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मैं, मेरी बीवी और चचेरा भाई

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जैसे ही आहट आई कि कोई इस तरफ आ रहा है, हमने अपने लंड तौलिया के अंदर कर लिए पर तम्बू बनने से रोक पाना मुश्किल था इसलिए सोफे पर पड़े छोटे तकिए अपनी गोदी में रख लिए।

नीता को नर्स की वेश भूषा में देखकर लंड तो हुंकार मारने लगा। वो बिल्कुल रंडियों की तरह किचन के दरवाज़े से टिक कर खड़ी हो गई थी।

पीछे से मधु भी आ गई और सीधे कालीन पर आकर बैठ गई और बोली- आपकी किस तरह सहायता कर सकती हूँ सर?

मैंने कहा- आज तो फ्लाइट में नर्स भी आई हुई है।

नीलेश नीता को देखते ही बोला- वाह यार नीता, तुम तो बहुत खूबसूरत लग रही हो।

और उसे अपने बगल में सोफे के हैंड रेस्ट पर बैठा लिया।

अब मैं मधु को चूमने लगा, उसके होंठों से होंठ मिला कर उसके मुंह के अंदर अपनी जीभ डाल के उसके जीभ से जीभ के पेंच लड़ाने लगा, वो भी मेरा भरपूर साथ दे रही थी।

मैंने तिरछी नज़र से देखा तो नीलेश भी नीता को चूम रहा था।

हम दोनों अपनी अपनी बीवी को मसल रहे थे।

मैं नीचे से हाथ डाल के मधु के नंगे चूतड़ सहलाने लगा और धीरे धीरे उसकी गांड के और नीचे आकर उसकी चूत को भी पीछे से ही पुचकारने लगा।

दोनों औरतें गर्म हो चुकी थी।

.

मैंने मधु को अपने से दूर हटाया और बोला- मुझे अंगूर खिलाओ!

मधु ने अंगूर का गुच्छा उठाया और गुच्छे से ही खिलाने लगी और एक अंगूर तोड़ कर अपने दोनों उरोजों के बीच रख लिया।

नीता और नीलेश हमें बड़े ध्यान से देख रहे थे। नीलेश का हाथ नीता के कूल्हों पर ही था। मैंने मधु की वक्षरेखा में जीभ घुसा कर अंगूर उठा लिया।

मधु को तो ज्यादा शर्म थी नहीं क्योंकि वो तो नीलेश के सामने कई बार नंगी हो चुकी थी।

पर नीता ने भी कोशिश की वो अपने स्तनों में अंगूर फंसा कर नीलेश को खिलाए।

अबकी बार हमारी नज़र उन दोनों पर थी। नीलेश जब उसके बूब्स में झाँक रहा था तो मैं उसके चूचों को निहार रहा था। नीता बेचारी देखा देखी सब कर तो रही थी पर उसे बहुत शर्म भी आ रही थी। पर शायद कहीं न कहीं वो इस आज़ादी से बहुत खुश थी और इसका आनन्द भी ले रही थी।

मधु मेरे बगल से उठकर हम दोनों के पैग बनाने के लिए जमीन पर बैठ गई।

मैंने कहा- क्यूँ नीता, मज़ा आ रहा है न दोस्त के यहाँ पर पूरी आज़ादी के साथ जीने का?

नीता थोड़ी बेसुध से सुध में आते हुए बोली- हाँ भैया, हम लोग ऐसा मज़ा सिर्फ अकेले में जब होटल में होते हैं तो ही कर पाते हैं।

मैंने कहा- नीता तुम बहुत खूबसूरत हो, तुम्हारा बदन का हर अंग एकदम तराशे हुए हीरे की तरह नुकीला और सुन्दर है।

नीता तो जैसे जमीन में गड़ी जा रही थी, वो थोड़ी शरमाई और अपने छोटे छोटे कपड़ों से अपने आपको ढकने की नाकाम कोशिश करने लगी।

नीलेश बोला- हाँ यार राहुल, यह बात तो तू सही बोल रहा है… मेरी बीवी है तो बहुत खूबसूरत पर भाभी का भी जवाब नहीं।

मैंने कहा- अब जब हम लोग इतने अच्छे दोस्त बन गए हैं तो आओ एक खेल खेलें।

मधु और नीलेश तो जानते ही थे कि यह मेरी कोई चाल होगी नीता को फ़ंसाने की… इसलिए उसके कुछ भी बोलने से पहले ही बोले- हाँ हाँ बताओ क्या गेम है?

मैंने कहा- कोई बहुत अलग नहीं, truth and dare जैसा ही है, बस जोखिम जो है वो थोड़े शरारती हो सकते हैं।

मैंने कहा- तो चलो सोफे थोड़ा पीछे करो! सभी लोग कालीन पर बैठ जाओ!

बीच में मैंने पर्चियों का टोकरा रख दिया- एक खाली बोतल को घुमाना है, जिस पर रुकेगा, उसके लिए जोखिम (dare) बोतल घुमाने वाला बताएगा।

बस तो नीता बोली- और अगर कोई truth लेगा तो?

मैंने कहा- यहाँ सिर्फ जोखिम ही ले सकते हैं, सच कोई नहीं ले सकता।

अब मैंने बोतल घुमाई और वो जाकर मधु पर रुकी, मैंने कहा- मधु तुम्हारे लिए जोखिम यह है कि तुम अपने बदन से कोई भी एक कपड़ा पूरे गेम के लिए अलग कर दो।

मधु ने थोड़ी ऐसी शक्ल बनाई जैसे उसे यह अच्छा न लगा हो।

फिर थोड़ा दिमाग लगा कर चतुराई का परिचय दिया और अपने गले में बढ़ा स्कार्फ़ उतार फेंका।

सभी ने ताली बजाई।

अबकी बार बोतल घुमाने की बारी मधु की थी। मधु ने बोतल घुमाई अबकी बार नीलेश पर जाकर बोतल रुकी।

मधु बोली- भैया, आप तौलिया में तो हो ही… सांवरिया वाले गाने पे डांस करके दिखाओ।

मैंने तुरंत सांवरिया वाला गाना लगा दिया, नीलेश खड़ा होकर गाने पर डांस करने लगा।

नीलेश ने रणबीर को अच्छा कॉपी करके डांस किया और दोनों लड़कियों को आकर्षित करने में कामयाब रहा।

अबकी बार बोतल नीलेश ने घुमाई और वो जाकर फिर से रुकी मधु पर!

मधु बोली- ओह नो…

नीलेश बोला- यार मुझे तो कोई आईडिया नहीं आ रहा कि क्या शरारती करवाऊँ? यार राहुल तू ही कुछ बोल!

मैंने कहा- नहीं, तेरी चाल है, तू चाहे तो पास कर सकता है।

नीलेश बोला- ऐसे कैसे पास? भाभी ने कहा मुझे छोड़ा था? भाभी आप अपने ड्रेस के टॉप के एक बटन को खोल दो पूरे गेम के लिए। मधु ने फाटक से एक बटन खोल दिया।

अबकी बार बोतल मधु ने घुमाई और वो जाकर रुकी मेरे ऊपर… मधु बोली- अब आया ऊँट पहाड़ के नीचे। आप अगले 3 मिनट तक के लिए खड़े हो जाओ और आप हिल नहीं सकते अगर आप हिले तो टाइम फिर से शुरू होगा।

मैं खड़ा हो गया।

मधु, नीलेश और नीता की तरफ देखकर बोली- तुम लोग क्या कर रहे हो? हेल्प मी, इन्हें अपन हाथ लगा सकते हैं, कुछ भी कर सकते हैं 3 मिनट तक और ये हिल नहीं सकते।

मधु अपनी जगह से उठी और मेरे करीब आकर मेरी छाती पर निप्पल पर अपने हाथ और उंगलियों से सनसनी करने लगी। उधर नीलेश ने मेरा तौलिया ऐसे पकड़ रखा था कि कभी भी खोल देगा।

मैंने कहा- नीलेश बेटा, बोतल सिर्फ मेरे ऊपर ही नहीं रुकी है। वो तेरे पे भी रुकेगी, इज़्ज़त बचा ले भाई की।

नीलेश मुझे झटके देता रहा जिससे मैं हिल जाऊँ तौलिया पकड़ने को।

मधु के टच के कारण मेरा लौड़ा आधा तो खड़ा हो ही गया था।

नीता भी मेरे करीब आई और मधु से बोली- भाभी, मैं क्या करूँ?

मधु ने कहा- जो तुम करना चाहो, ये तो एक मूर्ति हैं 3 मिनट तक… इस मूर्ति से जैसे चाहो खेलो, बस मूर्ति अपने आप हिल जानी चाहिए।

नीता नीलेश को देखकर बोली- सुनो मेरे पास एक आईडिया है पर तुम्हें बुरा तो नहीं लगेगा?

नीलेश बोला- यार दोस्त यारों के साथ खेल खेलते हैं तो बुरा क्या लगना है, करो जो तुम्हें करना है।

नीता ने आकर मेरे कमर में हाथ डाला और बोली- इनको गुदगुदी करते हैं।

मधु बोली- इनको गुदगुदी नहीं होती यार… चल तू कोशिश कर!

मधु बोली- तुम्हें ऐसे तो नहीं छोडूंगी।

इतने में नीलेश बोला- भाभी, आपको ऐसे आईडिया आते कहाँ से हैं।

मधु जमीन में बैठकर मेरी जांघों और पैरों पर चुम्बन करने लगी, अपने हाथ फेरने लगी जो कि मेरे चूतड़ों तक जा रहे थे।

उसके कारण मेरा लंड और अकड़ गया।

मैंने यहाँ तक सब सम्भाल लिया पर नीता भी कमर में हाथ डाले हुए थी और वो मधु की हरकत को बड़े ध्यान से देख रही थी। तो उसके मुंह से एकदम निकल गया- भैया आपका तो बहुत बड़ा है?

मेरी नज़र एकदम से नीचे चली गई।

इतने में मधु उछलती हुई बोली- ये… ये… आउट आउट! अब टाइम फिर से शुरू होगा।

मैंने नीता से कहा- क्या यार, हरवा दिया तुमने?

नीता भी हंसने लगी और वो थोड़ी और आज़ाद महसूस करने लगी क्योंकि किसी ने उसकी तरफ ऐसे देखा ही नहीं जैसे उसने कुछ गलत बोल दिया हो।

खैर में अगले 3 मिनट तक एक जैसा खड़ा रहा जबकि मधु से 2-4 बार मेरे लंड को तौलिया के अंदर हाथ डाल के भी पुचकार दिया। हम लोग वापिस खेलने के लिए बैठ गए।

अब अभी अभी मेरे शरीर से दो लड़कियाँ खेल रही थी इसलिए लंड तो खड़ा था ही… तो मैंने कहा- देखो भई, तुम लोगों ने उकसाया है अब, अभी उसे बैठने में टाइम लगेगा, तब तक दोनों लड़कियों तुम मेरे तम्बू को देखकर अपने आप को गर्म कर सकती हो।

और हंसने लगा।

अबकी बार बोतल मुझे घुमानी थी, मैंने बोतल घुमाई और जैसा सोचा था नीता पर जाकर रुकी।

नीता बोली- नो नो… मैं नहीं खेल रही!

नीलेश बोला- वाह, जब तक हम लोगों पर आ रहा था तो मजे ले रही थी अब नहीं खेलना?

मधु बोली- ये तो गलत बात है नीता… ऐसे थोड़े ही होता है?

मैंने कहा- देख लो ज्यादा मुश्किल काम नहीं देंगे तुम्हें।

नीता बोली- यार थोड़ा तो नाटक करना चाहिए न, बस वही कर रही थी, मैं तैयार हूँ, बताओ क्या करना है?

मैंने कहा- तुम्हें हम तीनों में से किसी को भी अगले 5 मिनट तक किस करना है। 5 मिनट तक होंठों से होंठ अलग हुए तो टाइम फिर से शुरू होगा। तुम जिसे भी किस करोगी उसके अलावा बाकी के दोनों लोग तुम्हारा चुम्बन तोड़ने की कोशिश करेंगे। बताओ तुम किसे चूमना चाहती हो?

नीता थोड़ी संकोच के साथ बोली- किसी को भी?

सबने एक सुर में कहा- हाँ भई, किसी को भी!

नीता थोड़ा सोच कर बोली- मैं नीलू को किस करुँगी।

नीलेश बोला- मुझे तो हमेशा ही चूमती है और चूम सकती है, चाहे तो अभी भी अपना फैसला बदल सकती है।

नीलेश की नशे में चूर मदहोश आवाज़ ने नीता को दोबारा सोचने पर मजबूर किया, नीता नीलेश की तरफ देखकर बोली- फिर तो मेरे पास भैया को चूमने के अलावा कोई और चारा ही नहीं है।

मैंने कहा- मजबूरी में नहीं, तुम चाहो तो मधु को भी किस कर सकती हो।

नीता ने मधु की तरफ देखा और बोली- भाभी, आपके होंठ बहुत गुलाबी हैं, मैं आपको किस करू तो आपको…

मधु बात पूरी होने से पहले ही बोली- यार, इतना मत सोच, तुम जिसको भी बोलोगी उसे तुम्हें किस करना ही पड़ेगा। वैसे मैं ज़िन्दगी में पहली बार किसी लड़की को किस करने वाली हूँ। पता नहीं कैसा लगेगा।

नीता बोली- तो भाभी, आज चखते हैं कि लड़की को किस करना कैसा लगता है, मेरा भी यह पहला अनुभव होगा जब मैं किसी लड़की को चूमूँगी।

नीता अपने घुटनों पर बैठ गई और मधु भी घुटनों पर आ गई जिससे दोनों की लम्बाई बराबर आ जाये।

मैंने स्टॉप क्लॉक चालू करके कहा- आपका समय अब शुरू होता है… अब!

एक एयर होस्टेस की ड्रेस में एक नर्स की ड्रेस में छोटे छोटे कपड़ो में एक दूसरे को चूमने के लिए जैसे ही अपने होंठों को होंठों से मिलाया, मैंने नीलेश को इशारा किया तू मधु के पीछे से जा, मैं नीता के पीछे से जाता हूँ।

नीता को बहुत देर से देख रहा था कि वो अपने छोटे कपड़ों में अपने बदन को ढकने की कोशिश कर रही थी पर अब वो कुछ ख़ास कर नहीं सकती थी। उसकी माइक्रो स्कर्ट से उसके कूल्हे न के बराबर ही ढक पा रहे थे।

मैं नीता के पीछे जाकर उसकी टांगों की तरफ मुंह करके लेट गया और थोड़ा खिसक कर उसकी टांगों के बीच अपना मुंह पहुँचा लिया। उसने अंदर कुछ पहना तो था ही नहीं, उसकी नंगी चूत अब बिल्कुल मेरी आँखों के सामने थी।

इधर नीलेश मधु के पीछे गया और मधु को बहुत देर से अधनंगी देख देख कर नीलेश कामोत्तेजित हो चुका था। क्योंकि नीता के होंठ से होंठ मिले हुए थे तो वो मधु के पीछे क्या हो रहा है, नहीं देख सकती थी, नीता को सिर्फ नीलेश की शक्ल ही दिख रही थी।

नीलेश ने चतुराई से नीता से बिना नजर चुराए अपना लंड तौलिया से थोड़ा बाहर निकाल के मधु की आधी नंगी गांड पे रगड़ना शुरू कर दिया और अपने हाथों से मधु के कूल्हे दबा रहा था।

इधर मैं इनके चुम्बन को तोड़ने के लिए नीता के नीचे लेटे लेटे बोला- यार नीता, तुम्हारी चूत पर तो एक भी बाल नहीं है। आज ही बनाए हैं क्या?

वो किस करते करते उंह उंह करके कुछ बोलने की कोशिश कर रही थी और अपनी चूत पर अपना एक हाथ रख लिया।

मैंने कहा- यार नीता, तुम्हारे चूतड़ भी बहुत बढ़िया और गोल हैं एकदम मस्त चिकने।

इस बार तो नीता के सब्र का बाँध टूट ही गया, वह चुम्बन करना छोड़ बोली- भैया, मैं आपकी बहू जैसी हूँ, आपको इस तरह करना शोभा देता है क्या? भाभी, आप भी कुछ नहीं कह रही?

मैंने कहा- कौन बहू? मैं तो यहाँ अपने दोस्तों के साथ खेल रहा हूँ।

मधु बोली- मैं क्या बोलूँ, नीलेश भी तो मेरे पीछे से मेरे कूल्हे सहला रहा है। एक दो बार तो उसकी ऊँगली मेरे छेद को भी छू आई है। पर तुम्हारा ये जोखिम पूरा हो जाये उसके लिए मैंने अपना मुंह नहीं हटाया। यार दोस्तों-यारों में सब चलता है, और फिर हमारे पति कोई बेईमानी तो कर नहीं रहे, जो कुछ कर रहे हैं, हमारे सामने ही कर रहे हैं। अब जब तुम xxx मूवीज देखती हो तो तुम्हारा भी तो मन करता है न कि सम्भोग करें। ऐसे ही मेरे पति तुम्हें और तुम्हारे पति मुझे देख कर उत्तेजित हो रहे है। उन्हें होने दो उत्तेजित… जब ज्यादा उत्तेजित होंगे तभी तो हमें अच्छे से प्यार करेंगे न

मधु बोली- मैं क्या बोलूँ, नीलेश भी तो मेरे पीछे से मेरे कूल्हे सहला रहा है। एक दो बार तो उसकी ऊँगली मेरे छेद को भी छू आई है। पर तुम्हारा ये जोखिम पूरा हो जाये उसके लिए मैंने अपना मुंह नहीं हटाया। यार दोस्तों-यारों में सब चलता है, और फिर हमारे पति कोई बेईमानी तो कर नहीं रहे, जो कुछ कर रहे हैं, हमारे सामने ही कर रहे हैं। अब जब तुम xxx मूवीज देखती हो तो तुम्हारा भी तो मन करता है न कि सम्भोग करें। ऐसे ही मेरे पति तुम्हें और तुम्हारे पति मुझे देख कर उत्तेजित हो रहे है। उन्हें होने दो उत्तेजित… जब ज्यादा उत्तेजित होंगे तभी तो हमें अच्छे से प्यार करेंगे न।

नीता को कुछ कुछ समझ आ रहा था, बोली- सॉरी एवरी वन! भैया टाइम दुबारा शुरू कर दो।

मैंने स्टॉप क्लॉक फिर से शुरू कर दी।

अबकी बार मैं फिर से नीता की टांगों की बीच पहुँचा और धीरे धीरे नीता की चूत के पास अपनी उंगली घुमाने लगा, फिर उनकी गांड में उंगली फेरने लगा, थोड़ी सी गर्दन को उठा कर उसकी चूत पर चुम्मी कर दी।

अब नीता की साँसें तेज़ होने लगी, पर उसने मुझे रोकने की कोशिश नहीं की।

इधर नीलेश को भी थोड़ी और आज़ादी मिल गई थी, उसने मधु के कंधे पर अपना मुंह रखा हुआ था, उसके हाथ मधु के वक्ष स्थल के आसपास घूम रहे थे और नीता की नज़र इन सभी चीज़ों पर ही थी।

जिस चीज़ पर नीता की नज़र नहीं थी वो यह कि मधु अपने हाथ से नीलेश के लंड को पुचकार रही थी और अपनी गांड पे रगड़वा रही थी।

नीलेश बोला- तूने मेरी बीवी की चूत देख ली, मैं भी तो अपनी भाभी की चूत देख कर आऊँ!

वो भी मेरी तरह मधु के नीचे लेट गया और मधु तो नीलेश से पहले ही चुदवा चुकी थी इसलिए वो सीधा मधु की चूत को चाटने और चूमने लगा।

मधु बहुत गर्म हो रही थी इसलिए उसने नीता के हाथ अपने चूचों पर रख दिए, नीता को भी मज़ा आया वो भी मधु के बूब्स रगड़ के दबाने लगी।

मैंने भी इसी बीच एक दो बार अपनी ऊँगली और जीभ नीता की चूत के अंदर तक डाल के निकाल ली।

स्टॉप क्लॉक पर टाइम खत्म होने की आवाज़ आई ‘बीप बीप…’

पर उस आवाज़ के आने के 10 सेकंड तक कोई अपनी जगह से नहीं हिला, फिर सब अपनी अपनी जगह बैठ गए।

अभी कमरे में सन्नाटा था।

मैंने मसखरी करते हुए नीता से कहा- क्यूँ मज़ा आया न?

नीता नज़र नीचे करके बोतल उठाने लगी।

मैं नीलेश से बोला- और मधु की चूत के बारे में आपकी क्या राय है?

नीलेश बोला- मधु भाभी की चूत एकदम चिकनी है और बड़ी प्यारी है।

मधु और नीता दोनों अब तक चुप थी।

मधु बोली- नीता, तू चिंता मत कर… अबकी बार इन दोनों में से किसी की बारी आने दे, ऐसा काम कराएँगे कि इनकी सारी हंसी निकल जाएगी।

नीता ने बोतल घुमाई बोतल जाकर रुकी नीलेश पर… नीता बोली- मार दिया जाये या छोड़ दिया जाये?

नीलेश बोला- हमें तो मरने में ज्यादा ख़ुशी मिलेगी।

सब इस बात पे हंस पड़े।

नीता बोली- तुमने मुझे एक लड़की को किस कराया था न? अब तुम्हारा टास्क है कि तुम हम सबके सामने भैया का लंड चुसोगे।

इस पर मैंने थोड़ा नाटक करते हुए कहा- यार, हमने कब तुम्हें मजबूर किया? हमने तो कहा था कि तुम हम तीनों में से किसी को भी किस कर सकती हो, तुम खुद ही दो मर्दों को छोड़ कर लड़की को किस करने गई। इतनी बड़ी सजा मत दो हम दोनों को।

नीता के चेहरे पर जीत की मुस्कराहट साफ़ दिखाई पड़ रही थी।

नीलेश बोला- यार राहुल, इतना लंड चुसवाया है, हमेशा सोचता हूँ कि चूसने में कैसा लगता होगा। चल आज तेरा लंड चूस के देख ही लेता हूँ।

मैंने कहा- ठीक है, मैं सोफे पर बैठ जाता हूँ, तू घुटनों पर बैठ जाना।

मैंने अपना तौलिया हटाया।

नीता की नजर मेरे ही लंड पर थी क्योंकि अपने पति का तो वो देखती ही रहती थी, और मधु को कपड़े बदलते समय देख चुकी थी, बस मैं ही था जिसका जननांग अभी तक उसने नहीं देखा था।

मैं नीता से बोला- क्यूँ नीता, कैसा लगा मेरा लंड?

नीता कुछ नहीं बोली, सिर्फ मुस्कुरा दी।

नीलेश मेरे लंड पर आया, मेरे को आँख मार कर मेरा लंड अपने मुंह में ले लिया।

नीता बोली- भाभी, ये तो सही में ही भैया का लंड चूसने लगे? मुझे लगा था कि नीलू मेरे सामने गिड़गिड़ाएंगे कि यार टास्क चेंज कर दो।

मधु बोली- हाँ यार नीता, यह तो हमारे साथ नहले पे दहला हो गया। चल कोई नहीं, और अनोखी हरकत सोचते हैं। वैसे तेरा आईडिया अच्छा था, कुछ ऐसा ही और सोच।

इधर नीलेश मेरे लंड को गले तक ले लेकर अच्छे से चूस रहा था, 2-3 मिनट तक अच्छे से चूस कर नीलेश खड़ा हो गया।

अब नीलेश ने बोतल घुमाई जो मधु पर जाकर रुकी।

नीलेश बोला- भाभी, अब आप पूरी तरह नंगी हो जाओ, आपके बदन पर कपड़ा तो क्या, एक धागा भी नहीं दिखना चाहिए। आप आगे का पूरा गेम ऐसे ही खेलोगी।

मधु थोड़ा नाटक दिखा कर जिससे नीता को शक न हो, पूरी नंगी होकर गेम खेलने लगी।

इधर मैं और नीलेश दोनों मधु पर कमेंट्स कसने लगे।

मधु ने बोतल घुमाई और वो जाकर रुकी फिर से नीलेश पे… मधु ने कहा- अब आप भी पूरे कपड़े उतार कर आगे का गेम खेलो।

नीलेश बोला- भाभी, यह तो आपने दिल की बात कर दी।

नीलेश खड़ा हुआ और तौलिया उतार के सोफे पर फेंक दिया और बोतल घुमाने नीचे बैठ गया।

अबकी बार बोतल नीता पर रुकी।

नीलेश के बोलने से पहले मैं बोला- इसको भी नंगा कर, साली का बदन वैसे ही पूरा बाहर निकला जा रहा है।

नीलेश बोला- चल तू भी नंगी हो जा!

नीता खड़ी होकर अपने कपड़े उतारने लगी।
 
जब वो बिना कपड़ो के पूरी नंगी सामने खड़ी थी तो एक पल को ख्याल आया ‘माँ चुदाये ये सारा गेम वेम… इसको यहीं पटक कर चोद दूँ।’

पर सब्र का फल मीठा होता है, यही सोच कर रुक गया।

अब चारों में से तीन लोग पूरी तरह नंगे होकर खेल रहे थे तो तीनों बोले- राहुल, तू भी अपना तौलिया हटा ले, वैसे भी लंड का एक बार तो नज़राना हो ही चुका है।

मैंने भी बात मानते हुए अपनी तौलिया हटा दिया, मैं बोला- यार नीलेश, खेलते खेलते साली पूरी बोतल खत्म हो गई।

नीलेश बोला- पूरी व्हिस्की खत्म?

मधु बोली- आपकी एक बोतल में से थोड़ी सी बची हुई है, अलमारी में रखी है, लेकर आऊँ?

मैं मधु के करीब गया और उसे किस करके बोला- वाह यार थैंक्स मधु डार्लिंग, ले आ यार प्लीज!

मधु उठी और अपके कूल्हे मटकाती हुई जाकर लगभग क्वाटर बची हुई व्हिस्की उठा लाई।

मधु ने ही हम दोनों के पैग बना दिए।

अबकी बारी नीता की थी बोतल घुमाने की, बोतल आकर रुकी मेरे ऊपर…

नीता बोली- भैया अब आप सीधे लेट जाओ, अगले 3 मिनट तक हम तीनों आपको उकसाएंगे, छुएंगे पर आप न तो अपने आप को, न ही किसी और के किसी भी अंग को छुओगे!

जैसा कहा गया, जमीन पर सीधा लेट गया मैं… स्टॉप क्लॉक चालू हुई।

जैसे ही स्टॉप क्लॉक चालू हुई, नीता मेरे मुंह के ऊपर ऐसे बैठ गई जैसे कमोड के ऊपर मूतने के लिए बैठते हैं, बोली- भाभी आप अपनी चूत इनके लंड पे रगड़ो और नीलू तुम जो चाहो करो, तुम चाहो तो दो लड़कियों को एक आदमी को उकसाते हुए देखो।

मैंने अपने हाथों को मुट्ठी बना लिया क्योंकि जब आप उत्तेजित होते हैं, वाकयी अपने हाथों को रोक पाना मुश्किल होता है।

नीता ने अपनी चूत मेरे होंठों और नाक के नोक पर रगड़नी शुरू कर दी।

और इधर मधु अपनी चूत से कभी अपने बूब्स से मेरे लंड को मसल रही थी।

नीता बोली- क्यूँ भैया, अब आया न मजा? मेरी चूत में उंगली करो न भैया… मेरी गांड सहलाओ हा? अच्छा… अपनी बीवी के चूचे ही दबा लो… करो न कुछ… कैसे नामर्द की तरह पड़े हो?

मैंने कहा- वाह री नीता, तुम तो खेल की माहिर खिलाड़ी बन गई हो। मैं हार जाऊँ, उसके लिए जो भी जतन कर रही हो, वाकयी काबिले तारीफ़ है। पर मैं भी कच्चा खिलाड़ी नहीं हूँ, अपनी बारी का इंतज़ार करूँगा, वैसे भी खीर ठंडी करके खाना मेरी फितरत है।

नीता सिसकारियाँ लेने लगी और नीलेश से बोली- हमारी शादी को इतना टाइम हो गया, तुम मुझे कभी इनके यहाँ नहीं लाये। इतना मज़ा तो हम दोनों होटल में भी नहीं करते जितना आज यहाँ कर रहे हैं। भैया और भाभी दोनों इतने कमाल के होंगे, मैंने कभी सोचा भी नहीं था। जब मैं घर आई थी तो यही सोच रही थी कि हम लोग कहाँ सोएंगे जिससे कम से कम रात को 1-2 बार चुदाई तो हो जाये। पर इनके खेल में मैं दो बार गीली हो चुकी हूँ। हाय अल्लाह… यह मैं क्या बोले जा रही हूँ। नीलेश प्लीज डोंट माइंड… मेरा मेरे ऊपर कोई कंट्रोल नहीं है।

नीलेश बोला- तुम सिर्फ आनन्द लो नीता और शुक्र मनाओ कि हमें ऐसे भैया और भाभी मिले हैं।

इतने में स्टॉप क्लॉक की आवाज़ आई ‘बीप बीप…’

मैंने नीता के चूतड़ों को दबोचा और पटक कर उसकी चूत में उँगली घुसा दी।

नीता बोली- आप हार गए भैया… टाइम फिर से स्टार्ट होगा।

नीलेश बोला- टाइम पूरा हो गया डियर, तब राहुल ने तुझे हाथ लगाया है।

नीता मुस्कुराई और बोली- अच्छा बाबा, आप जीते पर उंगली तो निकाल लो मेरी चूत में से।

फिर सब लोग अपनी अपनी जगह बैठ गए।

मैंने नीता के चूतड़ों को दबोचा और पटक कर उसकी चूत में उँगली घुसा दी।

नीता बोली- आप हार गए भैया… टाइम फिर से स्टार्ट होगा।

नीलेश बोला- टाइम पूरा हो गया डियर, तब राहुल ने तुझे हाथ लगाया है।

नीता मुस्कुराई और बोली- अच्छा बाबा, आप जीते पर उंगली तो निकाल लो मेरी चूत में से।

फिर सब लोग अपनी अपनी जगह बैठ गए।

नीता ने उत्सुकता से पूछा- भाभी, आप लोग ये गेम कितने लोगों के साथ खेल चुके हो?

मधु बोली- नीता, यह गेम सिर्फ तुम लोगों के साथ खेल रहे हैं। इससे पहले ये गेम सिर्फ हम दोनों अकेले में खेलते थे। पर अकेले में जैसे ही कपड़े उतर जाते, हम रति क्रिया में इतने डूब जाते कि अगली चाल का ख्याल सुबह ही आता था। आज तुम लोग हो इसलिए गेम इतना लम्बा चल रहा है।

नीता यह जवाब सुन कर खुश हुई।

अब बारी मेरी थी, मैंने बोतल घुमाई और वो जाकर रुकी नीलेश पर…

नीलेश बोला- हुकुम करो मेरे आका?

मैंने कहा- तुझे मेरी बीवी मधु की 4 मिनट तक चूत चाटनी है।

नीलेश बोला- यह सजा है या मज़ा?

और कूद पड़ा मधु के ऊपर…

4 मिनट तक वो मेरी बीवी मधु की चूत की अपनी जीभ से मसाज करता रहा। मेरी मधु तड़पती और छटपटाती सिसकारियाँ मारती रही, उसके हाथ लगातार नीलेश के बालों को सहला रहे थे।नीता अपने पति को किसी और की चूत चाटते हुए देख रही थी और में अपनी बीवी को किसी और मर्द से मेरे सामने चूत चटवाते और आनन्द लेते हुए देख रहा था।

..

मैं सोफे पर बैठकर सिगरेट के कश लगा कर यह सारा नज़ारा देख रहा था।

नीता आकर मेरी गोद में बैठ गई, बोली- भैया आपकी बीवी मेरी पति से चूत चटवा रही है, आपको बुरा नहीं लग रहा?

मैंने उसके बूब्स को चूमते हुए कहा- यार नीता, हम इंसानों की भी न कितना छोटी सोच है, आदमी के पास लंड है और औरत के पास चूत है। किसी और से सेक्स करने के बाद कोई लंड अशुद्ध या कोई चूत बेईमान थोड़े ही हो जाती है। यार हमें ये अंग मजे लेने के लिए दिए हैं तो इनसे मजे लो, इतना सोचना क्यूँ कि तू किसके साथ सोई या तू किसके साथ सोया। चार दिन की ज़िन्दगी है, उसमें भी सिर्फ एक दिन की जवानी हंस खेल कर मस्ती के साथ गुज़ार लो। ऐसा करने से किसी भी तरह के धोखे की कोई गुंजाइश ही नहीं बचती। मुझे जिसे चोदना हो, मैं अपनी बीवी से बोल सकता हूँ और मेरी बीवी को किसी का लंड अच्छा लगे तो वो मुझसे बोल सकती है कि मुझे फलाने से चुदवाना है।

नीता शरारती मुस्कान के साथ बोली- तो आपकी बीवी अब तक कितने लंड ले चुकी है आपके सामने? और आप कितनी चूत चोद चुके है अपनी बीवी के अलावा?

मैंने कहा- मेरी बीवी ने अभी तक मेरे अलावा किसी और का लंड नहीं लिया है। मैंने भी शादी के बाद अभी तक कोई चूत नहीं चोदी।

नीता बोली- शादी से पहले कितनी चूतें मार ली होगी आपने?

मैंने कहा- कभी गिनती तो नहीं की पर यही कोई 10 के आस पास चूतें तो चोदी ही होंगी।

नीता बोली- भैया, क्या आप ग्यारहवीं चूत मारना चाहोगे?

मैंने कहा- हाँ, बताओ किसकी मारनी है?

नीता बोली- भैया, आप भी न… मेरी और किसकी? बस भैया पता नहीं नीलेश इसके लिए तैयार होगा या नहीं? यह खेल तो खेल लिया पर शायद इसके आगे मुझे नहीं बढ़ने देंगे वो।

मैंने कहा- तुम चिंता मत करो, तुम्हारी इच्छा पूरी करने की कोशिश करूँगा मैं!

इतने में स्टॉप क्लॉक बज गई पर वो दोनों कहाँ रुकने वाले थे।

मैंने आवाज़ लगाई- अरे नीलेश, मधु टाइम अप!

नीलेश उसकी टांगों के बीच से निकला, उसने देखा उसकी नंगी बीवी नीता मेरी गोद में बैठी है और मेरे हाथ उसके स्तन को सहला रहे हैं, वो मेरे पास आया और हाथ बढ़ाया तो मैंने अपनी सिगरेट उसकी तरफ बढ़ा दी।

नीता बोली- तुम्हारा तो पूरा मुंह सन गया है।

नीलेश बोला- वो भाभी की चूत का पानी है।

मधु की तरफ देखकर बोला- भाभी आप कम से कम 2 बार तो झड़ गई होगी।

मधु भी उतनी कामुकता के साथ बोली- आपकी जीभ चूत के अंदर जाकर तो आग लगा देती है भैया!

ऐसी ऐसी बातें सुनकर नीता तो पागल सी हो रही थी।

नीलेश बोला- एक छोटा सा ब्रेक लेते हैं, मैं अभी मुंह धोकर आता हूँ।

सभी लोग फ्रेश होकर आकर दोबारा बैठ गए।

नीलेश बोला- यार, बहुत थक गए हैं और बहुत पी ली है।

मैंने भी कहा- चलो यारो, सोते हैं।

मैंने फिर कहा- देखा नीता इस खेल का एक और फायदा… एक ही रूम में चारों एक ही बिस्तर पर सो सकते हैं।

हमने बाहर के कमरे की लाइट बंद नहीं की और अंदर आकर लेट गए। इससे बाहर के कमरे से पर्याप्त रोशनी हमारे कमरे में आ रही थी जिससे हमें सब दिख रहा था और आँखों में चुभने वाली रोशनी भी नहीं थी।

नीलेश बड़ी खुली आवाज़ में नीता से बोला- आ जा तेरी चुदाई करूँ!

नीता भी अब तक बेबाक हो चुकी थी, बोली- इतना खुल कर तो हम जब होटल में होते हैं, तब भी नहीं बोलते हैं न जानू?

बोलते बोलते सीधी लेट गई और अपनी टाँगें फैला कर हवा में उठा ली।

मधु मेरे सीने पर लेटी हुई थी और मेरे सीने के बालों से खेल रही थी और अपनी टांगों से मेरे लंड को दबा रखा था।

हम दोनों एकटक उनकी चुदाई देख रहे थे।

नीलेश नीता की टांगों के बीच अपने लंड को सेट कर रहा था, बोला- यार राहुल, मेरी बीवी नीता की चूत तो पहले से ही गीली पड़ी है। मैंने कहा- तो फिर क्या देरी है? लगा और पेल दे अपना लंड!

नीता बोली- भैया आप भी अपनी बीवी को चोदिये न… हम भी देखेंगे आपकी चुदाई।

मधु बोली- हम अभी थोड़ी देर एक दूसरे के बदन से खेलेंगे, फिर चुदाई शुरू करेंगे।

नीता की चूत में अब तक लंड अंदर जा चुका था इसलिए उसकी आँखें बंद हो गई और वो चुदाई का आनन्द लेने लगी, आह उह आाह ओह्ह की आवाज़ें आने लगी।

फिर नीता नीलेश से बोली- आपका लंड लिए हुए महीना बीत गया… कितना मज़ा आ रहा है, और ख़ास तौर पे जब कोई हमें चुदाई करते हुए देख रहा है और हमें कोई शर्म नहीं है तो मज़ा दस गुना बढ़ गया है।

मधु बोली- भैया, नीता तो अच्छे से चोदो। इसके बोबे भी दबाओ, देखो कितनी गर्म हो रही है आपकी नीता। कब से आपके लंड का इंतज़ार कर रही थी।

मधु की बातों से दोनों और उत्तेजित हो गए और तेज़ तेज़ धक्के लगाने लगे।

मधु भी बहुत गर्म थी, वो बोली- दूसरी औरत को चुदाई देखकर आपको भी चोदने का मन कर रहा होगा न? आ जाओ, डाल दो अपना लंड मेरी चूत में।

नीलेश बोला- भाभी, आपकी चूत चाट कर इतना अच्छा लगा, यार राहुल भाभी की चूत इतनी अच्छी है, उसमें लंड डालने का मन हो रहा है। नीता, अगर तुम्हे बुरा न लगे तो क्या मैं भाभी की चूत मार लूँ।

नीता ने मेरी तरफ देखाम मैंने आँखों में इशारा किया कि हाँ बोल दो। मैंने थोड़ा दिखावे के लिए मधु से पूछा- मधु, तुम नीलेश से चुदना चाहोगी?

मधु बोली- मुझे तो लंड और प्यार चाहिए, कोई भी दे दे।

नीता ने नीलेश से बोला- अगर भाभी को कोई दिक्कत नहीं तो मुझे क्या दिक्कत हो सकती है।

नीलेश ने अपना लंड नीता की चूत से बाहर निकाल दिया और मधु को बोला- आप यहाँ लेट जाओ भाभी, आपकी चूत में मेरा लंड जाने को तरस रहा है।

नीता को थोड़ा बुरा लगा था शायद… बोली- मेरी प्यास तो बुझा देते, मैं भी तो मरी जा रही हूँ आपके लौड़े से चुदने को!

मधु उठ ही रही थी दूसरी तरफ जाकर अपनी टाँगें फैलाने को, पर फिर बोली- भैया, पहले बीवी फिर भाभी, चलिए डालिए उसकी चूत में अपना लंड!

नीलेश बोला- भाभी, इसको मेरा भाई राहुल चोद लेगा न! क्यू यार राहुल भाई, मेरी बीवी की मस्त चुदाई कर देगा न?

फिर नीता की तरफ देखकर बोला- तू राहुल के लौड़े से चुद ले, मैं तो तुझे हमेशा ही चोदूँगा।

बस यही तो हम चाहते थे।

मधु नीता की जगह जाकर लेट गई और अपनी टाँगें उठा ली।

इधर नीता मेरे ऊपर लेट गई और मेरे गले और जगह जगह चूमने लगी।

उधर नीलेश को मधु की चूत का पानी बहुत अच्छा लगता था इसलिए सीधा उसकी चूत चाटने के लिए उसकी चूत पर मुंह रख दिया। नीता उनको भी देख रही थी, बोली- भैया मैं आपका लंड चूसती हूँ, आप मेरी चूत चाट लो।

मैंने कहा- नहीं, तुम्हें अभी तुम्हारी चूत में लंड की ज्यादा ज़रूरत है।

मैंने नीता को नीचे लिटाया और उसकी चूत जो की अभी नीलेश के लंड डालने की वजह से काफी गीली और खुली हुई थी, पर अपना लंड सेट किया और एक ही बार में पूरा अंदर डाल दिया।

नीता को मीठा मीठा दर्द हुआ और वो कराह उठी, बोली- भैया आप तो सेक्सपर्ट हो… क्या शॉट मारा है।

मैंने नीता के बूब्स दबा दबा कर लाल कर दिए और धीरे धीरे धक्के लगाता रहा।

इधर मधु बोली- भैया, बस बहुत हुआ अब लंड दे दो, प्लीज फ़क मी!

अब दोनों लड़कियाँ हमारे नीचे थी, हम उनकी चूतों में ताबड़तोड़ चुदाई कर रहे थे।

इसी बीच मैंने नीलेश को हाय फाइव दिया। इसका मतलब था कि हमारा मकसद कामयाब हुआ।

फिर नीता के ऊपर पूरा लेट के उसके कान के पास जाकर बोला- तुम्हें चुदना था मेरे लंड से, देखो मैंने तुम्हारी इच्छा पूरी कर दी।

उसने मुझे चूमना शुरू कर दिया और पागलों की तरह उछल उछल कर मेरे धक्कों का साथ देने लगी।

इधर मधु और नीलेश भी अपने चरम पर एक दूसरे से चूदने का आनन्द प्राप्त कर रहे थे।

मधु बोली- राहुल, दूसरे आदमी का लंड लेने में तो बड़ा मज़ा आता है। नीलेश भैया मेरी अच्छी चुदाई कर रहे हैं। आप भी मेरी बहन नीता की अच्छे से चुदाई करो।

मेरे कुछ भी बोलने से पहले नीता बोली- भाभी, आप बिल्कुल सही कह रही हो, अपने पति के अलावा किसी और का लंड अपने पति के सामने बिना डर के लेने का मज़ा ही कुछ और है। भाभी मैं सातवें आसमान पे हूँ, भैया मेरी अच्छी चुदाई कर रहे हैं।

बोलते बोलते नीता लगभग चीखने लगी, बोली- मैं आ रही हूँ भैया, मुझे अपनी बाँहों में भर लो।

मैंने नीता को अपनी बाँहों में जकड़ लिया और बोला- आ जाओ, निकाल दो अपना पूरा पानी। खूब एन्जॉय करो, जितना चीखना चाहो चीखो, चिल्लाओ, खूब चुदो।

नीता बोली- हाँ भैया, आपका लौड़ा अगर नहीं ले पाती तो ज़िन्दगी से कुछ शिकायत होती। अब ज़िन्दगी से कोई शिकायत नहीं है… आह उह आह ओह्ह आह उह आह ओह्ह !

नीता ने पूरी ताकत से मुझे अपने वक्ष में घुसा लिया था, वो इतनी बुरी तरह झड़ रही थी कि उसका पूरा बदन बुरी तरह कांप रहा था।
 
मैं उसका सर और बाल सहला रहा था और दूसरे हाथ से उसकी जांघें सहला रहा था जिससे वो पूरी तरह झड़ जाए।

हम कुछ देर ऐसे ही पड़े रहे, मैं ज़रा भी नहीं हिला, 4-5 मिनट बाद नीता बोली- भैया, आपका लगता है अभी पानी छूटा नहीं है।

मैंने कहा- हाँ, अभी तो नहीं छूटा पर कोई चिंता नहीं, मेरी बीवी भी तो है वो कर देगी।

नीता बोली- नहीं भैया, मैं अभी पानी निकालने में आपकी मदद करती हूँ।

मैंने कहा- हाँ कर देना पर अभी थोड़ी देर तुम्हारी चूत में ऐसे ही पड़ा रहने दो मेरे लंड को!

नीता बोली- ओके भैया।

इधर मधु और नीलेश भी घमासान चुदाई में भिड़े हुए थे। नीलेश की चुदाई में से पच पच की आवाज़ें आ रही थी। नीलेश बोला- भाभी, मैं आ रहा हूँ।

मधु बोली- हाँ भैया, आप जहाँ मर्जी आये आ जाओ।

नीलेश बोला- भाभी मैं आपकी चूत में ही आना चाहता हूँ।

मधु बोली- भर दो आप मेरी चूत को भर दो अपनी मलाई से।

वो नीलेश के चूतड़ भी सहला रही थी जिससे नीलेश अपनी पूरी ताकत से मधु की चूत में फव्वारा चला दे।

नीता भी एकटक अपने पति और भाभी की चुदाई देख रही थी।

नीलेश की स्पीड कम हो गई उसी से अंदाज़ा लग गया था कि उसने अपना पूरा पानी मधु की चूत में डाल दिया है।

नीलेश थक के चूर होकर मधु के नंगे बदन पर यूँ ही गिर गया।

कुछ देर बाद नीलेश ने अपना सर उठाया और मधु मम्मों को सहला और दबाते हुए उठा, उसका लंड अभी भी मधु की चूत में ही पड़ा था, दोनों एक दूसरे को जगह जगह किस और सहला रहे थे, जैसे दो बिछड़े हुए प्रेमी काफी महीनों बाद मिले हों।

मैंने भी अब नीता की चूत में धीरे धीरे हल्के हल्के धक्के लगाने शुरू कर दिए। नीता की नज़र मेरे ऊपर ही थी, बोली- राहुल भैया, आप कितने अच्छे हो, चुदाई के वक़्त आप और भी अच्छे लगने लगते हो।

मैंने कहा- नीता, तुमने कभी गांड मरवाई है?

नीता बोली- नहीं भैया, आज तक नहीं लिया अपनी गांड में कोई भी लंड। नीलू भी एक दो बार कोशिश कर चुका है पर मैं उसे कभी गांड नहीं मारने देती, मुझे कुल मिला के गांड मरवाना अच्छा नहीं लगता।

मैंने कहा- नीता, तुमने कभी गांड मरवाई है?

नीता बोली- नहीं भैया, आज तक नहीं लिया अपनी गांड में कोई भी लंड… नीलू भी एक दो बार कोशिश कर चुका है पर मैं उसे कभी गांड नहीं मारने देती, मुझे कुल मिला कर मुझे गांड मरवाना अच्छा नहीं लगता।

मैंने कहा- पर मुझे तुम्हारी गांड मारने का मन है, बोलो क्या कहती हो?

नीता थोड़ा डरते हुए बोली- मैंने सुना है, बहुत दर्द होता है… क्या बहुत दर्द होगा भैया? एक्चुअली मैं आपको मना करना नहीं चाहती पर दर्द भी सहन नहीं करना है।

मैंने कहा- अच्छा एक काम करो, अपनी टाँगें चौड़ी करके तकिए पर बैठ जाओ। थोड़ी देर बाद तुम खुद मेरा लंड लेकर अपनी गांड में डलवा लोगी।

और मैंने धीरे से अपना लंड नीता की चूत से बाहर निकाल लिया।

मैं मधु से बोला- आज तुझे एक साथ 2 लंड का मज़ा देता हूँ।

नीलेश ने भी धीरे से अपना लंड मधु की चूत से बाहर निकाल लिया और मधु के ऊपर से हट गया।

मैं बोला- नीलेश तू सीधा लेट जा और अपना सर नीता की टांगों की बीच रख! मधु तुम नीलेश के लंड पर बैठ जाओ और अपना मुंह नीलेश के पैरों की तरफ रखो।

नीलेश के ऊपर लेटी हुई मधु की पोजीशन डॉगी जैसी ही थी, मैं मधु के पीछे से टांगों के बीच उसके दूसरे छेद में लंड सटा के खड़ा था।

मधु बोली- राहुल मेरी जान तुमने तो जन्नत के दर्शन करा दिए, एक साथ 2-2 लौंड़ों का मज़ा!

मैं मधु से बोला- देखो बिल्कुल तुम्हारे सामने नीता की चूत होगी, अब उसे भी चाटती जाओ।

मधु नीता की चूत को जीभ से टेस्ट करके बोली- आपने तो नीता की चूत को चौड़ा कर दिया है। मुझे अभी नीता की चूत में आपके लंड का टेस्ट भी आ रहा है।

और फिर वो अपनी मुंह से नीता की चूत चाटने में लग गई।

इधर नीलेश नीचे से मधु की चूत में धीरे धीरे धक्के मार रहा था, मैं भी मधु की गांड मारने का मज़ा ले रहा था।

नीता बोली- एक रात में इतनी सेवा मेरी चूत की कभी नहीं हुई।

नीलेश बोला- नीता तू अपनी दोनों टाँगें फैला के घुटनों के बल बैठ जा, भाभी तेरी चूत चाट ही रही है, मैं तेरी गांड भी चाट दूंगा।

नीता ने तुरंत अपना आसन बदला, उसके कारण अब नीता के होंठ भी मेरे काफी करीब थे। इधर नीता की चूत और गांड दोनों पर जीभ फेरी जा रही थी। दूसरी तरफ मधु की चूत और गांड में लंड डले हुए थे। मैं और नीलेश एक साथ एक लड़की के दो छेदों को भरे होने का मज़ा ले रहे थे।

मधु बहुत तेज़ तेज़ साँसों के साथ मचलने लगी और तड़पते हुए बोली- सुनो आप मेरी चूत में लंड डालो और भैया आप मेरी गांड मारो।

मैंने नीता के कान में कहा- अब तुम थोड़ी देर बैठ के तमाशा देखो और अपनी चूत में ऊँगली करो… हम दोनों भाई ज़रा तुम्हारी भाभी चोद लें।

नीता हट कर बिस्तर के एक कोने में जाकर बैठ गई।

नीलेश वही वैसा ही लेटा रहा, मधु ने अपनी गांड में नीलेश का लंड लिया और नीलेश की छाती पर अपनी पीठ के बल लेट गई, नीलेश ने अपने हाथ मधु के दोनों बूब्स पकड़ लिए और अपनी ऊँगली से मधु के निपल्स गुदगुदा रहा था।

मैंने भी मधु की चूत में अपना लंड पेल दिया और बोला- नीलेश लग जा पूरी ताकत से… इस कुतिया की गांड फाड़ डाल, मैं इसकी चूत का भोसड़ा बनाता हूँ।

नीलेश बोला- भाभी, आज आपकी गांड फाड़ दूंगा!

मधु बोली- भैया फाड़ दो, भैया मेरी गांड फाड़ दो। दो लंड लेने में बहुत मज़ा आ रहा है। राहुल प्लीज फ़क मी हार्ड।

मैंने अपनी स्पीड और बढ़ा दी।नीता ने इतनी गर्मी देखी तो वो हमारी तरफ आई और एक हाथ से मधु के सर पे हाथ फेरने लगी और दूसरे हाथ उसने मधु की चूत की तरफ बढ़ाया और मधु के दाने से थोड़ा ऊपर हाथ घुमाने लगी और बोली- भाभी, आराम से चुदो… भाभी आप कितना मस्त आनन्द लेती हो चुदाई का, आपको देखकर तो मेरी चूत फिर से गीली हो गई। भाभी खूब चीखो, चिल्लाओ और मज़ा आएगा चुदने में!

मैंने नीता का हाथ चूत के पास से हटाया और पूरा लेट कर फुल स्पीड में चुदाई करने लगा। नीता का हाथ हटा के मैंने अपनी गांड पे लगा दिया, नीता समझदार थी उसे इशारा मिल गया था नीता ने तुरंत अपने हाथ से मेरी गांड सहलाने लगी और बीच बीच में जीभ से चाट भी देती थी।

मैं उसकी जीभ का स्पर्श अपनी गांड पे पाकर और ज्यादा उत्तेजित हो जाता।

मैं भी पानी छोड़ने के काफी करीब था।

मधु बोली- भैया, आप मेरी गांड में ही मलाई निकाल दो, आप मुझे आपकी मलाई जहाँ देना चाहो दे दो।

हम तीनों बारी बारी से झड़ने लगे, सबसे पहली मधु झड़ी फिर मैं और फिर नीलेश… हम तीनों लस्त होकर एक दूसरे पर पड़े थे और नीता सभी का सर पे हाथ फेर रही थी।

थोड़ी देर बाद नीता बोली- हाँ भैयाम ये लो मेरी गांड मार दो प्लीज। आपने कहा था न कि मैं खुद बोलूंगी कि मेरी गांड मार दो! लो मैं कह रही हूँ मार दो मेरी गांड। मुझे भी भाभी की तरह दो लंड चाहिए एक साथ!

नीलेश थका हुआ सा बोला- सो जा माँ की लौड़ी सो जा, कितनी देर से लौड़ा लिए बैठी है, अब सुबह मिलेगा। हमारा लंड है लंड कोई मशीन थोड़े ही है?

मधु करवट लेकर लेट गई, वो काफी थकी हुई दिख रही थी। मैं बाहर के कमरे की लाइट्स ऑफ करके अंदर आया अभी कुछ भी साफ़ दिखाई नहीं पड़ रहा था।

मैं बिस्तर के कोने में लेट गया। थोड़ी देर में जब आँखें अँधेरे के हिसाब से अनुकूल हुई तो देखा नीलेश भी उल्टा करवट लेकर मधु के बूब्स में लंड फसा के मधु की चूत में मुंह डाल के पड़ा हुआ था।

मैंने भी नीता, जो मेरी तरफ पीठ करी लेटी थी, के बूब्स पकड़ के अपना लंड धीरे धीरे उसकी गांड में डाल दिया। मैंने नीता के मुंह पर हाथ रख लिया था और धीरे धीरे उसकी गांड मारने लगा, वो भी मेरा साथ देने लगी और गांड मरवाने का मज़ा लेने लगी।

हम थोड़ी ही देर में नींद की आगोश में आ गये और सो गए।

मैं बिस्तर के कोने में लेट गया। थोड़ी देर में जब आँखें अँधेरे के हिसाब से अनुकूल हुई तो देखा नीलेश भी उल्टा करवट लेकर मधु के बूब्स में लंड फसा के मधु की चूत में मुंह डाल के पड़ा हुआ था।

मैंने भी नीता, जो मेरी तरफ पीठ करी लेटी थी, के बूब्स पकड़ के अपना लंड धीरे धीरे उसकी गांड में डाल दिया। मैंने नीता के मुंह पर हाथ रख लिया था और धीरे धीरे उसकी गांड मारने लगा, वो भी मेरा साथ देने लगी और गांड मरवाने का मज़ा लेने लगी।

हम थोड़ी ही देर में नींद की आगोश में आ गये और सो गए।

सुबह जब नींद खुली तो बिस्तर पर सिर्फ मैं और नीलेश ही थे। मैंने नीलेश को जगाया और उससे इशारे में पूछा- क्या तुझे पता है कि दोनों लड़कियाँ कहाँ हैं?

उसने भी इशारे से बताया कि उसे नहीं पता।

मैंने अलसाते हुए आवाज़ लगाई- मधु ओ मधु, डार्लिंग कहाँ हो?

मधु की आवाज़ आई- साढ़े आठ बज गए हैं, आपको ऑफिस नहीं जाना? उठ जाओ, तैयार हो जाओ, मैं नाश्ता बनाती हूँ।

मैंने अपना मोबाइल देखा तो आठ पच्चीस हो रहे थे, मैं बोला- इधर तो आओ, चाय दे दो।

इधर मैनेजर को मैसेज कर दिया कि मेरी तबियत ठीक नहीं है, मैं आज ऑफिस नहीं आ सकूंगा।

मधु चाय लेकर मेरे सामने खड़ी थी, मैंने कहा- गुड मॉर्निंग डार्लिंग!

मधु ने सूट का केवल कुरता पहना हुआ था और नीचे लेगगिंग नहीं पहना था, मधु ने मेरी तरफ चाय बढ़ा कर कहा- गुड मॉर्निंग! अब जल्दी से उठ जाओ, आप ऑफिस के लिए लेट हो जाओगे।

मैंने कहा- आज ऑफिस नहीं जा रहा…

और मधु को बाँहों में पकड़ने लगा।

मधु बोली- छोड़िए मुझे, मुझे अभी बहुत काम करने है।

मैंने पूछा- नीता कहाँ है?

मधु ने बताया कि उसका कोई फ़ोन आया हुआ है, वो बालकनी में है।

मधु ने देखा कि नीलेश भी उठा हुआ है तो बोली- गुड मॉर्निंग भैया, लीजिए आपकी भी चाय!

नीलेश बोला- गुड मॉर्निंग भाभी, वो नीता को बता देना कि मैं उठ गया हूँ।

मधु ने वही से आवाज़ लगाई- ए नीता, ये नीलेश भैया बुला रहे हैं।

नीता कमरे में आई, नीता ने एक गाउन पहन रखा था, नीता मुझसे बोली- गुड मॉर्निंग भैया!

फिर नीलेश के पास गई और बोली- गुड मॉर्निंग जान!

मैंने कहा- तुम दोनों भी चाय ले आओ, और यहीं बैठो

मैंने और नीलेश दोनों ने अभी तक कुछ नहीं पहना था, बस चादर ओढ़ के रखी थी।

नीता मधु और खुद के लिए चाय ले आई, नीलेश बोला- यार कल रात तो मज़ा आ गया।

मैंने कहा- हाँ, तुम दोनों जब सो गए थे तब मैंने नीता की एक बार गांड मारी थी।

मधु बोली- आपको क्या लगता है? हम लोग सोये नहीं थे, सब सुनाई दे रहा था, बस थके हुए थे इसलिए चुपचाप पड़े थे।

नीता बोली- मेरी फर्स्ट गांड चुदाई पर मैं चीख भी नहीं सकी क्योंकि मुझे लगा कि नीलू और आप सो चुके हो और नींद न टूट जाये।

मैं बोला- देखो, हम लोग जितने भी दिन यहाँ साथ रहेंगे, तन पर कपड़ा नहीं होना चाहिए।

मैंने कहते कहते अपने ऊपर से चादर हटा दी, मेरा लंड आधा खड़ा था, सुबह के टाइम तो अपने आप खड़ा ही मिलता है।

नीता बोली- भैया, आप क्या खाते हो, रात भर इतनी चुदाई के बावजूद आपका अभी तक खड़ा है।

नीलेश ने भी अपनी चादर हटा दी, नीलेश का लंड भी खड़ा था।

मधु बोली- यार मुझे काम करना होता है!

मैंने कहा- तो नंगी ही काम करना।

मधु ने भी अपना शर्ट उतार फेंका, नीता भी नंगी हो गई।

मैंने बताया कि मैंने आज छुट्टी ले ली है तो हम आज पूरे दिन कुछ न कुछ मस्ती कर सकते हैं।

मधु बोली- मैं पोहे बनाने जा रही हूँ, आप लोग प्रोग्राम बना लो।

मैंने कहा- हाँ, हम सब लोग भी जल्दी से नहा धोकर तैयार होते हैं।

मधु किचन में चली गई, नीलेश बाथरूम जाने लगा, मैंने सिगरेट जला ली, नीता भी किचन की तरफ जाने लगी।

मैंने नीता को बीच में ही पकड़ा और चूतड़ मसल दिये और बोला- सिगरेट पियोगी?

वो बोली- नहीं भैया, मैं सिगरेट नहीं पीती।

मैंने कहा- एक कध तो मार के देखो!

उसने जैसे ही सिगरेट का कश लगाया उसे खांसी आ गई, वो बोली- यक… इसका कितना गन्दा टेस्ट है, मेरा तो मुंह ख़राब हो गया।

वो भी बाथरूम की तरफ भागी।

दरवाज़े में ठोकर मारी, दरवाज़ा खुल गया, नीलेश कोमोड पर बैठा था।

नीता ने कुल्ला किया और ब्रश करने लगी।

मैं भी नीता के पीछे पीछे पंहुचा, उससे चिपक कर खड़ा हो गया और पीछे से उसके चूतड़ों के बीच अपना लंड चुभाने लगा और हाथों से उसके मम्मे सहलाने लगा।

नीलेश कोमोड पे बैठा सब देख रहा था।

नीलेश हाथ धोने वाश बेसिन के पास आया तो मैं जाकर कोमोड पर बैठ गया।

नीता अभी ब्रश कर ही रही थी, नीलेश हाथ पौंछने बाहर चला गया।

नीता ब्रश करने के बाद मेरे कोमोड के पास आई और बोली- भैया मैं आपकी गांड धुला दूँ जैसे बच्चों की धुलाते हैं?

मैंने कहा- ठीक है!

मेरा जब काम खत्म हुआ तो नीता ने मेरी गांड अच्छे से धोई और फिर हम दोनों ने एक दूसरे के हाथ से हाथ धोए।

मधु बोली- तुम बस मेरे राहुल का ध्यान रखो, अब अगर हम दोनों ही खाने में बिजी हो जायेंगे तो ये लोग क्या एक दूसरे के साथ नहाएंगे?

दोनों लड़कियाँ हसने लगी।

नीलेश बोला- नीता तू जाकर राहुल के साथ नहा के आ, मैं भाभी के साथ नहाऊंगा। जब हम नहाने जायेंगे तब तुम किचन देखना, अभी हम किचन देख रहे है।

मैंने कहा- चल नीता, अपन तो चले नहाने।

मैं पहले ब्रश करने लगा, नीता जाकर शावर चलाने लगी।

मैंने कहा- रुको, अभी में ब्रश तो कर लूँ।

वो आकर मेरे पीछे खड़ी हो गई और अपने बूब्स से मेरी पीठ घिसने लगी।

मैंने जैसे तैसे ब्रश किया, मैं दरवाज़ा बंद करने लगा, तो मुझे नीता ने रोका, बोली- आप दरवाज़ा क्यू बंद कर रहे हो?

मैंने कहा- अरे वो आदत सी ही है न इसलिए!

मैं बोला- नीता, तुम्हारी ऐसी कोई चाहत कोई फ़ंतासी है जो तुम्हें लगता है कि बहुत गन्दी है और तुम उसे किसी से नहीं बता सकती।
 
नीता बोली- हाँ है तो… जैसे अभी मैंने आपकी गन्दी गांड धुलाई थी, वो भी मेरी एक फ़ंतासी ही थी।

मैंने कहा- और कौन सी ऐसी चाहत है जो तुम्हें पूरी करनी है?

नीता बोली- नहीं भैया, मैं नहीं बोल सकती, पता नहीं आप क्या सोचोगे? पता नहीं आपको कैसा लगे?

मैंने कहा- बोल के देखो, शायद मैं तुम्हारे सपने पूरे कर सकूँ।

नीता बोली- मैं चाहती हूँ कि कोई मेरे ऊपर मूते, मेरे मुंह पे, मेरे बूब्स पे, मेरी चूत पे, मैं थोड़ा मूत पी जाऊँ, थोड़ा सा उसका लौड़ा चूस के उसका बचा हुआ मूत भी चाट जाऊँ। मुझे खुद नहीं पता कि मैं ऐसा कर पाऊँगी या नहीं, मुझे खुद नहीं पता कि यह मुझे अच्छा लगेगा या नहीं पर मुझे करने का मन तो है ऐसा ही कुछ।

मैंने कहा- यह तो छोटी सी चाहत है, ये लो, अभी पूरी किये देता हूँ।

वो तुरंत जमीन में बैठ गई, मैं लौड़ा लेकर उसके मुँह के पास खड़ा हो गया और मूतने की कोशिश करने लगा।

नीता ने मेरे अंडे सहलाए, थोड़ा लंड सहलाया और बिल्कुल पोले मुँह से चूसने और चूमने लगी।

मैंने अपना लंड उसी को पकड़ा दिया और बोला- लेट मी पी ऑन यू!

नीता बोली- हाँ भैया, प्लीज मेरे ऊपर मूत दीजिये।

मेरे लंड में से मूत की धार शुरू हुई, फिर रुकी, नीता के चेहरे पर मूत की एक धार जैसी ही पड़ी, उसे गर्म गर्म लगा, एक आध बूँद उसके होंठों से मुँह के अंदर भी चली गई।

मैंने पूछा- अच्छा लगा?

नीता बोली- अभी तो ठीक लग रहा है भैया, आप मेरे ऊपर मूतते जाओ, मुझे अच्छा नहीं लगेगा तो मैं खड़ी हो जाऊँगी।

अब तो मैंने नीता के मुँह में लंड डाला और अपने मूत का फव्वारा शुरू कर दिया, उसका मुँह भरा तो लंड बाहर निकाला और उसके पूरे बदन को भिगोने लगा, उसके मुँह के अंदर जो मूता था, वो भी उसने अपने ऊपर ही थूक लिया और मेरे लंड की धार को अपने बदन के अलग अलग हिस्सों पर लेने लगी, कभी अपने बूब्स पर मेरे पेशाब को मलती तो कभी अपनी चूत पर बहते मेरे मूत को थप्पड़ मारती।

मुझे उसकी ये अदाएँ बहुत पसन्द आ रही थी, मेरा मूत जब खत्म हुआ तो उसने बड़े प्यार से मेरे लौड़े को मुंह में लेकर चूसा और फिर बाहर निकाल के हिला कर और मूत निकालने लगी।

और फिर मेरे लंड के सुपारे को अच्छे से चाट के साफ़ करने लगी।

मेरी नज़र दरवाज़े पर गई तो देखा कि नीलेश और मधु दरवाज़े से टिके हुए हमारे इस खेल को देख रहे थे।नीलेश मधु की चूत ऊँगली से सहला रहा था।

मैं उन दोनों की तरफ देखकर बोला- किसी और को मूतना है नीता पे?

नीलेश बोला- नीता, तू इतनी वाइल्ड हो सकती है, मैंने कभी सोचा भी नहीं था, रुक मैं भी तेरे ऊपर मूतता हूँ।

नीलेश अपना लंड पकड़ के नीता के करीब गया, नीता ने नीलेश के लौड़े को प्यार से पुचकारा और फिर चूसने लगी और साथ ही उसकी बॉल्स भी सहलाने लगी।

मैंने मधु को बोला- तुम भी मूतो इसके ऊपर!

मधु बोली- मैं कैसे मूत सकती हूँ?

मैंने कहा- नीता, थोड़ा सा लेट जाओ जिससे मधु तुम्हारे ऊपर मूतने वाली अवस्था में आ जाये।

मधु नीता के मुंह की तरफ चली गई और उसके पैर की तरफ मुंह कर लिया और थोड़ा नीचे झुक कर वो भी मूतने लगी।

नीलेश बोला- भाभी, आओ मूत के पेंच लड़ाते हैं।

शायद मधु इस सबको एन्जॉय नहीं कर रही थी, बोली- मैं मूत रही हूँ, आप लड़ा लो पेंच।

मैंने मधु से कहा- तुम चाहो तो नीता के मुंह पर भी पेशाब कर सकती हो।

मधु थोड़ी सी खड़ी हुई तो मधु के पाँव भी उसके खुद के मूत से गीले होने लगे, वो भी आदमी की तरह अपनी चूत से नीता के पूरे बदन पर मूतने लगी।

जब दोनों का मूतना बंद हुआ, तो नीता बोली- मज़ा आ गया तीन मूतों से नहा कर!

हम चारों बाथरूम में ही थे तो शावर ऑन किया और चारों साथ में नहाने लगे। हम सभी एक दूसरे को सहला और पुचकार रहे थे। नहाते हुए कभी नीलेश मधु की बूब्स दबता कभी नीता की चूत में लंड डाल देता। मैं भी कभी मधु के नंगे गीले बदन से खेलता तो कभी नीता के बदन से। सभी लोगो ने एक दूसरे को साबुन लगाया और अच्छे से नहला दिया।

नहाने के बाद कपड़े तो पहनने नहीं थे इसलिए मधु ने नीलेश का बदन पोंछा, नीता ने मेरा और बाद में दोनों ने एक दूसरे का बदन पौंछा।

नीता बोली- भाभी इतना नहाने के बाद तो बड़ी तेज़ भूख लग आई है।

मैंने और नीलेश ने भी हाँ में हाँ मिला दी।

मधु बोली- पोहा तकरीबन तैयार ही है, मैं अभी लेकर आती हूँ।

नीता ने बिस्तर पे ही अखबार बिछा दिया और हम लोग पोहा खाने लगे।

मैंने कहा- आज एक नया गेम खेलते हैं।

सभी लोग एक सुर में बोले- क्या?

मैंने कहा- आज सब अपनी अपनी एक एक फंतासी बताएँगे और बाकी के लोग मिलकर उसकी कल्पना को पूरा करने की कोशिश करेंगे। चाहे फंतासी कितनी भी गन्दी और मलिन क्यूँ न हो। जैसे अभी अभी नीता की एक डर्टी फंतासी को पूरा किया गया, वैसे ही सबकी एक एक इच्छा पूरी की जाएगी।

सभी लोग बहुत खुश दिखाई दिए।

मैंने कहा- तो मधु बताओ तुम्हारी कोई ख्वाहिश?

मधु बोली- मुझे पब्लिक प्लेस में चुदना है।

मैंने कहा- ओके डार्लिंग तुम्हारी यह इच्छा पूरी करेंगे।

फिर मैंने कहा- हाँ भई नीलेश, तेरी कोई फंतासी?

नीलेश बोला- हाँ है तो मेरी फंतासी पर थोड़ी अजीब है!

मैंने कहा- बातें मत बना सीधा बोल, क्या है तेरी डर्टी फंतासी।

नीलेश बोला- मैं नीता को काले लौड़े से अपने सामने चुदवाना चाहता हूँ।

हम सभी लोग हक्के बक्के रह गए, मैंने कहा- यार कुछ और कोई और फंतासी बता जो हो सके?

मेरी बात काटते हुए नीता बोली- नहीं भैया, आपने ही कहा था कि चाहे कैसी भी चाहत हो, हम सबको साथ देना है। तो मैं दूंगी अपने पति को उनकी फंतासी पूरा करने का मौका।

मैंने कहा- जब मियाँ बीवी राज़ी तो क्या करेगा क़ाज़ी, मुझे लगा था कि तुम इसके लिए तैयार नहीं होगी।

नीता कुछ नहीं बोली बस नीलेश को देखती रही।

नीलेश और मधु लगभग एक सुर में बोले- तू अपनी भी तो कोई हसरत बता दे?

इतने में ही फ़ोन बजा, फ़ोन नीलेश के फ़ोन पर आया था, स्क्रीन पर मम्मी लिखा था, मैं बोला- ले बुआ का फ़ोन आ गया।

उसने फ़ोन उठाया और बोला- हाँ मम्मी!

और इधर नीता को इशारा किया, नीता तुरंत नीलेश का लंड चूसने लगी।

बात करते करते ही नीलेश ने मधु को भी करीब आने का इशारा किया। मधु भी नीलेश के पास चली गई और नीलेश की छाती पे निप्पल चूसने लगी। वो मधु की गांड में उंगली करने लगा।

मेरा ध्यान उसके फ़ोन पे चल रही बातों पर नहीं था बल्कि मेरा ध्यान उसके साथ चल रही गतिविधि पर था।

इतने में नीलेश बोला- तो लो आप बोल दो राहुल से!

और उसने फ़ोन मेरी तरफ बढ़ा दिया।

मैं जैसे एकदम नींद तोड़ के उठा हूँ, वैसे फ़ोन पर बोला- हाँ हाँ बुआ? कैसी है आप?

जब तक इधर उधर की बातें ही चल रही थी तब तक नीलेश ने नीता और मधु के कान में कुछ कहा, दोनों लड़कियाँ मुस्कुराई और मेरी तरफ बढ़ी।

मधु मेरे निप्पल चूसने लगी और नीता ने झट से पूरा लंड मुंह में ले लिया और चूसने लगी।

मेरा ध्यान फ़ोन पे जो बुआ बोल रही थी उसमें लग ही नहीं रहा था, मुझे सुनाई सब पड़ रहा था पर समझ कुछ नहीं आ रहा था, मैंने हाँ हाँ… ओके… ओके… बोल कर फ़ोन रख दिया।

फ़ोन रखने के बाद में अपने साथ चल रही रति क्रिया के मज़े लेने लगा।

नीलेश बोला- तो मम्मी क्या बोली?

मैंने बहुत ही गैरजिम्मेदारी से कहा- मुझे नहीं पता वो क्या बोली, मुझे कुछ समझ ही नहीं आया।

नीलेश बोला- यार तू भी न, वो तुझे भोपाल बुला रही है और तूने हाँ हाँ ओके ओके… बोल कर फ़ोन रख दिया।

मैंने कहा- अब एक ने सीने में आग लगा रखी है और दूसरी लंड मुंह में लिए पड़ी है तो घंटा समझ आ रहा था कि बुआ क्या बोल रही है।

नीलेश बोला- यह भी मेरी एक फंतासी हुआ करती थी, जब भी होटल में होते थे, मैं किसी न किसी को फ़ोन लगा लेता और नीता से लौड़ा चुसवाता था। इसलिए मैंने सोचा तुझे भी अनुभव कराऊँ कि कैसा लगता है।

मैंने कहा- हाँ मज़ा तो बहुत आया लेकिन फ़ोन पर मैंने किस बात पे क्या कह दिया इसका कोई अनुमान नहीं है। मैंने नीता का मुंह हटाया और अपना लंड उसके मुंह से बाहर निकाला और मधु को भी अपनी छाती से दूर कर दिया।

नीलेश बोला- अब क्या करें?

तब तक मैंने दोबारा फ़ोन लगाया और बोला- बुआ, आपकी आवाज़ साफ़ नहीं आ रही थी इसलिए कुछ समझ नहीं आया था, क्या बोल रही थी आप?

बुआ ने बताया कि परसों सुबह एक लड़के वाले आ रहे हैं और लगभग बात तय सी ही है, उसके कारण वो हम सबको वहाँ भोपाल बुला रही थी।

मैंने भी ऐसी ख़ुशी की बात में कह दिया- हाँ बुआ, मैं इन सबको लेकर आता हूँ।

फिर सबसे पहले ट्रेन में तत्काल में अगले दिन सुबह की टिकट बुक कर दी, मैनेजर को मैसेज कर दिया कि डॉक्टर ने कम्पलीट बेड रेस्ट के लिए बोला है इसलिए में सोमवार को ही वापस आ पाउँगा।

मधु बोली- चलो में भी पैकिंग कर लेती हूँ वहां तो कपड़े पहनने पड़ेंगे न!

सभी लोग जोर से हंस पड़े।

नीता बोली- मेरे तो कपड़े निकले ही नहीं क्योंकि यहाँ तो कपड़े पहनने की अनुमति ही नहीं है न।

मैंने कहा- हाँ तुम पैकिंग करो, मैं काले भुजंग लम्बे और मोटे से लौड़े का इंतज़ाम करता हूँ नीता के लिए… क्योंकि आज का दिन तो है ही न मस्ती मारने के लिए। और तदनुसार कोई मूवी की टिकट भी बुक करता हूँ। क्यूँ मधु, सिनेमा हॉल पब्लिक प्लेस भी है और ठंडक में चुदाई का भी मज़ा आएगा।

मधु मेरे गले लग गई और बोली- हाँ जान तुमने बहुत अच्छी पब्लिक प्लेस चुना है मेरी फंतासी पूरी करने के लिए।

मैंने तुरंत इंटरनेट पे सर्च किया जिससे पुरुष वेश्या मिल सके। जल्दी ही एक एजेंसी का नंबर मिला उससे मैंने बात की और एक 6 फुट लम्बे काले, मोटे और लम्बे लंड वाले हब्शी को बुक कर लिया।

उसके बाद मैंने एक बकवास सी मूवी के टिकट बुक किये जिससे उसमें भीड़ कम हो, मधु की इच्छा भी पूरी हो जाये और कोई ड्रामा भी न हो।
 
मैंने कहा- चलो सब लोग तैयार हो जाओ अपन लोग पहले मूवी देखने चल रहे हैं, हब्शी 4 बजे तक आएगा।

मधु पैकिंग करते करते तैयार भी हो गई।

सभी लोग गाड़ी में आकर बैठ गए, आगे नीता पीछे नीलेश और मधु!

मधु बोली- बहुत देर बाद कपड़े पहने हैं, अच्छा लग रहा है।

इस मासूम से वाक्य से हम सभी लोग हंसने लगे।

हम सभी मूवी हॉल में पहुंचे, बहुत ज्यादा लोग नहीं थे सिनेमा में कोई 18+ मूवी ही थी। ज्यादातर कपल्स ही थे मूवी हाल में, मैंने नीलेश को बोला- तू मधु के एक तरफ बैठ और नीता को अपनी तरफ बैठाया तो हम दोनों नीता और नीलेश के बीच में थे जिससे हमें साइड से कोई देख न सके।

मूवी शुरू हुई, अँधेरा हुआ। मुझे मूवी में कोई इंट्रेस्ट तो था नहीं, बस मैंने मधु के ऊपर हाथ फेरना शुरू कर दिया, मधु भी अँधेरे की आड़ में मेरा लंड टटोल रही थी।

मैंने मधु के कपड़ों में हाथ डाला सोचा कि इसकी ब्रा का हुक खोल दूँ, पर जैसे ही मैंने अंदर हाथ डाला तो पाया कि उसने ब्रा पहनी ही नहीं थी।

हम दोनों एक दूसरे की आँखों में देखकर मुस्कुरा दिए।

मधु बोली- कैसा रहा सरप्राइज?

मैं हंसते हुए बोला- बहुत अच्छा, तुम तो चुदने को बेताब नज़र आ रही हो?

मधु तुरंत अपनी सीट से उठी और सीट के नीचे घुटनों पर बैठ गई। नीलेश थोड़ा टेढ़ा होकर बैठ गया जिससे आड़ थोड़ी ज्यादा हो जाये और उसकी भाभी को कोई उसके भाई का लंड चूसते हुए न देख सके।

मधु ने मेरे जीन्स के ऊपर से ही लंड सहलाना शुरू किया और ज़िप नीचे कर दी, और फिर ज़िप में से ही मेरा लौड़ा जो खड़ा ही था, उसे बाहर निकाल दिया। मैंने जीन्स का बटन भी खोल और कच्छे सहित घुटनों तक उतार दिया। जिससे मेरी जान मेरे लंड के साथ साथ मेरे अंटे से भी खेल सके।

थोड़ी देर लंड की चुसाई के बाद मधु बोली- अब आप मेरी चूत में अपनी जीभ से तब तक चुदाई करो जब तक मेरी चूत कम से कम तीन बार पानी न छोड़ दे, मैं अगर तुम्हारे सामने गिड़गिड़ाने भी लगूँ तो भी मुझे मत छोड़ना।

नीलेश एक सीट छोड़ के बैठा हुआ था, उसको अभी अपनी सीट के पास वाली सीट पर आने को कहा और बोली- जब तक तुम्हारा भाई मेरी चूत से पानी निकाल रहा है, मेरे बूब्स को एक भी पल के लिए मसलना और चूसना मत छोड़ना।

नीता को कहा- नीता, तू मेरा दूसरा बोबा अपने मुंह में लेकर रख। आज तुम तीनों मिलकर मुझे जन्नत में पहुँचा दो, मुझ पर कोई तरस मत खाना!

हम तीनों ही मधु के इस रूप को देखकर थोड़े से आश्चर्य में थे पर हमे कोई ख़ास ऐतराज़ नहीं था, क्योंकि मधु भूखी थी और उसकी मनपसंद ख्वाहिश पूरी हो रही थी।

हम सभी ने मन ही मन आज मधु के ताबड़तोड़ चुदाई का प्रण कर लिया था।

मधु थोड़ा सा नीचे सरक कर बैठी गई जिससे उसकी चूत बिल्कुल बाहर को आ जाये और चाटने चूमने में कोई दिक्कत न हो।

नीलेश ने भी मधु के टॉप को ऊपर करके आदेशानुसार मधु के उरोज को अपने मुंह में लेकर मसलना और सहलाना शुरू किया, ऐसे ही नीता भी मधु के दूसरे बोबे के साथ खेलने लगी।

मैं मधु की चूत में घुस गया, उसने अपनी टाँगें चौड़ी कर रखी थी जिससे मैं आराम से अपनी जीभ जितना अंदर हो सके ले जा सकूँ।

मधु इतनी गर्म और कामोत्तेजित थी कि जीभ के अंदर जाते ही दो ही मिनट में उसकी फ़ुद्दी ने पानी छोड़ दिया। पर उसकी तमन्ना अभी भरी नहीं थी। उसकी भूख अपने चरम पर थी, मैं बिना रुके उसकी चूत में ड्रिल मशीन की तरह अपनी जीभ से सनसनी करता ही रहा।

मधु को और मज़ा आये उसके लिए अब मैंने उसकी गांड में अपनी एक उंगली और चूत के निचले हिस्से पर अपने अंगूठे से धीरे धीरे मसाज भी करने लगा।

करीब 15 मिनट बाद मधु झड़ी और इतना पानी निकला जैसे वो मूत रही हो। जब मधु झड़ रही थी तो ऐसे झटके ले रही थी जैसे हार्ट अटैक आ गया हो।

मधु के चिपचिपे पानी से मेरे पूरे कपड़े गीले हो चुके थे, मधु ने पूरी ताकत से अपनी दोनों टांगों के एक दूसरे से मिला रखा था, वो ऐसे ही टाँगे चिपकाये कांपती हुई झड़ती रही।

जब वो थोड़ी सी नार्मल होने लगी तो मैंने टाँगें फिर से चौड़ी करने का इशारा किया, तो मधु बोली- बस हो गया मेरा… अब कुछ नहीं चाहिए।

मैंने कहा- माँ की लौड़ी, अभी एक बार और तुझे और पानी बहाना पड़ेगा तभी छोड़ूँगा मैं तुझे।

मधु बोली- अरे वो तो मैं वासना और कामोत्तेजना में बहकर बोल गई थी, आप बैठ जाओ थोड़ी देर में आपके लौड़े को अपनी चूत में डलवाऊँगी।

मैंने कहा- हाँ ठीक है, पर टाँगें चौड़ी तो कर मुझे थोड़ा सा पानी टेस्ट करना है।

जैसे ही मधु की टाँगें थोड़ी चौड़ी हुई, मैंने फिर से अपना सर उसकी चूत पर लगा दिया और फिर से जीभ से अपनी बीवी की चूत की चुदाई करने लगा।

मधु बोली- प्लीज छोड़ दो, बात को समझो… मैंने ऐसे ही कह दिया था, मेरा यह मतलब नहीं था।

पर मैंने भी सोचा हुआ था कि आज इसको इतना चोदूँगा की यह रो पड़े।

मैं बोला- तुमने बोला था न, तो अब मजे लो, टेंशन मत लो। ए नीलेश… ज़रा अपनी भाभी का सर पे हाथ फेर और उसे नार्मल कर!

नीलेश ने बिना मुंह से मधु का बोबा निकाले ही सर पे हाथ फेरना शुरू कर दिया।

अब तक मधु को समझ आ गया था कि मैंने बात को पुरुषत्व पे ले लिया है, तो उसने मुझसे बोलना बंद कर दिया और अपनी फंतासी को जीने लगी।

मैंने फिर से मधु की गांड में एक उंगली डाल कर और अबकी बार अंगूठा भी थोड़ा चूत के थोड़ा ज्यादा अन्दर डाल कर मसलने लगा और जीभ से मधु की चूत का दाना छेड़ता रहा।

थोड़ी ही देर में मधु फिर से भड़भड़ा के पानी बहाने लगी, उसके चेहरे पर पसीना उसकी आँखें एकदम लाल और आँखों में आंसू भी थे। मैंने उसको सीट से उठाया और अपनी गोद में बैठा लिया और पूछा- क्या हुआ तुम रो रही हो?

मधु बोली- कोई नहीं, आप चिंता मत करो, औरतों के आंसू तो किसी भी बात पे निकल जाते हैं। मुझे बहुत अच्छा लग रहा है, मेरी दिल की तमन्ना पूरी हो रही है इसलिए ख़ुशी के आंसू हैं।

नीलेश बोला- यार, शायद इंटरवल होने वाला है, अपन थोड़ा सीधे बैठ जाते हैं।

हमने अपने अपने कपड़े सही किये और चारों अच्छे से अपनी अपनी जगह बैठ गए।

नीता नीलेश के बगल में उसके कंधे पर सर रखकर बैठ गई और मधु मेरे बगल में बैठ कर मेरे कंधे पर सर रखकर बैठी रही।

10 मिनट बाद ही इंटरवल हो गया, मैं और नीलेश जाकर पॉपकॉर्न, ड्रिंक्स और पानी ले आये।

मैंने वाशरूम जाकर अपने कपड़े थोड़े सही किये क्योंकि वो चिपचिपे थे।

हम चारों बाथरूम में ही थे तो शावर ऑन किया और चारों साथ में नहाने लगे। हम सभी एक दूसरे को सहला और पुचकार रहे थे। नहाते हुए कभी नीलेश मधु की बूब्स दबता कभी नीता की चूत में लंड डाल देता। मैं भी कभी मधु के नंगे गीले बदन से खेलता तो कभी नीता के बदन से। सभी लोगो ने एक दूसरे को साबुन लगाया और अच्छे से नहला दिया।

नहाने के बाद कपड़े तो पहनने नहीं थे इसलिए मधु ने नीलेश का बदन पोंछा, नीता ने मेरा और बाद में दोनों ने एक दूसरे का बदन पौंछा।

नीता बोली- भाभी इतना नहाने के बाद तो बड़ी तेज़ भूख लग आई है।

मैंने और नीलेश ने भी हाँ में हाँ मिला दी।

मधु बोली- पोहा तकरीबन तैयार ही है, मैं अभी लेकर आती हूँ।

नीता ने बिस्तर पे ही अखबार बिछा दिया और हम लोग पोहा खाने लगे।

मैंने कहा- आज एक नया गेम खेलते हैं।

सभी लोग एक सुर में बोले- क्या?

मैंने कहा- आज सब अपनी अपनी एक एक फंतासी बताएँगे और बाकी के लोग मिलकर उसकी कल्पना को पूरा करने की कोशिश करेंगे। चाहे फंतासी कितनी भी गन्दी और मलिन क्यूँ न हो। जैसे अभी अभी नीता की एक डर्टी फंतासी को पूरा किया गया, वैसे ही सबकी एक एक इच्छा पूरी की जाएगी।

सभी लोग बहुत खुश दिखाई दिए।

मैंने कहा- तो मधु बताओ तुम्हारी कोई ख्वाहिश?

मधु बोली- मुझे पब्लिक प्लेस में चुदना है।

मैंने कहा- ओके डार्लिंग तुम्हारी यह इच्छा पूरी करेंगे।

फिर मैंने कहा- हाँ भई नीलेश, तेरी कोई फंतासी?

नीलेश बोला- हाँ है तो मेरी फंतासी पर थोड़ी अजीब है!

मैंने कहा- बातें मत बना सीधा बोल, क्या है तेरी डर्टी फंतासी।

नीलेश बोला- मैं नीता को काले लौड़े से अपने सामने चुदवाना चाहता हूँ।

हम सभी लोग हक्के बक्के रह गए, मैंने कहा- यार कुछ और कोई और फंतासी बता जो हो सके?

मेरी बात काटते हुए नीता बोली- नहीं भैया, आपने ही कहा था कि चाहे कैसी भी चाहत हो, हम सबको साथ देना है। तो मैं दूंगी अपने पति को उनकी फंतासी पूरा करने का मौका।

मैंने कहा- जब मियाँ बीवी राज़ी तो क्या करेगा क़ाज़ी, मुझे लगा था कि तुम इसके लिए तैयार नहीं होगी।

नीता कुछ नहीं बोली बस नीलेश को देखती रही।

नीलेश और मधु लगभग एक सुर में बोले- तू अपनी भी तो कोई हसरत बता दे?

इतने में ही फ़ोन बजा, फ़ोन नीलेश के फ़ोन पर आया था, स्क्रीन पर मम्मी लिखा था, मैं बोला- ले बुआ का फ़ोन आ गया।

उसने फ़ोन उठाया और बोला- हाँ मम्मी!

और इधर नीता को इशारा किया, नीता तुरंत नीलेश का लंड चूसने लगी।

बात करते करते ही नीलेश ने मधु को भी करीब आने का इशारा किया। मधु भी नीलेश के पास चली गई और नीलेश की छाती पे निप्पल चूसने लगी। वो मधु की गांड में उंगली करने लगा।

मेरा ध्यान उसके फ़ोन पे चल रही बातों पर नहीं था बल्कि मेरा ध्यान उसके साथ चल रही गतिविधि पर था।

इतने में नीलेश बोला- तो लो आप बोल दो राहुल से!

और उसने फ़ोन मेरी तरफ बढ़ा दिया।

मैं जैसे एकदम नींद तोड़ के उठा हूँ, वैसे फ़ोन पर बोला- हाँ हाँ बुआ? कैसी है आप?

जब तक इधर उधर की बातें ही चल रही थी तब तक नीलेश ने नीता और मधु के कान में कुछ कहा, दोनों लड़कियाँ मुस्कुराई और मेरी तरफ बढ़ी।

मधु मेरे निप्पल चूसने लगी और नीता ने झट से पूरा लंड मुंह में ले लिया और चूसने लगी।

मेरा ध्यान फ़ोन पे जो बुआ बोल रही थी उसमें लग ही नहीं रहा था, मुझे सुनाई सब पड़ रहा था पर समझ कुछ नहीं आ रहा था, मैंने हाँ हाँ… ओके… ओके… बोल कर फ़ोन रख दिया।

फ़ोन रखने के बाद में अपने साथ चल रही रति क्रिया के मज़े लेने लगा।

नीलेश बोला- तो मम्मी क्या बोली?

मैंने बहुत ही गैरजिम्मेदारी से कहा- मुझे नहीं पता वो क्या बोली, मुझे कुछ समझ ही नहीं आया।

नीलेश बोला- यार तू भी न, वो तुझे भोपाल बुला रही है और तूने हाँ हाँ ओके ओके… बोल कर फ़ोन रख दिया।

मैंने कहा- अब एक ने सीने में आग लगा रखी है और दूसरी लंड मुंह में लिए पड़ी है तो घंटा समझ आ रहा था कि बुआ क्या बोल रही है।

नीलेश बोला- यह भी मेरी एक फंतासी हुआ करती थी, जब भी होटल में होते थे, मैं किसी न किसी को फ़ोन लगा लेता और नीता से लौड़ा चुसवाता था। इसलिए मैंने सोचा तुझे भी अनुभव कराऊँ कि कैसा लगता है।

मैंने कहा- हाँ मज़ा तो बहुत आया लेकिन फ़ोन पर मैंने किस बात पे क्या कह दिया इसका कोई अनुमान नहीं है। मैंने नीता का मुंह हटाया और अपना लंड उसके मुंह से बाहर निकाला और मधु को भी अपनी छाती से दूर कर दिया।

नीलेश बोला- अब क्या करें?

तब तक मैंने दोबारा फ़ोन लगाया और बोला- बुआ, आपकी आवाज़ साफ़ नहीं आ रही थी इसलिए कुछ समझ नहीं आया था, क्या बोल रही थी आप?

बुआ ने बताया कि परसों सुबह एक लड़के वाले आ रहे हैं और लगभग बात तय सी ही है, उसके कारण वो हम सबको वहाँ भोपाल बुला रही थी।

मैंने भी ऐसी ख़ुशी की बात में कह दिया- हाँ बुआ, मैं इन सबको लेकर आता हूँ।

फिर सबसे पहले ट्रेन में तत्काल में अगले दिन सुबह की टिकट बुक कर दी, मैनेजर को मैसेज कर दिया कि डॉक्टर ने कम्पलीट बेड रेस्ट के लिए बोला है इसलिए में सोमवार को ही वापस आ पाउँगा।

मधु बोली- चलो में भी पैकिंग कर लेती हूँ वहां तो कपड़े पहनने पड़ेंगे न!

सभी लोग जोर से हंस पड़े।

नीता बोली- मेरे तो कपड़े निकले ही नहीं क्योंकि यहाँ तो कपड़े पहनने की अनुमति ही नहीं है न।

मैंने कहा- हाँ तुम पैकिंग करो, मैं काले भुजंग लम्बे और मोटे से लौड़े का इंतज़ाम करता हूँ नीता के लिए… क्योंकि आज का दिन तो है ही न मस्ती मारने के लिए। और तदनुसार कोई मूवी की टिकट भी बुक करता हूँ। क्यूँ मधु, सिनेमा हॉल पब्लिक प्लेस भी है और ठंडक में चुदाई का भी मज़ा आएगा।

मधु मेरे गले लग गई और बोली- हाँ जान तुमने बहुत अच्छी पब्लिक प्लेस चुना है मेरी फंतासी पूरी करने के लिए।

मैंने तुरंत इंटरनेट पे सर्च किया जिससे पुरुष वेश्या मिल सके। जल्दी ही एक एजेंसी का नंबर मिला उससे मैंने बात की और एक 6 फुट लम्बे काले, मोटे और लम्बे लंड वाले हब्शी को बुक कर लिया।

उसके बाद मैंने एक बकवास सी मूवी के टिकट बुक किये जिससे उसमें भीड़ कम हो, मधु की इच्छा भी पूरी हो जाये और कोई ड्रामा भी न हो।

मैंने कहा- चलो सब लोग तैयार हो जाओ अपन लोग पहले मूवी देखने चल रहे हैं, हब्शी 4 बजे तक आएगा।

मधु पैकिंग करते करते तैयार भी हो गई।

सभी लोग गाड़ी में आकर बैठ गए, आगे नीता पीछे नीलेश और मधु!

मधु बोली- बहुत देर बाद कपड़े पहने हैं, अच्छा लग रहा है।

इस मासूम से वाक्य से हम सभी लोग हंसने लगे।

हम सभी मूवी हॉल में पहुंचे, बहुत ज्यादा लोग नहीं थे सिनेमा में कोई 18+ मूवी ही थी। ज्यादातर कपल्स ही थे मूवी हाल में, मैंने नीलेश को बोला- तू मधु के एक तरफ बैठ और नीता को अपनी तरफ बैठाया तो हम दोनों नीता और नीलेश के बीच में थे जिससे हमें साइड से कोई देख न सके।

मूवी शुरू हुई, अँधेरा हुआ। मुझे मूवी में कोई इंट्रेस्ट तो था नहीं, बस मैंने मधु के ऊपर हाथ फेरना शुरू कर दिया, मधु भी अँधेरे की आड़ में मेरा लंड टटोल रही थी।

मैंने मधु के कपड़ों में हाथ डाला सोचा कि इसकी ब्रा का हुक खोल दूँ, पर जैसे ही मैंने अंदर हाथ डाला तो पाया कि उसने ब्रा पहनी ही नहीं थी।

हम दोनों एक दूसरे की आँखों में देखकर मुस्कुरा दिए।

मधु बोली- कैसा रहा सरप्राइज?

मैं हंसते हुए बोला- बहुत अच्छा, तुम तो चुदने को बेताब नज़र आ रही हो?

मधु तुरंत अपनी सीट से उठी और सीट के नीचे घुटनों पर बैठ गई। नीलेश थोड़ा टेढ़ा होकर बैठ गया जिससे आड़ थोड़ी ज्यादा हो जाये और उसकी भाभी को कोई उसके भाई का लंड चूसते हुए न देख सके।

मधु ने मेरे जीन्स के ऊपर से ही लंड सहलाना शुरू किया और ज़िप नीचे कर दी, और फिर ज़िप में से ही मेरा लौड़ा जो खड़ा ही था, उसे बाहर निकाल दिया। मैंने जीन्स का बटन भी खोल और कच्छे सहित घुटनों तक उतार दिया। जिससे मेरी जान मेरे लंड के साथ साथ मेरे अंटे से भी खेल सके।

थोड़ी देर लंड की चुसाई के बाद मधु बोली- अब आप मेरी चूत में अपनी जीभ से तब तक चुदाई करो जब तक मेरी चूत कम से कम तीन बार पानी न छोड़ दे, मैं अगर तुम्हारे सामने गिड़गिड़ाने भी लगूँ तो भी मुझे मत छोड़ना।

नीलेश एक सीट छोड़ के बैठा हुआ था, उसको अभी अपनी सीट के पास वाली सीट पर आने को कहा और बोली- जब तक तुम्हारा भाई मेरी चूत से पानी निकाल रहा है, मेरे बूब्स को एक भी पल के लिए मसलना और चूसना मत छोड़ना।

नीता को कहा- नीता, तू मेरा दूसरा बोबा अपने मुंह में लेकर रख। आज तुम तीनों मिलकर मुझे जन्नत में पहुँचा दो, मुझ पर कोई तरस मत खाना!

हम तीनों ही मधु के इस रूप को देखकर थोड़े से आश्चर्य में थे पर हमे कोई ख़ास ऐतराज़ नहीं था, क्योंकि मधु भूखी थी और उसकी मनपसंद ख्वाहिश पूरी हो रही थी।

हम सभी ने मन ही मन आज मधु के ताबड़तोड़ चुदाई का प्रण कर लिया था।

मधु थोड़ा सा नीचे सरक कर बैठी गई जिससे उसकी चूत बिल्कुल बाहर को आ जाये और चाटने चूमने में कोई दिक्कत न हो।

नीलेश ने भी मधु के टॉप को ऊपर करके आदेशानुसार मधु के उरोज को अपने मुंह में लेकर मसलना और सहलाना शुरू किया, ऐसे ही नीता भी मधु के दूसरे बोबे के साथ खेलने लगी।

मैं मधु की चूत में घुस गया, उसने अपनी टाँगें चौड़ी कर रखी थी जिससे मैं आराम से अपनी जीभ जितना अंदर हो सके ले जा सकूँ।

मधु इतनी गर्म और कामोत्तेजित थी कि जीभ के अंदर जाते ही दो ही मिनट में उसकी फ़ुद्दी ने पानी छोड़ दिया। पर उसकी तमन्ना अभी भरी नहीं थी। उसकी भूख अपने चरम पर थी, मैं बिना रुके उसकी चूत में ड्रिल मशीन की तरह अपनी जीभ से सनसनी करता ही रहा।

मधु को और मज़ा आये उसके लिए अब मैंने उसकी गांड में अपनी एक उंगली और चूत के निचले हिस्से पर अपने अंगूठे से धीरे धीरे मसाज भी करने लगा।

करीब 15 मिनट बाद मधु झड़ी और इतना पानी निकला जैसे वो मूत रही हो। जब मधु झड़ रही थी तो ऐसे झटके ले रही थी जैसे हार्ट अटैक आ गया हो।

मधु के चिपचिपे पानी से मेरे पूरे कपड़े गीले हो चुके थे, मधु ने पूरी ताकत से अपनी दोनों टांगों के एक दूसरे से मिला रखा था, वो ऐसे ही टाँगे चिपकाये कांपती हुई झड़ती रही।

जब वो थोड़ी सी नार्मल होने लगी तो मैंने टाँगें फिर से चौड़ी करने का इशारा किया, तो मधु बोली- बस हो गया मेरा… अब कुछ नहीं चाहिए।

मैंने कहा- माँ की लौड़ी, अभी एक बार और तुझे और पानी बहाना पड़ेगा तभी छोड़ूँगा मैं तुझे।

मधु बोली- अरे वो तो मैं वासना और कामोत्तेजना में बहकर बोल गई थी, आप बैठ जाओ थोड़ी देर में आपके लौड़े को अपनी चूत में डलवाऊँगी।

मैंने कहा- हाँ ठीक है, पर टाँगें चौड़ी तो कर मुझे थोड़ा सा पानी टेस्ट करना है।

जैसे ही मधु की टाँगें थोड़ी चौड़ी हुई, मैंने फिर से अपना सर उसकी चूत पर लगा दिया और फिर से जीभ से अपनी बीवी की चूत की चुदाई करने लगा।

मधु बोली- प्लीज छोड़ दो, बात को समझो… मैंने ऐसे ही कह दिया था, मेरा यह मतलब नहीं था।

पर मैंने भी सोचा हुआ था कि आज इसको इतना चोदूँगा की यह रो पड़े।

मैं बोला- तुमने बोला था न, तो अब मजे लो, टेंशन मत लो। ए नीलेश… ज़रा अपनी भाभी का सर पे हाथ फेर और उसे नार्मल कर!

नीलेश ने बिना मुंह से मधु का बोबा निकाले ही सर पे हाथ फेरना शुरू कर दिया।
 
अब तक मधु को समझ आ गया था कि मैंने बात को पुरुषत्व पे ले लिया है, तो उसने मुझसे बोलना बंद कर दिया और अपनी फंतासी को जीने लगी।

मैंने फिर से मधु की गांड में एक उंगली डाल कर और अबकी बार अंगूठा भी थोड़ा चूत के थोड़ा ज्यादा अन्दर डाल कर मसलने लगा और जीभ से मधु की चूत का दाना छेड़ता रहा।

थोड़ी ही देर में मधु फिर से भड़भड़ा के पानी बहाने लगी, उसके चेहरे पर पसीना उसकी आँखें एकदम लाल और आँखों में आंसू भी थे। मैंने उसको सीट से उठाया और अपनी गोद में बैठा लिया और पूछा- क्या हुआ तुम रो रही हो?

मधु बोली- कोई नहीं, आप चिंता मत करो, औरतों के आंसू तो किसी भी बात पे निकल जाते हैं। मुझे बहुत अच्छा लग रहा है, मेरी दिल की तमन्ना पूरी हो रही है इसलिए ख़ुशी के आंसू हैं।

नीलेश बोला- यार, शायद इंटरवल होने वाला है, अपन थोड़ा सीधे बैठ जाते हैं।

हमने अपने अपने कपड़े सही किये और चारों अच्छे से अपनी अपनी जगह बैठ गए।

नीता नीलेश के बगल में उसके कंधे पर सर रखकर बैठ गई और मधु मेरे बगल में बैठ कर मेरे कंधे पर सर रखकर बैठी रही।

10 मिनट बाद ही इंटरवल हो गया, मैं और नीलेश जाकर पॉपकॉर्न, ड्रिंक्स और पानी ले आये।

मैंने वाशरूम जाकर अपने कपड़े थोड़े सही किये क्योंकि वो चिपचिपे थे।

मधु बोली- मैंने इतना चुदवाया है आज कि मुझे थोड़ी थकान हो रही है, मुझे थोड़ी देर आराम करना है।

और बोलते बोलते मधु बिस्तर पर गिर गई, जल्दी ही वो सो गई।

हम सभी को 4 बजे का इंतज़ार था पर अभी एक घंटा था हब्शी के आने में, मैंने मधु को चादर उढ़ा दी और हम तीनों बाहर के कमरे में आ गये जिससे मधु की नींद में कोई विघ्न न आये।

बाहर के कमरे में आकर में सोफे पर बैठ गया और नीता मेरे बगल में नीलेश कालीन पर था और उसका सर मेरी जांघों से टिका हुआ था।

नीलेश बोला- यार, ये ज़िन्दगी के सबसे हसीं पल हैं कितना अच्छा होता कि अपन लोग साथ में ही रहते। मैं भी दिल्ली में ही नौकरी ढूंढ लेता हूँ।

मैंने कहा- हाँ, मेरी कंपनी में अप्लाई कर दे, वहाँ कुछ जुगाड़ भी लगा दूंगा मैं!

नीलेश बोला- अपन इसी मकान में साथ साथ रहेंगे, जब मर्जी आये नीता को चोदूँगा और जब मन करेगा भाभी को।

नीता भी बोली- हाँ, बहुत मज़ा आएगा, इससे पहले हम लोग सिर्फ रात को 20 मिनट के लिए बिस्तर पर जाने के बाद सेक्स करते और सो जाते थे, पता ही नहीं था कि इस सेक्स की दुनिया में इससे ज्यादा आनन्द भी लिया जा सकता है। पहले मन में अगर ऐसे ख्याल आ भी जाते थे तो यही सोचती रहती थी कि शायद नीलू को अच्छा नहीं लगेगा पर अब खुल के अपनी ज़िन्दगी जी सकती हूँ। किसी का भी लंड किसी भी जगह बिना किसी डर के ले सकती हूँ। पहले ये सब पाप लगता था।

नीलेश बोला- हाँ, मैं भी अब तुम्हारी मदद से किसी भी चूत को अपना बना सकता हूँ, तुम मेरे लिए किसी भी लड़की को मेरे बिस्तर तक लाने में मदद कर सकती हो।

बातें करते करते चार भी बज गए तब तक एक मधु भी एक नींद निकाल के बाहर के कमरे में आ गई और आते ही मेरी गोदी में बैठ गई और मुझे किस करने लगी।

नीता बोली- भाभी, आप सच में बहुत बहादुर हो, सबके सामने चुदते समय यह डर नहीं लग रहा था कि कोई और भी आपको चोद सकता है?

मधु बोली- जब तक राहुल मेरे साथ है, मेरी मर्जी के खिलाफ मुझे छूना तो दूर मेरी तरफ कोई आँख भी नहीं उठा सकता।

और अगर इनके होते हुए भी मेरी मर्जी के खिलाफ मुझे हाथ लगा जाता तो धत्त है ऐसे मर्द पे! जब इन्होंने कहा, तभी लोग मुझे देखकर मुठ मार पाये। मुझे भी अच्छा लग रहा था कि मेरे बदन को देखकर जवान और बूढ़े सभी मुठ मार रहे थे।

मैंने कहा- चल छोड़ डायलाग बाज़ी, और सब लोग कपड़े पहन लो, हब्शी आता ही होगा नीता की चूत मारने के लिए।

नीता बोली- भैया, अब वो तो मुझे चोदने ही आने वाला है तो कपड़े क्यूँ पहनने?

मैंने कहा- थोड़ी नजाकत से चुदवाओगी तो और आनन्द आएगा, भले ही वो तुम्हारे लिए रंडी ही है पर मजा तो तब है जब एक रंडी भी खुल के एन्जॉय करे और तुम्हें अपने चरम पर ले जाए, तुम्हें खुश करे।

नीता बोली- हाँ भैया, यह बात तो सही है।

सभी लोग कपड़े पहनने लगे, मैंने मधु से पूछा- डार्लिंग, तुम्हें भी चाहिए क्या उस हब्शी का लंड?

मधु बोली- मैं देखने के बाद ही फैसला करुँगी… वैसे पिछले कुछ दिनों में इतना सेक्स कर लिया है कि अभी तो फिलहाल ऐसा कोई मन नहीं है।

सभी लोग घर के नार्मल कपड़ों में आ गये, मैंने और नीलेश ने बनियान और बरमूडा पहन लिया, नीता ने टॉप और जीन्स, मधु ने सूट।

तभी घंटी बजी, नीलेश ने दरवाज़ा खोला, सामने के भयानक काला और डरावना आदमी खड़ा था।

उसने विनम्रता से पूछा- Can I talk to राहुल?

मैंने अंदर से ही आवाज़ लगाकर बोला- हाँ मैं हूँ राहुल, तुम्हें हिंदी नहीं आती क्या?

दरवाज़े के बाहर से ही उसने बोला- आता है पर थोड़ा थोड़ा।

मैंने कहा- ठीक है, अंदर आ जाओ।

उसको सोफे पर बैठने के लिए इशारा किया। सोफे पर बैठकर बेचारा इधर उधर बगलें झांकता सा दिख रहा था।

मैंने कहा- पैसे पहले लोगे या बाद में?

वो बोला- कैसा भी चलेगा।

मैं थोड़ी दबंग आवाज़ में बोला- नीता!

जब तक नीता बाहर आये, मैंने पूछा- तुम्हारा नाम क्या है?

वो कालू बोला- मेरा नाम देंयल जॉन है। लोग मुझे डी जे बुलाते है।

नीता बाहर आई, बोली- हाँ भैया?

मैंने कहा- देख लो, ये है वो!

डी जे थोड़ा हक्का बक्का था पर चुप था।

नीता थोड़ा शर्माते हुए नज़रें झुका के बोली- हाँ अच्छा है।

मैं थोड़ा गुस्सा दिखाते हुए बोला- अरे शादी के लिए थोड़े ही दिखा रहे है जो ऐसे शर्मा कर बोल रही है। उसके करीब जाओ उसके बदन को छू कर आजमा लो सब सामान चेक कर लो।

नीता ने नजरें उठाई और जाकर उसकी गोदी में बैठ गई, उसकी टी-शर्ट को ऊपर से गले के अंदर झाँक कर देखा, फिर बोली- नाइस, तुम्हारी छाती पर बाल नहीं है।

डी जे ने अपने हाथ हवा में ऐसे उठा रखे थे जैसे चेकिंग के लिए हाथ उठा लिए जाते है, वो नीता को कहीं भी छू नहीं रहा था।

नीता ने डी जे के जीन्स पर हाथ फेरते हुए मेरी तरफ देखकर बोली- हाँ, भैया चलेगा ये!

नीता उसकी गोदी से उठी, तब तक मधु भी आ गई बाहर के कमरे में, मैंने कहा- मधु देख ये आया है नीता को चोदने!

मधु आँखें बड़ी करके बोली- अरे बाप रे… यह तो इंसान ही नहीं लग रहा।

मैंने थोड़ा धीरे से कहा- उसे हिंदी आती है।

डी जे बोला- सर कोई बात नहीं!

मैंने कहा- तो फिर क्या है, हो जा शुरू… जाओ नीता इसे अंदर ले जाओ।

नीता ने उसका हाथ पकड़ा और उसे सोफे से उठाने के लिए बड़ी अदा से अंदर ले जाने लगी। नीलेश बिल्कुल चुपचाप यह सारा नज़ारा देख रहा था।

मैं नीलेश की ख़ामोशी तोड़ने के लिए बोला- नीलेश भाई, तुझे अगर तेरी बीवी नीता के लिए वो कालू पसंद नहीं आया हो तो बता, अपन कोई और बुला लेंगे।

नीलेश थोड़ा गहरी मुस्कान के साथ बोला- नहीं यार, ऐसी कोई बात नहीं है।

मैंने कहा- फिर इतना शांत क्यूँ खड़ा है, तेरी फंतासी पूरी होने जा रही है, तुझे कोई ख़ुशी नहीं हो रही?

तब तक डी जे और नीता ने कमरा बंद कर लिया था, मैंने आवाज़ लगाई- नीता!

जल्दी ही नीता बाहर आई और बोली- हाँ भैया?

मैंने कहा- मुझे तो ऐसा लग रहा है जैसे तुम्हारी फंतासी पूरी होने जा रही है।

नीता बोली- नहीं, ऐसी तो कोई बात नहीं है।

तो मैंने कहा- तो नीलेश की फंतासी के हिसाब से तो तुम्हें नीलेश के सामने उस कालू से शारीरिक सम्बन्ध बनाने हैं।

नीता बोली- मुझे तो आप लोगों से कोई दिक्कत नहीं है पर वो आदमी कैसे ये सब करेगा इसलिए अंदर गई तो उसने दरवाज़ा बंद कर लिया।

मैंने कहा- उसकी चिंता मत करो, वो तो साला रंडी है, जो कहेंगे वो करना पड़ेगा।

मैंने आवाज़ लगाई- डी जे!

वो बाहर के कमरे में आ गया।

मैंने उससे कहा- तुम्हें जो भी कुछ करना है, यहीं करना है।

मैं थोड़ा रूककर बोला- चलो, अपनी टी-शर्ट उतारो।

काले सांड ने अपनी टी-शर्ट उतारी, उसका शरीर देखने लायक था। उसके पूरा बदन गठीला, एक एक मांशपेशी और नस नस दिखाई पड़ रही थी।

नीलेश बोला- अब क्या हर चीज़ बोलनी पड़ेगी, नीता को खुश करो, तुम जैसे भी कर सकते हो।

डी जे कुछ नहीं बोला और नीता को गोद में उठा लिया जैसे कोई दो साल की बच्ची को उठाता है और उसे सोफे पर बैठा दिया।

फिर कालू खड़ा हुआ और जैसे स्ट्रिप टीज़र करते है वैसे अपने जीन्स का बटन खोलने लगा। मैंने जल्दी ही माहौल समझा और पिटबुल के गाने लगा कर आवाज़ बढ़ा दी।

डी जे ने मुझे आँखों से ही थैंक्स बोला।

मैंने बोला- मधु तुम भी नीता के बगल में जाकर बैठ जाओ।

नीलेश बोला- हाँ भाभी, जैसे लड़कियों की पार्टी में स्ट्रिप टीज़र डांस होता है वैसा ही लगेगा जाओ न!

मधु भी नीता के बगल में जाकर बैठ गई।

अब धीरे धीरे गाने की धुन पर डी जे अपने जीन्स की ज़िप खोलते हुए अपनी गांड मटकाता हुआ लड़कियों के लिए स्ट्रिप टीज़ करने लगा।

दोनों लड़कियों को उसने इतना उकसा दिया कि मधु ने उसके जीन्स के ऊपर से ही हथियार की धार देखने की कोशिश करने लगी और नीता भी कालू की गांड पे चपेट लगा देती।

जैसे ही जीन्स कालू के शरीर से अलग हुई, कालू ने एक स्टेप में अपनी चड्डी को थोड़ा उठा के अंदर का हथियार दिखाया और फिर बंद कर दिया जैसे उन्हें दिखा के चिढ़ा रहा हो।

मैं और नीलेश सिगरेट के धुएं के साथ खड़े खड़े ये तमाशा देख रहे थे।

कालू ने दोनों लड़कियों को इशारा किया कि वो भी अपने कपड़े उतार लें।

नीता ने तुरंत अपना टॉप उतार फेंका, मधु कपड़े बिना उतारे ही बस एक टक कालू को देख रही थी।

डी जे ने नीता के दोनों बूब्स अपने दोनों बड़े बड़े हाथों से पकड़े और हल्की हल्की मसाज देने लगा।

इधर नीलेश ने अपने कपड़े उतारना शुरू कर दिया।

डी जे ने नीता को खड़ा किया और उसके जीन्स का बटन अपने मुंह से खोल दिया, ताकतवर दांतों से ज़िप भी नीचे करता जा रहा था और नीता की गांड भी सहला रहा था।

मधु अपने पैर के अंगूठे के नाख़ून से कालू के सीने के निप्पल को छेड़ने लगी। डी जे भी दिखा रहा था कि हाँ उसे अच्छा लग रहा है।

तभी मेरे बरमूडा नीचे सरका, मैंने पीछे देखा तो नीलेश ने सरकाया था। मैं भी कपड़े उतार के नीलेश की तरह नंगा हो चूका था।

डी जे ने अब तक नीता को पूरी तरह नंगी कर दिया था। मधु ने अब तक अपना बदन ढक कर रखा था पर हाँ वो अपने पैर के अंगूठे के नाख़ून से डी जे के छाती ही नहीं अब उसके औजार पर भी वार कर रही थी।

डी जे ने नीता को सोफे पर बैठाया और अब धीरे धीरे अपनी बॉक्सर को उतारना शुरू किया।

कभी दांई तरफ से बॉक्सर नीचे करता कभी बांई तरफ से और फिर रोक देता।

कालू के बदन पर अब तक एक भी बाल नहीं दिखा था।

इंतज़ार की घड़ियाँ समाप्त हुई और डी जे ने अपना लम्बा और काला लौड़ा दोनों औरतों के सामने कर दिया।

नीलेश बोला- नीता चूस इसका लंड!

डी जे का लंड अभी पूरी तरह खड़ा ही नहीं था तब भी वो कम से कम 9 इंच तो होगा ही।

मधु बोली- ये आदमी का है या गधे का? नीलेश भैया, आदमी ही क्यूँ बोला, बोल देते गधे से चुदवाना है नीता को।

नीलेश बोला- भाभी मैंने सपने में कई बार इसको ऐसे ही काले लंड से चुदते हुए और मस्ती करते हुए इसी को चोदा है। जब हम चुदाई करते थे तो हम अपने मन में कोई कहानी से अपने आपको उकसा कर अपना लंड खड़ा करता था। यह ऐसी अचूक कहानी है जिसमें मेरा लंड हमेशा ही खड़ा हो जाता था और मैं नीता को कभी कभी 40-45 मिनट तक चोदता रहता था।

तब तक नीता ने कालू के लौड़े को चूसना शुरू कर दिया था। इधर मधु भी धीरे धीरे मूड में आरही थी, उसने भी एक एक करके अपने बदन से कपड़े अलग करना शुरू कर दिए थे।

मधु ने डी जे के बॉल्स सहलाना शुरू किये इधर नीलेश भी मेरी जांघें और लंड को छूना शुरू कर चुका था।

डी जे जमीन में लेट गया और नीता को अपने मुंह पर बैठा लिया, मधु सोफे पर बैठे बैठे अपने पैर के पंजों से डी जे के लंड की मुठ मारने लगी। नीता भी अपनी चूत पर कालू की जीभ का पूरा मज़ा ले रही थी, अपने हाथों से अपने बूब्स दबा कर नीलेश और मुझे दिखा रही थी, बता रही थी कि वो इस फंतासी को पूरी तरह जी रही है।

नीलेश बोला- यार, यहाँ कब तक खड़े खड़े तमाशा देखेंगे, चलो अंदर चलते हैं, बिस्तर पर सभी लोग मस्ती करेंगे।

नीता बोली- नीलू, थोड़ी देर रुको न, अभी इसकी जीभ सही जगह पर छू रही है, थोड़ा मज़ा ले लेने दो, फिर चलूंगी।

नीलेश बोला- रंडी कैसी कालिये की जीभ के मजे ले रही है, ले मजे और मजे ले बेन की लोड़ी।

हम तीनों मैं, मधु और नीलेश बैडरूम में चले गए।

8-10 मिनट के बाद नीता हमारे कमरे में आई, तब तक हम तीनों एक दूसरे के बदन से खेल रहे थे।

नीता आकर बोली- मुझे इस कालू पर मूतना है, उस दिन आप सब मेरे ऊपर मूते थे। आज मैं इस पर मूतना चाहती हूँ।

बाथरूम में कालू को लिटा कर वैसे ही उसके मुंह पर नीता बैठ गई और डी जे के मुंह पर मूतने लगी। डी जे भी एक्सपर्ट था, वो भी नीता को पूरा आनन्द देने के लिए आराम से अपने ऊपर मुतवाता रहा। नीता का मूत पीता, कभी उसके मूत को मुंह में भरकर नीता के पेट तक उसी का कुल्ला कर देता।

नीता ने पूरा मूतने के बाद भी लगभग 5 मिनट और कालू के मुंह पर बैठकर अपने कूल्हे मटका मटका के अपनी चूत को चटवाया। फिर दोनों साथ में शावर लेने लगे, बाथरूम का दरवाज़ा एक मिनट के लिए भी बंद नहीं किया गया।

नीता नहा कर बदन पौंछ कर बिस्तर के बिल्कुल बीच में लेट गई, अपनी टांगें हवा में उछाल कर डी जे को अपनी चूत में अपना लंड डालने को निमंत्रण दे दिया।

डी जे प्रोफेशनल तो था ही, तुरंत अपना लौड़ा हाथ में लेकर आगे बढ़ा और नीता के चूत के द्वार पर रख दिया। उसने पहले अपने लंड के टोपे से नीता की चूत इतनी रगड़ी कि नीता लंड लेने के लिए लगभग पागल और भूखी शेरनी जैसी हो गई।

नीता खुद ही उछलने लगी जिससे उसका लंड थोड़ा अंदर चला जाए, वो डी जे को पकड़ कर हिलाने की कोशिश कर रही थी पर वो सांड कहा हिलने वाला था।

जब डी जे पूरी तरह संतुष्ट हो गया कि अब नीता को ज्यादा दर्द नहीं होगा उसने थोड़ा सा लंड नीता की चूत में ठेल दिया।

मेरे और नीलेश के लंड के मुकाबले इस लंड का मोटापा काफी था। नीता ने तकिए का कोन पूरी ताकत से अपनी मुट्ठी में भर लिया और अपने मुंह को दबा लिया जिससे उसकी चीख न निकल जाए।

नीलेश तुरंत उठकर गया और अपनी बीवी नीता का सर गोदी में रखकर बोला- नीता जान, अपने आप को रोको मत… चीखो, चिल्लाओ कोई बात नहीं।

नीता बोली- इसने तो मेरी चूत फाड़ डाली, मैं मर जाऊँगी जान!

नीलेश बोला- तू मेरा लंड चूस, ये तेरी चूत मारेगा तुझे दर्द नहीं होने देगा।

मधु ने ऐसी बातें सुनी तो सरसों का तेल उठा लाई, बिना किसी से कुछ बोले डी जे के पास गई उसके लंड को पकड़ा और बाहर निकाल दिया और उसके लंड पर ढेर सारा तेल मल दिया, थोड़ा सा तेल लेकर नीता की चूत पर भी लगा दिया और थोड़ा ऊँगली नीता की चूत के अंदर डाल के तेल अंदर तक लगा दिया।

नीता बोली- थैंक यू भाभी! अब शायद इसका लौड़ा लेना आसान हो जायेगा।

मधु मुस्कुरा कर बोली- एन्जॉय करो डियर, थैंक्स की क्या बात है।

नीता पलट गई और घोड़ी बन गई, कालू भी घुटने के बल बैठ गया, नीता का मुंह अब नीलेश के लंड पर था।

कालू ने धीरे धीरे अपना लंड नीता की चूत में पेलना शुरू कर दिया। नीलेश इस तरह सीधा लेटा था जैसे वो नीता का तकिया हो, नीता के एक हाथ की तरफ नीलेश के पैर थे और दूसरे हाथ की तरफ उसका मुंह।

नीलेश ने मुझे अपनी तरफ बुलाया और मेरा लंड चूसने लगा।

मैंने भी मधु को सीधा लिटा दिया और उसकी चूत चाटने लगा और मधु का मुंह नीता और कालू के लंड के पास पहुंच चूका था तो वो भी कालू के बॉल्स और सहला और चाट रही थी।

पूरा गोला बना लिया था हम लोगों ने जिसमें सभी एक दूसरे को पूरा आनन्द दे रहे थे।

नीता की चूत में अब जोरदार धक्का लगा जिससे डी जे का पूरा लंड अब नीता की चूत में घुस गया था, नीता चीख उठी, बोली- ये माँ का लौड़ा चूत से डाल के मुंह से निकालेगा।

नीता के मुंह से गाली सुनकर बहुत अच्छा लगा, सभी लोग हंस दिए।

नीलेश बोला- तू बस ये बता… मज़ा आ रहा है या नहीं?

नीता कुछ नहीं बोल सकी, बस आह उन्हह ओह्ह्ह आंहह ओह्ह्ह्ह करती ही रह गई।

मैंने मधु से कहा- बोल, अगर तुझे भी चाहिए ऐसा लंड तो ले ले।

मधु बोली- मुझे चुदने का शौक है पर इतने बड़े लंड से अपनी चूत नहीं फड़वानी… मेरे लिए तो आप दोनों के ही लंड बहुत हैं कोई और पसंद आएगा तो मैं ज़रूर बताऊँगी।

मैं बोला- डी जे, मेरी बीवी को भी खुश कर यार, उसे भी ओरल का मज़ा दे दे।

डी जे बोला- यस सर!

डी जे ने नीता को लिटा दिया, पीछे से चोदता रहा और नीता और डी जे के बीच जो जगह बनी उसमें मधु को लिटा लिया और उसकी चूत को चाटने लगा।

नीता और मधु की पीठ एक दूसरे से टकरा रही थी। नीलेश मधु के बूब्स मसलने और चूसने लगा वही में नीता की तरफ जाकर नीता के बूब्स के साथ खेलने लगा।

नीता और मधु पूरी पसीने में तरबतर थी।

नीता बोली- भैया, यह राक्षस अपना पानी छोड़ेगा या नहीं?

मैंने कहा- तू उसकी क्यूँ चिंता करती है, वो तो रंडी है न, जब तक तेरा मन है लिए रह लौड़ा अपनी चूत में… जब तेरा हो जाये तो निकलवा देना। घर जाकर हिलाता रहेगा या कोई दूसरी ग्राहक पे निबट लेगा।

नीता हँसते हुए बोली- भैया, मैं तो 2 बार अपना पानी छोड़ चुकी हूँ। बस एक और बार निकाल लूँ, उसके बाद इस लंड को जाने दूंगी। भैया आपका लंड चूसती हूँ आप अपना पानी मेरे मुंह में निकाल देना। मुझे थोड़ा पानी पीना है।

नीता अब और ज्यादा मज़ा ले रही थी, वो अब कालू के लंड पर उछल रही थी, मेरे लंड को वो गले तक लेकर चूस रही थी। इससे पहले कि मैं अपना पानी उसके मुंह में छोड़ता, नीता पानी छोड़ने लगी।

नीता इतना मज़ा ले रही थी कि वो बोली- फाड़ दे मेरी चूत, निकाल दे मेरा पानी, मादरचोद मुझे खा जा। चोद साले मुझे चोद, मसल डाल मुझे।

मैं उसके बूब्स मसल रहा था और डी जे पूरी ताकत से नीता को पेल रहा था।

नीता के झड़ने के बाद डी जे बोला- मैं भी आ रहा हूँ।

डी जे ने अपना लंड बाहर निकाला और जोरों से हिलाने लगा।

मधु भी नीता के बिल्कुल बगल में मुंह लगा कर बैठ गई।

मैंने पहली बार अपनी बीवी को लंड से निकलने वाले पानी के लिए इतना उतावला देखा था।

डी जे की मलाई निकलने लगी, उसने इतना मलाई निकाली कि दोनों औरतें पूरी तरह उसकी मलाई में भीग गई।

नीलेश ने डी जे को पैसे दिए और थैंक्स बोल कर तौलिया लगा कर गेट तक छोड़ कर आया।

तब तक नीता और मधु एक दूसरे को स्मूच करके एक साथ नहाने चली गई।

शाम के 7 बज चुके थे, सभी लोग थके हुए थे, भूख भी लग रही थी, मधु और नीता ने खाना बनाया, खाना खाकर सभी लोग एक साथ सो गए।

सभी इतने थके हुए थे कि आज की रात किसी ने किसी को भी नहीं चोदा लेकिन अगले दिन हमारे पास समय नहीं था चुदाई का इसलिए मैं नीता की बाँहों में और नीलेश मधु की बाँहों में ही सोते रहे !

और अब यह तो स्पष्ट ही था कि हमने कपड़े नहीं पहने हुए थे।

अगली सुबह 10 बजे हमारी ट्रेन थी भोपाल जाने की… सभी लोग सुबह 7 बजे उठ कर नहा धोकर तैयार हो गए और हम 9:40 पर स्टेशन पहुंच गए थे।

अभी ट्रेन लग ही रही थी, नीलेश ने पूछा- भाई, अपना सीट नंबर और बोगी कौन सा है?

मैंने कहा- यार कहीं जगह नहीं थी, मैंने फर्स्ट क्लास में बुकिंग कर ली है। बस प्रॉब्लम यह है कि 2 सीट एक कम्पार्टमेंट और बाकी 2 अलग अलग कम्पार्टमेंट में मिली है। अब अंदर ही कुछ जुगाड़ करना पड़ेगा।

ट्रेन आई मैंने TT से बात की तो उसने हमारी चारों सीट एक ही कम्पार्टमेंट में करवा दी।

मुझे बुकिंग करते वक़्त से लेकर अभी तक कोई अंदाज़ा नहीं था कि यह सफर इतना सुहाना भी हो सकता है।

अगली सुबह 10 बजे हमारी ट्रेन थी भोपाल की… सभी लोग सुबह 7 बजे उठकर नहा धोकर तैयार हो गए और हम 9:40 पर स्टेशन पहुँच गए थे।

अभी ट्रेन लग ही रही थी, नीलेश ने पूछा- भाई अपना सीट नंबर और बोगी कौन सी है।

मैंने कहा- यार कहीं जगह नहीं थी, मैंने फर्स्ट क्लास में बुकिंग कर ली है। बस प्रॉब्लम यह है कि दो सीट एक कम्पार्टमेंट और बाकी दो अलग अलग कम्पार्टमेंट में मिली हैं। अब अंदर ही कुछ जुगाड़ करना पड़ेगा।

ट्रेन के आते ही हमने सामान एक ही कम्पार्टमेंट की बर्थ के नीचे रख दिया और मैं और नीलेश चले गए खाने पीने का सामान लेने। हमने कुछ पानी, पेप्सी, जूस, कुछ केक्स और चिप्स ले लिए थे। क्योंकि मैंने फर्स्ट क्लास में रिजर्वेशन कराया था तो अपने सामान में एक व्हिस्की की बोतल तो घर से ही ले के चला था।

नीलेश बोला- यार, तूने तो रंग जमा दिया। तूने बताया ही नहीं कि तूने फर्स्ट क्लास में बुकिंग की है।

मैंने कहा- बस यार, कहीं नहीं मिल रही थी तो इसमें ही करा दी। चल ट्रेन में चलते हैं, वैसे तो फर्स्ट क्लास है इसलिए टीटी जल्दी ही अपनी बात मान जायेगा पर फिर भी दूसरे यात्रियों को परेशानी न हो इसलिए पहले से व्यवस्था कर देनी चाहिए।

अभी अभी गाड़ी लगी ही थी, टीटी दूर दूर तक कहीं दिखाई नहीं पड़ रहा था।

हमने जाकर अपने कम्पार्टमेंट में खाने पीने का सामान रख दिया और पूछा- कोई और चीज़ की ज़रूरत तो नहीं है।

तभी टीटी भी आ गया, मैंने उसे पूरा किस्सा बताया तो उसने बोला- सर, मैं कोशिश करूँगा कि आपको तकलीफ न दूँ और आने वाले यात्रियों को समझा कर दूसरे कम्पार्टमेंट में शिफ्ट कर दूँ पर अगर कोई नहीं माना तो मुझे आप लोगों परेशान करना पड़ेगा। वैसे चिंता की कोई बात नहीं है, आम तौर पर फर्स्ट क्लास में सफर करने वाले थोड़े एडजस्टेबल होते हैं।

गाड़ी चल चुकी थी।

हम लोग ट्रेन के गेट पर सिगरेट पीते हुए ही बातें कर रहे थे। जब हम लौटे तो कम्पार्टमेंट का दरवाज़ा बंद था।

हमने खटखटाया तो अंदर से आवाज़ आई- कौन है?

हमने कहा- हम ही होंगे और कौन आएगा? खोलो।

अंदर देखा तो दोनों ने कपड़े चेंज कर लिए थे। घर से दोनों साड़ी पहन कर आई थी, पर ट्रेन में आकर दोनों ने छोटे टॉप और केपरी टाइप के कपड़े पहन लिए।

नीलेश बोला- ये क्या है?

मधु बोली- हमें थोड़े ही पता था कि हम फर्स्ट क्लास से जा रहे हैं, अब 12 घंटे कौन साड़ी पहन कर बैठेगा… आराम से जब भोपाल आने वाला होगा तब चेंज कर लेंगे।

मैंने भी अपने बैग से व्हिस्की की बोतल और गिलास निकाले और पूछा- हाँ भई, कौन कौन मेरा साथ देने में रुचि रखता है?

नीता और मधु बोली- हम लोग तो नहीं पी सकते क्योंकि हम तो ससुराल जा रहे हैं।

नीलेश बोला- इतना लम्बा रास्ता है, चलो धीरे धीरे पीते हुए रास्ता मस्त कटेगा।

हमने एक एक छोटा छोटा पैग बनाया और नीता और मधु को सॉफ्ट ड्रिंक्स दे दिए और चियर्स करके पीने लगे।

नीता बोली- अब तो हम भोपाल चले जायेंगे और आप लोग दिल्ली में रहोगे पर यह समय बहुत अच्छा बीता। आप लोग भी जल्दी जल्दी मिलने की कोशिश करना, हम लोग भी कोशिश करेंगे कि हमारे दिल्ली के चक्कर ज्यादा लगा करें।

मधु बोली- हाँ, तुम दोनों के साथ तो बहुत अच्छे वाले सम्बन्ध हो गए हैं अब तो जल्दी जल्दी मिलना ही पड़ेगा।

मैंने कहा- सम्बन्ध नहीं, अवैध सम्बन्ध!

कम्पार्टमेंट में कुछ पल के लिए ख़ामोशी छा गई, फिर सब हंस पड़े।

मैं भी हंसी में हंसने लगा।

नीता बोली- भैया, हमारे पास अभी भी 12 घंटे हैं, कोई गेम खेलते हैं न, कुछ सोचिये न?

मैंने कहा- आईडिया तो बुरा नहीं है।

मैं उठा और दरवाज़ा अच्छे से चटकनी लगा कर बंद कर दियाम मैं बोला- नीता तुम यहाँ आ जाओ मेरे पास, नीलेश तू मधु के बगल में बैठ, ट्रेन में कुछ धमाल करते हैं।

नीलेश बोला- वाह यार, मैंने तो ये सोचा ही नहीं, कम्पार्टमेंट का फायदा उठाया जा सकता है।

बोलते बोलते वो मधु के बगल में जाकर बैठ गया।

मधु आधी लेटी हुई थी, नीलेश मधु के बूब्स मसल कर बोला- क्यूँ भाभी है न?

मधु बोली- हाँ भैया, अब जो कुछ पल रह गए हैं उसमें कुछ मस्ती तो बनती है।

नीता बोली- हाँ मस्ती तो निश्चित रूप से करेंगे ही, पर हम लोग कोई फैंटम थोड़े ही हैं जो 12 घंटे तक चुदाई कर सकें। इसलिए जैसा भैया गेम बताएँगे, खेल खेल में कोई न कोई मस्ती तो ढूंढ ही लेंगे। क्यूँ भैया?

और मेरी तरफ आँख मार दी।

मधु बोली- बात तो तूने सही बोली है नीता, गेम खेलने में ज्यादा मज़ा आएगा।

नीलेश बोला- यार, कोई अच्छा सा गेम सोच जो यहाँ खेल सकें।

मैंने कहा- चलो फिर आज मैं एक नया खेल बताता हूँ, कोई बोतल नहीं घूमेगी। सबकी एक एक करके बारी आएगी। बाकी के तीन लोग मिलकर सामने वाले के लिए टास्क बताएँगे। अगर तीनों लोगों की सहमति होगी तो टास्क पूरा करना ही पड़ेगा, कोई बहाना नहीं चलेगा।

तीनों ने हाँ तो कर दी पर वो यही सोच रहे थे कि यह तो लगभग वही गेम है जो घर पर पहले दिन खेला था।

मैंने कहा- बताओ सबसे पहले टास्क लेने को कौन तैयार है?

नीता ने सबसे पहले हाथ खड़ा कर दिया।

मैंने कहा- तुम्हारे लिए बहुत ही आसान सा टास्क है, तुम्हें मेरे 3 सवालों का सच सच जबाब देना होगा।

नीता बोली- ओ के… पूछिए।

मैंने कहा- पहला सवाल यह है कि तुम्हें पिछले 2 दिनों में सबसे अच्छा पल कौन सा लगा और क्यूं?

नीता बोली- यह आसान सवाल नहीं है पर मैं जवाब ज़रूर दूंगी। पिछले 2 दिनों में सबसे अच्छा पल था जब मेरी इच्छा का काम अपने आप हुआ था। जब मुझे नीलेश ने खुद आपसे पहली बार चुदने के लिए गर्म करके भेज दिया था।
 
दूसरा सवाल: कल शाम को कालू से चुदाई का अनुभव कैसा रहा? क्या तुम इसे बार बार करना चाहोगी?

नीलेश की आँखों में देखती हुई नीता बोली- अगर मेरे पति को अच्छा लगता है कि मुझे कोई और चोदे तो मैं ऐसा करती रहूंगी… पर सच पूछिए तो मुझे बड़े काले मूसल से ज्यादा आनन्द आप दोनों के प्यारे से लंड में आता है। यह बात सही है कि यह मेरा पहला अनुभव था जब मुझे एक काला आदमी चोद रहा था, वो भी जिसको पैसे दिए गए थे कि वो मुझे खुश करे। उसने मुझे बहुत अच्छे से उत्तेजित किया पर सबसे ज्यादा उत्तेजित करने वाली बात यह थी कि ये सब मैं अकेली नहीं, आप लोगों के सामने कर रही थी। शायद अकेले में मैं इतनी प्रसन्न नहीं हो पाती।

तीसरा सवाल: तुमने शादी के पहले और शादी के बाद अब तक कितने लण्डों को देखा है? कितने लण्डों को छुआ है? और कितने लण्डों से चुदवाया है?

नीता अपनी जगह से उठी और नीलेश को बाहों में लेकर बोली- मैं चाहूँ तो इसका जो भी जवाब दूंगी, आप लोगों को मानना ही पड़ेगा पर मैं सच बोलना चाहती हूँ। शादी से पहले से ही मैं थोड़ी जिज्ञासु किस्म की लड़की रही हूँ। मैंने शादी से पहले अनगिनत लण्डों को देखा है। उसमें मेरे भाई, पापा, चाचा और भी कई लोग आते हैं। मैंने बाथरूम के रोशनदान में एक छेद ढूंढ लिया था जिसमें से मैं इन सभी को देख लेती थी।

जैसा कि मैंने बताया कि मैं जिज्ञासु थी तो मैं बस, ट्रेन में चलते समय लण्डों को छू भी लेती थी और कई बार तो मैंने उनकी चलती ट्रेन में खड़े खड़े अपने हाथों से मुठ भी मारी है। क्या करती वो अपना लंड मेरी गांड में चुभाये जा रहा था, मैंने हाथ पीछे किया तो उसका लंड मेरी हथेली को छू गया। मैंने उसे पकड़ लिया और हिलाती रही जब तक कि उसकी मलाई मेरे हाथ में नहीं गिर गई।

उसके बाद तो मुझे मज़ा आने लगा, चलती बस ट्रेन में बैठने की जगह भी होती तो भी नहीं बैठती बल्कि खड़े आदमियों के खड़े लण्डों को सहला आती थी।

हाँ चुदवाने के मामले में मैंने अपनी मर्जी से कोई लंड अपनी चूत में नहीं लिया। मुझे सबसे पहले मेरे चाचा ने गांड मारी थी, उसके बाद मैंने एक बॉयफ्रेंड बनाया था उससे भी मैं गांड ही मरवाती थी और चूत में सिर्फ उंगली करवाती थी। मेरी चूत में अब तक केवल तीन ही लंड गए हैं, एक नीलू, दूसरे आप और तीसरा वो कालू।

नीलेश ने नीता को बाँहों में भर के जकड़ लिया और एक बेहतरीन स्मूच में होंठों से होंठ जोड़ कर नीलेश शायद सिर्फ यही कहने की कोशिश कर रहा था कि क्या आज तक तुम्हें मुझ पर इतना भरोसा नहीं था कि ये सब बातें कह पाती।

और शायद नीता कह रही थी कि बताना तो कब से चाहती थी पर हिम्मत नहीं पड़ती थी, सोचती थी कि तुम क्या सोचोगे।

आज के इस स्मूच में केवल और केवल एक प्रेम का भाव था एक पति का अपनी पत्नी के लिए और एक पत्नी का अपने पति के लिए। सम्मान और प्रेम का ऐसा भाव मैंने उन दोनों में एक दूजे के लिए अब तक नहीं देखा था।

उनके इस चुम्बन से बाहर निकालने का एक ही तरीका था, मैंने कहा- हाँ तो अब अगला नंबर किसका है?

नीलेश अपने होंठों को होंठों से अलग करके बोला- तू जिसका भी बोले?

मैंने कहा- तो फिर तेरा ही नंबर है।

नीता के चेहरे पर असीम शांति का भाव था पर खेल को पूरे भाव के साथ खेलने के लिए बोली- हाँ भैया, इनको भी कोई अच्छा सा टास्क देना।

मैंने कहा- तुम्हीं दे दो कोई टास्क नीलू को?

नीता बोली -अगर ऐसी बात है तो चलो नीलू, तुम यहाँ से बाहर निकल कर जाओ और सामने आने वाली पहली लड़की या औरत को तुम्हें छेड़ना है। छेड़ने का मतलब है कि तुम्हें उसके बूब्स दबाने हैं।

नीलेश बोला- यह कैसा टास्क है? मेरी पिटाई हो गई तो?

नीता बोली- पिटाई न हो, इसका ध्यान रखना और हंसने लगी।

नीलेश कम्पार्टमेंट से बाहर निकला, हम लोग भी उसे देखने के लिए बाहर आये।

वहाँ बीच में जो अटेंडेंट बैठा होता है, वो खड़ा हो गया और बड़े अदब से पूछा- सर, मैं आपकी किस तरह सहायता कर सकता हूँ?

नीलेश बोला- मेरी मदद कोई नहीं कर सकता, आप बैठ जाओ, मुझे जैसे ही आपकी ज़रूरत होगी, मैं आपको बता दूंगा।

नीलेश वहाँ से सेकंड AC के डब्बे में घुसा। वहाँ तीसरी बर्थ पर ही एक सुन्दर सी 35-38 साल की महिला बैठी थी।

नीलेश ने पीछे मुड़ कर देखा, हमने इशारा किया ‘हाँ यही है जिसके नीलेश को बूब्स दबाने हैं।

नीलेश उससे बात करना शुरू किया- एक्सक्यूज़ मी, यहाँ नीचे आपका ही सामान रखा है?

महिला बोली- हाँ जी, क्यूँ क्या हुआ?

नीलेश बोला- मेरे पास थोड़ा सामान ज्यादा है, मैं थोड़ा सामान यहाँ रख दूँ?

तब तक मैंने नीलेश की मदद करने के लिए उसके पास पहुँचा और उसे उस औरत पर धक्का सा दे दिया।

नीलेश ने गिरते ही उसके दोनों बूब्स कस के दबा दिए।

मैंने उसे क्रॉस करते हुए कहा- साले अंधे, दीखता नहीं है, रास्ते में खड़े हो जाते हैं।

नीलेश औरत के ऊपर से खड़ा होता हुआ बोला- अँधा मैं हूँ या तू है?

और इधर औरत की तरफ मुंह करके बोला- मैं बहुत माफ़ी चाहता हूँ।

औरत के बूब्स नीलेश ने इतनी जोर से दबाए थे कि वो औरत बोली- आप जाइये यहाँ से… मैं आपका कोई सामान नहीं रख सकती।

और धीरे धीरे कुछ बड़बड़ाने लगी।

नीलेश वहाँ से सीधा कम्पार्टमेंट में आ गया, मैं थोड़ी देर बाद वापस पहुँचा।

जब मैं पहुँचा तो सभी लोग इसी घटना पर हंस रहे थे, मधु और नीता ताली पीट पीट कर नीलेश का मजाक उड़ा रहे थे, नीता बोली- अगर भैया नहीं होते तो तुम कभी भी उस औरत को छू नहीं पाते।

मैंने अंदर आकर कहा- नीलेश, तूने इतनी जोर से उसके मम्मे दबाए कि बेचारी अभी तक अपने बूब्स सहला रही है।

नीलेश बोला- साली थी ही एकदम क़यामत, उम्र कुछ भी हो पर थी साली गजब की बला! इसीलिए जोश जोश में थोड़ा जोर से दब गए होंगे।

मधु बोली- अब आपकी बारी!

मैंने कहा- ओके, मैं तैयार हूँ, बताओ क्या करना है?

मधु बोली- आप अपने आप को बहुत अफलातून समझते हो न, आज मैं आपको ऐसा टास्क दूंगी जो आप पूरा नहीं कर पाओगे। अगर आप टास्क पूरा नहीं कर सके तो आपकी सजा होगी कि आप पूरे 15 दिन-रात तक आप किसी भी तरह का सेक्स नहीं कर सकेंगे। यहाँ तक की बाथरूम में जाकर मुठ भी नहीं मार सकते।

मैंने कहा- यह हुई न बात, अब आएगा मज़ा… बताओ ऐसा कौन सा काम है जिसके लिए तुमने इतनी बड़ी शर्त रख दी। और साथ ही यह भी बता देना कि जीत गया तो क्या मिलेगा?

मधु बोली- आपको उसी औरत को किस करना है जिसके अभी नीलेश भैया ने मम्मे दबाये हैं। और हाँ अगर आप जीत गए तो आपकी मर्जी, जो आप चाहोगे, करूँगी।

‘मैं तुम्हारी चुनौती स्वीकार करता हूँ। जीत कर ही बताऊँगा कि मैं क्या करवाऊँगा तुमसे!’

मधु बोली- आपको उसी औरत को किस करना है जिसके अभी नीलेश भैया ने मम्मे दबाये हैं। और हाँ अगर आप जीत गए तो आपकी मर्जी, जो आप चाहोगे, करूँगी।

‘मैं तुम्हारी चुनौती स्वीकार करता हूँ। जीत कर ही बताऊँगा कि मैं क्या करवाऊँगा तुमसे!’

अब मैं मन मन सोच रहा था आखिर मैं यह करूँगा कैसे? बीवी के सामने अफलातून वाली इमेज को बनाए रखने के लिए ज़रूरी था की इस टास्क तो पूरा करूँ… पर कुछ नहीं सूझ रहा था।

इतना सोचते हुए में बाहर तो आ गया और ट्रेन के गेट पर खड़ा होकर सिगरेट पीने लगा।

सभी लोग मेरे पीछे आ ही गए थे देखने के लिए कि मैं ऐसा क्या करूँगा जिससे वो बंदी मुझे चूम ले।

पर कहावत है न अल्लाह मेहरबान तो गधा पहलवान… ऐसा ही कुछ हुआ मेरे साथ!

सभी लोग मेरे बगल मैं आकर खड़े हो गए थे और बातें कर रहे थे। नीलेश ने मेरे हाथ से सिगरेट ली और कश लगाने लगा। तभी मैंने देखा की वही खूबसूरत औरत हमारी तरफ ही देख रही थी, वो हमें गुस्से में देख रही थी।

नीलेश ने मुझे सिगरेट दिया और अपने कम्पार्टमेंट की तरफ हो लिया। नीता और मधु भी नीलेश के पीछे हो लिए।

मैंने उस महिला को देखकर कहा- देखिये, आप जो सोच रही हैं वो बिलकुल सही है।

उसके थोड़ा और करीब गया और कहा- हम सभी लोग एक गेम खेल रहे हैं, उसमे आप बिना बात के मोहरा बन गई हैं। पर सबको तो मैंने जिता दिया और अब यह चाल मेरे ऊपर है और मैं ये बाज़ी हारने वाला हूँ।

महिला थोड़ी नाखुश सी बोली- आप समझते क्या हैं अपने आप को? मैं कोई चीज़ हूँ जिसके ऊपर आपने शर्त लगा ली?

मैंने कहा- एक बात सुनिए, आपको किसी ने चीज़ नहीं बनाया। खुद खुदा ने आपको हमारे बीच इस खेल के लिए चुना है। हमने सिर्फ इतना ही कहा था कि यहाँ से जाते समय जो पहली लड़की दिखे उसके साथ अपना टास्क पूरा करना है। अब बताइए हमने कहाँ, खुद ईश्वर ने आपको हमारे खेल का हिस्सा बनाया है।

महिला बोली- अब आपका क्या टास्क है?

मैंने कहा- मुझे आपको किस करना है बस!

महिला बोली- और तुम ये कैसे करने वाले हो?

मैंने कहा- शायद मैं ये टास्क पूरा न कर सकूं पर मैंने सोचा अगर मैं आपको सब कुछ साफ़ साफ़ बताऊँगा तो आप मेरा साथ देंगी।

महिला एक पल को सोच में पड़ गई फिर हल्की मुस्कान से बोली- और वो लोग जिन्होंने आपको टास्क दिया है वो कैसे मानेंगे कि आपने टास्क पूरा कर लिया?

मैंने पीछे देखा तो सब कम्पार्टमेंट में घुस गए थे।

मैं बोला- आप आइये न हमारे कम्पार्टमेंट में!

कम्पार्टमेंट में घुसते ही देखा, सभी लोग चुप और एकदम डरे हुए से थे।

मैंने कहा- ये देखिये, मैं अपना टास्क पूरा करता हूँ तुम सबके सामने।

मैंने उस औरत के होंठों पर होंठ रख दिए।

मेरे होंठ से होंठ मिलते ही उसे करंट सा लगा और वो बुरी तरह मुझसे चिपक गई और मुझे स्मूच करने लगी।

मैंने भी अपना हाथ उसके ऊपर घुमाना शुरू कर दिया, उसकी पीठ सहलाते हुए मेरा हाथ उसके मस्त बूब्स पर चला गया। मैंने उसके बूब्स भी सहलाना शुरू कर दिया और वो मुझे किसी भी चीज़ के लिए मना नहीं कर रही थी जिससे मेरी हिम्मत और बढ़ती जा रही थी।

अब मैंने अपने दूसरे हाथ से उसके कूल्हे भी सम्भाल लिए, अभी तक हमारा चुम्बन चल ही रहा था कभी वो मेरे ऊपर के होंठ को चूसती तो कभी में उसके निचले होंठ को अपने दोनों होंठों के बीच रखकर चूसता।

मधु बोली- मान गई आपको यार, आप सच में अफलातून ही हो।

उस औरत को थोड़ा होश आया, फिर थोड़ी शर्म भी आ गई, बोली- मैं थोड़ी ज्यादा ही बह गई थी, सॉरी।

मैंने उसे कहा- कोई बात नहीं, आप थोड़ी देर हमारे साथ बैठ जाइये, कुछ पानी या कोल्ड ड्रिंक्स वगैरह लेंगी।

वो बोली- हाँ थोड़ा पानी मिल जाता तो अच्छा होता।

उसको पानी देने के बाद मैंने और नीलेश ने पैग उठाया और बोले- चियर्स… एक और टास्क पूरा कर लिया।

‘हाँ तो मधु डार्लिंग, अब कहो, अब है तुम्हारी बारी और शर्त वाली बात तो में बाद में ही बताऊँगा।’

पानी पीने के बाद वो औरत बोली- अब मैं अपनी सीट पर जाती हूँ।

मैंने कहा- आप चाहो तो आप भी हमारे साथ खेल सकती हो।

पर वो नहीं रुकी और बोली- नहीं आप लोग खेलिए, मैं अपनी सीट पर ही जा रही हूँ।

और वो अपनी सीट पर चली गई।

मधु बोली- तो बताओ अब क्या आदेश है मेरे आका?

‘तुमने मुझे बहुत टेढ़ा काम दिया था करने को, अब तुम्हें भी कुछ ऐसा ही काम बताऊंगा जिससे तेरी गांड में बम्बू हो जाये।’

मधु इठलाते हुए बोली- आय हाय… मजा आ जायेगा जब गांड में बम्बू जायेगा। बताओ न क्या करना है मुझे?

मैंने कहा- तुम्हें सबसे पहले स्ट्रिप टीज करना है, उसके बाद जब पूरी नंगी हो जाओगी तब ट्रेन के गेट पर 2 मिनट तक खड़े रहना है। ट्रेन के बाहर के लोग अगर कमेंट्स या गालियाँ दे तो उन्हें अपने बूब्स पकड़ के हिला हिला के दिखाना है।

मधु के चेहरे पर हवाइयाँ उड़ने लगी, वो बोली- यह तो नाइंसाफी है। ट्रेन के बाहर के ही नहीं, ट्रेन के अंदर के लोग भी तो देखेंगे न मुझे? मेरा टास्क चेंज करो।

नीता बोली- हाँ भैया, यह टास्क तो बहुत कठिन है, थोड़ा रियायत तो बरत ही सकते हैं न?

नीलेश बो-ला तेरे बोलते बोलते मैंने तो अपनी प्यारी सी नंगी भाभी को कल्पना में देख भी लिया था। पर ठीक है अपन खेल खेल रहे हैं, कुछ थोड़ा आसान सा टास्क दे दे जिससे इनके बदन का दीदार हो सके बहुत देर से भाभी को नंगा नहीं देखा।

मैंने कहा- चलो टास्क को थोड़ा सा आसान कर देते हैं। तुम्हें नंगे होने के बाद कम्पार्टमेंट से बाहर जाना है और एक बाथरूम से लेकर दूसरे बाथरूम तक दौड़ लगा कर आ जाना है।

नीलेश बोला- हाँ, अब तो ठीक ही है।

नीता बोली- ये भी है तो मुश्किल लेकिन हमारी भाभी भी एक्सपर्ट हैं, कर ही लेंगी। चिंता मत करो भाभी में आपके साथ हूँ। इनके टास्क में यह कहीं भी नहीं है कि मैं आपकी मदद नहीं कर सकती। मैं करुँगी आपकी मदद टास्क पूरा करने में।

मधु बोली- ठीक है। मैं कोशिश करती हूँ।

मधु दोनों बर्थ के बीच खड़ी होकर धीरे धीरे अपने कपड़े उतारने लगी, चेहरे पर थोड़ी शिकन साफ़ दिखाई पड़ रही थी जो इस बात का आभास करा रही थी कि वो कपड़े तो उतार लेगी पर बाहर कैसे जाएगी।

मैंने नीता से कहा- तुम वहाँ बैठी बैठी क्या कर रही हो, इधर आओ और मेरा लंड चूसो।

नीलेश मुझे फटी आँखों से देख रहा था।

नीता उठी और मेरी टांगों के बीच बैठ गई, मैं खिड़की से तकिया लगाकर टाँगें चौड़ी करके बैठा था।

नीता ने मेरे जीन्स का बटन खोला, ज़िप खोली और लंड को बाहर निकालने लगी।

मैंने कहा- थोड़ा प्यार से नीता डार्लिंग, ज़रा नजाकत दिखाओ। वो देखो तेरी भाभी नंगी होने में बिजी है कैसे अपने जिस्म की नुमाइश कर रही है साली… मस्त लगती है न अपनी जान?

नीता बोली- हाँ भैया, भाभी का फिगर एकदम परफेक्ट है।

नीता मेरे लंड को मसल के प्यार करने लगी थी।

मधु अभी तक उधेड़ बन में ही लगी थी की आखिर वो टास्क पूरा कैसे करेगी। मैंने नीता का मुंह अपने हाथ से अपने लौड़े के पास ले गया। नीता को इशारा काफी था जिस से वो समझ जाए कि अब उसे लंड मुंह में ले लेना है।

नीता ने लंड मुंह में लेकर ऐसे चूसना शुरू किया जैसे कुल्फी आइस क्रीम हो।

मधु नंगी हो चुकी थी और अपने चूतड़ मटका के मुझे और नीलेश को उकसा रही थी।

मधु बोली- छोड़ इनके लंड को और एक काम कर बाहर जाकर देख, कोई है तो नहीं? और अटेंडेंट को पानी की बोतल लेने भेज देना। मैं फटाफट दौड़ के अपना टास्क पूरा कर लूंगी।

नीता लंड बाहर निकाल कर बोली- हाँ भाभी, यह मस्त जुगाड़ है। मैं अभी आई।

नीता एक चक्कर लगा के आई और बोली- भाभी, वो अटेंडेंट ही था, उसे भेज दिया है आप जल्दी से अपना टास्क पूरा कर लो।

नीता बाहर गेट पे खड़ी हो गई मधु पूरी नंगी दौड़ती हुई पहले बाथरूम की तरफ गई जो सेकंड AC के डिब्बे की तरफ था और भागकर दूसरी और आई जिस तरफ से बोगी बन्द होती है।

वो उस बाथरूम के दरवाज़े को हाथ लगाकर लौट रही थी, थोड़ी रिलैक्स भी हो गयी थी क्योंकि वो लगभग अपना पूरा टास्क खत्म कर चुकी थी।

तभी उस बाथरूम का दरवाज़ा खुला, हाँ आप बिल्कुल सही पहचाने… अंदर से वही औरत निकली जिसके कुछ देर पहले नीलेश ने मम्मे दबाए थे और मैंने चुम्बन करके उसके बदन पर इधर उधर हाथ घुमाया ही था।

मधु उससे बिना आँखें मिलाये, तेज़ी से आकर कम्पार्टमेंट में आ गई।

मधु के अंदर आते ही, नीता ने कम्पार्टमेंट के अंदर आकर दरवाज़ा बंद किया और जोर जोर से हंसने लगी और मधु को हाय फाइव दिया।

मधु जल्दी जल्दी कपड़े पहनने लगी। मैंने मधु को पीछे से पकड़ा और जोर से बूब्स दबा दिए।

मधु बोली- छोड़ो मुझे, बाहर तुम्हारी वही आंटी खड़ी है।

मधु ने कपड़े पहन लिए थे। इधर शायद आंटी अपनी सीट तक जाकर बेचैन होकर वापस आई और गेट खटखटाया।

मैंने कड़क स्वर में पूछा- कौन है?

आंटी की आवाज़ आई- मैं…

मैंने दरवाज़ा खोला, आंटी बोली- क्या मुझे थोड़ी सी पेप्सी मिल सकती है? खैर मुझे समझ तो आ रहा था की आंटी को कौन सी पेप्सी चाहिए पर फिर भी औपचारिकता वश मैंने कहा- हाँ क्यू नहीं।

और में अंदर आकर पेप्सी उठा कर दे दी।

आंटी अंदर तक आ चुकी थी और कोने की सीट पर अपने चूतड़ टिका लिए थे।

पेप्सी के दो बड़े बड़े घूंट पीने के बाद आंटी बोली- क्या मैं यहीं बैठ जाऊँ? आप लोग अपना गेम कंटिन्यू करो, मैं खेलूंगी नहीं, पर देख तो सकती हूँ।

सभी लोग चुप थे, आंटी बोली- तुम लोग कौन हो?

नीलेश बोला- हम दोनों भाई है और ये हमारी बीवियाँ है।

आंटी ने मधु की तरफ ऊँगली करके पूछा- ये किसकी बीवी है?

मधु मेरी तरफ ऊँगली करके बोली- मैं इनकी पत्नी हूँ।

आंटी ने अपनी नज़र झुका ली।

नीता बोली- आप इतने सवाल क्यूँ पूछ रही हैं?

आंटी बोली- मैं तो ऐसे ही पूछ रही थी, सॉरी अगर आपको बुरा लगा हो तो।

मैंने कहा- देखिये, हम लोग थोड़े कामुक खेल खेल रहे हैं, आप यहाँ बैठेंगी तो शायद आपको सहज न लगे इसलिए अगर आप हम लोगो को अकेला छोड़ दें तो।

मेरी बात खत्म होने से पहले ही आंटी बोली- नहीं, मैं आप लोगो के गेम्स देखने ही आई हूँ।

नीता बोली- आप शायद सहज होंगी, पर हम लोग आपके सामने खेलने में सहज नहीं हों तो!

मैंने नीता की तरफ आँख मार के इशारा किया कि रहने दे इसके होने से हम लोगों को खेलने में किक मिलेगी।

मैं बोला- तो हाँ भई, अब किसकी बारी है?

नीलेश और मधु एक सुर में बोले- नीता!

मैंने कहा- कोई है जो टास्क देना चाहता है, या मैं दूँ?

नीलेश बोला- तू ही दे!

मधु बोली- इसको टास्क कैसे दूँ, इसने तो मेरी मदद की थी।

मैंने कहा- यह तो खेल है, मदद की थी तो कोई अच्छा सा टास्क दे दो, जो उसको भी अच्छा लगे।

मधु बोली- नहीं, अभी तो आप ही दो, मैं तो नीलेश भैया को दूँगी।

हमारी डबल मीनिंग बात और लहजे को देख आंटी की आँखें फटी पड़ी थी। पर कोई भी उन पर ध्यान नहीं दे रहा था, उन्हें ऐसा महसूस करा रहे थे जैसे वो यहाँ हो ही न।

मैंने नीता से कहा- तुम्हें ट्रेन में जो भी आदमी पसंद आये, उसकी मलाई अपने हाथ में लानी है।

नीता ने भवें तानी और बोली- मैं ये कैसे करुँगी।

मधु ने नीता के कान में कुछ कहा और नीता के चेहरे पर मुस्कान बिखर गई, नीता आराम से मटक कर बाहर चली गई।

हम लोग भी जिज्ञासावश उसके पीछे पीछे गए पर एक दूरी बनकर रखी, जिससे देख सकें कि वो आखिर कर क्या रही है।

वो बाथरूम के बगल में जाकर खड़ी हो गई, काफी देर खड़े रहने के बावजूद नीता ने कुछ नहीं किया।

हम लोग वापस कम्पार्टमेंट में आ गये।

थोड़ी देर में नीता आई और बोली- आपसे एक गलती हो गयी भैया!

मैंने कहा- क्या गलती?

नीता आई और मेरी टांगों के बीच बैठ गई, फिर बोली- पूरी ट्रेन में तो आप भी आते हो। वैसे सबसे पसन्द आदमी तो मुझे मेरा नीलू ही है पर उसकी मलाई तो मैं लेती ही रहूंगी, अभी आपकी मलाई अपने हाथ में ले लेती हूँ।

आंटी मेरी वाली बर्थ पे ही बैठी थी, आंटी फुर्ती से सामने की सीट पर आ गई।

नीता ने दरवाज़ा बंद किया और बोली- क्यूँ भैया, हो गई न गलती आपसे?

मैंने कहा- अगर यह गलती है तो ऐसे गलती तो मैं बार बार करना चाहूंगा।

सभी लोग हंसने लगे, आंटी एक दबी मुस्कान हंस दी थी। आंटी ने थोड़ी हिचक के साथ पूछा- तुम दोनों मियां बीवी हो न?

मैंने तपाक से जबाब दिया- नहीं, ये मुझे भैया बोल रही है तो ये मेरे भाई की बीवी है।

आंटी मधु और नीलेश की और देख कर बोली- तो ये तुम्हारे सामने ये लोग…

इससे पहले की आंटी कुछ और कह पाती, नीलेश मधु की चूचियों को रगड़ते हुए बोला- आंटी देखो, मेरी भाभी की चूचियाँ इतनी मस्त हैं। अब इससे ज़िन्दगी भर सिर्फ एक ही आदमी खेलता तो ये नाइंसाफी नहीं होती?

आंटी शर्म से लाल हो रही थी।

इधर नीता मेरी टांगों के बीच बैठकर मेरी जीन्स खोल चुकी थी और मेरे लंड को चूम और सहला कर बड़ा कर रही थी।

आंटी की नज़र मेरे लंड पे जमी हुई थी।

मैं थोड़ा उठकर बैठ गया और नीता की पीठ सहलाते हुए उसे भी प्यार करने लगा।

नीता ने मेरे लंड से प्यार करते हुए मेरी जीन्स उतार फेंकी, मैंने भी नीता की पीठ सहलाते हुए उसके संगमरमर बदन से टॉप को अलग कर दिया था।

नीता अब हमारे गैंग की उस्ताद खिलाड़िन थी, उसने मेरी पसंद के अनुसार अंदर ब्रा नहीं पहनी थी।

आंटी कभी नीता के जिस्म को देखती और कभी मेरे लंड को।

इधर नीलेश मधु को अपनी गोद में बैठा कर उसके बदन को निचोड़ रहा था।

नीता मेरे लंड को चूस कर मेरे ऊपर आई और मुझे स्मूच करने लगी। फिर अपने होंठों को हटा कर पोंछते हुए बोली- आपके लंड का टेस्ट बहुत बढ़िया है।

नीता फिर से अपने बूब्स से मेरे शरीर को रगड़ती हुई नीचे सरक गई और वापस मेरे लंड को मुंह में भर लिया।

मैं थोड़ा उठ कर अपने बदन पर पड़े हुए बिना मतलब के बोझिल कपड़ों को निकाल फेंका।

नीता ने लंड को अपने मुंह से बाहर निकाल कर अपने शॉर्ट्स और पैंटी को उतार के अपने पति नीलेश की तरफ उछाल दिया और मधु से बोली- भाभी, नीलू ने आपको रगड़ रगड़ आपके निप्पल खड़े कर दिए हैं। कपड़ों के ऊपर से आपकी चूचियाँ एकदम कामुक लग रही हैं।

आंटी सबसे नज़र बचा कर धीरे धीरे हमारे काम रस का मजा लेते हुए कभी कभी अपने बदन पर इधर उधर हाथ लगा कर अपने आपको सांत्वना दे रही थी।

कल शाम से कामुकता के भूखे, अब मैं और नीता दोनों ही नंगे थे।

नीता मेरे ऊपर लेट कर मुझे चूमने और प्यार करने लगी, मुझसे धीरे से कान में बोली- क्या मैं आपको आपके नाम और एक दो गालियाँ दे सकती हूँ?

मैंने अपनी कामुकता की खुमारी में नीता की नंगी पीठ सहलाते गले पर काटते हुए कहा- हाँ जानेमन, तू मुझे जो मर्ज़ी आये बोल सकती है।

नीलेश बोला- खुसुर पुसुर मत करो, हमें भी सुनने दो कि क्या बातें हो रही हैं।

मधु बोली- नीलेश भैया, करने दो, अपन तो नयन सुख में ही खुश हैं।

आंटी बोली- मैं भी कुछ बोल सकती हूँ?

नीलेश बोला- अरे आप हो अभी तक यहीं पर, हाँ बोलो बोलो… जो मर्जी आये बोलो!

आंटी बोली- मेरी उम्र 38 साल है, मेरी बहुत जल्दी शादी हो गई थी। मेरे पति का देहांत हुए आज 12 साल हो गए। आज तक मुझे कभी दुबारा शारीरिक सम्बन्ध बनने की ज़रूरत महसूस नहीं हुई है। पर आज…

वो कुछ कहते कहते रुक गई… फ़िर बोली- मैं अपना काम अपनी उँगलियों से ही चला लेती हूँ, वो भी मुझे महीने में 1 या हद से हद 2 बार करने की ज़रूरत पड़ती है।

मधु बोली- आंटी, साफ़ साफ़ बोलो, कहना क्या चाहती हो?

आंटी बोली- कुछ नहीं, सिर्फ थैंक्स बोलना चाहती हूँ, अब मैं घर जाकर सबसे कह दूंगी कि मुझे दुबारा शादी करनी है। सॉरी आप लोग लगे रहो।

नीता और मैं तो वैसे भी रुकने वाले नहीं थे, जब बुढ़िया ने भौंकना शुरू किया था, तभी नीता ने मेरे लंड को चूत में डलवा लिया था। और धीरे धीरे अपने कूल्हे मटका के मजे दे रही थी।

इधर नीलेश भी मधु के टॉप के अंदर हाथ डाल के मधु के मम्मे सहला रहा था।

नीता बोली- भइया आपका… ओह्ह सॉरी… राहुल तेरा लंड बहुत अच्छा है, मेरी चूत में मस्त गुदगुदी कर रहा है। मैं आज अपना टास्क हार जाना चाहती हूँ, राहुल तेरे लंड से निकला हुआ अमृत अपने हाथों में नहीं अपनी चूत में भरवाना चाहती हूँ। सजा में जो कहोगे करुँगी, जान प्लीज, मुझे हरा दो, मुझे बुरी तरह चोदो जैसे आप भाभी को पटक कर चोदते हो।

आंटी के सब्र का बाँध भी टूट ही गया, आंटी अपनी साड़ी ऊपर करके अपने एक पैर को जमीन में लटका कर और एक पैर को सीट पर रख लिया था। अपनी पैंटी के साइड से उंगली डाल कर अपनी चूत को सहला रही थी।

किसी ने दरवाज़ा पीटा, नीलेश बोला- कौन है?

उसने मधु के कपड़ों से हाथ बाहर निकाला, अपने खुद के कपडे सही किये, आंटी ने फुर्ती से अपनी साड़ी नीचे की, मधु ने हम दोनों के ऊपर कम्बल और चादर उढ़ा दिया।

दरवाज़े के बाहर से आवाज़ आई- अटेंडेंट, आपकी चाय लाया हूँ।

मैं और नीता हिल तो नहीं रहे थे पर ट्रेन के हिलने की वजह से हमें धीमे धीमे धक्के तो लग ही रहे थे। जिसे हम दोनों आँखें बंद करके अनुभव कर रहे थे।

ये अपने आप में बेहतरीन अनुभव था… जब न ही आप और न ही आपका सेक्स पार्टनर हिले फिर भी छोटे छोटे धक्के आपकी चुदाई के आनन्द को बढ़ाते रहें।

अटेंडेंट दरवाज़ा खुलते ही अंदर आया और टेबल पर व्हिस्की और कोक देखकर बोला- इसे हटा दूँ या?

नीलेश बोला- उसे रखा रहने दो और चाय रख दो, थोड़ी देर बाद हम बना लेंगे।

अटेंडेंट चाय रखकर जा ही रहा था कि उसने हमारी तरफ ध्यान से देखा। पता नहीं क्या समझा क्या नहीं समझा, पर बाहर चला गया।

उसके जाते ही मैंने कहा- अरे कोई चादर हटाओ हमारे ऊपर से…

नीलेश जब तक आगे बढ़ पाता, तब तक आंटी ने फटाक से चादर हम दोनों पर से हटा दी।

मधु ने दरवाज़ा बंद किया, दोनों बर्थ के बीच बैठ गई और नीता की गांड सहलाने लगी, गांड से हाथ नीचे लेकर वो मेरे अंडकोष तक सहलाने लगी।

नीता बोली- भाभी, आपके हाथों में तो जादू है।

इधर आंटी पर इतनी देर में किसी ने ध्यान नहीं दिया था तो वो अपनी ओर आकर्षण खींचने के लिए अपनी पैंटी उतार कर साड़ी ऊपर करके अपनी चूत सहलाने लगी।

मैंने देखा कि अब लोहा गर्म है, अब चोट करेंगे तो वार खाली नहीं जायेगा।

मैंने कहा- अरे दो दो मर्दों के होते हुए तुम अपने हाथ से अपनी चूत सहला रही हो। लानत है हम दोनों पर, नीलेश मेरे लंड से तो तेरी बीवी चुद रही है, तू इनकी मदद कर थोड़ी इनकी चूत को चाट ले और उनकी कामाग्नि को शांत कर।

नीलेश मेरा इशारा समझ गया, उसने आंटी के कंधे पकड़े और उन्हें 2 तकियों के सहारे लिटा दिया।

नीलेश ने जैसे ही अपनी जीभ उसकी चूत के ऊपर फिराई वो तो रो पड़ी, नीलेश के मुंह को अपनी चूत में घुसाने लगी इतनी ताकत से अपने हाथों से नीलेश के मुंह को अपनी चूत में धकेलने लगी।
 
नीलेश भी कच्चा खिलाड़ी नहीं था, अपना मुंह उसकी चूत से दूर करके बोला- जहाँ इतने साल बिना लंड के काम चलाया है थोड़ा सा और इंतज़ार करो। मुझे भी मज़ा लेने दो और खुद भी मज़ा लो। ताकत लगाओगी तो कोई फायदा नहीं होगा, मैं उठकर अपनी भाभी की चूत के साथ मजे ले लूंगा।

आंटी थोड़ा सुबकते हुए बोली- मैंने आज तक केवल नंगी पिक्चर में ही चूत चाटते हुए देखा है। मेरे पति ने मुझे कभी ओरल दिया ही नहीं था। आज जब पहली बार मेरी चूत से जीभ छू गई तो मैं कंट्रोल नहीं कर सकी, प्लीज मुझे और मत तड़पाओ, प्लीज मेरी चुत को वो परम सुख वो परम आनन्द दे दो।

इधर नीता और मैं बिना हिले ट्रेन के हिलने से पैदा होने वाले आनन्द का मज़ा ले रहे थे। मधु चुपचाप यह नज़ारा देख रही थी।

मैं बोला- मधु, आज बहुत दिनों से पराये लंड से चुद रही है, आज अपने पति से अपनी चूत चटवा ले।

मधु बोली- मैं अगर आपके मुंह पर बैठ गई तो आप इस पराई नंगी औरत की चूत के दर्शन नहीं कर पाएंगे इसलिए दूर बैठी हूँ।

आप कौन से भागे जा रहे हो, आप तो मेरे ही हो चाहे जब चुद लूंगी आपसे तो!

आंटी के तो जैसे आँख कान सब बंद हो चुके थे, उन्हें कुछ सुनाई या दिखाई नहीं पड़ रहा था। अगर कुछ सुनाई दे भी रहा था तो वो उसके कान में अमृत की तरह घुल रहा था।

नीलेश चूत चाटने में तो एक्सपर्ट था ही साथ ही वो अब अपने हाथ उस औरत के मम्मों को भी सहलाता जा रहा था जिससे आंटी की कामुकता और बढ़ती जा रही थी।

मधु ने जाकर नीलेश की मदद करने के लिए आंटी के पेटीकोट का नाड़ा भी खोल दिया।

नीलेश अपना हाथ कई बार वहाँ लेजा चुका था पर चाटते हुए नाड़ा खोलना थोड़ा मुश्किल पड़ रहा था।

नीलेश ने खड़े होकर आंटी को पूरी तरह नंगी कर दिया, वो अपने हाथों से अपने मम्मों को ढकने की नाकाम कोशिश कर रही थी। उसकी शक्ल ऐसी हो गई थी जैसे हम उसकी इज़्ज़त लूट रहे हो।

मैंने कहा- नीलेश छोड़ उसको, तू तो मधु को चोद!

नीलेश ने मेरी तरफ देखा, आंटी बेचारी कुछ न बोलने की न करने की…

नीलेश मधु की तरफ बढ़ा, आंटी बोली- क्या हुआ, मुझसे कोई गलती हो गई क्या? प्लीज बता दो पर मुझे ऐसे मत छोड़ो।

मैंने कहा- तुम तो अपना बदन ऐसे छुपा रही हो जैसे c ग्रेड मूवी में हीरोइन अपनी इज़्ज़त बचाने के लिए अपने सीने को ढकती है। आंटी तुरंत अपने घुटनों पर आ गई और बोली- तुम जैसे चाहो जो चाहो करो पर मुझे छोड़ो मत।

चुदने के लिए गिड़गिड़ाती औरत देख कर लंड उछाल मारने लगा, पता नहीं कब से मन में दबा हुआ यह एक ख्याल था जो कभी मुंह पर आया ही नहीं था कि मुझे चुदने के लिए गिड़गिड़ाती औरत देखने का मन है।

नीलेश बोला- तो चल फिर शुरू हो जा और चूस मेरा लंड और अपने बूब्स दबा, अपनी चूत में उंगली कर और हमें गर्म कर!

अगर तू हमें उकसा पाई तो यकीन मान तुझे इतनी अच्छी चुदाई देंगे कि तू ज़िन्दगी भर हमसे से चुदने के लिए प्राथना करेगी।

आंटी के चेहरे पर आत्मविश्वास के भाव आ गये जैसे अब उसने नीलेश की इस चुनौती को स्वीकार कर लिया हो।

वो अब दोनों बर्थ के बीच खड़ी होकर अपने बूब्स को पकड़ कर नाचने लगी।

गंदे और भद्दे इशारे करती तो कभी अपने होंठ काटते हुए अपनी चूत में उंगली दे देती।

मैंने नीता को अपनी बाँहों में जकड़ लिया और धीमे से कहा- नीलेश ने बहुत बड़ा वादा कर दिया है, उसकी बात रखने के लिए तुम मुझे ऐसे चोदो कि मैं थोड़ा प्यासा रह जाऊँ और मेरा लंड दुबारा जल्दी खड़ा हो जाये।

नीता बोली- भैया, आप चिंता मत करो, आप 2-3 बार तो आराम से चुदाई कर ही लेते हो। और मैं आपको प्यासा भी छोड़ दूंगी जिससे इस आंटी की मस्त चुदाई कर सको आप! वैसे साली आंटी लगी कितनी कंटीली रही है न? देखो भैया इसके बूब्स भी बिल्कुल नई नवेली लौंडिया की तरह कड़क और उभरे हुए हैं। आप तो आज लगभग नई ताज़ा और बहुत दिनों से प्यासी चूत मारने वाले हो।

नीता की बातों का ऐसा जादू हुआ कि मैंने नीलेश से बोला- नीलेश पटक ले इसको, यह तो साली चुदने के लिए मरी जा रही है। देख तो सही कैसे गांड मटका मटका के दिखा रही है। पेशेवर पोल डांसर भी इसके आगे पानी भर जाये ऐसी अदाओं से रिझा रही है यह माँ की लौड़ी।

लौड़ी बोलते बोलते में नीता की चूत में अपना फव्वारा चलाने लगा।

नीता ने जैसे ही महसूस किया कि मैं उसकी चूत में अपनी मलाई भर रहा हूँ, उसने अपनी चूत से मेरा लंड बाहर निकाल दिया जिससे मेरा पूरा मलाई न निकले और मैं दूसरी चूत अच्छे से बजा सकूँ।

मेरे लंड को अपने मुट्ठी में टाइट पकड़ लिया, मेरे लंड से निकलती हुई मलाई को नीता ने अपनी जीभ से साफ़ दिया और अपने हाथ में आये मेरी मलाई को उसने आंटी को चाटने के लिए उसके मुंह के पास कर दिया।

कामाग्नि में लीन आंटी ने नीता के हाथ को चाट के साफ़ कर दिया।

मधु ने अपना पर्स खोला और मेरे लंड को चूम कर बोली- जाओ इसकी चूत की खुजली को शांत कर दो!

और मुझे कंडोम पकड़ा दिया।

नीलेश बोला- भाभी, मेरे शहजादे के लिए भी एक बढ़िया सा रेन कोट दे दो।

मधु नीलेश की तरफ बढ़ी और उसके लंड को चूम कर बोली- तुम भी इनकी प्यास बुझा देना।

मधु ने अपना पर्स खोला और मेरे लंड को चूम कर बोली- जाओ इसकी चूत की खुजली को शांत कर दो!

और मुझे कंडोम पकड़ा दिया।

नीलेश बोला- भाभी, मेरे शहजादे के लिए भी एक बढ़िया सा रेन कोट दे दो।

मधु नीलेश की तरफ बढ़ी और उसके लंड को चूम कर बोली- तुम भी इनकी प्यास बुझा देना।

नीलेश का लंड पूरी तरह खड़ा था तो उसके लंड पर मधु ने अपने हाथ से कंडोम चढ़ा दिया।

नीलेश बोला- बता, पहले किसका लंड लेगी?

आंटी मेरी तरफ बढ़ी और मेरे लंड को चाटने लगी, बोली- मैंने अभी अभी इसका वीर्य चखा है, इसका लंड पहले लूंगी।

मैंने कहा- तो चढ़ जा लंड पे… सोच क्या रही है?

आंटी बोली- मुझे नीचे आने दो और तुम मुझे चोदो।

मैं अपनी सीट से खड़ा हुआ तो आंटी अपनी टाँगें फैला कर लेट गई।

मैंने कहा- नीलेश, तू इसके मुंह में अपना लंड पेल दे, मैं इसकी चूत में भरता हूँ।

नीलेश अपना लंड सहलाता हुआ आंटी के मुंह पर खड़ा हो गया। आंटी सच में कई सालों से नहीं चुदी थी, उसकी चूत बहुत टाइट थी। ऊपर से मेरा लंड भी अभी तक पूरी औकात में नहीं आया था। मैं थोड़ी देर आंटी की चूत पर अपने लंड को रगड़ता रहा जिससे मेरा लंड भी औकात में आ जाये और दूसरा आंटी की चूत भी थोड़ी चौड़ी हो जाये।

मैं नीलेश से बोला- इसके दोनों हाथ पकड़ के रखना!

और मैंने एक झटका लगाया जो मेरे लंड के टोपे को थोड़ा सा अंदर ले गया, आंटी के मुंह से चीख निकल गई।

मधु ने आंटी को उनका ब्लाउज दिया और कहा- इसे अपने मुंह में ठूंस लो जिससे चीख न निकले।

नीलेश ने हाथ छोड़े, आंटी अपने मुंह में ब्लाउज रखते हुए बोली- पूरा घुस गया है न!

मैंने कहा- अभी तो टोपा भी अंदर नहीं गया है। अभी तो पूरा लंड बाकी है जाने को!

आंटी ने मुंह में ब्लाउज ठूंस कर अपने हाथ नीलेश को पकड़ा दिए। शायद आंटी समझ गयी थी कि अगर उसे अपनी चूत की अच्छी सेवा करानी है तो इनकी पसंद के अनुसार काम करना ही उचित होगा।

अब मैंने थोड़ा सा और धक्का लगाया पर मुझे ऐसा कुछ महसूस नहीं हुआ कि मेरा लंड अंदर गया होगा। इसीलिए मैंने लंड को दुबारा बाहर निकाला और फिर से ठेल दिया अबकी बार थोड़ा और ताकत से!

आंटी की आँखों से निकलता पानी और ब्लाउज के होते हुए उनकी दबी हुई चीख की आवाज़ बता रही थी कि हाँ अब आधा लंड तो अंदर जा चुका है।

मैंने फिर से थोड़ा लंड पीछे लिया और फिर पूरा लंड अंदर तक पेल दिया, फिर धीरे धीरे छोटे छोटे धक्के लगाने लगा जब तक कि आंटी के चेहरे का नक्शा नहीं बदल गया।

अब आंटी के चेहरे पर संतुष्टि दिख रही थी।

मैंने अपने हाथ से आंटी के मुंह में फंसा ब्लाउज हटाया और नीलेश के लंड को पकड़ के आंटी के मुंह में डलवा दिया।

अब में नीलेश के बॉल्स को भी सहला रहा था और इधर आंटी की चूत की चुदाई भी कर रहा था।

आंटी इतनी कामोत्तेजित थी कि सपड़ सपड़ करके नीलेश के लौड़े को चूस रही थी।

मैंने कहा- आज तो तुमने बहुत सारे नए काम किये हैं। अब तुम मेरे ऊपर आ जाओ!

बोल कर मैं खड़ा हो गया। आंटी की इतना मज़ा आ रहा था कि उन्होंने कुछ नहीं कहा, जैसा कहा जा रहा था, वैसा वो करे जा रही थी।

जब आंटी मेरे ऊपर आ गई तो मैं नीलेश से बोला- आ जा इसकी गांड में अपना लंड पेल दे।

आंटी बोली- पर मैंने कभी…

मैंने इतना सुनते ही आंटी के मुंह पर हाथ रख दिया- नीलेश, प्यार से करियो ओ के!

नीलेश बोला- तू चिंता मत कर, इतना मज़ा आएगा कि तू सब भूल जाएगी।

और साथ साथ आंटी की गांड पर हाथ भी फेरता जा रहा था।

नीलेश भी अब चढ़ गया था। आंटी की गांड में लंड जैसे ही गया आंटी तिलमिला गई और गधे की तरह उछलने लगी।

मैंने कहा- नीता मधु, तुम दोनों इसके बूब्स और पूरे बदन की अच्छी मसाज करो जिससे यह घोड़ी बिदके नहीं।

मधु आंटी के बूब्स चूसने लगी और नीता आंटी के बदन पर पोले हाथों से मसाज देने लगी।

नीलेश ने फिर धीरे से आंटी की गांड में अपना लंड पेला, धीरे धीरे जब नीलेश का लंड पूरा अंदर चला गया तो नीलेश बोला- हाँ राहुल, गया पूरा लंड अंदर, अब जैसे ही में थ्री बोलूँ तू इसको चोदना शुरू करना!

मैंने कहा- ओके।

नीलेश बोला- वन, टू एंड थ्री…

मैंने थ्री सुनते ही धक्के लगाने शुरू कर दिए।

नीलेश ने कुछ ऐसा प्रोग्राम बनाया था जिसमें जब मेरा पूरा लंड अंदर होता तो उसका आधा बाहर और जब उसका पूरा अंदर होता तो मेरा आधा बाहर।

अब आंटी के दोनों छेदों पर लगातार एक के बाद एक प्रहार हो रहे थे, आंटी अब तक कई बार झड़ चुकी थी।

मैंने कहा- अब मैं तुम्हारी गांड मरूंगा और नीलेश तुम्हारी चूत चोदेगा।

आंटी बोली- मैं इतनी बार झड़ चुकी हूँ कि अब गिन नहीं पा रही। मुझे पर थोड़ा रहम करो!

हमें कहाँ कुछ सुनाई दे रहा था, नीलेश हटा, मैंने आंटी को हटाया और नीलेश नीचे लेट गया, उसके ऊपर आंटी ने नीलेश का लंड अपनी चूत में डलवाया फिर मैंने ऊपर चढ़ के उसकी गांड में अपना लंड पेल दिया।

मुझे ट्रेन के धक्कों के साथ ताल से ताल मिलाना पसंद आ रहा था। मैं बहुत देर से अपने लंड के पानी को रोक कर धक्कमपेल में लगा हुआ था पर अब मेरे लिए अपना स्खलन रोकना नामुमकिन था।

मैं नीलेश से बोला- नीलेश, आगे का तू ही सम्भाल, मैं तो इसकी गांड में अपनी मलाई छोड़ रहा हूँ।

नीलेश बोला- चिंता मत कर, मैं भी आने ही वाला हूँ।

बारी बारी से हम दोनों ने अपनी अपनी मलाई साथ साथ ही छोड़ दी और थोड़ी देर ऐसे ही पड़े रहे अपने अपने लंड गांड और चूत में डाले हुए।

ट्रेन के हिलने से हल्के हल्के धक्के तो लग ही रहे थे।

थोड़ी देर बाद हम तीनों उठे, आंटी ने अपने कपड़े पहने और बाहर जाने लगी।

मैं बोला- सुनो, तुमने हमें अपनी चूत गांड तक दे दी, अब यह तो बता दो कि तुम्हारा नाम क्या है?

आंटी बोली- मेरा नाम आरती है।

मैंने कहा- बाए आरती!

वो लंगड़ाती हुई अपनी सीट पर जा रही थी।

लंड के खड़े होने की कोई उम्मीद नहीं थी पर दो जवान जिस्म मेरे सामने नंगे पड़े थे। तो सोचा चुदाई न सही जिस्म के साथ खेला तो जा ही सकता है, मैं नीता को बोला- आजा मेरे ऊपर लेट जा!

वो बोली- हाँ भैया!

नीलेश ने मधु से कहा- भाभी, आप मेरे ऊपर लेट जाओ।

मधु मुस्कुरा कर नीलेश के ऊपर लेट गई।

दोनों ही औरतें हमारे बदन से खिलवाड़ कर रही थी। हम लोग भी थक कर चूर हो चुके थे और हम दोनों जल्दी ही सो गए।

लड़कियाँ पता नहीं सोई या नहीं।
 
जब मेरे कान में गूंजा कि ‘उठ जाओ… भोपाल आने वाला है।’ तब कहीं जाकर मेरी नींद खुली, आँखें खोली तो देखा जो लड़कियाँ रंडियों की तरह नंगे बदन अभी तक हमारे लण्डों से खेल रही थी, वो एकदम सलीके से साड़ी पहन कर देवियों की भांति प्रतीत हो रही थी।

भोपाल स्टेशन आ गया। आरती को भी हमने ट्रेन से उतरते हुए देखा, मैं सामान उतरवाने के बहाने उसके करीब गया और अपना नंबर देकर बोल आया कि जब दिल करे फ़ोन करना, एक ही शहर में हुए तो मिलेंगे।

खैर फूफाजी हमें लेने स्टेशन आये हुए थे तो हम जल्दी ही घर भी पहुँच गए।

बुआ का घर बहुत बड़ा नहीं था पर छोटा भी नहीं था। बुआ के घर में 10 कमरे थे, उनमें से एक बुआ फूफाजी का कमरा, एक में नीलेश और नीता और तीसरे कमरे में शिखा जिसके लिए हम लड़का देखने आये थे, वो रहती थी।

शिखा का रूम छोटा भी था और उसे स्टोर रूम की तरह भी उपयोग में लाया जाता था। बाकी सभी कमरे में नीलेश के चाचा-चाची, दादा-दादी, ताऊजी-ताईजी और उन लोगों के बच्चे रहते थे।

काफी बड़ा परिवार था, परिवार क्या, एक दो लोग और होते तो जिला ही घोषित हो जाता।

घर में हमेशा ही एक मेले जैसा माहौल रहता है।

खैर हमारे जाते ही हमारा उचित खाने पीने की व्यवस्था थी, हम लोग खाना खाकर अब सोने की तैयारी में थे पर यह समझ नहीं आ रहा था कि कौन कहाँ सोने वाला है।

मैंने नीलेश को बोला- भाई ये सामान वगैरह कहाँ रख कर खोलें… और सोना कहाँ है?

नीलेश मजाक के स्वर में बोला- पूरा घर तुम्हारा है, जहाँ मर्जी आये सामान रखो और जहाँ मर्जी आये सो जाओ।

मुझे लग रहा था कि सभी के लिए कमरे निर्धारित हैं तो शायद हमें ड्राइंग रूम में ही सोना पड़ सकता है।

पर बुआ बोली- सारी औरतें एक कमरे में सो जाएँगी और सारे मर्द एक कमरे में।

मुझे लग रहा था कि सभी के लिए कमरे निर्धारित हैं तो शायद हमें ड्राइंग रूम में ही सोना पड़ सकता है।

पर बुआ बोली- सारी औरतें एक कमरे में सो जाएँगी और सारे मर्द एक कमरे में।

साड़ी औरतें मतलब नीता, मधु, शिखा, बुआ सभी नीलेश के कमरे में सो गए और हम लोग यानि मैं, नीलेश, फूफाजी बुआ के कमरे में सो गए।

रात तो बीत गई। वैसे भी ट्रेन और उससे पहले इतनी चुदाई मचा चुके थे कि अभी ज़रूरत नहीं थी। हाँ अगर चूत मिल जाती तो मना नहीं करते।

अगले दिन सुबह सभी लोगों से मिलना जुलना चलता रहा। मधु शादी के बाद पहली बार गई थी तो विशेष रूप से उससे मिलने को सभी लोग आतुर दिखाई दिए।

दिन का खाना भी हो गया, अब बारी थी लड़के वालों के आने की, घर को ठीकठाक किया गया, बाजार से कई पकवान मंगवा लिए गए।

लड़के वाले शिखा को पसंद करके चले गए।

उन लोगों के जाने के बाद हमने शिखा को खूब चिढ़ाया, बुआ तो रोने ही लगी। शादी आने वाले नवंबर में तय हुई।

शाम होने लगी थी, दिन कैसे खत्म हो गया पता ही नहीं चला।

शाम को मैं और नीलेश निकल गए सैर सपाटे पर, सैर सपाटा तो बहाना है, हम दो दो ड्रिंक मारने के मूड से निकले थे।

नीलेश ने एक एक्टिवा की चाबी उठाई और चलने लगा।

मैंने रास्ते में कहा- यार दिल्ली में क्या मजे थे! जब से यहाँ आये है अपनी बीवी तक को ढंग से देखने की फुर्सत नहीं मिली है। नीलेश बोला- यही तो मैं तुझे बता रहा था कि हमारे यहाँ सब चाहते है कि एक बच्चा जल्दी से दे दें पर हमें कभी अकेले ही नहीं छोड़ते। अब बच्चा क्या पेड़ से टपकेगा।

हम दोनों हंसने लगे, मैंने कहा- यार कहीं बैठकर बढ़िया दो चार पेग मारते हैं फिर चलेंगे।

नीलेश बोला- हाँ अपन बार में ही जा रहे हैं।

बार में दो पेग के बाद नीलेश बोला- ज्यादा मत पीना, घर में काफी लोग है। अभी जाकर भी कई लोगों से बातें करनी पड़ेगी।

मैंने कहा- हाँ ठीक है पर एक और पेग मार के चलते हैं।

दोनों ने एक एक और पेग मारा और आ गये घर।

जब हम घर लौट रहे थे, तब कॉलोनी की सड़क पर नीता और मधु घूम रही थी।

मैंने कहा- नीलेश, तू मुझे यहीं छोड़ इनके पास और तू एक्टिवा रख के आ जा!नीलेश मुझे उतार कर बिना रुके चला गया।

नीता बोली- आप लोग ड्रिंक करके आये होंगे?

मैंने कहा- कोई शक?

मधु चिढ़ाते हुए बोली- क्यूँ मजा आ रहा है न फूफाजी के साथ सोने में?

मैंने कहा- क्या यार जले पे नमक छिड़क रही हो? वैसे ठरक तो तुमको भी हो रही होगी?

नीता बोली- हाँ भैया, जब से दिल्ली से लौट कर आये हैं, वाकयी ठरक होने लगी है। वर्ना तो पहले हम दोनों एक कमरे में भी सोने के बावजूद कभी कभी ऐसे ही सो जाया करते थे।

मैं नीता से बोला- ज़रा थोड़ी आड़ लेना, मुझे मधु के बूब्स दबाने है।

नीता ऐसे खड़ी हो गई कि किसी को दिखे न कि हो क्या रहा है।

मैंने आराम से मधु के बूब्स दबाये और बोला- मधु यार, एक काम कर, रात को किसी बहाने से बाथरूम में मिल। छुप छुप कर चुदाई करेंगे।

मधु बोली- आपको क्या लगता है मेरा मन नहीं कर रहा, पर ऐसे अच्छा नहीं लगेगा।

तब तक नीलेश भी गाड़ी रख कर वापस आ गया था।

मैंने कहा- नीलेश, कुछ प्रोग्राम बना यार… ऐसे कैसे बिना चूत के रह सकेंगे। वो भी जब घर में दो दो चूत हमारे लिए गीली हो रही हों तब।

नीलेश बोला- यार, मैं कुछ करने की कोशिश करता हूँ। पर तेरे से एक बात कहूँ, तू ज्यादा अच्छे से कुछ प्लान कर लेगा। प्लीज कुछ कर या आईडिया दे दे।

मैंने कहा- मादरचोद, सारे काम मुझे ही करने हैं, तुम्हें तो बस चूत चाहिए वो भी फ्री में!

वो हंसता रहा, दोनों लड़कियाँ भी मुंह दबा कर हंस रही थी।

गाली खाने की डेडिकेशन के कारण मैंने कहा- चिंता मत करो ठरकियो, तुम्हारे लिए कुछ जुगाड़ करता हूँ।

हम लोग सभी साथ साथ घर में घुसे, दोनों लड़कियों ने घर में घुसते ही घूँघट डाल लिया और नजर नीची करके अंदर की ओर चली गई।

ड्राइंग रूम पूरा भरा पड़ा था, कहीं बैठने की जगह नहीं थी।

मैंने कहा- कोई आया है क्या अपने घर, काफी नए चेहरे दिख रहे हैं।

नीलेश हसंते हुए बोला- भाई, कोई बाहर के लोग नहीं है ये अपना ही कुनबा है। सुबह जब अपन लोग सोकर उठे थे तब तक कई लोग अपने अपने काम से कॉलेज, स्कूल और ऑफिस जा चुके थे, इसीलिए तुम्हें कोई नहीं दिखा था।

फिर धीरे से बोला- मैंने तो कहा था कि घर जाकर कई और लोगों से बातें करनी है।

घर में दाखिल होते ही सभी ने बड़ी गर्म जोशी से मेरा स्वागत किया। सभी लोगों से हाय हेलो करते करते खाना भी लग गया। सभी लोग साथ में खाना खाने लगे, घर की लड़कियाँ खाना परोस रही थी।

तभी मैंने नोटिस किया की शिखा भी अब खूबसूरत लगने लगी थी और उससे भी खूबसूरत एक और लड़की थी।

नशे में जब चूत की आग लगती है तो हर लड़की खूबसूरत लगने लगती है लेकिन वो वाकयी क़यामत थी।

और वो जब झुक कर खाना परोस रही थी तो जो नज़ारे देखने को मिल रहे थे उससे तो लंड में हरकत आना शुरू भी हो गई थी।

खाना खाने के बाद मैं और नीलेश सुट्टे की तलब में छत पर गए, तब मैंने पूछा उस लड़की के बारे में, तब पता चला कि वो नीलेश के ताऊजी की लड़की है।

अब नीलेश से कैसा पर्दा, मैंने नीलेश को बता दिया कि मेरे मन उस लड़की के लिए नेक ख्याल नहीं हैं।

नीलेश का थोड़ा मुंह बन गया, बोला- यार बहन को तो छोड़ दे, ऐसी भी क्या ठरक?

मैंने कहा- देख, जब देखा तब नहीं पता था कि वो तेरी बहन है, और अभी भी तू बोलेगा तो मैं अपने कदम पीछे ले लूंगा। तेरी दोस्ती के लिए ऐसी कई लड़कियाँ कुर्बान हैं मेरे दोस्त… पर देख, लड़की लड़की ही रहती है, सबमें चुदने की भूख होती है, उसने जिस तरह खाना खिलाया है, मुझे लग रहा है कि उसमें भी तड़प तो है। और उसे मैं अपना लंड नहीं दूंगा तो किसी और का लेगी। पर लेगी ज़रूर, और हाँ इसमें अगर पकड़ी गई तो बदनामी भी बहुत है। मैंने किया तो घर की बात घर में और कोई शक भी नहीं करेगा।

नीलेश बोला- तू चाहे जितनी बातें बना पर यह सही नहीं है।

मैंने कहा- ठीक है भाई, कोई नहीं हम इस टॉपिक पे बात ही नहीं करेंगे।

नीलेश बोला- उसका नाम नेहा है, और वो वैसी नहीं है जैसी तू सोच रहा है।

मैंने कहा- यार टॉपिक खत्म कर, मैं क्या बोलूँ?

नीलेश बोला- बोल बोल, क्या बोलना चाहता है बोल दे।

मैंने कहा- देख, तू तो भाई है, तेरे सामने ऐसी हरकतें तो वो करेगी नहीं, पर मैंने उसकी आँखों में शरारत देखी है। न माने तो तू देख लेना कल वो कहीं नहीं जाने वाली और मेरे लिए कुछ न कुछ ऐसा ज़रूर करेगी जिससे मैं उसकी तरफ झुक जाऊँ!

नीलेश बोला- हो ही नहीं सकता, वो जानती है कि तू शादीशुदा है।

मैंने कहा- यही तो वो चाहती है कि उसका काम भी हो जाए और गले की घंटी भी न बने।

नीलेश बोला- अगर ऐसा है तो देखते हैं, अगर वो सच में चालू माल है तो, फिर कोई भी भाई कुछ नहीं कर सकता। तूने चोदा तो मैं तुझे रंगे हाथों पकड़ के मैं भी चोद डालूंगा।

अब जाकर मेरी जान में जान आई, मैंने कहा- ठीक है। अब तू बस देखता जा।

मैं और नीलेश सिगरेट पीकर नीचे आ गये। आज शादी तय हुई थी इसलिए घर में बहुत ख़ुशी का माहौल था और अभी तक कोई भी सोने नहीं गया था। सभी बड़े बुजुर्ग बाहर वाले ड्राइंग रूम में बैठकर सरकार को गलियां और PF और EPF की बातें कर रहे थे। सभी औरतें चाचा-चाची वाले कमरे में थी। नीता-नीलेश के कमरे पर बच्चों ने अधिकार जमा रखा था। मैंने देखा की नेहा भी बच्चों वाले कमरे में ही है।

मैंने कमरे में घुसते ही बोला- शिखा अब तुम्हे यहाँ नहीं रहना चाहिए अब तुम जाकर औरतों वाले कमरे में जाओ ये तो बच्चों का कमरा है।

शिखा बोली भइया आप मुझे कब तक चिड़ाते ही रहोगे, वैसे बच्चों वाले कमरे में आप क्या कर रहे हो। जाओ जाकर सरकार, पॉलिटिक्स, महंगाई भत्ते के बारे में बातें करो बाहर जाकर।

मैंने कहा- ओके चल कोई नहीं तू भी यही बैठ जा और मुझे भी बैठ जाने दे।

नेहा अब तक मुझे एक टक देखे ही जा रही थी, इस बात को नीलेश ने भी नोटिस कर लिया था।

हमने कमरे में आते ही बढ़िया बढ़िया गेम्स खेले, सभी बच्चे हमारे दोस्त बन गए।

फिर दौर शुरू हुआ अंताक्षरी का, सभी लोग गाने में मशरूफ थे और नेहा मुझे तकने में और मैं भी मौका देखकर उसे देखते हुए पकड़ कर शर्माने पर मजबूर कर देता था।

बीच बीच में नीलेश को कोनी मार के दिखा देता था कि नेहा की हरकतें कैसी हैं।

रात का एक बज रहा था पर किसी की आँखों में कोई नींद नहीं थी।तभी नीलेश के दादाजी गरजे और बोले- सोना नहीं है किसी को? सुबह सब लेट हो जाओगे। चलो सोने, कैसे गाने गव रहे हैं देखो तो, अभी जमीन में से निकले नहीं है और गाने गाये जा रहे हैं।

एक शैतान बच्चा बोला- गाना गाने के लिए जमीन से निकलने की ज़रूरत ही नहीं है।

खैर सभी लोग अपने अपने कमरों में जाकर सोने लगे।

मैंने सोचा कि नीलेश थोड़ा बहन भक्ति दिखा रहा है इसलिए मैंने उसे अपने साथ नहीं लिया और यह देखने लगा कि नेहा कौन से कमरे में सोती है।

जब मैंने उसे कमरे में जाते देख लिया तो आराम से आकर अपनी जगह सो गया।

जब नीलेश और फूफाजी खर्राटे भरने लगे तो उठा और जाकर उस कमरे के आस पास तफ़्तीश करने लगा।

जब कहीं कोई जुगाड़ नहीं मिला तो छत पर सिगरेट पीने चला गया।

छत पर सिगरेट पीते पीते उलटी तरफ देखा तो लगा कि एक छज्जा है जहाँ से शायद कुछ दिखे।

बड़े आराम से मैं छज्जे पर उतरा और अंदर देखा।

लाइट बंद थी कुछ नहीं दिखा।

फिर मैंने थोड़ा दिमाग लगाया और समझने की कोशिश की कि नेहा का कमरा कौन सा होना चाहिए क्योंकि उसके कमरे की लाइट तो जल रही थी जब मैं उसके कमरे के आस पास था।

फिर थोड़ी ताक झांकी से समझ आया कि 3 ही कमरों की लाइट जल रही थी जो फर्स्ट फ्लोर पर थे।

पहले कमरे में झाँका तो देखा कि नीलेश के ताऊजी ताईजी को पलंग पर आधा लिटा के खड़े होकर चुदाई कर रहे हैं।

थोड़ी देर उनकी चुदाई का आनन्द लिया फिर दूसरे छज्जे पर गया वहाँ से झाँका तो पाया कि यह नेहा का ही कमरा था।

गाने गाते वक़्त मैंने शिखा के मोबाइल से नेहा का नंबर चुरा लिया था।

बस अपने मोबाइल से नेहा को एक शायराना मैसेज भेज दिया और उसके चेहरे पर बस भाव चेक करने थे।

उसने मोबाइल उठाया, मैसेज देखा तो उसने लिखा- आप कौन?

मैंने अपना नाम राहुल लिखकर भेज दिया।

वैसे वो समझ तो गई थी पर फिर भी कन्फर्म कर रही थी।

उसके कमरे में उसके अलावा कोई नहीं था तो आराम से कूद कूद के ‘ये ये ये…’ करने लगी।

फिर उसका मैसेज आया कि आप अभी तक सोये नहीं?

मैंने लिखा- खर्राटों के बीच नहीं नींद आ रही।

उसने हंसने वाला स्माइली बनाकर लिखा- तो आप क्या कर रहे हो?

मैंने देखा कि वो अपने होंठ काटते हुए अपने आप को शीशे में देखकर अपने बूब्स को दबाकर थोड़ा ब्रा टाइट करते हुए मैसेज का इंतज़ार कर रही थी।

मैंने सब्र का इम्तिहान लिया, मैंने लिखा- तुमसे बातें!

उसने अपना मोबाइल अपने सर पे मारा और कुछ बुदबुदाने लगी, फिर शरारती मुस्कान से मैसेज लिखने लगी।

मैसेज आया- बीवी से अलग सोना पड़ रहा है? शिखा बता रही थी कि भैया भाभियों की वाट लगी पड़ी है।

मैंने समझ तो लिया ही था कि ये चाहती क्या है इसलिए मैंने एक बढ़िया सा चुदाई का वीडियो फॉरवर्ड कर दिया।

उसके तुरंत बाद लिखा- सॉरी सॉरी यार… गलती से तुम्हारे पास चला गया, वो तुम्हारी भाभी के साथ नहीं सो रहा तो सोचा कि कुछ तो एंटरटेनमेंट कर लूँ पर गलती से तुम्हारे पास मैसेज चला गया।
 
मैंने समझ तो लिया ही था कि ये चाहती क्या है इसलिए मैंने एक बढ़िया सा चुदाई का वीडियो फॉरवर्ड कर दिया।

उसके तुरंत बाद लिखा- सॉरी सॉरी यार… गलती से तुम्हारे पास चला गया, वो तुम्हारी भाभी के साथ नहीं सो रहा तो सोचा कि कुछ तो एंटरटेनमेंट कर लूँ पर गलती से तुम्हारे पास मैसेज चला गया।

उसका मैसेज आया- कोई बात नहीं।

अब वो उस वीडियो को बार बार देखकर धीरे धीरे अपने बदन से खेलने लगी।

मैंने भी कुछ देर उसे कोई मैसेज नहीं किया और उसकी रतिक्रिया देखने लगा।

पहले तो वो ऊपर से ही अपने बदन को अपने हाथों से मसल रही थी, पर फिर धीरे से उसका हाथ अपनी पैंटी के अंदर चला गया, वो अब आँखें बंद करके शायद अपनी उंगली से बिल्कुल धीमे धीमे अपनी चूत के दाने को रगड़ रही होगी।

मैंने एक और मैसेज किया और कहा- अगर तुम नीलेश की बहन नहीं होती तो शायद मैं ऐसी गलतियाँ और करता पर, आई एम रियली वेरी सॉरी उस वीडियो के लिए!

नेहा का मोबाइल जैसे ही वाइब्रेट हुआ उसने अपना हाथ अपनी पैंटी से बाहर निकाल लिया और जल्दी से मोबाइल उठाया, फिर मोबाइल पर बहुत देर तक कुछ टाइप करती रही। पर शायद उसे समझ नहीं आ रहा था कि वो क्या लिखे।

वो बार बार अपने सर को खुजाती और कुछ टाइप करती, कभी मुस्कुराती तो कभी अपने पढ़े हुए मैसेज पर अपना मुंह टेढ़ा कर लेती।

फिर उसका मैसेज आया- मैं उनकी बहन हूँ आपकी नहीं, मैं हर किसी को अपना भाई बनाना भी नहीं चाहती।

मैसेज के तुरंत बाद से ही वो कुछ तलाश कर रही थी, अलमारी में, ड्रावर में सब जगह कुछ ढूंढ रही थी।

मैंने मैसेज लिखा- मुझे खूबसूरती की कदर है, और तुम बेहद खूबसूरत हो। अगर तुम नीलेश की बहन नहीं होती तो मैं तुम्हें अभी छत पर बुला लेता। मैं तुम्हारे गुलाबी होंठों का कायल हूँ।

उसने मैसेज पढ़ा और मस्ती से झूम गई और शरारती मुस्कान के साथ लिखा- आप सो जाइये, बहुत रात हो गई है।

मैंने लिखा- मैं तुम्हारा छत पर वेट करूँगा और अगर तुम 15 मिनट में नहीं आई तो मैं तुम्हारे कमरे में आ जाऊंगा।

मैसेज पढ़ कर थोड़ी सकपकाई, फिर थोड़ी खुश हुई फिर थोड़ी घबराई, जल्दी से शीशे के सामने बैठकर अपने बाल बनाने लगी, फिर चेहरे पर कुछ कुछ लगाया।

अभी तक नेहा ने केवल एक पैंटी ही पहन रखी थी, अब उसने नीचे एक केप्री जैसा कुछ 3/4 पहन लिया। ऊपर तो उसने एक शार्ट कुर्ता पहना ही हुआ था।

यह सब करने के बाद उसने लाइट बंद कर दी और मैसेज किया- मैं छत पर नहीं आ सकती, हम कल मिलेंगे, कल मैं कहीं नहीं जाऊँगी।मैंने लिखा- तुम्हारे पास अब केवल 3 मिनट रह गए हैं, या तो तुम ऊपर आ जाओ, नहीं तो मैं तुम्हारे कमरे में तो आ ही सकता हूँ। नेहा ने लिखा- मैं अपने कमरे में अकेली नहीं हूँ, मेरी मम्मी भी मेरे ही साथ सो रही हैं, आप मेरे कमरे में मत आना। और इसीलिए में ऊपर भी नहीं आ सकती।

मैंने लिखा- तुम्हारे पास अब केवल 1 मिनट है, मुझे डर नहीं लगता, तुम बस दरवाज़ा खोलो, मैं तुम्हारी माँ के सामने तुम्हें चूम कर दिखा सकता हूँ।

नेहा बोली- अच्छा प्लीज मुझे 10 मिनट दो, मैं ऊपर आती हूँ।

मैंने लिखा- ठीक है, मैं तुम्हारा 2 मिनट और वेट करूँगा, अगर तुम आ गई तो ठीक, नहीं तो अब मैं बिना मैसेज करे तुम्हारे कमरे में दाखिल हो जाऊंगा। नेहा उठी अपने कमरे की लाइट जलाई और अपने आप को शीशे में एक बार और देखा, अपने बाल उँगलियों से बनाए। और एक स्टॉल उठाया और चल दी बाहर।

मैं भी तुरंत छज्जे से छत पर आ गया और छत पे उसके कमरे से दूसरी तरफ घूमने लगा।

जैसे ही वो छत की आखिरी 3 सीढ़ी पर थी, मैं उसके करीब गया और जोर से उसे अपनी ओर खींचा और सीधा उसके होंठों पर होंठ रख दिए।

नेहा शायद इस हमले के लिए तैयार नहीं थी, उसने सोचा होगा कि कुछ बातें होंगी और मैं उसे चूमने के लिए कहूँगा, वो मना करेगी। पर यहाँ तो सीधा होंठ से होंठ चिपक चुके थे।

वो 15-20 सेकंड तक तो फटी आँखों से देख रही थी फिर उसने भी मेरा साथ देना शुरू किया।

अब हम चूमते चूमते छत पर पूरी तरह आ गये थे, मैंने उसे दीवार से सहारे खड़ा किया, उसके हाथों को हाथों से पकड़ पर ऊपर कर दिया और होंठों को होंठों से चूमता रहा।

हाथों को ऊपर करने के बाद में अपने हाथों को उसके ऊपर सहलाते हुए नीचे लाया और लेकर उसके उरोजों पर रख दिया, फिर हाथों से उसके बूब्स का नाप लेकर अपना हाथ और नीचे लाया और उसके चूतड़ों का नाप लिया।

अभी तक नेहा ने मुझे नहीं रोका था।

मैंने उसकी शॉर्ट्स में अपना हाथ डाला तो उसने झट से मेरा हाथ पकड़ लिया, होंठों को होंठों से दूर करती हुई बोली- आप दिल्ली वाले तो बहुत फ़ास्ट होते हो? न कोई बात न कोई चीत सीधा चुम्मा। और अब आपके हाथ है कि रुक ही नहीं रहे।

मैंने कहा- कुड़िये… हम दिल्ली वाले न… बस ऐसे ही होते हैं, फालतू चीज़ों में टाइम वेस्ट नहीं करते। बातें करने का मज़ा ही तब आता है जब दिमाग में केवल बातें ही हों, खुल कर बातें हो सकती हों। अब सोचो मेरे दिमाग में तुम्हारे बूब्स का साइज हो और मैं कहूँ कि आज मौसम कितना अच्छा है। यह तो गलत है न? एक बार चुम्मी हो गई, अब मौसम अच्छा लगेगा तो मौसम के बारे में बात करूँगा और तुम अच्छी लगोगी तो तुम्हारे बारे में।

बोलते बोलते अब की बार नेहा ने मुझे चूम लिया, बोली- आप बातें सीधा दिल से करते हो सीधा दिल को लग जाती हैं।

मैंने कहा- दिल कहाँ कहाँ….

करते करते उसके बूब्स पकड़ कर मसल दिए।

वो बोली- धीरे से दबाओ, मेरा साइज बढ़ जायेगा।

मैंने कहा- दबाने से साइज नहीं बढ़ता डार्लिंग, उससे तो शेप अच्छी हो जाती है मम्मों की!

नेहा बोली- मुझे नहीं करानी अपनी शेप अच्छी, आप तो बस धीरे से दबाओ, मुझे दर्द होता है

मैंने अब नेहा के गले और गालों पर भी चूमना शुरू कर दिया था और उसके कुर्ते में अंदर भी हाथ डालने की कोशिश कर रहा था पर कुरता टाइट था इसलिए कुर्ते के पीछे के हुक खोलकर उसकी ब्रा के हुक को भी खोल दिया।

अपने एक हाथ को नेहा के चूतड़ों पर फेर रहा था और हुक खोलते ही मैंने नेहा की चूत को भी ऊँगली से छेड़ दिया, कपड़ो के ऊपर से ही हल्का गीलापन महसूस हो रहा था।

मैंने अब फिर से उसके शॉर्ट्स में हाथ डालने की कोशिश की, इस बार नेहा ने कोई आनाकानी नहीं की।

मैंने अपने होंठों को उसके होंठों से दूर किया और कहा- नेहा, तुम तो बहुत गीली हो गई हो।

नेहा बोली- ओह्ह आई एम वेरी सॉरी राहुल वो मैं मैं वो….

मैंने कहा- अरे इतना परेशान क्यों हो जाती हो? यह नार्मल है, जब लड़की को चुदवाने की इच्छा होती है तो वो अपनी चूत से ऐसे ही गीली हो जाती है जिससे उसमें लंड आसानी से अंदर जा सके। लगता है यह तुम्हारा फर्स्ट टाइम है?

नेहा बोली- हाँ राहुल, यह मेरा फर्स्ट टाइम है।

वो थोड़ी सी शरमाई हुई थी और मेरे मुंह से लंड चूत और चुदवाना जैसे शब्दों को सुनकर थोड़ी और उत्तेजित भी थी शायद!

मैंने कहा- नेहा, अगर यह तुम्हारा फर्स्ट टाइम है, तुम इससे पहले किसी से नहीं चुदी, तो तुम अपने कमरे में वापस जाओ, हम तुम्हारी वर्जिनिटी लॉस शील भंग को पूरी तरह एन्जॉय करेंगे। पहली बार में छत पर, बिना बिस्तर के आधे डर से तुम एन्जॉय नहीं कर पाओगी और थोड़ा दर्द भी होगा तो चीख भी नहीं पाओगी! चुदाई के वक़्त चिल्लाने और चीखने से मज़ा दुगना हो जाता है।

नेहा उदास हो गई, बोली- राहुल तुम बहुत अच्छे हो, कोई ऐसी लड़की को नहीं छोड़ता, पर तुम मुझे मना रहे हो कि मैं अपने VL के पलों को खुल कर जिऊँ। पर अभी यह मेरे लिए फन से ज्यादा ज़रूरत हो गया है। मैं अभी क्या करूँ?

मैंने कहा- तुम चिंता मत करो, उसका भी इलाज़ है मेरे पास… चलो तुम्हारे कमरे में चलते हैं, तुम्हारी मम्मी तो अब तक पापा के कमरे में चली गई होंगी।

मैंने उसके झूठ तो बनाए रखा और आईडिया भी दे दिया।

उसने मेरी आँखों में देखा और मुस्कुरा कर अपने कमरे की ओर चल दी।

कमरे में आने के बाद मैंने उसे बिस्तर पर लेटने का इशारा किया, दरवाज़ा बंद किया और कुण्डी लगा दी।

नेहा बिस्तर पर लेट चुकी थी।

मैंने नेहा को छुआ तो पाया कि वो कामाग्नि में पूरी तरह जल रही है।

मैंने नेहा को खड़ा किया और धीरे से कान में बोला- मैं लाइट जलाता हूँ, तुम अपने कपड़े उतारो!

मैंने लाइट जलाई पर नेहा ज्यों की त्यों ही खड़ी रही।

मैं उसके करीब आया तो एक एक करके उसके कपड़े उतारे, बिस्तर पर धक्का मार कर उसकी केप्री और पैंटी को भी उसके बदन से अलग कर दिया।

अब नेहा मेरे सामने पूरी तरह नंगी पड़ी थी।

मैंने उसकी चूत को चाटना शुरू किया, पूरी जीभ को नेहा की झुलसती हुई चूत से अंदर बाहर करने लगा, बीच बीच में नेहा की चूत का दाना भी अपनी जीभ से छेड़ देता था।

मैं बिस्तर के नीचे बैठा था और नेहा बिस्तर के ऊपर अपनी टाँगें पलंग के नीचे लटका कर मेरे सामने अपनी चूत खोले पड़ी थी।

मैं अपनी जगह से उठा और नेहा के कान के पास जाकर बोला- कैसा लग रहा है?

नेहा बोली- आज तक इतना आनन्द नहीं आया… वाकयी ओरल सेक्स में बहुत अच्छा लगता है।

मैंने कहा- तुम चिंता मत करना, तुम अपना पानी मेरे ऊपर छोड़ सकती हो। मुझे अच्छा लगेगा अगर मैं तुम्हारे यौवन का पहला कतरा चख सकूँ।

नेहा बोली- इतनी सीधी भी नहीं हूँ मैं, ऊँगली तो मैं एक हफ्ते में दो बार कर ही लेती हूँ।

मैंने कहा- तूने मेरे पूरे डायलाग की माँ चोद दी।

नेहा हंसने लगी और बोली- मैं सच में आपके चाटते हुए अपना पानी छोड़ सकती हूँ क्या?

मैंने कहा- हाँ, यही बताने ऊपर आया था।

नेहा बोली- राहुल मुझे और मजा दो न!

मैंने कहा- देख नेहा मेरा तेरे से ज्यादा मन है चाहे तो मेरे लंड को हाथ लगा के देख ले, पर मैं सिर्फ इसलिए कंट्रोल कर रहा हूँ कि तुम्हारी पहली चुदाई इतनी यादगार हो कि तुम जब भी कहीं भी चुदो तो तुम्हें वही ख्याल आये और तुम उत्तेजित हो जाओ।

नेहा ने मेरे लंड को हाथ लगाया और आँखें बड़ी बड़ी कर ली।

मैंने कहा- अब यह मत बोलना कि तुम आज से पहले कड़क लंड भी नहीं देखा है।

नेहा सिर्फ न में गर्दन हिला रही थी।
 
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