मे-कट जाएगा. अच्छा मुझे अभी काम है फिर बात करूँगी. बाइ.
कारण-बाइ. कल पक्का ना.
मे-पक्का काजू.
मैने बात ख़तम की और जादू भैया के घर के अंदर चली गयी.
मे-भैयाआअ...... जादू भैया......
ताई जी मेरी आवाज़ सुनकर किचन से बाहर आई और मुझे देखते हुए कहा.
ताई जी-अरे वाह मेरी रीत तू. बड़े दिन बाद आई हो.
मे-बस ताई जी पढ़ाई में बिज़ी हूँ.
ताई जी-जब से तेरी गुलनाज़ दीदी गयी है तू तो यहाँ आना ही भूल गई.
मे-ऐसा क्यूँ बोल रही हो ताई जी मैं आज आ तो गयी.
ताई जी ने मुझे हग करते हुए कहा.
ताई जी-हमे मिलती रहा कर अब तू ही तो मेरी गुलनाज़ है.
मे-जी ताई मैं आती रहूंगी अच्छा जावेद भैया कहाँ हैं.
ताई जी-यही होगा अपने रूम में या उपर छत पे होगा.
मैं भैया के रूम में गयी बट वो वहाँ नही थे. मैं उपर छत पे चली गयी लेकिन भैया वहाँ भी नही थे. मैं नीचे आने के लिए मूडी तो मेरे कानो में एक लड़की की आवाज़ सुनाई दी.
लड़की-छोड़ो ना प्लीज़.
मैने देखा वो आवाज़ उपर बने स्टोर रूम में से आई थी. ये वोही स्टोर रूम था यहाँ मैने आकाश को पहली बार दी थी.
मैं धीरे-2 स्टोर रूम की तरफ बढ़ने लगी. अंदर से आने वाली आवाज़ अब तेज़ होती जा रही थी. मैने दरवाज़े के पास पहुँच कर अपना कान लगाकर सुन ने की कोशिश की तो अंदर की बातें मुझे सॉफ सुनाई देने लगी.
लड़की की आवाज़ मेने पहचान ली थी वो दीपा थी और अगर दीपा अंदर थी तो इसका मतलब उसके साथ जावेद भैया थे. मैं अब अंदर का दृश्य देखने के लिए बेचैन हो गई लेकिन मुझे अंदर देखने की कोई जगह दिखाई ना दी. मैं पास वाली विंडो के पास गई तो वहाँ भी मुझे निराशा ही हाथ लगी क्योंकि वो भी अंदर से बंद थी. मुझे विंडो के बीच की दरार दिखाई दी तो मुझे ऐसा लगा जैसे मैने कोई जंग जीत ली हो. मैने अपनी आँख वहाँ पे लगाई और अंदर देखने की कोशिश करने लगी. अंदर का नज़ारा देखते ही मेरा पूरा शरीर गरमा गया क्योंकि अंदर बिस्तेर पे दीपा और जावेद भैया सेक्स कर रहे थे.
दीपा बिस्तेर के उपर पीठ के बल लेटी हुई थी और बिल्कुल नंगी थी और जावेद भैया ने अपनी टी-शर्ट उतार रखी थी और पॅंट को थोड़ा नीचे कर रखा था और उन्होने दीपा के घुटनो को उसके कंधो तक मोड़ रखा था और अपना लिंग उसकी योनि में तेज़-2 पेल रहे थे. मैने देखा जावेद भैया का लिंग बहुत बड़ा था लेकिन अगले ही पल मुझे खुद पे शर्म आई कि मैं ये क्या देख रही हूँ. मैने अपनी नज़र उनके लिंग से हटा कर दीपा के फेस पे कर ली. अंदर का नज़ारा देख कर मुझे वो दिन याद आ गया जिस दिन आकाश मुझे इसी स्टोर रूम में और इसी बिस्तेर के उपर और इसी पोज़िशन में चोद रहा था. कितनी अजीब बात थी मुझे इसी जगह पे दीपा के भाई ने चोदा था और दीपा को मेरा भाई चोद रहा था. मैं वहाँ से हटी और वापिस सीडीयों के पास आ गई. मैने ज़ोर से भैया को आवाज़ लगाई और झट से नीचे उतर गई. मेरी आवाज़ भैया तक पहुँच चुकी थी और मेरे नीचे आने के 2मिनट बाद ही भैया नीचे आ गये और मुझे देखते ही बोले.
ज़वेद-वाह स्वीतू आज ग़लती से हमारे घर कैसे आ गई तुम.
मे-क्या कहा. ये घर सिर्फ़ आपका नही है मेरा भी है.
जावेद-अरे हां बिल्कुल आपका भी है जी मगर आप आती तो कभी है नही.
मे-भैया आप छोड़ो ये सब बातें चलो मेरे साथ.
जावेद-कहाँ.
मे-उधर अपने दूसरे घर.
जावेद-ओके चल.
हम दोनो हमारे घर आ गये और मैने जावेद भैया को सारी बात बता दी कि कैसे भाभी और भैया के बीच झगड़ा हुआ और भैया ने भाभी के उपर हाथ उठाया और अब भैया को सबक सिखाने में हमे उनकी हेल्प चाहिए.
जावेद भैया हेल्प के लिए तैयार हो गये. मैं और जावेद भैया मेरे रूम में पहुँच गये. भाभी वहीं बिस्तेर पे बैठी थी उन्होने नाइटी खोल कर सलवार कमीज़ पहन लिया था. भैया को देखते ही भाभी बोली.
करू-देवर जी कैसे हो आप.
जावेद-मैं ठीक हूँ भाभी.
करू-कभी अपनी भाभी को भी याद कर लिया करो.
जावेद-कैसी बात करती हो भाभी आप तो हर पल मेरे ख़यालों में घूमती रहती हो.
भाभी आँखें निकालती हुई बोली.
करू-क्या मतलब.
जावेद-म.म.मेरा मतलब भाभी आप हो ही इतनी अच्छी की आपका नाम तो हम सब के मूह पे ही रहता है.
मे-ओये जादू भैया भाभी पे लाइन मारना छोड़ो और काम की बात सुनो.
फिर मैं भाभी और जावेद भैया को पूरा प्लान समझाने लगी. फिर मैं हॅरी भैया को देखने के लिए बाहर आई तो वो अपने रूम की तरफ तेज़ी से जा रहे थे. मैने मन में सोचा कही भैया ने हमारी बातें सुन तो नही ली.
फिर मैने सोचा जो होगा देखा जाएगा और मैं वापिस भाभी के पास आ गई और उन्हे ड्रेस चेंज करने के लिए कहा. मैने भाभी को एक टाइट सी ब्लू टी-शर्ट और एक शॉर्ट वाइट स्कर्ट दी वो टी-शर्ट और स्कर्ट मेरी थी लेकिन अब भाभी उसे पहन ने वाली थी. भाभी वॉशरूम में गई और चेंज करके बाहर आ गई. भाभी पूरी हॉट लग रही थी उस ड्रेस में. टी-शर्ट उनके जिस्म से चिपकी हुई थी और स्कर्ट तो जांघों के भी उपर तक थी. उनकी गोरी-2 जंघें देखकर बूढ़ा भी अपना लिंग हिलाने लगे. मैने जावेद भैया की तरफ देखा वो एक टक भाभी को घूर रहे थे. उनकी नज़र भाभी की गोरी-2 जांघों पे ही अटकी हुई थी. मैने देखा भैया का लिंग भी उनकी पॅंट के अंदर तन गया था और उनकी पॅंट का टेंट बना दिया था.
भाभी ने भी शायद ये बात नोटीस की थी और जावेद भैया के इस तरह घूर्ने से वो थोड़ा अनकमफर्टबल महसूस कर रही थी. भाभी ने मेरी तरफ देखते हुए कहा.
करू-रीतू मैं ये नही पहनुगी.
और वो वॉशरूम की तरफ जाने लगी. मैने भाग कर उन्हे पकड़ कर रोका और कहा.
मे-भाभी रूको तो.
फिर मैने जावेद भैया को घूरते हुए कहा.
मे-आप भाभी को घूर्ना बंद करेंगे.
जावेद-अरे रीतू मैं तो अपने रोल की प्रॅक्टीस कर रहा था. तुम जानती तो हो मैं कितनी इज़्ज़त करता हूँ भाभी की.
मे-ओह माइ गॉड. आप प्लीज़ जो भी करना है बाहर जाकर सही समय पे करना.
जावेद-ओके तो चलो मुझसे सबर नही हो रहा. मैं और भाभी अकेले आहाआ मज़ा आएगा.
करू-रीतू छोड़ मुझे मुझे नही करना कुछ भी.
जावेद-ओह भाभी सॉरी सॉरी सॉरी मैं मज़ाक कर रहा था.
करू-सारा मज़ाक निकाल दूँगी एक मिनट में मैं तुम्हारा.
भाभी कहते हुए मुस्कुराने लगी और मैं और जावेद भैया भी मुस्कुरा कर उनका साथ देने लगे.
भाभी कहते हुए मुस्कुराने लगी और मैं और जावेद भैया भी मुस्कुरा कर उनका साथ देने लगे.
फिर मैने भाभी और जादू भैया को बाहर चलने को कहा. हम तीनो बाहर आकर सोफे पे बैठ गये. मैने जावेद भैया को कहा.
मे-भैया आप प्लीज़ भाभी के साथ थोड़ा कंट्रोल में रहना.
जावेद-ओये स्वीतू तू मुझ पे शक कर रही है.
मे-जैसी आपकी हरकतें हैं. शक तो होगा ही.
जावेद-रीतू तू ज़्यादा बक-2 मत कर समझी ना.
करू-तुम दोनो चुप करोगे या नही.
भाभी ने गुस्से से कहा और हम दोनो शांति से बैठ गये.
जब काफ़ी देर तक कोई कुछ नही बोला तो भाभी झल्लाती हुई बोली.
करू-कोई मुझे बताएगा भी की करना क्या है.
मे-अभी तो आप ने बोला चुप बैठो.
करू-ओह माइ गोद. महामुरख लड़की मैने तुम्हे झगड़ा बंद करने को कहा था.
मे-ओके तो ठीक है अगर मैं महामुरख हूँ तो आप करो जो करना है.
जावेद-रीतू ज़्यादा नखरे मत दिखा जल्दी बता क्या करना है.
मे-पहले सॉरी बोलो दोनो.
करू-सॉरी मेरी माँ.
मैने जादू भैया की तरफ देखते हुए कहा.
मे-आपकी सॉरी के लिया क्या महुरत निकालना पड़ेगा.
जावेद-सॉरी यार. चल अब बता.
मे-ओके तो सुनो. भाभी आप जादू भैया के पास बैठो.
भाभी उठी और भैया के पास बैठो गई.
मे-थोड़ा सट कर बैठो.
भाभी जादू भैया से सट कर बैठ गई.
मे-अब मैं भैया को किसी बहाने बुलाउन्गी और जैसे ही भैया की नज़र तुम दोनो पे पड़ेगी तो आपको अपनी आक्टिंग शुरू करनी है ओके.
जावेद-ओके ठीक है.
मे-भाभी प्लीज़ आप खेल मत बिगाड़ देना थोड़ा बोल्ड होकर बात करना जादू भैया के साथ.
करू-ओके स्वीतू.
मैं हॅरी भैया के रूम में गई तो वो अपने बिस्तेर पे लेट कर आराम कर रहे थे.
मैं रूम से बाहर आई और भैया को आवाज़ दी और फिर भाग कर अपने रूम में चली गई. मैं खिड़की के पास जाकर बैठ गई और बाहर का नज़ारा देखने लगी. हॅरी भैया अपने रूम से बाहर आए तो उनकी नज़र सोफे पे बैठे जादू भैया और भाभी के उपर पड़ी.
भाभी एक टाँग दूसरी पे चढ़ा कर बैठी थी. उनकी स्कर्ट शॉर्ट थी जिसकी वजह से उनकी गोरी जाँघ काफ़ी दिखाई दे रही थी.
जैसे ही जादू भैया और भाभी को हॅरी भैया के आने का आभास हुआ तो उन्होने अंजान बनते हुए आक्टिंग शुरू कर दी.
करू-क्या बात है देवर जी आज कल इधर नही आते.
जावेद-अरे भाभी कैसी बात करती हो मैं तो हर पल आपके ख़यालों में ही खोया रहता हूँ.
करू-अच्छा जी वो क्यूँ.
जावेद-अब जिसकी आपके जैसी सेक्सी न्ड हॉट भाभी हो वो कैसे उसके बिना रह सकता है.
मैने हॅरी भैया की तरफ देखा तो वो हैरान परेशान भाभी की तरफ देख रहे थे.
करू-अच्छा जी क्या मैं इतनी सेक्सी हूँ.
जावेद-भाभी बस पूछो मत आप कितनी सेक्सी हो और आज तो आप कयामत ही लग रही हो इन कपड़ो में.
करू-और कॉन-2 से कपड़ों में सेक्सी दिखती हूँ मैं.
जॉड-भाभी आप कपड़ों के बिना ही ज़्यादा सेक्सी दिखती हो.
मैं एकदम से चौंक गई जादू की बात सुनकर क्योंकि ये डायलॉग तो मैने उन्हे बोलने को कहा ही नही था. भाभी भी थोड़ा परेशान सी हो गई थी लेकिन उन्हो ने बात को संभाल लिया.
करू-हट बदमाश कही का शरम नही आती भाभी के साथ ऐसी बातें करते हुए.
जॉड-भाभी जब आपको ऐसे कपड़े पहन ने में शरम नही आती तो मुझे क्यूँ आएगी.
मुझे लग रहा था कि ये जादू आज पिटेगा पहले हॅरी भैया के हाथों और फिर मेरे और भाभी के हाथों.
मैने देखा भैया गुस्से से अब उन दोनो की तरफ बढ़ने लगे थे और जाकर उन्होने जादू को कॉलर पकड़ कर उठाया और फिर फटाक फटाक फटाक ऐसी 5-6 आवाज़ें आई और जादू भैया के गाल लाल हो गये.
लेकिन ये क्या हॅरी भैया तो वही खड़े थे यहाँ पहले खड़े थे और वो तो गुस्से की जगह मुस्कुरा रहे थे और जादू भैया और भाभी भी वहीं बैठे थे मतलब मैने सपना देखा था ओह थॅंक गॉड.
अब जो मैं देख रही थी वो सपने से एकदम उलट था. अब हॅरी भैया मुस्कुराते हुए उनकी तरफ बढ़ रहे थे. उन्होने उनके पास जाकर भाभी को आवाज़ दी तो भाभी एकदम से उठ कर खड़ी हो गई. भैया आगे बढ़े और भाभी को गोद में उठा लिया और फिर जादू भैया को कहा.
हॅरी-साले अपनी भाभी पे लाइन मार रहा है शरम नही आती.
करू-मुझे नीचे उतारो चुप चाप तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई मुझे हाथ लगाने की.
हॅरी-डार्लिंग अब अपने कॅरक्टर से बाहर आ जाओ मैं सब जानता हूँ तुम लोगो के नाटक के बारे में.
करू-कॉन्सा नाटक.
हॅरी-अच्छा जी. ज़रा उस डाइरीक्टर मेडम को बाहर निकालो.
मैं मुस्कुराती हुई उनके पास पहुँची तो भैया ने कहा.
हॅरी-हां तो मेडम आपकी मूवी तो हिट हो गई.
मे-अभी नही जब आप भाभी की बात मानेगे तब हिट होगी.
जावेद-हां भैया जब तक आप भाभी की बात नही मानेगे तब तक नही हां अगर आप भाभी को बच्चा नही दे सकते तो मैं ट्राइ कर सकता हूँ.
हॅरी भैया ने जादू भैया को लात मारते हुए कहा.
हॅरी-साले बेशरम चल भाग यहाँ से और रही बात करू की तो अब इसकी हर खावहिश पूरी होगी.
भैया की बात सुनकर भाभी खुशी से उनसे लिपट गई.
हॅरी-तुम दोनो को तो मैं बाद में देखूँगा पहले इसे देखता हूँ बेडरूम में लेजाकार.
भैया ने भाभी की तरफ इशारा करते हुए कहा. फिर वो भाभी को गोद में उठाए रूम में चले गये. जादू भैया भी चले गये और मैं बैठ कर टीवी देखने लगी.
उस रात भैया और भाभी के बीच सारी रात जमकर चुदाई हुई. उनके रूम से भाभी की सिसकारियों की आवाज़ें मुझे अपने रूम में सॉफ सुनाई दे रही थी. रात की जबरदस्त चुदाई का सबूत मुझे सुबह मिल भी गया जब मैं भाभी को थोड़ा लंगड़ा कर चलते देखा. मैने भाभी के पास किचन में जाकर उन्हे पीछे से पकड़ लिया और भोली बनते हुए कहा.
मे-भाभी आप लंगड़ा कर क्यूँ चल रही हैं.
करू-वो.वो.वो मैं वॉशरूम में फिसल गई थी नहाते वक़्त.
मैने भाभी को कस कर अपनी बाहों में जकड़ते हुए कहा.
मे-भाभी आप वॉशरूम में फिसली थी या बिस्तेर में.
करू-ओये रीतू बदमाश चुप कर समझी. दोनो भाई बेहन मिल कर मुझे परेशान करने में लगे हैं एक सारी रात सोने नही देता तो दूसरी चैन से जीने नही देती.
मे-वैसे भाभी कितने राउंड लगाए रात भैया के साथ.
करू भाभी ने बेलन उठाते हुए कहा.
करू-रुक अभी बताती हूँ तुझे.
मैं झट से भाग कर किचन के डोर के पास आ गई.
भाभी मुझे बेलन दिखाते हुए.
करू-अब आ ना पास बताऊ तुझे कितने राउंड लगाए.
मैने हँसते हुए कहा.
मे-भाभी जैसे आपने ये बेलन हाथ में पकड़ा है वैसे ही रात को भी पकड़ा होगा.
करू-रुक तू तेरी तो मैं जान ले लूँगी आज.
कहते हुए भाभी मेरे पीछे भागने लगी. मैं जाकर सीधा भैया से टकरा गई जो की रूम से बाहर आ रहे थे.
हॅरी-ओये रीतू क्या हुआ क्यूँ ऐसे भाग रही हो.
भाभी कमर पे हाथ रखकर बोली.
करू-महारानी जी अब बताओ क्यूँ भाग रही थी आप.
मे-वो.वो.वो.....
करू-वो.वो क्या.
मे-वो भाभी मुझे मार रही थी भैया पूछो इनसे क्यूँ मार रही थी.
भाभी मेरे पास आकर मेरा कान पकड़ते हुए बोली.
करू-अच्छा तो मैं मार रही थी मेडम को. चल तुझे अभी सीधी करती हूँ मैं.
भाभी मुझे कान पकड़ कर मेरे रूम में ले आई और बोली.
करू-अब फटाफट रेडी होकर कॉलेज को भाग जा समझी.
मे-ओह तो मैं कॉलेज चली जाउ और आप दोनो बाद में.
करू भाभी माथे पर हाथ मारते हुए.
करू-तेरा कुछ नही हो सकता.
मे-मेरा तो बहुत कुछ हो चुका है.
करू-तभी तो इतनी बेशरम हो गई हो तुम.
मे-भैया के साथ बिस्तेर में नंगी आप थी और बेशरम में.
करू-मैं तो एक के साथ ही नंगी थी तू तो 3-3 के साथ नंगी हो चुकी है बदतमीज़ कही की.
मे-भाआभिईिइ......
करू-अब लगी ना मिर्ची.
मे-मुझसे मत बात करना आप आज के बाद.
भाभी मेरे पास आकर मुझे सीने से लगाकर बोली.
करू-ओये ऐसी बात दुबारा मत करना समझी. मैं तो मज़ाक कर रही थी. अच्छा ये बता करण से कब मिला रही हो मुझे.
मे-मिला दूँगी पहले आज मैं तो मिल लूँ उस से उसके बेडरूम में.
भाभी मुझे दूर धकेलते हुए बाहर जाने लगी और बोली.
करू-तू कभी नही सुधरेगी.
भाभी के जाने के बाद मैं वॉशरूम में नहाने चली गई और नहाने के बाद एक टाइट वाइट पॅंट और उसके साथ टाइट रेड टी-शर्ट पहन ली और हाइ हील्स के सॅनडेल पहन कर बाहर आई तो मुझे देख कर भाभी बोली.
करू-आज तो पता नही कितनो को घायल करेगी मेरी स्वीतू.
मे-आपने भी कल जादू भैया को घायल कर दिया था.
करू-बदतमीज़ वो बहुत अच्छा देवर है मेरा तेरी तरह बेशरम नही है वो अब चुप चाप खाना खा और भाग यहाँ से जब देखो बेशर्मी पे उतर आती है ये लड़की.
मैने खाना खाया इतने में मिक्कु भी आ गई फिर मैं और मिक्कुी मेरी स्कॉटी पे कॉलेज के लिए निकल गये. मैं स्कॉटी पार्क करने गई तो वहाँ आकाश मुझे दिखाई दिया.
मैने उस से हेलो की और फिर हम दोनो कॅंटीन की तरफ चल पड़े. मिक्कुई को मैने वही जाने को कहा था. आकाश बार-2 मुझे घूर रहा था आख़िर मैने उसे पूछ ही लिया.
मे-ऐसे क्यूँ घूर रहे हो मुझे.
आकाश-तुम आज बहुत सेक्सी लग रही हो रीत.
मे-प्लीज़ अक्की ऐसे मत बोलो तुम सब जानते हो.
आकाश-अरे हां यार मैं जनता हूँ मगर आज मुझसे रहा नही जा रहा दिल कर रहा है तुम्हे बाहों में भरकर चूम लूँ.
मे-प्लीज़ अक्की स्टॉप दिस.
आकाश-प्लीज़ रीत एक बार सिर्फ़ एक किस.
मे-देखो आकाश मुझे गुस्सा होने पर मज़बूर मत करो.
आकाश-रीत यार मैं समझ रहा हूँ तुम्हारी बात और तुम भी जानती हो कि जिस दिन से तुमने मुझे अपने पास आने से मना किया उस दिन के बाद मैने कभी तुम्हे गंदी नज़र से नही देखा.
मे-यस मुझे पता है तो फिर आज ऐसे क्यूँ बोल रहे हो.
आकाश-रीत यार सिर्फ़ एक किस ही तो माँगी है क्या वो भी नही दे सकती.
मे-नो कभी नही.
आकाश-क्या इतनी ही दोस्ती है हमारी.
मे-अक्की प्लीज़ मुझे एमोशनाली ब्लॅकमेल मत करो.
आकाश-प्लीज़ रीत मैं कोई ब्लॅकमेल नही कर रहा तुम्हे अगर मेरे दिल में ऐसी कोई बात होती तो मैं कब का तुम्हे बर्बाद कर सकता था. मैं तो सिर्फ़ एक किस माँग रहा हूँ तुमसे वो भी भीख में.
अब मैं आसमंजस में पड़ चुकी थी की अब क्या करू. एक तरफ मेरा प्यार था तो दूसरी तरफ वो जिसने मुझे सेक्स का रियल सुख दिया था जिसके साथ सेक्स करते वक़्त मैं सब कुछ भूल जाती थी. आख़िर में वोही हुआ जो नही होना चाहिए था.
मे-ओके ठीक है मगर सिर्फ़ किस.
आकाश-थॅंक यू रीत सिर्फ़ किस करूँगा.
मे-मगर करोगे कहाँ.
आकाश-चलो उपर क्लास रूम में चलते है 2न्ड फ्लोर पे कोई क्लास नही लगती वहाँ कोई नही होगा.
मे-ओके जल्दी चलो.
मैं आकाश के पीछे पीछे उपर पहुँच गई. हम उसी रूम में पहुँच गये यहाँ कॉलेज के 1स्ट डे आकाश ने मुझे चोदा था.
आकाश मुझे उसी रूम में ले गया यहाँ कॉलेज के 1स्ट डे उसने मुझे चोदा था.
मैं रूम के अंदर जाकर इधर उधर देखने लगी. आकाश ने डोर अंदर से लॉक किया और फिर मुझे पीछे से अपनी बाहों में जाकड़ लिया. उसके हाथ मेरे पेट पे घूम रहे थे और उसके होंठ मेरी गालों को चूम रहे थे वो मदहोशी मे बड़बड़ा रहा था.
आकाश-ओह रीत तुम बहुत सेक्सी हो यार.
उसके हाथ अब उपर की तरफ बढ़ते हुए मेरे उरोजो के उपर पहुँच चुके थे और मेरे उरोजो को शर्ट के उपर से मसल्ने लगा था. उसकी हरकतें मुझे मदहोश करने लगी थी. मैने खुद को संभाला और उसके हाथों को अपने उरोजो के उपर से झटकते हुए कहा.
मे-आकाश सिर्फ़ किस तक की बात हुई थी.
उसने फिरसे मेरे उरोजो को थामते हुए कहा.
आकाश-किस ही तो करूँगा सिर्फ़ पहले थोड़ा मूड तो बना लेने दो.
मे-क्या मुसीबत है जल्दी करो अक्की. मिक्कु वहाँ हमारा वेट कर रही है.
आकाश-करने दो उसे थोड़ा वेट. वैसे भी उसे आज लेजाने वाला हूँ मैं यहाँ तुम्हे लेजा कर तुम्हारी गान्ड मारी थी मैने याद है ना तुम्हे.
मे-मुझे कुछ याद नही है जल्दी करो नही तो मैं ऐसे ही चली जाउन्गी.
आकाश-तुम भूल गई क्या कितना खून निकला था तुम्हारे पीछे वाले छेद में से और कितना चीखी चिल्लाई थी तुम.
मे-प्लीज़ आकाश फालतू की बकवास मत करो.
आकाश-ओके डार्लिंग.
कहते हुए आकाश ने मेरी शर्ट का बटन खोल दिया. मैने उसका हाथ पकड़ते हुए कहा.
मे-इसे मत खोलो.
आकाश-रीत प्लीज़ यार मुझे तुम्हारे गोरे-2 मम्मे देखने हैं वैसे भी पहले से ज़्यादा बड़े हो गये है अब तो इन्हे चूसने का मन करता है यार.
मे-कुछ देखने को नही मिलेगा.
आकाश-प्लीज़ यार ऐसे मत तडपा.
आकाश ने अब दूसरा बटन भी खोल दिया. अब मेरे उरोज ब्लॅक ब्रा की क़ैद दिखने लगे थे. ब्रा में कसे हुए एकदम कड़े और गोरे मुलायम जैसे ब्रा और उनके बीच युद्ध चल रहा हो बाहर निकलने का. मैं भी जल्दी से आकाश से पीछा छुड़ाना चाहती थी. इसलिए मैने अब मना नही किया. आकाश अपने दोनो हाथों में मेरे उरोजो को भर का ज़ोर ज़ोर से मसल्ने लगा. पहले उसके हाथ ब्रा के उपर से मेरे उरोज मसल रहे थे लेकिन अब उसके हाथ मेरी ब्रा के भीतर घुस गये थे और मेरे दोनो उरोजो को बाहर निकाल लिया था. वो मेरे दोनो उरोजो को एकदुसरे के साथ रगड़ते हुए मसल रहा था. मेरा दिमाग़ अब मेरे शरीर की मस्ती के सामने झुकने लगा था मैं मस्त होती जा रही थी. इसका एहसास आकाश को भी हो चुका था क्योंकि अब मस्ती में मैं अपने पॅंट में क़ैद चुतड़ों को आकाश के लिंग के उपर रगड़ने लगी थी. अब मेरी शर्ट के सभी बटन खुल चुके थे और आकाश के हाथ मेरे उरोजो को और मेरे पेट को सहला रहे थे. एक और मेरा शरीर यहाँ आकाश का साथ देने लगा था वहीं मेरा दिमाग़ मुझे ये सब करने से रोक रहा था. मैं मस्ती में बड़बड़ा रही थी.
मे-प्लीज़ आकाश मुझे जाने दो मैं ये सब नही करना चाहती.
लेकिन आकाश के उपर इन सब बातों का कोई असर नही हो रहा था.
मेरे दिमाग़ में जैसे ही ये ख़याल आया कि मैं ये सब करके 'कारण' को धोखा दे रही हूँ तो एकदम जैसे मैं नींद से जाग उठी और मैने पूरे ज़ोर के साथ खुद को आकाश की गिरफ़्त से छुड़ा लिया उस से दूर हट कर अपनी शर्ट को दोनो हाथों से पकड़ कर अपने उरोजो को ढक कर रोते हुए कहा.
मे-प्लीज़ आकाश मुझे जाने दो मैं करण को और धोखा नही देना चाहती पहले ही मैने बहुत धोखे दिए हैं उसे.
मैं इतने कहने के बाद आकाश की तरफ पीठ करके खड़ी हो गई और सुबकने लगी.
मुझे उम्मीद थी कि आकाश मेरी बात को समझेगा मगर उसने जो हरकत की वो हैरान करने लायक थी.
उसने मुझे फिरसे पीछे से पकड़ लिया और इस दफ़ा अपना लिंग मेरी पॅंट के उपर से ही मेरे चुतड़ों के बीच वाली दरार में घिसने लगा. उसने अपना लिंग बाहर निकाला हुया था और वो मुझे अपने नितंबों के बीच अच्छी तरह से महसूस हो रहा था. फिर उसने मुझे एकदम अपनी ओर घुमा लिया और मेरे होंठों के उपर अपने होंठ टिका दिए. मैं अपने होंठ उसके होंठों से छुड़ाना चाहती थी मगर उसने मुझे धकेलते हुए दीवार के साथ सटा दिया और मेरे हाथों को अपने हाथों में जाकड़ कर दीवार के साथ लगा दिया. वो बेरेहमी से मेरे होंठों को चूस रहा था मैं जी तोड़ कोशिश कर रही थी अपने होंठों को छुड़वाने की मगर उसकी मजबूती के आगे मेरा कोई ज़ोर नही चल रहा था. मेरी शर्ट फिर से मेरे उरोजो के उपर से हट गई थी और मेरे नंगे उरोज आकाश की छाती में धँस रहे थे. उसका विशाल लिंग मुझे मेरे नंगे पेट पे महसूस हो रहा था और उसके लिंग से जो थोड़ा-2 कम निकल रहा था वो मेरे पेट को गीला कर रहा था. वो बुरी तरह से मेरे होंठों को चूस रहा था और बीच-2 में काट भी देता. मेरी आँखों से लगातार आँसू निकल रहे थे मगर उन्हे देखने वाली आकाश की आँखों में रहम की जगह आज हवस थी. आख़िरकार उसने मेरे होंठों को छोड़ा और जैसे ही वो मुझे थोड़ा दूर हुआ तो मैने एक जोरदार तमाचा उसकी गाल पे दे मारा और फिर तेज़ी के साथ डोर की तरफ बढ़ी और बाहर निकल गई. मैने इतनी बेसूध थी कि मुझे ये भी पता नही चला कि मेरी शर्ट के बटन खुले हैं और मेरे नंगे उरोज ब्रा से बाहर छलक रहे है. जैसे ही मुझे आभास हुया तो मैने फटाफट अपने बटन बंद किए और अपनी आँसू सॉफ करते हुए वॉशरूम की ओर बढ़ गयी.
मैं वॉशरूम में गयी और अपना मूह धोया और कपड़ों को ठीक किया और फिर कॅंटीन की तरफ चल पड़ी यहाँ पे महक मेरा वेट कर रही थी. मैने देखा महक और करण एक बेंच पे साथ ही बैठते थे. मुझे देखते ही महक ने पूछा.
महक-कहाँ रह गई थी तुम.
मैने करण को हग किया और फिर महक को जवाब देते हुए कहा.
मे-कुछ नही यार वॉशरूम चली गई थी ज़रा.
महक-कोई इतना टाइम लगता है क्या वॉशरूम में.
मे-मिक्कुन तू अब चुप करेगी मुझे कोई ढंग की बात कर लेने दे करण से.
महक-हां-2 ज़रूर करो मेडम हमारी तो कोई वॅल्यू ही नही आपकी लाइफ में.
मैने मिक्कु के कंधे पे हाथ रखते हुए कहा.
मे-ओये मिक्कुक ऐसी बात दुबारा मत करना समझी.
महक ने हँसते हुए कहा.
महक-मेरी स्वीतू मैं तो मज़ाक कर रही थी.
करण-अरे ज़रा इस नाचीज़ पे भी कोई ध्यान दो बंदा कब्से बैठा है.
मे-सारा ध्यान तो तुम्हारे उपर है और कैसे ध्यान दूं.
करण-मेरा मतलब था तुम दोनो आपस में बात करती जा रही हो ज़रा हमे भी मौका दो.
मे-लो अब हम चुप हो जाते है आप अपनी बकवास शुरू कर दीजिए.
करण-ओह तो हमारी बातें बकवास लगती है मेडम को.
मे-नही-2 आप तो जब इन गुलाबी-2 होंठो से मीठे-2 वर्ड बाहर निकालते हो तो ऐसा लगता है कि फूल नीचे गिर रहे हों.
करण-अरे यार पहले बता देती ये बात.
मे-वो क्यूँ.
करण ने एक फूल मुझे देते हुए कहा.
करण-मैं ऐसे ही दुकान से खरीद कर लाया फूल अगर पहले पता होता तो अपने होंठों से निकले फूल उठाकर तुम्हे दे देता.
मिक्कुा बदमाश ने मौके पे चोट लगाई.
महक-अरे जीजू अपने होंठों के फूल तो आप अभी भी दे सकते हो रीत को.
करण ने अंजान बनते हुए कहा.
करण-वो कैसे.
महक-सिंपल अपने होंठों को रीत के होंठों के साथ जोड़कर.
मे-चुप कर कमिनि कहीं की जा जाकर आकाश से ले होंठों के फूल.
महक-अरे हाँ आकाश से याद आया पता नही कहाँ है वो आज.
मे-तू जा जाकर ढूंड उसे.
महक-ओके जी आप बैठो लैला मजनू.
महक के जाने के बाद करण और मैं पार्क की तरफ चल पड़े करण ने मुझे कही घूमने जाने को कहा तो मैं फट से तैयार हो गई. हम दोनो उसकी बाइक पे निकल पड़े. करण की बाइक अब शहर से निकल कर गाओं की तरफ चल पड़ी थी.
मैने करण से पूछा.
मे-कहाँ जा रहे हो.
करण-आज तुम्हे अपने गाओं घुमा कर लाता हूँ मैं.
मे-गाओं में भी तुम्हारा घर है क्या.
करण-और नही तो क्या शहर आने से पहले हम वही तो रहते थे. हमारी ज़मीन है वहाँ पे.
मे-ह्म्म्मत कितना टाइम लगेगा.
करण-बस थोड़ी देर में पहुँच जाएँगे.
थोड़ी देर और सफ़र करने के बाद हम करण के गाओं पहुँच गये. गाओं से थोड़ी दूर करण ने बाइक रोकी और अपना मोबाइल निकाला और किसी को कॉल की.
मैं देख रही थी चारो तरफ हरियाली ही हरियाली थी. ठंडी हवा चल रही थी जो शरीर को एकदम तरो ताज़ा करने का दम रखती थी. करण ने मोबाइल पे बात करनी शुरू की.
करण-हां साहिल ब्रो कैसा है तू.
दूसरी और की बात मुझे सुनाई नही दे रही थी.
करण-अच्छा तो अभी कहाँ पे है.
करण-जल्दी कर अपने ट्यूबिवेल पे आ मैं आ रहा हूँ वहाँ पे.
करण-तुझे किसी से मिलवाना है.
करण-समझा कर घर नही ला सकता उसे.
करण-हां तेरी भाभी ही है बस जल्दी आ और तेरी भाभी को खेतों में भी घुमाना है आज.
करण ने मोबाइल जेब में रखा और मुझे बाइक पे बैठने को कहा और उसे बाइक फिरसे दौड़ा दी.
वैसे तो मैं भी गाओं में ही रहती थी लेकिन हमारा गाओं अब सिर्फ़ नाम का ही गाओं था. शहर नज़दीक होने की वजह से वहाँ बहुत डेवेलपमेंट हो चुकी थी और तक़रीबन सारा गाओं अब शहर में ही मिल चुका था.
करण का जो गाओं था वो तो बिल्कुल पंजाब के गाओं जैसा था. एकदम शांत, हरा भरा, खुला दूला. दिल को अजीब सी शांति मिलती थी गाओं में आकर.
मैं ये सब सोच ही रही थी कि हम करण के दोस्त के ट्यूबिवेल पे पहुँच गये.
वहाँ एक लड़का बैठा था शायद वोही था जिसके साथ करण ने बात की थी. करण ने मुझे उस से मिलवाते हुए कहा.
करण-रीत ये है मेरा बचपन का दोस्त साहिल.
मे-हेलो.
करण-न्ड साहिल ब्रो ये है मेरी होने वाली बीवी यानी कि तेरी भाभी रीत.
साहिल-सत श्री अकाल भाभी जी.
मे-सत श्री अकाल जी.
मैने देखा साहिल मुझे घूरता ही जा रहा था उसकी नज़र मेरे उरोजो पे थी और मैं जानती थी कि उसके मूह में मेरे उरोजो को देखकर पानी ज़रूर आ रहा होगा. मैने सोचा क्यूँ ना साहिल को थोड़ा तडपाया जाए उसके घूर्ने के जवाब में मैं भी उसे घूर्ने लगी. जैसे ही हमारी नज़रें मिली तो उसने झट से अपनी नज़रें नीची कर ली. शायद वो शरमा रहा था. मुझे उसकी हालत पे हँसी आ रही थी. मैने अपनी नज़र को चारो ओर दौड़ाते हुए कहा.
मे-करण कितना मन लग रहा है ना यहाँ.
करण-इसीलिए तो तुम्हे यहाँ लेकर आया हूँ चलो तुम्हे खेतों में घुमा कर लाता हूँ.
हम दोनो खेतों की तरफ चल पड़े. मेरे नितंब एक तो पहले से पॅंट में कसे हुए थे दूसरे साहिल को दिखाने के लिए मैने उन्हे चलते वक़्त ज़्यादा ही मटकाना शुरू कर दिया. मैने पीछे मूड कर देखा तो वो वहीं अपनी जगह पे खड़ा होकर एक टक मेरे नितंबों की थिरकन देख रहा था और अपना लिंग मसल रहा था. हम सरसो की फसल के पास घूम रहे थे. अचानक करण ने मुझे धक्का देकर सरसो के बीच गिरा दिया और खुद मेरे उपर गिर गया और अपने होंठ मेरे होंठों से चिपका दिए.
मैने अपने होंठों को करण के होंठों से दूर किया और कहा.
मे-तुम पागल हो क्या.
करण-हां जानू तुम्हारे प्यार में पागल ही तो हूँ.
मे-इस तरह क्यूँ गिराया मुझे.
करण-अब बातें मत करो.
करण ने फिरसे अपने होंठ मेरे होंठों के नज़दीक किए.
मे-तुम्हारा दिमाग़ तो ठीक है अगर किसी ने देख लिया.
करण-कोई नही देखेगा यार.
अब करण ने ज़बरदस्ती मेरा चेहरा पकड़ा और मेरे होंठों को चूसने लगा मगर उसके होंठों को चूसने में ज़बरदस्ती बिल्कुल नही थी बस प्यार ही प्यार था. वो इतने प्यार से मेरे होंठों का रस्पान कर रहा था कि मुझे लग रहा था जैसे आकाश ने सुबह ज़बरदस्ती मेरे होंठ चूस कर मुझे जखम दिए थे करण उनपर मलम लगा रहा हो. यही बातें सोच कर मेरी आँखों से आँसू निकल आए. मेरी आँखों में आँसू देखते ही करण मेरे उपर से उठ गया और बोला.
करण-सॉरी रीत मुझे नही पता था कि तुम बुरा मान जाओगी.
मैने अपने आँसू सॉफ करते हुए कहा.
मे-नही पागल ये तो खुशी के आँसू हैं तुम मुझे कभी दर्द दे ही नही सकते.
और मैने उसकी गले में बाहें डाली और उसे फिरसे अपने उपर चढ़ा लिया. मैने करण की गालों को चूमते हुए कहा.
मे-जो तुम्हारा दिल करता है वो करो मेरे साथ 'मैं सिर्फ़ तुम्हारी हूँ करण, सिर्फ़ तुम्हारी'
अब करण के होंठ फिरसे मेरे होंठों के उपर क़ब्ज़ा ज़मा चुके थे. हम सरसो की फसल के बीचो-बीच लेटे हुए थे. हमारे चारो और काफ़ी उँची फसल खड़ी थी. इसलिए बाहर से हमे देखपाना बहुत मुश्क़िल था.
करण अब थोड़ा नीचे सरक कर मेरे उरोजो को हाथों से मसल्ने लगा था और उसने एक-एक करके मेरी शर्ट के बटन खोल दिए थे. नीचे मेरी ब्रा मे क़ैद मेरे उरोज देखते ही वो उनपर टूट पड़ा और अपने होंठों से मेरे उरोज चूसने लगा. करण ने अपने दाँतों से मेरे उरोजो को पकड़ कर खीच-2 कर मेरी ब्रा से बाहर निकाल लिया. उसने दोनो हाथों से मेरे उरोजो को थाम रखा था और उन्हे आपस में रगड़ रहा था और अपने होंठों से उन्हे चूस रहा था. मेरे हाथ उसके बालों में घूम रहे थे. करण ने अब थोड़ा और नीचे सरकते हुए मेरी पॅंट का बटन भी खोल दिया था और फिर ज़िप खोल कर उसने मेरी कमर के पास दोनो किनारों से पकड़ा और नीचे खीच दिया मैने भी अपने नितंब उठाकर पॅंट को आसानी से नीचे जाने दिया लेकिन पॅंट टाइट थी सो ज़्यादा नीचे नही जा पाई और मेरी जांघों के पास जाकर अटक गई. अब मेरी योनि पे केवल एक पैंटी थी. मगर करण ने उसे भी खीच कर मेरे घुटनो में फसि मेरी पॅंट के पास पहुँचा दिया. करण मेरे पैरों के पास गया और उन्हे उपर उठा दिया और मेरी सॅंडल'स को निकाल दिया. अब उसने मेरी टाँगों को मोड़ कर उपर उठा दिया था. मेरी योनि अब बिल्कुल उसकी आँखों के सामने थी. करण ने मेरी टाँगों का कंधो पे रखा और अपनी जीन्स को खोल कर अपना अंडरवेर नीचे किया और अपना लिंग बाहर निकाल लिया. जैसे ही उसने अपना लिंग मेरी टाँगों को उठाकर मेरी योनि के उपर लगाया तो मैने कहा.
मे-करण प्लीज़ मेरे पास आओ.
करण ने मेरी टाँगों को नीचे रखा और मेरे साथ लेट गया. मैं उठी और अपनी पॅंट को और नीचे कर दिया और उसके पेट के उपर बैठ गई और उसकी टी-शर्ट निकाल दी फिर मैं झुक कर करण की छाती को चूमने लगी. करण के हाथ मेरे नंगे नितंबों को मसल्ने लगे. मैं थोड़ा और नीचे खिसक गई और अब मेरा चेहरा बिल्कुल कारण के लिंग के सामने था. ऐसा लग रहा था कि उसका गोरा लिंग मेरी ओर ही देख रहा था. मैने उसे हाथ में पकड़ा और सहलाने लगी. मैने अपना मूह उसके नज़दीक किया और अपने होंठों को खोल कर लिंग के सुपाडे पे रख दिया.
करण के शरीर में करंट दौड़ गया उसने सिसकारियाँ भरते हुए कहा.
करण-पूरा मूह में लो ना रीत.
अब आधा लिंग तो मैने हाथ में ही पकड़ रखा था और जो उपर बाकी बचा था उसे मैने अपने होंठों में क़ैद कर लिया था.
करण ने मेरा हाथ अपने लिंग के उपर से खीच लिया और कहा.
करण-रीत अब पूरा मूह में लो प्लीज़.
मुझे बहुत शरम आ रही थी. पहला मौका था जब मैं किसी मर्द का लिंग मूह में ले रही थी. मैने हिम्मत करते हुए अपने होंठों को एक बार फिरसे खोला और पूरा लिंग मूह में ले लिया. करण का गोरा लिंग मेरे गुलाबी होंठों में क़ैद हो चुका था. अब मैं और बर्दाश्त नही कर सकती थी मैने उसका लिंग अपने होंठों से बाहर निकाला और उपर होकर करण की छाती में अपना चेहरा छुपा लिया.
करण-रीत डार्लिंग आगे तो मज़ा आना था.
मे-मुझे शरम आती है अगली बार जो कहोगे वो करूँगी.
करण-पक्का.
मे-पक्का बाबा.
अब करण ने अपना लिंग मेरी योनि के उपर सेट किया और फिर एक जोरदार धक्का देते हुए अपना लिंग मेरी योनि के अंदर पहुँचा दिया. उसके हाथों ने मेरे नितंबों को थाम लिया और वो नीचे से तेज़-2 धक्के देने लगा. मुझे बहुत मज़ा आ रहा था एक तो जगह ऐसी रोमॅंटिक थी उपर से करण आज पूरे मूड में था. उसका लिंग जड़ तक मेरी योनि के अंदर समा रहा था. करण अब नीचे से धक्के लगाता हुआ थक चुका था. अब मैं उसकी छाती के उपर से उठते हुए खुद उसके लिंग पे उपर नीचे होने लगी थी. मेरे खुद लिंग के उपर कूदने की वजह से करण का मज़ा दो गुना हो गया था. मैं तेज़-2 उसके लिंग पे कूदने लगी थी उसने भी मेरे उरोजो को कस कर थाम लिया था. जैसे ही मेरी योनि ने पानी छोड़ा साथ ही साथ करण का लिंग भी मेरी योनि को अपने प्रेम रस से भरने लगा.
मैं हाँफती हुई करण की छाती के उपर गिर गयी. करण ने मुझे अपनी बाहों में समेट लिया. हम कुछ देर तक ऐसे ही लेटे रहे. अब करण का लिंग छोटा होकर मेरी योनि से बाहर आ गया था. करण ने मेरा चेहरा अपने हाथों में थाम लिया और मुझे किस करने लगा. मैने भी उसका खूब साथ दिया. अब करण का लिंग फिरसे हरकत में आने लगा था. उसका लिंग मुझे अपनी दोनो जांघों के बीच महसूस हो रहा था. ऐसा लग रहा था जैसे वो मेरी गोरी-2 जांघों के बीच घुसने का प्रयास कर रहा हो. मैने अपने होंठ करण के होंठों से जुदा किए और कहा.
मे-चलो ना अब बहुत देर हो गई है.
करण मेरे नितंबों को मसल्ते हुए.
करण-रीत प्लीज़ एक बार और.
मे-नही कभी नही चुप चाप कपड़े पहनो जल्दी से.
करण-अच्छा चलो एक बार मेरे लंड को किस तो करदो अपने इन गुलाबी होंठो से.
मे-उम्म्म्म काजू तुम भी ना.
करण-प्लीज़....
मे-ओके.
मैं करण के उपर से उतर कर साइड में आ गई और उसके लिंग के पास बैठ गई. मैने उसे अपने हाथों में पकड़ा और अपने होंठों को उसके नज़दीक ले गयी. मैने देखा वो मेरे हाथों में एकदम कड़क हो चुका था. एकदम गोरा और उपर से रेड बहुत ही प्यारा लग रहा था. थोड़ी देर पहले ही वो मेरी योनि की सैर करके आया था. मैने अपने होंठों को खोला और लिंग का जो हिस्सा रेड सा था उसके उपर अपने होंठ टिका दिए और फिर अपने होंठो को बंद कर लिया. लिंग के उपर लगा कम मेरे होंठों के बीच आ गया. मैने झट से अपने होंठ वहाँ से हटा लिए. करण भी अब उठा और मुझे कपड़े उठाती देख बोला.
करण-डार्लिंग कपड़े पहन ने की क्या ज़रूरत है ऐसे ही तुम्हे उठा कर ले जाता हूँ.
मेने अपनी पॅंट उसके मूह पे मारते हुए कहा.
मे-बेशरम तुम्हारा दोस्त देखेगा तो क्या सोचेगा.
कारण-अरे उस से मत डरो. वो बहुत शरीफ लड़का है.
मे-अच्छा-2 फालतू की बकवास मत करो जल्दी कपड़े पहनो.
फिर हम दोनो ने कपड़े पहन लिए. करण ने फिरसे मुझे गोद में उठा लिया और हम दोनो साहिल की तरफ जाने लगे. मैने अपने कपड़े पहन रखे थे और सॅंडल'स को हाथ में पकड़ा हुआ था और करण की गोद में मज़े से लेटी थी.
साहिल की नज़र जैसे ही हमारे उपर पड़ी तो एकदम उसकी आँखें चमक उठी. शायद वो समझ चुका था कि अभी-2 मेरे साथ क्या हुआ है. हम उसके पास पहुँचे तो करण ने मुझे नीचे उतार दिया और कहा.
करण-बहुत भारी हो गई हो तुम रीत.
साहिल-भाई मैं उठा कर देखूं भाभी को कितनी भारी हैं.
मैं एकदम चौंक गई उसकी बात सुनकर.
करण-साले तेरे से नही उठाई जाएगी ये खाए पीये खानदान की है.
साहिल-क्या बात करता है यार. मैं भी गाओं का पहलवान हूँ.
करण-तो लगी शर्त.
साहिल-लगी.
मे-ना बाबा ना करण पागल हो तुम.
करण-रीत यार डर क्यूँ रही हो ये मेरा बचपन का दोस्त है हम ऐसे ही बात बात पे शर्त लगा लेते हैं.
साहिल-हां भाभी मुझसे डरने की ज़रूरत नही है.
मे-ओके.
साहिल आगे बढ़ा और उसने एक ही झटके में मुझे गोद में उठा लिया.
साहिल-देखा दोस्त अरे मैं तो भाभी को गोद में उठाकर शहर तक छोड़ के आ सकता हूँ.
करण-ठीक है बाबा तू जीता अब उतार दे बेचारी को.
जैसे ही साहिल ने मुझे नीचे उतारा तो उतारते वक़्त उसने मेरे नितंब को अपने हाथ से ज़ोर से दबा दिया.
मैने गुस्से से उसकी तरफ देखा तो उसने मुस्कुराते हुए आँख दबा दी.
मैने करण को चलने को कहा और अपने सॅंडल पहन लिए. करण ने साहिल को बाइ बोला और फिर हम दोनो बाइक पे घर की तरफ निकल पड़े.
जब मैं शाम को घर पहुँची तो भाभी टीवी देख रही थी. सारा दिन इनके सीरियल ख़तम नही होते थे. एक ख़तम तो दूसरा शुरू. मैं अपने रूम की तरफ जाने लगी तो भाभी ने मुझे रोका और कहा.
करू-तुम्हारे रूम में तेरे लिए एक सर्प्राइज़ है डार्लिंग.
मे-कैसा सर्प्राइज़..?
करू-अभी पता चल जाएगा.
भाभी ने अपने हाथ मेरी आँखों पे रखे और मुझे रूम में ले गई.
करू-रीतू डार्लिंग अब तैयार हो जा सर्प्राइज़ के लिए.
मे-भाभी हाथ उठाओ ना जल्दी.
भाभी ने धीरे-2 अपने हाथ उठाते हुए कहा.
करू-ये ले मेरी ननद रानी देख सामने कॉन बैठा है.
मेरी नज़र जैसे ही सामने बैठे शख्स पे गई तो मैं जैसे खुशी से पागल हो गई. क्योंकि वो कोई और नही 'गुलनाज़' दीदी थी.
मैं भाग कर उनके गले लग गई और कस कर उन्हे जॅफी देते हुए कहा.
मे-आप ने मुझे बताया क्यूँ नही कि आप आने वाली हो.
गुलनाज़-हमने सोचा अपनी रीतू को सर्प्राइज़ दूँगी. कैसा लगा सर्प्राइज़.
मे-बहुत बढ़िया दीदी. अब मैं आपको जाने नही दूँगी.
करू-एकदम ग़लत रीतू. अब तो इन्हे जाने से रोक ही नही सकती.
मे-वो क्यूँ.
करू-क्यूँ बड़ी ननद रानी बता दूं क्या.
मे-आप उनसे क्या पूछ रही है बताओ मुझे.
करू-तो सुन. तेरी गुलनाज़ दीदी की शादी हो रही है.
मे-क्या, किसके साथ.
करू-पागल शादी है तो लड़के के साथ ही होगी.
मे-दीदी क्या भाभी सच कह रही हैं.
गुलनाज़-हां रीतू.
मे-मगर आप तो मानती नही थी.
नाज़-वो पुरानी बात थी. तुम्हारे जीजू मिल गये हैं अब मुझे.
मे-ये तो बहुत ही अच्छी बात है दीदी. मैं तो खूब नाचूंगी आपकी शादी में.
नाज़-हां-2 ज़रूर नाचना और भाभी आप नही नाचेंगी क्या.
करू-ऐसा कैसे हो सकता है कि मेरी ननद की शादी हो और मैं ना नाचू.
मे-अच्छा ये तो बताओ कब है शादी.
करू-नेक्स्ट वीक.
मे-इतनी जल्दी.
गुलनाज़-हां रीत जल्दी से शादी करके हमे अपना कॉलेज जाय्न करना है.
घर में अब गुलनाज़ दीदी की शादी की तैयारियाँ चल रही थी. पूरे घर में चहल पहल थी. हर तरफ खुशी का माहौल था. आख़िरकार वो दिन भी आ गया जिसका हम सबका बेसब्री से इंतेज़ार था मतलब गुल दीदी की शादी का दिन. घर में अब मेहमान आने शुरू हो गये थे और आज शाम को तो नाच गाने का प्रोग्राम भी था. रिश्तेदारों से अलावा भैया के दोस्त और जादू भैया के दोस्त भी आए हुए थे. मैं पूरे घर में आग लगाती फिर रही थी. आग लगाने से मेरा मतलब है अपने जिस्म से आग लगा रही थी जो भी देख रहा था बस जल उठता था. हॅरी भैया के दोस्त तो पहले भी मेरे जलवे भैया की शादी में देख चुके थे और इस दफ़ा वो मेरे साथ-2 करू भाभी के जलवे भी देखने वाले थे क्योंकि भाभी भी रेड साड़ी में अपने गोरे और कसे हुए बदन को लपेटे पूरे घर के माहौल को गरम कर रही थी. जादू भैया तो उनके आस पास ही मंडरा रहे थे बस
और जादू भैया को करूँ भाभी के पास भंवरे की तरह फटकता देख दीपा का चेहरा देखने लायक था. भाभी भी खूब जादू भैया और उनके दोस्तों को मटक मटक कर चल कर दिखा रही थी. ये भाभी भी अब कमिनि होती जा रही थी. मैं जादू भैया के पास कुछ काम के लिए गई तो वो अब अपने दोस्तों के साथ अपने रूम में बैठे थे. मैं जब अंदर गई तो वो लोग शराब पी रहे थे. मैने दरवाज़े के पास खड़ी होकर भैया को आवाज़ दी लेकिन इस बीच मुझे जो चेहरा दिखाई दिया उसे देखते ही मेरा शरीर काँपने लगा और एकदम मेरा शरीर पसीने से लथपथ हो गया. मैने जिसे देखा था वो कोई और नही बल्कि तुषार था. मैं मन में सोच रही थी कि अब ये क्या लेने आया है यहाँ. मैने भैया को बाहर आने को कहा और उनसे तुषार के बारे में पूछा.
मे-भैया ये तुषार यहाँ क्या कर रहा है.
जावेद-अरे तू उसे जानती है.
मे-हां भैया वो मेरे साथ स्कूल में पढ़ता था.
जावेद-अच्छा मुझे तो आज पता चला. चल छोड़ मैने ही इसे बुलाया है मेरा दोस्त है वो. चल अब जा तू यहाँ से.
मेरा दिल अब घबरा रहा था. मैं सोच रही थी कि अब ये क्या लेने आया है यहाँ. वैसे मुझे उसके आने से कोई प्रॉब्लम नही थी. प्रॉब्लम. थी तो ये कि मैने करण को भी बुलाया था और करण के होते हुए अगर कुछ ऐसा वैसा हो गया तो मेरे लिए मुश्क़िल बढ़ सकती थी. मैं वहाँ खड़ी ही थी कि मुझे आकाश भी उसी रूम में जाता दिखा. अब मेरे हाथ में कुछ नही था मैने सोचा जो होगा देखा जाएगा और मैं घर के कामो में व्यस्त हो गई. महक भी आ चुकी थी अभी मुझे इंतेज़ार था तो सिर्फ़ करण का. मेरा इंतेज़ार भी पूरा हुआ और मुझे करण सामने से आता दिखाई दिया. मैं भाग कर उसके पास गई और उस से लिपट गई. करण ने धीरे से मेरे कान में कहा.
करण-रीत डार्लिंग कंट्रोल करो सब के सामने ही शुरू हो गई.
अचानक मुझे आभास हुया कि मैं तो सब के सामने ही करण से लिपट गई थी. मैं झट से उससे अलग हो गई. करू भाभी ने नज़दीक आकर मेरा कान पकड़ा और कहा.
करू-ननद रानी जी गुलनाज़ के साथ ही आपकी शादी भी फिक्स करवा दूं क्या अगर इतनी ही जल्दी है लिपटने चिपटने की.
मे-भाभी कान छोड़ो और इनसे मिलो ये है करण.
करण-हाई भाभी.
करू-हेलो जी. एक बात सॉफ-2 सुन लो मिस्टर. करण अगर मेरी ननद को अपनी बीवी बनाना है तो सबसे पहले आपको मेरे पैर छूने पड़ेंगे.
करण-लाओ जी आपके चरण है कहाँ हम अभी छु देते हैं.
करू-अरे नो नो ऐसे नही जब मौका आएगा तब.
मे-भाभी क्या इन्हे यही खड़े रखोगी.
करू-ओये होये इतनी फिकर. चलो नंदोई जी अंदर चलो.
हम सब अंदर चले गये और अंदर यहाँ मम्मी, पापा और भैया बैठे थे भाभी हमे वहीं पे ले गई. करण ने मम्मी, पापा को नमस्ते किया और हम सब बैठे गये.
मम्मी-करू बेटा कॉन है ये पहले कभी नही देखा हमने इस लड़के को.
करू-मम्मी जी पहले भले ही ना देखा हो लेकिन आज अच्छे से देख लो.
पापा-लेकिन बेटा ये है कॉन.
करू-ये कॉन है ये तो रीत ही बता सकती है.
मैने भाभी के पेट में कोहनी मारते हुए धीरे से कहा.
मे-भाभी मरवाओगी क्या.
करू-आज तो गिन-2 कर बदले लूँगी.
पापा-अरे तुम दोनो घुसर फुसर क्या कर रहे न सॉफ-2 बताओ बात क्या है.
करू-पापा तो लो अब सॉफ-2 सुनो......................ये लड़का जो है ये चोर है.
हॅरी भैया अपनी जगह से उठते हुए.
हॅरी-क्या.
मैने फिरसे भाभी के कान में कहा.
मे-बहुत पिटोगी आज आप मेरे हाथ से.
करू-अरे नही-2 हॅरी ये वो चोर नही है.
हॅरी-तो कॉन है.
करू-ये दिल चुराने वाला चोर है.
हॅरी-ओह हो तो ये बात है. रीतू यहाँ आना ज़रा.
मैं वहीं खड़ी रही.
पापा-करू बेटी तू भी ना बस पहले ही बता देती कि अपनी रीत की पसंद है.
मम्मी-रीतू बेटा यहाँ तो आ दूर ही खड़ी रहेगी क्या.
मुझे बहुत शरम आ रही थी अब तो मैं हिन्दी फिल्मों की हीरोइन की तरह शरमा कर दूसरे रूम में भाग गई. बाद में वहाँ जो कुछ हुआ वो मुझे भाभी ने बता दिया. फ़ैसला ये हुआ कि करण के घरवालो से मिलकर जल्दी ही हमारी शादी की बात शुरू की जाएगी. ये बात सुनते ही मैं खुशी से झूम उठी.
अब तो 2-2 गुड न्यूज़ मेरे सामने थी. एक मेरी शादी न्ड दूसरी गुलनाज़ दीदी की. बाहर डी.जे की आवाज़ आनी शुरू हो चुकी थी. मैं वॉशरूम में घुस गई ताकि अच्छे से रेडी होके करण को आज खूब जला सकूँ.
डीजे चल रहा था और जावेद भैया और हॅरी भैया के शराबी दोस्तों ने डॅन्स करना शुरू कर दिया था. मैं भी अपने रूम से बाहर आ गई थी. मैने रेड कलर का पाजामी सूट पहना था और पूरा शृंगार किया हुआ था और मैं दुल्हन ही लग रही थी. जब मैं फ्लोर के पास आई यहाँ पे म्यूज़िक सिस्टम लगाया गया था. वहाँ सभी की निगाहें एक टक मुझे ही घूर रही थी. वैसे मेरे साथ भाभी भी थी पिंक साड़ी में बहुत से लड़के तो भाभी के उपर भी डोरे डाल रहे थे. महक भी कुछ कम नही थी. वाइट कलर के सलवार सूट में वो परी ही लग रही थी. कुल मिला कर आज 3-3 हसीनाएँ मिल कर लड़कों का बॅंड बजाने वाली थी. तुषार भी लड़कों के साथ ही डॅन्स कर रहा था और मेरी और देख कर गंदी सी हँसी हँस रहा था.
मैने उसकी तरफ से ध्यान हटाया और दूसरी ओर देखने लगी जिस तरफ खाने पीने का अरेंज्मेंट था.
रसगुल्ला देखते ही मेरे मूह में पानी आ गया और मैं उस तरफ खिचि चली गई. मैने जी भर कर मिठाई खाई और फिर आकर महक और भाभी को डॅन्स के लिए उठा लिया क्योंकि अब जो मिठाई खाई थी उसे हजम भी तो करना था तभी तो दूसरी दफ़ा खाने का रास्ता सॉफ होगा.
मैं, महक और करू भाभी धीरे-2 डॅन्सिंग फ्लोर पे जाकर थिरकने लगी. हमारे पास ही लड़के डॅन्स कर रहे थे इसी लिए हम तीनो थोड़ा झिझक रही थी. जादू भैया भी अपने दोस्तो के साथ नाच रहे थे. मैं उनको अपने पास खीचने के लिए गई तो वहाँ नाच रहे लड़कों के पता नही कितने ही हाथ मुझे मेरे नितंबों पे फिरते महसूस हुए. किसी ने चूटी काटी तो किसी ने ज़ोर से उन्हे भींच दिया और किसी की उंगली नितंब की दरार में घूम गई. मैं जादू भैया को खीच कर अपने पास ले आई और अब जादू भैया भी हमारे साथ आ कर डॅन्स करने लगे और भैया करू भाभी के साथ साथ अपनी कमर लचका के नाच रहे थे. हॅरी भैया आए और जादू भैया को भाभी के पास से दूर धकेल दिया और खुद भाभी का हाथ पकड़ कर नाचने लगे. दोनो की जोड़ी बहुत अच्छी लग रही थी. एकदम पर्फेक्ट जोड़ी थी उनकी जितने सुंदर हॅरी भैया थे उससे कही ज़्यादा बढ़कर करू भाभी और दोनो एक दूसरे से बढ़कर थे और वो बस एक दूसरे के लिए ही बने थे.
तभी भाभी अपना हाथ छुड़ाकर वहाँ से चली गई. मैं और बाकी सब अपनी मस्ती में डॅन्स कर रहे थे. मैने देखा भाभी करण को पकड़ कर हमारे पास ला रही थी. उन्होने करण को भी हमारे बीच शामिल कर दिया और मुझे खीच कर करण के पास कर दिया और हम दोनो एक दूसरे का हाथ पकड़ कर थिरकने लगे. मैं बहुत खुश थी मेरी पूरी फॅमिली जो एक साथ डॅन्स कर रही थी. फ्लोर पे लाइट अब कम हो गई थी और मैं अब करण से लिपटने लगी थी उधर भाभी भी भैया के सीने से लगी हुई थी. महक पता नही किधर भाग गई थी लेकिन मुझे पता था कि वो ज़रूर आकाश के पास ही गई होगी. जादू भैया फिरसे अपने दोस्तों के पास चले गये थे. मेरे हाथ करण के गले में थे और करण के हाथ मेरी कमर पे लिपटे हुए थे. वो हल्की-2 किस्सस मेरे चेहरे पे कर रहा था. डीजे पे रोमॅंटिक सॉंग चल रहा था और बहुत ही अच्छा लग रहा था मुझे करण के सीने से लिपटकर. मैं इस बेशक़ीमती अहसासो में डूबी थी कि तभी मेरे हाथ में पकड़ा मेरा मोबाइल बज उठा. दिल किया इसको ज़ोर से दीवार के साथ मारु. मैने करण की गाल पे किस की और उसे 'अभी आई' का बोलकर साइड पे आकर फोन सुनने लगी. किसी अननोन नंबर. से कॉल आ रही थी. मैने कॉल पिच की.
मे-हेलो.
'हाई रीत मैं तुषार बोल रहा हूँ'
मे-किस लिए फोन किया.
तुषार-मुझे तुमसे कुछ बात करनी है प्लीज़ उपर छत पे आओ.
मे-देखो तुषार अब मेरा और तुम्हारा कोई रिश्ता नही है समझे.
तुषार-अरे रीत यार मुझे करण के बारे में कुछ बताना है.
मैं एकदम चौंकते हुए बोली.
मे-करण के बारे में...?
तुषार-हां.
मे-क्या बात है.
तुषार-तुम आओ तो सही.
मे-मुझे पता है तुम जो भी बताओगे झूठ ही होगा.
तुषार-एक बार सुनोगी तो तुम भी यकीन नही कर पाओगी.
मे-ऐसी क्या बात है.
तुषार-वो बात फोन पे बताई नही जा सकती क्योंकि वो दिखाने वाली चीज़ है जल्दी उपर आओ.
और फोन कट गया.
मैं सोचने लगी कि आख़िर बात क्या है. मैने डॅन्सिंग फ्लोर पे देखा तो वहाँ अब फिरसे लाइट'स ऑन हो गई थी और करण और हॅरी भैया एक साइड पे बैठ कर कुछ बात कर रहे थे.
मैं धीरे-2 अंदर की तरफ बढ़ी और अंदर जाकर सीडीयाँ चढ़ते हुए उपर की तरफ जाने लगी. उपर जाकर देखा तो कोई नही था. चाँद की हल्की-2 रोशनी थी और ज़्यादा दूर तक दिखाई भी नही दे रहा था. मैने अपना मोबाइल निकाला और वोही नंबर. डाइयल किया जिसके उपर से तुषार बात कर रहा था. मैने मोबाइल कान को लगाया ही था कि मुझे अपनी कमर पे दोनो ओर 2 हाथ महसूस हुए और वो हाथ आगे बढ़कर मेरे पेट पर बँध गये. मुझे किसी ने पीछे से जाकड़ लिया था. मैने एकदम हड़बड़ा कर अपना फोन कान से हटाया और पीछे घूम कर देखना चाहा और डरते हुए कहा.
मे-कॉन हो तुम. छोड़ो मुझे.
'मुझे भूल गई हो रीत डार्लिंग'
फिर उसने मेरी पाजामी के उपर से मेरी योनि को मुट्ठी में भरते हुए कहा.
'मैं वोही तो हूँ जिसने तुम्हारी चूत का उद्घाटन किया था'
मे-तुषार तुम.
तुषार-हां अब याद आया तुम्हे.
मे-तुषार दिखाओ मुझे क्या दिखाना है...?
तुषार-रीत डार्लिंग एक बात तो है तू तो पहले से भी ज़्यादा मस्त हो गई है.
(मेरे नितंबों पे हाथ फेरते हुए)
ये तेरी गान्ड कैसी एकदम गोल-मटोल हो गई है और पीछे को भी तो निकल आई है. और ये तेरे मम्मे(मेरे उरोजो को एक हाथ से मसल्ते हुए) कितने बड़े-2 हो गये हैं.
मैने उसका हाथ अपने उरोजो के उपर से झटकते हुए.
मे-तुषार छोड़ो मुझे और सामने आकर बात करो.
तुषार-बातें भी होती रहेंगी डार्लिंग पहले तुम्हे अच्छी तरह से देख तो लूँ. बहुत दिन बाद देख रहा हूँ आज रीत तुम्हारी लेने का मन कर रहा है डार्लिंग.
मे-बकवास मत करो छोड़ो मुझे जो बात बताने के लिए यहाँ बुलाया है वो बात बताओ.
तुषार-अरे ऐसी कोई बात है ही नही जो तुम्हे बताऊ मैं तो तुम्हारी लेने के लिए यहाँ आया हूँ.
कहते-2 उसने मेरी पाजामी का नाडा खोल दिया. मैं एकदम से चौंक गई और अपने हाथ अपनी पाजामी की तरह बढ़ा दिए मगर तुषार के हाथों ने मेरे हाथ को पहले ही जाकड़ लिया और मेरी पाजामी थोड़ी सरक्ति हुई नीचे हो गई और मेरी पैंटी और थोड़ी-2 नंगी जांघे दिखने लगी. मैं तुषार की बाहों में छटपटाने लगी और कहा.
मे-तुषार ये क्या बदतमीज़ी है छोड़ो मुझे मैं अब ये सब नही करना चाहती. मैं अब करण को प्यार करती हूँ.
तुषार-तो करती रह प्यार मुझे इस से क्या मुझे तो तेरी चूत मारनी है बस.
मे-प्लीज़ तुषार समझा करो मैं उसे धोखा नही देना चाहती.
तुषार-ओह तो आज तुम्हे पता चल गया कि ये धोखा है. साली जब मुझसे प्यार करती थी तब भी तो आकाश को देती थी तब मेरे साथ धोखा नही हो रहा था क्या.
अब मेरे पास उसकी बात को कोई जवाब नही था क्योंकि उस वक़्त मैं ग़लत थी.
मे-प्लीज़ तुषार मुझे माफ़ करदो मुझे बहुत बड़ी ग़लती हुई.