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दोस्तो, मेरा नाम राहुल (बदला हुआ) है, मैं कानपुर का रहने वाला हूँ, मेरी उम्र 22 साल है, मेरी लम्बाई 5.8 है। मेरे लंड की लम्बाई 6.5 इंच व मोटाई 2.5 इंच है।
मेरी मम्मी की एक दूर की बहन की शादी हमारे शहर में हुई है। जब भी वो घर आती तो उनको देखता ही रह जाता। उनका नाम रूपाली है, उनकी उम्र 26 साल है, उनका फिगर 34-30-36 का है। उनका दूध सा गोरा रंग और उनकी उठी चुचियाँ और गांड तो ऐसी गोल कि लगता कि अभी पकड़ के चोद दो।
एक बार हमारे किसी रिश्तेदार की शादी में मौसी और मेरे परिवार को भोपाल जाना था। मैं शादी में नहीं जा रहा था। मौसी का लड़का जो दूसरी क्लास में है, उसके स्कूल की वजह से मौसी और मौसा जी में से कोई एक ही जा सकता था। तो मौसा जी ने जाना ठीक समझा।
मुझे खाना बनाना नहीं आता तो मम्मी ने मौसा जी को बोला कि रूपाली को हमारे घर में छोड़ दें।
शाम को मौसा जी मौसी को हमारे घर पर छोड़ कर मम्मी पापा के साथ छह दिन के लिय भोपाल चले गये।
मैं बैठे-बैठे सोच रहा था कि मौसी की चूत का मज़ा कैसे लिया जाये। मैं मेडिकल स्टोर गया वहां से सेक्स वाली 2 गोली ले आया। तब तक मौसी ने खाना भी बना लिया था। हम सबने खाना खाया।
मैं टीवी देख रहा था।
फिर मौसी आयी, उन्होंने कहा कि वो नहाने जा रही हैं।
मैं सोच रहा था कि मौसी को गोली कैसे खिलाऊँ।
मौसी नहा कर बाहर आ गई, मौसी ने एक मैक्सी पहन रखी थी। मौसी भी वहीं बैठ कर टीवी देखने लगी। मैं बार-बार मौसी को ही देख रहा था। मौसी ने शायद ब्रा नहीं पहनी थी, उनके निप्पल साफ़ दिख रहे थे।
तभी मौसी बोली- राहुल, एक ग्लास पानी ला दे।
मैं किचन में गया और मौसी के पानी में गोली मिला दी।
मौसी ने पानी पिया और टीवी बंद कर दिया। फिर मौसी ने कहा- चलो सो जाते हैं।
तो मैंने कहा- आप सो जाओ, मैं आता हूँ।
तो बोली- नहीं अभी चलो, मुझे डर लगता है।
फिर हम दूसरे कमरे में आ गये मैंने लाइट बंद कर दी और मौसी के बगल में लेट गया।
बीस मिनट बाद मुझे कुछ हलचल महसूस हुई। मैंने हल्की सी आँख खोल के देखा तो मौसी एक हाथ से अपनी चूत सहला रही थी। मौसी बहुत देर से अपनी चूत में उंगली कर रही थी। अब मुझसे भी रहा नहीं जा रहा था, मैंने मौसी की तरफ अपना चेहरा किया और धीरे से उनकी एक चूची को दबाना शुरू किया।
मौसी भी आँख बंद कर के मज़ा ले रही थी।
मुझे भी काम बनता नजर आ रहा था तो मैंने भी अपना दूसरा हमला किया। मैंने अपने होंठ मौसी के होंठ पर रख दिए और मौसी के होंठों का रस पीने लगा। थोड़ी देर बाद मौसी भी साथ देने लगी।
मैंने अपना एक हाथ उनकी चूत पर रखा, उनकी चूत बहुत गीली हो गई थी।
फिर मैंने उनकी मेक्सी उतार दी, अब मौसी केवल पेंटी में थी क्योंकि वो रात को ब्रा नहीं पहनती।
मैं उठा और मैंने लाइट ओन कर दी। मौसी ने अपना चेहरा हाथों से छुपा लिया और लाइट बंद करने को कहने लगी। सफ़ेद रोशनी में उनका शरीर संगमरमर की तरह चमक रहा था। मैं लाइट चालू छोड़ कर वापस उनके पास चला गया।
मैंने मौसी की एक चूची को मुँह में भर लिया और दूसरी को हाथों से मसलने लगा। मौसी पुनः गर्म होने लगी थी। मौसी ने भी अब शर्म छोड़ के मेरा साथ देना शुरू कर दिया था।
अब मैं थोड़ा नीचे सरक कर उनकी नाभि को अपनी जीभ से सहला रहा था। फिर मैंने उनकी जान्घों पे चूमना और हलके-हलके दाँतों से काटना शूरू किया। अब मौसी उम्म्ह… अहह… हय… याह… की आवाजें निकाल रही थी।
अचानक मौसी का शरीर अकड़ने लगा और वो एक तेज़ आवाज़ के साथ झड़ने लगी, उनका रस उनकी चड्डी से बाहर आकर चादर को गीला करने लगा था।
मैंने उनकी चड्डी को दाँतों से पकड़ के उतार दिया, मौसी की चूत बालों से ढकी हुई थी। अब मैं उनकी टांगों के बीच में आ गया और उनकी चूत के पास मुँह ले जा कर जीभ से उसे चाटने लगा।
मैंने उनकी चूत को चाट-चाट कर साफ़ कर दी थी।
मौसी अब फिर से गर्म हो गयी थी, वो अपने हाथों से मेरा सर अपनी चूत पर दबाने लगी थी।
अब मौसी ने पहली बार कुछ बोला- राहुल बेटा, मुझे चोद कर अपना बना ले।
मैंने मौसी से कहा- मेरे कपड़े तो उतारो!
उन्होंने आगे बढ़ कर मेरा लोवर और चड्ढी उतारी मेरे लंड को हैरानी से देखने लगी।
मैंने पूछा- मौसी जी, क्या हुआ?
तो वो बोली- तुम्हारे मौसा जी से तुम्हारा बड़ा है।
मैंने लंड आगे करते हुए उनको चूसने को बोला तो उन्होंने मना कर दिया, उन्होंने कहा- मुझे पसंद नहीं।
मैंने भी जोर नहीं दिया।
अब मैं उनकी टांगों के बीच में आ गया और लंड को उनकी चूत के ऊपर रगड़ने लगा। मौसी बार-बार अपनी कमर उचका रही थी।
फिर उन्होंने कहा- कितना तड़पाते हो।
मैंने लंड को उनकी चूत के मुँह पर रखा और हल्का से धक्का दिया तो मेरे लंड का आगे का हिस्सा अंदर चला गया।
उनके चेहरे पर दर्द साफ़ दिख रहा था। मैंने उनके होंठों पर अपने होंठ रख दिये और चूसने लगा।
थोड़ी देर बाद मैंने एक झटका मारा तो मेरा आधा लंडमौसी की चूत के अंदर था, उनकी तो साँस ही अटक गयी थी। फिर मैंने अपना लंड बाहर निकाला और जोर से एक शॉट मारा इस बार मेरा पूरा लंड मौसी की चूत में फिट हो गया, उनके मुँह से ‘आईई… माँ… मार डाला रे… उम्म्म… बाहर निकाल इसको… वरना मैं मर जाऊँगी!’ के दर्द भरे स्वर निकलने लगे।
मेरी मम्मी की एक दूर की बहन की शादी हमारे शहर में हुई है। जब भी वो घर आती तो उनको देखता ही रह जाता। उनका नाम रूपाली है, उनकी उम्र 26 साल है, उनका फिगर 34-30-36 का है। उनका दूध सा गोरा रंग और उनकी उठी चुचियाँ और गांड तो ऐसी गोल कि लगता कि अभी पकड़ के चोद दो।
एक बार हमारे किसी रिश्तेदार की शादी में मौसी और मेरे परिवार को भोपाल जाना था। मैं शादी में नहीं जा रहा था। मौसी का लड़का जो दूसरी क्लास में है, उसके स्कूल की वजह से मौसी और मौसा जी में से कोई एक ही जा सकता था। तो मौसा जी ने जाना ठीक समझा।
मुझे खाना बनाना नहीं आता तो मम्मी ने मौसा जी को बोला कि रूपाली को हमारे घर में छोड़ दें।
शाम को मौसा जी मौसी को हमारे घर पर छोड़ कर मम्मी पापा के साथ छह दिन के लिय भोपाल चले गये।
मैं बैठे-बैठे सोच रहा था कि मौसी की चूत का मज़ा कैसे लिया जाये। मैं मेडिकल स्टोर गया वहां से सेक्स वाली 2 गोली ले आया। तब तक मौसी ने खाना भी बना लिया था। हम सबने खाना खाया।
मैं टीवी देख रहा था।
फिर मौसी आयी, उन्होंने कहा कि वो नहाने जा रही हैं।
मैं सोच रहा था कि मौसी को गोली कैसे खिलाऊँ।
मौसी नहा कर बाहर आ गई, मौसी ने एक मैक्सी पहन रखी थी। मौसी भी वहीं बैठ कर टीवी देखने लगी। मैं बार-बार मौसी को ही देख रहा था। मौसी ने शायद ब्रा नहीं पहनी थी, उनके निप्पल साफ़ दिख रहे थे।
तभी मौसी बोली- राहुल, एक ग्लास पानी ला दे।
मैं किचन में गया और मौसी के पानी में गोली मिला दी।
मौसी ने पानी पिया और टीवी बंद कर दिया। फिर मौसी ने कहा- चलो सो जाते हैं।
तो मैंने कहा- आप सो जाओ, मैं आता हूँ।
तो बोली- नहीं अभी चलो, मुझे डर लगता है।
फिर हम दूसरे कमरे में आ गये मैंने लाइट बंद कर दी और मौसी के बगल में लेट गया।
बीस मिनट बाद मुझे कुछ हलचल महसूस हुई। मैंने हल्की सी आँख खोल के देखा तो मौसी एक हाथ से अपनी चूत सहला रही थी। मौसी बहुत देर से अपनी चूत में उंगली कर रही थी। अब मुझसे भी रहा नहीं जा रहा था, मैंने मौसी की तरफ अपना चेहरा किया और धीरे से उनकी एक चूची को दबाना शुरू किया।
मौसी भी आँख बंद कर के मज़ा ले रही थी।
मुझे भी काम बनता नजर आ रहा था तो मैंने भी अपना दूसरा हमला किया। मैंने अपने होंठ मौसी के होंठ पर रख दिए और मौसी के होंठों का रस पीने लगा। थोड़ी देर बाद मौसी भी साथ देने लगी।
मैंने अपना एक हाथ उनकी चूत पर रखा, उनकी चूत बहुत गीली हो गई थी।
फिर मैंने उनकी मेक्सी उतार दी, अब मौसी केवल पेंटी में थी क्योंकि वो रात को ब्रा नहीं पहनती।
मैं उठा और मैंने लाइट ओन कर दी। मौसी ने अपना चेहरा हाथों से छुपा लिया और लाइट बंद करने को कहने लगी। सफ़ेद रोशनी में उनका शरीर संगमरमर की तरह चमक रहा था। मैं लाइट चालू छोड़ कर वापस उनके पास चला गया।
मैंने मौसी की एक चूची को मुँह में भर लिया और दूसरी को हाथों से मसलने लगा। मौसी पुनः गर्म होने लगी थी। मौसी ने भी अब शर्म छोड़ के मेरा साथ देना शुरू कर दिया था।
अब मैं थोड़ा नीचे सरक कर उनकी नाभि को अपनी जीभ से सहला रहा था। फिर मैंने उनकी जान्घों पे चूमना और हलके-हलके दाँतों से काटना शूरू किया। अब मौसी उम्म्ह… अहह… हय… याह… की आवाजें निकाल रही थी।
अचानक मौसी का शरीर अकड़ने लगा और वो एक तेज़ आवाज़ के साथ झड़ने लगी, उनका रस उनकी चड्डी से बाहर आकर चादर को गीला करने लगा था।
मैंने उनकी चड्डी को दाँतों से पकड़ के उतार दिया, मौसी की चूत बालों से ढकी हुई थी। अब मैं उनकी टांगों के बीच में आ गया और उनकी चूत के पास मुँह ले जा कर जीभ से उसे चाटने लगा।
मैंने उनकी चूत को चाट-चाट कर साफ़ कर दी थी।
मौसी अब फिर से गर्म हो गयी थी, वो अपने हाथों से मेरा सर अपनी चूत पर दबाने लगी थी।
अब मौसी ने पहली बार कुछ बोला- राहुल बेटा, मुझे चोद कर अपना बना ले।
मैंने मौसी से कहा- मेरे कपड़े तो उतारो!
उन्होंने आगे बढ़ कर मेरा लोवर और चड्ढी उतारी मेरे लंड को हैरानी से देखने लगी।
मैंने पूछा- मौसी जी, क्या हुआ?
तो वो बोली- तुम्हारे मौसा जी से तुम्हारा बड़ा है।
मैंने लंड आगे करते हुए उनको चूसने को बोला तो उन्होंने मना कर दिया, उन्होंने कहा- मुझे पसंद नहीं।
मैंने भी जोर नहीं दिया।
अब मैं उनकी टांगों के बीच में आ गया और लंड को उनकी चूत के ऊपर रगड़ने लगा। मौसी बार-बार अपनी कमर उचका रही थी।
फिर उन्होंने कहा- कितना तड़पाते हो।
मैंने लंड को उनकी चूत के मुँह पर रखा और हल्का से धक्का दिया तो मेरे लंड का आगे का हिस्सा अंदर चला गया।
उनके चेहरे पर दर्द साफ़ दिख रहा था। मैंने उनके होंठों पर अपने होंठ रख दिये और चूसने लगा।
थोड़ी देर बाद मैंने एक झटका मारा तो मेरा आधा लंडमौसी की चूत के अंदर था, उनकी तो साँस ही अटक गयी थी। फिर मैंने अपना लंड बाहर निकाला और जोर से एक शॉट मारा इस बार मेरा पूरा लंड मौसी की चूत में फिट हो गया, उनके मुँह से ‘आईई… माँ… मार डाला रे… उम्म्म… बाहर निकाल इसको… वरना मैं मर जाऊँगी!’ के दर्द भरे स्वर निकलने लगे।