही अरुण उसकी तरफ पलटा तुरंत ही नमक की डिब्बी उसके सीने पे धम्म से पड़ी. सोनिया के चमेलीबाई कहे जाने से बहुत नफ़रत थी. बचपन मे वो चमेली फिल्म को देखकर काफ़ी डॅन्स किया करती थी तबसे अरुण ने उसकी ये चिढ़ बना दी थी.

"कम से कम मेरा एक बाय्फ्रेंड तो है..तेरी तरह अपने रूम मे ब्लू फिल्म्स तो छुपा कर नही रखती हूँ.." सोनिया ने चीखते हुए पलटवार किया.

"मुज़रा ढंग से करना चमेली बाई.." अरुण ये कहकर सीढ़ियों की तरफ जाने लगा.

"जाओ जाओ हिलाओ जाके अरुंधती.." सोनिया ने जैसे ही ये कहा आरोही के मूह से मिल्कशेक निकल गया और फर्श पर गिर गया. और वो बहुत तेज़ी से खांसने लगी जिससे उसे टेबल का सहारा लेना पड़ा.

इस हरकत को देखकर अरुण का चेहरा पूरा लाल पड़ गया.

इधर स्नेहा और सुप्रिया भी बहुत तेज़ी से हँसने लगी.

"बस अब और नही..,"सुप्रिया अपनी हँसी को दबाते हुए बोली लेकिन और तेज़ी से हँसने लगी.

लेकिन तब तक सोनिया ने दोबारा वार किया, "तुम मेरे साथ आज रात क्यू नही चलते शायद किसी लड़के को तुम पसंद आ जाओ अरुणिया बेगम." उसने लड़के शब्द पर ज़्यादा ज़ोर देते हुए कहा. बस इतना बोलना था कि अरुण अपने रूम मे चला गया. पर सारी लड़कियाँ बहुत तेज़ी से हँसती रही. स्नेहा ने तो अपना सिर टेबल पर रख दिया और उसके कंधे हिलते रहे जब तक उसके पेट मे दर्द नही होने लगा.

"ए..इतना भी उससे मत सताया कर...." सुप्रिया अपनी हसी को कंट्रोल करते हुए बोली.

"कुतिया कहीं की.."

अरुण ने इस बार उसे नही टोका. वो सही मायने मे कुतिया ही थी. अरुण उसे कोसते हुए पुरानी टीशर्ट पहनने लगा.

अरुण बिना किचन की ओर देखे पीछे के दरवाजे से बाहर जाने लगा. उसे हँसी तो नही सुनाई दे रही थी पर गॉसिप की आवाज़ खूब आ रही थी. आख़िर ये लोग इतनी बातें कर कैसे लेती हैं. उससे अगर 5 दिन भी बिना कुछ बोले रहने के लिए कहा जाए तब भी रह लेगा. पर यहाँ तो ऐसा लगता जैसे हर वक़्त रेडियो ऑन ही रहता हो.

अरुण के दिमाग़ मे सुबह के किस्से आने लगे. सपना, फिर आरोही, फिर शवर. शिट. आख़िर सोनिया ही क्यूँ आई उसके दिमाग़ मे. जहाँ देखो वहाँ अपनी टाँगे ले के चली आएगी. मराए जाके कहीं ओर.

"तू क्यू नही मार लेता."

"तुम तो चुप ही रहो.. तुम्हारे कारण ही सुबह वो बवाल हुआ.." वो अपने मन को कोस्ता हुआ बाहर आ गया. कभी कभी उसे लगता था शायद ये टीनेजर होने का साइडइफेक्ट है. एक तो छोटी सी उम्र मे ही उसके मम्मी पापा गुजर गये. तो इसके कारण वो लोगो से थोड़ा कटा कटा रहने लगा. 11थ तक तो वो किसी लड़की से बात तक नही करता था (स्कूल मे). ऐसा नही था कि उसे लड़कियाँ अच्छी नही लगती थी पर फिर भी छोटी उम्र मे किसी फॅमिली मेंबर की डेत आपको काफ़ी हद तक बदल सकती है. वो अपनी सारी एनर्जी फुटबॉल मे लगा देता था. स्कूल के टॉप फुटबॉल प्लेयर्स मे उसका नाम आता था. पर कॉलेज मे आने पर उसने फुटबॉल को छोड़ ही दिया. उसका बिल्कुल मन ही हट गया उस खेल से.

वो धीरे धीरे पूल के किनारे से पत्ते वग़ैरह हटाते हटाते अपनी पुरानी लाइफ के बारे मे सोचने लगा. उसकी भी एक गर्लफ्रेंड थी 12थ मे. वो काफ़ी भगवान से डरने वाली टाइप की थी तो कभी किस्सिंग और हल्की फुल्की टचिंग से आगे नही बढ़े दोनो. एक तरीके से सिंपल लव अफेर था दोनो मे. 12थ के बाद दोनो अलग हो गये. वो यही मुंबई मे एक कॉलेज मे पढ़ने लगा और वो विदेश चली गयी पढ़ने.

इधर अरुण पूल के अंदर उतर के सफाई करने लगता है. धूप भी तेज होने लगी है तो वो टीशर्ट उतार देता है और गॉगल्स पहेन लेता है. तब तक लॅडीस फ़ौज़ आ जाती है बॅकयार्ड मे. पूल के किनारे और घर की बाउंड्री के पास थोड़े बड़े पेड़ है जिनके नीचे सोनिया और स्नेहा चादर बिछा के बैठ जाते हैं. पीछे से आरोही और सुप्रिया आती हैं. सुप्रिया के हाथ मे एक जग है पानी का. सुप्रिया हमेशा से ही अरुण की लगभग हर ज़रूरत का ध्यान रखती थी तो वो अरुण को पानी पिला के अंदर चली जाती है. इधर अरुण पानी पी के पीछे देखता है तो देखता ही रह जाता है.सोनिया स्ट्रेक्टैंग कर रही होती है. उसने स्पोर्ट्स ब्रा तो वही पहनी हुई पर पॅंट की जगह शॉर्ट्स पहेन लिए हैं.और जब वो उसके उल्टी ओर देखती हुई दोनो हाथो और घुटनो पर आगे की ओर स्ट्रेचिंग करती है तो अरुण के गले मे पानी तो अटक के ही रह जाता है. वो अपने आप को गॉगल्स पहनने के लिए शाबाशी देता है.

"एक चपत...एक चपत....मज़ा आ जाएगा..देख तो कितनी गदराई है.." आवाज़ का अपना राग चालू है.

स्नेहा तो अपनी किताब मे खोई हुई है.

लेकिन 2 नज़रें बड़े ध्यान से अरुण की ओर देख रही होती हैं. ये नज़रें हैं आरोही की जो अपने नाख़ून काट रही है चुपके से अरुण को सोनिया की गान्ड की तरफ देखते हुए देख रही है. उसके चेहरे पर हल्की सी स्माइल आ जाती है. उसकी नज़र जब अरुण की आँखों से नीचे उसकी बॉडी पर पड़ती है तो उसको भी आज पहली बार कुछ अजीब लगता है. ऐसा नही है अरुण की बॉडी बहुत ही भारी भरकम किसी बॉडी बिल्डर की तरह हो. उसकी बॉडी सिंपल है जैसे सुशांत सिंग राजपूत की काइ पो छे मे थी वैसी. हल्के से पॅक्स. सिंपल क्लीन पर्फेक्ट. ऐसा भी नही है की आरोही ने पहले कभी अरुण को ऐसे देखा नही है. पर आज सुबह के इन्सिडेंट ने उसके नज़रिए को बदल दिया था. वो एक तरीके से अरुण की बॉडी से अट्रॅक्ट होने लगी थी.

4

Pehle inke ghar ke bare me pata kar lete hain.

2 manzil ka bungalow hai. Upar ke floor par Arun Aarohi aur Soniya ke kamre hain. Niche Supriya aur Sneha ke kamre hain. Saath me ek large bathroom aur fully furnished kitchen plus a large hall. Backyard me ek pool.

To waapas...

Uske baad subah lagbhag normally hi start hui. Jab Arun seedhiyon se neeche aa rha tha use desi ghee ke bane parathon ki mahak aani start ho gayi. Aur use bina dekhe hi pata chal gaya ye parathe jo ki uski favourite chiz hai wo aur koi nhi uski Supriya di bana rahi hai aur wo bhi sirf uske liye.

Jaise hi Supriya ne Arun ke pairo ki aahat suni wo palat kar uske pas jati hai aur uske gal par hath rakhte hue pucha- "Fir se sapna. Maine tumhare cheekhne ki awaz suni thi. Ab thik ho??"

Arun ki nazre neeche ki or dekh rhi hai. Supriya aaj lower or tshirt ke upar apna apron pehne hue hai. Arun ki najre apron ke piche ke cleavage pe tik jati hain aur turant hi use realise hota ki uski Supriya di ne aaj bra nhi pehni hai.

"Arun?"

"Hmm kuch nhi..Sab thik hai," Wo jaldi se yeh bolkar dining table par baith jata hai.

Supriya bade aram se puchti hai aur ye jahir nhi hone deti ki usne arun ki najre apne cleavage par dekh li thi aur uske chehre par halki se kutil muskan aa jati hai,"Bat karna chahoge ?"

"Nhi abhi nhi."

"Parathen?"Supriya kitchen me jate hue puchti hai.

"Yep." Arun samne ki or dekhta hai to pata chalta hai Sneha pehle se hi milkshake liye baithi hai. Arun kabhi kabhi sneha ki cooking par bada surprise ho jata hai. Jyadatar khana Supriya hi banati hai par Sneha jab bhi banati thi to Arun ungliyan chatne par majboor ho jata tha. Wo dhyan deta hai to Sneha bas newspaper padh rahi hoti hai. Use aisa lagta hai jaise wo janbujhkar use ignore kar rhi ho. Hey bhagwan..Kahi Sneha di to nhi?? Agar sneha di ne Soniya ko bta diya to?? Arun apne aap ko shant rkhne ke liye do gehri saans leta hai.

"Milkshake chahiye."Sneha use dekhkar puchti hai.

"Hmm.. haan de do."

"Pkka thik ho na."

"Haan..sure. Bas wahi purana sapna."

"Haan wo to raat me hi pata chal gaya tha." Wo bade pyar aur caring nazron se Arun ki taraf dekhti hai. "Tumhe pata hai na tum mujhse kabhi bhi bat kar skte ho ok.?"

Tab tak Supriya plate me 2 parathe lekar aa jati hai aur Arun ke samne table par rakh deti hai.

"Nahi main thik hun." Ye kehkar Arun khane par tut padta hai.

Jaise hi Arun parathon ki pehle bite le rha hota hai tabhi Soniya uchalti kudti teji se seedhiyon se neeche utar rahi hoti hai. Arun ki ankhen apne aap hi uski or ghum jati hain. Soniya sports bra aur jogging pants me niche aa rahi hoti hai. Uski pants bilkul uske body se chipki hui hoti hai. Shayad jogging karke wo room se fresh hokar aai thi. Ye dress uske har ek ang ko mohak bna rahi hoti hai. Uske doodh sports bra me aur jyada hi kud rahe hain. Nangi kamar bal kha rhi hai. Wo bhi thodi bahut athletic hai to body to mashallah behtereen hai hi.

Arun sochta hai ki isne abhi tak mujhe dekhkar ladna start kyu nhi kiya..Oh my god..Yahi thi subah. Ab to main gya. Ab to pkka direct hospital me dikhunga....

"Dudh par hath mar aur teji se bhag. Tujhe kabhi pakad nhi payegi." uSKE man ne apna idea diya.

Soniya niche aakar sidhe kitchen me chali jati hai aur apne liye milkshake lene lagti hai. "Thoda Aarohi ke liye bhi bachana," Supriya parathe banate hue usse kehti hai. Soniya bahut hi attitude me Supriya ki or dekhti hai lekin thoda milkshake chhod bhi deti hai.

Fir apna glass lekar hall me jate time Arun ke sir par mar ke bhagte hue kehti hai, "Aise hi roj itne parathe khaoge to dhol banane me jyada time nhi lagega."

"Aaj mera dimag mat kharab kar."

"Nahi to kya kar loge.."

"Nhi to pkka aaj nani yad dula dunga tujhe.."Arun ne piche mudkar use dekhte hue kaha. Aur uski najre wahi tik gayi. Soniya uske ulti taraf muh karke milkshake pi rahi hai. Uski nazrein apne aap hi uski body ko tarashne lagi aur jaise hi uske hips par pahunchi to bas dekhta hi reh gaya. Bilkul gol, mulayam, sudaoul.

Arun ne kisi tarah se apni najrein dobara apni plate pe wapas kari aur khane par dhyan dene laga. Lekin thodi der me dobara uski najre wapas Soniya par tik gayi. Tab tak wo apna milkshake khatm kar chuki thi aur milkhade ki ek do bundhe uske muh aur gardan se hote hue uske cleavage tak ja rahi thi. Uski skin bilkul hi chikni aur mulayam lag rahi thi. Arun ne socha ki lotion ke ek botal to daily khatm hi ho jati hogi.

"Kya boli Arundhati..?" Soniya ne banawati awaj me bade pyar me pucha.

Arundhati nickname the Arun ka given by only Soniya.

"Koi ladai nahi." Turant hi Supriya ki awaz andar se aayi.

Arun ne jab Aarohi ki taraf dekha to turant hi Aarohi ne apni najre tv ki or kar di. wo janbujhkar use ignore kar rhi thi. Tab jake Arun ko realise hua Aarohi hi thi. Aur wo sochne laga pakka 2 din ke andar use Aarohi ki har bat manani padegi.

"To aaj ka kya plan hai..?" Supriya ne bartan sink me dalte hue pucha.

"Main to pool ki safai karne wala hoon. Garmiyan bas aane hi wali hain." Arun ne apne bartan sink me rakhte hue jawab diya. Usne socha ki apne ubalte hue hormones ko control karne ke liye pool saaf karne ki mehnat se badhkar koi kam nhi.

"Main to aaj ek party me jane wali hun..Royal Club me..Soch rahi hun ek do ache dost hi mil jayenge wahan.." Soniya ne angdayi lete hue kaha.

Is bat ko sun kar Arun ko halki si hansi aa gayi.

"Kya be joker.."

"haan..chamelibai.."

Is bat ko kehkar jaise hi Arun uski taraf palta turant hi namak ki dibbi uske seene pe dhamm se padi. Soniya ke chamelibai kahe jane se bahut nafrat thi. Bachpan me wo chameli film ko dekhkar kafi dance kiya karti thi tabse Arun ne uski ye chidh bna di thi.

"Kam se kam mera ek boyfriend to hai..Teri tarah apne room me blue films to chhupa kar nhi rkhti hun.." Soniya ne chikhte hue palatwar kiya.

"Mujra dhang se karna chameli bai.." Arun ye kehkar sidhiyon ki traf jane laga.

"Jao jao hilao jake Arundhati.." Soniya ne jaise hi ye kaha Aarohi ke muh se milkshake nikal gaya aur fars par gir gaya. Aur wo bahut teji se khansne lagi jisse use table ka sahara lena pada.

Is harkat ko dekhkar Arun ka chehra pura lal pad gaya.

Idhar Sneha aur Supriya bhi bahut teji se hasne lagi.

"Bas ab aur nhi..,"Supriya apni hansi ko dabate hue boli lekin aur teji se hsne lagi.

Lekin tab tak soniya ne dobara war kiya, "Tum mere sath aaj rat kyu nhi chalte shayad kisi LADKE ko tum pasand aa jao Aruniya begum." Usne ladke sabd par jyada jor dete hue kaha. Bas itna bolna tha ki Arun apne room me chala gaya. Par sari ladkiyan bahut teji se hasti rahi. Sneha ne to apna sir table par rakh diya aur uske kandhe hilte rahe jab tak uske pet me dard nhi hone laga.

"Aee..Itna bhi usse mat sataya kar...." Supriya apni hasi ko control karte hue boli.

"Kutiya kahi ki.."

Arun ne is bar use nhi toka. Wo sahi maine me kutiya hi thi. Arun use koste hue purani tshirt pehnane laga.

Arun bina kitchen ki or dekhe piche ke darwaje se bahar jane laga. Use hasi to nhi sunai de rahi thi par gossip ki awaj khub aa rahi thi. Aakhir ye log itni batein kar kaise leti hain. Usse agar 5 din bhi bina kuch bole rehne ke liye kaha jaye tab bhi reh lega. Par yaha to aisa lagta jaise har waqt radio on hi rehta ho.

Arun ke dimag me suabh ke kisse aane lage. Sapna, fir Aarohi, fir shower. Shit. akhir soniya hi kyu aayi uske dimag. Jahan dekho waha apni tange le ke chali aayegi. Maraye jake kahi or.

"Tu kyu nhi maar leta."

"Tum to chup hi raho.. Tumhare karan hi subah wo bawal hua.." Wo apne man ko kosta hua bahar aa gaya. Kabhi kabhi use lagta tha shayad ye teenager hone ka sideeffect hai. Ek to choti si umr me hi uske mummy papa gujar gaye. To iske karan wo logo se thoda kata kata rehne laga. 11th tak to wo kisi ladki se baat tak nhi karta tha (school me). Aisa nhi tha ki use ladkiyan achi nhi lagti thi par fir bhi choti umr me kisi family member ki death apko kafi had tak badal skti hai. Wo apni sari energy football me laga deta tha. School ke top football players me uska naam aata tha. Par college me aane par usne football ko chhod hi diya. Uska bilkul man hi hat gaya us khel se.

Wo dhire dhire pool ke kinare se patte wagairah hatate hatate apni purani life ke bare me sochne laga. Uski bhi ek girlfriend thi 12th me. Wo kafi bhagwan se darne wali type ki thi to kabhi kissing aur halki fulki touching se aage nhi badhe dono. Ek tarike se simple love affair tha dono me. 12th ke baad dono alag ho gaye. Wo yahi mumbai me ek college me padhne laga aur wo videsh chali gayi padhne.

Idhar Arun pool ke andar utar ke safai karne lagta hai. Dhoop bhi tej hone lagi hai to wo tshirt utar deta hai aur goggles pehen leta hai. Tab tak ladies fauz aa jati hai backyard me. Pool ke kinare aur ghar ki boundary ke paas thode bade ped hai jinke niche Soniya aur Sneha chadar bicha ke baith jate hain. Piche se Aarohi aur Supriya aati hain. Supriya ke hath me ek jug hai pani ka. Supriya hamesha se hi Arun ki lagbhag har jarurat ka dhyan rkhti thi to wo Arun ko pani pila ke andar chali jati hai. Idhar Arun pani pi ke piche dekhta hai to dekhta hi reh jata hai.Soniya strectching kar rhi hoti hai. Usne sports bra to wahi pehni hui par pant ki jagah shorts pehen liye hain.Aur jab wo uske ulti or dekhti hui dono hatho aur ghutno par aage ki or stretching karti hai to Arun ke gale me pani to atak ke hi reh jata hai. Wo apne aap ko goggles pehnne ke liye shabashi deta hai.

"Ek chapat...Ek chapat....Maja aa jayega..Dekh to kitni gadrayi hai.." awaz ka apna raag chalu hai.

Sneha to apni kitab me khoi hui hai.

Lekin 2 najrein bade dhyan se Arun ki or dekh rhi hoti hain. Ye nazrein hain Aarohi ki jo apne nakhun kat rahi hai chupke se Arun ko Soniya ki gand ki taraf dekhte hue dekh rhi hai. Uske chehre par halki si smile aa jati hai. Uski najar jab Arun ki aankhon se niche uski body par padti hai to usko bhi aaj pehli baar kuch ajib lagta hai. Aisa nhi hai Arun ki body bahut hi bhari bharkam kisi body builder ki tarah ho. Uski body simple hai jaise Sushant singh Rajput ki Kai Po Che me thi waisi. Halke se packs. Simple clean perfect. Aisa bhi nhi hai ki Aarohi ne pehle kabhi Arun ko aise dekha nhi hai. Par aaj subah ke incident ne uske najariye ko badal diya tha. Wo ek tarike se Arun ki body se attract hone lagi thi.

 
5

उधर सोनिया की तरफ देखते देखते अरुण पता नही क्या क्या इमॅजिन करने लगता है.

उधर उसके मन मे आवाज़ें आ रहीं हैं "बूब्स दूध मम्मे.गंद.चूतर..आआह्ह."

उसकी नज़र तब जाके स्नेहा दी की तरफ़ पड़ी. और वो सोचने लगा कितनी सुंदर दी हैं उसकी. इनका तो कभी बाय्फ्रेंड वग़ैरह भी नही रहा. और क्योंकि वैसे भी आज उसके हॉर्मोन्स हाइ थे तो वो सोचने लगा क्या कभी किसी ने स्नेहा दी के दूध छुए होंगे. क्या स्नेहा दी वर्जिन होंगी.?? फिर तुरंत ही उसके मूह से निकला "कर क्या रहा हूँ आख़िर मैं." और पूल के दूसरी साइड जाके सफाई करने लगा. फिर उसकी नज़र आरोही की तरफ पड़ी जो पेड़ की छाया मे अपना एक हाथ आँखों पर रख के सो रही है शायद. उसने पतली सफेद टीशर्ट और ब्लू कॅप्री पहनी हुई है. वो देखने लगा कि उसके बूब्स थोड़े छोटे थे. सोनिया से थोड़े से छोटे. उसे हमेशा लगता था कि आरोही अभी भी वर्जिन ही होगी. जुड़वा होने का साइड एफेक्ट शायद जो ये बात उसे लगती थी.

इन्ही सब बातों को सोचते हुए वो दोबारा पूल की सफाई मे जुट गया.

इधर सोनिया अब अपना योगा करके मॅगज़ीन पढ़ रही थी. लेकिन वो मॅगज़ीन पर ध्यान ही नही दे पा रही थी. वो बार बार अरुण को पूल की सफाई करते हुए देखती और हर बार एक गुस्से की लहर उसके अंदर उमड़ पड़ती. उसे समझ मे नही आ रहा था कि आख़िर एक इंसान उसे इतना कैसे इरिटेट कर सकता है. वो उसकी मसल्स और बॉडी की तरफ़ देखने लगती है और उसके चेहरे पर एक हल्की स्माइल आ जाती है. लेकिन फिर तुरंत ही उसे अपने उपर गुस्सा आने लगता है जब उसे रीयलाइज़ होता है कि वो अपने डफर भाई की बॉडी की तारीफ कर रही होती है.

अरुण तब तक पूल की सफाई पूरी कर चुका था.

इसके बाद उसने ऐसे ही अपनी तीनो खूबसूरत बहनों की तरफ नज़रें घुमाई. बस यही ग़लती कर गया. वो तीन सुंदरता की देवियाँ वहाँ आराम फर्मा रही थी. उन तीनो को देखकर तो किसी का भी मन डोल जाए तो अरुण तो बैसे भी सुबह से ही सेक्स का मारा हुआ था. सोनिया की जंघें, स्नेहा के बूब्स और आरोही की कॅप्री के बीच से पता चलती उसकी दरार को देखकर अरुण के लंड महाराज ने अपना सिर उठा दिया था.

अरुण ने तब पूल से निकलने की सोची लेकिन जब उसका ध्यान अपने हथियार की ओर गया तो वो बड़ा सावधानी से अपनी बहनों की नज़र बचाकर पूल से बाहर निकला और अपने आप को सुकून देने के लिए वहाँ पड़े प्रेशर पाइप से पानी की धार अपने सिर पर डालने लगा. लेकिन इससे कुछ फ़ायदा तो हुआ नही उल्टा उसकी तीनो बहनों की आँखें चौड़ी ज़रूर हो गयीं. अरुण ने सोचा अब इस से बचने का एक ही तरीका है कि मास्टरबेट कर लिया जाए.

"आअह...सोनिया.." ये कहकर उसके मन मे हँसी की आवाज़ आने लगी.

अरुण तेज़ी से पीछे के दरवाजे की ओर गया और हाल मे एंटर होने ही वाला थी कि सुप्रिया तब तक वहाँ तौलिया लेकर आ गयी और बोली.."ऐसे गंदगी फैलाओगे क्या फर्श पर..कपड़े देकर जाओ.."

"नही मैं उपर से चेंज करके दे दूँगा.." अरुण जल्दी से बोला.

"और उपर से तुम्हे भी तो याद करना है.."ऐसा उसकी मन मे आवाज़ आई.

लेकिन सुप्रिया फर्श तो गंदा होने नही देने वाली थी तो दोबारा फोर्स किया. तो अरुण ने अपनी जीन्स का बटन खोलके एक हाथ से अपना बॉक्सर पकड़कर दूसरे हाथ से जीन्स नीचे करने लगा. पर जैसा हम चाहते हैं वैसा तो हो नही सकता सो जीन्स उपर से भीगी हुई तो नीचे तो हो नही रही थी. तो सुप्रिया ने सिर्फ़ मदद करने के लिए उसकी जीन्स को पकड़कर थोड़ी फोर्स के साथ नीचे कर लिया.और जीन्स नीचे हो भी गयी लेकिन...

जीन्स के साथ साथ अरुण का बॉक्सर भी नीचे आ गया और इसके कारण अरुण का लंड फुफ्कार कर खड़ा हो गया और सुप्रिया जोकि बैठ के जीन्स उतार रही थी उसके होठों से रगड़ ख़ाता हुआ उछलने लगा. इसके कारण सुप्रिया एक दम से पीछे को हटी और फर्श पर गिर पड़ी और एक दम से उसका हाथ अपने मूह पर आ गया...

"शाबाश मेरे शेर"उसके मन ने कहा.

"ओह माइ गॉडसॉरी".. बस इतना कह के अरुण तेज़ी से जीन्स और बॉक्सर्स को हाथो से पकड़कर सीढ़ियों से उपर भाग गया..

"वाउ.." बस इतना ही सुप्रिया के मूह से निकल पाया..

"वाउ..."

अरुण तेज़ी से भाग कर अपने रूम मे पहुँचा और सोचने लगा इस कंडीशन से बाहर कैसे आया जाए.

एक तो उसका हथियार शांत होने का नाम नही ले रहा था. तो उसने अपने ड्रॉयर से लोशन निकाला और एक कपड़े को कंधे पर डालकर मूठ मारने लगा.

पहले तो पॉर्न को याद करने लगा पर जब उससे फ़ायदा नही हुआ तो फिर सोनिया के बारे मे सेक्सी बातें सोचने लगा. उसके मन मे दिखाई देने लगा सोनिया अपने सेक्सी चिकने दूधों पर तेल मसल रही है. उसके दूध बिल्कुल सफेद, कॉनदार है. छोटे छोटे हल्के पिंक रंग के निपल और साथ मे वो अपने दोनो हाथों से उनको मसल रही है निपल्स को खींचकर उन्हे मसल रही है और साथ मे हल्की हल्की आहें उसके गले से बाहर आ रही हैं..

"ओह सोनिया..सोनिया...सोनिया" बस यही राग अलापता जा रहा था.

"अरुंण.."

अरुण के हाथ एक दम रुक गये. उसे याद आया कि वो अपने रूम का दरवाजा लॉक करना भूल गया था. उसकी पीठ दरवाजे की तरफ है...

"शिट...शिट...शिट" अरुण मन मे सोचता है ये तो सुप्रिया दी की आवाज़ है..

"अरुण तुम ठीक हो...इधर देखो.." सुप्रिया आगे बढ़के उसके कंधे पर हाथ रखते हुए कहती है.

"ह्म्म" अरुण बिना पलटे जवाब देता है..

"मैने कहा इधर देखो.." सुप्रिया एक तरीके से ऑर्डर देते हुए उसके कंधा अपनी तरफ खींचती है..

अरुण अपना लंड हाथ मे लिए अपनी सुप्रिया दी के सामने पलटता है उसकी आँखें बंद हैं..

सुप्रिया जैसे ही ये देखती है वो थोड़ा पीछे हट जाती है..

"मैं..म..मैं.." अरुण के मूह से शर्म के कारण शब्द नही निकलते और आँखें बंद ही रखता है..लेकिन अपने हाथों से जीन्स और बॉक्सर उपर चढ़ा लेता है.

"स्वीतू .. एंबरस्स होने की ज़रूरत नही है...ये तो नॉर्मल चीज़ है.. मैं भी करती हूँ हालाँकि तुम्हारे जितना नही और ना ही मैं अपनी बहनों के बारे मे सोचती हूँ ये करते वक़्त.." सुप्रिया बड़े प्यार से दिलासा देते हुए बोली..

अब तो अरुण और ज़्यादा शर्म से गढ़ा चला जाता है...

अरुण का पूरा चेहरा लाल हो चुका है. उसकी इच्छा हो रही की बस अभी धरती फट जाए और वो उसमे समा जाए.

"भाई कुछ तो बोलो.."

"क्या बोलू. आज तो सही मे जिंदगी का सबसे बेकार दिन है. पहले नीचे तुम्हारे साथ वो...और अब तुमने मुझे मास्टरबेट करते हुए पकड़ लिया वो भी अपनी ही बहन को इमॅजिन करते हुए..."ऐसा लग रहा था जैसे अरुण बस रोने ही वाला हो.

"आइ आम सॉरी...मैने तुम्हे नीचे कपड़े उतारने को मजबूर किया जिसके कारण..." सुप्रिया बोली..

"जिसके कारण तुम्हारे मूह से मेरा वो टकरा गया..."अरुण रुंधी सी आवाज़ मे बोला.

"ष्ह...मैं गुस्सा नही हूँ स्वीतू.." सुप्रिया प्यार से बोली. "कॅन वी टॉक? तुम शायद थोड़ा अच्छा महसूस करोगे..."

"इससे बढ़िया मैं अपने आप को किसी कोठरी मे बंद कर लूँगा..." अरुण आँखें नीचे करे करे ही बोला..

"वैसे तुम ये करते वक्त अपनी बहेन को क्यू याद कर रहे थे??"

"मुझे खुद नही पता दीं मुझे क्या हो गया है. आज सुबह से कुछ ज़्यादा ही जैसे मेरा क्लाइमॅक्स होने वाला था एक दम से इमेज आ गयी मेरे मन मे.." अरुण दूसरी तरफ मूह करके बोला..तब तक अरुण बेड पर और सुप्रिया सामने कुर्सी पर बैठ जाती है.

"तो कौन थी वो? स्नेहा.." सुप्रिया ने बड़ी उत्सुकता के साथ पूछा..

"सोनिया..." अरुण बहुत धीमे से बोलकर सुप्रिया की तरफ देखने लगता है...

अरुण का चेहरा ये कहते वक़्त बिल्कुल गर्म और लाल हो जाता है.

"सोनिया? सच मे.."

अरुण उपर की ओर देखता है तो सुप्रिया के चेहरे पर कन्फ्यूषन देखता है.

"मैं कह रहा हूँ इसका नाम ले ..मज़ा आएगा.."

"क्यू सोनिया मे क्या दिक्कत है..शी ईज़ हॉट आंड सेक्सी.." अरुण अपनी मन की आवाज़ को ना सुनकर सोनिया को डिफेंड करता है. उसे खुद विश्वास नही होता कि वो सोनिया को बचाने को डिफेंड करने की कोशिस कर रहा है..

"मैं जानता था तेरा सोनिया के लिए ही खड़ा होता है.."

"प्लीज़ तुम चुप रहो तुम्हारे कारण ही ये हो रहा है" अरुण मन मे सोचता है..

"नही सोनिया मे कोई प्राब्लम नही है बट मैने सोचा अगर तुम किसी के बारे मे सोचोगे तो वो या तो स्नेहा होगी. क्यूकी उसके बूब्स भी लगभग पर्फेक्ट हैं या फिर आरोही...वैसे भी तुम और आरोही काफ़ी क्लोज़ हो.." सुप्रिया उसकी तरफ देखते हुए कहती है..

"भाई मैं बता रहा हूँ तेरी दीदी पक्का लेसबो हैं..देख इनकी भी नज़र है स्नेहा दी के मम्मो पर..हहा"

"प्लीज़" अरुण मन मे सोचता है और सुप्रिया की ओर बहुत ही असमंजस से देखने लगता है. उसे अपने कानो पर यकीन ही नही होता कि उसकी सुप्रिया दी जो इतनी सीधी और सिंपल दिखती हैं वो स्नेहा दी के बूब्स भी नोटीस करती होंगी.

"व्हाट?? ऐसे क्या देख रहे हो..अब मैं डेली इसी घर मे तो रहती हूँ तो एक दो चीज़ तो नोटीस कर ही लेती हूँ.." सुप्रिया अपनी सफाई पेश करती है..

"लेसबो...लेसबो..लेसबो...तेरी दी लेसबो...हरे"

इधर उसके मन मे पार्टी सेलेब्रेशन चल रही है..

"दी मैं हमेशा ऐसा थोड़ी ना करता हूँ..बस पता नही कैसे आज ही ये पहली बार हुआ कि सोनिया का ख़याल आया हो जहेन मे मास्टरबेट करते वक़्त.." अरुण सुप्रिया की नज़रों को बचाता हुआ कहता है.

वो आरोही और सोनिया वाली बात अपने तक ही रखता है.

"इसमे इतना परेशान होने वाली कोई बात नही है भाई..सबके मन मे मास्टरबेट करते टाइम अजीब से खायल आते हैं.." सुप्रिया उसकी नज़रों को ढूँडने की कोसिस करती है. पर अरुण उसकी नज़रों से नज़रें मिला ही नही पा रहा है..

"अरुण.."

"क्या दी..?"

" तुम्हारा ये अभी तक एरेक्ट कैसे है?? मुझे आए लगभग 15 मिनिट हुए हैं तबसे अभी तक ये उसी कंडीशन मे हैं..मुझे तो ऐसा लग रहा है जैसे तुम्हे इससे दर्द हो रहा हो..ये नॉर्मल कब तक होगा??" सुप्रिया बड़ी जिग्यासा के साथ उसके लंड की तरफ उंगली करके उसे बताती है.

अरुण इस बार सुप्रिया की आँखों की तरफ देखता है..

" पता नही दी..ऐसा लगता है जैसे ये नॉर्मल होना ही नही चाहता..चाहे मैं कुछ भी कर लूँ.." अरुण थोड़ा परेशान होके कहता है.

"तो तुम मास्टरबेट करते हुए कुछ देख क्यूँ नही लेते लाइक प..पॉर्न वग़ैरह..??" सुप्रिया अपनी नज़रें बचाते हुए कहती है. उसकी आँखें बार बार अरुण के चेहरे और लंड के बीच उपर नीचे हो रही हैं..

"ओह येस..तेरी दी तुझे सेक्स ज्ञान दे रही हैं..इसे कहते हैं दी.."

"कोई फ़ायदा नही दी.."

"तो कुछ इमॅजिन ही कर लो"

"जैसे ही कुछ इमॅजिन करूँगा दोबारा सोनिया आ जाएगी दिमाग़ मे.."

"सोनिया ही क्यूँ?? स्नेहा क्यूँ न्ही?? और आरोही...क्या बस सोनिया ही बसी पड़ी है दिमाग़ मे??" वो हल्की स्माइल के साथ पूछती है..

"सोनिया...ओह मेरी सोनियाअ.."

"ये मेरी जिंदगी का सबसे बेकार दिन है" अरुण अपने चेहरे पे अपने हाथों को रखते हुए कहता है.

"ओह स्वीतू..मैं तो बस हेल्प करना चाहती हूँ.."

"ऐसा नही है कि सिर्फ़ सोनिया आती हो..तुम सब आती हो कभी ना कभी मेरे दिमाग़ मे..आइ कॅंट कंट्रोल इट दी..पिछले कुछ सालों से ऐसा ही हो रहा है.."

"हम सब?? इसका मतलब क..क्या..."

सुप्रिया थोड़ा सा शरमाते हुए बोलने की कोसिस करती है.

इस बार अरुण के चेहरे पर बहुत हल्की सी स्माइल आ जाती है जो वो जाहिर नही होने देता.." हां दी आप भी.."

सुप्रिया का चेहरा ये सुनते ही लाल हो जाता है और वो अपनी नज़रें चुराने लगती है..

"और दी आजकल तो आप कुछ ज़्यादा ही..."

"म..म्म..मैं??"

कुछ सेकेंड्स के लिए बिल्कुल सन्नाटा छा जाता है. अरुण और सुप्रिया की आँखें इस वक़्त एक दूसरे से मिलने की हिम्मत नही कर पा रही है. सुप्रिया के गालों पर हल्का हल्का गुलाबी रंग चढ़ना स्टार्ट हो गया है.

"मैं क्यू??" सुप्रिया हकलाकर पूछती है..

"बिकॉज़ यू हॅव अवेसम सेक्सी चिकनी मलाईदर दूध..." इसके बाद अरुण के दिमाग़ मे सीटियाँ बजने लगती हैं..

"मतलब दी.." अरुण कुछ समझ नही पाता..

"मतलब मैं क्यूँ?? ना तो मैं सोनिया जितनी खूबसूरत हूँ..ना मेरे स्नेहा जितने ब..बूब्स पर्फेक्ट हैं..ना आरोही की तरह मेरी बॉडी सेक्सी है फिर मैं क्यूँ??" सुप्रिया थोड़ा धीमी आवाज़ मे बोली..

पोंगगगग.....लेसबो...

" आरोही की सेक्सी बॉडी???" अरुण बोला...

"अब ये मत कहना कि आरोही की बॉडी सेक्सी नही है.." सुप्रिया ने बिल्कुल नॉर्मली बोला..

"नही है..लेकिन मैने कभी नही सोचा कि आप भी ऐसा सोचती होगी.." अरुण को अब ऐसा लग रहा था जैसे वो अपनी सुप्रिया दी को तो बिल्कुल जानता ही ना हो..

"हां..उन लोगो मे वो क्वालिटीस हैं..लेकिन आप मुझे बिल्कुल पर्फेक्ट लगती हो. क्यूट, पर्फेक्ट, ब्यूटिफुल, प्रेटी.." अरुण ये कहते वक़्त डाइरेक्ट्ली सुप्रिया की आँखों मे देखता है..

"तुम्हे सही मे लगता है मैं खूबसूरत हूँ?"

"हां दी..जब आप खाना बनाती हो बिल्कुल उसमे कॉन्सेंट्रेट करके तब मन करता है बस आपको ही देखता रहूं. आप उस टाइम बिल्कुल पर्फेक्ट डॉल की तरह लगती हो.."

ये सुन के सुप्रिया के गालों की लाली और बढ़ गयी..

ममममीईए

"तू पक्का मार पड़वाएगा.." अरुण सोचता है..

" दी..सॉरी" अरुण अपना चेहरा नीचे झुकाते हुए कहता है..

"किसलिए अरुण? मास्टरबेशन के टाइम मेरे बारे मे सोचने के लिए??"

"हां और इस कंडीशन के लिए भी.." अरुण अपने लंड की तरफ़ देखते हुए कहता है..

बेटा सॅंडल पड़ने वाली हैं..

 


अब अरुण और सुप्रिया दोनो थोड़ा थोड़ा खुलके बातें करने लगे हैं..

"ष्ह.डोंट बी सॉरी..मुझे तो ये कॉंप्लिमेंट लगा कि तुम मेरे बारे मे ऐसा सोचते हो..वैसे और क्या क्या सेक्सी लगता है म..मेरे बारे मे?" सुप्रिया एक स्माइल के साथ पूछती है..

"प्लीज़ भाई...मम्मे बोल..बोल बे"

"आपको इस बात से कोई प्राब्लम नही है कि मैं आपके बारे मे सोचता हूँ?" अरुण को यकीन ही नही होता कि उसकी दी को इस बात से कोई प्राब्लम ही नही है..

"बेटा तू सन्यासी बन जा." मन फिर कहता है

"नही अरुण..बताओ ना क्या सेक्सी लगता है मेरे बारे मे??"

"आ..आ..आपके बूब्स. दे लुक जस्ट पर्फेक्ट. और उपर से मुझे थोड़ा कम हाइट की लड़कियाँ ज़्यादा ही पसंद हैं.(सुप्रिया, स्नेहा और सोनिया तीनो की हाइट अरुण से 6 7 इंच कम है..बस आरोही ही लगभग उसके बराबर है लेकिन वो भी 2 3 इंच शॉर्ट है लेकिन उसकी आत्लेटिक बॉडी के कारण ये पता नही चलता.) और मुझे आप खाना बनाते वक़्त और जब आप सिब्क पर बर्तन धो रही होती हो तो बहुत ही अच्छी लगती हो.." अरुण के चेहरे पर भी हल्की सी स्माइल आनी स्टार्ट हो गयी है..

"बर्तन धोते वक़्त??" सुप्रिया को समझ मे नही आता कि बर्तन धोते वक़्त ऐसा क्या होता है..

"बोल.. गान्ड मटकती है.."

"दी आप जब थोड़ा झुक के बर्तन धुल रही होती हो..तो बहुत ही क्यूट गुड़िया लगती हो जिसे दुनिया का ध्यान ही नही है..और वो आपके ब..ब.बूब्स टीशर्ट और एप्रन के अंदर हल्का हल्का सा हिलते हैं ऐसा लगता है जैसे आप ब्रा पहनना ही नही चाहती हो..आपका क्लीवेज और कभी कभी जब हल्का सा सीना भीग जाता है आपका तो बहुत ही सेक्सी लगती हो..कोई काम करते वक़्त जब आप अपनी उंगलियों से अपने बाल पीछे करती हो...टीवी देखते टाइम जब आप अपने पैर के अंगूठे को हिलाती रहती हो..आपकी स्माइल आपकी आँखें सब कुछ" अरुण एक साँस मे बोलता चला गया..

"नाइस वे ऑफ कॉंप्लिमेंट मेरे शेर"

अरुण मन मे ही आँख मारता है..

इधर सोनिया का हल्का सा मूह खुला हुआ है और चेहरा तो बिल्कुल ही गुलाबी हो गया है..

"स.सही मे..एक बात पुच्छू अरुण?" सुप्रिया उसकी आँखों मे देखकर बोलती है..

"श्योर दी.."

"क्या मेरे चूसोगे मोरे भैयाअ..." इसके बाद अरुण को आह आह की आवाज़ें सुनाई देती हैं

"भाई प्लीज़ मान जा..मत कर" अरुण सोचता है..

"तुम मास्टरबेट करते वक़्त क्या सोचते हो मेरे ब..बारे मे.?" ये पूछते वक़्त सुप्रिया का चेहरा बिल्कुल गर्म पड़ जाता है..

अरुण आगे की ओर झुक के अपनी चिन पर हाथ रखता है और ऐसे बैठता है जैसे किसी गहरी सोच मे हो..

" दी..मुझे दिखाई देता है कि आप सिंक मे डिश धो रहे हो लेकिन आपने सिर्फ़ एक वाइट एप्रन पहना हुआ है और कुछ नही..पानी से भीगकर आपका एप्रन हल्का सा ट्रॅन्स्परेंट हो गया है..और आपके न.न..निपल्स दिखाई दे रहे हैं.और साथ मे आपके हिलने से आपके बूब्स भी हिलते जा रहे हैं.. फिर आप पीछे पलटती हो और आप अपना एप्रन के अंदर हाथ डाल के पानी को पोछने की कोसिस करती हो जिससे आपके निपल्स और एरेक्ट हो जाते हैं फिर आप एक उंगली सेक्सी तरीके से अपने मूह मे रख के सक करती हुई मेरे पास आती हो.."

ये बताते बताते अरुण का लंड दोबारा अपने फूल साइज़ मे आ जाता है..इधर सुप्रिया एक दम से गहरी साँस लेती है..और अरुण की आँखों और लंड को बारी बारी देखने लगती है..

"और ऐसे सोचने से तुम्हारा काम हो जाता है?"" अब सुप्रिया लगभग पूरी तरीके से ओपन हो चुकी है.

"हां..ऐसा तो मैं कयि बार सोचता हूँ दिन मे.."

"केयी बार..क्या मतलब तुम दिन मे कितनी बार मास्टरबेट कर लेते हो...??"

" 5 से 6 बार.."

"व्हाट?? लेकिन इतनी बार कैसे.." सुप्रिया को इस बात पर यकीन ही नही होता..

"पता नही क्यू दी..मेरे मन मे हर वक़्त सेक्स ही सेक्स रहता है..ऐसा लगता है जैसे माइंड ना हो कर सेक्स मशीन हो..उपर से आप लोग मेरी कंडीशन और खराब करते हो आपका काम..स्नेहा दी के बूब्स..सोनिया के वो सेक्सी ड्रेसस और आरोही तो चिपकती ही रहती है..मुझसे कंट्रोल ही नही होता.." अरुण अपनी प्राब्लम बताता है

"वाउ.. मुझे तो पता ही नही था कि तुम पर हम लोगो का ऐसा एफेक्ट पड़ता है.."

"रियली दी..आप ये सब जान के नाराज़ नही हो मुझसे??"

"बिल्कुल नही...थोड़ी सी ग़लती हम लोगो की भी है..वैसे अब तुम इस मॉन्स्टर से कैसे छुटकारा पाओगे?" सुप्रिया थोड़ा सा हँस के बोलती है..

"पता नही दी..शायद अपने आप नॉर्मल हो जाए.."

"तुम्हे पता है ना कि तुम क..." सुप्रिया बहुत अटक अटक के कुछ बोल रही होती है

अरुण बड़ी ही अजीब नज़रों से सुप्रिया की तरफ देखता है...

"कि..तुम कभी भी म..मेरी म..म..मदद ले सकते हो??" सुप्रिया एक सांस मे बोल जाती है...

"चूत मिल गयी..यारा चूत मिल गयी." मन ने जैसे हुंकार लगाई

अरुण का मूह खुला का खुला रह जाता है..

"दी......" अरुण थोड़ा तेज़ी से बोलता है..

"चूतिए.. हां बोल"

"व्हाट...मैं वैसे भी तुम्हारा हर तरीके से ख़याल रखती हूँ. और तुम मेरे भाई हो आंड आइ लव यू सो मच. और मुझे ऐसा लग रहा है जैसे तुम्हे इस चीज़ से बहुत प्राब्लम भी हो रही है. अब तुम्हारी दी तुम्हारी प्राब्लम सॉल्व करने मे हेल्प नही करेगी तो कौन करेगा. और उपर से जब तुमने मुझे बताया कि तुम दिन मे 5 से 6 बार म..मास्टरबेट करते हो तब से मुझे रीयलाइज़ हुआ कि तुम्हारे हॉर्मोन्स कुछ ज़्यादा ही दौड़ रहे हैं.." सुप्रिया ने ये बात बड़े कॅष्यूयली कह दी जैसे कोई बुखार की दवाई बता रहा हो. और अपना एक हाथ कमर पर रख के खड़ी हो गयी..

"कलपद मत कर...हां बोल"

"दी....प्ल्ज़"

"अरुण...मैं तो सिर्फ़ तुम्हारी हेल्प के लिए कह रही थी. मैने थोड़ी ना कहा कि मैं तुम्हे अपने साथ स.सेक्स करने दूँगी.." सुप्रिया ने अपने साँस रोक के कहा..

"शी ईज़ आ हॉट बिच..."

"ओह गॉड,,,प्लीज़ दी......" इन सब बातों से तो उसके लंड महाराज और ज़्यादा खड़े हुए जा रहे थे...

"शांत रहो अरुण. दो गहरी साँस लो.." सुप्रिया ने हंस के कहा..

5

Udhar Soniya ki taraf dekhte dekhte Arun pata nahi kya kya imagine karne lagta hai.

Udhar uske man me awazein aa rahin hain "Boobs.Dudhuu.Mamme.Gand.Chutar..AAhh."

Uski najar tab jake Sneha di ki tarf padi. Aur wo sochne laga kitni sunder di hain uski. Inka to kabhi boyfriend wagairah bhi nahi raha. Aur kyonki waise bhi aaj uske hormones high the to wo sochne laga kya kabhi kisi ne sneha di ke doodh chue honge. Kya sneha di virgin hongi.?? Fir turant hi uske muh se nikla "Kar kya raha hun akhir main." Aur pool ke dusri side jake safai karne laga. Fir uski najar Aarohi ki taraf padi jo ped ki chhaya me apna ek hath ankhon par rkh ke so rahi hai shayad. Usne patli safed tshirt aur blue capri pehni hui hai. Wo dekhne laga ki uske boobs thode chhote the. Soniya se thode se chote. Use hamesha lagta tha ki Aarohi abhi bhi virgin hi hogi. Judwa hone ka side effect shayad jo ye bat use lagti thi.

Inahi sab baton ko sochte hue wo dobara pool ki safai me jut gaya.

Idhar soniya ab apna yoga karke magazine padh rahi thi. Lekin wo magazine par dhyan hi nahi de pa rahi thi. Wo bar bar Arun ko pool ki safai karte hue dekhti aur har bar ek gusse ki lehar uske andar umad padti. Use samjh me nahi aa raha tha ki akhir ek insaan use itna kaise irritate kar skta hai. Wo uski muscles aur body ki tarf dekhne lagti hai aur uske chehre par ek halki smile aa jati hai. Lekin fir turant hi use apne upar gussa aane lagta hai jab use realise hota hai ki wo apne duffer bhai ki body ki tarif kar rahi hoti hai.

Arun tab tak pool ki safai puri kar chuka tha.

Iske bad usne aise hi apni teeno khoobsurat behnon ki taraf nazrein ghumain. Bas yahi galti kar gaya. Wo teen sundarta ki deviyan waha aram farma rahi thi. Un teeno ko dekhkar to kisi ka bhi man dol jaye to Arun to baise bhi subah se hi sex ka mara hua tha. Soniya ki janghen, Sneha ke boobs aur Aarohi ki capri ke beech se pata chalti uski darar ko dekhkar Arun ke lund maharaj ne apna sir utha diya tha.

Arun ne tab pool se nikalne ki sochi lekin jab uska dhyan apne hathiyar ki or gaya to wo bada savdhani se apni behnon ki najar bachakar pool se bahar nikla aur apne aap ko sukoon dene ke liye waha pade pressure pipe se pani ki dhar apne sir par dalne laga. Lekin isse kuch fayda to hua nahi ulta uski teeno behnon ki ankhen chowdi jarur ho gayin. Arun ne socha ab is se bachne ka ek hi tarika hai ki masturbate kar liya jaye.

"Aah...Soniyaa.." Ye kehkar uske man me hasi ki awaz aane lagi.

Arun tezi se piche ke darwaje ki or gaya aur haal me enter hone hi wala thi ki Supriya tab tak waha tauliya lekar aa gayi aur boli.."Aise gandgi failaoge kya farsh par..Kapde dekar jao.."

"Nahi main upar se change karke de dunga.." Arun jaldi se bola.

"Aur upar se tumhe bhi to yaad karna hai.."Aisa uski man me awaz aayi.

Lekin supriya farsh to ganda hone nahi dene wali thi to dobara force kiya. To arun ne apni jeans ka button kholke ek hath se apna boxer pakadkar dusre hath se jeans niche karne laga. Par jaisa hum chahte hain waisa to ho nahi skta so jeans upar se bhigi hui to niche to ho nahi rahi thi. To supriya ne sirf madad karne ke liye uski jeans ko pakadkar thodi force ke sath niche kar liya.Aur jeans niche ho bhi gayi lekin...

Jeans ke sath sath arun ka boxer bhi niche aa gaya aur iske karan Arun ka lund fufkar kar khada ho gaya aur Supriya joki baith ke jeans utar rahi thi uske hothon se ragad khata hua uchalne laga. Iske karan Supriya ek dam se piche ko hati aur farsh par gir padi aur ek dam se uska hath apne muh par aa gaya...

"Shabash mere Sher"Uske man ne kaha.

"Ohmygodiamsorry".. bas itna keh ke Arun teji se jeans aur boxers ko hatho se pakadkar seedhiyon se upar bhag gaya..

"Wow.." Bas itna hi Supriya ke muh se nikal paaya..

"Wow..."

Arun teji se bHAGkar apne room me pahuncha aur sochne laga is condition se bahar kaise aaya jaye.

Ek to uska hathiyar shant hone ka naam nahi le raha tha. To usne apne drawer se lotion nikala aur ek kapda ko kandhe par dalkar muth marne laga.

Pehle to porn ko yaad karne laga par jab usse fayda nahi hua to fir Soniya ke bare me sexy batein sochne laga. Uske man me dikhayi dene laga Soniya apne sexy chikne doodhon par tel masal rahi hai. Uske doodh bilkul safed, condar hai. Chote chote halke pink rang ke nipple aur sath me wo apne dono hathon se ubko masal rahi hai nipples ko khinchkar unhe masal rahi hai aur sath me halki halki aahein uske gale se bahar aa rahi hain..

"oh soniya..soniyaa...soniya" bas yahi rag alapata ja raha tha.

"Arunn.."

Arun ke hath ek dam ruk gaye. Use yad aaya ki wo apne room ka darwaja lock karna bhool gaya tha. Uski peeth darwaje ki taraf hai...

"Shit...Shit...Shit" Arun man me sochta hai ye to Supriya di ki awaz hai..

"Arun tum thik ho...idhar dekho.." Supriya aage badhke uske kandhe par hath rakhte hue kehti hai.

"hmm" Arun bina palte jawab deta hai..

"Maine kaha idhar dekho.." Supriya ek tarike se order dete hue uske kandha apni taraf kheenchti hai..

Arun apna lund hath me liye apni supriya di ke samne palatata hai uski ankhen band hain..

Supriya jaise hi ye dekhti hai wo thoda piche hat jati hai..

"Main..m..main.." Arun ke muh se sharm ke karan shabd nahi nikalte aur ankhen band hi rkhta hai..lekin usne apne hathon se jeans aur boxer upar chadha leta hai.

"Sweetu .. Embarass hone ki jarurat nahi hai...ye to normal chiz hai.. main bhi karti hun halanki tumhare jitna nahi aur na hi main apni behnon ke bare me sochti hun ye karte waqt.." Supriya bade pyar se dilasa dete hue boli..

Ab to arun aur jyada sharm se gada chala jata hai...

Arun ka pura chehra laal ho chuka hai. Uski icha ho rahi ki bas abhi dharti fat jaye aur wo usme sama jaye.

"Bhai kuch to bolo.."

"Kya bolu. Aaj to sahi me jindagi ka sabse bekar din hai. Pehle niche tumhare sath wo...aur ab tumne mujhe masturbate karte hue pakd liya wo bhi apni hi behn ko imagine karte hue..."Aisa lag raha tha jaise Arun bas rone hi wala ho.

"I am sorry...maine tumhe niche kapde utarne ko majboor kiya jiske karan..." Supriya boli..

"Jiske karan tumhare muh mera wo takara gaya..."arun rundhi si awaz me bola.

"Shh...main gussa nahi hun sweetu.." Supriya pyar se boli. "Can we talk? Tum shayad thoda acha mehsus karoge..."

"Isse badhiya main apne aap ko kisi kothri me band kar lunga..." Arun aankhen niche kare kare hi bola..

"Waise tum ye karte wqt apni behen ko kyu yaad kar rahe the??"

"Mujhe khud nahi pata dim mujhe kya ho gaya hai. Aaj subah se kuch jyada hi jaise mera climax hone wala tha ek dam se image aa gayi mere man me.." Arun dusri taraf muh karke bola..Tab tak arun bed par aur supriya samne kursi par baith jati hai.

"To kaun thi wo? Sneha.." Supriya ne badi utsukta ke sath pucha..

"Soniya..." Arun bahut dheeme se bolkar supriya ki taraf dekhne lagta hai...

Arun ka chehra ye kehte waqt bilkul garm aur lal ho jata hai.

"Soniya? Sach me.."

Arun upar ki or dekhta hai to Supriya ke chehre par confusion dekhta hai.

"Main keh raha hun iska naam le ..maja aayega.."

"Kyu soniya me kya dikkat hai..She is hot and sexy.." Arun apni man ki awaz ko na sunkar soniya ko defend karta hai. Use khud vishwas nahi hota ki wo soniya ko bachane ko defend karne ki kosis kar raha hai..

"Main janta tha tera soniya ke liye hi khada hota hai.."

"please tum chup rho tumhare karan hi ye ho raha hai" Arun man me sochta hai..

"Nahi Soniya me koi problem nahi hai but maine socha agar tum kisi ke bare me sochoge to wo ya to Sneha hogi. Kyuke uske boobs bhi lagbhag perfect hain ya fir Aarohi...waise bhi tum aur aarohi kafi close ho.." supriya uski taraf dekhte hue kehti hai..

"Bhai main bata raha hun teri di pakka lesbo hain..dekh inki bhi najar hai sneha di ke mammo par..haha"

"plz" arun man me sochta hai aur supriya ki or bahut hi asmanjas sw dekhne lagta hai. Use apne kaano par yakeen hi nahi hota ki uski supriya di jo itni seedhi aur simple dikhti hain wo sneha di ke boobs bhi notice karti hongi.

"What?? Aise kya dekh rahe ho..ab main daily isi ghar me to rehti hun to ek do chiz to notice kar hi leti hoon.." Supriya apni safai pesh karti hai..

"Lesbo...lesbo..lesbo...teri di lesbo...hurray"

Idhar uske man me party celebration chal rahi hai..

"di main hamesha aisa thodi na karta hun..bas pata nahi kaise aaj hi ye pehli baar hua ki Soniya ka khayal aaya ho jehen me masturbate karte waqt.." arun supriya ki najron ko bachata hua kehta hai.

Wo Aarohi aur aah soniyaa wali baat apne tak hi rakhta hai.

"Isme itna pareshan hone wali koi bat nahi hai bhai..sabke man me masturbate karte time ajib se khaayal aate hain.." Supriya uski najaron ko dhundne ki kosis karti hai. Par arun uski najaron se najarein mila hi nahi paa raha hai..

"Arun.."

"Kya di..?"

" Tumhara ye abhi tak erect kaise hai?? Mujhe aaye lagbhag 15 minute hue hain tabse abhi tak ye usi condition me hain..Mujhe to aisa lag raha hai jaise tumhe isse dard ho raha ho..Ye normal kb tak hoga??" Supriya badi jigyasa ke sath uske lund ki taraf ungli karke use batati hai.

Arun is bar supriya ki ankhon ki taraf dekhta hai..

" Pata nahi di..aisa lagta hai jaise ye normal hona hi nahi chahta..chahe main kuch bhi kar lun.." Arun thoda pareshan hoke kehta hai.

"To tum masturbate karte hue kuch dekh kyu nahi lete like p..porn wagairah..??" Supriya apni najrein bachate hue kahti hai. Uski aankhein bar bar Arun ke chehre aur lund ke bich upar niche ho rahi hain..

"OH Yess..teri di tujhe sex gyan de rahi hain..ise kehte hain di.."

"Koi fayda nahi di.."

"To kuch imagine hi kar lo"

"Jaise hi kuch imagine karunga dobara Soniya aa jayegi dimag me.."

"Soniya hi kyu?? Sneha kyu nahi?? Aur Aarohi...Kya bas Soniya hi basi padi hai dimag me??" Wo halki smile ke sath puchti hai..

"Soniya...oh meri soniyaaa.."

"Ye meri jindagi ka sabse bekar din hai" Arun apne chehre pe apne hathon ko rakhte hue kehta hai.

"Oh sweetu..main to bas help karna chahti hun.."

"Aisa nahi hai ki sirf soniya aati ho..Tum sab aati ho kabhi na kabhi mere dimag me..I cant control it di..Pichle kuch saalon se aisa hi ho raha hai.."

"Hum sab?? Iska matlab k..kya..."

Supriya thoda sa sharmate hue bolne ki kosis karti hai.

Is bar Arun ke chehre par bahut halki si smile aa jati hai jo wo jahir mhi hone deta.." haan di aap bhi.."

Supriya ka chehra ye sunate hi lal ho jata hai aur wo apni najrein churane lagti hai..

"Aur di aajkal to aap kuch jyada hi..."

"M..mm..Main??"

Kuch seconds ke liye bilkul sannata cha jata hai. Arun aur Supriya ki ankhen is waqt ek dusre se milne ki himmat nahi kar pa rahi hai. Supriya le gaalon par halka halka gulabi rang chdhna start ho gya hai.

"Main kyu??" Supriya haklakar puchti hai..

"Because u have awesome sexy chikne malaidar dudhooo..." Iske bad Arun ke dimag me seetiyan bajme lagti hain..

"Matlab di.." Arun kuch samajh nahi pata..

"Matlab main kyu?? Na to main Soniya jitni khoobsurat hoon..Na mere sneha jitne b..boobs perfect hain..na aarohi ki tarah meri body sexy hai fir main kyun??" Supriya thoda dheemi awaz me boli..

pongggg.....Lesbo...

" Aarohi ki sexy body???" Arun bola...

"Ab ye mat kehna ki Aarohi ki body sexy nahi hai.." Supriya ne bilkul normally bola..

"Nahi hai..lekin maine kabhi nahi socha ki aap bhi aisa sochti hogi.." Arun ko ab aisa lag raha tha jaise wo apni Supriya di ko to bilkul janta hi na ho..

"Haan..un logo me wo qualities hain..lekin aap mujhe bilkul perfect lagti ho. Cute, perfect, beautiful, pretty.." Arun ye lehte waqt directly supriya ki ankhon me dekhta hai..

"Tumhe sahi me lagta hai main khoobsurat hoon?"

"Haan di..jab aap khana banati ho bilkul usme concentrate karke tab man karta hai bas aapko hi dekhta rahun. Aap us time bilkul perfect doll ki tarah lagti ho.."

Ye sun ke Supriya ke gaalon ki lali aur badh gayi..

Mammmeeeee

"Tu pakka mar padwayega.." Arun sochta hai..

" Di..Sorry" Arun apna chehra niche jhukate hue kehta hai..

"Kisliye Arun? Masturbation ke time mere bare me sochne ke liye??"

"Haan aur is condition ke liye bhi.." Arun apne lund ki tarf dekhte hue kehta hai..

Beta sandal padne wali hain..

Ab Arun aur Supriya dono thoda thoda khulke batein karne lage hain..

"Shh.dont be sorry..Mujhe to ye compliment laga ki tum mere bare me aisa sochte ho..Waise aur kya kya sexy lagta hai m..mere bare me?" Supriya ek smile ke sath puchti hai..

"Plz bhai...mamme bol..bol be"

"Aapko is baat se koi problem nahi hai ki main aapke bare me sochta hun?" Arun ko yakeen hi nahi hota ki uski di ko is bat se koi problem hi nahi hai..

"Beta tu sanyasi ban ja."

"nahi arun..batao na kya sexy lagta hai mere bare me??"

"aa..aa..apke boobs. They look just perfect. Aur upar se mujhe thoda kam height ki ladkiyan jyada hi pasand hain.(Supriya, Sneha aur Soniya teeno ki height Arun se 6 7 inch kam hai..Bas Aarohi hi lagbhag uske barabar hai lekin wo bhi 2 3 inch short haiblekin uski athletic body ke karan ye pata nahi chalta.) Aur mujhe aap khana banate waqt aur jab aap sibk par bartan dho rahi hoti ho to bahut hi achi lagti ho.." Arun ke chehre par bhi halki si smile aani start ho gayi hai..

"Bartan dhote waqt??" Supriya ko samjh me nahi aata ki bartan dhote waqt aisa kya hota hai..

"Bol.. Gand matakati hai.."

"Di aap jab thoda jhuk ke bartan dhul rahi hoti ho..to bahut hi cute gudiya lagti ho jise duniya ka dhyan hi nahi hai..Aur wo apke b..b.boobs tshirt aur apron ke andar halka halka sa hilte hain aisa lagta hai jaise aap bra pehnana hi nahi chahti ho..apka cleavage aur kabhi kabhi jab halka sa seena bheeg jata hai apka to vahut hi sexy lagti ho..koi kaam karte waqt jab aap apni ungliyon se apne baal piche karti ho...tv dekhte time jab aap apne pair ke anguthe ko hilati rehti ho..apki smile apki aankhein sab kuch" Arun ek saans me bolta chala gaya..

"Nice way of compliment mere sher"

arun man me hi ankh marta hai..

Idhar soniya ka halka sa muh khula hua hai aur chehra to bilkul hi gulabi ho gaya hai..

"S.sahi me..Ek bat puchu Arun?" Supriya uski ankhon me dekhkar bolti hai..

"Sure di.."

"Kya mere choosoge more bhaiyaaa..." Iske bad Arun ko aah aah ki awazein sunai deti hain

"Bhai plz maan ja..mat kar" Arun sochta hai..

"Tum masturbate karte waqt kya sochte ho mere b..bare me.?" Ye puchte waqt Supriya ka chehra bilkul garm pad jata hai..

Arun aage ki or jhuk ke apni chin apni hath pe rkhta hai aur aise baithta hai jaise kisi gehri soch me ho..

" Di..mujhe dikhayi deta hai ki aap sink me dish dho rahe ho lekin aapne sirf ek white apron pehna hua hai aur kuch nahi..pani se bhigkar apka apron halka sa transparent ho gaya hai..aur apke n.n..nipples dikhai de rahe hain.Aur sath me apke hilne se apke boobs bhi hilte ja rahe hain.. Fir aap piche palatati ho aur aap apna apron ke andar hath daal ke pani ko pochne ki kosis karti ho jisse apke nipples aur erect ho jate hain fir aap ek ungli sexy tarike se apne muh me rakh ke suck karti hui mere pas aati ho.."

Ye batate batate arun ka lund dobara apne ful size me aa jata hai..Idhar supriya ek dum se gehri saans leti hai..aur arun ke ankhon aur land ko bari bari dekhne lagti hai..

"Aur aise sochne se tumhara kaam ho jata hai?"" ab supriya lagbhag puri tarike se oprn ho chuki hai.

"Haan..aisa to main kayi baar sochta hun din me.."

"Kayi baar..kya matlab tum din me kitni bar masturbate kar lete ho...??"

" 5 se 6 baar.."

"What?? Lekin itni baar kaise.." supriya ko is bat par yakeen hi nahi hota..

"Pata nahi kyu di..mere man me har waqt sex hi sex rehta hai..aisa lagta hai jaise mind na ho kar sex machine ho..upar se aap log meri condition aur kharab karte ho apka kaam..sneha di ke boobs..soniya ke wo sexy dresses aur aarohi to chipakti hi rehti hai..mujhse control hi nahi hota.." Arun apni problem batata hai

"Wow.. Mujhe to pata hi nahi tha ki tum par hum logo ka aisa effect padta hai.."

"Really di..aap ye sab jaan ke naraz nahi ho mujhse??"

"Bilkul nahi...thodi si galti hum logo ki bhi hai..waise ab tum is monster se kaise chutkara paaoge?" Supriya thoda sa hans ke bolti hai..

"Pata nahi di..shayd apne aap normal ho jaye.."

"Tumhe pata hai na ki tum k..." Supriya bahut atak atak ke kuch bol rahi hoti hai

Arun badi hi ajeeb najaron se supriya ki taraf dekhta hAi...

"Ki..tum kabhi bhi m..meri m..m..madad le skte ho??" Supriya ek sans me bol jati hai...

"Choot mil gayi..yaara choot mil gayiii."

Arun ka muh khula ka khula reh jata hai..

"Diii......" Arun thoda teji se bolta hai..

"Chutiye.. haan bol"

"What...main waise bhi tumhara har tarike se khayal rkhti hun. Aur tum mere bhai ho and I love u so much. Aur mujhe aisa lag raha hai jaise tumhe is cheez se bahut problem bhi ho rahi hai. ab tumhari di tumhari problem solve karne me help nahi karegi to kaun karega. Aur upar se jab tumne mujhe bataya ki tum din me 5 se 6 bar m..masturbate karte ho tab se mujhe realise hua ki tumhare hormones kuch jyada hi daud rahe hain.." Supriya ne ye bat bade casually keh di jaise koi bukhar ki dawai bata raha ho. Aur apna ek hath kamar par rakh ke khadi ho gayi..

"Klpd mat kar...haan bol"

"Di....plz"

"Arun...main to sirf tumhari help ke liye keh rehi thi. Maine thodi na kaha ki main tumhe apne sath s.sex karne dungi.." Supriya ne apne saans rok ke kaha..

"She is a hot bitch..."

"Oh god,,,please di......" In sab baton se to uske lund mharaj aur jyada khade huee ja rahe the...

"Shant raho Arun. Do gehri saans lo.." Supriya ne hans ke kaha..

 
6

अरुण ने दो गहरी साँस ली. एक बार सुप्रिया की ओर नज़र डालने पर उसे पता चल गया कि वो ऐसे नहीं जाने वाली. उसने अपने मूह को अपने हाथों से साफ किया और बोला---

"क्या करूँ? बताओ..."

"पकड़ और गिरा दे बिस्तेर पे..." मन ने कहा

"आ.आ..अगर तुम चाहो तो तुम म..मुझे द्द...." सुप्रिया बहुत ही ज़्यादा हकला के बोल रही थी. और उसकी छाती उपर नीचे हो रही थी और चहरी पर लाली छाइ हुई थी..

"बोलो दी..." अरुण ने आँखों मे देखते हुए ज़ोर देके कहा..\

"मैं कह रही हूँ कि अगर तुम चाहो तो म..मुझे देखते हुए म..मास्टरबेट कर सकते हो.." इतना कह के सुप्रिया ने अपना चेहरा दूसरी तरफ मोड़ लिया..

"दिस ईज़ दा सक्सेस बॉस..."

इधर अरुण का मूह खुला का खुला रह गया.

"आ...आ...आप सही मे मुझे देखने दोगे...." अरुण का गला सुख जाता है आगे के सीन इमॅजिन करके..

"ऑफ कोर्स.. इतनी हेल्प तो मैं तुम्हारी कर ही सकती हूँ."

"ओके..." और उसके बाद थूक अंदर निगल जाता है...

"तुम बेड पर लेट क्यूँ नही जाते..." सुप्रिया थोड़ा चेयर हटा कर बेड के सामने आते हुए बोलती है..

वो फिर खिड़की और डोर का लॉक चेक करके दोबारा बेड के नज़दीक आती हैं. अरुण के पैर बेड के नीचे लटके हुए हैं. और सिर तकिया के उपर रख उसने अपने उपर चादर डाल ली है और अपनी जीन्स और बॉक्सर नीचे करके अपना लंड अपने हाथ मे ले रखा है...

सुप्रिया बेड के पास आके धीरे से अपनी टीशर्ट के किनारे को पकड़ती है. और धीरे धीरे उसे उपर उठाती है जैसे ही उसकी टीशर्ट उसकी नाभि के उपर पहुँचती है..अरुण का धीरे धीरे अपने लंड पर उपर नीचे होने लगता है. उसके सामने उसकी बहेन सुप्रिया दी की चिकनी, चमकती, गहरी नाभि का नज़ारा आता है. फिर और उपर फिर एक झटके के साथ उसके सामने दुनिया के दो सबसे खूबसूरत फल आते हैं. और उसकी एक हल्की सी आह निकल जाती है. सुप्रिया टीशर्ट को बेड की दूसरी साइड फेक देती है.. और हल्का सा अपने दुधो को हिलाती हुई अरुण की तरफ देखती है.. इधर अरुण उन खरबूज़ों की एक एक चीज़ को आँखों मे भर लेना चाहता है. बिल्कुल गोल दूध हिलते वक़्त अपनी कयामत ढा रहे हैं. उनपर हल्के भूरे कलर के निपल हल्का हल्का ऐंठन के साथ टाइट होते जा रहे हैं(कमरे मे लाइट भरपूर है).. अरुण की इच्छा हो रही थी अभी जाए उनको पकड़ कर उनका रस पान करने लगे.

"कैसे लगे???" सुप्रिया अरुण की आँखों मे देखकर हल्का सा शरमाते हुए पूछती है...

"भाई पकड़....पकड़"

अरुण एक बार फिर उन सुंदरताओं की तरफ नज़र डालता है. उसे धीरे धीरे महसूस होता है कि सुप्रिया भी गर्म होती जा रही है जिसके कारण उसके छोटे छोटे निपल्स कड़क होते जा रहे हैं... सुप्रिया अपनी नज़रें नीचे कर लेती है..

अरुण दोबारा थूक निगलता है..

"दी...दे आर...." उसे इस टाइम बोलना मुश्किल पड़ रहा है "पर्फेक्ट, सो ब्यूटिफुल..."

"सुप्रिया हल्की सी स्माइल के साथ अरुण को देखती है और कहती है" इतने भी अच्छे नही हैं..मस्का मारने की ज़रूरत नही है..

"चूत मारने की ज़रूरत है..." मन ने कहा

"नही दी..दे आर रियली नाइस. पर्फेक्ट, राउंड, स्माल. आप सही मे हॉट हो...." अरुण भी मुस्कुराते हुए जवाब देता है. उसका हाथ अभी भी अपने लंड पर उपर नीचे हो रहा है..

"त..तुम चाहो तो च...छ्च..छू के देख सकते हो..." इस बार सुप्रिया के कान भी लाल पड़ने लगते है..

हवा मे एक सेक्षुयल टेन्षन बढ़ जाती है...पूरे कमरे मे सिर्फ़ सुप्रिया और अरुण की साँसों की आवाज़ और साथ मे उसके हाथों के उपर नीचे होने की आवाज़ सुनी जा सकती है..

"सच मे दी..." अरुण बहुत ही ज़्यादा खुश होते हुए पूछता है...

"हां...अगर तुम चाहो तो ??" ये कहते कहते सुप्रिया बेड के बिल्कुल नज़दीक पहुच जाती है..

अरुण उठता है और सुप्रिया की कमर मे दोनो हाथ डाल के उसे अपनी बॉडी के पास खींचता है. सुप्रिया के बिल्कुल पास आते ही उसे एक बहुत ही मदहोश करने वाली खुसबू आने लगती है.. उसकी नज़रें सुप्रिया के शर्म से मुस्कुराते चेहरे से उसके दूधों की तरफ जाती है...जो उसे बुला रहे हैं...

वो हल्की सी फूँक सुप्रिया के गले से लेकर दूधों के बीच की जगह पर मारता है...सुप्रिया की हल्की सी आह निकल जाती है..और उसके निपल और ज़्यादा तन जाते हैं.. साँसों के साथ साथ दूध उपर नीचे हो रहे हैं..अरुण के मूह मे पानी आ जाता है..उसके हाथ सुप्रिया की पीठ सहला रहे हैं. उसे अपने हाथों पर अपनी दी की चिकनी, मुलायम स्किन बहुत ही ज़्यादा उत्तेजित कर रही होती है..

वो हल्का सा झटका देके उसे अपनी एक जाँघ पर बैठा लेता है और उसकी आँखों मे देखते हुए पूछता है "कोई प्राब्लम तो नही हो रही ना दी..."

सुप्रिया मे बोलने की ताक़त नही बची है. वो बस अपना सिर इधर उधर हिला देती है..अरुण उसके होठों की तरफ देखता है. बिल्कुल गुलाबी और रस से भरपूर...फिर वो अपना लेफ्ट हाथ आगे लाके एक उंगली गले से लेकर दूधों के बीच मे सुप्रिया की साँसों के साथ साथ धीरे धीरे लेकर जाता है...उसके बाद लेफ्ट दूध की बाउन्ड्री पे हल्के से उंगली गोल गोल घूमाते हुए जैसे ही निपल पे उसकी उंगली पड़ती है. दोनो की आहें एक साथ मिलकर घुल जाती हैं. सुप्रिया और अरुण दोनो एक दूसरे की गर्म और मदहोशी भरी सासें अपने अपने चेहरों पर महसूस कर रहे हैं..जैसे ही निपल पर उंगली पड़ती है..सुप्रिया आ के साथ साँस अंदर खींचती है और अपने होंठ अरुण के होंठ से जोड़ देती है..ये पहला मिलन उन दोनो के रोमांच को और बढ़ा देता है..अरुण के होंठों पर जैसे ही उसे सुप्रिया के तपते होंठों का आभास होता है वो हल्के से अपने होंठ खोल देता है और सुप्रिया के उपर वाले होठ का रस्पान करने लगता है. उसे बहुत ही मीठी मीठी खुसबू आ रही है..उसका एक हाथ सुप्रिया के बालों मे दूसरा निपल के साथ हल्की छेड़खानी कर रहा है. सुप्रिया से भी रहा नही जाता वो एक हाथ अरुण के गले मे डालती है और दूसरे उसे उसके बालों मे उंगलियाँ फिराने लगती है..

अरुण उपर वाले होंठ के बाद नीचे वाले का रस्पान करने लगता है..थोड़ी देर बाद वो अपनी जीभ सुप्रिया के मूह मे डालने की कोशिस करता है तो सुप्रिया मना नही करती और अपने होठ खोल देती है.अरुण की जीभ अंदर जाके अपना सैर सपाटा करने लगती है. सुप्रिया से भी रहा नही जाता और वो भी अपनी जीभ अरुण के होंठों से अंदर डालने लगती है. दोनो ऐसे किस कर रहे हों जैसे एक दूसरे को खा जाएँगे. वो किस तब तक चालू रहता है जब तक दोनो को साँस लेना मुश्किल नही पड़ गया..

2 मिनिट बाद दोनो के होठ एक दूसरे से अलग हुए तो दोनो के बीच मे एक धागा बन जाता है लार का..अरुण जैसे ही साँस भरता है तुरंत ही अपना मूह नीचे ले जाता है और निपल को मूह मे रखके एक ज़ोर की साँस लेता है..

"आ.हा.हा" सुप्रिया के मूह से मदहोशी भरी आह निकल जाती है..और वो अपनी छाती और ज़्यादा अरुण के मूह मे फोर्स करते हुए अपनी पीठ को घुमाती है...उसकी जीभ भी अपने होंठों पर फिराती रहती है..

अरुण अपनी सुप्रिया दी को अपनी बाहों मे भरे भरे दोनो निपल्स बारी बारी चूस रहा होता है. ये उसकी जिंदगी के फर्स्ट दूध थे इस बात से वो और ज़्यादा उत्तेजित हो रहा था..उसी बाहों मे सुप्रिया ऐसी समाई हुई है जैसे कोई बच्चा अपनी माँ की गोद मे समा जाता है.. अरुण को इस समय सुप्रिया पर बड़ा प्यार आ रहा होता है..

अरुण 10 मिनिट तक सिर्फ़ एक निपल से दूसरे निपल पर ही लगा हुआ होता है..सुप्रिया के मूह से आह उः की आवाज़ें निकल रही होती हैं..

"निपल के अलावा भी दूसरी जगह किस करने पर भी मुझे अच्छा लगेगा..वैसे मुझे कोई प्राब्लम नही है निपल किस करने से.." सुप्रिया बहुत ही मदहोशी भरी आवाज़ मे अरुण के कान को मूह से लिक्क करके कहती है...तुरंत ही उसकी एक तेज आह निकल जाती है..जैसे ही अरुण एक निपल को दोबारा चूस्ता है और हल्का से उसे दाँतों से काट लेता है जिसके कारण सुप्रिया का निपल और ज़्यादा फूल जाता है..

"अब किसका इंतेज़ार है चूतिए...गिरा और मार ले चूत...गाढ दे लन्डे ओह सॉरी झंडे"

अरुण उधर ध्यान ना देकर अपने मूह से निपल निकाल कर दोबारा उसे अपनी जीब बाहर निकालकर हिलाता है. फिर अपना ध्यान दूधों के बीच की जगह पर डालता है जहाँ पर हल्की सी नमी आ गयी है और अपनी जीभ से उसे चाटने लगता है. वो दोनो मम्मों को चाट चाट कर गीला कर देता है और आस पास के एरिया को भी..

अब वो धीरे धीरे उसकी गर्दन की तरफ बढ़ते हुए सुप्रिया की एक एक इंच स्किन को किस करते करते और साथ मे लिक्क भी करते चल रहा है. वो उसकी चिन को मूह मे भर के चूस लेता है..और एक हाथ से सुप्रिया के निपल को खींच कर मरोड़ देता है..बस सुप्रिया के मूह से "ओह अरून्न्ञन्..." निकलता है और वो और ज़्यादा उसमे घुसने की कोसिस करती है और मदहोशी मे अपना हाथ अरुण के लंड की तरफ ले जाती है..जैसे ही उसका हाथ अरुण के लंड से टच होता है वैसे ही अरुण का लंड एक तेज झटका मारता है और अरुण एक आह के साथ कस्के सुप्रिया के बालों को पकड़कर अपनी तरफ झुकाता है और अपनी जीब सुप्रिया के खुले मूह मे डालकर चूसने लगता है..एक तरफ उसकी जीभ सुप्रिया के मूह मे अपना कमाल दिखा रही है दूसरी तरफ उसके हाथ निपल को मरोड़े जा रहे हैं..वो अपनी एक उंगली को पहले अपने मूह से गीला करता है फिर सुप्रिया के निपल पर फिरा कर अपने मूह मे डाल के चूसने लगता है फिर साइड से सुप्रिया के मूह मे डालता है..सुप्रिया किसी लॉलिपोप की तरह उसकी उंगली चूसने लगती है...उसका हाथ अरुण के लंड को पकड़ लेता है और उसे चादर के उपर से भी उसमे से आग निकलते हुए महसूस होती है..

सुप्रिया और ज़्यादा अरुण के करीब आती है और अपनी चूत को अरुण के लंड के करीब छूने की कोसिस करने लगती है..एक हाथ से वो उसके लंड को उपर नीचे कर रही है दूसरा हाथ उसके गले मे डाल कर अपनी चूत को उसके लंड पर रगड़ रही है..उसने नीचे पैंटी और उसके उपर बहुत ही पतले कपड़े वाला लोवर पहना हुआ है..इतना ज़्यादा धक्के के कारण दोनो बिस्तर पर गिर पड़ते हैं अरुण नीचे है सुप्रिया उसके उपर चढ़ के उसके लंड पर अपनी चूत रगड़ रही है.अरुण के दोनो हाथ सुप्रिया के बालों मे उलझे हुए हैं और दोनो बहुत ही आवाज़ के साथ एक दूसरे का रस्पान कर रहे हैं.. कमरे मे सिर्फ़ स्लर्प..आह..उहह की आवाज़ें ही सुनाई दे रही हैं.

सुप्रिया एक हाथ से चादर हटा देती है और अरुण के नंगे लंड पर अपनी गीली चूत रगड़ने लगती है. लोवर के उपर से गीलापन सॉफ सॉफ देखा जा सकता है..थोड़ी देर मे दोनो किस तोड़ते हैं और सुप्रिया के मूह से आह और उह और तेज हो जाती है..

"ओह..ओह्ह्ह..आह...उहह..ओह गॉड...अरून्न्ञणन्..." और अरुण के नाम के साथ उसे रीयलाइज़ होता है वो इतनी ज़्यादा गर्म हो गयी थी उसका भी छूटने वाला ही है..

"ओह गॉड...दी यू आर सो हॉट...दी......दीई. आइ.इम कूम्म्मिंगगगग..." और ये कहते कहते अरुण का छूट जाता है..जैसे ही सुप्रिया को अरुण का सीमेन अपने पेट पर महसूस होता है उसका भी ऑर्गॅज़म हो जाता है दोनो इतने कस के दूसरे को चूमने लगते हैं. दोनो एक दूसरे के शरीर को एक दूसरे के अंदर समा लेना चाहते हैं..

सुप्रिया की उंगलियों मे अरुण का स्पर्म लग जाता है और अरुण बिना जाने ही धक्के मारने लगता है जैसे की चूत के अंदर लंड को ले जाना चाहता हो.."ओह अरुण...

निकालो..निकाल दो अपने माल को अपनी दी के उपर....आह..उहह...फाड़ दो अपनी दी की चूत को अपने इस लंड से..."

सुप्रिया अपनी उत्तेजना मे पता नही क्या क्या बोले चली जाती है..

अरुण अपना सिर पीछे तकिया मे डाल देता है..उसके सिर मे हल्के हल्के विशफोट होने लगते हैं और उसका वीर्य बाहर सुप्रिया के हाथ पेट और बूब्स को ढक देता है..

सुप्रिया भी निढाल होकर अपना सिर उसकी छाती पर रख के ढेर हो जाती है.दोनो की साँसें बड़ी तेज़ी के साथ उपर नीचे हो रही हैं...अपनी सासों पे काबू करने के बाद अरुण सुप्रिया के चेहरे पर से बालों की लट को हटाता है और उसको अपने उपर खींच के पहले उसके लिप्स पे एक छोटी सी किस करता है फिर उसके सिर को चूमता है.सुप्रिया भी उसके सिर और गाल को चूमती है और दोबारा उसके उपर लेट जाती है..

थोड़ी देर बाद सुप्रिया उठती है उसके गालों को चूमती है. अरुण अपनी आँखें खोलता है तो सामने सुप्रिया का मुस्कुराता हुआ चेहरा पाता है..

"हाई.." अरुण कहता है..

"मुझे तुम्हे कुछ बताना है.." सुप्रिया मुस्कुराते हुए कहती है..

"यू आर प्रेग्नेंट.." ये कहके अरुण एक बड़ी सी स्माइल देता है..

सुप्रिया हँसते हुए उसके माथे पर मारती है और कहती है "नो यू ईडियट..थोड़ा सीरीयस होके सुनो...दट वाज़ सो हॉट..मुझे बहुत अच्छा लगा..मैने लाइफ मे पहली बार इतनी अच्छे तरीके से ऑर्गॅज़म को एंजाय किया है..और तुमने इस तरीके से किस करना कहाँ से सीखा..तट वाज़ पर्फेक्ट आंड सो एरॉटिक.."

"मुझे भी नही पता दी कहाँ से आपके साथ बस हो गया..यू आर सो हॉट..अब आगे से पॉर्न देख के तो मेरा कुछ नही होने वाला.." अरुण हल्की हँसी के साथ कहता है..

उसके मन मे तो पार्टी चल रही थी..

"अरुण सुनो..चाहे कुछ भी हो जाए यू आर माइ ब्रदर आंड आइ लव यू..मुझे नही लगता की अभी जो कुछ हमारे बीच हुआ वो ग़लत था..मुझे इससे कोई प्राब्लम नही है लेकिन अगर तुम्हे कोई प्राब्लम है तो हम आज के बाद कभी इस बारे मे कोई बात नही करेंगे.."

"फक हर"

सुप्रिया अपने आप को साइड मे कर के एक हाथ उसकी छाती पर रख देती है..

"मुझे तो नही लगता मैं कभी ये दिन भूल पाउन्गा.."अरुण बहुत ही बड़ी स्माइल के साथ बोलता है..

"देखो अरुण मैने बचपन से तुम्हारा ख़याल रखा है..तुम्हारी हर प्राब्लम मे मैने तुम्हारी मदद की और मुझे उसमे कोई प्राब्लम भी नही हुई..तो आज भी मुझे खुशी हुई जब मैने अपने छोटे भाई की किसी प्राब्लम को सॉल्व करने मे मदद की..मुझे खुशी है कि हमारे बीच ये हुआ.."सुप्रिया उसके सीने को सहलाते हुए बोली.

"दी..मैं भी कभी महसूस नही करूँगा कि ये ग़लत था..मैं सही मे आपसे बहुत ज़्यादा प्यार करता हूँ..आंड थॅंक योउ फॉर दिस..आंड थॅंक यू फॉर बीयिंग माइ फर्स्ट.."

"फर्स्ट?" सुप्रिया कन्फ्यूज़ हो जाती है..

"माइ फर्स्ट हॅंड जॉब दी..."अरुण स्माइल के साथ कहता है और सुप्रिया के गालों को सहलाता रहता है..

"आर यू ओके..?" सुप्रिया पूछती है

"एप..एक्सलेंट"

"अगर दोबारा कोई प्राब्लम हो तो तुम्हे पता ही है मैं कहाँ मिलूंगी.."सुप्रिया उसे आँख मारते हुए बोलती है.. और बिस्तर से उठ के अपनी टी शर्ट पहनने लगती है.."अब मुझे जल्दी नीचे चले जाना चाहिए वैसे भी अभी खाना भी नही बनाया है..और सोनिया को कुछ शक हो गया तो तुम्हारा तो जीना मुश्किल हो जाएगा...हां ये अलग बात है अगर तुम उसको अपना ये हथियार दिखा दो कुछ और मिल जाए.." सुप्रिया अपने बालों को सुलझाते हुए कहती है और आँख मार के कहती है..

"दी...शी ईज़ माइ सिस्टर"

"और मैं क्या हूँ...?" सुप्रिया उसको पिल्लो मारते हुए कहती है..

"मैं उस सेन्स मे नही कह रहा था दी..." अरुण फिर एक किस करता है सुप्रिया को और उसका माथा चूम लेता है..

सुप्रिया जैसे ही उसके रूम के दरवाजे तक पहुँचती है अरुण बोलता है..

"दी..मैने जब कहा था कि आप बहुत ही ब्यूटिफुल हो आंड आइ लव यू...आइ रियली मीन इट..." सुप्रिया उसकी ओर फ्लाइयिंग किस करके चली जाती है..और अरुण सपनो की दुनिया मे जाने की तय्यारी करने लगता है..

और धीरे धीरे नींद की आगोश मे चला जाता है..इस बार ना कोई जोकर..ना कोई आक्सिडेंट बस सुहानी नींद...

इसके बाद अरुण 3 4 घंटे तक आराम से सोता रहा. इतनी अच्छी और गहरी नींद थी कि जब सुप्रिया उसे लंच के लिए बुलाने आई तब भी नही उठा. तो सुप्रिया ने उसे सोने दिया लेकिन उसके उपर चादर ऊढा के चली गयी और उसके माथे को चूमा.

अरुण अपने सपनों की दुनिया मे खोया हुआ था. उसके सपने मे उसके पीछे बूब्स और चूतो की फ़ौज़ उसके पीछे पड़ी थी और वो बेतहाशा भागा जा रहा है. और वो पीछे से उसे आवाज़ भी दे रहे हैं..

"अरुण"

"अरुण"

"अरुंण" आरोही ने आख़िर तंग आकर उसके हाथ पे तेज़ी से मारते हुए उसे उठाने की कोसिस की...

"मैं कसम खा के कहता हूँ मैने सिर्फ़ किस किया था..." अरुण बहुत तेज़ी से उठ के बोलता है....उसका चेहरा पसीने से भीग जाता है. पहले तो उसे कुछ समझ मे नही आता लेकिन जब उसके कानों मे बहुत ही तेज हँसने की आवाज़ और बिस्तर हिलने का आभास होता है तो वो अपनी आँखों को मल के चारों ओर देखता है कि आरोही अपना पेट पकड़कर हंस रही है...

अगले 2 3 मिनिट तक कमरे मे केवल आरोही के हँसने की ही आवाज़ें आ रही थी..आख़िर मे उसने हान्फते हुए कहा.."दट वाज़ रियली फन्नी..."

इधर अरुण के मन मे भी हँसी ही हँसी की आवाज़ें आ रही थी..

"बेटा तू पक्का किसी दिन सपने की वजह से मर जाएगा..हाहहाहा...मैने सिर्फ़ किस किया था...हाहहहहह"

"हां...हां..वेरी फन्नी" अरुण मूह बनाते हुए बोला.

"कोई नही...वैसे सपना किसके बारे मे देख रहे थे.." आरोही ने हँसी को रोकते हुए कहा..

"जोकर..."

"जोकर का नाम आरोही था..." और दोबारा हँसने लगी..

"दट'स नोट फन्नी.." अरुण थोड़ा एंबॅरस होते हुए बोला..

फिर भी आरोही हँसती रही और रूम के दरवाजे के पास पहुँच के बोली.."तुमने लंच तो किया नही तो स्नेहा दी ने स्नॅक्स तय्यार करे हैं..जल्दी आ जाना.." अरुण के मूह पर ये बात सुनते ही मिलियन डॉलर स्माइल आ जाती है और वो उपर की ओर देखता है तो दिखाई देता है कि सोनिया अपने मूह से किस्सिंग का सीन का डिसप्ले कर रही है और उसकी ओर देख के हंस रही है. अरुण एक छोटी सी बॉल जो कि बेड के पास टेबल पे रखी है उसे उसके उपर फैंकता है लेकिन तब तक आरोही दरवाजा बंद करके बाहर पहुँच जाती है लेकिन दोबारा सिर अंदर करके "आहह...सोनियाआ...हहिहिहीः" बोल के भाग जाती है..

"ये तुझे पक्का अपना गुलाम बनाएगी...देख लियो...बस सेक्स स्लेव बनाए लेकिन.हिहीही"

इस बात को मन से हटाते हुए और स्नेहा दी के खाने के बारे मे सोचते हुए अरुण फ्रेश होकर क्लीन क्लोद्स पहेन कर नीचे जाता है तो आरोही तो सोफे पे बैठ के टीवी देख रही है.. सोनिया फोन पे चिपकी हुई है..स्नेहा दी किचन मे कुछ बना रही हैं और बाथरूम मे पानी चलने की आवाज़ आ रही है..

तो अरुण पानी पीने किचन मे जाता है तो देखता है कि स्नेहा किचन की टॉप शेल्फ से कुछ उतारने की कोसिस कर रही है जिसकी वजह से उसकी गान्ड का शेप काफ़ी अच्छा लगने लगता है अरुण को और वो उसी मे खो जाता है..

"अरुण.."

"अरुण..हेलो मैने कहा उपर से सॉस उतार दो ...ध्यान कहाँ हैं तुम्हारा"

अरुण एक दम से होश मे आता है और सॉस उतार कर स्नेहा को दे देता है लेकिन सॉस देते देते उसकी नज़र स्नेहा के फ्रंट पर पड़ती है और उसकी गर्मी बढ़ने लगती है..स्नेहा का क्लीवेज सॉफ सॉफ नज़र आ रहा है लेकिन स्नेहा तो स्नेहा है उसे इन चीज़ों के बारे मे ज़्यादा कामन सेन्स नही है..

(यहाँ पर मैं पहले ही क्लियर कर दूँ कि स्नेहा इंटेलिजेंट तो बहुत है लेकिन इसके कारण थोड़ा सा कामन सेन्स आंड बिहेवियर वाली थिंग्स हल्की सी कम है..)

खैर तब तक सुप्रिया किचन मे आती है और अरुण को कोई चीज़ बाथरूम मे उतारने के लिए अपने साथ लेके जाती है और बाथरूम मे पहुँचते ही पहले उसके होंठों पर एक छोटी सी किस फिर कहती है.."मैने तुम्हे जब उस कंडीशन मे स्नेहा के दूध देखते देखा तो मैं समझ गयी कि तुम हॉर्नी हो रहे हो..अरुण मैं अपने प्यारे भाई को तक़लीफ़ मे कैसे देख सकती हूँ" इतना कह के वो दोबारा अरुण को किस करने लगती है.. और उसके हाथ अरुण की पीठ सहलाने लगते हैं.. उसके हाथ अरुण की पीठ से होते होते अरुण के लंड पर पहुँच जाते हैं और उसका हाथ पड़ते ही अरुण का लंड खड़ा होने लगता है..

"अरुण तुम ऐसे नही रह सकते..हम लोग तो हमेशा ही यही रहेंगे..इस तरीके से हर घंटे अगर तुम हम को देख कर गर्म हो जाओगे तो कैसे चलेगा..यू हॅव टू कंट्रोल..." इतना कह के सुप्रिया अरुण की बेल्ट खोलने लगती है...

अरुण सर्प्राइज़ के साथ बाथरूम के गेट की तरफ देखता है जैसे ही सुप्रिया उसके बॉक्सर्स को नीचे करती है अरुण का लंड उसकी आँखों के सामने आ जाता है. जिसे देखकर सुप्रिया की आँखों मे चमक आ जाती है वो अपने होंठों पर जीभ फिराती है और एक हाथ से लंड को उपर उठाती है और टट्टो को मूह मे भरकर चुस्ती है...

"दी..ये..क..क्क्या..क.क्कार .र्र..रही हो..दूसरे. लोग..भी हैं बाहर..किसी ने सुन ल्ल.ल्लिया तो...आहह" अरुण सिर्फ़ इतना ही कह पाता है तब तक सुप्रिया उसे एक बार आँख मारती है और उसके लंड के अंदर की साइड को चाटती हुई उपर सुपाडे तक जाती है उसे मूह मे भरकर एक ज़ोर की चुस्की मारती है..जैसे अभी उस मे से जूस निकलेगा..फिर उसी सुपाडे पर अपने होंठ ज़ोर ज़ोर से घुमाने लगती है और एक हाथ से लंड को आगे पीछे कर रही है और दूसरे से टट्टो को सहला रही है..मदहोशी मे अरुण का हाथ सुप्रिया के बालों पर चला जाता है और वो उन्हे सहलाने लगता है...

सुप्रिया फिर पूरा लंड मूह मे भरकर चूसने लगती है...

ये दोनो अपनी मस्ती मे पूरी तरह खोए हुए होते हैं...

"दी..स्नॅक्स तय्यार हैं जल्दी आ जाओ...और ये अरुण कहाँ चला गया...आरृूंन्ञणणन्.."स्नेहा की आवाज़ आती है..

सुप्रिया तुरंत ही अरुण का लंड अपने मूह से झटके से निकालती है और इधर उधर देखती है और उपर उठ के अरुण को एक लीप किस के साथ आँख मार के चली जाती है..इधर अरुण का चेहरा पसीने से भीगा हुआ है..वो दोबारा मूह धोता है..

"कितनी कलपद होगी तेरी बे..."

वो भी चुपके से बाथरूम से निकलता है और आके डाइनिंग टेबल पर बैठ जाता है..

सब लोग बैठे हैं सिवाय स्नेहा के वो भी सब समान लाके अरुण के सामने वाली चेयर पर बैठ जाती है....लेकिन आरोही बड़े ध्यान से अरुण की तरफ देखती है तो समझ जाती है कि कुछ तो गड़बड़ है..वो कुछ नही कहती...इधर स्नेहा सबको चाउमीन सर्व करती है..जितनी बार वो उठ कर आगे तरफ़ झुकती है उतनी बार अरुण का गला सुख जाता है. सुप्रिया ये देखकर अपनी हँसी को कंट्रोल करती है. फिर सब खाना शुरू करते हैं..

6

Arun ne do gehri saans li. Ek bar supriya ki or najar dalne par use pata chal gaya ki wo aise nahi jaane wali. Usne apne muh ko apne hathon se saf kiya aur bola---

"Kya karun? batao..."

"Pakad aur gira de bister pe..."

"Aa.aa..agar tum chaho to tum m..mujhe dd...." Supriya bahut hi jyada hakla ke bol rahi thi. Aur uski chhati upar niche ho rahi thi aur chehri par lali chhahi hui thi..

"Bolo diiii..." Arun ne ankhon me dekhte hue jor deke kaha..\

"Main keh rehi hun ki agar tum chaho to m..mujhe dekhte hue m..masturbate kar skte ho.." Itna keh ke Supriya ne apna chehra dusri taraf mod liya..

"This is the success boss..."

Idhar Arun ka muh khula ka khula reh gaya.

"Aa...aa...aap sahi me mujhe dekhne doge...." Arun ka gala sukh jata hai aage ke scene imagine karke..

"Of course.. itni help to main tumhari kar hi skti hun."

"ok..." Aur uske bad thuk andar nigal jata hai...

"Tum bed par let kyu nahi jate..." Supriya thoda chair hatake bed ke samne aate hue bolti hai..

Wo fir khidki and door ka lock check karke dobara bed ke najdeek aati hain. Arun ke pair bed ke neeche latake hue hain. Aur sir takiya ke upar rkhke usne apne upar chadar dal li hai aur apni jeans aur boxer niche karke apna lund apne haath me le rkha hai...

Supriya bed ke paas aake dheere se apni tshirt ke kinare ko pakadti hai. Hai dhhere dheere use upar uthati hai jaise hi uski tshirt uski nabhi ke upar pahunchti hai..Arun ka dheere dheere apne lund par upar niche hone lagta hai. Uske samne uski behen Supriya di ki chikni, chamakti, gehri nabhi ka najara aata hai. Fir aur upar fir ek jhatke ke sath uske samne duniya ke do sabse khoobsurat fal aate hain. Aur uski ek halki si aah nikal jati hai. Supriya tshirt ko bed ki dusri side fek deti hai.. Aur halka sa apne dudhon ko hilati hui Arun ki tararf dekhti hai.. Idhar Arun un kharboozon ki ek ek cheez ko ankhon me bhar lena chahta hai. Bilkul gol dooth hilte waqt apni kayamat dha rahe hain. Unpar halke bhoore colour ke nipple halka halka ainthan ke sath tight hote ja rahe hain(Kamre me light bharpur hai).. Arun ki ichha ho rahi thi abhi jaye unko pakad kar unka ras pan karne lage.

"Kaise lage???" Supriya arun ki ankhon me dekhkar halka sa sharmate hue puchti hai...

"Bhai pakad....pakad"

Arun ek bar fir un sundarataon ki taraf najar dalta hai. Use dheere dheere mahsoos hota hai ki Supriya bhi garm hoti ja rahi hai jiske karan uske chhote choote nipples kadak hote ja rahe hain... Supriya apni najarein neeche kar leti hai..

Arun dobara thook nigalta hai..

"Di...they are...." Use is time bolna mushkil pad raha hai "Perfect, so beautiful..."

"Supriya halki si smile ke sath Arun ko dekhti hai aur kehti hai" Itne bhi ache nahi hain..Maska marne ki jarurat nahi hai..

"Chut marne ki jarurat hai..."

"Nahi di..theyre really nice. Perfect, round, small. Aap sahi me hot ho...." Arun bhi muskurate hue jawab deta hai. Uska hath abhi bhi apne lund par upar niche ho raha hai..

"T..tum chaho to ch...chh..choo ke dekh skte ho..." Is bar supriya ke kaan bhi lal padne lagte hai..

Hawa me ek sexual tension badh jati hai...Pure kamre me sirf Supriya aur Arun ki saanson ki awaz aur sath me uske hathon ke upar niche hone ki awaz suni ja skti hai..

"Sach me di..." Arun bahut hi jyada khush hote hue puchta hai...

"Haan...agar tum chaho to ??" ye kehte kehte Supriya bed ke bilkul najdeek pahuch jati hai..

Arun uthta hai aur supriya ki kamar me dono hath dal ke use apni body ke pas kheenchta hai. Supriya ke bilkul pas aate hi use ek bahut hi madhosh karne wali khusboo ane lagti hai.. uski najarein supriya ke sharm se muskurate chehre se uske doodhon ki taraf jati hai...jo use bula rahe hain...

Wo halki si foonk supriya ke gale se lekar doodhon ke beech ki jagah par marta hai...Supriya ki halki si aah nikal jati hai..aur uske nipple aur jyada tan jate hain.. saanson ke sath sath doodh upar niche ho rahe hain..Arun ke muh me pani aa jata hai..Uske hath supriya ki pith sehla rahe hain. Use apne hathon par apni di ki chikni, mulayam skin bahut hi jyada uttejit kar rahi hoti hai..

Wo halka sa jhatka deke use apni ek jangh par baithalta hai aur uski ankhon me dekhte hue puchta hai "Koi problem to nahi ho rahi na di..."

Supriya me bolne ki takat nahi bachi hai. wo bas apna sir idhar udhar hila deti hai..Arun uske hothon ki taraf dekhta hai. Bilkul gulabi aur ras se bharpur...fir wo apna left hath aage lage ek ungli gale se lekar doodhon ke bich me supriya ki saanson ke sath sath dheere dheere lekar jata hai...Uske bad left doodh ki boundari pe halke se ungli gol gol ghumate hue jaise hi nipple pe uski ungli padti hai. Dono ki aahein ek sath milkar ghul jati hain. Supriya aur Arun dono ek dusre ki garm aur madhoshi bhari saasein apne apne chehron par mahsus kar rahe hain..Jaise hi nipple par ungli padti hai..Supriya aah ke sath saans andar khinchti hai aur apne honth Arun ke honth se jod deti hai..Ye pehla milan un dono ke romanch ko aur badha deta hai..Arun ke honthon par jaise hi use Supriya ke tapte honthon ka abhas hota hai wo halke se apne honth khol deta hai aur Supriya ke upar wale hoth ka raspan karne lagta hai. Use bahut hi meethi meethi khusboo aa rahi hai..Uska ek hath supriya ke balon me dusra nipple ke sath halki chedkani kar raha hai. Supriya se bhi raha nahi jata wo ek hath Arun ke gale me dalti hai aur dusre use uske balon me ungliyan phirane lagti hai..

Arun upar honth ke baad neeche wale ka raspan karne lagta hai..Thodi der bad wo apni jibh supriya ke muh me dalne ki kosis karta hai to Supriya mana nahi karti aur apne hoth khol deti hai.Arun ki jibh andar jake apna sair sapata karne lagti hai. Supriya se bhi raha nahi jata aur wo bhi apni jeebh arun ke honthon se andar dalne lagti hai. Dono aise kiss kar rahe hon jaise ek dusre ko kha jayenge. Wo kiss tab tak chalu rehta hai jab tak dono ko saans lena mushkil nahi pad gaya..

2 minute baad dono ke hoth ek dusre se alag hue to dono ke beech me ek dhaaga ban jata hai laar ka..Arun jaise hi saans bharta hai turant hi apna muh neeche le jata hai aur nipple ko muh me rakhke ek jor ki saans leta hai..

"Aah.ha.ha" Supriya ke muh se madhoshi bhari aah nikal jati hai..Aur wo apni chhati aur jyada Arun ke muh me force karte hue apni peeth ko ghumati hai...Uski jeebh bhi apne honthon par firti rehti hai..

Arun apni supriya di ko apni bahon me bhare bhare dono nipples bari bari choos raha hota hai. Ye uski jindagi ke first doodh the is baat se wo aur jyada uttejit ho raha tha..Usi bahon me Supriya aisi samai hui hai jaise koi bacha apne maan ki god me sama jata hai.. Arun ko is samay Supriya par bada pyar aa raha hota hai..

Arun 10 minute tak sirf ek nipple se dusre nipple par hi laga hua hota hai..Supriya ke muh se aah uh ki awazein nikal rahi hoti hain..

"Nipple ke alawa bhi dusri jagah kiss karne par bhi mujhe acha lagega..Waise mujhe koi problem nahi hai nipple kiss karne se.." Supriya bahut hi madhoshi bhari awaz me arun ke kaan ko muh se lick karke kehti hai...Turant hi uski ek tej aah nikal jati hai..Jaise hi arun ek nipple ko dobara choosta hai aur halka se use danton se kat leta hai jiske karan Supriya ka nipple aur jyada ful jata hai..

"Ab kiska intezaar hai chutiye...gira aur mar le choot...gaad de LUNDE oh sorry jhande"

Arun udhar dhyan ne dekar apne muh se nipple nikal kar dobara use apni jeeb bahar nikalkar hilata hai. Fir apna dhyan doodhon ke bich ki jagah par dalta hai jahan par halki si nami aa gayi hai aur apni jeebh se use chatne lagata hai. Wo dono dudhon ko chat chat kar geela kar deta hai aur aas paas ke area ko bhi..

Ab wo dheere dheere uski gardan ki taraf badhte hue supriya ki ek ek inch skin ko kiss karte karte aur sath me lick bhi karte chal raha hai. Wo uski chin ko muh me bhar ke choos leta hai..Aur ek hath se supriya ke nipple ko kheench kar marod deta hai..Bas supriya ke muh se "Oh Arunnnn..." nikalta hai aur wo aur jyada usme ghusne ki kosis karti hai aur madhosi me apna hath arun ke lund ki taraf le jati hai..jaise hi uska hath arun ke lund se touch hota hai waise hi arun ka lund ek tej jhatka marta hai aur arun ek aah ke sath kaske supriya ke baalon ko pakadkar apni taraf jhukata hai aur apni jeeb supriya ke khule muh me dalkar choosne lagta hai..Ek taraf uski jeebh supriya ke muh me apna kamal dikha rahi hai dusri taraf uske hath nipple ko marode ja rahe hain..Wo apni ek ungli ke pehle apne muh se geela karta hai fir supriya ke nipple par fira kar apne muh me daal ke choosne lagta hai fir side se supriya ke muh me dalta hai..Supriya kisi lollipop ki tarah uski ungli choosne lagti hai...Uska hath arun ke lund ko pakad leta hai aur use chadar ke upar se bhi usme se aag nikalte hue mahsoos hoti hai..

Supriya aur jyada Arun ke kareeb aati hai aur apni choot ko arun ke lund ke kareeb choone ki kosis karne lagti hai..ek hath se wo uske lund ko upar neeche kar rahi hai dusra hath uske gale me daal kar apni choot ko uske lund par ragad rahi hai..Usne neeche panty aur uske upar bahut hi patle kapde wala lower pehna hua hai..Itna jyada dhakke ke karan dono bistar par gir padte hain arun neeche hai supriya uske upar chad ke uske lund par apni choot ragad rahi hai.arun ke dono hath supriya ke balon me uljhe hue hain aur dono bahut hi awaz ke sath ek dusre ka raspan kar rahe hain.. Kamre me sirf slurp..aah..uhh ki awazein hi sunai de rahi hain.

Supriya ek hath se chadar hata deti hai aur Arun ke nange lund par apni geeli choot ragadane lagti hai. Lower ke upar se geelapan saaf saaf dekha ja sakta hai..Thodi der me dono kiss todte hain aur supriya ke muh se aah aur uh aur tej ho jata hai..

"oh..ohhh..aah...uhh..oh god...arunnnnn..." aur arun ke naam ke sath use realise hota hai wo itni jyada garm ho gayi thi uska bhi chootne wala hi hai..

"oh god...di you are so hot...di......diiii..im cummmingggg..." aur ye kehte kehte arun ka choot jata hai..Jaise hi supriya ko arun ka semen apne boobs pet par mahsus hota hai uska bhi orgasm ho jata hai dono itne kas ke ke dusre ko chumne lagte hain. Dono ek dusre ke shareer ko ek dusre ke andar sama lena chahte hain..

Supriya ki ungliyon me arun ka sperm lag jata hai aur Arun bina jane hi dhakke marne lagta hai jaise ki choot ke undar lund ko le jana chahta ho.."oh Arun...

nikalo..nikal do apne maal ko apni di ke upar....aah..uhhh...fad do apni di ki choot ko apne is land se..."

supriya apni uttejana me pata nahi kya kya bole chali jati hai..

Arun apna sir piche takiya me dal deta hai..uske sir me halke halke vishphot hone lagte hain aur uska virya bahar supriyan ke hath pet aur boobs ko dhak deta hai..

Supriya bhi nidhal hokar apna sir uski chhati par rakh ke dher ho jati hai.Dono ki sansein badi teji ke sath upar niche ho rahi hain...apni saason pe kaboo karne ke bad arun supriya ke chehre par se baalon ki lat ko hatata hai aur usko apne upar kheench ke pehle uske lips pe ek choti si kiss karta hai fir uske sir ko chumta hai.Supriya bhi uske sir aur gaal ko chumti hai aur dobara uske upar let jati hai..

thodi der bad supriya uthati hai uske galon ko chuti hai. Arun apni ankhein kholta hai to samne supriya ka muskurata hua chehra pata hai..

"Hi.." Arun kehta hai..

"Mujhe tumhe kuch batana hai.." Supriya muskurate hue kehti hai..

"You are pregnant.." Ye kehke Arun ek badi si smile deta hai..

Supriya haste hue uske mathe par marti hai aur kehti hai "No you idiot..Thoda serious hoke suno...That was so hot..Mujhe bahut acha laga..Maine life me pehli bar itni ache tarike se orgasm ko enjoy kiya hai..Aur tumne is tarike se kiss karna kaha se sekha..that was perfect and so erotic.."

"Mujhe bhi nahi pata di kahan si aapke sath bas ho gaya..You are so hot..Ab aage se porn dekh ke to mera kuch nahi hone wala.." arun halki hansi ke sath kehta hai..

Uske man me to party chal rahi thi..

"Arun suno..chahe kuch bhi ho jaye you are my brother and I love you..mujhe nahi lagta ki abhi jo kuch hamare beech hua wo galat tha..mujhe isse koi problem nahi hai lekin agar tumhe koi problem hai to hum aaj ke baad kabhi is bare me koi baat nahi karenge.."

"Fuck her"

Supriya apne aap ko side me kar ke ek hath uski chhati par rakh deti hai..

"Mujhe to nahi lagta main kabhi ye din bhool paunga.."Arun bahut hi badi smile ke sath bolta hai..

"Dekho arun maine bachpan se tumhara khayal rkha hai..tumhari har problem me maine tumhari madad ki aur mujhe usme koi problem bhi nahi hui..to aaj bhi mujhe khushi hui jab maine apne chhote bhai ki kisi problem ko solve karne me madad ki..mujhe khushi hai ki hamare beech ye hua.."Supriya uske seene ko sehlate hue boli.

"Di..main bhi kabhi mahsoos nahi karunga ki ye galat tha..Main sahi me aapse bahut jyada pyaar karta hun..and thankyou for this..and thankyou for being my first.."

"First?" Supriya confuse ho jati hai..

"My first hand job di..."Arun smile ke sath kehta hai aur supriya ke galon ko sehlata rehta hai..

"Are you ok..?" Supriya puchti hai

"Yep..Excellent"

"Agar dobara koi problem ho to tumhe pata hi hai main kaha milungi.."Supriya use ankh marte hue bolti hai.. aur bistar se uth ke apni tshirt pehnane lagti hai.."Ab mujhe jaldi neeche chale jana chahiye waise bhi abhi khana bhi nahi banaya hai..Aur soniya ko kuch shakh ho gaya to tumhara to jeena mushkil ho jayega...Haan ye alag baat hai agar tum usko apna ye hathiyar dikha do kuch aur mil jaye.." Supriya apne baalon ko suljhate hue kehti hai aur ankh mar ke kehti hai..

"Di...she is my sister"

"Aur main kya hun...?" supriya usko pillow marte hue kehti hai..

"Main us sense me nahi keh raha tha di..." Arun fir ek kiss karta hai supriya ko aur uska matha chum leta hai..

Supriya jaise hi uske room ke darwaje tak pahunchti hai Arun bolta hai..

"Di..maine jab kaha tha ki aap bahut hi beautiful ho and I love you...I really mean it..." Supriya uski or flying kiss karke chali jati hai..Aur arun sapno ki duniya me jane ki tayyari karne lagta hai..

Aur dheere dheere neend ki aghosh me chala jata hai..iss bar na koi joker..na koi accident bas suhani neend...

Iske baad arun 3 4 ghante tak aaraam se sota raha. Itni achi aur gehri neend thi ki jab supriya use lunch ke liye bulane aayi tab bhi nahi utha. To supriya ne use sone diya lekin uske upar chadhar udha ke chali gayi aur uske mathe ko chuma.

Arun apne sapnon ki duniya me khoya hua tha. Uske sapne me uske piche boobs aur chooton ki fauz uske piche padi thi aur wo betahasha bhaaga ja raha hai. Aur wo piche se use awaz bhi de rahe hain..

"ARUN"

"ARUN"

"ARUNN" Aarohi ne akhir tang akar uske hath pe teji se marte hue use uthane ki kosis ki...

"MAIN KASAM KHA KE KEHTA HUN MAINE SIRF KISS KIYA THA..." Arun bahut teji se uth ke bolta hai....Uska chehra paseene se bhig jata hai. Pehle to use kuch samajh me nahi aata lekin jab uske kaanon me bahut hi tej hansne ki awaz aur bister hilne ka abhas hota hai to wo apni ankhon ko mal ke charon or dekhta hai ki Aarohi apna pet pakadkar hans rahi hai...

Agle 2 3 minute tak kamre me keval Aarohi ke hasne ki hi awazein aa rahi thi..Akhir me usne hafte hue kaha.."That was really funny..."

Idhar Arun ke man me bhi hansi hi hansi ki awazein aa rahi thi..

"Beta tu pakka kisi din sapne ki wajah se mar jayega..hahahaha...Maine sirf kiss kiya tha...hahahahahhh"

"Haan...haan..very funny" Arun muh banate hue bola.

"Koi nahi...vaise sapna kiske bare me dekh rahe the.." Aarohi ne hansi ko rokte hue kaha..

"Joker..."

"Joker ka nam Aarohi tha..." Aur dobara hasne lagi..

"THAT'S NOT FUNNY.." Arun thoda embarrass hote hue bola..

Fir bhi Aarohi hasti rahi aur room ke darwaje ke paas pahunch ke boli.."Tumne lunch to kiya nahi to Sneha di ne snacks tayyar kare hain..jaldi aa jana.." Arun ke muh par ye bat sunte hi million dollar smile aa jati hai aur wo upar ki or dekhta hai to dikhayi deta hai ki Soniya apne muh se kissing ka scene ka display kar rahi hai aur uski or dekh ke hans rahi hai. Arun ek choti si ball jo ki bed ke pas table pe rakhi hai use uske upar fekta hai lekin tab tak Aarohi darwaja band karke bahar pahunch jati hai lekin dobara sir andar karke "Aahh...Soniyaaaa...hhihihih" Bol ke bhag jati hai..

"Ye tujhe pkka apna gulam banayegi...dekh liyo...bas sex slave banaye lekin.hihihi"

Is bat ko man se hatate hue aur sneha di ke khane ke bare me sochte hue arun fresh hokar clean clothes pehen kar niche jata hai to aarohi to sofe pe baith ke tv dekh rahi hai.. soniya phone pe chipki hui hai..sneha di kitchen me kuch bna rahi hain aur bathroom me pani chalne ki awaz aa rahi hai..

To arun pani pine kitchen me jata hai to dekhta hai ki Sneha kitchen ki top shelf se kuch utarne ki kosis kar rahi hai jiski wajah se uski gand ka shape kafi acha lagne lagta hai arun ko aur wo usi me kho jata hai..

"Arun.."

"Arun..hello maine kaha upar se sauce utar do ...dhyan kaha hain tumhara"

Arun ek dam se hosh me aata hai aur sauce utar kar sneha ko de deta hai lekin sauce dete dete uski najar sneha ke front par padti hai aur uski garmi badhne lagti hai..Sneha ka cleavage saaf saaf najar aa raha hai lekin sneha to sneha hai use in cheezon ke bare me jyada common sense nahi hai..

(yahan par main pehle hi clear kar doon ki sneha intelligent to bahut hai lekin iske karan thoda sa common sense and behaviour wali things halki si kam hai..)

Khair tab tak supriya kitchen me aati hai aur Arun ko koi cheez bathroom me utarne ke liye apne sath leke jati hai aur bathroom me pahunchte hi pehle uske honthon par ek choti si kiss fir kehti hai.."Maine tumhe jab us condition me sneha ke doodh dekhte dekha to main samajh gayi ki tum horny ho rahe ho..Arun main apne pyare bhai ko taqleef me kaise dekh sakti hun" Itna keh ke wo dobara arun ko kiss karne lagti hai.. aur uske hath Arun ki peeth sehlane lagte hain.. Uske hath arun ki peeth se hote hote Arun ke lund par pahunch jate hain aur uska hath padte hi Arun ka lund khada hone lagta hai..

"Arun tum aise nahi reh skte..Hum log to hamesha hi yahi rahenge..Is tarike se har ghante agar tum humko dekh kar garm ho jaoge to kaise chalega..You have to control..." Itna keh ke supriya arun ki belt kholne lagti hai...

Arun surprise ke sath bathroom ke gate ki taraf dekhta hai jaise hi supriya uske boxers ko niche karti hai arun ka lund uski ankhon ke samne aa jata hai. jise dekhkar supriya ki ankhon me chamak aa jati hai wo apne honthon par jeebh firati hai aur ek hath se lund ko upar uthati hai aur tatto ko muh me bharkar chusti hai...

"Di..ye..k..kkya..k.kkar .rr..rahi ho..Dusre. log..bbhi hain bahar..kkisi ne sun ll.lliya to...aahh" Arun sirf itna hi keh pata hai tab tak supriya use ek bar ankh marti hai aur uske lund ke andar ki side ko chatati hui upar supade tak jati hai use muh me bharkar ek jor ki chuski marti hai..jaise abhi us me se juice nikalega..fir usi supade par apne honth jor jor se ghumane lagti hai aur ek hath se lund ko age piche kar rahi hai aur dusre se tatto ko sehla rahi hai..madhoshi me arun ka hath supriya ke balon par chala jata hai aur wo unhe sehlane lagta hai...

Supriya fir pura lund muh me bharkar choosne lagti hai...

Ye dono apni masti me puri tarah khoye hue hote hain...

"Di..snacks tayyar hain jaldi aa jao...aur Ye Arun kahan chala gaya...Arrunnnnnn.."Sneha ki awaz aati hai..

Supriya turant hi Arun ka lund apne muh se jhatke se nikalti hai aur idhar udhar dekhti hai aur upar uth ke Arun ko ek lip kiss ke sath ankh mar ke chali jati hai..idhar arun ka chehra paseene se bheega hua hai..Wo dobara muh dhota hai..

"Kitni KLPD hogi teri be..."

Wo bhi chupke se bathroom se nikalta hai aur aake dining table par baith jata hai..

Sab log baithe hain siway Sneha ke wo bhi sab samaan lake arun ke samne wali chair par baith jati hai....Lekin aarohi bade dhyan se arun ki taraf dekhti hai to samajh jati hai ki kuch to gadbad hai..wo kuch nahi kehti...idhar Sneha sabko chowmeen serve karti hai..jitni bar wo uth kar age tarf jhukti hai utni bar arun ka gala sukh jata hai. Supriya ye dekhkar apni hasi ko control karti hai. Fir sab khana shuru karte hain..

 


7

सुप्रिया अरुण को और परेशान करने के लिए नूडल बिल्कुल ऐसे सक करती है जैसे कि अरुण का लंड और उसकी तरफ देखती रहती है. जैसे ही अरुण की नज़र उसके उपर पड़ती है उसका लंड हल्का सा झटका मारता है. वो पानी पीता है जिससे कुछ आराम मिले.

स्नेहा भी बेचारी बिना जाने उसे परेशान कर देती है. उसके फोर्क से 2 नूडल्स निकल के उसके क्लीवेज़ के अंदर गिर जाते हैं..आंड सिन्स इट्स स्नेहा (थोड़ा सा कामन सेन्स की कमी है) तो जो सॉस साइड बूब्स पे लग गयी है वो उंगली से उठा कर मूह मे उंगली डाल कर सक करने लगती है..स्नेहा बहुत ही सेक्सी लग रही है..एक तो वो चश्मिस उपर से बड़े बूब्स और उपर से वाइट टीशर्ट वित डीप नेक..अरुण की तो मानो सासें ही बंद हो गयी हैं..उसके बाद स्नेहा बिना किसी की ओर देखे अपनी 2 उंगलियाँ अपने क्लीवेज के अंदर डालती है और नूडल्स निकालने की कोसिस करती है जिससे और सॉस लग जाता है लेकिन वो थोड़ा ज़्यादा अंदर होते हैं तो वो बिना किसी शर्म के थोड़ा सा बूब्स को हिलाती है और नूडल्स निकाल कर मूह मे डाल लेती है फिर वही उंगली से सॉस को उठा कर उंगली सक करने लगती है..

इधर अरुण का मूह खुला हुआ है..और उसके लंड महाराज तो बिल्कुल तूफान खड़ा कर चुके हैं पॅंट मे...

"भाई तू ये वाली सॉस खा..."

उसके लंड मे दर्द होने लगा है बॉक्सर और जीन्स मे बंद रहने के कारण.. इधर अरुण को होश ही नही है कि स्नेहा को छोड़कर तीनों लोग उसे ही ध्यान से देख रहे हैं जैसे ही अरुण का ध्यान सोनिया की तरफ जाता है तीनों बहुत ही तेज हँसने लगते हैं..और सोनिया कहने लगती है "देखो..देखो..खूब देखो तुम्हारी ही तो बहेन है तुम नही देखोगे तो कौन देखेगा..पेर्वेर्ट" और तीनों हंसते रहते हैं इधर अरुण का चेहरा शर्म से लाल हो जाता है..वो अपनी नज़रें नीचे कर देता है..

स्नेहा को कुछ समझ मे नही आता वो अरुण से ही पूछती है "क्या हुआ?? ये लोग ऐसे हँस क्यू रहे हैं? क्या खाना अच्छा नही है अरुण?"

"आपकी डिश के सामने तो बेकार है दी..."

"नही दी..मस्त है.." अरुण बड़ी मुश्किल से बोलता है..

वो जल्दी से अपनी प्लेट सॉफ करके अपने कमरे मे चला जाता है पीछे से उसे सोनिया की चिढ़ाने वाली आवाज़ आती है "और नही देखना..यू परवर्ट.." अरुण बिना कुछ कहे अपने रूम मे जाकर दरवाजा बंद करके बेड पर लेट जाता है..और सोचता है इस बात पे पक्का सोनिया उसकी ले लेगी..

"वो तेरी ले इससे पहले तू उसकी ले ले"

इधर टेबल पर जब सब लोग स्नेहा को बताते हैं कि क्यू अरुण जल्दी उपर भाग गया तो वो सिर्फ़ ओह्ह्ह्ह कहती है फिर सब बातें करने लगते हैं..जब आरोही और सोनिया बताते हैं कि वो दोनो पार्टी करने क्लब जा रही हैं तो सुप्रिया को आइडिया आता है कि अरुण भी काफ़ी दिनो से बाहर नही गया तो वो दोनो से कहती है "अरे अरुण को भी ले जाओ..बहुत दिनो से वो भी बाहर नही गया है..उसका भी थोड़ा मूड ठीक हो जाएगा."

"दी किसे साथ मे पूछ की तरह भेज रही हो..मैं नही ले जाने वाली उसे कहो वो अपने फ्रेंड्स के साथ जाए.." सोनिया तपाक से बोल देती है.

"सोनिया..उसके सब फ्रेंड्स तो आउट ऑफ टाउन हैं. चले जाने दे ना..कौन सा वो तेरी जासूसी करेगा और उपर से अगर रात ज़्यादा हो गयी तो कोई मर्द भी होना चाहिए फॉर सेफ्टी आइ'म नोट सेयिंग यू कॅंट प्रोटेक्ट युवरसेल्फ बट स्टिल..प्ल्ज़्ज़ मेरे कहने पर मैं प्रॉमिस करती हूँ वो तुझे बिल्कुल भी डिस्टर्ब नही करेगा..प्ल्ज़्ज़" सुप्रिया सोनिया से कहती है

"ओके दी लेकिन सिर्फ़ आपके कहने पर..और उससे कहना ज़्यादा बहेन बहेन ना करे मेरे फ्रेंड्स के सामने..बड़ा आया" ये सुनके आरोही तो खुश हो जाती है कि अरुण भी चलेगा क्लब इधर सुप्रिया सोचती है कि अरुण को कैसे राज़ी करे..

अरुण के क्लब जाने से दो काम हो जाएँगे एक तो अरुण का थोड़ा मूड भी ठीक हो जाएगा बाहर निकलकर और सोनिया और आरोही की प्रोटेक्षन भी हो जाएगी..

ये सोचते सोचते सुप्रिया खाने लगती है..

थोड़ी देर मे सुप्रिया खाना ख़ाके अरुण के रूम मे जाती है तो अरुण कंप्यूटर पर नॉक करने पर वो दरवाजा खोलता है आंड सुप्रिया को देखकर एक स्माइल के साथ उसे अंदर खींचता है. और दरवाजा बंद करके उसके साथ बिस्तर पर लेट जाता है और दोनो किस करने लगते हैं. 2 3 दिन मिनिट के बाद सुप्रिया उसे अपने से अलग करती है और कहती है "आज रात तुम सोनिया और आरोही के साथ क्लब जा रहे हो..और मैं ना नही सुनना चाहती."सुप्रिया बिल्कुल एक बड़ी बहेन की तरह बोलती है.

"ले अच्छा ख़ासा चोदने का मौका था वो भी तेरी दी खुद ही कलपद कर रही हैं"

"दी..प्लीज़ मुझे नही जाना सोनिया के साथ कहीं..और बढ़िया है वो दोनो चले जाएँगे और स्नेहा दी पढ़ती ही रहती हैं अपन लोग थोड़ा टाइम साथ मे स्पेंड कर लेंगे..मान जाओ ना दी.." अरुण बड़े प्यार से 2 किस सुप्रिया के गाल पर करके कहता है.

"अरे नही मेरे शेर कुत्ते की तरह चाटना भी जानता है..हिहीही"

"नही कोई मस्का नही..एक तो तुम बहुत दिनो से बिल्कुल बाहर भी नही गये हो..अभी तुम्हारी उम्र है तो थोड़ा बहुत बाहर घुमो पार्टी करो.और उपर से तुम जाओगे उन दोनो के साथ तो मुझे ज़्यादा टेन्षन भी नही होगी.." सुप्रिया उसका हाथ पकड़कर बोली "और मैं कही भागी थोड़ी ना जा रही हूँ स्वीतू."

"दी आज पहली बार थोड़ी ना दोनो रात मे पार्टी करने जा रही हैं..प्लीज़ मत भेजो ना"

"ना मैने कह दिया तो कह दिया..हां अगर तुम उन दोनो के साथ जाओगे तो..तुम्हे एक सर्प्राइज़ गिफ्ट मिलेगा.." सुप्रिया ने एक स्माइल के साथ कहा और दो किस लीप पर कर दिए.

"सर्प्राइज़ मे चूत मिलेगी..हां बोल"

सर्प्राइज़ का नाम सुन के अरुण के चेहरे पर एक बड़ी स्माइल आ जाती है और वो पहले तो सुप्रिया का निचला होंठ अपने दाँतों से काट लेता है और फिर कहता है "ओके मैं चला जाउन्गा और एंजाय भी करूँगा लेकिन गिफ्ट शानदार होना चाहिए.." और दोनो किस करने लग जाते हैं. किस करते करते अरुण अपना हाथ टीशर्ट के उपर से ही सुप्रिया के दूध पर रख देता है और मसल्ने लगता है..

"ओह.ओह्ह्ह..लेट मी..." सुप्रिया बस इतना कहती है उठ के बिस्तर पर बैठ जाती है और अपनी टीशर्ट उतार देती है अंदर उसने ब्रा नही पहनी है और वो अरुण का जीन्स और बॉक्सर उतार देती है "बाथरूम वाला काम अधूरा छोड़ दिया था और मुझे कोई काम अधूरा छोड़ना पसंद नही.." और आँख मार के वो अपना मूह लंड के करीब ले जाती है. पहले तो वो बहुत सा थूक निकाल कर अरुण के लंड के सुपाडे पर निकालती है और फिर अपने दोनो हाथों से उसे रगड़ने लगती है..फिर पहले सुपाडे पर अपने होंठ लगा के उसे चूसने लगती है और साथ मे उस पर जीभ भी घुमाने लगती है..अरुण अपनी आँखें बंद करके आराम से बिस्तर पर लेट जाता है.. सुप्रिया उसका पूरा लंड इस बार मूह मे भर के चूसने लगती है और बहुत तेज़ी से सक करने लगती है..

"हां दी...ऐसे ही...ऐसे ही..अपने छोटे भाई को खूब प्यार करो..उम्म्म्म..आप दुनिया की बेस्ट दी हो...आह" अरुण आहें भर भर के ये कहने लगता है और एक हाथ से सुप्रिया के बाल सहलाने लगता है..थोड़ी देर ऐसे ही सकिंग करते करते अरुण सुप्रिया एक बार लंड से मूह हटाती है और अपना पूरा मूह खोल के दोबारा लंड को अपने गले तक ले जाती है इस बार उसके होंठ लंड की जड़ पर लग जाते हैं और अरुण को लगने लगता है कि उसका क्लाइमॅक्स होने वाला है..वो बिना किसी चेतावनी के मदहोशी मे सुप्रिया का सिर फोर्स्फुली अपने लंड पर बनाए रखता है और झटके मार के अपना स्पर्म उसके मूह मे उडेलने लगता है..इस हमले से सुप्रिया बिल्कुल अंजान थी तो उसकी साँस टूटने लगती है..मूह मे अंदर तक लंड होने से थोड़ा सा स्पर्म उसकी नाक के रास्ते बाहर आने लगता है और बाकी अंदर और बाकी मूह के किनारे से बाहर आने लगता है. सुप्रिया की आँखें चढ़ जाती हैं लेकिन उसके मूह से सिर्फ़ म्‍म्म्मम की आवाज़ें ही आती हैं.. इधर जब अरुण का क्लाइमॅक्स पूरा होता है तो उसे होश आता है कि सुप्रिया साँस के लिए तड़प रही वो जल्दी से सुप्रिया को अपने लंड से उपर उठाता है और उसकी पीठ सहलाने लगता है..

"सॉरी दी..मैने वो ...मुझे पता नही क्या हो गया था ..मेरा ध्यान ही नही गया आप पर सॉरी..."

सुप्रिया खाँसती है तो उसके मूह मे और सीमेन आ जाता है. वो उसे गटक जाती है और हाथ से नाक से निकला सीमेन पोछती है अपना सिर हिला कर कहती है.."कोई नही स्वीटी.. होता है.. तुमने तो मेरी जान ही ले ली थी लेकिन ऐसे मज़ा भी बहुत आया लेकिन आगे से साँस ले लेने देना" और वो दोबारा उसके लंड को सॉफ करने लगती है..थोड़ी देर मे दोनो कपड़े पहेन लेते हैं उसके बाद सुप्रिया अरुण को किस करके रूम से चली जाती है..

"तू पक्का आज उसे मार डालता"

"मेरी ग़लती थी..लेकिन इतनी नही पता नही मुझे क्या हो गया था बिल्कुल होश ही नही था..मैं तो जैसे हवा मे उड़ रहा था..खैर यार अब पार्टी मे उस सोनिया के साथ जाना पड़ेगा..अगर उसने उसके फ्रेंड्स के सामने मेरी इन्सल्ट करी तो,,," अरुण मन मे ही सोचता है.

"तो वही उसके दोस्तों के सामने उसे पटक के रेप कर देना साली का.."

"चूतियापा मत बको छोटी बहेन है मेरी ऐसा थोड़ी ना कर सकता हूँ उसके साथ.." अरुण सोचता है और ऐसे ही सोचते सोचते लेटा रहता है..

इधर 7 बजे आरोही अरुण के कमरे मे नॉक करके उसे बताती है कि तय्यार हो जाए..वो लोग आधे घंटे मे जाने वाले हैं..

तो अरुण तय्यार होके नीचे आ जाता है और टीवी देखते देखते उनका इंतेज़ार करने लगता है..

थोड़ी देर मे हील्स की आवाज़ आती है सीढ़ियों से तो वो पलट के देखता है तो तुरंत ही उसके लंड मे हरकत होने लगती है..

आरोही और सोनिया दोनो कमाल की लग रही थी..उसे लगा जैसे वो दोनो दुनिया की सबसे खूबसूरत लड़कियाँ हों..आरोही ने स्कर्ट ओर क्रॉप टॉप पहना था और सोनिया उसका तो कहना ही क्या..ब्लॅक कलर की ड्रेस थी जो उसके अप्पर थाइस तक ही थी जिसमे से उसकी मखमली चिकनी दूध सी सफेद जांघे सॉफ सॉफ चमक रही थी और उपर कंधे से स्ट्रॅप्स के ज़रिए पीछे जा रही थी..डीप नेक के कारण बहुत ही अच्छे से उसका क्लीवेज दिख रहा था.. लेफ्ट वाले दूध से ठीक पहले उसके एक तिल था जो उसे और कातिलाना बना रहा था...ये तिल उसकी तीनों बहनो सुप्रिया, स्नेहा और सोनिया के लेफ्ट साइड यानी बूब्स के थोड़ा सा उपर या कह सकते हैं बूब्स की जड़ पर था लेकिन आरोही और अरुण के नही था..

और आरोही वो भी गजब ढा रही थी..उसका क्रॉप टॉप उसकी नाभि से उपर ही था तो उसकी नाभि देख के और सपाट पेट देख के उसके लंड मे हल्का सा झटका लगा. उसकी स्कर्ट भी शॉर्ट थी पर सोनिया से तो नीचे ही थी..

अरुण को ऐसे देख कर आरोही को तो बड़ी हँसी आ रही थी पर सोनिया को गुस्सा आ रहा था वो दोनो नीचे आती हैं और सोनिया 2 बार चुटकी बजाती है अरुण के सामने और कहती है "ड्राइवर अरुंधती चलें.. किसी को तो छोड़ दे बहेन हैं हम तेरी.."सोनिया बहुत ही गुस्से से बोलती है..

तब तक सुप्रिया वहाँ आ जाती है "तय्यार हो गये तुम लोग..वॉवव..कितनी खूबसूरत लग रही हो दोनो..और अरुण तुम भी काफ़ी अच्छे लग रहे हो जाओ तो फिर लेकिन थोड़ा जल्दी आने की कोशिस करना.." सुप्रिया के कारण वो दोनो नही लड़ते और फिर सब बाहर निकल कर अपनी गाड़ी से रॉयल क्लब मे चले जाते हैं..

क्लब मे पहुँच कर सोनिया और आरोही तो अपने फ्रेंड्स के साथ मस्ती करने लगते हैं और अरुण बार पर पहुच कर कुछ ड्रिंक करने के लिए लेने लगता है..तब तक आरोही पास मे आती है और कहती है "आह सोनिया..." जो सिर्फ़ अरुण को सुनाई देता है लेकिन वो थोड़ा गुस्से से आरोही को देखता है तो आरोही कान पकड़ के अरुण के गले मे हाथ डाल कर वही पास मे बैठ जाती है "बोर तो नही हो रहे.. किसी से बात ही कर लो.. इतने अच्छे लोग हैं. इतना अच्छा क्लब है डॅन्स के लिए हज़ार लड़कियाँ मिल जाएगी किसी से पूछो तो .." आरोही उसे समझाते हुए पूछती है..

उसके इस तरीके से बात करने से अरुण के चेहरे पर स्माइल आ जाती है और वो हां मे सिर हिला देता है.."तुम जाओ सोनिया के साथ एंजाय करो मैं किसी को ढूंड ही लूँगा.." तो आरोही वहाँ से चली जाती है..

"तू साले ऐसी जगह आता क्यूँ नही देख..चारों तरफ चूत, मम्मे, गंदे आहह.."

अरुण ये बात मन मे सुन के सोचने लगता है.

 


वैसे अरुण पहले दो तीन बार क्लब आया था अपने फ्रेंड्स के साथ लेकिन उसे इतना शोरगुल पसंद नही था.. तो कम ही आता था..

ऐसे ही पार्टी बीत रही होती है सोनिया आरोही और उनके फ्रेंड्स डॅन्स कर रहे होते हैं..अरुण भी एक लड़की से ऐसे ही बात कर रहा होता है जो उसी के कॉलेज से होती है..

थोड़ी देर मे उसके कंधे पर एक हाथ आता है अरुण जब देखता है तो उसे हल्का सा गुस्सा आता है पर वो जाहिर नही करता..

ये हाथ है उसके कॉलेज के एक प्लेबाय विकी का.. विकी कॉलेज मे मशहूर है क्यू कि उसके बाप मिनिस्टर हैं और दिखता भी ठीक है पर दिल का बिल्कुल भी अच्छा नही है. स्मोकिंग, ड्रिंकिंग, ड्रग्स, लड़ाई वग़ैरह उसी के काम हैं. लड़कियाँ तो ऐसे बदलता है जैसे कपड़े. उसने एक बार सोनिया को प्रपोज़ किया था पर सोनिया ने मना कर दिया था. तबसे उसके दिल मे सोनिया को पाने की इच्छा और बढ़ गयी है. उसने ठान रखा था कि किसी ना किसी तरीके से सोनिया को हासिल करके ही रहेगा. अरुण भी ज़्यादा उसे पसंद नही करता लेकिन सिंपल हाई हेलो चलती है. विकी ने कई बार उसे अपने साथ पार्टी मे आने को कहा जिससे वो सोनिया के करीब या यूँ कहे कि उसके घर आना जाना शुरू कर सके लेकिन अरुण उससे दूर ही रहा..

तो उसे देखकर अरुण झुटि स्माइल देता है और हाई बोलता है..विकी अपने 5 6 दोस्तों के साथ है. दोस्त क्या उसके टुकड़ों पर पालने वाले कुत्ते कह सकते हैं..विकी को ये बात अभी 2 दिन पहले ही पता चली है कि अरुण और सोनिया की बिल्कुल नही बनती..तबसे उसके मन मे कुछ कुछ ना कुछ प्लान बन रहा होता है..

वो भी ही बोलकर अरुण के पास बैठ जाता है और सबके लिए ड्रिंक्स ऑर्डर कर देता है.

"और अरुण क्या हाल हैं..देख रहा हूँ अपनी दोनो बहनों के साथ आए हो..अब जब क्लब मे आए हो तो थोड़ी मस्ती वग़ैरह करो यूँ खाली बार पर क्यूँ बैठे हो.."

"नही विकी ऐसे ही ठीक हूँ...तुम बताओ आजकल किसके साथ हो.." अरुण ड्रिंक करते हुए बोलता है..

"कहाँ भाई मैं तो सिंगल हूँ आजकल साली कोई ढंग की लड़की पसंद ही नही आ रही.." विकी भी ड्रिंक करते हुए बोलता है..

"ढंग की लड़की..यहाँ इतनी लड़कियाँ हैं कोई तो पसंद होगी..किसी को भी पता लो वैसे भी तुम्हे तो कोई लड़की मना करेगी नही.." अरुण कहता है..

"हां भाई बात तो ठीक है लेकिन एक ने मना किया है.."

अरुण को ये बात नही पता है कि विकी ने सोनिया को प्रपोज़ किया था कभी..

"तुम्हे किस पागल ने मना कर दिया यार..??"

"भाई नाराज़ मत होना नाम लेने पर..."

"मैं क्यू नाराज़ होने लगा..बताओ ना??"

"सोनिया ने..मैं सही मे उसे पसंद करता हूँ.. मुझे पता है कि वो तुम्हारी छोटी बहेन है तो गुस्सा मत करना यार..." विकी भी मस्का लगा के कहता है..

ये बात सुन के अरुण थोड़ी देर के लिए खामोश हो जाता है...

"तेरी माँ का...साले अपनी बहेन पे नज़र डालता है.तेरी तो.."

अरुण को थोड़ा गुस्सा तो आता है लेकिन वो उसे पी जाता है.."कोई नही यार उसने मना कर दिया तो कर दिया..."

"भाई लेकिन आइ रियली लाइक हर..प्ल्ज़ यार कुछ कर ना शायद तेरे कहने से कुछ काम बन जाए बाकी तुझे किसी चीज़ की प्राब्लम नही होगी मेरे रहते..." विकी आँख मारता है और उंगलियों से पैसे का इशारा करता है..

अरुण दो मिनिट उसे देखता है फिर कहता है "विकी मैं तेरा दोस्त हूँ तो बता रहा हूँ छोड़ दे..मेरी बहेन के पीछे मत पड़ नही तो ठीक नही होगा..समझा" अरुण थोड़ा गर्म होके कहता है लेकिन शांत रहता है..

विकी समझ जाता है कि उसकी दाल नही गलने वाली. लेकिन उसकी ईगो हर्ट होती है कि दोनो भाई बहेन ने उसके ऑफर विकी के ऑफर को ठुकरा दिया वो मन मे ही उससे बदला लेने की सोचता है...

"भाई मैं तो मज़ाक कर रहा था..तू तो ख़ामाखाँ नाराज़ हो गया चल तू एंजाय कर मैं चलता हूँ..." विकी ये कहके चल देता है लेकिन वो पहले सोनिया के पास जाता है..माना कि सोनिया ने विकी का ऑफर ठुकरा दिया था लेकिन वो बात वग़ैरह कर लिया करती थी विकी से तो..फिर

"यार सोनिया..काफ़ी अच्छी लग रही हो आज.." विकी उसे डॅन्स फ्लोर से थोडा दूर ले जाके बोलता है..

"थॅंक्स..और बताओ क्या चल रहा है.." सोनिया हल्का सा मुस्कुरा के कहती है..

तो विकी बड़ा सीरीयस टोन मे "यार सोनिया तुझे एक बात बतानी थी.. लेकिन खैर छोड़.." वो बड़ी चालाकी से अपना जाल फ़ैलाने लगता है

"अरे बोल ना क्या बोलना है..कही फिर से प्रपोज़ तो नही करना" सोनिया बड़े फ्रॅंक्ली और हंस कर बोलती है..

"अरे नही भाई तेरे हाथों मार थोड़ी ना खानी है लेकिन बात तेरे भाई से रिलेटेड है..वो वहाँ मैं उससे बात कर रहा था तो तेरी बात चली तो...."विकी इतना कह के रुक जाता है..

"तो..बोल ना क्या बोला उसने" सोनिया थोड़ा गुस्से मे आने लगती है..

"नही ऐसे मैने सोचा तुझे बताना मस्ट है. खैर मुझे ये उम्मीद तो नही थी अरुण से लेकिन क्या कर सकते हैं..वो बोला कि सोनिया म..माल लग रही है ना..तो मैने उससे कहा कि भाई तेरी बहेन है तू ऐसे कैसे बोल सकता है उसके बारे मे..

तो वो बोला बहेन है तो क्या हुआ है तो लड़की ना दिन भर दूसरे लड़कों के साथ रंडी पना करती रहती है तो मैं उसे ऐसे देख लूँगा तो क्या फ़र्क पड़ता है..तो भाई मैं तो वहाँ से उसे बाइ बोलकर चला आया मैने सोचा तुझे बताना ज़रूरी था कि अपने घर मे इस बारे मे बात करो..अरुण का दिमाग़ ठीक नही आजकल... लेकिन मेरा नाम मत लेना मैं इस मामले मे नही पड़ना चाहता ओके बाइ.." विकी इतना कह कर दूर हट जाता है... लेकिन क्लब छोड़ कर नही जाता..

सोनिया का तो पूरा चेहरा लाल हो जाता है..उसके हाथों की मुठियाँ बंद हो जाती है वो बहुत तेज़ी से जाती है अरुण के पास और खींच कर एक थप्पड़ उसके गाल पर मारती है..अरुण के हाथ मे शॉट होता है वो छूटकर फर्श पर गिर जाता है..अरुण को भी गुस्सा आ जाता है लेकिन वो अपने आप को कंट्रोल करता है "व्हाट दा हेल ईज़ रॉंग वित यू...? क्‍या हुआ मारा क्यू"

"यू बस्टर्ड..अभी तो एक मारा है आगे दस मारूँगी..भाई हो के ऐसी बात करते शर्म नही आई.." सोनिया इतने गुस्से मे है कि उसकी साँसें उपर नीचे हो रही है..अरुण के आसपास के लोग ये ड्रामा देखने लगते हैं..तब तक आरोही भी आ जाती है और अरुण के चेहरे पर उंगलियों के निशान देख कर अपने चेहरे पर हाथ रख लेती है..फिर जब ध्यान से देखती है तो पता चलता है कि अरुण के होंठ से खून निकल रहा है क्यूंकी सोनिया ने उसी हाथ मे एक रिंग पहनी है जिसका नग थोड़ा सा पायंटेड है तो वो उसके होठ पर लग गया लेकिन अरुण को चोट का ध्यान ही नही है..

"कैसी बात..कहना क्या चाहती हो..आर यू मॅड??" अरुण चिल्ला के पूछता है.

"हां मैं ही तो पागल हूँ.. तुम तो दूध के धुले हो अपनी ही बहेन को गंदी नज़र से देखते शर्म नही आती.. अपनी ही छोटी बहेन को रंडी बोलने से पहले तो तुझे मर जाना चाहिए था..आइ विश मेरा कोई भाई ही नही होता...तेरे जैसे भाई से तो अच्छा है कि मेरा कोई भाई ही नही होता. तुझे भी मम्मी डॅडी के साथ ही उस आक्सिडेंट मे मर जाना चाहिए था. तू...भाई कहता है खुद को.." सोनिया इतना कहके पीछे मुड़ती है..

"सोनिया..मेरी बात सुनो..तुम गुस्से मे हो.. मैने ऐसा कुछ नही कहा..आइ डिड्न्ट से एनी र... वर्ड..मैं कभी ऐसा सोच भी नही सकता तुम्हारे बारे मे..." अरुण सोनिया का हाथ पकड़कर कहता है..

"हट.." सोनिया अपना हाथ छुड़ाती है और बाथरूम की तरफ चली जाती है आरोही अरुण की तरफ़ नम आँखों से देखती है तो अरुण उसे सोनिया के पीछे जाने के लिए इशारा करता है और खुद वहाँ से बाहर निकलकर पार्किंग मे कार लेके बाहर चला जाता है.. उसे गुस्सा तो बहुत आ रहा है सोनिया पर लेकिन माना कि वो दोनो लड़ते बहुत थे सोनिया और अरुण लेकिन दोनो के बीच कभी बात इतनी नही बढ़ी..अरुण ने कभी भी सोनिया पर हाथ उठाने के बारे मे सोचा तक नही था.. गुस्सा भले ही कितना आ रहा हो उसे सोनिया पर .. वो बिना कुछ सोचे समझे कार को फुल स्पीड से रोड पर दौड़ाए चले जा रहा है और आँखों से आँसू निकल रहे है..

उसे इस बात से बहुत ज़्यादा दर्द हुआ कि सोनिया किसी की भी बात पर भरोसा कर लेगी कि उसने सोनिया को रंडी कहा है..और उसका दिमाग़ ये सोचने लगता है कि आख़िर ये कहा किसने..फिर उसे ध्यान आता है कि वो कार तो ले आया है लेकिन सोनिया और आरोही कैसे आएँगी..तो वो आरोही के फोन पर मेसेज कर देता है कि वो घर जा रहा है वहाँ से ड्राइवर को भेज देगा कार लेके..

और वो घर की तरफ तेज़ी से जाने लगता है.. घर से थोड़ी ही दूर पर उसके पास कॉल आती है.. अरुण जब कॉल को देखता है तो वो आरोही की है तो वो कॉल रिसीव करता है..

"हां..आरोही क्या हुआ?क्यूँ....."

बस इतना ही कह पाया कि आरोही की आवाज़ बहुत ही डरी डरी सी घबराई सी आती है...

"भाई...वो.. वो सोनिया नही मिल रही कहीं...."

इतना सुनते ही अरुण के पैर ब्रेक्स पर दब्ते चले गये और गाड़ी जितनी तेज़ी से हवा को चीरती हुई जा रही थी उतनी ही तेज़ी से रुक भी गयी..

"व्हाट...क्या मतलब मिल नही रही..कहा हो तुम..तुम ठीक हो..क्या हुआ??" अरुण के चेहरे से परेशानी के भाव सॉफ देखे जा सकते थे..उसे समझ नही आया कि मिल नही रही का का क्या मतलब हो सकता है..उसके मन मे तरह तरह के ख्याल आने लगे.

"भाई अभी थोड़ी देर पहले मैने उसे विकी के साथ डॅन्स करते देखा था.." बस इतना कहते ही अरुण को पूरी बात समझ मे आ जाती है..

"तुम इस टाइम कहाँ हो..??" अरुण अपना ब्लूटूथ हेडसेट लगा के गाड़ी स्टार्ट करता है आंड टर्न लेके क्लब की तरफ़ निकलता है साथ मे आरोही से बात करता रहता है..

"मैं तो अभी भी क्लब के एंट्रेन्स पर ही हूँ मैने बाहर सेक्यूरिटी से पूछा तो उन्होने बताया अभी कोई बाहर नही आया है..मैं सोच रही कि नेक्स्ट फ्लोर पर..."

"तुम कहीं नही जाओगी..जहाँ हो वही रहो..मैं जल्दी से जल्दी आ रहा हूँ..सुना तुम कहीं मत जाना. और मुझे पूरी बात बताती रहो ओके..तुम तो ठीक हो ना?"

अरुण बहुत तेज कार को ले के आ रहा था.

एक बात और है जिसके कारण अरुण घबरा गया आरोही उसे भाई तभी कहती थी जब उसे कोई प्राब्लम हो या वो बहुत ज़्यादा घबरा गयी हो. उसमे और आरोही मे 5 मिनिट का डिफरेन्स था तो वो उससे छोटी थी लेकिन इतना डिफरेन्स कौन मानता है सो वो उसे नाम से ही बुलाती थी लेकिन प्राब्लम पर उसके मूह से डाइरेक्ट भाई ही निकलता था.

"मैं ठीक हूँ भाई..वो आपके पास से जाने के बाद मैं उसके पीछे बाथरूम मे गयी तो वो अपना मूह धो रही थी मुझे देख के बोली आइ डोंट वान्ट टू टॉक अबाउट हिम राइट नाउ...आंड उसको तो मैं देख ही लूँगी अब. तो मैने उससे ज़्यादा कुछ नही कहा लेकिन उसके पीछे तो लगी ही रही. फिर हम लोग बार पर आके ड्रिंक्स वग़ैरह करने लगे लेकिन सोनिया तो जैसे बॉटल पर बॉटल ही ख़त्म करे जा रही थी.. मैने रुकने को कहा तो मुझे बहुत गुस्से से देखने लगी तो मैने उसकी फ्रेंड्स से कहा इसे थोड़ा कंट्रोल करें तो वो लोग उसे पकड़कर डॅन्स फ्लोर पर ले गये जिससे उसका मूड थोड़ा ठीक हो जाए. मैं भी पीछे पीछे चली गयी. थोड़ी देर मे मेरी एक फ्रेंड ने मुझे बार पर बुलाया सो मैं वहाँ चली गयी मैं उससे बात कर ही रही थी कि मैने देखा विकी भी डॅन्स कर रहा है सोनिया के साथ और उसके कान मे कुछ बोला. मैने सोचा ऐसे ही कुछ होगा 5 मिनिट बाद मेरा ध्यान गया तो वहाँ नही थी. मैने उसके फ्रेंड्स से पूछा तो उन्हे भी नही पता मैने पूरा फ्लोर चेक कर लिया ईवन हर बाथरूम भी पर वो नही मिल रही भाई..वो सही तो होगी ना भाई..." आरोही के ये कहते कहते हल्के से आँसू निकल आए..

"ष्ह...आरोही मेरी बात सुनो. मैं आ रहा हूँ बस 2 टर्न और.. कुछ नही होगा उसे वो बिल्कुल सही होगी. होगी यही कहीं ओके वही रूको.." अरुण इतना कह के थोड़ी देर मे वहाँ पहुचता है. आरोही जैसे ही उसे देखती है वो जाके तुरंत ही उसके गले लग जाती है. अरुण उसे कस के एक बार हग करता है और फिर उससे अलग हो के कहता है चलो अंदर जाके वो मेन हॉल मे देखता है तो कहीं कोई नही दिखता जिसे पता हो तो वो आरोही को वही बार पर बिठा के खुद बाथरूम की तरफ जाता है.वहाँ भी उसे कुछ नही मिलता लेकिन एक दम से उसकी नज़र एक लड़के पर पड़ती है जो कि विकी के साथ अभी थोड़ी देर पहले था..

अरुण सीधे जाके दोनो हाथ से उसकी गर्दन पकड़कर उसे दीवार से लगाके एक घुटना उसके पेट पर मारता है और पूछता है "विकी कहाँ है? जल्दी बता नही तो यहीं मार डालूँगा..मुझे पता है कि वो यही है बता.." इतना कह के वो एक बार और उसके पेट पर वॉर करता है.

इतनी मार ख़ाके उस लड़के के मूह से थूक निकल आता है."बताता हूँ..बताता हूँ..मुझे मत मारो" लड़का अपने हाथ जोड़कर बोलता है "वो सेकेंड फ्लोर पर प्राइवेट चेंबर्स हैं तो चेंबर नंबर 4 मे है..सोनिया भी है..मुझे मत मारना मैने कुछ नही किया उसे.." अरुण 2 बार और उसे मारता है और उसे वही बाथरूम मे छोड़ कर उपर फ्लोर पर जाता है जाते जाते वो अपनी शर्ट की स्लीव्स को अपनी कोहनियों तक मोड़ लेता है. उसकी आँखों मे बिल्कुल खून उतर आता है..

चेंबर नंबर 4 के दरवाजे पर एक ज़ोर की लात पड़ती है और गेट अंदर की ओर खुल जाते हैं. जैसे ही अंदर के सीन पर अरुण की नज़र पड़ती है अरुण की आँखों का रंग बिल्कुल लाल हो जाता है. सोनिया एक सोफे पर पड़ी हुई है उसकी ब्लॅक ड्रेस उसकी कमर पर है और उसकी ग्रे पैंटी सॉफ दिख रही है. एक लड़का सोनिया के हाथ उसकी पीठ पर पकड़ा हुआ है. और एक ने सोनिया का मूह बंद कर के रखा है और एक अपनी जीन्स से अपना लंड निकाल कर सोनिया की तरफ बढ़ रहा है. अरुण उस लड़के की तरफ जाते जाते अपना मुक्का बना के उसके चेहरे पर मारता है. अरुण को कुश्ती के थोड़े बहुत पैंतरे उसके डॅड ने सिखाए थे तो उनका यूज़ करना उसे बखूबी आता था. उसका मुक्का खा कर वो लड़का पीछे गिर पड़ता है और अपने हाथ अपने चेहरे के आगे करके सॉरी सॉरी करके बोलने लगता है.

"भोंसड़ी के बहेन है मेरी..."

"भाई मत मारना. मैने अभी तक छुआ तक नही था..मुझे तो एक लड़के ने रुपये दिए थे इसके साथ ये करने के..सॉरी" अरुण उसके चेहरे पर दो मुक्के और मारता है और कहता है "लेकिन तू छुने तो जा रहा था ना कुत्ते..किसने दिए रुपये बता.." अरुण अपना मुक्का तान के पूछता है "भाई नाम नही पता यहीं मिला था 2 3 लड़के और थे उसके साथ हाँ नीला ब्लेज़र पहने हुए था..ये नीला ब्लेज़र विकी का डिस्क्रिप्षन दे रहा था अरुण उसे छोड़ के खड़ा होता है और एक लात मारता है उसके पेट पर.

इधर अपने दोस्त की ऐसी पिटाई देख कर बाकी दोनो लड़के नीचे भाग जाते हैं...

7

Supriya arun ko aur pareshan karne ke liye noodle bilkul aise suck karti hai jaise ki arun ka lund aur uski taraf dekhti rehti hai. Jaise hi arun ki najar uske upar padti hai uska lund halka sa jhatka marta hai. Wo pani pita hai jisse kuch aram mile.

Sneha bhi bechari bina jane use pareshan kar deti hai. Uske fork se 2 noodles nikal ke uske cleave ke andar gir jate hain..And since its Sneha (thoda sa common sense ki kami hai) to jo sauce side boobs pe lag gayi hai wo ungli se utha kar muh me ungli daal kar suck karne lagti hai..Sneha bahut hi sexy lag rahi hai..ek to wo chasmis upar se bade boobs aur upar se white tshirt with deep neck..arun ki to mano saasein hi band ho gayi hain..uske bad sneha bina kisi ki or dekhe apni 2 ungliyan apne cleavage ke andar dalti hai aur noodles nikalne ki kosis karti hai jisse aur sauce lag jata hai lekin wo thoda jyada andar hote hain to wo bina kisi sharm ke thoda sa boobs ko hilati hai aur noodles nikal kar muh me daal leti hai fir wahi ungli se sauce ko utha kar ungli suck karne lagti hai..

Idhar arun ka muh khula hua hai..aur uske lund maharaj to bilkul toofan khada kar chuke hain pant me...

"Bhai tu ye wali sauce kha..."

Uske lund me dard hone laga hai boxer aur jeans me band rehne ke karan.. Idhar arun ko hosh hi nahi hai ki sneha ko chhodkar teenon log use hi dhyan se dekh rahe hain jaise hi arun ka dhyan soniya ki taraf jata hai teenon bahut hi tej hasne lagte hain..aur soniya kehne lagti hai "Dekho..dekho..khoob dekho tumhari hi to behen hai tum nahi dekhoge to kaun dekhega..pervert" Aur teenon hanste rehte hain idhar Arun ka chehra sharm se laal ho jata hai..Wo apni najarein neeche kar deta hai..

Sneha ko kuch samajh me nahi aata wo Arun se hi puchti hai "Kya hua?? Ye log aise has kyu rahe hain? Kya khana acha nahi hai Arun?"

"Apki dish ke samne to bekar hai di..."

"Nahi di..mast hai.." Arun badi mushkil se bolta hai..

Wo jaldi se apni plate saaf karke apne kamre me chala jata hai piche se use soniya ki chidhane wali awaz aati hai "Aur nahi dekhna..you pervert.." Arun bina kuch kahe apne room me jakar darwaja band karke bed par let jata hai..Aur sochta hai is bat pe pkka soniya uski le legi..

"Wo teri le isse pehle tu uski le le"

Idhar table par jab sab log Sneha ko batate hain ki kyu Arun jaldi upar bhag gaya to wo sir Ohhhh kehti hai fir sab batein karne lagte hain..Jab aarohi aur soniya batate hain ki wo dono party karne club ja rahi hain to Supriya ko idea aata hai ki Arun bhi kafi dino se bahar nahi gaya to wo dono se kehti hai "Are Arun ko bhi le jao..Bahut dino se wo bhi bahar nahi gaya hai..uska bhi thoda mood thik ho jayega."

"Di kisse sath me pooch ki tarah bhej rahi ho..main nahi le jane wali usse kaho wo apne friends ke sath jaye.." Soniya tapak se bol deti hai.

"Soniya..uske sab friends to out of town hain. Chale jane de na..kaun sa wo teri jasoosi karega aur upar se agar raat jyada ho gayi to koi mard bhi hona chahiye for safety I'm not saying you cant protect yourself but still..plzz mere kehne par main promise karti hun wo tujhe bilkul bhi disturb nahi karega..plzz" Supriya soniya se kehti hai

"Okay di lekin sirf aapke kehne par..aur usse kehna jyada behen behen na kare mere friends ke samne..bada aaya" Ye sunke aarohi to khush ho jati hai ki Arun bhi chalega club idhar Supriya sochti hai ki Arun ko kaise razi kare..

Arun ke club jane se do kaam ho jayenge ek to Arun ka thoda mood bhi thik ho jayega bahar nikalkar aur soniya aur arohi ki protection bhi ho jayegi..

Ye sochte sochte supriya khane lagti hai..

Thodi der me supriya khana khake arun ke room me jati hai to Arun computer par Knock karne par wo darwaja kholta hai and Supriya ko dekhkar ek smile ke sath use andar kheenchta hai. Aur darwaja band karke uske sath bistar par let jata hai aur dono kiss karne lagte hain. 2 3 din minute ke baad supriya use apne se alag karti hai aur kehti hai "Aaj raat tum Soniya aur Aarohi ke sath club ja rahe ho..aur main naa nnahi sunana chahti."Supriya bilkul ek badi behen ki tarah bolti hai.

"Le achcha khasa chodne ka mauka tha wo bhi teri di khud hi klpd kar rahi hain"

"Di..plz mujhe nahi jaana soniya ke sath kahi..aur badhiya hai wo dono chale jayenge aur sneha di padhti hi rehti hain apne log thoda time sath me spend kar lenge..maan jao na di.." Arun bade pyar se 2 kiss supriya ke gaal par karke kehta hai.

"Are nahi mere sher kutte ki tarah chatna bhi janta hai..hihihi"

"Nahi koi maska nahi..ek to tum bahut dino se bilkul bahar bhi nahi gaye ho..Abhi tumhari umr hai to thoda bahut bahar ghumo party karo.aur upar se tum jaoge un dono ke sath to mujhe jyada tention bhi nahi hogi.." Supriya uska hath pakadkar boli "Aur main kahi bhagi thodi na ja rahi hun sweetu."

"Di aaj pehli baar thodi na dono raat me party karne ja rahi hain..plz mat bhejo na"

"Na maine keh diya to keh diya..Haan agar tum un dono ke sath jaoge tohhh..tumhe ek surprise gift milega.." Supriya ne ek smile ke sath kaha aur do kiss lip par kar diye.

"Surprise me choot milegi..haan bol"

Surprise ka naam sun ke arun ke chehre par ek badi smile aa jati hai aur wo pehle to supriya ka nichla honth apne danton se kaat leta hai aur fir kehta hai "ok main chala jaunga aur enjoy bhi karunga lekin gift shaandaar hona chahiye.." Aur dono kiss karne lag jate hain. Kiss karte karte arun apna hath tshirt ke upar se hi supriya ke doodh par rakh deta hai aur masalne lagta hai..

"oh.ohhh..let me..." Supriya bas itna kehti hai uth ke bistar par baith jati hai aur apni tshirt utar deti hai andar usne bra nahi pehni hai aur wo arun ka jeans aur boxer utar deti hai "Bathroom wala kaam adhura chhod diya tha aur mujhe koi kaam adhura chhodna pasand nahi.." Aur ankh mar ke wo apna muh lund ke kareeb le jati hai. Pehle to wo bahut sa thook nikal kar arun ke lund ke supaare par nikalti hai aur fir apne dono hathon se use ragadne lagti hai..Fir pehle supade par apne hoth dal ke use choosne lagti hai aur sath me us par jeebh bhi ghumane lagti hai..Arun apni ankhen band karke aram se bistar par let jata hai.. Supriya uska pura lund is baar muh me bhar ke choosne lagti hai aur bahut teji se suck karne lagti hai..

"Haan di...aise hi...aise hi..apne chhote bhai ko khoob pyar karo..ummmm..aap duniya ki best di ho...ahhh" Arun aahein bhar bhar ke ye kehne lagta hai aur ek hath se supriya ke baal sehlane lagta hai..Thodi der aise hi sucking karte karte arun supriya ek bar lund se muh hatati hai aur apna pura muh khol ke dobara lund ko apne gale tak le jati hai is bar uske honth lund ki jad par lag jate hain aur arun ko lagne lagta hai ki uska climax hone wala hai..wo bina kisi chetawani ke madhosi me supriya ka sir forcefully apne land par banaye rkhta hai aur jhatke mar ke apna sperm uske muh me udelene lagta hai..Is hamle se supriya bilkul anjaan thi to uski saans tutne lagti hai..muh me andar tak land hone se thoda sa sperm uski naak ke raste bahar aane lagta hai aur baki andar aur baki muh ke kinare se bahar aane lagta hai. Supriya ki ankhen kadh jati hain lekin uske muh se sirf mmmmm ki awazein hi aati hain.. Idhar jab Arun ka climax pura hota hai to use hosh aata hai ki supriya saans ke liye tadap rahi wo jaldi se supriya ko apne lund se upar uthata hai aur uski peeth sehlane lagta hai..

"Sorry di..maine wo ...mujhe pata nahi kya ho gaya tha ..mera dhyan hi nahi gaya aap par sorry..."

Supriya khansti hai to uske muh me aur semen aa jata hai. Wo use gatak jati hai aur hath se naak se nikla semen pochti hai apna sir hila kar kehti hai.."koi nahi sweety.. hota hai.. tumne to meri jaan hi le li thi lekin aise maja bhi bahut aaya lekin aage se saans le lene dena" aur wo dobara uske lund ko saaf karne lagti hai..Thodi der me dono kapde pehen lete hain uske baad supriya arun ko kiss karke room se chali jati hai..

"Tu pkka aaj use maar dalta"

"Meri galti thi..lekin itni nahi pata nahi mujhe kya ho gaya tha bilkul hosh hi nahi tha..main to jaise hawa me ud raha tha..khair yaar ab party me us soniya ke sath jana padega..agar usne uske friends ke samne meri insult kari to,,," Arun man me hi sochta hai.

"to wahi uske doston ke samne use patak ke rape kar dena sali ka.."

"Chutiyapa mat bako chhoti behen hai meri aisa thodi na kar skta hun uske sath.." Arun sochta hai aur aise hi sochte sochte leta rehta hai..

Idhar 7 baje aarohi arun ke kamre me knock karke use batati hai ki tayyar ho jaye..wo log adhe ghante me jane wale hain..

To arun tayyar hoke niche aa jata hai aur tv dekhte dekhte unka intezaar karne lagta hai..

Thodi der me heels ki awaz aati hai seedhiyon se to wo palat ke dekhta hai to turant hi uske lund me harkat hone lagti hai..

Aarohi aur Soniya dono kamaal ki lag rahi thi..Use laga jaise wo dono duniya ki sabse khoobsurat ladkiyan hon..Aarohi ne skirt or crop top pehna tha aur Soniya uska to kehna hi kya..Black colour ki dress thi jo uske upper thighs tak hi thi jisme se uski makhmali chikni doodh si safed janghen saaf saaf chamak rahi thi aur upar kandhe se straps ke jariye piche ja rahi thi..Deep neck ke karan bahut hi ache se uska cleavage dikh raha tha.. Left wale doodh se thik pehle uske ek til tha jo use aur katilana bana raha tha...Ye til uski teenon behon Supriya, Sneha aur Soniya ke left side yani boobs ke thoda sa upar ya keh sakte hain boobs ki jad par tha lekin Aarohi aur Arun ke nahi tha..

Aur aarohi wo bhi gajab dha rahi thi..Uska crop top uski naabhi se upar hi tha to uski naabhi dekh ke aur sapat pet dekh ke uske lund me halka sa jhatka laga. Uski skirt bhi short thi par soniya se to niche hi thi..

Arun ko aise dekh kar Aarohi ko to badi hasi aa rahi thi par soniya ko gussa aa raha tha wo dono niche aati hain aur soniya 2 bar chutki bajati hai arun ke samne aur kehti hai "Driver arundhati chalein.. kisi ko toh chhod de behen hain hum teri.."Soniya bahut hi gusse se bolti hai..

Tab tak supriya waha aa jati hai "Tayyar ho gaye tum log..woww..kitni khoobsurat lag rahi ho dono..aur Arun tum bhi kafi acche lag rahe ho jao to fir lekin thoda jaldi aane ki kosis karna.." Supriya ke karan wo dono nahi ladte aur fir sab bahar nikal kar apni gadi se Royal Club me chale jate hain..

Club me pahunch kar soniya aur aarohi to apne friends ke sath masti karne lagte hain aur arun bar par pahuch kar kuch drink karne ke liye lene lagta hai..Tab tak aarohi paas me aati hai aur kehti hai "aah soniya..." jo sirf Arun ko sunai deta hai lekin wo thoda gusse se Aarohi ko dekhta hai to Aarohi kaan pakad ke arun ke gale me hath dal kar wahi paas me baith jati hai "Bor to nahi ho rahe.. kisi se baat hi kar lo.. itni ache log hain. itna acha club hai dance ke liye hajar ladkiyan mil jayegi kisi se pucho to .." Aarohi use samjhate hue puchti hai..

Uske is tarike se baat karne se Arun ke chehre par smile aa jati hai aur wo haan me sir hila deta hai.."Tum jao soniya ke sath enjoy karo main kisi ko dhund hi lunga.." To aarohi wahan se chali jati hai..

"Tu sale aisi jagah aata kyu nahi dekh..charon taraf choot, mamme, gande aahhhh.."

Arun ye bat man me sun ke sochne lagta hai.

Waise arun pehle do tin bar club aaya tha apne friends ke sath lekin use itna shorgul pasand nahi tha.. To kam hi aata tha..

Aise hi party beet rahi hoti hai soniya aarohi aur unke friends dance kar rahe hote hain..Arun bhi ek ladki se aise hi baat kar raha hota hai jo usi ke college se hoti hai..

Thodi der me uske kandhe par ek haath aata hai arun jab dekhta hai to use halka sa gussa aata hai par wo jahir nahi karta..

Ye haath hai uske college ke ek playboy Vicky ka.. Vicky college me mashoor hai kyu ke uske baap minister hain aur dikhta bhi thik hai par dil ka bilkul bhi acha nahi hai. Smoking, drinking, drugs, ladai wagairah usi ke kaam hain. Ladkiyan to aise badalta hai jaise kapde. Usne ek baar Soniya ko propose kiya tha par soniya ne mana kar diya tha. Tabse uske dil me soniya ko paane ki ichcha aur badh gayi hai. Usne thaan rkha tha ki kisi na kisi tarike se soniya ko haasil karke hi rahega. Arun bhi jyada use pasand nahi karta lekin simple hi hello chalti hai. Vicky ne kai bar use apne sath party me aane ko kaha jisse wo soniya ke kareeb ya yu kahe ki uske ghar aana jaana shuru kar ske lekin Arun usse dur hi raha..

To use dekhkar Arun jhuti smile deta hai aur hi bolta hai..Vicky apne 5 6 doston ke sath hai. dost kya uske tukdon par palne wale kutte keh skte hain..vicky ko ye baat abhi 2 din pehle hi pata chali hai ki arun aur soniya ki bilkul nahi banti..tabse uske man me kuch kuch na kuch plan ban raha hota hai..

Wo bhi hi bolkar arun ke pas baith jata hai aur sabke liye drinks order kar deta hai.

"Aur arun kya haal hain..Dekh raha hun apni dono behnon ke sath aaye..Ab jab club me aaye ho to thodi masti wagairah karo yun khali bar par kyu baithe ho.."

"Nahi vicky aise hi thik hun...tum batao aajkal kiske sath ho.." Arun drink karte hue bolta hai..

"Kahan bhai main to single hun aajkal sali koi dhang ki ladki pasand hi nahi aa rahi.." Vicky bhi drink karte hue bolta hai..

"Dhang ki ladki..yahan itni ladkiyan hain koi to pasand hogi..kisi ko bhi pata lo waise bhi tumhe to koi ladki mana karegi nahi.." Arun kehta hai..

"Haan bhai baat to thik hai lekin ek ne mana kiya hai.."

Arun ko ye baat nahi pata hai ki Vicky ne Soniya ko propose kiya tha kabhi..

"Tumhe kis pagal ne mana kar diya yaar..??"

"Bhai naraz mat hona naam lene par..."

"Main kyu naraaz hone laga..batao na??"

"Soniya ne..main sahi me use pasand karta hun.. mujhe pata hai ki wo tumhari chhoti behen hai to gussa mat karna yaar..." Vicky bhi maska laga ke kehta hai..

Ye baat sun ke Arun thodi der ke liye khamosh ho jata hai...

"Teri maa ka...sale apni behen pe nazar dalta hai.teri to.."

Arun ko thoda gussa to aata hai lekin wo use pi jata hai.."Koi nahi yaar usne mana kar diya to kar diya..."

"Bhai lekin I really like kar..plz yaar kuch kar na shayad tere kehne se kuch kaam ban jaye baki tujhe kisi cheez ki problem nahi hogi mere rehte..." Vicky ankh marta hai aur ungliyon se paise ka ishara karta hai..

Arun do minute use dekhta hai fir kehta hai "Vicky main tera dost hun to bata raha hun chhod de..Meri behen ke piche mat pad nahi to thik nahi hoga..samjha" Arun thoda garm hoke kehta hai lekin shant rehta hai..

Vicky samajh jata hai ki uski daal nahi galne wali. Lekin uski ego hurt hoti hai ki dono bhai behen ne uske offer Vicky ke offer ko thukara diya wo man me hi usse badla lene ki sochta hai...

"Bhai main to majak kar raha tha..tu to khamkha naraj ho gaya chal tu enjoy kar main chalta hun..." Vicky ye kehke chal deta hai lekin wo pehle soniya ke pas jata hai..mana ki soniya ne vicky ka offer thukara diya tha lekin wo baat wagairah kar liya karti thi vicky se to..fir

"Yar soniya..kafi achi lag rahi ho aaj.." Vicky use dance floor se thoda dur le jake bolta hai..

"Thanx..aur batao kya chal raha hai.." Soniya halka sa muskura ke kehti hai..

To vicky bada serious tone me "Yar soniya tujhe ek baat batani thi.. lekin khair chod.." Wo badi chalaki se apna jaal failane lagta hai

"Are bol na kya bolna hai..kahi fir se propose to nahi karna" Soniya bade frankly aur hans kar bolti hai..

"Are nahi bhai tere hathon mar thodi na khani hai lekin baat tere bhai se related hai..wo waha main usse baat kar raha tha to teri baat chali to...."vicky itna keh ke ruk jata hai..

"to..bol na kya bola usne" Soniya thoda gusse me aane lagti hai..

"Nahi aise maine socha tujhe batana must hai. khair mujhe ye ummeed to nahi thi arun se lekin kya kar skte hain..wo bola ki Soniya m..maal lag rahi hai na..To maine usse kaha ki bhai teri behen hai tu aise kaise bol skta hai uske bare me..

To wo bola behen hai to kya hua hai to ladki na din bhar dusre ladkon ke sath randi pana karti rehti hai to main use aise dekh lunga to kya fark padta hai..to bhai main to waha se use bye bolkar chala aaya maine socha tujhe batana jaruri ki apne ghar me is bare me baat karo..arun ka dimag thik nahi aajkal... lekin mera naam mat lena main iss mamle me nahi padna chahta ok bye.." vicky itna keh kar dur hat jata hai... lekin club chhodkar nahi jaata..

Soniya ka to pura chehra laal ho jata hai..Uske hathon ki muthiyan band ho jati hai wo bahut teji se jati hai arun ke pas aur khinch kar ek thappad uske gal par marti hai..arun ke hath me shot hota hai wo chootkar farsh par gir jata hai..Arun ko bhi gussa aa jati hai lekin wo apne aap ko control karta hai "What the hell is wrong with you...? kYa hua maara kyu"

"You bastard..abhi to ek maara hai aage dus marungi..bhai ho ke aisi baat karte sharm nahi aayi.." Soniya itne gusse me hai ki uski saansein upar niche ho rahi haii..Arun ke aaspas ke log ye drama dekhne lagte hain..tab tak Aarohi bhi aa jati hai aur arun ke chehre par ungliyon ke nishan dekh kar apne chehre par hath rakh leti hai..Fir jab dhyan se dekhti hai to pata chalta hai ki arun ke honth se khoon nikal raha hai kyunki soniya ne usi hath me ek ring pehni hai jiska nag thoda sa pointed hai to wo uske hoth par lag gaya lekin arun ko chot ka dhyan hi nahi hai..

"Kaisi baat..Kehna kya chahti ho..are you mad??" Arun chilla ke puchta hai.

"Haan main hi to pagal hun.. tum to dudh ke dhule ho apni hi behen ko gandi najar se dekhte sharm nahi aati.. apni hi chhoti behen ko randi bolne se pehle to tujhe mar jana chahiye tha..i wish mera koi bhai hi nahi hota...tere jaise bhai se to acha hai ki mera koi bhai hi nahi hota. Tujhe bhi mummy daddy ke sath hi us accident me mar jana chahiye tha.thoo...bhai kehta hai khud ko.." Soniya itna kehke piche mudti hai..

"Soniya..meri baat suno..tum gusse me ho.. maine aisa kuch nahi kaha..I didnt say any r... word..main kabhi aisa soch bhi nahi skta tumhare bare me..." Arun soniya ka hath pakadkar kehta hai..

"Hat.." Soniya apna hath chudati hai aur bathroom ki taraf chali jati hai aarohi arun ki tarf nam ankhon se dekhti hai to arun use soniya ke piche jane ke liye ishara karta hai aur khud waha se bahar nikalkar parking me car leke bahar chala jata hai.. Use gussa to bahut aa rahi hai soniya par lekin mana ki wo dono ladte bahut the soniya aur arun lekin dono ke bich kabhi baat itni nahi badhi..arun ne kabhi bhi soniya par hath uthane ke bare me socha tak nahi tha.. gussa bhale hi kitni aa rahi ho use soniya par .. wo bina kuch soche samjhe car ko full speed se road par daudaye chale ja raha hai aur ankhon se ansun nikal rahe hai..

use is baat se bahut jyada dard hua ki soniya kisi ki bhi baat par bharosa kar legi ki usne soniya ko randi kaha hai..aur uska dimaag ye sochne lagta hai ki akhir ye kaha kisne..fir use dhyan aata hai ki wo car to le aaya hai lekin soniya aur aarohi kaise aayengi..to wo aarohi ke phone par message kar deta hai ki wo ghar ja raha hai waha se driver ko bhej dega car leke..

Aur wo ghar ti taraf teji se jane lagta hai.. Ghar se thodi hi door par uske paas call aati hai.. arun jab call ko dekhta hai to wo Aarohi ki hai to wo call receive karta hai..

"Haan..aarohi kya hua?kyun....."

Bas itna hi keh paaya ki aarohi ki awaz bahut hi dari dari si ghabrai si aati hai...

"Bhai...wo.. wo soniya nahi mil rahi kahin...."

Itna sunate hi arun ke pair breaks par dabte chale gaye aur gadi jitni teji se hawa ko chirti hui ja rahi thi utni hi teji se ruk bhi gayi..

"What...kya matlab mil nahi rahi..kaha ho tum..tum thik ho..kya hua??" Arun ke chehre se pareshani ke bhav saaf dekhe ja skte the..Use samajh nahi aaya ki mil nahi rahi ka ka kya matlab ho skta hai..uske man me tarah tarah ke khyal aane lage.

"Bhai abhi thodi der pehle maine use vicky ke sath dance karte dekha tha.." Bas itna kehte hi arun ko puri baat samajh me aa jati hai..

"Tum is time kahan ho..??" Arun apna bluetooth headset laga ke gadi start karta hai and turn leke club ki tarf nikalta hai sath me aarohi se baat karta rehta hai..

"Main to abhi bhi club ke entrance par hi hun maine bahar security se pucha to unhone bataya abhi koi bahar nahi aaya hai..main soch rahi ki next floor par..."

"Tum kahi nahi jaogi..jaha ho wahi raho..main jaldi se jaldi aa raha hun..suna tumne kahi mat jana. Aur mujhe puri baat batati raho okay..tum to thik ho na?"

Arun bahut tej car ko le ke aa raha tha.

Ek bat aur hai jiske karan Arun ghabra gaya Aarohi use bhai tabhi kehti thi jab use koi problem ho ya wo bahut jyada ghabra gayi ho. Usme aur Aarohi me 5 minute ka difference tha to wo usse chhoti thi lekin itna difference kaun manta hai so wo use naam se hi bulati thi lekin problem par uske muh se direct bhai hi nikalta tha.

"Main thik hun bhai..wo aapke paas se jane ke baad main uske piche bathroom me gayi to wo apna muh dho rahi thi mujhe dekh ke boli I dont want to talk about him right now...and usko to main dekh hi lungi ab. to maine usse jyada kuch nahi kaha lekin uske piche to lagi hi rahi. Fir hum log bar par aake drinks wagairah karne lage lekin Soniya to jaise bottle par bottle hi khatm kare ja rahi thi.. maine rukne ko kaha to mujhe bahut gusse se dekhne lagi to maine uski friends se kaha ise thoda control karein to wo log use pakadkar dance floor par le gaye jisse uska mood thoda thik ho jaye. Main bhi piche piche chali gayi. Thodi der me meri ek friend ne mujhe bar par bulaya so main waha chali gayi main usse bat kar hi rahi thi ki maine dekha Vicky bhi dance kar raha hai soniya ke sath aur uske kaan me kuch bola. Maine socha aise hi kuch hoga 5 minute bad mera dhyan gaya to waha nahi thi. Maine uske friends se pucha to unhe bhi nahi pata maine pura floor check kar liya even har bathroom bhi par wo nahi mil rahi bhai..wo sahi to hogi na bhai..." Aarohi ke ye kehte kehte halke se aansun nikal aaye..

"Shh...aarohi meri baat suno. Main aa raha hun bas 2 turn aur.. Kuch nahi hoga use wo bilkul sahi hogi. Hogi yahi kahin ok wahi ruko.." Arun itna keh ke thodi der me waha pahuchta hai. Aarohi jaise hi use dekhti hai wo jake turant hi uske gale lag jati hai. Arun use kas ke ek bar hug karta hai aur fir usse alag ho ke kehta hai chalo andar jake wo main hall me dekhta hai to kahi koi nahi dikhta jise pata ho to wo aarohi ko wahi bar par bittha ke khud bathrooms ki taraf jata hai.waha bhi use kuch nahi milta lekin ek dum se uski najar ek ladke par padti hai jo ki vicky ke sath abhi thodi der pehle tha..

Arun seedhe jake dono hath se uski gardan pakadkar use deewar se lagake ek ghutna uske pet par marta hai aur puchta hai "Vicky kaha hai? jaldi bata nahi to yahi maar dalunga..mujhe pata hai ki wo yahi hai bata.." Itna keh ke wo ek bar aur uske pet par war karta hai.

Itni maar khake us ladke ke muh se thook nikal aata hai."Batata hun..batata hun..mujhe mat maro" Ladka apne hath jodkar bolta hai "Wo second floor par private chambers hain to chamber no 4 me hai..Soniya bhi hai..mujhe mat marna maine kuch nahi kiya use.." Arun 2 bar aur use marta hai aur use wahi bathroom me chhodkar upar floor par jata hai jate jate wo apni shirt ki sleeves ko apni kohniyon tak mod leta hai. Uski ankhon me bilkul khoon utar aata hai..

Chamber no 4 ke darwaje par ek jor ki laat padti hai aur gate andar ki or khul jate hain. Jaise hi andar ke scene par Arun ki najar padti hai Arun ki ankhon ka rang bilkul laal ho jata hai. Soniya ek sofe par padi hui hai uski black dress uski kamar par hai aur uski grey panty saaf dikh rahi hai. Ek ladka soniya ke hath uske peeth par pakda hua hai. Aur ek ne soniya ka muh band kar ke rakha hai aur ek apni jeans se apna lund nikal kar soniya ki taraf badh raha hai. Arun us ladke ki taraf jate jate apna mukka bna ke uske chehre par marta hai. Arun ko kushti ke thode bahut paintare uske dad ne sikhaye the to unka use karna use bakhubi aata tha. Uska mukka kha kar wo ladka piche gir padta hai aur apne hath apne chehre ke aage karke sorry sorry karke bolne lagta hai.

"Bhonsdi ke behen hai meri..."

"Bhai mat marna. maine abhi tak chhua tak nahi tha..mujhe to ek ladke ne rs diye the iske sath ye karne ke..sorry" Arun uske chehre par do mukke aur marta hai aur kehta hai "Lekin tu chhune to ja raha tha na kutte..kisne diye rupaye bataaaa.." Arun apna mukka tan ke puchta hai "Bhai nam nahi pata yahi mila tha 2 3 ladke aur the uske sath han Neela blazer pehne hue tha..Ye neela blazer vicky ka description de raha tha arun use chhod ke khada hota hai aur ek laat marta hai uske pet par.

Idhar apne dost ki aisi pitai dekh kar baki dono ladke niche bhag jate hain...

 


अरुण सोनिया के पास जाके उसकी ड्रेस सही करता है. सोनिया जैसे होश मे ही नही है वो बस रोए जा रही है..जैसे ही अरुण उसकी ड्रेस सही करता है वो धक्का देने की कोशिश करती है.."ष्ह...सोनिया मैं हूँ अरुण..कुछ नही हुआ सब ठीक है चलो.." सोनिया ध्यान से उसे देखती है फिर उसके गले लग के रोने लगती है अरुण अपना ब्लेज़र उतार कर उसे पहनाता है और उसे लेके चेंबर से बाहर आने लगता है.

हुआ ये था कि विकी के दोस्त जिसे अरुण ने मारा उसने विकी को कॉल कर दी कि अरुण आ गया है. विकी ने पहले ही पैसे दे के सोनिया का रेप होते देखता और उसकी वीडियो बनाने वाला था लेकिन कॉल आते ही वो रूम से चला गया और दूसरे चेंबर मे छुप गया..इधर चेंबर से निकलते टाइम अरुण ने उस लड़के की तरफ ध्यान नही दिया जिसे उसने मारा उसने किसी को कुछ मेसेज किया था..

नीचे जाके अरुण आरोही को बुला कर सोनिया को संभालने लगता है. आरोही भी सोनिया को पकड़ लेती है. और जैसे ही वो लोग एग्ज़िट होने वाले होते हैं म्यूज़िक स्टॉप हो जाता है. इसे किस्मत कह ले ये डीजे की मेहेरबानी की म्यूज़िक स्टॉप होने के कारण अरुण पीछे से आती चीख को सुन लेता है तेज़ी से पलटके बैठ जाता है एक मुक्का आने वाले लड़के के पेट मे मारता है.. लेकिन उसके पीछे जब उसकी नज़र जाती है तो अरुण का गला सूख जाता है..पीछे से 25 30 लड़के आ रहे होते हैं..अरुण समझ जाता है यहाँ बहादुरी दिखाने का कोई फ़ायदा नही वो आरोही और सोनिया की तरफ भागता है जिससे वो उनके साथ एग्ज़िट हो जाए लेकिन पीछे से उसे कोई पकड़कर घुमा देता है. घूमते टाइम भी अरुण एक लात उसके मारता है लेकिन 2 3 लड़के और उसके उपर हावी हो जाते हैं थोड़ी देर तक तो अरुण उन्हे अपने लातों और मुक्को से रोकता है लेकिन फिर उसके सिर पर कोई मुक्का मारता है तो उसका सिर घूमने लगता है और वो फ्लोर पर गिरने लगता है. फिर तो उसकी बॉडी मुक्कों और लातों का टारगेट बन जाती है. अरुण अपने आप को बचाने के लिए अपने हाथ पैर उपर उठा कर बचने की कोसिस करता है लेकिन कोई फ़ायदा नही होता. उसकी नज़र धीरे धीरे धुंधली हो जाती है उसके कानों मे आवाज़ें हल्की होती जा रही है..फिर एक दम से लाइट्स बंद हो जाती हैं..और अरुण की सब सेन्सस काम करना बंद कर देते हैं..

अरुण की आँखों के आगे अंधेरा छा गया.

एक बहुत तेज सीने मे दर्द. कैसा दर्द है ये?? व्हाट हॅपंड?? अरुण अपने जगह पर हिला तो उसकी आ निकल आई दर्द की वजह से..

उसके आँखों के आगे अभी भी अंधेरा है. सिर बहुत भारी लग रहा है. सीने और पेट मे दर्द. सारी बॉडी ऐसी लग रही जैसे किसी ने वॉशिंग मशीन मे डाल कर धो डाली हो..

फिर उसे धीरे धीरे पहले की बातें याद आने लगी..क्या हुआ वहाँ?? लड़ाई?? लोगो का उसे लात घूँसे मारना?? किसी का रोना..?? तुम्हे आक्सिडेंट मे मार जाना चाहिए था?? थप्पड़..आक्सिडेंट का सीन..जोकर की हँसी..और ये सब सोचते सोचते उसे बहुत ही ज़्यादा डर लगने लगा. उसकी मुट्ठी बंद होके बेड पर धँसने लगी और वो छटपटाने लगा. उसकी पूरी बॉडी पसीने मे भीगने लगी लेकिन उसका दर्द कम नही हुआ. कोई उसे हिला रहा है.. बहुत दूर से एक आवाज़ आ रही है..अरुण..अरुण...अरूउन्न्ञन्..

वो सपने से बाहर आता है..उठने की कोशिश करता है तो दर्द होता है सीने मे और पसलियों मे..लेकिन कोई उसे उठने नही दे रहा. वो आँखें खोलने की कोशिश करता है तो आँखों तक दर्द होता है..थूक निगलता है तो गला भारी सा लगता है और फिर दर्द की एक लहर उसकी बॉडी मे दौड़ जाती है..धीरे धीरे उसकी आँखें खुलती हैं..सामने 2 लोग खड़े हैं..पता नही कौन चेहरा सॉफ नही दिख रहा. एक उसके उपर थोड़ा झुक के उसे उठाने नही दे रहा.. वो अपनी आँख को सही करने के लिए हाथ को उपर उठाने की कोशिश करता है लेकिन हाथ उठाते ही दोबारा दर्द की लहर दौड़ जाती है लेकिन वो दर्द सह के भी आँख के पास अपनी उंगलियाँ ले जाता है..लेकिन ऐसा लग रहा जैसी उसकी आँखें काफ़ी बड़ी हो गयी हों.. आँख पर हाथ रखते ही वहाँ भी पेन होता है..फिर धीरे धीरे चेहरे सॉफ होते हैं..

"क्या जाग रहा है..??"

"सही तो है ना??"

"वो ठीक है दी.." ये आवाज़ें..हां ये तो उसकी बहनों की आवाज़ें हैं..फिर जब वो आँख खोलता है तो सामने सुप्रिया स्नेहा और आरोही दूसरी तरफ खड़ी हुई होती हैं. और उन सबके चेहरे उतरे हुए होते हैं जैसे काफ़ी टाइम से सोई ना हों..

वो कुछ कहने के लिए जैसे ही होंठ खोलता है तो फिर दर्द से आह निकल जाती है..होंठ तो ऐसे लग रहे थे जैसे 2 3 किलो के हों और स्वेल भी हो गये हैं

"क्या हुआ..??" बस इतना ही उसके मूह से निकलता है..

"मैने कहा था ना बिल्कुल ठीक है.." स्नेहा सुप्रिया को बोलती है..

"हां ओके..वैसे कैसा लग रहा है अब.." सुप्रिया पूछती है..

"आह..पेन हो रहा है हर जगह..हुआ क्या था और मैं हूँ कहाँ.." अरुण साइड मे देखने की कोसिस करता है लेकिन फिर दर्द की वजह से नही देखता..

"भाई गजब ढा दिया तुमने.. क्या फाइट थी.. क्या पंचस क्या ऐक्शन.. वो तो उन लोगों ने तुम पर एक साथ हमला कर दिया और वो एक ने पीछे से मारा तो तुम गिर पड़े वहाँ..लेकिन उससे पहले भी तुमने उनके 3 4 तो गिरा ही दिए..मज़ा आ गया फाइट देख के.. तुम्हारे बेहोश होने के बाद बाहर से सेक्यूरिटी वाले बॉक्सर्स आ गये लड़ाई रोकने मेरे कहने पर लेकिन तब तक उन लोगो ने तुम्हे काफ़ी चोट पहुँचा दी थी.. उसके बाद मैं और सोनिया तुम्हे कार मे घर ले आए.. तुम्हे तो होश भी नही था.. रात मे ही डॉक्टर अंकल को बुलाया तो उन्होने ड्रेसिंग वग़ैरह कर दी है 3 4 दिन मे आराम होने को कहा है.. आंड तुम सुप्रिया दी के कमरे मे हो.. हम लोगो मे इतनी ताक़त नही है कि तुम्हे उठा कर उपर ले जा सकें..लेकिन भाई तुम्हारी फाइट से मज़ा आ गया.." आरोही बड़ी तेज़ी से बोलकर उसके बेड पर बैठकर मुस्कुराने लगी...

"हे भगवान इस लड़की को तो मज़ा आ रहा है.. हमारा भाई इतनी मार खा कर आया है..2 पसली टूटी हैं.. चेहरा सूज गया है..एक आँख काली पड़ गयी है..होंठ मे स्वेल्लिंग है.. जगह जगह चोट के. निशान हैं.और इसे मज़ा आ रहा है.." सुप्रिया ने हल्के से आरोही के सिर पर मारते हुए कहा

अरुण को तब जाके हर बात ध्यान आई..उसकी और सोनिया की लड़ाई फिर बाकी का ड्रामा. लेकिन सोनिया नही दिख रही.."स..सोनिया कहाँ है?? ठीक तो है ना.." अरुण थोड़ा सा परेशान हो के सुप्रिया से पूछता है..

ये सुन कर सुप्रिया का चेहरा हल्का सा उतर जाता है..

अरुण जब सुप्रिया का चेहरा देखता है तो उसका दिल बैठ जाता है..

"मैं यहाँ हूँ भाई..सुबुक" एक बहुत ही घुटि सी आवाज़ उसके कानों मे पड़ती है उसके कानों मे और वो अपने सिर के पीछे के साइड बड़ी तकलीफ़ के साथ देखता है तो सोनिया उसी कंडीशन मे जिस कंडीशन मे उसने कल उसे छोड़ा था यानी अभी भी अपनी ब्लॅक ड्रेस मे है लेकिन अरुण का ब्लेज़र वो अभी भी पहने हुए है और बहुत ही कस कर उस ब्लेज़र को अपने हाथों से पकड़ा हुआ है..जैसे कोई उससे उस ब्लेज़र को छीन लेगा.. उसके चेहरे से सॉफ सॉफ झलक रहा है कि वो बहुत ज़्यादा रोई है..सूखे आँसुओं के निशान उसके चेहरे पर सॉफ देखे जा सकते हैं.. लेकिन सोनिया को ठीक देख कर अरुण को आराम बहुत मिला. उसके दिल से डर और भारीपन एक दम ख़त्म हो गया..

"वेल..मैं तो ठीक हूँ..और तुम..." अरुण ने पूछा और अपना हाथ आगे बढ़ाकर उसकी तरफ देखा..

 
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