S
StoryPublisher
Guest
मेरे स्वीट राज अंकल Hindi sexi story
मेरा घरेलू नाम डॉली है.. कहानी में मैंने अपने इसी नाम का इस्तेमाल किया है। अगर आगे दूसरी कहानी लिखी.. तो उसमें मैं अपने शहर का नाम भी बता दूँगी।
अब मैं अपने बारे में बता दूँ.. मैं 20 वर्ष की एक लड़की हूँ। मेरे मम्मे इतने गोल और कसे हुए हैं कि जब मैं टी-शर्ट पहनती हूँ.. तब लगता है कि मेरे सीने पर अलग से पानी भरे गोल-गोल दो गुब्बारे रखे हुए हैं।
ज़रा सा भी चलने-फिरने से ये खूब उछलने लगते हैं, ब्रा भी इनकी उछल-कूद को रोकने में नाकाम रहती है।
मेरा पेट बिल्कुल चिकना और सपाट है, मेरी जांघें लंबी और गोल हैं। मैं जब जीन्स पहनती हूँ.. तब तो मेरी जांघें और मेरे चूतड़ इस क़दर नुमाया हो जाते हैं कि इनके सारे कटाव और गोलाइयाँ उभर कर सामने आ जाती हैं।
मेरे जिस्म की जिल्द इतनी नर्म पतली और गोरी है कि मेरे मम्मों की गोलाइयों पर जिस्म के अन्दर की नसें सब्ज़ रंग में झलकने लगती हैं।
पूरा बदन इतना चिकना है कि हाथ रखते ही फिसलने लगता है।
मेरी चूत एकदम साफ है.. एक भी बाल नहीं है, कुदरती तौर पर चिकनी और एकदम गोरी.. है।
चूत के दोनों लब एकदम गुलाबी सुर्ख.. हालांकि यह बहुत बारीक और छोटे हैं और अधिकतर अन्दर की ओर ही घुसे रहते हैं। जब कभी मस्ती के वक़्त मैं इन्हें अपनी उंगलियों से सहलाती हूँ.. तब यह खड़े होकर बाहर झाँकने लगते हैं।
मेरी कसी हुई चूत से थोड़ा नीचे.. पीछे की छेद के इर्द-गिर्द बहुत बारीक से सुनहरे रोएँ हैं।
मैं अपने माता-पिता की इकलौती संतान हूँ। मेरे पापा की उम्र 45 वर्ष है और मम्मी की लगभग 40 वर्ष है। दोनों बहुत अच्छी पर्सनाल्टी के मालिक हैं। इस उम्र में भी पापा एकदम स्मार्ट और हैण्डसम दिखते हैं.. उनका रंग भी बिल्कुल गोरा है। केवल कनपटियों के पास कुछ बाल सफेद हैं।
मम्मी तो एकदम से मेरी बड़ी बहन लगती हैं, उनका रंग भी एकदम दूधिया और चमकदार है।
उनके मम्मे मुझसे थोड़े बड़े.. मगर बिल्कुल कसे हुए हैं। उनका पेट बिल्कुल मेरी तरह पतला और चिकना है। हिप और जांघें इतनी सुडौल कि साड़ी बाँधने पर पीछे की गोलाइयाँ और ठोस जाँघें छलकने लगती हैं।
दोनों की जोड़ी बहुत मस्त है, उनकी लाइफ बहुत ख़ुशगवार है।
मम्मी और पापा मुझसे बहुत प्यार करते हैं.. हमारे घर का माहौल काफी खुला है। मम्मी.. पापा मेरे सामने ही एक-दूसरे को किस कर लेते हैं। डिनर के वक़्त ड्रिंक भी सामने कर लेते हैं। कभी-कभार रेड वाइन का एक आध पैग मैं भी ले लेती हूँ। बचपन से मम्मी और पापा को ऐसे ही खुले प्यार करते देखती रही हूँ।
हमारे काफ़ी बड़े मकान में हमें तमाम सुख-सुविधा प्राप्त है।
अभी-अभी मेरा ग्रेजुएशन पूरा हुआ है। घर में सब कुछ ठीक चल रहा था कि अचानक पापा को अपनी कंपनी के ज़रूरी काम से अमरीका जाने की ज़रूरत पड़ गई। उन्हें वहाँ चार महीने रुकना था.. वह मम्मी को भी साथ ले जाना चाहते थे। मैं इसलिए नहीं जा सकती थी कि मुझे आगे की पढ़ाई के लिए मास्टर डिग्री में एडमिशन लेना था।
इतने बड़े घर में इतने दिनों तक मैं अकेली नहीं रह सकती थी.. इसलिए पापा ने अपने एक साथी से बात की। वह एक-दो बार मेरे घर आए थे.. मैं उन्हें अच्छी तरह जानती थी। वह लगभग 34 वर्ष के थे.. बेहद स्मार्ट खूब गोरे-चिट्टे.. उनका मकान हमारे घर से पंद्रह मिनट के फ़ासले पर था। दो-तीन बार मैं मम्मी और पापा के साथ उनके घर भी जा चुकी थी।
उन्होंने शादी नहीं की थी। उनका मकान काफ़ी बड़ा और बिल्कुल मॉडर्न था। एकदम फिल्मी सैट की तरह बड़ा सा ड्राइंग रूम.. क़ीमती सोफे.. उम्दा क़ालीन और हर चीज़ बेहद क़ीमती।
उनके यहाँ दो महिलाएँ और एक पुरुष कर्मचारी थे। वह बहुत बड़े बिजनेसमैन थे। मेरे पापा ने उनसे अपनी समस्या बताई.. तो वह फ़ौरन इस बात के लिए तैयार हो गए कि जब तक वह अमरीका में रहेंगे.. उनकी बेटी यानि कि मैं.. उनके घर में रह सकती हूँ।
पापा ने घर आकर मुझे और मम्मी को बताया कि अगर तुम लोगों को कोई एतराज़ न हो.. तो उनका दोस्त राज अपने घर में हमारी बेटी को रखने को तैयार है।
मुझे यह सुन कर खुशी हुई.. लेकिन मम्मी ने पापा को कहा- राज अकेले रहते हैं.. क्या हमारी बेटी का उनके घर में रहना मुनासिब होगा?
पापा ने उन्हें समझाया कि राज उनका पुराना दोस्त है और वह हमारी बेटी को अपनी बेटी की तरह रखेगा.. तो मम्मी मान गईं।
पापा.. मम्मी अमेरिका जाने की तैयारी में लग गए और तय तारीख को जब उन्हें फ्लाइट पकड़नी थी.. तो राज हमारे घर आए। अपने मकान को अच्छी तरह लॉक करके हम लोग उन्हीं की शानदार गाड़ी में हवाई अड्डे के लिए निकले। रास्ते में पापा ने मुझसे कहा- आज से तुम राज के घर में रहोगी.. लेकिन राज अंकल को किसी बात के लिए ज़्यादा परेशान मत करना।
इस पर राज राज अंकल हँसने लगे और बोले- वो तुम्हारा अपना घर है.. किसी भी चीज़ के लिए झिझकना मत.. पूरे घर में जिस तरह चाहो रह सकती हो.. जिस चीज़ की ज़रूरत हो.. मुझसे पूछे बिना इस्तेमाल कर सकती हो। जो कुछ खाने-पीने का मन करे.. मेरे खास रेस्टोरेंट से फ़ोन करके घर मंगवा सकती हो। घर पर जो स्टाफ हैं.. उन्हें तुम अपने स्टाफ की तरह इस्तेमाल कर सकती हो।
यह सुन कर मम्मी भी बहुत खुश हुईं।
पापा और मम्मी की फ्लाइट उड़ जाने के बाद राज राज अंकल अपने साथ मुझे अपने घर ले कर आ गए। हम लोगों के घर पहुँचने के बाद पुरुष कर्मचारी ने अपने घर जाने की इजाज़त राज अंकल से माँगी। राज अंकल ने उसे छुट्टी दे दी। उसकी ड्यूटी शाम छ: बजे तक ही थी। अभी साढ़े छ: बज रहे थे।
राज अंकल ने कहा- पहले फ्रेश हो लेते हैं..
उन्होंने मुझे भी फ्रेश होने को कहा और ड्राइंगरूम के साथ वाले कमरे को खोल कर उन्होंने कहा- यह रहा तुम्हारा कमरा..
उसके ठीक बगल वाला कमरा राज अंकल का आफ़िस था। उस कमरे के पीछे एक और कमरा था। जिसका दरवाज़ा केवल उनके आफ़िस में खुलता था। वह उनका बेडरूम था। उनके बेडरूम से बाथरूम अटैच था। मुझे जो कमरा राज अंकल ने दिया था.. उसमें भी बाथरूम अटैच था। मैं अपने कमरे में जाकर फ्रेश होने लगी।
बाहर आई तो राज अंकल सोफे पर बैठे कोई फाइल देख रहे थे। मुझे देखते ही उन्होंने फाइल किनारे रखी और मुझसे उन्होंने पूछा- डिनर कहाँ करेंगे.. कहीं बाहर चल कर.. या यहीं मंगा लें?
मैंने कहा- आप जैसा पसंद करें।
उन्होंने कहा- नहीं तुम बताओ..
तब मैंने कहा- आज घर पर मँगा लें.. जब तक मैं पूरा घर भी देख लूँगी।
राज अंकल ने खाने का आर्डर फ़ोन पर दिया और मुझे अपना पूरा मकान दिखाने लगे। नीचे हिस्से में दस कमरे थे.. सब एक से बढ़ कर एक शानदार। मकान बहुत बड़ी चारदीवारी और सब तरफ फैले हुए बाग बगीचे के बीचों-बीच बना हुआ था।
मेनगेट पर चौकीदार रहता था। यह सब देखने के बाद हम ऊपर आ गए। फिर राज अंकल अपने आफ़िस में लेकर आ गए और वहीं बैठ कर खाना आने का इंतज़ार करने लगे।
तब मैंने कहा- राज अंकल आपने अपना बेडरूम तो दिखाया ही नहीं..
उन्होंने कहा- उस रूम में और उससे लगे बाथरूम में आज तक मैंने किसी बाहर के आदमी को नहीं जाने दिया है। केवल सफाई के लिए हमारी एक घरेलू महिला नौकर ही वहाँ जाती है। वह भी तब.. जब मैं घर पर मौजूद होता हूँ। बाक़ी समय मेरा बेडरूम लॉक रहता है और जब मैं सोने जाता हूँ.. तब ही वो खुलता है। मेरे अन्दर जाने के बाद मेरे बाहर आने तक वह बंद ही रहता है।
मैंने पूछा- ऐसा क्यों?
तब राज अंकल बात बदलने की कोशिश करने लगे.. इतने में खाना आ गया।
मैंने पैकिट खोल कर ख़ाना डाइनिंग-टेबल पर सज़ा दिया।
राज अंकल ने अपने आफ़िस के फ्रिज से रेड वाईन की बोतल निकाली और आइस-क्यूब बाक्स लेकर डाइनिंग-टेबल पर आ गए।
उन्होंने ने दो गिलास में ड्रिंक डाली.. तो मैंने झिझकते हुए उन्हें कहा- मैं अक्सर नहीं पीती हूँ.. कभी-कभार मम्मी-पापा के साथ एक आध पैग ले लेती हूँ..
तब राज अंकल ने कहा- मैंने तो समझा था कि तुम अपने मम्मी-पापा की तरह रोज़ ही लेती होगी.. अगर तुम्हारी इच्छा नहीं है.. तो कोई बात नहीं।
तब मैंने कहा- नहीं राज अंकल ऐसा नहीं है.. लेकिन आज आपके साथ पहली बार खा रही हूँ.. तो पी लूँगी।
फिर हम खाना खाने लगे.. तो मैंने पूछा- राज अंकल आपने बताया नहीं कि अपने बेडरूम में आज तक किसी और को क्यों नहीं जाने दिया.. वहाँ ऐसा क्या है?
राज अंकल ने कहा- कुछ भी नहीं.. बस यूँ ही..
तब मैंने कहा- लेकिन मैं तो आपके बेडरूम में जाऊंगी.. उसे देखने के लिए..
तभी राज अंकल ने कहा- पहले अपना खाना और ड्रिंक ख़त्म करो..
खाना ख़त्म होने के बाद राज अंकल मुझे ले कर नीचे बाग में टहलने के लिए आ गए।
आधा घंटा टहलने के बाद हम लोग ऊपर गए.. तो राज अंकल ने कहा- तुम अपने कमरे में जाकर सो जाओ।
मैंने कहा- लेकिन पहले मैं आपका बेडरूम देखना चाहती हूँ।
मेरा घरेलू नाम डॉली है.. कहानी में मैंने अपने इसी नाम का इस्तेमाल किया है। अगर आगे दूसरी कहानी लिखी.. तो उसमें मैं अपने शहर का नाम भी बता दूँगी।
अब मैं अपने बारे में बता दूँ.. मैं 20 वर्ष की एक लड़की हूँ। मेरे मम्मे इतने गोल और कसे हुए हैं कि जब मैं टी-शर्ट पहनती हूँ.. तब लगता है कि मेरे सीने पर अलग से पानी भरे गोल-गोल दो गुब्बारे रखे हुए हैं।
ज़रा सा भी चलने-फिरने से ये खूब उछलने लगते हैं, ब्रा भी इनकी उछल-कूद को रोकने में नाकाम रहती है।
मेरा पेट बिल्कुल चिकना और सपाट है, मेरी जांघें लंबी और गोल हैं। मैं जब जीन्स पहनती हूँ.. तब तो मेरी जांघें और मेरे चूतड़ इस क़दर नुमाया हो जाते हैं कि इनके सारे कटाव और गोलाइयाँ उभर कर सामने आ जाती हैं।
मेरे जिस्म की जिल्द इतनी नर्म पतली और गोरी है कि मेरे मम्मों की गोलाइयों पर जिस्म के अन्दर की नसें सब्ज़ रंग में झलकने लगती हैं।
पूरा बदन इतना चिकना है कि हाथ रखते ही फिसलने लगता है।
मेरी चूत एकदम साफ है.. एक भी बाल नहीं है, कुदरती तौर पर चिकनी और एकदम गोरी.. है।
चूत के दोनों लब एकदम गुलाबी सुर्ख.. हालांकि यह बहुत बारीक और छोटे हैं और अधिकतर अन्दर की ओर ही घुसे रहते हैं। जब कभी मस्ती के वक़्त मैं इन्हें अपनी उंगलियों से सहलाती हूँ.. तब यह खड़े होकर बाहर झाँकने लगते हैं।
मेरी कसी हुई चूत से थोड़ा नीचे.. पीछे की छेद के इर्द-गिर्द बहुत बारीक से सुनहरे रोएँ हैं।
मैं अपने माता-पिता की इकलौती संतान हूँ। मेरे पापा की उम्र 45 वर्ष है और मम्मी की लगभग 40 वर्ष है। दोनों बहुत अच्छी पर्सनाल्टी के मालिक हैं। इस उम्र में भी पापा एकदम स्मार्ट और हैण्डसम दिखते हैं.. उनका रंग भी बिल्कुल गोरा है। केवल कनपटियों के पास कुछ बाल सफेद हैं।
मम्मी तो एकदम से मेरी बड़ी बहन लगती हैं, उनका रंग भी एकदम दूधिया और चमकदार है।
उनके मम्मे मुझसे थोड़े बड़े.. मगर बिल्कुल कसे हुए हैं। उनका पेट बिल्कुल मेरी तरह पतला और चिकना है। हिप और जांघें इतनी सुडौल कि साड़ी बाँधने पर पीछे की गोलाइयाँ और ठोस जाँघें छलकने लगती हैं।
दोनों की जोड़ी बहुत मस्त है, उनकी लाइफ बहुत ख़ुशगवार है।
मम्मी और पापा मुझसे बहुत प्यार करते हैं.. हमारे घर का माहौल काफी खुला है। मम्मी.. पापा मेरे सामने ही एक-दूसरे को किस कर लेते हैं। डिनर के वक़्त ड्रिंक भी सामने कर लेते हैं। कभी-कभार रेड वाइन का एक आध पैग मैं भी ले लेती हूँ। बचपन से मम्मी और पापा को ऐसे ही खुले प्यार करते देखती रही हूँ।
हमारे काफ़ी बड़े मकान में हमें तमाम सुख-सुविधा प्राप्त है।
अभी-अभी मेरा ग्रेजुएशन पूरा हुआ है। घर में सब कुछ ठीक चल रहा था कि अचानक पापा को अपनी कंपनी के ज़रूरी काम से अमरीका जाने की ज़रूरत पड़ गई। उन्हें वहाँ चार महीने रुकना था.. वह मम्मी को भी साथ ले जाना चाहते थे। मैं इसलिए नहीं जा सकती थी कि मुझे आगे की पढ़ाई के लिए मास्टर डिग्री में एडमिशन लेना था।
इतने बड़े घर में इतने दिनों तक मैं अकेली नहीं रह सकती थी.. इसलिए पापा ने अपने एक साथी से बात की। वह एक-दो बार मेरे घर आए थे.. मैं उन्हें अच्छी तरह जानती थी। वह लगभग 34 वर्ष के थे.. बेहद स्मार्ट खूब गोरे-चिट्टे.. उनका मकान हमारे घर से पंद्रह मिनट के फ़ासले पर था। दो-तीन बार मैं मम्मी और पापा के साथ उनके घर भी जा चुकी थी।
उन्होंने शादी नहीं की थी। उनका मकान काफ़ी बड़ा और बिल्कुल मॉडर्न था। एकदम फिल्मी सैट की तरह बड़ा सा ड्राइंग रूम.. क़ीमती सोफे.. उम्दा क़ालीन और हर चीज़ बेहद क़ीमती।
उनके यहाँ दो महिलाएँ और एक पुरुष कर्मचारी थे। वह बहुत बड़े बिजनेसमैन थे। मेरे पापा ने उनसे अपनी समस्या बताई.. तो वह फ़ौरन इस बात के लिए तैयार हो गए कि जब तक वह अमरीका में रहेंगे.. उनकी बेटी यानि कि मैं.. उनके घर में रह सकती हूँ।
पापा ने घर आकर मुझे और मम्मी को बताया कि अगर तुम लोगों को कोई एतराज़ न हो.. तो उनका दोस्त राज अपने घर में हमारी बेटी को रखने को तैयार है।
मुझे यह सुन कर खुशी हुई.. लेकिन मम्मी ने पापा को कहा- राज अकेले रहते हैं.. क्या हमारी बेटी का उनके घर में रहना मुनासिब होगा?
पापा ने उन्हें समझाया कि राज उनका पुराना दोस्त है और वह हमारी बेटी को अपनी बेटी की तरह रखेगा.. तो मम्मी मान गईं।
पापा.. मम्मी अमेरिका जाने की तैयारी में लग गए और तय तारीख को जब उन्हें फ्लाइट पकड़नी थी.. तो राज हमारे घर आए। अपने मकान को अच्छी तरह लॉक करके हम लोग उन्हीं की शानदार गाड़ी में हवाई अड्डे के लिए निकले। रास्ते में पापा ने मुझसे कहा- आज से तुम राज के घर में रहोगी.. लेकिन राज अंकल को किसी बात के लिए ज़्यादा परेशान मत करना।
इस पर राज राज अंकल हँसने लगे और बोले- वो तुम्हारा अपना घर है.. किसी भी चीज़ के लिए झिझकना मत.. पूरे घर में जिस तरह चाहो रह सकती हो.. जिस चीज़ की ज़रूरत हो.. मुझसे पूछे बिना इस्तेमाल कर सकती हो। जो कुछ खाने-पीने का मन करे.. मेरे खास रेस्टोरेंट से फ़ोन करके घर मंगवा सकती हो। घर पर जो स्टाफ हैं.. उन्हें तुम अपने स्टाफ की तरह इस्तेमाल कर सकती हो।
यह सुन कर मम्मी भी बहुत खुश हुईं।
पापा और मम्मी की फ्लाइट उड़ जाने के बाद राज राज अंकल अपने साथ मुझे अपने घर ले कर आ गए। हम लोगों के घर पहुँचने के बाद पुरुष कर्मचारी ने अपने घर जाने की इजाज़त राज अंकल से माँगी। राज अंकल ने उसे छुट्टी दे दी। उसकी ड्यूटी शाम छ: बजे तक ही थी। अभी साढ़े छ: बज रहे थे।
राज अंकल ने कहा- पहले फ्रेश हो लेते हैं..
उन्होंने मुझे भी फ्रेश होने को कहा और ड्राइंगरूम के साथ वाले कमरे को खोल कर उन्होंने कहा- यह रहा तुम्हारा कमरा..
उसके ठीक बगल वाला कमरा राज अंकल का आफ़िस था। उस कमरे के पीछे एक और कमरा था। जिसका दरवाज़ा केवल उनके आफ़िस में खुलता था। वह उनका बेडरूम था। उनके बेडरूम से बाथरूम अटैच था। मुझे जो कमरा राज अंकल ने दिया था.. उसमें भी बाथरूम अटैच था। मैं अपने कमरे में जाकर फ्रेश होने लगी।
बाहर आई तो राज अंकल सोफे पर बैठे कोई फाइल देख रहे थे। मुझे देखते ही उन्होंने फाइल किनारे रखी और मुझसे उन्होंने पूछा- डिनर कहाँ करेंगे.. कहीं बाहर चल कर.. या यहीं मंगा लें?
मैंने कहा- आप जैसा पसंद करें।
उन्होंने कहा- नहीं तुम बताओ..
तब मैंने कहा- आज घर पर मँगा लें.. जब तक मैं पूरा घर भी देख लूँगी।
राज अंकल ने खाने का आर्डर फ़ोन पर दिया और मुझे अपना पूरा मकान दिखाने लगे। नीचे हिस्से में दस कमरे थे.. सब एक से बढ़ कर एक शानदार। मकान बहुत बड़ी चारदीवारी और सब तरफ फैले हुए बाग बगीचे के बीचों-बीच बना हुआ था।
मेनगेट पर चौकीदार रहता था। यह सब देखने के बाद हम ऊपर आ गए। फिर राज अंकल अपने आफ़िस में लेकर आ गए और वहीं बैठ कर खाना आने का इंतज़ार करने लगे।
तब मैंने कहा- राज अंकल आपने अपना बेडरूम तो दिखाया ही नहीं..
उन्होंने कहा- उस रूम में और उससे लगे बाथरूम में आज तक मैंने किसी बाहर के आदमी को नहीं जाने दिया है। केवल सफाई के लिए हमारी एक घरेलू महिला नौकर ही वहाँ जाती है। वह भी तब.. जब मैं घर पर मौजूद होता हूँ। बाक़ी समय मेरा बेडरूम लॉक रहता है और जब मैं सोने जाता हूँ.. तब ही वो खुलता है। मेरे अन्दर जाने के बाद मेरे बाहर आने तक वह बंद ही रहता है।
मैंने पूछा- ऐसा क्यों?
तब राज अंकल बात बदलने की कोशिश करने लगे.. इतने में खाना आ गया।
मैंने पैकिट खोल कर ख़ाना डाइनिंग-टेबल पर सज़ा दिया।
राज अंकल ने अपने आफ़िस के फ्रिज से रेड वाईन की बोतल निकाली और आइस-क्यूब बाक्स लेकर डाइनिंग-टेबल पर आ गए।
उन्होंने ने दो गिलास में ड्रिंक डाली.. तो मैंने झिझकते हुए उन्हें कहा- मैं अक्सर नहीं पीती हूँ.. कभी-कभार मम्मी-पापा के साथ एक आध पैग ले लेती हूँ..
तब राज अंकल ने कहा- मैंने तो समझा था कि तुम अपने मम्मी-पापा की तरह रोज़ ही लेती होगी.. अगर तुम्हारी इच्छा नहीं है.. तो कोई बात नहीं।
तब मैंने कहा- नहीं राज अंकल ऐसा नहीं है.. लेकिन आज आपके साथ पहली बार खा रही हूँ.. तो पी लूँगी।
फिर हम खाना खाने लगे.. तो मैंने पूछा- राज अंकल आपने बताया नहीं कि अपने बेडरूम में आज तक किसी और को क्यों नहीं जाने दिया.. वहाँ ऐसा क्या है?
राज अंकल ने कहा- कुछ भी नहीं.. बस यूँ ही..
तब मैंने कहा- लेकिन मैं तो आपके बेडरूम में जाऊंगी.. उसे देखने के लिए..
तभी राज अंकल ने कहा- पहले अपना खाना और ड्रिंक ख़त्म करो..
खाना ख़त्म होने के बाद राज अंकल मुझे ले कर नीचे बाग में टहलने के लिए आ गए।
आधा घंटा टहलने के बाद हम लोग ऊपर गए.. तो राज अंकल ने कहा- तुम अपने कमरे में जाकर सो जाओ।
मैंने कहा- लेकिन पहले मैं आपका बेडरूम देखना चाहती हूँ।