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Guest
पूजा जाके बेड पे लेट गयी, और बहुत ज़ोर ज़ोर से साँसे ले रही थी... मैं जाके उसके पास लेट गया, मुझे बाजू में देख पूजा ने ज़ोर से मुझे अपनी पास खींचा और मेरी बाहों में छुप गयी... उसकी साँसे अभी भी तेज़ चल रही थी.... कुछ देर तक हमने कोई बात नहीं की, जब पूजा की साँसे नॉर्मल हुई
"अब तो कोई फॅंटेसी बाकी नहीं रह जाती आपकी" पूजा ने अपने नाख़ून मेरी छाती पे घुमाते हुए पूछा..
"पूजा... ये करने की क्या ज़रूरत थी.. ये नहीं करती, तो क्या होता" मैं उसके बालों को उसके चेहरे से हटाने लगा
"ज़रूरत थी... पर , फ्रॅंक्ली मैने ये आपकी वजह से किया... ऐसे सेक्स में मुझे किसी और का रॉल्प्ले करना अच्छा नहीं लगता... इससे लगता है ,कि आपका जिस्म ही सिर्फ़ मेरे साथ है, आपका मन नहीं" पूजा ने मुझे अपनी बाहों में भींच लिया और मेरे बालों के साथ खेलने लगी...
"पूजा.... इसमे मेरी कोई ग़लती नहीं, कुछ दिनो से घर में ऐसी ऐसी चीज़े देखी है, तो मुझसे रहा नहीं जाता..."
"समझती हूँ मैं ... आपकी कोई भी फॅंटेसी पूरी करूँगी मैं.. बिना किसी रोक टोक के.. आपकी खुशी में ही मेरी खुशी है"
"पर पूजा.. तुम्हे डाइयरी के बारे में कैसे पता चला" मैने पूजा से पूछा
"ज़य भैया ने बताया... मुझे आपको स्ट्रेस में देख के बिल्कुल भी अच्छा नहीं लग रहा था, इसलिए आज सुबह ज़य भैया से पूछा आपकी पसंद के बारे में, तभी उन्होने बताया डाइयरी के बारे में"
पूजा की ये बात सुनके मैने कुछ नहीं कहा... हम यूही कुछ देर बेड पे लेटे रहे, देखते देखते शाम हो गयी और हम फ्रेश होके तैयार होने लगे.... जैसे ही हम तैयार होके वहाँ से निकले, गाड़ी में बैठते ही पूजा ने कहा
"... मैं आप से अब कुछ छुपा नहीं सकती... सब कुछ सॉफ करना चाहती हूँ मैं अब... क्या आप सुनने के लिए तैयार हैं....
पूजा और मैं काफ़ी थक चुके थे.... मैने कभी नहीं सोचा था कि मुझे पूजा का ये रूप देखने को मिलेगा.... हम लोग कुछ देर में होटेल से निकल रहे थे, तभी गाड़ी में बैठते ही पूजा ने कहा
".. मैं आपसे कुछ छुपाना नहीं चाहती.... अब और मुझसे छुपाया नहीं जाएगा कुछ भी.. क्या आप सुनने के लिए तैयार हैं"
"ओफ़कौर्स पूजा.... मैं कब्से जानना चाहता हूँ, और बेफिकर रहो, हमारे बीच की ये बातें किसी को नहीं पता लगेगी" मैने पूजा को आश्वासन देते हुए कहा
"ठीक है .... दरअसल बात ये है कि....."
इससे पहले पूजा कुछ बोलती, मेरा फोन बजने लगा.... फोन डॅड का था...
"हां डॅड.. बोलिए"
", व्हेअर् आर यू... इतनी देर हो गयी है, हो कहाँ तुम लोग..." पापा ने सामने से पूछा
"डॅड... हम लोगो की गाड़ी खराब हो गयी है, इसलिए देरी हुई.." मैने झूठ बोला पापा को
"ओके .. कहाँ हो तुम, मैं अभी ज़य को भेजता हूँ, तुम्हे रिसीव करने के लिए..."
"नहीं डॅड.. अभी ठीक करवा दी है गाड़ी.. हम आ रहे हैं माल में.."
"माल में नहीं बॉय, तुम लोग अभी सीधे घर आओ, हमने तुम्हारी शॉपिंग कर ली है.. जल्दी आओ, कुछ और बातें भी डिसकस करनी हैं.." पापा ने फोन कट करने से पहले कहा...
पहली बार मुझे पापा पे गुस्सा आ रहा था, मैने फोन कट करके फिर पूजा से कहा.
"बोलो पूजा.... आइ आम ऑल युवर्ज़ नाउ"
पूजा:- , घर चलिए अब, बहुत देर हो चुकी है हमको, घर चल कर आराम से बात करते हैं.. और कल हम इंडोनेषिया तो जा रहे हैं, इतमीनान से बात करेंगे कल...
मैं:- नहीं पूजा.. अभी कहो, क्या हुआ है, मैं अभी जानना चाहता हूँ प्लीज़
पूजा:- ,.. प्लीज़, काफ़ी देर हो चुकी है, और चिंता नहीं कीजिए.. मैं आपको सामने से सब बताना चाहती हूँ,
मैने ज़्यादा बहस ना करते हुए गाड़ी चलाना शुरू किया... कुछ देर चलने के बाद , मौसम ने करवट बदली, और हल्की हल्की बारिश शुरू होने लगी...
"ये गर्मी में बारिश कहाँ से आ गयी" मैने चिढ़ते हुए पूजा से कहा...
पूजा:- आपको तो बारिश पसंद है , इतना चिढ़ क्यूँ रहे हैं...
मैने कोई जवाब नहीं दिया उसकी बात का.. बारिश तो पसंद थी मुझे, पर मेरा दिमाग़ मेरे दिल का साथ नहीं दे रहा था.. मुझे ऐसे देख पूजा ने जारी रखा
"मैं जानती हूँ कि पिछले कुछ दिनो से इन सब बातों की वजह से आप ठीक से ना खा रहे हैं, ना तो आराम कर रहे हैं... आपकी चिंता बिल्कुल सही है .. पर आप इन सब के बीच में कुछ भूल रहे हैं.."
"पूजा... क्या भूल रहा हूँ, अब ज़्यादा पहेलियाँ मत भुजाओ प्लीज़" मैने झल्लाते हुए कहा...