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मेरी बहु की मस्त जवानी complete

बहु आयी और बोली

सरोज - बाबूजी यहाँ कुछ अजीब सी स्मेल आ रही है

शमशेर - बेटा मेरे हाथ से आ रहा होगा।। (शमशेर जिस हाथ से अपना लंड मसल रहा था। उसी हाथ को बहु की नाक के पास लगा दिया)

सरोज - हाँ अंकल आपके हाथ में से स्मेल आ रही है।। किस चीज़ की स्मेल है? अजीब सी है कुछ जानी पहचानी भी। लेकिन स्मेल अच्छी है।।

शमशेर - बेटा ये स्मेल मेरे फैक्ट्री में लगे केमिकल की है। तुम्हे अच्छा लगता है तो तुम रोज मेरा हाथ स्मेल कर सकती हो।।

सरोज - ओके अंकल

बहु को शमशेर के लंड की महक लेते देख मेरा लंड फडकने लगा।।लंच करते वक़्त मैं टेबल के नीचे एक हाथ से लंड निकाला। बहु के टाइट ब्लाउज में चूचि देख मुठ मारने लगा और फर्श पे पानी निकाल दिया।

सूबह से बहु मेरा और शमशेर दोनों के लंड का पानी निकाल चुकी थी।।
 
शाम को बहु रेड कलर की साड़ी पहने किचन में बर्तन धुल रही थी। मैं किचन में उसके पीछे एक टीशर्ट और लोअर पहने चाय की प्यालि लिए खड़ा बहु से बातें कर रहा था।।

सरोज - (अपनी साड़ी के पल्लू को कमर में खोसति हुई।।) बाबूजी।। आज रात शमशेर अंकल यहीं रुकेंगे?

मै - हाँ बहु।।

सरोज - ठीक।। अगर ऐसा है तो मैं आपका कमरा ठीक कर देती हूं, उनको वहीँ कमरे में सोने दिजिये और आप मेरे कमरे में सो जाइये।

मै - ठीक है बहु जैसा तुम्हे ठीक लगे।

सरोज - कमरा थोड़ा साफ़ करना पडेगा।।चीज़ें बिखरी पड़ी हैं बहुत दिन से हमलोगों ने साफ़ नहीं किया। मैंने बर्तन धूल लिए हैं आप अगर मेरी थोड़ी सी मदद कर दें तो मैं जल्दी से कमरा साफ़ कर दूँगी।

मै - (बहु के खुली चिकनी कमर को देखते हुए।) हाँ बहु क्यों नही।।

किचेन से निकल कर मैं और बहु मेरे कमरे में जाते हैं और बिखरे पड़े सामान को ठीक करने लगते है।।

सरोज - बाबूजी।। यहाँ रखे पुराने सामान को मैं ऊपर वुडेन कवर में रख देति हूं, बहुत सारा स्पेस हो जायेगा कमरे में।

मै - हाँ बहु रुको मैं कोई चेयर लगता हूं, जिसपे तुम चढ़ के सामान रख सको।

सरोज - अच्छा बाबूजी।।

मैन डाइनिंग हॉल से एक प्लास्टिक के चेयर लाया और कमरे में बेड के पास लगा दिया।

मैन - बहु तुम इस चेयर पे चढ़ जाओ और बॉक्स ऊपर रख दो।। और संभल के चढ़ना बेटी।।

सरोज - जी बाबूजी।

बहु ने एक बार फिर अपनी साड़ी के पल्लू को अपनी कमर में बांधे और अपनी पूरी तरह से खुली नवेल को बेशरमी से दिखाती हुई चेयर पे चढ़ गई।

सरोज - बाबूजी।। मुझे होल्ड करिये मैं गिर जॉंउगी, मैं कोशिश करती हूँ बॉक्स को ऊपर ड़ालने की।।

मै बहु के बिलकुल सामने था, उसकी नवेल मेरे फेस के पास थी। मैंने अपने दोनों हाथों से बहु के बड़ी सी हिप्स को घेर लिया, और अपनी हथेली से बहु के नर्म मुलायम गांड को साड़ी के ऊपर से दबा दिया।

बहु - आह बाबूजी।। थोड़ा ऊपर को पुश कीजिये मेरे हाथ लगभग पहुच गया है।

मैने बहु के बड़ी गांड को कस्स के दबाते हुवे ऊपर उठा दिया और अपना फेस बहु के डीप सॉफ्ट नवेल(नाभि) में चिपका लिया।। मेरे गाल और होठ बहु के नवेल से टच हो रहे थे।। मैंने बहाने से अपने होठ बहु के नवेल पे रगड दिए।

अभि २ मिनट हे हुए थे की तभी, पावर कट हो गया।। शाम हो चुकी थे और इस वजह से कमरे में अँधेरा छा गया।

सरोज - हो गया बाबूजी, अब मुझे धीरे से नीचे उतारिये प्लीज।। मुझे कुछ दिखाई नहीं दे रह था।।

मै - ठीक है बहु।। (कहते हुए मैंने हाथ के घेरे को ढीला किया और बहु को नीचे आने दिया।। )

अंधेरे में मैं अपने हाथ धीरे-धीरे बहु के गांड से होती हुये उसकी नंगी कमर को महसूस कर पा रहा था। सामने के तरफ मेरे फेस उसकी नवेल से होता हुआ अब उसके बूब्स के काफी क़रीब आ चूका था। नीचे आते वक़्त बहु के घुटने (कनी) से मेरा लोअर और अंडरवियर नीचे की तरफ खिच गया और मेरा खड़ा लंड पूरी तरह से बाहर निकल गया।

एससे पहले की मैं संभल पाता बहु चेयर से उतारते ही अपना बैलेंस खो बैठी और जमीन पे झुकते ही उसके नर्म होठ मेरे लंड से कस के रगड खा गई।

मैने अँधेरे में उसके गीले होठ को साफ़ अपने लंड पे महसूस किया।।। मैंने बिना कोई मौका गवाये अँधेरे का फ़ायदा उठाते हुये जानबूझ कर बैलेंस खोने का नाटक किया और एक हाथ से लंड का स्किन नीचे खोल बहु के मुह में डाल दिया। बहु की गरम साँस और मुह के अंदर के लार (सैल्विया) का स्पर्श पा कर मेरे लंड से थोड़ा सा पानी निकल गया।।।
 
सरोज - बाबुजी।।। (कहते हुए अपने हाथ मेरी टाँगो पे रख दिया और लंड को अपने मुह में और अंदर जाने से रोक लिया)

मै - ओह बहु।।।सॉरी (कहते हुए अपने लंड को बहु के मुह से निकाल लिया।।)

लेकिन इतना सब होने के बाद मेरे अंदर इतना कण्ट्रोल नहीं था की मैं रुक पाता।। लंड बहु के मुह से बाहर आते ही फच-फच के आवाज के साथ ढेर सारा पानी मेरे लंड से निकल गया। मेरे लंड का पानी बहु के चेहरे, गर्दन और शायद बूब्स पे पड़े और बाकी फर्श पर।। बहु का चेहरा मेरे लंड के पानी से भीग गया था।।
 
मैने अपने लंड को अंदर अपने लोअर में छिपा लिया।

थोडी देर के लिए कमरे में सन्नाटा था हमदोनो में से किसी ने कुछ नहीं कहा। बहु ने अपने आँचल से अपना चेहरा साफ़ किया और उठ के खड़ी हो गई। मैं भी बहु से बिना नज़रें मिलाये बिस्तर के तरफ बढ़ गया। बहु ने अँधेरे में फर्श पे गिरी मेरे मुठ को देखने की कोशिश की और फिर बगल के कमरे से एक कपडा लाकर फर्श पोंछने लगी। मैं वहीँ खड़ा बहु को देखता रहा। बहु ने चुप्पी तोड़ने के लिए मुझसे रिक्वेस्ट की।।

सरोज - बाबूजी।। ये चेयर हॉल में रख दिजिये न प्लीज

मै - अच्छा बहु।।

मैने चेयर वापस हॉल में रख दिया।। (मैंने थोड़ी राहत की साँस लिया, जो कुछ भी हुआ उसके रिएक्शन से साफ़ नज़र आ रहा था की बहु को कोई फ़र्क़ नहीं पड़ा और अब वो नार्मल हो चुकी थी।
 
रात को मैं, बहु और शमशेर डिनर करने के बाद बिस्तर पे बैठे बातें कर रहे थे।।।

शमशेर - लगता है आज सारी रात पावर नहीं आएगी, बहु को कैंडल के रौशनी में डिनर बनाने में काफी तकलीफ हुई होगी न?

सरोज - नहीं अंकल मुझे कोई प्रॉब्लम नहीं हुई, इस मोहल्ले में शम को लाइट जाना तो आम बात है।

मै - हाँ शमशीर, हमारे घर का पावर बैकअप भी ख़राब पड़ा है कल मैं उसे बाजार में ठीक कराने की कोशिश करता हूं, देखो अब तो सारे कैंडल भी ख़तम हो जाएंगे। बहु और कैंडल हैं?

सरोज - नहीं बाबूजी।। और कैंडल नहीं है।

शमशेर - (मुझे आँखों से इशारा करते हुए।। ) शायद बहु बहुत ज़्यादा कैंडल यूज करती है।। (शमशेर जानबूझ कर डबल मीनिंग में बातें की)

सरोज - हाँ अंकल मैं तो बहुत सारे कैंडल यूज करती हू।।। कैंडल भी पतले हैं तो ज्यादा देर तक नहीं चलते।। मोटा होता तो अच्छा होता

मैन - बहु तुम्हे मोटा कैंडल चाहिए तो मैं ला दूंगा।

शमशेर - मेरा कैंडल बहुत मोटा है बहु तुम्हे चाहिए तो मैं दे दूंगा।। मेरा मतलब मुझे घर से लाना होगा।।

शमशेर - वैसे बहु तुम कैंडल के अलावा और क्या-क्या यूज करती हो? (शमशेर फिर से गन्दी टॉक करते हुए।।)

सरोज - अंकल जी में।। ज्यादा तो कैंडल ही यूज करती हूँ कभी कभी किचन में अपना मोबाइल भी यूज कर लेती हूं।। उसमे टोर्च है न।।

शमशेर - बहु।।। तुम बाबूजी का मोबाइल क्यों नहीं यूज करती।।? वो बड़ा भी है और उसकी रौशनी भी ज्यादा है।

शमशेर - वैसे बहु तुम्हे मोबाइल से ज्यादा मजा आता है या कैंडल से?? मेरा मतलब आसान क्या है?

शमशेर इस बार काफी खुल के डबल मीनिंग क्वेश्चन किया, और मुझे लगा शायद बहु को भी समझ आने लगा की क्या ये डबल मीनिंग बातें हो रही है।। लेकिन फिर भी बहु शायद जानबूझ कर बोली।।

सरोज - अंकल जी।। मुझे तो कैंडल यूज करने में ज्यादा मजा आता है।।

बहु के मुँह से ऐसी बात सुन कर मेरा लंड खड़ा हो चूका था।। मैंने भी अपनी तरह से डबल मीनिंग जोड़ने के कोशिश की।।

मै - बहु क्या तुम रात में भी कैंडल उसे करती हो।।।?

सरोज - हाँ बाबूजी मैं रात में मोटा कैंडल यूज करती हूँ ताकि देर तक चले।। वरना मुझे अँधेरे में डर लगता है।

मै - कोई बात नहीं बहु आज तो मैं तुम्हारे साथ ही सोउंगा तो आज तुम्हे किसी मोटे कैंडल की जरुरत नहीं पडेगी।।

कुछ देर बात करने के बाद शमशेर सोने चला गया। मैं और बहु बैडरूम में आ गये।। बैडरूम में आने के साथ ही बहु ने मेरी तरफ प्यासी नज़रों से देखते हुए एक मादक अंगडाई ली। मैंने अपनी नज़र बहु के चेहरे से हटा कर उसके बड़े बूब्स को देखने लगा, उसकी अंगडाई देख कर ऐसा लगता था मानो बहु के दोनों चूचियां ब्लाउज का बटन तोड़ के बाहर आ जाएंगी। बहु ने अपना पल्लू निचे गिरा दिया और बोली।।

सरोज - बाबूजी आज कितनी गर्मी है कमरे में।।

मै बहु के नाभि देखने लगा, पल्लू उतरने से उसकी पेट पूरी नंगी हो चुकी थी और उसके गोरे पेट् और कमर अन्धेर में भी चमक रहे थे। मैंने भी अपनी टीशर्ट उतारते हुए कहा।।

मै - हाँ बहु बहुत गर्मी है।। ( बहु के नंगी पेट देखकर लोअर में मेरा लंड खड़ा था।।)

सरोज - पता नहीं कब लाइट आएगी।। (बहु ने अपने ब्लाउज के ३ बटन खोल दिए )

मै - (मैं बहु की क्लीवेज को देखता रहा।।उसकी चूचियां ब्रा के अंदर से बाहर निकल आयीं थी।।) बहु।। तुम साड़ी में बहुत अच्छी लगती हो।।

सरोज - सच बाबूजी।। क्या अच्छा लगता है?
 
मै - सबकुछ बहु।। तुम्हारी पसंद के कलर, तुम्हारी साड़ी पहनने का स्टाईल।। तुम्हारी साड़ी में बॉडी सबकुछ अच्छा लगता है

सरोज - साड़ी पहनने के स्टाइल? कौन सी स्टाइल?

मै - वही बहु जो तुम साड़ी को नवेल के नीचे बाँधती हो और टाइट भी

सरोज - हाँ बाबू जी मुझे साड़ी नवेल के नीचे पहनना अच्छा लगता है।। मनीष भी मुझे हमेशा नवेल दिखाने को कहते है

मै - बहु तुम्हारी नवेल बहुत ही अच्छी दिखती है।। ऐसे नवेल तो किसी एक्ट्रेस की भी नहीं है बहु।

सरोज - (अपनी साड़ी को नवेल के और नीचे करते हुये।। ) बाबूजी।। ऐसा क्या है मेरी नवेल में ?

मै - (बहु के पास जा कर अपने दोनों हाथों से उसकी नंगी कमर को पकड़ते हुए।।) बहु तुम्हारी नवेल कितने डीप और बड़ी है।। मुझे हमेशा से ऐसी नवेल पसंद थे।। बहु जब तुम कॉलेज में होगी तब तुम्हारी नवेल के तो बहुत सारे दिवाने होंगे न?

सरोज - (हँसते हुए।। ) होंगे बाबूजी मुझे नहीं मालूम।। अभी तो मुझे इतना पता है की मेरी नवेल को मेरे पति और ससुर दोनों बहुत पसंद करते है

बहु अब अपनी साड़ी और ब्लाउज उतार चुकी थी, वो मेरे सामने सिर्फ ब्रा और पेटीकोट में खड़ी थी।

सरोज - बाबूजी मैं कपडे बदल लेती हूं।। आप भी चेंज कर लिजीये ( बहु ने अपने पेटीकोट की डोर खीचते हुए कहा।)

सरोज - ओह बाबूजी।। ये पेटीकोट खुल नहीं रहि।। लगता है गाँठ पड़ गई है।।

मै - (बेड पे बैठे हुए।।।) इधर आओ बहु मैं तुम्हारी पेटीकोट खोल देता हूँ।

सरोज - जी बाबूजी (मेरे क़रीब आ जाती है)

मैने कुछ देर कोशिश की।।

मै - अरे बहु लगता है गाँठ पड़ गई है ये नहीं खुलेगी। तुम ऐसे ही सो जाओ।। सुबह खोल दूँगा

सरोज - नहीं बाबूजी मैं गर्मी से मर जाऊँगी।। आप प्लीज खोल दिजिये ना

मै - ठीक है बहु।। मैं अपने दांतो से कोशिश करता हू

बहु को अपने और पास खीच कर मैं बहु के पेटीकोट को अपने होठ और दाँत से खोलने लगा। ऐसा करते वक़्त मैं कई बार बहु के नाभि भी चाट लिया।

मै- खुल गई बहु।। ( मैंने बहु के पेटीकोट को मैंने नीचे गिरा दिया)

मै बहु के नंगी जाँघो को छूने लगा।।
 
मै - बहु तुम सच ही कहती थी तुम्हारी जाँघो पे बिलकुल बाल नहीं है। (मैं बहु के थाइस पे हाथ फिराते हुए कहा)

सरोज - हाँ बाबुजी।।। (बहु के आवाज़ थोड़ी बदली सी थी।। जैसे उसे कुछ हो रहा हो)

मै बहु के इनर थाइस को सहलाते हुए उसकी बुर(चूत) के काफी करीब ऊँगली लगा दिया।। मुझे वहां पे बहुत गिला सा लगा।। बहु शायद गरम थी।

मै - अरे बहु तुम्हे तो पसीना (स्वेटिंग) हो रहा है।।

सरोज - आआआहहह नहीं बाबूजी ये स्वेटिंग नहीं है।।

मै - फिर क्या है बहु?

सरोज - बाबूजी वो बस ऐसे ही, कुछ नहीं छोड़िये न।। (बहु मेरा हाथ हटा कर बिस्तर पे एक पतले चादर के अंदर लेट गई)

मुझे महसूस हुआ की शायद बहु गरम हो गई है और वो पसीना नहीं बहु के बुर का पानी था। मैं बहु के बगल में उसी चादर में केवल लोअर पहने लेट गया।

मै - बहु क्या तुम ऐसे भीगी पैन्टी पहन कर सोओगी ?? ऐसे तो तुम्हारे थाइस के बीच रशेस आ जाएंगे

सरोज - ओह।।। बाबूजी क्या भीगी पैन्टी पहनने से रशेस हो जाती है।।?

मै - हाँ बहु।। और फिर स्किन डिजीज भी हो जाते है।।

सरोज - क्या सच में बाबूजी।। एक बात कहूं पापा मुझे वहां २ दिन से इचिंग हो रही है।। मुझे लगा की मैंने हेयर रिमूव किया इसलिए हो रही है।

मै - नहीं बहु रशेस भी हो सकती है क्या तुम्हे २ दिन से लगातार ईचिंग हो रही है?

सरोज - हाँ बाबूजी.
 
मै - बहु जब तुम्हे रशेस हो तो रात को सोते वक़्त सब उतार दिया करो। लड़कियों का बदन बहुत नाज़ुक होता है इसलिए रशेस होना बहुत कॉमन हो जाता है।

सरोज - मैं तो कपडे उतार के सोती हूं।। देखिये अभी भी मैंने बस ब्रा और पैन्टी ही पहनी है

मै - बहु मैं इनको भी उतारने को कह रहा हूं।। तुम्हे पूरी तरह से नंगी सोना चाहिए कुछ दिन। आज तो लाइट भी नहीं है, गर्मी भी बहुत है और तुमने भीगी पैन्टी पहनी है।। तुम उतार दो बहु

बहु मेरी बात सुन अपनी ब्रा उतार दी।। और अपनी पैन्टी हाथ में लेकर मुझे दीखाते हुए बोली।।

सरोज - ये लिजीये बाबू जी मैंने अपनी पैन्टी उतार दिया।।

बहु के पैन्टी हाथ में देख मैं पूरी तरह से एक्साइटेड हो गया। मैं अपनी लोअर और अंडरवियर खोल बिस्तर के नीचे गिरा दिया और एक हाथ से लंड को पकड़ सहलाने लगा।

मैने बहु के हाथ से पैन्टी ले ली और उसके गिली पैन्टी को सूँघने (स्मेल) लगा।

सरोज - ये क्या कर रहे हैं बाबूजी?

मै - बहु तुम्हारी पैन्टी से कुछ अजीब सी स्मेल आ रही है।।

सरोज - ओह बाबूजी फेंकिये न ।।। (बहु ने अपनी पैन्टी मेरे हाथ से लेकर नीचे फेंक दिया और शीट के अंदर अपना चेहरा ढक लीया)

सरोज - बाबू जी।।। ये शीट के अंदर कैसी स्मेल है?

मुझे रिलीज़ हुआ की मैंने लंड सहलाते-सहलाते अपने लंड का स्किन नीचे खोल दिया था और मेरे लंड की स्मेल फैल् गई थी।

मै - बहु वो मुझे गर्मी लग रही थी तो मैंने अपनी लोअर और अंडरवियर उतार दी है।।

सरोज - ओह्ह बाबूजी आपको भी ज्यादा गर्मी लग रही है? ठीक किया आपने न जाने कबतक लाइट आएगी।। लेकिन ये स्मेल क्यों है?

मै- वो बहु।।।।। जैसे तुम्हारे पैन्टी से स्मेल आ रही थी न। वैसे ही जब मैंने अपनी अंडरवियर उतार दी तो आ रही है।। ये देखो ठीक वैसी ही स्मेल मेरे हाथ से भी आ रही होगी (मैंने अपना हाथ लंड से हटा कर बहु के तरफ बढ़ाया)

सरोज - (बहु मेरे हाथ को स्मेल करते हुए। ) हाँ बाबूजी।। ये तो वैसे ही स्मेल है।। लेकिन ये आपके हाथ से क्यों? इसका मतलब आप अपने हाथ से क्या कर रहे थे।।

मै - अरे बहु वो मैंने जो अंडरवियर उतारा तो साथ में वूऊ।।।आआ।।। मेरा मतलब।।। ओ।।।। स्किन खुल गया और फिर हाथ लगाने से स्मेल मेरे हाथ में भी आ गई।

सरोज - ओह बाबूजी।। आपको दर्द तो नहीं हुआ।।??

मै - नहीं बहु।।

मै - बहु एक बात पूछूँ?

सरोज - हाँ बाबूजी पूछिये

मै - तुम्हारी पैंटी गिली क्यों थी।। ? और तुम्हारी पेंटी में स्मेल कैसी थी?

सरोज - (शर्माते हुए।) ओह प प।। वो ऐसा ही होता है।। वहां नीचे स्मेल तो होती है न जैसे आपकी है।। तो पेंटी में भी वही स्मेल थी।।

मै - (बहु का जवाब सुनकर मैं तेज़ी से लंड हिलाने लगा, और भारी सां लेते हुए फिर से पूछा) क्या तुम नीचे अभी भी गिली हो।।??

सरोज - (शर्माते हुए ) जी बाबूजी।।

मै - क्या तुम्हारे नीचे ज्यादा पानी आ रहा है या कम?

सरोज - जी बाबूजी ज्यादा आ रहा है।।

मै - ओह्ह्ह बहु।। अपना एक हाथ नीचे ले जाओ और अंदर से पानी पोंछ लो

सरोज - क्यों बाबूजी?

मै - बहुउउउउउउउउ जैसा मैं कह रहा हूँ करो।।

सरोज - ठीक है बाबूजी।। (बहु ने अपना हाथ अपने बुर पे ले गई और २ उँगलियों से पानी को साफ़ कर अपना हाथ बाहर ले आयी)

मैने पहले बहु का हाथ पकड़ क़रीब से स्मेल किया और फिर उसकी बुर के पानी से चिपचिपे ऊँगली को मुह में ले चाटने लगा।।
 
सरोज - आआह बाबूजी ये क्या कर रहे हैं??

मै- बहु।। मैं सोच रहा था की जब इसकि स्मेल इतनी अच्छी है तो इसे चाटने में कितना मजा आयेगा।।

सरोज - बाबूजी।। ये आप क्या कह रहे है।। आपने मेरे वहां के पानी को चाटा।। ओहः

मै - हाँ बहु तुम्हारे बुर का पानी चाटने में बहुत मजा आ रहा है बहु।।

(मैंने बेशरमी से बहु के बुर की बात कह डाली।।। बहु मेरे मुह से बुर वर्ड सुन कर शॉक हो गई।। और मेरा मुह बंद करने के लिए उसने अपना हाथ मेरे मुह पे रख दिया लेकिन ये वही हाथ था जिससे बहु ने अपनी चुत में ऊँगली की थी। मैं पागलों की तरह बहु के हाथ चाटने लगा। बहु शर्मा गई।।)

सरोज - बाबूजी।। हुमे साथ नहीं सोना चहिये।। ये आपको क्या हो रहा है।। ? प्लीज रुक जाइये।

मै - मैं रुक जाऊंगा बहु बस एक बार मुझे अपनी गरम बुर (चुत) छूने दो।

सरोज - नहीं बाबूजी।।

मै - प्लीज बहु मैं जानता हूँ ये गलत है लेकिन मुझे बस एक बार अपनी गरम जवान बहु का बुर छूना है

सरोज - नहीं बाबूजी।। मैं नहीं कर सकती अगर आपको मेरे बुर का पानी पीना है तो मैं अपनी ऊँगली डाल के आपके मुह में देती हूँ बस।ये ठीक है?

बहु के मुह से बुर वर्ड सुन मैं पागलों की तरह लंड हिलाने लगा।। और बोला।मैं बहु को खुलता देख और गन्दी बातें करने लगा

मै - ठीक है बहु मैं नहीं छुऊँगा लेकिन फिर तुम्हे मेरे लंड से पानी निकालना होगा।।

सरोज - मैं कैसे कर सकती हूँ बाबूजी।।?

मै - देखो बहु झूट मत बोलो मुझे पता है तुम्हे भी मेरे लंड का स्मेल पसंद है, और शाम को तो रूम साफ़ करते वक़्त मेरे लंड का पानी तुम्हारे चेहरे पे गिर गया था।

सरोज - वो सब अचानक हुआ था बाबूजी।। प्लीज मैं आपका लंड नहीं छूवूँगी।। प्लीज आप मेरे ससुर है।

मै - ठीक है बहु फिर मैं तुम्हारे सामने मास्टरबैट करुँगा और शाम की तरह तुम्हारे चेहरे पे अपने लंड का पानी निकालूंगा। बोलो बहु।।

सरोज - ठीक है बाबूजी।। लेकिन जल्दी कीजिये शमशेर अंकल क्या सोचेंगे?

(मैं अपना लंड हाथ में लेकर बहु के पास बैठ गया, बहु के चुचि से चादर हटा दिया और बहु के बड़ी बड़ी चूचि और निप्पल देख मुट्ठ मारने लगा। मेरा लंड बहु के होठ के काफी क़रीब था और बहु बेशरमी से कभी मुझे तो कभी मेरे लंड को देख रही थे) थोड़ी देर बाद मेरे लंड से गाढ़ा सफ़ेद पानी बहु के होठ पे गिरा और फिर उसके पूरे चेहरे पर गिरने लगा।।
 
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