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मैं कॉलगर्ल कैसे बनी

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दूसरे दिन एमडी सर ने मुझसे बोला- कम्पनी का एक कांट्रॅक्ट किसी कम्पनी के मालिक के पास फँसा हुआ है, जो किसी कीमत पर नहीं मान रहा है. उसे सीधी राह पर लाओ. अगर इस काम में तुम कामयाब हो गई तो तुम्हारी यह नौकरी पक्की और तुम्हें 5 लाख का बोनस भी दिया जाएगा. जाने से पहले यह अपना फोन जो किसी के यहाँ छूट गया था, लेती जाओ. उसे मैंने कह दिया है, अब वो तुम्हें किसी तरह से परेशान नहीं करेगा.

‘जी सर…’ कह कर मैं अपने रूम में आ गई.

फिर मैंने उस कंपनी के मलिक को फ़ोन किया और कहा- क्या हम लोग वीडियो कॉल पर बात कर सकते हैं?

जब वो लाइन पर आया तो मैंने जानबूझ कर अपने को इतना झुका लिया कि मेरे मम्मों और उसकी घुन्डियां भी उसे नज़र आ जाएं.

उसकी नज़र मुझ पर ऐसी टिकी कि वो लहराते हुए बोला- जी.

मैंने अपना परिचय देते हुए कहा कि मैं इस कम्पनी से बोल रही हूँ और आपसे काम के सिलसिले में मिलना चाहती हूँ.

उसने लगभग लार टपकाते हुए कहा- आ जाइए.

तब मैंने कहा- क्या शाम का टाइम मिल सकता है, अगर आपको कोई प्राब्लम ना हो.

उधर से जवाब आया- हां कोई प्राब्लम नहीं है.. मगर आप 8 बजे मेरे ऑफिस में आ पाओगी?

मैंने कहा- ज़रूरत मेरी है… अगर आप ऑफिस में तो क्या जहाँ भी बुलायेंगे, मैं पक्का आऊंगी.

उसने कहा- ओके ठीक 9 बजे आ जाना. अपना कॉंटॅक्ट नंबर मेरी सेक्रेट्री को लिखा दीजिए.

कोई एक घंटे के बाद मेरे पास उसका डायरेक्ट फोन आया. वो बोला- मैडम, अगर आप बुरा ना माने तो आप मुझे इस होटल के रूम नो 123 में मिल सकती हैं.. क्योंकि ऑफिस में आराम से बात नहीं कर पाऊंगा.

मैंने भी हाँ कह दिया कि मैं भी ऑफिस में सहज नहीं रह पाऊंगी.. खास कर आपकी कम्पनी के कांट्रॅक्ट के लिए.

अंधे को क्या चाहिए दो आँखें… मैं भी खुशी से मान गई और दिए गए टाइम पर उस होटल में जा पहुंची. वहां पर वो आराम से बैठा हुआ व्हिस्की पी रहा था.

मुझे देखते ही बोला- आइए आपका ही इंतज़ार कर रहा था.. कुछ पीएंगी?

मैंने कहा- मैं पीती तो नहीं मगर आपको नाराज़ भी नहीं कर सकती इसलिए आप जो कहेंगे मैं करूँगी.

उसने पूरा गिलास सोडा मिला कर मेरे आगे रख दिया और बोला- आप किस फटीचर कम्पनी में नौकरी कर रही हैं.

मैंने कहा कि सर जिसका नमक खाया हो.. उससे नमक हलाली करना ही पड़ता है. अब आपके आगे मेरी इज़्ज़त का सवाल है, आप इस कांट्रॅक्ट पर अपनी हामी भर दीजिए.

उसने कहा- ठीक है मगर उसके लिए आपको पूरा नमक हलाल करना पड़ेगा.

मैंने कहा- मैं आपके साथ कमरे में हूँ, बोलिए क्या करना है मुझे?

वो बोला- ठीक है.. पहले जाम पूरा कीजिए.

उसने मुझे दो तीन जाम पिला कर पूरी तरह से मेरे होश गुम करवा दिए. फिर वो मुझसे बोला- आप अपना अपनी जवानी का जलवा तो दिखाइए.

मैंने कहा- आपने मदहोश कर दिया है.. अब आप खुद ही मेरी जवानी को देख लीजिए.

इतना कह कर मैं खड़ी होकर लड़खड़ाने लगी. उसने मुझे मेरी कमर में हाथ डाल कर संभाला. फिर मैं खुद ही अपने कपड़े उतारने लगी. क्योंकि नशे की वजह से मेरे शरीर में पूरी गर्मी दौड़ रही थी. कुछ ही पलों में मैं सिर्फ ब्रा, जिसका कप सिर्फ मेरे मम्मों को नीचे से ही पकड़ कर रखता था और बाकी पूरी चूचियां साफ़ दिखती थीं.

शराब की मदहोशी के कारण मेरे मम्मों की घुन्डियां खड़ी हो गई थीं. मेरी चुत पर जो चड्डी थी, वो तो बस नाम मात्र के लिए ही थी. इस हालत में वो मुझे देख कर अपना आपा खो बैठा. उसने अपने कपड़े उतार दिए.

उसका लंड भी पूरा लौड़ा बन कर उछाल मार रहा था.

मैंने उससे झूम झूम कर कहा- सर, पहले उन पेपर्स पर साइन कर दीजिए, फिर मेरी चुत में अपना लौड़ा डाल कर जो करना है, मजे से करिए. अगर आप कहेंगे तो मैं पूरा वीक आपसे चुदती रहूंगी. मगर पहले मेरा काम कर दीजिए.

वो लंड सहलाता हुआ बोला- क्यों नहीं क्यों नहीं.. तुमने देखा नहीं, मैं उन पर साइन कर चुका हूँ. इन पेपर को तुम्हारी चूत में एक बार डाल कर इनको भी तुम्हारी चूत का आशिक़ बना दूं, फिर दे दूँगा.

हम दोनों चुदाई की मस्ती में आ गए. बस फिर क्या था.. लंड चुत का घमासान शुरू हो गया. जब चूत ने पानी छोड़ा तो उसने पेपर्स पर जहाँ साइन किए था, उसके नीचे चूत का पानी डाल दिया.

वो बोला- ये लो आप यह पेपर अब तुम्हारे हैं.. इस पर तुम्हारी चूत का ठप्पा भी लग गया है.

मैं उससे बोली- मेरी चूत तो अब आपकी गुलाम बन गई है.. जब बोलोगे हाज़िर हो जाएगी.

इस तरह से आधी रात तक उससे चुदवा कर मैं साइन किए हुए पेपर्स को लेकर वापिस आ गई.

दूसरे दिन ऑफिस ने एमडी से जाकर बोली- लीजिए सर.. आपका काम हो गया.

वो नहीं समझ पाया कि ऐसे भी हो सकता है. जो काम कई महीनों से लटका हुआ था, मैंने एक दिन में कर दिया.

वो बोला- तुम्हारा बोनस तुमको मिल जाएगा.. जैसे ही यह कॉन्ट्रैक्ट नोटिफाइ होता है.

मैंने कहा- सर कोई बात नहीं आप जब चाहें, दे दीजिएगा. मुझे अगला काम बताइए.
 
उसने कहा- मैंने तो इस काम के लिए कम से कम 15 दिन का टाइम सोचा था जो आपने एक ही रात में कर दिया अगला दिन भी नहीं रुकने दिया. अगला काम जब होगा, तब बताऊंगा. अभी आप चाहें तो कम्पनी के गेस्ट हाउस में नैनीताल घूमने जा सकती हो, मज़े मानने के लिए.. सारा खर्चा कंपनी देगी.

अब मैं एक तरफ़ दुनिया वालों की नजर में कंपनी के लिए काम कर रही थे. वहीं दूसरी ओर मैं अपनी चूत में रोज़ नए नए किस्म के लंड, छोटे मोटे लम्बे मोटे पतले हर तरह के लंड डलवाती थी.

अब मेरी चूत बहुत खुली हो गई थी. इसलिए मेरी चूत अब लंडों को वो मज़ा नहीं दे पाती थी, जो वो चाहते थे. हर लंड वाला चूत में लंड फँसा कर मज़े लेना चाहता था और यहाँ तो एक ही झटके में पूरा लंड अन्दर चला जाता था और जब वो आधा निकाल कर धक्का मारना चाहता था, तो मेरी ढीली चूत के कारण उसका लंड पूरा ही बाहर आ जाता था.

एक दिन मैंने डॉक्टर से बात की कि क्या इसका कोई इलाज़ है?

उसने कहा- हां है.

मैं- क्या?

वो बोला- मैं चूत ऑपरेशन करके ऐसा बना दूँगा जैसे कि वो अभी तक किसी से चुदी ही नहीं हो, मगर इसमें एक लाख रुपए खर्च करने होंगे.

मैं मान गई.

तो बोला- कल मेरे नर्सिंग होम में आ जाना.. बस कुछ समय का ही ऑपरेशन होगा मगर चुदाई वन वीक तक बंद हो जाएगी.

अगले दिन मैं उस डॉक्टर के नर्सिंग होम में दाखिल हो गई. वहाँ वो डॉक्टर अपनी एक नर्स के साथ आया और मेरी चूत खोल कर पूरी तरह से देख कर उसके कई फोटो निकाले और मुझे उठने के लिए बोल दिया गया.

फिर डॉक्टर बोला- कल मॉर्निंग में ऑपरेशन करूँगा.

उसने उन फोटोज से ग्राफिक्स से कोई स्केच बनाया और फिर उसको सामने रख कर मेरा ऑपरेशन शुरू किया. उसने कोई औजार लेकर मेरी चुत की चमड़ी को बाहर खींच कर और नीचे मेडिकल वाले धागे से सिल कर मेरी चमड़ी से ही एक छोटा से माँस का टुकड़ा लेकर चूत का दाना बना कर मेरी चुत में सिल दिया और बोला कि अब दो तीन दिनों तक तुम यहीं मेरी देखभाल में रहोगी ताकि तुम चुत को किसी तरह से तंग ना करो.. मतलब कि उंगली वगैरह मार कर खराब कर लो.

दो दिनों के बाद मैंने देखा कि चूत कमसिन जवान लौंडिया की अनचुदी चुत जैसी लग रही थी. चूत का मुँह पूरी तरह से बंद था.

दो दिन बाद डॉक्टर ने मुझे घर भेज दिया और बोला- इससे कोई छेड़छाड़ ना करना और दो दिनों बाद आकर इसकी जांच करवा जाना.

दो दिनों बाद जब मैं गई तो डॉक्टर देख कर बोला- अब तो तुम्हारी चुत, मस्त चूत बन गई है. अब यह चुदने के लिए पूरी फिट है. हां जब पहली बार चुदोगी तो टांका टूटने से कुछ खून की बूंदें भी आ सकती हैं, मगर उतनी नहीं, जब असली सील टूटती है. मगर अब लंड को चूत में डालने के लिए जोर लगाना पड़ेगा. अब यह पुरानी चूत नहीं रही, यह जवान चूत बन गई है. इसको सख्त लंड की जरूरत होगी.

हां तो दोस्तो अब जिंदगी मज़े से चल रही थी. कंपनी में काम भी इज्जतदार था. एमडी या मेरे सिवाये किसी को कुछ नहीं पता था कि मैं क्या क्या करती हूँ. ऑफिस वाले भी मेरी बड़ी इज्जत करते थे. पैसे की भी कोई कमी ना थी. मगर ऊपर वाले की नजरें मुझ पर ठीक नहीं थीं.

एक दिन मैं पूरी तैयारी के साथ किसी अधिकारी से मिलने गई कि उससे काम निकलवा ही लूँगी, मगर बदनसीबी से उसके किसी दुश्मन ने उसे फँसाने का पूरा काम कर रखा था. उसकी शिकायत की जा चुकी थी और पुलिस ने हम दोनों को बंद कमरे में आकर दबोच लिया.

उस अधिकारी को तो पुलिस ने छोड़ दिया क्योंकि उसने किसी खास आदमी से फोन करवा दिया. मगर पुलिस मुझे थाने में ले गई. जब कंपनी के एमडी से पूछा गया तो उसने साफ साफ़ कह दिया मुझे कुछ पता नहीं है कि यह क्या करती है. आप लोग क़ानून के अनुसार इस पर एक्शन लीजिए.

अब मुझे पता लग चुका था कि मैं किसी को भी मुँह दिखाने के काबिल नहीं रही. सिवा आंसू निकालने के मैं कुछ भी नहीं कर सकती थी.

मुझे सुबह तक के लिए उन लड़कियों के साथ रख दिया गया.. जो आवारा व जेबकतरी थीं.

 
तभी आधी रात को एक पुलिस वाला आया और बोला- चलो बड़े साहब ने बुलाया है.

मैं उसके साथ चल पड़ी.

उसने एक कमरे के आगे जाकर मुझसे बोला- जाओ अन्दर केवल साहब ही हैं.

मैं सोच रही थी कि अब साला ये भी मुझसे चूत की सेवा लेगा.

खैर.. मैं जब अन्दर गई तो पहले तो वो एकटक मुझे देखता रहा और बोला- आपको यह सब करते हुए शरम नहीं आती?

मैं कुछ कहने लायक नहीं थी, इसलिए चुप रही.

उसने कहा- बैठ जाओ.

उसने मेरे लिए पीने का पानी मंगवाया और बोला- तुमने खाना वाना खाया या नहीं?

मैंने कहा- साहब यहाँ जान पर पड़ी है, आप खाने की बात कर रहे हैं. मुझे पता नहीं मेरे घर पर क्या हो रहा होगा.

उसने कुछ हमदर्दी दिखाते हुए कहा- मुझे पूरी हमदर्दी है तुम्हारे साथ. मैं तुम्हें यहाँ रखना नहीं चाहता और वैसे भी असली मुजरिम तो ऊपर से किसी के दबाव के चलते निकल गया है क्योंकि वो जा चुका है तो मैं आपको किस कसूर में यहाँ रख सकता हूँ. मैं तुम्हें छोड़ता हूँ. पुलिस की गाड़ी तुम्हें घर छोड़ देगी.

मैंने उससे कहा- मैं आपका शुक्रिया शायद जिंदगी में ना चुका पाऊं. मैं आपको किसी रिश्ते से भी नहीं बुला सकती. अगर कभी मेरी किसी तरह की सहायता की ज़रूरत पड़े तो आधी रात को बुला लीजिएगा. मैं तो यह समझ कर आपके कमरे में आई थी कि आप भी मुझसे वही काम करेंगे, जो सब करते हैं, मगर आपने तो मुझे हाथ भी नहीं लगाया.

यह सुन कर वो बोला- अगर आप मेरी कोई सहायता करना चाहती हैं तो मेरी बहन बन कर कर सकती हैं.

मुझे तो विश्वास ही नहीं हुआ कि यह क्या बोल रहा है. मैं उसके मुँह के तरफ हैरानी से देखने लगी.

तब उसने कहा- मुझ पर कोई केस चल रहा है और जो अधिकारी उस केस की छानबीन कर रहा है, उसके पास जाकर बोलना कि मेरे भाई को छोड़ दीजिए. आप जो कहेंगे मैं करने को तैयार हूँ. वो आपको पूरी रात अपने पास रखेगा और फिर आप जानती ही होगी कि क्या करेगा.

मैंने कहा- यह तो मेरे बाएँ हाथ का काम है भाई साहब. बोलिए कब और कहाँ जाना है?

वो बोला- मैं तुम्हें कल बता दूँगा.

क्योंकि अब मैं छूट चुकी थी तो मैं सुबह रोज़ की तरह से अपने दफ़्तर गई और वहाँ एमडी से मिली. वो मुझे देखते ही बोला कि सॉरी उस वक़्त मैं कुछ नहीं कर पाया मगर बाद में मैंने पुलिस स्टेशन पर फोन कर तुम्हें छोड़ने की रिक्वेस्ट की थी.

खैर अब इस बात पर कुछ भी बोलना बेकार था. इस तरह से यह बात तो दब गई मगर मुझे अभी छूटने की कीमत अदा करनी थी, जो मैं ही जानती थी.

दो तीन दिनों के बाद मुझे सुबह सुबह फ़ोन आया तो पता चला कि उसी पुलिस अधिकारी का फ़ोन है. उसने कहा- आपसे आज मुझे सहायता चाहिए.

मैंने कहा- बंदी हाज़िर है भाई साहब. आप पहले आदमी हैं, जो मेरा चरित्र जानते हुए भी बहन बना कर बात कर रहा है.

तब उसने कहा कि वो अधिकारी आया हुआ है, जिसने मेरे केस की तहकीकात करनी है. आप उसके रेस्ट हाउस में जाकर उससे मिलिए और कहिएगा कि आप मेरी बहन हैं और मैं अकेला ही घर का खर्चा चलाने वाला हूँ और आप मेरी बदमानी सहन नहीं कर पाओगी. अगर मेरे भाई को कुछ हो गया तो मैं जीते जी मर जाऊंगी. मुझे मालूम है कि इसके आगे आप सब संभाल लोगी, वो पूरा अय्याश है.

फिर उसने मुझे उसका पता दिया, जहाँ वो रह रहा था. मैं जब उसके पास गई तो वो शराब पी रहा था और सिर्फ चड्डी पहन कर बैठा हुआ था.

जब मैंने उस के कमरे की बेल बजाई तो वो गालियां देता हुआ बोला- इस वक्त कौन साला बहनचोद आ गया है.

जब उसने दरवाजा खोला तो मुझे देख कर कुछ हिचकिचाया और बोला- आपको किससे मिलना है.

उस वक्त वो सिर्फ कच्छे में था.

मैंने जब बताया, तो बोला- हां वो मैं ही हूँ.. आप बैठिए मैं अभी आता हूँ.

वो दूसरे कमरे में जाकर अपना पजामा और कमीज़ डाल कर वापिस आया और बोला- गर्मी की वजह से मैं आराम से बैठा था. खैर बताइए किस काम से आपका आना हुआ?

जब मैंने उसे बताया अपने आने के मकसद के बारे में तो मुँह में बुदबुदाया कि साले ने अपनी बहन को भेज दिया.

मैंने ऐसे शो किया जैसे मुझे कुछ नहीं सुनाई दिया और मैं कुछ इस तरह से झुक गई ताकि वो मेरे मम्मों के पूरे दर्शन कर ले. मैं कपड़े ही इस तरह के डाल कर गई थी, जिससे उसको यह सब नज़र आ जाए. उसकी कुत्ती नज़रें जब मेरे मम्मों पर पड़ीं तो उसकी हवस भरी आँखें चमक उठीं. इस मैं इतना अधिक झुकी हुई थी कि उसको मेरे मम्मों की घुन्डियां भी दिख गई थीं.

मैंने देखा उस हरामी के पजामे में हरकत होने लगी थी. मैंने सोचा कि लोहा गरम है, इस पर अभी ही अपनी जवानी का गरम हथौड़ा मार देना चाहिए.

मैं उससे बोली- देखिए सर मैं बड़ी उम्मीद से आपके पास आई हूँ. आप मुझ पर तरस खाइए और मेरे भाई को बचा लीजिए.

वो मेरे मम्मों को घूरता हुआ बोला- उसका काम तो ऐसा है कि उसको बचाना मुश्किल है. मगर मैं उसके लिए कुछ ना कुछ जरूर करूँगा क्योंकि उसकी आप जैसी खूबसूरत बहन, जो मेरे पास चल कर आई है.

 
मैंने कहा- सर अगर किसी को कुछ लेना देना हो तो खुल कर बता दीजिए, मैं भाई से कह कर सब कुछ करवा दूँगी.

उसने कहा- नहीं कुछ नहीं चाहिए जब आप ही आ गई हैं तो.. ठीक है आप शाम को आइएगा और घर पर बोल कर आइएगा कि कुछ देर हो सकती है. मैं आपका इसी कमरे में इंतज़ार करूँगा.

मैं मासूम सी शक्ल बना कर बोली- सर मैं ज़रूर आ जाऊंगी, अगर ज़रूरत पड़ी तो पूरी रात भर भी रह लूँगी, मगर आप मेरे भाई का काम तो कर देंगे ना?

पूरी रात रुकने का नाम सुन कर वो अपना लंड सहलाता हुआ बोला- हां क्यों नहीं.. जब आप पूरी रात मेरे साथ गुजार सकती हैं, तो मैं क्या आपका काम नहीं कर सकता. ताली दोनों हाथों से बजती है. कोई देता है और कोई लेता है तभी तो पटाखा बजता है.

मैंने उसके एकदम करीब होकर उसे अपनी जवानी की महक सुंघाते हुए पूछा- सर कितने बजे आऊं और इस बात का किसी को पता तो नहीं लगेगा ना?

उसने मुझे एकदम करीब से फुसफुसाते हुए कहा- आप मुझे शाम को 7 बजे फोन कर देना. मैं खुद ही आप को लेने आ जाऊंगा ताकि किसी को कोई शक ना हो. यहाँ पर कोई भी जासूसी कर सकता है.

इसके बाद मैंने खुद ही अपना हाथ उसके लंड पर इस अंदाज में फेर दिया मानो गलती से लग गया हो.

उसने भी मेरी चूचियों पर अपनी हथेली फेरी और कहा- शाम को मिलते हैं.

शाम तो सात बजे मैंने उसको फोन किया- बताएं सर आप कहाँ पर मिलेंगे?

उसने एक होटल का नाम लेकर जवाब दिया- आप होटल में आ जाओ.. उधर आकर कमरा नंबर एक सौ तेरह में आ जाना.

जब मैं वहाँ पर पहुँची तो वो सिंगल बेड वाला कमरा था. मुझे अन्दर खींचकर उसने कमरे को बंद कर दिया.

वो बोला- आपको पता है ना मैं क्या करने वाला हूँ.

मैंने कहा- जी पता है, तभी तो मैं इस ड्रेस में आई हूँ.

इस वक्त मैंने एक स्कर्ट डाली हुई थी और नीचे कुछ नहीं डाला था. ऊपर एक बहुत खुला हुआ टॉप था, जिसके नीचे मेरे मम्मे बिना ब्रा के पूरे नंगे थे.

मेरी ड्रेस को देख कर बोला- बहुत समझदार हो. अपने भाई को बचाने के लिए खुद को कुर्बान कर रही हो.

मैंने कहा- जी जब मजबूरी होती है तो करना ही पड़ता है.

उसने कहा- तो फिर फालतू की बातें छोड़ो तो काम पर लग जाओ, अपना जलवा दिखाओ और कुछ अगर डान्स वान्स आता हो तो वो भी दिखाओ.

अब तो मैं इन कामों में पूरी पक्की चुदक्कड़ बन चुकी थी. सो मैंने बेझिझक अपने कपड़े उतारे और उसकी गोद में बैठ कर उसके कपड़े भी उतारने लगी. उसने मुझे हाथ लगाना चालू कर दिया.

कुछ ही देर में मैंने उसको भी पूरा नंगा करके मैं उसके सामने सेक्सी डांस करने लगी. अपनी चुत को हिला हिला कर मैं उसको अपनी जवानी दिखाने लगी. बीच बीच में अपनी पूरी चुत को खोल कर भी दिखा देती.. जिससे वो मस्त होने लगा. वो मेरे सामने शराब का गिलास लिए हुए चुस्कियां भर रहा था और सिगरेट के कश खींच रहा था.

फिर उसने अपने लंड की तरफ इशारा किया तो मैंने उसके लंड को पकड़ा और अपने मुँह में ले लिया. उसका लंड कोई ज़्यादा बड़ा लंड नहीं था, बस छह इंच लंबा और दो इंच मोटा था. उसके लंड को चुत में लेना तो मेरे लिए अब बहुत ही आसान था. उसका लंड मुँह में लेकर मैं लंड चूसने लगी. मैंने उसके लंड को तब तक नहीं छोड़ा जब तक उसका पानी नहीं निकल गया. मैं उसका पानी भी गटक कर पी गई.

मैंने उसके लंड का पानी पीते हुए उससे कहा- मैंने आज तक कभी यह रस नहीं पिया है.. लेकिन आपको बुरा ना लगे इसलिए पी लिया है. आप पहले इंसान हैं, जिसके लंड का पानी मैंने पिया है.
 
यह सुन कर वो बहुत खुश हुआ. अब वो मेरे मम्मों को दबाने लगा और मेरे निप्पलों को मुँह में भर भर कर पीने लगा. जब उसका लंड कुछ देर तक खड़ा नहीं हुआ तो मैंने दोबारा से उसके लंड को मुँह से चूसना शुरू कर दिया. मैं अपनी जुबान को उसके सुपारे पर फेरने लगी. इसका नतीजा भी निकल आया और उसका लंड फिर से खड़ा हो गया.

अब उसने कहा- मैं आपके हवाले हूँ, आपको जो भी मेरे लंड से करना है, आप करिए.

मैं उसके खड़े लंड पर बैठ गई और चुत में लंड लेकर ऊपर नीचे होकर चुदाई का मजा देने लगी.

इस वक्त मैं उसे चोद रही थी और वो मेरे मम्मों को दबा रहा था. इस तरह से कुछ देर तक चुदाई के बाद उसका रस फिर से निकल गया और वो झड़ गया. मैंने लाख कोशिश की कि उसका लंड तीसरी बार फिर से खड़ा हो जाए मगर वो ना हो पाया.

तब वो बोला- मैडम, अब ये सुबह सुबह अपना जलवा दिखाएगा. आप इस तरह से मेरे साथ लेट जाएं. क्योंकि बेड एक ही है तो हम दोनों को चिपक कर ही सोना पड़ेगा.

खैर रात भर वो लंड से तो कुछ ना कर पाया मगर ना तो उसने मुझे सोने दिया और ना ही खुद सोया. मेरे मम्मों को दबाता रहा और मेरे निप्पलों को मुँह में लेता रहा.

सुबह लगभग 4 बजे मुझे नींद आने लगी और मैं सो गई. मगर तभी उसका लंड खड़ा हो गया और बिना टाइम खराब किए उसने मेरी चुत में लंड घुसेड़ कर कहा- अब सोना नहीं, चुदना है.

खैर अगले दस मिनट तक वो अपना लंड मेरी चुत में हिलाता रहा और फिर से खलास हो गया.

लगभग सुबह छह बजे मैंने पूछा- अब बोलिए सर, क्या करना है?

वो बोला- अब आप यहाँ से निकल जाइए, मैं आज ही जाकर तुम्हारे भाई का केस रफादफा कर दूँगा. मगर एक बात है, मैं जब भी यहाँ आऊं, तो आप अपनी सेवाएं मुझे ज़रूर दीजिएगा.

मैंने उससे वादा किया और उससे विदा ली.

इस तरह से मैं चुदवा कर अपने मुँह बोले भाई के केस को खत्म करवा आई. मैंने उस पुलिस अधिकारी को फोन भी किया कि भाई तुम्हारा केस ख़त्म हो गया है. क्या मेरा कर्ज़ा चुकता हो गया कि अभी भी कुछ बाकी है?

वो मुझसे बोला- दुनिया की नज़रों में तुम चाहे कुछ भी हो मगर मेरी नज़रों में तुम मेरी बहन ही रहोगी. मैं तुम से कल आ कर राखी भी बंधवाऊंगा.. ताकि तुम्हें कोई शक ना रहे. जो तुमने मेरे लिए अपने शरीर की कुर्बानी की है, उसे मैं कभी भी भूल नहीं सकूँगा
 
अगले दिन वो पुलिस अधिकारी सच में मेरे घर पर आया और मुझसे राखी बँधवा कर बोला- अपने भाई को क्या मिठाई नहीं खिलाओगी?

मैंने कहा- मुझे नहीं पता था कि आप सच में आएंगे, मैं तो इसे एक मज़ाक समझ कर भूल भी गई थी. आप दो मिनट रुकिए, मैं अभी आती हूँ.

मैं झटपट बाज़ार से मिठाई का डिब्बा लेकर आई और उसको मिठाई खिलाई.

उसने मुझे उस डिब्बे में से एक पीस मिठाई का खिलाते हुए बोला- आज से मैं तुमको अपनी बहन मानता हूँ और तुमसे यही चाहूँगा कि तुम ये सब काम छोड़ दो, अगर मेरी किसी तरह की सहयोग की ज़रूरत हो, तो बताना मैं जितना भी हो सकेगा, करूँगा.

इसके बाद वो मुझे कुछ पैसे राखी बंधवाने के देकर चला गया और जाते वक्त फिर बोला- अपने इस भाई को कभी ना भूलना, जो अब तुम्हारा कर्जदार हो चुका है. अब मेरी तरक्की हो जाएगी शायद मैं किसी दूसरे शहर में भी जा सकता हूँ. मगर तुमसे अपना सम्पर्क बना कर रखूंगा. मैं नहीं चाहता कि मेरी बहन, चाहे वो मुँह बोली ही क्यों ना हो, किसी गंदे काम में लिप्त रहे.

उसने मुझसे वादा करने को कहा.

मैंने कहा- मैं वादा तो नहीं करूँगी मगर पूरी कोशिश करूँगी.

मैंने कुछ दिनों तक यह धंधा बंद कर दिया. जो भी फोन आते थे, मैं उनका जवाब ही नहीं देती थी. आख़िर तंग आ कर मैंने फोन से सिम को ही निकाल दिया ताकि फोन ही आना बंद ही जाएं. मगर किस्मत जब साथ ना दे, तो चाहे इंसान जो भी कर ले, वो सब नहीं कर पाता है.. जो वो चाहता है.

एक दिन में किसी मॉल में थी कि पीछे से आकर किसी ने मुझे बोला- कहो मैडम, आजकल क्या कोई नया मुर्गा फंसा लिया है या किसी को चूतिया बना कर उससे शादी करने की सोच रही हो. अगर ऐसा कुछ है तो वो मैं तुम्हें करने नहीं दूँगा.

मैंने देखा वो मेरा एक दलाल था.

फिर वो बोला- एक मिनट बाहर आओ सबके सामने बात करना ठीक नहीं होगा.

मैं उसके पीछे पीछे बाहर आ गई. वो मुझे अपनी कार में बिठा कर बोला- एक बात सुन लो मेरी पाली हुई चिड़िया. तेरे पंख मेरे पास हैं, तू चाहे तो भी उड़ नहीं सकती. तू मेरा धंधा चौपट करना चाह रही है ना.. वो मैं तुझे करने नहीं दूँगा. अगर आराम से नहीं मानी तो उठवा लूँगा.. फिर मुझसे कुछ भी मत बोलना. एक बात साफ़ साफ़ सुन लो, आज तू मेरे से ही चुदेगी और टाइम पर आ जाना वरना मुझसे बुरा कोई नहीं होगा. फिर जिसके पास मैं बोलूं, वहाँ जा कर चुदवा आना. मेरे साथ किसी किस्म की चालाकी नहीं चलेगी.. समझ गई ना? अब निकल कार से बाहर और शाम तो चुदने के लिए आ जाना. अपनी चुत पूरी सफाचट करके आना. बहुत दिन से लगता है तुम मुझे गोली दे रही हो. आज मैं तेरी चुत में डंडा दूँगा, ताकि उसकी खुजली फिर से शुरू हो जाए.

मैं किस्मत को कोसती हुई वापिस मॉल में आ गई.

मुझे वहाँ पर कुसुम मिल गई. मुझे देखते ही बोली- हैलो कैसी हो.. आजकल तुम्हारा बिजनेस कैसा चल रहा है?

मैंने जब कुछ जवाब नहीं दिया तो वो बोली- मुझसे क्यों नाराज़ हो.. बता ना?

मैंने उसको बताया कि आज शाम को उस दलाल ने बुलाया है मुझे चुदवाने के लिए.

कुसुम का जवाब था कि तो क्या हुआ.. यह सब तो चलता है यार अपने बिजनेस में.. अब तो हम लोगों के लिए लंड को चुत में लेना कोई खास बात नहीं है. जैसे प्यास लगते ही हम पानी पी लेते हैं, उसी तरह से चूत में लंड भी डलवा लेती हैं.

मैं उसकी तरफ हैरानी से देख रही थी.

मुझसे वो बोली- एक बात हमेशा के लिए दिमाग में रख ले. जब तक शक्ल ठीक ठाक है और मम्मे नहीं लटक जाते, तब तक चुत का धंधा चलता रहेगा और तू चलती रहेगी. उसके बाद में जैसे मैं तुमको ढूँढ कर लाई थी, उसी तरह तुम भी किसी मुसीबत की मारी को खोज कर लाओगी और उससे कमीशन लेकर ग्राहकों के आगे पेश करोगी.

मैंने कहा- ठीक है.

मैं वापिस आ गई.
 
मगर शाम आते आते ही मुझे समझ में आना शुरू हो गया कि अगर मैं उस दलाल के पास नहीं जाती तो वो कुछ गुंडे मेरे पीछे लगा देगा और फिर मेरा क्या हाल होगा, उसका सोचना ही मुश्किल है. इन सब बातों तो ध्यान में रख कर मैं उसके बताए हुए पते पर चल पड़ी. हां जाने से पहले मैंने अपनी चुत की झांटों को पूरी तरह से साफ़ करके चुत को पूरी मुलायम कर लिया.

जब वहाँ पहुँची तो देखते ही मेरे होश उड़ गए. क्योंकि उसने चार लड़कों को बुला रखा था और पता नहीं उन सबसे क्या बोला था कि सबके सब नंगे अपना लंड खड़ा किए हुए बैठे थे.

मुझे देखते हो वो बोला- यारो, आपका माल आ गया है, अब जाम कर इसकी चुत की सिकाई करो. साली आजकल बहुत फुदक रही है. बड़ी सती सावित्री बनने चली थी.

यह सुनते ही वो चारों लड़के मुझ पर टूट पड़े और मुझे पूरी नंगी करके मेरी चुत, मेरे मम्मों को, मेरे होंठों को चाटने में लग गए.

पता नहीं उनको कितने दिनों से चूत की तलाश थी. कभी एक मेरी चुत में अपना लंड डालता था और दूसरा उसको धक्का मार कर अपना लंड डाल देता था.

इस तरह से चारों ने मिल कर मुझे बुरी तरह से चोद कर ही दम लिया. इसके बाद वो तो वहाँ से चले गए. मगर दलाल वहीं बैठा रहा, वो बोला- बोल, अब कभी मुझे अनदेखा करेगी.

इसके बाद वो अपना लंड मेरी चुत में डाल कर धक्के मारने लगा. उन चारों से चुदने के बाद मेरे जिस्म में कोई जान बाकी नहीं बची थी. मगर वो छोड़ने को नहीं तैयार ही नहीं था. जब तक उसके लंड ने मेरी चुत में अपना रस नहीं निकाल लिया, तब तक वो धक्के पर धक्का मारता रहा.

चोदने के बाद वो मुझसे बोला- चल अब निकल यहाँ से.. आज की चुदाई का कोई पैसा नहीं मिलेगा, यह इस चुदाई की पूरी कमाई मेरी है, जो तुमने इतने दिनों तक मेरा नुकसान किया है.. और सुन जाने से पहले यह सुनती जा कि कल जैसे ही मेरा फोन आए, बिना कुछ सोचे बिना चड्डी ब्रा पहने आ जाना. तुम्हें पूरी चुदाई की फीस मिल जाएगी.

मुझे घर पर पहुँचे अभी एक घंटा भी नहीं बीता था कि उसका फोन आ गया. कल सुबह फार्म हाउस पर तुम्हें फिक्स किया है. तुम्हें कार घर के पास वाले बस स्टॉप पर मिल जाएगी.. समझ गई ना. चड्डी ब्रा नहीं डालनी है, बाकी क्या डालना है.. तुम खुद ही होशियार हो.

मुझसे बिना कुछ जवाब लिए उसने फोन काट दिया. दूसरे दिन सुबह सुबह मैं रोते हुए तैयार हो गई. एक ढीला सा टॉप, जो काफ़ी खुला हुआ था, डाला. इस टॉप में जैसे ही जरा सा भी झुकती तो मेरे मम्मे पूरे ही नंगे हो जाते थे. एक स्कर्ट डाली जो काफ़ी खुली हुई थी और घुटनों के काफी ऊपर तक की थी. अगर बैठने की कोशिश भी करूँ, तो पूरी चूत नंगी हो जाती थी.

खैर जब जाना था तो उसके कहे के मुताबिक ही जाना था. जब बस स्टॉप पर आई तो कार खड़ी हुई थी. ड्राइवर ने पिछला दरवाजा खोला और मुझे बैठने को कहा. वहाँ पर एक 45 से 47 साल का कोई आदमी पहले से ही बैठा था. मेरे बैठने की देर थी कि उसने मेरे टॉप में हाथ डाल कर मेरे मम्मों को दबाना शुरू कर दिया. कुछ देर बाद उसने अपना दूसरा हाथ मेरी चुत में डाल दिया. इस तरह से वो सारे रास्ते मेरे आमों को दबाता रहा और चूत में उंगली भी करता रहा.

इसका असर यह हुआ कि मेरे मम्मों की घुन्डियां अकड़ गईं और चूत भी पानी छोड़ने लग गई.

जब फार्म हाउस में कार पहुँची तो वो आदमी जो मेरे साथ बैठा था, निकल कर अन्दर भाग गया और फिर बाहर आकर बोला- चलो अन्दर.

जब अन्दर जा कर देखा तो कोई 70 साल का बुड्डा सोफे पर बैठा था और उसके पास एक बीस बाइस साल का लड़का खड़ा था.

मुझे आते देख कर वो उस लड़के से बोला- मुझे यहाँ पर अब अपनी जवानी का जोश इस लड़की के साथ दिखाओ.

वो तो शायद इसी आदेश का ही इंतज़ार कर रहा था. वो लड़का मुझ पर इस तरह से झपटा, जैसे चूहे पर कोई बिल्ली झपटा मारती है. उसने मेरी शर्ट और टॉप को उतारने के लिए एक पल भी नहीं लगाया.

जैसे ही उस बुड्डे ने मेरी सफाचट चुत देखी तो बोला- ज़रा इसको मेरे पास लाओ.

जैसे ही उस लड़के ने मुझे उस बुड्डे के पास धकेला तो बूढ़ा मेरी चुत पर मुँह मारने लगा. उस बुड्डे की उम्र मेरे दादा जी से भी बड़ी थी, मगर यहाँ मैं सिर्फ एक चूत की मालकिन थी, जिसको वो चूसना चाहता था. बूढ़े के मुँह में एक भी दाँत नहीं था, वो चुत के अन्दर तक अपनी ज़ुबान डाल डाल कर चूस रहा था.

कुछ देर बाद मुझे उसने लड़के की तरफ धकेला और बोला- करो जो करना है.

वो लड़का तो पहले ही अपना खड़ा लंड अपने हाथ में लिए हुए था, झट से मुझे नीचे डाल कर मेरी टांगें चौड़ी करके अपना लंड मेरी चुत में पेल दिया और फिर धक्के पर धक्का लगाने लगा.

ये सब देख कर बूढ़ा उसे उकसाए जा रहा था- हां बेटा, ज़रा जोर से चोदो, यह तुम्हारी बहन नहीं है.. इसकी चुत चोदने के पैसे दिए हैं, आज अच्छी तरह से चोदो ताकि मैं भी पूरी ब्लू फिल्म देख सकूँ.

 
लड़का ज़ोर ज़ोर से धक्के मारते हुए मेरे मम्मों को भी काट रहा था.

बूढ़ा बार बार बोल रहा था- साले हराम की औलाद अभी तेरा लंड बाहर क्यों है भोसड़ी के.. इसे पूरा अन्दर डाल कर चोद ना.

पूरा आधा घंटा मुझे चोदने के बाद उसका लंड बाहर निकला.

इस पर बूढ़ा बोला- इसे मेरे सामने खड़ी कर दो और इसके पैर चौड़े करके मेज से बाँध दो और हाथ पीछे की तरफ से बाँध दो. मैं इसको पूरी तरह से आज नंगी देखना चाहता हूँ.

मुझे बाँध दिया गया.

बुड्डा बहुत देर तक मेरी चुत में उंगली करता रहा. फिर उसने लड़के को बुला कर कहा- अब तू इसको कुतिया बना कर चोद. इस लड़की का सेक्स पूरा निकाल दे आज!

उसे लगा जब पूरी तरह से चुद गई तो बूढ़ा बोला- अब मैडम जी जाने से पहले मेरे लंड को भी चूस लो.. यह तो कुछ करने के काबिल रहा नहीं.

लगभग बीस मिनट तक उस बुड्डे का लंड बहुत चूसा, मगर वो तो अपना जलवा बहुत पीछे छोड़ आया था. उसमें ज़रा सी भी हरकत नहीं हुई.

इसके बाद बुड्डे ने किसी को फ़ोन किया तो पता चला कि उसने उसी दलाल से बात की थी. वहाँ से जवाब आया कि इसको 20 हजार दे दो. इससे मैं खुद ही हिसाब कर लूँगा. हाँ इसे छोड़ने का पूरा इंतजाम करवा देना, इस पर जो मेरे साथ गाड़ी में आया था. उसको बुलवाया और बोला कि इसको वहीं छोड़ कर आईयो जहाँ से लाए थे.

इससे पहले कि वो मुझे चुदाई की रकम देता, उस आदमी ने बुड्डे के कान में कुछ कहा.

बूढ़ा बोला- बहनचोद साले हरामी, पहले क्यों नहीं बताया.

फिर बोला- ठीक है पैसे मैं बाद में दूँगा, ज़रा मुझे अपनी जवानी का एक जलवा और दिखा कर जाओ.

फिर उसने उस आदमी से आँख मारी. वो भी मुझ पर टूट पड़ा और मेरी चुदाई करने लगा. जब मैंने कुछ आनाकानी की तो बुड्डा बोला- ओ रंडी साली बहनचोद चकले की औलाद, मुझसे मुँह लगाती है. चुद इससे गांड उछाल उछाल कर.. जैसे मैं बोल रहा हूँ वैसे चुद मादरचोद.

मैं बेबस थी.

फिर वो उस आदमी से बोला- तुम नीचे लेट जाओ, यह तुम्हारे ऊपर चढ़ कर तुम्हारा लंड चूत में खुद ही डालेगी, जिससे पता लगेगा कि यह तुमको चोद रही है… ना कि तुम इसको.

सिवा उसके कहना मानने के अलावा मेरे पास कुछ नहीं था. मैं उसके खड़े हुए लंड को चुत में डाल कर चुदने लगी.

इधर बूढ़ा परेशान कर रहा था- साली हरजाई जोर जोर से लगा धक्के.. उसके लंड पर..

जब मैं धक्के मार रही थी तो वो उस आदमी से बोल रहा था- बहनचोद साले हरामी की औलाद, लड़की के मम्मे क्या तेरा बाप खींचेगा. खींच साले ताकि उस पर तेरे हाथों के निशान पड़ जाएं, इसको जो पैसे देने है, वो निशान ही हमारी रसीद होगी.

जब मैं उस आदमी से भी पूरी तरह से चुद गई तो उसका लंड भी पानी छोड़ते हुए बाहर निकल गया.

तब मैं बोली- अभी भी कोई बाकी है क्या?

इस तरह से मैं चुद चुदा कर वापिस आ गई. मैं सोचती रही कि मैं क्या करूँ जिससे इन सब चीजों से छुटकारा मिल जाए.

रात को मेरी आँखों में नींद नहीं थी, बहुत सोचने के बाद मैंने उसी पुलिस अधिकारी से बात करने की सोची, जिसने मुझे अपनी बहन कहा था. जब फोन किया तो उधर से आवाज़ आई कि बहन बताओ क्या हुआ?

मैंने उससे अपने पर जो बीती थी, बताई तो उसने कहा- ठीक है, मैं तुमसे कल सुबह बात करता हूँ.

सुबह उसने मुझसे कहा- तुम अपना पासपोर्ट बनवा लो, फिर मैं तुम्हारी पूरी हेल्प करूँगा, जिससे तुम इस दलदल से पूरी तरह से निकल जाओगी.
 
दूसरे दिन सुबह मेरे पुलिस ऑफिसर भाई का फोन आया- जब तुम्हारा पासपोर्ट बन जाए तो तुम मुझे बताना, मैं तुम्हारा वीज़ा लगवा दूँगा और तुम्हें उधर नौकरी भी मिल जाएगी.. मगर यह बात किसी से भी ना बताना क्योंकि जब भी कोई अच्छा काम सोचा जाता है तो बहुत सी अड़चनें आ जाती हैं. कुछ बिन बुलाए आ जाती हैं और कुछ खुद बुलवा कर आ जाती हैं. अगर तुमने किसी से कुछ भी कहा तो यह बुलाई हुए अड़चन ही होगी. यहाँ दोस्त कम और दुश्मन ज़्यादा मिलते हैं फिर तुम्हारे तो बहुत से खास दोस्त हैं, जो काम बनते हुए भी बिगाड़ना चाहेंगे.

मैंने कहा- भाई जब आप जैसा किसी का भाई हो तो उसे किसी और की कोई चिंता नहीं होगी. मैं मर भी जाऊंगी तब भी अपने मुँह से कुछ नहीं निकालूँगी.

इस घटना के बाद मैं चुप हो गई और अपने पासपोर्ट बन कर आने की राह देखने लगी. कुछ दिनों बाद मेरे पास पासपोर्ट बन कर आ गया. मगर मुसीबत पीछा नहीं छोड़ती.. जिस ऑफिस से पासपोर्ट बन कर आया था, वहाँ के किसी आदमी ने मुझे चोद रखा था, तो उसको पता लग गया और उसने उस दलाल को भी इस बारे में बता दिया.

उसी शाम को दलाल का फोन आया- तू शाम को मिलना, कोई कस्टमर तुम्हें मिलना चाहता है.

मैंने उससे बचने की बहुत कोशिश की मगर उसने मुझे डरा धमका कर उसकी बात मानने पर मजबूर कर ही लिया. साथ में मेरी चुत में भी चींटियाँ रेंग रही थीं, सो मैंने भी उसकी बात मान ली.

जब मैं उसके पास गई, तो वहाँ उसके सिवा और कोई नहीं था.

मुझे देखते ही वो बोला- तो मेरी चुदक्कड़ रानी अब विदेशों में उड़ना चाहती है.

मैंने कहा- क्या बोल रहे हो?

मुझे जवाब मिला कि बहुत ज्यादा बनने की कोशिश ना करो, जो पासपोर्ट आया है ना.. उसे मेरे हवाले करो, फिर मैं तुम्हारे लिए खाड़ी के देशों में ग्राहक ढूँढता हूँ.

जब मैंने कोई जवाब नहीं दिया तो उसने मेरे करीब आकर मेरे मम्मों को बहुत जोर से खींचा और गुर्रा कर बोला- सुन रही है ना.. क्या बोला है.

मेरे मम्मों को इतनी जोर से खींचा गया था कि मेरी चीख निकल गई.

वो हंसते हुए बोला- अभी तो एक चीख निकली है.. अगर मुझसे कोई पाटेबाज़ी की.. तो साली चीखें निकलवा कर रख दूँगा. कुत्ते से चुदवा कर तुम्हारी डीवीडी बना लूँगा, जब कुत्ते का लंड चुत में जा कर फंसेगा तो उसकी गांड से तेरी गांड आगे पीछे हो जाएगी.. फिर तुझे पता लगेगा.

वो मुझे कुत्ते कुतिया की चुदाई के बाद दोनों की चुत लंड फंसने के सीन के बारे में बताता हुआ डरा रहा था.

मैंने उससे कहा- तुम जहाँ जहाँ जाने की बोलते हो, मैं वहीं तो जाती हूँ.. जो जो वो कहते हो, वो ही तो करती हूँ. कभी तुमसे पैसे की कोई बात नहीं की, फिर भी तुम मुझ पर शक़ करते रहते हो. क्या चाहते हो? मैं आत्महत्या कर लूँ? पासपोर्ट बनवाया है, मगर क्या बाहर जाना कोई इतना आसान है? उसके लिए बहुत से पापड़ बेलने पड़ते हैं. इतना आसान नहीं है, जितना तुमने सोच लिया. लगता है तुम्हें कोई बहका रहा है. एक बात और सुन लो अगर मैं अपनी औकात पर आ गई ना तो फिर तुम भी बच नहीं पाओगे. मुझे क्या है जब मैं हज़ारों बार अनेकों लौड़ों से चुद चुकी हूँ तो और चार-पांच पुलिस वालों से भी चुद लूँगी. तब मैं तो मरूँगी ही मगर तुमको भी साथ लेकर मरूँगी.

यह सब सुन कर वो ढीला हो गया और मुझे चूमते हुए बोला- ठीक है अब कुछ नहीं कहूँगा. मगर तुम मेरे कस्टमर्स का ख्याल रखती रहना. क्या करूँ यही तो मेरा धंधा है और यही मेरी रोज़ी रोटी है.

मेरा भी चुदाई का मन था तो मैं भी उसके साथ प्यार से पेश आने लगी. मैंने साथ में ये भो सोचा कि इससे फिलहाल बना कर रखने में ही भलाई है. दो चार बार और चुद जाउंगी तो कौन सी चुत खर्च हो जाएगी.

उसने मुझे अपनी बांहों में भर लिया और बोला- चल आज मुझे अपना सुख दे दे.

मैंने भी खुद को उसे सौंप दिया और अगले कुछ ही पलों में उसके सामने नंगी होकर बिछ गई. उसने मुझे पूरी बेदर्दी से चोदा, आज उसकी चुदाई से मुझे भी मजा आ रहा था. उसका लंड मुझे आज बहुत मजा दे रहा था. मैंने भी उसके लंड को पूरी संतुष्टि दी और घर आ गई.
 
उस रात को भाई से बात हुई तो मैंने उसको भी सब बता दिया.

उसने कहा- ठीक है तुम फिक्र ना करो अब जो काम करना होगा, मैं यहीं से करूँगा ताकि किसी को कोई भनक ना लगे.

उसका कोई दोस्त सिंगापुर में रहता था. उससे उसने बात की थी. उस दोस्त को उसने कहा था कि मैं तुम्हारे पास अपनी कज़िन को भेज रहा हूँ. उसे कोई काम दिला देना.

भाई ने अपने फ्रेंड को मुझे अपनी कज़िन कह कर बताया था. दोस्त ने भी भाई को आश्वासन दिया कि ठीक है उसको यहाँ किसी बिजनेस में लगा दूँगा, जिससे वो अपना काम खुद ही करती रहेगी. उसका वीज़ा भी बनवा कर भेज दूँगा. क्योंकि वो तुम्हारी कज़िन है, तो मेरी भी कज़िन ही हुई ना. मैं उसे उतनी ही रेस्पेक्ट दूँगा, जितनी वो उसके काबिल है. मैं उसमें और अपनी बहन में कोई अंतर नहीं रखूँगा.

भाई के मुँह से अपने लिए जब ये जाना तो मेरा दिल अन्दर से रोने लगा कि क्या दुनिया ऐसे भी हो सकती है. क्योंकि अभी तक का मेरा अनुभव था कि सभी लोग जैसे ही कोई पराई लड़की देखते हैं, तो उनका ध्यान उस लड़की के मम्मों और चूत पर ही जाता है कि किस तरह से इसको हासिल करके चुदाई के लिए इस्तेमाल किया जाए.

अब मैं दिन गिन रही थी कि किस दिन यहाँ से छुटकारा मिलेगा. एक दिन मुझे 99 से 100 डिग्री के बीच में बुखार था, मेरा जिस्म पूरी तरह से टूट रहा था.

मुझे उसी दल्ले का फोन आया कि होटल के कमरा नंबर 213 में जाकर ग्राहक से मिलो.

मैंने कहा कि मुझमें चलने की भी ताकत नहीं है.

तो उसने कहा- तुम तैयार हो जाओ, तुम्हारी ताक़त तू खुद ही बन जाएगी.

मैंने रोटी पीटती किस्मत को गालियां देती हुई किसी तरह तैयार हुई और होटल में पहुँच गई.

मुझे बुखार था और होटल में एसी चल रहा था इसलिए मेरा शरीर कांपने लगा.

इस पर वो लड़का जो मुझे चोदने के लिए आया था. उसने शराब का भरा हुआ गिलास मेरे मुँह में लगा दिया और बोला- लो पियो और पूरी गरम हो जाओ, क्यों कांप रही हो.

शराब के अन्दर जाते ही मैं भी खुद को तरोताजा महसूस करने लगी और मैं चुदवाने के लिए तैयार हो गई.

अब कमरे में एक चुत और दूसरा लंड था, जो एक दूसरे को देख रहे थे और दंगल होने की राह देख रहे थे. दोनों को आपस में भिड़ने के लिए ज़्यादा समय नहीं लगा. उसका लंड बोल रहा था कि ओ साली चुत, मैं आज तुझमें समा जाऊंगा.

चूत बोल रही थी कि आ जा भोसड़ी के आज मैं तुझको अपने अन्दर हजम कर लूँगी.

कुछ देर तक एक दूसरे को देखने के बाद आख़िर लंड को जोश चढ़ गया और उसने चूत पर हमला कर दिया. चूत तो जैसे इंतजार कर रही थी, उसने भी अपना मुँह खोल कर लंड को पूरा गटक लिया.

अब दोनों में घमासान होने लगा. जैसे ही लंड धक्का मार कर बाहर आना चाहता था, चूत उछल कर उसे बाहर जाने से रोक देती थी.

इसी घमासान में आख़िर लंड का पसीना छूट गया और वो ढीला होकर बाहर आ गया. मगर वो लौंडा पूरा कमीना था, उसका लंड जैसे ही चुत से बाहर आया, वो मेरे मम्मों पर टूट पड़ा और मुँह से चूसने और काटने में लग गया.

थोड़ी देर बाद उस हरामी का लंड फिर से खड़ा हो गया और वो फिर से चूत में लंड पेल कर धक्के मारने लगा.

चूंकि मुझे बुखार था, मैं ढीली पड़ती जा रही थी मगर वो छोड़ ही नहीं रहा था. जब उसके लंड का पानी निकल गया तभी उसने मुझको छोड़ा.

मगर वो बोला- अभी ऐसे ही नंगी पड़ी रहो.. मैं दिल में भर कर तुम्हारी नंगी चूत को अपनी आँखों में बसा लेना चाहता हूँ.

कुछ देर बाद उसने मुझे छोड़ा और बोला- अब जाना चाहो तो जाओ, जहाँ भी जाना है.

इस तरह से मैं बुखार में भी चुद कर वापिस घर पर आ गई. दूसरे दिन मुझे बुखार और तेज हो गया. मगर वो दलाल मेरा पीछा ही नहीं छोड़ रहा था.

वो बोला- तुमको आज के लिए भी फिक्स किया है.

मैं बोली- आकर देख पहले मेरी हालत को.. क्या मैं चुदने जाने लायक हूँ या हॉस्पिटल जाने के काबिल हूँ. अब मैं पूरा एक हफ्ता किसी के पास नहीं जा सकती.

दो दिनों बाद भाई का फोन आया- तुम चिंता मत करो, अगर प्राब्लम है तो मेरे शहर में आ जाओ, मैं तुम्हारा रहने का प्रबंध कर दूँगा. अब बस कुछ दिनों की बात है, फिर तुम इस दलदल से हमेशा के लिए छूट जाओगी.

वो दल्ला तो मेरे पीछे पड़ा हुआ था. एक हफ्ते के बाद पूछने लगा- बोलो, कब से प्रोग्राम फिक्स करूँ?

मैं बोली- अभी एक दो दिन रूको.

इस बीच मैंने अपना सामान पैक कर लिया और बाहर के शहर में चली गई. उसका फोन आता रहा, मगर मैंने कोई जवाब नहीं दिया और फिर फोन का सिम ही तोड़ दिया.

भाई की मेहरबानी से उसके दोस्त ने मेरा सिंगापुर का वीसा लगवा दिया और मुझे वहाँ पर काम भी दिलवा दिया. इस तरह मैं इस गंदी जिंदगी से निकल कर बाहर आई हूँ.

अब मैं सिंगापुर में रह रही हूँ. अब मैंने अपने बाल कटवा कर अपनी शक्ल भी बदलवा ली है. इधर किसी को कुछ पता नहीं है कि मेरा भूतकाल कैसा था. मैं अब यहां पर इज्जत की जिंमगी बसर कर रही हूँ. मैंने उन सब लोगों से पूरी तरह से रिश्ते तोड़ दिए हैं, जिनको मेरे बारे में कुछ भी पता है या था.

लोग कहते हैं कि पुलिस वाले बहुत गंदे होते हैं, मगर सभी को एक ही तराजू में तौलना ठीक नहीं है. इस गंदी जिंदगी में ही मुझे एक इंसान ऐसा मिला, जो पुलिस में काम करता है और मेरे बारे में सब कुछ जान कर भी मुझसे राखी बंधवाकर मुझे अपनी बहन मानता है.

वो मेरा सगा भाई नहीं है मगर मेरे लिए सगे से भी बड़ा है.

समाप्त

 
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