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मेरे ह्ज्बेंड ने मुझे रण्डी बना दिया

तभी कॉफ़ी आ गई, कॉफ़ी पीते हुए जय अपनी जमीन वगैरह के विषय में बात कर रहे थे और मैं उन दोनों की बात सुन रही थी, पर मेरा ध्यान सुरेश पर ज्यादा था, फिर कुछ नोटरी कागज पर जय और सुरेश ने दस्तखत किए और एक फाइल में रख दिए।

फिर सुरेश ने जय से कहा- डॉली जी बोर हो रही होगीं, क्यों ना आप डॉली जी को लेकर अपनी साइट भी देख आओ, क्यों डॉली जी..!

सुरेश जी ऐसा बोल कर बाथरूम चले गए।

तभी मैं जय से बोली- क्या आप को बाहर जाना है?

जय ने कहा- जा कर देख लूँ, प्लाट कैसा है। तुम यहीं ऑफिस में रहो, मैं सुरेश से तुम्हारे विषय में बोला है कि आप वाराणसी से आई हो, यहाँ मेरे पास कुछ काम से आई हो, बाकी और कुछ नहीं कहा है, पर सुरेश सुन्दरता का दीवाना है, तुम यहाँ रह कर सुन्दरता का दीदार करा दोगी तो बाकी काम सुरेश पूरा कर देगा। तुम्हारी चूत की आग और पैसे की चाहत दोनों पूरी हो जाएगी और हाँ.. चूत चुदवा ही लेना.. सुबह की तरह अधूरी न रह जाना।

मैं बोली- देखती हूँ.. मैं कितना सुरेश जी के बाबूराव को गर्म कर पाती हूँ।

तभी बाथरूम का दरवाजा खुलने की आवाज आई तो हम चुप हो गए।

सुरेश बोले- क्यों भाई.. आप लोग जा रहे हो?

जय बोले- बॉस.. डॉली तो नहीं जा रही है, बोल रही है कि अगर कोई दिक्कत ना हो तो आपे ऑफिस में रह जाऊँ?

सुरेश जी बोले- डॉली आप कहीं भी रह सकती हो.. कोई दिक्कत नहीं है..

मैं मुस्कुरा दी।

फिर जय चले गए और सुरेश से बात करने लगी।

बात करते-करते सुरेश जी मेज के नीचे से अपने पैर से मेरे पैरों को हल्का-हल्का रह-रह कर सहला देते और मैं गुदगुदा उठती।

फिर मैं भी मेज पर झुक कर बैठ गई, ताकि मेरे रस भरे आम दिख सकें, मैं सुरेश को थोड़ा और आकर्षित और उत्तेजित कर सकूँ।

बातों के दौरान सुरेश मेरी सुन्दरता की तारीफ करते हुए कुर्सी से उठ कर मेरे पीछे आ गए, मेरे कन्धों पर हाथ रख सहलाने लगे और मैं सिसियाते हुए बोली- सर जी.. यह क्या कर रहे हो.. प्लीज ऐसा मत करो प्लीज..

सुरेश बोले- नहीं.. डॉली जी, मना मत करो.. एक बार तुम्हारे सुन्दरता का रस पीना चाहता हूँ.. एक बार पिला दो..

ऐसा कहते हुए उन्होंने मेरा हाथ पकड़ कर अपने पास खींच लिया और मैं भी मस्ती में झूमती हुई उनके सीने से जा लगी।

फिर वहीं पास पड़े सोफे पर मुझे लेकर बैठ गए और कुर्ती के ऊपर से मेरी चूचियाँ दबाने लगे।

आज सुबह से ही मेरी बुर चुदना चाह रही थी, मैंने भी एक हाथ से उनका लण्ड पकड़ कर दबा दिया।

मेरे इतना करते ही उन्होंने एक झटके में ही मेरी कुर्ती उतार दी और अगले ही पल मेरी ब्रा भी उतार दी।

अब वो मेरी चूची पीने लगे, मैं भी अपने आमों को चुसाते हुए सिसकारने लगी।

वो चूमते हुए नीचे की ओर आते हुए मेरे चुचों को दबाए जा रहे थे।

मेरी चूत पानी-पानी हो गई।

फिर सुरेश उठ अपने सारे कपड़े उतार फेंके और मेरी लैगीज भी सरका दी और मेरी चूत पर मुँह रख कर बुर चाटने लगे।

मेरी चूत ने पहले से ही पानी छोड़ा हुआ था क्योंकि मैं स्वयं भी तो चुदना चाह रही थी, वो भी पूरी नंगी हो कर, मस्ती से शरीर को उसके हवाले करके जी भर कर अपनी प्यास बुझाना चाहती थी।

अब हम दोनों कुछ ही पलों में पूरे नंगे हो चुके थे।

मेरा दिल फिर से लण्ड के चूत में घुसने के अहसास से धड़क उठा।

उसने मुझे अपनी बाँहों में कस कर ऊपर उठा लिया और अब मैंने भी शरम छोड़ दी, अपनी दोनों टाँगें उसकी कमर से लपेट लीं।

उसका लण्ड मेरी गाण्ड पर फिर से छूने लगा।

उसने मुझे सोफे पर पटक दिया। मैंने भी उसे झटके से पलट कर नीचे कर दिया और उस चढ़ बैठी और अपनी चूचियाँ उसके मुँह में ठूंस दीं।

‘मेरे सुरेश.. मेरा दूध पी ले जरा… जोर से चूस कर पीना।’

मैंने उसके बालों को जोर से पकड़ लिया और चूचियाँ उसके मुँह में दबाने लगी।

उसका मुँह खुल गया और मेरे कठोर चूचुकों को वो चूसने लगा।

मेरा हाल बुरा होता जा रहा था, चूत बेहाल हो चुकी थी और लण्ड लेने को लपलपा रही थी, पानी की बूंदें चूत से रिसने लग गई थी। लण्ड को निगलने के लिए चूत बिल्कुल तैयार थी।

उसने दोनों हाथों से मेरे चूतड़ भींच लिए, मेरी चूत के आस-पास उसका लण्ड तड़पने लगा।

 
मैं थोड़ा सा नीचे सरक गई और लण्ड को चूत के द्वार पर अड़ा लिया।

अब देर किस बात की बात की… उसके लण्ड ने एक ऊपर की ओर उछाल मारी और मेरी चूत ने उसके लण्ड को लीलते हुए, नीचे लण्ड पर दबा दिया।

उसका मस्त बाबूराव “फ़च” की आवाज के साथ भीतर तक रास्ता बनाता हुआ जड़ तक बैठ गया।

मैंने अपनी चूचियाँ उसके मुँह से निकालीं और अपने होंठ से उसके होंठ दबा लिए।

‘आह्ह्ह्ह ठोक दिया ना.. ईह्ह्ह..’ मेरी चूत में उसके लण्ड का मीठा-मीठा अहसास होने लगा था।

‘आपका जिस्म कितना मस्त है.. चोदने लायक..’ उसके मुँह से ‘चोदना’ शब्द बड़ा प्यारा लगा।

मुझे लगा कि सुरेश मुझसे इसी भाषा में मुझसे बोले, सो मैंने भी जानबूझ कर ऐसी भाषा का प्रयोग करना शुरु कर दिया- तेरा लण्ड भी सॉलिड है।

‘रानी, तेरी चूत भी कितनी प्यारी है।’

मैं उसके लण्ड पर अपनी चूत मारने लगी। लण्ड बहुत ही प्यारी रग़ड़ मार रहा था।

मुझे चूत-घर्षण करते हुए चुदाने में आनन्द आ रहा था।

कुछ देर ऐसे ही चुदने के दौरान सुरेश ने मुझे ऊपर कर लिया।

मैं सीधी बैठ गई और ‘धच’ से उसके लण्ड पर चूत मारी और खुद ही चीख पड़ी।

मैं भूल गई थी कि उसका लण्ड मोटा और अधिक लंबा था, वो तो मेरी बच्चेदानी से जोर से टकरा गया था।

इस दर्द के साथ बहुत ही जोर का आनन्द भी आया।

‘सुरेश उई.. ईईसीओ.. सीसीईईईसीई चुद गई.. तेरे लण्ड से.. राजा बहुत मजा आ रहा है.. तू भी नीचे से मार ना चोद दे राजा मेरी चूत को फ़ाड़ दे आआहह.. सीईई… राजा मैं आज सुबह से ही चुदासी हूँ.. चोदो ओर चोदो मोटे लण्ड से आह्ह… मेरी प्यारी चूत को.. मादरचोद.. इस चूत को चोद डाल तू.. मुझे आज चोद-चोद कर निहाल कर दे…’

मैं गालियाँ बोल-बोल कर अपने मन की भड़ास निकाल रही थी।

मेरे दिल को ऐसा करने से बहुत सुकून आ रहा था।

मैंने कुछ रुक कर फिर से ऊपर से चूत को फिर से उछाला और एक नया और सुहाना मजा लम्बे लण्ड का मिल रहा था।

फिर तो ऊपर से ‘धचा..धच’ लण्ड के ऊपर अपने आप को पटकते चली गई।

सुरेश चोदते हुए बोला- गालियाँ देती हुई बहुत प्यारी लग रही है.. आजा अब मैं तेरी माँ चोद देता हूँ.. भोसड़ी की.. रण्डी कुतिया.. ले चुदवा ले अपनी चूत को.. भोसड़ी में खा मेरा बाबूराव.. चुदवा ले।

मैं भी मस्त हो कर कहने लगी- मेरे प्यारे हरामी मादरचोद.. मेरी भोसड़ी चोद दे… बस अब मुझे नीचे दबा ले और साली चूत की चटनी बना दे।

अब हम दोनों ने पलटी मार ली और वो मेरे ऊपर सवार हो गया।

उसकी कमर, मैंने सोचा भी नहीं था, ऐसी जोर-जोर से चलने लगी कि बस मुझे स्वर्ग का आनन्द आ गया।

मैं तबियत से चुदने लगी।

‘हाय मेरे चोदू.. चोद मुझे.. राजा मेरी फ़ुद्दी को मसल डाल… चूत फ़ाड़ दे मेरी।’

मैं अनाप-शनाप बकते हुए चुद रही और चुदाई का भरपूर मजा ले रही थी।

‘आह, मेरी रानी तेरी चूत का चोद आज मेरा बाबूराव मस्त हो गया.. रानी.. जी भर के आज चुदवा ले.. जी भर के मेरी कुतिया.. छिनाल.. साली.. रण्डी.. आह्ह्ह्हऽऽ’

उसकी प्यारी सी मीठी गालियाँ मुझे नया आनन्द करा रही थीं।

मेरे शरीर में तरावट आने लगी, सारा जिस्म मीठे जोश से भर गया, मुझे ऐसा लग रहा था कि मैं कभी ना झड़ूँ.. बस जिन्दगी भर चुदाती ही रहूँ.. यह मजा किसी और चुदाई से अलग था, कुछ जवानी का जोश और मीठी-मीठी गालियों की मीठी चुभन थी।

मैं भी आज जी खोल कर सारी गन्दी से गन्दी गाली सुनते हुए चुद रही थी।

अब मेरा जिस्म ऐंठने लगा और आनन्द को मैं और बर्दाश्त नहीं कर सकी… मेरी चूत जोर से झड़ने लगी।

मेरी चूत में लहरें उठने लगीं, तभी सुरेश ने मेरे ऊपर अपने आपको बिछा लिया और लण्ड को चूत में भीतर तक दबा लिया।

उसके कड़कते लण्ड ने मेरी बच्चेदानी को रगड़ मारा और चूत में उसका वीर्य छूट पड़ा।

वो अपने लण्ड को बार-बार वीर्य निकालने के लिए दबाने लगा।

वीर्य से मेरी चूत लबालब भर चुकी थी।

वो निढाल हो कर एक तरफ़ लुढ़क पड़ा।

मैंने भी मस्ती में अपनी आंखें बन्द कर ली थीं।

सारा सुख और आनन्द और दिन भर की तड़प, चूत की प्यास शान्त हो गई थी।

मैं लम्बी-लम्बी साँसें लेते हुए पड़ी रही.. मेरी चूत से वीर्य निकलते हुए मेरी गांड तक पहुँच रहा था।

मैं लम्बी-लम्बी साँसें लेते हुए पड़ी रही। चूत से वीर्य निकलते हुए मेरी गाण्ड तक पहुँच रहा था।

मैं तो इतनी थक गई थी कि सोफे पर ही पड़ी रही।

मुझे होश तब आया, जब सुरेश जी ने मुझे हिला कर बोला- डॉली.. क्या हुआ?

मैं बोली- जानू.. इतना मजा आया कि उठने का मन नहीं कर रहा है.. जी कर रहा है ऐसे ही लेटी रहूँ..

पर ऑफिस में थी इसलिए बाथरूम में अपने जिस्म को साफ़ करने के लिए चूतड़ मटकाते हुए चली गई।

जब बाहर आई तो सुरेश ने कहा- डॉली जी.. आज तो आप ने बहुत मजा दिया.. ये लो 5000/- रुपए रख लो।

मैं लेने से मना करने लगी लेकिन सुरेश जी ने जबरदस्ती दे दिए तो मैंने रूपए पर्स में रख लिए।

सुरेश बोले- रानी, मैंने आप को मथुरा भेजने का इन्तजाम कर दिया है, आप लोगों को मेरी कार से ड्राइवर छोड़ देगा।

मैंने ‘थैंक्स’ कहा।

तभी चपरासी नाश्ता लेकर आया, मैंने और सुरेश जी ने नाश्ता करके कॉफ़ी पी।

तब तक जय जी आ गए, मेरे चेहरे पर मुस्कान देख जय सारी बात समझ मुस्कुराने लगे और सुरेश से बात करने लगे कि जमीन ठीक है.. पसंद आ गई।

और बोले- अब आप इजाजत दीजिए.. नहीं तो बहुत लेट हो जायेंगे, वैसे भी 6:35 हो रहा है।

सुरेश बोले- आप लोग मेरी कार से जा रहे हो।

फिर हम लोग एक साथ उठ कर बाहर हाल में आए और ड्राइवर को बुला कर बोले- ये लोग मेरे मेहमान हैं, इनको मथुरा छोड़ कर आओ।

मैंने नमस्ते की और कार की पिछली सीट पर बैठ गई, जय भी मेरे साथ पीछे ही बैठ गए।

कार मथुरा के लिए चल दी।

रास्ते में जय मेरी चुदाई के विषय में पूछने लगे।

मैंने सब बात बताई कि कैसे सुरेश ने चोदा और कैसे मैं चुदी।

तभी जय ने कहा- रानी तुम्हारी चुदाई सुन कर मेरा भी पानी निकालने का मन करने लगा है। क्या तुम मेरा साथ नहीं दोगी?

मैं बोली- क्यों नहीं.. जो मेरे लिए इतना कर सकता है.. मैं तो घूमने आई थी, पर आपने चुदाई और पैसा दोनों दिला दिया।

इस समय कैसे चुदाई करें? ड्राइवर क्या कहेगा?

जय बोले- तुम हाथ और मुँह के सहारे पानी निकाल दो।

मैं बोली- ठीक है.. पर आप आगे ड्राइवर पर निगाह रखना, कहीं वो देख ना ले।

जय बोले- ओके..

 
मैंने जय की जांघ को सहलाते हुए पैंट के ऊपर से ही लन्ड को सहलाते हुए जिप को आहिस्ता-आहिस्ता नीचे करते हुए खोल दिया।

अब उनके अंडरवियर में हाथ डाल कर लंड बाहर निकाल कर देखने लगी।

जय का लंड बड़ा प्यारा था, एक बार फिर मुझे चुदने का मन करने लगा।

मैंने जय के लंड को पकड़ कर ऊपर-नीचे करना शुरू किया।

कुछ समय बाद मैंने अपना सिर नीचे करके उस के तनतनाते हुए लंड को अपने मुँह में लिया। मैंने अपनी जीभ को उसके लंड के शिश्न-मुंड पर घुमा कर उसके पानी का स्वाद लिया।

फिर उसका लंड चूसते हुए, हाथों से बाबूराव को मेरा मुठ मारना लगातार चालू था।

जय का एक हाथ मेरे पीठ से होते हुए मेरी लैगिंग्स और पैन्टी के अन्दर हाथ डाल मेरे चूतड़ों को सहलाते हुए मेरी चूत की तरफ बढ़ा, तो मैंने धीरे से अपने पैर थोड़े चौड़े कर लिए ताकि वो मेरी सफाचट, चिकनी चूत पर आराम से हाथ फिरा सके।

हाथ फिराते-फिराते उस की बीच की उंगली मेरी गीली फुद्दी के बीच की दरार में घुस गई।

वो अपनी उंगली मेरी चूत के बीच में ऊपर-नीचे मेरी चूत के दाने को मसलता हुआ घुमा रहा था और चूत में ऊँगली करवाने से मेरे मुँह से कामुक आवाजें निकल जातीं, पर मैं ड्राइवर की वजह से खुल कर आवाज नहीं कर सकती थी।

उसके मुँह में मेरा एक चूचुक और मेरे हाथ में उसका लंड था।

हम दोनों और कड़क हो गए।

मैं भी उस का लंड चूसते हुए बाबूराव को आगे-पीछे करती जा रही थी और एक बार तो मैंने सोची कि चुद ही लूँ मगर कार में यह संभव नहीं था।

मेरी चूत में जय की ऊँगली लगातार घूम रही थी और मैं संतुष्टि के गंतव्य की तरफ बढ़ने लगी।

उसकी उंगली अब मेरी चूत में घुस कर चुदाई कर रही थी, मेरी फुद्दी को उसकी उंगली चोद रही थी।

मैं भी उसके लंड को चूस रही थी और एक हाथ से उसके अंडकोष को सहला रही थी।

हम दोनों दबी जुबान से कार में चुदाई का मजा ले रहे थे।

जैसे ही उसको पता चला कि मैं झड़ने के मुकाम पर पहुँचने वाली हूँ, उसने अपनी उंगली से जोर-जोर से मेरी चूत की चुदाई करनी शुरू कर दी।

वो मेरी चूत को अपनी उंगली से इतनी अच्छी तरह से कामुक अंदाज़ में चोद रहा था कि मैं झड़ने वाली थी और मेरी नंगी गांड अपने आप ही हिलने लगी।

मेरे मुँह से जोर से संतुष्टि की आवाज निकली और मैं झड़ गई।

मैंने उसकी उंगली को अपने पैर, गांड और चूत को भींच कर अपनी चूत में ही जकड़ लिया और झड़ने का मज़ा लेने लगी।

मैं झड़ने का मज़ा लेते हुए जय के लन्ड का सुपारा गले तक लेकर चाटते हुए लंड को आगे-पीछे किए जा रही थी।

अभी भी जय का हाथ मेरी चूत और गाण्ड की दरार में घूम रहे थे और मैं जय का लंड तेज-तेज मुठियाते हुए आगे-पीछे किए जा रही थी।

जय भी मस्ती की तरफ बढ़ रहा था, तभी जय का बाबूराव मेरे मुँह में ढेर हो गया और उसने पानी छोड़ दिया।

जय के वीर्य से मेरा मुँह भर गया और मैंने तुरंत माल को गुटकते हुए मुँह हटा कर कहा- यार ये क्या किया.. अब मुँह कैसे धोऊँगी?

पर जय आँखें बंद किए झड़ने का मजा ले रहा था.. क्योंकि अभी भी मेरा हाथ जय के बाबूराव पर चल रहा था।

जय ने अपने रुमाल से मेरा मुँह साफ किया और फिर अपना लंड साफ़ किया।

अब हम लोग अपने कपड़े ठीक कर आराम से बैठ गए।

जय बोला- थैंक्स डॉली..

मैं बोली- इसमे थैंक्स की क्या बात है.. यह तो मेरा फर्ज था।

हम लोग मथुरा के करीब पहुँच गए थे कुछ ही देर में कार एक मकान के सामने रुकी।

मैं और जय कार से बाहर निकले और ड्राईवर को बाय किया। फिर मैं जय के पीछे चलते हुए बिल्डिंग में दाखिल होते हुए बोली- यहाँ कोई काम है क्या?

जय बोले- वो मैं आपको बताने वाला था.. पर ध्यान से उतर गया था। यहाँ पर मेरा एक बहुत ही ख़ास दोस्त रहता है.. उसी से आपको मिलाने ले जा रहा हूँ। यदि आप थकी न हो.. तो आप मिल लेतीं।

मैं बोली- अब तो यहाँ लाकर पूछना तो बेमानी है और आप उससे मिलाने लाए हो या चुदाने?

जय बोला- यार नाराज हो गई क्या?

मैं हँस कर बोली- नहीं यार.. मैं तो यूं ही मजाक कर रही थी।

तभी जय ने एक कमरे के बाहर लगी घंटी को दबाया।

करीब एक मिनट बाद कमरे का दरवाजा खुला और सामने एक साधारण कदकाठी का एकदम गोरा मर्द बाहर आया- अरे जय, तुमने बताया भी नहीं यार.. कि तुम आ रहे हो?

जय बोला- क्या नवीन भाई.. मुझे अब बता कर आना पड़ेगा क्या..?

नवीन बोला- नहीं यार.. मेरा कहने का यह मकसद नहीं है।

फिर नवीन मेरी तरफ देखने लगा.. तभी जय ने मेरा परिचय करवाया।

‘भाई क्या देख रहे हो.. यह डॉली जी हैं क्या इन्हें दरवाजे पर ही खड़ा किए रहोंगे?’

नवीन हड़बड़ा कर मुझे ‘हाय’ करके अन्दर आने को बोला।

हम लोगों ने कमरे में पहुँच कर देखा कि यह एक गेस्टरूम था.. उसमें दो सोफे और एक बेड लगा था।

मैं सोफे पर बैठी और मेरे बगल में जय जी बैठकर नवीन जी से बोले- यार डॉली जी बनारस से आई हुई हैं। मैंने सोचा कि इन्हें आपसे मिलवा दूँ।

नवीन बोला- अच्छा किया.. पर यार थोड़ा मुश्किल है।

मैं यहाँ आपको नवीन के फ्लैट के विषय में बता दूँ कि नवीन का फ्लैट चार कमरे का था। कुल मिलाकर ये बहुत बड़ा फ्लैट था। मैं जहाँ बैठी थी.. वह सामने का पहला कमरा था।

जय बोला- क्यों यार.. ऐसी क्या दिक्कत है.. जो तू डॉली जैसी हसीन लड़की को सामने पाकर भी मुश्किल कह रहा है।

नवीन बोला- अब तेरी भाभी है अन्दर.. तो कैसे क्या होगा?

तभी जय बोला- यार, भाभी को हम लोगों का आना पता ही नहीं है। डॉली जी को यहीं रहने दो.. तुम मेरे साथ अन्दर चलो। भाभी मुझे देख कर खुश हो जाएंगी और मैं उनको बातों में उलझाए रहूँगा, तुम कोई बहाना बनाकर डॉली के पास आकर आराम से मिलते रहना।

फिर जय और नवीन अन्दर चले गए।

 
करीब दस मिनट बाद नवीन जी वापस आ गए।

मैं नवीन से बोली- अगर आपकी वाइफ यहाँ आ गईं तो?

नवीन मुस्कुराकर बोला- डॉली, देखो आपको और मेरे को पता है कि तुम मेरे पास क्यों आई हो।

मैं ‘हाँ’ बोली।

‘फिर भी मेरा और आपके मिलन में देर हो रही है.. लेकिन अन्दर जय और मेरी वाइफ सेक्स शुरू भी कर चुके होंगे।’

मैं बोली- ओ माई गॉड.. क्या जय को पता है कि तुम अपनी बीवी की चूत चुदाई के बारे में जानते हो?

नवीन जी बोले- नहीं जय और मेरी वाइफ कुछ नहीं जानते.. में उन्हें चुदाई करते देख चुका हूँ.. बस जय को मौका चाहिए था.. जो आज आपकी वजह से मिल गया।

‘क्या जय आपकी वाइफ को बताएगा कि मैं यहाँ आपके साथ हूँ?’

‘नहीं डॉली जी.. वह ऐसा नहीं करेगा.. क्योंकि उसने वाइफ के सामने मुझे मथुरा फ़ोर्ट भेजने की बात की है.. अगर मैं यहाँ हूँ.. वाइफ को पता चलेगा, तो वो जय के साथ कुछ नहीं करेगी और सती सावित्री बनने का ढोंग करके आसमान पर सर पर उठा लेगी।’

बातों के दौरान ही मुझे नवीन ने बेड पर बैठाकर मेरी कुर्ती और लैगी को निकाल दिए थे और मैं पैन्टी और ब्रा में बैठी चूची और चूत मसलवा रही थी।

मैंने अपने होंठ नवीन के होंठों पर रख दिए, नवीन मेरे होंठों को चूसने लगे, नवीन अपने हाथों से मेरी चूचियाँ कस कर मसल रहे थे। हम दोनों करीब दो मिनट तक इस तरह ही एक-दूसरे के मुँह में मुँह डालकर चूमते रहे।

कुछ मिनट बाद नवीन ने अपने कपड़े निकालने के लिए मेरे होंठ से अपने को अलग किए और कपड़े निकाल कर पूरी तरह निर्वस्त्र हो गए और इसी के साथ मेरी भी ब्रा-पैन्टी निकाल फेंके।

नवीन ने मेरी गर्दन को चूमते हुए कहा- डॉली जी.. आपको सेक्स का लाईव सो दिखाता हूँ।

मैं कुछ कहती इससे पहले नवीन धीमे से अन्दर चले गए जहाँ जय और नवीन की वाइफ थी।

कुछ देर में मुझे भी अन्दर आने का इशारा किया, मैं डरते हुए नवीन के पास गई।

इस वक्त मैं और जय पूरी तरह निर्वस्त्र थे।

जय ने इशारे से खिड़की के अन्दर देखने को बोला, खिड़की की ओट से हम दोनों ने अन्दर देखा तो मेरे तो होश ही उड़ गए। नवीन की वाइफ पैर फैलाकर बिस्तर पर लेटी थी और जय उसकी चूत चाट रहा था।

नवीन की वाइफ मजे लेकर चूत चटवाते हुए सिसकारी लेते हुए नवीन को गालियाँ बक रही थी- हाय जान.. मस्त है तुम्हारा लंड.. इसी लिए तो तुमको देख कर मेरी चूत छिनाल बन जाती है.. नवीन साले का लंड.. मुझे उसका बाबूराव कभी पसंद ही नहीं आया.. आज तक साला ठीक ढंग से मेरी चूत चौड़ी ही नहीं कर पाया।

जय नवीन की वाइफ के ऊपर चढ़ कर और पैर उठा कर अपना लंड चूत पर लगा कर रगड़ने लगा।

नवीन की वाइफ पूरी मस्ती से ‘आआआह.. ऊऊ.. उईईई.. हाआ.. सि.. करते हुए अपना चूतड़ उछाल कर लंड को अन्दर कर लिया।

इधर नवीन भी अपनी वाइफ की चुदाई देखकर उत्तेजित होकर पीछे से ही मेरी चूत पर लंड लगा कर ठेल दिया।

सही में नवीन का लण्ड बहुत छोटा तो नहीं था.. फिर भी मीडियम साइज था, पर जय के लण्ड के आगे बच्चा ही था।

नवीन के एक ही झटके में मेरी चूत पूरा लण्ड खा गई।

नवीन की वाइफ की चुदाई देख कर मेरी भी चूत लण्ड लेने के लिए पानी छोड़ रही थी और मेरी गीली चूत में नवीन का लण्ड ‘सट.. सट..’ करते हुए अन्दर-बाहर हो रहा था।

नवीन मेरी गर्दन.. कभी मेरी पीठ को.. और मेरी चूची को रगड़ते हुए अपने लण्ड को पेल रहा था।

‘आआहह..’ उसे चूमने और चूसने में मुझे भरपूर मज़ा आ रहा था।

मैं भी सिसियाते हुए धीमे से बोली- आह.. सिईसिआह.. बहुत मजा आ रहा है.. ऐसे ही चूसो.. चाटो.. ऊंऊऊहह.. हां… हां.. और मेरी चूत पेलो।

उधर नवीन की वाइफ कमरे में जय के मोटे लण्ड से चीख-चीख कर और कमर उठाकर चुद रही थी, इधर मैं चुदाई देखते हुए चुदने का एक अलग ही मजा लेकर चुद रही थी। नवीन बड़े प्यार से मेरी चूत का मजा ले रहा था।

तभी कमरे से सिसकारियों की आवाज तेज हो गई और नवीन भी चोदते हुए अन्दर देखने लगा।

जय ‘गचा.. गच..’ लण्ड पेलते हुए बीच में उसकी चूचियाँ भी दबाता जा रहा था और हर एक धक्के पर चीख कर नवीन की वाइफ जय को चूत में लण्ड पेलने को प्रोत्साहित कर रही थी।

‘आह्ह.. चोदो आह.. आआहह.. और मारो मेरी चूत.. आआहह.. ऊऊह.. उईई.. अहा..’

वो मजे करते हुए चूतड़ उछाल कर लण्ड खा रही थी।

इधर नवीन मेरी चूत पर शॉट पर शॉट मार कर मेरी चुदाई करता जा रहा था।

तभी मेरी निगाह अन्दर गई और मैंने देखा कि नवीन की वाइफ झड़ रही थी और जय ने झटका मारते हुए नवीन की बीवी की चूत में ही पिचकारी छोड़ दी, वो अपना पूरे का पूरा लण्ड बुर में ठोक कर झड़ने लगा।

 
इधर नवीन जय को झड़ता देख मेरी चूत में लण्ड चोदने की रफ्तार तेज करके मेरी चुदाई करते हुए छह-सात जोरदार धक्के लगाकर मुझे अपनी बाँहों से जकड़ कर मेरी चूत में भी पिचकारी छोड़ कर झड़ने लगा।

मैं सिसियाकर प्रश्न वाचक निगाहों से नवीन को झड़ते देखने लगी। नवीन समझ गया कि मैं प्यासी हूँ और सर झुकाकर मेरे पीठ पर वजन रख कर हाँफने लगा।

उधर नवीन की वाइफ भी जोरदार चुदाई से मस्त होकर आँखें बंद करके जय के सीने से चिपक कर लंबी-लंबी साँसें ले रही थी।

वे दोनों एक-दूसरे की बाँहों में ऐसे बेसुध होकर चिपके रहे, जैसे किसी से कोई शिकायत ही ना हो।

इधर मैं प्यासी ही रह गई।

मुझे नवीन के लण्ड से चूत हटाने का मन तो नहीं कर रहा था.. पर उससे पहले ही नवीन का लण्ड मुरझा कर चूत से बाहर निकल गया और उधर भी तूफान आकर चला गया था। नवीन की वाइफ और जय कभी भी बाहर आ सकते थे। इसलिए वहाँ से हटना जरूरी था। मैं नवीन के साथ बाहर चली आई।

नवीन ने कहा- डॉली जी सॉरी.. मैं ज्यादा उत्तेजित हो गया था.. इसलिए जल्दी झड़ गया।

मैं बोली- कोई बात नहीं।

तभी मेरे मोबाईल पर जय का मैसेज आया कि डॉली जी अगर आप लोगों का काम हो गया हो.. तो आप और नवीन बाहर निकलो।

मैंने नवीन को यह बात बताई, नवीन मेरे साथ बाहर आ गया और हम लोग लिफ्ट पकड़ कर नीचे चले आए।

करीब दस मिनट बाद जय भी नीचे आ गए। मैंने नवीन को नमस्ते की.. तभी जय बोला- क्यों नवीन भाई.. कैसा रहा डॉली का साथ.. मजा आया?

नवीन बोला- डॉली का साथ हो तो मजा ना आए.. यह हो ही नहीं सकता।

फिर हम लोग ऑटो पकड़ कर जहाँ रूके थे.. वहाँ अपने रूम पर आ गए।

अब रात के साढ़े दस का समय हो रहा था, रंगीला कमरे में सोया हुआ था।

जय हाल समाचार करके.. सुबह आने को बोल चला गया, मैं बाथरूम जाकर फ्रेश होकर नाईटी पहन कर बाहर आई और ह्ज्बेंड के साथ खाना खाकर बिस्तर पर आराम करने लगी।

पर मेरी चूत अब भी पानी छोड़ रही थी और मुझे चुदाई की चाहत हो रही थी। मैं अपना एक पैर ह्ज्बेंड की जांघ पर चढ़ा कर अपनी बुर को कमर पर दाबने लगी।

तभी ह्ज्बेंड मुस्कुराकर बोले- मेरी जान.. बहुत प्यासी लग रही हो.. क्या बात है?

मैं नवीन और जय के घर पर हुई चुदाई की सारी बातें बताने लगी। चुदाई की बात और मेरी चूत प्यासी रह गई सुन ह्ज्बेंड जोश में आकर मेरे चूचियाँ कसकर दबाते हुए मेरे होंठों को मुँह में ले कर चूसते हुए एक हाथ से मेरी बुर कस कर मसल कर मेरे ऊपर चढ़ गए।

बुर मसलते हुऐ ह्ज्बेंड की एक उंगली मेरी बुर में चली गई।

एक तो मेरी बुर पानी छोड़ रही थी, दूसरे मैं पैन्टी भी नहीं पहने हुई थी.. क्योंकि मैं जब बाथरूम गई थी तभी ब्रा-पैन्टी उतार आई थी।

फिर ह्ज्बेंड ने मुझे अपनी बाँहों में जकड़ कर बेतहाशा चूमना शुरू कर दिया। मैं ह्ज्बेंड का सर पकड़ कर अपने तने हुए चूचों पर उनका मुँह रख कर बोली- सैयां जी.. मेरी चूचियाँ चूसो।

मेरे ह्ज्बेंड तने हुए दोनों चुचों को दबाते हुए मुँह में भर कर मेरे निप्पल को खींच-खींच कर चूसते हुए बोले- कई दिन हो गए.. तेरी चूत मारे हुए.. आज तेरी चूत की सारी गर्मी और अकड़न दूर कर दूँगा।

वो बड़े ज़ोर-जोर से दोनों चूचों को भींचते हुए मेरे गले और होंठ और चूचियां चूसने लगे।

मैं सिसकारी लेकर बोली- आह रे.. ऊहहआह.. सीई आह सीईईई सी आह.. अब मुझसे नहीं रहा जाता.. मेरे राजा.. मेरी चूत चोदकर मेरा सारा रस निकाल दो..

तभी ह्ज्बेंड ने मेरी चूची छोड़कर जल्दी से अपने सारे कपड़े उतार कर अपना लम्बा और मोटा लण्ड मेरे होंठों पर लगा कर बोले- मेरी जान.. बुर पेलवाने से पहले अपने प्यारे लण्ड को चाट तो लो।

मैं ह्ज्बेंड के लण्ड को हाथों से पकड़ कर बड़े प्यार से सुपारे को मुँह में लेकर चूसने लगी।

मैं आप लोगों को यह बता दूँ कि मेरे ह्ज्बेंड के लण्ड पर चमड़ी नहीं है, लण्ड की चमड़ी कटी हुई है।

मैंने प्यार से जीभ को लण्ड के चारों तरफ फिराते हुए.. चाट-चाट कर मोटे सुपारे को लाल कर डाला।

मैं समूचे लण्ड को गले तक लेकर चूसे जा रही थी।

मेरी इस तरह की चुसाई से ह्ज्बेंड मस्त होकर ‘आहें’ निकालने लगे और लण्ड चूसने के दौरान ह्ज्बेंड चूतड़ और मेरी बुर भी मसक रहे थे।

मैं पहले से ही प्यासी थी, एक तो ह्ज्बेंड के द्वारा चूतड़ और चूत सहलाने से मेरी चुदास अब पूरी तरह सवार हो चुकी थी और अब मैं मस्ती में मचलते हुए लण्ड चूसे जा रही थी।

तभी ह्ज्बेंड बोले- बस करो मेरी जान.. नहीं तो मेरा माल तेरे मुँह में ही निकल जाएगा।

मैं भी लण्ड पीना छोड़ कर बोली- हाँ मेरे सैयां.. बस अब जल्दी से चोद दो.. अब मैं इतनी गर्म हो गई कि मुझसे अब रहा नहीं जाता आआह… सीईईई सीआह.. ऊऊऊँ.. इइइसीसी.. बस राजा.. अब देर ना करो.. मेरे सईयां..

इतना सुनते ही ह्ज्बेंड ने मेरी बुर को अपनी गदोरी में भरते हुए कसकर भींच दिया और मेरी बुर ने ढेर सारा पानी छोड़ दिया।

एक तो मेरी बुर पहले से ही पनिया हुई थी और बुर दबाने से मेरा बदन कांपने लगा। मैं ‘आहें’ भरते हुए सिसियाने लगी और चुदाई की प्यास से व्याकुल होकर मैं पलटकर घोड़ी बनकर हिनहिनाते हुए लण्ड को बुर के मुँह पर लगा के.. बुर की फांकों को लण्ड के सुपारे से फैला कर चूतड़ों को पीछे को कर दिया।

‘फक्क..’ की आवाज के साथ सुपारा मेरी बुर में घुसता चला गया।

तभी ह्ज्बेंड ने बचा खुचा हुआ लण्ड भी सटाक से मार कर अन्दर कर दिया।

अब ह्ज्बेंड तेज़-तेज़ कमर हिलाते हुए मेरी ताबड़तोड़ चुदाई करने लगे। मैं कमर और चूतड़ हिला-हिला कर लण्ड बुर में पेलवाते जा रही थी।

 
मैं मस्त हो कर बोलने लगी- आह्ह.. और चोदो.. मेरे राजा.. पेलो मेरी बुर.. फाड़ दो.. मेरी चूत.. हाय सीई हाय रे आहहह सी… और ज़ोर से मारो धक्का.. चोदो साली को.. बहुत प्यासी थी.. आहहह.. चोदते रहो

ह्ज्बेंड मेरी चूचियाँ जोर से मसलते हुए बोलने लगे- ले खा साली.. मेरे लण्ड को छिनाल साली.. खा मेरे लण्ड को..

‘हाँ मेरे जानू, मेरी चूत छिनाल हो गई है। पेलो साली को.. आहहह.. गइइई.. मेरे राजा.. मैं गइई.. आह सी..’

अकड़ते हुए मैं झड़ने लगी और मुझे झड़ता हुआ पाकर ह्ज्बेंड मेरी बुर पर ताबड़तोड़ धक्कों की बौछार करते हुए चोदते जा रहे थे।

मेरी चूत से ‘फच.. फचा.. फच..’ की आवाजें आने लगी थीं।

लण्ड भी ‘सक.. सक..’ करके अन्दर- बाहर करते हुए ह्ज्बेंड मेरी बुर में लण्ड जड़ तक ठोक कर झड़ते हुए बोले- ले.. मैं भी गया.. तेरी चूत में… ले साली अपनी चूत में.. मेरे वीर्य को.. आह.. ले.. मैं झड़ रहा हूँ.. ततत..तेरी चूत में..

वे झड़ कर हाँफने लगे और हम दोनों एक मस्त चुदाई के बाद आराम से एक दूसरे को बाहों में लेकर सो गए।

सुबह नींद तब खुली जब मैंने दरवाजे पर घंटी की आवाज सुनी।

मैं उठी और जाकर दरवाजा खोला तो सामने जय चाय लेकर खड़ा था।

‘अरे आप..?’

‘गुड मॉर्निंग..’ जय बोला- लग रहा है, रात को कुश्ती देर तक चली।

मैं मादकता से बोली- ऐसा क्यों लग रहा है..

जय बोला- मुझे पता है नवीन ने तुमको केवल गरम तो कर दिया होगा पर ठंडा नहीं कर पाया होगा और तुमने ठंडा होने के लिए रंगीला भाई को सोने नहीं दिया होगा।

मैं जय की बात सुनकर मुस्कुरा दी और जय भी मुस्कुराते हुए अन्दर आ गए। तब तक मेरे ह्ज्बेंड भी जाग गए थे। मैं बाथरूम में जाकर फ्रेश हुई और ह्ज्बेंड भी फ्रेश होकर आ गए.. फिर हम सब लोग बैठकर चाय पीने लगे।

अब जय बोले- डॉली जी.. आज आप को पूरे दिन के लिए सिर्फ आराम है.. कहीं जाना नहीं है। हो सकता है रात का कोई प्रोग्राम बने।

जय 20000/- रूपया मेरे ह्ज्बेंड को देते हुए बोले- रंगीला जी इसे रखिए.. यह कल का कुछ हिसाब है.. बाकी बाद में देखा जाएगा और मैं दोपहर में तो आ नहीं सकता.. शाम तक ही आऊँगा। इसलिए आप लोग बाहर जाकर खाना खा लीजिएगा।

इस सबके बाद जय चले गए। उनके जाने के बाद मैं बाथरूम में नहाने चली गई.. लेकिन कुछ ही देर बाद ह्ज्बेंड बाथरूम के दरवाजे पर दस्तक देने लगे।

मैंने अन्दर से ही पूछा- क्या है?

तो ह्ज्बेंड ने कहा- साथ नहाने का मन है।

मैंने मुस्कुराते हुए दरवाजा खोल दिया। फिर ह्ज्बेंड भी मेरे साथ नहाते हुए मेरी चूचियों और चूतड़ों को दबाने लगे, वो कभी मेरी चूची को मुँह में भर लेते और कभी बुर को सहला देते।

मैं ह्ज्बेंड की इस तरह की हरकतों से गरम होने लगी और बोली- इरादा क्या है जनाब का.. सुबह-सुबह रंगीन मिजाजी..?

ह्ज्बेंड मुस्कुराते हुए मेरी योनि प्रदेश को चूमने लगे। काफी देर मेरी बुर को चूसने से मेरी चूत की गरमी बढ़ गई और मैं सिसियाते हुए ह्ज्बेंड के सर को बुर पर दबाते हुए चूत को चटवाने लगी..

साथ ही मैं सिसक भी रही थी- ऊऊउई.. आआह्ह्ह.. आआह्ह.. मेरे राजा चाटो.. मेरी चूत.. मेरी चूत को काट कर खा जाओ..

ह्ज्बेंड मेरी चूत की पंखुड़ियों को मुँह से खींच-खींच कर चूस रहे थे.. पर अचानक चूत को पीना छोड़कर अचानक से लण्ड को बुर पर लगा दिया और एक तेज शॉट लगा कर लंड को ‘सटाक’ से मेरी चूत में पेल दिया।

मैं रंगीला की इस हरकत के लिए तैयार नहीं थी। मैंने ‘ऊऊउ..ईईई.. सीई..’ की आवाज करते हुए कस कर ह्ज्बेंड को पकड़ लिया।

उधर ह्ज्बेंड ने मेरी बुर पर लगातार दस-बारह झटके मार कर लण्ड को बाहर निकाल लिया और बोले- बस आज ऐसे ही रहा जाए.. बिना चुदाई पूरी किए..।

मैं मिन्नतें करती रही- और पेलो..

पर ह्ज्बेंड मेरी काम वासना की आग का मजा उठा रहे थे और नहाकर बाहर निकल गए।

कुछ देर बाद मैं भी बाहर आई.. पर मेरी चुदास पूरे चरम पर थी इसलिए मेरी चूतड़ और कमर बल खा रहे थे। उस पर मेरे ह्ज्बेंड मेरे नितम्बों पर चिकोटी लेते बोले- क्या हुआ मेरी जान.. तबियत सही नहीं है क्या?

मैं वासना के नशे में बाथगाउन उतार नंगे ही जाकर ह्ज्बेंड की गोद में बैठ गई और मैंने अचनाक उनके खड़े लण्ड को कसकर पकड़ कर उस पर चिकोटी काट ली।

ह्ज्बेंड तेज स्वर में चिल्ला उठे और मुझे गोद से उतार कर ‘आह सी..’ करने लगे।

मैं बोली- क्या हुआ.. अब पता चला कि बात क्या है?

फिर ह्ज्बेंड बोले- जान.. मैंने तुम्हें जानबूझ कर प्यासा छोड़ दिया था। अभी पूरा दिन ही बाकी है.. पता नहीं कब लण्ड से चूत लड़ जाए.. क्यों उतावली होती हो.. मौका मिलेगा तो किसी भी लण्ड से चूत लड़ा लेना। मैंने रोका तो नहीं है।

मैं मुस्कुराने लगी।

फिर ह्ज्बेंड कपड़े पहन कर बोले- मैं सामने वाली दुकान से उसी के हाथ नाश्ता भिजवाता हूँ.. और मैं नहीं आऊँगा क्योंकि मुझे एक काम से जाना है और एक या दो घण्टे में आऊँगा.. तुम कपड़े पहन लो।

ये बोल कर वे चले गए..

पर मुझे शरारत सूझ रही थी इसलिए मैंने एक छोटा सा स्कर्ट और टाप डाल लिया.. स्कर्ट केवल मेरी चूत और चूतड़ों को ढकने भर के लिए काफी था.. बाकी मेरी जांघें पूरी नंगी दिख ही रही थीं।

इन कपड़ों में मेरी स्थिति यह थी कि अगर मैं झुक जाऊँ.. तो चूतड़ों के छेद और चूत का भी दीदार हो ही जाएगा.. क्योंकि मैंने पैन्टी नहीं पहनी थी।

फिर मैं मिरर के सामने बैठ कर पूरी तरह से तैयार हो कर बिस्तर पर लेट गई।

तभी घंटी बजी.. ...........................

 
तभी घंटी बजी..मैंने जाकर दरवाजा खोला.. तो सामने एक बांका नौजवान हाथ में नाश्ते का पैकट लिए खड़ा था। वो मेरे को ऊपर से नीचे देखते हुए बोला- मेम साहब.. साहब ने ये नाश्ता भिजवाया है।

मैं एक तरफ को होते हुए बोली- अन्दर मेज पर रख दो।

वह बांका जवान कमरे में अन्दर दाखिल होकर.. नाश्ता मेज पर रखकर खड़ा होकर मुझे देखते हुए बोला- मेम साहब मैं जाऊँ?

मैं बोली- आप का नाम क्या है और जाने की जल्दी है क्या?

वह बोला- मेरा नाम विनय है और मेरी सामने दुकान है..

मेरा इरादा उसे देख कर चुदने का हो उठा था.. इसलिए मैंने उसे कुछ और दिखाने और उसको अपने जाल में फंसाने के लिए एक तरीका सोचा।

और मैं बोली- विनय मेरा एक काम कर दोगे क्या?

वह बोला- जी मेम साहब..

मैं बोली- एक बोतल पानी ला दो।

और पैसा देने के लिए मैं मिरर के पास जाकर और झुककर अपने हैंडपर्स से पैसा निकालने लगी। मेरे झुकते ही विनय को मेरी चूत का दीदार हो उठा। विनय आँखें फाड़ कर देखते हुए अपना लण्ड सहलाने लगा।

यह सब करते हुए मैं मिरर से विनय को देख रही थी और जानबूझ कर पैसा ढूँढ़ने का नाटक कर रही थी ताकि उसको ज्यादा से ज्यादा गरम कर सकूँ।

मेरे दिमाग में घुस चुका था कि आज इस साले को इतना गरम कर दूंगी कि ये आज मेरी चूत चोद ही दे। मैं उसी की हरकतों तो नोटिस करते हुए घूम गई.. बिना विनय को कोई मौका दिए हुए..

मेरे पलटते ही विनय डरकर बगल में देखने का नाटक करने लगा। मैं जब विनय के करीब पहुँची तो विनय की साँसें तेज चल रही थीं। विनय की साँसों में एक वासना की महक आ रही थी।

मैंने एक सौ का नोट देते हुए उसके हाथों को दबा दिया।

अब मैं मादक अदा से अंगड़ाई लेते हुए बोली- थोड़ा जल्दी आना पानी लेकर.. बहुत प्यासी हूँ..।

विनय हकलाते हुए बोला- जी जी जी.. मेमममेम साहहब..

वो झटके से मुझे घूरता हुआ कमरे के बाहर चला गया। मैं जाकर बिस्तर पर चूत खोल कर बैठ गई और एक पत्रिका लेकर पैर को मोड़ लिया ताकि विनय को आते ही मेरी चिकनी बुर का दीदार हो जाए।

और वही हुआ.. जैसे ही विनय पानी की बोतल लेकर आया.. वैसे ही मैंने मुँह के सामने पत्रिका करके पढ़ने का नाटक करते हुए अपने पैरों को थोड़ा और फैला दिया। ताकि विनय मेरी बुर को अच्छे से देख ले।

कमरे के अन्दर आते ही सबसे पहले विनय की कामुक निगाहें मेरी जाँघों के बीच में पहुँच कर मेरी बुर को ताड़ने लगीं।

काफी देर तक बुर का मैं जमकर दीदार कराने के बाद चौंकते हुए बोली- अरे तुम कब आए?

विनय सच्चाई छुपाते हुए बोला- ब्ब्स.. अ..अभी आआआ.. आया म..मेम स..स.. साहब।

‘ओके..’

बोला- नाश्ता नहीं किया मेमसाहब.. ठण्डा हो गया है..

मैं बोली- विनय लेकिन कुछ और है जो गरम है।

‘ऐसा क्या है.. आप नाश्ता तो खा लीजिए।’

मैं बोली- नाश्ते के साथ कुछ और खाने का मन हो गया है।

ये कह कर मैंने आगे की बात अधूरी छोड़ दी।

तभी विनय ने पूछा- और क्या खाना चाहती है- मेमसाब?

मैं बोली- अगर तुम खिलाओ.. तो जरूर खा लूँगी।

विनय बोला- आप बताइए.. मैं अभी ला देता हूँ..

जानबूझ कर विनय भी बात बढ़ा कर बात कर रहा था।

मैं अश्लीलता से खुलते हुए बोली- अपना केला खिला दो।

विनय सकपकाते हुए बोला- मेरी दुकान पर केला नहीं बिकता.. रूकिए कहीं और से ले आता हूँ।

मैं बोली- नहीं.. मैं जब भी खाऊँगी.. तो तुम्हारा ही केला ही खाऊँगी।

विनय बोला- क्यों मजाक करती है-मेमसाब.. मेरे पास कहाँ है केला..?

मैं उसको उंगली से बुलाते हुए बोली- जरा यहाँ को आओ.. दिखाती हूँ..।

विनय के करीब आते ही मैंने अपनी जांघों को पूरा खोल दिया और जैसे ही विनय मेरे करीब आया।

मैं बोली- विनय अगर तुम्हारे पास केला निकला.. तो खिलाओगे ना.. वादा करो।

‘वादा मेमसाब.. जरूर खिलाऊँगा..’ वो लजरते हुए स्वर में बोला।

तभी मैंने एक झटके से विनय के मोटे तगड़े और खड़े लण्ड को पकड़ लिया।

‘यह है केला.. अब जल्दी से निकालो और खिलाओ।’

विनय को भी अब चुदास चढ़ गई थी और वो भी नाटक करते हुए बोला- मेमसाब, यह केला मुँह से खाने के लिए नहीं है।

मैंने तुरंत विनय का हाथ पकड़ कर ले जाकर सीधे अपनी गरम चूत पर रख कर दबाते हुए बोली- इसे खिलाना है। अब तो केला खाने की सही जगह है ना..

विनय ने मेरी बुर को चापते हुए कहा- जी मेमसाब.. लेकिन कोई आ गया तो?

मैं सिसियाते स्वर में कराही- आह्ह्ह.. आआ आह्ह्ह्ह.. नहीं विनय कोईई.. नहींई.. आएगा.. तुम इत्मीनान से खिलाओ अपना केला.. यह मेरी चूत इसको आराम से खा लेगी।

‘मेमसाब.. आपको मैं अपना केला जरूर खिलाऊँगा।’

‘क्या तुम मेमसाब मेमसाब.. किए जा रहे हो.. मेरा नाम डॉली है और प्यार से सब रानी भी कहते हैं। तुमको जो अच्छा लगे तुम बुला सकते हो।’

‘जी रानी जी..’ कहते हुए उसने मेरी बुर में उंगली डाल कर एक हाथ से मेरी चूची को पकड़ कर सहलाते हुए खड़ा रहा।

शायद विनय चाह रहा था कि मैं खुद आगे बढूँ..

फिर मैं विनय के सर को पकड़ कर नीचे कर के अपने होंठों पर रख कर एक जोरदार किस करके विनय को अपने दूधों की तरफ ले गई और अपनी चूची के अंगूरों को चूसने के लिए बोली।

विनय मेरी छाती को भींच कर पीते हुए मेरी चूत को अपनी मुठ्ठी भरकर दबाते हुए मेरी चूचियों को पीने में मस्त था।

तभी मैंने विनय के लण्ड को बाहर निकाल लिया, उसका लण्ड बाहर आते ही हवा में झूल गया.. जैसे कोई गदहा अपना लण्ड झुला रहा हो।

विनय का लण्ड देख कर मेरी मुँह में पानी भर आया और मैंने मुँह खोल के विनय के लण्ड को मुँह में भर लिया पर विनय का सुपारा काफी मोटा था.. जो मेरे मुँह में भर गया और मुझे चूसने में दिक्कत हो रही थी।

 
इधर विनय मेरी चूत को सहलाते हुए कभी उंगली अन्दर पेल देता.. कभी मेरी बुर को भींच लेता। मैं विनय के लण्ड की चमड़ी को आगे-पीछे करते हुए पूरे गले तक डाल कर लण्ड को को मुठियाते हुए चूसे जा रही थी।

तभी विनय मेरा मुँह लण्ड से हटाकर सीधे मुझे बिस्तर पर गिरा दिया। उसने मेरी चूत के ऊपर पर मुँह लगा कर पूरी बुर को मुँह में भर लिया। अब उसने बुर को खींचकर चूसते हुए मेरे लहसुन को हल्के-हल्के दांत लगा कर चुसाई करना शुरू कर दिया। इसी के साथ उसने अपना हाथ चूतड़ों पर ले जाकर मेरे गुदा द्वार को सहलाते हुए मेरी बुर की चुसाई करने लगा।

मैं पूरी मस्ती में सिसकारियाँ ‘उफ्फ्फ्फ़ आह सी..’ ले रही थी।

मैं कामुकता से सीत्कार करते हुए बोली- विनय.. अब बस करो.. मेरी बुर में केला पेल दो.. हाय विनय चोदो मुझे.. जितना चाहे चोदो.. अपना पूरा लौड़ा मेरी बुर में पेलो.. आआईईई..

मैं सिसियाते हुए विनए का मुँह अपनी चूत से हटाने लगी और विनय ने भी चूत चुसाई छोड़ कर मुझे दबोच लिया मैंने अपना एक हाथ ले जाकर उसका मूसल लण्ड पकड़ लिया और उसे सहलाते हुए बोली- विनय.. तुम्हारा लण्ड बहुत बड़ा है.. बहुत मोटा है.. लंबा भी खूब है..।

विनय मस्ती से मुझसे चिपका हुआ था, मैं लण्ड को मसलते बोली- उफ्फ्फ्फ़.. यकीन नहीं होता.. इतना मोटा लण्ड मेरी चूत के अन्दर जाने वाला है। उसी पल विनय ने मुझे चूमते हुए मेरी एक टांग को उठा दिया और मैं चूत पर लण्ड लगा कर लण्ड को चूत में घुसने का रास्ता दिखा बैठी।

अगले ही पल एक ही शॉट में विनय ने लण्ड का सुपाड़ा चूत में उतार दिया। मैं उत्तेजना में उसके होंठ चूसने लगी और मैंने अपने पैरों को उसकी कमर पर लपेट दिया। चूचियों को मसलते हुए मैंने अपनी बांहें उसके गले में डाल दीं।

विनय अपने कंधों पर पैर रखवा कर मेरी चूत में लण्ड पेलने लगा, विनय मुझे ठोकने लगा और कस-कस के ठाप पर ठाप लगा कर अपने मोटे लण्ड से मेरी ठुकाई करने लगा।

विनय के लण्ड की मदमस्त चुदाई से मेरी चूत से ‘खचाखच.. फचाफच..’ की आवाज आ रही थी। मेरे मुँह से, ‘ओह्ह्ह.. ऊऊफ़.. आहसीई.. उफ़..’ की आवाजें आने लगीं।

मैं अपनी चूत उठा-उठा कर विनय का लण्ड बुर में लेती जा रही थी।

‘ऊऊफ़आह.. और पेलो.. ऐसे ही.. चोदो.. मुझे.. मैं ऐसे मोटे लण्ड से चुदने के लिए तड़फ रही हूँ.. आईईईई सीऊऊह सीईईई आह ऊफ़्फ़्फ़.. चोद.. पेल.. मार साले मेरी चूत…’

विनय कस-कस कर अपना लौड़ा डाल कर मेरी चूत को चोद रहा था और मैं अपनी चूत उसके लण्ड पर उछाल-उछाल कर चुदवाती रही।

विनय पूरा ज़ोर लगा कर धक्के पर धक्के लगाता हुआ पूरा लण्ड चूत में जड़ तक डाल रहा था वो मेरी जबरदस्त चुदाई कर रहा था और मैं सिसकारी लेते हुए बुर चुदवाती जा रही थी।

‘आहसीई.. आउउई.. फाड़ दो.. मेरी चूत.. मसक दो मेरे बोबों को.. और रगड़ कर पेल मेरे राजा.. वाह इसे कहते हैं चुदाई.. चूत के राजा.. मेरी चूत के मैदान में दिखा मर्दागनी.. आआह्ह्ह.. म्म्म्म म्म्मार.. चूतत.. मेरे राजजा.. डालल.. पेलल.. आहसीई… ऊईई.. मैं गई.. मेरे राजा.. लगा धक्का.. कस कस.. कर पेल साले.. मार चूत आआ.. मेरीरी.. सासाली.. चूत.. आह आउइ उउउइ..’ कहते हुए मैंने विनय से चिपकते हुए पानी छोड़ दिया।

‘आह जान.. मैं झड़ रही हूँ.. मेरे सैयां मैं बारी तेरे लण्ड पर.. तेरी बाँहों पर.. पेल दे लण्ड.. मेरी बच्चेदानी तक.. आहहह सी..’

मैं विनय को कस के पकड़ कर झड़ रही थी और विनय मेरी झड़ी हुई चूत पर धक्के पर धक्के लगाते हुए काफी देर तक मुझे रौंदता रहा। मेरी चूत में लण्ड जड़ तक चांप कर झड़ने लगा और मुझको पूरी तरह अपनी बाँहों में कसकर दाब के.. लण्ड से वीर्य की धार छोड़ कर झड़ने लगा। हम दोनों एक-दूसरे को बाँहों में लिए काफी देर तक पड़े रहे।

दोस्तो.. विनय की चुदाई से मेरे तन-मन को बड़ी राहत मिली थी, मैं उसके लण्ड पर फ़िदा हो गई थी।

उस शाम जय मुझे एक फाईव स्टार होटल में ले गया।

वहाँ दो विदेशी बाबूराव मेरी चूत की चुदाई के लिए अपने लण्ड को तैयार कर रहे थे।

मैं जय के साथ मिनी स्कर्ट और टॉप में जैसे ही उनके कमरे में पहुँची.. वो विदेशी मुझे देखते ही लार टपकाने लगे।

तभी उसमें से एक ने मुझे जय के सामने ही खींच कर अपनी जाँघ पर बैठा लिया और एक हाथ से चूची और एक हाथ चूत पर ले जाकर बोला- वाऊ.. वंडरफुल जय.. क्या माल लाए हो।

उसी वक्त दूसरे ने जय की तरफ एक नोट की गड्डी उछाल कर कहा- प्लीज गो आउट।

मैं बस जय को ही देख रही थी और जय मुझे भूखे भेड़ियों में छोड़ कर चला गया।

उनमें से एक का नाम चार्ली था और दूसरे का नाम रिची था।

जय के जाते ही चार्ली मुझ पर टूट पड़ा। एक तो पहले से ही मुझे रिची अपनी बाँहों में दबोच कर मेरी चूचियाँ मसल रहा था.. उस पर चार्ली का भूखे भेड़िये सा टूटना.. मैं तो डर ही गई।

तभी चार्ली मेरे होंठों को अपने दाँतों से दबाकर काट कर चूसने लगा और मैं दर्द से बिलबिला उठी।

मेरे जिस्म को नोंचने- खसोटने की मानो कोई प्रतियोगिता चल रही हो, कभी मुझे रिची अपनी तरफ खींचकर मेरी चूची मसकता.. और कभी चार्ली मुझे भंभोड़ता।

मैं तो बस छटपटा कर रह जाती और मैं कर भी क्या सकती थी।

दोनों में रहम नाम की चीज ही नहीं थी, मेरा जिस्म उन्हें केवल एक भोगने कि वस्तु दिख रही थी।

चार्ली ने मुझे चूमते-काटते हुए एकाएक मेरी स्कर्ट को खींच कर फाड़ दिया और दूर फेंक दिया। रिची भी कहाँ पीछे रहता.. उसने भी मेरे टॉप को बिल्कुल खींचते-फाड़ते हुए मेरे जिस्म से अलग कर दिया।

उन दोनों को देख कर लग रहा था कि जैसे उन्हें ऐसा करने में बहुत ख़ुशी मिल रही हो.. पर मुझे लग रहा था अब कपड़ों को फाड़ने के बाद मुझे ही फाड़ने का नम्बर है।

इसी तरह अभी ये दोनों मुझे नोंच-खसोट कर मेरी चूत और जिस्म की धज्जियाँ उड़ाने वाले हैं।

मेरे जिस्म पर बचे-खुचे ब्रा और पैन्टी को भी फाड़कर फेंक दिया गया।

एक ने मेरी चूत को मुँह में भर लिया और एक ने मेरी चूची को..

मैं डरते हुए बोली- मैं कैसे जाऊँगी.. आप लोगों ने तो मेरे कपड़े ही फाड़ दिए।

उन दोनों ने कहा- पहले चुदाई करा.. फिर जाने की सोचना..

ये सब बातें इंग्लिश में ही हो रही थीं, उन लोगों को हिन्दी कहाँ आती थी।

 
चार्ली मेरे चुचों को चूसते हुए कभी निप्पलों को ज़ोर से दबाता या कभी दोनों चुचों को एक साथ पकड़ के ज़ोर से हिलाने लगता। नीचे मेरी चूत को रिची मुँह में भरकर चूसते हुए काट लेता, कभी वो जाँघ को.. तो कभी चूत को काट रहा था.. और ऊपर चार्ली मेरी चूची.. पेट को बुरी तरह काट और नोंच रहा था।

मुझे मजा आने की जगह दर्द हो रहा था, मैंने चिल्लाते हुए कहा- प्लीज.. बंद करो ये खेल.. प्लीज़ मैं मर जाऊँगी.. प्लीज़ अहह… सिसि.. द..दर्द हो रहा है।

लेकिन चार्ली और रिची को जैसे सुनाई ही नहीं दे रहा था, चार्ली मेरे चुचों से होते हुए गरदन को चूमते हुए मेरे होंठों को मुँह में लेकर चूसने लगा, उसने मेरी चूचियाँ मसकते हुए दाँतों से कसकर मेरे होंठ को काट लिया।

मैं दर्द से सीत्कार कर उठी- आहह आ..

मैंने दर्द की अधिकता से उसका मुँह पकड़ कर अपने होंठों से हटा दिया.. तो उसने मेरे निप्पलों को काट लिया।

मैं जोर से चीख पड़ी- अहहह..आहसीई.. प्लीज़ मुझे दर्द हो रहा है.. प्लीज़ समझने की कोशिश करो.. आह प्लीज़ अहहहह..

फिर वो मुझे छोड़ कर खड़ा होकर अपने कपड़े खोलने लगा।

इधर रिची मेरी चूत की चटाई चालू रखे हुए था, रिची की चूत चुसाई से मुझे थोड़ा मजा आ रहा था।

तभी मेरा ध्यान चार्ली पर गया, चार्ली ने अपनी पैंट खोली और उसे उतार कर फेंक दी। जैसे ही चार्ली ने अपना अंडरवियर नीचे किया.. मैंने चार्ली का लण्ड देखा, मेरी आँखें खुली की खुली रह गईं, मैं पलक झपकाना भूलकर चार्ली का लण्ड देख रही थी। चार्ली का लण्ड स्प्रिंग की तरह बाहर निकल कर लटक रहा था।

मैं देख कर हैरान थी। उसका लंड कम से कम 9 इंच का तो था। एकदम गोरा.. और मोटा लंड निकाल कर वो मेरी तरफ बढ़ा। वो मेरे नजदीक आकर अपने लण्ड को मेरे होंठों पर फिराने लगा.. और मैंने भी मस्त होकर लण्ड को देख कर चार्ली का लण्ड मुँह में ले लिया।

उधर नीचे रिची भी चुसाई बंद करके अपने कपड़े उतार कर अपने लण्ड को मेरी चूत में रगड़ने लगा।

तभी मेरा ध्यान रिची के लण्ड पर गया। जैसे दोनों के जुड़वां लण्ड हों.. एक सी ही बराबरी के मोटे.. लम्बे.. दोनों लण्ड को देखकर मेरी बुर पानी छोड़ने लगी।

उसके बाद क्या बताऊँ दोस्तो.. रिची ने अपना लंड मेरी चूत पर लगा दिया। उसका मोटा लंड देखकर तो मैं हैरान हो गई थी। बड़ा ही जबरदस्त लण्ड मेरी चूत पर टिका हुआ था।

एक मेरे मुँह में घुसा था। फिर रिची ने दो-तीन बार लंड को मेरी चूत पर रगड़ कर एकदम से जोर से धक्का लगा दिया। उसका पूरा हलब्बी लंड मेरी चूत में समाता चला गया।

मेरे मुँह से आवाज निकली- आह्ह्ह्हह्ह सीई..

मैंने दर्द सहते हुए कसकर दाँतों को जकड़ लिया.. और मेरे मुँह के अन्दर चार्ली का लण्ड था.. जिस पर मेरे दाँत लग गए। चार्ली कसकर चिल्लाया।

चार्ली के लण्ड का ध्यान आते ही मैंने मुँह खोल दिया।

फिर चार्ली मुझे गाली देते हुए लण्ड को मेरे गले तक डाल कर मेरे मुँह में आगे-पीछे करने लगा।

उधर रिची तेज-तेज धक्के पर धक्के लगा कर लंड को मेरी चूत में पेल रहा था। इधर चार्ली मेरी चूचियों को दबाते हुए मेरे मुँह में अपना लण्ड ठोक रहा था। रिची मेरे चूतड़ों को पकड़ कर जोर-जोर से धक्के दे रहा था। मैं लण्ड चूसते हुए चुदवाती रही और रिची चोदता रहा। फिर मेरी चूत ने अचानक पानी छोड़ दिया।

रिची के लण्ड के हर धक्के का स्वागत करते हुए मैं बड़ी जोर से चुदवा रही थी, ‘फचफच..’ लंड अन्दर-बाहर हो रहा था।

मेरी चूत रिची के हर शॉट पर मेरे मुँह से आवाज निकालने लगी ‘अहह.. अह्ह्ह सीसीईईई आहहह.. की मदमस्त आवाज मेरे मुँह से निकलने लगी।

‘आआहआसी.. सी..सीआह..’ करके मैं चुद रही थी और चार्ली का लण्ड भी चूस रही थी। दोनों तरफ के मजे पाकर मैं झड़ने लगी और रिची भी मेरी झड़ती चूत पर धक्कों की रफ्तार तेज करके मेरी चूत में पानी निकाल कर शान्त हो गया।

अभी तो चुदाई शुरू हुई थी पूरी रात मेरी चूत की धज्जियाँ उड़ने वाली थीं।

रिची के गर्म वीर्य को चूत में लिए हुए चार्ली के लण्ड को चूस रही थी, कभी सुपारे को तो.. कभी चार्ली के अंडकोषों को मुँह से चूस रही थी, चार्ली मेरी चूचियाँ मींज रहा था।

रिची मेरी चूत से लण्ड खींच कर नीचे उतर गया और तभी चार्ली मेरी चूची व पेट को सहलाते हुए अपना हाथ मेरी चूत की तरफ ले जा गया, वो मेरी चूत को सहलाते हुए लण्ड चुसवाता जा रहा था।

रिची के वीर्य से भरी हुई चूत को मींजते हुए चूत में दो उंगली डाल कर चूत मसकते हुए चार्ली भी मेरे मुँह में पानी छोड़ने लगा.. उसने अपने सारे वीर्य को मेरे मुँह में डाल दिया और लण्ड को मेरे होंठों से नीचे तक मेरी चूचियों पर रगड़ने लगा।

मैं चार्ली के लण्ड से निकले हुए पानी को गटक गई। उन दोनों मुझे उसी हालत में लेकर बिस्तर पर अगल-बगल लेट गए। मेरी बुर से अभी भी रिची के लण्ड का पानी बह रहा था और मुँह में होंठों पर थोड़ा बहुत चार्ली का वीर्य लगा था। मेरे शरीर पर काटने के निशान दिख रहे थे। मेरे साथ हुई बेदर्द चुदाई से मैं बिल्कुल थक गई थी.. पर अभी वो दोनों वैसे ही भूखे दिख रहे थे।

काफी देर रिची और चार्ली की बाँहों में पड़ी रही, जितनी देर रही.. दोनों ने एक भी पल के लिए मेरे शरीर को राहत नहीं लेने दी। रिची और चार्ली के हाथ मेरे पूरे बदन पर चूत पर.. चूची.. चूतड़.. हर जगह फिर रहे थे।

रिची और चार्ली ने मेरा हाथ पकड़ कर अपने लण्ड पर रख दिया।

एक बार फिर दोनों के लण्ड मेरी चुदाई करने के लिए पूरे तैयार थे। उसी पल चार्ली मुझे घोड़ी बना कर मेरे पीछे से चूतड़ों को और पीठ को चूमने लगा, पूरे चूतड़ और छेद के साथ रिची के वीर्य से सनी चूत को चार्ली चाटते हुए मेरी गाण्ड मारने की तैयारी कर रहा था।

 
उधर रिची मेरे मुँह के करीब खड़े होकर पहले मेरे होंठों को कुछ देर किस करने लगा। इसके बाद उसने चूत के रज और वीर्य से सने लण्ड को मेरे होंठों पर रगड़ते हुए चूसने का मुझे इशारा किया।

मैं अपने मुँह में रिची के लण्ड को लेकर चूसने लगी, रिची मेरे गले तक लण्ड ले जाकर मुझे लण्ड चुसवा रहा था।

मेरा ध्यान चार्ली की तरफ तब गया.. जब चार्ली का बाबूराव मेरी गाण्ड को चौड़ा करने के लिए जोर लगा रहा था।

मेरी गाण्ड इतने मोटे लण्ड को झेल नहीं पाएगी इसलिए मैंने चार्ली के लण्ड को गाण्ड से हटा कर चूत की तरफ कर दिया।

चार्ली तो पहले से जोर लगा रहा था और एक तो चूत पहले से रिची के लण्ड के पानी से चिकनी थी। चार्ली का लौड़ा ‘सपाक’ की आवाज के साथ पूरा चूत में समा गया और मैं दर्द से बिलबिला कर दोहरी हो उठी।

पर आराम के बजाए मेरी और शामत आ गई।

इधर रिची का लण्ड मेरे पूरे हलक में चला गया जिससे मुझे उबकाई और सांस लेने में दिक्कत होने लगी।

जैसे ही मैंने बाहर उबकाई करना चाही.. रिची ने मेरा सर पकड़ कर मेरे हलक में बाबूराव पेल कर धक्के मारने शुरू कर दिए।

उधर नीचे चार्ली के लण्ड का निशाना चूकने की सजा मिलने लगी।

चार्ली ने लण्ड को बुर से खींच कर मेरी गाण्ड के छेद पर लगा कर कस कर मेरे नितम्ब पकड़ कर मुझे बिना सम्भलने का मौका दिए.. एक जोरदार शॉट लगा दिया।

चार्ली का मोटा लम्बा लण्ड मेरी गाण्ड को चीरता हुआ तीन-चौथाई हिस्सा अन्दर दाखिल हो गया।

मैंने चिल्लाना चाहा.. पर रिची के लण्ड के हलक में होने की वजह से आवाज नहीं निकाल पाई, दर्द से मेरी आँखों में आँसू निकल रहे थे.. पर रिची और चार्ली कोई रहम नहीं दिखा रहे थे।

बस मेरे मुँह से ‘गूंगूं गूंगूं..’ की हल्की आवाज बाहर आ रही थी।

रिची और चार्ली एक साथ दोनों तरफ से मुझे बजा रहे थे।

मेरी गाण्ड फट गई थी.. पर चार्ली मेरी गाण्ड मारने में कोई कसर नहीं कर रहा था, साला खींच-खींच कर मेरी गाण्ड पर शॉट पर शॉट लगाए जा रहा था, कमरे में चार्ली के लण्ड का लग रहा हर शॉट.. कमरे में गूंज रहा था ‘सट.. सट.. चट.. सट.. सट..’

मैं बस रिची के लण्ड का दर्द सहते हुए चूस रही थी.. चूसना कहना बेमानी होगा रिची मेरे मुँह को चोद रहा था।

मैं बेबस थी.. कुछ नहीं कर सकती थी, बस कामना कर रही थी कि किसी तरह ये दोनों झड़ जाएँ, करीब दस-बारह धक्के मेरे हलक में लगा कर रिची ने अपना लण्ड पूरी तरह हलक में ठोक दिया।

अब वो ‘आहआह.. सीसीईआह..’ कर झड़ने लगा।

पीछे चार्ली मेरी गाण्ड की चुदाई किए जा रहा था, चार्ली की गाण्ड मराई से मेरी मेरी गाण्ड का छेद सुन्न हो गया था।

चार्ली का लण्ड कितनी बार.. और कितनी तेजी से अन्दर जा रहा था। मुझे पता ही नहीं चल रहा था। रिची का लण्ड जब मुँह से निकला.. तो थोड़ी राहत मिली।

मेरा मुँह दर्द से दु:ख रहा था। मैं अपना मुँह बिस्तर पर रख कर चार्ली का लण्ड गाण्ड में लेती जा रही थी। बस अपने मुँह से चार्ली के हर धक्के पर ‘आह ऊऊऊईई आह..’ कर रही थी। चार्ली भी कस-कस कर ना जाने कितनी देर तक गाली देते हुए मेरी गाण्ड मारता रहा।

मुझे तब पता चला.. जब चार्ली एक तेज शॉट मार कर लण्ड को गाण्ड की जड़ तक चांप कर औंधे मुँह मुझे लेकर बिस्तर पर गिर पड़ा। चार्ली ने मेरे ऊपर लदे रहते हुए अपना सारा वीर्य मेरी गाण्ड में छोड़ दिया।

वो अब हाँफते हुए मुझे कस कर जकड़े हुए पड़ा रहा।

उधर रिची सोफे पर नंगे ही बैठ कर मुझे और चार्ली को देख रहा था। रिची का लण्ड ढीला होकर गदहे के बाबूराव की तरह झूल रहा था। चार्ली का लण्ड अभी भी मेरी गाण्ड में ही घुसा था।

पूरी रात इसी तरह कई बार मेरी कभी गाण्ड और मुँह.. चूत चुदती रही।

सुबह तक मेरे शरीर में मानो जान ही नहीं रह गई थी, मैं बिस्तर पर वैसे ही बेहोशी की हालत में नंगी पड़ी थी।

शायद रिची या चार्ली में से किसी ने जय को फोन करके बोल दिया था, जय आया मुझे बाथरूम ले जाकर फ्रेश करवाया।

अब मुझ में हल्की सी जान आई, मैं बोली- जय मेरे कपड़े फट गए हैं।

तभी रिची की आवाज सुनाई दी- रानी हम लोग ऐसे ही चोदते हैं इसीलिए मैंने तुम्हारे लिए कपड़े ले लिए थे।

फिर जय ने मुझे कपड़े पहनाए और चाय पीकर निकल लिए।

जय मुझे होटल से लेकर सीधे कमरे पर पहुँचे और मैं सीधे जा कर बिस्तर पर लेट गई। रात भर उन दोनों ने मेरी जमकर चूत का मर्दन और चुदाई करके शरीर के पोर-पोर को दुखा कर रख दिया था।

मेरी चूत को और मुझे.. आराम की सख्त जरूरत थी।

जब मैं कमरे पर पहुँची.. उस वक्त मेरे ह्ज्बेंड नहीं थे.. शायद बाहर नाश्ता करने गए हुए थे। जय मेरे पास ही बिस्तर पर बैठ कर बोले- थक गई हो रानी.. कल सालों ने जमकर चूत मारी है क्या?

मैंने कहा- सालों ने चूत ही नहीं.. पिछवाड़ा.. मुँह.. यानि हर छेद को जम कर मारा है.. और आप भी तो भूखे दरिन्दों के बीच छोड़ कर चले गए थे।

जय सिर्फ मुस्कुरा दिए।

मैं बोली- आप को हँसी आ रही है.. वो तो मुझे पता है कैसे मैंने झेला है।

तभी कमरे में ह्ज्बेंड आ गए.. आते ही वे बोले- अरे आ गए आप लोग.. मैं जरा नीचे चला गया था।

जय बोला- रंगीला जी आज आप मेरे साथ चलो.. शाम तक आ जायेंगे.. और आज डॉली को आराम करने दो.. वो काफी थक गई है। रंगीला ने सहमति में सर हिलाया।

‘डॉली जी.. मैं जाते वक्त नीचे दुकान से खाना नाश्ता भेजता जाऊँगा.. और भी कोई काम जो जरूरत का होगा.. सब कमरे में ही आ जाएगा। आपको कहीं जाना नहीं है.. आप बस आराम कीजिएगा।’

कुछ देर बाद जय और ह्ज्बेंड चले गए उनके जाने के बाद वही लड़का.. जिसने मुझे चोदा था.. आया और ‘नमस्ते’ कह कर बोला- नाश्ता लाया हूँ.. आप खा लीजिए..

मैंने उसे अपने पास बैठाया और बोली- विनय.. मेरे बदन में बहुत दर्द है.. तुम दोपहर में गरम तेल से मेरी मालिश कर देना।

विनय बोला- जी मैडम..

और वो चला गया।

 
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