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मेरी बहु की मस्त जवानी complete

मुझे बाप-बेटी के इस वर्ताव से कोई प्रॉब्लम नहीं था, बल्कि मैं न जाने क्यों बहु और उसके पापा को साथ-साथ देख मजा आ रहा था। मैं न जाने क्यों बहु को अपने पापा के साथ चुदते हुए देखना चाहता था। मेरा लंड ये सोच कर खड़ा हो गया की कैसा लगेगा जब एक बेटी अपने ही बाप से चुदायेगी।

प्यारेलाल - अच्छा बहु चलो मैं फ्रेश हो कर आता हू।

सरोज - जी पापा मैं आपके सामान को टेबल और कपबोर्ड में लगा देती हू।

प्यारेलाल - ओके बेटी

बहु समधी जी का सूटकेस खोलने लगी।।

सरोज - बाबूजी इधर आईए न जरा मदद करेंगे मेरी सूटकेस खोलने में?

मै - हाँ बहु ये लो खुल गया।।

सरोज - मैं ये सब सामान कपबोर्ड में लगा देती हूँ ( बहु सारे सामान रखने लगी।। अपने पापा के सामान अंडरवियर वगैरह भी)

सरोज - अरे ये साइड में क्या आवाज़ कर रहा है देखिये तो।।

मै - बहु ये तो कोई मैगज़ीन है।। रुको निकालता हूं

मैने जब मैगज़ीन बाहर निकाला तो वो एक पोर्न मैगज़ीन थी।। जिसके कवर पेज पे एक लड़की लंड चूस रही थी मैंने बहु को दिखाया।

मै - ये देखो बहु, तुम्हारा पापा ने सूटकेस में ये मैगज़ीन छुपा के रखी है।।

सरोज - ओह माय गोड़। पापा ये सब?

मै - क्यों नहि।। और ये देखो बहु ये इन्सेस्ट मैगज़ीन है। ये ऊपर लिखा है डॉटर लव्स टू सक।। मतलब बेटी को लंड चुसना पसंद है।। आखिर तुम्हारे पापा ऐसे मैंगज़ीन क्यों पढेंगे वो भी बाप - बेटी के सेक्स रिश्ते के बारे में।

बहु ने मैगज़ीन मेरे हाथ से ले लिए और आश्चर्य से देखने लगी।। जब उसने मैगज़ीन अंदर खोला तो हैरान रह गई।। अंदर कई मॉडल के फोटो पे दाग लगे थे।

सरोज - बाबूजी।। ये मैगज़ीन पे हर लड़की के फोटो पे दाग कैसे।। जैसे कुछ गिरा हो।

मै - बहु ये मुट्ठ के दाग है।। तुम्हारे पापा ये सब तस्वीर देख कर मूठ मारते होंगे और हर मॉडल के ऊपर अपना मुट्ठ गिराया है।।

सरोज - (२ पन्ने और पलटते हुए। ) आआह्ह्।। ये गिला चिपचिपा सा।।।

मै - क्या हुआ बहु?

सरोज - बाबूजी ये देखिये न एक फोटो पे ये गिला गिला है।। चिपचिपा सा।।

मै - ये तो मुट्ठ ही है बहु, वो भी ताजा।।
 
सरोज - इसका मतलब क्या पापा ट्रैन के सफ़र में इस फोटो पे मुट्ठ मारे हैं?

मै - हाँ बहु और कौन करेंगा।। ये तुम्हारे पापा का ही मुट्ठ है।।

सरोज - आप इतने यकीन के साथ कैसे कह सकते हैं?

मै - मुझे आदमी के सेक्सुअल जरुरत मालूम है ये मुट्ठ ही है, यकीन न आये तो चाट के देख लो नमकीन सा टेस्ट होगा

सरोज - छी: बाबूजी।। अगर आप सही कह रहे होंगे तो क्या मैं अपने पापा का मुट्ठ चाटूँगी ??

मै - अरे बहु कोई बात नही।। तुमने मेरा भी तो मुट्ठ पिया है कितनी बार।। चाट के देख लो।।

सरोज - (मुट्ठ को स्मेल करती हुई।। चाट लूँ सच्ची? )

मै - हाँ बहु।। (मेरे हाँ कहते ही बहु जीभ लगा कर मुट्ठ चाटने लगी।।)

सरोज - ओह बाबूजी आप सच कह रहे हैं ये तो मुट्ठ का ही टेस्ट है।।

मै - और चाट लो बहु।। (और बहु आँखे बंद कर मस्ती में अपने पापा का मूठ चाट गई)

मै - ओह बहु।। लगता है तुम्हे अपने पापा के लंड का मुट्ठ बहुत पसंद आया।।

सरोज - छी: बाबूजी आप भी न।। मैं तो बस कन्फर्म करने के लिए चाटी।।

मै - काश तुम समधी जी का लंड चाटती तो वो तेरे मुह में ही अपना मुठ छोड़ देते।।

सरोज - ओह बाबूजी ये आप क्या कह रहे है।। मैं अपने पापा का लंड चूसूंगी।।

मै - कोई बात नहीं बहु।। सेक्स के जरुरत में रिश्ता नहीं देखा जाता। और तुम्हारी उभरी हुई निप्पल बता रही है की तुम ये सोच कर बहुत एक्साईटेड हो गई हो।।

सरोज - बाबूजी।। चुप रहिये आप भी न।।

मै - मेरा यकीन करो बहु।। अगर समधी जी के पास तुम्हारी फोटो होती तो वो अबतक दूसरे लड़कियों पे अपना मुट्ठ बर्बाद नहीं करते।। बल्कि सारा दिन तुम्हारी फोटो पे ही मुट्ठ मारा करते।।

सरोज - बस करिये न बाबूजी।। (बहु शर्मा गई।।)

मै - बहु इससे पहले की समधी जी देखें मैगज़ीन वापस रख दो।

सरोज - ओके बाबूजी।।

बहु ने मैगज़ीन वापस रख दिया और फिर कमरे से बाहर चलि गई। समधी जी भी बाथरूम से बाहर आये और अपने कपडे चेंज कर डाइनिंग हॉल में चले गये।

शाम को हम सभी तैयार हो कर बहु के बर्थडे के अवसर पे फोटो खीच रहे थे, बहु ने पहले मेरे लाये हुए जीन्स और टीशर्ट ट्राई किया। हमेशा की तरह बहु भी किस्सी न किसी बहाने से हमे अपनी कमर और नवेल दिखाती रही।

बाद में वो कपडे बदल कर अपने पापा के लाये हुए कपडे भी ट्राई की। हमलोगों ने बहुत सारी फोटो खींची लेकिन सबसे ज्यादा फोटो बहु की ही थी। हर एंगल से

जहां से भी उसके मादक बदन की झलक मिल जाती मैं फोटो खीच लेता।
 
मैने नोटिस किया की समधी जी भी अपनी बेटी के बहुत सारे आपत्ति जनक फोटो खीचे, समधी जी ने ख़ास तौर पे बहु के उभार और उसकी मादक गांड के फोटो लिए।

शाम तक हम सब ने खूब एन्जॉय किया उसके बाद जैसा की बहु चाहती थी मैं अपने कमरे में सोने चला गया और बहु और समधी अपने कमरे में। मेरी नींद आज उड़ चुकि थी मैं जानता था की आज रात कुछ होने वाला है। मैं अपने कमरे में आकर लाइट्स ऑफ कर दिया ताकि बहु और समधी जी को लगे की मैं सो गया हू।

मैं सामने वाली खिड़की के पास बैठ गया। कमरा पास होने की वजह से मुझे उनकी बातें साफ़ सुनाइ दे रही थी। बहु अपने सेक्सी ब्लैक कलर नाईट ड्रेस में थी।, और उसके पापा बेड पे बैठे टीवी देख रहे थे। बहु अपने पापा से सोने के लिए रिक्वेस्ट कर रही थी।

सरोज - पापा अब सो जाइये चलिये आप थक गए होंगे।

प्यारेलाल - हाँ बेटा ठीक है, कमरे में तो बहुत गर्मी है और तुम ये ब्लैक गाउन पहन के लेटोगी?

सरोज - हाँ पापा मैं तो रात को अक्सर ये पहन के सोती हूँ।

प्यारेलाल - बेटी तुम झूठ क्यों बोल रही हो? मैं समझ सकता हूँ तुम अकेली सोती थी तो इस गर्मी में कैसे सोती होगी। तुम जो इतना स्वेट कर रही हो इसी से मुझे

पता चलता है की तुम्हे इसकी आदत नही

सरोज - ओके पापा, आपने ठीक पहचाना।

प्यारेलाल - तो फिर सरोज बेटा लाइट्स ऑफ करो और नाईट गाउन उतार कर सो जाओ।

समधि जी आज अपनी बेटी को बिना नाइटी के अपने पास चाहते थे, और बहु ने भी बिना लाइट्स बुझाये उनके सामने अपनी नाइटी उतार खड़ी हो गई।

मै खिड़की से बहु को सिर्फ ब्लैक ब्रा पेंटी में देख कर अपना लंड बाहर निकाल लिया और मुट्ठ मारने लगा। बहु बेशरमी से अपने पापा के सामने अपनी गदराई जवानी दिखाते हुए खड़ी थी। उसकी जाँघे बहुत गोरी दिख रही थी वो अपनी पेंटी में दोनों तरफ से अँगूठा डाले खड़ी थी ऐसा लग रहा था जैसे वो अपने पापा के एक इशारे पे अपनी पेंटी उतार देगी। बहु ने लाइट बंद कर दी और नाईट लैंप जला कर अपने पापा को हग करके सो गई। मैंने अपना मुट्ठ नहीं निकाला मुझे एक उम्मीद थी कुछ होने की इसलिए क़रीब १ घंटे बाद मुझे पास वाले कमरे से कुछ हलचल महसूस हुई और मैं दूबारा उठ कर बहु के कमरे में झाँकने लगा।

मैने देखा बहु सो रही है और समधी जी अपने लंड को लेटे लेटे लोअर के ऊपर से ही रगड रहे है। बहु की पीठ खुली थी जिसे देख कर समधी जी अपना लंड बाहर

निकाल जोर जोर से मुट्ठ मारने लगे।

वो बार बार बहु के तरफ ध्यान दे रहे थे की कहीं बहु जग न जाए।समधीजी ने बहु की ब्रा खोल दिया था और उन्होंने बहु की पेंटी भी सरका दिए और तेज़ी से लंड की स्कीन ऊपर नीछे करने लगे। उनकी साँसे तेज़ होती जा रही थी और साथ-साथ हिम्मत भी। बहु के तरफ से कोई हलचल न देख कर वो अपना लंड मुट्ठी में लिए बहु के चेहरे के काफी क़रीब आ गए और फिर उनका सारा वीर्य बहु के चेहरे पे गिर गया।

एक बाप को अपनी बेटी के मुह पे मुट्ठ मारता देख मेरा लंड जोश से भर आया मैं बहु के समधी जी के मुट्ठ से सने चेहरे को देख कर मुट्ठ मारने लगा।। मैं मुट्ठ मार - मार कर थकता जा रहा था। मैंने कभी नहीं सोचा था की अपनी रंडी बहु के नाम पे मैं इतना मुट्ठ मारूँगा।। मैं बहु को रंडी बनते देखना चाहता था।। जो किसी का भी लंड अपनी चुत में ले ले चाहे वो उसका अपना भाई हो या फिर पिता।। ए सब सोचते हुए मेरे लंड से फच-फच कर पानी निकल गया।

मुझे ये सब काफी अच्छा लग रहा था लेकिन मैं बहु के मन की बात जानना चाहता था। मुझे लगता था की बहु अपने पापा से चुदवाना चाहती है लेकिन मैं उसके पापा की ये करतूत बता कर सब खेल बिगाड़ना नहीं चाहता था। मुझे तो उस पल का इंतज़ार था जब बहु खुद चुदने के लिए अपने पापा को सेडयूस करे।।।।
 
मै पिछले कई हफ्तो से बहु के नाम की मुट्ठ मार और उसे चोद के थक गया था, मैं उस रात बहु के मुह पे अपने पापा का मुठ निकालते देख अपना पानी निकाल कर इतना थक गया की सुबह १० बजे तक सोता रहा। सुबह बहु कमरे में झाड़ू लगाने आयी और मुझे उठाने लगी।। मुझे हलकी हलकी आवाज़ सुनाइ दे रही थी।।लकिन थकान थी की मेरी नींद नहीं खुली।

कुछ देर बाद बहु और समधी की आवाज़ सुन कर मेरी नींद खुली, मैंने जब कमरे में अपनी नज़रें घुमाई तो हैरान रह गया। कमरा बिलकुल साफ़ था, टेबल पे न्यूज़पेपर रखा हुआ था तब मुझे याद आया की सुबह शायद बहु मुझे उठाने आयी थी।

मैने हैरान था, मेरा अंडरवियर घुटने तक था और मैं पूरा नंगा था। मैंने जब लेटे लेटे बेड पे हाथ लगाया तो बिस्तर की चादर पे एक बड़ा सा धब्बा था और उस जगह पे बेडशीट कड़ा हो का पापड़ की तरह सख्त हो गया था। मैंने अपने लंड को पकड़ कर अंडरवियर में डालना चाहा तो देखा की मेरा लंड एकदम गिला है जैसे की अभी-अभी मुट्ठ निकला हो।

लेकिन ये कैसे हो सकता है? मुट्ठ तो मैं रात में मारा था और वो बेडशीट पे गिर के सख्त भी हो गया फिर लंड गिला कैसे? मुझे कुछ समझ में नहीं आया मैं बाथरूम गया और फ्रेश हो कर बाहर हॉल में चला गया।

बहु सामने आयी और वो मुझे देख कर मुस्कुरा रही थी।। उसने चाय का प्याला मेरी ओर बढाया।।

सरोज - ये लिजीये बाबूजी।। चाय पीजिये।। आप रात में बहुत थक गए होंगे ( बहु ने आँख मारते हुए कहा।। )

मैने ने चाय का प्याला ले लिया और सोचने लगा की शायद बहु सुबह मेरे कमरे में आयी थे और उसने मेरा खुला लंड देख कर ये समझ गई होगी की मैंने रात में मुट्ठ मारा है।

सरोज - क्या बाबूजी मैं आपको सुबह उठाते उठाते थक गई। लेकिन आप हैं की उठते ही नही।। क्या - क्या नहीं किया मैंने आपको उठाने के लिए ( बहु ने फिर से मेरी ओर देख आँख मारी)

मेरे दिमाग में अचानक से बात आयी।। कहीं बहु सुबह मेरा लंड तो नहीं चूस रही थे और वो गीलापन उसके होठों का था?

मै - गुड मॉर्निंग समधी जी।। कैसी रही रात आपकी

प्यारेलाल - बहुत अच्छी। काफी रिलैक्स हो के सोया।

मै अपने मनन में सोचा। समधी जी रिलैक्स तो जरूर हुये होंगे आखिर अपनी बेटी के मुह पे अपना माल गिराया है। बहुत कम ऐसे बाप होते होंगे जो अपनी जवान बेटी के सामने मुट्ठ मार कर सटिसफाई होते होंगे।

सरोज - बाबूजी, आज आप इतनी देर तक क्यों सोते रहे? ऐसा क्या कर रहे थे आप कल रात जो इतना थक गए?
 
मै - (बहु की बातचीत को अच्छी तरह से समझ रहा था, वो शायद अपने पापा के सामने मुझसे डबल मीनिंग में बात करना चाहती थी )।। हाँ बहु क्या करता पिछले कई दिनों से निकाल-निकाल के थक गया हूँ।

सरोज - क्या निकाल के थक गए हैं बाबूजी?

मै - अरे बेटा।। तुम तो जानती हो। वो बाथरूम का नल ख़राब हो गया है न तो कुछ ही घंटे में नीचे पानी भर जाता है और फिर उसे निकालना पड़ता है।

सरोज - बाबूजी।। आपको कितनी बार मना किया है आप मत किया कीजिये मुझे बोलिये मैं आपका पानी निकाल दिया करुँगी।।।।।।।।।।। आपके बाथरूम से।

सरोज - कल रात आप पानी निकाल के सोये क्या?

मै - हाँ बहु।। कल रात पानी निकल के सोया, सुबह तक ज्यादा पानी इकट्ठा हो जाता न। प्लम्बर को बुलाउंगा आज़।

सरोज - ओह अच्छा, मैं सुबह जब आपके कमरे में आयी तो देखा की आप सो रहे है, तो मैंने बिना आपको नींद से उठाये आपका पानी निकाल दिया (बहु ने बड़ी ही शरारती अन्दाज़ में कहा)

सरोज - बाबूजी।। पानी इतना ज्यादा था की मेरे मुह पे भी छीटें पड़ गये।। आप चिंता न करें जबतक प्लम्बर नहीं आता मैं रोज आपका पानी निकाल दिया करुँगी।

मुझे पहले से ही शक़ था की बहु ने सुबह मेरा लंड चूसा है, लेकिन मुझे नहीं पता था की मैं जो सपना देख रहा था की कोई लड़की मेरा लंड हिला रही है, वो दरअसल हकीकत में मेरी बहु मेरा लंड मुह में लिए मुट्ठ निकाल रही थी। मुझे यकीन नहीं हो रहा था के मेरी बहु जो इतनी शर्मीली थी, जो कुछ हफ्ते पहले मेरे सामने घूंघट में रहती थी आज वो मेरा लंड चूसने से भी नहीं हिचकिचाती। और सिर्फ यही नहीं अपने पापा के सामने मुझसे डबल मीनिंग में रोज मेरे लंड का पानी निकालने की बात भी कर रही है। मैं बहु के इस नए बहिवियर से काफी खुश था, आखिर मैं हमेशा से एक रंडी बहु चाहता था। पहले मेरी बहु शरमीली थी तो क्या? अब तो धीरे धीरे रंडी बन रही है।

मैने बहु से इस बारे में बात करने की सोची, और मौका देखते ही किचन में चला गया। समधी जी हॉल में बैठे टीवी देख रहे थे।

मै किचन में पहुच कर बहु को पीछे से पकड़ लिया, उसकी खुली नाभि को छूने लगा और उसकी पीठ को चाटने लगा। मेरा खड़ा लंड बहु के मादक गांड में दबने लगा।

सरोज - बाबू जी ये क्या कर रहे हैं आप? पापा देख लेंगे।

मैने बहु की बात अनसुनी कर दी, उसे किचन के दिवार में चिपका दिया और उसके पल्लू को खीच नीचे कर दिया। फिर मैं पगलों की तरह उसकी गरम पेट में मुह मारने लगा।। अपने जीभ को बहु के नाभि में डाल दिया। बहु सिसकारी मारने लगी, मुझे समझ में आ गया की बहु उत्तेजित हो रही है।

उसके बाद मैंने अपना एक हाथ आगे कर साड़ी को ऊपर उठा दिया, बहु ने एक ढीली सी पेंटी पहनी थी,पेंटी इतना ढीली थी की मैं आराम से अपनी ऊँगली बहु के चुत में घुसा दिया।

बहु एकदम से चौंक गई।। मैं लगतार बहु के चुत में ऊँगली पेलता रहा। बहु के बुर खुलने से किचन में बहु के बुर की स्मेल फैल गई। अबतक बहु के बुर से पानी छुटने लगा था लेकिन फिर भी वो अपने आप को मेरे बंधन से छुडाने लगी।

मै बहु को जोर से जकडा रहा अपने राइट हैंड से मैंने अपना लंड बाहर निकाल के बहु के गांड से सटा दिया। मैं पगलों की तरह बहु को चोदना चाहता था, मुझे न जाने क्या हो गया मैंने समधी जी का बिना ख्याल किये किचन में ही बहु के ब्लाउज और ब्रा में हाथ डाल कर उसके सर के ऊपर से निकाल दिया। बहु के दोनों चूचियां आज़ाद हो कर बाहर लटकने लगी। मैं पीछे से बहु को पकड़ा और उसके होठों पे अपने होठ रख दिए, बहु की साँस तेज़ चल रही थी। मैंने अपने दोनों हथेलियों में बहु के भारी बूब्स को पकड़ लिया और उसे कस-कस के दबाने लगा।
 
बहु के मुह से टीस उठने लगी, वो भी उत्तेजित होकर अपना सब्र खो रही थी। वो अपने होठ मेरे मुह के अंदर ड़ालते हुए अपने हाथों से मेरा हाथ पकड़ बूब्स को जोर-जोर से रगड रही थी। लेकिन बहु को इस बात का ख्याल था की कहीं समधी जी ये सब देख न ले, बहु ने सँभालते हुए कहा।।

सरोज - बाबूजी।। पापा देख लेंगे प्लीज छोड़ दिजिये

मै - ले बहु पहले मेरे लंड को अपने हाथ में तो ले।। (मैंने बहु का हाथ पकड़ के अपने लंड पे रख दिया)

सरोज - बाबूजी यहाँ किचन में?

मै - क्या हुआ बहु जब तुम सुबह मेरा लंड चूस सकती हो तो यहाँ क्यों नहीं? चलो मेरा लंड सहलाओ और अपने मुह में ले कर चुसो

सरोज - ठीक है बाबूजी लेकिन जल्दी निकालिये अपना माल।

बहु मेरा लंड पकड़ के मुट्ठ मारने लगी और मैंने अपने हाथ से उसके गरम निप्पल को दबाने लगा। बहु भी मस्ती में अपनी आँख बंद किये तेज़ी से मुट्ठ मारने लगी।।
 
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