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मेरी बहु की मस्त जवानी complete

बाबू जी ने धीरे धीरे, रुक रुक कर अपना पूरा लंड बहु की गांड में पेल दिया।बहू दर्द से बेचैन थी, उसका बदन पसीना पसीना हो चूका था, दाँत के दबाव से होंठ लाल हो चुके थे और उसकी आँखों से आंसू बह रहे थे। कुछ देर तक शांत रहने के बाद बाबू जी ने बहू की गांड को धीरे धीरे चोदना शुरु किया। बहू की कमर को दोनों हाथों से पकड़ कर बाबूजी अपने लंड को उसकी गांड में धीरे धीरे अंदर बाहर कर रहे थे। बाबू जी ने इतनी टाइट गांड में लंड कभी नहीं पेला था। बाबू जी जब लंड को अंदर घुसाते तब बहू की टाइट गांड उनके लंड के ऊपर की त्वचा को जकड लेती और उनके लंड का सुपाड़ा पूरी तरह से नंगा हो कर तन जाता। फिर बहु की गांड के भीतर के कोमल और चिपचिपी त्वचा से नंगे सुपाडे की रगड बाबू जी को बहुत आनंद दे रहा था।

बहू का दर्द भी अब शांत हो गया था। गाँड में मोटा सा लंड जब अंदर घुसता तो बहु को अपनी चूत पर दबाव महसुश होता, ये एहसास बहुत ही मादक था। बहू को अब मजा आने लगा था। वो बाबूजी के लंड के साथ लय मिला कर अपने गांड को हिलाने लगी। जैसे बाबू जी लंड अंदर घुसाते, बहू अपना गांड पीछे कर देती। बहू को मजा लेता देख बाबूजी ने भी चुदाई की गति काफी तेज़ कर दी। चूतड़ के पास दोनों हाथों से बहू की कमर को पकड़ कर बाबू जी पूरे अंदर तक अपना लंड पेल रहे थे।

जैसे जैसे बहू गांड मरवाने में सहज हो रही थी वैसे वैसे बाबूजी की चुदाई की गति बढ़ती जा रही थी। अब बाबू जी मस्ती में आधा लंड अंदर बाहर कर बहू की गांड में लंड पेल रहे थे। अब बहू भी मस्ती में आ चुकी थी। बाबु जी ने झुक कर अपने दोनों हाथों से बहू की दोनों चूचि को पकड़ा और उसकी चूचियों को भींचते हुए उन्होंने बहू को घुटने के बल खड़ा कर दिया। बहू घुटने के बल खडी, उसके पीछे उसकी गांड में अपना लंड घुसाए बाबू जी घुटने के बल खडे उसकी चूचियों को मसलते हुए उसकी गर्दन चूम रहे थे। बहू ने अपने दोनों हाथों को उठा कर बाबू जी के सर को पकड़ लिया और मुँह पीछे घुमा कर बाबूजी को चूमने लगी। बाबू जी बहू की गांड में लंड तो पेल ही रहे थे अब वो उसकी मुंह में अपना जीभ पेलने लगे। एक हाथ से चूचियों को मिसते हुए उन्होंने अपना दूसरा हाथ नीचे बढाया। पेट पर रेंगता हुआ उनका हाथ नीचे जांघों के बीच में सांप के बिल तक पहुँच गया। थोड़ी देर तक गीली चूत की मालिश करने के बाद उनकी ऊँगली अंदर बिल में घुस गयी। बहू तीनो मोर्चे पर एक साथ प्रहार से विचलित थी; उसकी गांड में बाबू जी का लंड ड्रिल कर रहा था तो चूत में उनकी ऊँगली और मुंह में उनका जीभ। तीनो मोरचे पर बस एक ही मोरचा, उसकी गांड़, पर पूरे ज़ोर शोर से लडाई चल रही थी बांकी मोर्चों पर तो बस छिट पुट हमले ही हो रहे थे। अगर इस लडाई में ऐसा मजा है तो तीनो मोरचे पर एक साथ घमाशान युद्व हो तो कितना मजा आएगा। बहू के आँखों के सामने फिर से तीनो मोर्चे पर लंड लेती पोर्न स्टार की तस्वीर आ गयी। अब तीन लंड एक साथ लेने की बहू की अभिलाषा बन चुकी थी।

जब बाबूजी जी ने बहू की चूत में दो ऊँगली घुसायी तो बहू ये भूल चुकी थी की वो कहाँ है।। वो आनंद में इस तरह मतवाली हो चुकी थी की वो बाबूजी के ऊँगली को लंड मान रही थी। उसने बाबू जी के हाथ की ऊँगली को मुंह में रखा और उसे लंड की तरह चूसने लगी। वो एक साथ गांड में लंड का दबाव और चूत में दो ऊँगली के दबाव से मतवाली हो कर मचलने लगी। वो बिस्तर पर झुक गयी और अपने ही ऊँगली को चूसने लगी। बाबू जी ने बहू को मस्ती में देख कर चुदाई तेज़ कर दी। वो पूरे ज़ोर से बहू की गांड में लंड और चूत में ऊँगली पेल रहे थे।
 
बहु आनन्द के उत्कर्ष पर थी, कुछ ही देर में वो झड गयी। उसकी चूत को बहता देख कर बाबू जी और भी उत्तेजित हो गये।। उन्होंने अपना पूरा लंड बहु के गांड में पेल दिया, फिर बाहर निकाल कर एक झटके के साथ अंदर घुसा दिया। अब वो पूरे लंड को अंदर बाहर कर चोदने लगे। थोड़ी देर में बाबू जी भी चरम पर पहुँच गये। उन्होंने अपना लंड बहू की गांड में बिलकुल भीतर तक पेल कर बाहर निकाला और अपने हाथ से हिला कर अपने प्रेम रस को बहू के मुँह के अंदर गिरा दिया जिसे बहू किसी कुतिया की तरह चाटकर साफ करने लगी।

अगले दिन सुबह मैं देर से उठा, मैंने देखा की समधी जी मिरर के सामने खड़े होकर शेविंग कर रहे थे। बहु मेरे बगल में चादर के अंदर लेटी थी। मैंने बहु को धीरे से उठाया

मै - बहु, उठो।।

सरोज - मैं सो नहीं रही बाबूजी। बस ऐसे ही लेती हू।

मै - लगता है समधी जी की तबियत आज ठीक है, वो शेविंग कर रहे है। उन्होंने हमे साथ में सोते हुए भी देख लिया। अब तुम उन्हें रिझाने की कोशिश शुरू कर दो।

सरोज - ओके बाबूजी।

बहु अपने बदन से चादर हटा कर फेंक दिया। उसने अपना गाउन घुटने के ऊपर अपनी जांघो तक खीच लिया और पैर मोड़ कर बिस्तर पे बैठ गई। फिर उसने एक सेक्सी अंगडाई ली और नशीले आवाज़ में अपने पापा से कहा।

सरोज - गुड मार्निंग पापा, आप कब उठ गए? आपकी तबियत अब कैसी है?

समधि जी - मैं अभी अच्छा फील कर रहा हूँ बेटी (समधी जी ने बिना बहु को देखे जवाब दिया)

सरोज - पापा इधर मेरे पास आइये न मुझे आपको किस करके गुड मॉर्निंग बोलना है।

समधि जी - अरे बेटी २ मिनट में हो गया बस।

सरोज - उम् आइये।।

समधि जी - ओके हो गया, (जैसे ही समधी जी पीछे मुड कर अपनी बेटी को देखा उनकी आंखे बड़ी और जुबान बाहर हो गई )

अपनी बेटी को इस तरह से उन्होंने कभी नहीं देखा था उनकी सेक्सी बेटी अपनी आधी चूचियां लटकाये और मांसल गोरी जांघो को खोले उनके सामने बैठी थी। उनके मुह से कुछ नहीं निकला वो बेड के पास आ गये। बहु ने अपना पोजीशन चेंज किया और झुकते हुए पापा के क़रीब आ गई। झुकने से उसकी चूचि इस बार पूरी बाहर निकल गई थी, बेड पे जब वो झुकि तो उसकी नंगी चूचिया बेड को छु रही थी। बहु अपनी गाउन के सरकने से जानबूझ कर अन्जान बनी हुई थी।
 
अगर वो बेड पे सटी न होती तो उसकी बड़ी बड़ी चूचियां और उसके ब्राउन कलर के निप्पल समधी जी को साफ़ दिख जाता। समधी जी ने आगे बढ़ कर बहु को किस किया, लेकिन किस करते वक़्त पूरे टाइम उनकी नज़र अपनी बेटी के गाउन के अंदर निप्पल ढूंढने में लगी थी।

सरोज - आपको नींद तो ठीक से आयी न पापा?

समधि जी - हाँ बेटी ठीक से सोया मैं तो रात में, मुझे तो कुछ भी पता नहीं चला कब सुबह हो गई। और जब मैं सुबह उठा तो काफी अच्छा महसूस कर रहा था।

मैन मन में सोचता रहा, आखिर आपकी बेटी ने कल रात आपके लंड को चूस के मुट्ठ निकाला है तो आप तो फ्रेश ही महसूस करेंगे। मैं ऐसा सोच कर मन ही मन हंसने लगा

समधि जी - अरे देसाई जी आप क्यों मुस्कुरा रहे हैँ।

मै - कुछ नहीं मैं सोच रहा था की आपकी बेटी ने कल रात आपकी खूब सेवा की तभी आपको अच्छे से नींद आई।

संधि जी - अच्छा बेटी थैंकस, तुम्हे नींद आयी?

सरोज - हाँ पापा, थोड़ी सी आई

समधि जी - थोड़ी सी क्यों?

सरोज - वो बाबूजी आपसे थोड़े मोठे हैं न और मैं भी मोटी हो गई हूँ तो मुझे सोने के लिए जगह नहीं मिली।

समधि जी - नहीं बेटी तुम मोटी नहीं हो। (समधी जी ने अपनी बेटी को ऊपर से नीचे उसके बदन को घूरते हुए कहा) ऐसी बात थी तो तुम मेरे पास क्यों नहीं सो गई?

सरोज - हाँ पापा कल से मैं आपके पास ही सोऊँगी।

मैने मौका देखकर बेड के नीचे पड़े बहु की एक फोटोग्राफ को पैर से पुश कर समधी जी के पास पंहुचा दिया।

समधि जी - नीचे ये फर्श पे क्या गिरा है बेटी?

सरोज - कहाँ मुझे तो कुछ नज़र नहीं आ रहा।।

समधि जी - रुको मैं उठाता हूं, कहीं मेरे पॉकेट से कुछ गिरा तो नहीं (समधी जी ने फोटो उठा कर पलटा और फोटो में अपनी बेटी को देख कर चौंक गये। फोटो में बहु अपने पैरों में मेहंदी लगवा रही थी। उसने एक छोटी सी पेंटी पहनी थी जिसमें उसकी पूरी टाँग और जाँघें बिलकुल नंगी थी)

समधि जी - बेटी ये तो तुम्हारी फोटो है

सरोज - मेरी फोटो? दिखाइये।।।

समधि जी - ये देखो बेटी, (समधी जी ने बहु को फोटो दिखाया)

सरोज - अरे हाँ ये तो मैं हू।।।

समधि जी - ये कहाँ की फोटो है बहु? (समधी जी ने बहु के फोटो को घूरते हुये पूछा)

सरोज - पापा वो मेरी दोस्त है न शालीनी, उसकी शादी की है। हम सबलोग मेहंदी लगवा रहे थे। देखिये न इसमे मैं कितनी मोटी लग रही हू।

समधि जी - नहीं बेटी तुम मोटी तो बिलकुल नहीं ही, वो तो बस फोटोग्राफर के फोटो खीचने के वजह से।।

सरोज - फोटोग्राफर की वजह से क्या पापा?? (बहु ने और खुल के पूछना चाहा )

समधि जी - फोटो नीचे से ली गई है न तो इसलिए तुम्हारी जाँघें मोटी लग रही है।

(समधी जी बहुत हिचकिचाते हुये जाँघ शब्द का यूज किया, अपनी बेटी के जाँघ के बारे में कमेंट करने में उन्हें अजीब लग रहा था। लेकिन जैसा की मैंने बहु से कहा था थोड़ा बेशर्म होने के लिए बहु ने ठीक ऐसा ही कहा)

सरोज - नहीं पापा, मेरी जाँघ सच में बहुत मोटी है न। देखिये न फोटो में और मेरी अभी के जाँघो में आपको कोई अंतर दीखता है। मुझे तो मेरी जाँघें और मोटी लगती है।

समधि जी - बेटि, तुम्हारी जाँघे अच्छी है। मोटी जाँघ तो अच्छी लगती हैं।

सरोज - सच में पापा आपको मेरी मोटी जाँघ अच्छी लगती है?

समधि जी - हाँ बेटी।।। मुझे बहुत अच्छी लगती है। क्यों देसाई जी आप देखिये इस फोटो को

(समधी जी ने फोटो मेरी तरफ बढाते हुए कहा। मैं हैरान था की हमलोग आपस में इतना खुल गए हैं की बहु के जांघों के बारे में बातें कर रहे हैं)

मै - हाँ बहु तुम्हारी जाँघ बहुत अच्छी है।

सरोज - (खुश होती हुई।।) थैंक यू पापा।
 
समधि जी - लेकिन तुम शादी में टीशर्ट और पेंट पहनी हो? तुम साड़ी नहीं पहनती क्या?

सरोज - साड़ी भी पहना था पापा और हमलोगों ने तो खूब डांस भी किया था। रुकिए मैं आपको साड़ी वाली फोटो दिखाती हू। (बहु बेड के साइड से फोटो निकाल कर अपने पापा को दिखाई)

सरोज - ये देखिये पापा, मुझे प्लेन साड़ी ज्यादा पसंद है तो मैं हमेशा ऐसी ही साड़ी पहनती हू।

(बहु एक फोटो में लाल साड़ी पहने हुये अपनी खुली पेट और नाभि दिखा रही थी, तो दूसरी फोटो में ग्रीन साड़ी पहने हुये थी)

समधि जी - बेटी साड़ी तो बहुत अच्छी है, और इस ग्रीन साड़ी वाले फोटो में तुम डांस कर रही हो क्या?

सरोज - हा, मैं वो मिस्टर इंडिया के श्रीदेवी वाले गाने पे डांस कर रही थी। मैं जब साड़ी पहन के तैयार हुई तो शालिनि मेरे पास आयी और अपना हाथ मेरी कमर के अंदर डाल साड़ी नाभि के नीचे सरका दी। मैं शर्मा गई लेकिन वहां केवल लड़कियां थी तो खूब डांस की।

समधि जी - वाह तुम तो एकदम श्रीदेवी ही लग रही हो इस पोज़ में तुम्हारी नाभि तो श्रीदेवी के नाभि से भी ज्यादा अच्छी लग रही है।

सरोज - हंसकर।। नहीं मैं कहाँ और कहाँ श्रीदेवी

समधि जी - नहीं बेटी मैं सच कह रहा हूं, तुम्हारी कमर काफी अच्छी है बस बारिश हो रही होती तो भीगे बदन और चिपकी साड़ी में तुम एकदम हॉट लग रही होती।

सरोज - पापा आप नहीं जानते मेरी फ्रेंड कितनी शैतान है, उन्होंने सच में मेरे ऊपर एक बाल्टी पानी डाल दिया था और मैं बिलकुल वैसे ही थी जैसा आप सोच रहा है।

समधि जी - सच? फोटो दिखाओ भीगी साड़ी वाली ?

सरोज - वो मैंने किसी को फोटो नहीं लेने दिया, सबकुछ दिख रहा था। अगर होता तो मैं आपको दिखा भी नहीं सकती। कुछ और भी फोटो होंगी लेकिन सब नहीं दिखा सकती।

समधि जी - है है खूब मस्ती की तुमलोगों ने, कुछ और फोटो हो तो दिखाओ।

सरोज - अच्छा मैं आपको एक और फोटो दिखाती हु, मैंने वो ब्लाउज के डिज़ाइन के लिए रखा था।

समधि जी - (बेसब्री से।। ) दिखाओ

सरोज - (एक और फोटो लाकर अपने पापा को देती है) ये देखिये पापा है न अच्छी डिज़ाइन?
 
समधि जी - वाओ बेटी तुम तो बहुत अच्छी लग रही हो इस ब्लाउज में। तुम कपडे बदल रही थी क्या?

सरोज - हाँ पापा, मैंने साड़ी उतार दी थी और ब्लाउज खोल रही थी तभी शालिनी ने फोटो खीच लिया। लेकिन मुझे वो ब्लाउज के डिज़ाइन चाहिए था इसलिए ले आयी। मैंने ऐसे ही २ और ब्लाउज बनवाई है।

समधि जी - हाँ बेटी तुम्हारी पीठ इस ब्लाउज में मांसल लग रही है, और कहाँ बनवाया तुमने ब्लाउज?

सरोज - पास में ही एक टेलर है उसको दिया, वो तो कभी कभी घर आ के मेरा नाप ले जाता है। बहुत अच्छा टेलर है, मैंने उसे ये फोटो दिखाइ और उसने डिज़ाइन देख कर मेरा नाप लिया और बिलकुल ऐसी ही ब्लाउज बना के दे दिया।

समधि जी - बेटी तुमने टेलर को ये फोटो दिखाए, मेरा मतलब ऐसे ब्लाउज खोलते हुए?

सरोज - ओह पापा, टेलर बुजुर्ग हैं मैं उन्हें चाचा बुलाती हूँ और वो बहुत मानते हैं मुझे।

समधि जी - ओके फिर ठीक है, और ब्लाउज बना के उन्होंने तुम्हे ये फोटो वापस कर दिया।

सरोज - नहीं नही, ये तो दूसरी फोटो है। मैंने उनसे फोटो माँगा तो वो बोले की उनको डिज़ाइन बहुत पसंद है और इसलिए वो फोटो अपने पास ही रख लिये।

मै समझ गया की समधी जी क्या जानने की कोशिश कर रहे थे, मुझे भी ये बात आज ही पता चली। उस बुजुर्ग टेलर को ब्लाउज के डिज़ाइन में कोई इंटरेस्ट नहीं रहा होगा। वो तो बहु की खुली पीठ का दिवाना हो गया होगा। और अबतक तो वो न जाने वो कितनी बार बहु के पीठ देख कर मुट्ठ मार लिया होगा।
 
समधि जी - अच्छा बेटी, क्या मैं तुम्हारी ये साडी फोटो रख लूँ? तुम्हारी कोई फोटो मेरे पास नहीं है। तुम्हारी जब याद आएगी तो मैं तुम्हे इस फोटो में इमेजिन कर लिया करुँगा और सोचूँगा की मेरी प्यारी बेटी मेरे पास ही है।

सरोज - कौन कौन सी मेरी फोटो चाहिए आपको पापा ?

समधि जी -सभी, वो मेहँदी वाली, साड़ी वाली और ये ब्लाउज वाली सभी।

सरोज - ठीक है पापा आप रख लीजिये।

मुझे समधी जी का इरादा पता था। समधी जी क्या मिस कर रहे थे? वो अपनी बेटी का पवित्र प्यार नहीं बल्कि उसकी मांसल जाँघ, नाभि और गदराई पीठ देख कर मुट्ठ मारने के लिए तड़प रहे थे। टेलर के बाद अब समधी जी की मुट्ठ मारने की बारी थी।।
 
सुबह काफी देर तक मैं समधी जी और बहु रूम में बातें करते रहे। बहु ने सुबह जल्द ही नाश्ता बना दिया था, मैं और समधी जी ने रूम के बेड को आपस में जोड दिया, अब बेड पे हम तीनो के लिए काफी जगह थी। बहु रूम में पिंक कलर का सलवार सूट पहन के घूम रही थी, वो जब रूम में चलती तो उसकी चूचियां उछल रही थी। जो मुझे और समधी जी को संकेत देने के लिए काफी थी की बहु ने आज कुरते के अंदर ब्रा नहीं पहनी है। मैं हाथ में टीवी रिमोट लिए बैठा था और मेरे बगल में समधी जी टीवी पे अपना पसंदीदा प्रोग्राम देख रहे थे।

तभी बहु बिस्तर पे मेरे और समधी जी के बीच चढ़ गयी, बहु किचन में काम करके थोड़ा थक सी गई थी। वो बिस्तर पे आते ही लेट गई और अपने पापा से बोली

सरोज - पापा, क्या देख रहे हैं टीवी में? सीरियल लगाईये न प्लिज।

समधि जी - बेटी सीरियल में क्या है? वो तो तुम दूबारा देख सकती हो लेकिन ये टीवी पे ये लाइव शो मैं नहीं देख पाउँगा

बहु समधी जी के बिलकुल पास आ गई, उसने टीवी रिमोट लेने के कोशिश की तो समधी जी ने नहीं दिया और उसे मेरी तरह फेंक दिया। मैं इससे पहले के रिमोट ले पाता, बहु ने अपना हाथ आगे बढा कर रिमोट मुझसे छिन लिया।

समधि जी- बेटी दो न प्लिज।

सरोज - नहीं दूंगी (कहते हुए बहु ने चैनल चेंज कर दिया)

बहु पिंक कलर के लेग्गिंग्स में अपनी मस्त जाँघो के शेप को दिखा रही थी। समधी जी बहु के हाथ पकड़ कर रिमोट छिनने लगे। मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा था की ईस वक़्त में मैं क्या करूँ। बहु ने रिमोट बिस्तर पे अपनी पीठ के नीचे छिपा लिया। समधी जी रिमोट लेने के बहाने अपनी बेटी के आधे शरीर पे चढ़ गए थे।

समधि जी - देसाई जी पकड़िये न बेटी को, रिमोट लेकर भाग जायेगी

मै समधी जी की यह बात सुनकर बहु के दोनों हाथ ऊपर कर कस कर पकड़ लिये। हाथ ऊपर करने से बहु के चूनरी हट गई थी और उसकी दोनों चूचि और बड़ी और मुलायम दिख रही थी। समधी जी का भी ध्यान बिलकुल अपनी बेटी के नरम-नरम चूचि पे था। रिमोट लेने के बहाने समधी जी बहु के पेट और साइड से नंगी कमर को छू कर आनन्द उठाए। कई बार तो वो बहु के नाभि का नज़ारा भी ले लिए । बहु भी जान बूझ कर अपने पापा को चकमा देति रही और इसी बहाने समधी जी अपनी बेटी को ऊपर से नीचे तक कई जगहों पे मसल चुके थे।

सरोज - पापा, बाबूजी, ये गलत है आप दोनों लोग एक साथ मुझे पकड़ कर मुझसे जबरदस्ती रिमोट ले रहे है।

मै - कुछ गलत नहीं है (कहते हुए मैंने बहु के पीठ के नीचे से रिमोट लेने के कोशिश की लेकिन बहु मेरे इरादे को जान चुकी थी मैंने बहु को आँखों से इशारा किया ताकि वो अपने पापा को और रिझाये)
 
बहु ने रिमोट निकाल कर अपने दोनों जांघो के बीच में कस के दबा लिया। समधी जी रिमोट को पकड़ना चाहते थे लेकिन इस चक्कर में उनका हाथ बहु के दोनों जाँघो के बीच फ़ांस गया।बहु ने तो लेग्गिंग्स के अंदर पैन्टी भी नहीं पहनी थी। वो बिना कोई ऐतराज़ दिखाते हुए अपने पापा का हाथ को जांघो के बीच दबाती रही। समधी जी का हाथ का स्पर्श बहु के गरम बुर से हो रहा था। समधी जी भी उत्तेजित हो कर अपने हाथ को बाहर न निकाल कर रिमोट ढूंढने के बहाने अपनी बेटी के गरम चुत को रगडते रहे। समधी जी इस मौके का पूरा आनन्द उठा रहे थे। फिर होश संभालते हुए मुझसे बोले -

समधि जी - देसाई जी, क्या हमदोनो इतने बूढ़े हैं के हमलोगों में ताकत नहीं रही, मैं अपनी बेटी से जीत नहीं पा रहा हूँ।

मै - (मैं बहु के हाथ जोर से पकड़ते हुवे बोला) - समधी जी आपकी नज़र कमजोर है बहु ने रिमोट अपने नीचे दबा लिया है। सरोज को उठा कर निकाल लीजिये।

बहु खिलखिला कर हँसती रही।।

समधि जी - देसाई जी मुझे मालूम है, लेकिन एसके कुल्हे इतने बड़े हैं के मैं इन्हे उठा नहीं पा रहा हूँ।

समधि जी के मुह से अपनी बेटी के कूल्हों के बारे में बात करता देख मेरा लंड सख्त हो गया। मैंने जवाब में "सच है कहा" कह कर चुप हो गया। बहु ने भी अपनी तरफ से झुठा ऐतराज़ करते हुये कहा

सरोज - पापा आप मेरा मजाक उड़ा रहे हैं वो भी बाबूजी के सामने ।

समधि जी - नहीं बेटि, इसमे मजाक उड़ाने वाली कौन सी बात हो गई। तुम्हे तो अपनी ख़ूबसूरती पे नाज़ होना चहिये

सरोज - कैसा नाज़ पापा, आपने अभी-अभी मुझे मोटी कहा।

समधि जी - बेटी मोटी कब कहा मैंने? मैंने तो सिर्फ इतना कहा के मैं तुम्हे उठा नहीं पा रहा क्योंकि तुम्हारे कुल्हे बड़े और भारी है। और लड़कियों के बड़े और भारी कुल्हे तो काफी अकर्षित लगते है, कई कवियों ने अपनी कविता में स्त्रियों के कूल्हों को उसके सिंगार का गहना बताया है। क्यों देसाई जी ठीक कहा न मैंने?

मैन अपने खड़े लंड को सहलाते हुए, ये सोच के हैरान था के समधी जी कितनी आसानी से अपनी जवान बेटी की बड़ी गांड की बात कर रहे हैं और मुझे भी उसके यौवन के बारे में बोलने के लिए उकसा रहे है। मैंने भी इस चर्चा को थोड़ा और मसाला देने की सोचा। मैं देखना चाहता था की समधी जी किस हद्द तक मुझसे अपनी बेटी के बारे में खुल सकते है।

मै - पापा ठीक कह रहे हैं बेटी, तुम नहीं जानती अपने जमाने में जब हमलोग कॉलेज जाया करते थे उस वक़्त थिएटर में हर आने वाली लड़की के लचकती कमर और मटकते कूल्हों पे हम लड़के सीटियाँ बजाय करते थे।

सरोज - सच में बाबूजी, आप लोग भी उस जमाने में बदमाशी करते थे? हम लड़कियों को तो कभी पता हे नहीं चल पता के लड़को को क्या अच्छा लगता है।

समधि जी - बेटी वो तो उम्र ही ऐसी होती है, तुम्हे नहीं पता चलता लेकिन मैं तो समझ सकता हूँ न। इसलिए तो मैं तुम्हे अपने साथ बाजार ले जाने में झिझकता था याद है बेटी।

सरोज - हाँ आप मुझे मना करते थे लेकिन मैं फिर भी आपके साथ जिद्द करके आ जाती थी। लेकिन आप मुझे क्यों मना करते थे पापा?

समधि जी - बेटी तुम बाजार में ध्यान नहीं देती थी, मैं देता था। जब भी तुम अपनी ब्लू कलर वाली टाइट जीन्स पहन के बाजार में चलति, तो तुम्हारे पीछे कॉलेज के लड़के जवान, बूढ़े सभी तुम्हारी बड़े-बड़े कूल्हों को देखा करते थे। और वो जीन्स भी तो टाइट थी जो तुम्हारी मांसल जाँघ और तुम्हारे निचले हिस्से को और भी उभार देती थी।

सरोज - ओह पापा मैं तो कभी ऐसा सोचा ही नही मुझे नहीं पता था की लोग ऐसे अट्रॅक्ट होते हैं लड़कियों के इस भाग के लिये। मेरे जीन्स पहनने पे ये हाल था तो मैं शॉर्ट्स पहनती तो क्या होता।।

समधि जी - है है ।। क्यों समधी जी आप बताइये क्या होता? आखिर शादी के बाद यहाँ इस मोहल्ले में क्या होता है वो तो आप ही बता सकते हैं क्यों?

मै - हाँ समधी जी मैंने भी कई बार कोशिश की बहु को बोलने की लेकिन बोल नहीं पाया। यहाँ भी आस पास के लड़के बहु के हिप्स को बहुत घूरते है।
 
समधि जी - इस समस्या का कोई समाधान भी तो नहीं है। मेरी बेटी कर भी क्या सकती है, वो अपने बड़े-बड़े हिप्स को छुप्पा भी तो नहीं सकति। किस्सी भी कपडे में ये उभर कर दिखने लगते हैं (हम सब समधी जी के बात पे हंसने लगे।।)

मै - तुम्हे याद है बहु, वो हमारे पडोसी? शमशेर जी?

सरोज - हाँ शमशेर अंकल मुझे पता है हमारे पडोसी। क्या हुआ?

मै - मुझे पहले पता नहीं चला, लेकिन वो जब बार बार घर पे आने लगे तो मुझे शक़ हुआ और फिर मैंने शमशेर को कई बार पकड़ लिया। फिर उन्हें मैंने यहाँ से भगा दिया।

समधि जी - ये कब की बात है? क्या मैं मिला हूँ शमशेर से?

मैन - नहीं आप नहीं जानते उनको, मेरी उम्र के है। पड़ोस में रहते हैं आज़कल कहीं बाहर गए है।

समधि जी -अच्छा, क्या किया उन्होंने?

मै - वो बहु को बहुत ही गन्दी नज़र से देखते थे, वो बहु के कई फोटोग्राफ्स भी क्लिक किये थे। उन्हें मैंने कई बार घिनौनी हरकत करते देखा जो मैं बहु के सामने आपसे बता नहीं सकता।

सरोज - कैसी हरकत बाबूजी, बताइये मुझे। बात मेरे बारे में है तो मुझे पता होना चहिये।

मैन - नहीं बहु मैं नहीं बता सकता

समधि जी - कोई बात नहीं समधी जी मेरी बेटी कोई बच्ची नहीं है। अब ये शादीशुदा है आप बे-झिझक खुलकर बताइये

मै - समधी जि, मैंने एक दिन रात में उनके कमरे में सिगरेट लेने गया तो देखा की बिस्तर पे बहु की कुछ पर्सनल फोटग्राफ्स है। जिनमे से कुछ फोटो में बहु नंगी भी थी।

सरोज - (चौंकते हुए) क्या मेरी पर्सनल फोटो? तो क्या शमशेर अंकल ने मेरी प्राइवेट फोटोज मेरे कमरे से चुरायीं थी?

समधि जी - (ग़ुस्से में आकर बोले) लेकिन सरोज बेटी, तुम्हारी नंगी फोटो उस बहनचोद शमशेर को कैसे मिली?

अपने पापा को गुस्से में गाली देता देख बहु घबरा गई थी।

सरोज - (घबराती हुई) पापा वो कुछ फोटोज थे जो मेरे पति ने खिची थे वही उनके हाथ लग गई होंगी। लेकिन मैंने अभी कल ही देखा, सारी फोटोज मेरे पास है। और शमशेर अंकल बहुत अच्छे थे हो सकता है की वो शायद अनजाने में देख लिए होंगे और फिर वापस रख दी होगी।
 
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