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मेरी माँ का और मेरा सेक्स एडवेंचरcomplete

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फिर थोड़ी देर बाद हम दोनों उठकर रूम में चले जाते हैं। वहां हमारे कपड़े टंगें हुए होते हैं। मोम मुझसे कुछ कहने को होती हैं, पर वो मुझसे आँखें नहीं मिला पा रही होती हैं। मैं उनका मुँह ऊपर करती हूँ, इशारे से उन्हें चुप रहने को कहती हूँ। हम ड्रेसअप होते हैं। मोम बिना पैंटी के अपनी ड्रेस पहनती हैं, क्योंकी उनकी पैंटी फट चुकी होती है। हम ड्रेसअप हो जाते हैं और अपना मेकप ठीक करते हैं।

तभी अकरम आ जाता है और कहता है- “हाय हाटी…”

मैं मुश्कुरा देती हूँ।

अकरम मोम से- “कल का प्रोग्राम तो याद है ना?”

मोम- “नहीं, कल मैं नहीं जा पाऊँगी…”

तभी मैं बोल पड़ती हूँ- “आप चिंता मत करो, हम चले जाएंगे…”

मोम मुझे गुस्से से घुरती हैं। मैं फिर से उनको आँख मारती हूँ।

अकरम- “यार, एक चीज समझ में नहीं आ रही है? तुम दोनों दिखती एक जैसी हो, फिगर भी एक जैसी है, और चुदवाती भी दोनों मस्ती से हो, ये चक्कर क्या है?”

मैं- “कभी-कभी हो जाता है की एक जैसे लोग मिल जाते हैं। हाँ वैसे कल का प्रोग्राम हमें शाम तक बता देना। मेरी अक्टिवा बाहर खड़ी है, मैं काफी थक गई हूँ। मैं इनके साथ चली जाऊँगी ये मुझे ड्राप कर देंगी…”

अकरम- “ओके, शाम को बात करता हूँ बाइ…”

फिर हम वहाँ से बाहर आ जाते हैं, और मैं मोम के साथ कार में बैठ जाती हूँ। मोम मुझसे आँखें नहीं मिलाती हैं। मैंने कहा- “मोम क्या बात है, आप मुझसे बात क्यों नहीं कर रही?”

मोम अचानक से रोने लगती हैं।

और मैं उन्हें चुप कराती हूँ- “मोम क्यों परेशान हो आप इतना?”

मोम रोते हुए- “आज तूने मुझे इस तरह से देखा, मैं तो शर्म से पानी-पानी हुई जा रही हूँ…”

मैं- “तो क्या हुआ मोम? हम औरतें हैं, हमारी भी कुछ जरूरतें होती हैं, और क्या हुआ अगर हमने कुछ ऐसा कर लिया तो? लाइफ ही तो एंजाय कर रहे हैं हम, अब आप चुप हो जाओ…”

मोम- “पर बेटा, ये अच्छे लोग नहीं है…”

मैंने आँख मारते हुए कहा- “मोम मैं जानती हूँ। पर जब हम इनके चंगुल में आ ही गये हैं तो देखा जाएगा। बस लाइफ को एंजाय करो देखा जाएगा सब…”

मोम हँस देती है और मुझसे पूछती हैं- “तू यहां तक कैसे पहुँची?”

और मैं शुरू से उन्हें सब बताती हूँ। और हाँ इसने मुझे एक सी॰डी॰ दी थी जिसमें आपका सारा सेक्स रेकार्डेड था…”

मोम- “इसका मतलब… तुम जानती थी की मैं यहां आई हुई हूँ…”

मैं- “हाँ मोम… और मुझे तो ये भी पता है की कल रात आपने सफारी में आदित्य के दोस्तों के साथ क्या-क्या किया था?”

मोम चकित हो गई।

मैं- “पर आप चिंता मत करो मोम, एंजाय करो और कल हम दोनों चलेंगे उन शेखों के पास…”

मोम- “पर बेटा?”

मैं उनकी चूचियों को दबाते हुये- “पर वर कुछ नहीं, अब तो शर्माना छोड़ो मुझसे…” फिर हम घर पहुँच जाते हैं।

भाई- “हाय मोम, हाय सिस…”

मोम- “हाय बेटा…”

मैं- “हाय भाई…”

भाई- “आप लोग कहां गये हुए थे? और काफी थके हुए लग रहे हो…”

मैं- “हम एक प्रोजेक्ट पर काम कर रहे हैं, मुश्लिमों की बस्ती में जिंदगी सुधार का, वहीं गये थे इसलिए काफी थके हुए हैं…”

भाई- “ओके मोम, मैं अपने दोस्तों के साथ जा रहा हूँ। रात को घर नहीं आऊँगा…”

मोम- “ओके…”

मैं- “मोम, मैं आज आपके साथ सोती हूँ…”

मोम- “ठीक है बेटा…”

मैं- “मोम सच बताओ एक बात?”

मोम- “क्या?”

मैं- “आप अकरम के यहां कैसे पहुँची? और आप अपनी लाइफ को एंजाय कर रहे हो की नहीं?”

मोम- “हुआ ये था बेटा की जब तेरे डैड दुबई गये हुए थे, तब अकरम से उन्हें काफी पैसे लेने थे। तब तेरे डैड का सारा काम यहां मैं देखती थी। वो पेमेंट नहीं कर रहा था। एक बार मैंने काल की तो उसने मुझे पेमेंट लेने क्लब बुलाया। मैं तब नहीं जानती थी उसके बारे में कुछ। जब मैं वहाँ गई तो वहां बहुत लोग थे। वो मुझे अंदर रूम में ले गया और मेरी चुदाई की वहां पर। खिड़की से बहुत लोगों ने देखा और लौटते समय उसने मुझे पेमेंट कर दी। फिर वो मुझे अक्सर वहाँ बुलाता था। फिर कुछ दिन बाद मुझे भी अच्छा लगने लगा वहां…”

मैं- “कोई बात नहीं मोम, जो हुआ सो हुआ। ये बात हमारे बीच ही रहेगी हमेशा…”

मोम- “थैंक्स, और कल फिर उसने मुझे किसी शेख के पास भेजना है…”

मैं बात काटते हुए- “सिर्फ आपको नहीं हमें…”

मोम- “पर बेटा, मैं नहीं चाहती की तू वहां जाए, पता नहीं कैसे होंगे वो लोग?”

मैं- “देखा जाएगा। आप भी तो जा रही हो ना, जो होगा वो मिलकर देखेंगे…”

हम बात कर रहे होते हैं तभी अकरम की काल आती है।

मैं- “हेलो…”

अकरम- “हेलो जान, तुम्हें कल का प्लान बताना है…”

मैं- “हाँ बोलिए… और सुनिए, वो जो आंटी आज आई थीं, उन्हें भी इसी काल पर ले लीजिए हम दोनों मिलकर समझ लेंगे…”

अकरम मोम को कान्फ्रेंस पर ले लेता है।

मोम- “हेलो…”

अकरम- “सुनो, थोड़ी देर में तुम्हारे घर एक लड़का आएगा एक बैग लेकर, उसमें तुम्हारी और उस लड़की की ड्रेसेस हैं। कल सुबह 11:30 बजे तक तैयार हो जाना। मैं लेने आऊँगा तुम दोनों को, और उस लड़की को भी अपने घर ही बुला लेना और अच्छे से तैयार होकर आना…”

अकरम- “सुनो, थोड़ी देर में तुम्हारे घर एक लड़का आएगा एक बैग लेकर, उसमें तुम्हारी और उस लड़की की ड्रेसेस हैं। कल सुबह 11:30 बजे तक तैयार हो जाना। मैं लेने आऊँगा तुम दोनों को, और उस लड़की को भी अपने घर ही बुला लेना और अच्छे से तैयार होकर आना…”

मोम- “ओके…”

मैं- “ओके…”

30 मिनट बाद घर की कालबेल बजती है, मोम उठकर दरवाजा खोलती हैं। एक लड़का मोम के हाथ में एक बैग देकर चला जाता है। मोम वो बैग लेकर बेडरूम में आती हैं।

मैं- “मोम कौन था, और इस बैग में क्या है?”

मोम- “पता नहीं अकरम ने भेजा है…”

मैं- “ओके। खोलो, देखें क्या है?”

मोम बैग खोलती हैं, उसमें ड्रेसेस होती हैं। एक ब्लैक और रेड पारदर्शी, दूसरी ब्लैक और सिल्वर और दो ब्लाउज़ होते हैं एक ब्लैक और दूसरा रेड, दोनों ब्लाउज़ बहुत छोटे होते हैं ब्रा की तरह। उसमें महज 3 डोरियां होती हैं, दो बैक साइड में, एक कंधे पर, और दो पैंटी होती हैं, उसमें भी डोरी से ही बांधा जाता है और भी उसमें ड्रेस होती है। मुझे समझ में नहीं आता तो मैं मोम से पूछती हूँ।

मोम खोलकर देखती हैं, वो मुश्लिम ड्रेस बुर्क़ा होता है, उसके साथ चेहरे पर बांधने वाला ब्लैक स्कार्फ भी होता है, जो मुश्लिम औरतें पहनती हैं। हमें समझ में नहीं आता क्यों भेजा है?

 


फिर हम डिनर करके सो जाते हैं और मैं सुबह सोकर उठती हूँ तो मोम किचेन में नाश्ता बना रही होती हैं। मैं फ्रेश होकर नाश्ता करती हूँ।

मोम बोलती हैं- मैं नहाने जा रही हूँ…”

मैं भी अपने रूम में नहाने चली जाती हूँ। फिर मैं नहाकर कपड़े पहनकर बाहर जाकर बालकोनी में चली जाती हूँ और सिगरेट जलाती हूँ और कश लेने लगती हूँ। मेरी बालकोनी के सामने 7वें फ्लोर पर एक अपार्टमेंट है, वहाँ खड़े लोग मुझे घूर रहे होते हैं।

तभी मोम आती हैं- “बेटा तैयार हो जा 10:30 बज चुका है…”

मैं- “हाँ मोम, होती हूँ…”

मोम कपड़े लेकर मेरे रूम में आ जाती हैं। पहले वो मुझे 3 इंच हील वाली सैंडल पहनाती हैं, फिर पेटीकोट और फिर ब्लाउज़। ब्लाउज़ इतना छोटा होता है की मेरी आधी चूचियां भी उसमें सही से नहीं आतीं, फिर साड़ी लपेटती हैं टाइट से। मैं मिरर मैं खुद को देखती हूँ, लुक्स स्टनिंग। मोम भी अपनी साड़ी ऐसे ही बांधती हैं। और तभी मोम के मोबाइल पर अकरम की काल आती है।

अकरम- “हेलो…”

मोम- “हेलो…”

अकरम- “जान तैयार हो गई? और वो लड़की आई की नहीं?”

मोम- “आ गई, हम दोनों तैयार हो रहे हैं…”

अकरम- “सुनो, ड्रेस सेक्सी स्टाइल में पहनना, उनको इंडियन औरतें बहुत पसंद हैं, इसलिए कुछ अच्छा सा मेकप कर लेना…”

मोम- “ओके… पर वो बुर्क़े क्यों भेजे हैं?”

अकरम- “उसे अपनी ड्रेस के ऊपर ढंग से पहन लेना, सिर्फ आँखें दिखनी चाहिए। 12:00 बजे मैं लेने आऊँगा और फिर उनकी प्रेस कान्फ्रेंस में तुम दोनों को छोड़ आऊँगा, ताकी कोई तुम लोगों को पहचाने नहीं…”

मोम- “ओके, हम तैयार हो जाएंगे…”

और फिर मोम मेरा मेकप करने लगती हैं, रेड लिपिस्टिक, काजल, आई सैडो, ब्लशर और फिर खुद का भी मेकप करती हैं। और खुद ब्लू कान्टैक्ट लेन्स लगमैंती हैं, शी लुक्स टू हाट। फिर पता नहीं क्या सोचती हैं और मेरी कमर में साड़ी में हाथ डालकर मेरी साड़ी 2½-3” इंच नीचे कर देती हैं और अपनी भी। जिससे हमारी चूत से दो इंच ऊपर से हमारा पूरा हिस्सा विजिबल हो जाता है। फिर वो मुझे बुर्क़ा देती हैं की इसे पहन लो। हम बुर्क़ा पहनते हैं, और चेहरे पर स्कार्फ भी बाँध लेते हैं। हमारी सिर्फ आँखें दिख रही होती हैं। फिर वो चूड़ियां लाती हैं, मुझे पहनाती हैं, और खुद भी पहनती हैं। हम पूरी तरह तैयार हो जाते हैं।

मैं- “मोम, आप तो हाट मुश्लिम लेडी लग रही हो…”

मोम- “मुझसे ज्यादा तो तू हाट लग रही है बेटी…”

फिर 11:50 बजे कालबेल बजती है। मोम दरवाजा खोलती हैं। ड्राइवर गेट पर खड़ा होता है, जो हमें लेने आया होता है। हम लोग दरवाजा लाक करके बाहर निकल जाते हैं। बाहर हमारे कुछ पड़ोसी होते हैं, पर हमें कोई पहचान नहीं पाता। बाहर एक आडी कार होती है, हम उसमें बैठ जाते हैं। जहां अकरम पहले से होता है। वो हमारी आँखों को देखता ही रह जाता है।

अकरम- “आज तो बिजली गिर जाएगी उन शेखों पर…”

हम दोनों अंदर ही अंदर मुश्कुराते हैं, हमारी गाड़ी एक सेवेन स्टार होटेल में रुकती है।

अकरम उतरता है और हमें भी उतरने को कहता है। फिर हम होटेल के अंदर जाते हैं। वहां एक प्रेस कान्फ्रेंसे चल रही होती है, जो थोड़ी देर बाद खतम हो जाती है। अकरम हमें उस शेख से मिलवाता है। वो 4 शेखों का ग्रुप होता है, वो एक-एक करके हमसे हाथ मिलाते हैं, और वेलकम बोलकर हमें बैठने को बोलते हैं। थोड़ी देर बाद जब वो फ्री होते हैं तो हमारे पास आकर बैठ जाते हैं, और पूछते हैं- “खाना खा लिया?”

हम ना में सिर हिलाते हैं।

वो एक बंदे को बुलाते हैं, और कहते हैं- “ये हमारी रिलेटिव हैं, इन्हें हमारे रूम में ले जाओ और इनकी खातिरदारी करो…”

वो बंदा हमें एक सूट में ले जाता है, वहाँ 42” इंच का एल॰ई॰डी॰ टीवी लगा होता है। मैं उसे ओन करती हूँ तो उसपर उनकी कान्फ्रेंस की सी॰डी॰ चल रही होती है। वो लोग बहुत अमीर थे। तभी दरवाजा खुलता है और वो अंदर आते हैं। उनके नाम काफी लंबे होते हैं, पर मैं शार्ट में बताती हूँ।

पहला- अल फैजन

दूसरा- हैदर

तीसरा- फहीम

चौथा- कबीर

पांचवां- अल अयाज।

वो हमसे हमारा नाम पूछते हैं।

मैं- “आई एम मोनिका…”

मोम- “आंड आई एम राखी…”

फैजन कहता है- “हमारे घर में आपका तहे दिल से स्वागत करते हैं…” उनमें से 3 अरबी ड्रेस में होते हैं, दो सूट में।

अयाज कहता है- “अब तुम लोग बुर्क़ा उतार दो…” और पूछता है- “कुछ पीना चाहोगी?”

मोम मेरी तरफ देखती हैं, और मैं बोलती हूँ- “आप जो चाहे मंगा लें…”

तब अयाज काल करके रेड वाइन और चिकन मंगाता है। वो सभी हट्टे-कट्टे होते है, 5’10” से 6’2” उंचाई तक।

तभी दरवाजा नाक होता है और हमारी ड्रिंक्स आ जाती है। मैं, मेरी मोम और जो दो बंदे सूट में होते है, मैं उनकी ड्रिंक बनाती हूँ। अभी तक मैंने और मेरी मोम ने हिजाब ही खोला होता है। हम दो-दो पेग पीते हैं। तभी हैदर और फहीम मुझे अपने पास बुलाते हैं तो मैं उठकर उन दोनों के बीच बैठ जाती हूँ।

हैदर अपने होंठों मेरे होंठों पर रखता है और किस करता है- “सस्स्स्स्शह वाट आ पैसिनेट किसिंग… सच बहुत मजा आता है।

फहीम का हाथ मेरी कमर पर आ जाता है।

तभी फैजन और कबीर बाहर चले जाते हैं, और अयाज मोम का बुर्क़ा उतार देता है, फिर साड़ी और पेटीकोट। ऐसा ही मेरे साथ भी होता है। अयाज मोम को गोद में उठाकर लाता है और बेड पर पटक देता है, और फिर तीनों हमें चूमने चाटने लगते हैं।

तभी अयाज उठता है, अपना बैग खोलता है और कुछ हाथ में लेकर बेड पर आता है। फिर हम दोनों को खड़ा कर देता है, वो हमारी कमर में एक चैन बांधता है, जिसमें एक छोटा सा हीरा लगा होता है। सच बहुत प्यारा सा था, उसका ये गिफ्ट। फिर अयाज मुझे बेड पर लिटाता है और मेरे ब्लाउज़ की सारी डोरियां खोलकर उसे उतार फेंकता है। फिर वो एक आइस क्यूब उठाता है और मेरे माथे और चूचियों पर रगड़ते हुए मेरी नाभि पर छोड़ देता है। जब वो आइस पिघलती होती है तो मेरे लोवर पोर्षन में थिरकन सी होने लगती है। फिर वो नीचे हाथ करके मेरी पैंटी की भी डोरी खोलकर उसे फेंक देता है।

मैं महसूस करती हूँ की मेरे निप्पल्स बहुत ज्यादा टाइट हो रहे हैं, और फिर वो अपनी उंगलियों से मेरे निप्पल्स को पिंच करते हैं तो मैं दर्द से तड़प उठती हूँ- …आअह्ह्ह…”

मेरी नजर मोम की तरफ जाती है, तो मोम बारी-बारी दोनों का लण्ड चूस रही होती हैं।

और तभी अयाज एक उंगली मेरी चूत में डालकर उंगलीबाजी करने लगता है, और बीच-बीच में ‘जी-स्पाट’ को भी छूता है। कुछ ही मिनट में मैं अपना पानी छोड़ देती हूँ, जिसे वो रुमाल से साफ करता है और फिर अपना लण्ड निकालकर मुझे चूसने को कहता है। मैं देखते ही सहम जाती हूँ, उनके लण्ड का टाप बहुत ही ज्यादा मोटा और पत्थर जैसा होता है। मैं ऊपर से ही उनके लण्ड को चाटती हूँ, तो वो एकदम टाइट हो जाता है। फिर वो मेरे पैर फैलाता है और मेरी चूत से अपना लण्ड रगड़ता है, मुझे टीज करता है। मैं ऊपर की ओर अपनी गाण्ड उठाती हूँ, तो वो समझ जाता है की ये सही समय है, और मैं पूरी तरह से तैयार हूँ। फिर एक झटके से अपना लण्ड मेरी चूत में डाल देता है।

मैं ना चाहकर भी चीख पड़ती हूँ- “ओह्ह्ह… माँऽऽ मार डालाऽऽ…”

वो रुक जाता है। मैं थोड़ा ऊपर होकर देखती हूँ तो सिर्फ सुपाड़ा ही अंदर गया होता है। मैं उन्हें हटाने की कोशिश करती हूँ तो वो अपने दोनों हाथों से कसकर मेरे हाथ पकड़कर बेड पर टिका देता है। मैं कसकर बेडशीट को पकड़ लेती हूँ, तभी अचानक फिर से एक जोरदार झटका लगता है और मैं दर्द से बिलबिला जाती हूँ, मेरी आँखों से आँसू निकल आते हैं।

मोम और हैदर रुक कर हमें देखने लगते हैं।

तभी अयाज एक और झटका लगाकर रुक जाता है, तो उसका पूरा लण्ड मेरी चूत के अंदर चला जाता है। कुछ सेकेंड बाद सुपाड़े को छोड़कर पूरा लण्ड फिर से बाहर निकालता है और एक ही झटके में फिर अंदर डाल देता है।

मुझे लगता है जैसे उसका लण्ड मेरी चूत को चीर रहा है। मैं दर्द बर्दास्त करते हुए- “आह्ह्ह… आअह्ह्ह… उफफ्फ़… उफफ्फ़…” करती हूँ। ऐसा वो कोई बार करता है, और अब मैं भी नीचे से अपनी गाण्ड उठाकर उसे सपोर्ट करने की कोशिश करती हूँ

अयाज समझ जाता है की मैं तैयार हो गई हूँ और वो लण्ड डाले-डाले मेरी कमर में हाथ डालकर मुझे गोद में उठाकर खड़ा हो जाता है। मैं उसके गले में बाहें डालकर कस के पकड़ लेती हूँ और फिर वो मुझे उछाल-उछालकर लण्ड अंदर-बाहर करता है, 3-4 मिनट बाद वो मुझे फिर से लिटाकर फुल स्पीड में मुझे चोदने लगता है।

मैं- “आऽऽह्ह्ह… उफफ्फ़… उफफ्फ़…” करती रहती हूँ। मैं दो बार झड़ चुकी होती हूँ, और मेरा पानी मेरी जांघों पर बहने लगता है।

तभी अचानक उनकी स्पीड बढ़ जाती है और वो अंदर ही झड़ जाता है, मुझे महसूस होता है की मेरी चूत पूरी भर गई है उसके पानी से। फिर वो अपना लण्ड बाहर निकालता है। बाहर निकालते ही पक्क की आवाज आती है और उसका पानी मेरी जांघों पर बहने लगता है।

हम दोनों वहीं लेट जाते हैं और रिलैक्स होते हैं। एसी में भी मैं पशीने से तरबतर हो जाती हूँ।

उधर मोम बारी-बारी दोनों का लण्ड चूस रही होती हैं। मैं उठकर एक पेग बनाती हूँ, सिगरेट जलाती हूँ और मोम के पास आकर बैठ जाती हूँ। हैदर मोम की चूत सहलाने लगता है। मैं मोम को किस करती हूँ और अपने मुँह से उन्हें रेड वाइन पिलाती हूँ।

तभी फहीम कुछ आइस क्यूब लेकर आता है और मोम की चूत पर रगड़ने लगता है, और फिर वो आइस क्यूब को मोम की चूत में डाल देता है और मोम तिलमिला जाती हैं।

 
फिर फहीम अपना लण्ड मुझे चूसने के लिए कहता है, तो मैं सहम जाती हूँ उसका लण्ड देखकर। उसका लण्ड बहुत मोटा तो नहीं, पर ठीक-ठाक लंबा और कुछ ‘यू’ शेप में मुड़ा होता है। मैं अपना पेग पीकर उसका लण्ड चूसने लगती हूँ। तभी हैदर भी मेरे पास आ जाता है।

अब फहीम उठकर मेरी मोम के पास चला जाता है। वो मोम को बेड का कोना पकड़कर झुकने को बोलता है। मैं मोम के पास ही बैठ जाती हूँ। मोम झुक जाती हैं। फहीम अपना लण्ड मोम की गाण्ड पर लगाता है और धीरे से पुश करता है। मोम के मुँह से ‘इस्स्स्स’ की आवाजें निकलती हैं। धीरे-धीरे करके वो पूरा लण्ड अंदर को पुश करता है।

मोम को बहुत तेज दर्द होता है ‘आआह्ह्ह’। मैं मोम को किस करने लगती हूँ, कुछ सेकेंड के बाद वो पूरा लण्ड बाहर निकालता है और एक जोरदार धक्का मारता है।

मोम चीख पड़ती हैं- “आऽऽआह्ह्ह… मर गईई… निकाल लो…”

पर वो उनकी बात पर ध्यान नहीं देता है और फिर से एक जोर का धक्का लगाता है। वो मोम की गाण्ड पर थप्पड़ करने लगता है और जोर-जोर से झटके लगाने लगता है। मोम जितना चीखती हैं, वो उन्हें चूतड़ पर उतनी ही तेज से थप्पड़ मारता है।

मेरी समझ में ये नहीं आ रहा था की इसका लण्ड इतना मोटा नहीं है की मोम ले ना पाएं, तब भी मोम इतना चीख क्यों रही हैं?

उसके हर झटके से मोम आगे-पीछे हो रही होती हैं, और लगतार चीखती हैं- “आह्ह्ह… मर्रर गई… बस बस बस… प्लीज़्ज़… आई आम बेगिंग यू प्लीज़्ज़…”

6-7 मिनट बुरी तरह गाण्ड मारने के बाद वो झड़ जाता है तो मोम के चेहरे पर रिलैक्स की फीलिंग साफ-साफ दिखती है। मोम निढाल होकर बेड पर लेट जाती हैं। मैं आइस क्यूब उठाकर मोम की गाण्ड पर लगाती हूँ की उन्हें दर्द से थोड़ा आराम मिले। उनकी गाण्ड एकदम लाल हो गई होती है।

तभी हैदर दो-तीन आइस क्यूब्स और लाकर मोम की चूत में ठूँस देता है। मोम को कंपकंपी सी आने लगती है, और मोम की आँखें बंद हो जाती हैं, उनके चेहरा पर मिक्स फीलिंग होती है, दर्द और मजे की। मोम सीधे पैर फैलाकर लेटी होती हैं।

तभी अयाज वहां आता है और मोम के पैर के पास बैठ जाता है। मोम की साँसें तेज चल रही होती हैं, जिससे उनके बड़े-बड़े खरबूजे (चूचियां) ऊपर-नीचे हो रहे होते हैं। हैदर अपना लण्ड मोम की चूचियों के बीच रखकर चूचियों की चुदाई करता है, जिसकी रगड़ के कारण मोम की चूचियां भी लाल हो जाती हैं।

अब अयाज मोम की चूत को फैलाता है और उनके दोनों पैर हैदर को पकड़ने को बोलता है और फिर वो अपना लण्ड मोम की चूत पर रगड़कर उन्हें टीज करता है। ऐसा वो एक-दो मिनट तक करता है। इससे मोम अपनी गाण्ड आगे को करने लगती हैं, और मोम आँखें खोलती है। उन्हें देखकर ऐसा लगता है की वो अयाज से अंदर डालने की भीख माँग रही हों। अयाज मुश्कुराने लगता है।

मोम उससे बोलती हैं- “प्लीज़्ज़… प्लीज़्ज़… प्लीज़्ज़ डोंट टीज… प्लीज़्ज़… चोदो मुझे… चोदो मुझे एक कुतिया कि तरह प्लीज़्ज़…”

तभी वो एक जोरदार झटका मारता है तो उसका पूरा लण्ड मोम की चूत को चीरता हुआ अंदर चला जाता है। मोम की आँखें दर्द से फटी की फटी रह जाती हैं। मोम तड़पने लगती हैं, और फिर अयाज लण्ड को धीरे-धीरे अंदर-बाहर करता है। मोम को थोड़ा-थोड़ा मजा आने लगता है। और हैदर उनकी चूचियां दबाकर उनको और उत्तेजित करता है।

तभी मोम अयाज से कहती हैं- “चोदो मुझे… चोदो मुझे… और जोर से चोदो मुझे…”

अयाज अपनी स्पीड बढ़ा देता है। मोम फिर चिल्लाने लगती हैं- “चोदो मुझे… चोदो मुझे… चोदो मुझे हार्डर… हार्डर हार्डर फास्टर…” मोम की आवाजें तेज हो जाती हैं, और वो अपनी गाण्ड उठा-उठाकर उनका पूरा सपोर्ट करती हैं- “चोदो मुझे… चोदो मुझे… फक फक फक…”

तभी किसी चीज के दबाव से उसका लण्ड चूत से बाहर निकल जाता है, और मोम की चूत से एक तेज धार पानी की निकलती है। उन्हें बहुत तेज स्क्विर्टिंग होती है। मोम उत्तेजना में पूरी कांपने लगती हैं, और खुद अपना हाथ आगे करके उसका लण्ड फिर से अपनी चूत पर लगाती हैं। वो फिर से शाट लगाने लगते हैं, और 30-40 सेकंड बाद वो अपना लण्ड फिर से बाहर निकालता है। मोम को फिर स्क्विर्टिंग होती है। ऐसा दो-तीन बार और होता है और फिर अयाज उनकी नाभि पर अपना माल छोड़ देता है।

मोम बुरी तरह से काँप रही होती हैं। करीब 15 मिनट बाद मोम थोड़ा रिलैक्स होती हैं। हमें टाइम का ध्यान ही नहीं होता, शाम के 6:00 बज गये होते हैं।

फहीम हम दोनों को हमारा ब्लाउज़, पैंटी और बुर्क़ा पहनने को देते हैं। हम ब्लाउज़ और पैंटी पहनकर साड़ी उठाते हैं तो हैदर हमें मना कर देता है। हम अपना मेकप ठीक करते हैं। हैदर हमें इन्हीं कपड़ों के ऊपर बुर्क़ा पहनने को कहता है। फिर हम दोनों हिजाब बाँधते हैं।

फिर रूम सर्विस को बुलाता है, और कहता है- “रूम ढंग से साफ कर देना और बेडशीट बदल देना…”

फिर हमारी तरफ देखकर कहता है- “आप लोग तैयार होकर पूल साइड आ जाओ, हम वहीं आते हैं…”

हम वहां से निकलते हैं। मोम मुझसे थोड़ा आगे चली जाती हैं, पीछे से उनकी पैंटी लाइन विजिबल होती है, और उनकी गाण्ड हर कदम पे ऊपर और नीचे हो रही होती है।

मैं- “मोम, आपका चेहरा देखकर लग रहा है आपको बहुत मजा आया…”

मोम- “मजा तो आया बेटा, पर फहीम की गाण्ड चुदाई से मुझे बहुत ही ज्यादा दर्द हुआ था…”

मैं- “मोम, आप तो पहले भी ले चुकी हो वहां, तो फिर इतना दर्द क्यों?”

मोम- “तुझे अभी बहुत मजा आ रहा है ना? जब फहीम से चुदेगी ना तो सब पता चल जाएगा?”

मैं- “कुछ भी कहो मोम, मुझे तो मजा आया…”

मोम- “हाँ… तू दिन पर दिन और चुदक्कड़ होती जा रही है…”

मैं- “मोम, आखिर बेटी किसकी हूँ?”

तभी हम पूल पर पहुँच जाते हैं। वहां हमारा टेबल लगा होता है। तभी एक बंदा वहां आता है और हमसे पूछता है की कुछ लेंगी आप?

मैं- “हाँ वोडका और कुछ सिगरेटें…”

वो देखकर मुश्कुराता है और फिर चला जाता है। थोड़ी देर बाद वो सब कुछ टेबल पर रखकर हमें घूरकर देखता है, मुश्कुराता है, और चला जाता है।

शाम होने की वजह से पूल साइड पर ज्यादा लोग नहीं होते, हम अपना हिजाब थोड़ा सा खोलकर ड्रिंक करते हैं, और मैं सिगरेट के कश लगाती हूँ, आस-पास बैठे लोगों की नजर हम पर पड़ जाती है।

तभी अयाज, फहीम और हैदर आते हुए दिखते हैं। वो गेट पर खड़े हुए बाउंसर्स से कुछ कहते हैं, और हमारे पास आ जाते हैं। 30 मिनट बीतते हैं और वहां बैठे लोग धीरे-धीरे वहां से चले जाते हैं। फिर हैदर मोम से कहता है- डार्लिंग बुर्क़ा उतारो और पूल में आओ मेरे साथ…”

मोम- “पर मेरे पास तो स्विमिंग की ड्रेस भी नहीं है…”

हैदर- “जो पहना है उसे ही पहनकर आ जाओ…”

मोम- “पर यहां तो कोई भी आ सकता है…”

हैदर- “आता है तो क्या हुआ तुम आओ बस…” और हैदर मोम का बुरक़ा उतार देता है। फिर वो छोटे ब्लाउज़ और ब्रा में पूल में उनको उतार लेता है। और वो लोग स्वीमिंग करते हैं।

 


थोड़ी देर में कुछ और लोग भी पूल साइड आ जाते हैं, और अपनी-अपनी टेबल्स पर बैठ जाते हैं।

मोम और हैदर पानी में हँसी मजाक कर रहे होते हैं। तभी दिखता है की पूल में एक कपड़ा तैर रहा होता है, ओह्ह्ह… ये तो मोम का ब्लाउज़ था। मैं समझ जाती हूँ कि मोम और हैदर अब नंगे हैं, पर लाइट कम होने के कारण बहुत साफ-साफ नहीं दिख रहा था।

फहीम मेरे बुरके में हाथ डालकर मेरी चूचियां दबाता है, मुझे किस करता है। तभी हैदर बाहर आता है और मोम को पूल से बाहर आने को बोलता है। मोम कोने पर आकर रुक जाती हैं, बाहर नहीं आती। वो तौलिया लेकर खड़ा हो जाता है और कहता है की आकर ले जाओ।

मोम धीरे से बोलती है- “मैंने कुछ भी नहीं पहना है, जो पहना भी था वो आपने उतार दिया, बाहर कैसे आऊँ?”

हैदर कहता है- अब शर्माना क्या? आ जाओ।

मोम झेंपते हुए बाहर आती है और सबसे पहले अपने चेहरे पर हिजाब बांधती हैं, फिर नंगी ही अपनी बाडी को पोंछती हैं।

हैदर, फहीम और अयाज कहते हैं- “तुम लोग रूम में जाओ, हम अपना काम निपटाकर आते हैं…” और वो वहां से चले जाते हैं। हम वापस लौट रहे होते हैं। जब हम बाउंसर्स के पास से गुजरते हैं तो वो दोनों बाउंसर्स हमारी गाण्ड पर चपत लगाते हैं।

मोम- “आउच…”

मैं- “ऊवू…” मैं उनको घूरकर देखती हूँ तो वो आँख मारते हैं।

मोम- “मोना चलो यहां से…”

मैं- “ओके…” और हम रूम में आ जाते हैं।

मैं- “मोम मजा आ रहा है?”

मोम- “बेटा, मजा तो आ रहा है पर कोई हमें पहचान ना ले?”

मैं- “मोम, हमें ऐसे कैसे कोई पहचान लेगा? बिना टेन्शन के एंजाय करो, बाकी बाद में देखेंगे…” हम थक चुके होते हैं और सो जाते हैं।

रात 10:30 बजे वो लोग लौट आते हैं। फिर हम खाना खाते हैं। तभी रूमबाय खाना लेकर आता है और हमारी ओर ध्यान से देखता है। पहली बार किसी ने होटेल में हमारा चेहरा देखा होता है। मैं उसको स्माइल पास करके खाना खाने लगती हूँ।

आधे घंटे बाद फहीम मुझे लेकर बेड पर लेट जाता है और मुझे किस करने लगता है। मेरा बुर्क़ा उतारता है और मेरी चूचियां जोर-जोर से दबाता है, और दाँतों से निप्पल्स को काटता है। मेरे निप्पल्स का साइज 1½” इंच है, और हाफ इंच पफी है।

मैं- “इस्स्स्स… आअह्ह्ह… प्लीज़्ज़… धीरे, दर्द हो रहा है…”

फहीम- “यार, तुम झड़ बहुत जल्दी जाती हो, इस कारण मजा नहीं आ पाता…”

मैं- “तो मैं उसमें कुछ नहीं कर सकती ना… कंट्रोल ही नहीं हो पाता…”

तभी अयाज कोई ज़ेल जैसी चीज मेरी और मोम की चूत में डालता है और कहता है- “अपनी चूत को साँस खींचकर अंदर की ओर सिकोड़ो…”

हम वैसा ही करते हैं और चूत के अंदर कुछ थोड़ा ठंडा सा हो जाता है। मैंने पूछा- “ये क्या था?”

अयाज- “चिंता मत करो कुछ नहीं होगा…”

मेरी चूत में हल्की-हल्की खुजली सी होती है। हैदर मुझे लण्ड चूसने को बोलता है और मैं उनका लण्ड मुँह में ले लेती हूँ। फहीम चूत चाटता है और मुझे डागी पोज में आने को बोलता है, तो मैं एक हाथ से हैदर का पैर पकड़ती हूँ एक हाथ से बेड का कोना और झुक जाती हूँ।

फहीम अपना लण्ड पीछे से मेरी चूत पर लगाता है और ऊपर से रगड़ने लगता है, पर डालता नहीं। थोड़ी देर में मेरी उत्तेजना बढ़ने लगती है तो मैं हल्की सी अपनी गाण्ड आगे-पीछे करती हूँ। वो समझ जाता है की मैं बहुत ज्यादा गरम हो गई हूँ, और अपना लण्ड थोड़ा सा पुश करता है। मैं दाँत भींचकर साँस रोक लेती हूँ। वो थोड़ा सा और पुश करता है और मेरे मुँह से घुटी हुई चीख निकल पड़ती है ‘ऊऊओऽ’

फिर एक और धक्के में उनका लण्ड पूरा अंदर चला जाता है। मुझे थोड़ा एहसास होता है की इसका लण्ड मेरी चूत में काफी गड़ रहा होता है।

तभी मोम मेरे पास आकर बैठती है, और कहती है- “तू मुझसे पूछ रही थी ना की जब ये मेरी गाण्ड मार रहा था तो मुझे कैसा लग रहा था? अब तुझे पता चलेगा की मुझे दर्द क्यों हो रहा था?” और मेरी ओर देखकर आँख मारती है।

मैं कुछ नहीं समझ पाती, और फहीम से कहती हूँ- “आप रुक क्यों गये?”

फहीम- “नहीं, जब तक तू नहीं बोलेगी मैं कुछ नहीं करूँगा…”

मैं- “प्लीज़्ज़… प्लीज़्ज़ फक मी…”

फहीम- “सोच ले, अगर मैं एक बार करने लगा तो तू चाहे रोए चीखे मैं नहीं रुकूंगा…”

मैं- “ओके, नहीं रोकूंगी प्लीज़्ज़… चोदो मुझे…”

फहीम- “सोच ले एक बार फिर?”

मैं- “सोच लिया…”

फहीम धीरे से अपना लण्ड सुपाड़े तक बाहर खींचता है और एक जोर का धक्का देता है।

मैं- “उउइईई माँऽऽऽ मर गई…”

ऐसे ही दो-तीन झटकों के बाद उसकी स्पीड धीरे-धीरे बढ़ती है। मेरी चीखों की आवाजें तेज हो जाती हैं, अब मुझे एहसास होता है की मोम को इतना दर्द क्यों हो रहा था? उसका लण्ड टेढ़ा था, जो चूत के अंदर की दीवारों को बुरी तरह से रगड़ रहा होता है, ऐसा लगता है जैसे किसी ने उंगली टेढ़ी करके अंदर से घी निकालना हो। दर्द बहुत बुरी तरह से बढ़ जाता है, आँख से आँसू आ जाते हैं, जिसे मोम पोंछती है। फहीम की स्पीड बढ़ने लगती है और मेरी चीखें भी।

मैं- “आअह्ह्ह… आअह्ह्ह… प्लीज़्ज़… रुक जाओ… नहीं बर्दास्त कर पा रही मैं…”

फहीम रुकते हुए- “डार्लिंग, मैंने पहले ही तुमसे पूछा था, तुमने हाँ की तभी डाला, अब झेलो…” और वो जोर-जोर से झटके मारने लगा।

मैं- “आआह्ह्ह… आअह्ह्ह… आआह्ह्ह… उफफ्फ़… उफफ्फ़… बस बस बस… प्लीज़्ज़…” उसकी स्पीड से मेरी चूचियां बहुत तेजी से आगे-पीछे होने लगती हैं। बेड से मेरा हाथ छूट जाता है और मेरा पूरा ऊपर का शरीर बेड पर लेट जाता है, बस पीछे से गाण्ड उठी हुई होती है।

तभी वो मेरे बाल पकड़कर खींचता है और फुल स्पीड में चोदने लगता है, फट-फट फट-फट की आवाजें आने लगती हैं।

मैं बहुत बुरी तरह से थक चुकी होती हूँ, और मैं अब चीखती हूँ- “अब बस बस बस… अब और नहीं… हर धक्के पर ऐसा लगता है की मेरी चूत का मांस बाहर आ जाएगा… प्लीज़्ज़… प्लीज़्ज़ आई एम बेगिंग यू प्लीज़्ज़…”

फिर वो लण्ड को पूरा जड़ तक अंदर तक डालकर रुक जाता है। मुझे उसका फौवारा अपनी चूत में छूटता हुआ महसूस होता है। एक मिनट बाद वो अपना लण्ड बाहर निकाल लेता है, तब जाकर मुझे थोड़ी राहत सी महसूस होती है, मैं निढाल होकर बेड पर लेट जाती हूँ। पर मैं संतुष्ट नहीं हो पाई थी, क्योंकी इतनी देर की चुदाई में मैं एक बार भी झड़ी नहीं थी। 5 मिनट के आराम के बाद मैं सीधी हो जाती हूँ, मेरी साँसें बहुत तेज होती हैं, मेरी उत्तेजना अभी खतम नहीं हुई होती, और मैं उत्तेजना में बुरी तरह से काँप रही होती हूँ, और बेड पर अपनी गाण्ड उठा-उठाकर तड़पने सी लगती हूँ।

अयाज- “मुझे पता था कि ऐसा ही होगा तू झड़ेगी नहीं और अभी फिर से हमसे चुदने की भीख माँगेगी इस ज़ेल ने तेरा पानी बाहर आने से रोक दिया है…”

थोड़ी देर के लिए मैं उत्तेजना में बुरी तरह से तड़पने लग जाती हूँ जैसे पानी बिना मछली।

 
मैं बेड पर तड़प रही होती हूँ तभी अयाज आता है, अयाज- “क्या हुआ डार्लिंग मजा आ रहा है ना?”

मैं- “आप लोग क्यों कर रहे हो ऐसा मेरे साथ?”

अयाज- “हम कुछ गलत नहीं कर रहे, जब तुझ जैसी लड़की चुदने के लिए तड़पे, तब तुझे भी मजा आएगा और हमें भी…”

मैं- “प्लीज़्ज़… प्लीज़्ज़ चोदो मुझे… चोदो मुझे प्लीज़्ज़…”

अयाज- “एक शर्त पर?”

मैं- “हाँ… मैं आपकी कोई भी शर्त मानने के लिए तैयार हूँ प्लीज़्ज़… चोदो मुझे हार्ड… मुझे अपनी चूत में लण्ड चाहिए…”

अयाज मुझे उठाकर बाल्कनी में लाता है।

मैं- “मुझे यहाँ क्यों लाए हैं आप?”

अयाज- “अब मैं तुझे यहीं चोदूंगा…”

मैं- “प्लीज़्ज़… यहां नहीं, आस-पास सबको पता चल जाएगा…”

अयाज- “ये तू सोच? तुझे लण्ड चाहिए की नहीं?”

मैं- “ठीक है, पर प्लीज़्ज़… थोड़ा धीरे-धीरे कीजिएगा…”

तभी अयाज मुझे झुका कर रेलिंग पकड़ने को बोलता है, और मैं वैसा ही करती हूँ। वो पीछे से मेरी चूचियां कसकर पकड़ता है और अपना लण्ड मेरी चूत पर रखता है। फिर एक जोरदार धक्का देता है तो मेरे मुँह से चीख निकल जाती है- ‘आह्ह्ह…’

अयाज- “अगर तू इतनी जोर से चीखेगी तो सबको पता चल जाएगा…”

मैं- “मैं क्या करूँ? आपके लण्ड का सुपाड़ा पत्थर जैसा हार्ड है, और मोटा भी…”

अयाज धीरे-धीरे अंदर-बाहर करता है, और मैं सिसकियां लेती हूँ। तभी अयाज की स्पीड तेज हो जाती है साथ-साथ मेरी चूड़ियों की खनक और सिसकियां उसे और जोर-जोर से करने के लिए उकसाती हैं, और मेरी चूचियां फिर बहुत तेजी से ऊपर-नीचे होने लगती हैं। मैं दर्द की परवाह किए बिना अपनी गाण्ड पीछे करके उन्हें पूरा सपोर्ट करती हूँ और जोर-जोर से बोलने लगती हूँ- “चोदो मुझे… चोदो मुझे प्लीज़्ज़… डोंट स्टाप… चोदो मुझे हार्डर हार्डर हार्डर फास्टर…”

और उनकी स्पीड बढ़ती जाती है। फिर मेरी चूत के अंदर से एक धारा फूट पड़ती है, मैं झड़ने लगती हूँ, मुझे कंपकंपी छूट जाती है। तभी अयाज भी अपना पानी अंदर छोड़ देता है। फिर मुझे इतनी देर बाद एक सुखद सा एहसास होता है, यह एक अद्भुत मजा। फिर मैं थक कर वहीं बाल्कनी में बैठ जाती हूँ।

मैं थोड़ी देर बाद रूम में आई तो वहां हैदर मोम के शरीर से खेल रहा था। मैं वहीं जाकर लेट जाती हूँ और तभी फहीम एक वाइब्रेटर लेकर आता है और मोम के निप्पल्स पे लगाकर ओन करता है, मोम के निप्पल्स टाइट होने लगते हैं। तभी वो वाइब्रेटर मोम की नाभि पर रखा देता है तो मोम की कमर में थिरकन साफ दिखाई पड़ती है। फिर वो उसे मोम की चूत के दाने पर रखकर स्पीड बढ़ा देता है और मोम थरथराने लगती है और अपने पैर इधर-उधर करके रिएक्ट करती है।

तभी हैदर लेट जाता है और मोम को अपने ऊपर बैठने को बोलता है। मोम उसका लण्ड अपनी चूत पर लगाती है और धीरे-धीरे उसपर बैठने लगती है, और पूरा लण्ड अंदर ले लेती है। तभी हैदर उठकर बैठ जाता है। मैंने इस पोज में किसी को सेक्स करते हुए कभी नहीं देखा था। मोम सिटिंग पोज में ही उसकी कमर पर दोनों तरफ पैर डाले हुए आगे-पीछे होने लगती है, ये इंटिमेट सेक्स देखते ही बनता था… क्या जुनून (जोश) था, दोनों धीरे-धीरे आगे-पीछे हो रहे होते हैं, और दोनों एक दूसरे की आँखों में आँखें डाले जैसे पूरी दुनियां को भूल गये होते हैं। थोड़ी देर वैसे ही करने के बाद हैदर थोड़ी तेजी से आगे-पीछे होने लगता है।

तभी फहीम अपना लण्ड मोम के मुँह में देता है और मोम उसे चूसते-चूसते आगे-पीछे होने लगती हैं। तभी हैदर मोम को उठने को बोलता है और मोम उठ जाती है। फिर वो मोम की गाण्ड में दो उंगलियों डालकर आगे-पीछे करता है और मोम की पीठ अपने तरफ करते हुए उसकी गाण्ड पर अपना लण्ड रखता है और उन्हें बैठने को बोलता है। मोम धीरे-धीरे उसपर पूरा बैठ जाती हैं, और थोड़ा-थोड़ा हिलती है। मोम खुद आगे-पीछे होकर उसका लण्ड अंदर लेती है।

फहीम इशारे से हैदर को रुकने को बोलता है और अपना लण्ड मोम की चूत पर लगाता है और थोड़ा-थोड़ा आगे-पीछे होने लगता है।

मोम का चेहरा उनके दर्द का एहसास करा रहा होता है। तभी दोनों एक-एक कर अपनी स्पीड बढ़ाते हैं, एक बार फहीम धक्का लगता है और एक बार हैदर, और मोम दोनों के धक्के बर्दास्त कर रही होती है और अपने होंठों अपने दांत से काटने लगती हैं। पर थोड़ी ही देर में दोनों एक साथ धक्के लगाने लगते हैं।

मोम एक साथ दोनों लण्ड अंदर ले रही होती हैं, अब शायद ये दर्द वो बर्दास्त नहीं कर पाती और उनकी आँखें गीली होने लगती है और ‘आअह्ह्ह… आआह्ह्ह’ की आवाजें उनके मुँह से निकलती हैं। पर साफ पता चलता है की इस दर्द को अंदर से वो पूरा एंजाय कर रही होती हैं।

तभी हैदर झड़ जाता है और अपना लण्ड निकालकर बगल में लेट जाता है।

पर मोम भी अभी तक झड़ी नहीं होती है। फहीम मोम की आँखों में देखता है तो ऐसा लगता है कि मोम उससे जंगली चुदाई कि उम्मीद कर रही हों। वो मुश्कुराता है और मोम के दोनों पैर एक हाथ से चिपका कर मुझे पकड़ने के लिये बोलता है। इससे मोम की चूत अंदर से पूरी तरह से सिकुड़ जाती है और वो जोर-जोर से धक्के लगाने लगता है।

मोम चीखने लगती हैं, शायद उसका टेढ़ा लण्ड उन्हें बहुत दर्द देता है। फिर वो पूरा लण्ड बाहर निकालता है और एक झटके से दुबारा पेल देता है। ऐसा वो 8-10 बार करता है। मोम की जांघों से उनका पानी बहने लगता है और मोम झड़ चुकी होती हैं।

फहीम भी अंदर ही झड़ जाता है। दोनों निढाल होकर बेड पर लेट जाते हैं।

हमें कब नींद आ जाती है हमें पता ही नहीं चलता। सुबह 9:30 बजे मोम की नींद खुलती है मोम मुझे जगाती हैं, और कहती हैं- “उठो मोनिका 9:30 बज गये…”

मैं- “मोम सोने दो ना मैं बहुत थक गई हूँ…”

मोम- “तैयार हो जा, घर जाकर सो लेना…”

मैं उठ जाती हूँ और फ्रेश होकर बाहर आ जाती हूँ।

मोम- “जा नहा ले, घर चलना है…”

मैं- “ओके…” कहकर मैं नहाने चली जाती हूँ।

और तभी अयाज की काल आती है।

मोम- “हेलो…”

अयाज- “उठ गई…”

मोम- “जी हाँ…”

अयाज- “ठीक है तैयार हो जाओ थोड़ी देर में ड्राइवर आएगा और तुम लोगों को घर छोड़ देगा…”

मोम- “ओके थैंक्स, पर आप लोग कहां चले गये इतनी सुबह-सुबह?”

अयाज- “आज जरूरी मीटिंग्स हैं, आज हम बिजी हैं, फ्री होते ही काल करता हूँ…”

मोम- “ओके…”

 


तभी मैं नहाकर बाहर आ जाती हूँ, कपड़े पहनकर तैयार हो जाती हूँ, और मोम भी बिना ब्लाउज़ के साड़ी पहनी होती हैं, क्योंकी उनका ब्लाउज़ स्वीमिंग पूल में ही रह गया था। तभी रूम सर्विस का बंदा दरवाजा नाक करता है और पूछता है- मेम कुछ चाहिए क्या आपको?

मोम- “नहीं थैंक्स, अभी हमें जाना है…”

उसकी आँखें मोम की बड़ी-बड़ी चूचियों पर टिक जाती हैं।

मोम- “क्या देख रहे हो?”

रूम सर्विस- “कुछ नहीं मेम…” और वो मोम के हाथ में एक विजिटिंग कार्ड देता है और एक लिफाफा।

मोम- “ये क्या है?”

रूम सर्विस- “मेम, मुझे नहीं पता? ये हमारे एक कस्टमर ने आपको देने के लिए बोला था…”

मोम- “ओके…”

और वो लड़का वहां से चला जाता है।

मोम बुरक़ा पहन लेती हैं, और मैं भी। फिर हम हिजाब बाँधते है। तभी दरवाजा नाक होता है। मैं दरवाजा खोलती हूँ तो वो ड्राइवर होता है और पूछता है- “मेम आप तैयार हैं? मैं आपको छोड़ने आया हूँ…”

मोम- “हाँ चलो…” मोम के हर कदम से मोम की बड़ी-बड़ी चूचियां उछल-कूद मचा रही थीं। लाबी में बैठे हर बंदे को एहसास हो जाता है की मोम ने ब्रा नहीं पहनी हुई है। हम कार में आकर बैठ जाते हैं, और कार चल देती है।

ड्राइवर मुश्कुराते हुए- “क्यों मेम जी, हमारे साहब लोगों ने आप लोगों को मजा दिया की नहीं?”

मोम- “शट-अप… तुम गाड़ी चलाओ…”

मैं मोम को हाथ रखकर चुप रहने को बोलती हूँ और तभी वो हमारे घर के पास कार रोकता है और हमें एक पैकेट देकर चला जाता है। हम घर के अंदर जाते हैं, उस समय भाई घर पर ही होता है।

भाई- “हाय मोम, हाय दीदी…”

मैं- “हाय…”

भाई- कहां गये थे आप लोग? और आप लोगों ने ये क्या पहन रखा है?

मैं- “हम एक थीम पार्टी में गये थे, ये वहां का ड्रेस कोड था…”

भाई- “कैसी थीम पार्टी?”

मैं- “मेरी एक दोस्त के घर पर थी, परसों बकरीद है ना, उस वजह से दी गई थी…”

भाई- “ओके…”

हम रूम में चले जाते है, मोम बोली- “बेटा, आज तो बाल-बाल बच गये। क्या आइडिया आया तुमको? मुझे तो लगा हम फँस गये…”

मैं- “मोम, आप चिंता मत करो, मैं हूँ ना कुछ नहीं होगा…”

तभी हम वो पैकेट खोलकर देखते हैं और आँखें फटी की फटी रह जाती हैं, उसमें दो गोल्ड के सेट होते हैं और मोम तो खुशी से नाच उठती हैं।

मैं- “क्या बात है मोम, एक दिन की इतनी बड़ी कीमत?”

मोम- “सच… आई आम वेरी थैंकफुल टु यू…”

मैं- “मुझे क्यों?”

मोम- “अगर तू हाँ ना करती तो शायद मैं नहीं जाती उनके पास…”

मैं- “एक बात है मोम?”

मोम- “क्या?”

मैं- “इतना ढेर सारा मजा और इतने महंगे गिफ्ट भी…”

मोम- “सब तेरी ही वजह से है…”

मैं- “और मोम वो रूम सर्विस वाला लड़का क्या देकर गया था आपको?”

मोम- “पता नहीं, मैंने तो खोलकर भी नहीं देखा?”

मैं- “देखो तो है क्या वो?”

मोम- “ओके…” फिर मोम वो पैकेट खोलती हैं। उसमें एक लेटर होता है,

डियर मेम,

मैंने आज आप लोगों को पूल साइड पर देखा। सच आप जैसी बिंदास लेडीस आज तक नहीं देखी। सच में आप लोगों पर फिदा हो गया हूँ, आपसे एक रिक्वेस्ट है। मेरा विजिटिंग कार्ड अंदर है। प्लीज़्ज़… आप एक बार मुझसे बात कर लो, प्लीज़्ज़… प्लीज़्ज़… प्लीज़्ज़। मोम वो लेटर पढ़कर पर्स में वापस रख लेती हैं और हम जाकर सो जाते हैं, शाम को मोम चाय बनाकर लाती हैं। हम दोनों चाय पीते हैं।

मैं- “सच बताओ मोम, कैसा लगा कल रात का थ्रिल?”

मोम- “सच बताऊँ तो बहुत मजा आया, और जब से तू मेरे साथ आई है ना मजा बढ़ गया है…”

मैं- “वो क्यों?”

मोम- “ये सोचकर की मैं अपनी ही बेटी के सामने बेशर्मी से चुदवा रही हूँ…”

मैं- “सच बताऊँ तो आपको देखकर ही मैंने सेक्स को सही से एंजाय किया…”

तभी अयाज की काल आती है।

मोम- “हेलो…”

अयाज- “कैसी है?”

मोम- “बस आप लोगों का प्यार है जो जी रही हूँ…”

अयाज- “हाँ… एक बात बताओ?”

मोम- “क्या?”

अयाज- “तुम दोनों जाब करोगी मेरी कंपनी में, जिंदगी बन जाएगी…”

मोम- “पर हमने तो कभी जाब की भी नहीं, कैसे कर पाऊँगी?”

अयाज- “तो अब करके देख और उस लड़की को भी जाब दे देता हूँ तेरे साथ…”

मोम- “ठीक है, मैं अपनी बेटी से बात करके बताती हूँ…”

अयाज- “बेटी से?”

मोम- “नहीं, मेरा मतलब है उस लड़की से…”

अयाज- “ठीक है, सोच ले?”

मोम- “पर हमें करना क्या होगा?”

 


अयाज- “कुछ खास नहीं, तुम लोगों को कंपनी के लिए कांट्रैक्ट फाइनल करवाने होंगे, पोलिटिकल लीडर्स और हाई लेबल अथारिटीस से, और मैं ये जानता हूँ कि तुम लोग कर लोगी। अब हम दुबई वापस जा रहे हैं, 10 दिन बाद आएंगे तब-तक सोच लेना…”

मोम- “ओके बाइ…”

मैं सब कुछ सुन चुकी थी- “मोम, वो सुबह लिफाफे में क्या था? किसका लेटर था?

मोम- “पता नहीं बेटा? कोई लटर था जिसमें लिखा था की वो हमसे बात करना चाहता है।

मैं- “तो क्या आपने बात की?”

मोम- “कल कर लूँगी…”

मैं अपने रूम मैं चली जाती हूँ और बाल्कनी में जाकर सिगरेट पीने लगती हूँ, तभी मेरा भाई आता है और बगल में खड़ा हो जाता है।

मैं- “क्या हुआ?”

भाई- “कुछ नहीं दीदी…” वो मुझसे चिपक कर खड़ा होता है, उसकी कुहनी मेरी चूचियों से छू रही होती है।

मैं- “कुछ तो बात है?” मैं अपना एक हाथ उसके कंधे पर रखकर पूछती हूँ।

भाई- “दीदी आप बुरा ना मानो तो एक बात पूछूं?”

मैं- “हाँ… पूछो…”

भाई- “दीदी आपका रेहान के साथ कुछ चल रहा है क्या?”

मैं- “मैं समझी नहीं?”

भाई- “कालेज़ में लड़के बोल रहे थे की तेरी गर्लफ्रेंड को रेहान…”

मैं- “रेहान क्या?”

भाई- “की मेरी गर्लफ्रेंड अब रेहान का बिस्तर गरम करती है…”

मैं- “तो ये बात तू अपनी गर्लफ्रेंड से पूछ ना, मुझसे क्यों पूछ रहा है?”

भाई- “दीदी, वो गर्लफ्रेंड आप ही तो हो, जो मेरे साथ उस दिन डिस्को गई थी, तब वो मिला था ना?”

मैं- “मेरा उसके साथ कुछ नहीं चल रहा…”

फिर मेरा भाई मुझे दो फोटोस दिखाता है। एक में मैं बाइक पर नंगी लेटी होती हूँ, दूसरी में वो मेरी चूचियां दबा रहा होता है। दोनों पिक्स में मेरी आँखें बंद होती हैं। मैं उसे कोई जवाब नहीं दे पाती।

भाई- “रेहान के सारे दोस्तों के मोबाइल में ये पिक्स हैं…”

मैं- “ओके, मैं रेहान से बात करूँगी की उसके पास मेरे ऐसी पिक्स कहां से आई?”

भाई- “नहीं दीदी, मत करना…”

मैं- “क्यों?”

भाई- “वो लोग मेरी गर्लफ्रेंड का गैंगबैंग का प्लान कर रहे हैं, आप मुसीबत में फँस जाओगी…”

मैं- “ओके… मैं सोचती हूँ कुछ और? हाँ तुझसे एक काम है…”

भाई- “क्या?”

मैं- “जा एक बोतल विस्की, रोस्टेड चिकन और सिगरेट ले आ, आज पार्टी करते हैं…”

भाई- “पर मोम?”

मैं- “उन्हें मैं देख लूँगी…”

एक घंटे बाद भाई सब कुछ लेकर लौट आ जाता है। मैं अपने रूम मैं शार्ट्स और टी-शर्ट पहनकर टीवी देख रही होती हूँ। वो टेबल पर सब लगाता है और ड्रिंक बनाता है। फिर हम 4-4 पेग पी चुके होते हैं। हम दोनों एक दूसरे से थोड़ा खुल चुके होते हैं।

भाई- “दीदी सच बताओ, आपने रेहान के साथ सेक्स किया है क्या?”

मैं- “हाँ किया है, पर मुझे नहीं पता उसने ये पिक्स कब ली?”

भाई- “फिर तो दीदी एक प्रोब्लम होगी?”

मैं- “क्या?”

भाई- “दीदी, वो गुंडे लड़के हैं, आपको छोड़ेंगे नहीं…”

मैं- “मैं समझी नहीं?”

भाई- “वो कुछ भी करके आपका गैंगबैंग कर देंगे…”

मैं आँख मारते हुए- “तुम चिंता मत करो मैं देख लूँगी…”

भाई- “वैसे दीदी, एक बात बोलूं?”

मैं- “क्या?”

भाई- “आप हो मस्त माल, आपको देखकर किसी का भी खड़ा हो जाएगा…”

मैं मुश्कुराते हुए- “अच्छा… ऐसा क्या है मुझमें?”

भाई- “आपकी चूचियां, आपकी गाण्ड… जब आप चलती हो ना तो कितने ही घायल हो जाते होंगे…”

मैं- “अच्छा बच्चू, अपनी दीदी पर नजर रखता है तू?”

भाई- “क्या करूँ? आपको देखकर ही खड़ा हो जाता है मेरा…”

मैं- “लाओ देखूं कितना बड़ा हो गया है तू?” और मैं उसकी जीन्स के ऊपर से उसका लण्ड सहलाती हूँ, उसकी जीन्स नीचे करके उसका लण्ड अपने हाथ से सहलाने लगती हूँ। फिर उसका लण्ड मुँह में लेकर चूसती हूँ।

भाई- “दीदी, आप एकदम पोर्न-स्टार की तरह चूसती हो लण्ड…” कहकर वो मेरी टी-शर्ट के ऊपर से मेरी चूचियां दबाने लगता है, मुझे बेड पर ले जाता है, मेरी टी-शर्ट उतार देता है और मेरे निप्पल्स चूसने लगता है। थोड़ी देर बाद वो मेरी शार्ट्स भी उतार देता है।

मैंने पैंटी नहीं पहनी होती तो वो कुत्ते की तरह जीभ से मेरी चूत चाटने लगता है। उसका लण्ड पूरा टाइट हो चुका होता है।

भाई- “दीदी अब मैं डालूं क्या?”

मैं- “अब नंगा तो कर ही लिया है तूने, तो अब डालकर अपनी इच्छा भी पूरी कर ले…”

भाई- “थैंक्स दीदी…” फिर वो मेरी गाण्ड को थोड़ा ऊपर उठाकर अपना लण्ड मेरी चूत पर रखता है और एक तेज धक्का मारता है।

मैं चीख पड़ती हूँ- “आह्ह्ह… मार डालेगा क्या मुझे?” मैं बहुत ज्यादा दर्द होने का नाटक करती हूँ ताकी उसको शक ना हो।

भाई- “सारी दीदी, मैंने आपको हर्ट किया हो तो…”

मैं- “ठीक है…”

फिर वो धीरे-धीरे धक्के लगाने लगता है, फट-फट, फट-फट। मैं मोन करने लगती हूँ, और नीचे से गाण्ड उछाल-उछालकर उसे एहसास कराती हूँ की मैं बहुत उत्तेजित हो गई हूँ। फिर वो धक्के तेज कर देता है।

मेरे मुँह से- “अया… आअह्ह्ह… चोदो मुझे… आदी चोदो यार, जोर-जोर से मुझको चोदो…” बोलने लगती हूँ।

तभी वो रुक कर मेरी दोनों टांगों को अपने कंधों पर रखकर धक्के लगाने लगता है।

और मैं भी चीखने लगती हूँ- “फक फक फक… चोदो मुझे एक कुतिया की तरह भाई…” और मैं झड़ जाती हूँ। भाई भी मेरे अंदर ही झड़ जाता है। मुझे एक अजीब सी फीलिंग आती है की मेरे भाई का माल मेरी चूत में है।

जब मैं सुबह सोकर उठती हूँ तो देखती हूँ की नंगी हूँ, और मेरा भाई मेरे बगल में ही नंगा सो रहा है। मुझे रात की सारी बातें याद आने लगती हैं।

 
डीयर फ्रेंड्स आज का अपडेट कैसा रहा

आपके रिस्पोन्स के इंतजार में
 
जब मैं सुबह सोकर उठती हूँ तो देखती हूँ की नंगी हूँ, और मेरा भाई मेरे बगल में ही नंगा सो रहा है। मुझे रात की सारी बातें याद आने लगती हैं।

मैं ड्रेसअप होकर रूम से बाहर निकलती हूँ तो मुझे बाहर मोम मिल जाती हैं।

मोम- “तू यहां क्या कर रही है?”

मैं- “मैं आदित्य को जगाने आई थी, कालेज़ जाने के लिए…”

मोम- “ओके…”

मैं वहां से अपने रूम में चली जाती हूँ। थोड़ी देर बाद जब आदित्य भाई उठकर नहीं आता तो मोम उसके रूम में जाती हैं। वो अभी भी नंगा सो रहा होता है। वो उसे इस हालत में देखकर वापस आ जाती हैं पर उसे कुछ नहीं बोलती।

मैं तैयार होकर नाश्ता करती हूँ।

तब तक आदित्य तैयार होकर आ जाता है, कहता है- “हाय दीदी…”

मैं- “हाय…”

भाई आँख मारते हुए- “रात मजा आया ना दीदी?”

मैं- “चुप कर… मोम सुन लेगी तो मैं और तू दोनों पिटेंगे?”

भाई- “ओके दीदी तैयार हो जाओ कालेज़ के लिए…”

मैं- “हाँ चल…”

मैं- “मोम, मैं जा रही हूँ बाइ…”

मोम- “बाइ बेटा…”

मैं आदित्य के साथ बाइक पर चिपक कर बैठी हूँ कालेज जाने के लिए, मैं वहां ब्रेक में कैंटीन में बैठी हुई होती हूँ तभी रेहान आता है।

रेहान- “हाय…”

मैं- “हाय…”

रेहान- “क्या बात है आजकल तुम मुझसे सीधे मुँह बात क्यों नहीं करती?”

मैं- “तुम्हें पता है, क्यों नहीं करती?”

रेहान- “मैंने क्या कर दिया ऐसा?”

मैं- “अब ज्यादा बनो मत? उस रात तुमने मेरी नंगी पिक निकाली और अपने सब दोस्तों को भेज दी…”

रेहान- “मैंने नहीं भेजी। मेरे एक दोस्त ने मेरा मोबाइल लिया था काल करने के लिए, उसी ने किया ये सब…”

मैं- “तब भी गलती तुम्हारी थी, क्यों ली थी तुमने मेरी नंगी पिक?”

रेहान- “सारी बेबी, गलती हो गई अब माफ भी कर दो…”

मैं दया दिखाते हुए- “यार अगर मेरे घरवालों को पता चल गया तो बड़ी प्रोब्लम हो जाएगी…”

रेहान- “कुछ नहीं होगा मैं सब सही कर दूँगा…”

मैं- “ओके, मैं अभी चलती हूँ…”

रेहान- “फिर कब मिल रही हो?”

मैं- “मैं बताती हूँ काल करके…”

***** *****

तभी अकरम की काल आती है- “हेलो…”

मैं- “हेलो…”

अकरम- “जान क्या बात है तुम तो हमें भूल ही गई…”

मैं- “नहीं, ऐसी कोई बात नहीं है। जहां आपने भेजा था वहां से आने के बाद टाइम ही नहीं मिला…”

अकरम- “हाँ… उनकी काल आई थी वो बहुत खुश हैं तुम लोगों से…”

मैं- “जी, काफी अच्छे लोग हैं वो…”

अकरम- “तो कब आ रही हो इधर भी?”

मैं- “दो-तीन दिन में आती हूँ एग्जाम भी आने वाले हैं मेरे…”

अकरम- “ओके, जल्दी आना बाइ…”

मैं- “बाइ…” फिर मैं घर लौट आती हूँ,

मैं- “मोम खाना दे दो बहुत भूख लगी है…”

मोम- “ला रही हूँ…”

मोम खाना लगाती है- “मोना, आज तुम सुबह आदी के रूम में गई थी जगाने?”

मैं- “हाँ… मोम…”

मोम- “तुम जानती थी की वो पूरा नंगा सोया हुआ था…”

मैं- “नहीं मोम, मैं तो बस बाहर से आवाज लगाकर आ गई थी…”

मोम- “ध्यान रखा करो थोड़ा, अब वो जवान हो गया है…”

मैं- “जी मोम, और हाँ मोम आपने उस लेटर वाले नंबर पर काल की थी?”

मोम- “नहीं…”

मैं- “एक बार करके तो देखती की कौन है? कहीं वो हमारे बारे में जान तो नहीं गया ना?”

मोम- “ठीक है तुम ही बात कर लो…” मोम ने मुझे वो कार्ड देते हुए कहा।

मैं खाना खाने के बाद काल करती हूँ, दूसरी तरफ से कोई विशाल नाम का लड़का बोल रहा होता है।

मैं- “हेलो…”

वो लड़का- “हेलो, आप कौन?”

मैं- “वो कल होटेल में हमें कोई आपका कार्ड दे गया था…”

वो लड़का- “जी जी… मैं विशाल बोल रहा हूँ, मैं आप लोगों से एक बार मिलना चाहता था…”

मैं- “किस सिलसिले में?”

विशाल- “जी, इस तरह फोन पर बात नहीं हो सकती। प्लीज़्ज़… आप एक बार मिल लो, मैं मिलकर आसानी से समझा पाऊँगा…”

मैं- “ओके, कहाँ मिलना है?”

विशाल- “उसी होटेल में पूल साइड, कल डिनर पर मिलते हैं…”

मैं- “ओके, हम आते हैं कल…”

विशाल- “ओके बाइ…”

मैं- “मोम, कोई विशाल था। कह रहा था कोई जरूरी बात है। हमें कल डिनर पर बुलाया है…”

मोम- “कहां?”

मैं- “उसी होटेल में पूल साइड पे…”

मोम- “ओके, कल वहीं चलकर देखते हैं कि क्या सीन है?”

मैं- “ओके मोम, मैं सोने जा रही हूँ, गुड नाइट…”

मोम- “गुड नाइट…”

सुबह जब मैं उठकर तैयार होती हूँ, तो लोंग मिडी पहनती हूँ और स्लीवलेश टाप और स्टाल डाला, फिर मोम से पूछा- “मोम मोम, आदित्य कहां गया? मैं कालेज़ को लेट हो रही हूँ…”

मोम- “बेटा, वो तो जल्दी निकल गया था…”

मैं- “ओह्ह्ह… हो… बताना तो चाहिए था। मैं कालेज को लेट हो रही हूँ, मैं चलती हूँ बाइ…”

मैं चौराहे पर आकर आटो रोकती हूँ, पर कोई आटो खाली नहीं मिलता। फिर सोचती हूँ, लगता है बस से ही जाना पड़ेगा और बस का इंतेजार करने लगती हूँ। तभी एक बस आती दिखाई पड़ती है, पर उसमें काफी भीड़ होती है। मैं उसपर नहीं चढ़ती, थोड़ी देर बाद एक और बस आती है उसमें भी काफी भीड़ होती है तो मैं थोड़ा सोचती हूँ। फिर चढ़ जाती हूँ और किसी तरह धक्के खाते हुए अंदर आ जाती हूँ। वहां तो हिलने की भी जगह नहीं होती। वहां सबके बदन एक दूसरे से सटे हुए थे।

बस चल देती है थोड़ी देर बाद मुझे अपने चूतड़ों पर किसी के हाथ महसूस होते हैं तो मैं हल्का सा पीछे मुड़कर देखती हूँ। तो एक चीप टाइप रोमियो मुश्कुरा रहा होता है मुझे देखकर। मेरी समझ में नहीं आता क्या करूँ? तभी वो मेरे चूतड़ों को सहलाने लगता है। मैं थोड़ा सा हिलती हूँ तो मेरी चूचियां आगे खड़े लड़के की पीठ पर रगड़ जाती हैं तो वो मेरी तरफ देखता है।

और तभी पीछे वाले लड़के का हाथ मेरी चूत के पास सहलाने लगता है मिडी के ऊपर से ही।

मैं कसमसाहट में फिर आगे को होती हूँ तो मेरी चूचियां फिर आगे वाले को रगड़ जाती हैं, तो उसे लगता है की मैं जानबूझ कर रगड़ रही हूँ। फिर वो मेरी तरफ मुँह करके खड़ा हो जाता है और धीरे से मेरी कमर में हाथ डालकर सहलाने लगता है।

 


मैंने उससे धीरे से कहा- ये क्या कर रहे हो?

तो वो मेरे कान में बोला- “आप ही तो जानबूझ कर अपनी बाडी मुझसे रगड़ रही थीं…”

मैं बोली- “नहीं, वो तो पीछे से धक्का आ रहा था…”

तभी उसने पीछे वाले लड़के को मेरे चूतड़ों को सहलाते हुए देख लिया, और बोला- “अगर चिल्लाओगी तो तुम ही बदनाम होगी, हम तो कह देंगे की बस में भीड़ के कारण गलती से टच हो गया। इसलिए अच्छा है की चुप रहो और हमें थोड़ा मजा ले लेने दो…”

मुझे लगा की अगर मैं कुछ बोलूँगी भी तो फायदा क्या होगा? मैं चुप हो गई और वो लोग समझ गये की मेरी तरफ से हाँ है, और फिर आगे वाले लड़के ने मेरे स्टाल से मेरी चूचियों तो थोड़ा ढका दिया और नीचे से हाथ डालकर मेरी चूचियां ब्रा के ऊपर से दबाने लगा, और ब्रा के ऊपर से मेरे निप्पल्स को पिंच करने लगा। मेरे चेहरा के भाव बदलने लगे थे।

तभी पीछे वाले लड़का पीछे से मेरी मिडी को ऊपर की ओर उठाने लगा। मैंने उसे धीरे से मना किया- “ऐसा मत करो, कोई देख लेगा…”

वो बोला- “कोई नहीं, कोई नहीं देख पाएगा…” और उसने मेरी मिडी मेरी कमर तक उठा दी और पैंटी के ऊपर से चूत सहलाने लगा।

मैंने आँखें बंद कर ली और तभी वो मेरी पैंटी में हाथ डालकर मेरी चूत को सहलाने लगा। अभी आगे वाला लड़का मेरी ब्रा में हाथ डालकर मेरे निप्पल्स पिंच करने लगा। मैं बदनाम ना होने के डर से ये दर्द मुँह के अंदर ही बर्दास्त करने लगी। पर मेरा चेहरा देखकर कोई भी आइडिया लगा सकता था, क्योंकी मेरे चेहरे पर दर्द और उत्तेजना साफ-साफ झलक रही थी।

तभी पीछे वाले लड़का अपनी एक उंगली मेरी चूत में डालकर अंदर-बाहर करने लगा, और वो आसानी से अपनी उंगली आगे-पीछे करने लगा। तभी उसने दूसरी उंगली भी अंदर डाल दी तो मेरे मुँह से ‘आह्ह्ह… सस्सिईइ…’ की आवाज निकल गई। मेरे पैर बुरी तरह से काँपने लगे थे। और ऐसा ही वो 5-6 मिनट तक करता रहा। पिर मैं झड़ गई, मेरा पानी मेरी जांघों पर बहने लगा और मैंने हाथ नीचे करके अपनी ड्रेस सही की और उनके हाथ झटक कर आगे गेट पर आकर खड़ी हो गई।

तभी मेरा स्टाप आ गया, और मैं उतरकर कालेज चली गई। एक क्लास अटेंड करने के बाद मेरा पीरियड खाली होता है तो मैं कैंटीन में चली जाती हूँ। मैं काफी चुदासी महसूस कर रही थी।

तभी वहां रेहान भी आ जाता है- “क्या हो रहा है मोना?”

मैं- “कुछ नहीं, क्लास फ्री थी तो यहां आ गई…”

रेहान- “अरे कभी हमें भी टाइम दे दिया करो?”

मैं- क्यों कोई काम था क्या?”

रेहान- “जब तुम सामने हो तो काम लगने का ही तो मन होता है बस…”

मैं- “क्या?”

रेहान- “कुछ नहीं चलो छत पर चलकर टहलते हैं, काफी अच्छा मौसम है…”

मैं- “ओके…” फिर हम वहां से निकलकर छत पर चले जाते हैं।

रेहान- “मोना, तुमने तो मुझसे मिलना ही बंद कर दिया…”

मैं- “नहीं, ऐसी कोई बात नहीं है…”

रेहान- “मोना, सच मैं तुमसे बहुत प्यार करता हूँ…”

मैं- “करती तो मैं भी हूँ, पर डर लगता है कि कहीं बदनाम ना हो जाऊँ कालेज में…”

रेहान- “सारी उस दिन की गलती के लिए…”

मैं- “ओके…”

रेहान मुझे अपने पास खींचता है और मुझे लिप-किस करने लगता है। मैं भी उसे पूरा सपोर्ट करती हूँ, 5 मिनट बाद वो मुझसे अलग होता है।

मैं- “प्लीज़्ज़… रेहान, यहां नहीं कोई देख लेगा हमें…”

रेहान- “ओके, वहां कोने पर स्टोर रूम है। वहां कोई नहीं आता, वहां चलते हैं…”

मैं- “पर रेहान?”

रेहान- “तुम चिंता मत करो, कोई नहीं आएगा वहां…”

मैं- “ओके…” और हम स्टोर रूम में जाते हैं, और वहां टूटी फूटी बेंचेस और चेयर्स पड़ी होती हैं।

वहां पहुँच कर वो फिर से मुझे किस करता है और मेरी चूचियां कपड़ों के ऊपर से दबाता है। कुछ मिनट बाद वो एक बेंच को सही करता है, मेरा टाप उतार देता है, और मुझे लिटा देता है। मैं बेंच पर पूरी नहीं आ पाती तो फिर वो मेरी मिडी में हाथ डालकर मेरी पैंटी उतार देता है और मेरी मिडी में मुँह डालकर चूत चाटने लगता है। 5 मिनट बाद मैं हाट महसूस करने लगती हूँ। तभी वो मिडी मेरी कमर तक उठा देता है और मेरे पैर फैलाकर अपना लण्ड मेरी चूत पर रगड़ने लगता है, और दोनों हाथों से मेरी एक-एक चूचियां ब्रा के ऊपर से ही पकड़ता है और जोर का झटका मारता है।

मेरे मुँह से ‘आअह्ह्ह’ निकल जाती है। मुझे खिड़की मैं किसी की परछाई का एहसास होता है, पर मैं उसकी चुदाई में सब भूल जाती हूँ। वो बहुत तेज-तेज धक्के लगाने लगता है, और मैं बस ‘आआह्ह्ह… आआह्ह्ह…’ करके रह जाती हूँ और झड़ जाती हूँ।

तभी वो मुझे बेंच पकड़कर झुकने को बोलता है और अपना लण्ड पीछे से मेरी चूत में डाल देता है। झुकने से मेरी चूचियां लटकने लगती हैं, जिन्हें वो पकड़कर धक्के लगाने लगता है, और थोड़ी देर बाद झड़ जाता है। मैं अपनी ड्रेस ठीक करके क्लास अटेंड करने चली जाती हूँ।

तभी मुझे एहसास होता है की मैं अपनी पैंटी तो वहीं भूल गई। मैं वापस स्टोर रूम की तरफ जाती हूँ। तभी मुझे रास्ते में मेरा भाई मिल जाता है, और मुझसे घर चलने के लिए पूछता है। मैं उसके साथ घर लौट आती हूँ।

फिर 5:00 बजे मोम आती हैं और पूछती हैं- चलना है क्या?

मैं- “कहां?”

मोम- “तुमने ही तो काल पर किसी को बोला था की हमें किसी से मिलने जाना है…”

मैं- “ओह्ह्ह… हाँ मोम, भूल गई थी। आप तैयार हो जाओ, चलना है…”

मोम- “ओके, मैं तैयार होती हूँ तुम भी हो जाओ…”

मैं- “ओके…”

फिर हम तैयार होकर होटेल के लिए निकल जाते हैं। मैं उस लड़के को काल करती हूँ- “हेलो…”

वो लड़का (विशाल)- “हेलो…”

मैं- “हम निकल चुके हैं, थोड़ी देर में होटेल पहुँच जाएंगे…”

विशाल- “ठीक है, आप आ जाओ…”

हम लोग होटेल पहुँच कर पूल साइड जाकर एक टेबल पर बैठ जाते हैं।

तभी एक 20-21 साल का लड़का हमारे पास आता है, उसके साथ 4 सेक्योरिटी गार्ड होते हैं। और वो उन्हें वहां से इशारे से जाने को कहता है। विशाल- “हाय…”

तभी एक 20-21 साल का लड़का हमारे पास आता है, उसके साथ 4 सेक्योरिटी गार्ड होते हैं। और वो उन्हें वहां से इशारे से जाने को कहता है। विशाल- “हाय…”

मैं- “हाय…”

मोम- “क्यों मिलना चाहते थे तुम हमसे?”

विशाल- “पहले हम कुछ खाने पीने को मंगाते हैं फिर बात करते हैं…” फिर 3 ड्रिंक और पनीर टिक्का आ जाता है। अब विशाल कहता है- “हाँ… तो बात ये है की मेरा नाम विशाल है और मैं यहां के मिनिस्टर का बेटा हूँ…”

मोम- “हाँ… तो?”

विशाल- “सो बात ये है की सनडे को मेरा बर्थ-डे है और मैं चाहता हूँ की आप वहां आओ…”

मोम- “पर हम तुम्हारे बर्थ-डे में आकर क्या करेंगे?”

विशाल- “मैंने आप लोगों को उस दिन 3 आदमियों के साथ देखा था, तब से ही मैं फिदा हूँ आप पर। और मैं चाहता हूँ कि आप मेरी पार्टी में आओ और स्ट्रिप डान्स करो…”

मोम- “क्याऽऽऽ? हम नहीं कर सकते ऐसा…”

विशाल- “मैं आपको एक लाख रूपया दूँगा और प्रोमिस करता हूँ कि आपके साथ मेरा कोई दोस्त सेक्स नहीं करेगा।

मोम- “मैं समझी नहीं?”

विशाल- “वो आपको छुयेंगे पर आपके अंदर नहीं डालेगा कोई…” तभी विशाल का काल आ जाता है।

विशाल- “एक्सक्यूज मी, मैं आता हूँ…”

मैं मोम से- “क्या करना चाहिए मोम?”

मोम- “समझ में नहीं आ रहा। मैं मना भी नहीं करना चाहती, क्योंकी है भी ये मिनिस्टर का बेटा और हमारे बारे में काफी जान भी गया है…”

मैं- “हाँ… तो?”

मोम- “चलते हैं एक बार, फिर देखेंगे?”

तभी विशाल लौटकर आता है, विशाल- “तो क्या सोचा आप लोगों ने?”

मोम- “ठीक है, हम आएंगे…”

विशाल- “थैंक्स मेडम, मैं कार भेज दूँगा…” और इतना बोलकर निकल जाता है।

फिर हम घर लौट आते हैं, घर पर भाई- “दीदी, आज आपने क्लास नहीं अटेंड की क्या?”

मैं- “क्यों?”

भाई- “जस्ट ऐसे ही पूछ रहा हूँ…”

मैं- “तुम अपने काम से काम रखो…” और मैं गुस्से में अपने रूम में चली जाती हूँ,

तभी अकरम की काल आती है।

मैं- “हेलो…”

अकरम- “क्या बात है जान, तुम तो हमें भूल ही गई…”

मैं- “नहीं, ऐसी कोई बात नहीं है…”

अकरम- “अच्छा सुनो, कल मेरा भाई और उसके कुछ दोस्त आ रहे हैं, तुम आ जाना…”

मैं- “मैं अकेली?”

अकरम- “नहीं, मैं राखी, जिसके साथ तुम शेखों के यहां गई थी, उसे भी बुला लूँगा। साथ में और भी दो लड़कियां बुलाई है। सारी रात का जश्न होगा और कपड़े भी लेती आना, हो सकता है अगले दिन दोपहर तक जाना हो तुम लोगों का…”

मैं- “ठीक है, मैं आपको कैसे मना कर सकती हूँ…”

अकरम- “मैं राखी को भी काल करके बता देता हूँ…”

मैं- “ओके गुड नाइट…”

सुबह मोम मेरे रूम में चाय लेकर आती है- “उठो, चाय लाई हूँ…”

मैं उठकर चाय लेती हूँ।

मोम- “अकरम की काल आई थी रात को…”

मैं- “हाँ… मुझे भी आई थी…”

मोम- “वहां तो जाना ही पड़ेगा। समझ में नहीं आ रहा कि विशाल को क्या बोला जाए?”

मैं- “बोल दूँगी कि मेरी दोस्त की शादी है वहां जाना है…”

मोम- “ओके…”

 
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