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मेरी सेक्सी बहनें compleet

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पूजा जाके बेड पे लेट गयी, और बहुत ज़ोर ज़ोर से साँसे ले रही थी... मैं जाके उसके पास लेट गया, मुझे बाजू में देख पूजा ने ज़ोर से मुझे अपनी पास खींचा और मेरी बाहों में छुप गयी... उसकी साँसे अभी भी तेज़ चल रही थी.... कुछ देर तक हमने कोई बात नहीं की, जब पूजा की साँसे नॉर्मल हुई

"अब तो कोई फॅंटेसी बाकी नहीं रह जाती आपकी" पूजा ने अपने नाख़ून मेरी छाती पे घुमाते हुए पूछा..

"पूजा... ये करने की क्या ज़रूरत थी.. ये नहीं करती, तो क्या होता" मैं उसके बालों को उसके चेहरे से हटाने लगा

"ज़रूरत थी... पर , फ्रॅंक्ली मैने ये आपकी वजह से किया... ऐसे सेक्स में मुझे किसी और का रॉल्प्ले करना अच्छा नहीं लगता... इससे लगता है ,कि आपका जिस्म ही सिर्फ़ मेरे साथ है, आपका मन नहीं" पूजा ने मुझे अपनी बाहों में भींच लिया और मेरे बालों के साथ खेलने लगी...

"पूजा.... इसमे मेरी कोई ग़लती नहीं, कुछ दिनो से घर में ऐसी ऐसी चीज़े देखी है, तो मुझसे रहा नहीं जाता..."

"समझती हूँ मैं ... आपकी कोई भी फॅंटेसी पूरी करूँगी मैं.. बिना किसी रोक टोक के.. आपकी खुशी में ही मेरी खुशी है"

"पर पूजा.. तुम्हे डाइयरी के बारे में कैसे पता चला" मैने पूजा से पूछा

"ज़य भैया ने बताया... मुझे आपको स्ट्रेस में देख के बिल्कुल भी अच्छा नहीं लग रहा था, इसलिए आज सुबह ज़य भैया से पूछा आपकी पसंद के बारे में, तभी उन्होने बताया डाइयरी के बारे में"

पूजा की ये बात सुनके मैने कुछ नहीं कहा... हम यूही कुछ देर बेड पे लेटे रहे, देखते देखते शाम हो गयी और हम फ्रेश होके तैयार होने लगे.... जैसे ही हम तैयार होके वहाँ से निकले, गाड़ी में बैठते ही पूजा ने कहा

"... मैं आप से अब कुछ छुपा नहीं सकती... सब कुछ सॉफ करना चाहती हूँ मैं अब... क्या आप सुनने के लिए तैयार हैं....

पूजा और मैं काफ़ी थक चुके थे.... मैने कभी नहीं सोचा था कि मुझे पूजा का ये रूप देखने को मिलेगा.... हम लोग कुछ देर में होटेल से निकल रहे थे, तभी गाड़ी में बैठते ही पूजा ने कहा

".. मैं आपसे कुछ छुपाना नहीं चाहती.... अब और मुझसे छुपाया नहीं जाएगा कुछ भी.. क्या आप सुनने के लिए तैयार हैं"

"ओफ़कौर्स पूजा.... मैं कब्से जानना चाहता हूँ, और बेफिकर रहो, हमारे बीच की ये बातें किसी को नहीं पता लगेगी" मैने पूजा को आश्वासन देते हुए कहा

"ठीक है .... दरअसल बात ये है कि....."

इससे पहले पूजा कुछ बोलती, मेरा फोन बजने लगा.... फोन डॅड का था...

"हां डॅड.. बोलिए"

", व्हेअर् आर यू... इतनी देर हो गयी है, हो कहाँ तुम लोग..." पापा ने सामने से पूछा

"डॅड... हम लोगो की गाड़ी खराब हो गयी है, इसलिए देरी हुई.." मैने झूठ बोला पापा को

"ओके .. कहाँ हो तुम, मैं अभी ज़य को भेजता हूँ, तुम्हे रिसीव करने के लिए..."

"नहीं डॅड.. अभी ठीक करवा दी है गाड़ी.. हम आ रहे हैं माल में.."

"माल में नहीं बॉय, तुम लोग अभी सीधे घर आओ, हमने तुम्हारी शॉपिंग कर ली है.. जल्दी आओ, कुछ और बातें भी डिसकस करनी हैं.." पापा ने फोन कट करने से पहले कहा...

पहली बार मुझे पापा पे गुस्सा आ रहा था, मैने फोन कट करके फिर पूजा से कहा.

"बोलो पूजा.... आइ आम ऑल युवर्ज़ नाउ"

पूजा:- , घर चलिए अब, बहुत देर हो चुकी है हमको, घर चल कर आराम से बात करते हैं.. और कल हम इंडोनेषिया तो जा रहे हैं, इतमीनान से बात करेंगे कल...

मैं:- नहीं पूजा.. अभी कहो, क्या हुआ है, मैं अभी जानना चाहता हूँ प्लीज़

पूजा:- ,.. प्लीज़, काफ़ी देर हो चुकी है, और चिंता नहीं कीजिए.. मैं आपको सामने से सब बताना चाहती हूँ,

मैने ज़्यादा बहस ना करते हुए गाड़ी चलाना शुरू किया... कुछ देर चलने के बाद , मौसम ने करवट बदली, और हल्की हल्की बारिश शुरू होने लगी...

"ये गर्मी में बारिश कहाँ से आ गयी" मैने चिढ़ते हुए पूजा से कहा...

पूजा:- आपको तो बारिश पसंद है , इतना चिढ़ क्यूँ रहे हैं...

मैने कोई जवाब नहीं दिया उसकी बात का.. बारिश तो पसंद थी मुझे, पर मेरा दिमाग़ मेरे दिल का साथ नहीं दे रहा था.. मुझे ऐसे देख पूजा ने जारी रखा

"मैं जानती हूँ कि पिछले कुछ दिनो से इन सब बातों की वजह से आप ठीक से ना खा रहे हैं, ना तो आराम कर रहे हैं... आपकी चिंता बिल्कुल सही है .. पर आप इन सब के बीच में कुछ भूल रहे हैं.."

"पूजा... क्या भूल रहा हूँ, अब ज़्यादा पहेलियाँ मत भुजाओ प्लीज़" मैने झल्लाते हुए कहा...

 


"रिलॅक्स कीजिए प्लीज़... आप को ऐसे देखके मुझे कैसा लगेगा, आपने कभी सोचा है, आपकी चिंता आपके परिवार के लिए सही है, पर साथ ही आपको अपने और मेरे बारे में भी सोचना चाहिए... मैं आपकी पत्नी होने वाली हूँ, तो आपको मेरे बारे में भी उतना ही सोचना पड़ेगा जितना आप अपने परिवार के बारे में सोच रहे हैं"

मैं:- पूजा... सीधे बोलो, तुम क्या चाहती हो

पूजा:- मैं ये चाहती हूँ कि अब आप इस बात की वजह से चिंता ना करें प्लीज़... हम कल इंडोनेषिया जाएँगे, मैं वहाँ चल कर आपको सब बता दूँगी, पर उससे पहले आपको मुझसे एक वादा करना पड़ेगा

"कैसा वादा.... मैं वादे निभाने में बहुत कमज़ोर हूँ पूजा..." मैने हताश भरे स्वर में कहा

पूजा:- ... मैं सिर्फ़ ये चाहती हूँ, के आने वाले 7 दिन हम एक दूसरे के साथ बिना किसी चिंता के बितायें.. आपकी चिंता अब मेरी चिंता है, मैं आपको अपना पूरा सहयोग दे रही हूँ... वादा करती हूँ आपसे के आपको या आपके परिवार को कोई नुकसान नहीं होगा... क्या आप एक छोटा सा वादा नहीं कर सकते...

मैने पूजा को कुछ जवाब नहीं दिया... मुझे ऐसे देख पूजा ने फिर कहा

".. आपकी खामोशी से ये दिखता है आपको मुझपे बिल्कुल विश्वास नहीं है..." पूजा ने अपनी नज़रें बाहर की तरफ करते हुए कहा

"नहीं पूजा , ऐसा बिल्कुल नहीं है.... तुम ही तो हो अभी मेरे साथ, तुमपे विश्वास नहीं करूँगा तो मैं खुद को माफ़ नहीं कर पाउन्गा अब.... अच्छा, वादा रहा, ये 7 दिन तुम्हारी ज़िंदगी के सबसे अच्छे दिन रहेंगे" मैने पूजा को हँस के जवाब दिया

ये सुनके पूजा ने भी हल्की सी स्माइल दी... बाहर बारिश हो रही थी धीमी सी, अंदर पूजा और मैं एक दूसरे से इधर उधर की बातें कर रहे थे, तभी मैने पूजा को देखते हुए गाना शुरू किया...



" हे काश, काश यूँ होता...

.हर शाम साथ तू होता......

चुप-चाप दिल ना यूँ रोता

हर शाम साथ तू होता....

गुज़ारा हो तेरे बिन गुज़ारा अब मुश्क़िल है लगता..

.नज़ारा हो तेरा ही नज़ारा अब हर दिन है लगता"




ये सुनके पूजे ने मेरी ओर अपनी आँखें बड़ी करते हुए, सर्प्राइज़ होके देखा, और कहा

"अरे वाह... मुझे नहीं पता था, आप इतने रोमॅंटिक भी हो सकते हैं.. क्या बात है जी" पूजा ने स्माइल करते कहा..

"अब इसके आगे तुम गाओ, तो मैं जानूँ तुम मेरी टक्कर की हो या नहीं" मैने पूजा को छोटा से चॅलेंज देते हुए कहा...

"जो काम किसी के कहने पे करो, उसमे मज़ा नहीं आता ... आपको मैं गाना भी सुनाउन्गि, पर सही वक़्त पे, अभी तो फिलहाल आप ही जारी रखिए"

यूही बातें करते करते , हम घर पहुँचने लगे... जैसे ही मैने गाड़ी पार्क की, पूजा मेरे कान में कुछ बोलके, अंदर की तरफ दौड़ गयी... उसकी बात सुनके, मेरे चेहरे पे हल्की सी हँसी छा गयी...

"हां डॅड... बोलिए, कुछ ज़रूरी काम था आपको ?" मैने घर के अंदर जाते कहा

डॅड:- हां ... सबसे पहले ये लो, डॉक्युमेंट्स.. इनके हिसाब से तुम अफीशियली अब हमारे मॅन्यूफॅक्चरिंग यूनिट्स के मालिक हो.. और पूजा जॉइंट सिग्नेटरी है अब... आज से, इनफॅक्ट अभी से, तुम्हारी सिगनेचर्स ही वालिद है, कोई भी पर्चेस ऑर्डर या सेल्स ऑर्डर, औथेंटिक नहीं होगा तुम्हारे सिगनेचर्स के बिना....

और तुम्हारे आब्सेन्स में, पूजा सिग्नेटरी रहेगी... 80-20 के रेशियो में प्रॉफिट डिसट्रिब्यूट होगा... आंड इंपॉर्टेंट थिंग, बॅंक में पूजा के सिगनेचर्स अपडेट करवाने हैं, जब तक वो हो, तब तक यू आर दा सोल प्रोप्राइटर... 5 दिन में पूजा के सिगनेचर्स अपडेट हो जाएँगे, ये लो फॉर्म, इस्पे पूजा के साइन ले लो, ये काम भी निपट जाएगा...

 


मैने ध्यान से हर एक पेपर देखा, चेक किया, एक जगह जाके मेरी नज़र अटक गयी...

"डॅड... ये विजय अंकल का नेम भी है इसमे ?" मैने शॉक्ड होते हुए पूछा

"हां बेटे.. इसके मुताबिक, गॉड फ़ोर्बिड, तुम्हे कभी कुछ हो जाए और पूजा भी ना रहे, तो विजय का भी हिस्सा रहेगा इस प्रॉपर्टी में..." पापा ने मुझे देखते हुए कहा..

'बट डॅड.. वो क्यूँ.. आइ मीन.."

इससे पहले मैं कुछ बोलता, पापा ने मुझसे कहा

" बॉय... रिलॅक्स, विजय भले ही सौतेला है तो क्या हुआ, है तो मेरा भाई ही... और मैं खुद को इन सब से अलग कर सकता हूँ, पर विजय को नहीं कर सकता.. रीज़न्स तुम जानते हो, उसकी दो बेटियाँ है जिनकी शादी अभी बाकी है.... और मैं नहीं चाहता कभी उन्हे महसूस हो कि उनके पास पैसों का कोई सुख नहीं है"

"ओके डॅड... पर आप ने ये सब आज क्यूँ दिया मुझे.. आइ मीन मेरे 29थ बर्तडे पे देने वाले थे ना आप तो"

".. ज़रा आप नज़र डालेंगे अपने कॅलंडर पे, आपको इसका जवाब मिल जाएगा" पीछे से पूजा ने आवाज़ दी

मैने सामने लगे हुए क्लॉक में देखा, 1स्ट जून थी डेट.....

"शिट..... आज ही तो मेरा बर्तडे है...." मैने खुद को हैरान होते हुए कहा...

इससे पहले मैं कुछ और बोल पाता, मोम, डॅड, ज़य और पूजा सब लोग मुझपे कूद पड़े और मेरे मूह पे केक लगाने लगे... सब लोग बहुत खुश थे,

मुझे भी काफ़ी खुशी थी कि मुझे ऐसे चाहने वाले मिले हैं... काफ़ी देर तक मेरे मूह पे केक लगाने के बाद ज़य बोला

"क्या भाई... आप तो कैसे हो, आप को खुद का बर्तडे याद नहीं है, और मैं मेरे कॉलेज से दो दिन की लीव लेके आपका बर्तडे सेलेब्रेट करने आया हूँ"

" बेटे, कोई चिंता है तो हमे बताओ, इससे पहले आज तक तुम अपना बर्तडे कभी नहीं भूले, इनफॅक्ट तुम सामने से अपना गिफ्ट माँगते थे, पर इस बार ऐसा क्यूँ" मोम ने मेरे सर पे हाथ रखते हुए कहा...

"नहीं मोम.. ऐसा कुछ नहीं है, ..." मैने इतना ही कहा , कि बीच में डॅड बोले

"अरे ये भूल गया तो क्या हुआ, हमे याद है ना, और इसकी गिफ्ट्स सब रेडी है, डोंट वरी अबौट दट"

 


डॅड की ये बात सुनके मैने उन्हे सवालिया नज़रों से देखा, वो मेरी बात समझ गये और आगे आके मुझे उन्होने एक केय्चैन पकड़ते हुए कहा

" बॉय.... तुम्हारी पहली गिफ्ट, इंडोनेषिया की ट्रिप हम सब की तरफ से... तुम्हारे सब पैसे मैने तुम्हारे बॅंक में ट्रान्स्फर करवा दिए हैं...

"डॅड... वो ठीक है, पर दिस ईज़ टू मच... मैं ये नहीं ले सकता प्लीज़" मैने डॅड को केय्चैन पकड़ाते हुए कहा

"व्हाट रब्बिश !!! नहीं ले सकता मीन्स.. यू आर दा बेस्ट सन इन दिस वर्ल्ड... सो फॉर माइ बेस्ट सन, इतना तो कर सकता हूँ...

"मिटस्यूबीशी पजेरो".... बेस्ट कार फॉर बेस्ट सन... एंजाय ऑलराइट..."

इससे पहले मैं कुछ बोलता, ज़य बोल पड़ा...

"भाई रख लो, मुझे तो कुछ देते ही नहीं डॅड.. आपको तो दे रहे हैं कम से कम..." ज़य ने डॅड की तरफ देखते हुए कहा..

"उफ्फ!!! ये लड़का.... ज़य, क्या बोल रहे हो... तुम्हारी गिफ्ट भी रेडी है.. देखना चाहोगे ?" मोम ने ज़य से पूछा

ये सुनते ही ज़य मोम के पास गया

"हां हां मोम.. दिखाओ ना प्लीज़ प्लीज़.... जल्दी" जे उतावला होने लगा था...

"ज़य, तुम्हारे भाई के बाद, तुम वाकेशन पे जाना चाहोगे" डॅड ने सवाल पूछा ज़य से

"हां डॅड... पर इंडोनेषिया नहीं हाँ, मैं कहीं एशिया के बाहर जाना चाहूँगा.." ज़य ने डॅड से कहा

"ओके बॉय... यू आर विश ईज़ माइ कमॅंड... 3 महीने बाद, तुम, तुम्हारी मोम और मैं... ऑस्ट्रेलिया चलेंगे.. ईज़ दट फाइन माइ सन" डॅड ने ज़य को गले लगाते हुए पूछा...

"ओह डॅड.... यूआर दा बेस्ट डॅड..." ज़य की सारी कंप्लेंट्स दूर हो गयी...

डॅड को ऐसे देख मुझे बहुत खुशी हो रही थी.. ऐसा लग रहा था काफ़ी दिनो बाद इस घर में खुशियाँ आई हैं... इन सब के बीच मोम ने मुझे और पूजा को अपने पास बुलाया

"बेटे.. तुम दोनो अब पूरी ज़िंदगी साथ रहने वाले हो... तुमने हम लोगों को बहुत बड़ी खुशी दी है... ये दोनो तुम लोगों के लिए लाए हैं हम.."

मोम ने हमे दो बॉक्स पकड़ाते हुए कहा...

"नहीं मम्मी जी... मैं ये नहीं ले सकती आपसे, प्लीज़ " पूजा ने कहा

इससे पहले मोम कुछ बोलती, ज़य ने बीच में टोका

"पूजा जी.... बॉक्सस ओपन कीजिए, शायद आपका इरादा बदल जाए"

हमने ज़य से कुछ नहीं कहा, और बॉक्सस ओपन करने लगे...

हमारे बॉक्स में अलग अलग डाइमंड रिंग्स थी... पूजा के हाथ में मेरी, और मेरे हाथ में पूजा की.. डाइमंड्स से हमारे नेम के इनिशियल्स "स" और "प" लिखा हुआ था...

"अब तुम मना मत करना... तुम लोगों से मैं ज़्यादा नहीं कहूँगी कुछ ओके.. मैं उम्मीद करती हूँ के तुम जान गये होगे ये गिफ्ट्स हमने तुम्हे क्यूँ दी"

मोम ने हमे देखते हुए कहा...

ये सुनके पूजा ने बिना कुछ कहे मोम डॅड का आशीर्वाद लिया, और वहाँ से चली गयी....

 


उस शाम ऐसा लग रहा था, कि हमारे घर पे भगवान कुछ ज़्यादा मेहेरबान हुए हैं... गिफ्ट्स तो सब को मिले, मुझे कुछ ज़्यादा ही... मैं वहीं खड़े खड़े सोच रहा था कि विजय का नाम डॉक्युमेंट्स से कैसे निकालु, तभी सामने से मेरी उदासी का कारण आता हुआ दिखा... सामने से विजय, शन्नो और अंशु आते दिखे...

(बहनचोद... जब जब मैं खुश हुआ हूँ, ये भोसड़ी के वहाँ टपक पड़ते हैं. मैं अपने आप से बोलने लगा)

बेटे.. जनमदिन की बधाई हो... ये लो तुम्हारा गिफ्ट.." अंशु ने आगे आते हुए कहा

"थॅंक यू वेरी मच आंटी.." मैने अंशु से कहा

"अब भी आंटी बोलोगे... अब तो बेटे एक कदम आगे बढ़ो, हमारा रिश्ता जुड़ने वाला है" अंशु ने मुझे गले लगाते हुए कहा...

जैसे ही मैं अंशु से गले लगा, मेरे लंड में अकड़न आने लगी... उसके चुचे मेरी छाती में धन्से जा रहे थे... मैं झट से अंशु से अलग हुआ और शरमाने का नाटक करने लगा. इतने में पीछे शन्नो और विजय ने कहा

" बेटे... मेनी मेनी हॅपी रिटर्न्स ऑफ दा डे.. ये गिफ्ट हम तीनो की तरफ से हैं तुम्हारे लिए

मैने उनका आशीर्वाद लिया और अपने रूम में चला गया... जैसे ही मैं रूम में पहुँचा, मैने सबसे पहले अपने बॅंक में बॅलेन्स देखा.. . देखके मुझे बहुत खुशी हुई, क्यूँ कि पापा ने सब ट्रिप के पैसे मेरे अकाउंट में डाल दिए थे.. और मेरा इन्सेंटिव और सॅलरी पेआउट भी आ चुका था... मैने जो मेरे शेअर्स बेचने के इन्स्ट्रक्षन दिए हुए थे, तुरंत वो कॅन्सल कर दिए.... अचानक मुझे दिमाग़ में आया, देखूं तो सही के इन लोगो ने मुझे गिफ्ट क्या दी है... मैं उठके अपने बेड पे गया और उनका दिया हुआ बॉक्स ओपन करने लगा... जैसे ही मैने बॉक्स ओपन किया, एक बहुत बड़ा झटका सा लगा मुझे... दिमाग़ में फिर तूफान चालू हो गया... मैं जैसे वहीं फ़्रीज़ हो चुका था... . मेरे पीछे से एक आवाज़ आई..

".. ये तो टूटने वाला था, पर मैने ऐसा करने से मना किया और वापस आपको मिला है ये" पूजा ने अंदर आते हुए कहा.

बॉक्स में मेरा आइ फोन जो कल रात को चोरी हुआ था, वो अंदर था.. न्यू कवर और न्यू स्क्रीन गार्ड के साथ... मैं बैठे बैठे फोन के अंदर के कॉंटेंट्स देखने लगा, तभी पूजा ने फिर कहा

"आपके सब कॉंटेंट्स डेलीट हैं.. क्यूँ कि आपने फोन लॉक किया था, अगर फोन लॉक्ड नहीं होता तो सब कुछ डेलीट नहीं होता... लॉक की वजह से इन्हे फोन फॉर्मॅट करना पड़ा" पूजा ने मेरे सामने बैठते हुए कहा

"पूजा... ये सब तुम जानती थी... फिर भी तुमने.." मैं पूजा से कहने लगा

"मैं नहीं, हम दोनो जानते थे ... मैने आपसे कहा था कि आप रेकॉर्डिंग ना करें, पर आप माने ही नहीं" पूजा ने बहुत ही शांति से कहा

"और मुझे पता था कि आपके बॅंक में बॅलेन्स बहुत कम है, तभी मैने मोम से कहा कि फोन को कोई डॅमेज ना हो, नही तो आपके अंकल आंटी ने तो इसको तोड़ना ही बेहतर समझा....

"हां बेटे... पूजा सही बोल रही है..." सामने से अंशु भी अंदर आ गयी...

".. अब तक पूजा और मैं जो करते हुए आए हैं उसके पीछे हमारी मजबूरी है... आज सुबह भी जब मैने शन्नो और जीजू से कहा फोन नहीं तोड़े, तो उनको मुझपे शक होने लगा.. पर मैं नहीं चाहती कि हमारी वजह से तुम्हे और तुम्हारे परिवार को कोई फाइनान्षियल नुकसान भी हो.."

मेरे सामने अंशु और पूजा बैठ गये थे....

"ठीक है मम्मी.. मैं जान चुका हूँ आप मजबूर हैं, पर क्यूँ, अब तक पूजा ने मुझे नहीं बताया... पर आप लोग मेरे साथ हैं इन सब में, मुझे यकीन है कि हम बहुत ही जल्द इस मुसीबत से बाहर आ जाएँगे..." मैने अंशु को देखते हुए कहा..

"मम्मी... तुमने मुझे मम्मी कहा.... मतलब... तुम्हे पूजा पसंद है बेटे.." अंशु ने अपनी आँखों से बहते आँसुओं को छुपाते हुए कहा..

"जी.... और आप प्लीज़ अब रोना नहीं, " मैने अंशु को जैसे हुकुम देते हुए कहा...

ये सुनके अंशु की खुशी का ठिकाना नहीं था... वो खुशी से हमारी तरफ देखने लगी और वहाँ से उठके नीचे चली गयी...

"थॅंक्स पूजा... अब ये तुम्हारा फोन ले लो..." मैने पूजा को उसका फोन वापस देते हुए कहा...

"... थॅंक्स नहीं, आपको अपना वादा याद है ना..." पूजा ने मुझे देखा

 


"हां स्वीट हार्ट.... आइ नो, आने वेल 7 दिन, नो चिंता, ओन्ली फन" मैने झूठा मूटा उत्साह दिखाते हुए कहा..

"आने वाले 7 दिन नहीं.... आने वाली रात के साथ आने वाले 7 दिन ..." पूजा ने मस्ती में आके कहा.. उसकी आँखों में अलग सा नशा दिखा मुझे उस वक़्त.... जब तक मुझे कुछ समझ आता, पूजा वहाँ से निकल के अपने रूम में चली गयी

कुछ देर में मैं भी अपने रूम से मोम डॅड के पास चला गया और उन्होने हमारे लिए शॉपिंग की थी वो सब देखने लगा था... थोड़ी देर में पूजा भी वहाँ आ गयी और हमारे बॅग्स पॅक करने लग गयी.. बॅग्स पॅक करते करते काफ़ी टाइम बीत चुका था, और अंत में हमने हमारे पासपोर्ट्स और सब ज़रूरी डॉक्युमेंट्स , टिकेट्स, सब निकाल के साइड में रख दिए, जिससे सुबह को कोई दिक्कत ना हो...

ये सब करने के बाद हम खाना खाने टेबल पे बैठ गये और सब लोग खिलखिलाकर बातें कर रहे थे एक दूसरे से... खाते खाते मैने शन्नो से पूछा

"आंटी, ललिता नहीं दिख रही, वो कहाँ है"

मेरा सवाल सुनके शन्नो थोड़ा सा चौंक गयी, पर उस वक़्त विजय ने संभालते हुए कहा

"अरे बेटे वो अपनी फ्रेंड के वहाँ रुकी हुई है.."

"कमाल है.. कुछ दिन पहले डॉली पायल के साथ बाहर गयी थी, आंटी ने तो उसे बहुत डांटा था, आज ललिता नहीं है, तो उसको आपने पर्मिशन दे दी..."

मैने विजय से सीधा सवाल पूछा जिससे वो भी हक्का बक्का रह गया...

कुछ देर तक दोनो पति पत्नी ने जवाब नहीं दिया... वो लोग फिर खाना आधे में छोड़के टेबल से उठ गये.... तभी मेरे मोबाइल पे मुझे स्मस आया

"आप शांत नहीं बैठ सकते... इनको जितने सवाल करोगे उतनी आपके लिए मुसीबतें बढ़ेंगी..." पूजा का स्मस था

इससे पहले मैं कुछ जवाब देता, पापा मुझे डाँटने लगे

".. क्या ज़रूरत थी ये सब बोलने की.. चले गये ना... हाउ कॅन यू डू दिस हाँ"

"पापा, मुझे नहीं पता था इनको इतना बुरा लगेगा... सॉरी"

"कोई बात नहीं भाई साहब.. बच्चे हैं, मैं अभी जाके दीदी और जीजू को देखती हूँ, आप आराम से अपना खाना फिनिश कीजिए" अंशु ने पापा को कहा, और वहाँ से उठ के शन्नो और विजय के पीछे चली गयी..

अंशु के जाते ही मैने पूजा को स्मस का ज्वाब दिया.......

कुछ देर में हमने भी खाना फिनिश किया और अपने अपने काम में व्यस्त हो गये.... मैं ज़य से भी आखरी बार गले लगा, क्यूँ कि वो अगली सुबह वापस बंगलोर जाने वाला था....

 


कुछ देर बातें करके हम सब अपने अपने कमरे में चले गये... रूम में जाते ही मैने गेम सेट की और खेलने लगा... करीब एक घंटे बाद मुझे पूजा का स्मस आया...

"दिस ईज़ दा फर्स्ट आंड लास्ट टाइम आम डूयिंग दिस फॉर यू... इफ़ ओके, देन ओन्ली "

"ओके स्वीटी... व्हाटेवर माइ प्रिन्सेस से" मैने जवाब दिया पूजा को

"क... देअर इन 20 मिनट्स... लव पूजा XओXओ "

मैने स्मस पढ़के तुरंत गेम बंद कर दी, रूम क्लीन किया, एसी का टेंपरेचर एक दम मिनिमम किया और एर फ्रेशनेर छिड़क दिया रूम में..

एंड में अपने वॉर्डरोब से ब्लॅक लेबल की बॉटल और फ्लॅट ग्लासस निकाल के टेबल पे सजाए...

करीब 5 मिनट बाद, मेरे रूम का दरवाज़ा हल्के से नॉक हुआ...

जैसे ही मैने दरवाज़ा खोला, मैं सामने देखता रह गया.. मेरा मूह खुला का खुला रह गया..

"अब ऐसे ही देखते रहेंगे के अंदर भी आ सकते हैं हूँ" पूजा ने मुझसे पूछा..

मैं थोड़ा संभला और अंदर जाने के लिए रास्ता बनाया... मैने दरवाज़ा बंद कर दिया और टेबल की ओर बढ़ने लगा...

"क्या बात है.... ब्लॅक लेबल.. इरादा ठीक नहीं लग रहा आपका"... अंशु ने बेड पे बैठ के कहा... अपनी एक टाँग पे दूसरी टाँग चढ़ा के जैसे अंशु बैठी, मेरे मूह में पानी सा आ गया...

अंशु एक टाइट येल्लो टॉप में मेरे सामने बैठी थी जिसका सिर्फ़ एक शोल्डर था... उसके बाल खुले हुए थे, उसने अपने बाल ऐसे सेट किए थे जिससे उसकी ज़ूलफें उसके चुचों के बीच में गिर रही थी... उसके चुचे देख के मुझसे रहा नहीं जा रहा था.... नीचे उसने कुछ नहीं पहना था, उसकी मांसल जांघे एक के उपर एक पड़ी हुई थी, ऐसा लग रहा था तंदूरी मुर्गा सेका हुआ पड़ा है मेरे सामने...

"अब क्या सिर्फ़ देखते ही रहेंगे , या जिस काम के लिए बुलाया है वो भी करेंगे..." पूजा ने मेरा ध्यान तोड़ते हुए कहा... ये सुनके मैने नज़रें अंशु से हटा के पूजा की तरफ घुमाई, तो मैं फिर उसे देखता ही रह गया

 


सामने पूजा बैठी थी, उसने उपर से एक लूज शर्ट जिसके नीचे एक सॅंडो पहना था, जिसमे से उसके आधे से ज़्यादा चुचे बाहर निकले हुए थे.. उसकी शर्ट उसके घुटनो तक थी, जिसके नीचे उसने कुछ नहीं पहना था

मैने खुद को संभाला... और पूजा को जवाब दिया

"जिस काम के लिए बुलाया है, वोई तो करना चाहता हूँ मैं.. पर लगता है मेरी सास और मेरी पत्नी मेरा ध्यान भटका रही हैं वहाँ से "

ये कहके मैं टेबल पे बैठ गया, और हमारे लिए तीन पेग बना दिए.... हम तीनो पेग उठाके पीने लगे.... तभी अंशु ने कहा

"जमाई बाबू... ये कैसी ख्वाहिश है आपकी, अपनी सास के साथ दारू पीने की, मुझे कुछ समझ नहीं आया"

"इनकी ख्वाहिशें तो बहुत हैं मम्मी, आप सिर्फ़ दारू पीजिए, बाकी का ख़याल मैं रखूँगी..." पूजा ने अंशु को आँख मारते कहा

"ओफफो !!! क्या आप भी ना जमाई आ, दारू पीनी थी तो डाइरेक्ट मुझे बोलते , पूजा के थ्रू क्यूँ कहा, स्मस से ज़्यादा मज़ा फेस टू फेस आता है"

"मज़ा तो मुझे आपके साथ कैसे भी आएगा सासू मा.... पर घर वालों के सामने मैं कह नहीं सका, और मुझे लगा कहीं आप बुरा ना मान जायं" मैने अपने पेग से सीप लेते हुए कहा

"क्या जमाई जी... कोई सास अपने जमाई की बात का बुरा मान सकती है भला... आप बस हुकुम कीजिए हमें, लड़की वाले हैं, आपको निराश नहीं करेंगे"

अंशु ने अपना ग्लास खाली करते हुए कहा...

मैं और पूजा धीरे धीरे अपना ग्लास ख़तम कर रहे थे... जब हमारा पहले पेग ख़तम हुआ, तब तक अंशु ने अपने 2 पेग ख़तम कर दिए थे...

"ओफफो... कितना धीरे करते हैं आप जमाई जी... लाइए, मैं आप लोगों के लिए दूसरा पेग बना देती हूँ"

ये कहके अंशु अपनी जगह से उठी और मेरी गोद में आके बैठ के मेरे लिए पेग बनाने लगी.... मेर गोद में बैठ कर वो धीरे धीरे झुकने लगी, जिससे उसके चुचे बाहर आने लगे, और उसका टॉप पीछे से उँचा होता चला गया.. अंशु की गान्ड को मैं महसूस करने लगा... अंशु धीरे धीरे दारू मेरे ग्लास में डाल रही थी, मैं भी उतना ही धीरे उसकी गान्ड पे हाथ फेरने लगा.... ये महसूस करके

अंशु:- उम्म्म.... अहहहह जमाई अह्ह्ह....उम्म्म्मम......

जैसे ही अंशु सिसकारियाँ भरने लगी, दारू की बॉटल का बॅलेन्स बिगड़ा जिससे मेरे ट्रॅक पॅंट के साथ कुछ दारू उसके टॉप पे भी गिरने लगा...

"उफ्फ!!! ये क्या हो गया... आप का तो पेंट गीला हो गया.... लाइए मैं अभी सॉफ कर देती हूँ..." ये कहते कहते अंशु मेरे ट्रॅक पेंट के उपर से ही मेरे लंड को रगड़ने लगी....

"ओफफो.... क्या मुसीबत हो गई..." बोलते बोलते अंशु मेरे लंड को रगड़ने लगी पॅंट सॉफ करने के बहाने से..

अंशु के हाथों के स्पर्श से मेरा लंड भी धीरे धीरे अपनी औकात पे आने लगा..

"उम्म..... हटिए ना जमाई राजा.... देखिए मैने आपका पेंट खराब कर दिया... अहह सीईईईई.... उम्म्म्म...... आपकी सास एक काम भी नहीं कर सकती आपका.

ये कहते कहते अंशु ने मेरे लंड को पॅंट के उपर से ही मुठिया लिया और सहलाने लगी...

"उम्म्म.... देख ना पूजी... तेरा पति मुझे देखके बहक रहा है, फिर मुझे दोष मत देना..." अंशु ने पूजा को देखते हुए कहा और अपने होंठ अपने दाँतों तले दबाने लगी....

पूजा एक नज़र अंशु को देख रही थी और फिर एक नज़र मुझे.... मैं तो जैसे सातवें आसमान पे था... बस हल्की हल्की सिसकारियाँ भर रहा था....

'चलिए जमाई बाबू... आपका पेग तो बन गया, अब ज़रा मेरी बेटी का पेग भी बना लूँ, नहीं तो वो मुझसे नाराज़ हो जाएगी.." ये कहके अंशु वहाँ से उठ के पूजा के पास चली गयी.. पूजा के पास जाके अंशु भी उसके पास बैठ के उसका ग्लास भरने लगी... अंशु एक दम मदहोश हो चुकी थी..

हम दोनो के ग्लास भर के अंशु वापस अपनी जगह पे आ गयी... अपनी जगह पे आते ही अंशु ने अपने तीसरा पेग बनाया और हम फिर से एक बार पीने में व्यस्त हो गये... पीते पीते अंशु ने कहा...

"अरे ये क्या...मेरा टॉप भी तो गीला हो चुका है, क्या जमाई राजा, मैने आपका पॅंट सॉफ किया तो आपका भी तो फ़र्ज़ बनता है ना मेरा ख़याल रखने का... खैर छोड़िए अब, मैं खुद ही सॉफ किए देती हूँ अपने कपड़े"

इतना कहते ही अंशु ने अपने टॉप को एक झटके में उतार फेंका और वो सिर्फ़ अपनी पेंटी में बैठी हमारे सामने शराब पीने लगी...

"ऊप्स !!! जमाई जी, मेरा टॉप पूरा खराब हो गया था... इसलिए मैने उतार दिया, उम्मीद है आपको कोई दिक्कत नहीं है...."

 


इसके जवाब में मैने सिर्फ़ ग्लास में से एक सीप लेके अंशु की आँखों में देखा

अंशु को ऐसे देख मेरा लंड हिचकोले खाने लगा.. गला सूखने लगा था, मैं अंशु को आँखों में देखते देखते अपने लंड को उपर से ही रगड़ने लगा.... ये देख पूजा ने कहा...

"आप चिंता नही कीजिए इसकी... इसके लिए तो मैं हूँ ना..." ये कहके पूजा ने अपना ग्लास टेबल पे रखा और अदा से चलके मेरे पास आके नीचे ज़मीन पे बैठ गयी.... ज़मीन पे बैठ के उसने एक नज़र अंशु को देखा, एक नज़र मुझे... और फिर अपना हाथ मेरे पॅंट में बने तंबू पे घुमाने लगी...

"उम्म्म... शैतान कहीं का.. अपनी सास को देख के ऐसी हालत, हरामी कहीं का.... लगता है इसे शांत करना ही पड़ेगा अब...."

ये कहके पूजा मेरा पॅंट को उतारने लगी, और जैसे ही मेरा पॅंट नीचे उतरा,

मेरे लंड को पूजा हाथ में लेके मूठ मारने लगी...

"उम्म.... अहहाहाहा साले हरामी, मेरी मा को देख के खड़ा हो गया अहहहाहा... उम्म्म्मममम... अहाहम्म्म्म म.....ससीसीसीई अहाहाहाहा..."

पूजा मेरे लंड को हिलाते हिलाते बोलने लगी.... जहाँ पूजा ये सब कर रही थी, मैने अंशु को इशारा करके मेरे पास बुलाया... जैसे ही अंशु मेरे पास आई, मैने उसका एक चुचा अपने मूह में ले लिया और उसे चूसने लगा...

'अहहहहाहा सीसीसिस.... चूस लो ना जमाई राजा अहहाहा.... उम्म्म.... दूध पियो ना इनका अहहाहा..... उम्म्म...... और ज़ोर से चूसो ना अहहाहा" अंशु बकने लगी...

"उम्म्म्म अहाहहाहः मेरी सासू मा.... आहहः सीईईईईई... तेरी बेटी ने मना किया था तुझे चोदने के लिए अहाहहाः... तो कैसे चोदु तुझे अहहहहा... उम्म... पूजा आहहहहा अब लंड ले भी लो ना मूह में अहहहहा...." मैं मा बेटी का साथ देने लगा..

"हां जी आहहा.... आप का हुकुम सर आँखो पर मेरे पति जी अहहहा.... " ये कहके पूजा मेरे लंड को मूह में लेके चूसने लगी और मेरे टट्टों पे थप्पड़ भी मारने लगी....

"अहहहहः... धीरे चूस भडवि कहीं की अहहहहा.... मार मत तेरी मा को चोदु आहहहः...." मैं आनंद लेने लगा था....

"हॅट दूर साली निकम्मी कहीं... मैं मेरे जमाई राजा को खुश करती हूँ, सीख मुझसे...." ये कहके अंशु मुझसे दूर होके नीचे बैठी और पूजा के मूह से मेरे लंड को छीन के उसे लॉलीपोप की तरह चूसने लगी...

"उम्म्म.....स्लर्प स्लर्प अहाहहाः.... आहहाेंम्म्मम स्लर्प अलुर्प अहहहहहा... " अंशु मेरा लंड चूसने लगी, और पूजा उसे देखती रही नीचे बैठ के

"उम्म्म हां माँ अब मुझे भी दो ना... अहहहहा लंड तो दो, मेरे पति का है ये अहहहाहा..... ये कहके पूजा और अंशु बारी बारी लंड चूसने लगी.... जब अंशु मेरे लंड को मूह में लेती, तब पूजा मेरे टट्टों को चाटने लगती... ऐसा नज़ारा देखते ही बनता था....

"उम्म्म अहहहहा.... मेरी पत्नी और आहहहहा सीसीसीसिस मेरी सास. अहहाहा मेरी रंडियों आहहाहा......" मैं बस येई बोल पा रहा था

"उम्म.. अहाहहाः सीईईई.. हम तो हैं ही रंडिया मेरे जमाई बाबू.. उम्म्म्मम, देखो ना मेरी बेटी को अहहहहहा.. कैसे तड़प रही है आपके लंड के लिए अहहहाहा...."

"उम्म्म्म अहहहहा माआंम्म्म.... तुमपे ही गयी है तुम्हारी बेटी अहहहहः अब लंड दो मुझे जल्दी से अहहहहहा......"

 


मैने पूजा को नीचे से उठाया, और गोद में लेके उसे बेड पे ले गया... बेड पे ला जाके, मैने उसका टॉप उतारा, उसका सॅंडो उसके शरीर से अलग किया..

उसके चुचे फुदक के जैसे बाहर आ गये.. मैने ज़्यादा देरी ना करते हुए, उसके चुचे मूह में ले लिए, एक को चूसना चालू रखा और एक को मसल्ने लगा..मैं पूजा के चुचे चूसने में लगा हुआ था, नीचे मेरा लंड पूजा की चूत के दरवाज़े पे दस्तक दे रहा था.... अंशु ने आके मेरी टी- शर्ट भी उतार दी, और नीचे से जाके उसने अपनी जीभ पूजा की चूत पे लगाई... अंशु पूजा की चूत और मेरे लंड को चूसने में व्यस्त हो गयी...

"उम्म्म्म आहहहाहा... माँ धीरे आहाहहहहः चूस ना अहहहहाहा...... अहहहाहा मैं पागल हो रही हूँ मा अहाहहाः..... आहहहाः ,

अहहाहाः , मुझे किस करो ना अहहहहाअ...... पूजा मेरे लिप्स को लेके उन्हे ज़ोर ज़ोर से चूमने लगी...

"उम्म्म आहाहः स्लर्प स्लर्प अहहहहः गुणन्ं गुणन्ं अहाहहाहा.... ओह्ह्ह अहहाहा आएेस्स्स आममाआआ.. माँ और चूसो ना अहहहहा... भडवे अहहहः... चूस ना मेरे होंठों को साले अहहहाहः..... उम्म्म अहाहहाः स्लर्प सुर्प अहहहहहाहहा....." पूजा पागल होके बड़बड़ाये जा रही थी..

नीचे से अंशु हम दोनो को चाटने में लगी हुई थी.. चाट चाट के उसने मेरे लंड और पूजा की चूत को एक दम गीला कर दिया था....

"आहाहहहाः मेरी बेटी तड़प रही है लंड के लिए अहहा,,,,,. सीसीईइ.... ये ले मेरी बिटिया, तेरे पति का लंड तेरी चूत में.." ये कहके अंशु ने मेरे लंड को पूजा की चूत में डाल दिया.... जैसे ही मुझे महसूस हुआ मेरा लंड पूजा की चूत के अंदर, मैं धीरे धीरे मेरे लंड को अंदर डालने की कोशिश करने लगा....

"अहहहः... डाल दो ना अंदर पूरा मेरे पति राजा अहहहहा.... " ये कहके पूजा जो मेरे शरीर पे झुकी हुई थी, उसने अपना पूरा वज़न पीछे शिफ्ट किया और एक ही झटके में अपनी चूत को मेरे लंड में घुसा दिया.... लंड के अंदर जाते ही पूजा तो जैसे जोश में आ गयी और मेरे लंड की सवारी करने लगी....

"उम्म्म्म अहहहहहाहा माअमममा....... अहहहहाहा आपका लंड मेरी हलक तक आ रहा है अहहहहा...... मेरी माँ की चूत इतनी गरम है क्या , जिसे देख के इतना जोश अजाहहः... और चोद मुझे अहहहः और चोदो अजहहहहा... " पूजा मेरे लंड पे कूद कूद के चुदवाते बोलने लगी...

 
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