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यकीन करना मुश्किल है compleet

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शौकत जब बाहर आया तो उसका लंड खड़ा था, ये मैं उसकी पॅंट के ऊपर से ही देख सकती थी. मैने उससे पूछा

मैं:"कुछ खाओ गे, तुम्हे भूख लगी होगी"

ये कहकर मैं उसको बाहर ले आई हॉल में और उसके सामने अपनी कुर्सी पर अपने पैर उठा कर बैठ गयी जिससे मेरी चूत उभार कर सॉफ देखा जा सकता था.शौकत ने मेरी चूत की तरफ देखा और फिर मेरे सीने की तरफ, वो समझ नही पा रहा था कि वो क्या करे उसने पाने को काबू मे करके कहा

शौकत:"कुछ पहेन लो आरा"

मैं:"क्यूँ क्या पहले मुझे नंगी नही देखा"

शौकत:"तुम तो बिल्कुल ही बेशर्म हो चुकी हो"

मैं:"वाह, और तुम कितने शर्म वाले हो ,किसी और की बीवी को नंगा देखने चले आए"

शौकत:"वो तो मैं अपना इम्तेहान देने आया था, तुम ही ने तो कहा था कि मुझे ये सब देखना होगा, तब ही तुम मेरे पास वापस लौटने के बारे मे सोचोगी"

मैं:"हां मैने कहा था, मैं अब ज़रूर इसके बारे मे सोचुगी, अब तुम जाओ, तुमने मुझे कन्फ्यूज़ कर दिया है"

शौकत:"क्या कन्फ्यूज़ कर दिया है"

मैं:"यही कि अगर मैं अब तुम्हारी बीवी बन जाउन्गि तो मुझे इनायत के साथ सेक्स का मौका कभी नही मिलेगा"

शौकत:"आरा लाइफ मे सेक्स ही सब कुछ नही होता,ज़िंदगी सिर्फ़ सेक्स का नाम नही है"

मैं:"अर्रे वाह, क्या बात है शौकत शहाब तो फिर ज़िंदगी किस चिड़िया का नाम है"

शौकत:"ज़िंदगी ख़ुसी गम,वफ़ा,मोहब्बत, क़ुर्बानी, इंतेज़ार,हिम्मत और तकदीर का नाम है"

मैं:"ये सब तुमने किसी शराब की दुकान पर पढ़ा था क्या"

शौकत:"मैं अब शराब के पास भी नही जाता"

मैं:"मुझे मालूम है ज़िंदगी किस चीज़ का नाम है"

शौकत:"किस चीज़ का"

मैं:"बॅलेन्स और तालमेल का"

शौकत:"कैसा बॅलेन्स"

मैं:"तुमने जिस चीज़ का नाम लिया उनमे एक बॅलेन्स ज़रूरी है और तालमेल भी होने उतना ही ज़रूरी है सोचो अगर क़ुर्बानी सिर्फ़ बीवी ही दे तो बॅलेन्स कैसे होगा और अगर मिया बीवी मे सुख दुख के दरमियाँ कोई तालमेल ना हो तो क्या होगा"

शौकत:"तुम बड़ी समझदार हो गयी हो"

मैं:"क्या करूँ शौकत साहब हम ग़रीबो को वक़्त की लाठी और आप जैसे लोग समझदार बनने पर मजबूर कर देते हैं"

शौकत:"तो मैं क्या समझू अब, क्या कुछ मुमकिन है"

मैं:"अभी थोड़ा वक़्त दो मुझे, इनायत ने मुझे खुद्दार बनाया, अपने पैरो पर खड़ा होने की तालकीन की, मुझे इज़्ज़त दी,मेरे मस्वरे को तरजीह दी, मेरे मा बाप को उम्मीद और प्यार दिया, मुझे अच्छी आज़ादी दी, वो मेरा एक सबसे अच्छा दोस्त है और तुमने मुझे क्या दिया शौकत मिया"

शौकत:"मुझे मौका तो दो एक बार"

मैं:"मैने तुम्हे एक मौका दिया था अफ़ोसोस तुमने उसको खो दिया"

शौकत:"एक बार और दो, मैं तुम्हारे बिना जी नही सकता आरा, मेरे पास लौट आओ"

मैं:"तुमको मौका देना किसी खतरे से कम नही है लेकिन फिर भी मैं इसपर गौर करूँगी लेकिन तुम मेरे फ़ैसले को हर हाल मे मानोगे और मुझे दोबारा तंग नही करोगे"

शौअकत:"ठीक है, मैं इंतेज़ार करूँगा. अब मैं चलता हूँ"

मैं:"रूको मुझे तुम्हे कुछ देना है"

मैं बेडरूम मे गयी और अपनी एक पैंटी ले आई.मैने उस पैंटी से अपनी चूत सॉफ की और शौकत की तरफ बढ़ा दी. वो थोड़ा हैरान सा हो गया और उसने पूंचा

शौकत:"ये क्या है"

मैं:"देखते नही मेरी पैंटी है"

शौकत:"तो"

मैं:"तो क्या, इसको ले लो और मेरी याद समझ कर खुद को मेरे फ़ैसले तक सम्भालो, अगर तुम चाहो तो मेरा बाथरूम इस्तेमाल कर सकते हो अपने खड़े लंड को शांत करने के लिए"

शौकत कुछ देर सोचता रहा फिर उसने मेरी पैंटी मुझ से ले ली लेकिन बाथरूम की तरफ नही बल्कि बाहर जाने लगा, मैने भी उसको रोका नही और उसके जाने के बाद डोर लॉक कर दिया. मैं अब और ज़्यादा परेशान थी, ज़िंदगी मे मुझे कभी ये भी करना होगा मैने सोचा नही था, अब मैं अपने कपड़े पहन चुकी थी कि डोर बेल बजी. जब देखा तो इनायत बाहर खड़ा मुस्कुरा रहा था.
 
Shaukat jab bahar aaya to uska lund khada tha, ye main uski pant ke oopar se hi dekh sakti thi. Maine usse poocha

Main:"kuch khao ge, tumhe bhookh lagi hogi"

Ye kehkar main usko bahar le aayi hall mein aur uske saamne apni kursi par apne pair utha kar baith gayi jisse meri choot ubhar kar saaf dekhi ja sakti thi.Shaukat ne meri choot ki taraf dekha aur phir mere seene ki taraf, wo samajh nahi paa raha tha ki wo kya kare usne pane ko kaabu me karke kaha

Shaukat:"kuch pahen lo Aara"

Main:"kyun kya pahle mujhe nangi nahi dekha"

Shaukat:"tum to bilkul hi besharm ho chuki ho"

Main:"waah, aur tum kitne sharm waale ho ,kisi aur ki biwi ko nanga dekhne chale aaye"

Shaukat:"wo to main apna imtehaan dene aaya tha, tum hi ne to kaha tha ki mujhe ye sab dekhna hoga, tab hi tum mere paas wapas lautne ke baare me sochogi"

Main:"haan maine kaha tha, main ab zarur iske baare me sochugi, ab tum jao, tumne mujhe confuse kar diya hai"

Shaukat:"kya confuse kar diya hai"

Main:"yahi ki agar main ab tumhari biwi ban jaungi to mujhe Inayat ke sath sex ka mauka kabhi nahi milega"

Shaukat:"Aara life me sex hi sab kuch nahi hota,zindagi sirf sex ka naam nahi hai"

Main:"arrey waah, kya baat hai Shaukat shahab to phir zindagi kis chidiya ka naam hai"

Shaukat:"zindagi khusi gham,wafa,mohabbat, qurnabi, intezar,himmat aur takdeer ka naam hai"

Main:"ye sab tumne kisi sharab ki dukaan par padha kya"

Shaukat:"main ab sharab ke paas bhi nahi jata"

Main:"mujhe maloom hai zindagi kis cheez ka naam hai"

Shaukat:"kis cheez ka"

Main:"balance aur taalmel ka"

Shaukat:"kaisa balance"

Main:"tumne jis cheez ka naam liya unme ek balance zaruri hai aur taalmel bhi hone uta hi zaruri hai socho agar qurnabi sirf biwi hi de to balance kaise hoga aur agar miya biwi me sukh dukh ke darmiyan koi taalmel na ho to kya hoga"

Shaukat:"tum badi samajhdaar ho gayi ho"

Main:"kya karun Shaukat sahab hum gareebo ko waqt ki laathi aur aap jaise log samajhdaar banne par majboor kar dete hain"

Shaukat:"to main kya samjhun ab, kya kuch mumkin hai"

Main:"abhi thoda waqt do mujhe, Inayat ne mujhe khuddar banaya, apne pairo par khada hone ki talkeen ki, mujhe izzat di,mere masware ko tarjih di, mere maa baap ko ummeed aur pyar diya, mujhe acchi aazadi di, wo mera ek sabse accha dost hai aur tumne mujhe kya diya shaukat miya"

Shaukat:"mujhe mauka to do ek baar"

Main:"maine tumhe ek mauka diya tha afososh tumne usko kho diya"

Shaukat:"ek baar aur do, main tumhare bina ji nahi sakta Aara, mere paas laut aao"

Main:"tumko mauka dena kisi khtre se kam nahi hai lekin phir bhi main ispar gaur karungi lekin tum mere faisle ko har haal me maanoge aur mujhe dobara tang nahi karoge"

Shauakt:"theek hai, main intezar karunga. Ab main chalta hoon"

Main:"ruku mujhe tumhe kuch dena hai"

Main bedroom me gayi aur pani ek panty le aayi.Maine us panty se apni choot saaf ki aur Shaukat ki taraf badha di. Wo thoda hairan sa ho gaya aur usne pooncha

Shaukat:"ye kya hai"

Main:"dekhte nahi meri panty hai"

Shaukat:"to"

Main:"to kya, isko le lo aur meri yaad samajh kar khud ko mere faisle tak sambhalo, agar tum chaho to mera bathroom istemal kar sakte ho apne khade lund ko shant karne ke liye"

Shaukat kuch deir sochta raha phir usne meri panty mujh se le li lekin bathroom ki taraf nahi balki bahar jaane laga, maine bhi usko roka nahi aur uske jaane ke baad door lock kar diya. Main ab au jyada pareshan thi, Zindagi me mujhe kabhi ye bhi karna hoga maine socha nahi tha, ab main apne kapde pahan chuki thi ki door bell baji. Jab dekha to Inayat bahar khada muskura raha tha.
 
इनायत जब अंदर आया तो मैं उसकी मुस्कुराहट की वजह जानने के लिए उससे पूछने लगी

मैं:"क्यूँ मुस्कुरा रहे हो, जले पर नमक छिड़क रहे हो क्या?"

इनायत:"नही मैं अपनी किस्मत पर मुस्कुरा रहा हूँ"

मैं:"अब ये सोचो कि अब करना क्या है, ये साहब तो चुदाई के खेल देख कर थॅंक्स बोल कर निकल पड़े"

इनायत:"एक ऐसी शर्त रखो जिसको वो मान ना सके यार फिर उसको कुछ ऐसा बताओ जो वो क़ुबूल ना कर सके"

मैं:"तुम्हे लगता है वो इंसान जो अपनी होने वाली बीवी का लाइव शो देखने के लिए राज़ी हो जाए वो किसी भी उल्टी सीधी बात को मानने के लिए तैयार होगा, मुझे तो लगता है कि शौकत पागल सा हो गया है

, मुझे कभी कभी ये सब करते हुए अच्छा नही लगता, ऐसा लगता है जैसे मैं उसको बेवजह तंग कर रही हूँ, ये खेल अब खेल नही रहा, कहीं ऐसा ना हो कि वो ख़ुदकुशी कर बैठे या हम को कोई नुकसान पहुँचाए"

इनायत:"मैं भी कभी कभी ये सोचता हूँ, मुझे लगता है तुम्हे उससे अब प्यार से बात करनी चाहिए और उसको एक दोस्त की तरहा धीरे धीरे समझाना चाहिए, उसने अपनी कुव्वत से बाहर आकर ये सब किया है, मुझे नही लगता कि कोई परवरटेड आदमी की तरह है, हो सकता है वो अब भी तुमसे प्यार करता हो"

मुझे इनायत की बात बिल्कुल अच्छी नही लगी और मैने उसकी नकल बनाते हुए उसकी बात दोहराई

मैं:"हो सकता है वो अब भी तुमसे प्यार करता हो, तो ठीक है मैं वापस उसके पास चली जाती हूँ और तुम अपना लौडा हिलाते रह जाना"

इनायत:"हहाहाा बुरा मान गयी क्या?"

मैं:"मैं तुमसे हाल पूछ रही हूँ और तुम आशिक़ी भघार रहे हो"

इनायत:"तो ठीक है, तुम उसको प्यार से समझाओ और उसको कहो कि वो कोई और लड़की तलाश करे"

मैं:"उसको प्यार से समझाते समझाते कहीं मैं पागल ना हो जाउ"

इनायत:"एक बार कोशिश तो करो"

मैं:"तुम्हे मालूम है, मैने उसको अपनी पैंटी दी अपना पानी पोंछ कर, ये कह कर कि वो इसे मेरे याद समझ कर अपने पास रखे"

इनायत:"हाआहाहा क्या कह रही हो ,तुम तो बिल्कुल पागल हो"

मैं:"और क्या करती वो बेचारा हमारा शो देख कर थोड़ा एग्ज़ाइटेड था, उसका कॉन्सोलेशन प्राइज़ तो बनता था ना."

इनायत:"अच्छा हुआ तुमने उससे चूत नही मरवाई, वरना ये गोल्ड मेडल हो जाता हाहाहाआआआआ:"

मैं:"तो मरवा ही लेती, मैने ग़लती की, तुम कहो तो उसको समझाते हुए अपनी फुद्दि मरवा लूँ उससे"

ये बात मैने इनायत को चिडाने के लिए कही थी.

इनायत इस बात पर एकदम सीरीयस हो गया, मुझे लगा शायद मैने ज़्यादा बोल दिया है इसलिए मुझे थोड़ा अफ़सोस हुआ.

मैं:"सॉरी, यार तुम भी तो ज़्यादा बोल रहे थे"

इनायत:"आइडिया अच्छा है,शायद वो इससे तुम्हारी मजबूरी समझ जाए"

मैं:"तुम पागलो वाले आइडियास अपने पास रखो, मैं क्या कोई रंडी हूँ जो गली गली चुदवाती रहूं"

इनायत:"सॉरी जान,मेरा ये मतलब नही था कि तुम उसके साथ सेक्स करो, मेरा मतलब था कि तुम उसको थोड़ा पुचकारो, किसी बच्चे की तरहा और थोड़ा प्यार दिखाओ ताकि वो सम्भल सके.

मैं:"ये ठीक है, ऐसा कर सकती हूँ. चलो ये ट्राइ करती हूँ"

कुछ दिन के बाद शौकत का फोन आया, मैने उसको फिर से मिलने के लिए बुलाया. इस बार भी मैने साना और आरिफ़ से ज़रिए उसकी हर हरकत पर नज़र रखी थी. इस बार इनायत पिछली बार की तरह टेरेस पर छुपा था. मैने इस बार इंटरकम मे म्डोफिकेशन करवाया था और उसका एक स्पीकर टेरेस पर रखवाया था. ये इसलिए ताकि मेरी हर बात पर इनायत की नज़र रहे और कुछ गड़बड़ होने पर वो सीधा बेडरूम मे आ जाए. मैने अपने लिए थोड़ी प्रेपरेशन कर रखी थी ताकि अपना प्रोटेक्षन कर सकूँ.
 
Inayat jab andar aaya to main uski muskurat ki wajah jaanne ke liye ussse poonchne lagi

Main:"kyun muskura rahe ho, jaley par namak chidak rahe ho kya?"

Inayat:"nahi main apni kismat par muskura raha hoon"

Maim:"aba ye socho ki ab karna kya hai, ye sahab to chudai ke khel dekh kar thank bol kar nikal padey"

Inayat:"ek aisi shart rakho jisko wo maan na sakey yar phir usko kuch aisa batao jo wo qubool na kar sakey"

Main:"tumhe lagta hai wo insan jo apni hone waali biwi ka live show dekhne ke liye raazi ho jaye wo kisi bhi ulti seedhi baat ko maane ke liye taiyaar hoga, mujhe to lagta hai ki shaukat pagal sa ho gaya

hai, mujhe kabhi kabhi ye sab karte huye accha nahi lagta, aisa lagta hai jaise maine usko bewajah tang kar rahi hoon, ye khel ab khel nahi raha, kahin aisa na ho ki wo khudkhushi kar baithe ya humko

koi nuksaan pahunchaye"

Inayat:"main bhi kabhi kabhi ye sochta hoon, mujhe lagta hai tumhe usse ab pyar se baat karni chahiye aur usko ek dost ki tarha dheere dheere samjhaa chahiye, usni apni kuwwat se bahar aakar ye

sab kiya hai, mujhe nahi lagta ki ko koi perverted aadmi ki tarha hai, ho sakta hai wo ab bhi tumse pyar karta ho"

Mujhe Inayat ki baat bilkul acchi nahi lagi aur maine uski nakal banate huye uski baat dohraai

Main:"ho sakta hai wo ab bhi tumse pyar karta ho, to theek hai main wapas uske paas chali jaati hoon aur tum apna luade hilate reh jaana"

Inayat:"hahaahaaaa bura maan gayi kya?"

Main:"main tumse hal pooch rahi hoon aur tum aashiqi bhaghaar rahe ho"

Inayat:"to theek hai, tum usko pyar se samjhao aur usko kaho ki wo koi aur ladki talash kare"

Main:"usko pyar se samjhate samjhate kahin main pagal na ho jaun"

Inayat:"ek baar koshish to karo"

Main:"tumhe malum hai, maine usko apni panty di apna paani ponch kar, ye keh kar ki wo isse mere yad samajh kar apne paas rakhe"

Inayat:"haaahaaha kya keh rahi ho ,tum to bilkul pagal ho"

Main:"aur kya karti wo bechara hamara show dekh kar thoda excited tha, uska consolation prize to banta tha hi na."

Inayat:"accha hua tumne usse choot nahi marwai, warna ye gold medal ho jaata haahaahaaaaaaaaaa:"

Main:"to marwa hi leti, maine galti ki, tum kaho to usko samjhate huye apni fuddi marwa loon usse"

Ye baat maine Inayat ko chidaane ke liye kahi thi.

Inayat is baat par ekdum serious ho gaya, mujhe laga shayad maine jyada bol diya hai isliye mujhe thoda afososh hua.

Main:"sorry, yaar tum bhi to jyada bol rahe the"

Inayat:"idea accha hai,shayad wo isse tumhari majboori samajh jaye"

Main:"tum pagalo waale ideas apne paas rakho, main kya koi randi hoon jo gali gali chudwati rahun"

Inayat:"sorry jaan,mera ye matlab nahi tha ki tum uske sath sex karo, mera matlab tha ki tum usko thoda puchkaro, kisi bacche ki tarha aur thoda pyar dikhao taaki wo sambhal sakey.

Main:"ye theek hai, aisa kar sakti hoon. chalo ye try karti hoon"

Kuch din ke baad Shaukat ka phone aaya, maine usko phir se milne ke liye bulaya. Is baar bhi Maine Sana aur Aarif se zariye uski har harkat par nazar rakhi thi. Is baar Inayat pichli baar ki tarha terrace par chupa tha. Maine is baar Intercom me mdofication karwaya tha aur uska ek speaker terrace par rakhwaya tha. Ye isliye taaki meri har baat par Inayat ki nazar rahe aur kuch gadbad hone par wo seedha bedroom me aa jaye. Maine apne liye thodi preparation kar rakhi thi taaki apna protection kar sakun.
 
शौकत अंदर आकर बैठ गया. मैने उससे चाइ के लिए पूछा,थोड़ी देर में मैं उसके लिए चाइ ले आई. उसने चाइ का कप अपने हाथो मे लिया और मेरी तरफ उम्मीद भरी नज़रों से कुछ कहना चाहा. मुझे समझ मे नही आ रहा था कि मैं उसको क्या कहूँ. शायद उसके लिए मेरे दिल मे अभी भी कहीं किसी कोने मे थोड़ा प्यार या शायद थोड़ी हमदर्दी बाकी थी. वो और आदमियो की तरहा नही लग रहा था जो सिर्फ़ औरतो पर अपनी मर्ज़ी थोप देते हैं. मुझे भी ये लगने लगा था कि शौकत को अपने किए का बहोत पछतावा है. वो अब एक हारा हुआ, कमज़ोर सा दुखी इंसान लगता था जिसे जीना था

लेकिन जीने का मकसद नही मिल रहा था. मैं उससे हमदर्दी करने लगी थी. शायद वो रात उसके लिए भी उतनी काली थी जितनी मेरे लिए ,शायद वो भी अंधेरे मे कहीं खो गया हो जैसे मैं खो गयी थी,

अब मैं शायद उसको अंधेरे मे कहीं दूर एक टिमटिमाते हुए दिए सी लग रही थी. उसने काफ़ी देर मेरी आँखो मे झाँक कर अपने लिए प्यार की बूँद तलाश करनी चाही थी. मैं उससे आँखें छिपा रही थी. अभी भी वो चाइ का कप हाथ मे लिए मेरी तरफ टकटकी लगा कर देख रहा था. मैने ये सिलसिला तोड़ने के लिए उससे बात शुरू कर दी.

मैं:"चाइ पियो, ठंडी हो रही है" मैं:""

शौकत:"हां पीता हूँ" :""

मैं:"तुम्हारी तबीयत तो ठीक है"

शौकत:"क्यूँ तबीयत का क्या है"

मैं:"तुम्हारी आँखो के नीचे काले घेरे दिखते हैं, क्या शराब फिर से शुरू कर दी है"

शौकत:"नही शुरू नही की है, लेकिन सोचता हूँ कि शायद अब वही बाकी है मेरी ज़िंदगी मे"

मैं:"शौकत ज़िंदगी मे सिर्फ़ प्यार ही सब कुछ नही होता, दूसरे की ख़ुसी भी कुछ होती है, कब तक तुम सिर्फ़ अपने ही बारे मे सोचोगे,क्या तुमसे जुड़े हुए और लोगो की ख़ुसी कुछ नही है"

शौकत:"मैं शायद इतना ताकतवर नही कि अब किसी और के लिए सोच सकूँ, मैं तो अब ये ढलती शाम हूँ"

मैं:"शौकत ज़रा दूसरो का भी ख्यायाल करो,अपनी मा का,अपने बाप का, अपनी बहेन का,उनकी ख़ुसी और गम का,सबके बारे मे सोचो ज़रा, ज़िंदगी सिर्फ़ प्यार से ही नही चलती"

शौकत:"क्या तुम मुझे बहलाना चाहती हो"

मैं:"नही हरगिज़ नही, मैं तो तुम्हारी खैर ख्वाह बनना चाहती हूँ, अब मुझे तुमसे नफ़रत नही रही, अब मैं इन सब चीज़ो के बारे मे नही सोचती और तुमसे भी यही चाहती हूँ"

शौकत:"मुझे लगता है कि शायद मेरा कुछ नही हो सकता, तुम मेरे पास अब लौटना ही नही चाहती"

ये कह कर शौकत ने अपना चेहरा झुका लिया और शायद उसकी आँखो से आँसू बह निकले,मुझे बहोत बुरा लगा, वो अपनी सारी हदें तोड़ कर मेरे पास मेरे वापस अपनाने के यकीन मे आया था,

मुझे समझ मे नही आया कि क्या किया जाए, ये एक बड़ा झटका था मेरे लिए. मैं इन कमज़ोर लम्हो मे उसके पास एमोशनल होकर हां नही कहना चाहती थी और ना ही तंग दिल इंसान की तरहा उसे वही पर लगभग रोता हुआ छोड़ना चाहती थी. वो एक ऐसे बच्चे की तरहा मासूम दिख रहा था जिसकी मा उसे लेने नही आई और वो हॉस्टिल मे अकेला रह गया हो. शायद यही वजह थी कि मेरी सास और ननद जो कि मेरी तरफ दारी करती थीं अब शौकत की तरफ दारी कर रहीं थी. मैं काफ़ी देर तक शौकत तो देखती रही और उसकी सिसकिया सुनती रही. मैं नहीं जानती थी कि मैं किस शौकत से बात कर रही हूँ.ये वो आदमी तो बिल्कुल नही लगता था, ये तो कोई मुसीबत का मारा. हारा हुआ इंसान लगता था. तकदीर किसी को इतना कमज़ोर कर सकती है ये मैने कभी नही सोचा था. हम लड़कियो को इतना सख़्त होना नही सिखाया जाता.ना जाने क्या हुआ मैने शौकत को गले से लगा लिया और एक छोटे बच्चे की तरहा उसको पुचकार्ने लगी. शौकत अभी भी सर नीचे किए धीरे धीरे सिसकिया ले रहा था.

मैने सोचा की उसको थोड़ा दिलासा देना ठीक होगा.

मैं:"शौकत ऐसे ना टूटो, तुम अगर मुझे कमज़ोर करके वापस पाना चाहते हो तो शायद मैं तुम्हारी तरफ लौट आउ, तुमने मुझे इनायत के पास शायद वापस हासिल करने के लिए भेजा था लेकिन मैं इस शख्स से प्यार कर बैठी, तुम नही जानते कि इनायत ने मुझे इतना प्यार और हौसला दिया है कि मैं उसकी कर्ज़दार हो चुकी हूँ, तुमको इस तरहा बिलखता देख कर मुझे लगता है कि शायद मेरा मर जाना ही हर चीज़ का हाल होगा, तुम भी खुश रहो , इनायत भी, सभी लोग,,,"

शौकत:"नही, आरा तुम क्यूँ मरने की बात करती हो, मैं ही क्यूँ ना मर जाउ, मुझसे ही तो ये सब बर्दास्त नही होता"

मैं:"नही शौकत नही, तुम मुझसे वादा करो कि तुम ऐसा कुछ भी नही करोगे चाहे कुछ भी हो जाए और अगर तुम्हारा मरने का जी चाहे तो मुझे बता देना,शायद हम दोनो ही साथ मे ज़हेर खा लें"

मेरे इस जवाब ने शौकत को थोड़ा हैरान किया, वो मुझे देखने लगा, मेरी आँखो मे भी आँसू झलक आए थे. वो मेरे आँसू पोंछते हुए बोला

शौकत:"आरा, मैं तुम्हे तकलीफ़ मे नही डालना चाहता,मैं तो बस तुमसे अलग होकर नही रह सकता हूँ, मुझे समझ मे नही आता कि मैं कैसे अपनी ज़िंदगी तुम्हारे बिना तसव्वुर मे लाउ"

मैं:"जानते हो अगर मैं इनायत से कहु कि मैं शौकत के पास लौटना चाहती हूँ तो वो मुझे नही रोकेगा अपने पास लेकिन वो भी किसी ताश के पत्तो की तरहा बिखर जाएगा, वो तुमसे भी मोहब्बत करता है और हर वक़्त इसी जुर्म की तकलीफ़ मे गिरफ्तार रहता है कि उसने मुझसे प्यार क्यूँ कर किया"

शौकत:" तो तुम ही बताओ आरा, मैं कैसे अपनी ज़िंदगी बिताऊ"

मैं:"जैसे मैने शुरू की तुम्हारे मुझसे अलग होने के बाद, मुझे ये ख़याल आया कि मेरी मा, मेरे बाप, मेरा भाई मेरे लिए कितने ज़रूरी हैं, उनका भी मेरी तरहा बुरा हाल था, मैं उनके लिए ही तुम्हारा ये सुझाव क़ुबूल किया, लेकिन धीरे धीरे वक़्त बदला, तुम भी किसी अच्छी लड़की से शादी कर लो,मुझ जैसे हज़ारो लड़किया अपने शौहर की ज़िंदगी को जन्नत बनाने के लिए इंतेज़ार मे बैठी हैं,

लेकिन ना जाने क्यूँ आदमी लोग ही उनकी मोहब्बत को ठुकरा देते हैं, मैं भी तुम्हारे साथ ही हूँ एक दोस्त की तरहा, मैं भी तुम्हारे सुख दुख मे शामिल हूँ, तुम मेरे एक अच्छे दोस्त नही बन सकते,

क्या सिर्फ़ मिया बीवी का ही कोई रिस्ता होता है? , मेरी मान लो शौकत ज़रा, अपनी ज़िंदगी फिर शुरू करो, तुम एक अच्छे आदमी हो, तुमने ये साबित कर दिया है, ज़रा अपने चारो ओर नज़र दौड़ाओ,ये ज़िंदगी खुशियों से भरी पड़ी है."

शौकत:"अच्छा लगा तुम्हारे मूह से अपने लिए ये सब सुन कर"

मैं:"अच्छा बहुत हुआ ये सब, ये बताओ कुछ खाओगे, मैने बिरयानी बनाई है"

शौकत:"हां ले आओ, थोड़ा खा लेता हूँ, भूख भी लगी है"

मैं झट से किचन मे गयी और उसके लिए खाना ले आई, उसने इतमीनान से खाया. फिर वो वहीं ड्रॉयिंग रूम मे बैठ गया. मैं उसके पास गयी और उसको फिर अपने गले से लगा लिया.

कुछ देर बाद उसने मुझसे कहा कि वो ज़रूर मेरी बात के बारे में सोचेगा. मैने भी उससे अपनी बात दोहराई और कहा कि अगर वो कोई ग़लत कदम उठाएगा तो वो सबको तकलीफ़ देगा और मैं उसे कभी माफ़ नही कर पाउन्गा. वो अब थोड़ा रिलॅक्स लग रहा था. अब वो मुझे सलाम कह कर चला गया. उसके जाने के बाद इनायत भी घर पर आ गया. इनायत को मैने सारी चीज़ें जो वो इंटरकम पर सुन चुका था दोहराई, लेकिन ये नही बताया कि मैने उसको गले से लगाया था. शायद ये कहना सही नही होता. मर्द कभी भी औरतो को समझ नही सकते. वो दोस्त और शौहर का फ़र्क़ तो कभी नही समझ सकते, मैं फिर से शौकत के उदास चेहरे के बारे में सोचने लगी, आज सेक्स का मूड नही था, आज तो एक बार फिर शौकत के साथ बिताए लम्हो में गुम हो जाने का मूड था.

इनायत कितना भी अच्छा शौहर क्यूँ ना हो लेकिन कुछ बाते औरत मर्द से हमेशा छुपा कर रखती है, ये कोई बड़ी बात हो ये ज़रूरी नही, हां मगर कोई छोटी बात भी कभी कभी बाई हो सकती है.

मैं शौकत के ख़यालो मे ही गुम थीं ना जाने कब नींद आ गयी.
 
Shaukat andar aakar baith gaya. Maine usse chai le liye pooncha,thodi deir mein main uske liye chai le aayi. Usne chai ka cup apne haanto me liya aur meri taraf ummed bhari nazaro se kuch kehna

chaha. Mujhe samajh me nahi aa raha tha ki main usko kya kahun. Shayad uske liye mere dil me abhi bhi kaheen kisi koney me thoda pyaar ya shayad thodi humdardi baaki thi. Wo aur aadmiyo ki tarha

nahi lag raha tha jo sirf aurto par apni marzi thop dete hain. Mujhe bhi ye lagne laga tha ki Shaukat ko apne kiye ka bahot pachtawa hai. Wo ab ek hara hua, kamzor sa dukhi insan lagta tha jisse jeena tha

lekin jeene ka maksad nahi mil raha tha. Main usse humdardi karne lagi thi. Shayad wo raat uske liye bhi utni kaali thi jitni mere liye ,Shayad wo bhi andhere me kahin kho gaya ho jaise main kho gayi thi,

ab main shayad usko andhere me kahin door ek timtimate huye diye si lag rahi thi. usne kaafi der meri aankho me jhaank kar apne liye pyar ki boond talash karni chahi thi. Main usse aankhein chipa rahi

thi. Abhi bhi wo chai ka cup haanth me liye meri taraf taktaki laga kar dekh raha tha. Maine ye silsila todne ke liye usse baat shuru kar di.

Main:"chai piyo, thadi ho rahi hai" Main:""

Shaukat:"haan peeta hoon" Shaukat:""

Main:"tumhari tabiyat to theek hai"

Shaukat:"kyun tabiyat ka kya hai"

Main:"tumhari aankho ke neeche kaale ghere dikhte hain, kya sharab phir se shuru kar di hai"

Shaukat:"nahi shuru nahi ki hai, lekin sochta hoon ki shayad ab wahi baaki hai meri zindagi me"

Main:"shaukat zindagi me sirf pyar hi sab kuch nahi hota, doosre ki khusi bhi kuch hoti hai, kab tak tum sirf apne hi baare me sochoge,kya tumse jude huye aur logo ki khusi kuch nahi hai"

Shaukat:"main shayad itna takatwar nahi ki ab kisi aur ke liye soch sakun, main to ab ye dhalti shaam hoon"

Main:"Shaukat zara dooro ka bhi khyayal karo,apni maa ka,apne baap ka, apni bahen ka,unki khusi aur gam ka,sabke baare mo socho zara, zindagi sirf pyar se hi nahi chalti"

Shaukat:"kya tum mujhe behlana chahti ho"

Main:"nahi hargiz nahi, main to tumhari khair kwah banna chahti hoon, ab mujhe tumse nafrat nahi rahi, ab main in sab cheezo ke bare me nahi sochti aur tumse bhi yahi chahti hoon"

Shaukat:"mujhe lagta hai ki shayad mera kuch nahi ho sakta, tum mere paas ab lautna hi nahi chahti"

Ye keh kar Shaukat ne apna chehra jhuka liya aur shayad uski aankho se aansu beh nikle,mujhe bahot bura laga, wo apni saari hadein tod kar mere paas mere wapas aapne ke yakin me aaya tha,

mujhe samajh me nahi aaya ki kya kiya jaye, ye ek bada jhtaka tha mere liye. Main in kamzor lamho me uske paas emotional hokar haan nahi kahna chahti thi aur na hi tang dil insan ki tarha usey wahi

par lagbhag rota hua chhodna chahti thi. Wo ek aise bacche ki tarha masoom dikh raha tha jiski maa usey lene nahi aayi aur wo hostel me akela reh gaya ho. Shayad yahi wajah thi ki meri saas aur

nanad jo ki meri taraf daari karti theen ab shaukat ki taraf daari kar rahin thi. Main kaafi der tak Shaukat to dekhti rahi aur uski siskiya sunti rahi. Main nahin jaanti thi ki main kis Shaukat se baat kar rahi

hoon.Ye wo aadmi to bilkul nahi lagta tha, ye to koi musibat ka maara. haara hua insan lagta tha. Takdeer kisi ko itna kamzor kar sakti hai ye maine kabhi nahi socha tha. Hum ladkiyo ko itna sakht hona

nahi sikhaya jata.Na jaane kya hua maine shaukat ko galey se laga liya aur ek chote bacche ki tarha usko puchakarne lagi. Shaukat abhi bhi sar neeche kiye dheere dheere siskiya le raha tha.Maine

socha ki usko thoda dilasa dena theek hoga.

Main:"Shaukat aise na tooto, tum agar mujhe kamzor karke wapas paana chahte ho to shayad main tumhari taraf laut aaun, tumne mujhe Inayat ke paas shayad wapas hasil karne ke liye bheja tha lekin

main is shakhs se pyar kar baithi, tum nahi jante ki Inayat ne mujhe itna pyar aur hausla diya hai ki main uski karzdaar ho chuki hoon, tumko is tarha bilkahta dekh kar mujhe lagta hai ki shayad mera mar

jaana hi har cheez ka hal hoga, tum bhi khush raho , Inayat bhi, sabhi log,,,"

Shaukat:"nahi, Aaara tum kyun marne ki baat karti ho, main hi kyun na mar jaun, mujhse hi to ye sab bardaast nahi hota"

Main:"nahi Shaukat nahi, tum mujhse wada karo ki tum aisa kuch bhi nahi karoge chahe kuch bhi ho jaye aur agar tumhara marne ka ji chahe to mujhe bata dena,shayad hum dono hi saath me zaher kha

lein"

Mere is jawab ne Shauakt ko thoda hairan kiya, wo mujhe dekhne laga, meri aankho me bhi aansu jhalak aaye the. Wo mere aanso ponchte huye bola

Shaukat:"Aara, main tumhe takleef me nahi daalna chahta,main to bas tumse alag hokar nahi reh sakta hoon, mujhe samajh me nahi aata ki main kaise apni zindagi tumhare bina tasawwur me laun"

Main:"jaante ho agar main Inayat se kahu ki main Shaukat ke paas lautna chahti hoon to wo mujhe nahi rokega apne paas lekin wo bhi kisi taash ke patto ki tarha bikhar jayega, wo tumse bhi mohabbat

karta hai aur har waqt isi jurm ki takleef me giraftaar rehta hai ki usne mujhse pyar kyun kar kiya"

Shaukat:" to tum hi batao Aara, main kaise apni zindagi bitaun"

Main:"jaise maine shuru ki tumhare mujhse alag hone ke baad, mujhe ye khayal aaya ki meri maa, mere baap, mera bhai mere liye kitne zaruri hain, unka bhi meri tarha bura haal tha, main unke liye hi

tumhara ye sujhaav qubul kiya, lekin dheere dheere waqt badla, tum bhi kisi acchi ladki se shadi kar lo,mujh jaise hazaro ladkiya apne shauhar ki zindagi ko jannat banane ke liye intezar me baithi hain,

lekin na jaane kyun aadmi log hi unki mohabbat ko thukra dete hain, main bhi tumhare sath hi hoon ek dost ki tarha, main bhi tumhare sukh dukh me shamil hoon, tum mere ek acche dost nahi ban sakte,

kya sirf miya biwi ka hi koi rista hota hai? , Meri maan lo Shaukat zara, apni zindagi phir shuru karo, tum ek acche aadmi ho, tumne ye sabit kar diya hai, zara apne chaaro or nazar daudao,ye zindagi

khusi se bhari padi hai."

Shaukat:"accha laga tumhare muh se apne liye ye sab sun kar"

Main:"accha bahut hua ye sab, ye batao kuch khaoge, maine biryani banai hai"

Shaukat:"haan le aao, thoda kha leta hoon, bhookh bhi lagi hai"

Main jhat se kitchen me gayi aur uske liye khana le aayi, usne itmeenan se khaya. phir wo wahin drawing room me baith gaya. Main uske paas gayi aur usko phir apne galey se laga liya.

Kuch deir baad usne mujhse kaha ki wo zarur meri baat ke baare mein sochega. Maine bhi usse apni baat dohrai aur kaha ki agar wo koi galat kadam uthayega to wo sabko takleef dega aur main usse

kabhi maaf nahi kar paungi. Wo ab thoda relax lag raha tha. Ab wo mujhe salam keh kar chala gaya. Uske jaane ke baad Inayat bhighar par aa gaya. Inayat ko maine saari cheezein jo wo intercom par

sun chuka tha dohrai, lekin ye nahi bataya ki maine usko galey se lagaya tha. Shayad ye kahna sahi nahi hota. Mard kabhi bhi aurto ko samajh nahi saktey. Wo dost aur shauhar ka farq to kabhi nahi

samajh sakte, Main phir se Shaukat ke udaas chehre ke baare mein sochne lagi, aaj sex ka mood nahi tha, Aaj to ek baar phir Shaukat ke sath bitaye lamho mein gum ho jaane ka mood tha. Inayat kitna

bhi accha shauhar kyun na ho lekin kuch batien aurat mard se hamesha chupa kar rakhti hai, ye koi badi baat ho ye zaruri nahi, haan magar koi choti baat bhi kabhi kabhi bai ho sakti hai.

Main Shaukat ke khayalo me hi gum thim na jaane kab neend aa gayi.
 
दो हफ्ते ना जाने कैसे बीत गये. ऐसा लगता था जैसे हम किसी लंबे टूर पर आए हैं जहाँ हर दिन पिकनिक है, इसी दौरान मैं शौकत से टच मे भी रही, वो लगभग रोज़ ही मुझे कॉल करता.

मुझे भी अब एक दोस्त के नाते उससे बातें करना खूब अच्छा लगता. एक दिन उसने बताया कि उसने मेरी सास को उसकी शादी के लिए कह दिया है और उसकी फॅमिली बहुत खुश है. मैने भी उसे मुबारक

बाद दी और मैं भी काफ़ी खुश थी. इनायत मेरी उससे बातों के सिलसिले को जानता था. वो भी खुश था. मैं अपने घर पर भी लगातार बात चीत करती रहती. मेरे भाई आरिफ़ की भी शादी होने वाली थी, लड़की को अब तक

फाइनल नही किया गया था. हां लड़कियाँ काफ़ी देख ली गयी थीं. मैने जैसे ही अपने घर वालो को ये खबर दी कि शौकत किसी और से शादी करने चाहता है तो सबने ठंडी साँस ली कि शूकर है बला टली.

फिर वो दिन भी आ गया जब शौकत की शादी थी, शायद काफ़ी मुद्दतो बाद दोनो भाई आपस मे मिलने वाले थे. ये बरसात का महीना था. हम लोग भी अपने ससुराल पहुँच चुके थे. मेरी सास और ननद अब भी हम से थोड़ा खफा थी लेकिन शायद उनका लहज़ा थोड़ा नर्म सा लगता था.ये मुझे उनके दिल डौल और बर्ताव से मालूम पड़ा. मेरे ससुर वैसे ही थे. शादी के दिन जैसे क़ि रिवाज़ है कि लड़के के नज़दीकी रिश्तेदार और चन्द औरतें ही जाती हैं तो मुझे भी जाना पड़ा. आज मैने एक ब्लाउस और लहगा पहना था, टॉप की गहराई ज़्यादा था और इसमे मेरा क्लीवेज काफ़ी नज़र आता था. लेकिन दुपट्टे से ढकने पर ये छुप जाता था. मैने फ़ैसला किया कि मैं शौकत से अब भी नॉर्मल तरीके से बात करूँगी. जब वो तैयार हो चुका तो मैं इनायत के साथ उसके कमरे मे गयी. वहाँ पहले से ही मेरी ननद साना और मेरी सास मौजूद थे. मैने शौकत को सलाम किया, दोनो भाई भी आपस मे गले मिल गये जैसे कोई गिला शिकवा था ही नही. दोनो काफ़ी देर तक इसी तरहा रहे,

मैने देखा कि मेरी सास मूह फेर कर अपने आँसू पोंछ रही थी और मेरी ननद साना उनको तसल्ली दे रही थी. काफ़ी दीनो बाद इस घर मे फिर से ख़ुसी की हल्की सी झलक नज़र आती थी.

हम सब तैयार हुए, रवाना हुए और फिर नयी दुल्हन के साथ वापस आ गये. इस लड़की का नाम तबस्सुम था. मूह दिखावे की रसम के दौरान जब मैं उसको देखने गयी तो मालूम हुआ कि ये बला की खूबसूरत है और इसके सामने मैं कहीं नही टिकती. ये थोड़ी दुबली पतली सी थी लेकिन कातिलाना नयन नक्श लेकर आई थी. काफ़ी रात हो चुकी थी और शौकत अपने कमरे की तरफ जा रहा था,

इस वक़्त उसके कमरे के बाहर सिर्फ़ मैं ही थी,मुझे ना जाने क्या मस्ती सूझी कि मैने शौकत को छेड़ने का फ़ैसला किया.

मैं:"शौकत क्या बला लेकर आए हो, ये तो कोई हूर है, किसी तरहा से ये ज़मीन की नयी लगती"

शौकत:"क्या सच में? मैने तो बस फोटो मे देखा था"

मैं:"असल मे जाकर देखो, वो भी क्या चीज़ है, सुबह बताना क्या चीज़ थी, हाहाहााआ"

मेरी इस बात पर शौकत सिर्फ़ मुस्कुरा कर रह गया और अंदर चला गया. ये शादी का घर था, इसीलिए सब समान इधर उधर बिखरा हुआ था, मैं भी अपनी खाला ज़ाद बहेन रीना के साथ इनायत के कमरे मे सो गयी. बहुत थकान थी इसलिए तुरंत नींद आ गयी. सुबह आँख खुली तो 6 बज रहे थे,मुझे अब भी नींद आ रही थी लेकिन लोगो की चहल कदमी ने मेरी आँख खोल दी थी, आज वलीमा था और लड़की के रिश्तेदारो की दावत थी. दिन भर मसरूफ़ रही और देर रात को ही कमर सीधी करने को मिली. फिर सो गयी जाकर. अगली सुबह दुल्हन वापस अपने घर जा चुकी थी.

कुछ हफ्ते यूँ ही मेहमानो का आना जाना लगा रहा लेकिन इस दौरान मेरी अपनी सास से और ननद से कम ही बात हुई थी. आज शादी को करीब महीना होने को आया था. इनायत अपने काम पर चले गये थे. ससुर वहीं घर के बाहर

कुछ बुज़ुर्गो से वही अपनी पुरानी बातें कर रहे थे. मैं और मेरी सास और ननद ही घर पर थे.

आज हम अकेले थे, साना मेरे लिए नाश्ता ले कर आई, हम ने नाश्ता किया और हमारे बीच बात चीत शुरू हो गयी.

साना:"भाभी कैसी लगी आपको तबस्सुम भाभी"

मैं:"अच्छी हैं"

मुझ से थोड़ी ही दूर पर मेरी सास बैठी थी, जो शायद कुछ पढ़ रही थी. मेरे इस जवाब पर वो तुनक कर बोल पड़ी

सास:"अच्छी है या बहुत अच्छी है?"

मैं:"बहोत अच्छी हैं"

सास:"तुमको क्या लगा था कि वो तुम्हारे चक्कर मे अपनी ज़िंदगी बर्बाद कर लेगा,देखो उसे तुमसे कहीं ज़्यादा अच्छी बीवी मिली"

मैं:"मैं जानती थी, शौकत को बहोत सारी लड़किया मिल सकती हैं, मैने ही उनसे इसके लिए इसरार किया था"

सास:"तुम तो करोगी ही इसरार क्यूंकी तुम्हे अपनी जान जो छुड़ानी थी, एक शराबी से"

मैं:"आप एक बार मेरी जगह खुद को रख कर तो देखिए, मैने कभी इस घर का बुरा नही चाहा, मैं थोड़ा परेशान ज़रूर थी"

सास:"खबरदार लड़की, अपने आप को हम से ना जोड़ो, तुम्हारे साथ जो हुआ उसका हम को बड़ा अफ़सोस है लेकिन तुमने अपना वादा तोड़ दिया था, और तुम्हारे इस घर मे वापस आने पर क्या शौकत को तकलीफ़ ना होगी, क्या सोच कर मूह उठा कर चली आई?, हम तुमसे बहोत खफा हैं, वो तो शादी की वजह से हम थोड़ा चुप थे लेकिन ये मत समझना कि हम ने तुम्हे माफ़ कर दिया है" ना जाने शौकत कब वापस आ गये थे और अपनी मा की बातें सुन रहे थे. वो अपनी मा पर ही बरस पड़े.

शौकत:"अम्मी ये सब क्या है"

सास:"बेटा, तुम कब आए, सब ख़ैरियत तो है"

शौकत:"अम्मी मैने आपको बताया था ना सब कुछ, फिर भी आप बाज़ नही आई, मैने बुलाया था इनायत और आरा को यहाँ, आरा ने ऐसा क्या किया है जिसे आप माफ़ नही कर सकती, आरा ने इनायत के साथ घर बसाया है, इनायत भी आप ही की औलाद है और उसकी शराफ़त ने आरा को बहुत मुतसिर किया, मैने आरा को क्या दिया था जो वो मुझ जैसे के पास दोबारा लौट कर आती, आरा ने ही मुझे हिम्मत दी और मुझे नयी ज़िंदगी की शुरआत करने की नसीहत दी, वो चाहे अब मेरी बीवी ना हो लेकिन वो मेरी अच्छी दोस्त है. मुझे इनायत पर फक्र है कि वो हमारा ही खून है, आप भी आरा को क़ुबूल कीजिए, वो हम सब से मोहब्बत रखती है"

मेरी सास अब खामोश हो गयी थी लेकिन अब साना बोल पड़ी.

साना:"अम्मी भाई बिल्कुल सही कह रहे हैं, इसमे भाभी का क्या क़ुसूर है, हमेशा औरतें ही क्यूँ क़ुसूरवार होती हैं हमारे मुआश्रे में, अब भाई और भाभी सब खुश हैं तो आपको क्या परेशानी है"

सास:"उस नयी लड़की को जब मालूम पड़ेगा कि ये सब तो वो क्या सोचेगी, क्या उसके बारे मे तुम लोगों ने कुछ सोचा है कभी"

शौकत:"क्यूँ, उसको हम ये बता देंगे कि, मैने आरा को एक ग़लती की वजह से छोड़ा और उसका हम सबको पछतावा है लेकिन अब वो फिर इस घर का हिस्सा है और इनायत की बीवी है,इसमे क्या बुरा लगेगा उसको"

सास:"पर क्या वो तुम्हारा और आरा का एक साथ हँसना बर्दास्त कर पाएगी"

शौकत:"अगर उसकी तर्बियत खराब होगी तो शुरुआत मे वो थोड़ा बुरा मान सकती है लेकिन क्या हमारे इस माहौल मे उसको साँस लेने की और सब से बात चीत करने का खुला पन नही मिलेगा"

सास:"शौकत तुम मासूम हो इसलिए सबको मासूम समझते हो, लोग तुम्हारी तरहा नही सोचते हैं"

शौकत:"मैं वो सब नही जानता अम्मी लेकिन आइन्दा आप आरा को बेइज़्ज़त नही करेंगी, आपको उसको माफ़ करना होगा और उसको अभी अपने गले से लगाना होगा"

सास:"शौकत, थोड़ा लिहाज़ करो अपनी मा का"

शौकत:"ठीक है,अगर आपको आरा से अभी बात करने मे तकलीफ़ है तो आप बाद मे कर सकती हैं लेकिन मेरी बात पर गौर काजिएगा"

इतना कहकर शौकत वापस चला गया. मेरी सास ने मेरी तरफ घूर कर देखा और फिर अपने कमरे मे चली गयी. लेकिन फिर मैने उनके बर्ताव मे फ़र्क देखा और धीरे धीरे वो वापस नॉर्मल सी हो गयी.उन्होने मुझे वापस अपने साथ रहने को कहा. मैने ये बात इनायत को बताई तो वो बहुत खुश हुआ. हम ने एक दिन अपना समान वापस लाने का प्लान बनाया और फिर हम अपने घर वापस आ गये. शौकत की बीवी वापस आ गयी थी. शौकत कुछ दिन के लिए कहीं घूमने जाना चाहता था और वो इनायत और मुझको भी साथ ले जाना चाहता था. इनायत भी राज़ी हो गया. हम लोग घूमने के लिए निकल पड़े.
 
Do hafte na jaane kaise beet gaye. Aisa lagta tha jaise hum kisi lambe tour par aaye hain jahan har din picnik hai, Isi dauran main Shaukat se touch me bhi rahi, wo lagbhag roz hi mujhe call karta.

Mujhe bhi ab ek dost ke naate usse batein karna khoob accha lagta. Ek din usne bataya ki usne meri saas ko uski shadi e liye keh diya hai aur uski family bahut khush hai. Maine bhi usse mubarak

baad di aur

main bhi kaafi khush thi. Inayat meri usse baaton ke silsile ko jaanta tha. Wo bhi khush tha. Main apne ghar par bhi lagatar baat cheet karti rehti. Mere bhai Aarif ki bhi shadi hone waali thi, ladki ko ab tak

final nahi kiya gaya tha. Haan ladkiyan kaafi dekh li gayi theen. Maine jaise hi apne ghar waalo ko ye khabar di ki Shaukat kisi aur se shadi karne chahta hai to sabne thandi saans li ki sukar hai bala tali.

Phir wo din bhi aa gaya jab Shaukat ki shadi thi, Shayad kaafi muddatao baad dono bhai aapas me milne wale they. Ye barsaat ka mahina tha. hum log bhi apne sasural pahunch chuke the. Meri saas

aur nanad ab bhi humse thoda khafa thi lekin shayad unka lehja thoda narm sa lagta tha.Ye mujhe unke dil daul aur bartaav se malum pada. Mere sasur waise hi the. Shadi ke din jaise ki riwaz hai ki

ladke ke nazdeeki rishtedaar aur chand aurtein hi jati hain to mujhe bhi jana pada. Aaj maine ek blouse aur lehga pehna tha, top ki gehrai jyada tha aur isme mera cleavage kaafi nazar aata tha. Lekin

dopatte se dhakne par ye chup jaata tha. Maine faisla kiya ki main Shaukat se ab bhi normal tarike se baat karungi. Jab wo taiyaar ho chuka to main Inayat ke sath uske kamre me gayi. Wahan pehle se

hi meri nanad Sana aur meri saas maujood the. Maine shaukat ko salam kiya, dono bhai bhi aapas me galey mil gaye jaise koi gila sikwa tha hi nahi. Done kaafi der tak isi tarha rahey, maine dekha ki

meri saas muh pher kar apne aansu ponch rahi thi aur meri nanad Sana unko tasalli de rahi thi. Kaafi dino baad is ghar me phir se khusi ki halki si jhalak nazar aati thi.

Hum sab taiyaar huye, rawana huye aur phir nayi dulhan ke sath wapas aa gaye. Is lagki ka naam tabassum tha. Muh dikhaye ki rasam ke dauran jab main usko dekhne gayi to malum hua ki ye bala ki

khoobsurat hai aur iske saamne maine kahin nahi tikti. Ye thodi dubli patli si thi lekin katilaana nayan naksh lekar aayi thi. Kaafi raat ho chuki thi aur Shaukat apne kamre ki taraf ja raha tha,is waqt uske

kamre ke bahar sirf main hi thi,mujhe na jaane kya masti soojhi ki maine Shaukat ko chedne ka faisla kiya.

Main:"Shaukat kya bala lekar aaye ho, ye to koi hoor hai, kisi tarha se ye zameen ki nayi lagti"

Shaukat:"kya sach mein? maine to bas photo me dekha tha"

Main:"asal me jakar dekho, wo bhi kar cheez ko, subha batana kya cheez thi, haahaahaaaaaa"

meri is baat par Shaukat sirf muskura kar reh gaya aur andar chala gaya. Ye shadi ka ghar tha, siliye sab saman idhar udhar bikhra hua tha, Main bhi apni khala zaad bahen Reena ke sath Inayat ke

kamre me so gayi. Bahut thakaan thi isliye turant neend aa gayi. Subah aankh khuli to 6 baj rahe the,mujhe ab bhi neend aa rahi thi lekin logo ke chal kadmi ne meri aankh khol di thi, aaj waleema tha aur

ladki ke rishtdaaro ki dawat thi. Din bhar masroof rahi aur der raat ko hi kamar seedhi karne ko mili. Phir so gayi jakar. Agli subha dulhan wapas apne ghar ja chuki thi. Kuch hafte yun hi mehmaano ka

aana jaana laga raha lekin is dauran meri apni saas se aur nanad ke kam hi baat huyi thi. Aaj shadi ko kareeb mahina hone ko aaya tha. Inayat apne kaam par chaley gaye the. Sasur wahin ghar ke bahar

kuch buzurgo se wahi apni purani batein kar rahe the. Main aur meri saas aur nanad hi ghar par the.

Aaj hum akele the, Sana mere liye naaste le kar aayi, humne naasta kiya aur hamara beech baat cheet shuru ho gayi.

Sana:"bhabhi kaisi lagi aapko tabassum bhabhi"

Main:"acchi hain"

Mujh se thodi hi door par meri saas baithi thi, jo shayad kuch padh rahi thi. Mere is jawab par wo tunak kar bol padi

saas:"Acchi hai ya bahut acchi hai?"

Main:"bahot acchi hain"

Saas:"tumko kya laga tha ki wo tumhare chakkar me apni zindagi barbaad kar lega,dekho use tumse kahin jyada acchi biwi mili"

Main:"main jaanti thi, Shaukat ko bahot saari ladkiya mil sakti hain, maine hi unse iske liye israar kiya tha"

Saas:"tum to karogi hi israar kyunki tumhe apni jaan jo chudaani thi, ek sharabi se"

Main:"aap ek baar meri jagah khud ki rakh kar to dekhiye, maine kabhi is ghar ka bura nahi chaha, main thoda pareshan zarur thi"

saas:"kahabar ladki, apne aap ko humne na jodo, tumhare sath jo hua uska humko bada afsosh hai lekin tumne apna wada tod diya tha, aur tumhare is ghar me wapas aane par kya Shaukat ko takleef na

hogi, kya soch kar muh utha kar chali aayi?, hum tumse bahot khafa hain, wo to shadi ki wajah se hum thoda chup the lekin ye mat samajhna ki humne tumhe maaf kar diya hai"

Na jaane Shaukat kab wapad aa gaye the aur apni maa ki baatein sun rahe the. Wo apni maa par hi baras padey.

Shaukat:"ammi ye sab kya hai"

Saas:"beta, tum kab aaye, sab khairiyat to hai"

Shaukat:"ammi maine aapko bataya tha na sab kuch, phir bhi aap baaz nahi aayi, maine bulaya tha Inayat aur Aara ko yahan, Aara ke aisa kya kiya hai jise aap maaf nahi kar sakti, Aara ne Inayat ke sath ghar basaya hai, Inayat bhi aap hi ki aulaad hai aur uski sharafat ne Aara ko bahut mutasir kiya, maine Aara ko kya diya tha jo wo mujh jaise ke paas dobara laut kar aati, Aara ne hi mujhe himmat di aur mujhe nayi zindagi ki shuraat karne ki nasihat di, wo chahe ab meri biwi na ho lekin wo meri acchi dost hai. Mujhe Inayat par fakr hai ki wo hamara hi khoon hai, Aap bhi Aara ko qubool kijiye, wo hum sab se mohabbat rakthi hai"

Meri saas ab khamosh ho gayi thi lekin ab Sana bol padi.

Sana:"Ammi bhai bikul sahi keh rahe hain, Isme bhabhi ka kya qusur hai, hamesha aurtein hi kyun qusoorwaar hoti hain hamare muaashrey mein, ab bhai aur bhabhi sab khush hain to aapko kya pareshani hai"

Saas:"us nayi ladki ko jab malum padeyga ki ye sab to wo kya sochegi, kya uske bare me tum logon ne kuch socha hai kabhi"

Shaukat:"kyun, usko hum ye bata deinge ki, Maine Aara ko ek galti ki wajah se choda aur uska hum sabko pachtawa hai lekin ab wo phir is ghar ka hissa hai aur Inayat ki biwi hai,isme kya bura lagega usko"

Saas:"par kya wo tumahra aur Aara ka ek sath hasna bardaast kar payegi"

Shaukat:"agar uski tarbiyat kharab hogi to shuriaat me wo thoda bura maan sakti hai lekin kya hamare is mahaul me usko saans lene ki aur sab se baat cheet karne ka khula pan nahi milega"

Saas:"shaukat tum masoom ho isliye sabko masoom samajhte ho, log tumhari tarha nahi sochte hain"

Shaukat:"main wo sab nahi jaanta ammi lekin aainda aap Aara ko beizzat nahi kareingi, Aapko usko maaf karna hoga aur usko abhi apne galey se lagna hoga"

Saas:"Shaukat, thoda lihaz karo apni maa ka"

Shaukat:"theek hai,agar aapko Aara se abhi baat karne me takleef hai to aap baad me kar sakti hain lekin meri baat par gaur kajiyega"

Itna kehkar Shaukat wapas chala gaya. Meri saas me meri taraf ghoor kar dekha aur phir apne kamre me chali gayi. Lekin phir maine unke bartaav me fark dekha aur dheere dheere wo wapas normal si ho gayi.Unhone mujhe wapas apne sath rehne ko kaha. Maine ye baat Inayat ko batai to wo bahut khush hua. Humne ek din apna saman wapas lane ka plan banaya aur phir hum apne ghar wapas aa gaye. Shaukat ki biwi wapas aa gayi thi. Shaukat kuch din ke liye kahin ghoomne jana chahta tha aur wo Inayat aur mujhko bhi sath le jana chahta tha. Inayat bhi razi ho gaya. Hum log ghoone ke liye nikal padey.
 
हम जिस जगह पहुँचे थे ये एक हिल स्टेशन था, बरसात ख़तम होने को आई थी, इस टाइम पर यहाँ लोग कम ही थे. हम ने एक अफोर्डबल होटेल मे रूम बुक किया. तबस्सुम जहाँ भी जाती लोग उसकी तरफ मूड मूड कर देखते. वो एक बला की खूबसूरत लड़की थी. मैं कभी कभी शौकत के साथ थोड़ा मज़ाक भी कर लेती. हम यहाँ की खूबसूरत वादियो मे अपने खूबसूरत मुस्तकबिल को तलाश कर रहे थे. कभी कभी मैं और शौकत एक साथ बैठ जाते और इनायत और तबस्सुम एक साथ. तबस्सुम एक पढ़ी लिखी लड़की थी, शुरू के दिनो मे तो वो चुप चाप रही लेकिन फिर वो हमारे साथ, ख़ास कर मेरे

साथ घुल मिल गयी. एक दिन सुबह शौकत और इनायत कहीं बाहर गये थे कि तबस्सुम और मैं होटेल के ही केफे मे बात चीत करने लगे.

तबस्सुम:आरा मैं काफ़ी दिनो से तुमसे एक बात पूछना चाह रही हूँ.

मैं:"पूछो, क्या बात है"

ताबू:"आप में और शौकत मे इतनी अच्छी निभती है तो उन्होने आपको,,,, आपको,,,"

मैं:"छोड़ क्यूँ दिया?"

ताबू:"आप बुरा मत मानना, मुझे लगा ही था कि आप इस बात का बुरा ना मान जायें"

मैं:"शौकत ने शराब के नशे में ऐसा किया था, जब उनको होश आया तो उनका अपनी ग़लती का एहसास हुआ"

ताबू:"तो फिर आप वापस इस घर मे क्यूँ आई"

मैं:"मेरे अब्बू को हार्ट अटॅक हुआ था जब मैं शौकत से अलग होकर अपने घर मे थी, मेरे लिए तलाक़शुदा और बूढो के ही रिश्ते आते थे, इसलिए कि,,,"

मैं अपनी बात को ख़तम भी ना कर पाई थी कि तबस्सुम मे मुझे रोक दिया,,,

ताबू:"छोड़िए इन बातो को, खैर अच्छी बात ये है कि आप फिर से खुश हैं, ये ज़रूरी है"

मैं:"हां, सही कहा तुमने यही ज़रूरी है"

हम लोगो ने फिर ना जाने कितने टोपिक्स पर बात की और फिर हम वापस ताबू के कमरे मे वापस आ गये. उनके कमरे में देखा तो मैं थोड़ा चौंक गयी, बेड पर ताबू की कई सारी पॅंटीस पड़ी थी,

मुझे थोड़ा हसी आ गयी, मैने उससे पूछा इसके बारे में

मैं:"ये सब क्या है बेड पर, कोई नुमाइश लगा रखी है क्या"

ताबू:"क्या कहूँ,,,"

मैं:"शरमा रही हो, ह्म्‍म्म्ममम लगता है हर रोज़ परेड होती है तुम्हारी"

ताबू:"आपको मालूम है"

मैं:"क्या"

ताबू:"यही सब"

मैं:"सॉफ सॉफ बताओ यार, शरमाओ मत"

ताबू:"यही आपके साथ ये सब नही करते थे"

मैं:"अर्रे भाई, सॉफ सॉफ बोलो तभी समझुगी ना"

ताबू:"मतलब, आपको वो आपके साथ वो,,,"

मैं:"शरमाओ मत यार तुम जिस आदमी की बात कर रही हो उसका मुझसे और मेरा उससे एक वक़्त कुछ नही छिपता था समझी,हाहाहा"

ताबू:"यही कि वो मेरी पैंटी पर अपना पानी गिराते हैं और फिर मुझे वही पहनने को देते हैं"

मैं:"नया स्टाइल है लगता है, मेरे साथ तो बस अंधेरे मे उछल कूद होती थी और फिर सो जाया करते थे, शायद तुम्हारे हुस्न ने उनको दीवाना कर दिया है"

ताबू इस बात पर सिर्फ़ मुस्कुराइ

ताबू:"आपके साथ वो सिर्फ़ रात मे और वो भी अंधेरे मे करते थे"

मैं:"हां, अब शायद वो बदल गये हैं लेकिन मुझे सेक्स का असली मज़ा इनायत ने दिया है, तुम यकीन नही कर सकती कि वो और मैं लगभग हर पोज़ीशन मे सेक्स कर चुके हैं"

ताबू:"सच में"

मैं अब बेड के सामने पड़े एक सोफे पर बैठ गयी थी और अंजाने मे मैने एक रिमोट कंट्रोल से टीवी ऑन करना चाही, टीवी पर जो कुछ नज़र आया उसको देख कर मैने ताबू की तरफ देखा तो वो शरमा सी गयी. ये एक हार्डकोर पॉर्न फिल्म थी जिसमे एक वाइट औरत को एक नीग्रो चोद रहा था और दूर बैठा एक वाइट आदमी ये सब देख रहा था, ये एक कुक्कोल्ड टाइप की मूवी थी.

मैं:"ह्म्‍म्म्मम तो आज कल ये भी देखा जा रहा है"

ताबू लगभग सकपका सी गयी और थोड़ा एम्बररस्मेंट भी झलक रही थी उसके चेहरे पर लेकिन मैने उसको संभाल लिया

मैं:"अर्रे इसमे घबराने की क्या बात है भला, हम लोग भी ये सब देखते हैं, और सच कहूँ तो मुझे ये सब देख कर बड़ा मज़ा आता है"

ताबू:"आप कब से"

मैं:"जब से इनायत से साथ हूँ"

ताबू:"एक बात पुच्छू, आप बुरा मत मानना"

मैं:"एक क्यूँ हज़ार पूच्छो"

ताबू:"आप ने दोनो भाइयो के साथ वो किया है तो आपको ,,,मेरा मतलब कि वो"

मैं:"कंपेर करना क्यूँ?"

ताबू:"हां"

मैं:"देखो शौकत का लंड लंबा है और पतला है, वो धीरे धीरे सेक्स करना पसंद करते हैं और मेरे साथ तो हमेशा अंधेरे मे सेक्स किया, वो मुझे पीठ के बल लिटा कर मेरी टाँगो के बीच मे आकर मेरी चूत मारा करते थे लेकिन इनायत ने तो कोई पोज़ीशन और टाइम और जगह छोड़ी ही नही है, बस हम ने यही ट्राइ नही किया जो इस मूवी मे दिख रहा हैं यानी स्वापिंग वगेरा"

 


ताबू मेरे मूह से इस तरहा से लफ्ज़ सुन कर थोड़ी शॉक हो गयी थी, वो कुछ और पूछना चाहती थी

ताबू:" भाभी आप ये सब कैसे बोल देती है, कितना गंदा लगता है ये सब सुन कर"

मैं:"मेरी जान, पहले मैं भी ऐसे ही थी लेकिन इनायत के साथ रह कर सब सीख गयी हूँ, तुम्हे भी मज़ा आएगा"

ताबू:"नही बाबा मुझसे तो ये सब नही बोला जाएगा"

मैं:"तो तुम क्या बोलती हो, कॉक, पुसी, कंट और फक्किंग"

ताबू:"हां"

मैं:"और इसको हिन्दी मे बोल दिया तो ये गंदा हो गया, कमाल है लोगो की मेनटॅलिटी पर"

ताबू:"कुछ भी हो, लेकिन इंग्लीश मे थोड़ा डीसेंट तो लगता है"

मैं:"अच्छा एक बात बताओ अगर कॉक पुसी के अंदर जाएगा तो उसको फक्किंग कहोगे और अगर हिन्दी मे कह दिया तो क्या बात बदल जाएगी, हाआआहाः"

ताबू:"मुझे नही पता, लेकिन मुझे तो यही वर्ड्स अच्छे लगते हैं, अच्छा आपने शौकत के बारे मे तो बताया लेकिन इनायत के बारे मे ,,"

मैं:"ह्म्‍म्म, इनायत के बारे में...... इनायत का कॉक शौकत के थोड़ा छोटा है लेकिन मोटा ज़्यादा है और मेरी पुसी मे एकदम फिट होता है, अच्छा तुम बताओ शौकत ने तुमको कैसे कैसे फक किया,

अक्चा अब मैं ठीक वर्ड्स का यूज़ कर रही हूँ कि नही"

ये कह कर मैं ज़ोर से हंस पड़ी...ताबू को शायद मेरी बात पर हँसी आ गयी, ताबू के डिंपल्स और दूध की तारह टीथ और एक फूल सा चेहरा बड़ा अच्छा लगा मुझे

ताबू:"ये तो डॉगी पोज़िशन और वुमन ऑन टॉप को ज़यादा पसंद करते हैं,ये मुझे स्ट्रीप डॅन्स के लिए रोज़ कहते हैं"

मैं:"अच्छा है, तुमने अपने बारे मे कुछ नही बताया"

ताबू:"अपने बारे मे क्या"

मैं:"मतलब तुम्हारे फिगर के बारे में"

ताबू:"आपको इसमे क्या इंटेरेस्ट है"

मैं:"इंटेरेस्ट तो नही है लेकिन अगर तुमको ये बात ओफ्फेंड करती है तो जाने दो"

ताबू:"मेरे बूब्स आपसे छोटे हैं, कमर भी बहुत पतली है शायद 30 की हो और बम्स थोड़े ज़्यादा लेकिन आपसे कम

मैं:"आरे भाई ये तो मुझे दिखता है,कुछ रंग ढंग के बारे मे बताओ"

ताबू:"मुझे शर्म आती है"

मैं:"अच्छा मुझसे सब पूंछ लिया लेकिन अपने बारे मे बताते हुए शर्म आती है"

ताबू:"आपने कहाँ बताया अपने बारे में, आपने तो इन लोगो के बारे मे बताया है"

मैं:"तुम देख ही लो, बताना क्या है"

ताबू:"आप मेरे सामने नंगी हो सकती हो"

मैं:"हां क्यूँ नही"

ताबू:"मुझे ऐसा नही लगता"

मैने एक टी शर्ट पहनी थी और एक लेगिंग, अंदर से कुछ नही पहना था, ताबू के कहने की देर थी मैने झट से अपनी लेगिंग और टी शर्ट उतार दी अब मैं उसके सामने एक दम नंगी खड़ी थी. ताबू की आँखें हैरत से खुल गयी और वो मुझे देख कर थोड़ा एग्ज़ाइटेड हो गयी, सॉफ लगता था कि वो थोड़ा सेक्षुयली एग्ज़ाइटेड भी थी, कुछ देर तक तो वो कुछ बोली नही फिर बोल पड़ी.

ताबू:"ओह माइ गॉड, यू आर रियली अमेज़िंग. आपके बम्स, बूब्स और ये शेव्ड पुसी तो किसी को भी दीवाना कर दे"

मैं:"अच्छा अब तुम अपना भी तो कुछ दिखाओ, या अभी भी शर्म आती है"

ताबू:"मैं दिखा दूँगी लेकिन आप किसी से ये शेअर नही करूँगी"

मैं:"तो ठीक है, कुछ मत दिखाओ, मैं हर बात अपने हज़्बेंड से शेअर करती हूँ"

ताबू:"रियली लेकिन ये ठीक नही है, वॉट ही विल थिंक अबाउट मी"

मैं:"कम ऑन, वी आर नोट परवर्ट्स,इफ़ इट अफेंड्ज़ यू देन बेटर यू डॉन'ट स्ट्रीप."

ताबू मेरे मूह से इंग्लीश सुन कर थोड़ा शॉक्ड थी.

ताबू:"इट्स ओके यार, आइ विल स्ट्रीप"

और ये कहते हुए उसने धीरे धीरे स्ट्रीप कर दिया लेकिन उसने एक हाथ अपनी चूत के आगे रख दिया और वो उसको दिखाने के लिए राज़ी ना थी. मैने बहोत इसरार किया तब उसने दिखाई अपनी चूत.ताबू के बूब्स छोटे थे मेरे मुक़ाबले लेकिन एक दम पर्फेक्ट. उसके निपल पिंक थे और अंदर का जिस्म एंडूम वाइट. मेरा रंग उसके सामने डार्क लग रहा था. उसकी कमर पतली थी और बम्स का उभार कमाल का था, उसकी चूत एक दम डिज़ाइनर वेजाइना की तरहा शेप मे और उसकी चूत के लिप्स एक दम पिंक,उसके लंबे काले बाल और उसके चेहरे की मुस्कान कमाल कर रही थी, उसकी चूत से चिप चिपा सा पानी आ रहा था , मैं काफ़ी देर तक उसको देखती रही कि रूम सर्विस की लाइट और बेल बज गयी. हम दोनो ने हड़बड़ाहट मे अपने कपड़े पहले और दण्ड का बटन पुश कर दिया. ये हम को बाद मे ध्यान आया. ये एक ना भूलने वाला इवेंट था, इसने आगे आने वाले कुछ रास्ते हमारे लिए खोल दिए थे.
 
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