मैं और भैया मार्केट पहुँच चुके थे और मैने एक बुक शॉप से जो बुक्स लेनी थी वो भी ले ली थी. अब मुझे भूख लगी तो मैने भैया को कुछ खिलाने के लिए बोला. भैया ने बाइक स्टार्ट की मुझे पीछे बिठाया और हम पास में ही एक बहुत ही अच्छे रेस्टौरेंट में जाकर बैठ गये. हमने जूस ऑर्डर किया और करूँ भाभी का वेट करने लगे. भैया ने फोन करके भाभी को उसी रेस्टौरेंट पे आने को बोला था. हमने जूस ख़तम ही किया था कि एक बहुत ही सुंदर लड़की अपनी स्कॉटी स्टॅंड पे लगाकर हमारी तरफ आने लगी. जैसे ही वो हमारे पास आई तो भैया ने उठ कर उसे हग किया और कहा.
हॅरी-रीतू ये है तुम्हारी भाभी करुणा.
मैने भी उठ कर भाभी को गले लगाया और उन्हे बैठने के लिए कहा. वो हमारे साथ ही बैठ गई और भैया ने भाभी से पूछा.
हॅरी-कुछ पियोगी करू.
करू-यस तुम्हारा खून.
भाभी की बात सुनते ही मुझे हँसी आ गई.
हॅरी-अब क्या हुआ यार.
करू-मुझे ये बताओ तुमने मना क्यूँ किया था मिलने से.
हॅरी-करू यार अब छोड़ भी पुरानी बातें देख रीतू तुझसे मिलने आई है.
मैने देखा भैया मेरा नाम लेकर डाँट से बचना चाहते थे.
मे-नो नो भाभी हम बाद में मिलेंगे पहला आप भैया का खून पियो जी भर के.
मेरी इस बात से भाभी और भैया दोनो मुस्कुराने लगे और भाभी हँसती हुई बोली.
करू-हॅरी ये बिल्कुल वैसी ही है जैसा तुमने बताया था. एकदम क्यूट सी गुड़िया.
अब भाभी को क्या पता था कि उनकी इस क्यूट सी गुड़िया ने कैसे अपने जलवे दिखाकर आकाश के होश उड़ा रखे हैं.
हॅरी-हां करू ये हमारे घर में सबसे प्यारी है शादी के बाद तुझे भी इसका पूरा ख़याल रखना पड़ेगा.
करू गुस्से से भैया को देखते हुए बोली.
करू-शादी तो तभी होगी जब तुम बात आगे बढ़ाओगे. एकदम घोन्चु हो तुम.
मैं 'घोन्चु' वर्ड सुनते ही फिरसे हँसने लगी और धीरे से कहा.
मे-भैया का दूसरा नाम 'घोन्चु'
भैया को मेरी कही ये बात सुन गई और वो बोले.
हॅरी-रीतू तू भी इसके साथ मिल गई.
करू-मेरी ननद है वो मेरा ही साथ देगी.
हॅरी-तुम्हारी ननद बाद में है पहले मेरी बेहन है वो समझी.
करू-अरे तो जल्दी से अपने पेरेंट्स से बात करो ना शादी की ताकि ये रीतू मेरी ननद बने और में इसे जी भर के प्यार करू.
भाभी की बात सुनते ही मेरे दिमाग़ में घंटी बजी 'कहीं करू भाभी लेज़्बीयन तो नही'
हॅरी-करू यार मुझे समझ नही आ रहा मैं कहाँ से बात शुरू करू मम्मी पापा के साथ.
करू-मुझे नही पता मैने भी तो अपने मम्मी पापा से बात की है अब तुम क्यूँ नही कर रहे हो.
अब मैने उन्हे रोकते हुए कहा.
मे-अटेंशन प्लीज़. इस मामले में मैं आपकी हेल्प कर सकती हूँ.
मेरे मूह से ये बात सुनते ही वो दोनो अपनी कुर्सी' उठाकर बिल्कुल मेरे पास आ गये और भाभी उत्सुकता के साथ बोली.
करू- वो कैसे रीत. वैसे मुझे पता है मेरी स्वीतू ही ये काम कर सकती है.
हॅरी-हां हां स्वीतू बता ना कैसे.
मे-आप लोग शादी की टेंशन छोड़ दो.
मेरी बात सुनते ही भाभी बोली.
करू-ये लो भाई घोन्चु और बेहन महा घोन्चु. अरे पागल अगर टेंशन ही छोड़ दी तो शादी कैसे होगी.
मे-ओह हो भाभी पूरी बात तो सुनो. मेरा मतलब था कि शादी की बात मैं करूँगी घर में आप टेंशन मत लो मगर मेरी भी एक शर्त है.
करू-अरे तू बोल ना मुझे सारी शर्तें मंज़ूर है.
मे-देखो देखो कितनी जल्दी है शादी की.
करू-जब तेरे सामने ऐसी सिचुयेशन आएगी ना तब पूछूंगी तुझसे.
मे-ओक ओके अब शर्त सुनो.
'मुझे एक मोबाइल चाहिए वो भी महंगा वाला'
करू-अरे बस इतनी सी बात. पक्का रहा तेरी भाभी तुझे मोबाइल दिलाएगी.
मे-ओके तो फिर कुछ दिन सबर करो. जल्दी ही गुड न्यूज़ मिलेगी आपको.
करू भाभी ने मेरी गालों पे किस करते हुए कहा.
करू-तू सचमुच कमाल की है रीतू.
हॅरी-रीतू यार ध्यान से बात करना घर पे.
मे-भैया आप जानते तो हो मुझे. वैसे भी भाभी अब मुझे पसंद आ गई हैं अब तो ये ही मेरी भाभी बनेगी.
करू-ओके तो चलो अब सबसे पहले रीतू को मैं फोन दिलाउन्गी.
हॅरी-छोड़ ना करू मैं दिला दूँगा इसे.
करू-ऐसे कैसे अपनी ननद को मोबाइल के रूप में पहला गिफ्ट मैं ही दूँगी.
फिर हम एक मोबाइल की शॉप में गये और मैने काफ़ी मोबाइल्स देखे और आख़िर में नोकिया न97 मुझे पसंद आ गया और उसके साथ टाटा डोकोमो का कनेक्षन मैने ले लिया. करू भाभी ने बिल पे किया और हम वहाँ से निकलकर फिरसे रेस्टौरेंट में आ गये. बहुत भूख लग रही थी हमने वहाँ से लंच किया और फिर भाभी और मैने मोबाइल. नंबर एक्सचेंज किए और मैं और भैया भाभी को बाइ बोल कर घर की तरफ निकल पड़े.
रास्ते में भैया ने मुझसे पूछा.
हॅरी-कैसी लगी तुम्हारी भाभी.
मे-बहुत अच्छी भैया अब तो वो ही मेरी भाभी बनेगी चाहे कुछ भी हो जाए.
हॅरी-सम्भल कर बात करना मम्मी पापा से.
मे-फिकर नोट भैया मम्मी पापा को तो मैं एक चुटकी में मना लूँगी.
हॅरी-काश ऐसा ही हो.
ऐसे ही बातें करते करते हम घर पहुँच गये. मैने अपना नया मोबाइल. मम्मी को दिखाया तो वो हैरान होते हुए बोली.
मम्मी-ये किसने दिलवाया.
मे-भैया ने अपनी पॉकेट मनी में से.
मैने झूठ बोल दिया.
तभी पापा वहाँ पे आए और मम्मी ने उन्हे गुस्से से कहा.
मम्मी-देखो हॅरी ने इसे मोबाइल. दिला दिया. क्या ज़रूरत थी इसकी.
पापा-अरे कोई बात नही एक ना एक दिन तो इसे मोबाइल लेना ही था.
मैने खुश होकर मोबाइल. उठाया और अपने रूम में चली गई.
मैं अपने रूम में देर रात तक न्यू मोबाइल से छेड़ चाड करती रही. कभी किसी फंक्षन को खोल देती तो किसी को बंद कर देती. आख़िरकार 12 वजे के करीब मुझे नींद आई और मैं घोड़े बीच कर सो गई. सुबह जल्दी उठी और जल्दी जल्दी नहा धो कर रेडी हो गई. नाश्ता वगेरा करने के बाद मैने अपना मोबाइल उठा कर बॅग में रखा. मोबाइल बॅग में रखते हुए मुझे भैया ने देख लिया और कहा.
हॅरी-ओये रीतू मोबाइल का स्कूल में क्या काम ला पकड़ा मुझे घर आकर ले लेना.
मे-भैया प्लीज़ आज लेजाने दो मुझे अपने फ्रेंड्स को दिखाना है प्लीज़.
हॅरी-ओके मगर सिर्फ़ आज कल इसे घर पे ही छोड़ के जाना.
मैं खुश होते हुए
मे-थॅंक यू भैया. यू आर बेस्ट इन वर्ल्ड.
हॅरी-ठीक है ठीक है जा अब लेट हो जाएगी.
मैने अपना बॅग उठाया और बस स्टॉप की तरफ चल पड़ी.
वहाँ रोज़ की तरह मजनू पहले से ही मेरे इंतेज़ार में था. मैं आकाश से थोड़ी दूरी पे जाकर खड़ी हो गई और वो आदत के मुताबिक मेरे पास आ गया और बोला.
आकाश-हाई रीत डार्लिंग बड़ी खुश दिखाई दे रही हो बात क्या है.
मे-तुम्हे इस से मतलब.
आकाश-राम राम इतना गुस्सा. वैसे उस रात गली में मज़ा आया ना.
मैने उसकी बात का कोई जवाब नही दिया.
आकाश-वैसे कल कहाँ गई थी हॅरी के साथ निखर कर माशा अल्लाह वाइट चुरिदार में कयामत लग रही थी तुम.
आकाश के मूह से तारीफ सुन कर मैं अंदर ही अंदर बहुत खुश हुई.
मुझे कुछ ना बोलते देख वो झुझलाते हुए बोला.
आकाश-यार इतना तो मैं जानता हू कि तू मेरी छेड़-छाड़ में मज़ा तो खूब लेती है मगर ये नखरा क्यू दिखा रही हो.
मैने उसे घूरते हुए देखा और कहा.
मे-ओये मिस्टर. एक बात ध्यान से सुन लो मैं अब तुषार की गर्ल फ़्रेंड हूँ. मुझे अब दूर रहा करो समझे.
आकाश-मुझे पता है तुषार ने तुझे पटा लिया है.
मैने हैरान होते हुए पूछा.
मे-तुम्हे कैसे पता.
आकाश-मेरा सबसे अच्छा दोस्त है वो मुझे सब पता है कि कैसे उसके हाथ के उपर तूने अपनी गान्ड रखकर मज़े लिए थे उसके साथ.
उसकी बात सुनकर मैने गुस्से से कहा.
मे-शट अप एडियट.....बिल्कुल भी तमीज़ नही तुम्हारे अंदर.
मैने दूसरी तरफ चेहरा घुमा कर खड़ी हो गई. तभी मुझे बस आती हुई दिखाई दी. मैं जल्दी से बस में चढ़ गई. आकाश आज मेरे नज़दीक ही खड़ा था बस एक और लड़का हमारे बीच खड़ा था. मैने देखा वो लड़का मेरे साथ चिपकने की कोशिश कर रहा था. मैने आकाश की तरफ देखा तो वो भी इस बात को नोट कर रहा था. आचनक मेरे मन में शरारत सूझी और मैं खुद ही थोड़ा पीछे को हट कर उस लड़के से सट कर खड़ी हो गई. मेरे ऐसा करने से उसकी हिम्मत बढ़ गई और उसने एक हाथ अपने पेनिस पे लेजा कर उसको ठीक मेरे नितुंबों के बीच सेट कर दिया और धीरे धीरे धक्के लगाने लगा. मैने आकाश को देखो तो वो हमारी तरफ ही देख रहा था और उसके चेहरे पे गुस्सा आसानी से देखा जा सकता था. मुझे आकाश को इस हालत में देखकर बड़ा मज़ा आ रहा था. उस लड़के का पेनिस मुझे बिल्कुल अपने नितंबों के बीच महसूस हो रहा था. मैं आकाश को और जलाने के लिए आकाश को देखकर मुस्कुराती हुई अपने नितंब उसके पेनिस पे इधर उधर करने लगी थी. आकाश की तो आँखें गुस्से में लाल हो चुकी थी. अब उस लड़के के हाथ मेरे दोनो नितंबों के उपर फिरने लगे थे और वो उन्हे ज़ोर ज़ोर से मसल्ने लगा था. मेरा शरीर भी अब गरम होने लगा था. मैं लगातार अपने नितंब उसके पेनिस पे इधर उधर कर रही थी. आचनक उसने बहुत ज़ोर से मेरे नितंबों के उपर के मुलायम मास को अपनी हथेलियों में जाकड़ लिया. मेरे पूरे शरीर में मस्ती और दर्द की मिलीजुली लहर दौड़ गई और मेरे मूह से हल्की चीख भी निकल गई. फिर उसने मेरे नितंबों को छोड़ दिया मैने पीछे देखा तो उसने अपने पेनिस वाली जगह को ज़ोर से पकड़ रखा था शायद उसका कम पॅंट में ही निकल गया था. मैने आकाश की तरफ देखा तो वो मुझे ही घूर रहा था. मैने उसकी तरफ मुस्कुराते हुए एक आँख दबा दी. नेक्स्ट स्टॉप हमारा स्कूल ही था जैसे ही बस रुकी तो मैं जल्दी से नीचे उतर गई और महक आगे बैठी थी इसलिए वो पहले ही नीचे उतर गई थी. मैं और महक क्लास की तरफ चल पड़े. क्लास में जाकर मैने महक को अपना न्यू मोबाइल दिखाया जिसे देखकर वो बहुत खुश हुई. हम अपने मोबाइल. नंबर. एक्सचेंज कर रहे थे तभी आकाश अंदर आया और मेरे हाथ में मोबाइल देखकर बोला.
आकाश-ये किसका फोन है.
महक-आकाश रीत ने नया लिया है.
आकाश-वाउ तो अब पार्टी तो बनती है.
मे-बिल्कुल बोलो क्या खाना है.
आकाश अपने होंठों पे जीभ फिराते हुए.
आकाश-कुछ मीठा हो जाए.
महक-पार्टी की बात बाद में करना पहले रीत अपना नंबर. तो लिखवा मुझे.
मैं महक को नंबर. लिखाने लगी तो आकाश ने भी मुझसे नंबर. ले लिया. उसने ये कहा कि उसे नोट्स वगेरा पूछने होंगे तो वो पूछ लेगा. महक के सामने मुझे अपना नंबर. उसे देना ही पड़ा.
फिर मेरी आँखें तुषार को क्लास में ढूँडने लगी. वो वहाँ दिखाई नही दिया. मुझे लगा कि शायद वो लाइब्ररी में ही होगा. मैने लाइब्ररी में जाकर देखा तो वो वही बैठा था. मैं उसके पास गई और उसे अपना न्यू फोन दिखाया तो वो भी बहुत खुश हुआ और उसने भी मेरा नंबर. ले लिया. लाइब्ररी में 3-4 रॅक बने हुए थे जिनमे बुक्स रखी गई थी. तुषार ने मेरा हाथ पकड़ा और मुझे रॅक्स के बीच जो खाली जगह होती है वहाँ ले गया.,
रॅक्स के पीछे हम किसी को दिखाई नही दे रहे थे वैसे भी इस टाइम लाइब्ररी में कोई नही था. मैने डरते डरते तुषार से कहा.
मे-तुषार क्या हुआ यहाँ क्यूँ लाए मुझे.
तुषार-यार कल का दिन बड़ी मुश्क़िल से गुज़रा सारा दिन मुझे तुम्हारे गुलाबी होंठों की याद आती रही.
मे-मैने भी तुम्हे मिस किया तुषार.
तुषार-तो जल्दी से पास आयो ना डार्लिंग.
कहते हुए तुषार ने मुझे खीच कर अपनी छाती से लगा लिया. मैं भी आसानी से उसकी बाहों में चली गई. तुषार ने मोबाइल मेरे हाथ से लिया और अपनी पॉकेट में डाल दिया. मैने अपने हाथ उसके गले में डाल दिए और तुषार ने ज़रा भी टाइम ना गँवाते हुए अपने होंठ मेरे होंठों के उपर रख दिए और अपने दोनो हाथ मेरी कमर के दोनो और टिका दिए. वो अपने होंठों से मेरे नीचे वाले होंठ को कस कर चूसने लगा. मैं भी चुंबन में उसका पूरा साथ देने लगी. कभी-2 वो मेरे होंठ को छोड़कर अपनी जीभ मेरे मूह में डाल देता और मैं प्यार से उसे चूसने लगती तो कभी मैं अपनी जीभ निकालती और तुषार उसे अपने होंठों में क़ैद कर लेता. हम पूरी शिद्दत से एक दूसरे को चूमने में लगे थे ना तुषार पीछे रहना चाहता था और ना ही मैं. तुषार के हाथ अब धीरे-2 मेरी कमर से फिसलते हुए मेरे नितंबों की ओर जाने लगे थे. उसने मुझे खुद से सटा रखा था जिसकी वजह से मेरे उरोज उसकी छाती में धँस रहे थे. उसके हाथ मेरे नितंबों के उपर पहुँच चुके थे और धीरे-2 वो मेरे नितंबों को मसल्ने लगे थे.
बस में उस लड़के के द्वारा ज़ोर ज़ोर से नितंब मसले जाने के कारण मेरे नितंब थोड़े दर्द कर रहे थे. लेकिन अब तुषार के द्वारा धीरे धीरे मसल्ने की वजह से मुझे बहुत आराम मिल रहा था. हमारे होंठों का आपस में उलझना अभी भी जारी था और तुषार के हाथ भी अब मेरे नितंबों पे तेज़ तेज़ घूमने लगे थे. मेरा पूरा शरीर तुषार के हाथो की कठ पुतली बनकर रह गया था. वो अपने दोनो हाथों को पूरा खोल कर मेरे नितंबों के उपर रखता और फिर आटे की तरह उन्हे गूँथ देता. इतनी बुरी तरह से वो मेरे नितंब मसल रहा था कि जब वो उन्हे हाथों में भरता तो मेरे पैर ज़मीन से उपर उठ जाते. उसकी हरकतों से मेरी पैंटी गीली हो चुकी थी और मेरी योनि से निकला रस मेरी पैंटी को गीला करते हुए मेरी जांघों पे भी बहने लगा था. मैने अपनी जंघें आपस में भींच रखी थी. करीब 10 मिनट तक एक दूसरे से उलझने के बाद हमारे होंठ एक दूसरे से अलग हो गये थे. हम दोनो की साँसें बहुत तेज़ तेज़ चल रही थी.
तुषार ने अपना एक हाथ आगे लाते हुए मेरी सलवार के नाडे को पकड़ कर झटके से खोल दिया था. सलवार के ढीली होते ही मैं जैसे नींद से जाग उठी थी मैं झट से तुषार की गिरफ़्त से बाहर होकर पीछे को हट गई और अपनी सलवार को पकड़ कर नीचे गिरने से रोक लिया.
मे-नही तुषार सलवार नही उतारूँगी मैं.
तुषार-प्लीज़ रीत सिर्फ़ एक बार मुझे तुम्हारी चूत देखनी है.
मे-नो नो तुषार प्लीज़ छोड़ो ना.
तुषार मेरे हाथों को सलवार के उपर से हटा रहा था जिनके ज़रिए मैने सलवार को पकड़ रखा था लेकिन मैं पीछे को हट ती हुई उसे मना कर रही थी.
आख़िरकार मैने उसे मना ही लिया और उसने मेरी सलवार छोड़ दी. मैने सलवार का नाडा बाँधा और तुषार की तरफ देखा वो मुझे ही घूर रहा था. मैने आगे बढ़कर उसके सीने में अपना चेहरा छुपा लिया और कहा.
मे-ऐसे मत देखो मुझे शरम आ रही है.
तुषार-देखो अब शरमाना छोड़ो मैने तुम्हारी बात मानी है अब तुम्हे भी मेरी बात मान नी पड़ेगी.
मे-कोन्सि बात.
वो अपना हाथ अपनी ज़िप के उपर ले गया और अपना पेनिस बाहर निकाल लिया. मैने अभी भी अपना चेहरा उसके सीने में छुपा रखा था. उसने मुझे कंधो से पकड़कर पीछे किया और नीचे देखने को कहा. जैसे ही मैने नीचे देखा तो तुषार का 6.5'' का ब्राउन कलर का पेनिस पूरा तन कर मेरी आँखों के सामने खड़ा था. पेनिस को देखने के बाद मैने फिरसे शरमा कर अपना चेहरा उसकी सीने में छुपा लिया.
तुषार-रीत अब शरमाओ मत प्लीज़ इसे मूह में लो ना.
मैने उसकी छाती पे मुक्के मारते हुए कहा.
मे-मैं तुम्हारी जान ले लूँगी. प्लीज़ इसे अंदर करो.
तुषार-प्लीज़ रीत अब नखरा छोड़ो मैने भी तो तुम्हारी बात मानी थी.
मे-मैं मूह में नही लूँगी.
तुषार-प्लीज़ रीत देखो बेचारा कैसे तुम्हारे होंठो का इंतेज़ार कर रहा है.
मे-मैने बोला ना मैं मूह में नही लूँगी.
तुषार-अच्छा चलो मूह में मत लो हाथ में पकड़ कर तो हिला दो प्लीज़.
मुझे उसके उपर थोड़ा तरस आया और
मैने अपना चेहरा उसकी छाती से हटाया और मुस्कुराती हुई उसके पेनिस को देखने लगी. पहली दफ़ा मैने किसी मर्द का पेनिस देखा था. और आज पहली बार ही उसे हाथ लगाने जा रही थी.
मैने डरते-2 तुषार पेनिस को हाथ में पकड़ लिया और धीरे-2 हिलाने लगी. वो बहुत ही हार्ड था तुषार के हाथ मेरे नितंबों से खेल रहे थे और मैं उसका पेनिस हाथ में लेकर हिला रही थी और इधर उधर भी देख रही थी. काफ़ी देर तक मैं उसे हिलाती रही. मेरे हाथ खुद ही उसके उपर तेज़-2 चलने लगे. मेरे हाथ अब दुखने लगे थे मगर उसका पेनिस था कि झड़ने का नाम नही ले रहा था. आख़िरकार काफ़ी मेहनत करने के बाद मुझे जीत मिल गई और उसके पेनिस से कम निकलकर नीचे फर्श पे गिरने लगा. थोड़ा सा कम मेरे हाथ पे भी लग गया मैं जल्दी-2 वहाँ से निकली और सीधा वॉशरूम में चली गई.
मैने वॉशरूम में जाकर अपने हाथ को धोया और सलवार को उतार कर देखा तो मेरी पैंटी पूरी तरह से गीली हो चुकी थी और मेरी जांघों पे भी गीलापन था. मैने पैंटी खोल कर फेंकने की सोची लेकिन फिर फेकना कॅन्सल कर दिया मैने सोचा अगर ऐसे ही पॅंटीस फेंकती रही तो एक दिन बिना पैंटी के ही स्कूल आने की नौबत आ जाएगी. फिर मैने अच्छी तरह से अपनी योनि और जांघों को धोया और वापिस क्लास में आ गई. तुषार पहले ही क्लास में आ चुका था. पहला पीरियड शुरू हुआ और टीचर पढ़ाने लगी. मगर मेरा ध्यान पढ़ाई में बिल्कुल भी नही था. जैसे तैसे मैने मुश्क़िल से रिसेस तक का टाइम निकाला. रिसेस होते ही तुषार मेरे पास आया और मेरा मोबाइल मुझे पकड़ाते हुए बोला.
तुषार-बाइ रीत मैं आज हाफ टाइम से लीव लेकर जा रहा हूँ घर.
मे-क्यूँ क्या हुआ.
तुषार-कुछ नही यार मम्मी की तबीयत थोड़ी खराब है.
मे-क्या हुया उन्हे.
तुषार-बस ऐसे ही थोड़ा सा बुखार था.
फिर हम दोनो ने हग किया और वो मेरे नितंबो पे चूटी काट ता हुया बाहर निकल गया. उसके जाने के बाद मैने अपना टिफेन उठाया और बाहर जाने लगी तो महक ने मुझे रोका और कहा.
महक-रीत मेरी बात सुन पहले.
मे-हां क्या हुया.
महक-वो...रीत प्लीज़ ना मत करना.
मे-किस बात के लिए. बता तो सही.
महक-वो रीत थोड़ी देर के लिए डोर पे खड़ी होकर ध्यान रख की कोई आ तो नही रहा तब तक मैं और आकाश थोड़ा....समझती है ना....
मे-ना बाबा ना मुझसे नही होगा ये बॉडीगार्ड वाला काम मैं तो चली.
महक मेरा हाथ पकड़ते हुए.
महक-प्लीज़ रीतू यार. तू मेरी बेस्ट फ़्रेंड है इतना भी नही कर सकती मेरे लिए.
मे-ओके मैं खड़ी रहूंगी मगर जब कोई आएगा तो मैं उसे रोकूंगी नही.
महक-ओके ओके मत रोकना बस हमे बता देना जब भी कोई आए.
मैं गेट के पास खड़ी हो गई और महक जल्दी से आकाश के पास चली गई. आकाश ने महक के पास आते ही उसे अपनी बाहों में भर लिया और अपने होंठ उसके होंठों पे टिका दिए. मैं उनकी तरफ से नज़र हटाकर बाहर देखने लगी. थोड़ी देर बाद मेरे मन में आया कि देखु तो सही क्या कर रहे है दोनो. मैने अंदर देखा तो आकाश अभी भी महक के होंठ चूस रहा था और उसके हाथ महक के नितंबों को मसल रहे थे. महक तो आकाश के साथ चिपक कर खड़ी थी. अब आकाश ने महक को दीवार के साथ लगा दिया था अब वो दोनो मुझे साइड से दिख रहे थे. आकाश फिरसे महक के होंठ चूमने लगा था. उसने अपने हाथ नीचे लेजकर महक का कमीज़ किनारों से पकड़ कर उपर उठाना शुरू कर दिया और उसे महक के उरोजो के उपर तक चढ़ा दिया अब महक के उरोज उसकी ब्लॅक ब्रा में क़ैद थे. आकाश ने उसकी ब्रा में नीचे से अपना हाथ डाला और उसे भी उपर की और चढ़ा दिया अब महक के गोरे गोरे उरोज आज़ाद हो चुके थे. आकाश अपने हाथों से उन्हे मसल्ने लगा था. मेरी नज़र नीचे गई तो मैने देखा महक ने अपने हाथ से आकाश का पेनिस उसकी पॅंट के उपर से पकड़ रखा था. आकाश की पॅंट का उभार सॉफ बता रहा था कि उसका पेनिस काफ़ी बड़ा होगा. मेरी तो नज़र जैसे उसकी पॅंट के उभार पे ही अटक चुकी थी. जब मैने वहाँ से अपनी नज़र उपर उठाई तो देखा आकाश मुझे ही देख रहा था. उसने मुझे अपने पेनिस की तरफ देखते हुए देख लिया था. और अब वो गंदी सी स्माइल के साथ मुझे घूर रहा था. मैने गुस्से से उसे देखा और अपना नाक चढ़ाते हुए अपनी नज़र बाहर की ओर कर ली. मैने सोच लिया था कि अब कुछ भी हो जाए अंदर नही देखूँगी लेकिन मैं अपने इस फ़ैसले पे ज़्यादा देर तक टिक नही पाई और मैने फिर से एक दफ़ा अपनी नज़र अंदर की और घुमा दी. मैने देखा आकाश अब महक के उरोजो को चूस रहा था. वो कभी एक उरोज को अपने होंठो में लेकर चूस्ता तो कभी दूसरे को. महक दीवार के साथ सर टिकाए आँखें बंद करके खड़ी थी. मैने नीचे देखा तो आकाश अपनी ज़िप खोल रहा था और देखते ही देखते उसने अपना पेनिस ज़िप में से बाहर निकाल लिया. उसका पेनिस देखते ही मेरे मूह से अपने आप 'ओह माइ गॉड' निकल गया. सच में उसका पेनिस काफ़ी बड़ा था. कम से कम 7.5इंच लंबा तो होगा ही और साथ ही साथ लगभग 1.5इंच मोटा था. मेरा मूह खुला का खुला रह गया था उसका पेनिस देखकर और मेरी योनि ने पानी छोड़ना शुरू कर दिया था. मेरा हाथ खुद ही अपनी योनि पे चला गया था. जैसे ही मेरी नज़र उसके पेनिस से हटकर उपर गई तो मैने देखा आकाश मुझे ही देखता हुआ अपने दाँत निकाल रहा था. मैं कभी उसकी आँखों में देख रही थी तो कभी उसके पेनिस को जिसे आकाश अपने हाथ से आगे पीछे कर रहा था. मुझे देखते ही उसने मुस्कुराते हुए एक आँख दबा दी और मुझसे भी अब रहा ना गया और मैं अपनी नज़रें नीची कर के मुस्कुराने लगी. अब आकाश ने महक को नीचे बिठा दिया और महक ने खुद ही उसका पेनिस हाथ में पकड़ा और अपने होंठ खोलते हुए उसे अपने मूह में समा लिया. आकाश का पेनिस महक के होंठों के अंदर बाहर होता देख मैं अपने होंठों पे जीभ फिराने लगी थी. आकाश तेज़ तेज़ महक के होंठों में अपना पेनिस पेल रहा था. महक की आँखें बाहर की और निकल आई थी. अचानक आकाश का शरीर झटके खाने लगा और उसने महक का सर ज़ोर से पकड़ कर अपने लिंग पे दबा दिया. उसके मूह से आह निकली और उसकी पकड़ महक के उपर ढीली हो गई. महक ने भी उसका लिंग अच्छे से चाट कर सॉफ कर दिया.
आकाश ने अपना सारा कम महक के मूह में निकाल दिया था और महक कमिनि भी उसका सारा कम अंदर निगल गई थी. आकाश का लिंग अब धीरे-2 ढीला होने लगा था लेकिन महक की बच्ची उसे छोड़ने का नाम ही नही ले रही थी. वो अपनी जीभ निकाल कर आकाश के लिंग की आगे वाली जगह पे फिरा रही थी. आकाश शायद समझ गया था कि महक की बच्ची का अभी तक जी नही भरा है उसने महक को कंधो से पकड़ कर उपर उठाया और उसके होंठ चूसने लगा और अपने हाथ नीचे लेजा कर महक की सलवार का नाडा खोल दिया और सलवार ढीली होकर महक के घुटनो में पहुँच गई. मैने देखा महक ने उसका बिल्कुल भी विरोध नही किया और आसानी से सलवार को नीचे जाने दिया. अब आकाश घुटनो के बल बैठ गया और महक के नितंबों के उपर हाथ रखते हुए उसे बिल्कुल अपने पास खींच लिया. फिर उसने महक की ब्लॅक पैंटी को किनारों से पकड़ा और खीच कर उसकी जाँघो में अटका दिया. मुझे महक के उपर हैरानी हो रही थी उसे कोई परवाह नही थी अब किसी के आने की बस मस्ती उसके उपर पूरी तरह से हावी हो चुकी थी. आकाश के हाथ फिरसे महक के नितंबों के उपर पहुँच गये थे और धीरे-2 उन्हे मसल्ने लगे थे. उसने अपनी जीभ निकाली और उसे महक की योनि पे लगा दिया. योनि पे आकाश की जीभ महसूस करते ही महक के मूह से मस्ती भरी सिसकारी निकली और उसके हाथ आकाश के बालों में खेलने लगे. आकाश अब महक की योनि पे अपनी जीभ फिराने लगा था. महक के लिए सहन करना मुश्क़िल हो रहा था उसकी आँखें बंद हो चुकी थी और उसने अपना चेहरा उपर की ओर उठा रखा था. आकाश अब तेज़-2 महक की योनि पे जीभ चलाने लगा था और अपनी जीभ को महक की योनि की फांको के बीच घिस रहा था जिसकी वजह से महक का बुरा हाल था और वो हल्की हल्की आहें भर रही थी जो कि मेरे कानो तक भी पहुँच रही थी. अब आकाश ने अपनी जीभ को महक की योनि से हटा लिया था और और अपने होंठों को महक की योनि के होंठों पे रख कर चूसने लगा था. वो कभी योनि की एक फाँक को अपने होंठों में भरने की कोशिश करता तो कभी दूसरी. फिर उसने अपने होंठो के साथ साथ अपनी एक उंगली को भी महक की योनि पे टिका दिया था और धीरे-2 उसे महक की योनि में उतारने लगा था. नीचे से उसकी उंगली महक की योनि में अंदर बाहर हो रही थी और उपर से उसके होंठ महक की योनि को चूसने में लगे थे. उसकी हरकतों ने महक के साथ साथ मेरा भी बुरा हाल कर दिया था. पता नही कैसा दिन चढ़ा था सुबह से लेकर अब तक मेरी योनि और पैंटी गीली की गीली थी. अब आकाश का लंड फिरसे पूरा तन गया था और अपने पहले वाले विकराल रूप में लौट आया था मैं उसके लिंग को देखकर सोच रही थी कि इसके लिंग को देखने से ही मेरा ये हाल हो रहा है तो जब ये मेरी योनि के अंदर जाएगा तब क्या हाल होगा मेरा. अब तो मैं इस कदर गरम हो चुकी थी कि दिल कर रहा था कि महक को हटाकर खुद आकाश के सामने खड़ी हो जाउ और जी भर उसे अपनी योनि चूसने दूं. लेकिन अगले ही पल दिमाग़ में ख़याल आया अरे में ये क्या सोच रही हूँ. मैने अपने सर पे हाथ मारा और अपना ध्यान फिरसे उन्दोनो के उपर लगा दिया.
वो दोनो अब पूरे गरम हो चुके थे आकाश ने अपने होंठों को महक की योनि के उपर से हटा लिया था और अब 2 उंगलियाँ तेज़-तेज़ महक की योनि के अंदर बाहर हो रही थी. महक भी अब अपने पूरे शरीर को मस्ती में हिला रही थी और धीरे-2 बड़बड़ा रही थी 'आहह औचह और तेज़ करो आकाश आहह बहुत मज़ाअ आआ रहाआ है......'
अब महक बुरी तरह से मचलने लगी थी और आकाश भी अब खड़ा हो चुका था मगर उसकी उंगलिया बराबर अपना काम कर रही थी. आकाश की जैसी बॉडी थी बिल्कुल वैसा ही उसका पेनिस था एकदम तगड़ा और जानदार. महक तो उसके सामने बच्ची सी लग रही थी. महक तो महक मैं भी उसके सामने बच्ची ही लगती थी. बहुत स्ट्रॉंग बॉडी थी उसकी.
अब फिरसे उन्दोनो के होंठ जुड़ चुके थे महक अब झड़ने की कगार पर थी वो बुरी तरह से आकाश के हाथों में मचल रही थी. अब उसने आकाश को ज़ोर से पकड़ लिया था और देखते ही देखते महक की योनि का पानी आकाश की उंगलियों की साइड से निकलने लगा था और महक बुरी तरह से हाँफ रही थी. आकाश ने तब तक अपनी उंगलियाँ अंदर बाहर करनी चालू रखी जब तक आख़िरी बूँद महक की योनि से बाहर नही आ गई. जैसे ही उसने उंगलियाँ बाहर निकाली तो महक उसकी छाती के साथ चिपक गई. आकाश ने मुझे देखा और मुस्कुराते हुए वो दोनो उंगलिया चाटने लगा जो थोड़ी देर पहले महक की योनि में थी. मुझे बहुत अजीब लगी उसकी ये हरकत. वो फिरसे एकदुसरे के होंठ चूसने लगे. मुझे अब फिकर होने लगी थी कि ये लोग अब हटेगे भी या नही. मैने वहाँ खड़े खड़े ही महक को कहा.
मे-मिक्कुह में बाहर जा रही हूँ अपने इस ख़ज़ाने को ढक ले किसी और ने देख लिया तो वो भी पीछे पड़ जाएगा.
मेरी बात सुनते ही महक जैसे नींद से जागी और झट से अपनी पैंटी और सलवार खींच कर उपर कर ली. मैं वहाँ से निकल कर फिरसे वॉशरूम में घुस गई अपनी योनि की हालत को देखने के लिए.
मैं वॉशरूम में गई और आख़िरकार अपनी पैंटी उतार कर वहीं फेंक दी और वापिस क्लास में आकर बैठ गई. रिसेस के बाद पीरियड फिर से शुरू हो गये और मुश्क़िल से स्कूल का टाइम पूरा हुया और मैं और महक ऑटो पकड़ कर घर आ गये. घर आकर मैने खाना खाया और जाकर अपने रूम में सो गई. अभी मेरी आँख लगी ही थी कि मेरे मोबाइल की घंटी बजी मैने देखा किसी अननोन नंबर. से फोन था. मैने कॉल पिक की तो सामने से आवाज़ आई.
'हेलो रीत तुषार बोल रहा हूँ'
मे- ओह तुषार तुम कैसे हो और आंटी कैसी है अब.
तुषार-सब ठीक हैं रीत ये मेरा नंबर. है सेव कर लेना.
मे-ओके.
तुषार-और बताओ क्या कर रही हो.
मे-कुछ नही सो रही थी.
तुषार-अपने रूम में.
मे-यस.
तुषार-काश मैं तुम्हारे पास होता तो सोने का कितना मज़ा आता.
मे-बच्चू तुम पास होते तो मुझे सोने कहाँ देते.
तुषार-हां ये तो है अब तुम्हारे जैसी मस्त मस्त चीज़ को बिस्तेर में सोने कॉन देगा.
मे-अच्छा अब बहुत हुई मस्ती मुझे सोने दो.
तुषार-ओके डियर. किस ऑन युवर लिप्स. बाइ.
मे-उम्म्म्म बाइ.
मैने फोन कट किया और आँखें बंद करके सोने की कोशिश करने लगी मेरे दिमाग़ आज जो कुछ भी हस वो सब घूमने लगा. मुझे पता ही नही चला कि कब इन ख़यालों में खोई खोई मैं सो गई. शाम को मेरी आँख खुली तो देखा 5 वज रहे थे. खूब जी भर के सोई थी मैं.
मैं उठी और किचन की तरफ चल पड़ी. किचन में मम्मी खड़ी काम कर रही थी. मैने मम्मी को प्यार से पीछे से पकड़ लिया और उनके गालों पे किस करने लगी.
मे-मुंम्म्मय्ययी....
मम्मी-क्या हुआ रीतू आज बड़ा प्यार आ रहा है मम्मी पर.
मे-बस ऐसे ही मम्मी मुझे चाइ दो.
मम्मी ने मुझे चाइ दी और मैं चाइ लेकर फिरसे अपने रूम में आ गई और अपना मोबाइल उठाया तो देखा उसपे करू भाभी की 2 मिस कॉल आई हुई थी.
मैने मोबाइल लिया और छत पे चढ़ कर भाभी को फोन मिलाया.
भाभी फोन उठाते ही भड़क उठी.
करू-ओये रीतू की बच्ची तू समझती क्या है अपने आप को.
मे-क्या हुआ भाभी.
करू-मैने ही तुझे मोबाइल लेकर दिया और तूने मेरा फोन ही नही उठाया.
मे-ओह कमोन भाभी मैं सो रही थी.
करू-किसके नीचे.
मे-क्या कहा आपने.
करू-अरे बुढ़ू मेरा मतलब पंखे के नीचे सो रही थी क्या.
मे-ओह अच्छा अच्छा मैने सोचा....
करू-क्या सोचा तूने चालू लड़की.
मे-ओह भाभी अब इतनी खिचाई भी मत करो.
करू-अच्छा चल ये बता तूने मम्मी पापा से बात की या नही.
मैने जान बुझ कर अंजान बनते हुए कहा.
मे-कोन्सि बात भाभी.
करू-ओये मुझसे मार खाएगी तू मोबाइल लेकर आराम से घर में बैठ गई मेरी और चिलकोज़ू की शादी कोन करवाएगा.
मे-आप लोगो का मॅटर है आप ही जानो.
करू-ओये रीतू अगर तू मेरे सामने होती ना तो तुझे पटक पटक के मारती अब मैं.
मे-हाहहहाहा.
करू-अब हँस क्या रही है तू.
मे-भाभी मैं तो मज़ाक कर रही थी. आप थोड़ा सबर तो करो मैं चलाती हूँ कोई चक्कर.
करू-ओके ओके जल्दी कर स्वीतू अब सबर नही हो रहा मुझसे.
मे-भाभी एक बात बताओ भैया ने आपके साथ 'वो' किया है.
करू- 'वो' क्या.
मे-वोही जो लड़का और लड़की अकेले में करते हैं.
करू-एक लगाउन्गी गाल पे. तू तो बहुत आगे निकल चुकी है. हॅरी को बताना पड़ेगा.
मे-नो नो भाभी चिलकोज़ू को मत बताना प्लेज.
करू-ओके मगर ये चिलकोज़ू कहने की हिम्मत कैसे हुई तेरी.
मे-क्यूँ भाभी.
करू-हॅरी को सिर्फ़ मैं चिलकोज़ू बुला सकती हूँ कोई और नही समझी.
मे-जी भाभी.
करू-अच्छा अब जी जी मत कर हमारा काम कर जल्दी से.
मे-श्योर भाभी.
करू-अच्छा ओके. बाइ.
मे-बाइ.
फोन कट होते ही मैने सोचा 'ओह गॉड ये भाभी भी पूरी जंगली बिल्ली हैं'
मैने नीचे आकर थोड़ी देर टीवी देखा और फिर सब खाने के लिए बैठ गये. मैने सोचा अब बात करने का अच्छा मौका है.
मे-मम्मी मुझे आपसे कुछ बात करनी थी.
मम्मी-बोल बच्चे क्या बात है.
मे-मम्मी मैं क्या कहती हूँ कि भैया की शादी कर देनी चाहिए अब.
मेरे इस सिक्सर से भैया एकदम क्लीन बोल्ड हो गये.
पापा-सही कहा रीतू तूने क्या कहती हो गुरमीत(मम्मी).
मम्मी-जी बात तो रीत की सही है मुझसे अब काम नही होता.
पापा-क्यूँ हॅरी क्या कहता है तू.
हॅरी-जी पापा जैसा आप कहे.
मे-देखो देखो कैसे शरमा रहे हैं भैया.
हॅरी-ओये रीतू तू चुप करती है या नही.
मे-भैया सोच लो अगर मैं चुप हो गई तो आप तो गये काम से.
मम्मी-चुप करो तुम दोनो. अजी मैं कहती हूँ कि हॅरी के लिए कोई अच्छी सी लड़की ढुंढ़ो आप.
मे-तो सुनो उसका नाम करुणा है. वो बहुत अच्छी हैं और जो सबसे बड़ी बात है कि भैया और करू एक दूसरे को पसंद करते हैं और मुझे मोबाइल की रिश्वत दी है आपसे बात करने के लिए.
मैने आँखें नचाते हुए कहा.
हॅरी-कोई रिश्वत नही दी खुद माँगा था इसने मोबाइल. तुझे तो मैं बाद में देखूँगा.
मम्मी पापा मेरी बात सुनकर बहुत खुश हुए.
पापा भैया का कान पकड़ते हुए.
पापा-तू खुद नही बता सकता था ये बात.
हॅरी-पापा बस मैं बताने ही वाला था.
मम्मी-अब छोड़ भी दो मेरे लाडले को. बेटा बता कब चले उसके घर.
हॅरी-मम्मी मैं करू से बात करके आपको सब कुछ बताउन्गा.
मम्मी-ओके जल्दी बताना.
भैया मेरा पास आए और मेरी गाल पे चूटी काट ते हुए बोले.
भैया-लव यू स्वीतू.
भैया की बात फिक्स करने और खाना खाने के बाद मैं अपने रूम में आई और भाभी का नंबर. डाइयल किया.
भाभी ने दूसरी पहली रिंग में ही उठा लिया.
करू-हां रीतू बता कैसे याद किया.
मे-भाभी बड़ी जल्दी उठाया फोन क्या फोन के उपर ही बैठी थी.
करू-ओये रीतू तूने देखे तो है कितने बड़े-2 हिप्स हैं मेरे अगर मैं इस फोन के उपर बैठी होती तो इस बेचारे की तो बत्तियाँ गुल हो जाती.
मे-नही भाभी वो तो मज़े लेता आपके मुलायम और नरम हिप्स के बीच घुसकर.
करू-चुप कर बदतमीज़ लड़की. बता फोन क्यूँ किया था.
मे-भाभी आपको भैया का फोन नही आया क्या.
करू-क्यूँ वो चिलकोज़ू करने वाला था फोन.
मे-अरे आपको एक न्यूज़ देनी थी.
करू-कोन्सि..?
मे-वो मैने मम्मी पापा से आपकी और भैया की शादी की बात की थी.
करू-ओह वाउ. बता ना फिर कहा कहा मम्मी पापा ने.
मे-मुश्क़िल है भाभी.
करू-क्या मुश्क़िल है.
मे-आपकी और भैया की शादी और क्या.
भाभी ने उदास होते हुए कहा.
करू-क्या हुया यार.
मे-पापा तो एकदम से भड़क उठे और फटाअक... करके भैया की गाल पे 5-7 थप्पड़ जड़ दिए.
करू-क्याआ....? अब क्या होगा रीतू यार.
मे-अब तो भगवान ही कुछ कर सकता है.
मैने फोन में करू भाभी के सुबकने की आवाज़ सुनी और सोचा अरे ये कम्बख़्त तो रोने लगी.
मे-ओह हो मेरी जंगली भाभी जी प्लीज़ रोओ मत. पापा ने ऐसा कुछ नही किया बल्कि पापा तो खुश हुए और आपकी शादी अब लगभग फिक्स है मेरी सेक्सी भाभी.
करू-रीतू की बच्ची तू मुझसे मार खाएगी. झूठ बोला और वो भी मेरे साथ.
मे-सॉरी भाभी मैं मज़ाक कर रही थी.
करू-स्वीतू ऐसा मज़ाक भी कोई करता है अब देख रोने की वजह से मेरा मेक-अप खराब हो गया.
अछा अब मैं उस चिलकोज़ू की खबर लेती हूँ इतनी बड़ी बात मुझे अब तक नही बताई उसने.
मे-मुझसे बात करो ना भाभी.
करू-अरे तुझसे बात करना तो अब टाइम की खराबी है. ओके बाइ स्वीतू.
और फोन कट हो गया.
मे-मतलब खोर कहीं की.
मैने बड़बड़ाते हुए फोन बेड पे फैंक दिया और खुद भी धडाम से बेड के उपर गिर गई और सोने की कोशिश करने लगी. मैं ख़यालों में खोई हुई थी तभी मेरे मोबाइल का एसएमएस टोन बज उठा. किसी अननोन नंबर. से मेसेज था.
'हेलो डार्लिंग सो गई क्या'
मैं समझ गई कि ये ज़रूर वो कमीना आकाश ही है.
मैने रिप्लाइ किया.
मे-हू'स यू डफर....?
हे रीप्लाइस 'रीत डार्लिंग मैं हूँ तुम्हारा आशिक़ आकाश कमीना'
मे-तुम तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई मुझे एसएमएस करने की.
आकाश-ओह डार्लिंग इतना गुस्सा मैने सोचा रात को अकेली बोर हो रही होगी तुम.
मे-तो तुमने क्या मुझे एंटरटेन करने का ठेका ले रखा है.
आकाश-हां कुछ ऐसा ही समझ लो. कॅन आइ कॉल यू..?
मे-नो वे....भूल कर मुझे फोन मत करना.
लेकिन तभी उसके नंबर. से कॉल आई और मैने कट कर दी. फिरसे कॉल आई मैने फिरसे कट कर दी. फिर उसने एसएमएस किया.
आकाश-प्ल्स रीत उठाओ ना.
फिरसे उसका नंबर. स्क्रीन पे फ्लश होने लगा.
आख़िरकार मैने भी रिसिव का बटन दबा ही दिया. उधर से आवाज़ आई.
आकाश-थॅंक्स डार्लिंग फोन उठाने के लिए.
मे-हाँ बोलो क्या कहना चाहते हो.
आकाश-कहाँ पे हो तुम.
मे-अपने घर पे और कहाँ.
आकाश-मेरा मतलब था अपने रूम में हो क्या.
मे-यस क्यूँ.
आकाश-वाउ अगर मैं तुम्हारे साथ होता तो कितना मज़ा आता. सोचो मैं तुम्हारे घर में तुम्हारे ही रूम में और तुम्हारे ही बिस्तेर पे तुम्हारे साथ वो भी बिल्कुल नंगा आहहाहा क्या सीन होता.
मे-शट अप युवर माउत एडियट. मैं फोन कट कर रही हूँ.
आकाश-अरे अरे रीत सुनो तो सॉरी यार मेरी बात तो सुनो.
मे-हां क्या है.
आकाश-ऐसे नाराज़ क्यूँ होती हो डार्लिंग.
मे-तुम्हे शरम नही आती अपनी गर्ल-फ़्रेंड की फ़्रेंड के साथ एसी बातें करते हुए.
आकाश-डार्लिंग जब तुम्हे शरम नही आती अपने बॉय-फ़्रेंड के फ़्रेंड को अपने जलवे दिखाकर जलाने में तो मुझे क्यूँ शरम आएगी.
मे-बकवास बंद करो मुझे कोई शौक नही तुम्हे जलाने का.
आकाश-अच्छा छोड़ो ये सब बातें तुम ये बताओ की आज मेरा लंड कैसा लगा.
मे-भाड़ में जाओ तुम और भाड़ में जाए तुम्हारा 'वो'
आकाश-मेरा 'वो' क्या डार्लिंग.
मे-जो मुझे दिखा रहे थे आज.
आकाश-मतलब तुमने देखा. वाउ कैसा लगा जानेमन.
मे-बहुत कमिने हो तुम कोई ढंग की बात नही कर सकते.
आकाश-अच्छा तुम करो ढंग की बात.
मैं आकाश से एक बात पूछना चाहती थी लेकिन थोड़ा जीझक रही थी. आख़िरकार मैने पूछ ही लिया.
मे-ह्म्म्मप मुझे एक बताओ क्या तुषार के सामने भी तुम महक के साथ ये सब करते हो.
आकाश-बिल्कुल.
मे-क्याअ...? मतलब महक तुषार के सामने भी ऐसे ही कपड़े उतार देती है.
आकाश-और नही तो क्या अरे डार्लिंग तुषार तो उसे किस तक भी कर लेता है.
मे-व्हाट....? क्या तुम्हारे सामने ही.
आकाश-यस. और तो और महक ने तुषार का लंड भी चूसा है काई बार.
मे-मुझे यकीन नही हो रहा.
आकाश-अरे तो मत करो यकीन. मुझे कॉन्सा तुम्हे यकीन दिलाना है.
मे-क्या तुमने महक के साथ 'वो' भी किया है.
आकाश-'वो' ये वो क्या चीज़ है.
मे-प्लीज़ बताओ ना.
आकाश-क्या बताऊ डार्लिंग.
मे-आइ मीन तुमने महक के साथ सेक्स भी किया है.
आकाश-यस मेनी ऑफ टाइम्स.
मे-ओह गॉड. इस सबके बावजूद तुम मुझपे लाइन मार रहे हो. तुम्हारे अंदर शरम नाम की चीज़ है या नही.
आकाश-बस मैं तो ऐसा ही हूँ. अच्छा अब रखता हूँ मुझे डिन्नर करना है. बाइ.
सुबह मैं उठी वॉशरूम में जाकर फ्रेश हुई और बाहर उठकर अपना मोबाइल उठाया तो उसमे 3 मेसेज आए हुए थे. सबसे पहला मेसेज तुषार का था और फिर भाभी और आकाश का. तीनो ने मेसेज में गुड मॉर्निंग विश की थी. मैं अपने रूम से बाहर निकली और किचन में जाकर मम्मी से चाइ ली और ड्रॉयिंग रूम में आकर बैठ गई और टीवी देखने लगी. मैं टीवी देख ही रही थी कि मुझे गुलनाज़ दीदी घर में एंटर होती दिखाई दी. उन्हे देखते ही मेरा चेहरा फूल की तरह खिल उठा. वो मेरे पास आई और बोली.
गुलनाज़-गुड मॉर्निंग रीतू.
मे-गुड मॉर्निंग दीदी. आज इधर कैसे आना हुआ वो भी सुबह सुबह.
गुलनाज़-अब आपसे मिलने का मन हो रहा था तो मैं चली आई. आप तो अब आती नही.
मे-वो दीदी मैं आज आने वाली थी. क्योंकि मुझे आपको कुछ दिखाना था.
गुलनाज़-ओये स्वीतू क्या दिखाना था.
मैने अपना मोबाइल दीदी की तरफ कर दिया.
गुलनाज़ दीदी मोबाइल देखकर बहुत खुश हुई और बोली.
गुलनाज़-बहुत अच्छा मोबाइल है आपका तो.
मे-थॅंक यू दीदी.
तभी भैया अपने रूम से निकले और गुलनाज़ दीदी को देखकर बोले.
हॅरी-गुड मॉर्निंग दीदी आप कब आई.
गुलनाज़-गुड मॉर्निंग हॅरी बस अभी-2. कैसी चल रही है आपकी स्टडी.
हॅरी-एकदम बढ़िया दीदी. इस चिरकूट से पूछो बिल्कुल ध्यान नही है इसका पढ़ाई में.
गुलनाज़-बिल्कुल सही कहा लगता है किसी दिन इसके स्कूल जाना पड़ेगा मुझे.
हॅरी-किसी दिन क्यूँ आज ही जाओ दीदी इसके साथ.
गुलनाज़-हां ये भी ठीक रहेगा.
मे-अरे दीदी क्या आप भी. स्कूल जाने की क्या ज़रूरत है.
गुलनाज़-चुप करो आप. मैं आपके साथ जा रही हूँ मतलब जा रही हूँ.
मैं बुरा सा मूह बनाकर बैठ गई.
गुलनाज़-अब इसमे इतना बुरा मानने वाली क्या बात है.
तभी मम्मी किचिन से बाहर आई और बोली.
मम्मी-कॉन बुरा मना रहा है.
गुलनाज़-नमस्ते चाची जी.
मम्मी-नमस्ते बेटा कैसी हो तुम.
गुलनाज़-बिल्कुल ठीक चाची जी.
मम्मी-क्या बातें हो रही थी.
गुलनाज़-अब देखो ना चाची जी. मैने रीतू से कहा कि मैं तुम्हारे साथ आज स्कूल जाउन्गी ताकि तुम्हारी प्रोग्रेस का पता चल सके और ये है कि मूह फुलाए बैठी है.
मम्मी-इसमे मूह फूलने की क्या बात है रीतू. गुल बेटी तू जा इसके साथ और अच्छे से खबर लेना इसकी वहाँ.
गुलनाज़-चल अब बच्चू जल्दी से रेडी हो जा मैं भी रेडी होकर आती हूँ.
मे-ओके दीदी.
मैं अपने रूम में आई और सोचने लगी कि 'दीदी भी मेरी मम्मी ही बन जाती हैं'
मैं रेडी होकर रूम से बाहर निकली तो गुलनाज़ दीदी पहले से ही मम्मी के पास बैठी थी. दीदी बहुत खूबसूरत लग रही थी. उन्होने रेड कलर का सलवार कमीज़ पहना था वो बहुत जच रहा था उनके उपर. वैसे भी दीदी का फेस और उनका शरीर ही ऐसा था कि वो कुछ भी पहनती थी तो अच्छा लगता था.
मैने ब्रेकफास्ट किया और फिर मैं और दीदी बस स्टॉप की ओर निकल पड़े. आकाश वहाँ पहले से ही खड़ा था. मेरे साथ आज गुलनाज़ दीदी को देखकर उसका चेहरा उतर सा गया था क्योंकि दीदी के रहते वो मेरे साथ कोई छेड़-छाड़ नही कर सकता था. मैं और दीदी बस स्टॉप पे खड़े होकर बस की वेट करने लगे. आकाश आज मुझसे दूर ही खड़ा था. मैने देखा वो बार-2 मुझे ही घूर रहा था. थोड़ी देर बाद बस आई और सभी उसमे चढ़ने लगे. मैं और दीदी भी बस में चढ़ गये और बस में भीड़ थी तो जाहिर था खड़े रहकर ही जाना था. मैं गुलनाज़ दीदी के आगे खड़ी थी और वो मेरे पीछे थी और उनके पीछे वोही लड़का खड़ा था जिसके साथ लास्ट डे मैने बस में एंजाय किया था. आकाश काफ़ी पीछे था उसने आगे आने की कोशिश भी नही की थी क्योंकि वो जानता था कि आज वो कुछ नही कर पाएगा.
बस अपनी स्पीड से जा रही थी. मैने नज़र घुमा कर गुलनाज़ दीदी की ओर देखा तो उनके चेहरे पे थोड़ी शिकन थी. शायद वो पीछे वाला लड़का उनके साथ कोई बदतमीज़ी कर रहा था. मैने देखा वो दीदी से बिल्कुल चिपक कर खड़ा था. मुझे उसके उपर बहुत गुस्सा आ रहा था. मैने दीदी को कहा.
मे-दीदी आप आगे आ जाओ.
गुलनाज़-नही बच्ची मैं ठीक हूँ.
शायद वो इसलिए नही आना चाहती थी कि अगर मैं उनकी जगह पे जाउन्गी तो वो मेरे साथ भी ऐसा ही करेगा.
लेकिन मैं नही मानी और ज़बरदस्ती उन्हे आगे कर दिया और खुद उनकी जगह पे आ गई. मैने देखा आकाश का आज हमारी तरफ ध्यान नही था.
अब वो लड़का फिरसे अपनी औकात पे आ गया था. और उसके हाथ मेरे नितंबों पे घूमने लगे.
उसने अपना चेहरा मेरे कान के पास किया और कहा.
'हाई डियर आइ आम रेहान वॉट'स युवर गुड नेम'
मैने सोचा अब इसको सबक सीखाना पड़ेगा. मैने गुस्से से उसकी तरफ देखा और काफ़ी लाउड्ली उसे कहा.
मे-पीछे हट कर नही खड़े हो सकते क्या अकेली लड़की के साथ बदतमीज़ी करते हुए शरम नही आती.
मैने लाउड्ली इस लिए कहा था कि मेरी बात सब को सुन जाए. जैसे ही मैने अपनी बात ख़तम की पास में खड़े कुछ लोग उसे गालियाँ देने लगे और कुछ एक ने तो थप्पड़ भी रसीद कर दिए. मैने देखा आकाश पीछे से लोगो को चीरता हुआ आया और धड़ाधड़ थप्पड़ रेहान के उपर बरसाने लगा. वो कल वाला गुस्सा भी उसके उपर निकाल रहा था. रेहान बेचारा पिटाई की वजह से सीट्स के बीच वाली जगह यहाँ हम खड़े थे वहाँ पे गिर गया और हाथ जोड़ कर सबसे माफी माँगने लगा. आकाश उसे लात मारने लगा लेकिन मैने उसे रोक दिया. क्योंकि उस बेचारे रेहान की इतनी ग़लती नही थी जितनी उसको सज़ा मिल चुकी थी.
आख़िरकार मैं और दीदी मेरे स्कूल पहुँचे. महक ने बस से उतरते ही दीदी को नमस्ते किया और मुझे कहा.
महक-क्या कर रहा था वो लड़का.
मे-बस यार ऐसे ही बदतमीज़ी कर रहा था.
गुलनाज़-ऐसे लोगो से दूर रहा करो तुम दोनो.
मे-ओके दीदी.
मैने देखा स्कूल के सभी लड़के गुलनाज़ दीदी को देखकर आहें भर रहे थे. मैने शरारत से दीदी को कहा.
मे-दीदी देखो कितने दीवाने है आपके.
गुलनाज़-स्टॉप दिस नॉनेसेंस. ईडियट. ऐसे लड़कों की तरफ ध्यान नही देते समझी.
अब मैं चुप चाप उनके साथ चलने लगी. महक अपनी क्लास में चली गई और दीदी मुझे प्रिन्सिपल ऑफीस में ले गई. वहाँ हमारे प्रिन्सिपल सर बैठे थे. मैने और दीदी ने उन्हे गुड मॉर्निंग कहा और दीदी सर से मेरे बारे में पूछने लगी. सर ने बताया कि इनकी प्रोग्रेस के बारे में आप इनके टीचर'स से पूछ सकते हैं. फिर मैं और दीदी स्टाफ रूम में गये और दीदी मेरे टीचर'स से मेरी प्रोग्रेस पूछने लगी. तकरीबन हर टीचर ने अच्छा ही कहा. बस सबकी बातों में एक ही बात कॉमन थी कि ये थोड़ी ला-परवाह है. ज़्यादा ध्यान नही देती. अगर दिल लगाकर पढ़े तो बहुत अच्छे मार्क्स ले सकती है.
टीचर'स से बात करने के बाद हम बाहर आए तो दीदी ने मुझे कहा.
गुलनाज़-देखा कितना कुछ बताया आपके टीचर'स ने.
मे-दीदी ये तो छोटी-2 बातें है.
गुलनाज़-ये इतनी सारी छोटी-2 बातें मिल कर बड़ी बात बन जाती है. आप दिल लगाकर पढ़ती क्यूँ नही.
(अब क्या बताती दीदी को कि मेरा दिल अब कोन्सि पढ़ाई पढ़ रहा है)
मे-बस दीदी मेरा मन नही लगता.
गुलनाज़-ह्म्म्मा अब मुझे ही कुछ करना पड़ेगा. आज से हर रोज़ शाम को मेरे पास ट्यूशन लेने के लिए आओगी आप. मैं देखती हूँ आपका मन कैसे नही लगता.
मे-ओके दीदी मैं शाम 6 आ जाया करूँगी.
गुलनाज़-अच्छा अब मैं चलती हूँ ध्यान से पढ़ना बच्चे. बाइ.
दीदी के जाने के बाद मैं अपनी क्लास में आ गई और पहला पीरियड अटेंड किया. आज मैने ध्यान से रिसेस तक के पीरियड लगाए और रिसेस होते ही मैं महक को ज़बरदस्ती खीच कर बाहर ले गई और हम ग्राउंड में जाकर बैठ गये. हम दोनो ने खाना खाया और फिर इधर उधर की बातें करते रहे. एक बात जो मेरे दिल में काफ़ी देर से आ रही थी आख़िरकार वो ज़ुबान पर भी आ ही गई.
मे-मिक्कु क्या तूने आकाश के साथ सेक्स किया है.
महक थोड़ा झिझक कर बोली.
महक-यस. पर क्यूँ पूछ रही है.
मे-बस ऐसे ही कल तुम दोनो क्लास में जो कर रहे थे क्या तुषार के सामने भी ऐसे ही करते हो.
महक मेरी बात सुनकर परेशान सी हो गई और बोली.
महक-हां रीत. अगर गुस्सा नही करोगी तो एक बात कहूँ.
मे-हां बता ना.
महक-देख रीत तू मेरी बेस्ट फ़्रेंड है तुझसे मैं कोई बात नही छुपाती.
मे-बता तो बात क्या है.
महक-रीत तुषार ने मेरे साथ सेक्स भी किया है.
मे-क्या...?
महक-हां रीत प्लीज़ गुस्सा मत होना मगर ये सच है.
मे-और तूने उसे करने दिया.
महक-अकटुल्ली यार आकाश मुझे अपने किसी दोस्त के फार्महाउस पे लेकर गया था और तुषार भी साथ में था. पहले तो मैं और आकाश ही रूम में थे लेकिन फिर आचनक तुषार भी अंदर आ गया और मेरे साथ छेड़-छाड़ करने लगा. पहले तो मैने उसे बहुत रोका लेकिन फिर अपने जिस्म के हाथों मज़बूर हो गई और मैने विरोध करना छोड़ दिया. उस दिन बस दोनो ने मेरे साथ किया.
मे-आकाश ने कुछ नही कहा उसे.
महक-नही यार आकाश ने तो उसे बुलाया था.
मे-और तू अब भी आकाश के साथ मज़े ले रही है उसने कितना बड़ा धोखा दिया तुझे.
महक-दिल के हाथों मज़बूर हूँ रीत. तू नही जानती मैं आकाश को किस कदर चाहती हूँ. बस मैं उसे हर वक़्त खुश देखना चाहती हूँ चाहे उसके लिए मुझे कुछ भी करना पड़े. मुझे पता है वो मुझे सिर्फ़ एंजाय्मेंट का खिलोना समझता है लेकिन मैं इसी में खुश हूँ कि वो कम से कम एक बात के लिए तो मुझे याद करता है चाहे वो सेक्स के लिए ही क्यूँ ना करता हो.
महक की बातें सुनकर मेरी आँखों के किनारों से पानी निकल आया और महक तो लगभग रो ही पड़ी थी.
मैने उसे अपने सीने से लगाया और चुप करने के लिए कहा.
मे-ओये मिक्कुल यार रो मत तू क्यूँ रो रही है यार. रोना तो उस आकाश को पड़ेगा एक दिन जो तुम्हारे प्यार को समझ नही रहा है.
महक उसी तरह रोए जा रही थी.
मे-मिक्कु देख रोना बंद कर नही तो एक लगाउन्गी. ब्स अब चुप कर मेरी बिल्लो.
महक ने खुद को तोड़ा संभाला और सीधी होकर बैठ गई. तभी सामने से तुषार आता दिखाई दिया. तुषार को देखते ही महक ने अपने आँसू पोंछे और उसके बैठते ही मुस्कुरा कर बोली.
महक-अच्छा रीत मैं चलती हूँ तुम दोनो बात करो.
महक के जाते ही तुषार बोला.
तुषार-कहाँ थी मेरी सरकार आज सुबह से बात तक नही की.
मे-वो दीदी आई थी तुषार आज.
तुषार-तुम्हारी दीदी तो तुमसे भी बड़ी सेक्स बॉम्ब थी.
मे-शट अप. तुम्हारी ये बकवास सुन ने के लिए नही बैठी हूँ मैं.
तुषार-सॉरी यार ग़लती हो गई बस. अछा कल हम घूमने जा रहे हैं ओके. मैं बस स्टॉप पे से ही तुम्हे उठा लूँगा.
महक की बातों को सुन कर पहले तो दिल किया इसे मना कर दूं. लेकिन नही शायद मैं भी उसे प्यार करने लगी थी और दिल के हाथों मज़बूर होकर मुझे उसे हां करनी ही पड़ी.
तुषार-ओके तो पक्का रहा. कल मैं अपने दोस्त की गाड़ी लेकर आउन्गा. तुम वहाँ बस स्टॉप पे ही वेट करना ओके.
मैने जवाब में सिर्फ़ मुस्कुरा दिया और तुषार वहाँ से उठ कर क्लास की तरफ चला गया.
आज का पूरा दिन स्कूल में उदासी के साथ गुज़रा क्योंकि महक की बातें सुनकर मुझे दुख हुआ था. सच में वो एक बहादुर लड़की है जो इतना कुछ सहन कर रही है सिर्फ़ प्यार के लिए लेकिन उसका प्यार सिर्फ़ एक तरफ़ा है. मेरे दिल मे आकाश के लिए नफ़रत पैदा हो रही थी. क्योंकि उसे महक का प्यार दिख नही रहा था.
आख़िरकार स्कूल टाइम ख़तम हुआ और मैं घर पे आ गई. घर आते ही मम्मी मुझ पे बरसने लगी. शायद गुलनाज़ दीदी ने उन्हे बता दिया था स्कूल की प्रोग्रेस के बारे में.
मम्मी गुस्सा होते हुए बोली.
मम्मी-आज से तुम गुल बेटी के पास जाओगी पढ़ने समझी.
मे-ओके मम्मी. अब खाना तो दो.
मम्मी-बैठ अभी देती हूँ. फिर मैने खाना खाया और कुछ देर अपने रूम में आराम किया और फिर शाम को गुलनाज़ दीदी के पास ट्यूशन के लिए गई और दीदी ने बहुत ही अच्छे तरीके से मुझे पढ़ाया और ट्यूशन के बाद मैं वापिस घर आ गई. रात को खाना खाया और सोने के लिए अपने रूम में चली गई. कुछ देर बाद तुषार की कॉल आई और उसने सुबह रेडी रहने को कहा. उसकी कॉल के बाद आकाश के 2-3 कॉल्स आए मगर मैने उसकी कॉल नही उठाई मेरा मन उसके साथ बात करने का नही हो रहा था. उसके कुछ मेसेज भी आए मगर मैने कोई जवाब नही दिया. मैं बेड पे पड़ी पड़ी महक की बातें सोचने लगी और सोचती-2 सो गई.
सुबह आँख खुली और मैं बिस्तेर से उठ कर वॉशरूम में गई और फिर फ्रेश होकर बाहर निकली और मम्मी से चाइ लेकर पीने लगी. फिर मैं स्कूल के लिए रेडी हुई. वैसे आज स्कूल तो नही जाना था. लेकिन फिर भी घर से तो स्कूल के लिए ही निकलना था. मैने स्कूल ड्रेस ब्लू कमीज़ और वाइट सलवार पहनी और घर से निकल गई. बस स्टॉप पे आकाश रोज़ की तरह खड़ा था. मुझे खड़े कुछ ही मिनिट हुए थे कि एक वाइट कलर की स्कोडा मेरे पास आकर रुकी. आकाश मेरे पास ही खड़ा था. उस कार के शीशे ब्लॅक थे इसलिए दिख नही रहा था कि अंदर कॉन है. तुषार ड्राइवर साइड का डोर खोल कर बाहर निकला और मुझे अंदर आने का इशारा किया फिर उसने आकाश को भी गाड़ी में आने को कहा. आकाश आगे का डोर खोल कर उसके पास वाली सीट पे बैठ गया और मैं पीछे बैठ गई और साइड वाली सीट पे अपना बॅग रख दिया. गाड़ी चल पड़ी और आकाश ने कहा.
आकाश-यार कहाँ घूमने जा रहे हो आज.
तुषार-बस यार ऐसे ही सोचा थोड़ा घूम फिर आते हैं.
आकाश-तो मुझे क्यूँ बिठा लिया गाड़ी में.
तुषार-अबे तुझे स्कूल के पास छोड़ दूँगा.
आकाश-तुम दोनो नही आ रहे हो आज महक भी नही आ रही तो मैं अकेला क्या करूँगा वहाँ.
तुषार-तो तू भी साथ में चल यार.
आकाश-हां ये सही है यार सुमित के फार्महाउस पे चलते हैं वहाँ अच्छा टाइम स्पेंड हो जाएगा यार.
फार्महाउस का नाम सुनते ही मेरा दिल घबरा गया और मुझे महक की बात याद आ गई कि कैसे महक के साथ उस फार्महाउस पे इन दोनो ने....नही नही मैं वहाँ नही जाउन्गी.
तभी आकाश ने मोबाइल निकाला और किसी को फोन किया.
आकाश-हां सुमित कैसा है.
'वो फार्महाउस की चाबी चाहिए थी यार'
'ओह नो. चल कोई बात नही ओके डियर बाइ'
तुषार-क्या हुआ.
आकाश-यार उसके कुछ गेस्ट्स आए हैं फार्महाउस पे.
तुषार-ओह नो.
कहते हुए तुषार ने गाड़ी एक साइड पे रोक दी और गाड़ी से बाहर निकलते हुए कहा.
तुषार-तू चला यार गाड़ी. मैं पीछे बैठता हूँ रीत के साथ.
तुषार मेरे पास आया और मेरा बॅग उठाकर आयेज की सीट पे रख दिया और मेरे साथ बैठ गया. आकाश ड्राइवर सीट पे जाकर गाड़ी ड्राइव करने लगा.
तुषार ने अपना हाथ मेरे कंधों के पीछे से घुमा कर मेरी दूसरी ओर कर लिया और मुझे अपनी तरफ खींचा. मैं थोड़ा सा उसकी तरफ हो गई. तुषार ने अपने होंठ मेरी गाल पे रख दिए और किस करने लगा. मैं अपने गाल नीचे की ओर करती हुई उसे हटाने लगी. मगर वो नही हटा मैने उसे दूर करते हुए कहा.
मे-तुषार प्लीज़ ये सब मत करो.
तुषार-अरे डार्लिंग अब थोड़ा बहुत हक तो बनता ही है हमारा.
मे-प्लीज़ तुषार मुझे शरम आ रही है और आकाश भी तो है गाड़ी में.
तुषार-यार तुम इसकी चिंता मत करो ये पीछे नही देखेगा. साले पीछे मत देखना समझे.
आकाश-नही देखूँगा यार आप करो एंजाय.
आकाश की बात सुन ने के बाद तुषार ने मेरा दुपट्टा मेरे गले में से उतार दिया और दुपट्टा उतरते ही मेरे उरोज जो कि मेरी कमीज़ में तने हुए थे वो तुषार को दिखने लगे. तुषार को मेरे उरोजो की तरफ देखता पाकर मुझे बहुत शरम आने लगी और मैने अपने दोनो हाथों को अपने उरोजो के उपर कर लिया ताकि उन्हे तुषार की नज़रों से बचा सकूँ. तुषार ने मेरे दोनो हाथों को पकड़ा और उठाकर अपने गले में डाल दिए और मुझे अपनी तरफ खीच लिया. अब मेरी एक टाँग सीट के उपर थी तो दूसरी नीचे और तुषार भी ऐसे ही बैठा था अब हम बिल्कुल एक दूसरे के सामने थे. तुषार मुझे घूर रहा था जिसकी वजह से मुझे बहुत शरम आ रही थी. तुषार ने मुझे अपने और पास खीच लिया अब हमारे होंठों के बीच बहुत कम फासला था. उसके होंठ मेरे होंठों की तरफ आने लगे और आख़िरकार मेरे होंठों को उसके होंठों ने क़ैद कर लिया. मेरी आँखें बंद होती चली गई और मैं मदहोश होकर चुंबन में तुषार का पूरा साथ देने लगी.
तुषार मेरे होंठो को बेदर्दी से चूस रहा था मुझे भी उसकी इस बेदर्दी में बहुत मज़ा आ रहा था. वो कभी मेरे उपर वाले होंठ को तो कभी नीचे वाले होंठ को अपने होंठो में लेता और अपनी तरफ खीचता मेरे होंठ भी उसके होंठों के साथ उसकी तरफ खिचे चले जाते. मैं आँखें बंद करके उसके चुंबन का मज़ा ले रही थी. मैं भूल चुकी थी कि हम दोनो के अलावा आकाश भी गाड़ी में है जो शायद हमे ही देख रहा है. तुषार के हाथ अब मेरी जांघों पे घूमने लगे थे और उसके हाथ जांघों पे महसूस करते ही मेरी योनि में सरसराहट होने लगी थी. मैने अपनी जांघों को आपस में भींच लिया और अपने हाथ नीचे लेज़ा कर उसके हाथों को अपनी जांघों के उपर से हटाने लगी. मगर तुषार अपने हाथ वहाँ से हटने को तयार नही था. उल्टा उसने मेरी दोनो लेग्स को पकड़ा और उन्हे उपर उठाते हुए मुझे अपनी तरफ खीचा. उसके खीचने की वजह से हमारे होंठ एक दूसरे से अलग हो गये और मेरे नितंब सीट के उपर घिसते हुए उसके पास पहुँच गये. मेरी दोनो टाँगें उसकी कमर के इर्द-गिर्द फैल गयी और मेरा सर पीछे की तरफ होता हुआ गाड़ी के डोर के साथ जाकर टिक गया. अब मैं सीट के उपर लगभग लेट गई थी और तुषार मेरी टाँगों के बीच था. तुषार ने अपनी टी-शर्ट उतार दी और उसे साइड पे फेंक दिया. टी-शर्ट उतारते देख मैने उसे कहा.
मे-टी-शर्ट क्यूँ उतार रहे हो तुम.
तुषार-बहुत गर्मी है डार्लिंग मैं तो कहता हूँ तुम भी उतार दो.
मे-बकवास मत करो मैं नही उतारने वाली.
तुषार-देखते हैं जानू.
मैने देखा तुषार की बॉडी भी काफ़ी अच्छी थी. हां लेकिन आकाश जितनी नही थी लेकिन फिर भी बहुत अच्छे से मैंटेन किया था उसने अपनी बॉडी को.
वो अब मेरे उपर लेट गया और फिरसे मेरे होंठों को चूसने लगा. मैने भी उसके गले में बाहें डाल दी और उसका साथ देने लगी. उसके हाथ अब हम दोनो के शरीर के बीच मेरे उरोजो के उपर पहुँच चुके थे और वो उन्हे मेरे कमीज़ के उपर से ही हाथों में भर कर मसल्ने लगा था. उरोजो के मसले जाने की वजह से मेरे पूरे शरीर में मस्ती की लहरें दौड़ने लगी थी. वो जितनी ज़ोर से मेरे उरोज मसलता मैं उतनी ही ज़ोर से उसके होंठ को चूस देती. तुषार मेरी इस हरकत से पागल सा हो गया. वो भी ज़ोर ज़ोर से मेरे होंठो को चूसने लगा और बीच-2 में बाइट भी करने लगा जिसकी वजह से मेरे होंठ दर्द करने लगे. मैने उसका चेहरा अपने हाथों में थाम लिया और उसे दूर हटाने लगी. बड़ी मुश्क़िल से मैने अपने होंठों को उसके होंठों की क़ैद से छुड़ाया. मैने अपना हाथ होंठों पे रखा तो मुझे अपने हाथों पे थोड़ा खून नज़र आया. मैने तुषार को मारते हुए कहा.
मे-तुमने खून निकाल दिया देखो.
तुषार-कोई बात नही डार्लिंग अभी सॉफ कर देता हूँ.
और वो अपनी जीभ निकालकर मेरे होंठों पे फिराने लगा और सारा खून चाट कर सॉफ कर दिया. अब उसने अपना चेहरा नीचे किया और मेरे उरोजो के उपर कमीज़ के उपर से ही अपनी जीभ फिराने लगा. मैने आकाश की तरफ देखा वो आगे देखता हुआ गाड़ी चला रहा था. आचनक उसने पीछे देखा और हमारी नज़रें एक हो गई. वो मुझे देखकर स्माइल करने लगा और बदले में मैने अपनी जीभ निकाल कर उसे चिड़ा दिया. अब तुषार ने अपने दोनो हाथों से मेरा कमीज़ पकड़ा और धीरे-2 उसे उपर सरकाने लगा और मेरा गोरा और चिकना पेट उसकी आँखों के सामने नंगा हो गया. मैने अपना कमीज़ नीचे करना चाहा मगर उसने मेरे हाथों को अपने हाथों में पकड़ लिया. जैसे ही उसके होंठ मेरे पेट के उपर मुझे महसूस हुए तो मेरा पूरा शरीर काँप उठा और एक आहह मेरे मूह से निकल गई. वो अपने होंठ मेरे गोरे पेट के उपर फिराने लगा मेरे लिए ये बर्दाश्त करना बहुत मुश्क़िल हो रहा था मेरी साँसें तेज़-2 चलने लगी जिसकी वजह से मेरा पेट उपर नीचे होने लगा. तुषार के हाथ अब मेरी सलवार के नाडे के उपर पहुँच गये और जैसे ही वो उसे खोलने लगा तो मैने झट से उसके हाथों को थाम लिया और कहा.
मे-प्लीज़ तुषार इसे मत खोलो.
तुषार-रीत प्लीज़ यार अब नखरा मत करो खोलने दो ना मुझे एक बार तुम्हारी चूत देखनी है.
मे-मुझे नही दिखानी.
तुषार ने अब अपने हाथ वहाँ से हटाए और फिर मेरे हाथों को अपने हाथों में जाकड़ लिया. वो अपना चेहरा मेरी योनि की तरफ लेकर गया और उसने झट से मेरे नाडे को अपने दाँतों के पीछ पकड़ कर खीच दिया और मेरी सलवार नाडा खुलते ही ढीली हो गई. मैं अपनी टाँगें इधर उधर हिलाते हुए कहने लगी.
मे-तुम बहुत बड़े कमिने हो तुषार.
तुषार-यस वो तो मैं हूँ.
अब उसने मेरी सलवार को किनारों से पकड़ा और मेरी उपर उठी टाँगों में से बाहर निकालने लगा. मैं कुछ कर पाती उस से पहले ही मेरी सलवार मेरी टाँगों से अलग हो गई और तुषार ने उसे आकाश के पास आगे फेंक दिया. आकाश ने पीछे देखा और वो मेरी बे-परदा हो चुकी नंगी मसल जांघे को घूर्ने लगा. मैं एकदम से सीधी होकर बैठ गई और अपना कमीज़ नीचे करते हुए अपनी जांघों को ढकने लगी.
मैने आकाश की तरफ देखते हुए कहा.
मे-आकाश मेरी सलवार वापिस दो प्लीज़.
आकाश-अरे रीत मैने थोड़े ही ना उतारी है जिसने उतारी है उस से माँगो.
मे-प्लीज़ तुषार मेरी सलवार दो वरना मैं तुम्हे कभी नही बुलाउन्गी.
तुषार-ओह डार्लिंग नाराज़ मत हो प्लीज़.
तुषार अब अपनी पैंट उतारने लगा और मैं अपनी नग्न जांघे छिपाने लगी.
तुषार ने अब अपनी जीन्स भी उतार दी थी और उसके जिस्म पे सिर्फ़ एक ब्लॅक अंडरवेर थी. और उसकी छोटी सी अंडरवेर उसका भारी भरकम लिंग संभालने में नाकाम हो रही थी. उसकी अंडरवेर का उफान सॉफ बता रहा था कि उसका लिंग पूरा तना हुआ है. मेरा तो दिल उसे अंडरवेर में देखते ही घबराने लगा. मुझे अपने लिंग को घूरते देख तुषार बोला.
तुषार-डार्लिंग इतनी दूर क्यूँ बैठी हो इसे पास से आकर देखो.
उसने मुझे पकड़ कर अपनी तरफ खीचा और मुझे अपनी गोद में बिठा लिया. अब वो दोनो टाँगें सीट से नीचे लटका कर बैठा था और मैं उसकी गोद में उसकी तरफ चेहरा किए बैठी थी. मेरी पीठ आकाश की तरफ थी और मेरी टाँगें तुषार की टाँगों के इर्द-गिर्द थी. वो फिरसे मेरे होंठ चूसने लगा और उसके हाथ मेरे कमीज़ को नितंबो के उपर से उठाते हुए नितंबों को मसल्ने लगे. मेरी पीठ आकाश की तरफ थी तो जाहिर है मेरे पिंक कलर की पैंटी में ढके नितंब उसे दिख रहे होंगे. यही सोच कर मेरा रोम रोम मस्ती और शरम में डूबने लगा. तुषार के हाथ अब मेरी पैंटी में घुसकर मेरे नितंब मसल्ने लगे थे. पहला मौका था जब मैं किसी मर्द के सामने ऐसी हालात में थी. वो भी 2 मर्दों के सामने. तुषार के होंठ अब मेरे उरोजो के उपर घूम रहे थे और वो मेरे उरोजो को कमीज़ के उपर से ही चूस रहा था और कभी-2 काट भी देता था. मैं अब पूरी तरह से मदहोश हो चुकी थी तुषार ने मौका अच्छा देखकर मेरा कमीज़ पकड़ा और उसे उपर करने लगा और मदहोशी में मेरे हाथ अब खुद ही उपर उठ गये और तुषार ने आसानी से मेरा कमीज़ मेरे जिस्म से अलग कर दिया. अब मेरे जिस्म पे केवल पिंक कलर की ब्रा और पैंटी थी. तुषार ने अब मेरे उरोजो को ब्रा से बाहर निकाला और मेरे गोरे और मुलायम उरोजो पर टूट पड़ा और अपने होंठों से उन्हे चूसने लगा. मैं उसका सर पकड़ कर अपने उरोजो में दबाने लगी मुझे बहुत ही मज़ा आ रहा था.
मुझे अपने नितंबों के उपर कोई हाथ रेंगता हुआ महसूस हुया मैने गर्दन घुमा कर देखा तो ये आकाश का हाथ था वो अपनी उंगली मेरे नितुंबों के बीच की दरार में घुमा रहा था. मैने झटके से उसके हाथ हटा दिया. वो फिरसे आगे देखता हुआ गाड़ी चलाने लगा.
फिर तुषार ने मेरे उरोजो के उपर से अपना मूह हटाया और कहा.
तुषार-अबे यार आकाश किसी सुनसान जगह पे गाड़ी रोक ले कब तक ऐसे घूमते रहेंगे.
आकाश-ओके बॉस जैसा तू कहे.
अब तुषार ने मुझे अपनी गोद से उतार दिया और सीट के उपर घुटनो के बल बैठने को कहा. मैं घुटनो के बल सीट के उपर बैठ गई अब मेरे नितंब तुषार की तरफ थे और मेरा चेहरा डोर की तरफ. आकाश ने भी गाड़ी एक सुनसान से रास्ते पे लेजा कर साइड में लगा दी थी.
तुषार ने पीछे से मेरी पैंटी को पकड़ा और झटके से उसे खोल कर मेरी जांघों तक कर दिया और वो अपना हाथ मेरी योनि पे फिराने लगा. मेरी योनि का गीलापन उसे अपने हाथ पे सॉफ महसूस हो रहा था. उसने अपना हाथ हटाया और अपना चेहरा मेरी योनि के पास कर दिया. मेरा शरीर तुषार की हरकतों से पहले ही पूरा गरम था. जैसे ही उसने अपनी जीभ मेरी योनि पे लगाई तो मेरी योनि एकदम से झटके खाते हुए पानी छोड़ने लगी. मेरे मूह से हल्की-2 आहें निकलने लगी. सारा कामरस मेरी जांघों से बहता हुआ नीचे की तरफ जाने लगा. अब तुषार की जीभ मेरी योनि पे तेज़-2 चलने लगी. उसकी हरक़तें मुझे फिरसे गरम करने लगी.
मैने आकाश की तरफ देखा तो वो मुझे ही देख रहा था और उसने अपना पेनिस बाहर निकाल रखा था और हाथों से हिला रहा था. सच में उसका पेनिस बहुत बड़ा था उसे देखते ही मेरे शरीर में एक झटका सा लगा. मैने देखा आकाश के होंठ मुझे इस हालत में देख कर बार सूख रहे थे. मैं भी कहाँ पीछे हटने वाली थी. उसकी हालत और पतली करने के लिए मैं अपने नितंबों के तुषार के मूह पे इधर उधर घुमाने लगी और जान बुझ कर थोड़ी लाउड्ली आहें भरने लगी. मेरी और आकाश की नज़रें आपस में मिली और मैं उसे देखकर मुस्कुराने लगी और वो भी मुस्कुराते हुए अपने लिंग को ज़ोर ज़ोर से हिलाने लगा. मैं आकाश के लिंग को देखने में इतना खो गई कि मुझे पता ही नही चला कि कब तुषार ने अपनी अंडरवेर उतार दी और अपना लिंग मेरी योनि में घुसाने के लिए रेडी कर लिया. जैसे ही तुषार का लिंग मेरी योनि पे लगा तो एकदम जैसे मैं नींद से जाग उठी और झट से आगे को होकर बैठ गई और कहने लगी.
मे-नही तुषार प्लीज़ में ये काम नही कर्वाउन्गी.
तुषार-ओह कमोन रीत देखना कितना मज़ा आएगा.
मे-नही मुझे पता है बहुत दर्द होता है.
तुषार-डार्लिंग थोड़ा बहुत दर्द होगा मैं प्यार से करूँगा प्लीज़ यार.
उसने मुझे फिरसे टाँगो से पकड़ा और अपनी तरफ खींच लिया. अब मैं फिरसे सीट के उपर पीठ के बल लेट गई और तुषार ने मेरी पैंटी और ब्रा निकाल दी अब मैं बिल्कुल नंगी उन दोनो के सामने थी. तुषार ने अपने लिंग पे थोड़ा थूक लगाया और उसे मेरी योनि के मुख द्वार पे सेट कर दिया. मेरा दिल आने वाले पल को सोचते हुए ज़ोर ज़ोर से धड़कने लगा. तुषार ने एक हल्का धक्का लगाया और मगर उसका लिंग मेरी योनि के उपर से फिसल गया. फिर तुषार ने थोड़ा ज़ोर लगाते हुए धक्का दिया और उसके लिंग का सुपाडा मेरी योनि को चीरता हुआ अंदर घुस गया और मेरी दर्द भरी चीख पूरी कार में गूँज़ उठी.
तुषार ने थोड़े ज़ोर के साथ धक्का लगाया और उसका सुपाडा मेरी योनि को चीरता हुआ अंदर घुस गया और मेरी दर्द भरी चीख पूरी कार में गूँज़ उठी. तुषार नीचे झुका और मेरे होंठों को चूसने लगा और मेरे उरोजो को मसल्ने लगा. अब मेरा दर्द थोड़ा कम हुआ तो उसने फिरसे एक धक्का लगाया और उसका लगभग आधा लिंग मेरी योनि में घुस गया मेरे आँखों में से पानी बहने लगा और मैं ज़ोर ज़ोर से चिल्लाने लगी.
मगर तुषार ने मेरी एक नही सुनी और उसने एक और जोरदार धक्का दिया और उसका लिंग पूरे का पूरा मेरी योनि में समा गया. मेरी आँकें बाहर निकल आई और मेरे मूह खुले का खुला ही रह गया. मेरी योनि में से खून की एक धार निकल कर मेरे नितंबों की दरार में से होती हुई नीचे सीट पे गिरने लगी. तुषार फिरसे मेरे होंठ चूसने लगा. मुझे बहुत दर्द हो रहा था ऐसे लग रहे था जैसे कोई बहुत ही मोटा डंडा मेरी योनि में घुस गया हो. काफ़ी देर तक तुषार अपने लिंग को मेरी योनि में डाले ही पड़ा रहा जब उसे लगा कि मेरा दर्द कुछ कम हो गया है तो वो धीरे धीरे अपने लिंग को बाहर निकालने लगा और फिर धीरे धीरे वापिस अंदर करने लगा अब मुझे पहले जितना दर्द नही हो रहा था. तुषार की स्पीड भी अब बढ़ती जा रही थी. मैं भी नीचे से अब उसका साथ देने लगी थी. मेरी दर्द की चीखें अब मस्ती भरी आहों में बदल गई थी और मैने तुषार को मज़बूती से जाकड़ लिया था. तुषार अब तेज़-2 धक्के लगाने लगा था. काफ़ी देर तक वो ऐसे ही धक्के लगाता रहा और फिर उसने अपना लिंग बाहर निकाल लिया. मैने देखा मेरी योनि सूज़ गई थी और काफ़ी खून उसके उपर लगा हुआ था. तुषार ने मेरी पैंटी उठाई और मेरी योनि को उसके साथ सॉफ करने लगा और फिर अपने लिंग को भी उसने सॉफ किया और पैंटी वापिस वहीं पे रख दी. अब उसने मुझे घुटने के बल कर दिया और पीछे से अपना लिंग मेरी योनि में डालते हुए धक्के लगाने लगा. मुझे अब बहुत मज़ा आ रहा था. मैं खुद अपने आप को आगे पीछे कर रही थी. मेरे पूरे शरीर में मस्ती छाई थी तुषार बहुत तेज़ तेज़ धक्के मार रहा था पूरी कार में मेरी आहें और सिसकारियाँ गूँज़ रही थी. आकाश अभी भी अपना पेनिस हाथ में पकड़ कर हिला रहा था. एक लिंग मेरी योनि के बीच था तो दूसरा आँखों के सामने. मेरे लिए ये बहुत ही उत्तेजक दृश्य था और उत्तेंजना की वजह से अब मेरी योनि ने अपना काम रस छोड़ दिया था मगर तुषार का लिंग था की शांत होने का नाम ही नही ले रहा था. वो बुरी तरह से मुझे चोद रहा था. आख़िरकार काफ़ी दर्द झेलने के बाद मेरी योनि ने तुषार के लिंग को अपने अंदर निचोड़ लिया था. तुषार ने भी अपना सारा काम रस मेरी योनि में उडेल दिया था. उसने अपना लिंग बाहर निकाला तो मुझे कुछ राहत मिली और मैं सीधी होकर बैठ गई. तुषार ने मुझे बाहों में भर कर चूमते हुए कहा.
तुषार-तुम बहुत हॉट हो रीत मज़ा आ गया.
मैं उसकी बात सुनकर दिल ही दिल में बहुत खुश हुई. आख़िर अपनी तारीफ सुन ना किसे अच्छा नही लगता. मुझे बहुत दर्द हो रहा था और मैं अपनी योनि पे हाथ लगाकर बैठी थी. मुझे इस तरह बैठे देख तुषार ने पूछा.
तुषार-क्या हुया रीत.
मे-बहुत दर्द हो रहा है तुषार.
तुषार-बस तुम थोड़ी देर रूको हम तुम्हे पेन किल्लर लेकर देते हैं ये लो अपने कपड़े पहनो.
और उसने मुझे मेरे कपड़े इकट्ठे करके दिए. मैने देखा मेरी पैंटी तो उनमे थी ही नही. मैने तुषार को कहा.
मे-तुषार मेरी पैंटी तो दो.
तुषार ने अपने हाथ में मुझे पैंटी दिखाते हुए कहा.
तुषार-ये है तुम्हारी पैंटी लेकिन अब ये मेरे पास रहेगी हमारे पहले सेक्स की याद के तौर पर. इसके उपर तुम्हारी कुँवारी योनि का खून लगा है जो कि हमेशा मुझे आज के दिन की याद दिलाता रहेगा.
फिर उसने गाड़ी में से एक मारकर उठाया और पैंटी के उपर तुषार न्ड रीत लिख दिया. मैं उसकी हरकत पे अंदर ही अंदर मुस्कुराने लगी. मैने सोचा जिस दिन से इस तुषार के संग दिल जोड़ा है मेरी 3 पॅंटीस खराब हो गई और आगे पता नही कितनी ही होंगी. फिर मैने अपने कपड़े पहने और आकाश ने भी गाड़ी वापिस घर की तरफ दौड़ा दी. रास्ते में एक मेडिकल स्टोर से तुषार ने मुझे पेन किल्लर ला कर दी जिसे खाने के बाद मेरा दर्द कुछ हद तक कम हो गया. फिर उन्होने मुझे हमारे बस स्टॉप से कुछ दूरी पे उतार दिया. मैने टाइम देखा तो 3 बज रहे थे. थॅंक गॉड मैं सही टाइम पे घर आ गई थी. आकाश थोड़ी आगे जाकर उतर गया था. मुझे चलने में थोड़ी मुश्क़िल हो रही थी. मगर मैं जल्दी जल्दी अपने घर पहुँच गई मगर वहाँ पे कोई नही था. मैं गुलनाज़ दीदी के घर गई तो ताई जी ने मुझे बताया कि वो लोग करुणा को देखने गये है और गुलनाज़ दीदी भी उनके साथ गई है. तभी जावेद भैया भी कॉलेज से वापिस आ गये. ताई जी ने मुझे और भैया को खाना दिया और हमने खाना खाया और फिर मैं गुलनाज़ दीदी के रूम में जाकर सो गई और शरीर के थक जाने की वजह से मुझे बेड पे गिरते ही नींद आ गई.
तुषार के साथ किए सेक्स की वजह से मुझे खूब नींद आई और शाम को 7 बजे मुझे गुलनाज़ दीदी ने उठाया.
गुलनाज़-ओये रीतू उठ कब से घोड़े बेच कर सो रही है.
मैं आँखें मल्ति हुई उठी और गुलनाज़ दीदी के गले में बाहें डाल दी. मैने दीदी की चीक्स पे किस की और बदले में दीदी ने भी प्यार के साथ मेरे फोर्हेड न्ड चीक्स पे किस की और कहा.
गुलनाज़-आज तो खूब सोई हो आप.
मे-जी दीदी मैं थक गई थी.
गुलनाज़-आपको पता है हम अपनी भाभी से मिलकर आ रहे हैं.
मे-ओह हम दीदी मैं तो भूल ही गई थी. कैसी लगी करू भाभी आपको.
गुलनाज़-बहुत अच्छी सच में बहुत अच्छी हैं वो आपको पूछ रही थी और मुझे आपको उनकी तरफ से किस देने को बोला है. और ये लो भाभी की तरफ से एक और किस.
और दीदी ने मेरी चीक्स पे फिरसे किस की और मुझे बाहर आने को बोल कर चली गई. मैं उठी और अपना मूह धोया मेरा दर्द अब काफ़ी कम हो चुका था. मैं वॉशरूम में गई और जब वॉशरूम करने के लिए अपनी सलवार नीचे की तो देखा मेरी योनि पूरी लाल हो चुकी थी और किनारों से सुज़ भी गई थी. मैने अपनी योनि को प्यार से सहलाते हुए कहा.
मे-देखो तुषार के बच्चे ने क्या हाल कर दिया मेरी परी का.
फिर मैने बाथरूम किया और फ्रेश हो कर बाहर ड्रॉयिंग रूम में आ गई. गुलनाज़ दीदी ने मुझे चाइ दी और हम बैठ कर चाइ पीने लगे. जावेद भैया भी हमारे पास आकर बैठ गये और बोले.
जॉड-ओये रीतू अब उठी है तू.
मे-जी भैया.
जॉड-तू इतना कब से सोने लगी और आज तो मेडम ने ड्रेस भी नही खोली स्कूल वाली.
मे-वो भैया मेरा सर दर्द कर रहा था इसलिए मैं ऐसे ही सो गई.
जॉड-रीतू ये आकाश भी तेरे ही क्लास में है ना.
मे-जी भैया.
जॉड-मैने उसे कहा था कि रीत का ख़याल रखा कर स्कूल में.
मैने सोचा बहुत अच्छे से ख़याल रखता है मेरा वो कमीना.
असल में भैया और आकाश अच्छे दोस्त थे और आकाश की एक बड़ी बेहन थी 'दीपा' जो जावेद भैया के साथ ही कॉलेज में पढ़ रही थी. भैया का उनके घर काफ़ी आना जाना था और मुझे पता था कि भैया और दीपा के बीच कुछ ना कुछ ज़रूर चल रहा है. मैने उन्हे छत पे कई बार छुप कर मिलते हुए देखा था. अक्सर वो छत पे एक दूसरे के साथ लिपट-ते चिपट-ते रहते थे.
...................
मैने अब चाइ पी और फिर दीदी और भैया को बाइ बोल कर अपने घर आ गई. भैया, मम्मी और पापा तीनो ड्रॉयिंग रूम में बैठे थे मैने मम्मी के पास बैठते हुए पूछा.
मे-मम्मी कैसी लगी आपको भाभी.
मम्मी-बहुत ही सुंदर और शुशील.
पापा-बहुत अच्छी पसंद है हॅरी की.
मे-तो फिर भैया किसके हैं पसंद तो अच्छी ही होगी.
सब मेरी बात सुन कर हँसने लगे. फिर मैने पूछा.
मे-तो फिर कब आ रही है मेरी भाभी घर में.
मम्मी-बहुत जलद आज हमने शगुन डाल दिया है और 5मंत के बाद शादी फिक्स की है.
मे-वाउ ये तो बहुत अच्छी खबर है. मैं अभी भाभी से बात करती हूँ.
मैं उठने लगी तो मम्मी ने कहा.
मम्मी-बात बाद में करना पहले अपनी ड्रेस चेंज कर सुबह से स्कूल की ड्रेस पहने घूम रही है तू.
मैने रूम में आकर ड्रेस चेंज की और लोवर और टी-शर्ट पहन ली लेकिन अंदर ब्रा और पैंटी नही पहनी. छत पे जाके मैने भाभी को फोन किया.
करू-हेलो माइ स्वीट ननद कैसी है तू.
मे-मैं ठीक हूँ भाभी. शादी की मुबारक हो.
करू-तुझे भी स्वीतू तेरी वजह से ही सब कुछ हुआ है वरना ये घून्चु देखता रह जाता और मुझे कोई और ही उठा कर ले जाता.
मे-ऐसे कैसे उठा कर ले जाता पहले उसे रीत का सामना करना पड़ता.
करू-हां ये तो है वैसे भी अगर मुझे से पहले तू किसी के सामने आती तो हर कोई तुझे ही उठा कर ले जाता. तेरे जैसी कच्ची कली कहाँ मिलेगी किसिको.
अब भाभी को क्या पता था कि ये कच्ची कली ताज़ा-ताज़ा फूल बन कर आई है आज.
मे-अच्छा भाभी आज तो आपको बताना पड़ेगा कि भैया ने आपके साथ 'वो' किया या नही.
करू-ओये रीतू तू मुझसे पिटेगी एक ना एक दिन.
मे-प्लीज़ भाभी बताओ ना प्लीज़....
करू-देखो-2 कैसे मरी जा रही ये सुन ने को.
मे-प्लीज़ भाभी.
करू-अच्छा सुन मेरी माँ. तेरे भैया दिखने में जितने भोले है उतने है नही.
मे-वो कैसे.
करू-वो ऐसे कि प्रपोज के दूसरे दिन ही तेरे भैया ने मुझे पहली किस की थी.
मे-ओह ग्रेट कहाँ पे.
करू-होंठो पे और कहाँ पे.
मे-अच्छा-2 मैने सोचा नीचे की थी.
करू-शट अप. बेफ़्कऊफ़ लड़की. जा मैं नही बताती.
मे-ओह सॉरी सॉरी भाभी प्लीज़ नाराज़ मत हो आप.
करू-अच्छा तो सुन. प्रपोज करने के ठीक 1वीक बाद ही तेरे भैया ने मेरे साथ वो भी कर दिया.
मे-और आपने खुशी-2 करवा लिया.
करू-यस अब हॅरी की खुशी में ही मेरी खुशी है.
मे-बस एक बार ही किया.
करू-अरे नही फिर तो जब भी मौका मिला तभी पकड़ लिया छिलकोज़ू ने मुझे.
मे-सिर्फ़ भैया के साथ ही किया या किसी और के साथ भी.
करू-ओये महा-मूरख लड़की. वन आंड ओन्ली तेरे भैया के साथ समझी. किसी और ने तो मुझे टच तक नही किया और तेरे भैया ने मेरे जिस्म का कोई ऐसा हिस्सा नही छोड़ा यहाँ टच ना किया हो. तूने तो कोई ऐसी वैसी हरकत नही की किसी के साथ.
मे-नही भाभी मैं तो बहुत शरीफ हूँ.
करू-दिख रही है मुझे तेरी शराफ़त. अगर तूने कोई ग़लत काम किया ना तो देखना बहुत मारूँगी मैं तुझे.
मे-ओये मेरी 'हिट्लर भाभी' अब बस भी करो.
करू-अच्छा फिर बात करूँगी. बाइ स्वीतू.
मे-बाइ भाभी.
भाभी से बात करने के बाद मैं नीचे आ गई. अब अंधेरा काफ़ी हो चुका था मैने सब के साथ मिल कर खाना खाया और फिर अपने रूम में चली गई. आज नींद थी कि आने का नाम ही नही ले रही थी. शायद दिन में सो लेने की वजह से नींद आँखों से दूरी बनाए हुए थी. मैने सोचा चलो तुषार को फोन करती हूँ.
मैने उसका नो. मिलाया और कुछ देर रिंग जाने के बाद उसने फोन उठाया.
तुषार-हाई मेरी सेक्सी जानेमन कैसी हो.
मे-ठीक हूँ तुमने तो मेरा हाल पूछने की ज़रूरत तक नही समझी.
तुषार-ओह हो ऐसी बात नही है जानू. तुम जानती तो हो मम्मी बीमार है मेरी.
मे-क्यूँ आंटी ठीक नही हुई अभी तक.
तुषार-पहले से बेहतर हैं अब.
मे-ओके गुड.
तुषार-अच्छा रीत बाद में फोन करता हूँ मम्मी बुला रही हैं.
मे-ओके ओके गो.
उसने फोन काट दिया और मैं सोचने लगी अब क्या करू. तभी मेरे मोबाइल. की रिंग बज उठी. मैने नंबर. देखा तो आकाश का था. मैने मन में सोचा लो आ गया कमीना.
मैने फोन उठाया और कहा.
मे-यस किससे मिलना है आपको.
आकाश-एक कली से मिलना है जो आज ही फूल बनी है वो भी मेरी आँखों के सामने.
मे-बकवास बंद करो अपनी.
आकाश-ये बकवास नही है डार्लिंग जब से तुम्हारा नंगा बदन देखा है तब से मेरा पप्पू बैठने का नाम ही नही ले रहा है. बस तुम्हे ही याद कर रहा है.
मे-अपने पप्पू को कहो कि भूल जाए मुझे और सिर्फ़ महक के बारे में सोचे.
आकाश-अरे यार कहाँ महक का नाम ले दिया सारा मूड ऑफ कर दिया.
मे-देखो आकाश मैं तुम्हे कुछ बताना चाहती हूँ प्लीज़ ध्यान से सुनो.
आकाश-बताओ आपकी सुन ने के लिए ही तो बैठे हैं.
मे-देखो आकाश मैं महक के बारे में तुम्हे कुछ बताना चाहती हूँ.
आकाश-क्या.
मे-आकाश महक तुम्हे बहुत प्यार करती है और तुम हो कि उसे हमेशा एंजाय्मेंट की चीज़ समझते हो.
फिर मैने वो सारी बातें उसे बताई जो मुझे महक ने उस्दिन ग्राउंड में बताई थी. मेरी बातें का असर आकाश के उपर भी हुआ. उसने मुझसे वादा किया कि वो अब महक को कभी इग्नोर नही करेगा. मगर फोन पे मेरे साथ वो फिरसे पहले की तरह फ्लर्ट करने लगा. मैं यही चाहती थी कि आकाश मेरे साथ भी ऐसा ही रहे और महक को भी पूरा प्यार दे.
आकाश-अच्छा रीत अब मैने तुम्हारे साथ वादा किया है कि मैं महक को इग्नोर नही करूँगा. अब तुम्हे भी मुझे वादा देना होगा.
मे-कैसा वादा.
आकाश-यही कि जैसा आज तुषार के नाम तुमने एक पैंटी की वैसे ही मेरे नाम भी एक पैंटी करोगी.
मे-अरे ये कैसा वादा हुआ.
आकाश-बस तुम वादा करो. मुझे पता है तुम चाहत हो मेरी तुम्हारे साथ सेक्स करना. मगर तडपा रही हो मुझे.
मे-ना बाबा ना मैं कोई वादा नही करूँगी अगर तुम में हिम्मत है तो देखा जाएगा.
आकाश-चॅलेंज कर रही हो.
मे-कुछ ऐसा ही समझ लो.
आकाश-ओके तो फिर ठीक है याद रखना रीत डार्लिंग अगर मैने अपना लंड तुम्हरे दोनो छेदो में ना घुसाया तो अपना नाम बदल दूँगा.
मे-ओके तो अभी से नाम सोचना शुरू करदो.
और मैने फोन काट दिया. क्योंकि वो कमीना तो पीछे ही पड़ गया था. फिर मैं सोने की कोशिश करने लगी और आख़िरकार मैं सपनो की दुनिया में खो गई.
दूसरे दिन सुबह उठी और रूटीन की तरह फ्रेश हो कर खाना खाकर स्कूल चली गई. बस फिर ऐसे ही दिन गुज़रते गये. तुषार और आकाश लगभग रोज़ ही फोन करते और मुझे गरम करते रहते. स्कूल में भी तुषार को जब भी मौका मिलता तो वो मुझे पकड़ लेता और बस शुरू हो जाता कभी क्लास रूम में तो कभी लाइब्ररी में बस वो मुझे पकड़ लेता. स्कूल में मैं उसे कपड़े नही उतारने देती थी बस वो उपर उपर से मसल कर मज़े लेता रहता स्कूल में तक़रीबन सभी स्टूडेंट्स को पता चल चुका था कि रीत और तुषार दोनो की जोड़ी बन चुकी. सभी लड़के तुषार की किस्मत से खार खाते क्योंकि तुषार की किस्मत ही थी जो उसके हाथ मेरे जैसी कच्ची कली लगी थी. आकाश ने भी इस बीच एक दो बार बस में मेरे साथ खूब मज़े किए थे. वो लड़का रेहान भी अक्सर बस में होता मगर वो बेचारा मुझसे दूर ही रहता और आकाश को मेरे साथ चिपकते देखता रहता. ज़्यादा तर मैं बस में बच ही जाती थी क्योंकि और लोग बीच में आकर खड़े हो जाते थे लेकिन जिस दिन भी आकाश मेरे पीछे आ जाता उस दिन मेरी पैंटी का गीलेपन से बुरा हाल हो जाता. पहले बस में आकाश उसे गीली होने पर मज़बूर करता और फिर स्कूल में तुषार. आकाश का महक के साथ बिहेव अब बहुत अच्छा हो गेया था. महक भी इस बदलाव से खुश थी. ऐसे ही हंसते खेलते टाइम गुज़र गया और हमारा आख़िरी एग्ज़ॅम आ गया था.
इस बीच तुषार ने मेरे साथ एक दफ़ा और सेक्स कर लिया था. वो और मैं स्कूल से बंक करके उसके घर गयी थी. उस दिन उसके पेरेंट्स किसी शादी में गये थे. वहाँ तुषार ने पूरा दिन मेरी जी भर के चुदाई की थी. सुबह 8 बजे से लेकर शाम के 4 बजे तक उसने मुझे कपड़े नही पहन ने दिए सारा दिन मैं उसके घर में नंगी ही घूमती रही थी. और उस दिन उसने मेरे साथ सेक्स के 4 राउंड लगाए थे मेरी तो हालत पतली हो गई थी. वो कोई गोली राउंड लगाने से करने से पहले ख़ाता था और फिर लगातार 30-40मिनट तक मुझे चोदता रहता था. मेरी परी का बुरा हाल कर दिया था उसने उस दिन.
.................
अब कल हमारा लास्ट एग्ज़ॅम था और मैने काफ़ी अच्छी तैयारी की थी एग्ज़ॅम के लिए.