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मैं, मेरी बीवी और चचेरा भाई

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मैं, मेरी बीवी और चचेरा भाई

मैं राहुल दिल्ली में अपनी बीवी मधु के साथ रहता हूँ। मेरे बारे में तो आप खुद ही अंदाज़ा लगा लेंगे।

आप मेरे किरदार और उनकी परिस्थिति को समझ सकें, उसके लिए बीच-बीच में आस पास की चीज़ों का अंदाज़ा लगवाने की कोशिश मैं करूँगा।

यह वो शाम थी, जब मेरा बुआ का लड़का नीलेश जो मेरा हमउम्र ही है, मेरे घर आया।

वो भोपाल में रहता है।

शाम की ट्रेन से जब वो घर आया तो काफी अँधेरा हो चुका था। मैं तो बालकनी में खड़ा-खड़ा काफी देर से उसी का इंतज़ार कर रहा था। जैसे ही वो आया, मेरी ख़ुशी दुगनी हो गई।

बचपन में हम दोनों बहुत समय साथ गुज़ारते थे, अब हम दोनों को ज्यादा समय नहीं मिलता।

पहली सिगरेट, पहली बियर यह सब हमने साथ साथ ही शुरू किया था।

घर आते ही उसने मेरी बीवी के पैर छुए और मुझसे गले मिला, मैंने कहा- कमीने, मेरे भी पांव छू!

तो वो बोला- क्यों भाभी के सामने गाली खाने के काम करता है? तेरे थोड़े ही न पाँव छूऊँगा।

हंस कर हम लोग सोफे पर बैठ गए।

घर में घुसते ही पहला कमरा हमारा ड्राइंग रूम है, उसमें 56 इंच का टीवी से लैपटॉप कनेक्ट किया हुआ है, जिससे मूवी लैपटॉप पर न देखकर बड़ी स्क्रीन पर देख सके।

सोफे केवल 2 सीटर ही हैं।

एक छोटा सा कालीन एक कांच की सेंटर टेबल!

घर देखकर नीलेश बोला- भाई, तूने घर तो बड़ा सही बना रखा है।

बोलते बोलते वो अपनी सामान भी खोलता जा रहा था।

मैंने कहा- भाई, सब ऊपर वाले का करम है।

उसने बैग से एक सूट निकला जो बुआ ने भोपाल से मेरी बीवी के लिए भेजा था।

मेरी पत्नी भी वहीं बैठी थी, उसने सूट मेरी पत्नी मधु को दिया।

मधु सूट देखकर खुश हो गई।

नीलेश कुछ मिठाई वगैरह भी लाया था। मैंने नीलेश से पूछा- भाई चाय पियेगा या खाना खाकर चाय पियेगा।

वो बोला- यार, सफर में थक गया हूँ, पहले चाय पीते हैं, फिर आगे का बाद में देखेंगे।

जब तक मधु चाय बना रही थी, हमने घर परिवार सबको लेकर बात करते रहे।

जैसे ही चाय आई, मैंने मधु को बोला- हम अपनी चाय लेकर ऊपर छत पे जा रहे हैं।

हम चाय के साथ सुट्टा मरना चाहते थे इसलिए छत पे आ गये थे।

चाय पीते सुट्टा मारते हुए बातें शुरू हुई। नीलेश बोला- यार तू तो बहुत कमीना है, ये तो नहीं कि बियर वियर पिलाए… ऊपर से पूछ रहा है कि खाना खायेगा?

मैं क्या करता… हंस कर रह गया।

मैंने कहा- चल भाई बियर ले आते है।

मैंने नीचे पहुंच कर अपनी पत्नी मधु को सलाद, फल और कुछ नमकीन मेवे का इंतज़ाम करने को बोल दिया। मैं और नीलेश दोनों बियर लेने चले गए, रास्ते से एक तंदूरी मुर्गा भी पैक करा लाये।

घर आकर मैंने बियर बोतल फ्रिज में रख दी और नहाने चला गया तब तक नीलेश ने youtube पर कुछ अच्छी गज़ल्स का कलेक्शन ढूंढ के रख लिया।

यह हमारा बहुत पुराना स्टाइल है बियर या व्हिस्की पीने का।

जब तक मैं नहा कर आया पूरा इंतज़ाम हमारी सेंटर टेबल पर हो चुका था। मैं तौलिये में ही सोफे पर जाकर बैठ गया, ग़ज़ल चालू हो गई और चियर्स हुआ।

मधु सारा सामान रखकर खाने की तैयारी के लिए किचन में चली गई जो ड्राइंग रूम से ही लगी हुई है, वहाँ से दिखता कुछ नहीं है पर सुनाई सब देता है।

पहली बोतल खत्म होने के बाद नीलेश बोला- राहुल भाई, मज़ा आ गया, बहुत दिनों बाद आत्मा शांत हुई है।

और बोलते बोलते सिगरेट जलाने लगा।

मैंने उसे रोका, मैंने कहा- मैं घर के अंदर सिगरेट नहीं पीता हूँ, या तो छत पे चल या बालकनी में।

तो उसने बोतल उठाई और बालकनी में आ गया।

मैंने सिर्फ तौलिया ही पहना हुआ था पर क्योंकि बालकनी में कपड़े सूखने के लिए डाले हुए थे इसीलिए कोई ख़ास प्रॉब्लम नहीं थी।

रात के लगभग 9 बज रहे थे।

हम एक ही में से शेयर करके सिगरेट पीते थे तो आज भी हम वैसे ही पी रहे थे।

मैंने उसकी तरफ सिगरेट बढ़ाया ही था और एक हाथ में बोतल थी, तब तक मेरा तौलिया गिरने लगा।

मैंने कोहनी से जैसे तैसे सम्भाला पर जो दिखना था वो तो दिख गया।

उसने बड़े आराम से मेरे लण्ड को देखकर सिगरेट अपने हाथ में ली और बड़ा सा काश मुंह में भरा।

तब तक मैं बोतल साइड में रखकर तौलिया सही करने लगा।

नीलेश बोला- भाई, तेरा लण्ड तो पहले से काफी बड़ा हो गया है।

नीलेश और मैं शादी से पहले एक दूसरे की मुट्ठ मार दिया करते थे और मुखमैथुन भी करते थे।

मैंने कहा- तुझे सोते लण्ड में भी साइज दिख गया गांडू? साइज अच्छा लग रहा है तो अपनी गांड में ले ले।

उसने धीरे से पूछा- भाभी को तूने हम दोनों के पास्ट के बारे में बताया है?

मैंने उसको बोला- नहीं बे… तू मुझे मरवाएगा।

नीलेश मजे लेते हुए बोला- आज मेरे ही पास सो जा, रात भर अच्छी सा ओरल सेक्स करेंगे।

मैंने कहा- आईडिया बुरा नहीं है, let me try.

फिर मैंने उसे बोला- साले तेरी भी शादी हो गई, क्या हम अभी भी इसे एन्जॉय करेंगे।

नीलेश ने कहा- तो मैं कौन सा अपनी बीवी के साथ आया हूँ। अच्छा लगे तो ठीक नहीं तो भाभी के पास चले जाना।

मैंने अंदर आकर 2 और बोतल निकाली और दोनों भाई बैठकर पीते रहे।

बीच बीच में मधु का ध्यान रखते हुए हम एक दूसरे को टच भी कर रहे थे।

मैं तो तौलिये में था इसलिए वो सीधा मेरा लण्ड ही सहला देता था पर मैं उसकी जीन्स के ऊपर से ही सहला रहा था।

मैंने उसको धीरे से बोला- जल्दी से खाना खा लेते हैं जिससे मधु के काम खत्म हो जायेंगे, वो सो जाएगी और हम मस्ती मार लेंगे।

तो उसने थोड़ी बुलंद आवाज़ में मुझसे कहा- भाई खाना खाते हैं। अब और पीना होगी तो खाने के बाद थोड़ी जगह बचा लेना।

मधु ने अंदर से आवाज़ लगाकर बोला- अभी लगाती हूँ आपके लिए खाना।

हम दोनों ने फटाफट खाना खत्म किया। जब तक मधु खाना खा रही थी, हम दोनों बालकनी में सिगरेट पीने चले गए।

अब सालों बाद मिले थे, शादी के बाद बदल गए होंगे, सोच कर अभी तक कोई हरकत नहीं कर रहे थे।

पर अब तो वो मेरे तौलिये में नीचे से हाथ डाल के मेरी जांघें और टट्टे सहला रहा था। तौलिये में तम्बू बन हुआ था, मैंने उसको मना किया- भाई थोड़ा सब्र कर अभी, उसको तम्बू दिख गया तो पता नहीं क्या सोचेगी।

मैं अपने आपको कंट्रोल करके कैसे तो भी अंदर आया, थोड़ी देर बैठे रहे, फिर मधु ने पूछा- भैया कहाँ सोएँगे? इनके लिए बिस्तर लगा देती हूँ।

मैंने कहा- यहीं कालीन पर गद्दा और चादर बिछा देते हैं।

नीलेश बोला- जहाँ आप लोग ठीक समझें।

मैं जब बैडरूम में बिस्तर लेने गया तो मधु बोली- आपको बिलकुल शर्म नहीं आती? 3 घंटे से ऐसे ही टॉवल में बैठे हो, भैया क्या सोच रहे होंगे। जाओ आप पहले कपड़े पहनो और में बिस्तर लगा देती हूँ।

मैंने मधु को बोला- लड़के इतना नहीं सोचते और अब वैसे ही रात हो गई है।

थोड़ा सा रोमांटिक अंदाज़ में बोला- अब तो वैसे भी रात हो गई है, अब तो कपड़े उतारने का समय है न कि पहनने का।

और मधु के होंठों पे ज़बरदस्त सा किस कर दिया।

उसने मुझे हटाते हुए धीरे से कहा- भैया देख लेंगे, आपको तो शर्म नहीं आती।

खैर, मैंने बाहर आकर बिस्तर लगा दिया और मधु को बोला- तुम सो जाओ, हम तो इतने दिनों बाद मिले हैं, काफी बातें है करने को। इतने में नीलेश हंसते हुए बोला- भाभी, आप भी बैठो, थोड़ी गप्पें लड़ाते हैं।

मैं सोफे पर बैठा था, नीलेश नीचे बिस्तर पे और बीवी सोफे के साइड में जो हाथ रखने के लिए होता है उस पर बैठ गई।

थोड़ी बहुत देर इधर उधर की बातों के बाद मधु ने नीलेश से इजाज़त ली और कहा- आप लोग बात करिये, मैं थोड़ा थक गई हूँ, आराम कर लेती हूँ।

मैंने नीलेश को धीरे से कहा- मैं अभी आया ज़रा गुड नाईट बोल कर और आँख मार दी।

मैंने कमरे में आते ही बीवी को पीछे से बूब्स से पकड़ लिया और गले पर काटने और किस करने लगा।

बीवी ने भी मुझे प्यार से किस किया और अपनी गांड मेरे खड़े लण्ड को टॉवल के ऊपर से ही रगड़ने लगी।

मैंने पीछे से ही उसकी शॉर्ट्स में हाथ डाला और पैंटी के ऊपर से ही मधु को सहलाने लगा।

हम दोनों ही काफी गर्म हो चुके थे, मैंने धीरे से मधु से पूछा- एक क्विकी हो जाए?

उसने जबाब न देते हुए सिर्फ मेरे होंठों से होंठों को लगा दिए।

मैंने भी अपना हाथ थोड़ा गहराई में ले जाकर अब उसकी चिकनी चूत पर सहलाना शुरू कर दिया।

हम अभी तक बेड के पास ही खड़े हुए थे, बाहर से थोड़ी रोशनी अंदर आ रही थी।

हम अपनी आवाज़ पूरे कंट्रोल में करे हुए थे।

मैंने मधु को बेड पर धक्का देकर उसे उल्टा लेटा दिया और उसके शॉर्ट्स और पैंटी उतार के सीधा लण्ड उसकी चूत में डाल दिया।

वो कामाग्नि में पूरी तरह जल रही थी और मेरे लण्ड पे तो काफी देर से दुलार हो ही रहा था।

हमने थोड़ी देर ऐसे ही चुदाई का आनन्द लिया, बिना आवाज़ किये।

पर अब इच्छा और भी ज्यादा तीव्र हो चुकी थी, हम दोनों का ही क्विकी से कोई काम नहीं चलना था, मैं उसके ऊपर से उठ कर खड़ा हो गया।

उसने मेरी तरफ देखा, मैंने दरवाज़ा बंद किया और कुण्डी लगा दी और नाईट लैंप ऑन कर दिया।

मधु अब तक बिस्तर पर ही सीधी हो गई थी, मेरे सामने उसकी चूत थी और उससे काफी पानी बहता दिख रहा था। उसकी जांघें भी थोड़ी गीली होने की वजह से चमक रही थी।

मैं मधु के ऊपर लेट गया और उसके कान पर काटते हुए बोला- ऐसे काम नहीं चलेगा डार्लिंग, थोड़ा जम के चुदाई हो जाए?

मधु थोड़ा मुस्कुराई और मुझे हटाते हुए बोली- पहले उनको सुला के आ जाओ, मैं तो पूरी रात आपको ही हूँ। आप जाओ, जब आप आओगे, मैं आपको चादर में नंगी ही सोती हुई मिलूंगी, आप आकर मुझे बहुत सारा प्यार कर लेना।

मैंने कहा- मधु, घर में एक ही बाथरूम है, जो इसी रूम के आगे है और बाथरूम तो वो भी उपयोग करेगा न… इसलिए कपड़े पहन लो, हम कल सुबह मस्ती मार लेंगे। वैसे भी अगर मैं तुम्हें भूखा छोड़ दूंगा तो तुम पूरे दिन मुझे अच्छे अच्छे पोज़ देती रहोगी, जो मुझे बहुत अच्छा लगता है।

मधु ने कहा- आप भैया को कंपनी दो, और हाँ, यह दरवाज़ा बाहर से बंद कर देना जिससे रोशनी अंदर न आये, अगर मैंने बंद किया तो जब आप आओगे तो मेरी नींद ख़राब होगी।

मैं तो आया ही इसी साजिश में था। मैंने मधु के जोर बूब्स दबाए और चूतड़ों पे एक चटाक लगा कर बाहर आ गया, बाहर के कमरे का भी दरवाज़ा और पर्दा लगाया और आकर सोफे पे बैठ गया।

मैंने कहा- मधु, घर में एक ही बाथरूम है, जो इसी रूम के आगे है और बाथरूम तो वो भी उपयोग करेगा न… इसलिए कपड़े पहन लो, हम कल सुबह मस्ती मार लेंगे। वैसे भी अगर मैं तुम्हें भूखा छोड़ दूंगा तो तुम पूरे दिन मुझे अच्छे अच्छे पोज़ देती रहोगी, जो मुझे बहुत अच्छा लगता है।

मधु ने कहा- आप भैया को कंपनी दो, और हाँ, यह दरवाज़ा बाहर से बंद कर देना जिससे रोशनी अंदर न आये, अगर मैंने बंद किया तो जब आप आओगे तो मेरी नींद ख़राब होगी।

मैं तो आया ही इसी साजिश में था। मैंने मधु के जोर बूब्स दबाए और चूतड़ों पे एक चटाक लगा कर बाहर आ गया, बाहर के कमरे का भी दरवाज़ा और पर्दा लगाया और आकर सोफे पे बैठ गया।

नीलेश बोला- भाई, तूने बड़ी देर लगा दी?

मैंने आँख मारते हुए कहा- तेरी भाभी को भी तो सुलाना था, इंजेक्शन दे दिया है, अब उसे अच्छी नींद आएगी।

वो बिस्तर पे ही लगभग रेंगता हुआ मेरे पास आया और मेरे टॉवल के अंदर मेरे भीगे हुए आधे सोते हुए लण्ड को जांघों से सहलाते हुए पकड़ने पहुँचा।

जैसे ही गीलापन नीलेश के हाथों पे लगा उसने हाथ वापस खींच लिया और बोला- इसे धो तो लेता!

मैंने नीलेश को बोला- गीलेपन को टेस्ट तो कर और बता टेस्ट कैसा है?

उसको मेरी बात जंच गई, उसने मेरा टॉवल हटाया। अब मैं शादी के बाद दूसरे इंसान के सामने पूरी तरह नंगा हुया हूँ, मुझे थोड़ा सा अजीब लग रहा था क्योंकि अभी नीलेश पूरे कपड़े पहने मेरे बदन के साथ खेलने की कोशिश कर रहा था।

शादी से कई साल पहले हम एक दूसरे को इस तरह देखा करते थे, तब हम इतने छोटे भी नहीं थे, एक दूसरे का लण्ड चूसना और मुट्ठ मारने में मदद करते थे।हमारी गर्ल फ्रेंड्स भी थी पर फिर भी मुखमैथुन का जो मज़ा हम एक दूसरे को दे पाते वो हमे किसी भी लड़की से नहीं मिलता था।

वो अपने होंठ मेरे अंडकोष के पास ले गया, वो भी गीले थे।

मेरे मुंह से सिसकारी निकाल गई जब उसने अपनी जीभ से मेरे अंडकोष और आसपास के इलाके को साफ़ करना शुरू किया।

मेरी आँखें बंद थी, मैं उन पलों का मज़ा लेना चाहता था।

मेरे मुंह से अकस्मात ही निकल गया- क्यों, मधु का टेस्ट कैसा लगा?

उसने मेरा लण्ड अपने मुंह में डाला और जीभ से अंदर ही अंदर मेरे लण्ड के टोपे को सहला रहा था, मेरा सवाल सुन कर उसने लण्ड मुंह से बाहर निकाला, बोला- यार, मधु भाभी का पानी तो बहुत ही स्वादिष्ट है।और फिर से मेरे लण्ड को ऐसे चूसने लगा जैसे वो पागल हो गया हो।

मैंने उसको बोला- नीलेश, तू भी अपने कपड़े उतार ले, दोनों मजे लेते हैं।

उसने फिर से मेरे लण्ड को बाहर निकाला और लगभग डांटते हुए बोला- यार तू डिस्टर्ब मत कर, मुझे पता है तेरा पानी निकल गया तो तू मुझे नहीं चूसेगा पर डोंट वरी, लेट मी एन्जॉय द टेस्ट… और तू पूरा पानी मेरे मुंह में ही निकाल देना, बहुत सालों से तेरा पानी नहीं पिया है मैंने! And now just enjoy and dont disturb me.

मैं भी अब उसकी तगड़ी वाली चुसाई का मजा लेने लगा। उसने मेरे लण्ड को फिर बाहर निकाला, मेरी टाँगें ऊपर उठा दी और मेरे गांड के छेद में अपनी जीभ से सहलाने लगा। ऐसा मेरे साथ इससे पहले कभी नहीं हुआ था।

मुझे अजीब ज़रूर लग रहा था पर मुझे अच्छा भी लग रहा था।

अब उसने मेरी गांड के छेद को बिल्कुल चूत की तरह चाटना शुरू कर दिया। मैं बहुत ज्यादा उत्तेजित होने लगा मेरे मुंह से आवाज़ निकलने ही वाली थी कि मैंने अपना टॉवल अपने मुंह में डाल लिया जिससे आवाज़ न निकले।

वो लगातार अपने हाथों से मेरी बॉल्स को सहला रहा था और मेरी गांड चाट रहा था। मैं बहुत कोशिश कर रहा था कि मेरा पानी न निकले पर पानी तो छूटने ही वाला था, मैंने अपने हाथ से उसका सर उठाया और अपने लण्ड को उसके मुंह में डाल दिया क्योंकि मुझे उसके मुंह में ही आना था।

मैंने अपनी सारी मलाई उसके मुंह में डाल दी।

उसने मलाई पूरी निगलने के बावजूद थोड़ी और देर मेरे लण्ड को अपने मुंह में ही रखा, फ़िर मुंह की सारी मलाई मेरे टॉवल पर थूक दी और फिर से मेरे लण्ड को मुंह में लेकर चूसा और फिर बची खुची मलाई भी टॉवल पर थूक दी।

उसने कहा- अब एक एक सिगरेट हो जाये क्योंकि तू तो मुंह में लेगा नहीं, तेरा काम तो हो गया।

वो फ्रिज से एक बोतल पानी की ले आया और बालकनी में जाने लगा, मैंने तब तक दूसरा टॉवल उठाया, सिगरेट उठाई और उसके पीछे चल दिया।

उसने बाहर बालकनी में कुल्ला किया और थोड़ा पानी पी लिया। मैंने भी पानी पीया, थोड़ा साँसें नार्मल हुई।

रात के 1:30 बज चुके थे कॉलोनी की गली में काफी सन्नाटा था। मैंने सिगरेट जलाई और चुप्पी तोड़ते हुए चुटकी लेते हुए कहा- यार नीलेश, तूने तो दिलखुश कर दिया, तुझे तो प्रोफेशनली यह काम शुरू कर देना चाहिए।

वो सिर्फ मुस्कुरा रहा था, कुछ नहीं बोला और सिगरेट पीने लगा।

मैंने उसके जीन्स का बटन खोलते हुए कहा- तेरा लण्ड तो अब तक काफी गर्म हो चुका होगा।

उसकी जीन्स की चैन भी खोल दी और उसकी अंडरवियर के अंदर हाथ डालने लगा।

उसने बिना किसी रिएक्शन के ये सब होने दिया।

मैंने जब हाथ में उसका लण्ड लिया तो वो पहले से काफी बड़ा था और हम दोनों का ही साइज लगभग एक सा था। मैंने उसकी जीन्स और अंडरवियर घुटने तक उतार दी, अँधेरा और सुनसान गली का फायदा उठाते हुए मुट्ठ मारने लगा।

वो सिगरेट पीते हुए मुट्ठ मरने को शायद एन्जॉय कर रहा था।

मैंने उसके अंडकोष सहलाए और जड़ से उसके लण्ड को अच्छे से मुट्ठ मारने की कोशिश करने लगा।

वो धीरे धीरे तेज़ साँसें लेने लगा, फिर बोला- यार मैं लेट जाता हूँ, तू अच्छे से मेरी मुट्ठ मार दे। इतनी देर से खड़ा लण्ड अब और सहन नहीं होता।

हम कमरे में आ गये, मैंने सब दरवाज़े खिड़की बंद किये, दुबारा चेक किया कि मधु का कमरा बंद है और जब मैं लौटकर आया तब तक नीलेश अपने बिस्तर पे नंगा लेट चुका था और अपने हाथ से धीरे धीरे अपने लण्ड की मसाज कर रहा था।

मैं उसके बगल में जाकर बैठा और उसके लण्ड को पकड़ कर धीरे धीरे अच्छी सी मसाज देने लगा।

अब वो धीरे धीरे और तेज़ साँसें लेने लगा, वो मुझसे बोला- भाई तेरे को एक बात बोलूं बुरा तो नहीं मानेगा?

मैंने कहा- बोल यार बोल!

मेरे हाथ नहीं रुके बिल्कुल, क्योंकि मुझे याद था की उसे मुट्ठ मारते वक़्त गन्दी गन्दी बातें करके और मज़ा आता है।

नीलेश बोला- यार, मैं जब तक यहाँ हूँ, तू मुझे भाभी का पानी चखा सकता है जैसा आज चखाया था, बहुत टेस्टी पानी है।

मैंने कहा- क्यूँ नहीं, रोज़ उसकी चूत में अपना लण्ड डाल कर तुझे चुसाने आ जाऊंगा।

उसने मेरे हाथ पे अपना हाथ रखा और हिलाने को रोक दिया और बहुत गम्भीर होकर पूछा- यार मैं मज़ाक नहीं कर रहा, हवस के नशे में नहीं बोल रहा, मुझे मधु भाभी का टेस्ट बहुत ही ज्यादा अच्छा लगा।

मैं थोड़ा सीरियस हुआ पर फिर मैंने उसका लण्ड हिलना शुरू कर दिया और कहा- तू चिंता मत कर… तेरा भाई तेरी यह इच्छा पूरी करने की पूरी कोशिश करेगा।

अब तक मेरा लण्ड भी अपनी औकात में दुबारा आना शुरू कर चुका था।

इतने में ही उसने मेरी गांड से लेकर जांघ और अंडकोष सब अपने हल्के हाथ से सहला दिए।

मैंने उसको कहा- अब 69 में आ जाते हैं, अब मेरा तेरा लौड़ा चूस सकता हूँ।

वो खुश हो गया।

हम दोनों 69 में एक दूसरे का लौड़ा और गांड का छेद दोनों चूस और चाट रहे थे।

उसने कहा- राहुल गांड को अच्छे से चाट जैसे कोई चूत हो, तुझे भी मज़ा आएगा और मुझे भी।

मैंने जैसे आदेश मिले, वैसा ही किया।

थोड़ी ही देर में हम दोनों ने बहुत सारी मलाई छोड़ दी, फिर मेरे पुराने टॉवल से उसे साफ़ कर दिया।

मैंने उसको बोला- अब तू सो जा… मैं भी सोने जा रहा हूँ।

और मैं वापस अपने कमरे में आकर अपनी नंगी बीवी से नंगा ही चिपक कर सो गया।
 
थोड़ी ही देर में हम दोनों ने बहुत सारी मलाई छोड़ दी, फिर मेरे पुराने टॉवल से उसे साफ़ कर दिया।

मैंने उसको बोला- अब तू सो जा… मैं भी सोने जा रहा हूँ।

और मैं वापस अपने कमरे में आकर अपनी नंगी बीवी से नंगा ही चिपक कर सो गया।

सुबह जब आँख खुली तो मधु मेरे लिए चाय लिए मेरे सर पे ही खड़ी थी।

मैंने चाय ली और उठ कर तकिए का टेका लगाया, पूछा- नीलेश उठ गया?

तो बोली- नहीं अभी नहीं उठे, आप उठा दो, मैंने उनके लिए भी चाय बनाई है।

मैं बिस्तर से उठ कर जाने लगा तो बोली- रुको, कुछ पहन तो लो।

मैंने देखा कि मैंने रात भर से कुछ पहना ही नहीं था, मैंने जल्दी से कपड़े पहने और नीलेश को उठाने चला गया।

उसने केवल अंडरवियर ही पहना था।

मैंने उसको उठाया और बोला- अंदर आ जा, चाय बन गई है।

वह एक शॉर्ट्स और बनियान पहन कर बैडरूम में आ गया।

बैडरूम में जाने का रास्ता किचन से होकर ही है, तो वह से निकलते हुए उसने मधु को गुड मॉर्निंग बोला और मेरे कमरे में आ गया। पीछे पीछे ही मधु भी चाय लेकर आ गई।

बीवी ने पूछा- आप लोग कितने बजे सोये?

मैंने कहा- पता नहीं टाइम ही नहीं देखा।

सब चाय पीकर अपने अपने काम में लग गए, नीलेश वाशरूम चला गया, बीवी किचन में और मैं न्यूज़पेपर लेकर बाहर वाले कमरे में! आज सुबह मैंने नीलेश का मधु के लिए व्यवहार में अंतर पाया, उसका देखने और बात करने के तरीके से मुझे अंतर महसूस हुआ।

मैं अभी अखबार पढ़ ही रहा था और रात के ख्यालों में खोया हुआ था कि बीवी ने पीछे से आकर मुझे पकड़ा और मेरे मुंह को चूम लिया और बोली- रात को जब अंदर आये तो जगाया क्यू नहीं? और पता है, मैं भी ऐसे ही सो रही थी और आप भी… और आपने दरवाज़ा भी बंद नहीं किया था। कभी भैया ने रात को वाशरूम use किया होगा तो?

मैंने अपने चेहरे पर आश्चर्य के भाव दिखाए और कहा- ओह्ह सॉरी सॉरी… मैं भूल गया होऊँगा।

और थोड़ा मजाकिया अंदाज़ में बोला- अभी आने दो उसको… पूछता हूँ, रात को क्या क्या देखा कमीने ने।मधु बोली- धत्त !!!

और मेरे छाती पर धीरे धीरे से वार कर दिया।

मैंने उसे वहीं से पकड़ा और आधा सोफे पे लटका के उसके होंठों पे चुम्बन करने लगा।

इतने में खराश की आवाज़ आई, हम दोनों फटाफट नार्मल हुए, नीलेश ही था, वाशरूम से वापस आ गया था।

मधु थोड़ा सा शर्मा गई और किचन की तरफ चली गई।

नीलेश ने कोई रिएक्शन नहीं दिया जैसे उसने कुछ देखा ही न हो।

नीलेश समझदार है उसे पता है कब और क्या करना चाहिए।

मुझे इशारे से पूछा- सिगरेट?

मैंने इशारे से बोला- छत पे।

फिर मैं बोला- मधु, मैं ऊपर जा रहा हूँ, थोड़ी देर में आता हूँ।

अंदर से आवाज़ आई- आपका लाइटर तो यही पड़ा है। रुको मैं आती हूँ।

हम गेट पर ही खड़े थे, लाइटर लेकर हम छत पर चले गए।

सिगरेट जलाते ही मैंने पूछा- तू साले थोड़ी और देर नहीं बैठ सकता था वाशरूम में, इतनी जल्दी क्यूँ आ गया? और आ भी गया था तो खांकरा क्यूँ?

नीलेश बोला- मैं थोड़ी देर से देख रहा था पर मेरे वाशरूम में होने की वजह से तुम इससे आगे बढ़ते नहीं और भाभी की आँखें शायद खुलने ही वाली थी।

मैंने कहा- अच्छा, किस करते समय आँखें बंद थी क्या उसकी?

नीलेश ने कहा- हाँ!

नीलेश फिर बोला- और बता आज का क्या प्रोग्राम है?

मैंने कहा- तू बोल, वही करते हैं।

उसने कहा- तेरी बड़ी स्क्रीन पे कोई मूवी देखते हैं, खाना खाते हैं और घर में पड़े रहते हैं। कहीं जाने का मन नहीं है, अभी थकान मिटी नहीं है।

मैंने हाँ में सर हिला दिया।

मैंने नीचे आकर बीवी को भी आज के प्रोग्राम से अवगत करा दिया। हम दोनों की मूवीज देखने में एक्सपर्ट्स (मोटी खाल) है। चाहे कैसी भी सड़ी मूवी दिखा लो, हम अपना टाइम पास कर ही लेते थे।

हम दोनों ही सोफे पर बैठकर मूवी देख रहे थे, हमने कमरे में परदे और दरवाज़े बंद करके अँधेरा कर लिया था, AC ऑन कर रखा था तो एक चादर भी ओढ़ ली थी।

उस चादर की आड़ में उसने मेरी चड्डी में हाथ डाला हुआ था और मैंने उसकी चड्डी में।

बीच बीच में मधु हमे कभी चिप्स कभी कोल्ड ड्रिंक्स देने भी आई पर उसे कुछ पता नहीं चला।

अब जब भी वो बीच में आती तो मुझे अच्छा लगता… डर और सामने चोरी करने का एक्साइटमेंट ही कुछ और है।

अब मैं मधु को जान कर के बार बार बीच बीच में किसी न किसी काम से बुलाता, आवाज़ लगाता।

इस बार जब मैंने रिमोट के लिए मधु को बुलाया और वो जब रिमोट के लिए हमारी तरफ पीठ करके झुकी तो उसके चूतड़ों की गोलाई बिल्कुल आँखों के सामने थी।

मैं बिना नीलेश की तरफ देखे हुए ही समझ गया कि उसे गोलाई बहुत अच्छी लगी है क्योंकि शायद आँखों से और शक्ल से वो छुपा भी लेता पर अभी तो उसका हथियार मेरे हाथ में ही था जो झूठ बोल ही नहीं पाता।

जब रिमोट देने के लिए हमारी साइड झुकी तो उसके बूब्स भी आँखों की चमक बढ़ा गए नीलेश की।

जब वो वह से चली गई तो मैंने नीलेश से पूछा- यार, एक सुट्टा ब्रेक तो बनता है।

नीलेश बोला- हाँ यार!

अंदर से मधु बोली- इतनी बकवास मूवी देखते ही क्यूँ हो जो खुद से ही नहीं झिलती!

और हंस पड़ी।

बालकनी में सिगरेट जलाते ही मैंने पूछा- क्यूँ बे, तेरी मधु पे नियत ख़राब लगती है मुझे। साले उसे देखते ही तेरा लण्ड बेहद अकड़ जाता है।

नीलेश के चेहरे पर थोड़ा डर था, वो बोला- नहीं भाई, ऐसी तो कोई बात नहीं है।

मैं थोड़ा मुस्कुराया जिससे वो डरे नहीं और जो मन में है, वो बोले।

नीलेश बोला- देख भाभी है तो खूबसूरत… इसमें तो कोई दो राय नहीं है, और कल जब उनका पानी टेस्ट किया तो देखने का नजरिया तो बदलता ही है। सॉरी भाई, प्लीज बुरा मत मान यार!

मैंने अपनी मुस्कराहट और बड़ी कर दी, मैंने बोला- तू चूतिया है क्या? मैं बुरा नहीं मान रहा हूँ।

पर मुझे अच्छा सा नहीं लगा पर जितना बुरा लगना चाहिए, उतना बुरा भी नहीं लगा। कुछ अजीब तो है पर सच यही है।

अब हम सिगरेट खत्म करके अंदर आ गये, नीलेश मूवी प्ले करके सोफे पर बैठ गया और मैं अंदर अपनी बीवी के पास आ गया।

मैं आकर बोला- मधु, क्या तुम अपनी ब्रा उतार कर रह सकती हो? मुझे अच्छा लगेगा।

मधु लगभग गुस्से में बोली- आपके सामने तो ठीक है, पर भैया भी तो हैं, उनके सामने ऐसे कैसे काम करुँगी?

मैंने कहा- अरे, उसे क्या पता चलेगा।

तो मधु बोली- नहीं, मैं नहीं करने वाली ऐसा कुछ! आप जाओ टीवी देखो, मुझे खाना बनाने में लेट हो रहा है।

मैं मुंह बनाकर आकर सोफे पे बैठ गया, दुबारा से हमने चादर ओढ़ ली और एक दूसरे की चड्डियों में हाथ डाल लिए।

मधु अंदर से बोली- आप कालीन पर प्लास्टिक बिछा लो, मैं खाना ला रही हूँ।

हम दोनों हाथ धोकर कालीन पर प्लास्टिक बिछा के बैठ गए। खाना खाने का मजा तो जमीन पे ही आता है। डाइनिंग टेबल तो हम सामान रखने के लिए लाये हैं।

जैसे ही मधु खाना लेकर रखने लगी तो मैंने ध्यान दिया कि उसने ब्रा उतार दी है और बार बार झुक कर खाना रखने और परोसने के कारण उसके बूब्स बहुत अच्छे से हिल रहे हैं।

मैंने मधु को आँख मार के थैंक्स बोल दिया। खाना परसने में जब भी वो झुकती, पूरा अंदर तक का अच्छा सा नज़ारा दिख जाता।

नीलेश और में दोनों ही सुबह से लण्ड सहला ही रहे थे इसलिए वो खड़े तो थे ही और ऐसे नजारा देख कर वो और झटके खाने लगते थे।

खाना खाकर हम दोनों साथ में वाशरूम में हाथ धोने चले गए।

उसने हाथ धोए और मूतने के लिए कमोड की तरफ मुड़ा, मैं भी हाथ धोकर उसके पीछे जाकर खड़ा हो गया, मैं साइड से उसका लण्ड पकड़ के बोला- मूत!

नीलेश मुस्कुराने लगा और आँख बंद करके मूतने की कोशिश करने लगा। मैं धीरे धीरे उसका लौड़ा जो की आधे से ज्यादा खड़ा था हिलाया जिससे उसमें से मूत गिरने लगे।

धीरे से 4 बूँद मूत निकला, फिर रुक कर फिर तेज़ धार निकलना शुरू हो गई।

मैंने उसका लण्ड ऐसे पकड़ा हुआ था कि उसका मूत मेरे हाथ पर भी गिरे।

वो कराह रहा था।

उसके मूतने के बाद मैंने उसके लण्ड को झड़ाया जिससे बचा कुचा पानी भी गिर जाए। फिर नीचे झुक कर उसके लण्ड पे किस किया और टोपे से थोड़ी खाल ऊपर करके उसके लण्ड को थोड़ा सा चूस भी लिया।

इतने में कमरे में कोई आवाज़ हुई, मैं फटाफट से बेसिन पर हाथ धोने में लग गया और नीलेश अपना मूतने के बाद का जो हिलाना होता है, वो करने लगा क्योंकि हम वाशरूम का दरवाज़ा बंद करना भूल गए थे।

मधु ने देखा तो बाहर चली गई।

हम दोनों भी सरपट बाहर आ गये।

मुझे शक था कि मधु ने कुछ देख न लिया हो।

नीलेश वापस सोफे पर बैठ गया, मैं बीवी के पास गया और बोला- खाना लाजवाब था।

उसने मुझे इशारे से बैडरूम में आने को बोला, मैं उसके पीछे पीछे चला गया।

मधु ने पूछा- आप दोनों वाशरूम में एक साथ?

मैं उसकी बात खत्म होने से पहले ही बोला- यार, तुम भी न… लड़कों के वाशरूम देखे है कभी? वहाँ ऐसा ही होता है!

हाथ से इशारा करते हुए कहा- उसका मुंह उस तरफ था मेरा मुंह इस तरफ।

मधु बोली- लेकिन यह घर है। यहाँ ऐसा करने की क्या ज़रूरत है। आप थोड़ी देर रुक नहीं सकते थे क्या? कितना एम्ब्रेस्सिंग लगता है। अभी उनसे नज़र मिलाना भी मुश्किल होगा मेरे लिए! कम से कम दरवाज़ा तो बंद किया होता। वो भी ऐसे बेशरम हैं और आप भी।

मैं क्या कहता, चुपचाप सुनता रहा, दिल में दिलासा था कि कम से कम उसने वो नहीं देखा जो वाकयी मुश्किल में डाल देता।

मेरे दिमाग में सिर्फ एक ही चीज़ चल रही थी कि अगर ये ज्यादा गुस्सा हो गई तो आज नीलेश को इसकी चूत का स्वाद कैसे चखाऊँगा।

मैंने उसको कंधे से पकड़ा और कहा- देखो, इतना गुस्सा मत करो, यह इतनी बड़ी बात नहीं है। हम लोग तुम्हें यहाँ एक्सपेक्ट ही नहीं कर रहे थे। खैर जो हुआ वो छोडो, मुझे तो नींद आ रही है, कल रात भर नहीं सोये, अभी खाना खाकर नींद आ रही है। तुम भी थोड़ी देर लेट लो जिससे फ्रेश हो जाओगी और इतना गुस्सा नहीं आएगा।

वो थोड़ा मुस्कुराई, मैंने सोचा यही मौका है, मैंने कहा- तुमने मेरी बात मान के मुझे खुश कर दिया। खाना खाने में और भी बहुत मज़ा आया, खाने का ज़ायका और बढ़ गया था तुम्हारे मस्त मस्त बूब्स देखकर।

और मैंने बोलते बोलते टी-शर्ट के ऊपर से ही उसके बूब्स दबा दिए।

मैंने मधु को बोला- मैं अभी उसको भी सोने के लिए बोल के आता हूँ जिससे बीच में डिस्टर्ब करने नहीं आएगा।

में नीलेश के पास आया और उससे बोला- यार, अच्छे खाने के बाद एक एक सिगरेट हो जाये।

बालकनी में सिगरेट पीते हुए उससे बोला- तेरी भाभी का मूड सही नहीं है। ज़रा प्यार कर आऊँ, थोड़ी देर में आता हूँ, तुझे बेहतरीन पानी का टेस्ट कराने को।

उसके चेहरे पर चमक आ गई, वो बोला- भाई जल्दी जा।

मेरे लण्ड को शॉर्ट्स के ऊपर से ही टच करके बोला- ज्यादा से ज्यादा पानी निकालना।

मैं कमरे में आया दरवाज़ा बंद किया, नाईट लैंप ऑन किया और आकर बिस्तर पे मधु के बगल में लेट गया।

उसने मुझे बिना कुछ बोले ही अपने और करीब आने के लिए अपनी बाँहों में भर लिया। मुझे समझ आ गया था कि कल रात से भूखी है इसलिए चूत कुलबुला रही होगी।

हमने एक दूसरे के कपड़े उतारने में एक दूसरे की मदद की, उसने मेरे लण्ड को चूस के थोड़ा गीला कर दिया। मैंने भी उसकी चूत को चाट कर गीला कर दिया।

उसकी चूत पहले ही इतना पानी छोड़ रही थी कि चाटने की ज़रूरत नहीं थी।

जब उसकी पैंटी उतारी थी तब ही वो काफी गीली थी।

वो अपनी टाँगें चौड़ी करके लेट गई और मुझे अपने ऊपर आने का न्योता दे रही थी। कामाग्नि में जलती हुई मेरी बीवी मधु बहुत ही खूबसूरत लगती है।

मैंने 3-4 धक्कों में ही पूरा लण्ड अंदर डाल दिया और फिर हम पागलों की तरह एक दूसरे को प्यार और चूमाचाटी करने लगे।

चूत में अंदर बाहर होता हुआ लण्ड बिल्कुल चिकना हो चुका था, मधु की साँसें बहुत तेज़ और सिसकारियाँ बहुत तीखी हो गई थी, मैंने उसके मुंह पर हाथ रखा जिससे उसकी आवाज़ें बाहर तक न जायें। पर उसे पता नहीं क्या हो गया था, उसने मेरा हाथ अपने मुंह से हटा दिया।

मैंने भी सोचा की मधु को पूरा एन्जॉय करने देना चाहिए।

वो मेरे कूल्हों को पकड़ कर और ज़ोर से हिलाने लगी, शायद वो आने ही वाली थी, उसकी आवाज़ें अब और भी तेज़ हो गई थी।

तभी दरवाज़े पर दस्तक हुई।

हम दोनों थोड़े ठिठक गए।
 
चूत में अंदर बाहर होता हुआ लण्ड बिल्कुल चिकना हो चुका था, मधु की साँसें बहुत तेज़ और सिसकारियाँ बहुत तीखी हो गई थी, मैंने उसके मुंह पर हाथ रखा जिससे उसकी आवाज़ें बाहर तक न जायें। पर उसे पता नहीं क्या हो गया था, उसने मेरा हाथ अपने मुंह से हटा दिया।

मैंने भी सोचा की मधु को पूरा एन्जॉय करने देना चाहिए।

वो मेरे कूल्हों को पकड़ कर और ज़ोर से हिलाने लगी, शायद वो आने ही वाली थी, उसकी आवाज़ें अब और भी तेज़ हो गई थी।

तभी दरवाज़े पर दस्तक हुई।

हम दोनों थोड़े ठिठक गए।

मैंने थोड़ा कड़क आवाज़ में पूछा- कौन है?

तो नीलेश की आवाज़ आई, बोला- राहुल, सब ठीक तो है न, तुम दोनों लड़ तो नहीं रहे? तू भाभी को मार रहा है क्या?

मैंने कहा- गधे, भाभी को नहीं, तेरी भाभी की मार रहा हूँ।

नीलेश मेरी पूरी बात होने से पहले ही बोला- भाभी, आप ठीक तो है न?

मधु हांफती हुई बोली- हा भ भाई भैया.. म मैं ठ ठी ठीक हूँ।

शायद नीलेश को लगा होगा कि उसने बहुत गलत टाइम पे डिस्टर्ब किया है, वो बोला- यार सॉरी यार ! आप लोग एन्जॉय करो, मैं टीवी वाले कमरे में जाता हूँ, वहाँ आवाज़ नहीं आ रही है, मैं टीवी की आवाज़ भी बढ़ा दूंगा। सॉरी यार राहुल, वेरी सॉरी!

और उसके तेज़ क़दमों से जाने की आवाज़ आई।

हम दोनों को तो जैसे पागलपन सवार था, हम बिना रुके अच्छे बढ़िया धक्के पे धक्के लगा रहे थे।

मधु ने अपनी आवाज़ और तेज़ कर दी ‘आ आह ओ ऊ उह आ आह ओ ऊ उह…’

मैंने फिर से उसके मुंह पर हाथ रखा तो उसने हटा के बोला- ज जब उनने स सुन ही लिया ह है, उन्हें प पता ही है तो जाने दो आवाज़… थिस इज ड्राइविंग मी क्रेजी।

बीच बीच में थोड़ा बोलने में लड़खड़ाने लगी थी। वो यह कहना चाहती थी ‘जब उसने सुन ही लिया है। उन्हें पता ही है तो जाने दो आवाज़। थिस इस ड्राइविंग में क्रेजी!’

मैंने अपनी स्पीड और बढ़ा दी। वो भी बिस्तर पर अपने पांव पटक पटक कर उछल उछल के मेरा साथ देने लगी।

इसके बाद न मुझे कुछ सुनाई दिया न दिखाई। मैं पूरी तरह कामरस में भरा हुआ अपनी बीवी को भरपूर प्यार और मोहब्बत से चुदाई करता रह गया।

हम इतनी मस्ती में मग्न थे कि जब दोनों का पानी छूटा तो मानो ऐसा लगा कि जान ही निकल जाएगी।

मैंने अपना पूरी मलाई उसकी चूत में ही डाल दी और अपना लण्ड उसकी चूत में डाल के ही थोड़ी देर उसके ऊपर पड़ा रहा।

अभी भी हमारी खुमारी खत्म नहीं हुई थी, अब वो मेरे सर पे हाथ फेर रही थी और एक हाथ पीठ पर था, मेरा एक हाथ उसके नीचे से होकर कंधे को पकड़ा हुआ था और दूसरे से उसके बूब्स को।

अभी भी हम दोनों की साँसे बहुत तेज़ थी।

5-7 मिनट बाद जब मधु को होश आया तो वो बोली- अरे!! यह हमने क्या किया। भइया क्या सोच रहे होंगे। अब मैं उनसे कैसे नज़र मिलाऊँगी?

मैंने कहा- तुम चिंता मत करो, वो एक तो हमउम्र है, दूसरा शादीशुदा है, वो समझ जायेगा! मैं अभी देखकर आता हूँ उस चूतिये को। बोलते हुए मैंने टॉवल पहना और दरवाज़ा खोल दिया।

मधु अभी बिस्तर पे नंगी ही पड़ी थी।

मैंने दरवाज़ा खोलते हुए बोला- क्यू बे गांडू?

सामने देखा तो दरवाज़े से सटा जमीन में कान लगाए हुए नीलेश जमीन पे पड़ा हुआ था… मैंने फिर भी जोर से ही अपना सेंटेंस खत्म किया- क्या हो गया था तुझे जो बीच में आया था?

उधर बिस्तर पे मेरी बीवी नंगी पड़ी थी, इधर जमीन पे नीलेश पड़ा हुआ था जो अपने एक हाथ में अपना लौड़ा पकड़ के हिला रहा था। मैंने मधु को बिल्कुल शो नहीं होने दिया कि नीलेश जमीन पर पड़ा हुआ है।

मैं मधु की तरफ देख कर धीरे से बोला- मैं ज़रा उसकी खबर लेता हूँ, तुम तब तक फ्रेश हो लो। दरवाज़ा बाहर से बंद करके ही रहा हूँ।

मैं फिर जोर से बोला- कहाँ मर गया कुत्ते?

और दरवाज़ा बंद कर दिया।

नीलेश खड़ा हुआ और बाहर की तरफ जाकर बोला- मैं बालकनी में सिगरेट पी रहा था, हो गया तेरा काम?

बोल कर हंस पड़ा।

मैं आया, आकर सोफे के किनारे पे बैठ गया।

उसने मेरा टॉवल अलग किया और मेरे मलाई और मधु के चूत के पानी में सने हुए मेरे आधे सोये लण्ड को चाटने लगा।

मैंने तेज़ आवाज़ में ही बोला- भाई, तू खुद शादीशुदा आदमी है। तुझे लड़ाई और प्यार की आवाज़ का अंतर समझ नहीं आया?

जिससे मेरी बीवी सुन सके कि मैं नीलेश की खबर ले रहा हूँ।

इधर नीलेश आधे सोये लण्ड को चाट चाट के पूरा साफ़ करने में भिड़ा हुआ था।

मैं धीरे से बोला- यार, इसमें मेरी मलाई भी मिक्स है।

उसने भी धीरे से बोला- इसी कारण और अच्छा लग रहा है टेस्ट। उसने फिर से मेरे लौड़े को इतना चूसा कि मैंने एक बार फिर से नीलेश के मुंह में फव्वारा चला दिया।

मैंने उसको बोला- भाई, आज भी मैंने अपना वादा निभा ही लिया। चल मैं ज़रा मधु के साथ नहा लूँ, और कुत्ते अब मत आना बीच में!

मैंने दरवाज़ा खोला बाथरूम में चला गया, वो बाथरूम में ही थी, हमने एक दूसरे को बाँहों में भरा और शावर लिया, एक दूसरे के अंगों को अच्छे से साफ किया, चूमा।फिर हम दोनों ने तौलिये से एक दूसरे को पोंछा, बाथरूम से बाहर निकल कर हमने कपड़े पहने।

मधु जब कपड़े पहन रही थी तो मैंने उसको बोला- सुन… तू अंडर गारमेंट्स मत पहन!

बोली- क्यूँ? जब भैया नहीं होते तो मैं आपकी सब बात मानती हूँ, पर अभी वो हैं तो प्लीज यार ऐसा कुछ मत बोलो न!

मैंने कहा- वो कौन सा तुम्हें इतने बारीकी से देखेगा। देख तो मैं रहा हूँ। सिर्फ मैक्सी पहन लो, इसमें से वैसे भी कुछ नहीं दिखता इतनी मोटी है।

तो वो मान गई।

मैं अब बाहर वाले कमरे में, जहाँ नीलेश बैठा मूवी देख रहा था, आ गया।

मधु भी मेरे पीछे पीछे वहीं आ गई।

नीलेश कालीन पर बैठा हुआ था। मैं और मधु दोनों सोफे पर बैठ गए और मूवी देखने लगे।

अब हम लोगों के बीच से धीरे धीरे शर्म के धागे टूटते जा रहे थे, अब मधु मुझसे चिपक कर बैठी थी जबकि नीलेश वहीं बैठा था।

मैंने भी उसे बाँहों में जकड़ के रखा था और जब तब उसके बूब्स और पीठ सहला रहा था।

नीलेश अंजान बना बैठा था पर कभी कभी कनखियों से देख ही रहा था।

मूवी के बीच में ब्रेक आया तो हमारी तरफ मुंह करके बोला- भाभी, I am sorry… मैं थोड़ा सा बेवकूफ हूँ। डिस्टर्बेंस के लिए माफ़ी चाहता हूँ। मुझे अंदर से बहुत बुरा लग रहा है। मेरा मन कर रहा है मैं आज ही यहाँ से चला जाऊँ क्योंकि इतनी बेवकूफाना हरकत के बाद आप लोगों से नज़र मिलाना मुश्किल हो रहा है।

इससे पहले की नीलेश और कुछ बोल पाता मधु बोली- नीलेश भैया, आपकी इन्नोसेंस ही आपकी सबसे बड़ी स्पेशलिटी है। हम सभी लगभग एक ही उम्र के हैं। और उसमें गलती हमारी भी है, पर क्या करें, यहाँ अकेले रहते हैं तो ऐसी हरकतें करते रहते हैं पर आपके होते हुए हमें ऐसा नहीं करना चाहिए था। आप हमारे कारण अन-कम्फ़र्टेबल होकर यहाँ से जायेंगे तो हम लोगों को बहुत बुरा लगेगा। प्लीज आप जाने के बारे में मत सोचिये।

कमरे में कुछ देर सन्नाटा रहा, फिर मैं बोला- चल छोड़ न, भूल जा… हम भी भूल गए।

फिर मधु बोली- भैया, आज मैं बढ़िया पनीर टिक्का और अच्छी सी सब्जी बनाती हूँ।

फिर मेरी तरफ देखकर बोली- आप कोई अच्छी सी व्हिस्की ले आइये!

हम दोनों को चेहरे पर ख़ुशी की लहर दौड़ गई।

कमरे में कुछ देर सन्नाटा रहा, फिर मैं बोला- चल छोड़ न, भूल जा… हम भी भूल गए।

फिर मधु बोली- भैया, आज मैं बढ़िया पनीर टिक्का और अच्छी सी सब्जी बनाती हूँ।

फिर मेरी तरफ देखकर बोली- आप कोई अच्छी सी व्हिस्की ले आइये!

हम दोनों को चेहरे पर ख़ुशी की लहर दौड़ गई।

शाम के 6 बजे रहे थे, मैं और नीलेश बाजार जाकर सामान लेकर आ गये थे, तब तक मधु ने पूरा घर साफ़ करके खाने की तैयारी भी लगाना शुरू कर दिया था।

हम दोनों आते ही कालीन पर प्लास्टिक बिछाया और बोतल, गिलास, बर्फ, चिप्स के पैकेट, नमकीन रख दिया।

मधु ने मुझे अंदर बुलाया और बोली- क्यूँ? मैंने सही किया न? नीलेश भैया को बुरा लग रहा था तो मैंने सोचा शायद इससे उन्हें अच्छा लगे।

मैंने उसके माथे को चूम कर बोला- तुमने बहुत अच्छा किया, मैं खुद भी नहीं सोच पाता शायद ऐसे तो… थैंक यू!

मैं उसकी बात से इतना भावुक हो गया कि मैंने उसके होंठों पे होंठ रख दिए। हम धीरे धीरे एक दूसरे के होंठों अपने होंठों में दबाकर चूस रहे थे, इसी बीच नीलेश भी किचन में आ गया।

अबकी बार खांकरा नहीं और बोला- यार, तुम लोगों का प्यार भी न जीनियस बुक में लिखवाना चाहिए। तुम दोनों एक दूसरे को सच में इतना प्यार करते हो कि मुझे तुम दोनों से जलन होने लगी है।

अभी तक हमारे होंठ चिपके हुए थे।

वो बोला- तुम लोग कंटिन्यू करो, मैं बाद में आता हूँ।

हमने अपने होंठों को आराम दिया और कहा- तुझे क्या चाहिए?

नीलेश बोला- पानी!

मैंने कहा- ले ले!

और फिर से अपनी बीवी को चूमने लगा।

इस बार बीवी भी पूरे भाव के साथ किस कर रही थी, उसे किसी की कोई शर्म नहीं थी।

खैर नीलेश पानी लेकर ड्राइंग रूम में चला गया, मैं भी 2 मिनट बाद बाहर आ गया, थोड़ा अँधेरा होने लगा था, मैंने कहा- पैग बना कर सिगरेट पीते हैं, तब तक पेग ठंडा होगा।

पैग बनाया, चियर्स किया, एक एक सिप मारी और सिगरेट पीने बाहर चले गए।

बाहर आकर नीलेश बोला- भाई, तेरी बीवी तो यार मस्त है, अब उन्हें कोई हिचक नहीं है मेरे सामने। मुझे यह देख कर अच्छा लगा। नीलेश थोड़ा रुक कर बोला- एक बात बोलूँ?

मैंने हाँ में सर हिला दिया तो उसने कहा- तूने 2 दिन मुझे अपनी बीवी का अमृत पिलाया है। मैंने सोचा था कि तू शादी के बाद बदल गया होगा, सीरियस हो गया होगा। काफी समय से बातें भी नहीं हुई थी इसलिए मैं यह सोच रहा था कि यहाँ टाइम पास कैसे होगा।

मैंने बीच में ही उसकी बात काटते हुए हंस कर कहा- एक सिप में ही चढ़ गई क्या? सीधे सीधे बोल क्या कहना चाहता है? इतनी भूमिका मत बना।

वो बस थोड़ा मुस्कुराया और चुप रह गया।

मैंने फिर से बोला- क्या हुआ? बोलता क्यूँ नहीं?

बोला- चढ़ी नहीं है कमीने, बस ऐसे ही बोल रहा था कि इतना इतना टाइम हो जाता है, बीच में एक आध चक्कर तू भी लगा लिया कर भोपाल का या बातें ही कर लिया कर!

मैंने बातों को घुमाते हुए कहा- क्यूँ बे? तू अपनी बीवी नीता को क्यूँ नहीं लाया?

तो उसने कहा- यार, वो मायके गई हुई थी, वो परसों आने वाली है, बस वो तुझे और भाभी को सरप्राइज देना चाहती थी। पर तेरे को बता दिया है। उसको पता नहीं चलना चाहिए कि तुझे पहले से पता था।

मैंने कहा- डील भाई डील… बिल्कुल पता नहीं चलेगा। चल नीता के लिए भी कुछ सरप्राइज प्लान करते हैं।

वो आश्चर्य से मेरी तरफ देखने लगा।

हम बातें करते करते छत पर पहुंच गए और एक एक सिगरेट और जला ली।

मैंने पूछा- नीता बिस्तर पे कैसी है?

नीलेश मुझे घूर रहा था।

मैंने कहा- चूतिये, बता तो क्या वो वाइल्ड है? क्या वो चिल्लाती है? उसे कैसा सेक्स करने की तमन्ना होती है?

नीलेश बोला- तू कैसी बातें कर रहा है बे?

मैंने उसे थोड़ा ठंडा करते हुए कहा- भोसड़ी के, हम एक दूसरे का लण्ड चूस चूस के बड़े हुए हैं, हमारे बीच कैसी शर्म? लड़कियाँ जो एक दूसरे को ज्यादा नहीं जानती वो तक अपनी न जाने कितनी प्राइवेट बातें एक दूसरे से शेयर कर लेती है। नहीं बताना तो माँ चुदा अपनी! भोसड़ी का!

उसने जब मुझे गर्म होते देखा तो बोला- लण्ड के… गुस्सा रहेगा या मैं नीता के बारे में कुछ बताऊँ!

मैंने उत्सुकता से कहा- बता!

नीलेश बोला- यार हम लोग तो मम्मी पापा और छोटी बहन के साथ रहते हैं इसलिए बहुत चुप और छुप छुप कर सेक्स करते हैं। पर हाँ जब कभी हम कहीं घूमने जाते हैं और होटल में चुदाई होती है तब हम दोनों ही इतने वाइल्ड होते हैं कि हम 2-2 दिन तक कमरे से बाहर ही नहीं निकलते। उसे बाथटब में चुदवाना इतना पसंद है कि अगर होटल में बाथटब न मिले तो मुझे कभी कभी लास्ट मोमेंट पे दूसरा होटल लेना पड़ता है। कुल मिला के हम लगभग रोज़ रात को ही सेक्स करते है। पर यार, तेरी बीवी मतलब मधु की तुलना में तो वो 50% भी हॉट या वाइल्ड नहीं कह सकता इसलिए थोड़ा झिझक रहा था।

मैंने एक गहरी सांस लेते हुए कहा- क्या तू अपनी बीवी को ग्रुप सेक्स के लिए मना सकता है? चारों साथ में मजे मारें

उसकी आँखें एकदम चमक उठी, वो बोला- भाई मजा ही आ जायेगा। पर क्या मधु मानेगी?

मेरी तरफ आशा की नज़र से देखने लगा।

मैंने कहा- पता नहीं, पर कोशिश करके देखता हूँ।

अब हम वापस से नीचे आ गये और बेहद चुप होकर टीवी देखते हुए शराब पीने लगे। अब वो मधु को बहुत ध्यान से उसके एक एक उतार चढ़ाव को देख रहा था।

मधु का पूरा ध्यान टीवी में था मेरा ध्यान टीवी में कम और मधु को पटाने में लगा हुआ था।

और नीलेश ख्याली पुलाव बनाते हुए मन ही मन ग्रुप सेक्स के बारे में सोच रहा था।

नीलेश थोड़ी देर बाद उठकर बाथरूम चला गया, मैं उठकर कालीन से सोफे पर बैठ गया।

सोफे पर मधु बैठी हुई थी, मैं नीलेश के न होने का फायदा उठते हुए उसके बूब्स दबाने लगा, वो अपना पूरा सीना मेरी तरफ आगे बढ़ा कर दबवाने के लिए उकसा रही थी।

वो धीरे से बोली- थोड़ा धीरे धीरे दबाओ, इतना जोर से नहीं।

उसकी इस हरकत से में और उत्तेजित होने लगा, मैंने अपना हाथ उसके टॉप के अंदर डाल दिया और अब उसके नंगे बदन पर मेरे हाथ रेंग रहे थे, उसके मस्त उभारों को में सहला रहा था।

वो मेरी तरफ न देखकर टीवी की तरफ ही देख रही थी जो पता नहीं क्यूँ पर बड़ा अच्छा लग रहा था।

मैंने देख लिया कि उधर अंदर की तरफ से नीलेश चला आ रहा है, मैंने उसको आँखों से ही इशारा किया और अपनी बीवी का टॉप इतना उठा दिया कि नीलेश थोड़ा दूर से देख सके।

फिर मैं उन्हें चूसने लगा और दूसरे तरफ का निप्पल को रगड़ने लगा, नीलेश थोड़ा झांक कर मधु के नंगे बदन को देखने की कोशिश करने लगा।

इतने में मैंने मधु के कपड़े सही किये, थोड़ा दूर हटा कहा- वो कभी भी बाथरूम से आ सकता है।

नीलेश थोड़ा पीछे हट कर दरवाज़े की आवाज़ करता हुआ आने लगा।

मधु धीरे से मुझसे बोली- आपकी टाइमिंग बहुत अच्छी है।

मैं बोला- अंदर आ जा !

और मैं बैडरूम में चला गया।
 
मैंने मधु के कपड़े सही किये, थोड़ा दूर हटा कहा- वो कभी भी बाथरूम से आ सकता है।

नीलेश थोड़ा पीछे हट कर दरवाज़े की आवाज़ करता हुआ आने लगा।

मधु धीरे से मुझसे बोली- आपकी टाइमिंग बहुत अच्छी है।

मैं बोला- अंदर आ जा !

और मैं बैडरूम में चला गया।

वो एक मिनट के बाद आई, बोली- क्या हुआ?

और मेरे सीने पर सर रखकर मेरी छाती के बालों से खेलने लगी।

मैंने कहा- तूने तो अंदर कुछ पहना नहीं है, तुझे देख देख कर लण्ड चड्डी में खड़ा हो कर दर्द करने लगता है। तुझे अंदर इसलिए बुलाया है कि मेरा टॉवल कहाँ है, मैं एक मिनट में नहा कर आता हूँ।

तो मधु इठलाते हुए बोली- नहाने की क्या ज़रूरत है?

मेरा लण्ड पकड़ते हुए बोली- इसे मेरे अंदर डाल कर गीला कर लो।

और हंसने लगी।

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मैंने कहा- तुझे इतनी आसानी से नहीं, धीरे धीरे तड़पा तड़पा कर पूरी रात चोदूँगा साली, तभी तो तुझे अंदर के कपड़े नहीं पहनने दिए। उसने मेरे लण्ड को जोर से दबा दिया और बोली- आज देखते हैं, कौन पहले पिघलता है। आप मुझे उकसाओ, मैं आपको उकसाती हूँ। बस भैया का भी ध्यान रखना आप।

मैंने कहा- ओके, आज की रात मजेदार रात होगी।

उसने मुझे ढूंढ कर टॉवल दे दिया, मैं नहाकर सिर्फ टॉवल पहन कर बाहर आ गया।

जब मैं ड्राइंग रूम में आया तो मेरा पैग खत्म हो चुका था, मैंने मधु की तरफ देखा तो मुझे अंदाज़ा लग गया कि मेरा बचा हुआ आधा पैग निबटा दिया है।

मैंने आकर नीलेश को बोला- भाई, अपना पैग खत्म कर और नए पेग बना !

उसने मेरी तरफ देखा तो बोला- यार, मुझे भी गर्मी लग रही है। या तो AC ऑन कर लेते हैं या मैं भी थोड़ा शावर लेकर आता हूँ।

मैंने कहा AC ऑन कर लेते हैं पर अगर शावर ले लेगा तो पीने में और मजा आएगा।

तो उसने अपने बैग से अपना टॉवल निकला और चल दिया बाथरूम की तरफ।

जब वो कमरे से निकल गया तो मैंने मधु से कहा- क्यूँ री, तू मेरा पेग पी गई है ना?

तो बोली- हाँ, मन कर रहा था, साइड में ही रखा था तो निबटा दिया… पर आप चिंता मत करो, नीलेश भाई ने कुछ नहीं देखा।

मैंने फ्रिज से बर्फ निकाली और दोनों के पैग बना के रख दिए। फिर मधु से पूछा- तुझे और पीना है तो बता, तेरा एक पैग बना कर छुपा कर रख देता हूँ किचन में, तू बीच बीच में जाकर पी आना। या फिर हमारे साथ भी कर सकती हो। नीलेश इतनी दतियनूसी सोच भी नहीं रखता।

मधु बोली- आप मेरा पैग बना कर किचन में रख दो, मैं जब ठीक समझूंगी तो आप लोगों के साथ चियर्स कर लूंगी।

मैंने एक गिलास में फटाफट पैग बनाया, बर्फ सोडा और ज़रा सी कोला भी डाल दी और जाकर रसोई में रख दिया।

इतनी देर में ही नीलेश बाहर आ गया, वो भी टॉवल में ही था, उसने कहा- यार, मेरा बैग उठा के दे देना, मैं बैडरूम में चेंज कर लेता हूँ।

तो मैंने कहा- क्या चेंज करेगा, आ जा ऐसे ही बैठ के पीते हैं।नीलेश बोला- यार भाई, उधर मधु भाभी भी बैठी है, अच्छा नहीं लगेगा।

मैंने कहा- देख ले, वैसे घर ही है, be comfortable.

तो शायद उसे मेरी बात जंच गई वो ऐसे ही आकर कालीन पर बैठ गया।

अब हम तीनों ही मस्ती में थे।

मधु उठकर किचन में गई, में समझ गया अपना पैग मारने गई है, मैं पीछे पीछे गया तो इशारे से अपनी तरफ बुलाया, एक घूंट अपने मुंह में भरा और मुझे मेरी गर्दन से पकड़ के नीचे की ओर झुकाया और मेरे मुंह को खोल के उसके अंदर अपनी शराब मेरे मुंह में डालने लगी।

मैंने पीते पीते उसके मुंह को चुम लिया और मैंने उसके बूब्स दबाए और चूतड़ शॉर्ट्स के ऊपर से ही हाथ फिराया।

फिर हम वापस बाहर आ गये।

मैंने अपने फ़ोन से बगल में बैठी बीवी को व्हाट्सप्प पे मैसेज किया कि देख अब जो तूने किचन में किया वो मैं तेरे साथ यहीं पर करूँगा।

बीवी का मैसेज आया- मुझे पता है कि आप करोगे पर देखना यह है कि कैसे करोगे? ऐसी अदा से करना कि मैं आपका मुंह चूम लूँ।

मुझे पता लग गया था कि आज बीवी बहुत ही अच्छे चुदाई के मूड में है।मैंने कहा- नीलेश, मेरी बीवी को शराब अच्छी नहीं लगती… पर एक तरीका है मेरे पास उसे शराब पिलाने का जिसे शायद ही वो मना कर पाये।

नीलेश बोला- अरे अगर भाभी पीती है तो पिलाओ भाई, हम भी कुछ गुर सीख लेंगे तुमसे।

मैंने अपने मुंह में शराब भरी और बीवी के ऊपर चढ़ गया और उसका मुंह खोलने के लिए उसके जबड़े दबाए।

मैंने अपने मुंह से छोटी सी धार उसके मुंह में डालना शुरू कर दी।

पीते पीते जब एक सेकंड के लिए होंठ बंद हुए तो शराब उसके मुंह में न गिर के उसके चिन से होती हुई गले पर बहती हुई उसके बूब्स की तरफ बढ़ने लगी।

मैं अभी भी उसके मुंह में शराब गिरा रहा था, मधु ने मुझे गर्दन से पकड़ के अपनी ओर खींचा और चूम लिया और अपनी जीभ को मेरे मुंह के अंदर डाल के कोने कोने से शराब की हर बूँद खींच ली।

मैंने उसके मुंह से हटते ही उसकी ठोड़ी और गले पर चुम्बन करते हुए उसके भरे हुए बूब्स की ओर बढ़ने लगा जहाँ जहाँ शराब से गीली थी, वहाँ वहाँ तक मेरी जीभ नीचे जा रही थी।

जैसे ही मैंने बूब्स को चूसा और नीचे जाने लगा, मधु ने हाथ से रोक दिया और शरमाते हुए बोली- हटो अब! आपने पिलाई तो मैंने पी ली न।

हम जैसे ही अलग हुए नीलेश ने ताली बजा दी, बोला- यार mindblowing है तुम दोनों की जोड़ी। तुम दोनों कहीं और किसी भी चीज़ में रोमांस ढूंढ ही लेते हो।

शाम धीरे धीरे जवान हो रही थी, हमारे जिस्मों की खुमरियाँ बढ़ती जा रही थी। नीलेश को देखकर पता चल रहा था कि वो लाइव रोमांटिक सीन देखकर उत्साहित हो गया है, उसके टॉवल के ऊपर से उसके लण्ड का प्रतिबिम्ब साफ़ दिखाई पड़ रहा था।

मेरे मन में मधु को नीलेश के सामने ही चोदने का मन करने लगा। फिर मैंने सोचा की इस तरह से मधु अभी नीलेश के सामने खुल जाएगी तो जब उसकी बीवी नीता आएगी तो उसे हमारे इस चंगुल में फ़साना शायद आसान हो जाए।

मेरी बहुत पुरानी मरी हुई इच्छा फिर से सांस लेने लगी, शादी से पहले मेरी इच्छा थी कि मैं ग्रुप सेक्स करूँ पर कभी मौका ही नहीं लगा।

मधु 2 ड्रिंक तो पी ही चुकी थी जिसके कारण वो थोड़ी ज्यादा रोमांटिक हो रही थी और उसे नीलेश से ज्यादा शर्म भी नहीं आ रही थी।

नीलेश बोला- यार आजा एक एक सिगरेट पी कर आते है।

मैंने मधु को देखते हुए कहा- आज के लिए घर में ही सिगरेट पी लें?

मधु की थोड़ी आँखें चढ़ी हुई थी, बोली- मैंने कभी आपको ‘घर के अंदर सिगरेट नहीं पियो’ ऐसा तो नहीं बोला, वो तो आप अपनी मर्ज़ी से बाहर पीते हो। तो अभी भी आप मुझसे मत पूछो, आपका जहाँ दिल करे, वहाँ सिगरेट पी सकते हो।

मैंने नीलेश को बोला- जला।

नीलेश ने बात खत्म होने से पहले ही सिगरेट मुंह में लगा ली थी और आदेश मिलते ही उसमें आग लगा ली।

शराब का असली असर सिगरेट के धुएं के साथ ही शुरू होता है।

अब शराब का सुरूर और मदमस्त बनाने लगा।

मैंने नीलेश को बोला- तू कभी भोपाल में अपनी बीवी को गोद में बैठा के सुट्टे मारते हुए शराब पीता है?

नीलेश बोला- नहीं यार, मेरी ऐसी किस्मत कहाँ… हम ये सारे काम अलग अलग और छुप छुप के करते है और हंसने लगा।

मैंने कहा- यार, छुप छुप के काम करने का मज़ा भी कुछ और ही है। पर हाँ यह बात भी सही है कि हमेशा छुप छुप के मज़ा नहीं आता। कभी छुप छुप के तो कभी खुल्लम खुल्ला पर थोड़ा परिवर्तन आना तो ज़रूरी है। एक ही एक जैसा काम करो तो बोरियत होने लगती है।

मैं और मेरी प्यारी बीवी मधु तो बहुत डायनामिक है इस मामले में, हम अपनी ज़िन्दगी को स्पाइस अप करते रहते हैं किसी न किसी तरह।

मधु सोफे पर आधी लेटी हुई थी, उसने अपना सर हैंड रेस्ट पर टिकाया हुआ था, उसकी एक टांग मेरी पीठ के पीछे थी और एक मेरी जांघों के ऊपर, मैं सोफे पर बैठा हुआ था। उसने एक लॉन्ग स्कर्ट पहना हुआ था और ऊपर शार्ट टॉप, अंदर कोई गारमेंट्स नहीं।

मैंने उसकी जांघों तक हाथ फेरते हुए कहा- क्यूँ, मैं सही कह रहा हूँ न?

उसने एक हाथ से अपनी लॉन्ग स्कर्ट को घुटने के नीचे तक करके रखा हुआ था जिससे नीलेश को कुछ न दिखे, पर मेरे हाथ को नहीं रोका और हाँ में सर हिला दिया।

मैंने सिगरेट का कश मारते हुए मधु से पूछा- पीयेगी?

तो मधु बिना कुछ बोले जिस हाथ से स्कर्ट पकड़ी थी वो हाथ बढ़ाया और सिगरेट मेरे हाथ से ले ली। मैंने उसकी आँखों में इतनी मस्ती कभी नहीं देखी थी।

उसने मुंह में सिगरेट लगाते ही जोर का दम लगाया और मैंने अपने हाथ को थोड़ा और नीचे ले गया जहाँ उसकी चूत टच हो सके। उसके कारण उसकी स्कर्ट थोड़ी सी और ऊपर उठ गई जो अब घुटने से थोड़ी ऊपर हो गई थी।

मधु सुट्टा लगाते ही खांसने लगी।

मैंने उसे थोड़ा सा उठाया उसकी पीठ सहलाते हुए बोला- धीरे धीरे पीनी चाहिए थी, एकदम से पूरी सिगरेट थोड़े ही पीनी होती है।

और उसकी बूब्स को ऊपर से ऐसे दबाया जैसे मरीज को सांस न आने पर दबाया जाता है।

नीलेश ने पानी की बोतल उठा के दे दी, मैंने बोतल मधु के मुंह से लगा दी।

वो थोड़ा पानी पीकर नार्मल हो गई पर इसी सब उठा पटक में उसका टॉप और ऊपर चला गया जहां से उसके उभार की पहली किरण दिखने लगी थी। जैसे कोई ईद के चाँद हो और इधर जांघों तक स्कर्ट ऊपर उठ गई।

थनीलेश मेरी तरफ देखता हुआ आँखों से इशारे से बताने की कोशिश कर रहा था कि स्कर्ट और टॉप थोड़ा नीचे कर दूँ पर वो अभी मेरा प्लान जानता ही कहाँ था, मैंने उसकी बातों को अनदेखा कर दिया।

अब आखिर वो भी जवान लौंडा, और ऊपर से तना हुआ लण्ड! उसने भी मधु के जिस्म को निहारना शुरू कर दिया।

मधु भी मदहोश थी, उसकी आँखें बंद और उसके ऊपर मेरा स्पर्श उसे और भी ज्यादा मादक बना रहा था, उसकी चूत पर प्यार से मेरा सहलाना उसकी ठोड़ी को थिरका रहा है।

इधर टीवी पर किसी का कोई ध्यान नहीं है और नीलेश टॉवल के ऊपर से ही अपने लण्ड को दबा रहा है।

मैं अभी अपने एक हाथ से अपने लण्ड को टॉवल से थोड़ा बाहर निकाल के उसके टोपे को रगड़ रहा हूँ। मधु की चूत अब तक काफी गीली हो चुकी है, वो इस समय अपनी कामाग्नि के चरम पर है।

मैं धीरे से उसके बूब्स को छूने की इच्छा से टॉप के ऊपर से ही अपना हाथ लेकर गया। मधु को जैसे करंट लग गया हो उसने तुरंत मेरा हाथ अपने टॉप और नीचे से हटा दिया।

नीलेश को देखा तो वो बहुत फुर्ती से टीवी की ओर देखने लगा और उसकी पीठ हमारी तरफ थी। यह देख कर मधु ने मेरी तरफ आश्चर्य के भाव से देखा जैसे वो कहना चाहती हो कि क्या तुम मुझे इसी के सामने चोदोगे।

मैंने कोई रिएक्शन नहीं दिया, मधु उठने की कोशिश करने लगी, मैंने उसकी उठने में मदद की और उसे बाँहों में भर कर उठाया।

उसने पहले थोड़े कपड़े सही किये, मतलब नीचे किये, फिर बैडरूम में चली गई।
 
मधु उठने की कोशिश करने लगी, मैंने उसकी उठने में मदद की और उसे बाँहों में भर कर उठाया।

उसने पहले थोड़े कपड़े सही किये, मतलब नीचे किये, फिर बैडरूम में चली गई।

उसके पीछे पीछे बैडरूम में गया तो वो बाथरूम में जा चुकी थी, में वापस ड्राइंग रूम में आ गया।

नीलेश ने पूछा सब ठीक तो है न?

मैंने कहा- हाँ यार, सब ठीक है।

फिर धीरे से कहा- तू बस शो एन्जॉय कर!

मैंने एक सिगरेट निकाली और जला ली।

तभी किचन में कुछ आवाज़ हुई, मैंने जाकर देखा तो मधु अपना बचा हुआ पैग एक घूंट में खत्म कर रही थी।

उसने मेरी तरफ देखा और अपने बूब्स को दबाते हुए नशीली अदा से अपने करीब बुलाया।

मैंने जाकर मधु को बाँहों में जकड़ लिया और उसकी स्कर्ट उठा कर अपने लण्ड को उसकी चूत पर टच करते हुए उसके टॉप को ऊपर उठा कर उसके बूब्स को अपने सीने से दबाने लगा।

मधु की सिसकारियाँ निकलने लगी, वो धीरे से मेरे कान में बोली- देखा न, तुम हारने वाले हो। मेरा कंट्रोल तुमसे अच्छा है।

मैंने उसकी बात को अनसुना करके अपना आधा लण्ड उसकी चूत में आधा ठेल दिया।

अब तो मधु से रहा ही नहीं गया और वो जोर से चिल्ला उठी- उहह आहह…

उसका पानी मेरे लण्ड पे महसूस होने लगा।

मैंने अपना लण्ड बाहर निकला और मधु को अपने आप से दूर कर दिया, फिर धीरे से कहा- इसे कहते हैं कंट्रोल!

और जोर जोर से हंसने लगा।

मधु नाटकीय रूप से गुस्सा होने लगी, बोली- जाओ, मैं आपसे बात नहीं करती। ऐसे भी कोई करता है क्या अपनी बीवी के साथ?

मैंने कहा- अभी तो पूरी रात पड़ी है, अभी तुम्हारे पास और भी बहुत मौके हैं, उकसाओ मुझे इतना कि मैं तुम्हें पागलों की तरह चोदूँ। मधु बोली- आपको उकसाना तो आसान है पर नीलेश भईया के चक्कर में बहुत से अपने जलवे नहीं दिखा पा रही जिसका आप फायदा उठा रहे हो।

मैंने धीरे से बोला- आज तुझे उसी के सामने चोदूँगा मेरी जान!

मधु को इस बात का कतई बुरा नहीं लगा क्योंकि वो यह जानती है कि जब मैं चोदने के लिए उत्साहित होता हूँ तो ऐसे ही गन्दी गन्दी बातें करता हूँ।

तो वो मेरी ताल में ताल मिला कर बोली- जहाँ मर्जी आये, वहाँ पर मेरे बदन के साथ खेलो जहांपनाह!

वो मेरी रग रग से वाकिफ थी, उसे पता था अगर पलट कर ऐसे जवाब देगी तो मैं इतना उत्तेजित हो जाऊँगा कि उसे वहीं चोद डालूँगा।

पर मैंने ऐसा नहीं किया और जाकर सोफे पर बैठ गया।

नीलेश के तो आँख कान सब हमारी बातों में ही लगे थे।

मैंने अपने आप को कंट्रोल करने के लिए अपना ध्यान टीवी में लगाना शुरू किया और नीलेश के हाथ से बिना कुछ बोले उसकी बची हुई सिगरेट ले ली।

2-4 कश लगाने के बाद ही सिगरेट खत्म हो गई थी तो उसे बुझाने के लिए मैं मुड़ा तो किचन के दरवाज़े की तरफ देखकर भौंचक्का ही रह गया।

उधर मधु सिर्फ टॉवल में खड़ी थी।

किचन के दरवाज़े से सटकर जो सोफे से दिख रहा था, शायद नीलेश जहाँ बैठा था वहाँ से नहीं।

मैंने उसको इशारे से बोला- आ जा यहाँ आ जा!

किचन से ही मधु बोलती हुई आई- मैंने सोचा क्यूँ न आप लोगों का साथ दूँ आप लोगों की तरह टॉवल में… और मैं भी पैग पीना चाहती हूँ। क्यूँ भइया, आपको बुरा तो नहीं लगेगा न?

नीलेश ने जैसे ही पीछे मुड़ कर देखा तो उसके पसीने छूट गए बोला- नहीं भाभी, यह आपका घर है, आप जैसे चाहे वैसे रह सकती हैं। और आप लोग मुझसे संकोच करेंगे तो मुझे लगेगा कि मैं आप लोगों के यहाँ गलत आ गया हूँ और मुझे शायद वापस जाना पड़े। प्लीज आप लोग comfortable रहे।

फिर हंसते हुए बोला- आज मैं आपको फालतू सवाल पूछ कर डिस्टर्ब भी नहीं करूँगा, चाहे कैसी भी आवाज़ें आयें।

हम तीनों इस बात पर हंस दिए।

मैं उठा और उसका गिलास जो किचन में रखा था, वो उठा लाया।

अब तीन पैग बने पर अब मधु बैठ नहीं रही थी क्योंकि उसका तौलिया बहुत ऊपर तक था।

वो तो मुझे उसकाने के लिए नीलेश के सामने पहन कर आई थी।

वो सोफे के दूसरी तरफ खड़ी रही, मैं सोफे पर बैठा रहा और बेचारे नीलेश को अपने तने हुए लण्ड को छुपाने के लिए चादर अपने ऊपर डालनी पड़ी।

मैं सोफे पर बैठा बैठा अपना हाथ बढ़ा कर उसकी चिकनी चूत को सहला रहा था। वो सोफे की तरफ झुकी हुई थी और उसके एक हाथ में गिलास था।

मेरे एक हाथ में गिलास था और दूसरा उसकी चूत पर… थोड़ी देर में मेरी पूरी उंगली गीली हो गई।

इतने में नीलेश उठा और बोला- मैं वाशरूम होकर आता हूँ।

मैंने कहा- क्यूँ बे… मेरी बीवी को टॉवल में देखकर कही तेरा….

बोलते बोलते मधु ने मेरे मुंह पे हाथ रख दिया, बोली- भइया इन्होंने थोड़ी ज्यादा पी ली है, कुछ भी बोले जा रहे हैं। आप प्लीज वाशरूम होकर आइये।

नीलेश बेचारा बिन पानी की मछली जैसा महसूस कर रहा था।

उसके जाते ही मैं मधु का टॉवल थोड़ा पीछे से उठकर उसकी गांड सहलाने लगा।

मधु बोली- आप भी कैसे बात करते हो?

मैंने कहा- चिंता मत कर, वो भी पीया हुआ है, उसे कल थोड़े ही न कुछ याद रहेगा। मैं उसे अच्छे से जानता हूँ।

मैंने मधु को बोला- मैं जैसा कहूँ, वैसा ही करना।

उसने आँखों आँखों में ही हामी भर दी।

जब नीलेश वाशरूम से लौटा तो मैंने मधु का टॉवल नीचे नहीं किया, आराम से उसके आते समय मधु की गांड सहलाता रहा।

मधु मुझे घूर रही थी और धीरे से बोली- टॉवल नीचे कर दो, वो देख रहे है।

मैंने कहा- तू चिंता मत कर, मुझे पता है कि मैं क्या कर रहा हूँ।

नीलेश आराम से नंगी गांड की गोलाई नापता हुआ अपनी जगह पर आकर बैठ गया।

मैं धीरे से मधु से बोला- अगर वो पीये नहीं होता तो कुछ कहता, या वो भी तुम पर चांस मार कर तुम्हें छूने की कोशिश करता। पर वो बहुत पीया हुआ है इसलिए चिंता मत करो उसे कुछ याद नहीं रहने वाला।

नीलेश ने थोड़ी बात सुन के ही आईडिया लगा लिया कि मैंने मधु से क्या बोला होगा।

तो नीलेश टीवी के किसी सीन के बारे में कुछ बोलने लगा। इससे मधु को और भरोसा हो गया कि नीलेश को कुछ समझ नहीं आ रहा और वो बहुत ड्रंक है।

उसी का फायदा उठाते हुए मधु ने सोफे के पीछे से ही मेरा लण्ड टॉवल के ऊपर से पकड़ लिया और सहलाने लगी जो नीलेश देख रहा था।

धीरे से मधु नीलेश को देखते हुए ही मेरा टॉवल हटाते हुए अब सीधे मेरे नंगे लण्ड को सहलाने लगी।

मैंने फिर मधु से कहा- देख… वो देख रहा है पर कोई रिएक्शन नहीं है। और अगर ऐसा होता तो मैं भी तो शर्माता जब तूने मेरा लण्ड बाहर निकाला तो।

फिर मैंने मधु का हाथ पकड़ा और उसे सोफे पर बैठने के लिए घुमा कर अपनी तरफ बुलाया।

मधु सोफे पर आकर बैठी।

अब मैं आधा लेटा हुआ था और मेरी एक टांग मधु की पीठ के पीछे और और एक जांघ के ऊपर! मेरी टाँगें चौड़ी होने की वजह से मेरा लण्ड अब पूरी तरह तौलिये से बाहर था, मधु का हाथ मेरे लण्ड से प्यार कर रहा था और मधु की आँखें केवल नीलेश को देख रही थी, वो अपने आप पर विश्वास नहीं कर पा रही थी कि यह आदमी सुबह सब भूल जायेगा और इसे अभी कुछ समझ नहीं आ रहा।

मधु मेरे लण्ड को छोड़ कर बोली- यार, आप अंदर चलो न! मैं हार गई, प्लीज मुझे अंदर ले जाकर मेरी प्यास बुझा दो। इनको चाहे कुछ याद रहे या न रहे पर इनके सामने में शायद कुछ नहीं कर पाऊँगी, चलो न अंदर!मैंने कहा- ओके, चलो पर देखो ये भी यादगार पल होंगे तुम्हारी ज़िन्दगी के जब तुम एक दूसरे मर्द के सामने चुदवा रही हो। बाकी मैं तुम्हे फ़ोर्स नहीं करूँगा, तुम जैसा कहो वैसा कर लूंगा। पर मैं इसे बहुत सालों से जानता हूँ, इसे दारु के दूसरे पेग के बाद कुछ याद नहीं रहता, इसके साथ कुछ भी करो।

मधु ने कुछ देर सोचा फिर बोली- ठीक है, आज किसी और के सामने नंगी होकर देखती हूँ!

मुझे सोच कर ही करंट दौड़ रहा था।

और मधु ने फिर से मेरे लण्ड को पकड़ कर सहलाने और पुचकारने लगी।

मैंने अपने पांव से मधु का तौलिया हटाना शुरू कर दिया।

मधु ने मेरे लण्ड को चूसना शुरू किया मैंने मधु का तौलिया पूरी तरह उसके बदन से अलग कर दिया। मधु ने भी मेरा तौलिया हटा दिया।

और जब मधु मेरे लण्ड को चूस रही थी मैंने नीलेश को इशारा किया कि ऐसे ही चुतिया बना रह!

मधु अच्छे से लण्ड चूसने के बाद 69 में आने लगी, बोली- आप भी करना चाह रहे होगे न? मैं मरी जा रही हूँ। वाकयी कितना अच्छा लग रहा है।

मैंने कहा- और मजा आएगा, अभी रुक तो सही।

मैंने बोला- नीलेश भाई, कैसी लग रही है मेरी प्यारी नंगी बीवी?

नीलेश बोला- भाभी तो बहुत खूबसूरत हैं।

मधु एकदम चौंक गई और जल्दी से मेरे ऊपर से हट कर तौलिया उठाने लगी।

मैंने कहा- वो ज़िंदा है, सब देख रहा है सब कुछ कर सकता है, पर सुबह सब भूल जायेगा, कोई सोया या मरा हुआ आदमी थोड़े ही है। मधु के चेहरे पर थोड़ी सी शान्ति का भाव आया।

फिर उसने देखा कि जल्दी के कारण वो नीलेश के काफी करीब खड़ी थी, नीलेश का लण्ड भी बाहर की ओर निकला हुआ था।

मैंने मधु का हाथ पकड़ा और अपनी ओर खींच लिया।

मधु बोली- सच में भैया को सुबह कुछ याद नहीं रहेगा न?

मैंने कहा- हाँ यार, सही कह रहा हूँ।

मधु फिर बोली- मैं इनके सामने आपसे और उनसे कैसी भी बातें करूँ न?

मैंने कहा- दिल खोल के जो चाहो करो।

मधु नीलेश से बोली- भैया, आपके टॉवल के अंदर से सब कुछ दिख रहा है।

नीलेश बोला- भाभी, उसे लण्ड बोलते है, हाँ वो बाहर आ गया है। आपको कैसा लगा मेरा लण्ड?

मधु बोली- आपका दिखने में बहुत सुन्दर है।

मैंने कहा- तुम चाहो तो उसे छू कर देख सकती हो।

मधु बोली- सच में? मेरा मन कर ही रहा था पर मैंने सोचा कि शायद आपको अच्छा न लगे।

मैंने कहा- यार तुम भी कैसी बातें करती हो? अगर किसी और के लौड़े को देखने या छूने से तुम्हारे मेरे लिए प्यार कम थोड़े ही होने वाला है।

थोड़ा रूक कर मैं नीलेश से बोला- नीलेश भाई, अपना टॉवल हटा कर आओ मेरी बीवी को अपना लण्ड दिखाओ, उसे अपने लण्ड को छूने दो।

नीलेश उठ कर खड़ा हो गया और सोफे से बिल्कुल करीब आकर बिल्कुल नंगा मेरी प्यारी बीवी मधु की आँखों के सामने अपने लौड़े को पेश कर दिया।

मेरी बीवी ने मेरी तरफ देखते हुए उसके लण्ड को धीरे से छूने के लिए हाथ बढ़ाये, फिर पूरा मुट्ठी में भर लिया।

मधु बोली- भैया, आपका लंड बहुत अच्छा और तना हुआ है।

नीलेश बोला- भाभी, क्या आप मेरे लंड को चूस कर मेरा पानी निकाल सकती हैं।

मेरी बीवी ने मेरी तरफ देखते हुए उसके लण्ड को धीरे से छूने के लिए हाथ बढ़ाये, फिर पूरा मुट्ठी में भर लिया।

मधु बोली- भैया, आपका लंड बहुत अच्छा और तना हुआ है।

नीलेश बोला- भाभी, क्या आप मेरे लंड को चूस कर मेरा पानी निकाल सकती हैं।

मधु बोली- हाँ भैया, क्यूँ नहीं। पर अभी थोड़ी देर आप अपने लंड को ऐसे ही रखिये, आप आराम से हम दोनों को प्यार करते हुए देखेंगे तो आपको चुसवाने में और भी मज़ा आएगा।

फिर बीवी ने हम दोनों के लंड को पकड़ के खेलना शुरू किया, मेरे लंड को चूमती कभी नीलेश के लंड को।

नीलेश भी आहें भर रहा था और मैं भी।

मैं नीलेश से बोला- बहनचोद, तूने अपना लंड पकड़वाया हुआ है और वो देख, तेरे लंड को चूम भी रही है और तू है कि मेरी बीवी को प्यार भी नहीं कर रहा! चल तू भी अपना हाथ चला… मेरी बीवी को आज तक किसी और मर्द ने नहीं छुआ है। तू मेरी बीवी के किसी भी अंग को चूम और छू सकता है।

नीलेश बोला- भाई थैंक यू, तूने तो दिल की बात कर दी।

फिर नीलेश मेरी बीवी के बूब्स को सहलाने लगा और निप्पलों के साथ खेलने लगा। मधु की साँसें गहरी होती जा रही थी, मधु बोली अब तो आप अपना लंड मेरे अंदर डाल दो, मैं मरने वाली हूँ, कब से तड़प रही हूँ आपके लंड के लिए!

मैंने कहा- चाहो तो आज इसका लंड ले सकती हो।

मधु बोली- नहीं, मुझे आपका ही लौड़ा अपने अंदर डलवाना है।

अब मधु को सोफे पे लिटाया और मैं उसके ऊपर आ गया।

पर जगह कम थी इसके कारण स्ट्रोक्स अच्छे नहीं लग पा रहे थे, मैंने कहा- चल अंदर बिस्तर पे ही तेरी चुदाई करता हूँ।

मधु बोली- हाँ, यहाँ अच्छे से लेट भी नहीं पा रही मैं।
 
हम तीनो नंगे ही बिस्तर पे चले गए।

नीलेश ने बोला- भाई क्या मैं तेरी बीवी की चूत चाट सकता हूँ? बहुत देर से इनकी खुशबू ने मुझे दीवाना बनाया हुआ है।

मैंने कहा- मुझसे क्या पूछता है, मेरी बीवी से पूछ!

उसने फिर कहा- भाभी, क्या मैं आपकी चूत चाट लूँ?

मधु बोली- नहीं भैया, अभी नहीं अभी मुझे लौड़े की ज़रूरत है, प्लीज आप माइंड मत करना।

मैंने कहा- एक काम कर, तू मेरा लंड चूस ले!

मधु बोली- ओह्ह… आप किसी मर्द से लंड चुसवा सकते हो, और ये किसी और लंड चूस सकते हैं?

मैंने कहा- अभी उसे चढ़ी हुई है, अभी वो कुछ भी कर सकता है। और मुंह तो औरत का हो या आदमी का रहेगा तो वैसा ही न!

मधु बोली- नहीं, मुझे अभी आपका लौड़ा अपनी चूत में चाहिए।

और मुझे उठाने की कोशिश करने लगी। मैं उठकर उसके ऊपर चढ़ गया और दो ही बार में उसकी चूत में अपना पूरा लंड पेल दिया। अब नीलेश मेरी बीवी के बूब्स के ऊपर अपने लंड से मार रहा था और मुट्ठ मार रहा था।

मैंने नीलेश से बोला- तू अपना मुंह लंड के पास लेकर आ।

नीलेश उल्टा लेट गया, अब उसकी टाँगें बीवी के मुंह की तरफ और उसका मुंह मेरी बीवी की चूत और मेरे लंड के करीब था, नीलेश की गर्म साँसे में अपने टट्टे पर महसूस कर रहा था।

मैंने अपना लंड मधु की चूत से बाहर निकला और नीलेश के मुंह पे रख दिया, नीलेश को जैसे ही गीला गीला महसूस हुआ, उसने तुरंत उसे अपने मुंह में ले लिया।

मैंने फिर उसके मुंह से बाहर निकाला और बीवी की चूत में डाल दिया, फिर 2 धक्के बीवी की चूत में और 2 धक्के नीलेश के मुंह में मारने लगा।

नीलेश को मधु का पानी पीना था, उसका इससे अच्छा उपाय नहीं था। जब मैं मधु की चूत में धक्के मारता तो नीलेश कभी मेरी गांड चाटता और कभी मधु की।

इधर जब मधु को उसकी गांड पे जीभ महसूस हुई तो और ज्यादा उत्साहित हो गई और उसने भी नीलेश के लंड को सहलाना और मुट्ठ मारना शुरू कर दिया, मैं मधु की चुदाई के साथ साथ उसके बूब्स भी मसल रहा था।

हम तीनों की सिसकारियाँ और आहें कमरे में गूंजने लगी।

मधु बोली- भैया, आप वहाँ से हट जाओ, मैं आने वाली हूँ।

नीलेश बोला- भाभी, आप आ जाओ, पूरा पानी मेरे ऊपर निकाल दो, कोई बात नहीं, मुझे अच्छा लगेगा।

मैंने कहा- मधु, तुम किसी की चिंता मत करो, बस चुदो मुझसे, मैं भी आने वाला हूँ।

मेरी आवाज़ें तेज़ होती जा रही थी, मैंने कहा- रंडी साली कुतिया, दूसरे लंड को कैसे मसल रही है? तेरी माँ की चूत। तेरी चूत को मार मार के भोसड़ा बना दूंगा माँ की लौड़ी।

मधु बोली- और चोदिये न, आपकी ही चूत है, जितना मर्जी आये, उतना इसे चोदिये, मैं तो आपसे चुदने के लिए ही बनी हूँ, आपकी रंडी बनकर ही रहना चाहती हूँ।

हम दोनों का लगभग एक साथ स्खलन हो गया।

इधर नीलेश लगातार मेरी और मधु की गांड चाटे जा रहा था।

फिर जब मैं पूरी तरह मधु की चूत में झड़ गया तो मैंने अपना लंड बाहर निकाला जिसे नीलेश ने बहुत अच्छे से साफ़ किया। फिर उसने मेरी बीवी मधु की चूत को भी अच्छे से चाट के साफ़ कर दिया।

इधर मधु ने नीलेश को भी हिला हिला के पागल सा कर रखा था।

मैंने अपनी बीवी से उसका लंड छुड़ाया और नीलेश के लंड को अपनी बीवी के सामने ही चूसने लगा।

मधु बोली- आप?

मैंने कहा- जिसने तुम्हें इतना अच्छी अनुभूति दी है, उसके लिए ये क्या मैं कुछ भी कर सकता हूँ।

मधु बोली- आप हटो, मैं चूस लेती हूँ। आदमी का लंड औरत चूसे तो ज्यादा अच्छा लगता है।

मैंने कहा- ठीक है, पर नीलेश को बहुत अच्छे से तृप्त कर देना।

मैंने कहा- तुम उसके ऊपर लेट जाओ, अपने बदन से उसके बदन को रगड़ कर उसकी मलाई का कतरा कतरा निकाल दो।

नीलेश के नंगे बदन पर मधु लेट गई और मछली की तरह उसके बदन पर फिसलने लगी।

नीलेश ने मधु को बाँहों में जकड़ा और बोला- भाभी आप ग्रेट हो, आप जिस तरह मेरे बदन की आग भड़का रही हो, मुझे मन कर रहा है कि मेरी मलाई कभी न निकले और मैं आपके साथ आपके पति के सामने ऐसे ही नंगा पड़ा रहूँ। भाभी अपनी चिकनी चूत को मेरे लंड पर रगड़ दीजिये प्लीज!

मधु बोली- भइया, आप मुझे जकड़े हुए हैं, मैं हिल भी नहीं पा रही। आप छोड़िए तो मुझे, मैं आपका दिल खुश कर दूंगी।

मैंने कहा- नीलेश, मज़ा आ रहा है मेरी बीवी के साथ?

नीलेश बोला- यार ये ज़िन्दगी का सबसे सुहाना पल है, मैं इसे कभी नहीं भूल पाऊँगा।

फिर बोला- भाभी, आप तो सेक्स की देवी हो। कितने अच्छे से सारे काम करती हो।

मधु बोली- थैंक यू!

नीलेश बोला- भाभी में थोड़े अपशब्द का उपयोग कर लूँ, मेरे लंड की मलाई का फव्वारा बस निकलने ही वाला है।

मधु बोली- भइया, आप कुछ भी बोलिए, अब तो मैं आपके साथ नंगी ही पड़ी हूँ, मुझे जैसे चाहे उपयोग करिये। आपका लंड बहुत प्यारा है, बिल्कुल राहुल जैसा लंड। क्या आप मेरी चूत में अपना ये लंड डालना चाहेंगे?

नीलेश ने मेरी तरफ देखा, मैंने कहा- तेरी और मधु की इच्छा होनी चाहिए, मुझे कोई दिक्कत नहीं है। चूत क्या है, सिर्फ एक छेद है उसमें कोई और लंड चला जायेगा तो वो बर्बाद थोड़े ही हो जाएगी? 4 दिन की ज़िन्दगी है, हंस खेल कर गुज़ार लें।

मैंने मधु से कहा- तुम दोनों को खेलते देख मेरा फिर से खड़ा हो गया है।

मधु तब तक फिसल कर नीलेश की टांगों की बीच अपना मुंह ला चुकी थी, वो उसके टट्टों को चाट चाट के लाल कर चुकी थी।

उसने वहीं से अपना हाथ बढ़ाया और मेरे लंड को भी हिलाने लगी।

मैंने कहा- मधु, दो लंड लोगी? नीलेश तुम्हारी चूत मार देगा, मैं तुम्हारी गांड मार देता हूँ।

मधु बोली- मैं तैयार हूँ, पर पहले आप दोनों मुझे मेरे पूरे बदन को चूमो और चाटो।

मधु धीरे धीरे बहुत खुल गई थी।

नीलेश उठ गया, मधु लेट गई।

अब नीलेश मधु की टांगों के बीच अपना मुंह ले गया और एक हाथ से एक बूबे को रगड़ने लगा।

मैंने उसके दूसरे बूबे को मुंह में लिया और चूसने लगा और एक ऊँगली से मधु के चूत के दाने को रगड़ने लगा।

मधु बोली- कितना अच्छा लग रहा है, आप दोनों कितने अच्छे हो, कितने प्यार से मेरे साथ खेल रहे हो।

मधु ने एक हाथ मेरे सर पे और दूसरा नीलेश के सर पे रख हुआ था, वो धीरे धीरे पर कड़क हाथों से हमारे सर को सहला रही थी।

मधु फिर बोली- भइया, आप बहुत अच्छे से चाट रहे हो। क्या मैं आपके मुंह में अपना पानी निकाल सकती हूँ?

नीलेश बोला- भाभी मैं तो कब से आपका पानी पीने के लिए मरा जा रहा हूँ। आप एन्जॉय करो और निकाल दो पूरा पानी मेरे मुंह में। विश्वास मानो मुझे बहुत अच्छा लगेगा।

मधु बोली- सुनो, क्या आप भी मेरे नीचे जा सकते हो? मेरे दूसरे छेद को प्लीज चाट दो। जब हम चुदाई कर रहे थे और भैया चाट रहे थे तो बहुत अच्छा लग रहा था।

मैंने कहा- ओके डार्लिंग, तुम्हारे लिए में कुछ भी कर सकता हूँ।

अब मधु डॉगी स्टाइल में बिस्तर पर उलटी लेट गई नीलेश उसकी चूत के नीचे आ गया और मैंने अपना लंड नीलेश के लंड पे रख दिया और मधु की गांड पे अपना मुंह रख दिया। चाटने की आवाज़ और मधु की सिसकारियों से कमरे में माहौल और भी ज्यादा सेक्सी हो गया था। मधु की कमर से झटके महसूस होने लगे जैसे वो अपने पानी को बाहर की और ठेल रही हो। मधु ने 2-3 मिनट में ही पूरा बिस्तर और नीलेश का मुंह पूरी तरह गीला कर दिया।

इतना वो नॉर्मली कभी पानी नहीं निकालती आज तो बहुत पानी निकला उसका।

मधु बुदबुदाती हुई बोली आप दोनों अपने अपने लंड को मेरे अंदर डाल दो जल्दी। नीलेश अपनी ही जगह पर ऊपर सरक गया, अब उसका तनतनाता हुआ लंड मधु की चूत के बिल्कुल सामने था और मैंने उठ कर मधु की गांड पर अपना लौड़ा तैनात कर दिया।

मैंने और नीलेश ने मधु को सैंडविच बना लिया था।

मैंने कहा- नीलेश, एक साथ लंड डालेंगे, जब मैं 3 बोलूँ तो तू भी डालना, मैं भी डालूंगा… मेरी प्यारी जानेमन मधु को पता न चले कि दर्द हो कहाँ हो रहा है।

नीलेश बोला- ओके!

मैंने कहा- 1 – 2 – 3

तीन बोलते ही दोनों ने एक साथ उसके अलग अलग छेदों में लंड डाल दिए।

मैं मधु की गांड कम ही मारता हूँ इसलिए वो अभी भी कड़क है।

मधु के मुंह के सामने नीलेश था, मधु बोली- भइया, जी भर के चोदो अपनी भाभी को। आपका लंड अंदर जाकर और भी अच्छा लग रहा है।

नीलेश मधु को किस करने के लिए अपना मुंह आगे लेकर आया तो मधु पीछे हट गई।

नीलेश बोला- भाभी, आपने सब कुछ किया पर लिप टू लिप किस में आप पीछे हट गई, ऐसा क्यूँ?

मधु बोली- आपके पूरे मुंह में मेरा पानी है, मैं आप दोनों की मलाई तो खा जाती हूँ पर अपने खुद के पानी का टेस्ट मुझे ठीक नहीं लगता। सॉरी। आप अभी चुदाई कर दो मेरी, फिर मुंह धोकर मैं आपको किस भी कर दूंगी।

नीलेश हंसते हुए बोला- ठीक है भाभी डार्लिंग!

फिर 2-3 धक्कों के बाद ही नीलेश बड़बड़ाने लगा- ले माँ की लौड़ी ले, अपनी चूत में ले मेरा लौड़ा… मादरचोद! राहुल तेरी बीवी तो माल है, साली कुतिया, क्या मस्त उछल उछल के लेती है। रंडी मेरी रंडी, चोद चोद के तेरी चूत मेरी मलाई से भर दूंगा बहन की लौड़ी।

मधु नीलेश के बालों को पुचकारते हुए बोली- भइया, आप बहुत अच्छी चुदाई करते हैं। आपका कड़क लंड ऐसा लग रहा है जैसे लोहे की रॉड अंदर डाल दी हो। आप तो… आह ओह्ह्ह आह… भर दो ओह्ह्ह आह आह मेरी चूत को!

इधर मैं भी स्पीड बढ़ा चुका था।

मधु बोली- राहुल, आज प्लीज आह ओह्ह्ह… मेरे ऊपर कोई रहम मत करो, मेरी गांड फाड़ डालो। आपका लंड गांड में आह ओह्ह्ह आह आह ओह्ह्ह आह… चोद डालो।

नीलेश बोला- मैं आ रहा हूँ। भाभी आपकी चूत में ही डाल दू या मुंह में लोगी?

मैं बोला- भर दे इसकी चूत को, साली ज़िन्दगी भर याद रखेगी तुझे।

मधु और नीलेश दोनों कराहते हुए एक दूसरे में समां गए।

मैं अभी भी मधु की गांड तेज़ तेज़ मार रहा था, मधु बोली- राहुल, प्लीज निकाल लो, मुझे दर्द हो रहा है।

मैंने कहा- अभी तो तू बोल रही थी कि मुझ पर कोई रहम मत करना? अब ले!

नीलेश हंसने लगा।

मैं हांफते हांफते बोला- एक शर्त पे छोड़ सकता हूँ, अगर तुम दोनों साथ में मेरा लंड चूसोगे?

मधु बोली- हाँ बाबा हाँ, प्लीज छोड़ दो मुझे, मेरी गांड फट गई है।

मैं बिस्तर पर सीधा लेट गया, मधु बोली- भैया, आप मुंह धोकर आ जाओ।

नीलेश बिना कुछ बोले मुंह धोने चला गया, मधु ने मेरा लंड पहले कपड़े से अच्छे से साफ़ किया फिर मेरे लंड पे जीभ फेरने लगी।

इतनी देर में नीलेश भी मुंह धोकर आ गया और वो भी जीभ से मेरे लंड को सहलाने लगा।

दोनों की जीभ बीच में टकरा रही थी।

अब दोनों ने मेरे लंड को बीच में रखकर एक दूसरे को लिप तो लिप किस करना शुरू किया।

मेरे लंड के टोपे पर दोनों के ऊपर के होंठ थे और जीभ जब एक दूसरे के मुंह में डालने की कोशिश करते वो मेरे लंड से होकर ही गुज़रती।

मैं तो पहले ही बहुत उत्तेजित था कि मैंने उन दोनों के मुंह में अपनी मलाई उड़ेलना शुरू कर दिया, 3-4 पिचकारी निकली, दोनों के किस में कोई फर्क नहीं पड़ा, वैसे ही स्लो मोशन में वो एक दूसरे को किस करते रहे और मेरी मलाई मधु अपने मुंह से उसके मुंह में रखती नीलेश अपने मुंह से मधु के मुंह में।

नीलेश और मधु एक एक हाथ मेरे अंडकोष पर और मधु को दूसरा हाथ नीलेश के अंडकोष पर और नीलेश का एक हाथ मधु के बूब्स पर था।

मुझे अब बहुत तेज़ नींद आ रही थी।

यही आखरी बात याद है मुझे उस रात की!

मैं कब नींद की ख़ामोशी में सो गया, मुझे याद नहीं।

नीलेश और मधु एक एक हाथ मेरे अंडकोष पर और मधु को दूसरा हाथ नीलेश के अंडकोष पर और नीलेश का एक हाथ मधु के बूब्स पर था।

मुझे अब बहुत तेज़ नींद आ रही थी।

यही आखरी बात याद है मुझे उस रात की!

मैं कब नींद की ख़ामोशी में सो गया, मुझे याद नहीं।

जब सुबह नींद खुली तो मैं बिस्तर पर अकेला ही था, पूरी चादर कल रात की हुई घमासान चुदाई की दास्ताँ बयां कर रही थी।

नींद खुलते ही मेरी आँखों के सामने से रात की पूरी कहानी एक पल में रिवाइंड हो गई, मैंने सोचा सबसे पहले तो देखा जाये कि कौन कहाँ है।

उठकर किचन की तरफ कूच किया तो देखा कि मधु नाश्ता बनाने में लगी है, नीलेश बाहर के कमरे में जांघिए में ही बिल्कुल धराशाई होकर सो रहा है।

मैंने पीछे से जाकर मधु को पकड़ लिया, उसने अभी भी अंदर कुछ नहीं पहना था।
 
मधु बोली- गुड मॉर्निंग जान, आप कब उठे?

मैंने कहा- अभी उठा हूँ।

वो बोली- आप जाकर बैडरूम मैं बैठो, मैं चाय लेकर आ रही हूँ।

मैं आकर बैडरूम में बैठ गया, मधु चाय लेकर आई, मैंने अपने ऊपर चादर डाल ली थी क्योंकि रात की बातें सोच सोच कर लंड में फिर से अकड़ आनी शुरू हो गई थी।

मैंने कहा- मुझे तो पता ही नहीं चला, मेरी कब नींद लग गई? तुम दोनों कब सोये?

मधु मुस्कुरा कर बोली- आप भी न बहुत शैतान हो! हम लोग भी तुरंत ही सो गए थे और सुबह तक यहाँ पर सारे लोग बिना कपड़ों के ही एक दूसरे से चिपक कर सो रहे थे। वो तो जब सुबह मेरी नींद खुली तब मैं वाशरूम गई और लौट कर आई तो भइया बाहर जाकर सो गए थे।

मैंने अपना सर पकड़ लिया, मैंने कहा- यार यह तो गलत हो गया। दारु का असर ज्यादा से ज्यादा 2 घंटे रहा होगा पर सुबह तक तो निश्चित रूप से नहीं रहा होगा। अब उस कमीने को यह बात याद रहेगी कि कल रात क्या हुआ था।

मधु थोड़ी टेंशन में आ गई, बोली- अब क्या करें?

मैंने कहा- करेंगे क्या, देखते हैं, उसे कुछ याद है या नहीं। वैसे यह बताओ कि कल मज़ा आया या नहीं?

मधु बोली- आप तो मेरे हीरो हो, मुझे बहुत मज़ा आया। और सबसे ज्यादा आपको उत्तेजित देखकर बार बार में उत्तेजित हो रही थी। मैं तो अभी तक आपको अपने अंदर महसूस कर रही हूँ। हम लोग नॉर्मली इतनी देर कहाँ सेक्स करते हैं, कभी कभार जब आप ड्रिंक करके वीकेंड्स में प्यार करते हो तो भले ही हम 2 घंटे कर लें, पर नॉर्मली तो वही 20-25 मिनट करके सो जाते हैं। कल रात हम लोगों ने 6 घंटे तक लगातार सेक्स किया है। मुझे तो बहुत मज़ा आया।

तो मैंने कहा- तो फिर अगर उसे याद भी रह जाता है तो कोई बहुत परेशानी की बात नहीं है। देखता हूँ जगा के… क्या हाल हैं भाई के! और मैं हंस दिया, मैंने कहा- तुम जल्दी से खाना बना लो, मुझे ऑफिस जाना है।

मधु बोली- मुझे पता था कि आप ऑफिस जाओगे, इसलिए खाना तो रेडी सा ही है, आप तैयार हो जाओ, मैं खाना पैक कर देती हूँ।

मैं चाय पीकर नीलेश को जगाने पंहुचा। नीलेश जो थोड़ा सा पहले ही जगा सा ही था, मेरी आवाज़ सुन कर बोला- राहुल यार, एक सिगरेट तो पिला दे।

मैंने कहा- लोड़ू उठ तो जा… पहले सिगरेट चाहिए।

तो नीलेश बोला- पिला न यार?

मैंने कहा- चल छत पे सिगरेट पिएंगे।

वो बोला- मधु भाभी, गुड मॉर्निंग!

मधु तब तक चाय लेकर आ गई, मैंने कहा- मुझे भी एक और कप दे दो, हम छत पे सिगरेट पी के आते हैं।

मधु ने कहा- गुड मॉर्निंग भइया।

दोनों की गुड मॉर्निग में बहुत गर्माहट थी।

मैं और नीलेश छत पे गए, सिगरेट जलाई, फिर मैंने कहा- क्यू बे भोसड़ी के… कैसी रही रात?

वो बोला- मान गए यार राहुल… तू तो चैंपियन है। क्या कहानी बनाई तूने कि मैं 2 पैग के बाद सब भूल जाता हूँ! और वो बात ‘वो ज़िंदा है, सब देख रहा है, सब कुछ कर सकता है पर सुबह सब भूल जायेगा… कोई सोया या मरा हुआ आदमी थोड़े ही है!’

मैं बस मुस्कुरा दिया- तो अब ये बता कि तुझे सब याद है या भूल गया?

नीलेश बोला- तू जैसा बोल? वैसे तो भूलने में भी भलाई है, नहीं तो भाभी को लगेगा कि उनके साथ धोखा किया गया है।

मैंने कहा- तू उसकी चिंता छोड़, उसका भी सब जुगाड़ है मेरे पास, बस इतना बता कि तुझे याद रखना है या भूलना है?

नीलेश लगभग गिड़गिड़ाता हुआ बोला- अगर याद रख सकूँ तो अच्छा रहेगा, दिन भर भाभी को छेड़ता रहूँगा।

मैंने कहा- चल तू चिंता मत कर, मैं बता दूंगा कि तुझे याद है रात की सारे बातें। बस तू उस बारे में मधु से कोई बात मत करना। नीलेश बोला- ओके!

मैंने कहा- मुझे तो ऑफिस जाना है, मैं तैयार होता हूँ, चल तू चाय पीकर और सिगरेट खत्म करके आ जाना।

मैं नीचे जाकर मधु को बोला- उसे रात की सारी बातें याद हैं।

मधु बोली- ठीक है, कोई नहीं, मैं हैंडल कर लूँगी।

मैं नहा कर आया, तैयार हुआ और ऑफिस चला गया।

मैं नीचे जाकर मधु को बोला- उसे रात की सारी बातें याद हैं।

मधु बोली- ठीक है, कोई नहीं, मैं हैंडल कर लूँगी।

मैं नहा कर आया, तैयार हुआ और ऑफिस चला गया।

इसके आगे की दास्ताँ मेरी बीवी लिख रही है।

जब ये ऑफिस जा रहे थे तो मैं बालकनी से इन्हें बाय कर रही थी, भैया भी मेरे पीछे आकर खड़े हो गए, वो भी राहुल को बाय का इशारा कर रहे थे और एक हाथ से बाय करते हुए दूसरे हाथ से उन्होंने मेरा कूल्हा दबा दिया।

मैंने पीछे मुड़ कर घूर कर उन्हें देखा जैसे मुझे अच्छा न लगा हो।

मैं अंदर आ गई, मैंने उनसे उस बारे में कुछ नहीं कहा, शायद वो भी डर से गए थे मेरे आँखों की ज्वाला से।

मैंने थोड़ा गुस्से में बोला- आप नहाकर आएंगे या मैं खाना लगा दूँ?

नीलेश भैया बोले- भाभी, आप गुस्सा हो क्या मुझसे? सॉरी प्लीज पर आप मुझसे ऐसे बात मत करो। मैंने अगर गलती की है तो आप मेरी पिटाई कर दो, पर ऐसे मत करो मेरे साथ।

मैंने कहा- आपने जो बाहर मेरे साथ किया वो, क्या वो सही था? यहाँ लोगों की आँखें हमेशा दूसरों के घर में ही झाँक रही होती हैं। आपका ऐसा व्यवहार मुझे पसंद नहीं आया।

नीलेश भैया थोड़े से चिंतित होते हुए, बोले- सॉरी भाभी, आगे से गलती हो तो उल्टा लटका के मारना पर अभी तो मुझे माफ़ कर दो। यह मेरी पहली और आखरी गलती थी।

मुझे अच्छा लगा कि उन्होंने अपनी गलती भी मानी और सॉरी भी बोला तो मैंने मुस्कुरा कर बोला- अब आप नाश्ता नहा कर करेंगे या अभी लेकर आ जाऊँ?

भैया बोले- मैं ज़रा फ्रेश हो आऊँ, फिर नाश्ता करता हूँ।

जब भैया बाथरूम में गए तो मेरे पास कोई काम नहीं था, कल रात की सारी बातें और हरकतें मेरी आँखों के सामने चल रही थी।

बस फिर क्या था, मैं बेधड़क बैडरूम से होती हुई बाथरूम में घुसने लगी।

हमारे बाथरूम में कुण्डी तो है पर वो लगाओ न लगाओ एक बराबर है, कुण्डी लगाने से दरवाज़ा अपने आप नहीं खुलता पर अगर को बाहर से धक्का मारे तो खुल जाता है।

मैंने देखा कि भैया कमोड पर बैठ कर मोबाइल पर कुछ करते हुए अपने लंड को भी सहला रहे थे, एकदम से मुझे बाथरूम में देखकर थोड़े शॉक हो गए और बोले- भाभी, मैंने कुन कुण्डी लगाई थी, सॉरी!मैंने कहा- सॉरी भैया, आप जो कर रहे हो, कर लो, मैं बस अपनी ब्रा पैंटी लेने आई थी, लेकर जा रही हूँ।

मैंने अपने अंडरगार्मेंट्स उठाये और बाहर आ गई, आकर मैंने अपने पति राहुल को मैसेज किया- डार्लिंग, तुम वापस आ जाओ, मुझे चुदना है।

‘हा हा… हा… हा… हा…’ पति का मैसेज आया- मैं तुझे रात को चोद दूँगा, अभी तेरे पास एक लंड है, उससे काम चला ले।

मैंने जवाब में लिखा- थैंक यू, बस यही पूछना था।

जैसे ही नीलेश भैया बाहर आये, मैंने कहा- भैया सॉरी, वो अकेले रहने की ऐसी आदत है कि याद ही नहीं रहा कि आप वहाँ हो सकते हो।भैया बोले- कोई नहीं भाभी, अब जो हो गया सो हो गया। आप नाश्ता दे दो, बहुत भूख लगी है।

मैं बोली- ओके भैया, अभी लेकर आती हूँ।

भैया ने तब तक टीवी पर अच्छे से गाने लगा दिए। उन्होंने नाश्ता किया, मैं बर्तन वगैरह लेकर किचन में चली गई और बर्तन साफ़ करने लगी।

भैया भी किचन में आ गये, बोले- भाभी पानी!

मैंने कहा- भैया, हाथ गंदे हैं, मैं अभी देती हूँ।

भैया बोले- नहीं, मैं ले लूंगा।

पानी पीकर बोले- मैं यहीं बैठ जाऊँ आपके पास? बातें करते हैं।

मैं तो चाहती ही यही थी, मैंने कहा- हाँ भैया।

वो प्लेटफार्म पर बैठ गए और सुबह के तेवर देखकर उनकी कुछ करने की हिम्मत नहीं पड़ रही थी इसलिए इधर उधर की बातें कर रहे थे।

मैंने सोचा मुझे ही कुछ करना पड़ेगा, पर तुरंत ही मन पलट गया, मैंने सोचा मैं नहीं करूँगी, इन्ही से करवाऊँगी ,तभी तो ज्यादा मज़ा आएगा।

जब आदमी पहल करता है तो बहुत अच्छे से चुदाई करता है।

मैं सोच ही रही थी, तब तक भैया बोले- भाभी, आप बहुत अच्छी हो।

मैंने कहा- कैसे भैया?

तो भैया बोले- आप इतना स्वादिष्ट खाना बनाती हो, राहुल की कितना ध्यान रखती हो। हर मर्द अपने सपने में आप जैसी ही बीवी मांगता होगा।मैंने कहा- थैंक यू भैया।

फिर मैंने सोचा कि आदमी साला तारीफ़ सिर्फ इसलिए करता है जिससे उसे चूत मिल सके। अब मुझे भी एक कदम आगे बढ़ाना चाहिए। कल रात की घमासान चुदाई के बावजूद कितनी हिचक है अभी भी।

मैंने कहा- भैया, पैरों में बड़ा दर्द हो रहा है पर अगर बैठ गई तो काम कैसे होगा।

नीलेश भैया बोले- भाभी, आप बताओ, मैं कर देता हूँ।

मैंने कहा- नहीं भैया, ऐसा थोड़े ही होता है… लेकिन थैंक्स, आपने इतना सोचा।

नीलेश भैया फिर बोले- भाभी बताओ न, आपकी किस तरह मदद कर सकता हूँ। जो भी आपके किसी काम आ जाऊँ तो लगेगा कि जीवन सफल हो गया।

सेंटी डायलाग सुन कर मुझे हंसी आ गई, मैंने कहा- भैया आप मेरी कुर्सी बन जाओगे, मैं काम भी कर लूँगी और बैठ भी जाऊँगी।

भैया बोले- शौक से!

भैया घोड़ी बन गए, मैंने अपने फ्रॉक को थोड़ा उठाया और उनकी नंगी पीठ पर अपने नंगे चूतड़ रख दिए।

भैया की आँखें बंद होते हुए देखी थी मैंने, मुझे महसूस हो गया था कि इनकी टांगों के बीच का राकेट अब गुलाटियां खाने ही वाला होगा।

मैंने कहा- भैया, बैठक बहुत नीची हो गई है, मेरा हाथ सिंक तक नहीं जा रहा, रहने दीजिये, ऐसे काम नहीं हो पाएगा।

तो भैया बोले- रुकिए, मैं सीधा बैठ जाता हूँ आप मेरे कंधे पर बैठ जाइये।

मुझे आईडिया पसंद आ गया, मैंने कहा- ठीक है!

मैं उठी और भैया सीधे बैठ गए। पर वो मेरे से उलटी दिशा में मुंह किये हुए थे।

मैंने सोचा ‘यह भी ठीक ही है, सीधे मेरी चूत इनके मुंह के पास ही पहुंचेगी।

मैंने अपनी टांग उठाई और जान करके अपनी चूत के आगे फ्रॉक कर दी थोड़ा नाटक तो ज़रूरी था न।

अब मैं आराम से उनके कंधे पर बैठी हुई थी और वो मेरी टांगों को घुटने से नीचे सहला रहे थे।

मैंने पैंटी तो पहनी ही नहीं थी इसलिए उनकी गर्म साँसें तो मेरी चूत तक जा रही थी।

उन्होंने अपने हाथ को धीरे धीरे मेरी जांघों तक लेकर आना शुरू किया और अपने मुंह के पास से फ्रॉक को हटाने की कोशिश करने लगे। धीरे धीरे अपने हाथों और होंठों से वो कामयाब हुए और मेरी फ्रॉक के अंदर घुस गए और मेरी चूत सामने आते ही जीभ गहराई तक डाल दी।

मैंने घायल शेर को खून तो लगा ही दिया था इसलिए मैं उनके ऊपर से उठ गई और बोली- थैंक यू भैया, हो गया मेरा काम खत्म, सारे बर्तन धुल गए।

जैसे मुझे उनकी जीभ अपनी चूत पर महसूस ही नहीं हुई हो।

भैया थोड़े परेशान से होकर बोले- अरे भाभी थैंक्स कैसा? मुझे तो अच्छा लगा कि मैं आपके किसी काम तो आया। मैं ज़रा नहा कर आता हूँ।

वो अपने कपड़े टॉवल लेकर बाथरूम में चले गए लेकिन इस बार उन्होंने दरवाज़ा लगाया ही नहीं।

मैं बैडरूम में आई तो देखा कि वो नंगे नहा रहे हैं।

मैंने कहा- भैया, डोर तो बंद कर लेते?

तो भैया बोले- भाभी, क्या फायदा… वो वैसे भी खुल ही जाता है।

मैंने कहा- ठीक है।

उनका लंड अभी आधा खड़ा हुआ था और वो जान बूझ कर मेरी तरफ मुंह करके ही नहा रहे थे जिससे मैं उन्हें देखूँ।

उनका गीला नंगा बदन देखकर मेरी चुदने की तमन्ना और भी ज्यादा बढ़ गई, मैं बेधड़क बाथरूम में गई और बाथरूम में राहुल के कपड़े उठाने लगी।

अब नीलेश भैया की हिम्मत और बढ़ गई, उन्होंने कहा- क्या आप मेरी पीठ पर साबुन लगा देंगी?

मैंने थोड़ा नाटक करते हुए कहा- अगर आप जांघिया पहन कर नहाते तो ज़रूर लगा देती।

तो भैया के सब्र का बांध टूट गया, बोले- अब रात को मैंने आपका क्या और आपने मेरा कौन सा अंग नहीं देखा। अब काहे की शर्म… मैं तो आपसे कहने वाला था कि क्या आप मेरे लौड़े को साबुन लगा देंगी?

और हंस दिए।

उनकी बेबाकी मुझे बुरी नहीं लगी, मैंने कहा- पीठ की जगह वही बोला होता तो मैं थोड़े ही न मना करती।

और मैं भी हंस दी।

मैंने हाथ में साबुन लेकर उनकी पीठ पर मलना शुरू कर दिया।

भैया बोले- थोड़ा सा लंड पे भी लगा दो।

मैंने उनके लंड को नाजुकता के साथ पकड़ कर उनकी गांड, लंड और टांगों के बीच पूरी जगह अच्छे से साबुन लगा दिया।

वो बोले- अरे आप भी कपड़े पहन कर साबुन लगा रही हैं, आइये आपको अभी अच्छे से नहला दूँ।

इस पर मैंने कहा- मैं सुबह एक बार नहा चुकी हूँ।

खैर साबुन लगा कर पानी से अच्छे से धोकर मतलब पूरी तरह गर्म करके मैं उन्हें उसी हालत में छोड़ आई। वो बाथरूम से अच्छे से पौंछ कर बिना कपड़ों के ही बाहर आ गये।

मैंने कहा- भैया, आप नंगे ही बाहर आ गये?

तो वो बोले- हाँ मधु भाभी, अब आपसे शर्म नहीं आ रही।

वो बाथरूम से अच्छे से पौंछ कर बिना कपड़ों के ही बाहर आ गये।

मैंने कहा- भैया, आप नंगे ही बाहर आ गये?

तो वो बोले- हाँ मधु भाभी, अब आपसे शर्म नहीं आ रही।

मैंने कहा- आप नाश्ता तो कर लो।

वो बोले- हाँ, भाभी ज़रूर… ले आइये।

वो बाहर ड्राइंग रूम में कालीन पर जाकर बैठ गए, परदे लगा दिए, AC ऑन कर दिया, टीवी पर ब्लू फिल्म लगा दी और आवाज़ न के बराबर ही रखी।

मैं जब खाना लेकर पहुँची तो मैंने जान बूझ कर उनके लंड को छूते हुए ही खाना रखा, वो आराम से मूवी देखते हुए खाते रहे और मुझसे बातें भी करते रहे, बोले- देखो भाभी, क्या मस्त पोजीशन है ना?

वो बिल्कुल ऐसे बात कर रहे थे जैसे कि कुछ गलत नहीं हो।

मैं भी अपने सामने एक पराये मर्द को नंगा खाना खाते देख और सामने ब्लू फिल्म के चलते अपने हाथ को चूत पर ले गई और रगड़ने लगी।

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अब तो भैया और भी दबंग होते जा रहे थे, बोले- चूत बाद में रगड़ना पहले पानी ले के आ जा।

मैं उठी, पानी लाकर दिया, बैडरूम में गई और पूरी नंगी हो गई।

मैंने वहीं से आवाज़ लगा कर बोला- भैया, आप बर्तन उठा के सिंक में रख देना।

भैया बोले- ओके!

जब मुझे बर्तन रखने की आवाज़ आई, उसके 2 मिनट के बाद मैं उठी और जाकर ड्राइंग रूम में सोफे पर बैठ गई।

मैं बोली- भैया, कुछ डेजर्ट?

भैया तो समझदार थे ही, बोले- हाँ भाभी, डेजर्ट की बहुत ज़रूरत है।

और आकर सीधा मेरी चूत पर अपना मुंह टिका दिया।

5-7 मिनट चाटने के बाद बोले- आपकी चूत का टेस्ट तो वाकई लाजवाब है। मेरा बस चले तो में दिन भर बस इसे ही चाटता रहूँ।

मैंने कहा- भैया, आप बहुत अच्छी चूत की चटाई करते हैं। मेरा भी मन करता है कि आपकी जीभ दिन भर मेरी चूत को अंदर तक सहलाती रहे।

भैया बोले- आपका तो हर अंग इतना खूबसूरत है कि अगर ज़िन्दगी भर बैठ कर तारीफ़ की जाए तो भी कम है। आपकी गर्दन एक सुराही की तरह चमकदार और लम्बी है, आपके बूब्स परफेक्ट साइज और शेप में हैं, आपकी कमर माशाल्लाह कयामत है, आपकी चिकनी चूत और उसका पानी ऐसा लगता है जैसे सोने के प्याले में अमृत परस दिया हो।

और फिर बोलते बोलते वो मेरे बूब्स चूसने लगे, मैं भी मज़े लेने के लिए आँखें बंद करके पराये मर्द से चुदने की अनुभूति का मजा लेने लगी और उनकी पीठ सहलाने लगी।

अब उनका हथियार मेरी जांघों में चुभ रहा था, मुझे उसे अपनी चूत में लेने की ललक बढ़ रही थी, मैंने कहा- भैया, लाइए आपके हथियार की सेवा कर दूँ, लाइए उसकी थोड़ी मलाई निकाल दूँ।

भैया बोले- हाँ भाभी, वो आपके मुंह में जाने को बेताब है। मैं आपकी चूत चाटता हूँ, आप मेरे लंड को चूस डालिए, चलिए 69 में दोनों अपने अपने गुप्तांगों को परम सुख दें, हथियारों को थोड़ी धार देते हैं।

फिर हम काफी देर तक एक दूसरे को चूसते और चाटते रहे, वो कभी मेरी गांड चाटते, कभी मेरी चूत और कभी अपनी उंगली मेरी गांड में डाल देते, कभी मेरी चूत में।

मैं भी कभी उनके गोलियों को मुंह में ले लेती कभी उनके लंड को तो कभी उनकी गांड में उंगली फेर देती थी।

हम दोनों जब अपने चरम पर थे तो मैंने कहा- भैया, आपके लंड का पानी आप मेरी चूत में डाल दीजिये।

भैया क्या बोलते, उनके मन में यही चल रहा था कि कब इस चूत में लंड डालें, अब वो मेरे ऊपर चढ़ गए और मेरी चूत पर अपना लंड रख दिया।

चाटने और चुसाई के कारण लंड और चूत बहुत गीले थे और थोड़ा थोड़ा रस हम दोनों छोड़ चुके थे इसलिए चूत पर लंड टिकाते ही वो सुरंग में अंदर तक फिसल गया।

भैया बोले- भाभी, कल रात भी बड़ा मन था आप में उतरने का। पर कल रात तो कयामत ही थी वो कभी भी नहीं भूल सकता मैं। आप दोनों बहुत ही मस्त और दिलदार हो, इतने खुले विचार होने के बावजूद आपकी भाषा कितनी सरल और अच्छी है। क्यूँ भाभी, आप कभी चुदाई के टाइम गाली गलौच नहीं करती?

मैंने कहा- मैं सेक्स का सहारा लेकर गाली नहीं देती, मुझे देना होता है तो मैं वैसे ही दे लेती हूँ पर मुझे गाली गलौच पसंद नहीं है। वो तो राहुल को चुदाई के टाइम गाली देना अच्छा लगता है इसलिए सुन लेती हूँ। आप भी जब अपना पानी छोड़ने वाले होते हो तो गन्दी गन्दी और भद्दी गालियां देते हो। कल रात को आपने मुझे पता नहीं क्या क्या बोला।

भैया बोले- सॉरी भाभी, शायद मैं और राहुल एक से ही हैं, हम दोनों को पानी निकालते समय पता नहीं क्या हो जाता है, कितना भी कंट्रोल करें गाली निकल ही जाती है।

मैंने कहा- भैया, आप कंट्रोल मत करो, जैसे अच्छा लगता है वैसे आप चुदाई करो, मैं गाली देना पसंद नहीं करती पर सुनने में मुझे कोई कष्ट नहीं है। जब चूत में लंड होता है तो वैसे भी गालियाँ मीठी ही लगती हैं। आप कंट्रोल में सेक्स करोगे तो आप एन्जॉय नहीं कर पाओगे। मैं चाहती हूँ कि आप एन्जॉय करो।

नीलेश भाई बोले- नहीं भाभी, आपकी ये अच्छी अच्छी बातें सुन कर सेक्स करने में और भी मज़ा आता है। इसलिए ऐसे ही करेंगे, मैं एन्जॉय कर रहा हूँ, आप भी मेरे लंड को अपनी चूत में एन्जॉय करो।
 
मैंने कहा- हाँ, बस राहुल ने बहुत बार बोल बोल कर मुझे लंड और चूत बोलना सीखा दिया है तो अब वो तो जुबान पर चढ़ गया है। आप ऐसे ही धीरे धीरे धक्के मारते रहो, स्पीड मत बढ़ाओ।

ये सब बातें करते हुए हमने धक्के मारने बंद कभी भी नहीं किये थे।

नीलेश भैया बोले- भाभी, मैं झड़ने वाला हूँ, मुझे स्पीड बढ़ानी है।

मैंने कहा- तो फाड़ दो मेरी चूत!

अब भैया की स्पीड 200% बढ़ गई, उनके माथे पर पसीने की बड़ी बड़ी बूंदें थी, मैं उन्हें पौंछ रही थी और बोली- भैया आँखें बंद करके नहीं, खोल कर मेरे जिस्म को देखकर चोदिये।

भैया ने मेरे चूचे ज़ोर से दबाए और बोले- हाँ भाभी, तेरा जिस्म तो क़यामत है। कितनी अच्छी और प्यारी चुदक्कड़ है तू भाभी। लंड लेने में माहिर है तू मेरी जान। मैं तेरी चूत को अपनी मलाई से भर दूंगा माँ की लौड़ी।

अब उनकी स्पीड के साथ मैंने भी अपनी कमर को झटके देना शुरू किये जिससे मैं भी उनके साथ परम आनन्द तक आ सकूँ, पर भैया बहुत उत्तेजित थे तो वो मेरे अंदर बहुत देर तक और बहुत ज्यादा मात्रा में झड़ गए।

मैं भी अपने चरम पर थी, मैं उनके झड़ने के बाद तक हिलती रही कि उनका लौड़ा मेरी आग बुझा दे…

पर भइया पूरी तरह लस्त होकर मेरे बदन पर गिर गए।

अभी मेरी तो इच्छा पूरी हुई नहीं थी इसलिए मैं उन्हें सहला कर चाहती थी कि वो मेरे अंदर 4-5 जोर के धक्के और मार दें, पर वो नहीं उठे।

मुझे थोड़ा बुरा लगा, मैंने उन्हें अपने ऊपर से उठाया वो बगल में चारों खाने चित्त वाले स्टाइल में पड़ गए।

मैंने पूरा चाट के उन्हें साफ़ किया, चाटने के साथ साथ मैं उनके लंड को पूरा मुंह में लेकर चूस रही थी जिससे वो दुबारा खड़ा हो जाये। भैया थोड़े होश में आने पर बोले- भाभी आप सीधी लेट जाओ।

मैं अपनी चूत की आग में झुलस रही थी और अभी कुछ भी करने को तैयार थी लेकिन वो तो बस लेटने को बोल रहे थे।

वो मेरी टांगों के बीच जाकर मेरी चूत जो उनकी खुद की मलाई से भरी थी, उसको चाटने लगे।

मुझे पहले तो थोड़ी घिन सी आई पर फिर मज़ा आने लगा।

अब चूत का पानी छूटने ही वाला था, मैंने कहा- भैया उंगली डाल दीजिये अंदर, मेरा पानी छूटने वाला है।

भैया बोले- आप सिर्फ एन्जॉय करना।

उन्होंने एक उंगली दाने पर घुमानी शुरू कर दी, दो उंगलियाँ मेरी चूत के अंदर डाल दी और अंगूठे का सिरा मेरी गांड के छेद पर रख दिया और चूत के निचले हिस्से पर अपनी जीभ से चाटने लगे।

मैंने महसूस किया कि मेरी टांगें अपने आप थोड़ी ज्यादा खुल गई हैं और मुझे बहुत मज़ा आ रहा है। मैंने अपने पेट से लेकर चूत तक एक बहुत बड़ा लोड बाहर की ओर आता महसूस किया, ऐसा लगा जैसे बाढ़ आने वाली है।

मैं अपनी चूत की मालिश की मस्ती में इतनी मस्त थी कि मैंने भैया को कुछ नहीं बोला। बहुत सारा पानी वो भी प्रेशर से, उतने प्रेशर से तो मूत भी नहीं सकती, उतने प्रेशर से पानी निकलने लगा।

भैया भी एक्सपर्ट थे, उन्होंने न उँगलियाँ हटाई न मुंह बस वैसे ही मेरी चूत की सेवा करते रहे, मैं 2-3 मिनट तक झड़ती रही।

इतने प्रेशर से तो मैं कभी भी नहीं झड़ी थी, मुझे ऐसा लग रहा था जैसे किसी ने मेरी जान निकाल दी हो। मेरी इतनी जोर से चीख निकल गई थी कि उसकी इको मुझे अभी भी सुनाई दे रही थी।

मैं इतनी बुरी तरह झड़ी थी कि मैं पूरी सिकुड़ गई और मुझे ठण्ड लगने लगी।

भैया ने अंदर के कमरे से रजाई लाकर उढ़ाई और खुद भी रजाई के अंदर आकर मुझे जकड़ लिया और बोले- भाभी, आप ठीक हैं न?

मैंने कांपते और मस्ती में कहा- हाँ!

भैया ने मेरे चूतड़ों को हाथ में लिया, बोले- भाभी आप अभी भी थोड़ा थोड़ा डिस्चार्ज हो रही हो। आप कहो तो कोई टॉवल आपके नीचे लगा दूँ जिससे रजाई ख़राब न हो।

मैंने सिर्फ गर्दन हाँ में हिला दी।

भैया एक तौलिया लाये, मेरी टांगों के बीच रख दिया जहाँ से रिसता हुआ पानी देख हंसते हुए बोले- भाभी, आपने तो बाल्टी भर पानी फैला दिया।

मैंने मुस्कुरा कर थके हुए थिरकते हुए होंठों से कहा- भैया, आपने तो जान ही निकाल दी थी, बहुत मज़ा आया। जैसे आप कल रात नहीं भूलोगे वैसे ही मैं आज का दिन नहीं भूलूंगी। थैंक यू भैया, थैंक यू!

भैया बोले- क्या भाभी, आप जैसी हसीना ने मेरा लंड चूसा और चूत में लिया, थैंक्स तो मुझे बोलना चाहिए। अब आप थोड़ी देर आराम कर लो जिससे आप रिलैक्स हो जाओगी।

मैंने कहा- भैया, आपकी बाँहों में सोना है मुझे, प्लीज अपनी बाँहों में सुला लो।

मैंने उन्हें अपने आलिंगन में लिया और कब आँख लगी पता नहीं।

मैंने सोचा ‘आज ऑफिस से थोड़ा जल्दी चलता हूँ’ जिससे नीलेश और मधु के साथ ज्यादा टाइम गुज़ार पाऊँ।

मुझे ऑफिस से लौटते लौटते कम से कम 8 तो बज ही जाते हैं पर आज में 4 बजे ही ऑफिस से निकल गया।

मैंने सोचा जल्दी जाकर दोनों को सरप्राइज देता हूँ।

मैं बिल्कुल धीरे से बाहर का दरवाज़ा खोल फिर बिना आहट किये घर का प्रवेश द्वार खोलने लगा।

पर वो बंद था, तो मैंने अपनी चाबी निकाली और ताला खोल कर अंदर आया, दरवाज़ा जैसे ही खुला, दोनों सकपका गए।

अगले ही पल दोनों नार्मल होकर बोले- अच्छा तो तुम हो।

मैंने देखा मेरी बीवी मधु नीलेश की बाँहों में नंगी पड़ी थी, नीलेश के हाथ मेरी बीवी के बोबे सहला रहे थे और मेरी बीवी की टांगें नीलेश के लंड पे रखी थी।रजाई साइड में पड़ी हुई थी और मधु की टांगों के बीच एक तौलिया लगा हुआ था।

मैंने कहा- तुम दोनों मस्त रहो, मैं चेंज करके आता हूँ।

मधु बोली- मैं आपके लिए चाय बनाती हूँ, आप जब तक हाथ मुंह धो कर आओ।

मैंने कहा- तुम दोनों बैठो, मैं चाय लेकर आता हूँ।

नीलेश बोला- यार, सुबह से भाभी की सेवा कर रहा हूँ, एक सिगरेट तो पिला दे।

मैंने कहा- माँ के लवडे, सिगरेट तेरे पास ही पड़ी है, पी ले और एक मेरे लिए भी जला!

मधु बोली- राहुल, पता है आज भैया ने इतना अच्छा अनुभव दिया है कि आप ख़ुशी से इनको चूम लोगे। देखो मेरे नीचे जो पानी से गीलापन दिख रहा है वो सब इन्होंने मेरी चूत में से ही निकाला है।

मेरे कुछ बोलने से पहले नीलेश बोला- भाभी, आप उसे क्या बता रही हो। यही तो मेरे गुरू हैं, जब भी ज्ञान चाहिए होता है, इन्ही से ज्ञान लेता हूँ। यह हुनर मैंने राहुल से ही सीखा है।

मधु की आँखें आश्चर्य से बड़ी हो गई, बोली- अच्छा तो ये बात है? मतलब मेरे पतिदेव सेक्स गुरु है।

मैं बातें करते करते कपड़े उतार रहा था, मैंने कहा- चलो दोनों एक जिस्म दो जान, ज़रा दोनों कुछ पहन लो, शाम होने वाली है तेरी बीवी को लेने भी जाना है।

नीलेश ने सर पकड़ा और बोला- यार क्यूँ आ गई कवाब में हड्डी! अब मैं अपनी भाभी को कैसे प्यार करूँगा?

मधु हंसती हुई बोली- छुप छुप के!

मैं भी हंसने लगा, मैंने कहा चल- अभी तेरी बीवी के आने में टाइम है, तू तब तक मधु को एक बार चोद ले… फिर पता नहीं कब मौका मिले तुझे मेरी बीवी को प्यार करने का!

नीलेश बोला- मेरा तो बहुत मन है भाभी की चूत मारने का… पर साला अब मेरा लंड खड़ा नहीं होने वाला। इसे पिछले आधे घंटे से भाभी मसल रही है और यह साला कुम्भकरण की तरह सोया पड़ा है।

मधु हंसने लगी।

मैंने कहा- तो फिर चल तू ही खड़ा हो जा भेनचोद… तेरा तो खड़ा होने से रहा। रात को तेरी बीवी आ जायेगी थोड़ा मलाई उसके लिए भी बचा ले, वो भी तो काफी दिनों से मायके में है।
 
नीलेश खड़ा हो गया, बीवी चाय बनाने चली गई, मैं अपने जांघिए में सोफे पे बैठा गया।

नीलेश ने सिगरेट जला ली और मुझे दी।

मैंने कहा- क्यूँ भाई, मानता है अब तुझे अपनी बीवी को रेडी करना है।

नीलेश बोला- भाई, मैं पूरी कोशिश करूँगा कि वो हम लोगों के गैंग में शामिल हो जाए… बाकी खुद की मर्जी!

मैंने कहा- कोई चिंता नहीं है, तू बस कोशिश करना बाकी फल की इच्छा तो हम करते ही नहीं हैं।

नीलेश बोला- यार, मैं तेरा कैसे शुक्रिया अदा करूँ, तूने मेरी ज़िन्दगी में चार चाँद लगा दिए हैं।

मैंने कहा- मुंह में ले ले।

यह हमारे यहाँ का तकिया कलाम है, जब किसी से कहना होता है ‘Mention not’ तो उससे कह देते है मुंह में ले ले।

वो अभी तक नंगा ही खड़ा था, वो घुटनों पर बैठा और मेरा लंड जो आधा जगा हुआ था, चड्डी से बाहर निकाला और मुंह में ले लिया। मैं सिगरेट का कश लेने लगा।

इतने में बीवी अंदर से चाय लेकर आ गई, उसने भी अब तक कोई कपड़ा नहीं पहना था, बोली- आप अपना लंड इनसे क्यूँ चुसवा रहे हो?

मैंने कहा- मैंने सिर्फ इतना कहा था कि ‘मुंह में ले ले’ इसने सही में ले लिया।

और मैं हंसने लगा।

नीलेश ने अपने मुंह से लंड निकाला और बोला- भाभी, मुझे लंड मुंह में लेना भी उतना ही अच्छा लगता है जितना चूत को। इसलिए इसने कहा तो मैंने ले लिया।

मैंने थोड़ा हिल ढुल कर अपनी चड्डी पूरी उतार दी।

मधु बोली- फिर तो भैया आप अपनी गांड में लंड भी ले लेते होंगे।

नीलेश ने फिर से मुंह से लंड निकाला और बोला- नहीं भाभी, इसका अनुभव नहीं है। पर देखूंगा किसी दिन शायद राहुल मेरी गांड मारने को बोलेगा और मैं मरवाने की कोशिश करूँगा। अभी तो यह नहीं पता कि गांड मरवाने में कितना दर्द होगा।

और फिर से लौड़ा चूसने लगा।

मैंने कहा- तू छोड़ न उसे, मुझे चाय दे।

मैं आराम से चाय पिता रहा नीलेश लंड चूसता रहा और मधु चाय पीते पीते उसे मेरा लंड चूसते हुए देखती रही।

मैंने कहा- नीलेश, तेरी चाय ठंडी हो रही है, चल चाय पी और लेकर आ तेरी बीवी को क्योंकि मेरे लिए तो सरप्राइज है न!

नीलेश बोला- यार, घंटा सरप्राइज है, मैं उसे फ़ोन कर देता हूँ कि मैं राहुल के साथ ही तुझे लेने आ रहा हूँ।

उसने फ़ोन उठाया मधु मेरी गोद में आकर खड़े लौड़े पर बैठ गई, मुझसे बोली- आप मेरी चूत मार लो, फिर चलते हैं। भैया को बोलो वो पूछ लें कि गाड़ी कितनी लेट चल रही है और फिर वो बाहर जाकर थोड़ा घूम आयें, तब तक हम एक बाज़ी निबटा लेंगे।

मैंने जोर से कहा- नीलेश, पूछ कहाँ तक पहुँची हैं उसकी ट्रेन।

फिर थोड़ा धीरे से बोला- उसको बाहर क्यूँ भेजेंगे? उसके सामने अपने पति से चुदने में शर्म आएगी क्या?

मधु थोड़ा शर्मा गई और बोली- आप भी न? आपसे तो मैं सड़क पे चुदवा सकती हूँ… उनके सामने काहे की शर्म जब उनके साथ तो कल से नंगी ही पड़ी हूँ।

वो बोला- भाई गाड़ी ऑन टाइम है और पलवल क्रॉस कर गई है, चलो जल्दी से!

मैंने मधु को बोला- चल कोई नी, तुझे आकर चोदता हूँ।

मधु बोली- मैं घर में पड़ी पड़ी क्या करुँगी, मुझे भी ले चलो।

मैंने कहा- तो ठीक है, चल तैयार हो जा।

अब हम कार में बैठे, मैंने मधु को आगे बैठाया और नीलेश को पीछे, मैंने कहा- मधु साथ में चुदाई में बहुत आनन्द आता है न?

मधु बोली- हाँ, बहुत मज़ा आता है। दिन भर कोई न कोई आपके आसपास रहता ही है लंड और चूत के मिलन चाहे जब हो जाता है। और पति के अलावा कोई और जब देख या छू रहा हो तो चुदाई का मज़ा और बढ़ जाता है।

पीछे बैठे नीलेश ने मधु की तरफ हाथ बढ़ाये और उसके बूब्स दबा दिए।

मधु बोली- भैया, ऐसे मत करो, कोई देख लेगा।

नीलेश बोला- सॉरी भाभी, पर बीवी के आने के बाद आपको पता नहीं कब छू पाऊँगा? उसी टेंशन के मारे सोच रहा हूँ कि वो ना आती तो ही अच्छा होता। हम तीनों कैसे दिन भर एक दूसरे की बाहों में पड़े रहते पर अब नीता के आने के बाद सबको कपड़े पहनने पड़ेंगे।

मेरी और मधु की बहुत बुरी तरह हंसी छूट गई, मैंने मधु से कहा- जब हम तीनों को मज़ा आया तो नीता को भी आएगा मज़ा। नीलेश तू उसे पटाने की कोशिश करना, मधु तुम भी कुछ ऐसा करो कि वो हमारी गैंग में शामिल हो जाए। मैं तो खैर कोशिश करूँगा ही। क्यूँ मधु, करोगी न?

मधु थोड़ी सोच में पड़ गई, फिर बोली- मैं आपके लिए कुछ भी कर सकती हूँ। आपको नीता अच्छी लगती है क्या?

मैंने कहा- मैंने उसे कभी देखा ही नहीं। शादी में स्टेज पर देखा था पर उस समय तो इतना मेकअप लहंगा और ज्वेलरी होती है कि लड़की कहाँ दिखती है। इसलिए ऐसा कुछ नहीं है। पर हाँ, ग्रुप सेक्स में मज़ा तो आएगा ही। तुम्हे भी तो तुम्हारे भैया का लंड और अदाएँ मिलता रहेगा।

मधु बोली- चलो, मैं देखती हूँ कि मैं क्या कर सकती हूँ, जो बन पड़ेगा वो करुँगी। वैसे राहुल तुम प्लान करो और हम दोनों को गाइड करो तो शायद सक्सेस जल्दी मिल जाये।

नीलेश बोला- क्या बात है भाभी, मैं भी यही कहने वाला था।

और उसने मधु की जांघ दबा दी- भाभी, अब ये मत बोलना की कोई देख लेगा, अब कार के बाहर से आपकी जाघें थोड़े ही दिख रही हैं।

मैंने कहा- तू सीधा बैठ जा चूतिये, तेरी बीवी के चक्कर में हम दोनों बिना चुदाई के आ गये हैं। दोनों में भयानक आग लगी है और ऊपर से तू बकचोदी में लगा है।

मैंने ड्राइव करते करते अपना लंड बाहर निकाला और बोला- तुम दोनों मुझे सोचने दो।

मधु बोली- ये सड़क पे लंड बाहर निकाल के क्या सोच रहे हो?

मैंने कहा- तू अभी बोली थी न, सड़क पे चुद सकती है। चल अभी रास्ता खाली है मैं गाड़ी चला रहा हूँ, तू मेरा लौड़ा चूस।

वो फटाक से बिना कुछ कहे मेरे लंड पे झुक गई, उसके बूब्स गियर के ऊपर थे तो नीलेश ने नीचे से हाथ डाल के उन्हें सहलाना शुरू कर दिया।

मधु ने भी एक हाथ ले जाकर नीलेश के लंड को पैंट के ऊपर से सहलाने लगी।

थोड़ी ही देर में मैंने मधु को बोला- चल उठ जा, मुझे आईडिया आ गया है। बस तुम जब भी में कुछ पूछूँ या करने को कहूँ तो सवाल किये बिना करना शुरू कर देना। मधु, मेरे लंड को मेरे जीन्स में डाल के चैन बंद कर दे, सामने पुलिस की गाडी खड़ी है।

हम लोग स्टेशन पहुंचे, गाड़ी से बाहर निकल के अंगड़ाई ली और मैंने एक सिगरेट जला ली।

नीलेश फ़ोन पर नीता को हमारी लोकेशन बता रहा था।

5-7 मिनट में ही नीता एक बेहद खूबसूरत जवान मदमस्त हसीना हमारी आँखों के सामने आ गई। उसे देखते ही मैंने उसे अपने ख्यालों न जितने पोजीशन में चोद दिया।

नीलेश नीता के हाथों से बैग लेने आगे बढ़ा, मेरे हाथ का सिगरेट फेंकते हुए मैं आगे बढ़ा, वो पाव छूने झुकी, मैंने उसको उठाया और बोला- इतना बड़ा मत बनाओ, बुड्ढों वाली फीलिंग आ जाती है!

और गले लगा लिया।

गले लगाते ही उसके सीने का नाप तोल और झाँक का कूल्हों का माप ले लिया था मैंने।

नीता को मैंने अलग किया तो वो जाकर मधु के पाँव छूने लगी, मधु ने भी उससे पाँव नहीं छुआए, बोली- जब मेरे पति ने पाँव नहीं छुआए तो में कैसे? आओ गले लगो।

मैंने और नीलेश ने सामान गाड़ी में रखा और मैंने कहा- मधु तुम आगे बैठो, और नीलेश तुम पीछे।

मधु मुझे देख रही थी, मैंने कहा- अब वो दोनों इतने दिनों बाद मिले हैं, बैठने दो साथ में!

और मैं हंस दिय, मधु भी मुस्कुरा कर आगे बैठ गई।

गाड़ी में काफी देर ख़ामोशी रही फिर मैंने ही आइस ब्रेक करते हुए कहा- नीता, तुम्हारा सफर कैसा रहा/

बोली- भैया अच्छा था सफर!

मैंने कहा- सैयां के इंतज़ार में सफर लम्बा लगा या जल्दी कट गया?

वो थोड़ा मुस्कुराई और नीलेश की आँखों में देख कर बोली- जब इंतज़ार करो तो सफर लम्बा ही लगता है।

मैंने बात आगे बढ़ाते हुए कहा- ये बात तो सही है। पर अब तुम यहाँ बिल्कुल पर्दा वरदा मत करना, हम दोनों भाई बाद में पहले दोस्त हैं। और दोस्ती में ये सब औपचारिकता ठीक नहीं है। सही कहा न मैंने मधु?

मधु बोली- हाँ नीता, तुम आराम से रहो जैसे किसी दोस्त के यहाँ आई हो! और हमारे यहाँ का एक नियम है कि कोई नियम नहीं है।

सब लोग थोड़ा चुप हुए फिर एक सेकंड बाद सब लोग जोर जोर से हंसने लगे।

मैंने कहा- मेरे साथ रहकर तुम तो बहुत अच्छे डॉयलॉग देने लगी हो बे।

हम मस्ती मज़ाक और हंसते मुस्कुराते हुए घर पहुंचे।

नीलेश बीवी को छोड़ के और सामान रखकर वापस आकर गाड़ी में बैठ गया।

मधु और नीता घर पर एक दूसरे से गप्पें लड़ाने वाली थी तो मैंने और नीलेश ने सोचा थोड़ा घूम के आयें।

हमने गाड़ी घर पे ही खड़ी करके पैदल चल के जाने के बारे में सोचा।

नीलेश ने पूछा- क्यूँ, कैसी लगी नीता?

मैंने कहा- भाई चलती फिरती एटम बम है वो तो, और तू जिस हिसाब से बता रहा था उससे तो मिलने का मन ही नहीं था मेरा। नीलेश बोला- चल यार, इतनी भी खूबसूरत नहीं है… तू तो ऐसे ही तारीफों के पुल बाँध रहा है।

तो मैंने हंसते हुए कहा- तो फिर तू जितने भी दिन यहाँ है, उतने दिन और रात तेरी बीवी को मैं चोदता हूँ और तू तेरी भाभी की ले! तू भी खुश में भी।

नीलेश बोला- तुझे सच में इतनी अच्छी लगी नीता?

मैंने कहा- कोई शक?

नीलेश बोला- यार, तू कैसे भी बस ग्रुप सेक्स का इंतज़ाम कर, ज़िन्दगी का मज़ा आ जायेगा जब अपनी बीवी नीता के सामने मधु भाभी को चोदूँगा… और तू मेरे सामने मेरी बीवी की चूत बजाएगा।

मैंने कहा- हाँ यार, कुछ चल तो रहा है दिमाग में… पर ढंग से कोई सटीक आईडिया नहीं आ रहा! खैर तू चिंता मत कर, नीता की चुदाई के लिए मैं कुछ भी करूँगा।

नीलेश बोला- यार, अब तो तू हद कर रहा है, इतनी भी सुन्दर नहीं है नीता और मधु भाभी के सामने तो कुछ भी नहीं है।

मैं बोला- वो तेरी बीवी है इसलिए तुझे छोड़ के सबको अच्छी लगेगी!

और हम दोनों हंसने लगे।

टहलते टहलते हम दोनों ठेके के करीब आ गये थे, मैंने कहा- तेरी बीवी को ड्रिंकिंग से कोई परहेज़ तो नहीं है न?

नीलेश बोला- वो नहीं पीती पर कोई और पिए तो शायद उसे कोई प्रॉब्लम नहीं होनी चाहिए। चल लेकर चलते हैं, अपन तो पिएंगे ही। मैंने फटाफट एक बोतल, कुछ खाने पीने के सामान वगैरह लिए और घर की ओर चल दिए।

क्या नीता ग्रुप सेक्स के लिए तैयार हो जाएगी?

क्या राहुल नीता की चूत को चोद पाएगा?

क्या नीलेश अपनी बीवी नीता के सामने अपनी भाभी मधु को चोद पाएगा?
 
चचेरे भाई की बीवी को भी शामिल किया

मेरी पिछली कहानी के मुख्य एवं संक्षिप्त वर्णन। बुआ के लड़के नीलेश का मेरे घर दिल्ली में आना, लंड चूसना। फिर अपनी बीवी को उसके साथ सोने के लिए तैयार करना। फिर तीनो की मस्त चुदाई और अब नीलेश की बीवी अपने मायके से सीधा दिल्ली मेरे घर आ चुकी है।

हमने गाड़ी घर पे ही खड़ी करके पैदल चल के जाने के बारे में सोचा।

नीलेश ने पूछा- क्यूँ, कैसी लगी नीता?

मैंने कहा- भाई चलती फिरती एटम बम है वो तो, और तू जिस हिसाब से बता रहा था उससे तो मिलने का मन ही नहीं था मेरा। नीलेश बोला- चल यार, इतनी भी खूबसूरत नहीं है… तू तो ऐसे ही तारीफों के पुल बाँध रहा है।

तो मैंने हंसते हुए कहा- तो फिर तू जितने भी दिन यहाँ है, उतने दिन और रात तेरी बीवी को मैं चोदता हूँ और तू तेरी भाभी की ले! तू भी खुश में भी।

नीलेश बोला- तुझे सच में इतनी अच्छी लगी नीता?

मैंने कहा- कोई शक?

नीलेश बोला- यार, तू कैसे भी बस ग्रुप सेक्स का इंतज़ाम कर, ज़िन्दगी का मज़ा आ जायेगा जब अपनी बीवी नीता के सामने मधु भाभी को चोदूँगा… और तू मेरे सामने मेरी बीवी की चूत बजाएगा।

मैंने कहा- हाँ यार, कुछ चल तो रहा है दिमाग में… पर ढंग से कोई सटीक आईडिया नहीं आ रहा! खैर तू चिंता मत कर, नीता की चुदाई के लिए मैं कुछ भी करूँगा।

नीलेश बोला- यार, अब तो तू हद कर रहा है, इतनी भी सुन्दर नहीं है नीता और मधु भाभी के सामने तो कुछ भी नहीं है।

मैं बोला- वो तेरी बीवी है इसलिए तुझे छोड़ के सबको अच्छी लगेगी!

और हम दोनों हंसने लगे।

टहलते टहलते हम दोनों ठेके के करीब आ गये थे, मैंने कहा- तेरी बीवी को ड्रिंकिंग से कोई परहेज़ तो नहीं है न?

नीलेश बोला- वो नहीं पीती पर कोई और पिए तो शायद उसे कोई प्रॉब्लम नहीं होनी चाहिए। चल लेकर चलते हैं, अपन तो पिएंगे ही। मैंने फटाफट एक बोतल, कुछ खाने पीने के सामान वगैरह लिए और घर की ओर चल दिए।

शाम को रंगीन बनाने का इंतज़ार अपने चरम पर था, बोतल, चिकन, चिप्स और बाकी चखना देख कर मधु दरवाज़े पर ही समझ गई की आज की शाम भी यादगार शाम होने वाली है, उसके चेहरे पर उत्सुकता का भाव साफ़ दिखाई पड़ रहा था, वो भी बेताब थी ये देखने के लिए की आखिर मैं ऐसा क्या करूँगा जिससे नीता भी हमारी सामूहिक चुदाई का हिस्सा बन जाये।

खैर जब तक हम लौट कर आये, मधु ने पूरा घर दिवाली की तरह सजा दिया था, हर जगह खुशबू वाली मोमबत्तियाँ लगा कर घर के वातावरण को खुशनुमा और मादक बनाया हुआ था। हर चीज़ सलीके से तरतीब के साथ रखी हुई थी। मैंने घर में घुसते ही ऐसे सुसज्जित घर को देखकर मधु से कहा- वाह यार, बीवी तुमने तो दिल खुश कर दिया। घर कितना अच्छा लग रहा है बस बेचारा कभी भी तुम्हारी बराबरी नहीं कर पता। घर की सबसे सुन्दर चीज़ तो तुम हो।

मधु थोड़ा मुस्कुराई और शर्मा कर खाने का सामान हाथ से लेकर किचन में चली गई.

नीता सोफे पर बैठ कर सब सुन रही थी, बोली- सुनो, देखो भैया कितने अच्छे हैं, अपनी बीवी की कितनी अच्छे से तारीफ़ करते हैं, कुछ सीख लो उनसे!

नीलेश तुनक कर बोला- तू कुछ ऐसा काम भी तो किया कर कि तारीफ़ कर सकूँ।

नीता आश्चर्य के भाव से सिर्फ नीलेश को देखती रही और फिर सर झुका लिया।

मैंने कहा- वाह भाई वाह, इतने दिनों बाद मिल रहे हो और फिर भी लड़ रहे हो? कितना प्यार है तुम दोनों के बीच।

नीता की तरफ देखकर बोला- नीता, तुम थक गई होगी, चाहो तो थोड़ी देर कमर सीधी कर लो, अंदर जाकर लेट जाओ।

नीता बोली- नहीं भैया, मैं ठीक हूँ, गाड़ी में भी में सोती हुई आई हूँ।

मैंने मजाकिया अंदाज़ में नीलेश की तरफ देखकर बोला- भाई देख ले, ये तो अपनी नींद पूरी करके आई है जिससे…

और मैं चुप होकर बोतल टेबल पर रख कर गिलास लेने किचन में चला गया, गिलास बर्फ सोडा और ज़रूरी सामान के साथ बाहर आया तो नीलेश और नीता दोनों सोफे पर बैठ कर कुछ कानाफूसी कर रहे थे, दोनों हाथों में हाथ डाल के नए युगल प्रेमी की तरह दिख रहे थे।

मुझे देखते ही दोनों थोड़ा ठिठक गए और हाथ दूर कर लिए।

मैं सामान टेबल पर रख के दोनों के करीब आया और नीलेश का हाथ उठाया और नीता के कंधे पर रख दिया और नीता का हाथ उठाया और नीलेश की कमर पर रख दिया और कहा- देखो, इसे दोस्त का घर समझो और दोनों आराम से रहो, अब इतने दिनों बाद मिले हो तो बहुत कुछ होगा एक दूसरे से बतियाने और पूछने को!

नीता को शायद बहुत अच्छा लगा।

नीलेश बोला- हाँ यार, मैं तो जानता हूँ फिर भी ये घबराई तो मैं भी पीछे हट गया। अब हम लोग जॉइंट फैमिली में रहते हैं, इसलिए ऐसे ही हो गए हैं।

मैं नीता को आँख मार कर बोला- ऐसा महसूस करो कि यहाँ कोई है ही नहीं… और हाँ, अगर पीने का मूड हो तो बता देना, मैं सर्व कर दूंगा।

नीता जैसा एकदम चौक गई और नीलेश से बोली- यार आप भी न… भाभी बेचारी अकेली लगी हुई है किचन में!

मधु वहीं से बोली- अरे तुम थकी होगी, बैठो आराम से, मैं भी बस आती हूँ अभी।

पर नीता कहाँ सुनने वाली थी, वो तब तक तो उठ के किचन में चली ही गई।

नीता के किचन में जाने के बाद हम दोनों अपने पैग और गाने लगाने में मस्त हो गए। नीलेश ने मस्त रोमांटिक गानों का कलेक्शन लगा दिया और मैंने बढ़िया से पैग तैयार कर दिए, पैग उठाकर हम दोनों भी किचन में चले गए।

मैं किचन में जाकर मधु की तरफ पैग बढ़ाकर बोला- चियर्स डार्लिंग!

मधु ने मेरे गिलास को किस किया और छोटा सा सिप लेकर बोली- चियर्स जान!फिर मैंने गिलास नीलेश की तरफ बढ़ाया और गिलास से टकरा के बोला- चियर्स!

और अपने पैग को सिप करने लगा।

हमारी इस हरकत को देखकर नीता को भी लगा कि शराब पीने का यह रोमांटिक अंदाज़ अच्छा है, नीलेश जो पैग पीने के लिए लगभग मुंह से लगा ही चुका था, उसके घूंट मारने से पहले नीता ने नीलेश के हाथ को रोका और अपने होंठों के पास लेकर मधु की तरह किस करके एक छोटा सा सिप किया और बोली- चियर्स नीलू!

नीलेश भी अपना पैग थोड़ा ऊँचा उठा कर बोला- थैंक्स एंड चियर्स डार्लिंग!

मेरी कोशिश कामयाब होती सी दिख रही थी, मुझे यही देखना था कि नीता ऐसी परिस्थिति में कैसी प्रतिक्रिया देती है।

मैंने नीलेश को थोड़ा छेड़ते हुए कहा- हाँ भाई नीलू?

और हंसने लगा।

नीलेश बस सर नीचे करके मुस्कुराता रहा।

हम लोग ऐसे ही किचन और ड्राइंग रूम में इधर उधर करते करते गानों का मज़ा लेते हुए दो पैग डाउन हो चुके थे। थोड़ा नशा होने लगा था और थोड़ा मुझे दिखाना था जिससे मेरी हरकत अगर किसी कारण से बुरी लग भी जाए तो नाम शराब का बदनाम हो।

मैंने पीछे से जाकर मधु को पकड़ा और उसके गले पे धीरे से काट कर किस कर लिया।

नीलेश कमरे में था पर नीता वही खड़ी थी, मधु जान करके मुझे हटा कर बोली- अरे आप भी कहीं भी शुरू हो जाते हो, देखो नीता यही खड़ी है।

मैंने नीता की तरफ देखा और बोला- तो खड़ी रहने दो उसे, हमने बता ही दिया था कि यहाँ एक ही नियम है कि कोई नियम नहीं है।

नीता बोली- भाभी, भैया आपको बहुत प्यार करते हैं।

मधु बिना कुछ बोले सर झुक कर मुस्कुरा दी।

मैं मधु के चूतड़ों पर एक चटाक लगा कर किचन से बाहर आ गया।

नीलेश बोला- यार राहुल, तू तो रोज़ नहा कर पैग पीता है, तो आज बिना नहाए कैसे पीने लगा?

मैंने थोड़ा झूमते हुए कहा- यार, वो नीता है न… इसलिये… और अपन को शाम को नहाने के बाद कपड़े पहनना पसंद नहीं है। तो तेरी बीवी को असहज लगता, इसलिए ऐसे ही पी ली आज!नीलेश बोला- यह तो गलत बात है, मतलब हम लोगों की मौजूदगी की वजह से तुम लोग असहज हो रहे हो।

और जोर से आवाज़ लगा कर बोला- नीता, चलो हम लोग किसी होटल में रात गुज़ार के आते हैं।

मधु नीता से धीरे से बोली- यार लगता है, दोनों को चढ़ गई है। इन लोगों की बातों को ज्यादा दिल से मत लगाना।

नीता बोली- भाभी, वो भैया को बोलिए न कि वो नहा लें, तो लड़ाई खत्म ही हो जाएगी।

मधु बोली- तुम जाकर बोल दो, तुम्हारी बात नहीं टालेंगे। हम दोनों में से तो वो किसी की नहीं सुनने वाले!

नीता किचन के दरवाज़े से खड़े होकर बोली- भइया, आप नहा के आ जाइये।

मैं नीता की तरफ देख कर बोला- ओके!

नीलेश बोला- जा अगला पैग तेरे आने के बाद ही बनाएंगे।

मैं थोड़ा गुस्से में बोला- तू नहीं बनाएगा पैग, पैग या तो मैं बनाऊंगा या या… या नीता बनाएगी।

नीता की तो शक्ल देखने लायक थी।

खैर मैं नहाने गया और आ गया तौलिया लपेट कर, मैं आकर सोफे पर बैठ गया और बोला- नीलेश तू भी नहा आ, नहाने के बाद पीने का मज़ा ज्यादा आता है। जो चढ़ी थी, वो थोड़ी सी उतर गई है, और सुरूर बहुत अच्छा है।

नीलेश नीता से बोला- मेरा तौलिया दे देना ज़रा!

और वो बाथरूम की तरफ चला गया।

जब तक नीता ने तौलिया निकाला, तब तक वो बाथरूम में जा चुका था।

मधु ने नीता को कोहनी मार कर कहा- जाओ तौलिया दे आओ भैया को।

नीता इशारे के साथ भावना को समझ गई थी, बोली- अच्छा मैं अभी आई।

नीलेश बाथरूम से गीला और नग्न अवस्था में बाहर आ गया, नीता बोली- ये लो तौलिया और अंदर जाओ, कोई आ जाएगा।

नीलेश बोला- यहाँ कोई बच्चा थोड़े ही है जो कोई आ जायेगा, तुम्हें तौलिया लेकर आने को बोला ही इसलिए था कि तुम्हें थोड़ा सा… बोलते बोलते गीले बदन ही नीता को बाँहों में भर लिया और उसके होंठों को चूमने लगा।

नीता के हाथ से तौलिया छूट गया और नीलेश के खड़े लंड पर जाकर टंग गया।

नीता के कपड़े भी थोड़े से गीले हो गए पर बेचारी कुछ एक महीने से प्यासी थी इसलिए उसे उस समय कुछ समझ नहीं आ रहा था और वो इस आज़ादी और अपने चुम्बन का रस ले रही थी।

नीलेश ने नीता को कपड़ों के ऊपर से ही चूचियाँ और चूतड़ दबा दबा कर और होंठों और गले पर चूम चूम कर बहुत गर्म कर दिया था। नीता नीलेश के कान में बोली- कमरा बंद कर लें?

नीलेश बोला- हाँ, कर तो सकते हैं, पर यह उनका बैडरूम है और बाथरूम भी सिर्फ इसी कमरे के साथ लगा हुआ है। बीच में किसी को कोई ज़रूरत आई तो बड़ा बुरा लगेगा।

नीता ने नीलेश को धक्का देकर अपने आप से अलग किया और बोली- हाँ, तुम सही बोल रहे हो, आज बीच में कोई नहीं आना चाहिए। महीने भर से प्यासी हूँ, आज तो तुम्हें खा जाऊँगी मैं!

नीलेश तौलिया लपेट कर बाहर आ गया।

नीता अपने कपड़ों को व्यवस्थित करके बाहर आये, उससे पहले नीलेश बाहर आकर सीधा मधु जो की नीचे कालीन पर बैठी हुई थी, के करीब पहुँचा और अपने लंड को बाहर निकाल के मधु के गाल पे मार दिया।

मधु ने नीलेश की तरफ देखकर मुस्कुरा कर लंड को हाथ में लेकर सहला दिया।

जल्दी से नीलेश मेरे बगल में आकर बैठ गया कि कहीं नीता देख न ले।

मैंने मधु को अंदर आने का इशारा किया, मधु उठी में भी उठ कर जाने लगी बैडरूम की तरफ तो नीता कमरे से बाहर आ रही थी। नीता के कपड़े थोड़े से गीले विशेष तौर पर बोबे और कंधे दिख रहे थे।

मैंने मधु का हाथ पकड़ा हुआ था जिसे देखकर नीता थोड़ा सर झुक कर मुस्कुरा कर जल्दी से दौड़ती हुई ड्राइंग रूम की तरफ चली गई। मैंने मधु को कमरे में अंदर बुला कर बोला- यार, तुम अपने ब्रा पैंटी उतार के बाहर आओ।

मधु बोली- वो तो आप इशारे से बताते तो भी मैं उतार के आ जाती पर अब केवल भैया नहीं है, उसकी बीवी भी है।

मैं बोला- इसलिए तो बोल रहा हूँ। तुम नंगी ही अच्छी लगती हो जानेमन!

मधु को बिस्तर पे बैठाया और उसके दूसरे गाल पे अपने लंड से थप्पड़ जैसे मारने लगा।

उसने मेरे लंड को हाथ से पुचकारा और लंड की तरफ देखकर बोली- आज तुझे नई चूत मिल सकती है, अच्छे से चुदाई मचाना मेरे शेर! और फिर मेरे लंड को चूमने और पुचकारने लगी।

फिर मेरी तरफ देखकर बोली- आप बाहर जाकर बैठो, मैं अभी आती हूँ नंगी होकर।

मधु मेरी नस नस जानती है, उसे पता है कब कौन से शब्द का उपयोग मुझे उत्तेजित कर सकता है।

मैं बाहर आकर सोफे पर नीलेश के करीब बैठ गया, हम दोनों ही तौलिये में थे। नीता कालीन पर दोनों पांव पीछे मोड़ कर बैठी थी, उसने जीन्स और टॉप पहना हुआ था।

नीता के बड़े बड़े बूब्स उसके पिछवाड़े से थोड़े बड़े थे, उसकी कमर ज्यादा से ज्यादा 30 रही होगी। उसका गोरा रंग बता रहा था कि उसका बदन संगमरमर सा चमकदार होगा।

मधु काले रंग की बड़े गले की मैक्सी पहन कर बाहर आ गई, ये मैक्सी बहुत मोटी थी, इसमें से कुछ भी अंदर तक नहीं दिखता था। मैं आदेश देते हुए बोला- मधु पैग बनाओ।

मधु आगे बढ़ी और झुक कर हमारे पैग बनाने लगी।

मधु के झुकने से उसके बोबे थोड़े ज्यादा दिखने लगे, मैंने कहा- मधु एक काम करो, तुम वो एयरहोस्टेस वाली ड्रेस पहन कर आओ और मुझे आकर्षित करने की कोशिश करो।

यह बात सुन कर तो नीता के कान खड़े हो गए। मधु धीमे क़दमों से बैडरूम की तरफ जा रही थी, नीता भी मधु के पीछे चली गई।

नीता ने जाकर मधु से बोला- भाभी, लगता है भैया को ज्यादा चढ़ गई है, आप उन्हें अंदर बुला लो, मैं नीलू को बाहर ही रखूंगी।

मधु बोली- थैंक्स यार, नीता पर वो इस समय कुछ नहीं सुनने वाले!

नीता बोली- तो आप नीलू के सामने भैया को कैसे आकर्षित करोगी? आपको अजीब नहीं लगेगा?

मधु बोली- वो वैसे भी ये सब मेरे या अपने लिए नहीं, तुम्हारे लिए कर रहे हैं जिससे तुम अपने पति के साथ आराम से चिपक कर या जैसे चाहो वैसे बैठ सको।

नीता बोली- भैया कितने अच्छे हैं न, मेरा कितना ध्यान रखने की कोशिश कर रहे हैं। भाभी मुझे भी कुछ ऐसे कपड़े दो न कि नीलू आपको न देखकर मुझे देखे।

मधु हंस के बोली- अच्छा तो ये बात है? मेरे पास 2 जोड़ी कपड़े हैं क्योंकि तुम्हारे भैया को भूमिका निभाने (Role Playing) वाले खेल पसंद हैं। एक तो एयर होस्टेस वाले कपड़े हैं और दूसरी नर्स की ड्रेस है। तुम चाहो तो नर्स बन जाओ।

नीता के लिए तो जैसे ये सब कुछ सपने जैसा था, वो बोली- हाँ भाभी, मैंने कुछ गन्दी मूवी में देखा है ऐसा भूमिका वाले खेल को खेलते हुए, आप लोग तो सच में बहुत दिलचस्प जोड़े हो। मुझे दिखाइए न वो नर्स वाले कपड़े में भी आज नीलू को सातवें आसमान की सैर कराती हूँ।

मधु बोली- ये हुई न बात, अब तुम खुल के बात कर रही हो।

मधु ने नीता को नर्स वाली वेशभूषा दिखाई तो नीता बोली- भाभी, यह तो बहुत छोटी है।

मधु बोली- हाँ, तभी तो आदमी को आकर्षित कर पाएंगे हम।

नीता अपनी टॉप और जीन्स उतारने लगी तो मधु बोली- तुम कहो तो मैं बाहर जाऊँ?

नीता बोली- भाभी, दोस्त भी बोल रही हो और ऐसी बात भी कर रही हो?

मधु बोली- नहीं, मुझे लगा कि तुम बोलने में संकोच करोगी इसलिए मैंने ही पूछ लिया, नीता तुम बहुत खूबसूरत इंसान हो। तुमने मुझे दोस्त सिर्फ समझा ही नहीं, मान भी लिया है, तुम्हारे व्यवहार से में बहुत खुश हो गई।

नीता बोली- आप भी ड्रेस पहन लो!

थोड़ा हंसते हुए बोली- या मैं बाहर जाऊँ?

मधु भी हंसने लगी और अपनी मैक्सी उतार दी।

नीता मधु को देखकर हैरान हो गई, बोली- भाभी, आपने अंदर कुछ पहना ही नहीं था।मधु बोली- हाँ तुम्हारे भैया को मैं ऐसे ही पसंद हूँ। इसलिए ऐसे ही जाती हूँ उनके सामने… ख़ास तौर पर जब वो ड्रिंक कर रहे हों।

नीता बोली- भाभी, आपका बदन तो बहुत खूबसूरत है।

मधु बातें सुनते सुनते ड्रेस पहनने लगी।

नीता बोली- भाभी आप इसके अंदर भी कुछ नहीं पहनने वाली क्या?

मधु बोली- यार जब उकसाना है तो पहनने का क्या फायदा!

फिर दोनों हंसने लगी।

मधु की ड्रेस किंगफ़िशर एयरलाइन्ज़ जैसे लाल और सफ़ेद रंग की थी। उसमे एक छोटा सा टॉप था और एक बहुत छोटी सी माइक्रो स्कर्ट… और पूरी टांगों के लिए सफ़ेद मौजे जो जांघ के थोड़े ऊपर तक आते हैं और लाल रंग की जूतियाँ।

नीता ने भी अपनी ब्रा और पैंटी उतार फेंकी और नर्स वाले कपड़े पहन लिए।

नीता बोली- भाभी, इससे तो मेरा पिछवाड़ा ढंग से ढक भी नहीं पा रहा?

नीता ने घूम कर दिखाया।

मधु बोली- हाँ, सही कह रही हो… पर यहाँ है ही कौन तुम्हें देखने वाला?

मधु बोली- मेरी स्कर्ट का भी यही हाल है, देखो!

नीता बोली- भाभी, इसमें तो ऐसा लग रहा है जैसे उनके सामने हम लोग बिना कपड़ों के ही हैं।

मधु बोली- यही तो रिझाने की कला है, थोड़ा दिखाओ थोड़ा छुपाओ, थोड़ा दिखा के छुपाओ थोड़ा छुपा के दिखाओ।

नीता को इस बात पर बहुत तेज़ हंसी आ गई, बोली- आपकी यह बात ज़िन्दगी में कभी नहीं भूल पाऊँगी।

मधु ने पहले नीता को कमरे में जाने के लिए कहा, बोली- मुझे तो मेरे पति इन कपड़ों में पचासों बार देख चुके हैं। तुम्हारे पति ने तुम्हें ऐसे कभी नहीं देखा होगा इसलिए पहले तुम जाकर अपना जलवा बिखेरो, मैं तुम्हार पीछे पीछे आती हूँ।

नीता थोड़ी शर्माती हुई थोड़ी घबराई हुई बैडरूम से बाहर निकली।

इधर में और नीलेश धीरे धीरे अपने लौड़ों को मसाज दे रहे थे।

हाँ आप सही समझे एक दूसरे के लौड़ों को… खुद हिलाने में वो मज़ा कहाँ!

नज़रों से पूरी तरह सतर्क और आँखें और कान बैडरूम के दरवाज़े पर जिससे दोनों में से कोई भी औरत आती दिखे तो लंड को तौलिये में छुपा सके।

जैसे ही आहट आई कि कोई इस तरफ आ रहा है, हमने अपने लंड तौलिया के अंदर कर लिए पर तम्बू बनने से रोक पाना मुश्किल था इसलिए सोफे पर पड़े छोटे तकिए अपनी गोदी में रख लिए।

नीता को नर्स की वेश भूषा में देखकर लंड तो हुंकार मारने लगा। वो बिल्कुल रंडियों की तरह किचन के दरवाज़े से टिक कर खड़ी हो गई थी।
 
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