S
StoryPublisher
Guest
जोश में आकर मैं अपना हाथ पीछे ले जाते हुए मेरी नाईटी ऊपर करने लगी, मौसा जी को मेरा इशारा समझ गया और उन्होंने मेरी नाईटी उठाकर मेरी पीठ पर रख दी।
“ओह … नीतू, ग्रेट ऐस!”
मौसा जी ने सिसकारी भरी, बारिश में भीगी हुई मेरी गोरी गांड देख कर मौसा जी पागल हो रहे थे।
मैंने भी जोश में आकर मेरी गांड को पीछे करते हुए लंड पर दबाया तो मेरी गांड को उनके नंगे लंड का स्पर्श हुआ, मौसा जी ने कब अपनी अंडरवियर उतारी थी मुझे पता भी नहीं चला। मेरी पैंटी मेरी गांड के दरार में घुस गई थी और मौसा जी मेरी गांड पर जोश में अपना लंड घिस रहे थे। मैं भी अपनी उंगलियाँ मेरी चुत में घुसाकर अंदर बाहर करने लगी, हम दोनों ही कामवासना में पागल हो गए थे।
“नीतू बेटा … मेरा हो रहा है!” मौसा जी ने मेरी कान में बोला।
उन्होंने अब मेरा एक हाथ पीछे ले जा कर अपने लंड पर रखा, उनको क्या चाहिए मुझे तुरंत समझ में आ गया। मैंने अपने हाथ से उनके लंड को पकड़ा तो उन्होंने मेरे हाथ पर अपना हाथ रखते हुए उस पर मुठ मारने लगे। दूसरी तरफ मेरी उंगलियाँ मेरी चुत के अंदर बाहर करते समय मुझे मेरे हाथ पर मौसा जी का हाथ महसूस हुआ और उन्होंने भी अपनी उंगलियाँ मेरी चुत के अंदर घुसा दी। हम दोनों की उंगलियाँ मेरी चुत के अंदर बाहर हो रही थी तो दूसरी ओर हम दोनों के हाथ उनके लंड पर मुठ मार रहे थे।
मैं यह ज्यादा देर सहन नहीं कर सकी- हाय मौसा जी … मैं आ गयी!
कहकर मेरी चुत ने फिर से अपना बांध छोड़ा।
उसी समय उनके लंड से भी पिचकारी छुटी और उनका गर्म वीर्य मेरी गांड पर गिरने लगा। मैंने उत्तेजना में उनके लंड के आगे अपना हाथ पकड़ा अब उनका वीर्य मेरा हाथ भिगो रहा था तो मेरी चुत उनका हाथ भिगो रही थी।
मैं तो पहले से ही टहनी पर सिर रख कर आराम कर रही थी, अब मौसा जी भी थक कर मेरी पीठ पर गिर गए, हम दोनों ही उसी अवस्था में बेसुध पड़े रहे, तेज बिजली के कड़कने ने हम दोनों फिर से होश में आ गए।
“नीतू …”
मौसा जी ने मुझे पुकारा तो मैंने आँखें खोल कर पीछे मौसा जी की ओर देखा, पहली बार मैंने मौसा जी के नजर से नजर मिलाई। हम दोनों की आंखों में वासना भरी थी, अचानक वे अपना चेहरा आगे लाते हुए अपने होंठ मेरे होंठों के पास ले आये।
मैं भी सहमति में अपने होंठों को उनके होंठों पर रख जर पूरे जोश से चूमने लगी।
हम दोनों बारी बारी से हमारे नीचे के और ऊपर के होंठ चूस रहे थे। बीच में रुकते हुए मौसा जी ने अपनी जीभ मेरे होंठों के बीच में डाल दी, मैंने भी होंठों को खोलते हुए उनकी जीभ को मुँह के अंदर घुसने की सहमति दी। अब हमारे होंठों के साथ साथ हमारी जीभ का भी द्वंद्व चल रहा था।
बहुत देर एक रोमांटिक लंबा किस एन्जॉय करने के बाद जब हमारे होंठ अलग हुए तब हमारी आँखें फिर से मिली। उन मर्दानी आँखों से आँखें मिलने के बाद मैं एकदम से शर्मा गयी और उनकी बाँहों से छूट कर घर के अंदर भाग गई।
“नीतू बेटा!” मौसा जी ने पीछे से आवाज दी पर मैंने पीछे न देखते हुए मेरे बैडरूम में घुस गई। फिर अपने गीले कपड़े उतार कर ड्रेसिंग टेबल के आईने में अपना रूप निहारने लगी, टेबल पर ही वह खीरा पड़ा था जिससे इस सब की शुरुआत हुई थी। पर अब उसकी जरूरत नहीं पड़ने वाली थी यह तो तय था, तीन बार झड़ने की थकावट की वजह से मुझे झट से नींद आ गयी.
दूसरे दिन सुबह संगीता के दरवाजा खखटाने से मेरी नींद खुली। सोते समय बाल गीले ही रह गए थे इसलिए बुखार हो गया था। मौसा जी ने खुद मुझे नाश्ता खिलाया और दवाई खिलाई। वे ऐसा बर्ताव कर रहे थे कि कल हम दोनों के बीच कुछ भी नहीं हुआ था।
बाद में मैंने फ़ोन कर के अपनी सहेली को बताया कि मैं आज कॉलेज में नहीं आ रही!
और फिर मैं सो गई।
“ओह … नीतू, ग्रेट ऐस!”
मौसा जी ने सिसकारी भरी, बारिश में भीगी हुई मेरी गोरी गांड देख कर मौसा जी पागल हो रहे थे।
मैंने भी जोश में आकर मेरी गांड को पीछे करते हुए लंड पर दबाया तो मेरी गांड को उनके नंगे लंड का स्पर्श हुआ, मौसा जी ने कब अपनी अंडरवियर उतारी थी मुझे पता भी नहीं चला। मेरी पैंटी मेरी गांड के दरार में घुस गई थी और मौसा जी मेरी गांड पर जोश में अपना लंड घिस रहे थे। मैं भी अपनी उंगलियाँ मेरी चुत में घुसाकर अंदर बाहर करने लगी, हम दोनों ही कामवासना में पागल हो गए थे।
“नीतू बेटा … मेरा हो रहा है!” मौसा जी ने मेरी कान में बोला।
उन्होंने अब मेरा एक हाथ पीछे ले जा कर अपने लंड पर रखा, उनको क्या चाहिए मुझे तुरंत समझ में आ गया। मैंने अपने हाथ से उनके लंड को पकड़ा तो उन्होंने मेरे हाथ पर अपना हाथ रखते हुए उस पर मुठ मारने लगे। दूसरी तरफ मेरी उंगलियाँ मेरी चुत के अंदर बाहर करते समय मुझे मेरे हाथ पर मौसा जी का हाथ महसूस हुआ और उन्होंने भी अपनी उंगलियाँ मेरी चुत के अंदर घुसा दी। हम दोनों की उंगलियाँ मेरी चुत के अंदर बाहर हो रही थी तो दूसरी ओर हम दोनों के हाथ उनके लंड पर मुठ मार रहे थे।
मैं यह ज्यादा देर सहन नहीं कर सकी- हाय मौसा जी … मैं आ गयी!
कहकर मेरी चुत ने फिर से अपना बांध छोड़ा।
उसी समय उनके लंड से भी पिचकारी छुटी और उनका गर्म वीर्य मेरी गांड पर गिरने लगा। मैंने उत्तेजना में उनके लंड के आगे अपना हाथ पकड़ा अब उनका वीर्य मेरा हाथ भिगो रहा था तो मेरी चुत उनका हाथ भिगो रही थी।
मैं तो पहले से ही टहनी पर सिर रख कर आराम कर रही थी, अब मौसा जी भी थक कर मेरी पीठ पर गिर गए, हम दोनों ही उसी अवस्था में बेसुध पड़े रहे, तेज बिजली के कड़कने ने हम दोनों फिर से होश में आ गए।
“नीतू …”
मौसा जी ने मुझे पुकारा तो मैंने आँखें खोल कर पीछे मौसा जी की ओर देखा, पहली बार मैंने मौसा जी के नजर से नजर मिलाई। हम दोनों की आंखों में वासना भरी थी, अचानक वे अपना चेहरा आगे लाते हुए अपने होंठ मेरे होंठों के पास ले आये।
मैं भी सहमति में अपने होंठों को उनके होंठों पर रख जर पूरे जोश से चूमने लगी।
हम दोनों बारी बारी से हमारे नीचे के और ऊपर के होंठ चूस रहे थे। बीच में रुकते हुए मौसा जी ने अपनी जीभ मेरे होंठों के बीच में डाल दी, मैंने भी होंठों को खोलते हुए उनकी जीभ को मुँह के अंदर घुसने की सहमति दी। अब हमारे होंठों के साथ साथ हमारी जीभ का भी द्वंद्व चल रहा था।
बहुत देर एक रोमांटिक लंबा किस एन्जॉय करने के बाद जब हमारे होंठ अलग हुए तब हमारी आँखें फिर से मिली। उन मर्दानी आँखों से आँखें मिलने के बाद मैं एकदम से शर्मा गयी और उनकी बाँहों से छूट कर घर के अंदर भाग गई।
“नीतू बेटा!” मौसा जी ने पीछे से आवाज दी पर मैंने पीछे न देखते हुए मेरे बैडरूम में घुस गई। फिर अपने गीले कपड़े उतार कर ड्रेसिंग टेबल के आईने में अपना रूप निहारने लगी, टेबल पर ही वह खीरा पड़ा था जिससे इस सब की शुरुआत हुई थी। पर अब उसकी जरूरत नहीं पड़ने वाली थी यह तो तय था, तीन बार झड़ने की थकावट की वजह से मुझे झट से नींद आ गयी.
दूसरे दिन सुबह संगीता के दरवाजा खखटाने से मेरी नींद खुली। सोते समय बाल गीले ही रह गए थे इसलिए बुखार हो गया था। मौसा जी ने खुद मुझे नाश्ता खिलाया और दवाई खिलाई। वे ऐसा बर्ताव कर रहे थे कि कल हम दोनों के बीच कुछ भी नहीं हुआ था।
बाद में मैंने फ़ोन कर के अपनी सहेली को बताया कि मैं आज कॉलेज में नहीं आ रही!
और फिर मैं सो गई।