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मैं तो बेताब हूं मेरे राजा

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Guest
मैं तो बेताब हूं मेरे राजा



सरिता भाभी का मेरे जीवन में आना मेरे लिए एक चमत्कारिक वरदान सा था . हम दोनों का मिलना किस्मत का एक करिश्मा था. मेरी और उसकी उम्र में बड़ा फर्क था. यह बताने की उसे जरुरत नहीं थी. सब कुछ जानकर भी वह मुझसे प्यार करने लगी थी. जब बहुत दिनों तक उसने मुझे तरसा लिया तब एक दिन उसका अच्छा मूड देखकर मैने उसे धर दबोचा. उसे पीछे से मैने अपनी बांहों में घेरा और उसकी छाती पर जमकर अपनी हथेलियां जमाते हुए थामकर दबाना शुरू कर दिया. पहले तो उसने “छोडो़ ना, छोड़ दो ना प्लीस” कहा फ़िर धीरे-धीरे उसके पांव लड़खडा़ने लगे. उसका चेहरा लाल हो चला था और धड़कनें तेज हो गई थीं.

“..हाय मेरे राजा तुम ये क्या कर रहे हो….हाय-हाय मुझको बेबस मत करो प्लीस..” कहती उसकी आवाज सिसक रही थी. बल खाती हुई “आह-आह” करती वह पलटी और निढाल हो बदहवाशी में मेरे कन्धे पर उसने अपना सिर टिका दिया. सरिता बेताब हो रही थी. अपनी बाहों से मेरे गरदन को घेरती उसने अपने को कसकर मेरी छाती से चिपका लिया था. वह खुद जोर-जोर से चिपकती मुझसे लिपटी पड़ रही थी. वह खुद मुझे दबाये जा रही थी और यह भी बुदबुदाती जा रही थी कि “हाय मैं क्या करूं, मुझसे सहा नहीं जा रहा है, छोड़ दो न”. वह कह रही थी कि “मैने कभी यह काम नहीं किया है. मुझे डर लगता है कि मै तुमको कैसे संभाल पाउंगी. दर्द से कहीं मेरी वो फट न जाए”.

मैने सरिताभाभी से कहा- “आज छोड़ने मत कहो मेरी भाभी. आज जैसा मौका फिर कहां मिलेगा ? आज तो मैं तुम्हें चोदकर ही रहूंगा. चुदवा लो प्लीस”.

मेरा तन्नाता लौडा़ सरिता की कमर से चिपका उसे ठोकरें मार रहा था.इसके असर से वह भी तड़प रही थी. यह बात अलग है कि औरतों की आदत से मजबूर बचने की फिराक में थी. मैने अपना लहराता हुआ व्याकुल लंड उसकी हथेली में थमा दिया. “आह”, वह बोली. “जबरदस्त है, लेकिन जिद्द न करो प्लीस. तुम मुझे कमजोर बना रहे हो.”

” मेरी भाभी, जरा मेरे लौडे़ को भी तो देखो प्लीस. जरा सोचो तो कि तुम न मानीं तो ये कितना उदास हो जाएगा ? इस बेचारे को कितनी तकलीफ होगी ?”

भाभी ललचाई नज़रों से मेरे हथियार को निहारती हुई बडे़ प्यार से अपनी उंगलियां फेरती उसे पुचकार रही थी. उसे मानो तौल रही हो, उसने नीचे अंगुलियां करती मेरे लौडे़ को ऊपर की ओर प्यार भरी टुनकी दी और उसी पर नज़रें जमाए इस अदा में बोली जैसे वह मुझसे नहीं मेरे नन्हे वीर से बात कर रही हो -”हाय डियर खूबसूरत, मुझको मारने पर क्यों उतारू हो मेरी जान. मान भी जाओ न यार..प्लीस.” मैने सरिता को पलटाकर अपनी ओर खींचा और उसकी कमर को घेर इस कदर कसकर भींच लिया कि उसकी भरी हुई गुदगुदी छातियां दबकर मेरी छातियों में समाती चली गईं. उसके होठों को अपने होठों में निगलता मै भरपूर प्यार से चूस और निचोड़ रहा था. हम दोनों के होश बेकाबू हो उड़ चले थे, लेकिन तब भी मेरी भाभी पशोपेश में थी. उसकी छाती की नुकीली बेरियों, उसकी चूचियों को मेरी छाती दायें-बायें करती रगड़ रही थी और मेरा लौडा़ अब भी उसकी हथेलियों में प्यार पाता बेचैनी से करवट बदल रहा था. मैने आखरी कोशिश की.

सरिता से मैने कहा- मेरी भाभी, मैं तुमसे इतना प्यार करता हूं और तुम मेरी इतनी सी बात नहीं मानतीं. मेरा कहा न मानो तो ज़रा उसका खयाल करो जो तुम्हारी हथेली में बडे़ अपनेपन से खेल रहा है.” वह चुप रही.जवाब में इतना हुआ कि वह और चिपटती मेरे बायें गाल से गाल चिपकाये, मेरे कन्धे पर अपना सिर निढाल हो टिकाती हुई सिसकियां भरती आंसू बहाने लगी. भाभी को ऐसी अवस्था में देख मेरा भी जी भर आया. जी किया कि उसकी बात मान मैं खुद वहां से हट जाऊं, लेकिन हठी मन ने अन्तिम कोशिश की.

मैने बडे़ प्यार से अपनी प्रिया से कहा- प्यारी भाभी, तुम्हें इतना लाचार पाकर मुझे खुद तकलीफ़ होती है. तब भी आखरी बार तुमसे कुछ कहना चाहता हूं . अब भी न मानोगी तो मै हारकर चला जाउंगा और फिर तुम्हें कभी ये बातें न कहूंगा. तुम मेरी बात न मानो, उस बेचारे की न सुनो जो तुम्हारे लिये तड़पता तुम्हारी हथेली में खेल रह है, लेकिन उस बेचारी से तो पूछ देखो जो तुम्हारे घाघरे में लम्बी फ़ांक के अन्दर अन्धेरी गुफ़ा में कैद दिन और रात इस खयाल में तड़पती रहती है कि उसकी इच्छाओं की परवाह करने वला कोई नहीं है – ,यहां तक कि उसकी भाभी तक नहीं, जिसको सुख पहुंचने वह नन्ही परी बेचैन रही आती है.”

मैं चुप हो गया था. तभी मुझे चुप देख खुद सरिता अपनी आहों और सिसकियों के बीच कह उठी – ” बोलो ना मेरे प्यारे, मुझे अच्छा लग रहा है. बोलते जाओ जो बोलना है.”

मैने आगे कहा- तुम मेरी बात न मानना, लेकिन सच कहूं तो एक बार अपनी उस मासूम नन्ही चिडि़या की बात तो सुन लो. देखने में भले ही वह छोटी है लेकिन वह मूड में आ जाए तो सारे जहान को लील सकती है. अगर तुम्हारी हथेलियों से फिसलकर मेरा वह खिलौना भूलकर भी तुम्हारी नन्ही परी उर्फ़ चूतकुमारी से टकरा गया न तब देखना कि वह उसे छोड़नेवाली नहीं है. अभी तो केवल तुम हो, लेकिन उसने पकड़ लिया न तो वह बेचारी भूखी रोज की भूख मिटाने इसे कैद करके हमेशा-हमेशा के लिये रख छोडे़गी. तुम्हारी वह खुद कहेगी कि राजा अब मैं तुम्हें बाहर न जाने दूंगी. अब तो तुम्हे यहीं रहना है और बस भकाभक तब तक चोदते रहना है जब तक तुम्हारी ये प्यारी चूत फटकर बिखर न जाये और मेरी जान न निकल जाये”. अब तो चोदने दो यार . तुम खुद अपनी चूत को क्यों तरसा रही मेरी प्यारी भाभी. घपाघप चुदाई की जोरदर टक्कर तुम्हारी चूत की मेरे तैयार लंड से हो जाने दो फिर तुम देखना कि तुम्हारी वह खुद कहेगी कि राजा अब मैं तुम्हें बाहर न जाने दूंगी. अब तो तुम्हे यहीं रहना है और बस भकाभक तब तक चोदते रहना है जब तक तुम्हारी ये प्यारी चूत फटकर बिखर न जाये और मेरी जान न निकल जाये”. वह खुद चीख-चीख कर दुहाई मांगेगी कि मेरे प्यारे राजा तुम्हारे इन्तिजार में तो मै भी जनमों से प्यासी बैठी हूं . आओ तुम्हारा स्वागत है. अब तुम बस चोदते जाओ और मैं तुम्हें जकडे हुए जमकर चुदवाती जाऊंगी. मेरे राजा अब मेरी चूत ही तुम्हारे लंड का घर है. इसे निकालोगे तो मेरे प्राण निकल जाएंगे. अब मैं तुम्हे बाहर न जाने दूंगी. अब तो तुम्हें मेरी चूत में ही रहना है और बिना रुके दिन और रात दनादन, भकाभक मेरी जनम की प्यासी अपनी इस तरसती नाजुक मेरी चूत की प्यास मिटाना है. मेरे राजा अब तो टूट पडो और ऐसी चुदाई इस साली की करो, ऐसा जमकर चोदो, चोदते रहो कि तुम्हारा कडकडाता प्यासा लंड ठोंक-ठोंककर, मेरी नाजुक चूत की धज्जियां उडाकर, इसे फाडकर , छितरा- छितरा कर इसे बिखेर न डाले और मेरी जान न निकल जाए. मेरी चूत तुमसे फरियाद कर रही है मेरे राजा . आओ टूट पडो और अपना लौडा़ पेलकर मेरे गले तक ऐसा ठांस दो कि वह मेरे मुंह को फाडता हुआ मेरे होठों पर जा खडा हो ताकि मैं उसे अपनी जीभ से चाट-चाट कर रस में खुद भी डूब जाऊं और तुम्हारे प्यारे लौडे को भी रस में डुबा डालूं. चोदो राजा, चोदो प्लीस, चोद डालो प्लीस. आज मैं कुछ भी कह्ती रहूं तुम मत सुनना. मेरा बदन तुम्हारे प्यारे-प्यारे लंड को लील जाने को तडप- तड़पकर मरा जा रहा है. आओ मेरे राजा. देर मत करो और मेरी चूत पर टूट पडो. चोदो मेरे राजा ,मेरे प्यारे राजा मैं जनमों की प्यासी हूं. मैं तुमसे इतना-इतना जी भर के चुदवाना चाहती हूं कि मेरी प्यारी चूत की कोई कसर बाकी न रहे और तुम्हारी शानदार चुदाई से इसकी सारी प्यास आज मिट जाए.”

सरिताभाभी से सहा नहीं जा रहा था. सिसकती हुई यह कहते-कहते मुझको जमीन पर उसने घसीट लिया कि “हाय राजा, मुझसे अब सहा नहीं जा रहा है.

मैं तुम्हारी हूं.जल्दी करो प्लीस.आज आनी और मेरी हसरत को मिटाने कोई कसर मत छोडना मेरे प्यारे, आज तुम्हें मेरी कसम है. मेरा लौडा़ सरिता की प्यार भरी बातों को सुनकर भन्नाता हुआ ठन्ना-ठ्न्नाकर लहरा रहा था और वह प्यार से तसल्ली देती अपनी मुट्ठी से सहलाती हुई अपने होठों के बीच चूसती और निगलती जा रही थी.”

मुझसे सहा नहीं जा रहा था.” आओ भाभी, अब हो जाने दो” कहकर मैने सरिताभाभी के कन्धों को दबाते हुए पटक दिया. उसकी पानी-पानी हो रही चूत की फांक पर मैने अपने सिर की ठोकर दी और अपने होठों से चूमते हुए उसकी चूत की लपलपाती हुई फुनगी को अपनी जीभ की नोक से बार-बार टकराता टुनकाता रहा. गुदगुदी से सरिताभाभी और ज्यादा बदहवास होती चली गई थी. उसकी टांगें अपने आप पसरकर फैलने लगी थीं जैसे अपने प्यारे लौड़े का स्वागत करने के लिये वे दरवाजा खोल रही हों. उसकी जांघों पर रस फैलकर बह चला था. मैने सोचा कि अब देर करना ठीक नहीं है. अपनी प्यारी की रिसती चूत पर मेरे लौड़े ने हौले से ठोकर मारी और अन्दर घुसने लगा.

सरिता की सिसकी भरी चीख निकली – ” हाय, धीरे ना. मेरी चूत एकदम सह नहीं पाएगी ना.”

मैने फौरन अपनी प्यारी की बाहों में अपनी बाहें फंसाकर उसका सिर थोड़ा ऊपर उठाया और उसके होठों पर अपने होठ रखते उसकी बेल जैसी गोलाइयों वाली दूधिया छातियों को कड़ककर अपने से चिपका लिया. फिर हौले से उसके कान की लौ को दांतों से काटते कहा -” चुप रहो मेरी भाभी, कुछ नहीं होगा. बस देखती रहो. अभी तो शुरुवात है”

इधर मै बातों में उसे लगाये रहा और उधर सरिताभाभी की प्यारी चूत में मेरा लौड़ा सरसराता हुआ और आगे धंस गया. उसके गले से फिर हल्की सी एक आह निकली. ” बोलो कुछ हुआ ? नहीं ना ” मैने कहा.” बस थोड़ा और मेरी भाभी ” कहते सरिता की चूत में आधे धंसे लन्ड को एक जोरदार झटके के साथ मैने पेला और चूत को जमकर ठांस दिया. वह उचक पड़ी और फिर अचानक मुझे छाती में जमकर चिपटाती हुई बोली – “आह कितना अच्छा लग रहा है. अब और मत तरसाओ. आ जाओ, जो करना है हो जाने दो मेरे प्यारे. मैं अब तुम्हारी गुलाम हूं.”

सरिता और मैंने प्यार भरी बातों में डूबे एक-दूसरे को टक्कर देते आधा घन्टे का समय हौले-हौले की गुदगुदाती कोमल चुदाई में गुजारा. इस दौरान ज्यों-ज्यों चुदाई की भकाभक बढ़ती गई त्यों-त्यों एक-दूसरे को प्यार से निहारते हमारे चेहरों की लाली और आखों की चमक भी बढ़ती चली गई. उस वक्त मेरी प्यारी सरिता मुझे दुनिया की सब से ज्यादा प्यारी औरत लग रही थी और वह मुझे “आह, मेरे राजा तुम कितने अच्छे हो. आह..आह..आह.. चोदो..खूब चोदो..चोद्ते जाओ..मार डालो मुझे आज” कहती सिसकियां ले रही थी.

प्यार भरी बातों के साथ हम दोनों का जोश परवान चढ़ रहा था. इसी के साथ लौडे़ और चूत की जोडी़ में काम्पीटिशन तेज हो रहा था. सरिता भाभी कई चूत और मेरा हथियार उछल-उछलकर एक-दूजे पर कूद जोरदार चोट कर रहे थे . दोनो प्यार के रसभरे कीचड़ मे डूबकर चप्प-चप्प और भकाभक करते खुशी में जोर-जोर से चिल्ला रहे थे.

अब बातों की जगह मेरे और मेरी भाभी के मुंह से चाहत की आहों और सिसकारियों की आवाजें तेज होती निकल रही थीं. सरिता सरिता ” आह रे..मर गई..आह आह..आ जाओ.. और जोर से.. चोदो..चोदे जाओ –मेरे प्यारे..आज इस चूत को फट जाने दो..हाय-हाय कितना अच्छा लग रहा है..हाय इतनी जोर से नई ना प्लीस..” चीखती मजे उठा रही थी और जवाब में मेरा लंड और भयानक रूप में उसकी चूत को फाड़ता हुआ – लो..ये लो..लेती जाओ …पूरा लो प्यारी..आज मै तुमको नहीं छोड़ने वाला… खा जाओ मेरी भाभी..खलास कर दो इस लौडे़ को “ -चिल्लाता अपनी प्यारी चूत पर टूटा पड़ रहा था.

सरिता की चूत और मेरे लौडे़ की जोरदार टक्कर से सनसनाती हम दोनो की देह बेहोशी के आलम में पहुंची जा रही थी. अचानक हम दोनों ने बादलों की धुन्ध, बिजली की एक-पर-एक लगातार कड़कडा़ती तरंगों, और झर-झर करती गुदगुदाती बौछार के बीच एक-दूसरे की देह में यूं प्रवेश किया कि कौन कहां था यह कोई नहीं जान सका. होश तब आया जब एक-दूसरे की बांहों में बन्धे, लंड और चूत में डूबे हुए ही आधा घन्टे के बाद हमारी आंखें खुलीं. मेरी सरिता और मेरी आंखें आपस में टकरातीं एक-दूसरे को समेट लेने की चाहत में निहार रही थीं. ऐसा लगा कि जैसे वह शुरुआत भर थी. जो अभी-अभी हुआ, उसकी याद से प्यास बुझाने की चाहत फ़ौरन इस कदर नसों में जोर मारने लगी कि जैसे के तैसे हमारी कायाएं एक-दूजे पर कब्जा करतीं बिस्तर को भूचाल की तरह कंपाने लग चलीं. सरिता मेरे नीचे दबी थी. उसकी दोनों टांगें मेरे कन्धों पर चढ़ी थीं. उसकी गदराई गुलाबी देह पर सवार हो मैने अपने हाथों को उसकी खूबसूरत चिकनी और पहाडों की सी कड़क कठोर छातियों पर कसकर लगाम की तरह चुस्ती में थामकर जमाए रक्खा था और मेरा दिल ? वह जैसे कड़कडा़ते, कठोर लौडे़ की शक्ल अख्तियार कर अपनी प्रिया सरिताभाभी की संकरी घाटी के मुहाने को ठेलकर अपनी भाभी के साथ फिर एक बार चुदाई के स्वर्ग की सैर के लिये तैयार खडा़ था.

झुककर मैने सरिताभाभी के बारीक गुलाबी पन्खुड़ियों की मानिन्द अधरों पर अपने होठ रख दिये. हौले-हौले उसके गालों पर अपने गालों को तैराता रहा और बिना आवाज़ की आवाज़ में पूछा – चलें ? सरिता ने उसी तरह अपने गालों को मेरे गालों पर तैराते, अपने होठों को सरकाते मेरे कान की लव पर अपने दांतों से मीठी चुटकी लेते, संगीत की खनक में जवाब दिया -” मैं तो बेताब हूं मेरे राजा
 
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