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मेरे पति के दोस्त से चुदी

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Guest
दोस्तो, मेरा नाम प्रीति शर्मा है और मैं दिल्ली में रहती हूँ। अभी मैं सिर्फ 27 साल की हूँ, देखने में बहुत सुंदर हूँ, और जितना मेरा चेहरा सुंदर है, उससे ज़्यादा मेरा जिस्म सुंदर है।

शादीशुदा हूँ, मेरे पति बहुत प्यार करते हैं।

पर मेरी कमजोरी यह है कि एक मर्द के प्यार से मेरा पेट नहीं भरता। या यूं कहूँ के मेरे पेट के नीचे, दोनों टाँगों के बीच जो सुराख है वो नहीं भरता। इसलिए मैं अक्सर इस तरह के लोगों की तलाश में या मौकों की तलाश में रहती हूँ, जब मैं अपने जिस्म की तपिश को किसी मर्द के गरमागरम रस से ठंडा कर सकूँ।

सेक्स तो मैंने बहुत किया है, मगर हर सेक्स को कहानी के रूप में नहीं ढाला जा पाता। मैं ढूंढती हूँ कि मेरी कहानी में कुछ खास हो, सबसे अलग। इसलिए कुछ खास घटनाओं को ही कहानी का रूप देकर आपके पढ़ने के लिए भेजती हूँ।

तो लीजिये आज का किस्सा भी पढ़िये।

एक दिन मेरे पति और मैंने शाम को बाहर आऊटिंग का प्रोग्राम बनाया। प्रोग्राम यह था कि पहले बाहर किसी डिस्को में जाकर एक दो वोड्का के पेग मारेंगे, थोड़ा डांस वांस करेंगे, फिर किसी बढ़िया होटल में डिनर करेंगे और मौज मस्ती करते हुये आधी रात के बाद ही घर वापिस आएंगे।

अब जब डिस्को में जाना था, तो मैंने गहरे लाल रंग की ड्रेस पहनी, ऊपर से भी गहरे गले की और नीचे भी छोटी सी टाइट स्कर्ट। मतलब मैं चाह कर भी अपना दिख रहा क्लीवेज और नंगी जांघें किसी से छुपा नहीं सकती थी। बहुत ही बदन उघाडू सी ड्रेस थी। यह पोशाक मेरे पति ने मुझे मेरे जनमदिन पर तोहफे में दी थी मगर पहनी आज।

सुर्ख लाल लिपस्टिक, गहरे लाल रंग की नेल पोलिश, मैचिंग मेकअप।

मेरे पति का कहना था- यार आज तो बहुत कयामत ढा रही हो, बच के रहना कहीं कोई इस हुस्न को चुरा न ले।

मैंने कहा- आपकी बीवी हूँ, संभाल के, बचा के रखना, अगर आपने मुझे छोड़ कर किसी और का दामन पकड़ा तो सोच लो, मैंने भी नीचे से पेंटी नहीं पहनी है।

मेरे पति हंस दिये और बोले- सच में? दिखा?

मैंने अपनी टाँगें खोल कर दिखाई, नीचे बिना चड्डी के शेव की हुई गुलाबी चूत देख कर वो बोले- साली, मादरचोद, तू तो चुदाई की पूरी तैयारी करके चली है। कोई बात नहीं… आज रास्ते में ही कहीं गाड़ी रोक कर तेरी चूत ठंडी करूंगा।

मैं भी खुश हो गई कि चलो आज ओपन एयर सेक्स का मज़ा लूँगी।

पहले हम एक डिस्को में गए, अंदर जा कर एक सोफ़े पर बैठ गए। मैं टाँगें क्रोस करके बैठी थी, क्योंकि अगर टाँगें खोल कर बैठती, तो सामने वाले को पता चल जाता कि मैंने नीचे से चड्डी नहीं पहनी है और वो मुफ्त में ही मेरी चूत के दर्शन भी कर जाता।

और जब एक दो टकीला शॉट अंदर नहीं जाते तब तक तो मैं सती सावित्री ही बनी रहती हूँ।

हसबेंड ने पहले कुछ खाने का और दो गिलास वोड्का का ऑर्डर किया। ड्रिंक्स आ गई, हम दोनों ने पी और खाया भी।

तेज़ आवाज़ में संगीत बज रहा था, बहुत से लोग डांसिंग फ्लोर पे नाच भी रहे थे। वोड्का पीते पीते हम दोनों भी रंगीन हो गए, माहौल बड़ा ही रंगीन और खुला था। बहुत से लड़के लड़कियां सरेआम किसिंग कर रहे थे, तो हमने भी दो तीन बार बिना आस पास का कोई ख्याल करे, होंठों से होंठ जोड़ कर लंबे लंबे किस किए।

सच में बड़ा ही मज़ा आता है, अजब सी सनसनी होती है, जब आप अपने प्यार को चूम रहे हों, और आस पास के लोग आपको देख रहे हों, और आपको उनके देखने की कोई चिंता नहीं होती।

हम पूरे सुरूर में थे।

थोड़ी देर बाद मेरे पति ने डांस ले लिए कहा। हम दोनों डांस फ्लोर पर जाकर खूब नाचे।

मैं क्या नाची… मुझे तो वोड्का नचा रही थी। खूब खुल कर, तड़प कर नाची मैं!

नाचते हुये मुझे लगा कि एक दो लड़के मेरे बदन को पीछे से छू कर गए, पर मैंने कोई बुरा नहीं माना। छू लिया तो छू लिया, मेरा कौन सा कुछ उतार के ले गया।

डांस करते करते जब थोड़ी सी थकावट हुई, तो हम दोनों वापिस आकर सोफ़े पर बैठ गए। मगर इस बार मैंने अपनी टाँगें क्रॉस नहीं की, आराम से पसर गई सोफ़े पर।

मेरे सामने बैठे लड़के की नज़र सीधी मेरी स्कर्ट के अंदर गई, और उसने “उफ़्फ़” करके मेरी तरफ देखा, मैं जान गई कि इसने मेरी नंगी चूत देख ली हैं, मगर मुझे कोई परेशानी नहीं थी।

मैं वैसे भी बैठी रही कि ‘देख यार… जी भर के देख!’

अब मैं पूरे मूड में थी, नशे में थी, सुरूर में थी तो मुझे अपनी चूत किसी दूसरे को दिखाने में मज़ा ही आ रहा था। डांस करने से मेरी ड्रेस थोड़ी और नीचे की ढिलक गई थी, जिस वजह से मेरा क्लीवेज भी और बड़ा हो गया था। ऐसे लग रहा था, जैसे मेरी ड्रेस से मेरे मम्मे संभाले नहीं जा रहे, वो इस ड्रेस को फाड़ कर बाहर आने को आज़ाद होने को आतुर हों।

हमने ठंडा होने के लिए शेम्पेन मंगवा ली।
 
अभी शेम्पेन मुंह को लगाई ही थी कि मेरे पति के एक दोस्त और उनके एक और दोस्त भी आ गए। उनके साथ दो लड़कियां भी थी, मगर वो देखने से ही एस्कॉर्ट लग रही थी। मेरे पति को देख कर वो हमारे पास ही आ गए और हमारे ही साथ बैठ गए।

गुप्ता जी को मैं पहले से जानती थी मगर गुप्ता जी के साथ आए लंबे चौड़े मर्द को मैंने पहली बार देखा था। उसने भी बड़े गौर से मुझे ऊपर से नीचे तक घूर कर देखा, मेरे क्लीवेज और मेरी नंगी जांघों को। हवस उसकी आँखों में साफ देखी जा सकती थी।

मैंने अपनी टाँगें फिर से क्रॉस कर ली क्योंकि अभी मैं उसको अपनी चूत के दर्शन करवाने के मूड में नहीं थी।

शेम्पेन बीच में ही छोड़ कर अब व्हिस्की आ गई। मगर मैंने अपना शेम्पेन का गिलास ही पकड़े रखा। सबने चियर्ज़ कह कर गिलास टकराए और पीने लगे। मगर गुप्ता जी के दोस्त की निगाह मेरे ही बदन पर चिपकी हुई थी, जैसे वो मेरा जायज़ा ले रहा हो। मुझे उसकी इस बदतमीजी से कोई फर्क नहीं पड़ रहा था क्योंकि मुझे ये था कि अभी थोड़ी देर में इसने चले जाना है, क्यों मैं इसके कारण अपने मुंह का जायका खराब करूँ।

मगर कुछ देर बातें करने के बाद गुप्ता जी तो मेरे पति को ही उठा कर ले गए, पीछे पीछे वो दोनों एस्कॉर्ट लड़कियां भी चली गई।

उनके जाते ही वो आदमी उठा और मेरे पास आ कर बैठ गया- हैलो, मेरा नाम रमेश चड्ढा है!

उसने अपना हाथ आगे बढ़ाया।

मैंने भी हाथ मिलाते हुये कहा- प्रीति, प्रीति शर्मा।

“अरे वाह, मिसेज़ शर्मा, आपको तो मिस शर्मा कहना चाहिए!” वो बोला। मक्खन लगा दिया उसने!

मैंने मुस्कुरा कर कहा- मिस्टर चड्ढा, आपकी मर्ज़ी, मिस भी कह सकते हैं.

मैंने कहा।

वो बोला- अरे नहीं, मिस्टर चड्ढा नहीं, काल मी रमेश।

मैंने कहा- ओके रमेश।

वो बोला- कब तक ये शेम्पेन पीती रहोगी, एक जाम व्हिस्की का हो जाए?

मैंने कहा- मैं व्हिस्की नहीं पीती रमेश।

वो बोला- तो शेम्पेन ही क्यों, कुछ और तड़कता भड़कता हो जाए।

मैंने कहा- क्या?

उसने वेटर को बुलाया और एक ड्रिंक बना कर लाने को कहा।

थोड़ी ही देर में एक शानदार ड्रिंक मेरे सामने थी, मैंने पूछा- ये क्या है?

वो बोला- पी कर देखो प्रीति, ऐसी चीज़ तुमने कभी नहीं पी होगी।

मुझे थोड़ी शंका, थोड़ा डर सा लगा।

“मगर ये है क्या?” मैंने फिर से ज़ोर देकर पूछा।

वो बोला- चिंता मत करो, कोई गलत चीज़ नहीं है, इसमें वोड्का है, टकीला है, जूस है, गलत चीज़ कोई भी नहीं है।

मैंने डरते डरते उसके कहने पर ड्रिंक उठा ली, एक सिप ली, अरे ये तो वाकई बहुत टेस्टी है। मैं सिप सिप करके पीने लगी।

मेरे पति और गुप्ता जी दोनों का कोई पता नहीं। बल्कि मेरे हसबेंड तो अपना मोबाइल भी मेरे पास ही छोड़ गए। अब उनको बुलाऊँ तो कैसे।

रमेश बोला- प्रीति, सिगरेट पीती हो?

मैंने कहा- नहीं।

“कभी भी नहीं?” उसने फिर पूछा।

मैंने कहा- बहुत ही रेयर, साल में एक आध बार।

उसने कहा- मेरे लिए एक सिगरेट सुलगा सकती हो?

मैंने सामने टेबल से एक सिगरेट और लाइटर उठाया, सिगरेट होंठों में दबाई, लाइटर से सुलगाई और एक लंबा सा कश लगा कर, ये दिखाने के लिए कि मैं सिगरेट भी पी लेती हूँ, धुआँ उसी के मुंह पर मारा और सिगरेट उसे पकड़ा दी।

उसने सिगरेट पकड़ी और पहले सिगरेट पर लगी मेरी लिपस्टिक को चूमा और फिर उसने भी एक लंबा सा कश लेकर सारा धुआँ मेरे बूब्स की तरफ फेंका।

मैं समझ गई कि ये साला मुझ पर सेंटी हो गया है और मुझे पटाने के चक्कर में है।

मैंने सोचा कि क्यों न इसी के साथ कुछ फ्लर्ट किया जाए, अच्छा खासा नौजवान है, अगर सेटिंग हो गई, तो दबा कर चोदेगा और मेरी चूत में उठ रही ख़लिश को भी शांत कर देगा।

उसको लिफ्ट देने के लिए मैंने उसके मुंह से सिगरेट ली और खुद भी कश लगाए, और उसे ये भी जता दिया कि तुमसे मुझे कोई परहेज नहीं है।

उसने मेरे लिए एक और ड्रिंक मँगवाई और अपने लिए व्हिस्की, धीरे धीरे बातें करते करते हम एक दूसरे से खुलने लगे, और बहुत जल्दी वो मेरे टेस्ट, मेरे शौक से मेरी सेक्सुयल चाहतों पर आ गया- ये बताओ प्रीति, सेक्स में तुम किस काम से सबसे ज़्यादा खुश होती हो, या कौनसा एक्ट तुम्हें सबसे ज़्यादा मज़ा देता है?

मुझे ये बहुत ही जल्दी लगा क्योंकि 10 मिनट पहले जो बंदा मुझे जी जी कह कर बुला रहा था, अब वो मुझसे सेक्स के बारे में बात कर रहा था।

तभी मुझे आज शाम की वो बात याद आई तो मैंने अपने पति से कही थी कि- आपकी बीवी हूँ, संभाल के बचा के रखना, अगर आपने मुझे छोड़ कर किसी और का दामन पकड़ा तो सोच लो, मैंने भी नीचे से पेंटी नहीं पहनी है।

मेरे दिमाग में भी यह विचार आया कि अगर इसका भी मूड है और मैं भी मूड में हूँ, तो दिक्कत क्या है यार।

मैंने उसके सवाल का जवाब तो नहीं दिया, पर उस से पूछा- मेरे हसबेंड कहाँ हैं?

वो बोला- उसकी छोड़ो, वो तो मेरी एस्कॉर्ट के टाँगो में मुंह छुपा के लेटा होगा किसी कमरे मे।

मुझे उसकी बात सुन करबड़ी हैरानी हुई।

मेरे चेहरे की तरफ देख कर वो बोला- अगर तुम चाहो तो मैं तुम्हें दिखा सकता हूँ।

मैंने कहा- चलो, पहले दिखाओ।

वो बोला- अगर तुम्हारा पति किसी और की बाहों में मिला, तो क्या तुम मेरे साथ रात बिताओगी।

अब ये तो उसने मुझे चोदने की खुल्लम खुल्ला ऑफर कर डाली। मैंने कुछ सोचा और फिर कहा- बाद में देखेंगे।

वो मेरे पास और सरक कर आया और मेरी नंगी जांघ को अपने हाथ में पकड़ कर बोला- बाद में नहीं जानेमन, अभी बोलो, हाँ या न?

मैं उठ खड़ी हुई और बोली- पहले दिखाओ।

वो मुझे उसी डिस्को के ऊपर बने होटल के एक रूम में ले गया। मैं रूम के अंदर दाखिल हुई, तो देखा तो अंदर कोई भी नहीं है। उसने रूम में बत्ती जलाई और दरवाजा बंद कर लिया।

मैंने कहा- ये क्या बदतमीजी है, खोलो दरवाजा, मुझे जाना है।

वो बोला- अजी हुज़ूर जाना तो सबने है, पर जाने से पहले अगर दो खूबसूरत लोग आपस में कुछ प्यार मोहब्बत कर लें, तो किसी को क्या दिक्कत है?

इरादे तो मैं उसके पहले से जानती थी, मगर मैं तो खुद हरामीपन पे उतरी हुई थी, मैंने भी जानबूझ कर अपना कमजोर दाँव फेंका- देखो, प्लीज़ मुझे जाने दो, मैं शादीशुदा सीधी सादी औरत हूँ, मेरे पति नीचे मुझे देख रहे होंगे।

मैं दरवाजे की तरफ बढ़ी तो उसने मेरा हाथ पकड़ लिया- कहाँ जाती हो प्रीति, इधर आओ!

और उसने जो खींचा और मुझे सीधा बेड पे गिरा दिया।

जैसे ही मैं बेड पे गिरी तो मेरी टाँगें खुली और मेरी स्कर्ट के अंदर उसने सब कुछ देख लिया।

मैं सिमट कर बेड पे बैठ गई।

मेरी चूत चुदाई की कहानी जारी रहेगी.
 
वो बोला- अजी हुज़ूर जाना तो सबने है, पर जाने से पहले अगर दो खूबसूरत लोग आपस में कुछ प्यार मोहब्बत कर लें, तो किसी को क्या दिक्कत है?

इरादे तो मैं उसके पहले से जानती थी, मगर मैं तो खुद हरामीपने पे उतरी हुई थी, मैंने भी जानबूझ कर अपना कमजोर दाँव फेंका- देखो, प्लीज़ मुझे जाने दो, मैं शादीशुदा सीधी सादी औरत हूँ, मेरे पति नीचे मुझे देख रहे होंगे।

मैं दरवाजे की तरफ बढ़ी तो उसने मेरा हाथ पकड़ लिया- कहाँ जाती हो प्रीति, इधर आओ!

और उसने जो खींचा और मुझे सीधा बेड पे गिरा दिया।

जैसे ही मैं बेड पे गिरी तो मेरी टाँगें खुली और मेरी स्कर्ट के अंदर उसने सब कुछ देख लिया।

मैं सिमट कर बेड पे बैठ गई।

वो आकर मेरे पास बैठ गया और बोला- बात सुनो यार, देखो तुम भी नीचे से पेंटी पहन कर नहीं आई, मतलब तुम भी मूड बना कर आई हो, तुम्हारा पति तुम जैसे खूबसूरत और सेक्सी औरत को छोड़ कर किसी और रंडी को चोद रहा है, तो तुम्हें क्या दिक्कत है, तुम भी मज़े कर लो।

मैं चुप रही तो वो उठ कर खड़ा हुआ और फिर से बोला- देखो प्रीति, मैं अपने कपड़े उतारने जा रहा हूँ, तुम मुझे एक बार देख लो, अगर मन न किया तो मैं तुमसे ज़बरदस्ती नहीं करूंगा, पर अगर तुम्हारा फन करने का मूड है, कुछ नया करने का मूड है, तो और कुछ मत सोचो, मज़ा करो और अपने घर जाओ।

कह कर उसने एक एक करके अपने सारे कपड़े उतार दिये और वो 6 फुट का गोरा चिट्टा आदमी, सर से पाँव तक सारे बदन पर गहरे बालों से भरा मेरे सामने एक दम नंगा हो गया।

मैं उसे ही देख रही थी, 7 इंच के करीब उसका लंबा मोटा लंड, जिसका गुलाबी टोपा बाहर निकला हुआ था। अभी पूरा तना नहीं था, मगर उसका आकार फिर भी बता रहा था कि मर्द दमदार है।

वो मेरे बिल्कुल पास आ कर खड़ा हो गया, इतना पास के उसका लंड मेरे कंधे को छू रहा था। उसने मेरा मुंह अपनी तरफ घुमाया, तो उसका लंड बिल्कुल मेरे मुंह के सामने था।

“चूसो इसे प्रीति!” वो बोला.

और उसके लंड को देख कर मेरी वासना और भड़क गई थी, मुझसे तो खुद पर काबू रखना मुश्किल हो रहा था, मैंने बिना कुछ और सोचे अपने होंठ खोले और उसके लंड का टोपा अपने मुंह में ले लिया।

“इसे जीभ से चाट!” वो फिर बोला.

मैंने अपनी जीभ उसके टोपे पर घुमाई। मेरे नर्म होंठों और गरम जीभ ने अपना कमाल दिखाया और उसका लंड पूरा तन कर सख्त हो गया।

अब जब उसका लंड मैंने अपने मुंह में ले ही लिया था तो फिर शर्म किस बात की थी। मैंने अपने पूरे मन से पूरी इच्छा से उसका लंड चूसना शुरू कर दिया, उसने भी मेरे सर पे, गालों पे हाथ फेरा और नीचे को झुक कर मेरे दोनों मम्मे भी दबा कर देखे। फिर मेरी ड्रेस नीचे को ही सरका कर मेरे दोनों मम्मे बाहर निकाल दिये।

“अरे वाह, क्या मस्त मम्मे हैं तेरे!” कहते हुये उसने मुझे पीछे को लेटा दिया और खुद मेरे ऊपर आ चढ़ा और मेरे दोनों मम्मे अपने हाथों में पकड़ कर पहले दबाये और फिर मेरे निप्पल अपने मुंह में लेकर चूसे।

मैं भी काम की अग्नि में जल उठी, मेरे मुंह से से भी “उफ़्फ़, आह, ऊ… आह” जैसे आवाज़ें अपने आप निकलने लगी। मैंने अपने पाँव से ही अपने सेंडिल उतार दिये और अपनी दोनों टाँगें खोल दी, तो वो भी अपना हाथ मेरी स्कर्ट के अंदर डाल कर मेरी चूत की भगनासा को अपनी बड़ी उंगली से मसलने लगा। कभी वो मेरी गर्दन पे चूमता काटता, कभी मेरे मम्मे चूसता, कभी होंठ।

जहां भी अपना मुंह लगाता, मुझे अपने थूक से भिगो देता। अपनी एक उंगली उसने मेरी चूत के अंदर तक डाल रखी थी, मैंने भी उसका लंड अपने हाथ में पकड़ा हुआ था और उसे दबा रही थी। थोड़ी चूसाचासी के बाद उसने मुझे अपनी तरफ घुमाया और मेरी दोनों टाँगें पूरी तरह से खोल कर मेरी चूत पे अपना लंड रखा और अंदर ठेल दिया।

गीली चूत में उसका लंड घप्प से घुस गया और लंड को उसने एक ही बार में धकेल कर सारे का सारा अंदर घुसेड़ दिया, अब चूत गीली थी तो आराम से लंड को निगल गई, सूखी होती तो मेरी तो फट जाती।

पर चलो, कोई बात नहीं।

बंदा जोशीला था, पहले दो मिनट उसने बड़े आराम से मुझे चूस चूस कर चोदा, कभी जीभ से मेरे गाल चाटता, कभी मेरे होंठ चूसता, मेरे मम्मे निचोड़ डाले, कभी अपनी जीभ मेरे मुंह में डालता, और कभी मेरी जीभ अपने मुंह में खींच लेता और चूसता।

मैंने भी अपनी बाहें उसके गले में डाल रखी थी और अपनी टाँगें ऊपर हवा में उठा रखी थी।

लगातार 10 मिनट तक उसने मुझे चोदा और फिर अपने लंड के गरम माल से मेरी चूत को भर दिया। मैं भी संतुष्ट हो कर लेट गई।

वो मेरे साथ ही लेटा था।

2 मिनट बाद मैं उठी, तो उसने पूछा- क्या हुआ?

मैंने कहा- सब कुछ तो हो चुका, अब क्या, अब मैं चली।

वो बोला- अरे अभी कहाँ, अभी तो मैंने शुरू किया है, अभी एक बार और करूंगा, तब मेरा दिल भरेगा। अभी रुक जाओ, बस अभी शुरू करते हैं।

मैंने कहा- अरे नहीं, मेरा पति मुझे मार डालेगा, अगर मैं नहीं गई तो।

वो बोला-नहीं मारेगा, उसका तो मेरी एस्कॉर्ट वो हाल करेगी के सुबह से पहले उठ ही नहीं पाएगा।
 
उसने मुझे बाजू से पकड़ कर उठाया, मेरी ड्रेस खींच कर उतार दी, मुझे बिल्कुल नंगी करके वो अपने बाथरूम में ले गया, शावर ऑन किया, ठंडे पानी में हम दोनों नहाये, नहाते हुये उसने मेरे बूब्स चूसे, मेरी चूत चाटी, मेरी गांड भी चाट गया, मेरे होंठ, गाल ठुड्डी, सब को खूब चाटा और चूसा। फिर मुझे नीचे बैठा कर अपने लंड और आँड चुसवाए। मैं उसकी हर बात मान रही थी।

नहा कर फिर बेडरूम में आए, उसने मेरा बदन पौंछा, मैंने उसका बदन पौंछा, फिर बेड पे लेट गए।

इस बार हम 69 की पोजीशन में लेटे।

अब किसी को कुछ कहने की ज़रूरत नहीं थी, बिना कहे उसने अगर मेरी चूत को चाटा तो मैंने भी उसके लंड को पूरे दिल से चूसा।

साले की जीभ इतनी तेज़ चलती थी कि जब मेरी चूत पे अपनी जीभ फेरता तो मेरी सिसकारियाँ निकल जाती। चाट चाट के साले ने पागल कर दिया, वो मेरी चूत में अपनी जीभ फेरता रहा और और मैं बिस्तर पे लेटी तड़प रही थी, उसके सख्त हाथ मेरे बदन को मसल रहे थे, मेरे मम्मे दबा दबा कर निचोड़े उसने, मेरी जांघों को अपनी मुट्ठियों में भर के इतने ज़ोर से भींचा कि मेरी जांघों पर उसके हाथों के निशान पड़ गए.

उसका जालिमाना तरीका मेरे काम को और भड़का रहा था। मुझे उसने इतना तड़पाया, इतना तड़पाया के उसके चाटने से ही मैं झड़ गई। जब मैं शांत हो कर लेट गई, तो उसने मेरी जांघों में से अपना सर बाहर निकाला- कैसा लगा?

उसने बड़े रोआब से पूछा।

मैंने कहा- मज़ा आ गया।

वो बोला- असली मज़ा तो अब आएगा साली, तू देखती जा!

उसने मेरी एक टांग पकड़ी और खींच के बेड के बीच में किया, फिर बड़ी बेदर्दी से मेरी दोनों टाँगें खोल कर बीच में आ गया और अपना लंड मेरी चूत पर रखा और अंदर घुसेड़ दिया।

मुझे हल्का सा दर्द हुआ- आई… उम्म्ह… अहह… हय… याह… धीरे यार!

वो बोला- अब कोई धीरे या आराम से नहीं, अब तो तेरी टिका के माँ चोदूँगा।

मुझे सेक्स के दौरान गाली खाना अच्छा लगता है, इस लिए मुझे कोई बुरा नहीं लगा के उसने मेरी माँ को गाली दी।

उसने अपना पूरा लंड मेरी चूत में डाल दिया और लगा पेलने… कितनी देर वो मुझे लगातार पेलता रहा। पहले तो मुझे थोड़ा थोड़ा दर्द सा हो रहा था मगर थोड़ी देर की चुदाई के बाद मुझे भी अच्छा लगने लगा। मेरी चूत ने फिर से पानी छोड़ा और मैं फिर से मज़ा लेने लगी।

इस बार मैंने भी उसे गाली दी और जोश दिलाया- क्या मरियल की तरह चोद रहा है बे, इतनी शानदार औरत तेरे नीचे नंगी पड़ी है, और तू साला चूतिया उसे ढंग से चोद भी नहीं पा रहा है, अगर लौड़े में दम नहीं था, तो पंगा ज़रूरी लेना था।

मेरी बात उसे चुभ गई, वो ज़ोर ज़ोर से चोद कर बोला- साली छिनाल, कुतिया, मुझे ढीला बोलती है, अभी तेरी गांड फाड़ता हूँ, साली तू भी क्या याद रखेगी, किस से पाला पड़ा था।

मैंने भी कहा- अरे जा, मैंने तो हबशी का इतना लंबा और मोटा लंड लिया है, तेरे पास तो है ही क्या, भोंसड़ी के?

मेरी बातें उसे अंदर तक काट रही थी इसीलिए उसकी चुदाई और वहशी होती जा रही थी, उसने मेरे चेहरे पे भी काट लिया, मेरे बाल खींचे, मेरे चूतड़ मार मार के लाल कर दिये, मेरी जांघों और पीठ पर बहुत बार उसने मारा और मांस को भींचा।

जितना मैं उसको जोश दिलाती उतना वो और ज़ालिम होता, उतनी और ज़ोर से वो अपना लंड मेरी चूत में मारता। बेशक मुझे दर्द होता, पर मुझे इस सब में मज़ा भी बहुत आ रहा था।

इस बार हमारी चुदाई लंबी चली, करीब 20-22 मिनट… इस दौरान उसने मुझे नीचे लेटा कर, घोड़ी बना कर ऊपर बैठा कर हर तरह से चोदा। चोदा कम पीटा ज़्यादा… मगर मेरी पूरी तसल्ली करवा दी।

एक बार फिर उसने अपने गरम वीर्य से मेरी चूत को भर दिया। मेरे दोनों मम्मे उसके दोनों हाथों में जकड़े हुये थे और उसने अपनी पूरी ताकत से वो आखरी धक्के लगाए, इतने ज़ोर से कि मेरी कमर और चूत दोनों दुखने लगे, मगर मैं फिर भी संतुष्ट थी, इतना ज़ुल्म सह कर भी!

एक 6 फीट के जवान ने अपनी पूरी ताकत लगा दी एक औरत को मसल देने में मगर मैं फिर भी ज़िंदा थी, खुश थी, तृप्त थी।

वो मेरे पास ही लेट गया- तू तो साली बड़ी दमदार है, इतना कुछ बर्दाश्त कर गई, मेरी बीवी तो इसका 10 परसेंट भी नहीं सह पाती और रोने लगती है। न कोई रंडी इतनी झेलती है, वो भी कहती है, ढंग से करना है तो करो वरना रहने दो। मगर तू तो साली मुझे और जोश दिला रही थी। चीज़ क्या है तू!

मैंने उसके साथ लिपटते हुये कहा- मैं वो चीज़ हूँ के अगर तू दो बार और मेरे साथ ये सब करना चाहे तो मैं तुझे रोकूँगी नहीं!

मैंने उससे कहा।

“तेरी माँ की आँख, साली ऐसा क्या खाती है?” वो हैरान हो कर बोला।

मैंने कहा- बस कुछ नहीं, तुम जैसों को ही खाती हूँ।

“किस किस से चुदवाया है साली?” वो बोला.

मैंने कहा- जिस से भी मेरा दिल किया, मैंने उसे पूरा मौका दिया है।

वो बोला- तो फिर मिलोगी?

मैंने कहा- हाँ, ज़रूर, मुझे भी तुमसे चुदवा कर बहुत मज़ा आया, हम ज़रूर फिर से मिलेंगे।

मैं उठी और बाथरूम में जाकर फ्रेश होकर वापिस आई और अपनी ड्रेस पहन कर फिर से तैयार होकर नीचे डिस्को में चली गई।

मेरे पति और गुप्ता जी अभी तक नहीं आए थे।

थोड़ी देर में रमेश भी आ गया और मेरे पास ही बैठ गया, हम दोनों ने एक एक ड्रिंक और ऑर्डर की।

करीब 15-20 मिनट बाद मेरे पति और गुप्ता जी वापिस आए। मैंने अपने पति से फालतू की शिकायत की- अरे यार, कहाँ चले गए थे, मैं कब से तुम्हारी वेट कर रही थी।

मेरे पति शरारती हंसी हंस कर बोले- क्यों, रमेश ने तुम्हारा ठीक से खयाल नहीं रखा क्या?

और उसके बाद कुछ और बैठ कर बातें करते रह और फिर हम लोग वापिस अपने घर आ गए।

घर आकर जब मैंने बाथरूम में शीशे में अपना बदन देखा तो मेरा सारा बदन लाल लाल दागों से भरा पड़ा था, जैसे 4-5 लोगों ने मेरे बेदर्दी से बलात्कार किया हो। मगर मैं नहाकर नाईटी पहन कर वापिस आई और बेड पे लेट गई।

मेरे पति ने मेरी जांघ पे हाथ फेरा और मुझे सेक्स के लिए इशारा किया मगर मैं तो निचुड़ी पड़ी थी, मैंने थकावट का बहाना करके मना कर दिया और सो गई।

मगर यह कैज़ुअल सेक्स मुझे हमेशा याद रहेगा।
 
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