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मेरे गाँव की नदी complete

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फिर से कहानी कल्लू के शब्दों में-

गीतिका मेरे बगल में लेट गई और मैंने जब करवट ली तो गुड़िया की मोटी गाण्ड मेरे लंड से सट गई मेरा लंड तो गुड़िया की गुदाज जवानी और मोटे मोटे दूध देख कर ही खड़ा हो गया था तभी माँ अपने घाघरे के ऊपर से अपनी चुत पोछते हुए बाथरूम से निकली और हम दोनों ने आंखे बन्द कर ली माँ थोड़ी देर बाद एक चादर ले कर आई और हम दोनों के ऊपर डाल कर अंदर चलि गई।

मैने धीरे से कहा गुडिया।

गूडिया : क्या भइया, गुड़िया ने मेरी ओर मुह कर लिया और मुझे देखने लगी।

कालू : गुड़िया कल फिर चलेगी मेरे साथ नदी में नहाने।

गुडिया : हाँ चलूँगी लेकिन मै आपकी गोद में चढ़ कर पानी में उतरूँगी मुझे बड़ा डर लगता है।

कालू : तू फिकर न कर मै अपनी प्यारी बहना को अपनी गोद में उठा कर नहलाउंगा, इतना कह कर मैंने गुड़िया की मोटी गाण्ड पर हाथ रख दिया।

उसकी स्कर्ट पहले से ही ऊपर चढ़ी हुई थी और मेरा हाथ उसकी नंगी गाण्ड पर चला गया, मेरा लंड यह जान कर पूरी तरह अकड गया की गुडिया ने पेंटी नहीं पहनी हुई थी, मेरी उंगलियो से उसकी गाण्ड की दरार बस एक इंच की दूरी पर थी लेकिन मै हाथ आगे नहीं बढा पा रहा था।

गुडिया : भैया आप मुझसे बहुत प्यार करते हो ना।

कालू : यह भी कोई पुछने की बाद है, गुड़िया ने इतना सुना और अपने मुह से मेरे होठो को चुम लिया और मेरा हाथ अपने आप मेरी बहन गुडिया की मोटी गाण्ड की गहरी दरार में चला गया, मेरे हाथ गुड़िया की गुदा को जैसे ही सहलाने लगे गुड़िया कस कर मुझसे चिपक गई।

अब मै बेतहाशा गुड़िया के रसीले होठो को चुसने लगा और उसकी मोटी गाण्ड की गहरी दरार में हाथ फेरने लगा।

गुडिया : भैया एक बात कहूँ।

कालू : क्या।

गुडिया : भैया आप बहुत अच्छा चाटते हो, इतना कह कर गुड़िया मुस्कुराने लगी, मैंने गुड़िया की छाती पर धीरे से हाथ रखा तभी गुड़िया ने मेरे हाथ के ऊपर हाथ रख कर अपने दूध को दबाने का इशारा किया।

कालू : क्या कह रही थी तु।

गुडिया : मुस्कुराते हुये, क्या।

कल्लु : क्या चाटने की बात कह रही थी।

गुडिया : शर्मा कर अपने मुह को मेरे सिने में छुपाते हुए कहने लगी कुछ नही।

कालू : मैंने धीरे से गुड़िया की गुदा सहलाते हुए उसकी चुत की फांको को उंगलियो से सहलाया और फिर कहा बता न गुड़िया मै क्या बहुत अच्छा चाटता हूँ।

गुडिया : धीरे से मेरे कान के पास मुह लगा कर कहने लगी, भैया आप चाटते थोड़े ही हो, आप तो चुसते हो और पीते हो।

कालू : गुड़िया के मोटे मोटे दूध को दबाते हुये, बता न क्या पीता हूँ।

गुडिया : अपनी बहन की चुत और क्या।

कालू : भला कोई भाई अपनी बहन की चुत पीता है क्या इतना कह कर मैंने अपनी जीभ गुड़िया के मुह में डाल दिया और वह मेरी जीभ चूस कर कहने लगी।

भैया आज कल तो सब सबसे पहले अपनी बहन की ही चुत पीना पसंद करते है।

कालू : तुझे कैसे पता है यह सब।

गुडिया : मैंने क़िताबों में पढ़ा है।

कालू : क्या लिखा था उसमे।

गुडिया : मुझे शर्म आती है।

कालू : अच्छा मै तेरी चुत चाटूंगा फिर तो बतायेगि।

गुड़िया : मुस्कुराते हुए ठीक है लेकिन कोई देख लेगा तो।

कालू : एक काम करते है में तेरे पैरो की तरफ सर कर लेता हु और चादर ढक कर लेट जाते है फिर मैंने अपना सर गुड़िया के पैरों की तरफ कर लिया, गुड़िया ने अपनी मोटी भरी हुई जांघो को फैला दिया और मै उसकी रसीली चुत की मादक गंध सूँघते ही पागल हो गया और अपनी बहन की रसीली चुत को अपनी जीभ से चाटने लाग, लेकिन तभी मुझे जोर का झटका लगा जब गुड़िया ने मेरे काले लंड को धोती के ऊपर से अपने हाथ में भर कर दबोच लिया, मै उस एह्सास से पागल होने लगा और गुड़िया की मस्त चुत को अपने हांथो से फैला फैला कर चाटने लगा। इतने में गुड़िया ने मेरे लंड को धोती से बाहर निकाला और मेरे लँड को चुसने लगी ।मैं तो चकित हो गया की गुड़िया किसी एक्सपर्ट की तरह मेरे मस्त लंड को चूस रही थी,गीतिका ने 10 मिनट तक मेरे लंड को अच्छी तरह से चाटा और चूसा मेरे लंड पूरा रॉड बन गया था।मैंने भी गुड़िया की चूत को फैला फैलाकर चाटा।

कुछ देर बाद गीतिका ने कहा भैया इधर आओ न, मै उठ कर उसकी तरफ चला गया और उसे देखा तो उसने मेरे हाथ पकड़ कर अपने मोटे मोटे दूध पर रख दिए और मै अपनी बहन के कसे हुए ठोस दूध को कस कस कर दबाने लगा, रात के १२ बज चुके थे गांव में सन्नाटा था और गीतिका अपने दूध दबवाते हुए मेरे लंड को खूब दबा दबा कर देख रही थी।

मै उसके रसीले होठो को चूस रहा था।

 
इस कहानी का अगला अपडेट कल आएगा।
 
कल्लु : गुड़िया बता न तूने किताब में क्या पढ़ा था।

गुडिया : मुझसे चिपकते हुये, भैया उसमे बहुत गन्दी गन्दी कहानिया थी।

कालू : कैसी कहानिया बता ना।

गुडिया : भैया मुझे शर्म आती है।

कालू : अब अपने भैया से क्या शर्मा रही है बता न।

गुडिया : भैया उस कहानी में लिखा था की एक भाई की दो बहने थी और वह अपनी दोनों बहनो को पूरी नंगी करके खूब कस कस कर चोदता है।

कालू : अरे गुड़िया वो तो कहानी में ऐसे ही लिख देते होंगे वर्ना कोई भाई अपनी बहन को थोड़े ही चोदेगा।

गडिया : ऐसा नहीं है भैया आज कल तो लोग सबसे पहले अपनी बहन को ही नंगी करके चोदना चाहते है

कालू : तूने कही सुना है ऐसा।

गुडिया : हाँ मेरी सहेली बता रही थी की उसके भैया उसको पिछले 4 सालो से खूब तबियत से रात रात भर नंगी करके चोदते है।

कालू : क्यों उसके घर में भाई बहन के अलावा और कोई नहीं है क्या।

गुडिया : नहीं उसकी माँ है ना।

कालू : तो फिर वह रात भर अपनी बहन को नंगी करके चोदता है तो उसकी माँ को पता नहीं चलता है।

गुडिया : मुस्कुराते हुये, हो सकता है भैया बहन को चोदने के बाद वह अपनी माँ को भी रात भर नंगी करके चोदता हो।

कालू : मुस्कुराते हुए अपनी बहन के रसीले आमो को दबा दबा कर चुसते हुये, अरे गुड़िया कोई अपनी माँ को पूरी नंगी करके कैसे चोद सकता है।

गुडिया : मेरे लंड को दबाते हुये, अरे भैया आजकल तो लोगो को सबसे ज्यादा अपनी माँ बहन के दूध और चूतड़ ही सबसे ज्यादा अच्छे लगते है।

मैने तो कई लड़को को अपनी खुद की माँ के भारी चूतडो को घुरते हुए देखा है और कहानियो में भी माँ को चोदने की बहुत कहानिया लिखी है लोगो ने।

तूम भी तो माँ के चूतडो को खा जाने वाली नज़रो से देख रहे थे।

कालू : नहीं नहीं वो तो मै ऐसे ही देख रहा था।

गुडिया : झूठ मत बोलो देखो माँ के मोटे मोटे चूतडो की बात करने से आपका लंड कितना बड़ा और मोटा हो गया है, सच सच बताओ भैया आपको माँ के चुतडों को देखना अच्छा लगता है ना।

कालू : चुत में ऊँगली पेलते हुये, मुझे तो तेरे और माँ दोनों के चूतड़ बहुत अच्छे लगते है।

गुडिया : तो क्या आज रात भर आप अपनी बहन को पूरी नंगी करके चोदोगे।

कालू : क्या तू अपने भैया का मोटा तगड़ा लंड अपनी चुत में नहीं डलवाना चाहती है।

गुडिया : मै तो कब से अपने भैया के मोटे तगडे लंड से चुदने के लिए तड़प रही हूँ, भैया अपनी बहन के ऊपर चढो ना।

कालू : कही माँ आ गई तो।

 
गुडिया : ओफ हो आप बहुत ड़रते हो माँ आ गई तो माँ को भी चोद लेना पर पहले अपनी बहन को तो चोद लो

गुडिया की बात सुन कर मैंने उसकी मोटी जांघो को फैला कर अपने मस्ताने लंड को उसकी चुत के मुहाने पर रख कर उसके दूध को दबोचते हुये एक कस कर धक्का दिया और मेरा मोटा लंड मेरी बहन की कुँवारी रसीली चूत को फाड़ता हुए एक ही बार में आधा घुस गया।गुड़िया जोर से चिल्लाई लेकिन मैंने पहले ही उसके रसीले होंठो को अपने होंठो में कस लिया था। अब गुड़िया मुझसे कस कर चिपक गई।

गुडिया : ओह भैया आह सी सी बहुत मोटा और लम्बा है मेरी चुत फटी जा रही है आह सी सीईई ओह भईया,

कालू :आह ओह गुड़िया कितनी कसी हुई टाइट चुत है तेरी पर तेरे दूध बड़े मस्त है गुड़िया बस थोड़ा सा लंड और बचा है।

गुडिया : धीरे धीरे पेलो भैया यह सी स ओह मर गई भइया।

मैने गुड़िया की चूत में धीरे धीरे गहरे धक्के मारने शुरू कर दिए और गुड़िया भी धीरे धीरे अपनी कमर उचकाने लगी।

आह भैया थोड़ा और तेज करो न बहुत मजा आ रहा है, मैंने गुड़िया के मोटे मोटे चूतडो के निचे अपने हाथ लगा कर खूब कस कर कर गुडिया की चुत में अपने काले मुसल को पेलने लगा और गुड़िया मुझसे खूब चिपक चिपक कर अपनी चुत मरवाने लगी, ओह गुड़िया जब से मैने तेरे मोटे मोटे चूतडो को देखा है तब से मै तुझे पूरी नंगी करके चोदने के लिए तड़प रहा था, जब मैंने देखा की मेरी प्यारी बहन इतनी खुबसुरत हो गई है और उसके दूध और चूतड़ बड़ी बड़ी औरतो की तरह दिखने लगे है तब से मै अपनी प्यारी बहन की गदराई जवानी को पुरी नंगी करके चोदने के लिए तड़प रहा था।

गुडिया : तगडे धक्के अपनी चुत में लेते हुए आह ओह ओह भैया मै सब जानती हूँ, पहले दिन ही तुम्हारी नजरे जब मेरी मोटी गाण्ड पर पड़ी थी तो मै समझ गई थी की मेरा अपना भाई मुझे पूरी नंगी करके मुझे चोदना चाहता है पर जब मुझे यह पता चला की तुम माँ को भी पुरी नंगी करके उसे चोदना चाहते हो तो बड़ा अजीब लगा फिर जब मैंने अपनी सहेली से पूछा तब उसने मुझे बताया की आज कल तो कई माँ अपने बेटे से भी चुदवा लेती है, आज कल बड़ी उम्र की औरतो को भी जवान और तगडे लंड की चाह होती है, हो सकता है माँ भी अपनी चुत रगडते हुये तुम्हारे लंड के बारे में सोचती हो या तुमसे चुदने की कल्पना करके अपनी चुत रगड़ती हो।

 
कल्लु : कस कस कर लंड अपनी बहन गीतिका की मस्त भोस में पेलते हुये, गुड़िया क्या माँ भी अपनी चुत रगड रगड कर पानी निकालती होगी।

गुडिया : क्यों नहीं भैया आह ओह हर औरत जब अकेली होती है तो अपनी चुत जरुर रगड़ती होगी, मुझे तो लगता है माँ तुम्हारे लंड को सोच सोच कर मुठ्ठ मारती होगी तुमने अभी तक माँ को अपना लंड दिखाया है की नही।

कल्लु : अरे कहा दिखाया है हाँ धोती के ऊपर से माँ ने जरुर देखा है।

गीतिका : भैया एक बार अपने लंड को धोती से बाहर निकाल कर माँ को दिखा दो तो वह तुम्हारे खड़े लंड को देख कर पागल हो जायेगी और अपनी मस्त चूत में आपका लंड लेने के लिए तड़प जाएगी, आपका लंड ही इतना मोटा तगड़ा है की किसी की बुर भी पानी छोड़ सकती है।

कल्लु : अरे गुड़िया मै तो खुद माँ को पूरी नंगी करके उसकी मस्त चुत मारना चाहता हु पर अभी तक तो मैंने माँ को पूरी नंगी भी नहीं देखा है।

गीतिका : भैया अब खूब तेज तेज चोदो बड़ा मजा आ रहा है, खूब चुत मारो अपनी गुड़िया परी कि, वैसे भी किसी का भी लंड सबसे ज्यादा अपनी बहन

और माँ की नंगी जवानी देख कर ही खड़ा होता है। आज रात भर खूब चोदिये भैया अपनी छोटी बहन को।

कल्लु : हाँ गुड़िया ले अपने भैया का मस्त लंड तेरी चुत भी बिलकुल माँ पर गई है और तेरे चूतड़ भी माँ की तरह ही मोटे मोटे होते जा रहे है।

गुडिया : आह आह ओह भैया तुमने क्या माँ की चुत देखी है।

कालू : हाँ जब वह खेतो में बैठ कर घास काटती है तब लगभग रोज ही मुझे माँ का मस्त भोस नजर आ जाता है।

गुडिया : कैसी है माँ की चुत क्या खूब बड़ी और फुल्ली हुई है।

कल्लु : अरे मेरी परी माँ की मस्त चुत देखते ही मेरे मुह में पानी भर आता है ऐसा लगता है माँ की मस्त फटी चुत में वही बैठे बैठे ही लंड पेल दू और पूरे खेत में नंगी दौड़ा दौड़ा कर चोदुं।

गुडिया : भैया माँ को चुत फैला कर मुतते हुए देखा है आपने।

कालू : देखा है बहुत मोटी धार निकलती है माँ की मस्त भोस से।

गुड़िया : भैया एक बात कहूँ।

कालू : क्या।

गुडिया : मै चाहती हु की आप माँ को मेरे सामने नंगी करके खूब कस कस कर चोदो, मै चाहती हु की मै छूप जाऊ और आपको और माँ को छुप कर चोदते हुए देखु, मै देखना चाहती हु की माँ आपके मस्त काला लंड को कैसे चुसती है और फिर आप माँ को झुका कर कैसे उसकी मस्त चुत को खूब हुमच हुमच कर चोदते हो, मै चाहती हु आप माँ को खड़ी करके उसकी मस्त चुत के दाने को रगडते जाओ और माँ खड़ी खड़ी मुतती जाए,

जब वह मुतना रोक दे तो आप उसकी मस्त चुत के दाने को अपने मुह में भर कर चुसना शुरू कर दो और माँ फिर से आपके मुह में मुतना शुरू कर दे।

 
कल्लु : तू फिकर न कर जब भी मै माँ को पूरी नंगी करके चोदूँगा तुझे जरुर बताऊंगा,और दिखाऊँगा। लेकिन मै माँ को चोदने के लिए पटाउं कैसे।

गुडिया : भैया एक काम करो अगर आपने चाची को पटा कर चोद दिया तो माँ भी चुदवा लेगी क्यों की माँ और चाची की बड़ी बनती है।

कालू : लेकिन चाची मुझसे क्यों चुदवाएगी।

गुडिया : अरे चाची भी बड़ी चुदासी रंडी है वह तो जब भी मिलती है आपके कसरती बदन की ही बात करती है और उसने तो आपके लंड के साइज की कल्पना भी की हुई है।मुझसे बता रही थी की मै आपके साथ नंगी होकर नहा रही थी

कालू : क्या उसने तुझे और मुझे नहाते हुए देखा है।

गुडिया : हाँ मुझसे कह रही थी की तू खूब आजकल अपने भैया के साथ नंगी होकर नहाती है, मैंने कहा की मै तेरना सिख रही थी तो कहने लगी मुझे भी अपने भैया से कह कर तैरना सीखा दे, तुम कहो तो कल चाची को भी नदी में नहाने के लिए बुला लेती हु फिर जिस तरह तुमने मुझे तैरना सिखाया है और मेरे रसीले आमो को चुस चूस कर जैसे मेरी मस्त चुत चाटी थी बस उसी तरह चाची को भी नंगी करके तैरना सीखा देना। इतनी बड़ी घोड़ी को जब आप पूरी नंगी करके तैरना सिखाओगे तो आपका लंड पानी छोड़ देगा।

कल्लु : अरे बहना यह लंड तो पानी तब छोडेगा जब तेरी मस्त चुत को रात भर चोद चोद कर लाल नहीं कर देगा।

गुडिया : अच्छा भैया तुम्हारा मन माँ को चोदने का ज्यादा करता है या चाची को।

कालू : मै तो अपनी कल्पना में दिन रात अपनी माँ को ही नंगी करके खूब कस कस कर चोदता हूँ, मुझे सबसे ज्यादा माँ के मोटे मोटे मटकते चूतड़ अच्छे लगते है।

गुडिया : कभी माँ की मोटी गाण्ड को अपने हांथो से सहलाये हो।

कल्लु : गुड़िया की चुत में जड़ तक लंड पेलते हुये, हाँ गुड़िया ठण्ड के मौसम में जब मै अंदर सोता था तब रात को माँ भी मेरे बगल मे सोती थी तब मैंने माँ के मोटे मोटे गुदाज नरम नरम चूतडो को खूब सहलाया लेकिन गुड़िया मेरा मन माँ के चूतडो को खूब दबा दबा कर

दबोचने का होता है और उसकी मोटी गाण्ड की गहरी दरार में अपने मुह को भर कर चाटने और मुह से माँ की गुदाज गाण्ड दबाने का होता है।

गुडिया : तो जब माँ रात भर तुम्हारे साथ सोइ थी तो माँ के मस्त मोटे चूतडो को उनका घाघरा उठा कर खूब दबोच दबोच कर मसल लेते न।मा की नींद तो वैसे भी बहुत पक्की है फिर भी तुम्हे अगर डर लगता है तो मै तुम्हे कल ऐसी व्यवश्था कर दूंगी की तुम मेरे सामने ही रात भर माँ के गुदाज नंगे जिस्म को खूब दबोच दबोच कर सहलाना और जहा मन चाहे वहाँ माँ के बदन को चाटना चुसना, लेकिन अगर माँ को पुरी नंगी करके चोदना है तो चाची को भी नंगी करके तैरना सीखाना पडेगा।

 
कल्लु : ठीक है मेरी परी बहना जैसा तू कहेगी वैसा ही करुँगा अब जरा अपनी जाँघे थोड़ा और फैला कर उठा ले ताकि तेरे भैया का मोटा लंड अपनी बहन की चूत की जम कर ठुकाई कर सके और फिर मैंने गुड़िया को खूब कस कस कर चोदना शुरू कर दिया और गुड़िया हाय भैया हाय मेरे राजा भैया चोदो मुझे।

खुब कस कर चोदो आज फाड दो अपनी बहन की रसीली चुत और चोदो आह आह यह ओह सीई सीई ओह भईया मै मर जाऊंगी बस फिर क्या था मैंने गुड़िया की गाण्ड को अपनी हथेली में उठा कर ताबड तोड़ धक्के उसकी चुत में मारना शुरू कर दिया और फिर मेरा सारा रस गुड़िया की रसीली बुर में निकल गया और हम दोनों हाफ्ते हुये चिपक गये।

उस दिन गुड़िया को मैंने रात भर खूब जम जम कर चोदा हर चुदाई के कुछ देर बाद गुड़िया मेरा लंड चूस चूसकर खड़ा करती और फिर हम मस्त सेक्स की बाते करके चुदाई करते। गुड़िया और मै सुबह ४ बजे सोये।

सूबह सुबह हम अपने खेतो की और चल दिए आगे आगे गुड़िया और बाबा चल रहे थे और पीछे पीछे मै चल रहा था, गुड़िया बार बार मुझे पीछे मुड कर देखती और मुस्कुरा देती, मै जब उसके चूतडो को देखने लगता तब वह चलते चलते अपने घाघरे के ऊपर से अपनी गाण्ड खुजलाने लगती और मुझे देख कर ऐसी मादक निगाहो से देखते हुए स्माइल देती की मेरा दिल करता की रंडी का घाघरा उठा कर यही खड़े खड़े खूब कस कस कर लंड अपनी बहन की गाण्ड में पेल दूँ।,

खेतो में पहुंचने के बाद बाबा अपने काम में लग गए और गीतिका मेरी ओर देख कर मुस्कुराते हुए कहने लगी भैया मै चाची के पास जा रही हु और

1 बजे तक हम नदी में नहाने चलेंगे और हाँ मै चाची को भी साथ लेकर आ रही हु तब तुम चाची के सामने शरमाना नही।

कालू : लेकिन तू चाची से कहेगी क्या।

गुडिया : वह सब मेरे ऊपर छोड़ दो और यह बताओ की चाची को चोदोगे ना।

कालू : मुस्कुराते हुए तू जैसा कहेगी मै वैसा करुँगा।

गडिया : मुस्कुराते हुए तो फिर ठीक है थोड़ी देर में मै चाची के साथ नदी की तरफ जाऊंगी तुम भी पीछे पीछे चले आना।

इसके बाद गुड़िया चाची के पास पहुच गई और उससे बाते करने लगी।

चाची : क्यों गुड़िया कैसी है आज तो बड़ी खिली खिली लग रही है कही रात को कल्लु के साथ तो नहीं सोइ थी।

गुडिया : मुस्कुराते हुए अरे नहीं चाची लेकिन हाँ भैया से मैंने तुम्हे भी तैरना सीखने की बात कर ली है तो आज चलो हम साथ में नदी में नहायेंगे और तैरेंगे भी।

चाची : न बाबा न मै नहीं जाती तेरे साथ तू तो बिलकुल रंडी बन गई है तुझे शर्म नहीं आती पूरी नंगी होकर अपने भाई के खड़े लंड पर चढ़ जाती है।

गुडिया : इसीलिए तो कह रही हु एक बार तुम भी पूरी नंगी होकर भैया के लंड पर चढ़ जाओगी तो फिर तुम्हारा मन उनके खड़े लंड से निचे उतरने का नहीं होगा।

 
चाची : नहीं गुड़िया मुझे तो शर्म आएगी, इतने बड़े जवान मरद के सामने मै कैसे नंगी हो कर पानी में जॉंऊंगी।

गुडिया : तुम भी न चाची तुम्हारी मस्ती भरी जवानी देख कर तो मैंने भैया को पटाया है की तुम्हे भी तैरना सीखा दे और तुम हो की अब नई नवेली दुल्हन की तरह

नखरे कर रही हो।

चाची : कुछ सोच कर मुस्कुराते हुये, क्या कल्लु राजी हो गया है मुझे तैरना सीखाने के लिए सच सच बता।

गुडिया : मुस्कुराते हुये, अच्छा पहले तुम मुझे एक बात सच सच बताओ।

चाची : क्या।

गुडिया : चाचा जब 2 महिने में एक बार आते है तब तुम इतने दिनों तक क्या करती हो।

चाची : मुस्कुराते हुये, अरे अब क्या करुँगी गुड़िया जब बहुत चुदवाने का मन करता है तो ऊँगली से सहला लेती हूँ।

गडिया : तुमने कभी कल्लु भैया का लंड देखा है।

चाची : हाँ एक बार उसे मुतते हुए देखा था बहुत मोटा और काला लंड है तेरे भैया का, लेकिन मुझे लगता है तूने भी अपने भैया के मोटे लंड के दर्शन कर लिये

है इसीलिए मुझसे पूछ रही है, सच सच बता नदी में नहाते समय तूने अपने भैया का मोटा लंड देखा है ना।

गुडिया : मुसकुराकर शरमाते हुये, हाँ देखा है।

चाची : एक दम से उत्साहित होते हुए कहने लगी उसने खुद तुझे दिखाया था क्या।

गुडिया : अरे नहीं चाची पर जब मै नंगी हो गई थी तब उनका लंड खड़ा हो गया था और धोती से बाहर निकल आया था तब मेरी नजर भैया के मोटे तगडे लंड

पर पड़ गई थी।

चाची : तुझे नंगी देख कर तो वह पगला गया होगा, तेरे दूध भी खूब दबाये होंगे ना।

गुडिया : नहीं वह ड़रते बहुत है इसलिए बस मुझे पकड़ने के बहाने मेरे दूध और गाण्ड को अपने हाथ से सहला भर देते है।

चाची : तुझे मालूम है कल्लु का लंड बहुत मोटा और तगड़ा है मुझे यह बात सबसे पहले तेरी माँ ने बताइ थी।

गुडिया : तो क्या माँ ने भैया का लंड देखा है।

चाची : हाँ वह बता रही थी की उसके बेटे कल्लु का लंड बहुत मोटा और लम्बा है, कहने लगी एक बार को तो उसकी चुत ने भी अपने बेटे के ऐसे मस्त लंड को देख कर पानी छोड़ दिया था।

गुडिया : इसीलिए तो कह रही हु भैया बहुत भोले है और मै अकेली कुछ मजा नहीं मार पा रही ह, तुम साथ रहोगी तो दोनों मिल कर मजा लेंगे।

चाची : तू तो ऐसी बाते करने लगी है की मेरी बुर अभी से पानी छोड़ रही है, कही तू अपने भैया के मोटे लंड से चुदना तो नहीं चाहती है।

गुडिया : हाँ जब से भैया का मोटा लंड देखा है तब से मेरी चुत में बहुत मीठी मीठी खुजलि हो रही है, भैया का मोटा लंड अपनी चुत में घूसवाने का बड़ा मन कर रहा है, लेकिन पहले तुम भैया से अपनी चुत मरवा लो उसके बाद ही मै भैया से चुदुँगी।

 
चाची : अच्छा तो मुझे चुदते देख कर पहले तू अपना डर दुर करना चाहती है की कही तेरे भैया का मोटा लंड तेरी चुत फाड न दे।

गुडिया : हाँ पहली बार मरवाने पर मैंने सुना है बड़ा दर्द होता है और फिर भैया का लंड तो खूब मोटा और तगड़ा है इसलिए मै चाहती हु की पहले मै देखु

की कैसे आपकी मस्त चुत को मेरे भैया का लंड फाड फाड कर चोदता है।

चेची : लेकिन अगर कोई आ गया नदी में तब।

गुड़िया : अरे जब तक तुम भैया से चुदोगी तब तक मै इधर उधर आने वाले का ध्यान रखूँगी फिर जब भैया मुझे पूरी नंगी करके चोदेगे तब तुम ध्यान रखना और वैसे भी जिस घाट पर तुम और हम जाते है वहाँ तो और कोई आता ही नहीं है तो डर किस बात का।

चाची : कुछ सोचते हुए अच्छा ठीक है लेकिन।

गुडिया : अब लेकिन वेकिन कुछ नहीं अब तुम जल्दी से मेरे साथ चलो हमें सीधे नदी की ओर जाना है भैया हमें देख कर आ जाएगे।

चाची : अरे जरा रुक तो सही एक दम से उठा नहीं जाता है कमर में दर्द होने लगता है।

गुडिया : चाची की मोटी गाण्ड की दरार को घाघरे के ऊपर से सहला कर दबाते हुए कहने लगी इसीलिए तो चाची कह रही हु एक बार भैया का मोटा लंड जब तुम्हारी गाँड में घुस कर चोदेगा तो तुम्हारे कमर के सारे दर्द दुर हो जाएगे और फिर चाची मुझसे मुसकुराकर बोली: रंडी कही की शहर जाकर तो बहुत चुदासी हो गई है चल आज लगता है कल्लु का मस्ताना लंड मेरी चुत की खूब चुदाई करने वाला है।

आगे कहानी गुड़िया के शब्दों में-

मैं चाची को ले कर नदी की ओर चल पड़ी और कुछ देर बाद भैया आता हुआ दिखाई दिया चाची कपडे धोने लगी और मैं अपनी गोरी गोरी पिण्डलियों को नदी के पानी में डाल कर अपने पैर हिला रही थी और मेरी चुत मस्ती के मारे फूल रही थी, चाची की गदराई जवानी उसकी चिकनी कमर और उठी हुई गुदाज गाण्ड अलग ही कहर ढा रही थी, कुछ देर बाद कल्लु भैया आ गए और।

गीतिका : भैया आज तो आपको चाची को भी तैरना सीखाना पडेगा।

कालू : चाची को तो तैरना आता होगा क्यों चाची।

चाचि : अरे कहा रे कल्लु कभी ऐसी जरुरत ही नहीं पड़ी अब यह गुड़िया जिद करने लगी की भैया बहुत अच्छे से तैरना सीखाते है और मुझे भी पकड़ लाई, चाची की नजर कभी भैया के चौड़े सिने में और कभी उसकी धोती में कसे लंड की ओर जा रही थी।

कल्लु : अच्छा हुआ चाची आप आ गई आपको भी तैरना सीखा देता हु और फिर कल्लु भैया पानी में कमर तक उतर गए और मुझसे कहने लगे आजा गुडिया,

मैने अपने कपडे की तरफ इशारा किया तो भैया ने कपडे उतारने का इशारा कर दिया, मैंने पहले अपनी चोली उतार दी और मेरे बड़े बड़े रसीले आम पूरे नंगे हो गये।

मेरे आमो को देखते ही कल्लु भैया अपने लंड को धोती के ऊपर से सहलाने लगे

कालू : गुड़िया घाघरा भी उतार कर जल्दी से आ जा।

गडिया : भैया पहले चाची को सिख़ाओ उसके बाद मै आउंगी, मैंने चाची को कहा चाची जल्दी से नंगी हो जाओ भैया देखो कैसे तुम्हारे पके हुए आमो को खा जाने वाली नज़रो से देख रहे है।
 
चाची ने शरमाते हुए अपनी चोली खोलना शुरू की और जब उसने चोली उतार दी तब उसके मुझसे भी डबल मोटे मोटे रसीले आमो को देख कर कल्लु भैया की

आंख में जवानी के लाल डोरे तैरने लगे।

चाची : घाघरे का नाडा पकडे मुसकुराकर कहने लगी गुड़िया मुझे शर्म आ रही है, मै घाघरा पहने पहने ही तैरना सीख लेती हूँ।

गडिया : अरे चाची घाघरा बार बार पैर में फसेगा तो कैसे तैरोगी, चलो जल्दी से उतार दो, लो मै भी तुम्हारे साथ ही नंगी हो जाती हु तब तो तुम्हे शर्म नहीं लगेगी

ओर फिर मैंने अपने घाघरे का नाडा खींच दिया और मै पूरी मादरजात नंगी हो कर खड़ी हो गई।

कल्लु भैया मेरी नंगी रसीली जवानी को घुर रहे थे तभी मैंने चाची के नाडे को पकड़ कर खींच दिया और जब चाची पूरी नंगी हुई तो कल्लु भैया भी उसकी गुदाज भरी हुई जवानी उठा हुआ माँसल पेट और बड़े बड़े दूध और मस्त फुली हुई चुत को देख कर मस्त हो गये, अब कल्लु भैया को मैंने कहा भइया थोड़ा इधर आओ नहीं तो हम डूब जाएगे और फिर कल्लु भैया हमारी तरफ आने लगे और मैंने चाची का हाथ पकड़ कर उन्हें पानी में उतार दिया।

चाची का चेहरा पूरा लाल हो रहा था और रंडी के चूतड़ बहुत भरी भरकम और गोरे थे अभी कल्लु भैया को चाची के मतवाले चूतडो के दर्शन नहीं हुए थे।

कालू भैया एक दम आ गए और चाची का हाथ पकड़ कर गहराई की ओर जाने लगे चाची डर रही थी और धीरे धीरे आगे कदम बढा रही थी और मै चाची की

चीकनी कमर पकडे उसके पीछे पीछे पानी में जा रही थी।

तभी कोई मछली निचे आई और फिर क्या था चाची किसी लोंड़िया की तरह भैया के कमर के इर्द गिर्द अपनी मोटी जांघो को लपेट कर भैया के सिने से चिपक गई, हाय मेरे भइया को तो जैसे जन्नत का सुख मिल गया भैया का दोनों हाँथ सीधे चाची के भारी भरकम गोरे गोरे चूतडो पर चले गए और भैया ने चाची के चूतडो को ऐसे थम लिया जैसे चाची को अपने लंड पर चढा कर चोद रहे हो, उस समय चाची का भारी भरकम 70 किलो का जिस्म पानी के अंदर भैया को किसी फूल के सामान लग रहा था।

अब भैया और बीच में जाने लगे और मै भी भैया के पीछे से अपनी जांघो को खोल कर भैया की कमर में टांगे लपेट कर लिपट गई पीछे से मैं अपने मोटे मोटे रसीले आमो का दबाव भइया की पीठ पर दे रही थी और चाची भैया के सिने से अपने मोटे मोटे तन्दुरुस्त रसीले आमो को दबा रही थी, भैया पागलो की तरह चाची को अपने सिने से चिपकाये हुये उनके सुडौल बड़े बड़े चूतडो को अपने हांथो में भरे हुए दबा रहे थे।

कल्लु : गुड़िया और बीच में ले कर चलु।

गुडिया : हाँ भैया बहुत मजा आ रहा है लेकिन डूबा मत देना, चाची आपको डर तो नहीं लग रहा है।

चाची : गुड़िया इधर बहुत गहरा है कल्लु ज्यादा बीच में मत जा।

मै कुछ कहता इससे पहले गुड़िया ने पानी के अंदर हाथ डाल कर मेरी धोती खोल दी और मेरा फनफनाता काला और मोटा लंड सीधे चाची की मस्त फुली हुई भोस में रगड खाने लगा।

और फिर गुड़िया ने मेरे एक हाथ को पकड़ कर चाची की फुली चुत पर रख कर दबा दिया और पहली बार मैंने अपनी चाची की मस्त फुली हुई चूत को पकड़ कर सहलाया, तभी गुडिया न हाथ आगे ले जाकर मेरे लंड को पकड़ कर उसकी खाल पीछे की और आगे से चाची के हाथ को पकड़ कर मेरे लंड को चाची के हाथ में दे दिया।

 
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