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मैं लड़की नहीं.. लड़का हूँ compleet

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मीरा- मेरे प्यारे राधे.. पहले तुम नहा कर मेरी दीदी बन जाओ.. उसके बाद मैं उठ जाऊँगी.. नहीं तो ममता अगर तुम्हारा ये शैतान जैसा लौड़ा देख लेगी ना.. तो बेहोश हो जाएगी।

राधे- अगर देख लेगी.. तो उसकी चूत में भी खुजली शुरू हो जाएगी.. बहुत कम औरतों को ऐसा तगड़ा लौड़ा नसीब में होता है।

मीरा- हाँ सही कहा तुमने.. ममता अक्सर अपने पति की कहानी सुनाती है.. कि उसका बहुत छोटा सा है.. मज़ा नहीं आता और दूसरी बात.. वो माँ बनना चाहती है.. मगर उसका पति इस लायक नहीं.. दो मिनट में ठंडा हो जाता है।

राधे- अरे तो इसमें क्या है.. मैं हूँ ना.. बुलाओ उसको.. अभी उसकी तमन्ना पूरी कर दूँगा।मीरा- शर्म करो.. रात को हमारी शादी हुई है.. और अभी से तुम्हारा मन मुझसे भर गया.. जो दूसरी औरत को चोदने की बात कर रहे हो।

सराधे- मेरी जान.. मैं मजाक कर रहा था अगर चोदने का इतना बड़ा हब्शी होता.. तो तुमको कब का चोद देता.. समझी मैं तो बस ऐसे ही बोला।

मीरा- वैसे एक बात कहूँ.. तुमने जो कहा.. अगर वैसा हो जाए.. तो बेचारी ममता खुश हो जाएगी।

राधे- ओ हैलो.. क्या बकवास कर रही हो..? मैं क्यों उसको बच्चा दूँगा.. मैं तो तुम्हें अपने बच्चों की माँ बनाऊँगा यार।

मीरा- अच्छा अब ये बातें बन्द करो.. जाओ नहा लो।

राधे नहा-धोकर अपने लड़की वाले रूप में बाहर निकल आया.. तब तक मीरा ने भी कपड़े पहन लिए और कमरे का दरवाजा खोल कर सो गई।

ममता कमरे में आई.. मीरा का जायजा लिया.. उसको बुखार था। ममता ने ज़बरदस्ती उसको उठाया.. मुँह धुलवा कर नाश्ता करवाया.. दवा दी.. मगर इन सब के दौरान मीरा को चलने में बहुत तकलीफ़ हो रही थी.. जो ममता से छुपी ना रह सकी। मीरा ने बहुत कोशिश की.. सीधा चलने की.. मगर उसकी चाल से ममता को समझते देर नहीं लगी कि माजरा क्या है।

ममता- ही ही बीबी जी.. ये क्या हुआ कब से देख रही हूँ आपकी चाल को.. क्या हो गया.. ऐसे-कैसे चल रही हो.. जैसे रात किसी ने..!

ममता बोलते-बोलते चुप हो गई.. मीरा भी उसकी अधूरी बात को समझ गई मगर अनजान बनकर उसने पूछा।

मीरा- क्या मतलब है तुम्हारा..? क्या रात किसी ने क्या.. पूरा बोलो.. अब चुप क्यों हो गई.. बोल दो.. जो कहना है।

ममता- माफ़ करना बीबीजी.. चमड़े की ज़ुबान है.. फिसल गई मगर आप ऐसे लंगड़ा कर क्यों चल रही हो.. आपको तो बुखार है ना।

मीरा- रात को बाथरूम में फिसल गई थी समझी.. वैसे तुम कहना क्या चाह रही थीं?

ममता- बुरा मत मानना बीबी जी.. ऐसी हालत तभी होती है.. जब कोई बहुत बुरी तरह से चुदवा कर आती है।

मीरा- ममता चुप रहो.. कुछ भी बोल दिया.. मैं किसके पास जाऊँगी.. तुम भी ना बस।

ममता की बात से मीरा का चेहरा शर्म से लाल हो गया।

मीरा- अच्छा ममता तेरी तो शादी हो गई है.. तू अक्सर अपने पति की बात बताती है.. लेकिन मैंने कभी ध्यान नहीं दिया आज बता ना.. तेरे पति तुझे मज़ा तो खूब देते होंगे ना?

ममता- काहे का मज़ा.. बीबी जी उसमें कहाँ दम है.. दारू पीके टुन्न हो जाता है… मैं अपनी जवानी की आग में तड़फती रहती हूँ.. वो सोया रहता है.. उसके लौड़े को खड़ा करने की नाकाम कोशिश करके.. मैं भी थक-हार कर सो जाती हूँ.. काश.. कोई तगड़ा लौड़ा मिल जाता.. तो जवानी का मज़ा ही आ जाता।

ममता सिसकारियाँ लेकर बोल रही थी.. तभी राधे भी वहाँ आ गया।

राधा- क्या बात हो रही है.. मैं भी तो सुनूँ।

मीरा- दीदी ये ममता है ना.. देखो कैसी बातें कर रही है.. खुद का पति तो इसको खुश रखता नहीं.. मेरे बारे में उल्टा-सीधा बोल रही है और किसी दूसरे आदमी के बारे में बता रही है।

ममता- अरे बीबी जी चुप रहिए.. मैंने तो बस मजाक किया था।

राधा- अरे शर्माती क्यों है.. बता मुझे भी तो पता चले.. कैसी बातें हो रही थीं।

ममता शर्मा जाती है और रसोई की तरफ भाग जाती है।

 


ममता के जाने के बाद राधे हँसने लगता है और मीरा भी उसके साथ हँसने लगती है।

मीरा- क्या दीदी.. आपने बेचारी को भगा दिया.. अगर आप उसकी कहानी सुन लेतीं.. तो बड़ा मज़ा आता, मैंने कई बार सुनी है।

राधे- अच्छा यह बात है.. ऐसा क्या खास है उसकी कहानी में.. अब तो सुनना ही पड़ेगा..

राधे रसोई की तरफ गया और ममता को ज़बरदस्ती बाहर लाकर बोला- ममता मुझे भी अपनी कहानी बताओ.. मीरा कह रही थी बड़ी दिलचस्प कहानी है..

ममता- बड़ी बीबी जी.. क्यों गरीब का मजाक उड़ा रही हो.. यह कहानी नहीं मेरे जीवन का कड़वा सच है।

मीरा- अरे ममता.. हम मजाक नहीं कर रहे.. दीदी को अपनी बात बताओ.. ये तुम्हारी मदद कर सकती हैं.. समझो बात को..

राधे- हाँ ममता.. बताओ ऐसा क्या हुआ तुम्हारे साथ.. जो ऐसी बातें कर रही हो?

ममता- ठीक है बीबी जी सुनाती हूँ मगर देखो मैं ठहरी अनपढ़ तो जो बोलूँ.. आप समझ लेना.. मुझे घुमा-फिरा कर बोलना नहीं आता.. सीधे-सीधे अपनी बात बताती हूँ.. आप हँसना मत बस हाँ..!

मीरा- अरे नहीं हँसेंगे.. बोलो अब..

राधे- यहाँ नहीं.. चलो कमरे में चलो.. वहाँ आराम से बताना..

तीनों वहाँ से कमरे की तरफ चल दिए.. मीरा अब भी लंगड़ा रही थी.. उसका बुखार तो उतर गया था.. मगर चूत में अभी भी थोड़ा दर्द था।

कमरे में जाकर ममता ने अपनी कहानी बतानी शुरू की।

ममता- देखो बीबी जी.. जब मैं जवान हुई.. तो मोहल्ले के सारे लड़के मुझे देख कर ‘आहें’ भरते थे.. मेरे बापू को लगा अब शादी कर देने में ही भलाई है.. तो बस उस निक्क्मे सरजू से मेरा रिश्ता कर दिया और हो गई शादी.. मुझे शादी के बारे में ज़्यादा पता नहीं था.. बस इतना जानती थी कि शादी की रात पति अपनी पत्नी को नंगा करके चुदाई करता है और ये चुदाई का क्या मतलब था.. ये ज़्यादा पता नहीं था। शादी की रात कुत्ता दारू पीके आ गया.. उस कमीं ने अपनी औकात पहली रात ही दिखा दी।

राधे- क्या तेरा बाप तेरा दुश्मन है क्या.. जो उसने तेरी ऐसे आदमी से शादी कर दी?

ममता- अरे बीबी जी.. उस सरजू के बाप से मेरे बापू की अच्छी दोस्ती है न.. बस इसी लिए ये रिश्ता कर दिया..

मीरा- दीदी आप चुप रहो ना.. आगे तो सुनो क्या हुआ?

ममता- होना क्या था.. हरामी आ गया और बस मेरे चूचे दबाने लगा.. मैं तो घबरा गई.. मगर मैंने कुछ कहा नहीं.. मेरी सहेली ने कहा था कि तेरा मर्द जो करे.. उसे करने देना.. कुछ बोलना मत.. बड़ा मज़ा आएगा.. इसी वास्ते मैं चुप रही..

मीरा- आगे बोल ना.. फिर क्या हुआ?

ममता- होना क्या था.. वो मेरे चूचे मसलता रहा.. मेरे जिस्म में अजीब सी आग लगने लगी..।

दोस्तो, ऐसे मज़ा नहीं आ रहा है.. चलो थोड़ा पीछे जाकर आपको ममता की सुहागरात का सीधा सीन ही दिखा देती हूँ.. आप भी क्या याद करोगे..

तो चलो सीधे ममता के कमरे में..

सरजू- क्यों मेरी बुलबुल.. मज़ा आ रहा है क्या.. हिच्च..

ममता- ऊंह.. आह्ह.. दुखता है जी.. धीरे दबाओ ना..

सरजू- अरे मेरी धर्म पत्नी जी.. अभी कहाँ दर्द हुआ जब मेरा लौड़ा तेरी चूत में जाएगा.. उस बखत दर्द होगा तेरे को.. ही ही ही ही.. हिच्च..

ममता को कुछ समझ नहीं आया.. बस वो चुपचाप रही.. सरजू ने उसके होंठों को चूमा और धीरे-धीरे उसके सारे कपड़े निकाल दिए।

ममता- जी.. लाइट तो बन्द कर दो.. मुझे शर्म आती है।

सरजू- अरे मुझसे कैसी शर्म.. तू मेरी पत्नी है.. हिच्च.. मैं तेरा पति.. अब तो सारी जिंदगी हमें ऐसे ही रहना है.. हिच्च.. तू काहे को डरती है.. हिच्च..

सरजू ने ममता को एकदम नंगा कर दिया था और अब खुद भी नंगा होने लगा।

ममता बस चुपचाप नशे में धुत्त सरजू को देख रही थी.. जब उसने पजामा निकाला तो उसका 4″ का पतला सा लंड देख कर वो घबरा गई.. क्योंकि उसने आज तक किसी का लौड़ा नहीं देखा था और आज ये छोटा सा लौड़ा भी उसको बड़ा लग रहा था। उसने बस अपनी सहेलियों से सुना था.. पर देखा पहली बार था और सरजू तो दारू के नशे में क्या से क्या बक रहा था।

सरजू- क्या देख रही है जानेमन.. हिच्च.. इसे लंड कहते हैं.. आज इसी लंड से तेरी चूत को फाडूंगा मैं.. हिच्च..

ममता नंगी शर्मा रही थी.. उसको कुछ समझ नहीं आ रहा था। वो बस चुपचाप बिस्तर पर बैठ गई..

सरजू उसके पास आया और उसके चूचे चूसने लगा.. उसका लौड़ा तना हुआ था। थोड़ी देर बाद उसने लौड़ा ममता के मुँह में डाल दिया..

सरजू- चूस मेरी ममता रानी.. आह्ह.. आज मज़ा आ जाएगा उफ़.. चूस.. न..

ममता को कुछ अच्छा नहीं लग रहा था.. मगर वो फिर भी लौड़े को चूसने लगी।

सरजू- आ आह्ह.. चूस.. मज़ा आ गया.. आह्ह..

सरजू ने ममता के सर को पकड़ लिया और ज़ोर-ज़ोर से झटके मारने लगा। जल्दी ही उसका पानी निकल गया.. जिसे मजबूरन ममता को गटकना पड़ा।

ममता- उहह.. उहह.. छी:.. आप कितने गंदे हैं.. मेरे मुँह में मूत दिया आह्ह..

सरजू- अरे ममता रानी.. ये मूत नहीं वीर्य था.. जिसे पीकर तू धन्य हो जाएगी.. आह्ह.. मज़ा आ गया… चल अब तेरी चूत चाट कर तुझे ठंडा करता हूँ उसके बाद तेरी सील तोड़ूँगा..

ममता को अब कुछ-कुछ होने लगा था.. सरजू उसकी कुँवारी चूत को बड़ी बेदर्दी से चाटने लगा..

ममता- आह्ह.. आई.. सी सी अजी सुनिए तो आह्ह.. बस भी करो.. आह्ह.. नहीं आह्ह.. मुझे कुछ हो रहा है आह्ह..

सरजू लगातार चूत चाट रहा था.. ममता की सिसकारियाँ कमरे में गूंजने लगीं.. जल्द ही उसका बदन अकड़ने लगा और उसकी चूत ने रस छोड़ दिया.. जिसे सरजू पी गया..

ममता की बात सुनकर मीरा की चूत गीली हो गई थी और राधे का लौड़ा फुंफकारने लगा था.. मगर दोनों ही अपने ज़ज्बात को दबाए बैठे.. उसकी बातें सुन रहे थे।

 


आधे एक घंटे तक सरजू और ममता एक-दूसरे से लिपटे पड़े रहे.. इस दौरान सरजू ने दो-चार पैग और लगा लिए अब वो नशे में झूलने लगा था.. ज़ुबान लड़खड़ाने लगी थी..

सरजू- ममता आज हमारी सुहागरात है अब तू मेरे लौड़े.. हिच्च.. को.. चूस कर खड़ा कर.. अब तेरी सील तोड़ने का बखत आ गया है.. हिच्च हिच्च..

ममता ने लौड़े को चूसना शुरू कर दिया जल्दी ही लौड़ा खड़ा भी हो गया, अब ममता की शर्म भी खुल गई थी, वो भी सरजू को बोलने लगी थी।

ममता- मेरे स्वामी.. आपने ये क्या कर दिया.. मेरे नीचे आग लग रही है.. आह्ह.. कुछ करो.. घुसा दो अपना ये.. आह्ह.. स्वामी.. जल्दी कुछ करो।

सरजू ने ममता के पैरों को फैलाया.. लौड़ा.. चुसाई के कारण थूक से सना हुआ था। सरजू ने लौड़े को चूत पर टिका कर धीरे से धक्का मारा लौड़ा फिसल गया। दो बार कोशिश करने के बाद सुपाड़ा ही चूत में घुस पाया था कि ममता दर्द से कराह उठी।

उसी पल सरजू ने ज़ोर से धक्का मारा.. और पूरा लौड़ा चूत में घुस गया। खून चूत से रिस कर बाहर आने लगा.. ममता ज़ोर-ज़ोर से चिल्ला रही थी। मगर सरजू तो बस ‘घपाघप’ लौड़ा पेल रहा था। पांच मिनट में ही उसका लौड़ा अकड़ गया और ममता की सुखी चूत को गीला कर दिया।

सरजू- आह्ह.. मज़ा आ गया.. तेरी सील तोड़कर आह्ह.. बहुत थक गया हूँ.. अब तू गुसलखाने में जाकर चूत साफ कर ले.. मैं तो सो रहा हूँ.. बहुत थक गया हूँ मैं.. आह्ह.. उहह।

सरजू नशे में था.. जल्दी ही उसे नींद आ गई.. ममता बस बिस्तर पर पड़ी सिसकती रही।

काफ़ी देर बाद ममता उठी.. बाथरूम जाकर उसने अपनी चूत साफ की और सरजू के पास ही सो गई।

राधे- अरे वाह.. ममता तेरी कहानी तो अच्छी है.. माना कि तेरे पति का छोटा है मगर तेरी चीखें निकलवा दीं उसने.. लेकिन सुहागरात की रात बस एक बार ही चोदा.. ये अच्छा नहीं किया तेरे पति ने।

ममता- जाने दो बड़ी बीबी जी.. अब आपको क्या बताऊँ.. पहली रात को मैं कुँवारी थी.. पहली बार चुदवाया तो दर्द होगा ही.. उस रात के बाद कोई एक महीने तक वो रोज मुझे चोदता रहा.. मेरी चुदाई की तड़प बढ़ती ही जा रही थी। सच कहूँ बीबी जी.. वो तो 5 मिनट में ठंडा हो जाता.. मेरी सुलगती चूत को मुझे उंगली से ठंडा करना पड़ता.. अब तो कई महीने हो गए.. वो नशे में धुत होकर आता है और गिर कर सो जाता है। मेरे तो करम ही फूट गए। मैं उसको सोते हुए नंगा करके खुद से चुदवा लेती हूँ मगर मज़ा नहीं आता.. उसका लौड़ा बड़ी मुश्किल से चूस कर खड़ा करती हूँ.. जब उसके ऊपर बैठ कर एक-दो बार ऊपर-नीचे होती हूँ.. साला भड़वा.. उतने में ही पानी छोड़ देता है.. मैं अधूरी की अधूरी रह जाती हूँ।

राधे- ओह सॉरी.. ममता.. मैं कुछ कर सकूँ तो मुझे बताना.. मैं जरूर तुम्हारी मदद करूँगी।

ममता- बीबी जी मुझे बच्चा चाहिए.. वो मेरे पति तो दे नहीं सकते.. पड़ोस वाली सुनीता कहती है किसी और मर्द से सम्बन्ध बना ले.. चुदाई का सुख भी मिल जाएगा और गोद भी हरी हो जाएगी।

मीरा- तो तुमने क्या सोचा?

ममता- नहीं बीबी जी.. ऐसे ही किसी से चुदवाना ठीक नहीं.. जो आगे चलकर मेरे जीवन में जहर घोल दे.. हाँ कोई ऐसा आदमी मिल जाए जिसके पास तगड़ा लौड़ा हो.. और मुझे पक्का विश्वास दिलाए कि मुझे बच्चा देकर वो कभी मुझे परेशान नहीं करेगा। तब मैं ख़ुशी से उसको अपनी चूत दे दूँगी।

ये सब कहते-कहते ममता की आँखों में आँसू आ गए।

राधे- तुम्हारा दिल दुखाने का मेरा बिल्कुल इरादा नहीं था ममता.. मगर तुम चिंता मत करो.. बहुत जल्दी तुम्हारी गोदी में बच्चा होगा।

ममता- कैसे होगा बीबी जी?

मीरा- होगा.. ममता जरूर होगा.. दीदी तुमको बच्चा देगी।

ममता की समझ में कुछ नहीं आया.. वो बस दोनों को टुकुर-टुकुर देखती रही।

 


राधे ने मीरा की कही बात को संभालते हुए कहा- अरे इसका मतलब है.. मैं ऐसे आदमी को जानती हूँ.. जो तुम्हें बच्चा देगा.. समझी.. अब जाओ अपना काम करो.. मुझे थोड़ा आराम करना है।

ममता- बीबी जी.. अगर सच में ऐसा हो जाए.. तो मैं आपका अहसान जिंदगी भर नहीं भूलूंगी।

ममता के बाहर जाते ही राधे ने मीरा को आँख दिखाई- तुम पागल हो क्या.. सीधे-सीधे मेरा नाम ले दिया।

मीरा- तो क्या हुआ.. बेचारी कितनी दुखी है.. तुम उसको बच्चा दे दोगे.. तो क्या बिगड़ जाएगा।

राधे- अरे मेरी भोली मीरा.. उसकी नजरों में राधा एक लड़की है.. अब उसको थोड़ी पता है मेरे बारे में।

मीरा- ये तो मैंने सोचा ही नहीं.. पापा को पता चल गया तो वो मर ही जाएँगे।

राधे- हाँ मेरी रानी.. अब समझी ना.. बात को ममता का भी कुछ सोचता हूँ इसकी बातों ने गर्म कर दिया.. उसको बोलो कि आज उसकी छुट्टी.. जाओ उसके बाद हम अपनी रासलीला करेंगे।

मीरा भी गर्म थी.. उसने ममता से कहा- दोपहर का खाना बनाकर तुम चली जाना.. रात को हम बाहर खाएँगे।

ममता भी जल्दी जाने की ख़ुशी में जल्दी से सब काम निपटा कर फ्री हो गई।

बारह बजे तक उसने खाना बना दिया राधे और मीरा ने खाना खा लिया।

मीरा- अच्छा ममता.. बर्तन धोकर तुम चली जाना.. मुझे नींद आ रही है.. मैं तो सोती हूँ।

राधे- तुम सो जाओ.. मैं थोड़ा बाहर जाकर आती हूँ।

ममता बर्तन धोने में लग गई.. राधे बाहर चला गया और मीरा कमरे में जाकर बिस्तर पर लेट गई।

कोई 20 मिनट बाद ममता ने मीरा को कहा- मैं जा रही हूँ।

ममता जब बाहर निकल रही थी.. राधे घर में आ रहा था। उसने ममता से कहा- जल्दी ही वो उसके लिए कुछ करेगी।

ममता खुश होकर चली गई।

राधे जब कमरे में गया तो मीरा नाईटी पहने हुए बिस्तर पर पेट के बल लेटी हुई थी, वो राधे बिना कोई आवाज़ किए सीधा बाथरूम में चला गया।

हाय दोस्तो.. क्या यार, कहानी में इतने खोए हुए हो.. मुझे याद भी नहीं करते.. अरे मेरी बात जाने दो.. नीरज को तो याद कर लो.. उसका क्या हाल है.. चलो देख लेते हैं। राधे को बाथरूम में लंड हिलाते रहने दो.. हम वापस पीछे चलते हैं.. जब नीरज ने रोमा को घर ड्रॉप किया था।

रोमा को ड्रॉप करने के बाद नीरज बहुत खुश था। करीब 15 मिनट बाद ही उसने रोमा को कॉल कर दिया।

नीरज- हैलो..!

रोमा- हाय.. अरे अभी तो मुझे छोड़ कर गए हो.. क्या हुआ जनाब.. क्या भूल गए?

नीरज- भूला कुछ नहीं हूँ.. तुम्हें थैंक्स बोलना चाहता हूँ और एक जरूरी बात भी करनी है।

रोमा- अरे किस बात का थैंक्स.. मैंने तो बस आपको सच बताया है और जरूरी बात क्या है?

नीरज- क्या शाम को मुझसे मिल सकती हो.. प्लीज़ गलत मत समझना.. तुमसे कोई जरूरी बात करनी है।

रोमा- क्या बात है.. फ़ोन पर बता दो ना.. शाम को मेरा आना जरा मुश्किल है।

नीरज- कोई बात नहीं.. फिर जब तुम मिलोगी.. तब बता दूँगा।

रोमा के मन में हलचल पैदा हो गई आख़िर क्या बात होगी।

रोमा- अच्छा ठीक है.. ऐसा करती हूँ.. कल आप 10 बजे स्कूल से थोड़ा दूर जो पीसीओ है ना.. वहाँ आ जाना.. मैं वहीं मिलने आ जाऊँगी।

नीरज- लेकिन उस टाइम तो तुम स्कूल में रहोगी ना?

रोमा- नहीं.. कल मैं स्कूल नहीं जाऊँगी.. मेरे मौसाजी के यहाँ उनकी बेटी की सगाई है.. हम सब वहाँ जाएँगे.. तो रास्ते में वहीं आपसे मिल लूँगी।

नीरज- ओके.. तो मैं पक्का वहाँ आ जाऊँगा।

सुबह नीरज समय पर वहाँ पहुँच गया और रोमा का इन्तजार करने लगा। थोड़ी ही देर में सामने से उसे रोमा आती हुई दिखाई दी।

रोमा ने हरे रंग का शॉर्ट स्कर्ट और सफ़ेद टॉप पहना हुआ था। उसकी चाल के साथ उसके मम्मे भी थिरक कर कत्थक कर रहे थे और उसकी गाण्ड ऐसे मटक रही थी.. जैसे कोई तराजू हो.. कभी ये पलड़ा ऊपर.. कभी वो पलड़ा ऊपर..

रोमा मुस्कुराती हुई नीरज के पास आ गई।

रोमा- हाय.. कैसे हो आप?

नीरज- बिल्कुल भी अच्छा नहीं हूँ।

रोमा- क्यों क्या हुआ.. प्लीज़ बताओ ना..

नीरज- यहीं सुनोगी क्या.. रास्ते में खड़ी होकर?

रोमा- ओके कहीं और चलते हैं चलो..

 


दोनों गाड़ी में बैठ गए। नीरज बस अपने झूठे प्यार को लेकर इधर-उधर की बातें करने लगा और रोमा चुपचाप उसकी बातों को गौर से सुन रही थी, उसका दिल भर आया था।

गाड़ी बस चली जा रही थी.. कोई 20 मिनट बाद गाड़ी एक बिल्डिंग के पास जाकर रुकी..

रोमा- ये हम कहाँ आ गए..

नीरज- ये मेरे चाचा की बिल्डिंग है.. ऊपर का फ्लैट हमारा है.. चलो वहाँ चलकर आराम से बातें करेंगे।

दोस्तो, दरअसल नीरज ने ये सब झूठ कहा था.. ये तो आप जानते हो.. मगर आपको बता दूँ कि नीरज ने किसी तरह एक दलाल को पैसे देकर ये फ्लैट कुछ दिनों के लिए ले लिया था.. ताकि रोमा को आराम से यहाँ लाकर उसकी चूत का मज़ा ले सके।

रोमा नीरज के पीछे-पीछे चलने लगी.. जब दोनों फ्लैट में गए.. तो रोमा थोड़ी घबरा गई।

उसने सोचा अन्दर कोई होगा.. मगर वहाँ उन दोनों के सिवा कोई नहीं था।

रोमा- नीरज जी आपके सिवा यहाँ कोई नहीं रहता क्या..

नीरज- मैंने बताया था ना.. हम दिल्ली में रहते हैं यहाँ बस काम के सिलसिले में आना होता है।

रोमा- अच्छा वो बात क्या थी.. जो आप बताना चाहते थे?

नीरज- अरे बता दूँगा.. इतनी जल्दी भी क्या है.. आई हो तो घर तो देखो.. क्या लोगी तुम.. ठंडा या गर्म?

रोमा- अरे नहीं.. मुझे कुछ नहीं चाहिए वैसे भी बहुत लेट हो गई हूँ.. अब मुझे चलना चाहिए।

नीरज- इतनी जल्दी क्या है.. लगता है तुम घबरा रही हो.. रोमा डरो मत.. मैं कोई ऐसा-वैसा इंसान नहीं हूँ.. अगर मुझ पर भरोसा ही नहीं है.. तो वो बात बताने का कोई फायदा नहीं.. चलो तुम्हें घर छोड़ आता हूँ।

रोमा- अरे नहीं नहीं.. ऐसी कोई बात नहीं है.. आपसे मैं क्यों डरूँगी.. प्लीज़ सॉरी.. कहो ना ऐसी क्या बात है.. जो आप बताना चाहते हो।

नीरज के चेहरे पर ज़हरीली मुस्कान आ गई.. क्योंकि चिड़िया दाना चुगने लगी थी और अब जल्दी ही जाल में फँस जाएगी।

नीरज ने मौके का फायदा उठाया और फ़ौरन जाल फेंक दिया यानि कि वो अपने घुटनों पर बैठ गया और रोमा का हाथ अपने हाथ में लेकर उसको ‘आई लव यू..’ बोल दिया।

रोमा मन ही मन नीरज को पसंद करने लगी थी और आज उसके सामने नीरज ने अपने प्यार का इज़हार कर दिया.. वो बेचारी ख़ुशी से फूली ना समाई.. उसका चेहरा शर्म से लाल हो गया और उसने नीरज का हाथ पकड़ कर उसको उठा लिया और ख़ुशी से उसके सीने से लिपट गई।

रोमा- आई लव यू टू नीरज.. मुझे आपसे ज़्यादा प्यार करने वाला इस दुनिया में और कहाँ मिलेगा..

रोमा बस ख़ुशी से नीरज से लिपटी हुई थी.. उसके नुकीले मम्मे नीरज के सीने में धँस गए थे.. जिसके कारण नीरज का लौड़ा ‘धिंक चिका.. धिंक चिका..’ करने लगा था।

नीरज के हाथ रोमा की पीठ पर घूमने लगे थे।

रोमा के बदन में एक अजीब सी बेचैनी होने लगी.. तो वो नीरज से अलग हो गई। अब उसको शर्म आने लगी थी।

नीरज- अरे क्या हुआ रोमा.. अच्छा नहीं लगा क्या?

रोमा- ऐसी बात नहीं है.. मुझे जाना होगा वरना घर पर गड़बड़ हो जाएगी।

नीरज- ठीक है.. चलो मगर दोबारा कब मिलोगी और आज हमारा प्यार का दिन है.. तो कुछ ‘मीठा’ होना चाहिए ना..

रोमा- मैं कुछ समझी नहीं.. क्या ‘मीठा’ होना चाहिए?

 


नीरज ने रोमा के मुलायम होंठों पर अपनी उंगली घुमाई और बस उसकी आँखों में देखने लगा।

रोमा समझ गई.. नीरज क्या चाहता है और वो थोड़ी घबरा गई.. क्योंकि इतनी जल्दी कोई भी लड़की चुम्बन के लिए तैयार नहीं होती.. कुछ घबरा जाती है.. तो कुछ नाटक करती ही है।

अब रोमा क्या कर रही थी ये भी पता चल जाएगा।

रोमा- न..न..नहीं नहीं.. इतनी जल्दी कुछ नहीं.. आप भी ना बस..

नीरज- अरे इसमें क्या है.. वो कहते हैं ना.. नए रिश्ते की शुरूआत कुछ मीठे से होनी चाहिए.. तो मैंने कहा बस.. कि कुछ मीठा हो जाए.. हम दोनों एक ही ‘डेरी-मिल्क’ आधी-आधी खाएँगे तो प्यार और मजबूत होगा।

रोमा- आप ‘डेरी-मिल्क’ की बात कर रहे हो.. मैं समझी..

इतना बोलकर रोमा चुप हो गई।

नीरज- हाँ और नहीं तो क्या.. तुम क्या समझी?

रोमा- कुछ नहीं.. अब चलो देर हो रही है।

नीरज- अरे बताओ ना यार.. क्या समझी तुम?

रोमा- कुछ नहीं.. अब चलो भी..

नीरज- हा हा हा.. जानता हूँ.. तुम शरमा रही हो.. अरे मेरी भोली रोमा.. तुम जो समझी.. वो तुम्हारी मर्ज़ी के बिना नहीं होगा.. वादा करता हूँ तुम अपने नीरज को जानती नहीं हो.. मैं मर जाऊँगा.. मगर तुम्हारे साथ कुछ ज़बरदस्ती नहीं करूँगा।

रोमा ने नीरज के होंठों पर हाथ रख दिया और गुस्से से देखते हुए बोली- प्लीज़ दोबारा मरने की बात मत करना।

नीरज- अच्छा नहीं करूँगा.. लेकिन तुम भी मेरा साथ किसी हाल में नहीं छोड़ोगी.. वादा करो..

रोमा ने वादा किया और दोनों वहाँ से निकल गए। नीरज ने अपनी पहली चाल में रोमा को फँसा लिया था। उससे दोबारा मिलने का वादा लेकर नीरज उसे घर के पास छोड़ आया।

चलो यहाँ तो कुछ नहीं हुआ.. अपने राधे के पास वापस चलते हैं।

जब राधे बाहर आया.. तो वो सिर्फ़ अंडरवियर में था.. मीरा सोई हुई थी.. उसकी मदमस्त उठी हुई गाण्ड देख कर राधे का लौड़ा तन गया।

राधे चुपचाप बिस्तर के पास गया अपना अंडरवियर निकाला और लौड़े को सहलाते हुए मुस्कुराने लगा..

मीरा अपनी मस्ती में सोई हुई थी और पैरों को हिला रही थी.. तभी राधे ने मीरा के चूतड़ों को पकड़ लिया और ज़ोर से दबा दिया।

मीरा- ऊईइ.. क्या करते हो.. दु:ख़्ता है.. ना..!

बोलने के साथ ही मीरा सीधी लेट गई और राधे को नंगा देख कर चौंक गई।

राधे- मेरी जान अभी कहा दु:ख़ता है.. जब यह तेरी गाण्ड में जाएगा तब बराबर दु:खेगा।

मीरा- तुम पागल हो गए हो क्या… कमरे का दरवाजा खुला है.. कोई आ गया तो?

राधे- अरे घर में कोई नहीं है कौन आएगा?

मीरा- अरे बाहर से कोई आ सकता है.. कम से कम मेन डोर तो बन्द कर आओ।

राधे- अब कौन आएगा इस समय पर.. तुम भी ना बना बनाया मूड खराब कर रही हो।

मीरा- तुमसे कौन जीतेगा.. आ जाओ मेरे आशिक.. जो करना है.. कर लो.. जब तक पापा नहीं आ जाते.. खुलकर मज़ा कर लो.. बाद में तो छुप-छुप कर ही करना होगा।

राधे- मेरी जान.. तेरी गाण्ड बड़ी मस्त है आज इसका भी उद्घाटन करवा लो..

मीरा- नहीं अभी नहीं.. मेरी चूत का दर्द ख़त्म हो जाने दो.. उसके बाद गाण्ड की बात करना.. लाओ पहले मुझे लंड चूसने दो.. कितना मस्त लग रहा है.. खड़ा हुआ..

 


राधे बिस्तर के पास जाकर खड़ा हो गया और मीरा पेट के बाल लेटी हुई लौड़े पर जीभ घुमाने लगी।

राधे ने मस्ती में आँखें बन्द कर लीं और मीरा पूरे लंड को लॉलीपॉप की तरह चूसने लगी.. तभी घर का मेन डोर खुला और ममता अन्दर आ गई।

वो सीधी इनके कमरे की तरफ़ आई और जब उसकी नज़र अन्दर पड़ी.. तो उसकी आँखें फटी की फटी रह गईं.. उसके पैरों के नीचे से जैसे जमीन निकल गई हो।

ये दोनों तो अपनी मस्ती में खोए हुए थे और ममता ने अपने मुँह पर हाथ रख लिया.. उसकी साँसें तेज़ चलने लगीं दरअसल वो इस तरह खड़ी थी कि राधे का लौड़ा उसे साफ-साफ मीरा के मुँह में अन्दर-बाहर होता हुआ दिखाई दे रहा था।

मीरा ने लौड़ा मुँह से निकाल कर उसे अपने हाथों में ले लिया।

मीरा- बस मेरे आशिक अब क्या मुँह में ही पानी निकालोगे.. मेरी चूत गीली हो गई है.. अब अपने इस शैतान को मेरी चूत में घुसा दो न..

राधे- मेरी जान अपने जिस्म को इस कपड़े से तो आज़ाद करो।

मीरा जब बैठी तो उसकी नज़र ममता पर पड़ गई.. वो एकदम चौंक सी गई। उसकी नज़रें दरवाजे पर चिपक गईं और उसकी इस हरकत ने राधे को भी दरवाजे की तरफ़ देखने पर मजबूर कर दिया।

राधे ने जल्दी से पास पड़ी चादर अपने जिस्म पर लपेट ली।

मीरा- अम्म.. म..ममता तुम तो चली गई थी ना.. वापस क्यों आई?

ममता- बीबीजी, जाते वक़्त मुझे याद आया कि मैं अपना फ़ोन रसोई में भूल गई हूँ.. बस वही लेने आई थी.. मगर यहाँ तो नजारा ही अलग हो गया। आपकी बहन का लौड़ा देख कर तो मेरी आँखें चकरा गईं..

राधे- देखो ममता तुम अन्दर आओ और मैं मीरा की बहन नहीं.. पति हूँ.. प्लीज़ तुम किसी को कुछ मत बताना.. तुम्हें जो चाहिए.. हम दे देंगे.. जितने पैसे बोलोगी.. हम देंगे..

ममता- बीबी जी ना ना.. साहेब जी.. मैं गरीब जरूर हूँ.. बेईमान नहीं.. लालची नहीं हूँ.. मुझे बस आप इस उलझन से आज़ाद कर दो.. यह माजरा क्या है?

राधे और मीरा ने ममता को पास बिठाया और शुरू से अब तक की सारी बातें बता दीं।

ममता- साहेब जी.. आप दोनों की जोड़ी बहुत अच्छी है.. मैं कभी किसी को कुछ नहीं बताऊँगी.. लेकिन..

मीरा- लेकिन क्या ममता?

ममता- बीबी जी आप बुरा मत मानना.. मैंने इतना बड़ा लौड़ा कभी सपने में भी नहीं देखा है.. मेरे पति का तो ना के बराबर है.. बस एक बार मैं साहेब जी का लौड़ा अपनी चूत में लेना चाहती हूँ.. मेरी प्यासी चूत की आग यही बुझा सकते हैं.. मेरी सूनी गोद को यही भर सकते हैं.. भगवान के लिए मुझे ये मौका दे दो.. मैं जीवन भर आपकी आभारी रहूंगी।

राधे- यह तुम क्या कह रही हो?

ममता- ना ना साहेब जी.. मैं आपको कोई धमकी नहीं दे रही.. बस प्रार्थना कर रही हूँ.. अगर आप ना भी करोगे.. तो भी मैं किसी को कुछ नहीं बताऊँगी। मैंने इस घर का नमक खाया है.. अब नमकहरामी नहीं करूँगी..

मीरा- देखो ममता.. वैसे तो दुनिया की कोई भी औरत अपने पति को दूसरी औरत के पास नहीं जाने देगी.. मगर तुम्हारे ऊपर बड़ा ज़ुल्म हुआ है और मैं खुद यही चाहती हूँ कि राधे तुम्हें बच्चा दे।

राधे- यह क्या बोल रही हो तुम मीरा.. बच्चा देना कोई मजाक है क्या?

मीरा- हाँ पता है.. आसान नहीं है.. मगर भगवान चाहे तो एक बार में ही बच्चा पेट में पड़ जाता है.. नहीं तो महीनों मेहनत करनी पड़ती है बच्चे के लिए..

राधे- हाँ तो ये बात तुम सोचो.. कैसे होगा ये?

मीरा- अरे मेरे आशिक.. बहुत आसान है.. सुबह जब मैं स्कूल चली जाऊँगी.. तो तुम और ममता अकेले रहोगे.. बस कोशिश करते रहना.. कभी ना कभी तो कामयाब हो जाओगे।

ममता इन दोनों की बातें सुनकर मन ही मन खुश हो रही थी.. उसकी चूत गीली होने लगी थी।

राधे- दिन में पापा रहेंगे ना.. कैसे होगा सब?

मीरा- अरे मेरे भोले आशिक… जब मैं स्कूल चली जाऊँगी और पापा अपने काम से बाहर होंगे.. तब तुम आराम से ममता के साथ कर सकते हो और अभी तो पापा को आने में दो दिन लगेंगे.. तब तक तो बिना किसी डर के कर सकते हो ना..

ममता- बीबी जी आप बहुत अच्छी हो भगवान आपका भला करेगा.. अभी तो मैं जाती हूँ.. आप मज़ा करो। कल आप स्कूल चली जाओगी.. तब मैं साहेब जी के साथ हो जाऊँगी।

मीरा- कल क्यों.. आज ही कर लो.. थोड़ा मज़ा ले लो..

मीरा की बात से ममता शर्मा गई।

ममता- नहीं बीबी जी.. आज नहीं.. आज आप मज़ा लो.. मैं कल अच्छे से नहा- धो कर आऊँगी।

मीरा- ओये होए.. ममता क्या बात है.. नहा कर आओगी या साफ-सफ़ाई करके आओगी.. हाँ..

ममता- बीबी जी आप बहुत बेशर्म हो गई हो.. कुछ भी बोल देती हो..

मीरा- हा हा हा.. अरे इसमें बेशर्मी की क्या बात है.. जब इतना बड़ा लौड़ा चूत में जाएगा.. तो शर्म अपने आप बाहर आ जाएगी.. तुम छूकर तो देखो.. तुम्हें भी पता चल जाएगा।

इतना कह कर मीरा ने राधे का कपड़ा हटा दिया और उसका आधा खड़ा लौड़ा ममता के सामने आ गया।

राधे- अरे मीरा, ये क्या है?

मीरा- अब तुम ज़्यादा भोले मत बनो मेरे सामने तो बड़ी डींगें हांकते हो.. अब ममता से क्यों शर्मा रहे हो.. कर दो बेचारी की गोद हरी-भरी।

ममता तो बस टकटकी लगाए राधे के लौड़े को निहार रही थी, तभी मीरा ने ममता का हाथ पकड़ कर लौड़े पर रख दिया।

मीरा- मेरे सामने तुम शर्मा रही हो.. लो मैं पापा के कमरे में जा रही हूँ.. थोड़ा मज़ा तुम दोनों भी कर लो।

मीरा के जाने के बाद ममता धीरे-धीरे लौड़े को सहलाने लगी.. अब भी उसमें थोड़ी झिझक थी.. मगर ऐसा तगड़ा लौड़ा देख कर उसकी जीभ लपलपा रही थी।

राधे- ममता ऐसे शरमाओगी तो कैसे चलेगा.. ठीक से मज़ा लो ना..

ममता- साहेब जी, आप बहुत अच्छे हो आपका लौड़ा बहुत तगड़ा है.. हमारी मीरा के तो भाग खुल गए.. जो आपसे उसकी शादी हुई.. बस सारी जिंदगी उसको खुश रखना।

 


राधे- हाँ ममता.. जरूर खुश रखूँगा.. चलो अब बातें बन्द करो.. तुम्हारे मुलायम होंठों से मेरे लौड़े को सुकून दो।

ममता ने बड़ी ख़ुशी से लौड़े को चूमना शुरू किया और सुपाड़े को जीभ से चाटने लगी।

राधे को मज़ा आने लगा.. ममता का स्टाइल थोड़ा अलग था.. मीरा तो नई खिलाड़ी थी.. मगर ममता एक्सपर्ट की तरह लौड़े को चूसने लगी।

राधे का लौड़ा अपने पूरे आकार में आ गया। अब राधे ममता के सर को पकड़ कर झटके मारने लगा।

ममता ने अपने होंठ भींच लिए.. राधे को कुँवारी चूत के जैसा मज़ा आने लगा।

दस मिनट तक राधे ममता के मुँह को चोदता रहा।

राधे- बस ममता अब क्या मुँह से पानी निकालोगी.. अपनी चूत के दीदार भी करा दो..

ममता ने लौड़ा मुँह से निकाला और कहा- नहीं साहेब जी.. अपना जिस्म तो आपको कल ही दिखाऊँगी.. आज तो बस आपके लौड़े से निकला पानी ही पी लूँगी।

राधे ने हंस कर उसको कहा- जैसी तुम्हारी मर्ज़ी.. लो चूसो लौड़े को.. आज पानी पीलो.. कल चूत में डलवा लेना..

ममता ने दोबारा लौड़े को मुँह में भर लिया और मस्ती से चूसने लगी। अब वो कभी राधे की गोटियाँ चूस रही थी.. तो कभी सुपाड़े को लॉलीपॉप की तरह चूस रही थी। ऐसी ज़बरदस्त चुसाई के आगे लौड़े की क्या मजाल.. जो पानी ना फेंके।

राधे ने ममता के सर को पकड़ लिया और स्पीड से चोदने लगा.. दो मिनट में उसके लौड़े ने वीर्य की धार ममता के गले में मारनी शुरू कर दी।

ममता ने जीभ से चाट-चाट कर पूरा लौड़ा साफ कर दिया.. आख़िरी बूँद तक लौड़े से निचोड़ कर वो पी गई..

राधे- आह्ह.. ममता.. मज़ा आ गया.. तूने तो मुँह से कुँवारी चूत का मज़ा दे दिया.. तुम बहुत सेक्सी हो यार..

ममता- साहेब जी.. कल देखना मेरी चूत भी कुँवारी ही है.. मेरा पति तो निकम्मा नामर्द है.. आपके जैसा असली मर्द कभी मिला ही नहीं.. कल आपको ऐसा मज़ा दूँगी कि आप याद रखोगे मुझे.. अब मैं चलती हूँ..

राधे- अरे ममता तुम कब से लौड़े को चूस रही हो.. तुम्हारी चूत भी तो गीली हो गई होगी.. ऐसे तड़पती ही घर जाओगी क्या..?

ममता- हाँ साहेब जी.. चूत में बड़ी आग लगी है.. आपके लौड़े को देख कर ही ये फड़फड़ाने लगी थी.. मगर आज नहीं.. इसे और तड़पने दो.. अब तो मैं कल ही इसको शांत करवाऊँगी..

राधे इसके आगे कुछ ना बोल सका और ममता ने राधे का शुक्रिया अदा किया और वहाँ से निकल गई।

ममता के जाने के बाद राधे जब मीरा के पास गया तो वो गहरी नींद में सो चुकी थी और ममता ने लौड़े को ठंडा कर दिया था.. तो राधे ने सोचा कि वो भी थोड़ा सो ले.. तो अच्छा रहेगा और बस वो वापस आकर कमरे में सो गया।

दोस्तो, उधर रोमा अपने रिश्तेदार के घर तो थी.. मगर उसका पूरा ध्यान बस नीरज पर ही था.. वो उसके बारे में ना जाने क्या-क्या सोच रही थी। उसका दिल नीरज से मिलने क लिए तड़प रहा था। शाम तक वो अपने घर वापस आ गई थी। उसने आकर कपड़े बदले और सीधा नीरज को फ़ोन लगा दिया।

नीरज- हाय रोमा.. कैसी हो..? क्या सगाई से वापस आ गईं?

रोमा- हाँ.. आ गई.. मगर वहाँ मज़ा नहीं आया.. बस आपके बारे में ही सोचती रही।

नीरज- अरे मेरी भोली रोमा.. मेरे बारे में सोच कर अपना मज़ा क्यों खराब किया.. अगर मेरी इतनी याद आ रही थी.. तो एक फ़ोन कर लेतीं।

रोमा- नहीं.. वहाँ से फ़ोन करना ठीक नहीं था और याद तो अभी भी आ रही है।

नीरज- अच्छा.. तो आ जाओ.. मैं हरदम तुमसे मिलने के लिए तैयार हूँ।

रोमा- इस वक़्त कैसे आऊँ.. घर से बाहर आने का.. कोई बहाना भी तो होना चाहिए ना।

नीरज- किसी फ्रेण्ड के घर जा रही हो.. ऐसा बोलकर आ जाओ ना.. यार मेरा भी बहुत मन है तुमसे मिलने का.. प्लीज़.. किसी भी तरह आ जाओ ना यार।

रोमा- किसी सहेली का नाम लेकर आऊँगी.. तो मॉम उसको बाद में पूछ सकती हैं.. और फिर मेरी शामत आ जाएगी.. क्योंकि मेरी मॉम बहुत गुस्से वाली हैं।

नीरज- अरे यार स्कूल में कितनी लड़कियां हैं.. तुम्हारी मॉम सबको तो नहीं जानती होंगी न।

रोमा- बात तो सही है मगर..

नीरज- अब ये ‘अगर-मगर’ करती रहोगी.. तो हो गई मोहब्बत.. यार थोड़ी देर के लिए कोई भी बहाना बना लो.. इसमें क्या है।

रोमा- ओक मैं ट्राइ करती हूँ.. आप वेट करो.. बाय।

रोमा अपनी माँ से डरती थी.. मगर ये प्यार होता ही ऐसा है कि कमजोर से कमजोर दिल की लड़की भी अपने आशिक के लिए बड़ा कदम उठा लेती है और बस रोमा ने भी वही किया। अपनी माँ को झूठ कह दिया कि कल एक्सट्रा क्लास है और टेस्ट भी है.. आज सगाई के कारण उसकी स्टडी भी नहीं हुई है.. तो अपनी फ्रेण्ड के यहाँ पढ़ने जा रही है.. एक घंटे में वापस आ जाएगी।

उसकी माँ ने कई सवालों के बाद उसको जाने की इजाज़त दे दी।

रोमा ने जल्दी से रेड टॉप और वाइट स्कर्ट पहना और कुछ बुक्स लेकर घर से निकल गई और साथ ही साथ नीरज को फ़ोन भी कर दिया कि सुबह जहाँ मिली थी.. वहाँ आ जाओ।

थोड़ी देर बाद रोमा वहाँ पहुँची तो नीरज पहले से वहाँ मौजूद था।

 


रोमा- वाऊ.. आप बहुत जल्दी आ गए.. क्या बात है।

नीरज- मुझे पता था.. तुम जरूर आओगी इसलिए उस समय बात होने के बाद ही मैं यहाँ आ गया था।

रोमा- ओह्ह.. आप बहुत स्मार्ट हो.. अब यहीं बात करोगे.. या चलोगे भी.. कोई देख लेगा तो मुसीबत हो जाएगी।

दोनों गाड़ी में बैठ गए और गाड़ी चलने लगी।

रोमा- मॉम को झूठ बोलकर एक घंटे के लिए आई हूँ.. अब बोलो हम कहाँ चलें..?

नीरज- तुम बोलो कहाँ जाना पसन्द करोगी.. समुद्र किनारे या किसी मॉल में.. जो तुम कहो.. वहीं चलेंगे।

रोमा- नहीं नहीं.. मैं घूमने नहीं.. आपसे मिलने आई हूँ.. और ये सब जगह तो मैंने कई बार देखी हुई हैं और दूसरी बात कोई पहचान लेगा तो मुसीबत हो जाएगी.. कोई ऐसी जगह चलते हैं.. जहाँ बस हम दोनों के अलावा कोई ना हो।

नीरज- ऐसी जगह तो मेरा फ्लैट ही है.. आराम से बैठकर बातें करेंगे.. वहाँ पर और कोई आएगा भी नहीं।

रोमा ने नीरज की बात सुनकर ‘हाँ’ में सर हिलाया और दोनों वहीं जा पहुँचे.. जहाँ पहले गए थे।

नीरज- सच रोमा.. अभी भी किस्मत पर यकीन नहीं आ रहा.. तुम जैसी अच्छी लड़की मेरी लाइफ में आ गई।

रोमा- यकीन दिलाने के लिए चींटी काटूँ क्या.. हा हा हा हा।

नीरज ने हँसते हुए रोमा को बाँहों में भर लिया।

अब दोनों एक-दूसरे को बाँहों में भरे हुए बस खड़े थे.. नीरज के हाथ रोमा की कमर पर घूम रहे थे और रोमा की साँसें तेज़ होने लगी थीं।

रोमा ने काँपते होंठों से धीरे से नीरज के कान में कहा- आई लव यू नीरज.. आज आप मुँह मीठा कर सकते हो।

बस इतना सुनना था कि नीरज ने अपने होंठ उसके होंठों पर रख दिए।

अब तो बस नीरज होंठों को ऐसे चूसने लगा जैसे कभी दोबारा रोमा हाथ में नहीं आएगी। उसकी वासना जाग उठी और उसके हाथ रोमा के चूतड़ों पर चले गए, वो उनको दबाने लगा।

रोमा ने जब यह महसूस किया तो जल्दी से नीरज को धक्का देकर उससे अलग हो गई, उसकी साँसें तेज़ हो गई थीं।

नीरज- अरे क्या हुआ रोमा..?

रोमा- नहीं.. यह ग़लत है.. आपके हाथ कहाँ तक पहुँच गए थे.. हर बात की एक हद होती है।

नीरज- आई एम सॉरी रोमा.. मुझे नहीं पता था.. प्यार की भी कोई हद होती है.. मैं तो बस सच्चे दिल से तुम्हें प्यार कर रहा था.. आई एम सॉरी।

इतना कहकर नीरज मायूस सा होकर एक तरफ़ बैठ गया।

रोमा का दिल भर आया। उसको लगा शायद उसने नीरज को दु:ख पहुँचाया है.. वो नीरज के करीब आ गई।

रोमा- आई एम सॉरी नीरज.. मैं घबरा गई थी.. सॉरी.. प्लीज़ मुझे माफ़ कर दो.. मैंने पहली बार ये सब किया.. तो समझ नहीं आया कि मुझे क्या कहना चाहिए।

नीरज- नहीं रोमा.. तुम जाओ.. ग़लती मेरी ही है.. जो मैं तुम्हारे प्यार में बहक गया था।

रोमा- प्लीज़ नीरज.. मुझे और शरमिंदा मत करो.. अब मैं कभी आपको किसी बात के लिए मना नहीं करूँगी.. प्लीज़ मान जाओ ना।

नीरज मन ही मन मुस्कुरा रहा था.. अब चिड़िया जाल में फंसने लगी थी।

नीरज- नहीं रोमा.. तुम नहीं जानती.. ये प्यार ऐसा ही होता है.. आदमी कहाँ से कहाँ पहुँच जाता है.. तुम ये सब नहीं समझ पाओगी।

रोमा- मैं सब समझती हूँ.. प्लीज़ मान जाओ.. मुझे एक बार आजमा कर तो देखो.. अब मैं कुछ नहीं कहूँगी।

नीरज- ठीक है.. मान जाता हूँ.. एक बात कहूँ.. मैं तुम्हें खुल कर प्यार करना चाहता हूँ.. क्या तुम मुझे इजाज़त देती हो?

रोमा- हाँ मेरे प्यारे नीरज.. जैसे प्यार करना चाहते हो.. कर लो.. मैं नहीं रोकूंगी.. आ जाओ.. अपनी रोमा को जैसे चाहो आजमा लो..

लो दोस्तो, गई रोमा काम से.. नीरज ने जो जाल फेंका.. बेचारी फँस गई जाल में.. खुद चूत ऑफर कर रही है..

नीरज ने रोमा के कंधे पकड़ लिए और बस उसको देखता रहा.. उसकी आँखों में एक अजीब सा नशा था। रोमा ने अपना जिस्म ढीला छोड़ दिया और बस नीरज की आँखों में देखने लगी।

नीरज ने रोमा को अपनी गोद में उठा लिया और बिस्तर पर ले जाकर लेटा दिया। रोमा के दिल की धड़कन बढ़ने लगी थीं।

 


अरे अरे ये क्या हो गया दोस्तो, सॉरी यह सीन आप बाद में देखना.. वहाँ ममता से थोड़ी गड़बड़ हो गई है.. चलो वहाँ चलते हैं।

शाम को मीरा और राधे बैठे हुए बातें कर रहे थे.. तभी डोर बेल बजी..

मीरा- ओह.. माँ.. कौन आया होगा.. राधे तुम अन्दर चले जाओ.. क्या पता कौन है?

राधे कमरे में चला गया और मीरा ने दरवाजा खोला तो सामने ममता का पति सरजू खड़ा था।

दोस्तों मैं आपको बताना भूल गई.. कभी-कभी सरजू यहाँ दिलीप जी से पैसे माँगने आ जाता था। हालाँकि दिलीप जी हमेशा उस पर गुस्सा करते रहते हैं कि वो दारू ना पिए.. मगर कहते हैं ना कुत्ते की दुम को 100 साल नली में रखो.. सीधी नहीं होती। यह सरजू भी वही कुत्ते की दुम है।

सरजू- नमस्ते मेमसाब।

मीरा- सरजू तुम यहाँ.. इस वक़्त क्यों आए हो… पापा घर में नहीं हैं.. जाओ यहाँ से..

सरजू- मेमसाब मैं आपसे ही मिलने आया हूँ.. वो ममता आज बड़ी खुश लग रही थी। मैंने पूछा तो कहने लगी मेमसाब उसको एक दवा लाकर देगी.. जिससे वो माँ बन जाएगी.. बस इसी लिए आपसे मिलने आया हूँ..

सरजू की बात सुनकर एक बार तो मीरा डर गई कि ये ममता ने क्या कर दिया। सरजू को बताने की क्या जरूरत थी..

मीरा- हाँ मैंने कहा था.. लेकिन तुम यहाँ क्यों आए हो?

सरजू- आपका शुक्रिया अदा करने आया हूँ मेमसाब.. बस जल्दी से वो दवा ला दो.. ताकि मैं बाप बन सकूँ। वैसे एक बात पूछू.. आप बुरा तो नहीं मानोगी ना?

मीरा- हाँ पूछो.. क्या बात है?

सरजू- वो क्या है ना मेमसाब.. मैं अक्सर रात को दारू पीकर टुन्न हो जाता हूँ और घर आकर सो जाता हूँ.. ममता को पति का सुख नहीं दे पाता.. बेचारी खुद ही सब करती है.. मैं तो बस सोया रहता हूँ.. ऐसे में वो दवा काम करेगी ना?

मीरा के चेहरे पर थोड़ी शर्म आ गई हालाँकि सरजू ने शॉर्ट में कहा.. मगर मीरा सब समझ गई।

मीरा- ये तुम मेरे साथ कैसी बातें कर रहे हो.. जाओ यहाँ से.. वो दवा मैं ला दूँगी और वो ऐसे भी काम करेगी.. समझ गए ना.. अब जाओ यहाँ से.. दोबारा मत आना.. नहीं तो पापा को बोल दूँगी।

सरजू घबरा गया और माफी माँगता हुआ वहाँ से चला गया.. मगर उसके दिल में इस बात की ख़ुशी थी कि ममता अब माँ बन जाएगी।

मीरा बड़बड़ाती हुई कमरे में आई.. उसके चेहरे पर थोड़ा गुस्सा भी था।

राधे- अरे मेरी जान क्या हुआ?

मीरा- होना क्या था.. वो ममता के पेट में कोई बात पचती ही नहीं.. जाकर बोल दिया अपने पति को..

राधे- अरे मैंने सब सुना है.. बेचारी ने दवा का नाम लिया है और कुछ तो नहीं कहा ना?

मीरा- क्या जरूरत थी दवा का नाम लेने की.. चुप नहीं रह सकती थी क्या.. और हाँ तुमने बताया नहीं.. दोपहर में मेरे जाने के बाद क्या किया तुम दोनों ने?

राधे- अरे करना क्या था.. बस मेरा लौड़ा चुसवाया उसको.. बड़ा अच्छा चूसती है।

मीरा- बस सिर्फ़ चुसवाया उसको.. और कुछ नहीं किया?

राधे- अरे उसने साफ मना कर दिया.. बोली कल अपनी चूत क साथ जलवा दिखाएगी।

मीरा- ओह.. लगता है.. वो कल चूत को साफ करके आएगी।

राधे- हाँ शायद मुझे भी ऐसा ही लगता है।

मीरा- चलो रेडी हो जाओ.. पिक्चर देख कर आएँगे.. आज खाना भी बाहर खाकर आएँगे।

राधे- मेरी जान.. अगर बुरा ना मानो तो आज थोड़ी ड्रिंक हो जाए.. प्लीज़।

मीरा- ओके मेरे आशिक.. वैसे मुझे शराब से नफ़रत है.. मगर आज तुम्हारे लिए ये भी सही.. अब चलो..

दोनों रेडी होकर बाहर निकल जाते हैं।

 
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