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मैं और मेरी बहू compleet

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गतान्क से आगे......

हनिमून का पाँचवाँ दिन

दूसरे दिन सुबह मेरी आँख खुली तो मुझे बहोत अछा लग रहा था. पिछली रात मेने काफ़ी एंजाय किया था और अपने आप पर कंट्रोल रखा था. तभी मुझे एहसास हुआ कि मैं बिस्तर पर अकेली हूँ. मेने नज़रे घुमा दूसरे बिस्तर पर देखा कि रवि मेरे बेटे राज और उसकी पत्नी और मेरी बहू रश्मि के साथ था. रश्मि रवि के उपर लेट उसे चोद रही थी और पीछे से राज उसकी गंद मार रहा था.

मैं सोचने लगी कैसी बच्चे है, कभी सेक्स से थकते ही नही. में बिस्तर से उत्तरी और नहाने चली गयी, जबकि वो तीनो अभी भी बिस्तर मे ही थे. मैं शवर के नीचे गरम पानी का मज़ा ले रही थी कि रश्मि बाथरूम मे आ गयी और मेरे साथ ही नहाने लगी.

"मेरी चूत और गंद मे इतना वीर्य भरा हुआ है, मेरी समझ मे नही आता कि रवि के लंड मे इतना वीर्य आता कहाँ से है, शायद उसने कोई वीर्य बनाने की मशीन लगा रखी है." रश्मि हंसते हुए बोली.

"हां सही मे उसके शरीर की ताक़त कमाल की है." मेने कहा.

रश्मि ने अपनी चूत और गंद से वीर्य अछी तरह धोया. हम साथ ही शवर के नीचे नहा रहे थे रश्मि ने अपना ध्यान मेरी ओर किया और मेरे शरीर पर साबुन मलने लगी.

"क्यों ना हम एक दूसरे के शरीर पर साबुन लगाए." रश्मि ने कहा.

मैं उसके शरीर पर साबुन लगाने लगी और रश्मि साबुन लगाते हुए अपने हाथ मेरे पूरे शरीर पर फिराने लगी. में उत्तेजित हो रही थी पर मैने रश्मि को रोक दिया, "रश्मि अभी रहने दो अभी तो पूरा दिन पड़ा है."

रश्मि मेरी बात मान गयी और हम दोनो नहा कर बाहर आ गये. रवि और राज ने भी स्नान कर लिया और हम कपड़े पहन नीचे नाश्ता करने आ गये.

आज हमे काफ़ी देर हो गयी थी नीचे आते आते सो मेने कहा, "क्यों ना आज हेवी नाश्ता कर लिया जाए और खाने की छुट्टी कर दी जाए. थोड़ी देर मे प्रिया राजेश कंचन और बॉब्बी भी आ गये और हमारी टेबल पर बैठ गये.

खाने के बाद हम सब घूमने निकल गये. घूमते हुए भी चर्चा का विषय चुदाई ही था. प्रिया और कंचन ने बताया कि रश्मि के साथ सेक्स करते हुए कितना मज़ा आया. इसके पहले उन्होने कभी किसी औरत के साथ चुदाई नही की थी. फिर राजेश और बॉब्बी ने बताया कि किस तरह उन्होने रश्मि की गंद मारी. दोनो ने अपनी जिंदगी मे पहली बार किसी की गंद मारी थी.

"ओह तो तुम दोनो का गंद मारने का ये पहला मौका था. फिर तो इसके लिए तुम्हे रश्मि का शुक्रिया अदा करना चाहिए." रवि ने कहा.

दोनो ने रश्मि का शुक्रिया अदा किया तो रश्मि ने झुक कर उनका अभिवादन किया. फिर प्रिया ने बताया कि किस तरह सुबह वो और कंचन ने 69 की अवस्था मे लेट एक दूसरे की चूत चूसी.

"देखा मेने पहले ही कहा था कि तुम दोनो को मज़ा आएगा. आज से अदला बदली मे एक नई चीज़ जुड़ गयी तुम दोनो के साथ." रश्मि बोली, "तुममे से अगर कोई मेरी चूत चूसना चाहता है तो में हमेशा तय्यार हूँ, मुझे बता देना."

प्रिया और रश्मि दोनो शर्मा गयी, प्रिया बोली, "अभी नही बाद मे देखते है."

वो चारों की इस बात मे ज़्यादा दिलचस्पी थी कि हम साथ साथ कैसे हुए कि साथ मे सफ़र कर रहे है और एक दूसरे के साथ चुदाई कर रहे है. मेने रवि, राज और रश्मि की तरफ देखा कि कहाँ से शुरू किया जाए.

राज बीच मे टपकता बोला, "में आपलोगों को हमारी कॉलेज की दिनो से बताता हूँ."

राज ने उन्हे माला, रवि और अपने रिश्ते के बारे मे बताया. फिर किस तरह रश्मि से उसकी पहचान हुई और रवि उनके साथ हो लिया. उसने इतनी बारीकी से अपने रश्मि और रवि के रिश्ते के बारे मे बताया कि में भी हैरान रह गयी.

उसने बताया कि किस तरह रवि उसकी गंद मारता था और रश्मि उसके लंड को अपने मुँह मे ले चूस्ति थी. फिर वो रवि की गंद मारता था और रश्मि अपनी कमर पर डिल्डो बाँध उसकी गंद मारती थी.

रश्मि बीच उछलते हुए बोली कि उस किस तरह दो या तीन लंड से साथ साथ चुदाई करने मे मज़ा आता था. उसने बाते की उसने और राज ने शादी के पहले ही सोच लिया था कि किसी चौथे इंसान को हनिमून पर साथ ले चलेंगे.

उसने बताया कि फिर जब प्रीति हमारे साथ खुल गयी तो किसी और को साथ लाने का सवाल ही नही उठता था.

प्रिया, कंचन, राजेश और बॉब्बी के मुँह से एक शब्द ना निकला, वो रवि राज और रश्मि की कहानी सुनते रहे. चारों अचंभित मुद्रा मे उनकी बात सुन रहे थे, फिर बॉब्बी बोला, "मुझे मालूम था कि तुम लोग सामूहिक चुदाई करते हो पर तुम्हारी चुदाई का अंदाज़ इतना भयंकर होगा ये नही मालूम था."

बॉब्बी कुछ देर शांत रहा फिर राज से पूछा, "क्या तुम्हे सही मे लंड चूसने और गंद मरवाने मे मज़ा आता है?"

"हां ये सब मुझे अछा लगता है," राज ने जवाब दिया फिर उनसे पूछा, "क्या तुम दोनो ने कभी किसी मर्द के साथ चुदाई की है, मेरा मतलब किसी का लंड चूसा हो या गंद मारी हो. क्यों ना करके एक बार इसका भी अनुभव ले लेते हो."

राजेश और बॉब्बी एक दूसरे को अजीब सी नज़रों से देखते रहे फिर राजेश बोला, "मेने कभी इस विषय पर सोचा नही है ना ही मुझे कभी ऐसा मौका लगा."

"मेने भी कभी नही सोचा आज तक." बॉब्बी भी बोला.

"एक बार कोशिश करके देखना चाहिए." रवि ने कहा, "और में दावे के साथ कहता हूँ कि तुम दोनो को मज़ा आएगा."

"हां तुम लोगों को एक बार आजमाना चाहिए और तुम लोगो को देख कर तो ऐसा लगता है कि तुम अभी से तय्यार हो." रश्मि ने कहा.

रश्मि की बात सही थी. राजेश और बॉब्बी के लंड पॅंट के अंदर खड़े हो गये थे. इतनी सब सेक्सी बातों ने उन्हे उत्तेजित कर दिया था पर वो अब भी सॅमलिंग चुदाई के लिए तय्यार नही थे. दोनो ने शर्मा कर अपने हाथ पॅंट के उपर रख लिए जिससे उनका खड़ा लंड दिखाई ना दे.

प्रिया ने बातचीत के विषय को बदलते हुए मुझसे पूछा कि मैं किस तरह रवि रश्मि और अपने बेटे के साथ जुड़ गयी.

मेने उन तीनो को बताया कि किस तरह मेने चुप कर राज को रवि का लंड चूस्ते देखा फिर रवि ने राज की गंद मारी. दूसरी बार मेने रश्मि को इनके साथ सामूहिक चुदाई करते देखा. फिर मेने दोनो को रश्मि को साथ साथ चूत और गंद मे चोद्ते देखा.

"हे भगवान प्रीति, तुम किस तरह अपने आपको ये सब नज़ारा देख कर रोक पाई, मैं होती तो उसी वक़्त उनके साथ हो जाती." प्रिया ने कहा.

"हां मेने अपने आप पर काबू रखा कारण मैं अपने ही बेट एके सामने शर्मिंदा नही होना चाहती थी, मेने सोच लिया था कि चुप रह कर बाद में अपने कमरे मे मुठिया लूँगी." मेने जवाब दिया.

"हां पर वो इतना भी शांत नही खड़ी थी, मेने इसे हमे देखते पकड़ लिए था." रवि ने कहा.

फिर मेने अपनी कहानी जारी रखते हुए सबको बताया कि किस तरह एक दिन रवि ने मुझे बहका लिया. फिर मेने बताया कि किस तरह पहले तो रश्मि हमारे साथ शामिल हो गयी और एक दिन मेरी उत्तेजना और मदहोशी का फ़ायदा उठाते हुए मेरे बेटे राज को भी इसमे शामिल कर लिया.

मेने बाते की किस तरह की किस तरह उस दिन मेरे बेटे ने मेरी गंद मारी जब रश्मि मेरी चूत चूस रही थी, और रवि मेरे मुँह को चोद रहा था. फिर मेने उन्हे अपनी दोहरी चुदाई के बारे में बताया कि किस तरह रवि ने मेरी चूत मे लंड डाला था और राज ने मेरी गंद मे.

"जब एक बार में इन तीनो के साथ चुदाई कर चुकी थी, तो हम सब बराबर साथ साथ मे चुदाई करने लगे. फिर जब राज ने मुझे अपने हनिमून पर साथ चलने को कहा तो में मान गयी, आगे की कहानी आप सबको मालूम ही है." मैने अपनी बात समाप्त करते हुए कहा.

"यार ये हक़ीक़त है या कोई कहानी, मुझसे तो अपना लंड संभाले नही जा रहा." राजेश अपने लंड को सहलाते हुए बोला.

"मेरी भी हालत कुछ ऐसी ही है." बॉब्बी भी बोला.

"अगर ऐसी बात है तो में तुम्हारी मदद कर सकता हूँ, चलो होटेल वापस चलते है." राज ने कहा.

"मान जाओ तुम दोनो," रवि ने कहा, "और ये दावा है तुम दोनो पछताओगे नही."

"हां तुम दोनो मान क्यों नही जाते," प्रिया ने उन्हे उकसाया.

 
राजेश और बॉब्बी दोनो दुविधा मे थे कि माने की ना माने. ये सही था कि दोनो का मर्द के साथ चुदाई करने का पहला अवसर था पर वो दोनो इतने ज़्यादा गरमा चुके थे कि ना नही कर पाए. दोनो होटेल वापस जाने को तय्यार हो गये.

"में ये नज़ारा अपनी आँखों से देखना चाहती हूँ." प्रिया उछलते हुए बोली.

हम सब लोग होटेल वापस आगाये. में रवि और रश्मि नीचे लॉन मे ही बैठ गये और वो सब कमरे की ओर बढ़ गये. अभी तक कंचन ने कोई प्रतिक्रिया नही जताई थी पर वो भी प्रिया की पीछे पीछे हो ली.

करीब एक घंटे के बाद सब लौट कर लॉन मे आ गये. मेने देखा कि राजेश और बॉब्बी के चेहरे पर एक अजीब सी चमक थी और राज धीरे धरिए मुकुरा रहा था. प्रिया और कंचन का चेहरा उत्तेजना मे लाल हो रहा था.

"कहो कैसा रहा?" रवि ने दोनो से पूछा.

राजेश और बॉब्बी के मुँह से कोई बोल नही फूटा पर राज ने कहा, "माज़ा आ गया, राजेश ने मेरी गांद मारी और मेने बॉब्बी का लंड चूमा. दोनो ने मुझे वीर्य से भर दिया, अब में ज़रा स्विम्मिंग पूल मे स्नान करके आता हूँ." कहकर राज स्विम्मिंग पूल की ओर बढ़ गया.

फिर प्रिया कहने लगी, "तीन मर्दो को साथ साथ चुदाई करते देखने का मेरा पहला अवसर था. ऐसी चुदाई मेने कभी नही देखी, तब से मेरी चूत मे अंगार लगी हुई है."

"मेरी भी ऐसी ही हालात हो रही है," कंचन भी बोली, "सही मे इन तीनो देख मे इतनी उत्तेजित हो गयी हूँ. राज एक दम लड़की जैसा लगता है जब उसका लंड नही दिखता."

"तुम्हारा क्या हाल है प्रीति, लगता है कि तुम सिर्फ़ सोच कर ही गीली हो गयी हो." रवि ने कहा.

"हां मेरी हालत भी कुछ ऐसी ही है, कमरे मे पहुँच कंचन को कहूँगी के मेरी चूत की आग ठंडा कर दे." मेने जवाब दिया.

"हाआँ ये तुम्हारे लिए अछा रहेगा." रवि हंसते हुए बोला.

"तो दोस्तों ऐसा लगता है कि तुम दोनो की सामूहिक चुदाई की झिझक अब दूर हो गयी है." रवि ने राजेश और बॉब्बी से पूछा.

राजेश ने जवाब दिया, "तुम्हारा कहना सही है रवि. राज काफ़ी अनुभवी है इस मामले में. उसे लंड चूसना कितनी अछी तरह से आता है, और जब में उसकी गंद मार रहा था मुझे ऐसा लगा कि में किसी लड़की की गंद मे लंड घुसाए हुए हूँ, वो ठीक एक औरत की तरह मेरे लंड को अपनी गंद की मांसपेशियों मे जाकड़ मेरे लंड को पूरा निचोड़ लिया."

इन सब बातों ने मुझे काफ़ी उत्तेजित कर दिया था. मेने कंचन की तरफ देखा और कहा, "कंचन चलो कमरे मे चलते है."

शायद कंचन का ध्यान कही और था, वो मेरी बात सुनकर चौंक पड़ी. वो खड़ी हो गयी और एक बार अपने पति की ओर देखा जैसे की उसकी अगया लेना चाहती हो, "ठीक है चलो." कहकर वो मेरे साथ हो ली.

कमरे मे पहुँचते ही हम दोनो ने अपने कपड़े उतारे और नंगे होकर बिस्तर पर लेट गये.

"तुम पहले चूत चूसवाना चाहोगी या तुम मेरी चूत पहले चूसना चाहोगी?" मेने उससे पूछा.

"नही मे पहले तुम्हारी चूत चूसूंगई, में तुम्हारे जितनी गरम नही हूँ अभी, तुम्हारी चूत चूस करफ्री हो जाउ." कंचन ने जवाब दिया.

में पीठ के बल होकर अपनी टाँगे फैला दी. कंचन मेरी टाँगो के बीच आ गयी और मेरी चूत पर हाथ फिराने लगी. में अपनी उत्तेजना को बड़ी मुश्किल से रोक पा रही थी, मेने महसूस किया की कंचन मेरी चूत को छेड़ मुझे चिढ़ा रही है. मेने कंचन को खींच कर अपनी चूत पर उसके मुँह को रखना चाहा पर जैसे कंचन को मेरी उत्तेजना की कोई परवाह नही थी, वो अपने हिसाब से मेरी चूत से खेलती रही.

मेने ज़ोर लगाकर अपनी चूत उसके मुँह पर रख दी. में चाहती थी कि ये मासूम सी दिखने वाली लड़की मेरी चूत की गहराइयों को अपनी जीब से नापे. मेरी चूत को अछी तरह से चाते और मेरे पानी को पी जाए.

कंचन भी अब अपनी उत्सुकता नही रोक पाई और अपनी जीब से मेरी चूत के चारों और चाटने लगी. फिर उसने मेरे कुल्हों को पकड़ कर थोड़ा फैला दिया और अपनी जीब को मेरी गंद के छेद पर घुमाने लगी. वहाँ से चाटते हुए जब वो मेरी चूत तक आकर उसे चट्टी तो एक अजीब सी सिरहन और उत्तेजना मेरे शरीर मे दौड़ जाती.

"ऑश कनककचन हाआँ ऐसे ही चॅटो बहोत माअज़ा एयेए रहा है." में उसे उत्तसाहित करते हुए सिसकने लगी.

कंचन अपनी प्यारी जीब से मेरी चूत को चाते जा रही थी. में भी उत्तेजना अपने कूल्हे उठा अपनी चूत को उसके मुँह पर दबा दी. अचानक कंचन अपनी एक उंगली मेरी चूत मे डाल अंदर बाहर करने लगी.

"ऑश हेयेयन एक उंगली और डाल दो बहोट अच्छा लग रहा है." में सिसक रही थी.

कंचन ने अब अपनी उंगली मेरी चूत के रस से गीली कर उसे मेरी गंद मे डाल अंदर बाहर कर रही थी. मुझे इतना मज़ा आ रहा थी कि क्या बताउ. मेरा झड़ने का समय नज़दीक आता जा रहा था. मेने ज़ोर से अपने कूल्हे उठाए और उसके सिर को पकड़ अपनी चूत पर जोरों से दबा दिया.

"ओह आआआआज काआअंचाां मेरााा चूऊता." कहकर मेरी चूत ने पानी छोड़ दिया.

कंचन मेरी चूत को पूरी तरह अपने मुँह में भर मेरे रस को पीने लगी. वो तब तक मेरी चूत को चूस्ति रही जब तक की एक बूँद पानी उसमे बचा था.

थोड़ी देर हम यूँही लेटे रहे, फिर धीरे से कंचन ने अपनी उंगली मेरी गंद से निकाली और अपना सिर मेरी जांघों पर रख दिया. वो बड़े प्यार से मेरी चूत को सहला रही थी. आज हमारे नए रिश्ते की शुरुआत थी और अब मुझे उसकी चूत चाहिए थी.

"तुम बहोत जल्दी सब कुछ सीख गयी कंचन." मेने उसके सिर पर हाथ फिराते हुए कहा.

"हां रश्मि एक अछी टीचर है." कंचन ने कहा.

"हां वो तो है, मुझे भी उसने ही सिखाया है." मेने कहा.

"प्रीतू जब तुम उत्तेजित होती हो तो तुम्हारी चूत कितनी फूल जाती है, और जब तुम्हारी चूत पानी छोड़ती है तो एक दम पिशब की धार की तरह छोड़ती है, एक बार तो में चौंक ही पड़ी थी जब एक तेज धार मेरे मुँह मे छूटी थी." कंचन ने कहा.

"हां रवि भी यही कहता है, वो कहता है कि मेरी चूत नही बल्कि पानी की नल है, लाओ अब में देखती हूँ कि तुम्हारी चूत क्या कहती है." हंसते हुए मेने उसे अपनी बाहों मे भर लिया.

अब कंचन बिस्तर पर लेट गयी और मैं उसकी टाँगो के बीच आ गयी. मेने कंचन की टाँगे और फैला दी और उसकी गुलाबी प्यारी चूत को देखने लगी. मेने उसकी चूत को फैलाया तो अंदर का गुलाबी हिस्सा रस से चिकना हो चमक रहा था.

जब इस प्यारी चीज़ को देख में अपने आपको नही रोक पा रही थी तो रश्मि कैसे रुकी होगी. मैने तुरंत अपना हाथ उसकी चूत पर फिराते हुए उसकी चूत को अपने मुँह मे ले लिया. में उसकी चूत के दाने के साथ खेलने लगी.
 
में जोरों से उसकी चूत को चूसे जा रही थी और वो उत्तेजना मे अपने कूल्हे उछाल मेरे मुँह पर मार रही थी. में अपनी जीब को अंदर बाहर कर उसे चोद रही थी.

"ओह प्रीईटी चूवसो और चूऊवसो ज़ोर से हाआअँ ज़ोर से ऑश अयाया" कंचन सिसक रही थी.

मेने अपने दोनो हाथों से उसके कूल्हे पकड़ लिए और अपने मुँह पर दबाते हुए उसकी चूत पूरे वेग से चूसने लगी. उसकी टाँगे अकड़ने लगी और में समझ गयी की उसका भी छूटने वाला है.

"ओह आआआः प्रीईईईटी चबा डालो मेरी चूओत को ओह हाां मेरा चूऊता." कहकर उसकी चूत ने पानी छोड़ दिया. उसकी चूत ने वैसी धार तो नही छोड़ी जैसा मेने सोचा था फिर भी मुझे मज़ा आया और मेने भी उसका सारा पानी पी लिया.

कंचन ने मुझे कंधों से पकड़ अपने उपर कर लिया और मेरे मुँह मे अपनी जीब डाल दी. वो अपने रस का स्वाद मेरे मुँह मे अपनी जीब गोल गोल घुमा कर लेने लगी.

हम अपने कपड़े पहन वापा हमारे दोस्तों के पास लॉन मे आ गये. सभी मिकलर शाम का और रात का प्रोग्राम बनाने लगे. सब के बीच ये तय हुआ कि तोड़ी देर अपने अपने कमरे में सुस्ताने के बाद हम सब यही नीचे रेस्टोरेंट मे खाने के लिए मिलेंगे फिर रात का कार्यक्रम तय करेंगे. हम सब अपने अपने कमरे मे सुस्ताने के लिए चले गये.

खाना मस्ती और चुदाई

जैसे तय हुआ था हम सब रेस्टोरेंट में खाने के लिए इकट्ठा हुए. आज होटेल मे एक संगीत का आयोजन किया हुआ. बाहर से ऑर्केस्ट्रा बुलाया गया था. खाना हर बार की तरह स्वादिष्ट और लाजवाब था.

खाने के बाद हम सब अपने हाथ मे ड्रिंक्स ले गाने का मज़ा लेने लगे. कुछ गानो पर हम सबने जोड़े बना डॅन्स भी किया. डॅन्स मे मेरे साथ राजेश था. डॅन्स करते करते उसने मुझे अपने से ज़ोर से चिपका लिया जिससे मेरी छातियाँ उसकी छाती से चिपक से गयी थी.

फिर राजेश ने अपने दोनो हाथों से मेरे कुल्हों का पकड़ा और अपनी और खींच लिया जिससे उसके लंड का दबाव मुझे ठीक अपनी चूत पर हो रहा था.

"प्रीति में तुम्हारी गांद मारना चाहता हूँ." राजेश मेरे कान मे धीरे धीरे से बोला.

"मना कौन करता है," कहकर मेने उसके लंड को पॅंट के उपर से पकड़ भिच दिया.

जब ऑर्केस्ट्रा ख़त्म हुआ तो हम सब हमरे कमरे की और चल दिए.

जैसे ही हम सब हमारे कमरे मे पहुँचे सबने अपने कपड़े उतारने शुरू कर दिए. थोड़ी देर मे आठ लोग मदरजात नंगे होकर एक दूसरे के शरीर से खेल रहे थे.

अचानक रश्मि को क्या हुआ पता नही, "प्रीति आज में तुम्हे तीन लंड से एक साथ चुदवाते देखना चाहती हूँ."

मेने भी आज तक तीन लंड एक साथ अपने शरीर पर नही झेले थे. तीन लंड की रोमांचता ने मुझे अंदर से हिला दिया. मेने धीरे से अपनी गर्दन हां मे हिला दी.

"बॉब्बी तुम बिस्तर पर लेट जाओ, प्रीति तुम बॉब्बी पर चढ़ उसका लंड अपनी चूत मे ले लो. राजेश तुम पीछे से अपना लंड इसकी चूत मे डाल देना. और रवि तुम अपना लंड प्रीति से चूस्वाओगे." रश्मि ने सबको निर्देश देते हुए कहा.

पता नही रश्मि को सपना आया था या उसने डॅन्स हॉल मे हमारी बात सुन ली थी. थोड़ी ही देर पहले राजेश ने मुझसे मेरी गंद मारने की इच्छा जाहिर की थी.

बॉब्बी बिस्तर पर पीठ के बल लेट गया और में उसपर चढ़ कर अपने दोनो घुटनो को उसके बगल रख दिए. फिर अपनी चूत को थोड़ा फैला मेने बॉब्बी के लंड को अपनी चूत से लगाया और उसे पर बैठती चली गयी. उसका लंड पूरा का पूरा मेरी चूत मे घुस चुक्का था.

फिर राजेश मेरे पीछे आ गया और मेरे चुतताड को सहलाने लगा. उसने थोड़ा से थूक मेरी गंद पर गिराया और मेरी गंद को गीला करने लगा. फिर सुस्ने अपनी एक उंगली मेरी गंद मे डाल गोल गोल घुमाने लगा. जब उसने देखा की गंद पूरी तरह गीली हो गयी है तो अपने लंड को मेरी गंद के छेद पर रख एक ज़ोर धक्का मारा, पूरा लंड एक ही धक्के मे अंदर घुस गया.

"उईईई माआअ मार गाआआए." में ज़ोर से चीख पड़ी.

मेरी चीख के साथ ही बॉब्बी मेरे दोनो मम्मे पकड़ उन्हे मसल्ने लगा और मेरे मुँह मे अपनी जीब डाल चुभलने लगा. मुझे थोड़ी सी राहत मिली. राजेश अब धीरे धीरे धक्के लगाते हुए मेरी गंद मार रहा था.

रवि ने जब देखा कि अब में मज़े लेते हुए बॉब्बी के लंड पर उठ बैठ रही हूँ तो उसने अपना लंड मेरे मुँह मे दे दिया. में उसके लंड को चूसने लगी.

एक अजीब स्वर्गिक आनंद मुझे मिल रहा था. जब में नीचे बैठती तो राजेश का लंड बाहर निकल आता और जब उपर उठती तो बॉब्बी का. मेरे शरीर के तीनो छेद को मज़ा आ रहा था. में सोच रही थी कि तीन लंड से चुदवाने मे इतना मज़ा आता है तो मेने पहले क्यों नही चुदवाया.

में पूरी तरह उत्तेजित हो उछल उछल कर चोद रही थी, चुदवा रही थी चूस रही थी. मुझे नही मालूम मेरी चूत ने कितनी बार पानी छोड़ा.

रवि झड़ने के कगार पर था, उसने मेरे सिर को पकड़ा और अपना लंड अंदर तक घुसाकर वीर्य की बौछार मेरे गले मे डाल दी. मैं जोरों से चूस कर उसका सारा वीर्य पी गयी. रवि अपने मुरझाए लंड को निकाल हट गया.

"ओह राअज याहान आआओ और मुझे अपन लंड दो चूसने के लिए." में चिल्लाई.

राज मेरे पास आया और अपना लंड मेरे मुँह मे दे दिया.
 
अगली बारी राजेश की थी. वो मेरे कुल्हों पर थप्पड़ मारते हुए मेरी गंद मार रहा था. उसने जोरों से मेरे कूल्हे पकड़े और अपने लंड को अंदर तक घुसा अपना पानी छोड़ दिया. मेरी गंद उसके वीर्य से भर गयी थी. मेने उसके लंड को जकड़े रखा और एक एक बूँद निचोड़ ली.

"रश्मि जल्दी से लॉडा लाओ और मेरी गंद मारो." में बोली.

प्रिया और कंचन अजीब नज़रों से रश्मि को देख रही थी. रश्मि उठी और अलमारी से डिल्डो निकाल अपनी कमर पर बाँधने लगी.

रश्मि मेरे पीछे आई और वो नकली लंड मेरी गंद घुसा धक्के मारने लगी. प्रिया और कंचन घूरते हुए रश्मि को मेरी गंद मारते देख रही थी. शायद उन्होने कभी नकली लंड का मज़ा नही लिया था.

"प्रीति तय्यार हो जाओ मेरा छूटने वाला है." बॉब्बी ने नीचे से धक्के मारते हुए कहा.

बॉब्बी का शरीर आकड़ा और उसने मेरी कमर पकड़ते हुए अपने कूल्हे उठाए और मेरी चूत को अपने वीर्य से भर दिया. उसने अपने धक्को रफ़्तार तेज करते हुए अपने लंड का सारा पानी मेरी चूत मे छोड़ दिया. उसके लंड से इतना पानी छूटा की वो मेरी चूत से बह कर उसकी गोलैईयों तक चला गया.

"हेययय भाआगवान्नन् मेरी चूऊत कितनी भारी हुई लग राआही हाीइ. ऑश अयाया बॉब्बबू लाओ में तुम्हारा लुंदड़ड़ चूवस कर साआफ कर दूं." में सिसक रही थी.

बॉब्बी मेरे नीचे से निकल घुटनो के बल मेरे मुँह के सामने हो गया. राज ने अपना लंड मेरे मुँह से बाहर निकाला और में बॉब्बी का लंड मुँह मे ले चूसने लगी. जब उसका लंड झड़कर मुरझा गया तो मेने उसे बाहर निकाल दिया.

"रश्मि प्लीज़ किसी से कहो मेरी चूत चोदे?" मेने चिल्लाते हुए बोली.

रश्मि ने वो नकली लंड मेरी गंद से निकाला और ड्रॉयर की ओर बढ़ी गयी. तीन मर्द झाड़ चुके थे और सिर्फ़ राज मेरा बेटा बचा था जो फिर से अपना लंड मेरे मुँह मे दे दिया था.

रश्मि ने एक दूसरा नकली लंड निकाला और प्रिया और कंचन से पूछा, "तुममे से कौन प्रीति की चूत इस नकली से लंड से चोदना चाहेगा?"

प्रिया रश्मि की बात सुनकर उछल पड़ी और दौड़ कर वो नकली लंड उससे ले अपनी कमर पर बाँधने लगी. फिर वो मेरे नीचे लेट गयी और मेने उस नकली लंड को मेरी चूत से लगाया और उसे अंदर घुसा लिया. अब में उछल उछल कर चोद रही थी.

रश्मि, प्रिया और राज तीनो मिलकर मुझे चोद रहे थे. तीन तीन लंड थे पर दो नकली थे.

राज अपने आपको ज़्यादा देर नही रोक पाया और मेरे मुँह मे अपना वीर्य छोड़ दिया. मैने जोरोसे चूस्ते हुए उसके लंड को पूरी तरह निचोड़ लिया. राज अपना लंड बाहर निकाल बाकी तीनो मर्दों के पास खड़ा हो मेरी चुदाई देखने लगा.

"कंचन यहाँ आओ और अपनी चूत मुझे दो?" में बोली.

कंचन शरमाते हुई मेरे पास आई और अपनी चूत मुझे चूसने के लिए दे दी. दो औरतें मुझे चोद रही थी और एक की मैं चूत चूस रही थी. ऐसा अनुभव मेने अपनी जिंदगी में कभी नही लिया. आज की रात मेरे लिए एक यादगार रात बन गयी थी.

मेरी चूत ने कितनी बार पानी छोड़ा ये मुझे भी याद नही. में आगे पीछे, उपर नीचे सब तरह से लंड का मज़ा ले रही थी. में थक कर चूर हो चुकी थी, आख़िर में थक कर कंचन के बदन पर गिर पड़ी. मुझमे अब और ताक़त नही बची थी, इस तरह की चुदाई मेने पहली बार की थी.

जब हम सब सुस्ता रहे थे तब रश्मि ने प्रिया को डबल डिल्डो दिखाया, उसे बताया कि किस तरह होटेल मे ठहरी दो लेज़्बीयन लड़कियों ने उनको इस डिल्डो से चोदा था.

"तुम्हे पता है यहाँ आने से पहले हमने कभी सपने में भी नही सोचा था की हम किसी औरत के साथ चुदाई का मज़ा लेंगे, वो भी एक नही तीन तीन के साथ." प्रिया ने रश्मि से कहा.

"हां में भी बहोत खुश हूँ की हम औरतों के साथ सेक्स करने मे खुल गये. कितना उत्तेजञात्मक होता है जब एक सुन्दर लड़की मेरी चूत रही हो और बाद मे मैं उसकी चूत चूसू. मेने अपनी जिंदगी मे कभी डिल्डो इस्तेमाल नही किया था, पर आज इस्तेमाल करके मुझे मज़ा आगेया." कंचन ने कहा.

"हां सही मे काफ़ी उत्तेजञात्मक नज़ारा था जब तुम तीनो औरतें आपस में चुदाई कर रहे थे. और में राज का शुक्रिया अदा करूँगा कि उसने हमे ये सब सिखाया. और सबसे बड़ी बात तो मुझे उसकी गंद मारने मे माज़ा आया." राजेश ने हंसते हुए कहा.

"आप सब जो करना चाहते वो आपने किया, पर मुझे तो प्रिया और कंचन की गंद मारने को नही मिली ना, पर फिर भी आप लोगों के साथ समय अच्छा गुज़ारा." रवि ने कहा.

"पता नही क्यों, पर जब मेरी गंद की चमड़ी खींचती है तो मुझे अच्छा नही लगता, मुझे तो अपनी गंद मे कोई उंगली डाले तो भी बुरा लगता है." प्रिया ने कहा.

"जब कमरे मे प्रीति मेरी चूत चूस रही थी तो मुझे उसकी उंगली अपनी गांद मे बहोत अछी लग रही थी, पर रवि का जितना मोटा और लंबा लंड अपनी गंद मे, ना बाबा ना, में तो मर ही जाउन्गि." कंचन थोड़ा शरारती स्वर मे बोली.

"देखो में तुम्हारी बात से सहमत हूँ, पर किसी भी चीज़ को उसका आदि होने मे थोड़ा वक़्त लगता है. अगर तुम थोड़ी हिम्मत और थोड़ा समय दो तुम रवि का लंड भी बड़ी आसानी से अपनी गंद मे लेने लगोगी." रश्मि ने कंचन से कहा.

तभी रवि बीच मे बोला, "तुम लोगों को मालूम ही है की मुझे गंद मारना अछा लगता है, फिर भी कोई कुतिया बन मुझसे चुदवाति है तो मुझे पीछे से उसकी चूत मारने मे ज़्यादा माज़ा आता है, कम से कम मैं उसकी गंद से खेल तो सकता हूँ."

थोड़ी देर सुस्ताने के बाद राजेश और बॉब्बी फिर किसी की गंद मारना चाहते थे. उन्हे मालूम था कि यही आखरी मौका है गंद मारने का कारण प्रिया और कंचन तो उन्हे गंद मारने देंगी नही भविष्या मे.

बॉब्बी ने मुझसे पूछा, "प्रीति क्या तुम अपनी गंद मे मेरा लंड लेना चाहोगी?"

और वहीं राजेश की नज़र रश्मि की गंद पर थी. रश्मि वो डबल डिल्डो निकाल लाई और हम दोनो एक दूसरे के सामने इस तरह हो गये कि वो डिल्डो हम दोनो की चूत मे आसानी से घुस जाए.

हम दोनो एक दूसरे को उस नकली लंड से चोद रहे थे, और बॉब्बी रश्मि की और राजेश मेरी गंद मार रहा था.

वहीं दूसरे बिस्तर पर रवि ने प्रिया को घुटनो के बल कर पीछे से उसकी चूत चोद रहा था. राज कंचन के साथ वही कर रहा था और चारों लोग हमे देख रहे थे.

रवि प्रिया की चूत चोद्ते चोद्ते उसकी गंद को सहला रहा था. वो कभी उसे भींच देता कभी झुक कर उसे चूम लेता.

राज ने किसी तरह अपनी उंगली कंचन की गंद मे घुसा दी थी और उसे अंदर बाहर कर रहा था, साथ ही उसका लंड कंचन की चूत की धुनाई कर रहा था.

थोड़ी ही देर में सबका पानी छूट गया, किसी मे बात करने की भी ताक़त नही बची थी. हम सब निढाल होकर जहाँ थे वही पसर गये और अपनी सांसो पर काबू पा रहे थे.

थोड़ा सुसताने के बाद हम चारों ने प्रिया और उसके साथियों से विदा ली और अपने कमरे में आ गये. में रवि के साथ बिस्तर में घुस गयी और राज अपनी नई दुल्हन रश्मि के साथ.

सुबह जब हमारी आँख खुली तो हम सब नहा कर नीचे रेस्टोरेंट मे नाश्ते के लिए आगाये. हमे प्रिया और उसके साथी कहीं दिखाई नही दिए. बाद मे हमे पता चला कि वो आज वापस जा रहे हैं.

हमारा भी आज का दिन आखरी दिन था और हम कल सुबह वापस लौटने वाले थे.

पूरे दिन हम घूमते रहे और शॉपिंग करते रहे. हमारा कोई इरादा नही था कि हम किसी नए जोड़े से दोस्ती बनाए.

शाम को थक हार कर हम अपने कमरे मे आए और सो गये. दूसरे दिन सुबह हमने होटेल का बिल भरा और एरपोर्ट की और चल दिए. चुदाई के इस दौर मे सब इतने थके हुए थे कि पूरे सफ़र में हम सब सोते रहे.

हां मेरे बेटे के साथ ये हनिमून मुझे हमेशा याद रहेगा. चुदाई की जिन उँचाइयों को मेने इन दिनो मे छुआ था वो में कभी कल्पना भी नही कर सकती.

टू बी कंटिन्यूड…………….

 
gataank se aage......

Honeymoon ka Panchvan din

Dusre din subah meri aankh khuli to mujhe bahot achaa lag raha tha. Pichli raat meine kafi enjoy kiya tha aur apne aap par control rakha tha. Tabhi mujhe ehsas hua ki mein bistar par akeli hun. Meine nazre ghuma dusre bistar par dekha ki Ravi mere bete Raj aur uski patni aur meri bahu Rashmi ke sath tha. Rashmi Ravi ke upar let use chod rahi thi aur piche se Raj uski gand mar raha tha.

Mein sochne lagi kaisi bache hai, kabhi sex se thakte hi nahi. Mein bistar se uttri aur nahane chali gayi, jabki wo teeno abhi bhi bistar me hi the. Mein shower ke niche garam pani ka maza le rahi thi ki Rashmi bathroom me aa gayi aur mere sath hi nahane lagi.

"Meri choot aur gand me itna virya bhara hua hai, meri samajh me nahi aata ki Ravi ke lund me itna virya aata kahan se hai, shayad usne koi virya banane ki machine laga rakhi hai." Rashmi hanste hue boli.

"Haan sahi me uske sharir ki takat kamal ki hai." Meine kaha.

Rashmi ne apni choot aur gand se virya achi tarah dhoya. Hum sath hi shower ke niche naha rahe the Rashmi ne apna dhyan mere aur kiya aur mere sharir par sabun malne lagi.

"Kyon na hum ek dusre ke sharir par sabun lagaye." Rashmi ne kaha.

Mein uske sharir par saabun lagane lagi aur Rashmi saabun lagate hue apne hath mere pure sharir par phirane lagi. Mein uttejit ho rahi thi par mein Rashmi ko rok diya, "Rashmi abhi rehne do abhi to pura din pada hai."

Rashmi meri baat man gayi aur hum dono naha kar bahar aa gaye. Ravi aur Raj ne bhi snan kar liya aur hum kapde pehan niche naashta karne aa gaye.

Aaj hame kafi der ho gayi thi niche aate aate so meine kaha, "Kyon na aaj heavy naashta kar liya jaye aur khane ki chutti kar di jaye. Thodi der me Priya Rajesh Kanchan aur Bobby bhi aa gaye aur hamari table par baith gaye.

Khane ke baad hum sab ghumne nikal gaye. Ghumte hue bhi charcha ka vishay chudai hi tha. Priya aur Kanchan ne bataya ki Rashmi ke sath sex karte hue kitna maza aaya. Iske pehle unhone kabhi kisi aurat ke sath chudai nahi ki thi. Phir Rajesh aur Bobby ne bataya ki kis tarah unhone Rashmi ki gand mari. Dono ne apni jindagi me pehli bar kisi ki gand mari thi.

"Oh to tum dono ka gand marne ka ye pehla mauka tha. Phir to iske liye tumhe Rahsmi ka shukriya ada karna chahiye." Ravi ne kaha.

Dono ne Rashmi ka shukriya ada kiya to Rashmi ne jhuk kar unka abhivadan kiya. Phir Priya ne bataya ki kis tarah subah wo aur Kanchan 69 ki avastha me let ek dusre ki choot choosi.

"Dekha meine pehle hi kaha tha kit um dono ko maza aayega. Aaj se adla badli me ek nai cheex jud gayi tum dono ke sath." Rashmi boli, "tumme se agar koi meri choot choosna chahta hai to mein hamesha tayyar hun, mujhe bata dena."

Priya aur Rashmi dono sharma gayi, Priya boli, "Abhi nahi baad me dekhte hai."

Wo charon ki is baat me jyada dilchaspi thi ki hum sath sath kaise hue ki sath me safar kar rahe hai aur ek dusre ke sath chudai kar rahe hai. Meine Ravi, Raj aur Rashmi ki taraf dekha ki kahan se shuru kiya jaye.

Raj bich me tapakta bola, "Mein aaplogon ko hamari college ki dino se batata hun."

Raj ne unhe Mala, Ravi aur apne rishte ke bare me bataya. Phir kis tarah Rashmi se uski pehchaan hui aur Ravi unke sath ho liya. Usne itni bariki se apne Rashmi aur Ravi ke rishte ke bare me bataya ki mein bhi hairan reh gayi.

Usne bataya ki kis tarah Ravi uski gand marta tha aur Rashmi uske lund ko apne munh me le choosti thi. Phir wo Ravi ki gand marta tha aur Rashmi apni kamar par dildo bandh uski gand marti thi.

Rashmi bich uchalte hue boli ki us kis tarah do ya teen lund se sath sath chudai karne me maza aata tha. Usne batay ki usne aur Raj ne shaadi ke pehle hi soch liya tha ki kisi chauthe insaan ko honeymoon par sath le chalenge.

Usne bataya ki phir jab Preeti hamare sath khul gayi to kisi aur ko sath lane ka sawal hi nahi uthhta tha.

Priya, Kanchan, Rajesh aur Bobby ke munh se ek shabd na nikla, Wo Ravi Raj aur Rashmi ki kahani sunte rahe. Charon achambhit mudra me unki baat sun rahe the, phir Bobby bola, "mujhe malum tha ki tum log samuhik chudai karte ho par tumhari chudai ka andaz itna bhayankar hoga ye nahi malum tha."

Bobby kuch der shant raha phir Raj se pucha, "kya tumhe sahi me lund choosne aur gand marwane me maza aata hai?"

"Haan ye sab mujhe achaa lagta hai," Raj ne jawab diya phir unse pucha, "kya tum dono ne kabhi kisi mard ke sath chudai ki hai, mera matlab kisi ka lund choosa ho ya gand mari ho. Kyon na karke ek bar iska bhi anubhav le lete ho."

Rajesh aur Bobby ek dusre ko ajeeb si nazron se dekhte rahe phir Rajesh bola, "Meine kabhi is vishay par socha nahi hai na hi mujhe kabhi aisa mauka laga."

"Meine bhi kabhi nahi socha aaj tak." Bobby bhi bola.

"Ek baar koshish karke dekhna chahiye." Ravi ne kaha, "aur mein dave ke sath kehta hun ki tum dono ko maza aayega."

"Haan tum logon ko ek baar ajmaana chahiye aur tum logo ko dekh kar to aisa lagata hai ki tum abhi se tayyar ho." Rashmi ne kaha.

Rashmi ki baat sahi thi. Rajesh aur Bobby ke lund pant ke andar khade ho gaye the. Itni sab sexy baton ne unhe uttejit kar diya tha par wo ab bhi samling chudai ke liye tayyar nahi the. Don one sharma kar apne hath pant ke upar rakh liye jisse unka khada lund dikhai na de.

Priya ne batchit ke vishay ko badalte hue mujhse pucha ki me kis tarah Ravi Rashmi aur apne bete ke sath jud gayi.

Meine un teeno ko bataya ki kis tarah meine chup kar Raj ko Ravi ka lund chooste dekha phir Ravi ne Raj ki gand mari. Dusri baar meine Rashmi ko inke sath samuhik chudai karte dekha. Phir meine dono ko Rashmi ko sath sath choot aur gand me chodte dekha.

"Hey bhagwan Preeti, tum kis tarah apne aapko ye sab nazaara dekh kar rok payi, mein hoti to usi waqt unke sath ho jaati." Priya ne kaha.

"Haan meine apne aap par kabu rakha karan mein apne hi bet eke samne sharminda nahi hona chahti thi, meine soch liya tha ki chup rah kar bad mein apne kamre me muthiya lungi." Meine jawab diya.

"Haan par wo itna bhi shant nahi khadi thi, meine ise hame dekhte pakad liye tha." Ravi ne kaha.

Phir meine apni kahani jaari rakhte hue sabko bataya ki kis tarah ek din Ravi ne mujhe behka liya. Phir meine bataya ki kis tarah pehle to Rashmi hamare sath shaamil ho gayi aur ek din meri uttejna aur madhoshi ka faida uthate hue mere bete Raj ko bhi isme shaamil kar liya.

Meine batay ki kis tarah ki kis tarah us din mere bete ne meri gand mari jab Rashmi meri choot choos rahi thi, aur Ravi mere munh ko chod raha tha. Phir meine unhe apni dohri chudai ke bare mein bataya ki kis tarah Ravi ne meri choot me lund dala tha aur Raj ne meri gand me.

"Jab ek bar mein in teeno ke sath chudai kar chuki thi, to hum sab barabar sath sath me chudai karne lage. Phir jab Raj ne mujhe apne honeymoon par sath chalne ko kaha to mein man gayi, aage ki kahani aap sabko maalum hi hai." Miene apni baat samapt karte hue kaha.

"Yaar ye haqiqat hai ya koi kahani, mujhse to apna lund sambhale nahi jaa raha." Rajesh apne lund ko sehlate hue bola.

"Meri bhi haalat kuch aisi hi hai." Bobby bhi bola.

"Agar aisi baat hai to mein tumhari madad kar sakta hun, chalo hotel wapas chalte hai." Raj ne kaha.

"Maan jao tum dono," Ravi ne kaha, "aur ye dawa hai tum dono pachtaoge nahi."

"Haan tum dono maan kyon nahi jaate," Priya ne unhe uksaya.

 
Rajesh aur Bobby dono duvidha me the ki mane ki na mane. Ye sahi tha ki dono ka mard ke sath chudai karne ka pehla avsar tha par wo dono itne jyada garama chuke the ki na nahi kar paye. Dono hotel waapas jane ko tayyar ho gaye.

"Mein ye nazara apni aankhon se dekhna chahti hun." Priya uchalte hue boli.

Hum sab log hotel wapas aagaye. Mein Ravi aur Rashmi niche lawn me hi baith gaye aur wo sab kamre ki aur badh gaye. Abhi tak Kanchan ne koi pratikriya nahi jatai thi par wo bhi Priya ki piche piceh ho li.

Kareeb ek ghante ke baad sab laut kar lawn me aa gaye. Meine dekha ki Rajesh aur Bobby ke chehre par ek ajeeb si chamak thi aur Raj dhire dhrie mukura raha tha. Priya aur Kanchan ka chehra uttejna me laal ho raha tha.

"Kaho kaisa raha?" Ravi ne dono se pucha.

Rajesh aur Bobby ke munh se koi bol nahi phuta par Raj ne kaha, "maaza aa gaya, Rajesh ne meri gaand mari aur meine Bobby ka lund chuma. Dono ne mujhe virya se bhar diya, ab mein jara swimming pool me snan karke aata hun." Kehkar Raj swimming pool ki aur badh gaya.

Phir Priya kehna lagi, "teen mardo ko sath sath chudai karte dekhne ka mera pehla avsar tha. Aisi chudai meine kabhi nahi dekhi, tab se meri choot me angar lagi hui hai."

"Meri bhi aisi hi halaat ho rahi hai," Kanchan bhi boli, "Sahi me in teeno dekh me itni uttejit ho gayi hun. Raj ek dam ladki jaisa lagta hai jab uska lund nahi dikhta."

"Tumhara kya haal hai Preeti, lagta hai kit um sirf soch kar hi gili ho gayi ho." Ravi ne kaha.

"Haan meri halat bhi kuch aisi hi hai, kamre me pahunch Kanchan ko kahungi ke meri choot ki aag thanda kar de." Meine jawab diya.

"Haaan ye tumhare liye acha rahega." Ravi hanste hue bola.

"To doston aisa lagta hai ki tum dono ki samuhik chudai ki jhijhak ab dur ho gayi hai." Ravi ne Rajesh aur Bobby se pucha.

Rajesh ne jawab diya, "Tumhara kehna sahi hai Ravi. Raj kafi anubhavi hai is mamle mein. Use lund choosna kitni achi tarah se aata hai, aur jab mein uski gand mar raha tha mujhe aisa laga ki mein kisi ladki ki gand me lund ghuasai hue hun, wo thik ek aurat ki tarah mere lund ko apni gand ki manspeshiyon me jakad mere lund ko pura nichod liya."

In sab baton ne mujhe kafi uttejit kar diya tha. Meine Kanchan ki taraf dekha aur kaha, "Kanchan chalo kamre me chalte hai."

Shayad Kanchan ka dhya kahi aur tha, wo meri baat sunkar chaunk padi. Wo khadi ho gayi aur ek bar apne pati ki aur dekha jaise ki uski agya lena chahti ho, "Thik hai chalo." Kehkar wo mere sath ho li.

Kamre me pahunchte hi hum dono ne apne kapde uttare aur nange hokar bistar par let gaye.

"Tum pehle choot chooswana chohogi ya tum meri choot pehle choosna chahogi?" meine usse pucha.

"Nahi me pehle tumhar choot choosungi, mein tumhare jitni garam nahi hun abhi, shaaya tumhari chooot choos kar ho jaun." Kanchan ne jawab diya.

Mein pith ke bal hokar apni tange phaila di. Kanchan meri tango ke bich aa gayi aur meri choot par hath phirane lagi. Mein apni uttejna ko badi mushkil se rok paa rahi thi, meine mehsus kiya ki Kanchan meri choot ko ched mujhe chidha rahi hai. Meine Kanchan ko khinch kar apne choot par uske munh ko rakhna chaha par jaise Kanchan ko meri uttejna ki koi parwah nahi thi, wo apne hisaab se meri choot se khelti rahi.

Meine jor lagakar apni choot uske munh par rakh di. Mein chahti thi ki ye masoom si dikhne wali ladki meri choot ki gehraiyon ko apni jeeb se naape. Meri choot ko achi tarah se chaate aur mere paani ko pee jaye.

Kanchan bhi ab apni utsukta nahi rok payi aur apni jeeb se meri choot ke charon aur chaatne lagi. Phir usne mere kulhon ko pakad kar thoda phaila diya aur apni jeeb ko meri gand ke ched par ghumane lagi. Wahan se chaatte hue jab wo meri choot tak aakar use chatti to ek ajib si sirhan aur uttejna mere sharir me daud jati.

"OHHHH KANCCCHAN HAAAN AISE HI CHAATO BAHOT MAAAZA AAA RAHA HAI." Mein use uttsahit karte hue sisakne lagi.

Kanchan apni pyaari jeeb se meri choot ko chaate ja rahi thi. Mein bhi uttejna apne kulhe utha apni choot ko uske munh par daba di. Achanak Kanchan ne apni ek ungli meri choot me dal andar bahar karne lagi.

"OHHH HAAAAN EK UNGLI AUR DAL DO BAHOT ACCCHA LAG RAHA HAI." Mein sisak rahi thi.

Kanchan ne ab apni ungli meri choot ke ras se gili kar use meri gand me dal andar bahar kar rahi thi. Mujhe itna maza aa raha thi ki kya bataun. Mera jhadne ka samay nazdik aata jaa raha tha. Meine jor se apne kulhe uthaye aur uske sir ko pakad apni choot par joron se daba diya.

"OHHHHHH AAAAAAAAJ KAAAAANCHAAAAN MERAAAAA CHOOOOTA." Kehkar meri choot ne pani chod diya.

Kanchan meri choot ko puri tarah apne munh mein bhar mere ras ko peene lagi. Wo tab tak meri choot ko choosti rahi jab tak ki ek boond pani usme bacha tha.

Thodi der hum yunhi lete rahe, phir dhire se Kanchan ne apni ungli meri gand se nikali aur apna sir meri janghon par rakh diya. Wo bade pyaar se meri choot ko sehla rahi thi. Aaj hamare nai rishte ki shuruat thi aur ab mujhe uski choot chahiye thi.

"Tum bahot jaldi sab kuch sikh gayi Kanchan." Meine uske sir par hath phirate hue kaha.

"Haan Rashmi ek achi teacher hai." Kanchan ne kaha.

"Haan wo to hai, mujhe bhi usne hi sikhaya hai." Meine kaha.

"Preetu jab tum uttejit hoti ho to tumhari choot kitni phul jati hai, aur jab tumhari choot pani chodti hai to ek dam pishab ki dhar ki tarah chodti hai, ek bar to mein chounk hi padi thi jab ek tej dhar mere munh me chooti thi." Kanchan ne kaha.

"Haan Ravi bhi yahi kehta hai, wo kehta hai ki meri choot nahi balki pani ki nal hai, lao ab mein dekhti hun ki tumhari choot kya kehti hai." Hanste hue meine use apni bahon mien bhar liya.

Ab Kanchan bistar par let gayi aur mein uski tango ke bich aa gayi. Meine Kanchan ki tange aur phaila di aur uski gulabi pyaari choot ko dekhne lagi. Meine uski choot ko phailaya to andar ka gulabi hissa ras se chikna ho chamak raha tha.

Jab is pyaari cheez ko dekh mein apne aapko nahi rok paa rahi thi to Rashmi kaise ruki hogi. Meeine turant apna hath uski choot par phirate hue uski choot ko apne munh me le liya. Mein uski choot ke dane ke sath khelne lagi.

Mein joron se uski choot ko choose jaa rahi thi aur wo uttejna me apne kulhe uchaal mere munh par mar rahi thi. Mein apni jeeb ko andar bahar kar use chod rahi thi.

"OHHHHH PREEEETI CHOOOSO AUR CHOOOOOSO JOR SE HAAAAAN JOR SE OHHHH AAAAH" Kanchan sisak rahi thi.

Meine apne dono hathon se uske kulhe pakad liye aur apne munh par dabata hue uski choot pure veg se choosne lagi. Uski tange akadne lagi aur mein samajh gayi ki uska bhi chootne wala hai.

"OHHHHH AAAAAH PREEEEEEEEETI CHABA DALO MERI CHOOOT KO OHHHHHH HAAAAN MERAA CHOOOOTA." Kehkar uski choot ne pani chod diya. Uski choot ne waisi dhar to nahi chodi jaisa meine socha tha phir bhi mujhe aaaya aur meine bhi uska saara pani pee liya.

Kanchan ne mujhe kandhon se pakad apne upar kar liya aur mere munh me apni jeeb dal di. Wo apne ras ka swaad mere munh me apni jeeb gol gol ghuma kar lene lagi.
 
Hum apne kapde pehan waapa hamare doston ke paas lawn me aa gaye. Sabhi miklar shaam ka aur raat ka program banana lage. Sab ke bich ye tay hua ki todi der apne apne kamre mein sustane ke bad hum sab yahi niche restaurant me khane ke liye milenge phir raat ka karyakram tay karenge. Hum sab apne apne kamre me sustane ke liye chale gaye.

Khana Masti aur Chudai

Jaise tay hua tha hum sab restaurant mein khane ke liye ikattha hue. Aaj hotel me ek sangeet ka ayojan kiya hua. Bahar se orchestra bulaya gaya tha. Khana har bar ki tarah swadisht aur laajawab tha.

Khane ke baad hum sab apne hath me drinks le gaane ka maza lene lage. Kuch gaano par hum sabne jode bana dance bhi kiya. Dance me mere sath Rajesh tha. Dance karte karte usne mujhe apne se jor se chipka liya jisse meri chaatiyan uski chaati se chipak se gayi thi.

Phir Rajesh ne apne dono hathon se mere kulhon ka pakda aur apni aur khinc liya jisse uske lund ka dabav mujhe thik apni choot par ho raha tha.

"Preeti mein tumhari gaand marna chahta hun." Rajesh mere kaan me dhire dhire se bola.

"Mana kaun karta hai," kehkar meine uske lund ko pant ke upar se pakad bhich diya.

Jab orchestra khatm hua to hum sab hamre kamre ki aur chal diye.

Jaise hi hum sab hamare kamre me pahunche sabne apne kapde uttarne shuru kar diye. Thodi der me aath log madarjat nange hokar ek dusre ke sharir se khel rahe the.

Achanak Rashmi ko kya hua pat nahi, "Preeti aaj mein tumhe teen lund se ek sath chudwate dekhna chahti hun."

Meine bhi aaj tak teen lund ek sath apne sharir par nahi jhele the. Teen lund ki romanchta ne mujhe andar se hila diya. Meine dhire se apni gardan haan me hila di.

"Bobby tum bistar par let jao, Preeti tum Bobby par chadh uska lund apni choot me le lo. Rajesh tum piche se apna lund iski choot me dal dena. Aur Ravi tum apna lund Preeti se chooswaoge." Rashmi ne sabko nirdesh dete hue kaha.

Pata nahi Rashmi ko sapna aaya tha ya usne dance hall me hamare baat sun li thi. Thodi hi der pehle Rajesh ne mujhse meri gand marne ki iccha jaahir ki thi.

Bobby bistar par pith ke bal let gaya aur mein uspar chadh kar apne dono ghutno ko uske bagal rakh diye. Phir apni choot ko thoda phaila meine Bobby ke lund ko apni choot se lagaya aur use par batihti chali gayi. Uska lund pura ka pura meri choot me ghus chukka tha.

Phir Rajesh mere piche aa gaya aur mere chuttad ko sehlane laga. Usne thoda se thuk meri gand par giraya aur meri gand ko gila karne laga. Phir susne apni ek ungli meri gand me dal gol gol ghumane laga. Jab usne dekha ki gand puri tarah gili ho gayi hai to apne lund ko meri gand ke ched par rakh ek jor dhakka mara, pura lund ek hi dhakke me andar ghus gaya.

"UIIIII MAAAAA MAR GAAAAAAYI." Mein jor se cheekh padi.

Meri cheekh ke sath hi Bobby ne mere dono mame pakad unhe masalne laga aur mere munh me apni jeeb dal chubhlane laga. Mujhe thodi si rahat mili. Rajesh ab dhire dhire dhakke lagate hue meri gand mar raha tha.

Ravi ne jab dheka ki ab mein maze lete hue Bobby ke lund par uth baith rahi hun to usne apna lund mere munh me de diya. Mein uske lund ko choosne lagi.

Ek ajib swargik anand mujhe mil raha tha. Jab mein niche baithti to Rajesh ka lund bahar nikal aata aur jab upar uthti to Bobby ka. Mere sharir ke teeno ched ko maza aa raha tha. Mein soch rahi thi ki teen lund se chudwane me itna maaza aata hai to meine pehle kyon nahi chudwaya.

Mein puri tarah uttejit ho uchal uchal kar chod rahi thi, chudwa rahi choos rahi thi. Mujhe nahi maalum meri choot ne kitni bar pani choda.

Ravi jhadne ke kagar par tha, usne mere sir ko pakda aur apna lund andar tak ghusakar virya ki bauchar mere gale me dal di. Mein joron se choos kar uska sara virya pee gayi. Ravi apne murjhaye lund ko nikal hat gaya.

"OH RAAAJ YAAHAN AAAO AUR MUJHE APAN LUND DO CHOOSNE KE LIYE." Mein chillayi.

Raj mere paas aaya aur apna lund mere munh me de diya.

Agali bari Rajesh ki thi. Wo mere kulhon par thappad marte hue meri gand mar raha tha. Usne joron se mere kulhe pakade aur apne lund ko andar tak ghusa apna pani chod diya. Meri gand uske virya se bhar gayi thi. Meine uske lund ko jakde rakha aur ek ek bund nichod li.

"Rashmi jaldi se lauda lao aur meri gand maro." Mein boli.

Priya aur Kanchan ajeeb nazron se Rashmi ko dekh rahi thi. Rashmi uthi aur almari se dildo nikal apni kamar par bandhne lagi.

Rashmi mere piche aayi aur wo nakli lund meri gand ghusa dhakke marne lagi. Priya aur Kanchan ghurte hue Rashmi ko meri gand marte dekh rahi thi. Shaayad unhone kabhi nakli lund ka maza nahi liya tha.

"Preeti tayyar ho jao mera chootne wala hai." Bobby ne niche se dhakke marte hue kaha.

Bobby ka sharir akda aur usne meri kamar pakadte hue apne kulhe uthaye aur meri choot ko apne virya se har diya. Usne anpe dhakko raftar tej karte hue apne lund ka sara pani meri choot me chod diya. Uske lund se itna pani choota ki wo meri choot se beh kar uski golaiyon tak chala gaya.

"HEYYY BHAAAGWANNN MERII CHOOOOT KITNI BHAARI HUI LAG RAAAHI HAIII. OHHH AAAAH BOBBBU LAO MEIN TUMHAARA LUNDDD CHOOOS KAR SAAAF KAR DUN." Mein sisak rahi thi.

Bobby mere niche se nikal ghutno ke bal mere munh ke samne ho gaya. Raj ne apna lund mere munh se bahar nikala aur mein Bobby ka lund mine me le choosne lagi. Jab uska lund jhadkar murjha gaya to meine use bahar nikal diya.

"Rashmi please kisi se kaho meri choot chode?" Meine chillate hue boli.

Rashmi ni wo nakli lund meri gand se nikala aur drawer ki aur badhi gayi. Teen mard jhad chuke the aur sirf Raj mera beta bacha tha jo phir se apna lund mere munh me de diya tha.

Rashmi ne ek dusra nakli lund nikala aur Priya aur Kanchan se pucha, "Tumme se kaun Preeti ki choot is nakli se lund se chaudna chahega?"

Priya Rashmi ki baat sunkar uchal padi aur daud kar wo nakli lund usse le apni kamar par bandhne lagi. Phir wo mere niche let gayi aur meine us nakli lund ko meri choot se lagaya aur use andar ghusa liya. Ab mein uchal uchal kar chod rahi thi.

Rashmi, Priya aur Raj teeno milkar mujhe chod rahe the. Teen teen lund the par do nakli the.

Raj apne aapko jyada der nahi rok paaya aur mere munh me apna virya chod diya. Mein jorose chooste hue uke lund ko puri tarah nichod liya. Raj apna lund bahar nikal baki teeno mardon ke paas khada ho meri chudai dekhne laga.

"Kanchan yahan aao aur apni choot mujhe do?" mein boli.

Kanchan sharmate hui mere paas aayi aur apni choot mujhe choosne ke liye de di. Do aurtein mujhe chod rahi thi aur ek ki meein choot choos rahi thi. Aisa anubhav meine apni jindagi mein kabhi nahi liya. Aaj ki raat mere liye ek yaadgar rat ban gayi thi.

Meri choot ne kitni baar pani choda ye mujhe bhi yaad nahi. Mein aage piche, upar niche sab tarah se lund ka mazaa le rahi thi. Mein thak kar chur ho chuki thi, aakhir mein thak kar Kanchan ke badan par gir padi. Mujhe ab aur takat nahi bachi thi, is tarah ki chudai meine pheli baar kit hi.

Jab hum sab susta rahe the tab Rashmi ne Priya ko double dildo dikhaya, Use bataya ki kis tarah hotel me thehri do lesbian ladkiyon ne unko is dildo se choda tha.

"Tumhe pata hai yahan aane se pehle humne kabhi sapne mein bhi nahi socha tha ki hum kisi aurat ke sath cudhai ka maza lenge, wo bhi ek nahi teen teen ke sath." Priya ne Rashmi se kaha.

"Haan mein bhi bahot khush hai ki ham aurton ke sath sex karne me khul gaye. Kitna uttejnatmak hota hai jab ek sunder ladki meri choot rahi ho aur baad me mein uski choot chooson. Meine apni jindagi me kabhi dildo istamal nahi kiya tha, par aaj istamal karke mujhe maza aagaya." Kanchan ne kaha.

"Haan sahi me kafi uttejnatmak nazaara tha jab tum teeno aurtein aapas mein chudai kar rahe the. Aur mein Raj ka shukriya ada karunga ki usne hame ye sab sikhaya. Aur sabse badi baat to mujhe uski gand marne me maaza aaya." Rajesh ne hanste hue kaha.

"Aap sab jo karna chahte wo aapne kiya, par mujhe to Priya aru Kanchan ki gand marne ko nahi mili na, par phir bhi aap logon ke sath samay accha guzara." Ravi ne kaha.

"Pata nahi kyon, par jab meri gand ki chamdi khinchti hai to mujhe accha nahi lagta, mujhe to apni gand me koi ungali dale to bhi bura lagta hai." Priya ne kaha.

"Jab kamre me Preeti meri choot choos rahi thi to mujhe uski ungali apne gaan me bahot achi lag rahi thi, par Ravi ka jitna mota aur lamba lund apni gand me, na baba na, mein to mar hi jaungi." Kanchan thoda shararti swar me boli.

"Dekho mein tumhari baat se sehmat hun, par kisi bhi cheez ko uska aadi hone me thoda waqt lagta hai. Agar tum thodi himmat aur thoda samay do tum Ravi ka lund bhi badi aasani se apni gand me lene lagogi." Rahmi ne Kancha se kaha.

Tabhi Ravi bich me bola, "Tum logon ko maalum hi hai ki mujhe gand marna achaa lagta hai, phir bhi koi kutiya ban mujhse chudwati hai to mujhe piche se ucki choot marne me jyada maaza aata hai, kam se kam mien uski gand se khel to sakta hun."

Thodi der sustane ke bad Rajesh aur Bobby phir kisi ki gand marna chahte the. Unhe maalum tha ki yahi aakhri mauka hai gand marne ka karan Priya aur Kanchan to unhe gand marne dengi nahi bhavishya me.

Bobby ne mujhse pucha, "Preeti kya tum apni gand me mera lund lena chahogi?"

Aur wahin Rajesh ki nazar Rashmi ki gand par thi. Rashmi wo double dildo nikall layi aur hum dono ek dusre ke saamne is tarah ho gaye ki wo dildo hum dono ki choot me aasani se ghus jaye.

Hum dono ek dusre ko us nakli lund se chod rahe the, aur Bobby Rashmi ki aur Rajesh meri gand mar raha tha.

Wahin dusre bistar par Ravi ne Priya ko ghutno ke bal kar piche se uski choot chod raha tha. Raj Kanchan ke sath wahi kar raha tha aur charon log hame dekh rahe the.

Ravi Priya ki choot chodte chodte uski gand ko sehla raha tha. Wo kabhi use bhinch deta kabhi jhuk kar use choom leta.

Raj ne kisi tarah apni ungli Kanchan ki gand me ghusa di thi aur use andar bahar kar raha tha, sath hi uska lund Kanchan ki choot ki dhunai kar raha tha.

Thodi hi der mein sabka paani choot gaya, kisi me baat karne ki bhi takat nahi bachi thi. Hum sab nidhal hokar jahan the wahi pasar gaye aur apni sanso par kaabu paa rahe the.

Thoda sustane ke bad hum charon ne Priya aur uske sathiyon se vida li aur anne kamre mein aa gaye. Mein Ravi ke sath bistar mein ghus gayi aur Raj apni nai dulhan Rashmi ke sath.

Subah jab hamari aankh khuli to hum sab naha kar niche restaurant me nashte ke liye aagaye. Hume Priya aur uske sathi kahin dikhai nahi diye. Baad me hame pata chala ki wo aaj wapas jaa rahe hain.

Hamara bhi aaj ka din aakhri din tha aur hum kal subah wapas lautne waale the.

Pure din hum ghoomte rahe aur shopping karte rahe. Hamara koi iraada nahi tha ki hum kisi nai jode se dosti banain.

Shaam ko thak har kar hum apne kamre me aaye aur so gaye. Dusre din subah humne hotel ka bill bhara aur airport ki aur chal diye. Chudai ke is daur me sab itne thake hue the ki pure safar mein hum sab sote rahe.

Haan mere bete ke sath ye Honeymoon mujhe hamesha yaad rahega. Chudai ki jin unchaaiyon ko meine in dino me chua tha wo mein kabhi kalpana bhi nahi kar sakti.

To be continued…………….

 
गतान्क से आगे......

आख़िरकार घर पर

हम चारों घर पहुँच बच्चो की तरह सो गये. सफ़र से इतना थक गये थे कि किसी मे भी हिम्मत नही थी. दूसरे दिन सब एक के बाद एक उठे.

सबसे पहले रवि सोकर उठा. जब सबको सोता हुआ देखा तो चुपचाप किचन मे जाकर सबके के लिए कॉफी बनाने लगा. फिर मेरी आँख खुली और मैं रवि के पास किचन मे जाकर उसके साथ डिन्निंग टेबल पर बैठ गयी. आख़िर रश्मि और राज भी आ गये और हमारे साथ कॉफी पीने लगे.

हम सब अपनी छुट्टियों की बात कर रहे थे कि तभी फोन की घंटी बजी, "इस समय कौन मुझे फोन करेगा." मेने अपने आपसे कहा.

"शायद सीमा होगी." राशिमी ने उम्मीद से कहा.

"तुम्हारी बात सच हो." राज ने कहा.

"हाई बबिता कैसी हो तुम?" मैं अपनी बेहन की आवाज़ सुनकर चौंक पड़ी. राज ने अपने मुँह पे उंगली रख रवि और रश्मि को चुप रहने का इशारा किया.

"हां ज़रुरू क्यों नही, तुम और प्रशांत यहाँ रह सकते हो, अरे तुम चिंता मत करो हमे कोई तकलीफ़ नही होगी," मेने जवाब दिया. "ठीक है फिर गुरुवार को मैं तुम लोगों का इंतेज़ार करूँगी, ओक बाइ." कहकर मेने फोन रख दिया.

रवि, रश्मि और राज मेरी तरफ अस्चर्य भरी नज़रों से देख रहे थे. मेने उन्हे बताया कि प्रशांत को कुछ बिज़्नेस का काम है, साथ में बबिता भी आ रही है. वो लोग रविवार तक यहीं हमारे साथ रहेंगे.

"बबिता मासी हमारी शादी में बहोत ही सेक्सी लग रही थी है ना." राज ने कहा.

"हां राज में भी उनसे मिलना चाहती हूँ, उस समय तो उनसे मुलाकात नही हो पाई." रश्मि ने कहा.

"क्या वो भी खुले विषचरों की है और ओपन सेक्स मे विश्वास रखती है." रवि ने मुझसे पूछा.

"अपनी बकवास बंद करो रवि. बबिता अपने पति प्रशांत से शादी करके बहोत खुश है, और वो इधर उधर मुँह नही मारती." मेने थोडा गुस्सा करते हुए कहा.

"क्या पता रवि का लंड और उसका चोदने का अंदाज़ जानकार वो अपना इरादा बदल ले." रश्मि थोड़ा मुझे चिढ़ाते हुए बोली.

"तुम दोनो बहोत ही बेशरम हो?' मेने कहा.

"इसमे बेशरम वाली क्या बात है, अब तुम अपनी तरफ ही देखो कैसे हमारे रंग मे रंग गयी." रश्मि ने कहा.

"मेरी बात कुछ अलग है, में किसी से बँधी हुई नही हूँ, मेरा तलाक़ हो चुका है और मैं अपनी मर्ज़ी की मालिक खुद हूँ." मेने उन्हे समझाते हुए कहा.

"ठीक है प्रीति इतना गुस्सा क्यों हो रही हो. हम वादा करते है कि वो जब यहाँ होगे तो हम उनसे तमीज़ से पेश आएँगे." रवि ने कहा.

"इस बात का ख़याल रखना और हां वो जब यहाँ पर हो तो घर मे नंगा घूमना बंद कर देना." मेने कहा.

पूरा दिन हम मस्ती करते रहे. कभी कोई गेम खेलते कभी लिविंग रूम मे बैठ साथ मे सब कोई पिक्चर देखते. रात के खाने के बाद सब सोने चले गये. आज कितने दिनो के बाद में आकेली अपने बिस्तर मे सो रही थी. अकेला सोना बड़ा ही अजीब लग रहा था.

अगले चार दिन में अपनी बेहन के आने की तय्यारी में जुटी रही. हम चारों ही मस्ती मे थे, और मौके के हिसाब से सब चुदाई करते थे. मैं अपनी मौजूदा जिंदगी से बड़ी खुश थी. मुझे तीन प्यारे बच्चे मिल गये थे जो मेरा हर प्रकार से ख़याल रखते थे.

बबिता और प्रशांत

गुरुवार की दोपहर को बबिता और प्रशांत आ गये. हमने एक दूसरे को गले लगा हल्का सा चुंबन लिया. मेने महसूस किया की प्रशांत ने कुछ ज़्यादा ज़ोर से ही मुझे अपनी बाहों मे लिया था. और जब अलग हो रहे थे तो उसके हाथ मेरी पीठ से होते हुए मेरे चुतताड को सहला गये थे. मेने उस बात को हादसा समझ अपने दिमाग़ से निकाल दिया.

रवि, रश्मि और राज ने पहले ही सोच लिया थे कि वो गुरुवार को घर पर नही रहेंगे जिससे बबिता और प्रशांत को घर मे अड्जस्ट होने का अच्छी तरह से मौका मिल सके.

प्रशांत को तुरंत अपने बिज़्नेस के काम से बाहर जाना था. बबिता स्नान कर सफ़र की थकान उतारना चाहती थी. प्रशांत अपने काम पर चला गया और बबिता नहाने.

बबिता नहाने के बाद एक नाइटी पहन बिस्तर पर लेटी थी. मेने भी सिर्फ़ एक गाउन पहना हुआ था.

"तुम राज और उसकी पत्नी के साथ उनके हनिमून पर गयी थी, कैसा रहा, मज़ा आया कि नही." बबिता ने पूछा.

"बबिता हनिमून के बारे में बताने से पहले मैं तुम्हे राज, रश्मि और राज के दोस्त रवि के बारे में बताना चाहूँगी." फिर मेने उसे बताया कि किस तरह मेरा रिश्ता रवि से हुआ और फिर किस तरह में राज और रश्मि के साथ भी खुल गयी.

मेने उसे बड़ी बारीकी से बताया कि किस तरह रवि ने मुझे बहकाया और फिर राज और रश्मि को भी अपने खेल मे शामिल कर लिया. बबिता मेरी बात सुनकर चौंक भी पड़ी और उत्तेजित भी हो गयी.

"हे भगवान प्रीति, मुझे तुमपर विश्वास नही हो रहा. तुम गांद भी मरवा सकती हो, दूसरी औरतों के साथ भी, और आख़िर में नकली लंड के साथ. तुम तो पूरी तरह चुड़क्कड़ हो गयी हो." बबिता हंसते हुए बोली.

"तुम्हारे साथ कैसा चल रहा है बबिता, सीधी साधी चुदाई या तुम लोग भी कुछ नया प्रयोग करते हो?" मेने उससे पूछा.

बबिता ने मेरी तरह सच बताते हुए कहा, "प्रशांत मेरी गंद मारता है, एक बार हम लोग दूसरे जोड़े के साथ भी अनुभव कर चुके है. उस औरत को भी दूसरी औरत के साथ चुदाई करने मे मज़ा आता था."

"क्या तुम्हे दूसरी औरतों के साथ पसंद है?" मेने पूछा.

"पहले तो अछा नही लगता था पर अब लगता है, और जहाँ तक गंद मे लंड लेने का है तो बहोत दर्द होता है पर प्रशांत को पसंद है इसलिए करना पड़ता है. अब तो आदत सी हो गयी है. दूसरी औरत के साथ अच्छा लगा था पर दुबारा कभी मौका नही मिला." बबिता ने कहा.

"अब मुझे हनिमून के बारे में विस्तार से बताओ, मैं सब सुनना चाहती हूँ." बबिता बोली.

मैं बबिता को हनिमून के बारे मे पूरी तरह बताने लगी. मेने एक बात भी उससे नही छुपाई. यहाँ तक कि किस तरह पहले हमे विनोद और शीला मिले, फिर वो दो लेज़्बीयन लड़कियाँ अनीता और रीता, फिर वो दो जोड़े. जब तक मेरी कहानी ख़त्म हुई बबिता उत्तेजित हो चुकी थी और गहरी साँसे ले रही थी.

मेने धीरे से बबिता को अपने पास खींचा और उसके होठों पर अपने होठ रख दिए, बबिता भी मेरा साथ देते हुए मेरे होठ चूसने लगी. मेने उसकी नाइटी उतार दी और उसने मेरा गाउन खोल दिया.

हम दोनो नंगे थे और एक दूसरे को बाहों मे भींच चूम रहे थे. मेने उसके होठों को चूस्ते हुए नीचे की ओर चूमना शुरू किया, पहले उसकी गर्दन को चूमा फिर उसकी चुचियों को चूसने लगी. उसकी चुचियाँ इतनी मुलायम और चिकनी थी की मेने उसके निपल अपने दांतो के बीच ले धीरे से काट लिया.

"ओह क्या करती हो प्रीएटी दर्द होता है ना." बबिता सिसक पड़ी.

फिर नीचे की ओर बढ़ते हुए मैं उसके पेट को चूमने लगी और उसकी नाभि मे अपनी जीब फिराने लगी. मैं और नीचे बढ़ी और अब उसकी जांघों के अन्द्रुनि हिस्सों को चूम रही थी.
 
मेने उसकी टांगो को थोड़ा फैलते हुए अपनी जीब उसकी चूत के मुँह पर रख दी, "ओह आआआअहह ओह." उसके मुँह से सिसकारी निकल पड़ी.

मैं अपनी ज़ुबान उसकी चूत के चारों तरफ फिरा रही थी कि बबिता ने मेरे सिर को पकड़ लिया और उसे अपनी ओर उठाते हुए पूछा, "दीदी तुम सही मे ये करना चाहती हो?"

"हां मैं तो करना चाहती हूँ, क्या तुम भी करना चाहती हो?" मेने उसकी चूत पर जीभ फिराते हुए कहा.

बबिता ने मेरे सिर को अपनी चूत पर दबा दिया और बोली, "ःआआआआण मीयेयिन कायर्नायये चाहती हूओन ऊहह प्रीईएटी मुझे प्याअर कारू."

उसकी चूत से उठ रही सुगंध मुझे बहोत अछी लग रही थी, में उसकी चूत का स्वाद भी लेना चाहती थी. मेने अपनी जीब उसकी चूत मे घुसाइ और चाटने लगी. उसकी चूत का स्वाद उसकी सुगंध से भी बेहतर था.

मेने अपने आपको ठीक उसकी टाँगो के बीच कर लिया और उसकी चूत को चाटने और चूसने लगी. चूत चूस्ते मेने अपनी दो उंगलियाँ उसकी चूत के अंदर डाल दी और अंदर बाहर करने लगी.

बबिता जोरों से सिसक रही थी, "ओह डीईईईड्डी चूऊवसो हाआँ और ज़ोर से ओह अया आआआआज़ तक किसीस ने मेरी चूओत को आईसीई नही चूवसा."

बबिता उत्तेजना मे अपने कूल्हे उपर को उठा मेरी जीब को और अंदर तक घुसाने की कोशिश करने लगी. उसने नीचे से खुल्‍हे उठाए और उपर से मेरे सिर को अपनी चूत पर दबा दिया, मुझे लगा कि मेरी जीब उसकी बच्चेदानि को छू रही थी.

बबिता ज़ोर से चीखी, "हाआँ ख़ाा जाओ मेरी चूऊत को ओह हाां ऑश मेराअ चूऊओटा." कहकर उसकी चूत ने पानी छोड़ दिया.

बबिता की चूत भी मेरी चूत की तरह धार मार कर पानी छोड़ती थी. मैं अपने होठों से उसकी चूत को मुँह में भर लिया और उसका रस का स्वाद लेने लगी. मैं एक एक बूँद चूस चूस कर पी रही थी. मुझे ऐसा लग रहा था कि मेरी जन्मों की प्यास बुझ रही थी.

बबिता निढाल होकर लेटी थी. मैं भी लेट कर अपनी उंगलियाँ अपनी चूत मे डाल अब अंदर बाहर कर रही थी. मेरे बदन मे आग लगी हुई थी और में भी झड़ने को बेताब थी.

बबिता ने जब मुझे मुठियाते देखा तो पूछा, "दीदी क्या में तुम्हारी चूत को छू सकती हूँ?'

मेने अपनी गर्दन हां मे हिलाई और बबिता अब मेरी टाँगो के बीच आ गयी. उसने धीरे से मेरी चूत पर हाथ फिराना शुरू किया.

मेने कई औरतों के साथ समय बिताया था पर ऐसा लग रहा था कि बबिता की उंगलियों मे जादू था. उसके हाथ लगाते ही एक अजीब नशा मेरे शरीर मे छा गया.

बबिता मेरे बदन को चूमते हुए नीचे की ओर आई और मेरी चूत को मुँह मे भर चूसने लगी. वो अपनी जीब को मेरी चूत के चारों और फिराते तो मुझे बड़ा अछा लगता. मैं भी उसकी पीठ को सहलाते हुए उसके चुतताड मसल रही थी.

बबिता ने मेरी जांघों को थोड़ा उठा कर अपने कंधे पर रख लिया जिससे मेरी चूत उपर को उठ गयी. उसने दोनो हाथों से मेरे कूल्हे पकड़ रखे थे और मेरी चूत मे अपनी ज़ुबान अंदर बाहर कर रही थी.

मैं उत्तेजना मे पागल हुए जा रही थी. मेने अपनी टाँगो को उसकी गर्दन मे फँसा लिया था और अपनी चूत को उँचा उठा उसके मुँह मे दबा रही थी.

मुझसे सहन नही हो रहा था, मेरे सारे शरीर मे मानो चीटियाँ रेंग रही थी, में चिल्ला रही थी, "ओह हाआअँ चूऊवसूओ ओह आअहह जूऊर सीई ओह."

बबिता अब और जोरों से मेरी चूत मे अपनी जीब और होठों का कमाल दिखा रही थी. मेरा झड़ने का वक़्त आ गया था मेने अपनी चूत को और दबाते हुए पानी छोड़ दिया, जैसे कोई बाँध टूट गया हो मेरी चूत पानी पर पानी छोड़ रही थी.

वो अपने होठों से मेरा सारा पानी पी गयी फिर ज़ुबान चारों ओर फिरा मेरे रस को चाट रही थी.

मैं निढाल हो अपनी सांसो पर काबू पाने की कोशिश कर रही थी. बबिता मेरे बगल मे लेटते हुए बोली, "प्रीति मुझे नही पता था कि तुम इतनी गरम औरत हो?"

"हां और मुझे भी नही पता थी कि इतनी अच्छी तरह से चूत चूस्ति और चाट्ती हो?' मेने उसके होठों को चूमते हुए कहा.

"मुझे औरतों के साथ सेक्स करने में माज़ा आता है, क्या तुम्हारे पास कोई खिलोने है मज़े के लिए?" बबिता ने पूछा.

"हां दो है जो शायद तुम्हे पसंद आएँगे, वही जो उन लेज़्बीयन लड़कियों ने मुझे मनाली मे दिए थे." मेने उसे याद दिलाते हुए कहा.

"तब तो मज़्ज़ा आ जाएगा, में तो रुक नही सकती, और में रश्मि को भी अछी तरह से जान लेना चाहती हूँ." बबिता बोली.

"ज़रूर तुम्हारे जाने से पहले तुम्हे हर चीज़ का मज़ा मिलेगा ये मेरा वादा है." मेने कहा.

उसके बाद पूरे दिन हम बातें करते रहे. दोपहर को हमारा खेल एक बार फिर चला. शाम को प्रशांत अपने काम से वापस आया और हम दोनो को रात के खाने के लिए बाहर ले गया.

 
राज, रश्मि और रवि ने घर पर ही रहना चाहा. मुझे नही मालूम था कि उन तीनो के दिमाग़ मे क्या था, में तो बस यही प्रार्थना कर रही थी कि जब हम वापस आएँ तो वो अपने कमरे मे हों.

प्रशांत रवि के बारे मे जानने के लिए बहोत उत्सुक था. मेने उसे बता दिया कि रवि राज का जिगरी दोस्त है और कुछ दिनो के लिए हमारे साथ रह रहा है. बबिता मेरी बात सुनकर मुस्कुरा दी.

मेने देखा कि प्रशांत मेरी तरफ कुछ ज़्यादा ही आकर्षित हो रहा था. मेने ध्यान दिया कि जब हम रेस्टोरेंट मे खाने की लिए घुसे तो प्रशांत ने मेरे कूल्हे हल्के से सहला दिए थे. पर उस रात ये हरकत उसने कई बार की पर हर बार अंजान बना रहा.

जब हम तीनो घर पहुँचे तो मेने चैन की सांस ली. राज रश्मि और रवि अपने कमरे मे थे, वरना मेने तो सोचा था कि वो तीनो यही हॉल मे चुदाई कर रहे होंगे.

हम तीनो ने एक दूसरे से विदा ली और में अपने कमरे मे आ गयी. प्रशांत और बबिता गेस्ट बेडरूम मे चले गये. थोड़ी ही देर मे मुझे उनके सिसकने और मादकता के शब्द सुनाई देने लगे. मेने चुप चाप सो गयी, किसी को मेरे और मेरी बेहन के रिश्तों के बारे मे पता नही चला था.

शुक्रवार की शाम मेरी बेहन के नाम

शुक्रवार की सुबह प्रशांत अपने काम से चला गया. मैं और बबिता दोनो दोपहर को खाने के टेबल पर बैठे थे कि रश्मि भी हमारे साथ आ बैठ गयी. शाम तक हम सब बातें करते रहे. बबिता रश्मि के साथ काफ़ी घुलमिल गयी थी.

शाम को मैं सब के लिए चाइ बनाने किचन मे चली गयी. वापस लौटती हूँ तो देखती हूँ कि रस्मी और बबिता नंगे हो सोफे पर 69 की मुद्रा मे हो एक दूसरे की चूत चूस रहे थे.

दोनो एक दूसरे की चूत चूस रहे थे और साथ एक दूसरे की गंद मे उंगली डाल अंदर बाहर कर रहे थे, जब वो दोनो झड़कर अलग हुए तो मेने कहा, "चलो चाइ तय्यार हो पी लो. मुझे तुम दोनो को एक मिनिट के लिए भी अकेले नही छोड़ना चाहिए था." मेने हंसते हुए कहा.

बबिता पहले बोली, "तुम सही कहती थी प्रीति, रश्मि से अछी चूत कोई नही चूस्ता, तभी मैं सोचूँ कि ये इतनी अछी टीचर कैसे बन गयी."

"बहुत आसान काम है बबिता, जब तुम्हारी जैसी गरम और मुलायम चूत सामने हो तो कोई भी चूस सकता, सही बोलू तो चाइ के स्वाद से तुम्हारी चूत का स्वाद मुँह से चला गया, मैं तो एक बार फिर तुम्हारी चूत चूसना चाहूँगी." रश्मि अपने होठों पर ज़ुबान फेरते हुए बोली.

"आज से ये चूत तुम्हारी है, तुम जब चाहो इसे चूस सकती हो काट सकती हो." बबिता ने अपनी चूत पे हाथ फेरते हुए कहा.

"ज़रा आराम से बबिता, तुम्हारे और प्रशांत के सामने अभी तो पूरी रात बाकी पड़ी है." मेने बबिता को याद दिलाते हुए कहा.

"बबिता तुम लोग एक काम क्यों नही करती, दो तीन दिन रुकने के बजाए पूरा हफ़्ता क्यों नही रुक जाते, साथ मे मौज मस्ती करेंगे बहोत मज़ा आएगा." रश्मि ने कहा.

"पता नही, प्रशांत को वहाँ ऑफीस मे काम है और फिर मेरा बेटा सन्नी भी तो सोमवार को घर आने वाला है." बबिता ने बताया.

"बबिता ये घर तुम्हारा है, तुम लोग जितने दिन चाहो यहाँ रह सकते हो. फिर तुम प्रशांत से बात करके तो देखो, शायद कोई रास्ता निकल आए, फिर तुम सन्नी को यही बुला लेना." मेने कहा.

"सुनकर तो अच्छा लग रहा है, में प्रशांत से बात करके देखूँगी." बबिता थोड़ा खुश होते हुए बोली.

"बबिता घड़ी देख लो, आज तुम्हे प्रशांत के साथ बाहर भी तो जाना है, चलो तय्यार हो जाओ?" मेने बबिता को एक बार फिर याद दिलाया.

"हां तुम सही कह रही हो, मुझे अभी नहाना भी है और फिर बाल भी तो बनाना है." कहकर बबिता बाथरूम की ओर जाने लगी.

"अगर तुम्हे ऐतराज़ ना हो तो क्या में तुम्हारे साथ शवर ले लूँ?" रश्मि ने बबिता से कहा.

"मुझे क्या ऐतराज़ होगा, बल्कि मुझे तो मज़ा आएगा." बबिता ने रश्मि का हाथ पकड़ा और उसे अपने साथ बाथरूम मे ले गयी.

"घड़ी पर नज़र रखना, प्रशांत टाइम का पाबंद है, मस्ती मे कहीं तुम समय को ही भूल जाओ." मेने पीछे से चिल्ला कर कहा.

करीब आधे घंटे बाद रश्मि बाथरूम से एक पारदर्शी गाउन पहने आई और सोफे पर बैठ गयी. दस मिनिट के बाद प्रशांत भी आया और पूछा, "बबिता कहाँ है?"

"वो गेस्ट रूम मे तय्यार हो रही है." मेने जवाब दिया. मेने गौर किया कि प्रशांत की नज़रें रश्मि के बदन पर गढ़ी हुई थी. वो उसके पारदर्शी गाउन से झलकते नंगे जिस्म को अपनी आँखों से नाप तौल रहा था.

"मैं भी जाकर तय्यार हो जाता हूँ." प्रशांत ने कहा.
 
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