आज घर में सभी खुश थे क्योंकि करण को जॉब जो मिल गयी थी. सब ने मिलकर रात को डिन्नर किया और फिर अपने-2 रूम में जाने लगे. करण भी रूम में चले गये और फिर मैने और कोमल ने थोड़ी देर बैठ कर बात की और फिर हम भी अपने-2 रूम में जाने लगे. मैने रूम में जैसे ही एंटर किया तो करण की हालत देख कर मेरे चेहरे पे मुस्कुराहट बिखर आई. वो बेड के उपर बिना कपड़ों के लेटे हुए थे और जनाब के कपड़े इधर-उधर बिखरे पड़े थे. मैने उनकी तरफ गुस्से से देखते हुए कहा.
मे-ये क्या हाल बना रखा है रूम का. कपड़ों को खोल कर सही तरह से नही रख सकते आप.
और मैं उनके कपड़े उठाने लगी. वो बिस्तर से उठे और आकर मुझे पीछे से बाहों में भरते हुए कहा.
करण-डार्लिंग छोड़ो कपड़ों को अभी तो इनके साथ तुम्हारे कपड़े भी यहीं पे आने है फिर उठा देना बाद में.
और उन्हो ने मुझे गोद में उठा लिया और बिस्तेर के उपर लिटा दिया. मैने उनकी बाहों में कसमसाते हुए कहा.
मे-छोड़िए ना कपड़े तो उठाने दो.
मगर जनाब ने बिना मेरी बात सुने मेरे शरीर को अपने शरीर के नीचे छुपा लिया और अपने होंठ मेरे होंठों पे टिका दिए. हम दोनो के होंठ एक दफ़ा जुड़े तो काफ़ी देर तक अलग नही हो पाए. आख़िरकार मैने कसमसाते हुए उन्हे अपने उपर से उतारा और अपने होंठों को अलग करते हुए कहा.
मे-आप भी ना बस सबर नही कर सकते.
उन्होने अपनी एक टाँग मेरी कमर पे चढ़ाते हुए कहा.
करण-जिसकी तुम्हारे जैसी मस्त बीवी हो वो सबर भला कैसे कर सकता है.
मे-ये सब छोड़ो ये बताओ की जॉब कैसी है.
करण-जॉब की बातें करने के लिए सारी जिंदगी पड़ी है. तुम फालतू की बातों में टाइम वेस्ट मत करो. अच्छा ये बताओ कि हनिमून के लिए कहाँ जाना है मेरी जान को.
मे-मुझे नही कही भी जाना.
करण-अरे ये क्या बात हुई.
मे-बस नही जाना तो नही जाना ये घर और ये रूम है ना हमारे हनिमून के लिए.
करण-अरे ये तो ठीक है मगर फिर भी...
मे-अगर मगर कुछ नही मैने कह दिया नही जाना तो नही जाना.
करण-रीतू डार्लिंग तुम्हारा दिल तो लग गया है ना यहाँ.
मे-बिल्कुल लगा है ऐसा क्यूँ पूछ रहे हो.
करण-मुझे तो नही लगता.
मे-आप भी ना बस अरे बाबा दिल क्यूँ नही लगेगा इतनी अच्छी फॅमिली मिली है मुझे. मम्मी-पापा जैसे मम्मी और पापा एक क्यूट सी ननद और एक नटखट देवर और सबसे ख़ास एक बुधु पति.
करण-अच्छा तो मैं बुधु नज़र आता हूँ तुम्हे अब देखना ये बुधु आज तुम्हारी क्या हालत करता है.
कहते हुए करण ने मुझ खीच कर अपने उपर चढ़ा लिया.
उन्होने मेरा कमीज़ पकड़ा और उसे उपर की ओर चढ़ाने लगे. मैं भी अब उनके हर कदम के लिए रेडी थी सो मैने भी अपने हाथ सीधे करते हुए आसानी से अपना कमीज़ शरीर से अलग होने दिया. अब करण ने मुझे करवट लेते हुए अपने नीचे कर लिया और उपर उठते हुए मेरी सलवार का नाडा पकड़ कर झटके के साथ खोल दिया. मैने अपनी टाँगो को उपर छत की तरफ किया और करण ने सलवार को बाहर निकाल दिया. अब मेरे शरीर पे केवल पिंक ब्रा न्ड पैंटी थी. करण तो थे ही बिल्कुल नंगे उन्होने मेरी टाँगों को पकड़ा और मेरी पैंटी को एक हाथ से पकड़ कर नीचे उतारने लगे और आख़िरकार मेरी पैंटी ने भी मेरे जिस्म का साथ छोड़ दिया. अब मेरे दोनो पैर एक साथ उपर छत की ओर थे और मेरे नितंब और उनके बीच छिपि मेरी योनि इनके सामने आ गई थी. करण ये नज़ारा देखते ही अपने होश गँवा बैठे और मेरी टाँगो को मोड़ कर मेरे कंधो तक कर दिया. मेरे घुटने अब मेरे बूब्स को टच हो रहे थे. करण ने अपना चेहरा मेरी योनि के पास किया और अपनी जीभ निकाल कर मेरी योनि के बीच घुसने लगे.
उनकी जीभ को वहाँ महसूस करते ही मेरे शरीर ने एक झटका खाया और एक मस्ती से भरी आह मेरे मूह से निकल गई. करण अब अपने होंठों से मेरी योनि के होंठों को चूसने लगे और मेरा पूरा शरीर एक अजीब सी मस्ती में डूबने लगा. मैने अपनी टाँगो को अब पकड़ रखा था और अपनी योनि को और करण के होंठों से सटा रही थी. अब मेरे लिए सहना मुश्क़िल हो रहा था और आख़िरकार करण के होंठों की गर्मी को ना सह पाते हुए मेरी योनि ने हाथ खड़े कर दिए और अपना सारा पानी करण के मूह पे उडेल दिया. कुछ योनि रस करण गतगत पी गये और कुछ मेरी नितंबों के बीच की दरार से बहता हुआ नीचे चद्दर पे गिरने लगा. करण अब उठे और अपना लिंग जो की अब पूरी तरह से लोडेड था मेरी योनि पे टिका दिया और एक ही झटके में सारा अंदर कर दिया. मैं उनके इस हमले के लिए रेडी नही थी. इस लिए मेरे मूह से एक चीख निकल गई. करण ने चीख की परवाह ना करते हुए ज़ोर-2 से धक्के देने शुरू कर दिए. मैं अभी भी उसी पोज़िशन में थी और करण अब मुझे एक दफ़ा मूह से धारा-शाही करने के बाद अब अपने हथियार से धरा-शाही करने में लगे हुए थे. उनका लिंग पूरी स्पीड से मेरी योनि के अंदर बाहर हो रहा था और मैं उनके हर धक्के की ताल से ताल मिलाते हुए आहें भर रही थी. करण के धक्के अब और तेज़ हो गये थे और मेरी साँसें भी अब स्पीड पकड़ चुकी थी. किसी भी वक़्त अब करण का लिंग मेरी योनि को अपने प्रेम-रस से नहला सकता था. आख़िर वो घड़ी भी आ ही गई और करण ने 5-6 जोरदार धक्के लगाए और उनके लिंग से प्रेम रस निकल कर मेरी योनि में भरने लगा और वो हान्फते हुए मेरे उपर गिर गये. मैने उन्हे बाहों में भींच लिया और हम ऐसे ही सो गये.
सुबह मेरी आँख खुली तो मैने अपने शरीर को चद्दर से ढके हुए पाया. वो बिस्तेर पे नही थे और वॉशरूम से पानी गिरने की आवाज़ आ रही थी शायद वो वॉशरूम में थे. मैं हैरान थी कि जनाब आज जल्दी कैसे उठ गये. करण नहाने के बाद टवल लगा कर बाहर निकले और मेरे पास आकर मेरे माथे पे किस करते हुए मुझे गुड मॉर्निंग विश किया. मैने उन्हे छेड़ते हुए कहा.
मे-क्या बात है जॉब पे जाने की इतनी खुशी कि जनाब मुझ से भी पहले उठ गये.
करण मेरे पास बैठते हुए बोले.
करण-रीत डार्लिंग मुझे ट्रैनिंग के लिए जाना है.
मे-कहाँ...?
करण-देल्ही.
मे-क्या...
करण-यस डार्लिंग.
मे-रात तो आपने बताया नही.
करण-सॉरी यार मैं तुम्हे बता कर परेशान नही करना चाहता था और वैसे भी तुम्हारे साथ सेक्स का मज़ा भी खराब हो जाता.
मे-कितने दिनो के लिए जा रहे हो.
करण-1 मंत.
मे-1 मंत कैसे रहूंगी आपके बिना.
करण-प्लीज़ डार्लिंग ऐसे एमोशनल मत करो मुझे अब कही ऐसा ना हो कि मैं जॉब ही छोड़ दूं.
मे-नही-2 पागल हो गये हो क्या.
करण-तो अब जल्दी से उठो और मेरा सूटकेस रेडी करो.
फिर उन्होने मेरे लिप्स पे किस की और उठ कर अलमारी से अपने कपड़े निकालने लगे.
मैं उठी वॉशरूम में गयी और फ्रेश होकर बाहर आ गई और इनका सूटकेस रेडी कर दिया.
फिर हम सब मिलकर खाना खाने लगे. खाना खाते हुए करण ने रेहान को कहा.
करण-रेहान मैं 1 मंत के लिए देल्ही जा रहा हूँ अब अपनी भाभी का ख़याल तुम्हे रखना है और हां रीत अगर अपने भैया-भाभी को मिलने का दिल करे तो भी इसे बोल देना ये छोड़ आएगा तुम्हे वहाँ.
रेहान-बिल्कुल भाभी आपको कोई भी प्रॉब्लम हो तो बस मुझे बोलना.
फिर सब ने खाना ख़तम किया और करण हम सब को बाइ बोलकर देल्ही के लिए निकल पड़े.
आज सनडे था इसलिए कोमल और रेहान घर पे ही थे.
रेहान तो सुबह ब्रेकफास्ट के बाद ही 'अपने दोस्तों के पास जा रहा हूँ' ये कहकर निकला हुआ था.
कोमल थी जो सुबह से मेरे कान खा रही थी भाभी ये है भाभी वो है. एक तो ये लड़की बोलती बहुत थी. पूरा दिन ऐसे ही गुज़र गया. शाम को करण का फोन आया और उन्हो ने बताया कि वो होटेल में पहुँच गये हैं.
रात को सब ने डिन्नर किया और अपने-2 कमरो में जाने लगे. मेरा मन अपने रूम में जाने का नही हो रहा था और मेरी ये परेशानी मम्मी जी और कोमल ने पढ़ ली थी.
मम्मी-क्या हुआ रीत बेटी दिल नही लग रहा ना.
मे-नही मम्मी जी ऐसी तो कोई बात नही.
कोमल-मैं सब जानती हूँ ज़्यादा नाटक मत करो आप अब भैया घर पे नही हैं तो आपका दिल कैसे लगेगा.
मैने आँखें निकलते हुए कोमल की ओर देखा.
मम्मी-भैया घर पे नही है तो तुम किस लिए हो तुम अपनी भाभी का दिल बहलाओ.
कोमल-मेरे होते हुए भाभी उदास रहे ऐसा कभी हो सकता है क्या.
मम्मी-अच्छा बहू मैं चलती हूँ अपने रूम में और हां कोमल तुम आज भाभी के रूम में ही सो जाना.
फिर मम्मी भी अपने रूम में चली गई और मैने कोमल का कान पकड़ते हुए कहा.
मे-मेडम मेरे साथ सोने में कोई प्रॉब्लम है तुझे.
कोमल-भाभी प्रॉब्लम आपके साथ सोने में नही है आपके रूम में सोने से है.
मे-क्यूँ क्या प्रॉब्लम है.
कोमल-अब आपको क्या बताऊ.
मे-आहो भाई अब मुझे क्यूँ कुछ बताएगी तू.
कोमल-ओये माइ स्वीट भाभी नाराज़ मत होइए आप अगर आप से छुपाउंगी तो और किसे बताउन्गी.
मे-तो बता ना.
कोमल-अब बता दूँगी पहले रूम में तो चलो.
हम दोनो रूम में आकर बिस्तेर पे बैठ गई. मैं अपनी टाँगें सीधी करके बिस्तेर पे बैठी थी और कोमल मेरी जांघों पे सिर टिकाए लेटी हुई थी.
मैने उसके गोरे-2 गालों को मसालते हुए कहा.
मे-हां तो अब बताओ क्या बात है.
कोमल-भाभी अब तो कोई इतनी ख़ास भी नही है असल में मुझे रात को जॉन के साथ फोन पे बात करनी होती है.
मे-तो मेरे सामने बात करते हुए तुम्हे शरम आती है क्या.
कोमल-ओह नही भाभी अब आपको कैसे समझाऊ.
मे-बस बस रहने दे मुझे कुछ नही समझना अब चुप चाप सो जा सीधी होकर.
कोमल बिस्तेर से उठते हुए.
कोमल-भाभी मैं अपना रूम लॉक करके आती हूँ.
मे-ओके.
कोमल के जाने के बाद मैं बिस्तेर पे लेट गई और जैसे ही मैं लेटी तो बिस्तेर के उपर पड़ा कोमल का मोबाइल वाइब्रट होने लगा. कोमल कब से इसे छेड़ रही थी. मैने मोबाइल उठाया तो उसके उपर जॉन का मेसेज था. मैने मेसेज ओपन किया और उसे पढ़ कर हैरान हो गई. उसमे लिखा था.
'अभी क्या पहना है डार्लिंग'
मेरे दिमाग़ में शरारत सूझी तो मैने उसे रिप्लाइ कर दिया.
'पिंक ब्रा न्ड पिंक पैंटी में हूँ'
फिर उसकी तरफ से रिप्लाइ आया.
'तुम तो कह रही थी तुम भाभी के रूम में हो तो क्या भाभी के सामने ही'
मैने रिप्लाइ किया.
'पागल अंदर क्या पहना है ये बताया था'
उसका रिप्लाइ 'ओह अच्छा-2 तो अब उपर वाले कपड़े उतार भी दो'
मेरा रिप्लाइ 'पागल भाभी हैं साथ में'
उसका रिप्लाइ 'तो भाभी के भी उतरवा दो'
मैं उसका रिप्लाइ पढ़के चौंक उठी.
और मैने रिप्लाइ किया 'तुमने मेरी भाभी को ऐसी वैसी समझा है क्या'
फिर आचनक कोमल अंदर आ गई और मैने झट से उसका मोबाइल रख दिया. कोमल बिस्तेर पे आई तो मैने उसका मोबाइल उसके हाथ से लेकर कहा.
मे-चुप चाप सो जा अब. मोबाइल सुबह मिलेगा. नही तो सारी रात इसके साथ ही चिपकी रहेगी तू. वो भी ज़िद्द ना करते हुए चुप चाप सो गई.
कोमल-भाभी मैने जॉन को बता दिया कि रात मैने नही आपने उसके साथ चॅट की थी.
कोमल-कुछ नही सोचेगा मैने उसे ये कहा है कि भाभी तुम्हारे साथ मज़ाक कर रही थी.
मे-तू ना एक दम बेवकूफ़ है.
कोमल-अच्छा अब छोड़ो भी चलो उठो चाय पीओ.
मैं उसके साथ बैठ कर चाइ पीने लगी. फिर मैने उस से पूछा.
मे-वैसे कोमल जो बात जॉन ने मेसेज में कही थी क्या वो सच है.
कोमल-कॉन सी बात भाभी.
मे-वो उसने कहा था कि तुम उसके अलावा और लड़कों के साथ भी...
कोमल-और लड़को के साथ भी क्या.
मे-मतलब तुम और लड़को के साथ भी सेक्स कर चुकी है.
कोमल-क्याअ...?
मे-हां वो तो बोल रहा था.
कोमल-बकवास करता है कमीना.
मे-मतलब तूने नही किया.
कोमल-न.न.नही भाभी मैने नही किया.
मे-ओके छोड़ और बता कैसा रहा आज का दिन.
कोमल-दिन तो अच्छा था लेकिन अब जल्दी रेडी हो जाओ आप हमे बॅंक जाना है.
मे-तो तू जा ना.
कोमल-नही आपको भी मेरे साथ जाना है.
मे-मैं क्या करूँगी.
कोमल-आपको जाना है तो बस जाना है.
कहते हुए कोमल बाहर चली गई. मैं भी उठी और जल्दी से नहा कर रेडी हो गई. मैने रूम से बाहर आकर कोमल को आवाज़ दी तो वो भी जल्दी से बाहर आ गई. उसने वाइट कलर का पाजामी सूट पहना था जिसमे वो बहुत सुंदर और हॉट दिख रही थी. मेरे पास आकर उसने रेहान को आवाज़ लगाते हुए कहा.
कोमल-भैया मैं और भाभी बॅंक जा रही है मम्मी के आने तक घर पे रहना.
रेहान-ओके. एक मिनिट रूको.
और रेहान अपने रूम से बाहर आ गया और बोला.
रेहान-कैसे जाओगे तुम.
कोमल-स्कॉटी से.
रेहान-ओह अच्छा ठीक है मैने सोचा कि कही तुम मेरी स्वीट भाभी को बस में ही ना चढ़ा दो.
और उसने मेरी तरफ देखते हुए उसने तीखी सी मुस्कुराहट दी.
कोमल-इतनी पागल नही हूँ मैं.
रेहान-तो और कितनी हो.
कोमल उसकी ओर भागते हुए.
कोमल-रुक तू एक मिनिट.
मैने पीछे से उसे रोका और कहा.
मे-कोमल अब चल ना.
कोमल-चलो-2 भाभी इसको आकर देखती हूँ मैं.
हम दोनो स्कॉटी से बॅंक पहुँच गयी और अंदर गई तो वहाँ काफ़ी भीड़ थी. मैने कोमल से पूछा.
मे-क्या करना है यहाँ.
कोमल-भाभी मुझे कुछ पैसे निकलवाने है लगता है लाइन में लगना पड़ेगा.
वो पैसे निकलवाने वाले काउंटर पे गई और वहाँ पे लगी लंबी लाइन में खड़ी हो गई.
मैं पास ही पड़े एक बेंच पे बैठ गई. कुछ और लोग अब कोमल के पीछे आकर खड़े हो गये थे.
कोमल के पीछे एक लड़का खड़ा था जो कि देखने में ठीक ठाक था. वो उसके साथ काफ़ी बात-चीत कर रही थी. शायद वो लड़का उसकी जान पहचान वाला था. मैं अपनी नज़र बॅंक में दूसरी और दौड़ाने लगी और जब थोड़ी देर बाद मेरी नज़र दुबारा कोमल की ओर गई तो मैं एकदम से चौंक गई क्योंकि कोमल के पीछे खड़े लड़के का हाथ अब कोमल की कमर के उपर थे और वो धीरे-2 कोमल की कमर को मसल रहा था. जैसे ही कोमल की नज़र मुझसे मिली तो उसने झट से उस लड़के के हाथ अपनी कमर से हटा दिए. मैने अपनी नज़र को जानबूझ कर उसकी ओर से हटा लिया. थोड़ी देर बाद जब मैने देखा तो वो फिर से कोमल की कमर को पकड़े हुए था और वो बिल्कुल कोमल के साथ सट कर खड़ा था. अब मैं चोरी-2 उन दोनो की हरकते देखने लगी. वो लड़का धीरे-2 कोमल को धक्के लगा रहा था जैसे उसकी चुदाई कर रहा हो. कोमल मेरी ओर देखती और फिर उस लड़के की ओर देखती और दोनो मुस्कुरा देते.
आचनक लाइन आगे बढ़ी और कोमल जब आगे हुई तो जो मैने देखा उसे देखकर बुरी तरह से चौंक गई. कोमल के आगे होते ही मुझे उस लड़के का लिंग कुछ सेकेंड्स के लिए दिखाई दिया जो कि उसने पॅंट से बाहर निकाल रखा था.
कुछ सेकेंड्स के लिए ही मुझे उसका लिंग देखने को मिला वो एकदम काला था और मोटा और लंबा भी. वो लड़का फिरसे कोमल के साथ सट गया. अब उसके हाथ कोमल के नितंबों के उपर थे और वो धीरे-2 उन्हे मसल्ने लगा था. मैने देखा वो धीरे से कोमल के कान में कुछ बोल रहा था. कोमल ने फिर मेरी ओर देखा तो मैने अपनी नज़रें झट से उसकी ओर से हटा ली. कोमल लाइन में से निकल कर मेरे पास आई और बोली.
कोमल-भाभी आप प्लीज़ ज़रा लाइन में खड़ी हो जाएँगी.
मे-क्यूँ क्या हुआ.
कोमल-मैं वॉशरूम होकर आती हूँ.
मे-ओके.
कोमल-उस लड़के के आगे खड़ी हो जाना.
मैं जाकर कोमल की जगह पे खड़ी हो गई और अपने नंबर. का वेट करने लगी.
मैने थोड़ी देर बाद पीछे गर्दन घुमा कर देखा तो एकदम हैरान रह गई.
क्योंकि अब वो लड़का भी मेरे पीछे नही था. मेरे दिमाग़ में आया कि शायद कोमल वॉशरूम में नही उसी लड़के के साथ ही होगी. मैं वहाँ खड़े-2 उसका वेट करती रही. कोमल का नंबर. आने वाला था मगर 10 मिनिट हो गये थे अभी तक वो आई नही थी. मैने उसका नंबर. मिलाया तो उसने डिसकनेक्ट कर दिया. मैने फिर से नंबर. मिलाया तो उधर से कोमल ने उठा लिया और धीरे से बोली.
कोमल-भाभी आती हूँ.
मे-तेरा नंबर. आ गया है जल्दी आ.
कोमल-बस आई.
कोमल ने ये कहते हुए फोन काट दिया. मैं जैसे ही अपना मोबाइल कान से हटाने लगी तो उसमे से आवाज़ आई.
मैने जैसे ही अपना मोबाइल कान से हटाना चाहा तो उसमे से आवाज़ आई
'आहह आर्यन छोड़ो मुझे भाभी बुला रही हैं'
मीन्स कोमल की तरफ से कॉल कट नही हुई थी.
मैने फिरसे मोबाइल कान से सटा लिया और आवाज़ सुन ने की कोशिश करने लगी.
आर्यन-प्लीज़ कोमल बस 5मिनट लगेंगे अपनी पाजामी उतार दो ना.
कोमल-तुम्हारा दिमाग़ तो ठीक है पता है हम स्टोर रूम में हैं और वो भी बॅंक के कोई भी आ सकता है यहाँ.
आर्यन-कुछ नही होगा जानू बस थोड़ी सी नीचे करके झुक जाओ मैं पीछे से डाल दूँगा.
कोमल-प्लीज़ आर्यन तुम समझते क्यूँ नही. कल कॉलेज के पार्क में मिलूंगी तुम्हे पक्का.
आर्यन-कहाँ यार कॉलेज में तो वो साला पवन सारा दिन तुम्हे गोद में बिठाकर रखता है. अगर उसे ज़रा सा भी पता चला की मैने तुम्हारी ली है तो वो साला मेरी गान्ड फाड़ देगा.
कोमल-तुम इतना क्यूँ डरते हो उस से.
आर्यन-साला एम.एल.ए का बेटा है और डॉन है पूरे कॉलेज को अब डरना तो पड़ता ही है लेकिन तुम यार टाइम बर्बाद मत करो जल्दी खोलो ना.
कोमल-नही आर्यन प्लीज़ अब मुझे जाने दो कल आ जाना पार्क में.
अब आवाज़ें आनी बंद हो गई थी शायद कोमल वहाँ से आ रही थी.
मैने अपना मोबाइल पर्स में रख दिया. कोमल अपने कपड़े ठीक करती हुई सामने से आई और मेरे पास आकर बोली.
कोमल-भाभी आप बैठो.
मैने कोमल को कहा.
मे-बड़ी देर लगा दी वॉशरूम में.
कोमल-वो काफ़ी भीड़ थी भाभी वॉशरूम में.
मैने मुस्कुराते हुए कोमल की और देखा और उसकी गाल पे चूटी काट ते हुए कहा.
मे-बहाना अच्छा है बेबी.
मैं कहते हुए फिरसे वहीं जाकर बैठो गई यहाँ पहले बैठी थी.
कोमल हैरान परेशान सी बार-2 मेरी ओर देख रही थी.
कोमल का नंबर आ चुका था और उसने पैसे निकलवाए और मेरी ओर आने लगी.
हम दोनो बॅंक से बाहर आ गई और कोमल स्कॉटी के पास जाकर बोली.
कोमल-भाभी आपने ऐसा क्यूँ कहा कि बहाना अच्छा है.
मैने हँसते हुए उसकी गाल पे हल्की सी चपेट लगाते हुए कहा.
मे-मैने मोबाइल के ज़रिए स्टोर रूम की सभी बातें सुन ली थी मेरी हॉट स्वीतू.
कोमल जान बुझ कर गुस्सा दिखाते हुए .
कोमल-भाभी आप अपनी तरफ से कॉल डिसकनेक्ट नही कर सकती थी क्या.
मे-अरे अब फ्री में सीसी रेडियो सुन ने को मिल रहा था भला मैं क्यूँ डिसकनेक्ट करती.
कोमल स्कॉटी उठाते हुए बोली.
कोमल-आप कितनी गंदी हो.
मैने पीछे बैठते हुए कहा.
मे-ओह अच्छा जी मैने सब सुना तो मैं गंदी हो गई और तुमने सब कुछ किया तुम अच्छी हो.
अब कोमल के पास कोई जवाब नही था और उसने स्कॉटी को रोड के उपर दौड़ा दिया. हम थोड़ी दूर ही गये थे कि मैने पीछे देखा तो हमारी कोमल के आशिक़ मतलब आर्यन जनाब पीछे-2 अपनी बाइक पे आ रहे थे. मैने कोमल के कान में कहा.
मे-तुम्हारा आशिक़ अभी भी पीछे-2 आ रहा है लगता है अब तुम्हारी पाजामी खुलवा कर ही दम लेगा.
कोमल लगभग चीखते हुए .
कोमल-भाभिईीई.....
मे-हहेहहे क्यूँ क्या हुआ मैने कुछ ग़लत कहा क्या मेरी स्वीतू.
कोमल-मुझे नही पता बस आप चुप करो.
मे-ओह हो तो हमारी स्वीतू शरमाती भी है.
अब हम दोनो चुप चाप घर की ओर जा रही थी.
मैने पीछे देखा तो आर्यन अभी भी पीछे आ रहा था. मैने सोचा थोड़ा इस आर्यन के बच्चे को भी तडपाया जाए.
मैने अपनी लेफ्ट लेग उठाकर दूसरी पे रख
ली. टाइट पाजामी पहनी होने की वजह से मेरी पाजामी मेरी जाँघ पे एकदम कस गई और ये नज़ारा पीछे आ रहे आर्यन को जैसे ही दिखा तो उसकी नज़र कोमल की और से हटकर मेरे उपर अटक गई. मैं उसके चेहरे की ओर ही देख रही थी जिसपे अब एक्सप्रेशन चेंज होने लगे थे. उसने अपना चेहरा उपर उठाया और जैसे ही हम दोनो की नज़र मिली तो उसने अपनी एक आँख दबा दी. मैं एकदम सकपका सी गई और अपना चेहरा आगे की ओर कर लिया. मेरे दिमाग़ में एक पुरानी घटना घूम गई. जब मैने एक दफ़ा आकाश हो इसी तरह चिड़ाया था तो उस कमिने ने इस तरह चिडाने की कीमत स्टोर रूम में मुझे पूरी नंगी करके चोद कर वसूल की थी.
मेरा दिल काँप सा उठा और मैने अब दुबारा पीछे नही देखा.
हम दोनो घर पहुँच गई और अंदर जाकर मैं अपने रूम में गई और चेंज करके बाहर आई और किचन में जाकर मम्मी जी से कहा.
मे-मम्मी आज खाना मैं बनाउन्गी.
मम्मी-मगर बेटी.
मे-अगर-मगर कुछ नही आप बस बैठो बाहर जाकर.
आख़िर मम्मी बाहर चली गई और मैं खाना तैयार करने लगी.
कोमल भी किचन में आकर मेरा साथ देने लगी. शायद उसे मम्मी जी ने भेजा था मेरी हेल्प के लिए.
मैने कोमल को अब बॅंक की घटना के बारे में और ज़्यादा नही पूछा और वो भी शायद शर्मिंदगी की वजह से चुप चाप सी थी.
मैने खाना रेडी किया और कोमल ने फटाफट खाना डिन्निंग टेबल पे पहुंचा दिया. हम सब मिलकर खाना खाने लगे. सभी मेरे खाने की तारीफ कर रहे थे. हम खाना खा रहे थी तभी मुझे लगा कि टेबल के नीचे से कोई अपने अंगूठे से मेरी टाँग को मसल रहा था.
रेहान मेरे सामने की सीट पे बैठा था और पापा और कोमल मेरी दोनो तरफ. मैं आइडिया नही लगा पा रही थी कि कॉन हो सकता है. मैने रेहान के चेहरे की तरफ देखा तो उसके चेहरे से अंदाज़ा लगाना मुश्क़िल था कि वोही ये कर रहा है. पापा के उपर तो मुझे शक भी नही था. कोमल ये ज़रूर कर सकती थी मगर आज तो वो इतनी शर्मिंदा थी कि शरारत के मूड में बिल्कुल भी नही थी.
हम सब ने खाना ख़तम किया और अपने-2 रूम में जाकर सो गये. कोमल आज अपने रूम में ही सो गई थी मैने भी उसे नही रोका.
रात को करण का फोन आया और मैने इधर से उठाया.
मे-हेलो.
करण-हाई डार्लिंग कैसी हो.
मे-अब याद आई मेरी.
करण-जानू याद तो पल-2 सताती है तुम्हारी मगर क्या करूँ.
मे-1 फोन तो कर ही सकते हो.
करण-जान सारा दिन ट्रैनिंग में निकल जाता है बड़ी मुश्क़िल से टाइम निकाल पाया हूँ.
मे-अभी कितने दिन लगेंगे और.
करण-अभी तो 3 दिन ही गुज़रे है डार्लिंग पूरा मंत चलेगी ट्रैनिंग.
मे-उम्म्म मैं बोर हो जाती हूँ सारा दिन अकेले.
करण-अरे तो कोमल के साथ घूम आया करो.
मे-वो और रेहान तो कॉलेज चले जाते हैं.
करण-तुम फिकर मत करो जानू मैं बोलूँगा रेहान को वो तुम्हे और कोमल को घुमा कर लाएगा कल.
मे-ओके.
करण-अच्छा डार्लिंग बाइ फिर बात करूँगा. लव यू डियर.
मे-लव यू 2.
करण से बात करने के बाद मेरे दिल को थोड़ा सा चैन ज़रूर मिल गया था. मैं आँखें बंद करते हुए सोने की कोशिश करने लगी. मुझे थोड़ी पानी की प्यास लगी थी इसलिए मैं उठी और रूम से बाहर निकल कर किचन में चली गई और फ्रीज़ से बोतल निकाली और पानी पीने लगी. मैं पानी पीकर बाहर निकली तो मुझे कोमल के रूम का डोर खुलकर बंद होता दिखाई दिया. मैने सोचा कि ये कोमल अब कहाँ से आ रही है. अगर पानी पीने आई होती तो किचन में ही आती और रही बात वॉशरूम की तो वो उसके रूम के साथ अटॅच्ड ही था. मैं उसके रूम के पास गई तो देखा डोर अब अंदर से लॉक हो चुका था. अंदर से कुछ आवाज़ ज़रूर आ रही थी मगर क्या आवाज़ आ रही थी ये मुझे सुनाई नही दे रहा था. मैने कोमल के रूम की विंडो के पास जाकर अंदर देखने की कोशिश की मगर मुझे कुछ दिखाई नही दिया. क्यूंकी विंडो पूरी तरह से बंद थी. मैं अंदर देखने के लिए कोई जगह ढूंड ही रही थी कि कोमल के साथ वाला रूम जो कि रेहान का था. उसका डोर खुला और रेहान रूम से बाहर निकला. मैं थोड़ा और पीछे को हटकर अंधेरे में छिप गई ताकि रेहान की नज़र मेरे उपर ना पड़े. मेरी नज़र बार-2 रेहान के शरीर के उपर जा रही थी. उसने इस वक़्त सिर्फ़ एक अंडरवेर पहनी थी और उसकी बॉडी एकदम मस्त थी. भले की वो करण से छोटा था मगर बॉडी देखकर लगता था कि वो करण से बड़ा होगा. उसका गातीला बदन और उसकी अंडरवेर में छुपा उसका लिंग मेरी सांसो को उखाड़ने के लिए काफ़ी था. भले ही उसका लिंग अंडरवेर में छुपा था मगर जिस तरह से उसने अंडरवेर को आगे की ओर उठा रखा था तो अंदाज़ा लगाना मुश्क़िल नही था कि उसका साइज़ बड़ा होगा. एक तो मैं पिछले 3 दिन से चुदि नही थी दूसरा रेहान की इतनी सेक्सी बॉडी देख कर मेरा दिल कर रहा था कि अभी जाकर उसकी अंडरवेर नीचे करके उसका लिंग निकाल लूँ और उसे अपने गुलाबी होंठों में भरकर पूरी जी-जान से चुसू लेकिन मैं खुद पे कंट्रोल बनाए हुए थी क्यूंकी मैं जानती थी कि अगर एक दफ़ा मैं फिसल गई तो फिर संभालना बहुत मुश्क़िल था. रेहान किचन में गया और फिर मेरे सामने से होता हुआ अपने रूम में चला गया और उसका डोर लॉक हो गया. खुदा का शूकर था कि उसकी नज़र मेरे उपर नही पड़ी.
अब मैं भी वहाँ रुकना नही चाहती थी मैं भी धीरे-2 चलती हुई अपने रूम में आ गई और आकर बिस्तेर पे लेट गई. मुझे नींद नही आ रही थी और अपने आप मेरे हाथ मेरे उरोजो और मेरी योनि को मसल रहे थे और अपने शरीर को मसल्ते हुए जो चेहरा मेरे दिमाग़ में घूम रहा था वो करण का ना होकर रेहान का था. उसका गातीला नंगा बदन और अंडरवेर में झूलता उसका लिंग मेरी उतेज्ना को और बढ़ा रहा था. आख़िर इन्ही बातों को सोचते-2 ही मैं झड गई और फिर कब मेरी आँख लग गई मुझे पता ही नही चला.
सुबह मम्मी जी की आवाज़ ने मुझे उठाया और मैं जल्दी से नाहकार किचन में पहुँच गई और ब्रेकफास्ट रेडी किया और फिर सभी साथ मिलकर ब्रेकफास्ट करने लगे. खाना खाते वक़्त रेहान बोला.
रेहान-भाभी आज आपको मेरे साथ चलना है.
हम सभी उसकी ओर देखने लगे.
मैं कुछ बोलू उस से पहले ही पापा बोले.
पापा-बहू और तेरे साथ कभी नही.
रेहान-क्यूँ मुझे कीड़े पड़े हैं क्या.
मम्मी-रेहान पापा है वो तेरे कैसे बात कर रहा है.
रेहान-मुझे कुछ नही पता भैया का फोन आया था मुझे और उन्होने मुझे भाभी को घुमाने के लिए बोला था.
पापा-कहाँ जाएगा.
रेहान-जहाँ भाभी जाना चाहें.
पापा-ओके लेकिन कोमल भी साथ में जाएगी.
कोमल-लेकिन मैं...
मे-लेकिन-वेकीन कुछ नही तुम हमारे साथ जाओगी बस.
मैने शरारत से कोमल की ओर देखते हुए कहा.
मुझे पता था वो क्यूँ नही जाना चाहती उसे आर्यन को पार्क में जो मिलना था आज.
हम तीनो गाड़ी में निकल चुके थे. रेहान और कोमल आगे बैठे थे और मैं पीछे. थोड़ी दूर ही गये थे कि कोमल बोली.
कोमल-भैया मुझे कॉलेज उतार देना आप दोनो जाओ.
मे-कोमल तुम जा रही हो या पापा का नंबर मिलाऊ.
रेहान-भाभी इसे जाने दो ना एकदम बोरिंग है ये.
और रेहान ने गाड़ी कोमल के कॉलेज के पास रोकी और कहा.
रेहान-चल जल्दी भाग गाड़ी में से.
कोमल-जाती हूँ मेरे ड्राइवर और जाते वक़्त मुझे पिक कर लेना यहीं से.
रेहान-अच्छा-2 जल्दी भाग.
कोमल कार में से उतर गई और रेहान ने मुझे अगली सीट पे आने को बोला और मैं अगली सीट पे जाकर बैठ गई और कार आगे बढ़ने लगी.
थोड़ी देर तक हम दोनो के बीच खामोशी छाई रही और आख़िर रेहान ने इस खामोशी को तोड़ते हुए कहा.
रेहान-तो भाभी कहाँ जाना है.
मे-अब मैं क्या बताऊं.
रेहान-अरे घूमने का मन आपका कर रहा था तो जगह भी आप ही चूज़ कीजिए ना.
मे-अगर कोमल साथ होती तो हम मूवी देखने चलते.
रेहान-अरे वो तो अब भी जाया जा सकता है.
मे-हम दोनो जाएँगे क्या.
रेहान-कहो तो अपने दोस्तो को बुला लेता हूँ.
मैने एकदम से कहा.
मे-नही-2 रहने दो जैसे तुम वैसे तुम्हारे दोस्त.
रेहान-क्यूँ मुझ में कोई खराबी है क्या.
मैने उसे छेड़ते हुए कहा.
मे-तो अच्छाई भी कोन्सि है.
रेहान-ओह तो ये बात है. वैसे भाभी आप तो मेरे बारे में ज़्यादा जानती हो.
मे-वो कैसे...
रेहान-आप भूल गई क्या वो बस वाली घटना.
मैं एकदम से चौंक गई और धीरे से कहा.
मे-कोन्सि घटना.
रेहान-अब इतनी भी भोली मत बनो आप.
मे-क्या कहना चाहते हो तुम.
रेहान-जब आपने बस में मेरे साथ मज़े किए थे और फिर मुझे ही पिटवा दिया था अपने आशिक़ से.
मे-क्या बकवास कर रहे हो तुम.
रेहान-अरे भाभी रिलॅक्स यार डरो मत मैं किसी को नही बताने वाला. शादी से पहले सबके बाय्फ्रेंड/गर्लफ्रेंड होते हैं तो इट'स ओके यार और आप ये भी मत सोचना की मैं आपको इस बात के लिए ब्लॅकमेल करूँगा क्यूंकी मैं उसी की लेता हो जो प्यार से खुद आकर मुझे देती है.
मे-क्या कहा.
रेहान-वो मेरा मतलब मैं उसी को अपनाता हूँ जो मुझे अपनाना चाहती है.
उसकी बात सुनकर मेरी बेचैनी थोड़ी दूर हो गई.
मे-ओह तो ये बात है.
रेहान-वैसे भाभी अगर आप चाहें तो आपके साथ...
मे-मेरे साथ क्या..
रेहान-वो अपनाने वाली बात.
मैं उसके कंधे पे मारते हुए .
मे-बदमाश बकवास बंद करो.
रेहान-भाभी एक बात तो है आप हो बहुत सेक्सी अगर वो आपका बस वाला आशिक़ अब मुझे मिल जाए ना तो साले को ऐसा ठोकू की याद रखेगा.
मे-तुम पुरानी बातों को छोड़ो और ये बताओ कि तुम्हारी कोई गर्लफ्रेंड है या नही.
रेहान-मेरी कोई गर्लफ्रेंड बने ऐसी किस्मत कहाँ भाभी आप ही बन जाओ ना.
मे-तुम फिर शुरू हो गये.
रेहान के साथ बातें करते-2 अब मैं पूरी तरह फ्रॅंक हो चुकी थी और वो भी मज़े ले लेकर मेरे साथ बात कर रहा था. आख़िर हम बातें करते-2 पीवीआर पहुँच गये और रेहान ने गाड़ी पार्क की और फिर हम टिकेट'स लेने के लिए टिकेट काउंटर पे आ गये.
मैं खड़ी होकर रेहान के बारे में सोचने लगी. कोमल ने सच ही कहा था कि उसका भाई रेहान दिल का बहुत अच्छा है और इस बात का सबूत आज उसने दे दिया था. मेरे दिल पे वो बस वाली बात बहुत बड़ा बोझ थी लेकिन आज वो बोझ उतर गया था.
रेहान टिकेट'स लेकर आया और मुझे चलने को कहा.
मैने चलते-2 उस से पूछा.
मे-कोन्सि मूवी है.
रेहान-भाभी आप चलो ना वहीं पता चल जाएगा आपको.
हम दोनो जाकर अपनी-2 सीट्स पे बैठ गये और मूवी स्टार्ट होने का इंतेज़ार करने लगे. रेहान जाकर कुछ स्नॅक्स और ड्रिंक वगेरा ले आया और हम उनका मज़ा लेते हुए मूवी स्टार्ट होने का वेट करने लगे. आख़िर मूवी स्टार्ट हुई और जैसे ही मैने उसका नाम पढ़ा तो हैरान हो गई. मूवी का नाम था 'जिस्म 2' ये रेहान का बच्चा कैसी मूवी की टिकेट'स लेकर आया था. मैने घूर कर रेहान की ओर देखा तो वो मेरी और देखता हुआ धीरे-2 मुस्कुरा रहा था. मैने उसकी पीठ पे मुक्का मारते हुए कहा.
मे-ये किस मूवी की टिकेट'स ली तुमने.
रेहान-भाभी बाकी सबी हाउस फुल थे बस इसी की टिकेट मिली अब देखो ना मूवी स्टार्ट हो चुकी है.
मेरे पास अब कोई रास्ता नही था मूवी देखने के बिना. मैं भी सामने की ओर देखने लगी. मूवी जैसा कि आप सभी जानते है बहुत ही हॉट थी. मेरी पैंटी गीली हो चुकी थी मूवी के बीच वाले सीन्स देखते-2. आस पास वाले सभी प्रेमी जोड़े एक दूसरे को बाहों में लेकर बैठे थे और पूरा मज़ा ले रहे थे. मैं खुद को बहुत मुश्क़िल से संभाले हुए थी. अगर मेरे साथ आज करण होते तो मैं कबकि उनकी गोद में जाकर बैठ जाती. लेकिन अब क्या फ़ायदा था ये सब सोचकर और एक ये रेहान था कि कुछ कर ही नही रहा था. एक बात तो अब क्लियर थी कि अगर रेहान मेरे साथ अब कुछ करता तो मैं उसे कभी नही रोक पाती क्यूंकी सिचुयेशन ही कुछ ऐसी थी. मैने चुपके से रेहान की ओर देखा वो कमीना पर्दे पे नज़र गढ़ाए बैठा था. मैने जैसे ही अपनी निगाहें थोड़ी नीची की तो एकदम से घबरा गई. क्यूंकी नज़ारा ही कुछ ऐसा था. रेहान ने अपना लिंग बाहर निकाल रखा था और अपने हाथ से उसे धीरे-2 सहला रहा था. उसके लिंग का साइज़ देखते-2 मैं घबरा गई थी. मैने जितने भी लिंग देखे थे उनमे से आकाश का लिंग ही सबसे बड़ा था लेकिन मेरी आँखों के सामने झूलता रेहान का लिंग आकाश के लिंग से भी बड़ा लग रहा था. मेरा दिल उसका लिंग देखकर मचलने लगा था और मन कर रहा था कि अभी उसका लिंग पकड़ लूँ और उसे अपने होंठों में भरकर चूस लूँ मगर मैं खुद को संभाल रही थी मगर कब तक आख़िरकार मेरा हाथ उसके लिंग की ओर बढ़ने ही लगा था. मैने रेहान के चेहरे की तरफ देखा तो वो आँखें बंद करके ज़ोर-2 से अपना लिंग हिला रहा था. जैसे ही मेरा हाथ उसके लिंग के बिल्कुल नज़दीक पहुँचा तो पूरे हाल में लाइट'स ऑन हो गई.
रेहान मेरा हाथ देख पाता इस से पहले ही मैने अपना हाथ हटा लिया और दूसरी तरफ चेहरा घुमा कर बैठो गई. इंटर्वल हो चुका था और सभी अपनी सीट'स से उठ कर जाने लगे थे. मैं भी उठ कर खड़ी हो गई और मेरे साथ ही रेहान भी. हम दोनो बाहर आ गये और रेहान बोला.
रेहान-भाभी मैं कुछ खाने को लेकर आता हूँ.
मैं उसे रोकते हुए कहा.
मे-नही रूको रेहान चलो अब यहाँ से मुझे नही देखनी ऐसी मूवी.
रेहान-भाभी देखते हैं ना मज़ा आएगा.
मैने थोड़ा सख़्त लहज़े में कहा.
मे-मैने कहा ना चलो यहाँ से.
रेहान थोड़ा नाराज़ होते हुए बाहर की तरफ चल पड़ा और पार्किंग में से गाड़ी निकाल कर ले आया. मैं गाड़ी में बैठ गई और रेहान ने गाड़ी रोड पे दौड़ा दी. वो उदास सा चेहरा लिए ड्राइविंग सीट पे बैठा गाड़ी चला रहा था. मैने उसके चेहरे को पकड़ कर अपनी तरफ घुमाया और प्यार से कहा.
मे-नाराज़ हो क्या.
वो कुछ नही बोला.
मे-रेहान प्लीज़ बात करो ना मेरे साथ.
रेहान-क्या बात करू सारा मज़ा खराब कर दिया आपने.
मे-अच्छा मैने मज़ा खराब किया तुम्हे शरम नही आई अपनी भाभी को ऐसी मूवी दिखाते हुए बेशरम कहीं के.
रेहान-हहेहेहहे.
मे-अब ये दाँत क्या निकाल कर दिखा रहे हो.
रेहान-वैसे भाभी सच्ची बताना आप गरम हो गई थी ना.
मैने उसे मारते हुए कहा.
मे-शट अप...बत्तमीज.
रेहान-भाभी अब बताओ कहाँ चलना है.
मे-कही नही सीधे घर चला बस.
रेहान-कोमल को भी तो पिक करना है कॉलेज से.
मे-ओके तो चलो उसके कॉलेज चलते हैं.
रेहान ने गाड़ी कोमल के कॉलेज की तरफ मोड़ दी. मैने कॉलेज के नज़दीक पहुँच कर कोमल को कॉल की तो उधर से आवाज़ आई.
कोमल-हां भाभी.
मे-जल्दी बाहर आजा हम वेट कर रहे हैं तेरा.
कोमल-आअहह भाभी इतनी जल्दी वापिस आ गये आप...
फिर उसकी तरफ से धीरे से आवाज़ आई.
'पवन धीरे करो ना भाभी से बात कर रही हूँ मैं'
शायद उसने अपना मोबाइल होंठों से दूर हटाकर ये बात कही थी मगर मुझे सुनाई दे गई थी.
मे-क्या कर रही है तू अभी.
कोमल-कुछ नही भाभी लेक्चर आआहह लेक्चर लगा रही हूँ 5मिनट में आई.
मैं समझ तो गई थी कि वो कॉन्सा लेक्चर लगा रही है मगर मैने उस से ज़्यादा बात करना ज़रूरी नही समझा क्यूंकी रेहान मेरे पास ही बैठा था.
इंतेज़ार करते-2 15मिनट हो चुके थे मगर कोमल अभी तक नही आई थी और अब तो वो कॉल भी पिक नही कर रही थी. हम दोनो परेशान हो गये थे उसका इंतेज़ार करते-2. रेहान मेरी तरफ देखता हुआ बोला.
रेहान-भाभी मैं अंदर जाकर देखता हूँ.
मे-रूको-2 तुम बैठो मैं देखकर आती हूँ.
और मैं गाड़ी से बाहर निकल कर कॉलेज के गेट की तरफ चल पड़ी. रेहान को मैने इस लिए रोका था क्यूंकी अगर वो कोमल को अंदर किसी के साथ देख लेता तो वहीं झगड़ा कर बैठता.
मैं कॉलेज में गई तो मुझे कुछ समझ नही आया कि मैं कहाँ जाकर ढूंढू उसे. अचानक मुझे पीछे से अपने कंधे पे एक हाथ महसूस हुआ. ये किसका हाथ है ये जान ने के लिए जब मैं पीछे मूडी तो मेरा मूह उस शक्श का चेहरा देखकर खुला का खुला रह गया. मेरे चेहरे पे हैरानी और खुशी के मिले-जुले भाव प्रगट हो गये.
मे-व्हाट आ प्लेसेंट सर्प्राइज़...
ये कहते हुए मैं उसके गले जा मिली और उसने भी मुझे अपनी बाहों में जाकड़ लिया.
ये शख्स कोई और नही आकाश था.(आकाश को तो आप जानते ही हो
जब मुझे एहसास हुआ की मैं आकाश की बाहों में खुले आसमान के नीचे खड़ी हूँ तो मैं झट से आकाश से दूर हो गई और अपनी नज़रें झुकाते हुए कहा.
मे-सॉरी आकाश.
आकाश-सॉरी तो मुझे कहना चाहिए रीत.
मे-बस छोड़ो अब ये बात तुम ये बताओ तुम यहाँ कैसे.
आकाश-मैं यहाँ स्टूडेंट हूँ.
मे-सच में.
आकाश-बिल्कुल.
मे-यहाँ तो मेरी ननद भी बी.कॉम कर रही है.
आकाश-मैं भी तो बी.कॉम ही कर रहा हूँ क्या नाम है उसका.
मे-कोमल.
आकाश-ओह अच्छा-2 तो कोमल मेडम आपकी ननद है.
मे-तुम जानते हो उसे.
आकाश-उसे कॉन नही जानता.
मे-क्या मतलब.
आकाश-अरे अब वो कॉलेज के प्रेसीडेंट की गर्ल-फ़्रेंड है तो सब जानते है उसे.
मैने आकाश को छेड़ने के मूड में कहा.
मे-वैसे तुम्हारे रहते हुए कोई और प्रेसीडेंट कैसे हो सकता है.
आकाश-अरे यार ऐसी बात नही है. वो अपना ख़ास दोस्त है पवन और मैं भी कॉलेज का वाइस-प्रेसीडेंट हूँ.
फिर मुझे याद आया कि मैं तो कोमल को ढूँडने आई थी.
मे-आकाश तुम्हे पता है अभी कोमल कहाँ होगी.
आकाश-यहाँ पवन होगा वहीं कोमल होगी चलो मुझे पता है वो कहाँ होंगे.
मैं आकाश के साथ चल पड़ी. चलते-2 मुझे आकाश पूछता रहा कि करण खुश तो रखता है ना तुम्हे और मैं उसकी बातों का जवाब देती रही.
एक रूम के पास पहुँचकर आकाश बोला.
आकाश-रीत अपनी ननद और नंदोई जी का लाइव शो देखना चाहोगी.
वो मुझे साथ वाले रूम में ले गया और फिर दीवार के साथ एक बेंच लगाया और हम उसके उपर चढ़ गये और उसने मुझे रोशन-दान के ज़रिए दूसरे रूम में देखने को कहा.
मैने रोशनदान में से दूसरे रूम में देखा तो सामने का नज़ारा देखकर मेरा शरीर सिहर उठा. उस रूम में कोमल एक बेंच के उपर पीठ के बल लेटी थी उसकी टाँगें एक लड़के के कंधों के उपर थी और शायद वही लड़का पवन था. एकदम गतिला बदन पूरी बॉडी जैसे साँचे में ढली हुई हां रंग थोड़ा सांवला ज़रूर था बट उसका बदन देखने के बाद कोई भी लड़की उसके रंग के उपर शिकायत नही कर सकती थी. वो ज़ोर-2 से कोमल की ओर धक्के मार रहा था उसका लिंग शायद कोमल की योनि में घुसा हुआ था जो अभी तक मुझे दिखाई नही दिया था. पवन ने अपनी टी-शर्ट निकाली हुई थी और अपनी जीन्स और अंडरवेर को नीचे सरका कर घुटनो तक कर रखा था. वहीं कोमल के शरीर पे एक भी कपड़ा नही था. वो बिल्कुल नंगी बेंच के उपर लेटी हुई थी. उसकी कमीज़ और पाजामी नीचे फर्श पर बिखरी पड़ी थी. सबसे बड़ी बात जो मुझे इस पूरे सीन में खटक रही थी वो ये थी कि वहाँ पे उन्दोनो के अलावा एक और लड़का भी था और वो इस पूरे सीन की अपने मोबाइल में वीडियो रेकॉर्डिंग कर रहा था और उसके दूसरे हाथ में कोमल की पैंटी थी और वो उसे अपने लिंग के उपर लपेट कर अपना लिंग हिला रहा था. मैं हैरान थी कि कोमल लड़के दुबारा बनाई जा रही उस वीडियो का विरोध क्यूँ नही कर रही थी.
मैने धीरे से आकाश को कहा.
मे-ये तो एमएमएस बना रहे हैं कोमल का.
आकाश-ये तो आम बात है इस कॉलेज में पता नही कितनी ही लड़कियों के एमएमएस बने है यहाँ पे.
मे-मुझे और लड़कियों का नही पता बट ये मेरी ननद है और उसकी फिकर है मुझे.
आकाश-लेकिन हम कर ही क्या सकते हैं.
मे-मैं अभी जाकर खबर लेती हूँ इनकी.
मैं बेंच से नीचे उतरने लगी तो आकाश ने मेरा हाथ पकड़ कर मुझे फिर से वही पे खड़ी कर दिया और कहा.
आकाश-रीत अभी जाना ठीक नही होगा.
मे-मेरा हाथ छोड़ो.
आकाश-रीत तुम मानती क्यूँ नही.
मे-कैसी बात कर रहे हो तुम ये मेरी कोमल की ज़िंदगी का सवाल है या फिर तुम भी उनके साथ मिले हुए हो.
आकाश-रीत मेरी बात समझने की कोशिश करो.
मे-मुझे कुछ नही समझना मुझे जाने दो वरना मैं यहीं से चिल्ला-2 कर उन्हे सब कुछ सुना दूँगी.
आकाश-रीत तुम मेरी बात क्यूँ नही सुन रही.
मे-3 तक गिनूँगी अगर तुमने मेरा हाथ नही छोड़ा तो मैं यहीं से.....
आकाश-देखो अगर तुम चिल्लाओगी तो मुझे कुछ ऐसा करना पड़ेगा जो तुम्हे अच्छा नही लगेगा.
मे-'1-2-3'
मैं इसके आगे कुछ बोलती उस से पहले ही मेरे होंठ आकाश ने अपने होंठों के साथ बंद कर दिए. मैं अपने होंठ उसके होंठों से छुड़ाने की जी तोड़ कोशिश करने लगी मगर उसके मज़बूत शरीर के आगे मेरी एक नही चल पाई. आकाश ने एक हाथ मेरी गर्दन पे रखा और मेरा चेहरा अपने चेहरे की ओर ज़ोर से धकेलने लगा. हम दोनो के होंठ बुरी तरह से एक दूसरे के साथ चिपक गये. उसने दूसरा हाथ मेरे नितंबों पे रखा और मुझे थोड़ा सा उपर उठा कर उसी बींच के उपर लिटा दिया जिसके उपर हम खड़े थे. अब मैं आकाश के नीचे पड़ी छटपटा रही थी और आकाश लगातार मेरे होंठों को चूस्ता हुआ मेरे उरोज दबा रहा था. वो अपने दोनो हाथों से मेरे दोनो उरोजो को कमीज़ के उपर से आपस में रगड़ता हुआ मसल रहा था. एक तो मैं पिछले एक हफ्ते से चुदि नही थी और दूसरा मेरा पुराना आशिक़ मेरे उरोजो से इतनी बुरी तरह से खेल रहा था कि मेरा सारा जोश हवा हो चुका था और मैं सब कुछ भूल कर उसका साथ देने लगी थी. आकाश को जब लगा कि मैं अब सब कुछ भूल कर गरम होने लगी हूँ तो वो एकदम मेरे उपर से उठ गया और साइड पे खड़ा हो गया. मेरी आँखों में आँसू आ चुके थे. आकाश कुछ कहने के लिए मेरे पास आया तो मैने जोरदार तमाचा उसकी गाल पे जड़ दिया. मैं उठ कर उसके सामने खड़ी हो गई और जब फिरसे अपना हाथ उसे मारने के लिए उठाया तो उसने मेरा हाथ पकड़ते हुए कहा.
आकाश-देखो रीत मैने ये सब तुम्हे चिल्लाने से रोकने के लिए किया है और प्लीज़ इस बात के लिए मुझे माफ़ कर देना.
मे-मगर तुम क्यूँ रोक रहे हो मुझे.
आकाश-देखो रीत उनके पास कोमल की और भी वीडियोस हैं अगर तुम अब जाकर उनके साथ बहस करोगी तो वो कोमल की ज़िंदगी को नरक बना देंगे. देखो वो मेरे दोस्त हैं मैं उन्हे अच्छी तरह से जानता हूँ. वो कोमल की वीडियोस का मिस यूज़ नही करेंगे और अगर कभी ऐसा हुआ तो मैं खुद उनकी खबर लूँगा.
मे-मगर आकाश वो नादान है...
आकाश-रीत तुम फिकर मत कर अब कोमल की ज़िम्मेदारी मेरी है तुम बाहर चलो मैं कोमल को बुलाता हूँ.
मैने अपने कपड़े दरुस्त किए और आकाश के साथ बाहर की ओर चल पड़ी.
तभी मेरे मोबाइल की रिंग बजी मैने देखा तो रेहान की कॉल थी. मैने कॉल रिसीव की और कहा.
मे-रेहान बस 5मीं में आ गये हम.
रेहान-भाभी 30मिनट हो गये मुझे वेट करते हुए .
मे-वो मेरी एक फरन्ड मिल गई थी बस अभी आई.
रेहान-ओके जल्दी आओ.
मैने कॉल डिसकनेक्ट की तो आकाश ने मुझसे पूछा.
आकाश-कॉन था.
मे-मेरा देवर है वो बाहर गाड़ी में वेट कर रहा है हमारा.