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“चलो अब तुम मेरी चूसो.” मैं बेड पर एक पैर रख कर बोली।
“नहीं मेमसाब… आप नशे में हैं.” वह बोला।
“हाँ तो… तुम्हें बोला ना… सक करो!” मैं अपने हाथों से अपनी चुत का दाना मसलते हुए बोली।
“नहीं मेमसाबम यह पाप होगा.”
उसके कहने पर मैं सिर्फ मुस्कुराई और अपना पैर बेड पर से उठाकर उसके सीने पर रखा और उसे बेड पर धकेला।
वह अपने पैर नीचे रखते हुए ही बेड पर लेट गया। मैंने अपने दोनों घुटने उसके शरीर के आजु बाजू बेड पर रखे और बेड पर चलते चलते अपनी चुत उसके मुँह के ऊपर ले आयी। वह अचंभित होकर मेरी चुत को देख रहा था। मैंने अपने पैर फैलाते हुए मेरी चुत को उसके होठों से छह इंच पास ले आयी, आगे क्या होने वाला है इसी कल्पना से मेरे चुत से पानी छूटने लगा। मेरे पानी की एक बूंद उसके गालों पर गिरी।
मैंने अपनी चुत को नीचे ले जाते हुए उसकी नाक को मेरी चुत पर रगड़ा, उसकी नाक बराबर मेरे चुत के दाने से रगड़ खा रहा था। मैं एकदम अटक गई, मैं अपनी उत्तेजना के शिखर पर थी। मैं उसी अवस्था में उसके पहल का इंतजार का रही थी।
उसने भी मुझे ज्यादा देर इंतजार नहीं करने दिया, उसकी जीभ मेरे चुत के पास महसूस हुई, उसकी जीभ मेरी चुत के आजु बाजू स्पर्श कर रही थी। मैं भी अपनी कमर हिलाकर उसकी जीभ मेरी चुत में घुसाने की कोशिश करने लगी।
पर वह भी उल्टी दिशा में जीभ घूमा रहा था इस वजह से उसकी जीभ मेरे चुत में जाने के बजाय चुत को चारों बाजू से चाट रही थी। उसका स्पर्श मुझे अजीब उत्तेजना दे रही थी जो पहले कभी नहीं मिली।
थोड़ी ही देर बाद उसने मुझे तड़पाना बंद किया और जीभ कड़ी कर के मेरी चुत के अंदर घुसा दी तो मेरी चुत ने उसकी जीभ को भींच लिया। मैं अपनी कमर ऊपर नीचे करके उसकी जीभ से चुदने लगी। राजू भी अपनी जीभ आगे-पीछे, ऊपर-नीचे कर के मुझे और उत्तेजित कर रहा था।
मेरे चुत में पानी का स्तर अब बढ़ने लगा था पर मुझे तो उसके लंड की आस लगी थी, तो मैं उसके ऊपर से उठी और बोली- चलो ठीक से लेट जाओ.
मेरे ऐसा कहने से ही राजू तुरंत अपने पैर ऊपर लेते हुए आराम से लेट गया, उसका लंड पूरा ऊपर की तरफ खड़ा था। मैं पहले कि तरह उसके ऊपर बैठ गयी पर इस बार मेरी चुत के नीचे उसका लंड खड़ा था।
मैं थोड़ा थोड़ा नीचे होने लगी, उसका बड़ा लंड और उसपर का बड़ा टोपा मेरी चुत में घुसने वाला था। नीचे जाते जाते ही अचानक मेरी चुत उसके लंड से टकरा गई, उसके लंड के स्पर्श से ही मैं…
उसने अपने हाथों से अपना लंड पकड़ा और मेरी चुत की दरार में घुसाने की कोशिश करने लगा। वह मेरी चुत पर अपना लंड घिस रहा था और मैं उत्तेजना में पागल हो रही थी। उसके लंड के घर्षण से मेरी चुत अब पानी छोड़ने लगी थी और चुत पानी लंड पर बह रहा था। मैं उसका लंड मेरी चुत की दरार पर आने की राह देख रही थी और जैसे ही उसका लंड वहा पहुँचा मैंने झट से अपनी कमर को नीचे किया। उसके लंड का टोपा मेरी चुत में घुस गया था। उसके लंड की टोपी ने ही मेरी चुत को पूरा भर दिया था। मैं ऊपर से जोर लगा रही थी पर वह अंदर नहीं घुस रहा था और बहुत दर्द भी हो रहा था।
मैं कुंवारी नहीं थी पर राकेश का लंड और राजू के लंड में बहुत फर्क था इसलिए मेरी चुत पूरी खुली नहीं थी और उस पर राजू के लंड की टोपी बहुत बड़ी थी। तो अंदर जाते हुए बहुत दुख रहा था। पर वह लंड और वह दर्द भी मुझे मीठा लगने लगा था तो मैंने उसे और अंदर लेने का प्रयास जारी रखा।
पर मुझे वह बहुत मुश्किल लग रहा था तो मैंने ऊपर हो कर उसका लंड बाहर निकाल लिया फिर जोर से कमर को नीचे किया। अब पहले से ज्यादा लंड अंदर घुस गया था। धीरे धीरे मैं अपने कमर को ऊपर नीचे करने लगी। उस लंड के घर्षण से मेरी चुत भी पानी छोड़ने लगी उसकी वजह से लंड को अंदर घुसने में आसानी हुई और आधे से ज्यादा लंड मेरी चुत में घुस गया। मेरी गीली चुत में धंसा लंड और भी बड़ा और गरम लगने लगा।
मैं भी अपने मन को समझाते हुए उसके लंड से अपनी चुत चौड़ी कर रही थी। मैं जोर जोर से ऊपर नीचे करते हुए उसका लंड ज्यादा से ज्यादा अंदर लेने का प्रयास कर रही थी।
अब तक उसने अपने हाथ मेरे स्तनों पर रख दिये थे, अपनी उंगलियों में मेरे निप्पल पकड़ कर दबाते हुए वह मेरे दोनो स्तन मसल रहा था। उसके ज़ोरों से मसलने से मेरे स्तनों में दर्द होने लगा था पर वह दर्द भी मीठा लगने लगा था।
“नहीं मेमसाब… आप नशे में हैं.” वह बोला।
“हाँ तो… तुम्हें बोला ना… सक करो!” मैं अपने हाथों से अपनी चुत का दाना मसलते हुए बोली।
“नहीं मेमसाबम यह पाप होगा.”
उसके कहने पर मैं सिर्फ मुस्कुराई और अपना पैर बेड पर से उठाकर उसके सीने पर रखा और उसे बेड पर धकेला।
वह अपने पैर नीचे रखते हुए ही बेड पर लेट गया। मैंने अपने दोनों घुटने उसके शरीर के आजु बाजू बेड पर रखे और बेड पर चलते चलते अपनी चुत उसके मुँह के ऊपर ले आयी। वह अचंभित होकर मेरी चुत को देख रहा था। मैंने अपने पैर फैलाते हुए मेरी चुत को उसके होठों से छह इंच पास ले आयी, आगे क्या होने वाला है इसी कल्पना से मेरे चुत से पानी छूटने लगा। मेरे पानी की एक बूंद उसके गालों पर गिरी।
मैंने अपनी चुत को नीचे ले जाते हुए उसकी नाक को मेरी चुत पर रगड़ा, उसकी नाक बराबर मेरे चुत के दाने से रगड़ खा रहा था। मैं एकदम अटक गई, मैं अपनी उत्तेजना के शिखर पर थी। मैं उसी अवस्था में उसके पहल का इंतजार का रही थी।
उसने भी मुझे ज्यादा देर इंतजार नहीं करने दिया, उसकी जीभ मेरे चुत के पास महसूस हुई, उसकी जीभ मेरी चुत के आजु बाजू स्पर्श कर रही थी। मैं भी अपनी कमर हिलाकर उसकी जीभ मेरी चुत में घुसाने की कोशिश करने लगी।
पर वह भी उल्टी दिशा में जीभ घूमा रहा था इस वजह से उसकी जीभ मेरे चुत में जाने के बजाय चुत को चारों बाजू से चाट रही थी। उसका स्पर्श मुझे अजीब उत्तेजना दे रही थी जो पहले कभी नहीं मिली।
थोड़ी ही देर बाद उसने मुझे तड़पाना बंद किया और जीभ कड़ी कर के मेरी चुत के अंदर घुसा दी तो मेरी चुत ने उसकी जीभ को भींच लिया। मैं अपनी कमर ऊपर नीचे करके उसकी जीभ से चुदने लगी। राजू भी अपनी जीभ आगे-पीछे, ऊपर-नीचे कर के मुझे और उत्तेजित कर रहा था।
मेरे चुत में पानी का स्तर अब बढ़ने लगा था पर मुझे तो उसके लंड की आस लगी थी, तो मैं उसके ऊपर से उठी और बोली- चलो ठीक से लेट जाओ.
मेरे ऐसा कहने से ही राजू तुरंत अपने पैर ऊपर लेते हुए आराम से लेट गया, उसका लंड पूरा ऊपर की तरफ खड़ा था। मैं पहले कि तरह उसके ऊपर बैठ गयी पर इस बार मेरी चुत के नीचे उसका लंड खड़ा था।
मैं थोड़ा थोड़ा नीचे होने लगी, उसका बड़ा लंड और उसपर का बड़ा टोपा मेरी चुत में घुसने वाला था। नीचे जाते जाते ही अचानक मेरी चुत उसके लंड से टकरा गई, उसके लंड के स्पर्श से ही मैं…
उसने अपने हाथों से अपना लंड पकड़ा और मेरी चुत की दरार में घुसाने की कोशिश करने लगा। वह मेरी चुत पर अपना लंड घिस रहा था और मैं उत्तेजना में पागल हो रही थी। उसके लंड के घर्षण से मेरी चुत अब पानी छोड़ने लगी थी और चुत पानी लंड पर बह रहा था। मैं उसका लंड मेरी चुत की दरार पर आने की राह देख रही थी और जैसे ही उसका लंड वहा पहुँचा मैंने झट से अपनी कमर को नीचे किया। उसके लंड का टोपा मेरी चुत में घुस गया था। उसके लंड की टोपी ने ही मेरी चुत को पूरा भर दिया था। मैं ऊपर से जोर लगा रही थी पर वह अंदर नहीं घुस रहा था और बहुत दर्द भी हो रहा था।
मैं कुंवारी नहीं थी पर राकेश का लंड और राजू के लंड में बहुत फर्क था इसलिए मेरी चुत पूरी खुली नहीं थी और उस पर राजू के लंड की टोपी बहुत बड़ी थी। तो अंदर जाते हुए बहुत दुख रहा था। पर वह लंड और वह दर्द भी मुझे मीठा लगने लगा था तो मैंने उसे और अंदर लेने का प्रयास जारी रखा।
पर मुझे वह बहुत मुश्किल लग रहा था तो मैंने ऊपर हो कर उसका लंड बाहर निकाल लिया फिर जोर से कमर को नीचे किया। अब पहले से ज्यादा लंड अंदर घुस गया था। धीरे धीरे मैं अपने कमर को ऊपर नीचे करने लगी। उस लंड के घर्षण से मेरी चुत भी पानी छोड़ने लगी उसकी वजह से लंड को अंदर घुसने में आसानी हुई और आधे से ज्यादा लंड मेरी चुत में घुस गया। मेरी गीली चुत में धंसा लंड और भी बड़ा और गरम लगने लगा।
मैं भी अपने मन को समझाते हुए उसके लंड से अपनी चुत चौड़ी कर रही थी। मैं जोर जोर से ऊपर नीचे करते हुए उसका लंड ज्यादा से ज्यादा अंदर लेने का प्रयास कर रही थी।
अब तक उसने अपने हाथ मेरे स्तनों पर रख दिये थे, अपनी उंगलियों में मेरे निप्पल पकड़ कर दबाते हुए वह मेरे दोनो स्तन मसल रहा था। उसके ज़ोरों से मसलने से मेरे स्तनों में दर्द होने लगा था पर वह दर्द भी मीठा लगने लगा था।